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लेखक: space4knews

नेपाल–हङकङ मैच के लिए राखेप ने स्वीकृति नहीं दी : एन्फा

चैत्र ५ की सुबह से दोपहर तक एन्फा के कर्मचारी राखेप कार्यालय में उपस्थित रहने के बावजूद लिखित स्वीकृति नहीं मिलने की जानकारी एन्फा ने दी है।


९ चैत्र, काठमांडू। अखिल नेपाल फुटबॉल संघ (एन्फा) ने स्पष्ट किया है कि चैत्र १२ को निर्धारित नेपाल और हङकङ के बीच अंतरराष्ट्रीय मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच के लिए राष्ट्रीय खेलकुद परिषद (राखेप) की ओर से कोई आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है।

एन्फा ने सोमवार सुबह जारी प्रेस विज्ञप्ति में दशरथ रंगशाला के रख-रखाव समेत आवश्यक स्वीकृति समय पर न मिलने का दावा किया है।

एन्फा ने रविवार दोपहर प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया था कि राखेप ने दशरथ रंगशाला उपलब्ध नहीं कराई, जिसके कारण नेपाल और हङकङ के बीच मैच रद्द हो गया।

इसके साथ ही नेपाल ने हङकङ फुटबॉल संघ को एक पत्र भेज कर राजनीतिक तनाव के कारण मैच रद्द होने की जानकारी दी थी। लेकिन रविवार शाम राखेप ने एन्फा की प्रेस विज्ञप्ति का खंडन करते हुए बताया कि समय पर दशरथ रंगशाला की स्वीकृति दे दी गई थी और एन्फा ने भ्रम फैला रहा है। अगले दिन एन्फा ने पुनः प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राखेप के पत्र का खंडन किया।

एन्फा के अनुसार खेल संचालन के लिए आवश्यक स्वीकृति और दशरथ रंगशाला उपलब्ध कराने हेतु माघ १० को राखेप को पत्राचार किया गया था। यह पत्र माघ ११ को दर्ज किया गया, लेकिन लंबे समय तक कोई लिखित स्वीकृति नहीं मिली।

एन्फा ने बार-बार राखेप के संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगने के बावजूद स्पष्ट जवाब न मिलने का दावा किया। चैत्र ५ की सुबह से दोपहर तक एन्फा के कर्मचारी राखेप कार्यालय में मौजूद थे, परन्तु कोई लिखित स्वीकृति नहीं दी गई।

संघ के अनुसार दशरथ रंगशाला के रख-रखाव, फ्लडलाइट ईंधन, कर्मचारी प्रबंधन सहित सभी आर्थिक और तकनीकी जिम्मेदारियाँ वे स्वयं निभा रहे हैं, बावजूद इसके स्वीकृति न मिलना दुखद है।

एन्फा ने मैच स्थगन की सूचना जारी करने के बाद राखेप द्वारा स्वीकृति दिए जाने की बात कहते हुए जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आश्चर्य व्यक्त किया। चैत्र ५ को जारी किया गया पत्र चैत्र ८ को प्रकाशित होने पर राखेप की मंशा पर सवाल उठाए।

एन्फा ने अब तक किसी भी आधिकारिक या लिखित स्वीकृति प्राप्त न होने की बात स्पष्ट की तथा प्रशासनिक देरी की वजह से उत्पन्न परिस्थिति के लिए सभी खेलप्रेमी नेपाली समुदाय से क्षमा मांगती है।

एन्फा ने यह भी कहा कि चैत्र १३ को झापा में निर्धारित अर्ली इलेक्शन के लिए राखेप द्वारा स्वीकृति न दिए जाने के कारण खेलकुद की कार्यकारी संस्था राखेप और देश के सबसे बड़े खेल संघ एन्फा के बीच संघर्ष बढ़ा है।

रविवार को शुरू हुए इस द्विपक्षीय संघर्ष की स्थिति सोमवार को भी जारी है। फुटबॉल के मैदान में दो टीमें विपरीत गोल करने के प्रयास में हैं, जबकि मैदान के बाहर राखेप और एन्फा के बीच विरोधाभास नजर आ रहा है।

 

अमेरिकाद्वारा विश्वभर रहेका नागरिकहरूका लागि नयाँ सुरक्षा सतर्कता


९ चैत, काठमाडौं । मध्यपूर्वमा जारी तनावलाई मध्यनजर गर्दै अमेरिकी विदेश मन्त्रालयले विश्वका विभिन्न स्थानमा रहेका आफ्ना नागरिकहरूका लागि नयाँ सुरक्षा चेतावनी जारी गरेको छ।

विदेश मन्त्रालयले सामाजिक सञ्जाल एक्समा अपिल गर्दै भनेको छ, ‘विश्वभर, विशेषतः मध्यपूर्वमा बसोबास गर्ने हाम्रा नागरिकहरूलाई अझ बढी सतर्क रहन अनुरोध गर्दछौं।’

यसमा उल्लेख छ, ‘समय-समयमा हवाई मार्गहरू बन्द हुन सक्ने भएकाले यात्रामा अवरोध आउन सक्छ। मध्यपूर्व बाहेक पनि अमेरिकी दूतावासहरूलाई लक्षित गरिने सम्भावना छ।’

विदेश मन्त्रालयले थप जानकारी दिँदै भनेको छ, ‘इरानको समर्थनमा रहेका समूहहरूले विदेशमा अमेरिका र अमेरिकी नागरिकसँग सम्बन्धित स्थानहरूलाई निशाना बनाउन सक्छन्।’

