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लेखक: space4knews

एमाले सुदूरपश्चिमको विवाद दलको नेता हटाउने तहमा – Online Khabar

एमाले सुदूरपश्चिम में विवादः संसदीय दल के नेता पद से हटाए जाने के कगार पर संकट

९ चैत, धनगढी। राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर विवाद के कारण नेकपा एमाले सुदूरपश्चिम प्रदेश संसदीय दल के नेता को बदलने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

संसदीय दल के नेता राजेन्द्र सिंह रावल पर अस्पताल व्यवस्थापन समिति सहित विभिन्न नियुक्तियाँ बिना परामर्श और एकतरफा रूप से करने का आरोप लगाते हुए एमाले सुदूरपश्चिम प्रदेश कमिटी ने पार्टी केन्द्रीय स्तर को सूचित किया है।

‘सरकार के विभिन्न संस्थानों में राजनीतिक नियुक्ति करते समय उन्होंने पार्टी कमिटी से कोई परामर्श नहीं किया है। स्वयं अपनी मर्जी से सिफारिश करने का कार्य किया है,’ एमाले प्रदेश अध्यक्ष कृष्णप्रसाद जैशी ने कहा, ‘हमने इस मामले में पार्टी केंद्र को रिपोर्ट भेजी है।’

पूर्व मुख्यमन्त्री रावल पर पार्टी से संपर्क टूटने का आरोप लगाया गया है। संपर्क न होने के कारण राष्ट्रीय युवा संघ नेपाल कंचनपुर के कृष्णपुर नगर कमिटी ने रविवार को संसदीय दल के कार्यालय में तालाबंदी कर विरोध जताया है।

तालाबंदी में शामिल युवाओं ने आरोप लगाया कि रावल ने राजनीतिक नियुक्तियाँ एकतरफा की हैं, प्रतिनिधि सभा चुनाव के उम्मीदवारों को असहयोग करने वालों को पद दिलाया है और बार-बार प्रयास के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

रावल की प्रतिक्रिया

रावल ने उन पर लगाए गए आरोपों को असत्य बताते हुए कहा कि अब तक पार्टी के निर्देशानुसार महाकाली प्रादेशिक अस्पताल के व्यवस्थापन समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों की ही नियुक्ति की गई है। उन्होंने बताया कि सभी नियुक्तियाँ प्रदेश अध्यक्ष सहित पार्टी के नेताओं के परामर्श से की गई हैं।

‘पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और अन्य साथियों से परामर्श के बाद ही विभिन्न नियुक्तियों के लिए सिफारिश की गई है,’ रावल ने कहा, ‘अब आकर लोग मुझ पर गलत आरोप लगाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। मुझे भी कारण स्पष्ट नहीं है।’

उन्होंने कहा कि कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे नेता मित्रों से संपर्क में नहीं आ सके हैं।

रावल ने खप्तड पर्यटन विकास समिति के अध्यक्ष पद के लिए बझाङ की जमुना चन्द को सिफारिश करने को भी विवाद पैदा करने की कोशिश बताया। ‘महिला को भी कार्यकारी भूमिका में आने देना मेरा अपराध नहीं है। ये सारी बातें तो उन्होंने खुद कही हैं। संसदीय दल के नेता के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए,’ रावल ने कहा, ‘प्रदेश अध्यक्ष जो कहें, वह करना मेरा कर्तव्य नहीं है।’

एक नेताओं के अनुसार, रावल की कार्यशैली को लेकर उठ रहे सवालों के चलते संसदीय दल के नेता पद में फेरबदल किए जाने के लिए पार्टी के नेता और प्रदेश के सांसद सक्रिय हैं। परंतु पद के लिए इच्छुक लोग पार्टी केंद्र के निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

‘उन (रावल) की कार्यशैली के कारण पार्टी में समस्या आ रही है। अब विकल्प खोजकर आगे बढ़ना आवश्यक है, इस पर सभी सहमत हैं,’ एक सांसद ने कहा, ‘प्रदेश ने इस विषय में पार्टी केंद्र को पत्र भी भेजा है। देखना होगा केंद्र से क्या निर्देश और बैठक होती है।’

तीन नेताओं की दावेदारी

एमाले सुदूरपश्चिम प्रदेश सभा में ११ सांसद हैं। इनमें से रावल संसदीय दल के नेता और सन्तोष शर्मा थापा उपनेता हैं।

कोइलीदेवी चौधरी उपसभापति हैं। डोटी से निर्वाचित चक्रबहादुर मल्ल प्रमुख सचेतक हैं और बैतडी की सांसद जानकी कुँवर बम सचेतक हैं।

एमाले के तीन मंत्री हैं: सुरेन्द्र बहादुर पाल भौतिक पूर्वाधार विकास मंत्री, बिरबहादुर थापा भूमि व्यवस्था, कृषि तथा सहकारी मंत्री, हिरा पार्की आंतरिक मामला तथा कानून मंत्री और निर्मला साउद भौतिक पूर्वाधार विकास राज्यमंत्री हैं। धर्मराज पाठक सामाजिक विकास समिति के सभापति हैं।

दल के नेता पद के लिए वर्तमान उपनेता सन्तोष शर्मा थापा, प्रमुख सचेतक चक्रबहादुर मल्ल और सामाजिक विकास समिति के सभापति धर्मराज पाठक ने दावेदारी जताई है, सूत्र ने बताया।

‘इन तीनों ने दल के नेता पद के लिए अपनी-अपनी ओर से चर्चा शुरू कर दी है। लेकिन व्यक्तिगत दावेदारी ही काफी नहीं, पार्टी केन्द्रीय स्तर और प्रदेश कमिटी का राय, परामर्श और निर्देश भी जरूरी होता है,’ एक सांसद ने कहा।

थापा बताते हैं कि चूंकि वे उपनेता हैं, इसलिए दल के नेता पद की दावेदारी करना स्वाभाविक है। केन्द्रीय सदस्य मल्ल भी अपने पक्ष का माहौल बनाने में सक्रिय हैं।

सामाजिक विकास समिति के सभापति धर्मराज पाठक ने दावा किया है कि युवा होने के नाते वे संसदीय दल का नेतृत्व करने में सक्षम हैं।

गण्डकी विधानसभा से नई सरकार को चेतावनी: जनता की प्रतिक्रिया स्वीकार है, प्रदेश को हतोत्साहित करने वाले कृत्यों का विरोध किया जाएगा

समाचार सारांश

  • २१ फागुन के चुनाव में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी ने गण्डकी प्रदेश में १५ सीटें जीत कर प्रदेश विधानसभा का नौवाँ अधिवेशन शुरू किया।
  • कांग्रेस, एमाले और माओवादी के नेताओं ने चुनाव परिणाम अप्रत्याशित होने का उल्लेख करते हुए गंभीर आत्म-विश्लेषण का संकल्प व्यक्त किया है।
  • नेकपा के नेता हरिबहादुर चुमान ने लोकतंत्र के सही अभ्यास में कमी स्वीकार करते हुए भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पुनर्गठन में कमजोरी बताई है।

८ चैत्र, पोखरा। २१ फागुन के चुनाव में जनता द्वारा प्रदत्त असाधारण मत के साथ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) संघीय सरकार गठन की तैयारी कर रही है, इसी बीच गण्डकी प्रदेशसभा का नौवाँ अधिवेशन रविवार से शुरू हो गया है।

संघीय सरकार बालेंद्र शाह के नेतृत्व में बनने की चर्चा के बीच गण्डकी में पुरानी पार्टियाँ अपनी समीक्षा और चुनाव परिणाम का विश्लेषण कर रही हैं।

जेनजी आन्दोलन के बाद गठित नेपाली कांग्रेस और नेकपा एमाले गठबंधन आगामी सरकार में हैं जबकि गण्डकी प्रदेश में भी ये ही पार्टियाँ सरकार में हैं। तत्कालीन नेकपा माओवादी (वर्तमान नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी) और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) भी संसद में शामिल हैं।

२१ फागुन के चुनाव में कांग्रेस ने मुस्ताङ और मनाङ से दो सीटें जीती हैं, जबकि एमाले, माओवादी, राप्रपा और अन्य दल शून्य सीटों तक सीमित रहे। म्याग्दी में स्वतंत्र उम्मीदवार महावीर पुन ने रास्वपा के समर्थन से चुनाव जीता, जबकि रास्वपा ने १५ सीटें बड़े अन्तर से हासिल की हैं।

प्रदेशसभा में ये दल वर्तमान स्थिति की समीक्षा, नई संघीय सरकार के प्रति दृष्टिकोण और चुनाव परिणाम की व्याख्या कैसे करते हैं इस पर विशेष ध्यान था।

रविवार को शुरू हुए नौवें अधिवेशन के पहले दिन प्रमुख तीन दलों के नेताओं ने अपने विचार प्रकट किए। कांग्रेस, एमाले और माओवादी के नेताओं ने जनता द्वारा स्पष्ट संदेश स्वीकार करते हुए गंभीर आत्म-विश्लेषण करने का संकल्प लिया। हालांकि चुनाव परिणाम स्वीकारने में कठिनाई बनी हुई है।

नेताओं ने चुनाव परिणाम अप्रत्याशित होने का उल्लेख करते हुए विभिन्न संशय व्यक्त किए और प्रदेश अधिकारों को हतोत्साहित करने के प्रयासों के प्रति कड़ा विरोध करने की चेतावनी दी।

सांसदों के कानून निर्माण में सहयोग को सरकार द्वारा निशाना बनाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री और एमाले सचिव खगराज अधिकारी ने असंतोष व्यक्त किया।

अधिकारी ने बताया कि यह चुनाव केवल विकास निर्माण नहीं बल्कि और भी कई मुद्दे सामने लाया है। उन्होंने यह जानने के लिए गंभीर समीक्षा की आवश्यकता बताई कि इस प्रकार का परिणाम कैसे आया।

अधिकारी ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुषिला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार पर प्रदेश को नीचा दिखाने का आरोप लगाया और कहा कि वर्तमान सरकार भी इसी तरह की हरकत कर रही है।

