अमेरिका से लौटी बुद्ध की मूर्ति को गुरुवार दोपहर काठमांडू के राष्ट्रीय संग्रहालय में पुनर्स्थापित किया गया।
काठमांडू महानगरपालिका की कार्यवाहक मेयर सुनीता डंगोल की उपस्थिति में मूर्ति का पुनर्स्थापन कार्य सम्पन्न हुआ।
१७ वैशाख, काठमांडू। अमेरिका से लौटाए गए बुद्ध की मूर्ति को पुनर्स्थापित किया गया है।
गुरुवार दोपहर काठमांडू महानगरपालिका की पहल पर मूर्ति का पुनर्स्थापन किया गया।
छावनी स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में यह मूर्ति पुनर्स्थापित की गई है। काठमांडू महानगरपालिका की कार्यवाहक मेयर सुनीता डंगोल सहित कई गणमान्य व्यक्ति मूर्ति पुनर्स्थापन के अवसर पर मौजूद थे।
१७ वैशाख, काठमाडौं । काठमाडौंमा भेला भएका नेपाली कांग्रेस सुदूरपश्चिमका नेता तथा कार्यकर्ताहरुले क्रियाशील सदस्यता अपडेट नगर्ने निर्णय गरेका छन्। १५औं महाधिवेशनका लागि सदस्यता नवीकरण गरिसकेको र पार्टी लेवी पनि बुझाइएको अवस्थामा अब थप सदस्यता अपडेट नगरिने पक्षमा निर्णय भएको एक नेताले जानकारी दिएका छन्। बिहीबार सुदूरपश्चिमका नेता तथा कार्यकर्ताहरुको भेला काठमाडौंको आनन्दभूमि इभेन्ट भेन्यु, नयाँबानेश्वरमा आयोजना भएको थियो।
भेलाले सुदूरपश्चिमका कांग्रेसका क्रियाशील सदस्यहरुलाई सदस्यता अपडेट नगर्न/नगराउन अनुरोध समेत गरेको छ। कांग्रेस सुदूरपश्चिमका प्रदेश सभापति वीरबहादुर बलायर, पूर्व केन्द्रीय सदस्यहरु एनपी साउद, रमेश लेखक, नाइनसिंह महर, डा. रणबहादुर रावल, नृप वड, सुशीला मिश्र भट्ट, गोविन्दबहादुर शाह, तथा विद्या तिमल्सिना भेलामा सहभागी थिए।
त्यसैगरी पूर्व आमन्त्रित केन्द्रीय सदस्य आनन्द विष्ट, कञ्चनपुर कांग्रेसका जिल्ला सभापति पदम बोगटी, कैलाली कांग्रेसका जिल्ला सभापति नारायण भट्ट, डोटी कांग्रेसका जिल्ला सभापति नरेन्द्रबहादुर सिंह, डडेलधुरा जिल्ला सभापति भीमबहादुर साउँद र बझाङ जिल्ला सभापति खडक बोहरा समेत सहभागी थिए। यस्तै पूर्वसांसद अक्कल विष्ट, बाजुरा कांग्रेसका पूर्व जिल्ला सभापति कविराज पण्डित, कञ्चनपुर कांग्रेसका जिल्ला उपसभापति मीनबहादुर सिंह, महासमिति सदस्यहरु डा. उत्तरबहादुर ऐर, पुष्पकुमार शाही, गणेश विष्ट, नेपाल विद्यार्थी संघ सुदूरपश्चिमका अध्यक्ष कपिल केसी, नेविसंघका केन्द्रीय सदस्य रमेश कुँवर लगायतका नेता पनि भेलामा उपस्थित थिए।
१७ वैशाख, रोल्पा। थवाङ गाउँपालिका-१ में २० लोगों की जान जाने वाली जीप दुर्घटना के बाद बचाव कार्य रात्रि होने के कारण रोक दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि दुर्घटना स्थल पर भारी वर्षा हो रही है और रात भी हो गई है, जिससे मृतकों के शवों की पहचान कर उनके परिजनों तक पहुंचाने का कार्य शेष है। रोल्पा के प्रमुख जिल्ला अधिकारी गंगाबहादुर क्षेत्री के अनुसार, मृतक २० लोगों के शव दुर्घटना स्थल से एकत्रित कर लिए गए हैं। इन शवों को एक ही स्थान पर रखा गया है। बताया गया है कि कल सुबह उजाला होने पर ही बचाव कार्य पुनः शुरू किया जाएगा और शवों की पहचान तथा पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय लाया जाएगा।
१७ वैशाख, काठमांडू। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनी ने फारस की खाड़ी का भविष्य अमेरिका से मुक्त होने की बात कही है। उन्होंने गुरुवार को फारस की खाड़ी दिवस के अवसर पर एक बयान में कहा कि फारस की खाड़ी में समुद्री गहराई के अलावा विदेशी मौजूदगी का कोई स्थान नहीं है।
