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लेखक: space4knews

धुलिखेल में शुक्रवार से सातवीं एशियाई सभात प्रतियोगिता शुरू होगी

नेपाल सभात संघ के आयोजन में सातवीं एशियाई सभात प्रतियोगिता वैशाख १८ से २० तारीख तक काठमांडू विश्वविद्यालय के हॉल में आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता में नेपाल सहित १० देशों के लगभग ३५० खिलाड़ी, रेफरी और अधिकारी भाग लेंगे, जिनमें १३६ वजन वर्गों में मुकाबला होगा। नेपाल से पुरुष और महिला मिलाकर १४३ खिलाड़ी भागीदारी करेंगे और यह प्रतियोगिता वैशाख २० को अपराह्न ४ बजे समापन के साथ संपन्न होगी।

१७ वैशाख, काठमांडू। नेपाल सभात संघ के तत्वावधान में सातवीं एशियाई सभात प्रतियोगिता एवं हिमालयन खुला सभात प्रतियोगिता कल धुलिखेल स्थित काठमांडू विश्वविद्यालय के हॉल में आरंभ होने जा रही है। यह प्रतियोगिता १८, १९ और २० वैशाख तक चलेगी। इसमें नेपाल के अलावा भारत, बांग्लादेश, हांगकांग, चीनी ताइपेई, उज्बेकिस्तान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, फ्रांस और न्यूजीलैंड के करीब ३५० खिलाड़ी, रेफरी और अधिकारी सम्मिलित होंगे।

संघ के अनुसार विभिन्न आयु एवं वजन वर्गों में कुल १३६ मुकाबले होंगे। नेपाल से पुरुष एवं महिला मिलाकर १४३ खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। प्रतियोगिता का उद्घाटन सत्र सुबह १० बजे होगा, जिसके बाद मुकाबले शुरू होंगे। विजेताओं को दैनिक आधार पर पदक प्रदान किए जाएंगे और प्रतियोगिता २० वैशाख को अपराह्न ४ बजे समाप्त होगी। संघ के अध्यक्ष लक्ष्मण बस्नेत के अनुसार पूरी तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी हैं। गत वर्ष भारत के नई दिल्ली में सम्पन्न छठे संस्करण के दौरान नेपाल ने इस सातवें संस्करण की मेजबानी का प्रस्ताव रखा था, जिसे सभी सहभागी देशों ने समर्थन दिया था।

‘अप्रेसन धुरन्धर’ टाइटलसहित जापानमा रिलिज हुँदै ‘धुरन्धर’

जापान में ‘ऑपरेशन धुरंधर’ नाम से रिलीज होगी बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’

रणवीर सिंह अभिनीत बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ आगामी 10 जुलाई को जापान में ‘ऑपरेशन धुरंधर’ नाम से प्रदर्शित होने जा रही है। इस फिल्म ने विश्वव्यापी रूप से लगभग 1,307 करोड़ रुपए की कमाई की है जबकि इसके दूसरे भाग की कुल कमाई 1,780 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। नेपाल में इस फिल्म को सुपरहिट घोषित किया जा चुका है।

काठमांडू। रणवीर सिंह की मुख्य भूमिका वाली बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ जापान में 10 जुलाई को प्रदर्शित की जाएगी। जापानी बाजार के लिए इस फिल्म का शीर्षक ‘ऑपरेशन धुरंधर’ रखा गया है। इससे पहले भी रणवीर की ‘गली बॉय’, ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ और ‘पद्मावत’ जापान में रिलीज हो चुकी हैं। जापान में सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म ‘आरआरआर’ है, जिसने लगभग 143.69 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

‘धुरंधर’ को पहली बार 5 दिसंबर, 2025 को विश्वव्यापी रूप से रिलीज किया गया था। इस फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर माधवन, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन ने भी अभिनय किया है। फिल्म का निर्देशन आदित्य धर ने किया है। बॉक्स ऑफिस ट्रैकिंग साइट सैकनिल्क के अनुसार, ‘धुरंधर’ ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतरीन व्यापार करते हुए विश्वभर लगभग 1,307 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

भारत में इस फिल्म ने क्रमशः ग्रॉस कलेक्शन 1,005 करोड़ रुपए और नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए की कमाई की थी। विदेशों में भी इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसने लगभग 299 करोड़ रुपए की आमदनी की। खासतौर पर अमेरिका और कनाडा में ही इसने 193.06 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई करते हुए ‘बाहुबली 2’ का रिकॉर्ड भी तोड़ा था। इसी बीच, ‘धुरंधर’ का दूसरा भाग 19 मार्च, 2026 को विश्वव्यापी रूप से प्रदर्शित हो चुका है। अब तक इसकी कुल वैश्विक कमाई 1,780 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। भारत में इसका कुल नेट कलेक्शन 1,132 करोड़ रुपए और ग्रॉस कलेक्शन 1,356 करोड़ रुपए है। नेपाली बॉक्स ऑफिस में भी इस फिल्म को सुपरहिट घोषित किया गया है।

हिटलर के बारे में १२ तथ्य, जो सामान्यतः चर्चा में नहीं आते

समाचार सारांश एडोल्फ हिटलर ऑस्ट्रिया के ब्राउनाउ एम इन में जन्मे थे और बाद में १९३० के दशक में वे जर्मनी के नागरिक बने। १९२३ के असफल विद्रोह के बाद हिटलर को देशद्रोह के आरोप में जेल जाना पड़ा और वहीं उन्होंने ‘मेन क्याम्फ’ लिखना शुरू किया। इतिहास के सबसे प्रसिद्ध किरदारों में से एक एडोल्फ हिटलर हैं। जर्मनी के सर्वोच्च पद पर पहुंचकर उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत की, और वे क्रूर और तानाशाही शासक के रूप में जाने जाते हैं। हिटलर के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है, फिर भी वे कई लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय बने हुए हैं। वे कैसे थे? क्या सोचते थे? कैसे बोलते थे? और वे इतने शक्तिशाली कैसे बने? ये सभी सवाल लोगों के मन में हैं। इस लेख में हिटलर से जुड़ी १२ रोचक बातें प्रस्तुत की गई हैं।