उन्होंने कहा, “प्रदेश को आदेश और निर्देशों का पालन करना होगा, यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है। यदि ऐसा नियोजन दोहराया गया तो हम कड़ा विरोध करेंगे।”

अधिकारी ने प्रदेश और स्थानीय स्तर पर किए गए कार्यों पर गर्व जताया और कोविद काल के दौरान इनका बड़ा योगदान बताया।

उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें दंडित किया है इसलिए उनका सम्मान किया जाना चाहिए, परन्तु प्रदेश पर प्रहार सहन नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने राष्ट्र के अस्तित्व से जुड़ी चिंता भी व्यक्त की।

कांग्रेस के महेन्द्रध्वज जिसी ने कहा कि पार्टी अपनी गलतियाँ सुधारने के लिए तैयार है तथा जेनजी आन्दोलन से लेकर चुनाव तक योजना के अनुसार कार्यक्रम का पालन किया गया।

उन्होंने कहा, “जब देश ही न हो तो सुधार कहाँ होगा? हम निराश नहीं हैं और न ही अधिक उत्साहित हैं। हमें पीछे लौटकर अपनी गलतियाँ सुधारने का प्रण लेना होगा।”

जैसे २४ भदौ की घटना सफल हुई, उसी प्रकार चुनाव भी पूर्व-योजित कार्यक्रम अनुसार सम्पन्न हुआ, जिसी ने कहा।

उन्होंने कहा, “२४ भदौ की घटना ट्रेलर थी, २१ फागुन का चुनाव उसका पुनरावृत्ति है और अब सभी को असली फिल्म देखने का समय आ चुका है।”

नेकपा के नेता हरिबहादुर चुमान ने पुरानी पार्टियों तथा अपने ही दोषों की गंभीर समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी दल जनता की मांग पर परीक्षा देने गए थे पर पुरानी दल अस्वीकृत हुए।

चुमान ने कहा, “हमें दूसरों को दोष नहीं देना चाहिए, समस्या हमारे भीतर है। हम लोकतंत्र का सही अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि लोकप्रियतावाद लोकतंत्र का उत्पाद है और इसे जन्म देने में हमारी भी भूमिका रही है। संघ, प्रदेश और स्थानीय सरकारों के कार्य कमजोर रहे और जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है और प्रशासनिक पुनर्गठन प्रभावी नहीं रहा। कर्मचारी प्रणाली ने अनेक समस्याएं पैदा की हैं और प्रशासनिक क्षेत्र में समस्याएं बढ़ सकती हैं, इस बात की चिंता व्यक्त की।

अख्तियारको दाबी- प्राधिकरणकै रकम खर्चेर परामर्शदाता नियुक्त गर्नु गलत भयो

अख्तियार का दावा: प्राधिकरण के स्वयं के बजट से परामर्शदाता नियुक्त करना गलत है

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने पोखरा हवाई अड्डा निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व सचिव केदारबहादुर अधिकारी समेत 23 लोगों के खिलाफ मामला दायर किया है।
  • मामले में नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के तत्कालीन महानिदेशक और ठेकेदार कंपनियों के प्रमुख शामिल हैं।
  • अख्तियार का दावा है कि 46 करोड़ 15 लाख रुपये का नुकसान हुआ है और बजट में अनियमितताएं हुई हैं।

8 चैत, काठमांडू। पोखरा हवाई अड्डा निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप में अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने पूर्व सचिव केदारबहादुर अधिकारी सहित 23 लोगों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।

अख्तियार ने नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के तत्कालीन महानिदेशक संजीव गौतम, राजन पोखरेल, प्रदीप अधिकारी, उपमहानिदेशक महेन्द्र सिंह रावल, निदेशक बाबुराम पौडेल, तत्कालीन उपमहानिदेशक ध्रुवदास भोछिभोया (पत्नी यमुनादेवी श्रेष्ठ) और उपनिदेशक प्रवीण न्यौपाने के खिलाफ भी मामला दायर किया है।

इसके अलावा प्राधिकरण के तत्कालीन प्रबंधक एवं राष्ट्रीय गौरव आयोजन के प्रमुख चाँदमाया श्रेष्ठ, तत्कालीन प्रबंधक विनेश मुनकर्मी, प्रबंधक हिमज्योति थापा, उपप्रबंधक प्रमोद नेपाल, वरिष्ठ लेखा अधिकारी नरेन्द्र राज सैंजु, उपप्रबंधक सविन फुयाल और अधिकारी राजाराम चौधरी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला चलाया गया है।

अख्तियार ने परामर्शदाताओं के टीम लीडर यामबहादुर अधिकारी, ईआरएमसी के प्रमुख उद्दवराज चौलागाईं, वास्तुकार शोभेन्द्रराज जोशी, स्लेट कंसल्टेंट प्रमोद दवाड़ी, परामर्शदाता कंपनी एआरएमसी और ठेकेदार चीन की सीएएमसी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर यांग झिगांग, प्रमुख वांग बो तथा कंपनी के विरुद्ध भी मुकदमा दायर किया है।

अख्तियार ने कुल 23 लोगों के खिलाफ मामला दायर किया है। उन पर 46 करोड़ 15 लाख रुपये के नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

अख्तियार के अनुसार, ठेका समझौते में 28 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर डिजाइन समीक्षा और निर्माण पर्यवेक्षण परामर्शदाता आवश्‍यक होने और इसके लिए राशि निर्धारित करने का प्रावधान था।

लेकिन उक्त राशि खर्च किए बिना ही नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अलग बजट से 50 करोड़ 34 लाख रुपये खर्च किए जाने का आरोप अख्तियार ने लगाया है।

अख्तियार ने 22 भदौ 2073 को इसी के अनुरूप आशयपत्र मांगना गलत बताया है। अख्तियार ने अपने दावे में कहा है, ‘परामर्शदाता नियुक्ति सम्बन्धी उक्त निर्णय और खरीद प्रक्रियाओं की शुरुआत ही बदनीयतपूर्ण साबित हुई है।’

ठेका समझौते के अनुसार राशि खर्च करने के बजाय आसामान्य रूप से लागत बढ़ाकर नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण की संपत्ति से अतिरिक्त और डबल बजट खर्च किया गया, यह आरोप अख्तियार ने लगाया है।

इसके बाद आयोजन ने ईआरएमसी स्लेट जेवी कंपनी से 42 करोड़ 89 लाख रुपये का समझौता किया और 40 करोड़ 68 लाख रुपए का भुगतान भी किया गया।

ठेका समझौते में ठेकेदार कंपनी द्वारा परामर्शदाता रखने का वर्णन था, लेकिन प्राधिकरण के बजट से परामर्शदाता नियुक्त करना गलत बताया गया है।

अख्तियार ने सचिव अधिकारी के खिलाफ पूर्ण रूप से जिम्मेदारी तय करने का सुझाव दिया है जबकि अन्य के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।

अख्तियार के अनुसार लागत राशि बढ़ाई गई थी। ठेका राशि से परामर्शदाताओं को भुगतान होना चाहिए था, पर प्राधिकरण से भुगतान करना गलत था।

आंतरिक बजट से खर्च करने के लिए तैयार किए गए लागत अनुमान में 19 करोड़ 52 लाख रुपये अधिक दिखाए गए, और इस प्रक्रिया में प्राधिकरण के तत्कालीन निदेशक प्रदीप अधिकारी शामिल थे।

परामर्श सेवाओं के लिए निर्धारित राशि से मशीन उपकरण खरीदना मान्य नहीं था, फिर भी बदनीयत से खरीदी गई। साथ ही, लोन समझौते से पहले ही प्राधिकरण के पैसे खर्च हो चुके थे, यह भी दावा किया गया है।

वैदेशिक रोजगार में भेजने के प्रलोभन में ठगी के आरोप में ५ आरोपी गिरफ्तार

समाचार सारांश

  • वैदेशिक रोजगार में आकर्षक वेतन का प्रलोभन देकर रकम की ठगी करने के आरोप में ५ आरोपियों को पुलिस ने काठमांडू उपत्यका से गिरफ्तार किया।
  • गिरफ्तार आरोपियों में अर्जुन बहादुर पौडेल, डिल्ली राम भुजेल, उमा गुरुङ, आशिष महत और संगिता श्रेष्ठ शामिल हैं।
  • वे विभिन्न देशों में भेजने का झांसा देकर पीड़ितों से लाखों रुपये ठगकर फरार हो गए, इसकी शिकायत प्राप्त हुई थी।

८ चैत, काठमांडू। वैदेशिक रोजगार में आकर्षक वेतन का प्रलोभन देकर विभिन्न देशों में भेजने का झांसा देकर रकम ठगी करने के आरोप में पुलिस ने ५ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में काठमांडू कीर्ति पुर नगरपालिका–७ में निवास वाले बर्दिया के ३६ वर्षीय अर्जुन बहादुर पौडेल, ललितपुर महालक्ष्मी नगरपालिका–७ में रहने वाले सर्लाही के ४६ वर्षीय डिल्ली राम भुजेल, काठमांडू महानगरपालिका–१६ में रहने वाली ४३ वर्षीया उमा गुरुङ, ललितपुर महानगरपालिका–७ में निवास वाले कास्की के ३३ वर्षीय आशिष महत और भक्तपुर मध्यपुर थिमी नगरपालिका–४ में रहने वाली रामेछाप की ३५ वर्षीया संगिता श्रेष्ठ शामिल हैं।

आरोप है कि अर्जुन ने क्रोएशिया भेजने का वादा कर एक पीड़ित से ३ लाख ३० हजार रुपए, डिल्ली ने मालदीव भेजने का झांसा देकर एक पीड़ित से २ लाख ९९ हजार रुपए, उमाने ब्रिटेन भेजने का वादा कर एक पीड़ित से २ लाख रुपए, आशिष ने ब्रिटेन भेजने के बहाने एक पीड़ित से २३ लाख रुपए और संगिता ने पुर्तगाल भेजने का झांसा देकर एक पीड़ित से ३ लाख ६८ हजार रुपए लिए तथा बाद में सम्पर्क तोड़ लिया। पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई थी।

