अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवा, सरकारी अस्पताल जैसी शुल्क व्यवस्था देने वाला काठमाडौं बाल अस्पताल

समाचार सारांश
- डा. भगवान कोइरालाले बालबालिकाओं के लिए सम्पूर्ण स्वास्थ्य सेवा एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से काठमाडौं बाल अस्पताल की स्थापना की।
- काठमाडौं बाल अस्पताल ने सरकारी अस्पताल जैसी सेवा शुल्क लागू करते हुए वंचित बालकों को नि:शुल्क उपचार प्रदान करने की नीति अपनाई है।
- अस्पताल में हृदय रोग, गुर्दा, कैंसर सहित बालविशेषज्ञ सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं और सातों प्रदेशों में सैटेलाइट केंद्र स्थापित करने की योजना है।
29 वैशाख, काठमाडौं। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. भगवान कोइरालाले तीन दशकों से अधिक समय तक बालकों के हृदय उपचार में बिताया। लाखों दिलों की जाँच कर, हजारों छोटे दिलों की सर्जरी की।
अधिकतर मामलों में ये ऑपरेशन सफल होते, बच्चे नए जीवन के साथ अस्पताल से घर लौटते। माता-पिता के चेहरे पर खुशी दिखती, डॉक्टर के मन में संतोष होता। उपचार के दौरान उन्होंने दर्दनाक क्षण भी अनुभव किए – जटिल हृदय सर्जरी के बच्चे सामान्य संक्रमण से भी मौत हो जाती थी।
शरीर में अन्य समस्याएँ दिखने पर बच्चे को दूसरी अस्पताल ले जाना पड़ता था। पेट की समस्या, मूत्र संक्रमण, मस्तिष्क संबंधी समस्या या अन्य सामान्य बीमारियों का समय पर उपचार न मिलने के कारण बच्चे अनजाने में जान गंवाते थे।
छोटे बच्चों की मृत्यु का कारण केवल डॉक्टर की असफलता नहीं, प्रणालीगत कमजोरी भी थी। इसी पीड़ा ने डा. कोइराला के मन में एक गहरा प्रश्न जन्मा – यदि सभी सेवाएं एक जगह उपलब्ध हो तो ये बच्चे बच सकें?
समय के साथ वह प्रश्न संकल्प में बदल गया। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद डा. कोइरालाले एक लक्ष्य निर्धारित किया – बालबालिकाओं की सम्पूर्ण स्वास्थ्य सेवा एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना। हृदय, पेट, गुर्दा, तंत्रिका, कैंसर या कोई भी अन्य समस्या हो, बाल विशेषज्ञों की टीम संयुक्त रूप से उपचार करेगी और कोई बच्चा इलाज न मिलने से नहीं मरेगा।
उपचार की पहुंच, विशेषज्ञ सेवा की कमी और आर्थिक अयोग्यता के कारण बच्चों के मरने की स्थिति को समाप्त करने का उनका संकल्प धीरे-धीरे आकार लेने लगा है।
डा. कोइरालाका आधे दशक बाद शुरु हुए इस सपने को साकार करने के लिए काठमाडौं इंस्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (किओच) के अंतर्गत काठमाडौं बाल अस्पताल स्थापित हुआ।
गैर-लाभकारी संस्था के तहत ‘पब्लिक सर्विस मॉडल’ से संचालित यह अस्पताल संरचना, तकनीक और सेवा के लिहाज से बाल स्वास्थ्य सेवा का नया मॉडल लेकर आया है।
100 रुपए में विशेषज्ञ सेवा
नेपाल में सरकारी तौर पर बाल चिकित्सा के लिए मुख्य अस्पताल कान्ति बाल अस्पताल है। इसके अलावा कुछ निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में विभाग हैं।
लेकिन सभी प्रकार की विशेषज्ञ सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं। विकसित देशों में युवा और बच्चों के लिए अलग अस्पताल आवश्यक माना जाता है। नेपाल की लगभग 40 प्रतिशत आबादी यानी करीब 1 करोड़ 20 लाख 18 वर्ष से कम उम्र के हैं।
जन्म के पाँच वर्ष पहले उपचार न मिलने पर प्रति 1000 शिशुओं में 30 की मृत्यु होती है। सही उपचार से कई बच्चों को बचाया जा सकता है।
इसी आवश्यकता को समझते हुए किओच के अध्यक्ष डा. कोइराला ने ‘एक ही छत के नीचे सम्पूर्ण बाल स्वास्थ्य सेवा’ देने का उद्देश्य लेकर काठमाडौं में मुख्य अस्पताल और सातों प्रदेशों में सैटेलाइट केंद्र स्थापित करने की दीर्घकालीन योजना बनाई। कुछ महीनों से संचालित काठमाडौं बाल अस्पताल इस योजना की आधारशिला है।
स्याटेलाइट केंद्र के रूप में कोशी प्रदेश के दमक नगरपालिकास्थित नेपाल रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा उपलब्ध कराए गए भवन में 50 बेड के साथ सेवा तीन साल पहले से ही शुरू हो चुकी है।