ब्रह्माण्ड नष्ट होने के तीन संभावित तरीके

वीडियो कैप्शन शुरू हो रहा है,

हमारे ब्रह्माण्ड का अंत कैसे होगा

भविष्य में ब्रह्माण्ड में क्या होगा? यह विज्ञान के रहस्यमय प्रश्नों में से सबसे चुनौतीपूर्ण सवालों में से एक है। वैज्ञानिकों ने इस विषय पर उत्तरों से अधिक प्रश्नों को स्वीकार किया है।

संभवतः मानव जाति के विलुप्त हो जाने के बाद काफी समय बाद, यह ब्रह्माण्ड भी एक दिन नष्ट हो सकता है।

वैज्ञानिक अभी तक ब्रह्माण्ड के अंत का पूरा स्वरूप निश्चित नहीं कर पाए हैं। हालांकि, इस विषय पर कई सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं।

इस वीडियो में देखें।

हमारे यूट्यूब चैनल पर भी विज्ञान संबंधी सामग्री उपलब्ध है। नए वीडियो देखने और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करें। आप फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सामाजिक नेटवर्क पर भी हमारी सामग्री देख सकते हैं। इसके अलावा सोमवार से शुक्रवार तक शाम पौने नौ बजे बीबीसी नेपाली सेवा का कार्यक्रम रेडियो पर सुना जा सकता है।

‘निजामती ऐनमा बर्खास्तीको व्यवस्था गरौं’

‘निजामती ऐन में बर्खास्तगी की व्यवस्था हो’

डा. ढुंगेल ने नई सरकार को पांच वर्षों तक स्थिरता बनाए रखने, सुशासन लागू करने और भ्रष्टाचार नियंत्रण पर जोर देने का सुझाव दिया है।

परिचय नै नहुने केन्द्रीय सदस्यलाई नेकपा कैसे करेगी कारवाई?

समाचार सारांश

समीक्षा की गई।

  • नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने निर्वाचन में रास्वपा को मत देने वाले केन्द्रीय सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
  • नेकपा ने २५ समूहों के बीच एकता कर चुनाव में भाग लिया, लेकिन केवल १७ सीटों पर सीमित रह गई।
  • पार्टी आगामी दिनों में समीक्षा बैठक कर संगठन पुनर्गठन की योजना बना रही है।

९ चैत, काठमांडू। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड द्वारा हाल ही में चुनाव परिणाम विषयक दी गई अभिव्यक्ति को पार्टी पंक्ति और राष्ट्रीय राजनीति में गम्भीरता से देखा जा रहा है।

गत शुक्रवार केन्द्रीय मुख्यालय पेरिसडाँडा में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रचण्ड ने घण्टी में मत देने वाले केन्द्रीय सदस्यों को कड़ी कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया था।

जनसंगठन के नेताओं सहित आयोजित उस कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमन्त्री प्रचण्ड ने पार्टी के भावी रोडमैप भी प्रस्तुत किए। परंतु मुख्य ध्यान रास्वपा को वोट देने वाले सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी पर केंद्रित रहा।

‘अब कार्रवाई होगी और इसकी शुरुआत केन्द्रीय सदस्यों से ही होगी। केन्द्रीय सदस्यों के घण्टी की तरफ जाने की सामान्य रिपोर्ट आई है,’ प्रचण्ड ने कहा, ‘सटीक प्रमाण लाएं, कौन- कौन अपने क्षेत्र में नहीं गया? कौन- कौन घण्टी की तरफ गया? ऐसे लोगों पर हम कड़ी कार्रवाई करेंगे।’

२५ समूहों के बीच एकता के बाद चुनाव लड़े नेकपा को मिले नतीजों के प्रकाश में प्रचण्ड की चेतावनी पर नेताओं का ध्यान जाना स्वाभाविक है। ‘जिस उद्देश्य से एकता अभियान चला रहे थे और जिस संख्या में नेता जुड़े थे, नतीजे वैसे नहीं आए,’ एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ‘गंभीर समीक्षा के बिना आगे बढ़ना संभव नहीं। संयोजक की बात को इसी रूप में लेना होगा।’

नेकपा माओवादी केन्द्र, नेकपा एकीकृत समाजवादी सहित दो दर्जन समूहों ने एकता कर पार्टी बनाई है, जिसमें शीर्ष नेताओं की संख्या भी काफी है। पूर्व प्रधानमंत्रियों में तीन (प्रचण्ड, माधव नेपाल, झलनाथ खनाल) शामिल हैं। पूर्व उपप्रधानमंत्री, पूर्व गृह मंत्री और अन्य मंत्री भी बड़ी संख्या में हैं।

इन नेताओं के गठजोड़ पर चुनाव के बाद सरकार बनाने की पहल करने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन रास्वपा अकेले ही लगभग दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गया।

समीक्षा बैठक की तैयारी

२०६३ साल के अंतरिम सरकार में सहभागी होने के बाद हमेशा सत्ता में रहे प्रचण्ड के लिए इस चुनाव के परिणाम में कुछ वर्षों के लिए पुनः सशक्त भूमिका की संभावना कम दिख रही है।

फागुन २१ के चुनाव में नेकपा को सीधे तौर पर ८ और समानुपातिक में ९ सीटें मिलीं, कुल १७ सीटें। अब सरकार बनाने की संभावना तभी बनेगी जब रास्वपा के भीतर संकट आए।

‘पार्टी की अपेक्षित सफलता नहीं मिली, अब समीक्षा कर संगठन पुनर्गठन योजना के साथ आगे बढ़ेंगे,’ नेता डॉ. बेदुराम भुसाल कहते हैं, ‘संभवतः जल्द समीक्षा बैठक होगी।’

