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लेखक: space4knews

सरकारी कर्मचारीयों को १५ दिनों के भीतर वेतन भुगतान प्रक्रिया शुरू

सरकार ने कर्मचारियों को १५ दिनों के भीतर वेतन भुगतान करने की प्रक्रिया को पायलट परियोजना के रूप में वैशाख १६ से लागू किया है। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने १५ दिनों के भीतर वेतन भुगतान योजना की शुरुआत करते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य अर्थव्यवस्था को सक्रिय करना है। महालेखा नियन्त्रक कार्यालय ने भी प्रदेश तथा अन्य सेवाओं के कर्मचारियों को क्रमिक रूप से १५ दिनों के भीतर वेतन देने की व्यवस्था आगे बढ़ाने की जानकारी दी है।

१६ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने शनिवार से कर्मचारियों को १५ दिनों में वेतन प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पायलट परियोजना को आज बुधवार से लागू किया गया है, ऐसी जानकारी अर्थ मंत्रालय ने दी है। बुधवार को अर्थ मंत्रालय में आयोजित समारोह में अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने १५ दिनों के भीतर वेतन भुगतान की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की। महालेखा नियन्त्रक कार्यालय के कर्मचारियों का वेतन प्रविष्टि कम्प्यूटरीकृत गवर्नमेंट अकाउंटिंग सिस्टम (सिगास) के माध्यम से कोष तथा लेखा नियन्त्रक कार्यालय को भुगतान आदेश भेजने की व्यवस्था की गई है, और अर्थमंत्री वाग्ले ने १५ दिनों में वेतन भुगतान प्रक्रिया शुरू की है।

अर्थ मंत्रालय के कर्मचारियों को वैशाख माह के प्रथम अर्धमासिक (१५ दिन) का वेतन भुगतान पहले ही किया जा चुका है। १५ दिनों में वेतन भुगतान की शुरुआत करते हुए अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा कि इससे अर्थव्यवस्था को तेजी से गति मिलेगी। “अगर १५ दिनों में वेतन दिया जाता है तो बाजार सक्रिय होगा, उपभोग और मांग दोनों बढ़ेंगे,” उन्होंने कहा, “यह पायलट परियोजना वर्तमान में संघीय निजामती कर्मचारियों पर लागू की गई है और धीरे-धीरे सभी सरकारी वेतनधारियों को यह सुविधा प्रदान की जाएगी।”

महालेखा नियन्त्रक शोभाकान्त पौडेल ने बताया कि अब क्रमशः प्रदेश और अन्य सरकारी सेवाओं के कर्मचारियों को भी १५ दिनों के भीतर वेतन मिलेगा। अपने कार्यालय की तकनीकी तैयारियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया क्रमशः आगे बढ़ाई जाएगी। उनके अनुसार वर्तमान प्रणाली से १५ दिन या एक महीने के अंदर कर्मचारी जब चाहे वेतन लेने का विकल्प उपलब्ध है। अर्धमासिक वेतन भुगतान से बाजार में नियमित मांग उत्पन्न होगी और अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने में मदद मिलेगी। यह उपभोग खर्च के संतुलित वितरण तथा छोटे व्यवसायों में नकदी प्रवाह बढ़ाने में भी सहायता करेगा। १५ दिनों में वेतन भुगतान का सेवा क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और डिजिटल अर्थव्यवस्था में वृद्धि की उम्मीद है। गत वैशाख ४ को अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने सरकारी कर्मचारियों को हर १५ दिन में वेतन उपलब्ध कराने की पायलट परियोजना आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था।

धनुषा के कमला बाजार सुकुमवासी बस्ती में जमीन खाली कराने की सूचना से दहशत

समाचार सारांश

  • धनुषा के गणेशमान चारनाथ नगरपालिका–७ में स्थित कमला बाजार की सुकुमवासी बस्ती में अतिक्रमण हटाने के लिए कमला सिंचाई प्रबंधन कार्यालय ने सूचना जारी की है।
  • सूचना से लगभग 45 परिवार के सुकुमवासी चिंतित हैं और उन्होंने बस्ती खाली कराने से पूर्व उचित व्यवस्था की मांग सरकार से की है।
  • कमला सिंचाई प्रबंधन कार्यालय के प्रमुख रणधीरकुमार साह ने बताया कि अतिक्रमित जमीन की पहचान करने और संरक्षण के लिए संघीय सरकार के निर्देशानुसार यह सूचना जारी की गई है।

16 वैशाख, जनकपुरधाम । धनुषा के गणेशमान चारनाथ नगरपालिका–7 कमला बाजार स्थित सुकुमवासी बस्ती की 67 वर्षीय पुनमदेवी पजियार मंगलवार को बेहद चिंतित दिखीं। उन्हें अपने निवास स्थान से विस्थापित किए जाने का डर है, जो उनके मन को असमंजस में डाल रहा है।

बस्ती के बीच में स्थित मंदिर के पिलर पर 3 वैशाख को लगी सूचना ने उन्हें तनावग्रस्त कर दिया है। बस्ती के पूर्वी हिस्से में स्थित कमला सिंचाई प्रबंधन कार्यालय द्वारा जारी इस सूचना में अतिक्रमित जमीन खाली करवाने का निर्देश दिया गया है।

सूचना में कहा गया है, ‘नहर प्रणाली का ‘राइट ऑफ वे’ और कैंपों की नाप-नक्शे के अनुसार जमीन पर अतिक्रमण न करें और पिछले किए गए अतिक्रमण को 15 दिनों के भीतर हटाने का अनुरोध किया जाता है। यदि समय सीमा के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’

इस सूचना को देखकर पुनमदेवी की चिंता और बढ़ गई है। उन्हें खाने-पीने का मन भी नहीं है। लगभग एक दशक पहले जनकपुर में हुए विस्थापन का दर्द दोहराने का भय उन्हें सताता है।

‘सूचना लगने के बाद से मैं अच्छी नींद नहीं ले पा रही हूँ। रात को आएंगे और घर गिरा देंगे या दिन में? पता नहीं,’ उन्होंने कहा।

करीब दस साल पहले उनका घर जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका–1 सीताचोक के पास रेलवे स्टेशन के करीब था। रेलवे विस्तार के कारण उनका घर ध्वस्त कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने सुरक्षित स्थान की तलाश में परिवार सहित कमला बाजार की सुकुमवासी बस्ती में आकर बस गई हैं। उनकी अभी सात सदस्यों की परिवार है। पुनः घर ध्वस्त होने और परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा, इसका डर उनके मन में व्याप्त है।