१. शुरू में ऑस्ट्रियाई थे – हिटलर जर्मन राष्ट्रवादी तो थे, लेकिन वे अप्रैल १८८९ में ऑस्ट्रिया के ब्राउनाउ एम इन में जन्मे थे। अपने विद्यालय शिक्षक लियोपोल्ड पोएट्स के प्रभाव के कारण उन्होंने ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के प्रति घृणा विकसित की और जर्मनी के प्रति वफादार हो गए। १९१४ में म्यूनिख में रहकर उन्होंने बवेरियाई सेना में भर्ती लिया। १९२५ में उन्होंने अपनी ऑस्ट्रियाई नागरिकता छोड़ दी और १९३० के दशक की शुरुआत में आधिकारिक तौर पर जर्मन नागरिक बन गए। नाजी पार्टी में शामिल होकर वे १९३३ में जर्मन सरकार के नेता बने।

२. असफल चित्रकार – हिटलर के युवा काल में चित्रकार बनने का सपना था। कई लोग सोचते हैं कि यदि वे सफल चित्रकार बने होते तो बीसवीं सदी कैसी होती। उन्होंने वियना की एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स के प्रवेश परीक्षा में १९०७ और १९०८ में दो बार असफलता पाई। वास्तुकला संबंधी रेखाचित्रों में उनकी कुछ प्रतिभा थी, लेकिन मानव आकृतियों में सटीकता और चरित्र की कमी थी। कला में उनकी रुचि बनी रही। थर्ड राइच काल में आधुनिक और प्रभाववादी कला को ‘यहूदी और बोल्शेविक कलाकारों द्वारा उत्पन्न’ बताया जाता था और नाजी उन्हें नफरत करते थे, साथ ही कई कला कृतियां जब्त की जाती थीं। हिटलर ने अपनी निजी संग्रह के लिए कई कलाकृतियां जमा की थीं।

३. बेघर चित्रकार के रूप में संघर्ष – सफल न होने के बाद हिटलर आर्थिक तंगी में चले गए। वे अपनी पेंटिंग और पोस्टकार्ड बेच पाने में असफल रहे, इसलिए १९०९ में वियना के घरबार विहीन आश्रय स्थल में रहने को मजबूर हुए। १९१३ तक वे सार्वजनिक छात्रावास में रहे। बाद में पिता की पैतृक संपत्ति मिलने पर वे म्यूनिख आ बस गए।

४. प्रथम विश्व युद्ध के घायलों में – ऑस्ट्रियाई नागरिक होने के बावजूद उन्होंने बवेरियाई सेना में भर्ती होकर १९१६ में सोम युद्ध में भाग लिया। वहां पैरों में चोट लगने की वजह से वे घायल हुए। १९१८ में मस्टर्ड गैस का उपयोग होने पर उनके आँखें अस्थायी रूप से अंधी हो गईं। अस्पताल में इलाज के दौरान ही उन्हें जर्मनी के आत्मसमर्पण की खबर मिली। युद्ध में उन्हें ‘आयरन क्रॉस’ पदक प्राप्त हुआ था।

५. देशद्रोह के आरोप में जेल – १९२३ में नाजी पार्टी के असफल विद्रोह के कारण हिटलर को देशद्रोह के आरोप में जेल में रखा गया। उन्हें पांच वर्षों की जेल सजा सुनाई गई थी, लेकिन उन्होंने एक वर्ष से कम समय जेल में बिताया। जेल में वे प्रसिद्ध पुस्तक ‘मेन क्याम्फ’ लिखना शुरू कर चुके थे।

६. कभी चुनाव नहीं जीते – १९३२ के राष्ट्रपति चुनाव में हिटलर, पल वॉन हिन्डेनबर्ग से हार गए। लेकिन उसी साल के संघीय चुनाव में नाजी पार्टी ने ३७ प्रतिशत वोट हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी साबित हुई। १९३३ में हिन्डेनबर्ग ने उन्हें चांसलर नियुक्त किया। बाद में हिन्डेनबर्ग की मृत्यु के बाद हिटलर ने राष्ट्रपति और चांसलर दोनों पदों को मिला कर खुद को ‘फुएहरर’ (सर्वोच्च नेता) घोषित कर दिया।

७. टाइम मैगजीन का ‘मैन ऑफ द ईयर’ – द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने से एक साल पहले १९३८ में टाइम मैगजीन ने हिटलर को यह खिताब दिया था। टाइम के अनुसार यह उपाधि समाचार के प्रभाव और चर्चा के आधार पर दी जाती है। उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था, हालांकि वह एक स्वीडिश राजनेता का तंज था।

८. कंसन्ट्रेशन कैंप कभी नहीं गए – यहूदियों के सामूहिक नरसंहार को हिटलर शासन का सबसे भयानक अध्याय माना जाता है। लेकिन हिटलर खुद कभी उन कंसन्ट्रेशन कैंपों या मृत्यु शिविरों का दौरा नहीं किया, जो उन्होंने बनाए थे। उन्होंने नरसंहार की योजना दूर से नियंत्रित की।

९. पशु प्रेमी – इंसानों पर क्रूर अत्याचार करने वाले हिटलर पशुओं के प्रति प्रेमी थे। यह विवाद है कि वे शाकाहारी थे या नहीं। लेकिन उन्होंने पशु संरक्षण के लिए कड़े कानून बनाए और वैज्ञानिक परीक्षणों का विरोध किया।

१०. स्वास्थ्य समस्याएँ – उनके स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की अटकलें हैं। कुछ इतिहासकारों के अनुसार उन्हें सिफलिस, हंटिंग्टन रोग और पार्किंसन रोग था। उनके हाथों का कंपना पार्किंसन या नशीली दवाओं के सेवन से जुड़ा हो सकता है।