काठमाडौं बाल अस्पताल का औपचारिक उद्घाटन बाकी है, लेकिन तीन महीने से बुनियादी सेवाएं चालू हैं। बुढानीलकण्ठ नगरपालिका–7 में ओपीडी, आकस्मिक सेवा और सर्जरी सेवाएं अच्छी तरह से व्यवस्थित हैं।
फ़िलहाल एक भवन से सेवा शुरू हो रही है और दो अन्य भवन निर्माणाधीन हैं। अस्पताल की संरचना अत्याधुनिक और बाल-मित्रतापूर्ण है। खेलने के लिए सामग्री और मनोरंजन के लिए टीवी भी उपलब्ध है। ओपीडी क्षेत्र के बाहर पर्याप्त कुर्सियाँ रखी गई हैं।
अस्पताल सरकारी अस्पतालों जैसी सेवा शुल्क लागू करने का प्रयास कर रहा है। गरीब वर्ग के बच्चों को निःशुल्क उपचार मिलने की नीति भी अपनाई गई है।
बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डा. सौरभ श्रेष्ठ के अनुसार, ओपीडी टिकट शुल्क मात्र 100 रुपए है, जो सरकारी अस्पतालों के बराबर है। इस टिकट से हृदय, गुर्दा, फेफड़े सहित विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाया जा सकता है और पुनः टिकट नहीं लेना पड़ता।
ओपीडी सेवा तीसरे मंजिल पर है, जहां जनरल विभाग के अलग-अलग कक्ष हैं। नेफ्रोलॉजी, हेमैटो-ऑन्कोलॉजी, आर्थोपेडिक्स, डेंटल, बाल मनोचिकित्सा, कार्डियोलॉजी और कार्डिएक सर्जरी सेवाएं उपलब्ध हैं। नियमित टीकाकरण के लिए भी अलग कक्ष तैयार किया गया है।
कार्डियोलॉजी विभाग में इको, ईसीजी और हृदय वीडियो परीक्षण के अत्याधुनिक उपकरण हैं। ओपीडी में विभिन्न बालरोग विभाग धीर-धीरे बढ़ रहे हैं।
डा. श्रेष्ठ कहते हैं, “नेपाल भर की सभी बालविशेषज्ञ सेवाएं यहां उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। यहां आने वाले मरीजों को इलाज न मिलने पर लौटना नहीं पड़ता।” अस्पताल में स्तनपान कक्ष भी है जहां माताएं गोपनीयता के साथ अपने शिशु को दूध पिला सकती हैं।

अस्पताल में अत्याधुनिक पैथोलॉजी विभाग भी है जहां आनुवंशिक रोग और कैंसर से जुड़ी परीक्षाएं नेपाल में की जाएंगी। हाल ही में अस्पताल ने ‘न्यूबॉर्न स्क्रीनींग’ सेवा भी शुरू की है। यह परीक्षण जन्म के 48 से 72 घंटों के भीतर गंभीर रोगों का प्रारंभिक पता लगाता है।
डा. श्रेष्ठ कहते हैं, “यहां अत्याधुनिक उपकरण हैं, परीक्षण के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और सेवा सस्ते दाम पर उपलब्ध होगी।”
आकस्मिक कक्ष में कैबिन व्यवस्था
आकस्मिक कक्ष के बाहर मरीजों के साथियों के लिए अलग कक्ष बनाया गया है। बच्चे अस्पताल आते ही रजिस्ट्रेशन हो जाता है और आधुनिक ट्रायज प्रणाली के अनुसार इलाज शुरू होता है। मरीज की स्थिति के अनुसार ‘रेड’, ‘येलो’ और ‘ग्रीन’ क्षेत्र निर्धारित किए जाते हैं।
गंभीर मरीजों को तुरंत सीपीआर सहित आवश्यक उपचार दिया जाता है। इसके लिए चार बेडों समेत वेंटिलेटर की व्यवस्था है। आकस्मिक कक्ष में दो मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर हैं और चौथे मंजिल पर चार अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध हैं।
हेपा फिल्टर, सक्शन सिस्टम और उच्च स्तरीय संक्रमण नियंत्रण तकनीक के साथ ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी को डायरेक्ट वीडियो के माध्यम से शिक्षण के लिए भी देखा जा सकता है। आकस्मिक कक्ष में 20 बेडों के साथ रेड, येलो और ग्रीन क्षेत्र हैं। अस्पताल ने आकस्मिक कक्ष में तीन कैबिन भी संचालित किए हैं।
पांचवें तल पर गंभीर स्थिति में शिशु और बच्चों के लिए NICU और PICU कक्ष हैं। PICU में 25 बेड की योजना है। संक्रमण रोकथाम के लिए कड़ा प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा। संक्रमित और सामान्य मरीज अलग रखे जाएंगे और वेंटिलेटर पर मरीजों की एक-एक नर्स देखरेख करेगी।