इसी तरह चिन्तित हैं बस्ती के प्रमोद साह। वह पांच लोगों के परिवार को पालते हैं और पिछले 9 वर्षों से इस बस्ती में सूखी फूस का घर बनाकर रहते हैं। कुछ पहले तक वे 18 साल वीरगंज में मज़दूरी किया करते थे। बेटी लक्ष्मी की शादी इसी क्षेत्र में होने के बाद उन्होंने जानकारी पाकर यहां आकर बसना शुरू किया।

प्रमोद का मूल घर महोत्तरी के पीपरा गाउँपालिका–7 रतौली में है। वे रोजगार के लिए दो बार विदेश (मलेशिया और कतर) गए, लेकिन भाग्य साथ नहीं दिया। कतर में नौकरी करने वाली कंपनी बंद हो गई, जिसके बाद तीन महीने में उन्हें वापस आना पड़ा। मलेशिया में काम करते हुए चोट लगने के कारण भी उन्हें लौटना पड़ा।

विदेशी रोजगार के कर्ज चुकाने हेतु उन्हें अपनी पांच कठ्ठा जमीन और घड़ेरी बेचनी पड़ी।

‘दो बार विदेश गया, लेकिन भाग्य साथ नहीं दिया। इसलिए घर और घड़ेरी बेचनी पड़ी। 18 साल वीरगंज में रहा। यहां रहने की अनुमति मिली है इसलिए आया हूँ,’ उन्होंने कहा। ‘अब कमला सिंचाई ने बस्ती खाली कराने का आदेश जारी किया है। हम कहां जाएंगे? कैसे जीविका चलाएंगे?’

घर गिराने से पहले उचित प्रबंध करने की मांग उन्होंने सरकार से की है।

इसी बस्ती के देवु रावल भी चिंतित हैं। वे कहते हैं कि उन्हें काठमांडू की सुकुमवासी बस्तियों में डोजर से घर गिराने के दृश्य याद आ रहे हैं। ‘वहां डोजर ने घर गिराया था, हमें भी ऐसे ही डर लग रहा है कि हमारे घर भी गिरा दिए जाएंगे या नहीं,’ देवु ने कहा।

वे बताते हैं कि बस्ती सर्लाही के सागरनाथ वन विकास परियोजना के पास से 11 साल पहले आई थी। ‘यहां जमीन खाली है और रहने दिया जाता है, यह सुनकर हम पूरे परिवार के साथ आए थे। अब खाली कराने की बात सामने आई है। व्यवस्थित तरीके से तो तोड़ना चाहिए, अन्यथा हमारा क्या होगा?’ रावल ने कहा। वे सात सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

सूचना से 65 वर्षीय रामनाथ साह भी परेशान हैं। ‘कुछ दिन पहले सूचना लगी थी। अब हमारा क्या होगा? हम कहां जाएंगे?’ वे चिंतित हैं।

उन्होंने बताया कि वे 11 साल पहले इस बस्ती में आए थे। सिरहा के मिर्चैया के भगवतपुर में उनका 1 कठ्ठा जमीन था। सड़क विस्तार के बाद जमीन का कुछ हिस्सा बचा था, जिसे ऋण लेकर बेच दिया। फिर वे सुकुमवासी हुए। यहां आकर रहने लगे।

पुनमदेवी पजियार, प्रमोद साह, देवु रावल और रामनाथ साह के अलावा इस बस्ती के अन्य सुकुमवासी भी यहां विभिन्न कारणों से आ बसे हैं। इस बस्ती में करीब 45 परिवार रहते हैं। जमीन खाली कराने की सूचना से बस्ती में डर और तनाव व्याप्त है। कई लोग रात भर नींद भी नहीं ले पाते।

यह बस्ती पूर्व-पश्चिम राजमार्ग से जुड़ी हुई है और कमला नदी के किनारे पर स्थित है। कमला सिंचाई प्रबंधन कार्यालय की लगभग दो बिघा जमीन पर बसे इस बस्ती में एक दर्जन से अधिक जाति-समाज के लोग रहते हैं।

कुछ लोग डरते हैं कि कब उनका घर डोजर से गिराया जाएगा। काठमांडू की सुकुमवासी बस्तियों के वीडियो और खबरें मोबाइल पर देख-देखकर उनका डर बढ़ा है। उजाड़े के बाद कहां जाएं और कहां रहेंगे, यह चिंता स्थानीय वरिष्ठ रामनाथ साह ने बताई।

‘हम असली सुकुमवासी हैं, विभिन्न जगहों से आए हैं। यहां झोपड़ी के अलावा कुछ नहीं है। उचित व्यवस्था नहीं होने से उजाड़े के बाद कहां जाएंगे यह सभी के मन में चिंता है,’ उन्होंने कहा।

प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा घोषित 100 बिंदुओं वाली शासन सुधार योजना में अतिक्रमित सार्वजनिक जमीनों को खाली कर व्यवस्थित करने और सुकुमवासियों की पहचान कर प्रबंधन करने की बात शामिल है।

बस्ती की जुमनी खातून ने पहले उचित प्रबंधन की गुहार लगाई। ‘हम सुकुमवासी यहां से हटेंगे तो कहां जाएंगे? पहले कुछ जमीन का प्रबंधन कर दो उसके बाद ही घर गिराना,’ उन्होंने याचना की।

किसुन बस्ती के किसुन पासवन भी पहले सुकुमवासियों के लिए प्रबंधन करने पर जोर देते हैं। ‘अगर पहले घर तोड़ा गया तो हमारे बच्चे कहां रहेंगे? इसलिए पहले घर बनाइए और फिर तोड़िए,’ उनका कहना है।

कमला सिंचाई प्रबंधन कार्यालय के प्रमुख रणधीरकुमार साह ने स्वीकार किया कि उन्होंने बस्ती खाली कराने का सूचना जारी किया है। ‘यह सूचना हमारे कार्यालय द्वारा लगाई गई है। यह जमीन कार्यालय के अधीन आती है और अतिक्रमित जमीन की पहचान कर उसे व्यवस्थित करने के काम में हम लगे हुए हैं। संघीय सरकार के निर्देश के बाद जमीन संरक्षण के लिए यह कदम उठाया गया है,’ उन्होंने कहा।

दीपेन्द्रसिंह ऐरी टी-20 आई अलराउंडर रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंचे

नेपाली राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के कप्तान दीपेन्द्रसिंह ऐरी आईसीसी टी-20 आई अलराउंडर रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुँच गए हैं। आईसीसी ने मंगलवार तक के अपडेट के आधार पर बुधवार को जारी की गई नई रैंकिंग के अनुसार दीपेन्द्र का रेटिंग अंक 245 है। उन्होंने नेपाल और यूएई के बीच घरेलू टी-20 आई श्रृंखला में बल्लेबाजी की थी।

