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विपक्षी दलों ने संसद में प्रधानमंत्री से जवाब मांगने की शर्त रखी

प्रतिनिधि सभा की बैठक को सहज रूप से संचालित करने के लिए विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री से संसद में उठाए गए प्रश्नों का जवाब देने की शर्त रखी है। प्रतिनिधि सभा नियमावली के अनुसार हर महीने के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर का अनिवार्य प्रावधान है, जो इस बार जेठ महीने में लागू नहीं हो पाया है। जेठ 12 को होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रधानमंत्री से प्रश्नोत्तर पर विपक्षी दल अपने दल के भीतर और सभामुख के साथ चर्चा करेंगे। 10 जेठ, काठमांडू।

विपक्षी दलों ने प्रतिनिधि सभा की बैठक को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रधानमंत्री बालेन शाह से संसद में उठाए गए प्रश्नों का जवाब देने की मांग शुरू कर दी है। हाल ही में भी ऐसा अनुरोध करते हुए वे संसद में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले शुक्रवार की बैठक में विपक्ष के विरोध के बाद भी बैठक चली और नाराबाजी के बीच वैकल्पिक विकास वित्त परिचालन बिल पारित किया गया।

इसके अतिरिक्त, मतदाता नामावली संबंधी विधेयक और प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन संबंधी विधेयक भी विरोध के बीच आगे बढ़ाए जाने हैं। विपक्षी दलों द्वारा संसद की बैठक में अवरोध जारी रखने के कारण बैठक बाधित होते हुए भी चल रही है, जिस पर रविवार को विपक्षी दलों के प्रमुख सचेतकों ने चर्चा की। सिंहदरबार में स्थित एमाले संसदीय दल के कार्यालय में हुई बैठक में नेपाली कांग्रेस की प्रमुख सचेतक बसना थापा, एमाले के प्रमुख सचेतक ऐन महर, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल और राप्रपा की प्रमुख सचेतक खुश्बु ओली शामिल थीं।

प्रतिनिधि सभा की अगली बैठक जेठ 12 को होगी और उस बैठक में भी विपक्षी दल प्रधानमंत्री से प्रश्नोत्तर करने की तैयारी में हैं। राप्रपा की प्रमुख सचेतक खुश्बु ओली ने कहा, ‘यह कोई मोर्चाबंदी नहीं है। आज केवल अनौपचारिक चर्चा हुई है। अब अपनी-अपनी पार्टियों में बातचीत होगी और 12 तारीख को क्या करना है, तय होगा।’ प्रमुख सचेतकों की बातचीत संसदीय भूमिका को सशक्त बनाने पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर कराने के विषय में फिर से सभामुख से जानकारी ली जाएगी।’

प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम 56 में इस विषय का प्रावधान है, जिसमें लिखा है, ‘प्रधानमंत्री या उनके कार्यक्षेत्र से सीधे जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रश्न पूछने के लिए सभामुख हर माह के पहले सप्ताह में एक दिन की बैठक के प्रथम एक घंटे का निर्धारण करेंगे।’ यह अनिवार्य व्यवस्था है और निर्धारित दिन यदि प्रधानमंत्री से प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर नहीं होता है तो अगली बैठक में यह अनिवार्य किया जाएगा। नियम 56 की उप-धारा 1 के अनुसार, ‘यदि निर्धारित दिन किसी कारणवश बैठक नहीं हुई तो तुरंत अगली बैठक में पहला एक घंटा इसके लिए रखा जाएगा।’ लेकिन यह प्रावधान इस बार जेठ माह में लागू नहीं हो सका। जेठ 4 से प्रतिनिधि सभा की बैठक चल रही है, लेकिन अब तक प्रधानमंत्री के साथ प्रत्यक्ष प्रश्नोत्तर नहीं हो पाया है।