छठे तल पर 35 जनरल बेड हैं जिसमें सिंगल, डबल और सुइट कक्ष व तीन बेडों वाले कैबिन उपलब्ध हैं। सातवें तल पर बैठक हॉल और प्रशासन शाखा है। संरचना आधुनिक होने के बावजूद सेवा शुल्क सरकारी अस्पताल के समान रखा गया है।
ओपीडी टिकट 100 रुपए, आकस्मिक टिकट 500 रुपए और सामान्य बेड शुल्क 300 रुपए निर्धारित है। आकस्मिक कैबिन का शुल्क 1,000 रुपए है। NICU सेवा 3,000 रुपए और वेंटिलेटर सेवा 6,000 रुपए प्रति दिन शुल्क तय है।
डा. श्रेष्ठ बताते हैं, “अगर कोई भुगतान नहीं कर सकता तो सारी सेवा मुफ्त दी जाएगी। यहां पैसा न होने के कारण इलाज न मिलने की बात नहीं होगी। जनरल बेड हो या कैबिन, सेवा समान रहेगी।”
अस्पताल में अभी 150 से अधिक स्वास्थ्य कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें करीब 30 बाल विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। सभी डॉक्टर पूर्णकालिक रूप से कार्यरत हैं।
व्यक्तिगत अनुभव से जन्मी पहल
बाल अस्पताल चलाने की पहल डा. कोइरालाका व्यक्तिगत अनुभव और पेशागत यात्रा से प्रेरित है।
बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने का सपना उन्हें 1993 से था। अपने जीवन काल में उन्होंने आधे से अधिक बाल हृदय शल्यक्रियाएं की हैं। अमेरिका में उन्होंने अपने बच्चों की हार्ट सर्जरी का मौका पाया। बाद में टोरंटो में विश्व के प्रमुख बाल हृदय अस्पताल में एक वर्ष का फैलोशिप किया। इसके बाद बाल स्वास्थ्य को लेकर उनका लगाव गहरा हुआ।
अमेरिका में अध्ययन और कार्यकाल के दौरान उन्हें विकसित देशों के बाल अस्पतालों की संरचना और सेवा प्रणाली नजदीक से देखने का अवसर मिला।
अब नेपाल लौटने के बाद हजारों बाल हृदय ऑपरेशन कर डा. कोइरालाले कई बच्चों की जान बचाई और उन्हें स्वस्थ जीवन तथा समाज में योगदान के लिए प्रेरित किया है।
“बचपन में रोगों का सही उपचार केवल जीवन बचाता ही नहीं, बल्कि भविष्य में 70-80 वर्ष तक समाज में योगदान की संभावना बढ़ाता है,” वे कहते हैं।