हालांकि, किस समिति की बैठक होगी, इस पर नेता स्पष्ट नहीं हैं। ‘कार्य संयोजन समिति या सचिवालय की बैठक हो सकती है,’ भुसाल कहते हैं, लेकिन इन दोनों समितियों के सदस्यों का निर्णय नहीं हो पाया है।

नेकपा में पद निर्धारण केवल प्रचण्ड और माधव नेपाल तक सीमित है। प्रचण्ड संयोजक और माधव नेपाल सहसंयोजक के रूप में पार्टी निर्णयों को प्रभावित करते रहे हैं। फागुन २१ के चुनाव के लिए तो १३८ केन्द्रीय सदस्यों की सूची चुनाव आयोग को दी गई थी, लेकिन वह केवल तकनीकी सूची थी।

केन्द्रीय सदस्यों की पहचान नहीं

नेकपा निर्माण के दौरान १२५ सदस्यों का सचिवालय प्रस्तावित था तथा शीर्ष नेता शामिल करने वाली कार्य संयोजन समिति बनाने का निर्णय भी लिया गया, लेकिन किन नेता उक्त समितियों में होंगे, यह निर्णय नहीं हुआ।

‘एकता अभियान लम्बा चला और नेताओं की संख्या बढ़ती गई, पर नेताओं की हैसियत और समिति गठन तय न हो सका,’ एक पूर्व अधिकारी बताते हैं, ‘२५ समूहों के नेताओं को संयोजक और सहसंयोजक तक सही पहचान नहीं है।’

पार्टी के कार्यकारी संरचनाओं में शामिल नेताओं का निश्चित चयन न होने के कारण प्रचण्ड ने कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो पार्टी के भीतर आमतौर पर केवल राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में ही ली जाती है। ‘यदि किसी को चुनाव परिचालन की जिम्मेदारी सौंपते हुए किसी अन्य उम्मीदवार को वोट देने का प्रमाण मिला, तो उस व्यक्ति की पार्टी में भूमिका पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। पर यह जांच शुरू नहीं होगी कि घण्टी को किसने वोट दिया।’ एक अन्य नेता कहते हैं।

मुख्य समस्या केन्द्रीय सदस्यों की पहचान का अभाव है। २५०० सदस्यों में से केन्द्रीय सदस्य बनाने का वादा हुआ था, लेकिन नेताओं को पहचान नहीं है। आठ समूहों के बीच एकता के बाद केन्द्रीय सदस्यों ने शपथ भी वर्चुअल माध्यम से ली थी, क्योंकि सभी सदस्यों का पेरिसडाँडा आना संभव नहीं था।

इसलिए कार्रवाई के योग्य नेताओं की तलाश करने की बजाय अपनी संपूर्ण हार का समीक्षा करना जरूरी बताया जा रहा है। ‘मत किसने दिया या नहीं दिया यह नहीं, बल्कि हार क्यों हुई उसका मूलभूत विश्लेषण जरूरी है,’ वे कहते हैं, ‘क्यों जनता के बीच पार्टी की समझ नहीं पहुंच पाई इसकी जांच होनी चाहिए।’

‘पार्टी की हार का कारण नेतृत्व पंक्ति में तलाशना चाहिए’

कुछ नेताओं को साजिश या प्रमाण के आधार पर दंडित करने से पार्टी टूटेगी नहीं, बल्कि हार की जिम्मेदारी नेतृत्व पंक्ति को ही लेनी होगी। ‘प्रचण्ड स्वयं चुनाव के दौरान भ्रमित करने वाली बातें बोले, लोगों को कांग्रेस, एमाले या घण्टी के साथ गठबंधन की संभावना दिखा दी। इससे कार्यकर्ता असमंजस में पड़ गए।’

नेकपा के एक उम्मीदवार नेता ने कहा कि प्रचण्ड की अभिव्यक्तियों ने माहौल बिगाड़ा। ‘बालेन (रास्वपा नेता) से कल भी गठबंधन हो सकता है, इस उम्मीद से कई मतदाता घण्टी को वोट दे बैठे।’

झापा-१ से उम्मीदवार अशेष घिमिरे ने हार के व्यक्तिगत कारण खोजने के बजाय पार्टी स्तर पर ध्यान देने की बात कही। ‘कम्युनिस्ट दशकों से बहुमत में आते रहे, पर भूमिहीन को संपत्ति नहीं मिली। पार्टी अलग है लेकिन नेताओं की भाषा एक जैसी है,’ उन्होंने कहा, ‘हमें अपनी कम्युनिस्ट पार्टी की समीक्षा करनी होगी कि चुनाव हमारे पक्ष में क्यों नहीं हुआ।’

उनके अनुसार इस चुनाव में मार्क्सवादी हार गया और उत्तरआधुनिक विचारधारा ने बाज़ी मारी। ‘जब कम्युनिस्ट पार्टी वर्ग आधारित सिद्धांतों से अलग हुई, तब उत्तरआधुनिकवाद का हमले शुरू हुए। इससे संगठन और सामूहिक शक्ति कमजोर हुई, तथा चुनावी परिणाम पर व्यक्तिगत नायकवाद का प्रभाव पड़ा।’ उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के खिलाफ दल बनाकर आई शक्तियों के हमले को बेहतर समझना आवश्यक है।

इरान के ऊर्जा स्थल पर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद करने की चेतावनी

इरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉरप्स (आईआरजीसी) ने अमेरिका से हमले की स्थिति में होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद करने की चेतावनी दी है। इरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने कहा है कि वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं है, लेकिन अमेरिका और इजरायल के व्यवहार के कारण इस मार्ग से समुद्री जहाजों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हुई है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 21 मार्च को चेतावनी दी थी कि यदि 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट खुला नहीं किया गया तो पावर प्लांट नष्ट कर दिए जाएंगे।

इरानी मीडिया में जारी बयान में आईआरजीसी ने कहा है, ‘यदि इरान के ऊर्जा स्थलों पर हमला होता है तो नष्ट हुए पावर प्लांट के पुनर्निर्माण तक होर्मुज स्ट्रेट को बंद रखा जाएगा।’ होर्मुज स्ट्रेट, जो इरान से जुड़ा है, फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला एकमात्र समुद्री मार्ग है। इस मार्ग से विश्वभर का लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थ का परिवहन होता है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इरान ने इस मार्ग को लगभग अवरुद्ध कर दिया है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई है और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।

आईआरजीसी ने कहा है, ‘हम इजरायल में पावर प्लांट, ऊर्जा स्थलों और आईटी को व्यापक रूप से निशाना बनाएंगे। अमेरिकी पक्ष के सभी कंपनियां निशाने पर होंगी।’ इरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने कहा, ‘होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं है। तेल वाहक जहाजों का बीमा करने वाली कंपनियां वार ऑफ च्वॉइस (war of choice) से डर रही हैं, जिसका आरंभ अमेरिका–इजरायल ने किया है, इरान ने नहीं।’

अरघची ने आगे कहा, ‘सम्मान करें। व्यापार की स्वतंत्रता के बिना समुद्री मार्ग की स्वतंत्रता और आवागमन का कोई अर्थ नहीं है। दोनों पक्षों को सम्मान दें, अन्यथा फिर किसी से उम्मीद न रखें।’ इजरायल के परमाणु केंद्र डिमोना के पास इरानी मिसाइल हमले के कारण 160 से अधिक लोग घायल हुए हैं। 28 फरवरी को इजरायली वायुसेना ने अमेरिका के समर्थन में इरान पर हमला किया था, जिसके बाद इरान ने अब तक 400 मिसाइल दागी हैं।

इरान युद्ध: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए ट्रंप द्वारा दी गई समयसीमा नजदीक, तेहरान का कड़ा जवाब

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

तस्बिर स्रोत, Getty Images

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इरान को 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो बड़ा आक्रमण होगा, जिस पर तेहरान ने कड़ा जवाब दिया है।

ट्रंप ने पिछले सप्ताहांत में इरानी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को जलाने की धमकी दी थी, जिसके बाद तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने धमकी के अनुसार कदम बढ़ाया तो वह जलमार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा।

एक वरिष्ठ इरानी कमांडर ने खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा, तेल, प्रौद्योगिकी और जल प्रशोधन केंद्रों को वैध लक्ष्य बताया है।

इरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका की धमकी को “हताशा” के रूप में वर्णित करते हुए कहा कि इससे इरान की एकता और भी मजबूत होगी।

“धमकी और आतंक हमारे एकता को मजबूत करता है। हमारे इलाक़े पर अत्याचार करने वालों को छोड़कर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री मार्ग सभी के लिए खुला है। हम युद्ध के मैदान में खतरों का सामना दृढ़ता से करेंगे।”

फराकिलो जीत के साथ आर्मी ने शीर्ष स्थान पर एकल बढ़त बनाई

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा सहित।

  • हिमालयन जाभा नेसनल बास्केटबल लीग २०२६ में आर्मी ने सोलो को १०३-६८ से हराकर सात मैचों में छठी जीत दर्ज की।
  • आर्मी ने ६ जीत और १ हार के साथ १३ अंक लेकर शीर्ष स्थान पर अकेली बढ़त बनाई है, जबकि टाइम्स इंटरनेशनल, केविसी हाउंड्स और गोल्डेनगेट के ११ अंक हैं।
  • प्रतियोगिता में ८ टीमें खेल रही हैं, विजेता को ४ लाख नकद पुरस्कार मिलेगा, उपविजेता को २ लाख और तीसरे स्थान को १ लाख रुपये पुरस्कार मिलेगा।

९ चैत्र, काठमांडू। हिमालयन जाभा नेसनल बास्केटबल लीग (एचजेएनबीएल) २०२६ के रविवार रात हुए मैच में विभागीय टीम आर्मी ने सोलो बास्केटबल क्लब को १०३-६८ के बड़े अंतर से हराया।

यह आर्मी की सात मैचों में छठी जीत है और इस जीत के साथ आर्मी ने शीर्ष स्थान पर अकेली बढ़त बना ली है। आर्मी ने ६ जीत और १ हार से १३ अंक हासिल किए हैं।

आर्मी के बाद टाइम्स इंटरनेशनल क्लब, केविसी हाउंड्स, और गोल्डेनगेट ११-११ अंक लेकर समान हैं। टाइम्स और गोल्डेनगेट ने एक मैच कम खेला है।

सोलो को यह सात मैचों में पाँचवीं हार रही है और वे ७ मैचों से ९ अंक लेकर पांचवें स्थान पर हैं।

त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला के कवरहॉल में हुए मैच में आर्मी ने सोलो पर दबदबा बनाए रखा। आर्मी ने पहले क्वार्टर में २४-१५ और दूसरे क्वार्टर में ३३-११ का स्कोर लेकर हाफटाइम तक ५७-२६ की काफ़ी बढ़त बना ली थी।

तीसरे क्वार्टर में आर्मी ने २६-१९ का स्कोर करते हुए अंतिम क्वार्टर से पहले ८३-४५ की बढ़त हासिल की। अंतिम क्वार्टर में सोलो ने २३-२० के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद आर्मी की जीत पर कोई असर नहीं पड़ा।