काठमांडू उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय टेकू से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमा और संगिता को काठमांडू महानगरपालिका–१२ से, आशिष को काठमांडू महानगरपालिका–१० से रविवार को गिरफ्तार किया गया। वहीं, अर्जुन को काठमांडू महानगरपालिका–४ से और डिल्ली को काठमांडू महानगरपालिका–९ से शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया।

ये सभी आरोपी वैदेशिक रोजगार विभाग, ताहाचल, काठमांडू, को आवश्यक जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए भेजे गए हैं।

नेपाल चुनाव २०८२ : प्रधानमंत्री नियुक्ति के दो मार्ग, नई सरकार गठन की प्रक्रिया कैसी होगी

बालेन शाह

तस्बिर स्रोत, Reuters

समानुपातिक वोटों की गिनती समाप्त होने के बाद भी नई सरकार गठन में एक सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया है कि चुनाव आयोग से अंतिम मत परिणाम की रिपोर्ट मिलने के बाद ही सरकार गठन का आह्वान किया जाएगा, और आयोग के एक सहायक प्रवक्ता ने कहा है कि उक्त रिपोर्ट तैयार होने में अभी लगभग एक सप्ताह लग सकता है।

“आयोग की रिपोर्ट के बाद दो रास्ते हैं – संसद बुलाकर संसदीय प्रक्रिया के अनुसार जाना या पहले प्रधानमंत्री नियुक्त करना,” आयोग के सहायक प्रवक्ता कुलबहादुर जीसी ने कहा, “कैसे आगे बढ़ना है, यह राष्ट्रपति के निर्णय पर निर्भर करेगा, रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग का काम समाप्त हो जाता है।”

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) की सहप्रवक्ता प्रतिभा रावल ने कहा कि पार्टी वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) के प्रधानमंत्री बनने को लेकर स्पष्ट है, लेकिन इस संबंध में प्रक्रियागत विवरणों पर पार्टी में अभी निर्णय होना बाकी है।

अब तक की गिनती के अनुसार, यह पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुकी है। प्रत्यक्ष चुनाव में १२५ सीटें जीत चुकी रास्वपा समानुपातिक मतगणना में भी शीर्ष पर है।

‘रविमाथि संगठित अपराध र सम्पत्ति शुद्धीकरणको अभियोगले न्यायको ढोका बन्द हुन्छ’

‘रवि पर लगे संगठित अपराध और संपत्ति शोधन के आरोपों से न्याय के द्वार बंद होते हैं’

८ चैत्र, काठमांडू। महा न्यायाधिवक्ता सबिता भण्डारी बराल ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सभापति रवि लामिछाने पर सहकारी ठगी के अलावा लगाये गए संगठित अपराध एवं संपत्ति शोधन के आरोपों के कारण पीड़ितों के न्याय पाने के रास्ते जटिल होते जाने का निष्कर्ष निकाला है।

रास्वपा सभापति रवि लामिछाने के मामले में संशोधन के निर्णय के विरोध में सर्वोच्च अदालत में दायर रिट याचिका के जवाब में प्रस्तुत दायर फाइल में इस प्रकार तथ्य उल्लेखित हैं।

महा न्यायाधिवक्ता भण्डारी ने संगठित अपराध और संपत्ति शोधन के आरोप होने से पीड़ितों का रकम वापस पाने का मार्ग बंद होने के कारण इन दो अतिरिक्त आरोपों को संशोधित कर फिर्ती का निर्णय करने की आवश्यकता व्यक्त की है।

महा न्यायाधिवक्ता के निर्णय के पूर्ण पाठ में कहा गया है, ‘जिन्हें निक्षेपकर्ता (पीड़ित वर्ग) की रकम वापस मिलने की संभावना जीवंत रखना चाहते हैं, उनके लिए मिलापत्र संभव रहे इसका संरक्षण करना आवश्यक है। इस हेतु मौलिक दंड प्रक्रिया संहिता, २०७४ की धारा ३६ के अनुसार अभियोग संशोधन के लिए आवेदन देना उचित प्रतीत होता है।’

‘संसदीय समिति ने विषय उठाया’

काठमांडू, रूपन्देही, कास्की समेत जिलों के सरकारी वकील कार्यालयों से निकासी हेतु दायर मामलों में संलग्न कागजात एवं महा न्यायाधिवक्ता तथा नायब महा न्यायाधिवक्ता ने निकासी हेतु टिप्पणियाँ पेश की हैं। इनमें प्रस्तुत तथ्य निम्नानुसार हैं:

१. सहकारी की रकम का अपव्यय एवं हिनामिना संबंधी अदालतों में सहकारी संस्थाओं के संचालकों के विरुद्ध चल रहे मामले जिसमें रवि लामिछाने ने आवेदन किया है।

इस कार्यालय में दिनांक २०८२ मंसिर २३, २०८२ पुष २० एवं ۲۰۸۲ पुष २३ को उनके विरुद्ध राजनीतिक प्रतिशोध के तहत सहकारी ठगी, संगठित अपराध व संपत्ति शोधन के आरोप में मामला दायर करने का अनुरोध किया गया है।

आवेदन के संबंध में प्रस्तुत टिप्पणियाँ और संलग्न मिसिल दस्तावेज अध्ययन करने पर तथ्य इस प्रकार हैं:

क) विभिन्न तिथियों पर सहकारी संस्थाओं में बचतकर्ताओं की रकम के अपव्यय की शिकायतें दर्ज हुई हैं।

तदुपरांत, संघीय संसद के अधीन सहकारी समस्याओं की पहचान व समाधान के लिए सुझाव देने हेतु बचतकर्ताओं की रकम के अपव्यय करने वालों के प्रति कार्रवाई की सिफारिश करने वाली संसदीय विशेष छानबीन समिति २०८१ बनाई गई है।

समिति ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं से पैसे कंपनियों में संचालित करने पर विस्तृत अध्ययन कर २०८१ में छानबीन रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इस रिपोर्ट में उल्लेख है, ‘सहकारी संस्थाओं से गोरखा मीडिया प्रालि को रकम आने की प्रक्रिया में रवि लामिछाने की संलिप्तता के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं, लेकिन उक्त रकम गोरखा मीडिया तक पहुंचने के बाद उनके संचालन खर्च में उनकी भागीदारी दिखती है।’ (संसदीय विशेष छानबीन समिति की रिपोर्ट पृष्ठ ४४९)

रिपोर्ट कार्यान्वयन के लिए संघीय संसद सचिवालय ने नेपाल सरकार को भेजा तथा गृह मंत्रालय को संबंधित सुझाव एवं सिफारिश मंत्रिपरिषद के निर्णयानुसार क्रियान्वयन हेतु प्रेषित किया।

ख) गृह मंत्रालय ने उक्त निर्णयानुसार पुलिस प्रधानालय को पत्र भेज कर आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित किया।

इसमें संसदीय छानबीन समिति की रिपोर्ट एवं सुझावों के आधार पर आवश्यक निर्देश शामिल हैं।

पुलिस प्रधानालय ने जिलों को सुझाव कार्यान्वयन हेतु पत्र भेजा तथा उसी आधार पर जांच आगे बढ़ी।

ग) उक्त रिपोर्ट एवं स्थानीय छानबीन रिपोर्ट के आधार पर कास्की जिला अदालत ने २०८१ असोज १८ को बचतकर्ताओं की रकम के अपव्यय का मामला दायर किया।

जालसाजीपूर्ण शिकायत में नाम जोड़ा गया

मामले में जांच के दौरान तथ्य न मिलने पर पुनः शिकायत दर्ज कर रवि लामिछाने का नाम जोड़ा गया।

संसदीय रिपोर्ट और बाद में दर्ज शिकायत के आधार पर बिना अतिरिक्त जांच के अवैध अपराध जोड़ा गया और आरोप पत्र दाखिल किया गया।

२०८१ पुष ७ को सहकारी ठगी, संगठित अपराध एवं संपत्ति शोधन के साथ पूरक आरोप पत्र दाखिल हुआ।

घ) २०८१ पुष २१ को काठमांडू जिला अदालत में स्वर्णलक्ष्मी बहुउद्देश्यीय सहकारी संस्था में बचतकर्ताओं की रकम के अपव्यय का मामला दर्ज हुआ।

ङ) २०८१ वैशाख ३ को रुपन्देही जिला अदालत में सुप्रीम बचत एवं ऋण सहकारी संस्थाओं के बचतकर्ताओं के रकम के अपव्यय का मामला दर्ज था।

उपरोक्त उल्लेखित सहकारी ठगी मामलों में संगठित अपराध और संपत्ति शोधन के आरोप भी शामिल कर पूरक अभियोग पत्र दाखिल किया गया।

च) २०८१ माघ २२ को चितवन जिला अदालत में साहारा चितवन बहुउद्देश्यीय सहकारी संस्था लिमिटेड के बचतकर्ताओं की रकम के दुरुपयोग के आरोप में ठगी संबंधी मामले में याचिकाकर्ता को प्रतिवादी बनाया गया।

छ) २०८० असोज २३ को पर्सा जिला अदालत ने सानो पाइला बचत एवं ऋण सहकारी संस्था लिमिटेड के बचतकर्ताओं के रकम दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया।

उसके बाद २०८० फागुन २ को संगठित अपराध के आरोप जोड़े।

२०८२ जेठ २९ को सहकारी संचालक समिति या सदस्य न होने वाले व्यक्तियों को भी प्रतिवादी बनाकर सहकारी ठगी व संगठित अपराध के आरोप जोड़े गए।

नारायणबहादुर पहराई का आवेदन

सामान्यतः सभी सहकारी संस्थाओं में बचतकर्ताओं की रकम के दुरुपयोग का आरोप ही दर्ज है।

२) २०८२ पुष ३ को रुपन्देही के सुप्रीम सहकारी के बचतकर्ता नारायणबहादुर पहराई ने अपनी वास्तविक शिकायत अलग होने का दावा करते हुए स्वघोषणा सहित आवेदन अदालत में दायर करवाना चाहा पर दायर नहीं किए जाने के प्रमाण प्राप्त हैं।