११. हत्या के प्रयासों से बचे – हिटलर पर कई बार हत्या के प्रयास हुए। सही संख्या ज्ञात नहीं है, लेकिन वे २० से अधिक प्रयासों से बच निकले। १९३९ में जॉर्ज एल्सर का बम हमला और १९४४ में क्लाउस वॉन स्टॉउफेनबर्ग का प्रयास सबसे प्रसिद्ध हैं।

१२. उनके भतीजे अमेरिकी सेना में – हिटलर के भतीजे विलियम पैट्रिक हिटलर लिवरपूल में जन्मे थे। १९३० के दशक में वे जर्मनी गए, लेकिन बाद में अमेरिका के पक्ष में अपने ही काका के खिलाफ लड़े। उन्होंने अमेरिकी नौसेना में सेवा करते हुए पर्पल हार्ट पदक जीता।

जेनजी आन्दोलन के बाद भी भूटानी शरणार्थी सुरक्षा बेस कैंप का संचालन नहीं हुआ है

मोरंग के पथरीशनिश्चरे नगरपालिका-१० में स्थित भूटानी शरणार्थी सुरक्षा बेस कैंप जेनजी आन्दोलन के बाद बंद हो गया है और अब तक इसे पुनः चालू नहीं किया गया है। १७ वैशाख, काठमांडू। सशस्त्र पुलिस बल का यह सुरक्षा बेस कैंप आन्दोलन के दौरान हुए आगजनी और तोड़फोड़ की वजह से बंद कर दिया गया था। देश भर में विभिन्न पुलिस चौकियों और सशस्त्र बेस कैंपों का पुनर्निर्माण कर संचालन शुरू किया जा चुका है, लेकिन यह कैंप अब तक सक्रिय नहीं हुआ है।

स्थानीय लोग और भूटानी शरणार्थी समुदाय लंबे समय से इस कैंप के संचालन न होने पर अपनी शिकायतें कर रहे हैं। बार-बार की गई अपीलों और ध्यानाकर्षण के बावजूद राज्य द्वारा इस क्षेत्र की अनदेखी किए जाने की उनकी बात है। २०६४ साल में स्थापित इस कैंप में लगभग १५ सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात थे, जो चोरी, झगड़ा, सामाजिक विवाद और मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करते थे, स्थानीय लोग बताते हैं। कैंप बंद होने के बाद से यहाँ की स्थिति असहज होती जा रही है।

हाल के समय में इस क्षेत्र में अपराधिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है, मादक पदार्थों के उपयोग व आवागमन की समस्याएँ बढ़ी हैं और सामाजिक असुरक्षा बढ़ी है, इसका उल्लेख भूटानी शरणार्थी समुदाय ने किया है। इसी कारण कैंप के आसपास रहने वाला समुदाय चिंतित है, उनकी शिकायत है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कैंप का स्थानीय भौगोलिक स्थिति भी संवेदनशील है। खुला बस्ती वाला ढांचा, सीमावर्ती आवागमन की प्रभावशीलता और निगरानी की कमी से सुरक्षा जोखिम बढ़ा है, ऐसा वे मानते हैं।

स्थानीय निवासी और शरणार्थियों ने जिला प्रशासन कार्यालय से लेकर सशस्त्र पुलिस मुख्यालय तक इस कैंप को पुनःस्थापित करने के लिए बार-बार पहल की है। लेकिन अन्य क्षेत्रों की तरह पुनर्निर्माण के बाद सुरक्षा बलों के वापस आने की स्थिति यहाँ नहीं बनी है, जिससे निराशा बढ़ी है। भूटानी शरणार्थी सुरक्षा बेस कैंप के सचिव करन राई ने कहा है कि यदि सशस्त्र पुलिस वापस आकर यहां रहने की व्यवस्था करे तो कैंप के पुनर्निर्माण और मरम्मत-संभाल के सभी खर्च समुदाय स्वयं वहन करने के लिए प्रतिबद्ध है। समुदाय ने राज्य से तत्काल सुरक्षा बलों की पुनः उपस्थिति की व्यवस्था करने और स्थायी समाधान के लिए अनुरोध किया है।

धमाधम सामान सार्दै बल्खु क्षेत्रका सुकुमवासी (तस्वीरहरू)

बल्खु क्षेत्र में सुकुमवासी अपने सामान हटाने लगे

समाचार का सार: जिल्ला प्रशासन कार्यालय काठमाडौं ने १८ वैशाख सुबह ७ बजे से काठमाडौं नदी किनारे की सुकुमवासी बस्तियों को खाली कराने का आदेश जारी किया है। बल्खु और वंशीघाट क्षेत्र के सुकुमवासी आज सुबह से ही स्वयं अपने सामान हटाने लगे हैं। प्रशासन ने नदी किनारे की अनधिकृत बस्तियों को मानवीय तरीके से उद्धार कर खाली कराने की बात कही है। १७ वैशाख, काठमाडौं – बल्खु और वंशीघाट क्षेत्र के सुकुमवासी तेजी से अपने सामान हटाने लगे हैं। जिल्ला प्रशासन कार्यालय काठमाडौं ने बुधवार को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए १८ वैशाख सुबह ७ बजे से काठमाडौं नदी किनारे की सभी सुकुमवासी बस्तियों को एक साथ खाली कराने की सूचना जारी की थी, जिसके बाद वहां के सुकुमवासी आज सुबह से ही स्वयं अपने बलबूते पर सामान हटाने लगे हैं। प्रशासन ने कहा है कि काठमाडौं जिले के विभिन्न पालिकाओं के नदी किनारे की बस्तियां और सरकारी, सार्वजनिक या निजी जमीन भी अतिक्रमण करके अनाधिकृत रूप से वर्षों से बसे सुकुमवासियों की बस्तियों को मानवीय तरीके से उद्धार करते हुए और आपदा जोखिम को ध्यान में रखते हुए खाली कराया जाएगा। इससे पहले काठमाडौं के थापाथली, गैरीगाउँ, सिनामंगल और मनोहरा क्षेत्रों की बस्तियां भी खाली कराई जा चुकी हैं।