डा. कोइरालाका उपचारों को वे समाज में निवेश मानते हैं। उनका कहना है, “बालकों का उपचार युवाओं के इलाज जैसा नहीं होना चाहिए। बच्चों की देखभाल के लिए ‘डेडिकेटेड’ टीम आवश्यक है।”
नेपाल में प्रति वर्ष लगभग पाँच से सात लाख बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से 3 प्रतिशत जन्म से ही किसी न किसी समस्या के साथ आते हैं, जिनमें हृदय रोग, अंग विकृति, न्यूरोलॉजिक समस्याएं शामिल हैं। बालकों में फेफड़ों की बीमारियां, दमा, कैंसर, न्यूरो-डेवलपमेंट समस्याएं, ऑटिज्म जैसे जटिल रोग बढ़ रहे हैं।
डा. कोइराला कहते हैं, “पहले संक्रामक रोग बाल मृत्यु के मुख्य कारण थे लेकिन अब जटिल और असाध्य रोग अधिक देखे जा रहे हैं। प्राथमिक रोकथाम ही समाधान नहीं है।”
एक ही छत के नीचे संपूर्ण सेवा, गरीबों के लिए नि:शुल्क
काठमाडौं बाल अस्पताल का मुख्य सिद्धांत ‘एक छत के नीचे पूर्ण सेवा’ है। अस्पताल में बाल रोगों में विशेषज्ञता प्राप्त डॉक्टर मौजूद हैं। बाल हृदय रोग, बाल तंत्रिका रोग, बाल गुर्दा रोग, बाल कैंसर, बाल शल्य चिकित्सा और क्रिटिकल केयर सेवाएं उपलब्ध हैं।
यह प्रणाली विशेषज्ञों को संयुक्त निर्णय लेकर उपचार की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करती है। डा. कोइराला के अनुसार यही प्रणाली सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाती है।

डा. कोइराला कहते हैं, “सभी उपचार एक जगह होने से सेवा की गुणवत्ता सशक्त होती है और कई बच्चे बच सकते हैं।”
सर्वसुलभ सेवा देने की प्रतिबद्धता
बाल अस्पताल एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका उद्देश्य आर्थिक लाभ नहीं बल्कि सार्वजनिक सेवा प्रदान करना है।
अस्पताल की संचालन समिति स्वयंसेवी है, जो पारिश्रमिक नहीं लेती। कर्मचारी और चिकित्सक अपने सेवाकाल के मुताबिक वेतन पाते हैं। सेवा शुल्क सरकारी अस्पताल जैसी है और सरकार द्वारा नि:शुल्क सेवा भी उपलब्ध है।

गरीब परिवारों के बच्चों को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा ऐसी अस्पताल की नीति है।
डा. कोइराला कहते हैं, “पैसा न होने पर इलाज से वंचित नहीं होना चाहिए। गरीबों को निःशुल्क सेवा मिलेगी।”
सरकारी अस्पताल के समान शुल्क
अस्पताल का पहला भवन सेवा शुरू कर चुका है, जहां 100 से अधिक बेड की क्षमता है। प्रारंभ में लगभग 50 बेड लेकर सेवा चल रही है। अगले 9 महीनों में 200 बेड के साथ सेवा देने का लक्ष्य है।
किओच ने केवल काठमाडौं तक सीमित नहीं, सातों प्रदेशों में बाल स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की योजना बनाई है।

डा. कोइराला का कहना है, “काठमाडौं ही नहीं, दक्ष जनशक्ति तैयार करने के लिए यहाँ कार्यक्रम शुरू किया गया है।” उन्होंने कहा कि कर्णाली प्रदेश में भी अगले चरण में अस्पताल बनाने की योजना है।
उनके अनुसार, शुल्क सरकारी अस्पताल के समान है और भुगतान न कर सकने वालों को नि:शुल्क सेवा दी जाएगी। कई बालरोग सरल स्तर पर इलाज होंगे और जटिल मामलों को काठमाडौं रेफर किया जाएगा।
बाल अस्पताल की इमारत निर्माण में लगभग 1 अरब 19 करोड़ खर्च हुए। उपकरण, पूर्वाधार व प्रबंधन समेत कुल लागत लगभग 2 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। इसका बड़ा हिस्सा देश में आर्थिक सहयोग से जुटाया गया है। अब भी 15 प्रतिशत धन जुटाना बाकी है।

डा. कोइराला के अनुसार बाल अस्पताल किसी व्यक्तिगत संपत्ति के रूप में नहीं होगा। समय के साथ यह नेपाल की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की महत्वपूर्ण संपत्ति बनेगा।
उनके शब्दों में, “यह प्रतिस्पर्धात्मक संस्था नहीं, सरकारी अस्पतालों को मदद करने और बाल स्वास्थ्य सेवा के स्तर को ऊपर उठाने का उद्देश्य है।” डा. कोइराला प्रतिबद्ध हैं कि काठमाडौं बाल अस्पताल नेपाल में बाल स्वास्थ्य सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करेगा।