उनके पत्र में उल्लेख है–

‘मैंने सहकारी संस्था के अलावा किसी अन्य के विरुद्ध मामला नहीं दायर किया। मुझे गलती से सहकारी में बचत करने के लिए विवश किया गया, जिसे रवि लामिछाने ने नहीं कहा। मेरी बचत के दुरुपयोग में जिन्हें जिम्मेदार नहीं हैं, उनके खिलाफ शिकायत देना उचित नहीं है। मेरा नियमित किया गया शिकायत पूर्णतः झूठी जानकारी के साथ तैयार की गई है। मेरी वास्तविक शिकायत २०८१ असोज ४ की है।’

इस स्वघोषणा को नोटरीकृत कर जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

यह मामले की अभियोजन स्थिति से भिन्न प्रतीत होता है। पीड़ित की स्वघोषणा को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

बचत है मुख्य प्राथमिकता

३) सभी मामलों की शुरुआत संसदीय विशेष छानबीन समिति से हुई और समिति की रिपोर्ट में रवि लामिछाने की कोई संलिप्तता नहीं पाई गई।

समिति ने गैरकानूनी तरीके से रकम लेने और खर्च करने वालों को कानूनी जवाबदेह बनाने के सुझाव दिए।

सहकारी से रकम सही तरीके से संस्थाओं में हस्तांतरित हुई दिखने पर इसके नियंत्रण के लिए कंपनी कानून के अनुसार सिफारिश की गई।

सहकारी पीड़ित एवं बचतकर्ता महा न्यायाधिवक्ता के कार्यालय में प्रतिनिधिमंडल के रूप में आए और ‘हमारे खिलाफ क्या-क्या मामले हैं, इससे हमारा सरोकार नहीं लेकिन हमारी बचत राशि वापस होनी चाहिए’ की गुहार लगाई।

सहकारी बचतकर्ताओं का मुख्य मुद्दा अपनी रकम वापस न मिलना और दुरुपयोग होना है। राज्य को बचतकर्ता के हित और रकम की सुरक्षा की मुख्य भूमिका निभानी चाहिए।

सहकारी से रकम वापस पाना चाहने वाले बचतकर्ता अब मामले दायर कर शिकायत कर रहे हैं।

न्याय के द्वार बंद हो गए

क) चितवन जिला अदालत को छोड़कर अन्य जिलों की अदालतों में केवल सहकारी ठगी पर अभियोजन शुरू किया गया लेकिन बाद में संगठित अपराध व संपत्ति शोधन की धाराएं जोड़कर आरोप पत्र दाखिल किया गया।

सहकारी ऐन, २०७४ (संशोधित २०८१) की धारा १३१(क) के अनुसार सहकारी ठगी का मामला मेल-मिलाप हो सकता है पर संगठित अपराध और संपत्ति शोधन में मिलापत्र संभव नहीं है।

सहकारी बचतकर्ता अपनी बचत न मिलने पर न्याय हेतू अंतिम विकल्प शिकायत करने को मजबूर हैं।

कम आय वर्ग द्वारा अर्जित बचत का शीघ्र वापसी राज्य का प्रमुख दायित्व है।

‘जानकारी के आधार पर कनक जाता है कि अभियोजन द्वारा सहकारी ठगी के साथ-साथ संगठित अपराध और संपत्ति शोधन के आरोप लगाने से पीड़ितों को न्याय का मार्ग बंद हो रहा है।’

संगठित अपराध और संपत्ति शोधन पर दंड हो सकता है, जिसमें जुर्माना या रकम जब्त होना संभव है, जो पीड़ित के हित के विपरीत है।

जमाहिर की जमा राशि अप्रत्यक्ष रूप से संपत्ति शोधन से संबंधित होने पर रकम जब्त हो सकती है और खो सकती है।

ख) विभिन्न सहकारी संचालक या भूमिका निभाने वाले फर्जी लोन देने, फर्जी खाते खोलने वालों से बचतकर्ता की रकम वसूल सकते हैं।

साथ ही ‘सहकारी से कंपनी में भेजी गई रकम के भुगतान के लिए कंपनी की संपत्ति बेच कर चुक्ता किया जा सकता है।’

इस स्थिति में संगठित अपराध और संपत्ति शोधन का आरोप बना होने से उपलब्ध कानूनी रास्ता भी बंद हो जाता है, जो पीड़ित की भावना के विपरीत है।

मिलापत्र द्वारा समाधान की राह खोलनी चाहिए, यह कानूनी औचित्य है।

ग) संसदीय विशेष छानबीन समिति के निष्कर्ष और सिफारिश ही मामले का आधार हैं।

यह चिकित्सकीय एवं कानूनी उपाय अपनाकर बचतकर्ताओं की रकम वापस दिलाई जानी चाहिए।

‘मिलापत्र का मार्ग खुला रहे’

संगठित अपराध और संपत्ति शोधन के आरोप लगाकर सहकारी बचतकर्ता मिलापत्र से रकम पाने के मार्ग को बंद होने से बचाना आवश्यक है।

संसदीय समिति के अनुसार बचत राशि जल्द से जल्द वापस होना ज़रूरी है।

इसलिए, कानूनी प्रक्रिया जारी रहते हुए भी संशोधित कानून के अनुसार निक्षेप फिर्ता की समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

घ) इसके लिए मौलिक दंड प्रक्रिया संहिता, २०७४ की धारा ३६ के अनुसार आरोप पत्र संशोधित कर पीड़ित को न्याय दिलाने की सुनिश्चितता दी जानी चाहिए।

प्रारंभ, अतिरिक्त व पूरक आरोप पत्रों में सहकारी ठगी के अलावा संगठित अपराध व संपत्ति शोधन के आरोप हटाकर निक्षेपकर्ता के रकम वापसी की संभावना बनाए रखने हेतु संशोधन करना सुझावित है।

संगठित अपराध व संपत्ति शोधन के आरोप वापस करने का निर्णय

४) उपरोक्त तथ्य और कानूनी आधार पर यह निर्णय लिया गया है।

क) याचिकाकर्ता रवि लामिछाने ने अपने ऊपर राजनीतिक प्रतिशोध के लिए सहकारी ठगी, संगठित अपराध व संपत्ति शोधन के आरोप लगाए जाने का दावा कर निकासी की मांग की।

मौलिक दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ३६ के अनुसार अभियोग संशोधन आवश्यक है जिससे पीड़ित बचतकर्ता के हित को प्राथमिकता मिले।

कास्की, काठमांडू, रूपन्देही, पर्सा और चितवन जिलों की अदालतों में सहकारी ठगी का आरोप बनाए रखते हुए संगठित अपराध और संपत्ति शोधन के आरोप हटाकर संशोधन करने की अनुमति दी गई।

इस निर्णय के अनुसार संबंधित जिलों के सरकारी वकील कार्यालयों को कार्रवाई आगे बढ़ाने हेतु सूचित किया जाएगा।

२०८२ पुष ३०

सबिता भण्डारी

महा न्यायाधिवक्ता

………………….

इसी प्रकार २०८२ माघ २ को उपरोक्त निर्णय के प्रकरण संख्या ४(क) के ११वें हरफ में ‘सम्पत्ति शोधन के अभियोग दावा नजदीक ‘निज के हक में’ शब्द हटा दिए गए।

२०८२ माघ २

सबिता भण्डारी

महा न्यायाधिवक्ता

(महा न्यायाधिवक्ता कार्यालय द्वारा सर्वोच्च अदालत में प्रस्तुत निर्णय का संपादित अंश)

रौतहट में करंट लगने से एक महिला की मौत

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षापछि तयार गरिएको।

  • रौतहट के चन्द्रपुर नगरपालिका-8 बसन्तपुर में करंट लगने से 84 वर्षीय कान्छी देवी चौधरी की मौत हुई।
  • उनका निधन चपुर स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान हुआ, नेपाल पुलिस ने जानकारी दी।
  • इस घटना की आवश्यक जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

8 चैत्र, रौतहट। रौतहट के चन्द्रपुर नगरपालिका-8 बसन्तपुर में करंट लगने से एक महिला की मौत हुई है।

गुजरा नगरपालिका-1 मनहर्वा की निवासी 84 वर्षीय कान्छी देवी चौधरी को करंट लगने से रविवार दोपहर मृत्यु हुई, नेपाल पुलिस केन्द्रीय समाचार कक्ष ने जानकारी दी।

धार में लगाई गई इलेक्ट्रिक मोटर से करंट लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हुईं उनकी चपुर स्थित चपुर अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हुई है।

इस संबंध में आवश्यक जांच पुलिस द्वारा जारी है।

नेपाल चुनाव २०८२: बालेन सरकार में मंत्री किसे चुनते हैं और मंत्रिमंडल कैसा होगा?