विपक्षी तीन दलों ने वर्षाअघि रासायनिक मल का भंडार जल्द सुनिश्चित करने की सरकार से मांगी मांग

विपक्षी तीन दलों ने अमेरिका-ईरान तनाव के कारण रासायनिक मल की कमी बढ़ने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार से वर्षाअघि ही इसका भंडार सुनिश्चित करने की मांग की है। नेकपा एमाले राष्ट्रिय सभा दल के नेता प्रेमप्रसाद दंगाल की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस और नेकपा की संयुक्त बैठक ने सरकार से वर्षा मौसम के लिए आवश्यक रासायनिक मल समय पर उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। १७ वैशाख, काठमाडौं।

विपक्षी तीन दलों ने वर्षाअघि ही रासायनिक मल का पर्याप्त भंडार करने की मांग की है। गुरुवार सुबह नेकपा एमाले राष्ट्रिय सभा दल के नेता प्रेमप्रसाद दंगाल की अध्यक्षता में आयोजित कांग्रेस और नेकपा की बैठक में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण मल की आपूर्ति में और भी कमी आ सकती है, इस आशंका से सरकार को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

‘हर साल रासायनिक मल की कमी देखी जाती है, और इस वर्ष अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण यह अभाव और अधिक गंभीर होने की संभावना है,’ निर्णय में कहा गया है, ‘इसलिए हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए वर्षा मौसम के लिए आवश्यक रासायनिक मल का भंडारण समय पर सुनिश्चित करे।’

नेपालको बडीबिल्डिङ तथा फिटनेस क्षेत्रमा एनाबोलिक स्टेरोइडको दुरुपयोग

नेपाल में बॉडीबिल्डिंग और फिटनेस क्षेत्र में एनाबोलिक स्टेरॉयड का दुरुपयोग

कभी-कभी ऐसा लगता है कि जिम की संस्कृति ही बदल गई है। जहां पहले मेहनत, अनुशासन और समय को प्राथमिकता दी जाती थी, अब वहां तेज़ परिणाम पाने का दबाव बढ़ गया है। नेपाल में फिटनेस और बॉडीबिल्डिंग की लोकप्रियता के साथ-साथ एनाबोलिक स्टेरॉयड के अनियंत्रित उपयोग से स्वास्थ्य जोखिम बढ़े हैं। सरकार और संबंधित संस्थान एनाबोलिक स्टेरॉयड के उपयोग और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण करने में असमर्थ रहे हैं। नेपाल में ये स्टेरॉयड भारत और चीन से आयात होकर फार्मेसी, जिम नेटवर्क और ऑनलाइन बाजार के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हैं।

सुबह के लगभग ६ बजे हैं। काठमांडू उपत्यका के जिम धीरे-धीरे खुल रहे हैं। बाहर ठंडी हवा चल रही है, लेकिन अंदर प्रवेश करते ही एक अलग दुनिया होती है – प्रेरणादायक संगीत, लोहे के वजन गिरने की आवाज़, और शीशे के सामने अपने शरीर से लड़ रहे युवा। कोई वजन कम करने का लक्ष्य रखता है, कोई अपने शरीर को आकर्षक बनाने का सपना संजोया है। सभी की आंखों में एक समान चमक है – मैं बदलना चाहता हूं। यह बदलाव की तलाश में ही मैं ३५ साल पहले जिम में प्रवेश हुआ था।

नेपाल में पिछले दशक में फिटनेस और बॉडीबिल्डिंग की लोकप्रियता में तेज़ वृद्धि हुई है। सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक शरीर, अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड्स और “परफेक्ट फिज़िक” की चाह ने युवाओं को गहराई से प्रभावित किया है। कई लोगों के लिए जिम जाना अब केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान और आत्मविश्वास का भी विषय बन चुका है। एनाबोलिक स्टेरॉयड वास्तव में क्या हैं, इसे समझना ज़रूरी है। ये मुख्यतः टेस्टोस्टेरोन जैसे कृत्रिम हार्मोन होते हैं, जो शरीर में मांसपेशियों का विकास तेज़ी से करते हैं।

नेपाल में ऐसे पदार्थों की उपलब्धता तुलनात्मक रूप से आसान है। कुछ जिमों में अनौपचारिक तौर पर इन पदार्थों की सलाह दी जाती है। नए जिम जाने वाले युवाओं को ‘छोटा रास्ता’ दिखाया जाता है। लेकिन इनके दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। सोशल मीडिया ने इसे और बढ़ावा दिया है। इंस्टाग्राम, टिकटोक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जाने वाली ‘ट्रांसफॉर्मेशन’ वीडियोज़ युवाओं को प्रभावित करती हैं।

नेपाल सरकार के विभिन्न विभागों ने इस विषय पर समय-समय पर चेतावनी दी है। लेकिन व्यवहार में प्रभावी क्रियान्वयन कमजोर दिखता है। बाजार में ये दवाइयाँ अभी भी आसानी से उपलब्ध हैं और जिमों में प्रयोग हो रहा है, लेकिन नियंत्रण नजर नहीं आता। यदि ऐसी स्थिति बनी रही तो क्या बॉडीबिल्डिंग को एक उचित खेल के रूप में मान्यता देना संभव रहेगा?

आखिरकार, शरीर बनाने के लिए स्वास्थ्य खो देना कोई उपलब्धि नहीं है। वास्तविक फिटनेस वह है जो न केवल शरीर, बल्कि जीवन को भी संतुलित और स्वस्थ बनाए। अगर आज हम इसे गंभीरता से नहीं लेते, तो भविष्य में इसकी कीमत एक पूरी पीढ़ी को चुकानी पड़ेगी।

सहकारी ठगीमा संलग्न परिवारका सदस्यका सम्पत्ति कार्यविधिको आधारमा जफत की जा सकती है?

