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बैंक के सीईओ को गैरकानूनी गिरफ्तार, धरोहर नीलामी में जनता की बचत पर खतरा

नेपाल पुलिस ने बैंक तथा वित्तीय संस्था संबंधित कानून के तहत स्मार्ट टेलिकम के ऋण वसूली के लिए धरोहर नीलामी करते हुए नेपाल इन्वेस्टमेंट मेगा बैंक (एनआईएमबी) के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ज्योतिप्रकाश पाण्डे को गिरफ्तार किया है। स्मार्ट टेलिकम का लाइसेंस रद्द होने के बावजूद स्वदेशी निवेश के कारण संपत्ति सरकार के स्वामित्व में नहीं आएगी और बैंक को धरोहर नीलामी कर ऋण वसूलने की कानूनी अनुमति है। नेपाल राष्ट्र बैंक और बैंकर्स संघ ने बताया है कि बैंक को कर्ज वसूली के लिए धरोहर नीलामी करने का अधिकार है, और कोई गैरकानूनी गतिविधि होने पर जांच होनी चाहिए। ३० वैशाख, काठमांडू।

नेपाल पुलिस द्वारा बैंक तथा वित्तीय संस्था संबंधी कानून और सुरक्षित कारोबार कानून के तहत धरोहर नीलामी के दौरान एनआईएमबी के सीईओ ज्योतिप्रकाश पाण्डे को गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्मार्ट टेलिकम प्रालि लंबे समय से ऋण नहीं चुका पाने के कारण एनआईएमबी ने कंपनी के टावर एवं उपकरणों को नीलामी कर ४ अरब ६० करोड़ रुपये का ऋण वसूला था। लेकिन नीलामी के बाद टेलिकम कंपनी का लाइसेंस रद्द होने के बाद संपत्ति सरकार के स्वामित्व में आने के संबंध में कानूनी प्रावधानों के आधार पर बैंक द्वारा धरोहर नीलामी कर ऋण वसूली में सीईओ की गिरफ्तारी दोनों गैरकानूनी प्रतीत होती है।

स्मार्ट टेलिकम को ग्रामीण दूरसंचार का लाइसेंस प्रारंभ में मिला था और २ वैशाख २०७० को १० वर्ष के लिए आधारभूत टेलीफोन सेवा संचालन का लाइसेंस प्राप्त हुआ था। लेकिन समय पर सरकार को रॉयल्टी न देने के कारण २ वैशाख २०८० को लाइसेंस स्वतः रद्द हो गया था। वर्तमान में एनआईएमबी ने स्मार्ट टेलिकम के टावर और उपकरण नीलामी कर ऋण वसूली के आरोप में सीआईबी ने बैंक के सीईओ पाण्डे को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद स्मार्ट टेलिकम की संपत्ति नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण के नियंत्रण में आ जाएगी और सरकारी संपत्ति की नीलामी गैरकानूनी है।

हालांकि यह दावा सत्य नहीं है। दूरसंचार अधिनियम २०७३ के अनुसार लाइसेंस रद्द होने पर निजी कंपनी की संपत्ति सरकार के नियंत्रण में नहीं आती, यह सरकार की गलत व्याख्या है। दूरसंचार अधिनियम २०५३ की धारा ३३ के अनुसार, जिन कंपनियों में विदेशी निवेश ५० प्रतिशत से अधिक है, उनकी लाइसेंस अवधि समाप्त होने पर जमीन, भवन और उपकरणों का स्वामित्व सरकारी होता है। इसलिए ५० प्रतिशत से कम विदेशी निवेश या स्वदेशी निवेश वाली कंपनियों का लाइसेंस समाप्त होने पर भी संपत्ति सरकार की नहीं होती। स्मार्ट टेलिकम स्वदेशी निवेश वाली कंपनी है, इसलिए इसकी संपत्ति सरकार के स्वामित्व में नहीं आएगी, वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. गांधी पंडित ने बताया।

सरकार ने अनुमतिपत्र रद्द किए गए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं की संपत्ति प्रबंधन नियमावली २०७९ जारी की है, जिसका नियम १८ के अनुसार ये कंपनियों की संपत्ति और पूर्वाधार नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण के नियंत्रण में आ सकते हैं। लेकिन यह नियमावली दूरसंचार अधिनियम से मेल नहीं खाती और असंवैधानिक है, डॉ. पंडित का कहना है। उन्होंने कहा, ‘संसद द्वारा बनाए गए कानून को सरकार द्वारा बनाए गए नियमावली से बदला नहीं जा सकता, यह नियमावली का वह हिस्सा गैरकानूनी है।’