‘ईरान फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए एक नया अध्याय शुरू करेगा,’ खामेनी ने कहा, ‘फारस की खाड़ी का भविष्य अमेरिका से मुक्त रहेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी में भविष्य में किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावना नहीं है। साथ ही, ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक नई व्यवस्था लागू करने वाला है, यह उन्होंने बताया।
सरकार ने वैशाख १८ तारीख को देशभर के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा संचालित करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने बताया कि सार्वजनिक छुट्टी के बावजूद मरीजों को सहज स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।
मंत्रालय के सह–प्रवक्ता डॉ. समीरकुमार अधिकारी ने कहा है कि लगातार तीन दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों के कारण ओपीडी सेवाओं में समस्या आ सकती है और इससे सेवा प्राप्त करने वालों को असुविधा हो सकती है। १७ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने कल (वैशाख १८) सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा संचालन करने का निर्देश जारी किया है।
कल सार्वजनिक छुट्टी होने के बावजूद भी मरीजों को स्वास्थ्य सेवा सुगमता से मिल सके, इस उद्देश्य से ओपीडी सेवा संचालन अनिवार्य कर दी गई है, यह सूचना स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने प्रदान की है। लगातार तीन दिवसीय सार्वजनिक छुट्टियों के प्रभाव से सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवा प्रभावित हो सकती है और इससे सेवा लेने वालों को असुविधा हो सकती है, इसलिए सह–प्रवक्ता डॉ. समीरकुमार अधिकारी ने इस संबंध में जागरूक रहने का आग्रह भी किया है।
फाइल तस्वीर १७ वैशाख, काठमाडौं। नेपाल पुलिस ने पिछले एक महीने के दौरान देशभर कुल ४१७ बिचौलियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। पुलिस प्रधान कार्यालय के गुरुवार के बुलेटिन में इस विषय में उल्लेख किया गया है। गिरफ्तार किए गए बिचौलियों में से उपत्यका से १२३, कोशी प्रदेश से ४५, मधेश प्रदेश से ५०, बागमती प्रदेश के उपत्यका क्षेत्र के बाहर के जिलों से ७६, गण्डकी प्रदेश से २७, लुम्बिनी प्रदेश से ४४, कर्णाली प्रदेश से २४ और सुदूरपश्चिम प्रदेश से २८ लोग शामिल हैं।
गिरफ्तार किए गए बिचौलियों में से १२१ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि २९६ को जांच के बाद मुक्त कर दिया गया है, पुलिस ने बताया। सरकार ने सार्वजनिक सेवाओं को बिचौलियामुक्त, नागरिक अनुकूल, कानूनी, पारदर्शी और त्वरित बनाने की योजना घोषित की थी। इसी के तहत देशभर में सेवा कार्यालयों में सक्रिय बिचौलियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई शुरू की गई है।
झापा के बिर्तामोड में शुक्रवार दोपहर 2 बजे होटल किंग्सवेरी में कवि नवराज पराजुली कविता कंसर्ट में प्रस्तुति देंगे। पराजुली की पुस्तक ‘सगरमाथाको गहिराइ’ के दसवें वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में पराजुली दो घंटे तक अकेले प्रस्तुति देंगे और उपस्थित दर्शकों को उक्त पुस्तक की एक प्रति प्रदान की जाएगी।
काठमांडू। झापा के बिर्तामोड में शुक्रवार को आयोजित होने वाले कविता कंसर्ट में कवि नवराज पराजुली प्रस्तुति देने वाले हैं। स्थानीय होटल किंग्सवेरी में दोपहर 2 बजे से कार्यक्रम शुरू होने की जानकारी मिली है। पराजुली की पुस्तक ‘सगरमाथाको गहिराइ’ के प्रकाशन के दसवें वर्ष पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम रखा गया है। वे दो घंटे तक एकल प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम में आने वाले दर्शकों को उस पुस्तक की एक प्रति वितरित की जाएगी।