समाचार सारांश सरकार ने सहकारी ठगी में संलग्न व्यक्ति के सम्बन्ध विच्छेद या अंशबंटा वाले परिवार सदस्यों की सम्पत्ति बिक्री करने के लिए कार्यविधि स्वीकृत की है। इस कार्यविधि और मुलुकी देवानी संहिता के बीच विरोधाभास होने के कारण कार्यान्वयन में चुनौती संभावित है, ऐसा वरिष्ठ अधिवक्ता प्रा. डा. गान्धी पंडित ने व्यक्त किया। सहकारी मन्त्रालय के उपसचिव रघुनाथ महत ने समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं को सम्पत्ति प्रबंधन हेतु सभी उपाय अपनाने का अधिकार दिया जाने की जानकारी दी है। १७ वैशाख, काठमाडौँ। सरकार ने नई कार्यविधि को स्वीकृति देते हुए सहकारी ठगी पीड़ितों की बचत वापसी के लिए, ठगी में लिप्त व्यक्तियों के सम्बन्ध विच्छेद (डिवोर्स) या अंशबंटा किए गए परिवार सदस्यों की भी सम्पत्ति बिक्री करने की व्यवस्था की है। यह व्यवस्था १० वैशाख को मंत्रिपरिषद बैठक में स्वीकृत ‘समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के सदस्य की बचत वापसी कोष स्थापना एवं संचालन सम्बन्धी कार्यविधि २०८३’ में शामिल की गई है।

कार्यविधि में अंशबंटा या सम्बन्ध विच्छेद के बाद भी सहकारी ठगी में संलग्न व्यक्ति से जुड़ी सम्पत्ति बिक्री करने की सुविधा दी गई है। परन्तु यह व्यवस्था मुलुकी देवानी संहिता के प्रावधानों के विपरीत है, जिससे लागू करने में समस्या उत्पन्न हो सकती है, ऐसा वरिष्ठ अधिवक्ता प्रा. डा. गान्धी पंडित ने बताया। तुलनात्मक रूप से अपराध संबन्धी देवानी संहिता की व्यवस्था सशक्त मानी जाती है, जबकि सरकार की नई कार्यविधि इसे चुनौती देने का प्रयास प्रतीत होती है। देवानी संहिता की धारा २५६ के खण्ड (च) अनुसार, कानूनी रूप से अलगाव या सम्बन्ध विच्छेद का मतलब संपत्ति निजी मानी जाती है। इसी तरह धारा २७६ में कहा गया है कि बिना अनुमति किसी दूसरे की सम्पत्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता। इससे सम्बन्ध विच्छेद के बाद या परिवार सदस्य के नाम अंशबंटा वाले संपत्ति की बिक्री संभव नहीं होती, जिससे कार्यविधि के क्रियान्वयन में समस्या हो सकती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रा. डा. गान्धी पंडित ने बताया कि अंशबंटा के माध्यम से नाम परिवर्तित सम्पत्ति को अन्य सदस्य बिना जानकारी के बिक्री नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, ‘जब तक संबंधित व्यक्ति की सहमति न हो, सम्पत्ति बिक्री और हस्तांतरण असंभव है। सहकारी ठगी के दोषियों ने परिवार के सदस्यों के नाम पर अंशबंटा करके संपत्ति बाँटी भी हो, तो भी उसे बेचकर रकम वापस करना संभव नहीं है।’ उन्होंने इस विषय को केवल एक कार्यविधि से हल नहीं किया जा सकता बताया। चक्रीय कोष स्थापना एवं संचालन कार्यविधि की धारा ३ के अनुसार, संचालक या व्यवस्थापक की संपत्ति की बिक्री से बचतकर्ता के पैसे वापसी नहीं होती, लेकिन सम्बंधित परिवार के सदस्य अंशबंटा की गई निवेश को रोक्का या नीलाम कर सकते हैं। अगर पैसे वापस नहीं होते हैं, तो समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं के संचालक, व्यवस्थापक और उनके परिवार के सदस्यों से सरकारी दावों के समान वसूली की व्यवस्था की गई है।

सहकारी संस्थाओं से प्रभावित बचतकर्ताओं को रकम दिलाना इतना सरल नहीं है, ऐसा व्यावसायिक जानकार मानते हैं। पूर्व सचिव गोपीनाथ मैनाली ने कहा, ‘अंशबंटा या सम्बन्ध विच्छेद के बाद संपत्ति की तत्काल बिक्री आसान नहीं है।’ चूंकि सहकारी का दायित्व सीमित होता है, इसलिए सरकार की कार्यविधि पूरी तरह प्रभावी नहीं होगी, उनका मानना है। उन्होंने कहा, ‘सरकार ने सहकारी ठगों के भागने को रोकने के लिए पासपोर्ट जारी न करने और रोक्का करने की व्यवस्था की है, जो सकारात्मक कदम है।’ उनकी दृष्टि में सहकारी ठग अपनी पत्नी या बच्चों के नाम पर संपत्ति रखकर पूंजी विदेश भिजवा चुके हैं। इसलिए सहकारी क्षेत्र की कानूनी जटिलताओं पर सरकार का पर्याप्त ध्यान नहीं है, उन्होंने इसकी आलोचना की। ‘सहकारी अभियान के लोग सरकार का विश्वास जीतना चाहिए। सहकारी क्षेत्र में कई अरबों की चोरी का ज्ञान किसी को नहीं है। संगठित संस्थाओं को सरकारी रकम समझकर वसूली करना आसान नहीं लगता,’ उन्होंने कहा। प्रारम्भ में कानून बनाते समय ऐसे पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया था, नई कानून आने पर कार्यविधि संशोधन में विधिक विरोधाभास हो गया, ऐसा उनका विश्लेषण है।