रवि लामिछाने और बालेन शाह

तस्वीर स्रोत, Reuters

तस्वीर का कैप्शन, चुनाव में भाग लेते समय रास्वपा ने बालेन्द्र शाह को भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया था

समानुपातिक चुनाव प्रणाली की मतगणना समाप्त होते ही नई सरकार के गठन के समय को लेकर जनता की नजरें लगी हैं।

प्रत्यक्ष और समानुपातिक चुनाव प्रणाली के माध्यम से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेताओं ने वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) के नेतृत्व में नई सरकार बनने की बात कही है। चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में आगे प्रस्तुत किया था।

रास्वपा के एक नेता ने समानुपातिक सांसद चयन के बाद सरकार गठन संबंधी चर्चा शुरू करने की जानकारी दी है।

निर्वाचन आयोग दलों को समानुपातिक सांसद चुनने की सूचना जल्द भेजने की तैयारी में है। आयुक्त सगुन शम्शेर जबर ने कहा, “हम पूरी कोशिश करेंगे कि आज ही पत्र भेज सकें।”

समानुपातिक सांसद चयन के लिए दो दिन का समय दिया जा सकता है और चैत्र ५ तक अंतिम चुनाव रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपने की योजना है, जबर ने बताया।

एचजेएनबीएल में टाइम्स की लगातार पाँचवीं जीत

टाइम्स इंटरनेशनल क्लब ने हिमालयन जावा नेशनल बास्केटबॉल लीग २०२६ में रॉयल को पराजित करते हुए लगातार पाँचवीं जीत हासिल की है। इस लीग में ८ टीमें प्रतिस्पर्धा कर रही हैं और शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में प्रवेश करेंगी, जिसमें विजेता को नकद ४ लाख का पुरस्कार दिया जाएगा। प्रतियोगिता में मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (एमवीपी) को भी पुरस्कार प्रदान किए जाने की नेबा ने जानकारी दी है। ७ चैत्र, काठमांडू।

हिमालयन जावा नेशनल बास्केटबॉल लीग (एचजेएनबीएल) २०२६ में टाइम्स इंटरनेशनल क्लब ने लगातार पाँचवीं जीत दर्ज की है। त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला के कवर हॉल में शनिवार को खेले गए मैच में टाइम्स ने रॉयल्स को ९५-६१ से हरा दिया। यह लीग में टाइम्स की लगातार पाँचवीं जीत है। पहले मैच में गोल्डनगेट से हारने के बाद टाइम्स ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लगातार जीत हासिल की है। ६ मैच खेलकर टाइम्स ने ११ अंक जोड़ लिए हैं। वहीं रॉयल की यह पाँचवीं हार है और ६ मैचों से उसके ७ अंक हैं।

टाइम्स ने सभी चार क्वार्टर में बढ़त बनाई; स्कोर रहा २९-१७, १७-१४, २५-१८ और २४-१२। टाइम्स के कप्तान सदिह प्रधान ने सर्वाधिक २४ अंक अर्जित किए। शुक्रवार रात हुए अन्य मैच में आर्मी ने प्लेबक्स अरेना को १०२-८६ से हराया। नेपाल बास्केटबॉल संघ (नेबा) के आयोजन में हो रहे इस दूसरे संस्करण की एचजेएनबीएल में कुल ८ टीमें भाग ले रही हैं। डबल राउंड रॉबिन फॉर्मेट में आयोजित इस लीग में कुल ५६ मैच खेले जाएंगे।

लीग चरण के बाद चार शीर्ष टीमें प्लेऑफ में प्रवेश करेंगी। प्लेऑफ में पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें प्रथम क्वालिफायर मैच में भिड़ेंगी, जबकि तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें एलिमिनेटर मैच में मुकाबला करेंगी। प्रथम क्वालिफायर के पराजित टीम और एलिमिनेटर की विजेता टीम के बीच दूसरा क्वालिफायर खेला जाएगा। पहले और दूसरे क्वालिफायर की विजेता टीमों के बीच फाइनल मुकाबला होगा। प्रतियोगिता के विजेता को नकद ४ लाख, उपविजेता को २ लाख और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को १ लाख पुरस्कार राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (एमवीपी) को आकर्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, इसकी नेबा ने घोषणा की है।

बालेन सरकारले नियुक्तिमा कस्तो लगाउला युक्ति ? – Online Khabar

बालेन सरकार की नियुक्ति नीति कैसी होगी?

समाचार का सारांश विश्लेषित किया गया है। राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के नेताओं का कहना है कि राजनीतिक नियुक्ति प्राप्त व्यक्तियों को सुविधा प्रदान करनी होगी। रास्वपा ने संवैधानिक निकायों में सक्षम और स्वतंत्र व्यक्तियों की नियुक्ति के लिए संबंधित कानूनों में संशोधन करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के समर्थकों ने भी राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष के अध्यक्ष आदर्शकुमार श्रेष्ठ की नियुक्ति को गलत बताया है। सरकारी अनियमितताओं के खिलाफ नवयुवाओं द्वारा किए गए जेएनजी आंदोलन के बाद राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी को लगभग दो-तिहाई का अभूतपूर्व जनादेश मिला। इस अपार जनविश्वास का अर्थ केवल सत्ता या नेतृत्व का परिवर्तन नहीं है, बल्कि वर्षों से जड़ जमा चुकी बुरी शासन व्यवस्था को समाप्त करके अच्छी शासन व्यवस्था स्थापित करना है। अच्छी शासन व्यवस्था केवल भाषणों या दुग्ध शब्‍दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे परिणामसर्वक कार्यवाही से प्रदर्शित होना होगा। परिवर्तन की सच्ची शुरुआत करने के लिए पहले मौजूदा राज्य संस्था की कमजोरियां और कार्यशैली को गहराई से समझना आवश्यक है। यही अस्वस्थाओं की वास्तविक तस्वीरों को उजागर करते हुए अच्छी शासन व्यवस्था के मार्गदर्शन के लिए शुरू की गई समाचार और विचारों की श्रृंखला है– जनादेश सुशासन।

नई सरकार गठन की तैयारी में लगी राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के नेताओं ने राजनीतिक नियुक्ति प्राप्त व्यक्तियों से ‘मार्गप्रशस्त’ करने की मांग करनी शुरू कर दी है। एक नेता के अनुसार पूर्व सरकारों द्वारा विभिन्न निकायों में की गई नियुक्तियों की सूची तैयार की जा रही है। नेताजी ने कहा कि योग्य और विशेषज्ञ व्यक्तियों को नियुक्त करके राज्य संयंत्र को चुस्त-दुरुस्त बनाया जाएगा और राजनीतिक नियुक्ति प्राप्त पदाधिकारियों से उनके पद छोड़ने का आग्रह किया गया है। पिछले चुनावी घोषणापत्र में रास्वपा ने सक्षम और स्वतंत्र व्यक्तियों की नियुक्ति के लिए संबंधित कानूनों में संशोधन का उल्लेख किया था। उनके वचनपत्र में कहा गया है, ‘अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ऐन २०४८, संवैधानिक परिषद् ऐन २०६६ और न्याय परिषद् ऐन २०७३ में संस्थागत क्षमता, क्षेत्राधिकार, नियुक्ति प्रक्रिया और कर्मचारी चयन संबंधित संशोधन कर स्वतंत्र, सक्षम और जिम्मेदार संवैधानिक निकायों की संस्थागत शासन प्रणाली मजबूत करेंगे।’ कानून संशोधन और विभिन्न निकायों में हजारों पदों पर फेरबदल की तैयारी कर रही रास्वपा के लिए पिछले कुछ उदाहरण उपयोगी हो सकते हैं।

उनमें से एक उदाहरण राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष के अध्यक्ष पद के लिए आदर्शकुमार श्रेष्ठ की नियुक्ति है। चैत १ को सरकार के प्रवक्ता ने मंत्रिपरिषद द्वारा किए गए राष्ट्रीय सभा सदस्य सिफारिश, जाँचबुझ आयोग की रिपोर्ट ग्रहण और जलवायु परिवर्तन संबंधी अनुदान स्वीकृति के साथ-साथ कोष अध्यक्ष श्रेष्ठ की नियुक्ति सार्वजनिक नहीं की थी। संभवतः सरकार के पास इस निर्णय को सार्वजनिक करने का आत्मविश्वास नहीं था। कठिन परिस्थितियों में समय पर चुनाव कर लोकप्रियता हासिल करने वाली प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के समर्थक भी इस फैसले का समर्थन नहीं कर पाए। इस निर्णय को कई कारणों से गलत माना गया। पहला, यह नया जनादेश के विपरीत है। पूर्व सचिव शारदाप्रसाद त्रिताल का कहना है, ‘चुनाव समाप्त होने के बाद नए सरकार बनने के समय लिए गए निर्णय नैतिक दृष्टि से उपयुक्त नहीं हैं। यह एक गलत परंपरा है, जिसे सुशीला कार्की ने भी दोहराया है।’

दूसरा, विशेषज्ञता के लिहाज से श्रेष्ठ कोष अध्यक्ष बनने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। कोष, जो प्रकृति की मूल्यांकन, सम्मान और संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, से उनका कोई संबंध नहीं है। वे सर्वोच्च अदालत के कर्मचारी के रूप में प्रधान न्यायाधीश के निजी सहायक के रूप में काम कर चुके हैं और उनका क्षेत्र प्रौद्योगिकी है। अन्य पूर्व सचिव डॉ. द्वारिकानाथ ढुंगेल कहते हैं, ‘आदर्श श्रेष्ठ के पास विषय विशेषज्ञता नहीं थी।’ तीसरा, यह पिछले समय से शक्ति और प्रभाव का उपयोग कर नियुक्तियों की निरंतरता है। डॉ. ढुंगेल इसे स्वार्थ के द्वन्द्व के रूप में देखते हैं। संवैधानिक पदों की स्थिति भी इन नियुक्तियों से अलग नहीं है। वे कहते हैं कि प्रधानमंत्री, विपक्षी दलों के नेता और सभामुख अनुकूल व्यक्तियों को नियुक्त करते हैं। ‘यह ध्यान रखा जाता है कि किसे भेजा जाए जिससे उनके भ्रष्टाचार या घोटालों के प्रकरण उजागर न हों।’

अवकाश से पहले की गई नियुक्तियाँ! २०८० जेठ में मुख्य सचिव शंकरदास वैरागी का कार्यकाल बाकी रहते हुए उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और तीन दिनों बाद अवकाश प्राप्त कर रहे सचिव वैकुण्ठ अर्याल को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। तीन महीने से अधिक का समय बचते हुए वैरागी ने इस्तीफा दिया और उन्हें सुरक्षा परिषद में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया। इसी तरह, महालेखापरीक्षक तोयम राया तथ्यांक कार्यालय के सचिव थे। २०८१ में महालेखापरीक्षक नियुक्ति के बाद संसदीय सुनवाई समिति द्वारा अनुमोदित किए गए। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल नेपाल की पूर्व अध्यक्ष पद्मिनी प्रधानांग राय बताती हैं कि तथ्यांक कार्यालय में रहते हुए उन्होंने निर्णय देखे और महालेखापरीक्षक बनने की नियुक्ति को स्वार्थ के द्वन्द्व के रूप में माना। उनका कहना है, ‘ऐसे मामलों को रोकने के लिए कम से कम तीन वर्ष का कुलिंग ऑफ पीरियड होना चाहिए।’