आयोजकों ने कहा है कि यह कार्यक्रम पठन-संस्कृति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उस पुस्तक को २०७३ साल में पद्मश्री साहित्य सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। कविता कंसर्ट के लिए वहां के विभिन्न विद्यालयों के साथ सहयोग किया गया है। पराजुली इससे पहले 17 देशों में कविता कंसर्ट सफलतापूर्वक समाप्त कर चुके हैं।
सरकार ने सहकारी ऐन २०७४ में संशोधन करते हुए सहकारी संस्थाओं को १५ प्रतिशत से अधिक लाभांश वितरण करने से रोकने वाला अध्यादेश जारी किया है। इस अध्यादेश के अनुसार, सहकारी संस्थाएं अपने सेयर पूंजी का पंद्रह प्रतिशत से अधिक लाभांश वितरित नहीं कर सकेंगीं।
पहले सहकारी संस्थाओं को अधिकतम १८ प्रतिशत तक लाभांश वितरित करने की अनुमति थी। १७ वैशाख को काठमाडौँ में जारी किए गए इस अध्यादेश ने सहकारी संस्थाओं के लाभांश वितरण पर नई सीमा तय कर दी है। अध्यादेश में स्पष्ट उल्लेख है कि, ‘सेयर पूंजी के पंद्रह प्रतिशत से अधिक लाभांश वितरण की अनुमति नहीं होगी।’
कविता कुँवर ने ICC विमेंस चैलेंज ट्रॉफ़ी के तहत भानुआतुओं के खिलाफ मात्र 3.4 ओवर में 5 रन देकर 6 विकेट लिए।
नेपाल ने कविता कुँवर की गेंदबाजी की बदौलत भानुआतुओं को 49 रन पर आउट करते हुए 83 रन की रोमांचक जीत हासिल की।
नेपाल ने 133 रन का लक्ष्य रखा था, जिसमें स्मृति खड़का ने 52 और कप्तान इन्दु बर्मा ने 43 रन जोड़े।
१७ वैशाख, काठमाडौं । ICC विमेंस चैलेंज ट्रॉफी के मैच में भानुआतुओं के खिलाफ नेपाली गेंदबाज कविता कुँवर ने शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन किया है।
कविता ने केवल 3.4 ओवर में 5 रन देकर 6 विकेट झटके, जो उनके करियर की बेहतरीन गेंदबाजी मानी जा रही है। यह नेपाल के लिए दूसरी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी है।
नेपाल की अंजली चन्द ने मालदीव के खिलाफ 2019 में 2.1 ओवर में बिना कोई रन दिए 6 विकेट लिए थे, तब से यह कविता का प्रदर्शन सबसे उत्कृष्ट माना जाएगा।
कविता की शानदार गेंदबाजी की मदद से नेपाल ने भानुआतुओं को मात्र 49 रन पर समेटकर 83 रन से जीत हासिल की। नेपाल ने पहले टीम के तौर पर 133 रन का लक्ष्य रखा था।
कविता ने 6 विकेट लिए जबकि पूजा महतो और रचना चौधरी ने बराबर 2-2 विकेट लिए। कविता को प्लेयर ऑफ़ द मैच घोषित किया गया।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी नेपाल ने 20 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 132 रन बनाए। स्मृति खड़का ने 51 गेंदों में 9 चौकों की मदद से 52 रन बनाए।
कप्तान इन्दु बर्मा ने 18 गेंदों में 7 चौकों की मदद से नाबाद 43 रन बनाए। पूजा महतो ने 19 रन बनाए।
नेपाल इससे पहले भानुआतुओं से हारा था और उपाधि की दौड़ से बाहर हो चुका है।
शिभाली गुरुङ और स्वस्तिका विष्ट ने 12वें सिटिजन्स बैंक ओपन टेनिस प्रतियोगिता के महिला सिंगल्स फाइनल में प्रवेश किया है। त्रिपुरेश्वर स्थित राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के कोर्ट में गुरुवार को हुए सेमीफाइनल में शिभाली ने प्राज्ञा मानन्धर को 6–0 और 6–1 से हराया जबकि स्वस्तिका ने प्रकृति श्रेष्ठ को 6–2 और 6–1 के सीधे सेट में पराजित किया।