आर्मी के निश्चल महर्जन ने सर्वाधिक २० अंक बनाए जबकि नुकेश जुगजाली को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।

नेपाल बास्केटबल संघ (नेबा) के आयोजन में चल रहे इस दूसरे संस्करण के एचजेएनबीएल में ८ टीमें प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।

इस डबल राउंड रोबिन प्रणाली वाली लीग में कुल ५६ मैच होंगे। लीग चरण के बाद शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में प्रवेश करेंगी। प्लेऑफ में पहले क्वालिफायर में लीग के पहले और दूसरे स्थान वाली टीमें भिड़ेंगी जबकि तीसरे और चौथे स्थान वाली टीमें एलिमिनेटर खेलेंगी।

पहले क्वालिफायर में हारने वाली टीम और एलिमिनेटर विजेता के बीच दूसरे क्वालिफायर का मैच होगा। पहले और दूसरे क्वालिफायर के विजेताओं के बीच फाइनल मैच खेला जाएगा।

प्रतियोगिता के विजेता को ४ लाख नकद पुरस्कार मिलेगा, उपविजेता को २ लाख और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को १ लाख रुपये दिए जाएंगे।

प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (एमवीपी) अवार्ड और आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे, जैसा कि नेबा ने बताया है।

मनाइँदै विश्व मौसम दिवस, बढ्दो तापमानले बढ्दो संकट

विश्व मौसम दिवस मनाते हुए बढ़ते तापमान से बढ़ती आपदाएँ

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा सहित तैयार।

  • आज 9 चैत्र, विश्व मौसम दिवस का 76वां संस्करण नेपाल समेत विश्व भर ‘आज की निगरानी, कल की सुरक्षा’ मूल नारा के साथ मनाया जा रहा है।
  • इसिमोड की रिपोर्ट के अनुसार हिंदुकुश हिमालय में हिमपात पिघलने की दर 65 प्रतिशत बढ़ी है और इस शताब्दी के अंत तक 30 से 50 प्रतिशत हिम गिरने का खतरा है।
  • नेपाल में जलवायु जनित आपदाओं के कारण हर वर्ष औसतन 250 लोगों की मृत्यु होती है और लगभग 29 अरब रुपये का आर्थिक नुकसान होता है, यह तथ्य गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक किया है।

9 चैत्र, काठमांडू। ‘आज की निगरानी, कल की सुरक्षा’ इस मूल नारे के साथ आज नेपाल समेत विश्व भर में 76वां विश्व मौसम दिवस मनाया जा रहा है। विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यू.एम.ओ.) की स्थापना दिवस के अवसर पर मनाए जाने वाले इस वर्ष के दिवस ने जलवायु परिवर्तन से बढ़ते जोखिम और सटीक पूर्वसूचना प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया है।

बदलते जलवायु और इसके कारण जनधन पर पड़ते गंभीर प्रभाव के कारण इस वर्ष का दिवस विशेष महत्व प्राप्त कर गया है।

पहाड़ों में गंभीर संकट

नेपाल में मुख्यालय वाले अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय विकास केंद्र (इसिमोड) की हाल ही में जारी रिपोर्ट ने हिंदुकुश हिमालय क्षेत्र में हिम पिघलने की भयावह दर को उजागर किया है। सन 2011 से 2020 के दशक में, पिछले दशक की तुलना में हिम पिघलने की दर में 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, इसिमोड की रिपोर्ट में कहा गया है।

यदि यही स्थिति जारी रही, तो इस शताब्दी के अंत तक हिमालय के 30 से 50 प्रतिशत हिम गायब हो सकते हैं और ‘एशिया के वाटर टावर’ कहलाने वाले नदीनालों के सूखने का खतरा है, ऐसा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है।

इसिमोड के अनुसार तीव्र हिम पिघलने से नेपाल के हिमताल फटने के उच्च जोखिम में हैं, जो तटीय निचले इलाकों में लाखों लोगों और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए हमेशा खतरा साबित हो सकते हैं।

नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, जलवायु जनित आपदाओं के कारण नेपाल में हर साल जनधन का व्यापक नुकसान होता है। बाढ़, भूस्खलन, और तूफान जैसी जलवायु जनित आपदाओं के कारण हर वर्ष औसतन 250 लोग अपनी जान गंवाते हैं। पिछले एक दशक में ही 5,600 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है।

सन् 2012 से 2024 तक 44,000 से अधिक आपदा घटनाएँ हुई हैं, जिनमें 42,000 से अधिक भौतिक संरचनाओं जैसे घर, विद्यालय, पुल आदि को नुकसान पहुंचा है।

इसके कारण नेपाल को हर साल लगभग 29 अरब नेपाली रुपये का आर्थिक नुकसान होता है, जो नेपाल की कुल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.25 प्रतिशत है।

चरम मौसमी घटनाएँ

विश्व मौसम संगठन के अनुसार, सन् 2025 अब तक का तीसरा सबसे गर्म वर्ष रहा है। औद्योगिक क्रांति से पूर्व की तुलना में पृथ्वी का तापमान 1.48 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव मानसून के पैटर्न में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कभी अतिवृष्टि और कभी सूखे की स्थिति उत्पन्न हो रही है। तराई क्षेत्र में गर्म हवाओं की लहर (लू), समुद्र तल में वृद्धि, और शक्तिशाली चक्रवातों का खतरा भी बढ़ गया है।