दीपेन्द्र हाल ही में नेपाल के टी-20 आई कप्तान चुने गए हैं। पिछले सप्ताह सोमवार और मंगलवार को यूएई के खिलाफ हुई टी-20 आई श्रृंखला के दोनों मैचों में उन्होंने बल्लेबाजी की। पहले मैच में उन्होंने 32 और दूसरे मैच में 23 रन बनाए और नाबाद रहे। पहले मैच में उन्होंने गेंदबाजी नहीं की, जबकि दूसरे मैच में 3 ओवर में 16 रन देकर कोई विकेट नहीं लिया।

आईसीसी टी-20 आई अलराउंडर रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर जिम्बाब्वे के सिकंदर राजा हैं, जिनका रेटिंग अंक 328 है। भारत के हार्दिक पांड्या दूसरे स्थान पर हैं, जिनका रेटिंग अंक 299 है। तीसरे स्थान पर पाकिस्तान के सायम अयूब मौजूद हैं।

यलम्बरको सालिक अनावरण कार्यक्रममा प्रशासनले लगायो रोक

यलम्बर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम पर प्रशासन ने लगाई रोक

समाचार सारांश

  • जिला प्रशासन कार्यालय खोटाङ ने सुरक्षा चिंताओं के कारण यलम्बर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम पर रोक लगाई है।
  • दिक्तेल रुपाकोट मझुवागढी नगरपालिका ने १७ वैशाख को और वाडा कार्यालय ने १८ वैशाख को अलग-अलग तिथियों और मुख्य अतिथियों के साथ प्रतिमा उद्घाटन की योजना बनाई थी।
  • प्रशासन ने दोनों कार्यक्रमों को स्थगित करते हुए हिंसा होने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की बात प्रमुख जिल्ला अधिकारी रेखा कंडेल ने बताई।

१६ वैशाख, खोटाङ। जिला प्रशासन कार्यालय खोटाङ ने सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए यलम्बर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम पर रोक लगा दी है।

दिक्तेल रुपाकोट मझुवागढी नगरपालिका-१४ बुइपा के पंचरदोबाटो में बनाए गए ११० फुट ऊंचे यलम्बर की प्रतिमा को अलग-अलग तिथियों और समय पर उद्घाटन की तैयारी करने के कारण प्रशासन ने इसे रोक दिया है।

विवाद के बीच दिक्तेल रुपाकोट मझुवागढी नगरपालिका ने १७ वैशाख को और वाडा कार्यालय बुइपा ने उभौली साकेला के दिन १८ वैशाख को यलम्बर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम तय किया था, जिसके बाद प्रशासन ने दोनों ही कार्यक्रम स्थगित कर दिए।

जिला समन्वय समिति के उपप्रमुख सुरेश तामांग की अध्यक्षता में आज हुई सर्वपक्षीय बैठक के निर्णय के अनुसार प्रशासन ने विवादित कार्यक्रम में हस्तक्षेप किया है।

प्रमुख जिल्ला अधिकारी रेखा कंडेल ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच दंगा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम पर रोक लगाई गई है। प्रशासन द्वारा जारी सूचना में शांति-सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और एकता को ध्यान में रखते हुए दोनों कार्यक्रम स्थगित करने के निर्देश दिये गए हैं।

वाडाध्यक्ष दिनेश राई प्रतिनिधि सभा सदस्य हर्क साम्पाङ को मुख्य अतिथि बनाकर यलम्बर की प्रतिमा उद्घाटन करने की तैयारी में हैं। नगरपालिका ने कोशी प्रदेश के पर्यटन, वन तथा वातावरण मंत्री भीम पराजुली और किरात राई यायोक्खा के केंद्रीय अध्यक्ष जीवन हाताचो की मौजूदगी में उद्घाटन करने का ऐलान किया था।

राजनीतिकरण के कारण एक ही प्रतिमा उद्घाटन के लिए अलग-अलग तिथियां और प्रमुख अतिथियों के नाम रखने के चलते कार्यक्रम विवादित हो गया है। दर्जनों कब्रों के ऊपर स्थापित इस प्रतिमा उद्घाटन को नगर और वाडा कार्यालय के बीच ‘जंग’ बना देने के कारण आपसी द्वंद्व पैदा हो गया है। वाडाध्यक्ष राई ने तो १८ वैशाख के कार्यक्रम को न स्थगित किए जाने का ‘स्टेटस’ भी जारी किया है।

कोशी प्रदेश के ७० प्रतिशत और दिक्तेल रुपाकोट मझुवागढी नगरपालिका के ३० प्रतिशत हिस्सेदारी में करीब ११ करोड़ ५८ लाख की लागत से बुइपा में यलम्बर की प्रतिमा समेत पार्क निर्मित हुआ है। ३० रोपनी से अधिक सरकारी जमीन पर स्थापित यह प्रतिमा यलम्बर की सबसे ऊंची और बड़ी बताई जाती है। लेकिन उद्घाटन में विवाद के कारण निर्माण पूरा हुए एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यलम्बर पार्क का उद्घाटन नहीं हो पाया है।

कोशी प्रदेश के मुख्यमंत्री हिकमत कार्की की प्रमुख आतिथ्य में २०८२ जेठ १८ गते यलम्बर पार्क का उद्घाटन करने की तैयारी थी, लेकिन प्रदेश के नामकरण को लेकर असंतुष्ट पहचान समूह के विरोध के कारण कार्यक्रम को रोक दिया गया था।

उमा तुवाचुङ अन्सुवी ज्वाइंट वेंचर ने यलम्बर पार्क का निर्माण किया है। इस कंपनी ने २०७८ असार २८ गते ठेका समझौता किया था। आर्थिक वर्ष २०७५/७६ में नगरपालिका ने आवंटित ७२ लाख रुपये से बुइपा में पार्क के प्राथमिक चरण के कार्य शुरू किए थे। यलम्बर की प्रतिमा तथा यलम्बर पार्क का २०७८ कार्तिक ३ गते तत्कालीन मेयर दीप नारायण रिजाल और उपमेयर बिनादेवी राई ने भूमिपूजन किया था।

विकल पौडेल दंपत्ति के खिलाफ 69 करोड़ से अधिक की संपत्ति शोधन के मामले में मुकदमा दर्ज

राजस्व अनुसन्धान विभाग ने सुरक्षा मुद्रण केन्द्र के तत्कालीन निर्देशक विकल पौडेल दंपत्ति के खिलाफ 68 करोड़ 94 लाख 65 हजार रुपये के बराबर की संपत्ति शोधन का मामला दर्ज किया है। विभाग ने संपत्ति शोधन निवारण अधिनियम 2064 की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड ‘क’, ‘ख’ एवं ‘ग’ में वर्णित अपराधों के तहत यह मुकदमा दर्ज किया है, जानकारी निदेशक सचितकुमार वाइवाले दी।