२०७५ चैत में संवैधानिक परिषद ने दिनेश थपलियालाई मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद के लिए सिफारिश की जब वे संघीय मामिला और सामान्य प्रशासन मंत्रालय के बहालवाला सचिव थे; मतलब एक पद पूरा किए बिना दूसरे पद की व्यवस्था हो चुकी थी। इससे पहले २०७४ वैशाख में संवैधानिक परिषद ने महालेखापरीक्षक के पद के लिए सरकार के बहालवाला सचिव टंकमणि शर्मा का नाम सिफारिश किया था। तब शर्मा प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय में सचिव थे। २०७४ में मुख्य सचिव डॉ. सोमलाल सुवेदी के कार्यकाल के दौरान वे एशियाई विकास बैंक (एडीबी) में कार्य करने गए थे जहां उन्होंने उपकार्यकारी निर्देशक के रूप में सेवाएं दीं। निजामती सेवा के उच्च पदस्थ कर्मचारियों ने अवकाश से पूर्व नियुक्ति पाने के लिए ऐतिहासिक प्रदर्शन दिया। संवैधानिक परिषद से हटाए जाने वाले ‘कुलिंग ऑफ पीरियड’ प्रावधान को लेकर वे सीमा पार कर गए थे। प्रतिनिधि सभा ने विधेयक में विशिष्ट और प्रथम श्रेणी कर्मचारियों को लाभ देने के लिए गोपनीय रूप से ‘बाहेक’ शब्द जोड़ा था। इस गड़बड़ी की जांच के दौरान संसदीय छानबिन समिति के अध्यक्ष रामहरी खतिवड़ा, मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल और सचिव सुरजकुमार दुराइ दोषी पाए गए। समिति ने उन्हें नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी दी, जिसके बाद खतिवड़ा को सभापति पद से इस्तीफा देना पड़ा। विडंबना यह रही कि कांग्रेस और नेकपा एमाले ने खतिवड़ा को फिर से संसदीय सुनवाई समिति का सभापति बना दिया। ‘रास्वपा को पुराने दलों से सीखने वाली बात यही है,’ संसद के एक सहसचिव ने कहा। ‘ऐसे कृत्यों ने जनता की अपमानजनक भावना को जन्म दिया जो जेएनजी आंदोलन का आधार बन गया।’

निरंतर सुधार की अपेक्षा है; बेरोज़गारी उच्च देशों में राजनीतिक नियुक्ति रोजगार के अवसर के रूप में ली जाती है। लेकिन राजनेताओं का प्राथमिक कर्तव्य सभी के लिए रोजगार अवसर बनाए रखना होना चाहिए। प्रभावशाली नेता अपने परिजनों, संबंधियों और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर योग्य और इमानदार व्यक्तियों को अवसर नहीं देते, जिससे प्रशासन प्रभावित होता है, प्रशासन विशेषज्ञ काशीराज दाहाल का मानना है। सबसे बड़ी समस्या नियुक्ति में दलालों और दबाव का होना है। दाहाल कहते हैं, ‘नियुक्ति देने वाले अकसर ‘ऐसे व्यक्ति दीजिये जिसकी खिलाफ अख्तियार में कोई मामला न चले’ पर जोर देते हैं।’ उच्चस्तरीय प्रशासन सुधार की सलाह देने वाले दाहाल कहते हैं, ‘अच्छी शासन व्यवस्था लागू करने के लिए दबाव और प्रभाव से मुक्त होकर निर्णय लेने होंगे।’ वर्तमान में संवैधानिक निकायों में की गई नियुक्तियां अक्सर असंवैधानिक होने के आरोपों के कारण विवादों में फंसती हैं, जो अदालत भी पहुंच जाती हैं। २०७७ में हुए संवैधानिक निकायों के ५२ पदाधिकारियों की नियुक्ति को सर्वोच्च न्यायालय ने चार साल बाद निरुपित किया था। दाहाल का सुझाव है कि ऐसी नियुक्ति विवादों से बचनी चाहिए। वे कहते हैं, ‘सरकार को जहाँ जरूरत नहीं वहां से हट जाना चाहिए, खुद-मुश्किलों से न गुजरना।’ संवैधानिक निकायों में नियुक्ति योग्य और उच्च छवि के व्यक्ति ही होने चाहिए। लेकिन बार-बार विवादित व्यक्तियों को सिफारिश में शामिल होना प्रश्न उठाता है। पूर्व सचिव त्रिताल नई सरकार को कानूनी सुधार के लिए सुझाव देते हैं। ‘सैद्धांतिक और नैतिक क्षेत्रों में कमी के कारण इसे कानून में लाना बेहतर होगा।’ प्रशासन विशेषज्ञ दाहाल कहते हैं कि प्रक्रिया में भ्रष्टाचार से समस्या बढ़ती है। उनका मानना है, ‘स्वार्थ के द्वंद्व को रोकने वाला कानून आवश्यक है, रसूखदार संसदीय सुनवाई का कोई कोई अर्थ नहीं।’

नई सरकार की ‘लिटमस टेस्ट’ १८ चैत को होगी, जब सर्वोच्च अदालत के प्रधान न्यायाधीश प्रकाशमानसिंह राउत उम्र सीमा के कारण सेवानिवृत्त होंगे। इसके बाद रिक्त प्रधान न्यायाधीश पद के लिए २६ फागुन को न्याय परिषद ने सर्वोच्च अदालत के छह न्यायाधीशों के नाम संवैधानिक परिषद को सिफारिश की है। ये हैं: सपना प्रधान मल्ल, कुमार रेग्मी, हरि फुयाँल, मनोजकुमार शर्मा, नहकुल सुवेदी और तिलप्रसाद श्रेष्ठ। संसदीय सुनवाई समिति के अनुमोदन के बाद राष्ट्रपति द्वारा प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति की संवैधानिक व्यवस्था है। न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में प्रस्तावित व्यक्तियों की सुनवाई रास्वपा की पहली परीक्षा होगी, ऐसा विश्लेषकों का मानना है। पूर्व सचिव डॉ. ढुंगेल कहते हैं, ‘राजनीतिकरण न करने का दावा एक बात है, व्यवहार में लागू करना अलग बात। आने वाली सरकार को प्रधान न्यायाधीश पद की नियुक्ति में अपनी परीक्षा देनी होगी।’ वे दलगत भागीदारी को पूरी तरह रोकने की सलाह देते हैं। ‘न्यायपालिका को मजबूत करने के लिए लोकसेवा आयोग जैसी निष्पक्ष नियुक्ति प्रणाली जरूरी है, बिना इसके सुधार संभव नहीं।’

पूर्व सरकारें पारदर्शिता में विफल रहीं और अच्छी शासन व्यवस्था कायम नहीं कर सकीं, इसके खिलाफ हुए आंदोलनों के बाद हुए चुनाव में रास्वपा को दो-तिहाई बहुमत मिला। जनादेश प्राप्त करके आई सरकार को पुरानी गलतियाँ दोहराने से बचना है। जनादेश सुशासन श्रृंखला के तहत आवश्यक प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जाएंगी।

बालेन सरकारले नियुक्तिमा कस्तो लगाउला युक्ति ? – Online Khabar

बाले सरकार की नियुक्ति रणनीति क्या होगी?

समाचार सारांश

पुनरावलोकन किया गया।

  • राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेताओं ने कहा है कि राजनीतिक नियुक्ति करने वाले व्यक्तियों को अग्रिम भूमिका निभानी चाहिए।
  • आरएसपी ने सक्षमता और स्वतंत्रता वाले व्यक्तियों को संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्त करने के लिए संबंधित कानूनों में संशोधन करने का संकल्प व्यक्त किया है।
  • प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के समर्थकों ने राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष के अध्यक्ष के पद पर आदर्शकुमार श्रेष्ठ की नियुक्ति पर आलोचना की है।

युवा आंदोलन जेएनजी के तहत शासन में अनियमितताओं के खिलाफ संघर्ष के पृष्ठभूमि पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने अभूतपूर्व दो-तिहाई बहुमत प्राप्त किया है। यह जनादेश सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि जड़ में गहराई से जमा भ्रष्टाचार को समाप्त कर बेहतर शासन की शुरुआत का संकेत है।

अच्छा शासन केवल अच्छे भाषणों से नहीं बल्कि प्रभावी और उद्देश्यपूर्ण कार्यों से झलकना चाहिए। वास्तविक बदलाव शुरू करने के लिए वर्तमान राज्य तंत्र की कमियों और कार्यप्रणाली की पहचान आवश्यक है। इन प्रणालीगत खामियों को उजागर करते हुए बेहतर शासन की दिशा दिखाने के उद्देश्य से ‘अच्छे शासन का जनादेश’ शीर्षक से यह समाचार और विचार श्रृंखला शुरू की गई है।

नए सरकार गठन की दिशा में बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेताओं ने राजनीतिक नियुक्ति किए गए लोगों से ‘मार्ग स्पष्ट करने’ की अपेक्षा जताई है। एक आरएसपी नेता ने पिछले सरकारों द्वारा विभिन्न संस्थाओं में की गई नियुक्तियों की सूची तैयार करने का खुलासा किया है।

उस नेता के अनुसार, दक्ष और कुशल पेशेवरों को सरकारी तंत्र में लाया जा रहा है और राजनीतिक नियुक्त कर्मचारियों को इस्तीफा देने को कहा गया है।

हाल ही के चुनावी घोषणा-पत्र में आरएसपी ने योग्य एवं स्वतंत्र व्यक्तियों को नियुक्ति देने हेतु संबंधित कानूनों में संशोधन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

घोषणा-पत्र में उल्लेख है, ‘हम संस्थागत सशक्तिकरण, क्षेत्राधिकार, नियुक्ति प्रक्रिया और कर्मचारी चयन से संबंधित आयोग दुरुपयोग अनुसन्धान ऐन 1991, संवैधानिक परिषद् ऐन 2010 एवं न्याय परिषद् ऐन 2017 को संशोधित कर स्वतंत्र, सक्षम और उत्तरदायी संवैधानिक निकायों में बेहतर शासन सुदृढ़ करेंगे।’