इसी कारण इस वर्ष का नारा कहता है कि प्रभावी पूर्वसूचना प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) को प्रभावी और सबके लिए सुलभ बनाना क्षति को कम करने का मुख्य उपाय है। नेपाल ने सन् 2027 तक ‘सभी के लिए पूर्वसूचना’ पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों के अनुसार अत्याधुनिक रडार और मौसम स्टेशन के माध्यम से दी जाने वाली सटीक जानकारी किसानों से लेकर आम जनता तक सुरक्षित रहने में मदद करेगी। हालांकि, इसिमोड जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान वृद्धि में मुख्य भूमिका निभाने वाले हरितगृह गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए बड़े देशों को जल्द कदम उठाना आवश्यक है।

अमेरिकी डॉलर स्थिर, यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के भाव में गिरावट

९ चैत्र, काठमाडौं। नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा आज निर्धारित विदेशी मुद्रा विनिमय दर के अनुसार अमेरिकी डॉलर का भाव स्थिर है। यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के भाव में कुछ गिरावट देखी गई है।

हिसाब से देखा जाए तो रविवार की तरह आज सोमवार को भी अमेरिकी डॉलर का खरीद मूल्य १४९ रुपये ६४ पैसे और बिक्री मूल्य १५० रुपये २४ पैसे ही बना हुआ है।

यूरो का भाव कल की तुलना में थोड़ा कम हुआ है। आज यूरो का खरीद मूल्य १७३ रुपये १२ पैसे और बिक्री मूल्य १७३ रुपये ८१ पैसे है, जबकि कल यह क्रमशः १७३ रुपये १५ पैसे और १७३ रुपये ८४ पैसे था।

इसी प्रकार, ब्रिटेन के पाउंड स्टर्लिंग का खरीद मूल्य १९९ रुपये ६६ पैसे और बिक्री मूल्य २०० रुपये ४६ पैसे है, जबकि कल यह क्रमशः २०० रुपये ३८ पैसे और २०१ रुपये १९ पैसे था।

आज स्विस फ़्रैंक और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के भाव भी घटे हैं।

स्विस फ़्रैंक का आज खरीद मूल्य १८९ रुपये ९० पैसे और बिक्री मूल्य १९० रुपये ६६ पैसे निर्धारित किया गया है, जबकि कल ये क्रमशः १९० रुपये ०१ पैसा और १९० रुपये ७७ पैसे थे।

ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का आज खरीद मूल्य १०५ रुपये १० पैसे और बिक्री मूल्य १०५ रुपये ५२ पैसे है, जो कल क्रमशः १०५ रुपये ८९ पैसे और १०६ रुपये ३१ पैसे था।

कनाडाई डॉलर का भाव स्थिर, सिंगापुर डॉलर का भाव गिरा

कनाडाई डॉलर का भाव आज स्थिर है। कल के समान आज भी कनाडाई डॉलर का खरीद मूल्य १०९ रुपये ०४ पैसे और बिक्री मूल्य १०९ रुपये ४८ पैसे है।

सिंगापुर डॉलर का भाव आज गिरा है। इसका आज खरीद मूल्य ११६ रुपये ७० पैसे और बिक्री मूल्य ११७ रुपये १६ पैसे निर्धारित किया गया है, जबकि कल ये क्रमशः ११७ रुपये ०१ पैसा और ११७ रुपये ४८ पैसे थे।

जापानी येन १० के खरीद मूल्य ९ रुपये ४० पैसे और बिक्री मूल्य ९ रुपये ४४ पैसे, चीनी युआन का खरीद मूल्य २१ रुपये ७३ पैसे और बिक्री मूल्य २१ रुपये ८२ पैसे, सऊदी अरबियन रियाल का खरीद मूल्य ३९ रुपये ८५ पैसे और बिक्री मूल्य ४० रुपये ०१ पैसा, कतारी रियाल का खरीद मूल्य ४० रुपये ९४ पैसे और बिक्री मूल्य ४१ रुपये ११ पैसे तय किया गया है।

राष्ट्र बैंक के अनुसार थाई भाट का खरीद मूल्य ४ रुपये ५५ पैसे और बिक्री मूल्य ४ रुपये ५७ पैसे, यूएई दिराम का खरीद मूल्य ४० रुपये ७४ पैसे और बिक्री मूल्य ४० रुपये ९० पैसे, मलेशियन रिंगेट का खरीद मूल्य ३७ रुपये ९८ पैसे और बिक्री मूल्य ३८ रुपये १४ पैसे, साउथ कोरियाई वन १०० का खरीद मूल्य ९ रुपये ९४ पैसे और बिक्री मूल्य ९ रुपये ९८ पैसे, स्वीडिश क्रोनर का खरीद मूल्य १६ रुपये ०२ पैसे और बिक्री मूल्य १६ रुपये ०८ पैसे तथा डेनिश क्रोनर का खरीद मूल्य २३ रुपये १७ पैसे और बिक्री मूल्य २३ रुपये २७ पैसे निर्धारित किया गया है।

राष्ट्र बैंक ने हांगकांग डॉलर का एक का खरीद मूल्य १९ रुपये १० पैसे और बिक्री मूल्य १९ रुपये १८ पैसे, कुवैती दिनार का खरीद मूल्य ४८८ रुपये ०६ पैसे और बिक्री मूल्य ४९० रुपये ०२ पैसे, बहरीन दिनार का खरीद मूल्य ३९६ रुपये ३४ पैसे और बिक्री मूल्य ३९७ रुपये ९३ पैसे, ओमन रियाल का खरीद मूल्य ३८८ रुपये ६८ पैसे और बिक्री मूल्य ३९० रुपये २३ पैसे निर्धारित किया है। साथ ही भारतीय रुपये के सौ के खरीद मूल्य १६० रुपये और बिक्री मूल्य १६० रुपये १५ पैसे निर्धारित किए गए हैं।