पौडेल और उनकी पत्नी ने विदेशी मुद्रा के अवैध लेनदेन के संबंध में 62 करोड़ 65 लाख 91 हजार 893 रुपए के बराबर की संपत्ति के खिलाफ 14 असोज 2081 को मामला दर्ज किया गया था। 16 वैशाख, काठमांडू। राजस्व अनुसन्धान विभाग ने सुरक्षा मुद्रण केन्द्र के तत्कालीन कार्यकारी निर्देशक विकल पौडेल दंपत्ति के विरुद्ध 68 करोड़ 94 लाख 65 हजार रुपये के बराबर का संपत्ति शोधन संबंधी मुकदमा दायर किया है।

विभाग ने बुधवार को काठमांडू जिला अदालत बबरमहल में अभियोगपत्र दायर किया, यह जानकारी निदेशक सचितकुमार वाइवाले ने दी। पौडेल के विरुद्ध 61 करोड़ 13 लाख 21 हजार 153 और उनकी पत्नी एलिना बस्नेत के विरुद्ध 7 करोड़ 81 लाख 44 हजार 51 रुपये के बराबर संपत्ति का दावा करते हुए मुकदमा दायर किया गया। विभाग ने संपत्ति शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) निवारण अधिनियम 2064 की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ में उल्लिखित अपराधों के तहत यह मामला दर्ज किया है।

विभाग के अनुसार, दोनों ने विदेशी मुद्रा के अवैध कारोबार के संबंध में 62 करोड़ 65 लाख 91 हजार 893 रुपये के बराबर संपत्ति के खिलाफ 14 असोज 2081 को काठमांडू जिला अदालत में मामला दर्ज किया गया था। संबंधित अपराध से अर्जित परिसंपत्ति के संबंध में जांच में यह भी पाया गया कि उन्होंने संपत्ति शोधन संबंधी अपराध भी किया है, जैसा कि विभाग ने अपनी सूचना में उल्लेख किया है।

काठमाडौं के-कौन से बस्तियों में डोजर चलाया जाएगा?

समाचार सारांश

समीक्षित तथ्यांक सहित।

  • सरकार ने काठमांडू की २४ बस्तियों में डोजर चलाने का निर्णय लिया है।
  • डोजर चलाने वाले स्थानों में खाडीपाखा, नारायणटोल, रानीबारी, बालुवाटार, धुम्बाराही सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।
  • जिला प्रशासन कार्यालय ने वैशाख १७ की शाम तक बस्ती खाली करने का निर्देश दिया है और वैशाख १८ की सुबह ७ बजे से बस्ती हटाना शुरू किया जाएगा।

१६ वैशाख, काठमांडू । सरकार ने काठमांडू की २४ बस्तियों में डोजर चलाने का निर्णय लिया है। काठमांडू महानगरपालिका के वडा नंबर ३ के अंतर्गत खाडीपाखा, नारायणटोल और रानीबारी तथा वडा नंबर ४ के बालुवाटार और धुम्बाराही बस्तियां हटाई जा रही हैं।

साथ ही, काठमांडू महानगरपालिका के वडा नंबर १० के देवीनगर, शान्तिविनायक और शंखमुल, वडा नंबर ११ के वंशीघाट, वडा नंबर १४ के जागरणमार्ग और बल्खु, वडा नंबर १५ के स्वयम्भु, वडा नंबर १६ के बुद्धज्योति और जागृति मार्ग, वडा नंबर २६ के संगम टोल, वडा नंबर २९ के अनामनगर और वडा नंबर ३२ के जड़ीबूटी मिलनचोक में भी डोजर चलाने का निर्णय जिला प्रशासन कार्यालय काठमांडू के एक अधिकारी ने दिया है।

उसी अधिकारी के अनुसार, कागेश्वरी मनोहरास्थित गोठाटार बुद्धचोक और मनोहरा टोल, बुढानीलकण्ठ के पाथिभरा और कपन की बस्तियों को भी हटाया जाना है। डोजर चलाने वाले कुछ स्थानों पर कल से सूचनाएं और माइकिंग भी शुरू कर दी गई है।

काठमांडू के नदी किनारों पर बनाए गए सभी अनाधिकृत बस्तियों को जिला प्रशासन कार्यालय ने वैशाख १७ की शाम तक खाली करने का आदेश दिया है। इसके बाद, वैशाख १८ की सुबह ७ बजे से वे बस्तियां हटाना शुरू कर दी जाएँगी, प्रशासनिक सूचना में कहा गया है।

सरकार ने पहले ही थापाथली, गैरीगाउँ (शान्तिनगर) और मनोहरा की बस्तियों में डोजर चला दिया है।

नेपालले ओमानसँग घरेलु मैदानमा लज्जास्पद हार भोग्यो

नेपालले आईसीसी विश्वकप क्रिकेट लिग–२ अन्तर्गत ओमानसँग १०२ रनले पराजित भएको छ। ओमानले ५० ओभरमा ८ विकेट गुमाएर ३०५ रन बनाएको थियो, जसमा जतिन्दर सिंहले १३० रन बनाए। नेपालका उपकप्तान दीपेन्द्रसिंह ऐरीले ६० रन बनाए पनि यो जितका लागि पर्याप्त हुन सकेन। १६ वैशाख, काठमाडौं।

आईसीसी विश्वकप क्रिकेट लिग–२ अन्तर्गतको खेलमा नेपाल ओमानसँग लज्जास्पद हार बेहोरेको छ। ओमानले दिएको ३०६ रनको लक्ष्य पछ्याएको नेपाल ३६ ओभर ५ बलमा ७ विकेट गुमाएर १५५ रन बनाउँदा वर्षा भएपछि खेल रोकिएको थियो। वर्षा नरोकिएपछि डीएल पद्धति अनुसार नेपाल १०२ रनले पराजित भयो। नेपालका लागि उपकप्तान दीपेन्द्रसिंह ऐरीले ६० रन जोडे, उनले ६२ बलमा ७ चौका र एक छक्का प्रहार गरे।

ओपनर कुशल भुर्तेल एक रनमा आउट भए, आसिफ शेखले १९, भीम सार्कीले २८, कप्तान रोहित पौडेल १०, बसिर अहमद १ र आरिफ शेख १४ रनमा आउट भए। गुल्सन झा १४ र सोमपाल कामी २ रनमा अविजित रहे। बलिङमा ओमानका नदीम खानले सर्वाधिक ३ विकेट लिए। शकील अहमदले २ र वासिम अली र इम्रान मोहम्मदले एक-एक विकेट लिए।