आरएसपी द्वारा कानून संशोधन कर विभिन्न संस्थाओं में हजारों पदों में फेरबदल की योजना के बाद कुछ पुराने घटनाक्रम शिक्षाप्रद हो सकते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष के अध्यक्ष आदर्शकुमार श्रेष्ठ की नियुक्ति (अधिक जानकारी यहाँ)।

चैत्र 1 को मंत्रिपरिषद की सिफारिश, राष्ट्रिय सभा सदस्यों की नियुक्ति, समीक्षा आयोग की रिपोर्ट और जलवायु परिवर्तन संबंधित अनुदान की स्वीकृति के बीच सरकार ने सार्वजनिक रूप से अध्यक्ष श्रेष्ठ की नियुक्ति की पुष्टि करने से इनकार किया, संभवतः इस निर्णय को सार्वजनिक करने में हिचकिचाहट के कारण।

आदर्शकुमार श्रेष्ठ।

दरअसल, प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के समर्थक, जिन्होंने कठिन परिस्थिति में समयबद्ध चुनाव कराने की प्रशंसा पाई, भी इस नियुक्ति को उचित नहीं मानते और इसे बचाने में असमर्थ हैं।

पहला, यह निर्णय नए जनादेश के विपरीत है। पूर्व सचिव शरदप्रसाद त्रिताल ने कहा, ‘चुनाव के बाद नई सरकार द्वारा की गई नियुक्ति नैतिक रूप से गलत परंपरा है,’ और प्रधानमंत्री कार्की ने भी इसी चिंता को व्यक्त किया है।

दूसरा, विषयगत ज्ञान की दृष्टि से, श्रेष्ठ प्रकृति मूल्यांकन, सम्मान और संरक्षण कोष के अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारी और मुख्य न्यायाधीश के व्यक्तिगत सहायक के रूप में कार्य किया है तथा उनकी पृष्ठभूमि तकनीकी है, पर्यावरण संरक्षण में नहीं। पूर्व सचिव डॉ. द्वारिकानाथ ढुंगेल ने टिप्पणी की, ‘आदर्श श्रेष्ठ के पास आवश्यक विषयगत ज्ञान नहीं था।’

तीसरा, यह नियुक्ति शक्ति और प्रभाव के निरंतर प्रयोग को दर्शाती है। डॉ. ढुंगेल ने ऐसे नियुक्तियों को स्वार्थों के टकराव के रूप में व्याख्यायित किया।

पूर्व सचिव डॉ. द्वारिकानाथ ढुंगेल

संवैधानिक पदों की स्थिति इसी प्रकार है। डॉ. ढुंगेल कहते हैं कि प्रधानमंत्री, विपक्षी नेता और सभापतियों द्वारा अक्सर व्यक्तिगत या राजनीतिक प्राथमिकताओं पर नियुक्ति की जाती है। ‘ऐसी नियुक्तियाँ की जाती हैं जो भ्रष्टाचार या घोटालों का विषय न बनें,’ उन्होंने कहा।

इच्छित आयु से पहले की नियुक्ति!

जेठ 2080 में प्रमुख सचिव शंकरदास बैरागी के अतिदायित्व पूर्व अवकाश लेकर इस्तीफा देने के बाद तीन दिनों में बिद्युन्‌ठ आर्याल को प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया।

बैरागी को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में स्थानांतरित किया गया था।

इसी प्रकार, 2081 में ऑडिटर जनरल टॉयम राया, जो पहले संघीय तथ्यांक कार्यालय के सचिव थे, उनकी नियुक्ति संवैधानिक परिषद द्वारा सुझाई गई थी और संसदीय सुनवाई समिति ने स्वीकृति दी।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल नेपाल की पूर्व अध्यक्ष पद्मिनी प्रधानांग ने तथ्यांक कार्यालय में राया की नियुक्ति को हित संघर्ष बताया। ‘इसे कम से कम तीन वर्ष की कुलिंग-ऑफ अवधि दी जानी चाहिए,’ उन्होंने कहा।

चैत्र 2075 में संविधान परिषद ने निर्वाचन आयोग प्रमुख के रूप में दिनेश थापालिया की सिफारिश की, जो संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय के सचिव थे, और उन्हें एक सुरक्षित अन्य पद दिलाकर नियुक्ति लेने की योजना थी।

पहले वैशाख 2074 में संविधान परिषद ने प्रधानमंत्री और मन्त्रिपरिषद के कार्यालय के सचिव तनकमणि शर्मालाई ऑडिटर जनरल के रूप में सिफारिश की थी, जबकि वे उसी कार्यालय के सचिव थे।

2074 में प्रमुख सचिव डॉ. सोमलाल सुवेदी ने अपने शेष कार्यकाल से इस्तीफा देकर एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) में नौकरी शुरू की। उन्होंने साउन 2075 तक पद संभाला, जबकि स्रावण 2074 से फिलीपींस में एडीबी के उप कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत थे।

पिछले असार-श्रावण में एक घटना ने वरिष्ठ कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति से पहले नियुक्ति पाने का तरीका दिखाया। संघीय सेवा विधेयक में ‘कूलिंग-ऑफ अवधि’ हटाने का प्रयास हुआ था, लेकिन कर्मचारियों ने इसका कड़ा विरोध किया। इसी दौरान प्रतिनिधि सभा ने गुपचुप तरीके से विशिष्ट और प्रथम श्रेणी कर्मचारियों के लिए ‘बाहेक’ शब्द जोड़कर विशेष सुविधा दी।

संसदीय छानबीन समिति ने रामहिरी खतिवडा (अध्यक्ष), प्रमुख सचिव एकनारायण आर्याल और सचिव सुरज कुमार दुुमाई को इस अनियमितता का जिम्मेदार ठहराया।

समिति के नैतिक और राजनीतिक जवाबदेही के आह्वान के बाद खतिवडा को अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। परंतु कुछ समय बाद कांग्रेस और एमाले द्वारा उन्हें पुनः संसदीय सुनवाई समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

‘आरएसपी को पुराने दलों से सीख लेकर वही गलतियाँ नहीं करनी चाहिए,’ संघीय संसद के उप-सचिव ने कहा। ‘ऐसे कार्यों ने जनता का अपमान किया और जेएनजी आंदोलन को जन्म दिया।’

निरंतरता के बीच प्रगति की उम्मीद

ज्यादा बेरोजगारी वाले देशों में राजनीतिक नियुक्तियों को रोजगार के अवसर के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन राजनीतिक नेताओं की मुख्य जिम्मेदारी सभी के लिए रोजगार सृजन का वातावरण तैयार करना है।

सार्वजनिक प्रशासन विशेषज्ञ काशीराज दहाल कहते हैं कि शक्तिशाली नेता अपने करीबी और समर्थकों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे सक्षम और ईमानदार व्यक्तियों को अवसर नहीं मिलता और प्रशासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

निर्णयों में अस्वाभाविक प्रभाव और दबाव सबसे बड़ी समस्या है। दहाल ने कहा, ‘नियुक्ति करने वाले प्रायः ऐसे लोगों को प्राथमिकता देते हैं जिनपर भ्रष्टाचार जांच आयोग कोई मामला न कर सके।’

उच्च स्तरीय प्रशासनिक सुधार सुझाव आयोग के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने निर्देश दिया था, ‘बेहतर शासन के लिए निर्णय दबाव और प्रभाव-मुक्त होना आवश्यक है।’

सार्वजनिक प्रशासन विशेषज्ञ काशीराज दहाल

संवैधानिक निकायों में नियुक्तियों को अकसर असंवैधानिक ठहराकर न्यायालय में चुनौती दी जाती है।

2077 में सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक निकायों में 52 पदाधिकारियों की नियुक्ति विवाद का पांच वर्षों बाद अंत किया था।

दहाल ने सुझाव दिया कि ऐसी नियुक्तियां अदालत तक न पहुंचें। ‘सरकार को सेवा की आवश्यकता नहीं लगती तो आसानी से छोड़ देना चाहिए; बार-बार मुकदमा करना उचित नहीं है,’ उन्होंने कहा।

संवैधानिक निकायों में विश्वसनीय व्यक्ति की नियुक्ति जरूरी है, पर विवादित व्यक्तियों को नामित किए जाने की चिंता बनी हुई है।

पूर्व सचिव त्रिताल ने नए सरकार को कानूनी संशोधन कर आगे बढ़ने की सलाह दी। ‘सैद्धांतिक और नैतिक पक्ष में कुछ चूक हुई थी, इसलिए समाधान कानून में है,’ उन्होंने कहा।

सामान्य स्तर पर बदलाव होने पर भी भ्रष्ट अभ्यास समस्या को और गहरा करता है। दहाल ने कहा, ‘हित संघर्ष रोकने के लिए कानूनी व्यवस्था जरूरी है; संसदीय सुनवाई केवल नाटकीय होती है।’

नई सरकार की ‘लिटमस टेस्ट’

चैत्र 18 को मुख्य न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह राउत उम्र सीमा पूरी करवानिर्वाचन होंगे। उनके इस्तीफे के बाद फागुन 26 को न्याय परिषद सर्वोच्च न्यायालय के छह न्यायाधिशों के नाम संवैधानिक परिषद को सिफारिश करेगी और मुख्य न्यायाधीश के रिक्त पद को भरने का प्रस्ताव रखेगी।

सिफारिश के लिए चुने गए न्यायाधीश हैं सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी, हरि फुयाल, मनोजकुमार शर्मा, नाहाकुल सुवेदी और तिलप्रसाद श्रेष्ठ। संसदीय सुनवाई समिति की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति संवैधानिक रूप से मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करेंगे।

विश्लेषक इसे आरएसपी की मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति में पहली बड़ी परीक्षा मान रहे हैं। पूर्व सचिव डॉ. ढुंगेल ने कहा, ‘राजनीतिकरण ना करने की बात करना एक बात है, उसे व्यवहार में लागू करना दूसरी। नई सरकार की परीक्षा होगी कि वे किसे नियुक्त करते हैं।’