राष्ट्र बैंक ने बताया है कि यह विनिमय दर आवश्यकतानुसार कभी भी संशोधित की जा सकती है। वाणिज्य बैंक द्वारा निर्धारित विनिमय दर अलग हो सकती है और नवीनतम विनिमय दर केन्द्रीय बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।

बहराइन, यूएई और कुवैत ने मिसाइल तथा ड्रोन हमलों को लेकर ‘अलर्ट’ जारी किया


९ चैत, काठमाडौं। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच खाड़ी के कुछ देशों ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के संबंध में सूचनाएँ जारी की हैं।

समाचार के अनुसार, बहराइन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत ने ईरान से हो रहे मिसाइल एवं ड्रोन हमलों के बारे में चेतावनी दी है।

बहराइन के गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर बताया कि ‘अलार्म सायरन सक्रिय कर दिए गए हैं। हम नागरिकों से शांत रहने और नजदीकी सुरक्षित स्थान की ओर जाने का अनुरोध करते हैं।’

गृह मंत्रालय ने नागरिकों से आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का पालन करने का भी आग्रह किया है।

इसी तरह, यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कुछ समय पहले कहा था कि देश की हवाई सुरक्षा प्रणाली ईरान से आए मिसाइलों और ड्रोन को निशाना बना कर रोक रही है।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि सुनाई देने वाली आवाजें मिसाइल और ड्रोन को रोकने की कोशिश के कारण हो सकती हैं।

कुवैत की सेना ने भी हाल ही में बताया कि देश की हवाई सुरक्षा प्रणाली दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रही है।

सेना के जनरल स्टाफ ने स्पष्ट किया कि विस्फोट की आवाजें हवाई सुरक्षा प्रणाली द्वारा दुश्मन के हमलों को रोकने की प्रक्रिया के कारण हैं।

कुवैत की सेना ने नागरिकों से संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने का आग्रह भी किया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: युद्ध से प्रभावित इस समुद्री मार्ग का विकल्प क्या है?

क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कोई अन्य विकल्प नहीं है?

मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण अवरुद्ध हो रहा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कोई विकल्प क्या हो सकता है?

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नेपाली युवाले ल्याए ‘ल बसम’ राइड सेयरिङ एप – Online Khabar

नेपाली युवाओं द्वारा विकसित ‘ल बसम’ राइड शेयरिंग ऐप का शुभारंभ

समाचार संक्षेप

संपादकीय समिक्षित।

  • नेपाली युवाओं के प्रयास से विकसित राइड शेयरिंग ऐप ‘ल बसम’ की सेवा अब आधिकारिक रूप से काठमांडू उपत्यका में आरंभ हो गई है।
  • कंपनी जल्द ही पोखरा, बुटवल, विराटनगर और चितवन जैसे शहरों में अपनी सेवा का विस्तार करेगी और निकट भविष्य में भोजन वितरण सेवा भी शुरू करने की योजना बना रही है।
  • ‘ल बसम’ में महिला यात्रुओं के लिए महिला ड्राइवर चुनने की सुविधा देने वाला ‘पिंक मोड’ फीचर और दुर्घटना बीमा का प्रावधान किया गया है।

९ चैत, काठमांडू। नेपाली युवाओं की पहल, कौशल और देशी निवेश के साथ तैयार किया गया नया राइड शेयरिंग ऐप ‘ल बसम’ अब औपचारिक रूप से संचालित हो रहा है। “हम सब साथ बैठें और यात्रा करें” के मूल नारे के साथ शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म नेपाल में विकसित तकनीक का उपयोग करते हुए आत्मनिर्भरता की नई पहचान प्रस्तुत करता है।

कंपनी ने रविवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में राइड शेयरिंग ऐप का सार्वजनिक शुभारंभ किया।

काठमांडू के तारकेश्वर-८, शेषमति स्थित कार्यालय से संचालित ‘ल बसम’ फिलहाल केवल काठमांडू उपत्यका में सेवा प्रदान कर रहा है। कंपनी जल्द ही पोखरा, बुटवल, विराटनगर और चितवन जैसे प्रमुख शहरों में अपनी सेवाओं का विस्तार करने का लक्ष्य रखती है। इसके साथ ही निकट भविष्य में खाद्य वितरण सेवा भी प्रारंभ करने की योजना है।

प्रारंभिक चरण में चालक सेवा शुल्क मुक्त रहेंगे और ऐप के उपयोग में छूट प्रदान की गई है, कंपनी ने बताया।

देशी विकल्प का उदय

कंपनी के संचालकों ने कहा कि प्रारंभ में विदेशी राइड शेयरिंग ऐप्स की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए भी अब देशी प्लेटफॉर्म विकसित हो चुके हैं, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संचालक विष्णु राज गिरी ने बताया कि नेपाली सुविधाओं से लैस यह ऐप विदेशी विकल्पों पर निर्भरता खत्म कर आर्थिक रूप से लाभकारी होगा, क्योंकि विदेशी ऐप के जरिए बड़ी रकम नेपाल से बाहर जाती है। ‘ल बसम’ इसे घटाने में मदद करेगा।

उनके अनुसार, ‘ल बसम’ केवल एक सेवा नहीं बल्कि नेपाली तकनीक, कौशल और मेहनत का संयोजन है, जो देश के भीतर आर्थिक मूल्य सृजन का अभियान है।