त्रिवि क्रिकेट मैदानमा टस जितेर ब्याटिङ रोजेको ओमानले निर्धारित ५० ओभरमा ८ विकेट गुमाएर ३०५ रन बनाएको थियो। ओमानका कप्तान जतिन्दर सिंहले शतक प्रहार गरे। उनले ९६ बलमा १३० रन बनाए, जसमा १५ चौका र ५ छक्का समावेश छन्। आशिष ओडेराले २३, नदीम खान १, हम्माद मिर्जा ३०, विनायक शुक्ला २३, जितेन रामानन्दी ४३, शकील अहमद ० र आर्यन विश्ट ३५ रनमा आउट भए। सिद्धार्थ बुकापटनम १ र वासिम अली १२ रनमा अविजित रहे। बलिङमा नेपालका लागि सोमपाल कामीले ४, सन्दीप लामिछाने र दीपेन्द्रसिंह ऐरीले समान रूपमा दुई विकेट लिए। सिरिजअन्तर्गत नेपालले आफ्नो तेस्रो खेल शुक्रबार युएईसँग खेल्नेछ।

दबाबमा राष्ट्रपति – Online Khabar

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल पर दबाव, सरकार द्वारा अध्यादेश सिफारिश से उत्पन्न स्थिति

सरकार द्वारा संसद की अवहेलना करते हुए ५ अध्यादेशों की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल संवैधानिक परिषद संबंधी अध्यादेश को लेकर दबाव में आ गए हैं। राष्ट्रपति पौडेल ने पहले संवैधानिक परिषद विधेयक को वापस भेजा था, जिसमें बहुमत निर्णय के प्रावधान संवैधानिक मान्यता के विरुद्ध थे। संवैधानिक परिषद संबंधी अध्यादेश में ३ सदस्यों द्वारा निर्णय लेने की व्यवस्था की गई है, जिसे राष्ट्रपति संवैधानिक एवं कानूनी परामर्श के बाद अनुमोदित या रोका जा सकेगा। १६ वैशाख, काठमाडौं।

सरकार द्वारा संसद को नजरअंदाज करते हुए एक साथ ५ अध्यादेशों की सिफारिश करने के बाद राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल पर दबाव बढ़ा है। एक ओर विपक्षी दल संसद की अवहेलना कर अध्यादेश लाए जाने पर राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, संसद ने पहले ही संवैधानिक परिषद संबंधी विधेयक पारित कर राष्ट्रपति को भेजा था, जिसे राष्ट्रपति पौडेल ने वापस कर दिया था, और अब उसी विधेयक को अध्यादेश के रूप में जारी करने की बाध्यता का सामना करना पड़ रहा है।

सिफारिश किए गए अध्यादेशों का अध्ययन राष्ट्रपति कर रहे हैं। अध्यादेश के विषय में राष्ट्रपति कार्यालय और सरकार ने आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी है। लेकिन सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति सबसे अधिक संवैधानिक परिषद संबंधी अध्यादेश को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के एक स्रोत ने कहा, “जिस विषय पर राष्ट्रपति ने पहले सवाल उठाकर विधेयक वापस किया था, सरकार ने वही विषय अध्यादेश लेकर आकर राष्ट्रपति को नैतिक संकट में डाल दिया है।”

अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्ले ने आर्थिक स्थितिपत्र में समस्याओं की सही पहचान में कमी दिखाई

अर्थमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले ने १४ वैशाख को नेपाल का आर्थिक स्थितिपत्र प्रकाशित करते हुए अर्थव्यवस्था के विभिन्न आंकड़ों को ७५ बिंदुओं में प्रस्तुत किया है। पूर्व प्रधानमंत्री डा. बाबुराम भट्टराई ने इस स्थितिपत्र की सकारात्मक समीक्षा की है, लेकिन उन्होंने समस्याओं की सही पहचान और भविष्य के मार्गदर्शन में कमजोरी होने की बात कही है। विभिन्न विशेषज्ञों ने भी कहा है कि इस स्थितिपत्र में आंकड़े स्पष्ट हैं, फिर भी आर्थिक आत्मविश्वास की कमी और कार्यान्वयन योजनाओं के अभाव को समाहित नहीं किया गया है।

अर्थ मंत्रालय प्रतिवर्ष बजट से पहले जारी किए जाने वाले ‘आर्थिक सर्वेक्षण’ के कार्यकारी सारांश में नेपाली अर्थव्यवस्था की विशेषताओं को दर्शाने वाले आंकड़े समान रूप से देखे जा सकते हैं। अर्थमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा १४ वैशाख, सोमवार को जारी किए गए आर्थिक स्थितिपत्र में भी इन्हीं आंकड़ों को ७५ बिंदुओं में समेकित किया गया है। इनमें से ७३ बिंदुओं में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं और उनकी तुलना आर्थिक वर्ष २०७२/७३ की स्थिति से की गई है।

पूर्व प्रधानमंत्री डा. बाबुराम भट्टराई ने अर्थमंत्री वाग्ले द्वारा जारी आर्थिक स्थितिपत्र को अपेक्षाकृत सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा, ‘नेपाल की अर्थव्यवस्था का समग्र आकार, विकास की गति, वितरण की स्थिति, और पर्यावरणीय संतुलन जैसे प्रमुख सूचकांक दशकों से विश्व के अन्य देशों की तुलना में लगभग सबसे नीचे होने का कड़वा सत्य इस स्थितिपत्र ने स्वीकार किया है।’ लेकिन उन्होंने आर्थिक समस्याओं की सही पहचान और भविष्य के दिशा-निर्देशन में कमी की भी ओर इशारा किया है।

आर्थिक आत्मविश्वास की कमी पर मौन रहने वाले अर्थमंत्री डा. वाग्ले ने प्रस्तुत किए गए स्थितिपत्र में अर्थव्यवस्था के सकारात्मक और नकारात्मक आंकड़ों को संतुलित ढंग से रखा है। हालांकि, वर्तमान में अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती ‘आत्मविश्वास’ की कमी को बहुत सीमित रूप में उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से कोविड महामारी के बाद नेपाल की अर्थव्यवस्था पुनरुत्थान के मार्ग पर पिछली बार से अधिक उन्नति नहीं कर पाई है। आंतरिक मांग और निवेश दोनों कमजोर हैं और निजी क्षेत्र ऋणग्रस्त हो चुका है।