इसलिए सीईओ पाण्डे की गिरफ्तारी कानूनी आधारहीन है। डॉ. पंडित के अनुसार बैंक को ऐसी संपत्ति को नीलामी कर ऋण वसूलने का कानूनी अधिकार है। बैंक तथा वित्तीय संस्था संबंधी कानून २०६३ की धारा ५७ के मुताबिक कर्ज न लौटाने पर धरोहर को नीलामी कर ऋण वसूल सकते हैं। सुरक्षित कारोबार कानून २०६३ की धाराएँ २८ और ४६ भी बैंक को धरोहर बिक्री कर ऋण वसूलने का अधिकार देती हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरुप्रसाद पौडेल ने भी कहा है कि बैंक को ऋण न लौटे तो धरोहर नीलामी करने का अधिकार है।

पौडेल ने कहा, ‘हाल नेपाल पुलिस द्वारा की जा रही जांच के विषय में हमारे पास पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन बैंक तथा वित्तीय संस्था संबंधी कानून की धारा ५७ ऋण न लौटे तो धरोहर नीलामी कर वसूली का अधिकार देती है।’ उन्होंने आगे कहा कि बैंक द्वारा दिया गया कर्ज जनता की जमा पूंजी से आता है, इसलिए धरोहर नीलामी कर ऋण वसूलना बैंक का प्रमुख अधिकार है।

यदि कोई अन्य गैरकानूनी गतिविधि होती है तो राज्य जांच कर सकता है और सभी को सहयोग करना चाहिए, उन्होंने बताया। नेपाल बैंकर्स संघ के अध्यक्ष संतोष कोइराला ने भी कहा कि बैंक को ऋण वसूलने की अनुमति मिलने पर सीईओ की गिरफ्तारी सही नहीं है। उनका कहना है, ‘बैंक का पहला अधिकार है कर्ज से जुड़ी संपत्ति को नीलाम करके ऋण वसूलना, कर्ज वसूली न होने पर बैंकिंग व्यवस्था संकट में आ सकती है।’

पुलिस का दावा है कि संपत्ति राज्य के नाम होने पर भी बैंक के पास इसे नीलामी करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘यदि राज्य संपत्ति का दावे करता है तो उस पर मौजूद ऋण की जिम्मेदारी भी लेनी होगी।’ दूरसंचार प्राधिकरण ने स्मार्ट टेलिकम के ऋण पर दावा करते समय ऋण दायित्व का ध्यान रखना आवश्यक बताया है। कंपनी ने लाइसेंस रद्द होने से पहले ही ऋण लेकर निवेश की गई धरोहर संपत्ति को बैंक वसूल सकता है। बैंक तथा वित्तीय संस्था कानून और सुरक्षित कारोबार कानून दोनों बैंक को ऋण वसूली में प्राथमिकता का अधिकार देते हैं। यदि सरकार ने कंपनी को सटहीकरण संबंधी कानून से खत्म किया होता तो पहले बकाया वसूल करती, लेकिन वर्तमान स्थिति में सरकार की कार्रवाई गैरकानूनी है।

बैंक द्वारा ऋण दिए गए पैसों से बने संपत्ति को नीलामी करने की अनुमति न मिलने से पूरे बैंकिंग तंत्र पर संकट आ सकता है, डॉ. पंडित ने कहा। उन्होंने कहा, ‘सरकारी साल्ट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ने नमक आयात के लिए बैंक से एलसी खोला है, यदि वह ऋण न चुकाए तो बैंक का नीलामी करना स्वाभाविक है।’ एनआईएमबी ने स्पष्ट किया है कि उसने स्मार्ट टेलिकम का लाइसेंस या जमीन नहीं बेची, केवल ऋण जुर्माने के भुगतान के लिए खरीदे गए उपकरणों को बेचा है।

बैंक ने बताया, ‘सुरक्षित कारोबार कानून २०६३ के तहत आईपीआर में दर्ज हाइपोथिकेटेड संपत्ति को ही नीलामी किया गया है, अन्य संपत्ति नहीं बेची गई।’ बैंक ने बैंक तथा वित्तीय संस्था संबंधी कानून २०७३ के तहत ३५ दिन की सूचना के साथ नीलामी प्रक्रिया शुरू की थी और कोई निकाय ने विरोध नहीं किया। नेपाल राष्ट्र बैंक ने वित्तीय वर्ष २०७९/८० में इस विषय पर मार्गदर्शन दिया था। एनआईएमबी ने ३ असोज २०८२ को नीलामी सूचना जारी कर नीलामी होने वाली सामग्री एवं जमीन के संबंध में स्मार्टसेल को बकाया राशि देने को कहा था, लेकिन मकान मालिकों ने अभी तक भुगतान नहीं किया है, इस संबंध में सीआईबी जांच कर रहा है। बैंक ने मकान मालिकों से ३८ करोड़ रुपये रोककर रखे हैं। सीआईबी प्रवक्ता शिवकुमार श्रेष्ठ ने कहा, ‘‘संपत्ति राज्य के नाम होने का दावा होने के बावजूद नीलामी के विरुद्ध और धोखाधड़ी तथा विश्वासघात की जांच चल रही है।”