सहकारी मन्त्रालय के उपसचिव रघुनाथ महत ने बताया कि समस्याग्रस्त सहकारी संस्थाओं की सम्पत्ति एवं दायित्व प्रबंधन के लिए व्यवस्थापन समिति को सभी उपाय अपनाने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘संबंध विच्छेद या अंशबंटा कब हुआ, इसे देखना आवश्यक है। पहले कसूर करके सम्बन्ध विच्छेद हुआ या बाद में, इसका स्पष्ट व्याख्या होनी चाहिए। कसूर करने वालों के हिस्से से छुटकारा नहीं मिलना चाहिए, इसमें देवानी संहिता के तहत निर्णय लिया जाता है।’

कच्चा तेल का मूल्य चार वर्षों में सबसे ऊँचे स्तर पर

१७ वैशाख, काठमाडौं। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला शुरू करने के बाद उत्पन्न तनाव के कारण कच्चे तेल का मूल्य पिछले चार वर्षों में सबसे ऊँचे स्तर तक पहुंच गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार कच्चे तेल का मूल्य ११९.७६ डॉलर प्रति बैरल हो गया है। यह जून २०२२ में देखा गया सबसे उच्चतम स्तर है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान २०२२ के फरवरी-मार्च में कच्चे तेल की कीमत लगभग १३० डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थी।

द गार्जियन के अनुसार, कच्चे तेल के मूल्य में वर्तमान उच्च वृद्धि में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों ने भी भूमिका निभाई है। ट्रम्प ने ईरान के बंदरगाहों पर सैन्य नाकाबंदी जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान अपना परमाणु समझौता पूरा नहीं करता, तब तक नाकाबंदी जारी रहेगी। इसका सीधा प्रभाव स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज समुद्री मार्ग पर पड़ा है। ईरान द्वारा नियंत्रित स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज विश्वभर तेल परिवहन का एक अहम जलमार्ग है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच समय-समय पर संघर्ष की घटनाएं होती रहती हैं।

असुरक्षा के कारण सैकड़ों तेल टैंकर और जहाज अलपत्र पड़े हैं, जिससे वैश्विक तेल और गैस की परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है तथा महंगाई बढ़ रही है। तनाव कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पाकिस्तान में वार्ता की पहल हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

पोखरामा पहिलोपटक महिला गोल्डकप हुँदै – Online Khabar

पोखरामा पहली बार महिला गोल्डकप फुटबल प्रतियोगिता का आयोजन

१७ वैशाख, पोखरा। पोखरामा पहली बार महिला गोल्डकप फुटबल प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसमें चार क्लब हिस्सा लेंगे। आर एस फुटबल क्लब के आयोजन में शुक्रवार से शुरू होने वाली इस प्रतियोगिता में चार क्लब प्रतिस्पर्धा करेंगे। बुधवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में क्लब के अध्यक्ष रमेश कार्की ने तैयारियां पूरी होने की जानकारी दी। प्रतियोगिता में आयोजक आरएस पोखरा फुटबल क्लब, नेपाल पुलिस क्लब, संकटा क्लब और त्रिभुवन आर्मी क्लब भाग लेंगे।

उद्घाटन मैच में आयोजक क्लब और नेपाल पुलिस क्लब के बीच मुकाबला होगा। शनिवार को संकटा क्लब और त्रिभुवन आर्मी क्लब के बीच मैच खेला जाएगा, जबकि रविवार को फाइनल मुकाबला आयोजित किया जाएगा। पोखरा में इससे पहले महिला गोल्डकप का आयोजन नहीं हुआ था। महिला फुटबॉल के विकास के लिए स्थापित आरएस क्लब ने पोखरा में पहली बार महिला फुटबॉल का अवसर प्रदान किया है। “हाल ही महिला फुटबॉल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, यह बात सभी जानते हैं। नेपाली राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम का प्रदर्शन और दर्शकों की उपस्थिति इसका प्रमाण है,” उन्होंने कहा।

पहले संस्करण के रूप में चुनौतियां होंगी, उन्होंने बताया। क्लब ने हाल ही में एन्फा के आयोजन में हुई महिला लीग चयन में भी भाग लिया था। अध्यक्ष कार्की ने बताया कि क्लब का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय खिताब जीतना और प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को खेल के साथ शिक्षा का अवसर देना है, इसी कारण प्रतियोगिता आयोजित की गई है। “हम पहली बार पोखरा रंगशाला में प्रथम महिला पोखरा गोल्डकप आयोजित कर रहे हैं। अवसर और चुनौतियां दोनों हैं, उन्हें पार करते हुए आगे बढ़ेंगे,” उन्होंने आगे कहा।

वैशाख १८ से २० तक चलने वाली प्रतियोगिता के विजेता को रु पाँच लाख नकद पुरस्कार के साथ ट्रॉफी, पदक और प्रमाण पत्र दिए जाएंगे, जबकि उपविजेता को रु तीन लाख नकद पुरस्कार मिलेगा। उत्कृष्ट खिलाड़ी को रु ३० हजार, उत्कृष्ट गोलरक्षक और सर्वाधिक गोल करने वाले को समान रूप से रु १५ हजार नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। अनुशासित टीम को भी रु २५ हजार पुरस्कार मिलेगा, यह जानकारी दी गई है।

