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न्यायाधीश और वकीलों की संपत्ति की जांच करने की सांसदों ने की मांग

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के साथ।

  • प्रतिनिधिसभा की कानून, न्याय और मानवाधिकार समिति की बैठक में सांसदों ने न्यायाधीशों और कानूनी पेशेवरों की संपत्ति की जांच की मांग की।
  • राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद यज्ञमणि न्यौपाने ने न्यायाधीशों की संपत्ति की विवरणी हर वर्ष सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक होने की मांग की।
  • अन्य सांसद राम विनोद यादव ने कानूनी पेशेवरों की सेवा शुल्क निर्धारण और उनकी संपत्ति जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

10 जेठ, काठमांडू। प्रतिनिधिसभा के सांसदों ने न्यायाधीशों और कानून व्यवसायियों (वकीलों) की संपत्ति की जांच का प्रस्ताव रखा है।

जबकि सार्वजनिक पदों पर स्थित राजनीतिक व्यक्तियों की संपत्ति की जांच के लिए मांगें उठ रही हैं, सांसदों ने न्यायाधीशों और वकीलों की संपत्ति की भी जांच की बात कहीं है।

‘भारत की वेबसाइट पर न्यायाधीशों की संपत्ति की जानकारी खुलकर उपलब्ध है, हम उसे देख भी सकते हैं,’ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद यज्ञमणि न्यौपाने ने कहा, ‘लेकिन नेपाल में न्यायाधीशों की संपत्ति गोपनीय रखे जाने की नियमावली के कारण पारदर्शिता नहीं है।’

सोमवार को प्रतिनिधिसभा की कानून, न्याय और मानवाधिकार समिति की बैठक में उन्होंने यह बात कही। बैठक में कानून, न्याय और संसदीय मामला मंत्री सोविता गौतम भी मौजूद थीं।

मंत्री गौतम से خطاب करते हुए सांसद न्यौपाने ने कहा कि मौजूदा कानून से न्यायपालिका की शुद्धि और सुदृढ़ीकरण संभव नहीं होगा और इस कानून में सुधार की आवश्यकता है।

‘तत्काल न्यायाधीशों की संपत्ति के विवरण को प्रत्येक वर्ष अपनी वेबसाइट, विशेषकर सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाने का प्रावधान होना चाहिए,’ उन्होंने यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि अब तक न्यायाधीशों के मामलों में न्यायपरिषद अधिनियम द्वारा गठित समिति को भी संपत्ति जांच के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

सांसद न्यौपाने ने यह सुझाव मंत्री गौतम को दिया।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अन्य सांसद राम विनोद यादव ने भी न्यायाधीशों की संपत्ति के सार्वजनिक और जांच के प्रस्ताव का समर्थन किया।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि कानूनी पेशेवरों के सेवा शुल्क निर्धारण और उनकी संपत्ति की जांच भी आवश्यक है।

‘न्यायाधीशों के साथ-साथ वकीलों द्वारा लिए जाने वाले सेवा शुल्क भी पारदर्शी होने चाहिए—किस मामले में कितना शुल्क लिया जाता है?’ यादव ने प्रश्न उठाया, ‘वकीलों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क और उनकी कार्यशैली पर स्पष्ट कानून होना जरूरी है।’

उन्होंने कहा कि यदि सेवा शुल्क के बारे में स्पष्ट कानून नहीं होगा तो सेवा प्राप्त करने वालों को कठिनाई होगी, इसलिए शुल्क तय करने का प्रावधान होना आवश्यक है।

साथ ही, उन्होंने मांग की कि कानूनी पेशेवरों की संपत्ति जांच के दायरे में भी लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘वकीलों को भी कानून के दायरे में लाना चाहिए। उनकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए। इस विषय पर विशेषज्ञों से सलाह लेकर उचित तरीका अपनाना चाहिए।’