पुरुष सिंगल्स में प्रदीप खड्का और दर्शिल श्रेष्ठ ने उपाधि मुकाबला निश्चित किया है। सेमीफाइनल में प्रदीप ने आयुशमान हजुर घले को 6–3, 6–7 और 6–1 के स्कोर से हराया, जबकि दर्शिल ने प्रणव मानन्धर को 6–0 और 6–0 के सेट में पराजित किया। प्रतियोगिता में कुल 13 स्पर्धाएं शामिल हैं और शुक्रवार को 11 स्पर्धाओं के फाइनल होंगे।
सिटिजन्स बैंक के मुख्य प्रायोजन में आयोजित इस प्रतियोगिता में वेटरान् वर्ग 35 वर्ष से ऊपर के पुरुष सिंगल्स में पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन जितेन्द्र परियार ने भीष्मजंग गुरुङ को 6–4 और 6–1 तथा सन्तोष खत्री ने दावा सोनाम शेर्पा को 6–2 और 7–5 से पराजित कर फाइनल में जगह बनाई। भद्रकाली स्थित आर्मी ऑफिसर्स क्लब में हुए वेटरान् 70 वर्ष से ऊपर के पुरुष सिंगल्स का खिताब धीरबहादुर गुरुङ ने जीता।
प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्ग के खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। शनिवार को पुरुष और महिला सिंगल्स के फाइनल मुकाबले होंगे।
वैदेशिक रोजगार विभाग ने वैदेशिक रोजगार में जाने वाले मजदूरों से सेवा शुल्क अनिवार्य रूप से बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से ही भुगतान करने का अनुरोध किया है। विभाग ने धोखाधड़ी से बचने और आर्थिक लेनदेन को पारदर्शी बनाने के लिए नकद लेनदेन से परहेज करने की सलाह दी है। नकद में लेनदेन करने पर कानून के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी विभाग ने जारी की है। १७ वैशाख, काठमाडौं। वैदेशिक रोजगार विभाग ने वैदेशिक रोजगार में जाने वाले श्रमिकों को सेवा शुल्क केवल बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से देने पर जोर दिया है। धोखाधड़ी से बचाव, आर्थिक लेनदेन में पारदर्शिता और सुरक्षित वैदेशिक रोजगार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मैनपावर व्यवसायियों को सेवा शुल्क का भुगतान अनिवार्य रूप से बैंकिंग प्रणाली के जरिए करने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने उक्त भुगतान का प्रमाण, दस्तावेज़ों और ऑनलाइन कारोबार के विवरण को सुरक्षित रखने का भी अनुरोध किया है। नकद लेनदेन से धोखाधड़ी की संभावना बढ़ने और प्रमाण जुटाने में कठिनाई होने के कारण विभाग ने किसी के साथ भी नकद लेनदेन न करने की चेतावनी दी है। मैनपावर, उनके कर्मचारी और प्रतिनिधि तथा अन्य किसी भी व्यक्ति को वैदेशिक रोजगार के लिए या वैदेशिक रोजगार संबंधी किसी भी आर्थिक लेनदेन के दौरान नकद लेनदेन से बचने का निर्देश दिया गया है। मैनपावर कंपनियों को भी मजदूरों से नकद लेनदेन नहीं करने को कहा गया है। इस प्रकार के नकद लेनदेन पाए जाने पर कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी, यह चेतावनी विभाग ने दी है।
वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने काठमाडौं उपत्यका में किए गए निरीक्षण के तहत साई श्री फुड्स प्रालि को 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2075 की धारा 38 (घ) के उल्लंघन के आधार पर इस अधिनियम की धारा 39(1)(क) अनुसार यह जुर्माना लगाया है।
निरीक्षण के दौरान कुल 52 फर्म और कंपनियों की समीक्षा की गई थी, जिसमें से अन्य 51 फर्मों को सामान्य निर्देश प्रदान किए गए हैं। 17 वैशाख, काठमाडौं। वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने गुरुवार को एक फर्म को 20 हजार रुपये का जुर्माना किया है। विभाग ने गुरुवार को काठमाडौं उपत्यका में किए गए बाजार निरीक्षण के दौरान काठमाडौं महानगरपालिका–14, कुलेश्वर स्थित साई श्री फुड्स प्रालि को जुर्माना लगाया है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2075 की धारा 38 (घ) के तहत लगने वाले उल्लंघन में उक्त अधिनियम की धारा 39(1)(क) के आधार पर जुर्माना लगाया गया है, विभाग ने बताया। इसी प्रकार विभाग ने कुल 52 फर्मों और कंपनियों का निरीक्षण करते हुए अन्य 51 फर्मों को सामान्य निर्देश जारी किए हैं।