चुनाव जीतने के दो महीने बाद प्रचण्ड रुकुमपूर्व जा रहे हैं

१७ वैशाख, रुकुमपूर्व। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के संयोजक प्रचण्ड आज रुकुमपूर्व आने वाले हैं। चुनाव जीतने के दो महीने बाद वे आज रुकुमपूर्व पहुंचने जा रहे हैं। जिला पार्टी संयोजक कुमारी बराल के अनुसार, प्रचण्ड सुबह १० बजे रुकुमकोट में आएंगे। प्रचण्ड वर्तमान में रुकुम पश्चिम में हैं। वहां से अपने चुनाव क्षेत्र रुकुमपूर्व पहुंचकर वापस लौटने का कार्यक्रम है। प्रचण्ड का यह भ्रमण चुनावी समीक्षा बैठक पर केन्द्रित होगा। चुनाव जीतने के बाद फागुन २२ गते हेलिकॉप्टर द्वारा काठमांडू लौटे प्रचण्ड तब से जिले में नजर नहीं आए थे। चुनाव से पहले उन्होंने जनप्रतिनिधि घर-घर जाकर विकास, समृद्धि, सड़क, रोजगार और परिवर्तन के कड़े प्रतिबद्धता व्यक्त की थी, पर जीत के बाद राजधानी में व्यस्तता बढ़ा ली थी। मतदाताओं ने प्रचण्ड के इस दौरे को केवल औपचारिक राजनीतिक उपस्थिति के रूप में नहीं बल्कि चुनावी प्रतिबद्धता के परीक्षण के रूप में भी देखा है। समीक्षा बैठक के अलावा जिले की वास्तविक समस्याओं जैसे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आधारभूत संरचना में ठोस योजना लागू होगी या नहीं, इसकी प्रतीक्षा यहाँ के नागरिक कर रहे हैं।

ईरान युद्ध: नाकाबंदी ‘लम्बाने’ के संकेत से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं

कच्चा तेल से पेट्रोल और डीजल तैयार किया जाता है। पेट्रोल पंप पर काले रंग की कार में तेल भरते हुए नीले जैकेट और भूरे और सफेद वेस्ट पहने एक पुरुष

तस्वीर स्रोत, Getty Images

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संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ नाकाबंदी “लंबी अवधि के लिए जारी रखने” की तैयारी की खबर के बाद तेल के दाम आसमान छू गए हैं।

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के बीच विवाद के लंबे समय तक खींचाव की आशंका से कच्चे तेल का दाम प्रति बैरल 120 अमेरिकी डॉलर से ऊपर पहुंच गया है।

फरवरी के अंत से शुरू हुए युद्ध के बाद यह तेल के दाम का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख कार्यकारी अधिकारियों के साथ ईरानी बंदरगाहों और ट्रांसपोर्ट मार्गों पर नाकाबंदी को लंबे समय तक जारी रखने के विकल्प पर चर्चा की थी।

युद्ध शुरू होने से पहले विश्वव्यापी पेट्रोलियम निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत होर्मुज जलसंधि मार्ग से होता था। फिलहाल अमेरिका ईरान के विरुद्ध समुद्री नाकाबंदी बनाए हुए है।

रुकुम पुगेर प्रचण्डले भने – निर्वाचन असामान्य, गहिरो अनुसन्धान आवश्यक

रुकुम पहुंचे प्रचण्ड ने कहा – चुनाव असामान्य, गहन जांच आवश्यक है

समाचार सारांश

समीक्षात्मक रूप से तैयार।

  • नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने फाल्गुन २१ के चुनाव को असामान्य और अस्वाभाविक कहा है।
  • प्रचण्ड ने चुनाव परिणामों में मत घटने और बढ़ने वाले क्षेत्रों की रिपोर्टों का अध्ययन कर गहन जांच की आवश्यकता जतायी।
  • उन्होंने कम्युनिस्ट आंदोलन के पुनर्गठन की जरूरत बताई और कहा कि पार्टी की विस्तारित बैठक ने पहल शुरू कर दी है।

१७ वैशाख, रुकुम पश्चिम। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने फाल्गुन २१ को चुनाव को असामान्य और अस्वाभाविक बताया है।

अपना निर्वाचन क्षेत्र रुकुम पूर्व जाते हुए रुकुम पश्चिम में पहुंचकर मुसिकोट में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रचण्ड ने चुनाव और उसके परिणाम को असामान्य और अस्वाभाविक कहा।

‘परिणाम जैसा आया है, वह कई जगहों की रिपोर्ट सुनने पर सहज रूप से सामान्य नहीं लगता। कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों ने अपने डाले हुए वोट भी अपने नाम नहीं होने की बात कही, कुछ जगहों पर जो जीत की उम्मीद नहीं थी वहां भी इतने अधिक वोट कैसे आए, कुछ जगहों से तो हमारे वोटों के खो जाने के आरोप जैसी रिपोर्टें भी आईं। जब हमने इन सभी को समीक्षा किया तो यह चुनाव सामान्य नहीं माना जा सकता,’ उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि इसकी गहन अध्ययन और जांच आवश्यक है। हालांकि, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी को मिले लगभग दो तिहाई मतों को वे स्वीकार करते हैं।

प्रचण्ड ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार द्वारा किए गए अच्छे कामों का समर्थन करेगी और गलत कामों की आलोचना करते हुए रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी।

उन्होंने बताया कि अब नेकपा युवाओं को विशेष प्राथमिकता देगी। वॉर्ड से लेकर केंद्र तक चुनावी नेतृत्व चयन होगा और प्रत्येक कमिटी में ५० प्रतिशत युवा व नवयुवाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा।

संयोजक प्रचण्ड ने पूरा कम्युनिस्ट आंदोलन के पुनर्गठन की जरूरत बताई। ‘हमारी पार्टी अकेले बेहतर बनने से काम नहीं चलेगा, पूरे नेपाल के कम्युनिस्ट आंदोलन को पुनर्गठित करना जरूरी है। वर्तमान चुनाव में कम्युनिस्टों को जो झटका लगा है, उसे ध्यान में रखकर अखिल नेपाल कम्युनिस्ट आंदोलन के पुनर्गठन हेतु पार्टी की विस्तारित बैठक ने निर्णय लिया है और इस दिशा में पहल शुरू हो चुकी है।’