कंपनी के अनुसार इस प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य नेपाल के यातायात प्रणाली को सुरक्षित, सम्मानित और प्रौद्योगिकी के अनुकूल बनाना है। पारदर्शिता और जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हुए उपयोगकर्ताओं में विश्वास बनाना इसकी रणनीति है।

काठमांडू उपत्यका में सेवारत ‘ल बसम’ अगली चरणों में अन्य प्रमुख शहरों में भी अपनी सेवा बढ़ाएगा, कंपनी के एक और संचालक सिताराम अधिकारी ने बताया। उन्होंने कहा, “फिलहाल काठमांडू उपत्यका में सेवा शुरू कर दी गई है। जल्द ही पोखरा, बुटवल, विराटनगर और चितवन जैसे बड़े शहरों में सेवा का विस्तार करेंगे।” उन्होंने निकट भविष्य में फूड डिलीवरी सेवा भी शुरू करने की योजना का उल्लेख किया।

कंपनी ने बताया कि वर्तमान में २५० से अधिक चालक इस ऐप से जुड़े हैं। यह ऐप प्ले स्टोर और ऐप स्टोर दोनों पर उपलब्ध है।

महिला यात्रुओं के लिए ‘पिंक मोड’

‘ल बसम’ चालक को केवल ड्राइवर के रूप में नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखता है। कंपनी के अनुसार चालक का सम्मान और उचित अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे। यात्रियों को भी केवल ग्राहक नहीं बल्कि समुदाय के सदस्य के रूप में माना जाएगा। प्लेटफॉर्म पर चालक और यात्री को ‘अभिभावक’ या ‘परिवार’ के रूप में परिभाषित किया गया है।

महिला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘पिंक मोड’ फीचर भी शामिल है, जिसके तहत महिला यात्री महिला चालक चुन सकती हैं। इससे महिला सशक्तिकरण और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, कंपनी ने उम्मीद जताई है।

यात्री और चालक दोनों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था है। यात्री को राइड बुक करने से पहले अनुमानित किराया दिखता है। इसके अलावा यात्री अपनी बजट के अनुसार किराया प्रस्तावित कर सकते हैं और चालक उसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।

प्रत्येक यात्रा के बाद यात्री और चालक दोनों को डिजिटल कूपन प्राप्त होगा, जिसे बाद में लकी ड्रॉ में कैश, स्मार्टफोन और विभिन्न गैजेट जीतने के लिए उपयोग किया जा सकेगा।

सुरक्षा के लिए हर चालक का लाइसेंस, ब्लू बुक और वाहन की फोटो प्रमाणीकरण के रूप में आवश्यक है। साथ ही वास्तविक समय लाइव ट्रैकिंग और आपातकालीन स्थिति के लिए SOS बटन भी उपलब्ध है।

पाल्पाको तिनाउ खोलामा दुई भारतीय पुरुष डुबकर लापता

समाचार सारांश

AI द्वारा निर्मित, सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • पाल्पाको तिनाउ खोलामा डुबकर दो भारतीय पुरुष पर्यटक लापता हो गए हैं।
  • लापता व्यक्ति पांच सदस्यों के समूह में थे और स्थानीय पुलिस टीम खोज में लगी हुई है।
  • लापता व्यक्तियों के नाम और पता अभी अनजान है।

८ चैत, पाल्पा। पाल्पाको तिनाउ खोलामा डुबकर दो भारतीय पुरुष पर्यटक लापता हो गए हैं। वे तिनाउ गाउँपालिका–३, दोभान ड्यामसाइड में जलविद्युत आयोजन के हेडबॉक्स के पास डूबे थे, पुलिस ने जानकारी दी है।

पुलिस के अनुसार, पांच सदस्यीय समूह में से दो पुरुष लापता हुए हैं। जिल्ला प्रहरी कार्यालय पाल्पाका सूचना अधिकारी होमप्रकाश चौधरी के मुताबिक, डूबकर लापता होने की सूचना पाकर स्थानीय, सशस्त्र पुलिस और दोभान थाना के दल खोज कार्य में लगे हुए हैं। लापता व्यक्तियों के नाम और पता अभी तक ज्ञात नहीं हो पाया है।

जेनजी आंदोलन: मानव अधिकार आयोग जल्द ही लाएगा जांच रिपोर्ट, नई सरकार से क्या हैं उम्मीदें?

जल रहा सिंहदरबार

तस्बिर स्रोत, Reuters

जेनजी आंदोलन संबंधी गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व में गठित उच्चस्तरीय जाँच आयोग की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं होने से बढ़ रही आम चिंता के बीच, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने दावा किया है कि वह जल्द ही संबंधित घटनाओं की जांच रिपोर्ट प्रकाशित करने जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, जेनजी आंदोलन के बाद बनी नई सरकार इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की योजना बना रही है।

भदौ आंदोलन के मामलों की गहन जांच करने वाली आयोग सदस्य लिली थापा की अगुवाई वाली टीम ने लगभग छह महीने में यह रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे शुक्रवार को आयोग के अध्यक्ष को सौंप दिया गया।

“यह रिपोर्ट आयोग की पूर्ण बैठक द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी, और इसके लिए अधिक समय नहीं लगेगा। हमारा विश्वास है कि इसे अगले इन सात से दस दिनों के भीतर सार्वजनिक कर दिया जाएगा,” प्रवक्ता टिकाराम पोखरेल ने कहा।

जेनजी आंदोलन के कुछ प्रतिभागी वर्तमान में कार्की आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। मानव अधिकार आयोग की रिपोर्ट की घोषणा से उनकी भी उम्मीदें जागी हैं।