डॉ. ढुंगेल ने न्यायिक नियुक्तियों में गुटीय गठजोड़ को पूरी तरह समाप्त करने की आवश्यकता बताई। ‘न्यायपालिका को सार्वजनिक सेवा आयोग जैसे उचित चयन प्रणाली के बिना सशक्त नहीं बनाया जा सकता,’ उन्होंने जोर दिया।

पिछली सरकारें पारदर्शी नहीं थीं और बेहतर शासन स्थापित नहीं कर सकी थीं, जिसने आरएसपी को दो तिहाई बहुमत दिलाया। जनादेश पाने वाली पार्टी पुरानी गलतियां दोहराने में सक्षम नहीं है।

अच्छे शासन का जनादेश श्रृंखला –

गगन द्वारा दिया गया नैतिक राजीनामा कांग्रेस ने किया अस्वीकार

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थाप का राजीनामा अस्वीकार किया गया है।
  • प्रतिनिधि सभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने राजीनामा दिया था।
  • पार्टी के केंद्रीय कार्यालय सानेपामा हुई बैठक में उपाध्यक्ष विश्वप्रकाश शर्मा द्वारा प्रस्तुत अध्यक्ष के राजीनामे को अस्वीकार करने का प्रस्ताव पारित किया गया है, प्रवक्ता देवराज चालिसे ने जानकारी दी है।

८ चैत्र, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थाप द्वारा प्रतिनिधि सभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिया गया राजीनामा पार्टी के केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक ने अस्वीकार कर दिया है।

शुक्रवार और रविवार को सानेपामा हुई पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की बैठक में गगन के राजीनामा को अस्वीकार करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव को उपाध्यक्ष विश्वप्रकाश शर्मा ने बैठक में रखा था।

इस प्रस्ताव के अस्वीकृत होने की जानकारी प्रवक्ता देवराज चालिसे ने दी है।

‘अध्यक्ष श्री गगन कुमार थाप ने फागुन २१ को सम्पन्न प्रतिनिधि सभा चुनाव के परिणामों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी लेकर विधान की धारा २६ (१) के अनुसार उपाध्यक्ष को प्रस्तुत किया गया राजीनामा केन्द्रीय कार्यसमिति की इस बैठक ने सर्वसम्मति से अस्वीकार करने का निर्णय लिया है,’ चालिसे ने जारी किए गए विज्ञप्ति में कहा।

नेपाल निर्वाचन २०८२ प्रतिनिधि सभा: मत परिणाम संख्या और मानचित्र में

 नेपाल निर्वाचन २०८२

    • लेखक, केशव कोइराला
    • भूमिका, बीबीसी न्यूज नेपाली
  • पढ़ने का समय: १ मिनट

निर्वाचन आयोग ने प्रतिनिधि सभा निर्वाचन का अंतिम मत परिणाम घोषित कर दिया है। मतदान फागुन २१, बिहीवार को सम्पन्न हुआ था।

प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली में, जहाँ ‘पहली आवक विजेता’ की व्यवस्था है, कुल १६५ निर्वाचन क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी ने १२५ स्थानों पर जीत हासिल की है। समानुपातिक प्रणाली में भी यह पार्टी ११० सीटों में से ५७ सीटें पाने में सफल रही है, जिसे निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को सार्वजनिक किया। यहाँ और जानकारी देखें।

आयोग के अनुसार कुल १,८९,०३,८६९ मतदाताओं में से प्रत्यक्ष तंत्र में १,११,६८,०३२ और समानुपातिक तंत्र में १,१२,८०,६१७ ने मतदान किया। हालाँकि प्रत्यक्ष तंत्र में ९४.५५ प्रतिशत और समानुपातिक में ९६.०५ प्रतिशत मतों की गणना सफल हुई है।

प्रत्यक्ष











समानुपातिक











समानुपातिक प्रणाली में, कुल सदस्यों की संख्या के अनुसार वे दल जिनके उम्मीदवारों को कम से कम तीन प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं, जैसे राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी, नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले, नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी, श्रम संस्कृति पार्टी तथा राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी, सीटें प्राप्त कर रहे हैं।

प्रत्यक्ष प्रणाली के परिणाम आते ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में उन दलों के उम्मीदवारों की समानुपातिक सूची सार्वजनिक की जाएगी।

वेलबेक के दो गोलों से ब्राइटन ने लिवरपूल को हराया

७ चैत, काठमाडौं। फॉरवर्ड ड्यानी वेलबेक के दो गोलों की मदद से इंग्लिश प्रीमियर लीग फुटबॉल में शनिवार शाम खेले गए मैच में ब्राइटन ने लिवरपूल को पराजित किया है।

घरेलू मैदान पर हुए इस मुकाबले में ब्राइटन ने लिवरपूल को २-१ के गोल अंतर से हराया। लिवरपूल के मिलोस केर्केज द्वारा किया गया गोल जीत के लिए पर्याप्त नहीं साबित हुआ।

वेलबेक ने १४वें मिनट में गोल कर ब्राइटन को बढ़त दिलाई। ३०वें मिनट में केर्केज ने लिवरपूल के लिए बराबरी का गोल दागा।

दूसरे हाफ के ५६वें मिनट में वेलबेक ने दूसरा गोल कर घरेलू टीम को फिर से बढ़त दिलाई। इसके बाद कोई और गोल नहीं हुआ और ब्राइटन विजयी रहा।

इस जीत के साथ ब्राइटन ने ३१ मैचों में ४३ अंक जमा कर आठवें स्थान पर कब्ज़ा किया है। हार का सामना करने वाले लिवरपूल के ४९ अंक हैं और वे पांचवें स्थान पर बने हुए हैं।

सरकार गठनको तीव्र तयारी, केही शीर्ष नेता पार्टी चलाउन ‘रिजर्भ’ राखिने

सरकार गठन की तेज़ तैयारी, कुछ शीर्ष नेताओं को पार्टी संचालन के लिए ‘रिज़र्व’ में रखा जाएगा

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 13 चैत को वरिष्ठ नेता बालेन शाह के नेतृत्व में सरकार गठन की तैयारी तेज़ कर दी है।
  • रास्वपा ने 12 चैत को नव निर्वाचित सांसदों की शपथ और 13 चैत को प्रधानमंत्री की शपथ की जानकारी दी है।
  • रास्वपा 15 से 18 मंत्रालयों का गठन करने और 12 चैत की शाम तक मंत्रियों के नाम अंतिम रूप देने की तैयारी में है।

8 चैत, काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) ने 13 चैत को वरिष्ठ नेता बालेन शाह के नेतृत्व में सरकार गठन की तैयारी में तेजी ला दी है।

21 फागुन को संपन्न प्रतिनिधि सभा चुनाव के अंतिम परिणाम घोषित होने के साथ ही रास्वपा ने सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रास्वपा के महामंत्री कविंद्र बुर्लाकोटी के अनुसार समन्वय कार्य पूरा हो चुका है।

‘राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद सचिवालय और निर्वाचन आयोग के साथ समन्वय संपन्न हो चुका है। 13 तारीख को प्रधानमंत्री की शपथ होगी,’ महामंत्री बुर्लाकोटी ने जानकारी दी।

इसके पहले 12 तारीख को नव निर्वाचित सांसदों की शपथ ग्रहण होगी। शपथ ग्रहण के बाद दल के नेता के रूप में बालेन शाह को चुना जाएगा। नेता चयन के तुरंत बाद 13 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली जाएगी।

संविधान की धारा 76(1) के अनुसार राष्ट्रपति के पास प्रधानमंत्री नियुक्त करने का अधिकार है।

इस धारा के तहत प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त संसदीय दल के नेता को राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे और मंत्रिपरिषद का गठन कर सकते हैं। इस आधार पर तैयारी चल रही है, रास्वपा ने बताया।

रास्वपा ने लगभग दो तिहाई सीटें जीती हैं। प्रत्यक्ष और समानुपातिक प्रणाली के तहत कुल 182 सीटें रास्वपा के पक्ष में हैं। चुनाव से पहले ही बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाकर पार्टी ने चुनाव लड़ा था।

प्रधानमंत्री पद की शपथ के बाद मंत्रियों की भी नियुक्ति की जाएगी। ‘13 तारीख को ही मंत्रिमंडल का गठन होगा,’ बुर्लाकोटी ने कहा।

15 से 18 मंत्रालयों का गठन होगा। पार्टी के घोषणापत्र के अनुसार संघीय स्तर पर मंत्रालयों की संख्या 18 तक सीमित की जाएगी। इसी आधार पर विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार मंत्रियों के नाम प्रस्तावित किए जाएंगे। महामंत्री बुर्लाकोटी ने कहा कि अभी तक मंत्रियों के नाम अंतिम रूप नहीं पाए हैं। ‘मंत्रियों के नाम तय नहीं हुए हैं,’ उन्होंने स्पष्ट किया।

हालांकि, सभापति रवि लामिछाने और वरिष्ठ नेता शाह ने कहा है कि गृह कार्य में लगे कुछ नेता हैं। पार्टी मंत्रियों के नाम 12 चैत की शाम तक तय करेगी। सचिवालय की बैठक में मंत्रियों के नाम अंतिम किए जाएंगे।

पार्टी के कुछ शीर्ष नेता सरकार में शामिल नहीं होंगे। पार्टी संचालन के लिए आवश्यक टीम बनाने हेतु सचिवालय स्तर के कुछ नेताओं को ‘रिज़र्व’ में रखा जाएगा, रास्वपा की तैयारी है।

‘पार्टी संचालन के लिए टीम जरूरी है। कुछ उच्च स्तरीय नेता सरकार में नहीं जाने पर सहमति बनी है,’ बुर्लाकोटी ने कहा।

सरकार गठन को लेकर पिछले गुरुवार को रास्वपा सभापति रवि लामिछाने, वरिष्ठ नेता बालेन शाह, उपसभापति डिपी अर्याल और स्वर्णिम वाग्ले के बीच चर्चा हुई थी। जनता की उम्मीदों को पूरा करते हुए सरकार संचालित करने का योजना है, रास्वपा ने बताया।