निजामती कर्मचारी विवरण अब ऑनलाइन उपलब्ध

निजामती कर्मचारी अब अपने विवरण ऑनलाइन देख और अपडेट कर सकेंगे। राष्ट्रिय किताब खाना ने बुधवार से अपनी सभी सेवाएं ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से शुरू कर दी हैं। संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने इसका अनुगमन करते हुए तकनीकी रूप से सक्षम और अधिक प्रभावकारी सेवा प्रदान करने का निर्देश दिया है।

१६ वैशाख, काठमांडू – निजामती कर्मचारी अब अपने विवरण ऑनलाइन देखने और अपडेट करने में सक्षम हो गए हैं। बुधवार से संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय किताब खाना (निजामती) ने अपनी सभी सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संचालित करना शुरू कर दिया है। इस प्रणाली के पूर्ण कार्यान्वयन के साथ ही सेवा प्राप्त करने वाले कर्मचारी और संबंधित व्यक्ति विभाग में शारीरिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता से मुक्त होंगे, राष्ट्रीय किताब खाने ने बताया।

सभी सेवाएं जैसे सिट रोल पंजीकरण, व्यक्तिगत विवरण अपडेट आदि ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे ही आसानी से उपलब्ध होंगी। आज से पूरी तरह डिजिटल सेवा प्रारंभ हुई इस संस्था का संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री रावल ने तकनीकी रूप से सक्षम, तेज और बिना शिकायत वाली सेवा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

हेल्प नेपाल ने लगातार पांचवीं जीत दर्ज की

समाचार सारांश: रेडबुल दसवां पीएम कप एनभीए पुरुष भलिबॉल लीग में हेल्प नेपाल स्पोर्ट्स क्लब ने लगातार पांचवीं जीत हासिल की है। महिला भलिबॉल लीग के फाइनल में न्यू डायमंड यूथ स्पोर्ट्स क्लब और नेपाल पुलिस क्लब के बीच मुकाबला होगा। पुरुष और महिला दोनों वर्गों में शीर्ष दो टीमें फाइनल खेलेंगी और विजेता दोनों को समान रूप से 10 लाख रूपये पुरस्कार दिया जाएगा।

१६ वैशाख, काठमाडौं। रेडबुल दसवां पीएम कप एनभीए महिला तथा पुरुष भलिबॉल लीग २०८३ के अंतर्गत पुरुष वर्ग में हेल्प नेपाल स्पोर्ट्स क्लब ने लगातार पाँचवीं जीत दर्ज की है। त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला में हुए मैच में हेल्प नेपाल ने रुकुम पश्चिम भलिबॉल क्लब को सीधे सेटों में पराजित किया। हालांकि विदेशी खिलाड़ी भी शामिल होने के कारण फाइनल में पहुंचने के दावेदार दोनों टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र बनी हुई है।

घरेलू भलिबॉल में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए हेल्प नेपाल ने अपने अनुभव का पूर्ण सदुपयोग किया जबकि रुकुम पश्चिम में अनुभव की कमी देखी गई। तीन सेट में हेल्प नेपाल ने लगातार जीत हासिल की, प्रत्येक सेट बेहद प्रतिस्पर्धात्मक रहा। हेल्प नेपाल ने रुकुम पश्चिम को २५-२३, २५-२२, २५-२३ अंकों से हराया। शुरुआती चार मैच जीत चुकी रुकुम पश्चिम की अपराजित यात्रा यहां समाप्त हो गई। लगातार पाँच मैच जीतने वाली हेल्प नेपाल ने १५ अंक जोड़े। दूसरी अपराजित टीम नेपाल पुलिस क्लब ने भी लगातार पाँच मैच जीतकर १५ अंक बटोरे। पहली हार झेलने वाली रुकुम पश्चिम पांच मैचों से १२ अंक लेकर तीसरे स्थान पर है।

पुरुष वर्ग के अन्य मैचों में विभागीय टीम त्रिभुवन आर्मी क्लब और नेपाल एपीएफ क्लब ने भी जीत दर्ज की। आर्मी ने कोशी प्रदेश को २५-१५, २५-१८, २५-१७ अंकों से हराया। यह आर्मी की पांच में चौथी जीत है। आर्मी के ११ अंक हैं और वे चौथे स्थान पर हैं। एपीएफ ने बुढानिलकण्ठ भलिबॉल क्लब को २५-२३, २५-२२, २५-२१ से हराया। यह एपीएफ की पहली जीत है। लगातार चार मैच हारने के बाद एपीएफ ने इस जीत के साथ ३ अंक हासिल किए।

महिला वर्ग में नेपाल पुलिस क्लब ने बुधवार को नेपाल एपीएफ क्लब को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। अब फाइनल में न्यू डायमंड यूथ स्पोर्ट्स क्लब और नेपाल पुलिस क्लब आमने-सामने होंगे। दोनों टीमें महिला वर्ग के लिग चरण का अंतिम मैच भी गुरुवार को खेलेंगी। यह मैच दोनों के लिए फाइनल से पूर्व अभ्यास समान होगा। न्यू डायमंड और पुलिस के बीच यह मैच गुरुवार शाम ५ बजे शुरू होगा।

चेतावनी देते हुए कहा गया है कि गुरुवार को पुरुष वर्ग में चार मैच होने हैं। कोशी प्रदेश और बुढानिलकण्ठ भलिबॉल क्लब के बीच मैच सुबह ९ बजे होगा। एपीएफ और खिल्जी युवा क्लब के बीच मैच सुबह ११ बजे शुरू होगा। फाइनल में पहुंचने के लिए दो महत्वपूर्ण मैच दोपहर में होंगे: त्रिभुवन आर्मी क्लब और रुकुम पश्चिम भलिबॉल क्लब का मैच दोपहर १ बजे तथा हेल्प नेपाल और नेपाल पुलिस क्लब का मैच दोपहर ३ बजे होगा।

नेपाल भलिबॉल संघ के आयोजन में हो रहे इस लिग में पुरुष वर्ग में ८ और महिला वर्ग में ६ टीमें भाग ले रही हैं। ९ दिनों तक चलने वाले इस लिग में पुरुष और महिला दोनों वर्ग मिलाकर कुल ४५ मैच खेले जाएंगे। सिंगल राउंड रॉबिन लिग के बाद महिला और पुरुष दोनों में शीर्ष दो टीम फाइनल मुकाबला खेलेगी। विजेता टीमों को पुरुष और महिला दोनों में समान रूप से १० लाख पुरस्कार दिया जाएगा।