१७ वैशाख, काठमाडौँ । प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस संसदीय दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बेले निजी सञ्चारमाध्यमों को सरकारी विज्ञापन न देने के सरकार के फैसले पर गम्भीर आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने इस निर्णय को लोकतंत्र की मर्म पर प्रहार के रूप में आलोचना किया है। उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी सरकार नस छूने का प्रयास करती है, लेकिन लोकतंत्र की मर्म के प्रति नस छूने का विचार गलत है।’
उनके अनुसार, सरकारी विज्ञापन निजी सञ्चारमाध्यमों को प्रकाशन या प्रसारण करने से रोकने का निर्णय प्रेस स्वतंत्रता और निजी सञ्चारमाध्यमों के आर्थिक आधार को कमजोर करने का खतरा उत्पन्न करता है। उन्होंने इसे नेपाली कांग्रेस द्वारा गंभीरता से लिया गया है तथा संसद के भीतर और संसदीय समितियों की बैठकों में प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा। यह जानकारी नेपाल पत्रकार महासंघ की टीम ने बिहीवार नेता आङ्देम्बे को दी।
सरकारी विज्ञापन केवल सरकारी सञ्चारमाध्यमों को उपलब्ध कराने के बालें सरकार के इस फैसले के खिलाफ नेपाल पत्रकार महासंघ ने आंदोलन किया है। आंदोलन के कार्यक्रम के तहत महासंघ अध्यक्ष निर्मला शर्मा, महासचिव रामप्रसाद दाहाल सहित की टीम ने नेता आङ्देम्बे से सरकार के इस फैसले को रद्द करने के लिए दबाव डालने की अपील की थी। इसके अलावा, उन्होंने सरकार द्वारा संसद की बैठक बुलाकर उसे स्थगित करते हुए अध्यादेश लाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘संसद की बैठक बुलाकर स्थगित करने के बाद अध्यादेशों की बाढ़ लाने का प्रयास हो रहा है, जो अच्छा संकेत नहीं है।’
बजट सम्बंधी चर्चा के लिए सप्ताह में संसद की बैठक होनी आवश्यक है, और बिना किसी आकस्मिक या प्राकृतिक आपदा के सरकार का लगातार अध्यादेश लाना उचित नहीं है, उनका कहना था।
राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) की बहुमत वाली सरकार द्वारा सिफारिश किए गए अध्यादेश राष्ट्रपति कार्यालय में रोक दिए जाने के बाद तीव्र विवाद शुरू हो गया है।
पिछले समय की तरह इस बार भी अध्ययन करने पर यह सवाल उठता है कि सरकार ने अध्यादेश लाते समय क्या उद्देश्य रखा है और राष्ट्रपति द्वारा रोकने की भूमिका का क्या मतलब हो सकता है, इस पर विभिन्न दृष्टिकोणों की व्याख्या और विश्लेषण हो रहे हैं।
कांग्रेस से राष्ट्रीय सभा सदस्य रह चुके वरिष्ठ अधिवक्ता राधेश्याम अधिकारी के अनुसार, कुछ ही दिन में संसद शुरू होने वाली है इसलिए इस समय अध्यादेश नहीं लाना ज्यादा उपयुक्त होता।
“संसद के अधिवेशन के करीब होने पर अध्यादेश लाना या न लाना सरकार की जिम्मेदारी है,” अधिकारी ने बताया, “लेकिन अगर सरकार अध्यादेश लाती है और वह संविधान के अनुरूप होता है तो उसे लाना सही होता है।”
राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने इस संबंध में संविधानविदों से परामर्श किया है और उनका कार्यालय इस विषय पर अध्ययन कर रहा है।
क्या राष्ट्रपति के पास अध्यादेश पर ‘अंकुश’ लगाने का अधिकार है?
