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खेलकूद से राजनीति को हटाने की नई सरकार की योजना

देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी राज्य से कोई प्रोत्साहन नहीं पाते हैं। कई खेलों के खिलाड़ियों के लिए राज्य से मिलने वाला धन सामान्य नाश्ते के लिए भी पर्याप्त नहीं होता। अखिल नेपाल फुटबाल संघ (एन्फा) ने कानून के विपरीत अधिवेशन करने की वजह से राष्ट्रिय खेलकूद परिषद् (राखेप) से निलंबित होकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के खतरे में आ गया है। राजनीतिक टकराव के कारण दसवें राष्ट्रीय खेलकूद २०७८ मंसिर में नहीं हो पाया है और खेल क्षेत्र में विवाद जारी है। नई सरकार खेलकूद में राजनीतिकरण रोकने और योग्य विशेषज्ञ नियुक्त कर सुधार करने की योजना बना रही है।

१३ चैत, काठमाडौं। यदि कानूनी तरीके से अधिवेशन किया गया होता तो इस समय अखिल नेपाल फुटबाल संघ (एन्फा) का अधिवेशन हो रहा होता। शुक्रवार नए सरकार बनने पर एन्फा को भी नया नेतृत्व मिलना था। लेकिन खेलकूद विकास ऐन २०७७ के विपरीत अधिवेशन आयोजित करने का प्रयास करने पर एन्फा न केवल राष्ट्रिय खेलकूद परिषद् (राखेप) से निलंबित हुआ है, बल्कि नेपाली फुटबाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधों के खतरे में भी है। एन्फा ने राखेप के निर्देशों का पालन नहीं किया और राखेप भी इसे किसी भी कीमत पर रोकना चाहता था, इसी कारण यह स्थिति बनी। नेपाल ओलम्पिक कमिटी और राखेप के बीच लम्बे समय से विवाद भी समाप्त नहीं हो पाया है।

राजनीतिक टकराव के कारण गत वर्ष मंसिर में होने वाला दसवां राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित नहीं हो सका। इसी तरह के अन्य विवाद और असंवेदनशीलताएं नेपाली खेलकूद में व्याप्त हैं। २०७९ असोज-कार्तिक में गण्डकी प्रदेश में आयोजित नवम राष्ट्रीय खेलकूद से दसवें राष्ट्रीय खेलकूद २०८१ मंसिर में कर्णाली प्रदेश में आयोजित करने की घोषणा की गई थी। लेकिन राजनीतिक उतार-चढ़ाव ने अभी तक दसवें खेलकूद को स्थगित रखा है। भाद्र २३ एवं २४ को हुए जनजी आंदोलन के बाद खेलकूद मंत्री बने बब्लु गुप्ता भी चार बार निर्धारित तिथि पर दसवें खेलकूद का आयोजन नहीं कर पाए। कभी सदस्य सचिव और मंत्री अलग-अलग पार्टी के होने, कभी विषयगत समिति में अपने लोग न होने के कारण दसवें खेलकूद स्थगित होते रहे हैं।

दसवें खेलकूद से लेकर एन्फा की निलंबन, ओलम्पिक कमिटी के साथ पुराने विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी नई बनी सरकार पर होगी। एन्फा, ओलम्पिक कमिटी समेत कई खेल संघ देश के खेलकूद कानून का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। नेपाल के कानून के अनुसार विजिट वीज़ा पर आने वाले व्यक्ति खेल नहीं सकते, पर कुछ खेल संघ श्रम स्वीकृति के बिना विदेशी खिलाड़ियों को खेला रहे हैं। हाल ही में अध्यागमन विभाग ने एन्फा को विजिट वीज़ा पर आए व्यक्तियों को खेलने से मना करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद प्रतियोगिताएं रुकी हैं। नेपाल फुटबाल खिलाड़ी संघ के अध्यक्ष विक्रम लामाले खेलकूद में निरीक्षण की नीति के अभाव की बात कही है।

निरीक्षण और अनुगमन होने से खेल संघों के विवादों का समाधान हो सकता है, उनका अनुभव है। ‘अभी खेलकूद क्षेत्र में जितना बजट खर्च होता है, उसका कभी निरीक्षण नहीं होता,’ उन्होंने कहा, ‘यह निरीक्षण केवल खेल से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा ही किया जाना चाहिए। सरकारी स्तर पर साफ नीति बनानी होगी कि कहाँ और कितना खर्च होगा, जिससे खेल संघ बेहतर होंगे।’ खेल संघों में राजनीतिकरण के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी भी है। खिलाड़ी चयन के मानदंड से लेकर आर्थिक हिसाब-किताब तक कई खेल संघ गुप्त रखते हैं। देश के लोकप्रिय नेपाल क्रिकेट संघ (क्यान) ने पिछले साल हुए पहले संस्करण के नेपाल प्रीमियर लीग (एनपीएल) का हिसाब-किताब अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है। खेल संघों में १०-१५ वर्षों से एक ही व्यक्ति नेतृत्व में है और नेतृत्व चयन राजनीतिक सहमति पर आधारित होता है। योग्यता से अधिक राजनीतिक ताकत वाले व्यक्ति खेल संघ में नेतृत्व प्राप्त करते हैं।

राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण नेपाली खेलकूद समस्याओं में फंसा हुआ है, यह राखेप के पूर्व सदस्य सचिव युवराज लामाको अनुभव है। वे कहते हैं, ‘राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण खेल संघ विवादों में फंसे हैं।’ खेल संघ बार-बार विवादों में पड़ते हैं तो खिलाड़ियों के पक्ष में कम समय और अदालत में ज्यादा समय खर्च होता है। नेपाली खेलकूद को सक्रिय बनाने के लिए राखेप पुनर्संरचना और खेलकूद कानून संशोधन की मांगें उठ रही हैं। राखेप बोर्ड में ३७ सदस्य हैं, जिन्हें सभी पार्टीगत रूप से नियुक्त किया जाता है। ‘बोर्ड बहुत बड़ा है। पार्टी के हिस्से वाले लोग बोर्ड में आते हैं जो खेलकूद को नहीं समझते, फिर खेल क्षेत्र में काम कैसे होगा?’ एक बोर्ड सदस्य ने कहा, ‘बोर्ड सदस्यों की संख्या कम करनी चाहिए और मेरिट आधारित सदस्य नियुक्ति प्रणाली लागू करनी चाहिए।’ ओलम्पिक कमिटी के विवाद के बाद गत जेठ में तत्कालीन खेलकूद मंत्री तेजुलाल चौधरी ने खेलकूद विकास ऐन २०७७ में संशोधन हेतु विधेयक लाया था, लेकिन यह विधेयक आलोचनाओं के कारण आगे बढ़ नहीं पाया।

प्रक्रियागत देरी के कारण विश्व स्तर पर नाम कमा चुके खिलाड़ियों को वर्षो तक उनके पुरस्कार नहीं मिल पाते। खिलाड़ी सार्वजनिक रूप से पुरस्कार मांगने को मजबूर होते हैं, जो नेपाली खेलकूद में विडंबना बनी हुई है। नेपाली फुटबाल की सबसे बड़ी प्रतियोगिता ‘ए’ डिविजन लीग फुटबाल पिछले हजार दिन से आयोजित नहीं हुई है। लीग न होने से खिलाड़ी भविष्य सुनिश्चित करने के लिए विदेश चले गए हैं। खेल के बाद कैरियर के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है, जिसके कारण खिलाड़ी खेल छोड़कर विदेश जा रहे हैं। विभाग में होने वाले खिलाड़ी भी नेपाल में भविष्य नहीं देख पा रहे हैं। प्रतिभा दिखाने के लिए प्रतियोगिताएं कम होती जा रही हैं, जबकि नेता और पार्टी के नाम पर होने वाली प्रतियोगिताएं बढ़ रही हैं। योग्य आधार पर चयन प्रक्रिया लागू होने से कम से कम आधे समस्याएं हल हो सकती हैं, राखेप के पूर्व सदस्य सचिव लामाले बताया। ‘संघों के चुनाव और कर्मचारी व्यवस्था में मेरिटोक्रेसी और ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने से आधी समस्याएं सुलझ जाएंगी,’ वे कहते हैं।

खेलकूद को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से मौजूदा सरकार ने शिक्षा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय और युवा एवं खेलकूद मंत्रालय को मिलाकर एक ही मंत्रालय बनाया है, जिसका नेतृत्व सस्मित पोखरेल करेंगे। नए सरकार ने खेल संघ विवाद समाधान और खेलकूद में राजनीतिकरण रोकने पर ध्यान देने की योजना बनाई है। राखेप के पूर्व सदस्य सचिव लामाका सुझाव हैं, ‘खेल संघों में बजट का राजनीतिक और पार्टीगत उपयोग रोकना होगा और सभी संघों को समान बजट आवंटन करना चाहिए। पार्टी के राजनीतिक संगठनों को बजट और नेतृत्व के लिए प्रोत्साहित किए बिना खेलकूद क्षेत्र के लोगों को ही प्रबंधन सौंपी जानी चाहिए।’ उनके अनुसार भुइँतह से खेलकूद का विकास करने हेतु एक खेल शिक्षक की नियुक्ति करनी चाहिए। राष्ट्रीय खेल वॉलीबॉल के लिए कोई कवर हॉल भी नहीं है। देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को राज्य से कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता। कई खिलाड़ी तो राज्य के पैसों से सामान्य भोजन भी नहीं कर पाते। निचले स्तर से खेलकूद विकास के लिए न तो संघों के पास योजना है और न ही सरकार के पास। स्कूल स्तर पर खेलकूद गतिविधियों की मात्रा बहुत कम है। खेल से जुड़े लोगों के लिए कोई निवेश या प्रोत्साहन नहीं है। नेपाली खेलकूद की तीनों बड़ी समस्याओं का समाधान नई सरकार के सामने चुनौती है।

सस्मित पोखरेल, नवनियुक्त मंत्री, ने कहा कि वे खेलकूद क्षेत्र में राजनीति को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लेकर कार्यभार संभालेंगे। ‘अब खेलकूद क्षेत्र में केवल खिलाड़ी और विशेषज्ञ होंगे, राजनीति करने वाले नहीं,’ उन्होंने कहा, ‘राखेप और खेलकूद से जुड़े सभी निकायों में क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाएगा।’ मंत्री पोखरेल के अनुसार, खेल क्षेत्र में राजनीतिकरण सबसे बड़ा शत्रु है। ‘बहुत अधिक राजनीतिकरण से खेल क्षेत्र खराब हुआ है, हर जगह राजनीति होनी जरूरी नहीं है। अब खेलकूद क्षेत्र से राजनीतिकरण हटाया जाएगा,’ उन्होंने बताया।