एनसेलले जित्यो कर्पोरेट टी-१० लिग – Online Khabar

एनसेल ने कर्पोरेट टी-१० लीग का खिताब जीता

टेक्सपायर कर्पोरेट टी-१० लीग क्रिकेट का खिताब एनसेल ने सुबिसु को डीएल पद्धति के अनुसार ३८ रन से हराकर अपने नाम किया है। एनसेल ने निर्धारित १० ओवरों में २ विकेट खोकर १३१ रन बनाए। अनिल भंडारी ने ३३ गेंदों में ७४ रन की शानदार पारी खेली। एनसेल के अनिल भंडारी को प्लेयर ऑफ द मैच और सुरज तिमिल्सिना को उत्कृष्ट खिलाड़ी का पुरस्कार दिया गया। १६ वैशाख, काठमाडौं।

काठमाडौं के तल्लो मुलपानी मैदान में बुधवार को सम्पन्न फाइनल मैच में एनसेल ने सुबिसु को ३८ रन से हराते हुए खिताब पर कब्ज़ा किया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए एनसेल ने १३१ रन का मजबूत स्कोर बनाया। एनसेल के लिए अनिल भंडारी ने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए ३३ गेंदों में ७४ रन बनाए जबकि समाज पौडेल ने २० गेंदों में ४८ रन जोड़कर टीम को ऊँचे स्कोर पर पहुँचाया।

१३२ रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सुबिसु का آغاز अच्छा नहीं रहा। टीम नियमित अंतराल पर विकेट खोती रही और ८ ओवरों में ६ विकेट पर केवल ६३ रन ही बना सकी। विवेक कुमार यादव ने १७ और दमन चन्द ने २३ रन बनाए, लेकिन अन्य बल्लेबाज बड़ी मदद नहीं कर सके। गेंदबाजी में, एनसेल के निराजन परियार ने २ ओवर में १७ रन देकर १ विकेट लिया। हिमाल चन्द ने २ ओवर में १७ रन खर्च कर १ विकेट प्राप्त किया, जबकि विवेक कुमार यादव ने २ ओवर में २४ रन दिए। सचिन्द्र ठाकुर ने १ ओवर में १८ रन दिए। एनसेल के अनिल भंडारी को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया। आईसीएफसी फाइनेंस के कप्तान सुरज तिमिल्सिना को प्रतियोगिता का उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया।

‘केंद्र सरकार ने संविधान की भावना का उल्लंघन करते हुए सरकारी विद्यालयों को कमजोर करने का प्रयास किया’

समाचार सारांश

  • संघीय सरकार ने वैशाख १५ से भर्तियों और २१ से पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया जबकि आँबुखैरेनी गाउँपालिका ने वैशाख २ से ही स्कूल शुरू कर दिए।
  • आँबुखैरेनी गाउँपालिका ने स्थानीय स्तर को संविधान द्वारा दिए गए अधिकार का उपयोग कर स्कूल संचालन किया और संघीय सरकार के निर्णय को अस्थायी व दीर्घकालीन नकारात्मक असर डालने वाला बताया।
  • गाउँपालिका ने स्कूल मर्ज किए, बस सेवा चलाई, छात्रावास बनाए और सामुदायिक स्कूल सुधार कर ९० प्रतिशत स्कूलों को निशुल्क बनाया।

१६ वैशाख, पोखरा। संघीय सरकार ने वैशाख १५ से भर्तियाँ शुरू करने और २१ से पढ़ाई संचालन करने का निर्णय लेते हुए स्थानीय तहों को निर्देश जारी किया। तनहुँ के आँबुखैरेनी गाउँपालिका ने सबसे पहले केंद्र सरकार के इस निर्णय की अवज्ञा करते हुए वैशाख २ से ही भर्तियाँ और स्कूल संचालित करने का सूचना अपने अधीन स्कूलों को जारी किया।

आँबुखैरेनी गाउँपालिका के सूचना और निर्देश के अनुसार सभी स्कूल २ से ही खुल गए। बाद में आँबुखैरेनी जैसी अन्य पालिकाओं ने भी केंद्र सरकार के आदेश के विपरीत भर्तियाँ शुरू कर स्कूल चलाए।

संविधान ने आधारभूत और माध्यमिक शिक्षा के प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय तह को दी है। संघ ने अपने अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है, ऐसा बताते हुए स्थानीय तहों ने अपने निर्णय के अनुसार स्कूल खोले हैं।

केन्द्र सरकार द्वारा स्थानीय तह के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करने का प्रयास किया जा रहा है, बताते हैं आँबुखैरेनी गाउँपालिका अध्यक्ष शुक्र चुमान। केंद्र सरकार के इस निर्णय को संविधान की भावना का उल्लंघन बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सामुदायिक स्कूलों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

स्थानीय तहों में विविध और क्रिएटिव कार्य कर रहे चुमान ने कहा कि वे सामुदायिक शिक्षा सुधार के काम चरणबद्ध तरीके से कर रहे हैं। स्कूल मर्जिंग से लेकर बस सेवा, छात्रावास निर्माण तक और शैक्षिक संरचना सुधारने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि संघीय सरकार के अस्थायी फैसले लंबे समय में नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

सरकार के शैक्षिक फैसलों और रविवार को अवकाश देने के निर्णय का स्थानीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर भी अध्यक्ष चुमान से बातचीत की गई।

संघीय सरकार ने वैशाख २१ से स्कूल खोलने का निर्णय लिया था। आप ने आँबुखैरेनी गाउँपालिका में वैशाख २ से स्कूल जल्दी खोलने का निर्णय क्यों लिया?

इस विषय पर मुख्य तीन बिंदु थे। पहला, संविधान ने कक्षा १२ तक के स्कूल प्रबंधन का पूरा अधिकार स्थानीय तह को दिया है। संघीय सरकार को अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था। दूसरा, वैशाख २१ से पढ़ाई शुरू करने से पिछले वर्ष के शिक्षण सत्र की शुरुआत का ध्यान रखना जरूरी था। पिछले साल अध्यापकों की मांग पर हो रहे आंदोलन से सार्वजनिक विद्यालयों के प्रति असर पड़ा है। तीसरा, सभी स्थानीय तह ने वर्षभर के कालेन्डर के अनुसार पढ़ाई के दिन तय कर रखे थे। पढ़ाई स्थगित करने से पाठ्यक्रम प्रभावित होगा, जिससे शिक्षक और छात्र दोनों को नुकसान होगा। इसलिए उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग करते हुए पढ़ाई शुरू की।

कक्षा १२ तक के शिक्षण प्रबंधन का प्रभार स्थानीय तह का है। संघीय सरकार के इस निर्णय को स्थानीय तह कैसे देख रही हैं?