“अध्यादेश का विषय हम नहीं जानते। यदि अध्यादेश असंवैधानिक प्रतीत होता है तो राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से बात कर सकते हैं,” वरिष्ठ अधिवक्ता अधिकारी कहते हैं, “लेकिन अगर वह संविधान और कानून के अनुरूप है तो उसे रोकना उचित नहीं होगा।”
जनमत प्राप्त सरकार को अवसर
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पहले भी राष्ट्रपति विभिन्न अध्यादेश और सिफारिशों को रोकते रहे हैं।
लेकिन इस बार राजनीतिक स्थिति अलग है। पहले की तरह संसदीय समीकरण जोड़-घटाव से नहीं, बल्कि लगभग दो-तिहाई मतों के साथ सरकार बनी है।
राष्ट्रपति द्वारा सरकार के तरफ से लाए गए अध्यादेश पर ‘परीक्षण’ करते हुए अंकुश लगाने की कोशिश को परिवर्तित राजनीतिक परिस्थिति और जनभावनाओं के खिलाफ कदम माना जाता है।
“अगर सरकार खुद इसे सुधारती है तो बात अलग है, लेकिन अध्यादेश लाने के बाद इसे रोकना राष्ट्रपति के लिए कठिन है,” वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्णमान शाक्य कहते हैं, “प्रक्रिया, लोकतंत्र, संविधान और कानून मुख्य रूप से वकील, न्यायालय और बौद्धिक समुदाय की विवेचना और सरोकार के विषय होते हैं। चुनाव से प्राप्त लोकप्रिय जनमत बालेन शाह के पास है और नागरिक जो भी करते हैं उसमें सहमति देते हैं।”
इसी आधार पर सरकार ने तुरंत कार्य करने के लिए 100 कार्यों की सूची भी जारी की है।
उनके विश्लेषण के अनुसार, राष्ट्रीय सभा में अपनी पार्टी का बहुमत नहीं होने के कारण विधेयक अटके सकते हैं और संसदीय प्रक्रिया में कम से कम एक या दो महीने लग सकते हैं, जो धैर्य करने की स्थिति नहीं है।
“लेकिन लोकतंत्र में प्रक्रिया पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। कार्यविधि महत्वपूर्ण है और उसे पालन करने में समय लगता है,” उन्होंने कहा, “इसलिए संसद के सत्र को टालकर अध्यादेश लाना असामान्य है, इसलिए राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री को बुलाकर स्थिति समझनी चाहिए।”
दूसरे संविधानविद सूर्य ढुङ्गेल कहते हैं कि सरकार द्वारा बहुमत का दुरुपयोग करने वाले विषय में रोक लगाना आवश्यक है।
लेकिन वे इस सरकार को बड़े जनमत के साथ आने के कारण अवसर देने के पक्ष में हैं।
उन्होंने कहा, “सरकार नागरिकों को सेवा प्रदान करना चाहती है तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं संविधान की सीमाओं में रहकर लागू की जानी चाहिए। युवा और नए लोग हैं, संसदीय परंपराओं और संस्कृतियों का विकास जरूरी है।”
अध्यादेश रोकने में राष्ट्रपति का विवेक
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देश की सार्वभौमिकता, राष्ट्रीय सुरक्षा, संविधान की अवहेलना और नागरिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर विधेयक या अध्यादेश को लेकर अध्ययन और परामर्श आवश्यक होता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्णमान शाक्य के अनुसार, राष्ट्रपति के पास संविधान संरक्षक के नाते अपना विवेक प्रयोग करने का अधिकार होता है।
“अगर मामला अत्यंत गंभीर हो तो राष्ट्रपति अध्यादेश को रोक या वापस करने का निर्णय ले सकते हैं,” वे कहते हैं।
यह अध्यादेश नई सरकार बनने से पहले, यानि चैत्र 13 से पहले राजनीतिक नियुक्तियों को निरस्त करने के उद्देश्य से भी बताया जा रहा है।
“सुकुम्बासी लोगों के लिए तत्काल व्यवस्था बनाने के लिए अध्यादेश का औचित्य है,” संविधानविद् ललित बस्नेत कहते हैं, “लेकिन विभिन्न नियुक्तियां और संरचनात्मक बदलाव बहुमत वाली सरकार संसद से भी कर सकती है तो इतनी जल्दी क्यों?”