इस बीच उन्होंने सरकार के हाल के निर्णयों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सुकुमवासी लोगों को बल प्रयोग से हटाना, ट्रेड यूनियन को खत्म करना, छात्र संगठनों पर प्रहार, अध्यादेश लाना और संसद की बैठक स्थगित करना असंवैधानिक है।

प्रचण्ड ने कहा कि सरकार के हाल के कुछ कदम तानाशाही की दिशा में जा सकते हैं, इसलिए उन्होंने सरकार को सुधार की सलाह दी। उन्होंने खुद को इस सरकार का अभिभावक बताया और कहा कि वे गलत कार्यों पर हमेशा सतर्क रहेंगे।

अंत में उन्होंने कहा कि वे पुराने राजनीतिक दलों के बीच सहयोग बढ़ाकर संविधान और गणतंत्र की रक्षा के लिए नेतृत्व करेंगे और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।

मौसम में क्रमिक सुधार, शुक्रवार तक वर्षा की संभावना

१७ वैशाख, काठमाडौं। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने आज से मौसम में क्रमिक सुधार होने की जानकारी दी है। हालांकि, कोशी, मधेश, बागमती और गण्डकी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में आगामी शुक्रवार तक वर्षा होने की संभावना बनी हुई है। मौसमविदों ने बताया कि इस वर्षा का मौसमी प्रभाव वैशाख के पहले से कम व्यापक होगा। पश्चिमी वायु एवं स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण मंगलवार और बुधवार को देश के कई हिस्सों में बारिश हुई, जिसमें कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी दर्ज की गई। पिछले २४ घंटों में सबसे अधिक वर्षा प्युठान के हंसपुर में रिकॉर्ड की गई, जहाँ १०४.६ मिमी बारिश मापी गई। इसी प्रकार, कास्की के रिभान में ८१ मिमी वर्षा हुई। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के मौसम पूर्वानुमान महाशाखा ने बताया कि आज भी कुछ क्षेत्रों में वर्षा होने की संभावना है।
आज, वैशाख १७ गते, कोशी, मधेश प्रदेश के साथ-साथ हिमाली और पहाड़ी इलाकों के कुछ हिस्सों तथा तराई के कुछ सीमित क्षेत्रों में मेघगर्जन और आकाशीय बिजली के साथ मध्यम से हल्की बारिश या हिमपात होने की संभावना है। आज रात को भी कोशी, बागमती और गण्डकी प्रदेश के हिमाली तथा पहाड़ी इलाकों के कुछ हिस्सों और अन्य भूभागों के कुछ क्षेत्रों में मध्यम वर्षा या हिमपात हो सकता है, ऐसा महाशाखा ने बताया है। वैशाख १८ गते शुक्रवार दोपहर कोशी, मधेश, बागमती और गण्डकी प्रदेशों के साथ लुम्बिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रदेश के पहाड़ी और हिमाली क्षेत्रों में सामान्य रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। लुम्बिनी और सुदूरपश्चिम प्रदेश के तराई क्षेत्र में भी आंशिक बादल छाए रहेंगे। कोशी प्रदेश के साथ-साथ देश के हिमाली एवं पहाड़ी इलाकों के कुछ हिस्सों, मधेश प्रदेश के कुछ क्षेत्रों तथा बागमती, गण्डकी, लुम्बिनी और सुदूरपश्चिम प्रदेश के तराई क्षेत्र के एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन और आकाशीय बिजली के साथ मध्यम बारिश या हिमपात हो सकता है।

ट्रम्पका विशेष दूत गोर काठमाडौं आउँदै, बालेनसँग भेट होला ?

ट्रम्प के विशेष दूत सर्जियो गोर काठमांडू आ रहे हैं, बालेन से मिलने की संभावना क्या है?

१७ वैशाख, काठमांडू। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत सर्जियो गोर आज काठमांडू आएंगे। विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने जानकारी दी कि वे आज शाम काठमांडू पहुंचेंगे। बालेन शाह के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद नेपाल के इस दौरे पर आएगा गोर सबसे उच्च स्तरीय अमेरिकी कूटनीतिज्ञ हैं। ३९ वर्षीय गोर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत हैं। वे वर्तमान में भारत के लिए अमेरिकी राजदूत की भूमिका भी निभा रहे हैं। ट्रम्प के निकट सहयोगी माने जाने वाले उन्हें भारत के साथ राजदूत के साथ-साथ दक्षिण और मध्य एशिया का विशेष दूत भी नियुक्त किया गया है। इस आधार पर, गोर की हैसियत ७ वैशाख को काठमांडू आए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री समीर पल कपूर से भी अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

काठमांडू का यह पहला दौरा गोर का मुख्यतः व्यवसाय, निवेश और दोनों देशों के बीच सरकारी संबंधों के विस्तार जैसे विषयों पर केंद्रित होगा, विदेश मंत्रालय के सूत्र ने बताया। गोर का अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले और विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मिलने का कार्यक्रम तय है। नेपाल में उनके राजनीतिक मुलाकातों की भी संभावना है, लेकिन अभी यह निश्चित नहीं है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह से उनकी मुलाकात होगी या नहीं। प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार दीपा दाहाल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री देश के आंतरिक मामलों में व्यस्त हैं, विशेषकर सुशासन के विषय पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।’

बीते वर्षों में नेपाल दौरे पर आए अधिकांश विदेशी कूटनीतिज्ञ प्रधानमंत्री सहित शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से मिलते रहे हैं, लेकिन बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने इस संदर्भ में कुछ बदलाव किया है, सूत्रों ने बताया। पहले काठमांडू आए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री समीर पल कपूर ने रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने और विभिन्न वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात की, लेकिन वे प्रधानमंत्री बालेन शाह से नहीं मिल पाए। बालेन शाह ने मुलाकात के लिए समय न देने के कारण गोर भी कपूर जैसे रास्वपाके नेता और वरिष्ठ मंत्रियों से ही मिलने की संभावना है। हालांकि, गोर की अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले और विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मुलाकात पक्की है।