नगरपालिका संघ और गाउँपालिका महासंघ ने मिलकर एकरूपता से काम किया है। संविधान उल्लंघन को लेकर चिंता है, खासकर जब देश का कार्यकारी प्रमुख एक स्थानीय तह के प्रमुख हों। लेकिन, सभी स्थानीय तह एकजुट होकर यह मुद्दा उठा रहे हैं, जो खुशी की बात है।

सरकारी और निजी, दोनों प्रकार के शिक्षा प्रणाली के बीच केंद्र सरकार के निर्णय का क्या असर होता?

सरकारी स्कूलों को कम से कम १८० दिन चलाना होता है और १०४५ क्रेडिट घंटे पूरे करने होते हैं। आँबुखैरेनी के अधिकांश स्कूल पहाड़ी क्षेत्र में हैं जहाँ मौसम की वजह से पढ़ाई पर असर पड़ता है। पढ़ाई की शुरुआत न होने से छात्रों का सामुदायिक स्कूलों पर विश्वास कम होता है। निजी स्कूलों की प्रतिस्पर्धा से सरकारी स्कूल कमजोर पड़ सकते थे, इसलिए स्कूल मर्जिंग, बस सेवा आदि की पहल की गई है जिससे सेवा का विस्तार हो।

संघीय सरकार से अनुरोध है कि रविवार को छुट्टी देने और कालेन्डर बदलने के फैसले दीर्घकालीन असर डाल सकते हैं। यह निर्णय अस्थायी हैं और इन्हें पुनः विचार किया जाना चाहिए।

रविवार को छुट्टी देने के फैसले पर स्थानीय तह में बहस हुई। इसके सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष क्या हैं?

हम शिक्षकों समेत शिक्षा समिति की बैठक कर रहे हैं। रविवार की छुट्टी से क्रेडिट घंटे पूरे करने में दिक्कत होगी, इसे कैसे कम किया जाए इस पर चर्चा हो रही है। सरकारी कार्यालय बंद होने से वैसे ज्यादा असर नहीं होगा लेकिन सभी विद्यालयों का रविवार को बंद किया जाना उचित नहीं लगता।

पिछली बार निजी स्कूलों के साथ बैठक करके फीस और कालेन्डर को व्यवस्थित किया गया था, अब निजी स्कूल अलग- अलग नामों से फीस वसूल रहे हैं, इस पर आपकी क्या राय है?

हमने दो सकारात्मक बातों में कड़ाई से काम किया है : कम से कम १० प्रतिशत छात्रवृत्ति देना और बार-बार छात्रों को नामांकन करने पर शुल्क नहीं लेना। हालांकि वर्तमान में शिक्षा कानून कुछ अस्पष्ट है और नए निर्देशिका नहीं आई, जिससे स्थानीय तह के लिए शुल्क संबंधी नियम लागू करना जटिल हो गया है।

स्थानीय तह को कक्षा १२ तक शिक्षा प्रबंधन का अधिकार है। स्थानीय पाठ्यक्रम निर्माण और स्कूल प्रबंधन के लिए आपने क्या किया है?

सामुदायिक विद्यालय सुधार एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। हमने भौतिक संरचना में बड़े सुधार किए हैं। पुराने कच्चे भवनों और खराब पूर्वाधार वाले स्कूल अब सही रूप लेने लगे हैं।

विद्यालयों की दरबंदी भी हमने स्वयं व्यवस्थित की है क्योंकि संघीय दरबंदी सभी शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती। कम विद्यार्थियों वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भी हम पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करते हैं।

सामुदायिक स्कूलों में फीस लेने की जरूरत होती है, हालांकि २४ में से २२ स्कूलों को १०वीं कक्षा तक निशुल्क बनाया गया है, एक स्कूल ५वीं तक निशुल्क है। लगभग ९० प्रतिशत स्कूल निशुल्क हैं। निजी स्कूलों की फीस और शुल्क व्यवस्था पर भी निगरानी रखी जाती है। स्थानीय पाठ्यक्रम निर्माण कर पुस्तकों का प्रकाशन करना भी योजना में है।

पृथ्वीराजमार्ग ने आँबुखैरेनी बाजार को तोड़ दिया है, अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण है। कुछ समुदायिक स्कूलों में छात्र कम हैं और इलाके अभी पूर्ण नहीं हैं। ऐसी स्थिति में आपने मर्जिंग और गुणवत्ता सुधार के लिए क्या किया?

हमने स्कूल मर्जिंग और भौतिक दूरी कम करने के लिए साझा बस सेवा चलाई है। एक वार्ड में एक स्कूल बस सेवा से स्थानीय लोगों को भी सुविधा मिलती है। इस वर्ष और अधिक बस सेवा योजनाबद्ध की गई है।

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुविधाएँ पूरी न होने के कारण बारह महीने बस सेवा संभव नहीं है, ऐसे जगहों पर छात्रावास सहित स्कूल निर्माण किए जा रहे हैं ताकि विद्यार्थी आकर्षित हों। सुबह ८ बजे स्कूल आने वाले बच्चों के लिए दोपहर का भोजन और आश्रय भी प्रदान किया जाता है ताकि पढ़ाई में बाधा न हो।

नेपाल पत्रकार महासंघ ने कमल प्रसाईं पर हमले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की सख्त मांग की

१६ वैशाख, काठमाडौं। नेपाल पत्रकार महासंघ ने ऑनलाइनखबर के पत्रकार कमल प्रसाईं पर हमले करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सख्त मांग की है। महासंघ के महासचिव रामप्रसाद दाहाल ने जारी की गई विज्ञप्ति में कहा है, ‘महासंघ इस आपराधिक कृत्य में संलग्न सभी व्यक्तियों की तत्काल पहचान कर उन्हें कानूनी दायरे में लाने के लिए संबंधित संस्थाओं से कड़े कदम उठाने का आग्रह करता है।’

१२ वैशाख को काठमाडौं उपत्यका के मनोहरास्थित सुकुमवासी बस्ती में रिपोर्टिंग के दौरान कमल प्रसाईं पर जानलेवा हमला किया गया था। हमले में घायल हुए प्रसाईं का नाक का ऑपरेशन हुआ है। साथ ही, हमलावरों ने प्रसाईं का कैमरे का मेमोरी कार्ड भी छीन लिया था।

दूसरे चरण के मतदान में ९१.७६ प्रतिशत भागीदारी

१६ वैशाख, काठमांडू। भारत के पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान में ९१.७६ प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। आज १४२ सीटों के लिए मतदान सम्पन्न हुआ। भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन १४२ सीटों के कुल ३ करोड़ २१ लाख मतदाता थे। इनमें से १ करोड़ ६४ लाख पुरुष, १ करोड़ ५७ लाख महिला और ७९२ तृतीयलिंगी मतदाता शामिल हैं। इससे पहले पहले चरण का मतदान २३ अप्रैल को सम्पन्न हुआ था।