संविधानविद् बस्नेत के अनुसार, अध्यादेश का विषय और आवश्यकता के अनुसार कुछ अध्यादेश जारी किए जा सकते हैं और कुछ को रोका भी जा सकता है।
राष्ट्रपति ने सहकारी संबंधी अध्यादेश जारी कर विषय की गंभीरता के आधार पर निर्णय करने का संकेत दिया है।
“संविधान संरक्षक के रूप में राष्ट्रपति संवैधानिक विवेक प्रयोग कर सकते हैं,” बस्नेत कहते हैं।
दलीय राजनीति और राष्ट्रपति पर प्रभाव
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दल अपने-अपने हित के अनुसार सरकार में हों या विपक्ष में, राष्ट्रपति पर प्रभाव डालने या डालने की कोशिश करने की आलोचना की जाती रही है।
विधान बनवाने की बजाय अपने स्वार्थ के अनुसार राष्ट्रपति को विवेक प्रयोग के लिए उकसाकर स्वेच्छाचारी रास्ते पर ले जाने की भी टिप्पणियां होती हैं।
इस बार भी विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से अध्यादेश जारी न करने की अपील की है।
संविधानविद् सूर्य ढुङ्गेल का कहना है कि नेपाल में लोकतांत्रिक संस्कृति अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है, इसी वजह से इस तरह के अभ्यास और विवाद होते हैं।
“पिछले समय में अध्यादेश का दुरुपयोग हुआ था, नई सरकार भी संसदीय अभ्यास से ज्यादा जल्दी काम करना चाहती है,” उन्होंने कहा, “लेकिन विपक्षी दल भी क्या राष्ट्रपति से यह कह सकते हैं कि ऐसा न करें? क्योंकि कल वे भी सरकार में आ सकते हैं। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है।”
सरकार के आंतरिक कार्यों से जुड़े अध्यादेशों पर रोक लगाने की परंपरा के कारण राष्ट्रपति की संस्था विवादों में फंसने का खतरा भी समझा जाता है।
संविधानविद् बस्नेत कहते हैं, “पिछली बार पार्टी तोड़ने और जोड़ने के लिए अध्यादेश का दुरुपयोग हुआ था। इस सरकार का उद्देश्य सही हो सकता है लेकिन विधि, परंपरा और मान्यता का पालन होना चाहिए।”
कोलोराडो के डेनवर में आगामी अगस्त 8 और 9 को ‘हिमालयन ओपन गोल्फ 2026’ का आयोजन होगा।
प्रतियोगिता का उद्देश्य नेपाली और हिमालयी डायस्पोरा को एकजुट करना और गोल्फ की पहुंच बढ़ाना है।
कुल पुरस्कार राशि 12,000 अमेरिकी डॉलर निर्धारित की गई है और दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय विस्तार की योजना भी है।
17 वैशाख, काठमांडू। अमेरिका के कोलोराडो में स्थित डेनवर में आगामी अगस्त 8 और 9 तारीख को ‘हिमालयन ओपन गोल्फ (HOG) 2026’ का आयोजन होने जा रहा है।
हिमालयी समुदाय की पहल से शुरू की गई यह प्रतियोगिता विदेशों में रहने वाले नेपाली और हिमालयी डायस्पोरा को एकजुट करने वाला महत्वपूर्ण मंच बनती जा रही है।
सौंदर्यपूर्ण पहाड़ी वातावरण में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य खेल के साथ-साथ संस्कृति, दोस्ती और जीवनशैली को भी साथ जोड़ना है, जैसा कि आयोजकों ने बताया। इस प्रतियोगिता में अनुभवी खिलाड़ी से लेकर नए सीख रहे गोल्फर भी हिस्सा ले सकते हैं।
आयोजकों के अनुसार, इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य हिमालयी समुदाय में गोल्फ खेल को लोकप्रिय बनाना और नई पीढ़ी को स्वस्थ, अनुशासित तथा सक्रिय जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है।
इसी तरह, प्रतियोगिता खेल के माध्यम से सहयोग, नेटवर्किंग और व्यावसायिक संबंधों को बढ़ाने का अवसर भी प्रदान करती है।
प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि 12,000 अमेरिकी डॉलर तय की गई है। यह युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, मार्गदर्शन का वातावरण बनाने और विश्वभर में फैले हिमालयी समुदाय के बीच संबंधों को मजबूत करने का लक्ष्य रखती है।
आयोजक इस प्रतियोगिता को दीर्घकालिक रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने की योजना भी बना रहे हैं। हिमालयन ओपन गोल्फ समुदाय के बीच एकता, पहचान और पारस्परिक संबंधों को मजबूत करने वाला एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।