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निकुञ्ज में रोक दिए गए जलविद्युत परियोजनाओं का कार्य शुरू करने के लिए मंत्री का ध्यानाकर्षण

समाचार सारांश

  • इप्पान ने लाङटाङ राष्ट्रीय निकुञ्ज क्षेत्र में रुकी हुई पाँच जलविद्युत परियोजनाओं का काम शुरू कराने के लिए वन मंत्री गीता चौधरी का ध्यानाकर्षित किया है।
  • इप्पान के अध्यक्ष गणेश कार्की ने बताया कि पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन स्वीकृत होने के बाद भी परियोजना निर्माण रोकने से निजी क्षेत्र निराश है।
  • मंत्री चौधरी ने जलविद्युत परियोजनाओं के काम शुरू करने के लिये आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करने और नीतिगत सुधारों की योजना की जानकारी दी।

१३, जेठ, काठमांडू। स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संस्था, नेपाल (इप्पान) ने लाङटाङ राष्ट्रीय निकुञ्ज के दिशा-निर्देशों के कारण निर्माण रुकी हुई पाँच जलविद्युत परियोजनाओं का काम शुरू करने हेतु कृषि, वन तथा पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी का ध्यानाकर्षण कराया है।

इप्पान अध्यक्ष गणेश कार्की के नेतृत्व में गई प्रतिनिधि मंडल ने बुधवार को मंत्री चौधरी से मुलाकात कर राष्ट्रीय प्राथमिकता वाली जलविद्युत परियोजनाओं के कार्य शीघ्र शुरू होने के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने की अपील की।

मंत्री चौधरी को ज्ञापन देते हुए अध्यक्ष कार्की ने बताया कि निकुञ्ज के अंदर कई परियोजनाओं के निर्माण की क्षमता है, लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद भी परियोजनाओं को रोक देने से निजी क्षेत्र निराशा में है। उन्होंने मंत्री से इस पर सहजीकरण की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा मंत्रालय करोड़ों रुपये राजस्व लेकर परियोजना विकास की अनुमति देता है, वन मंत्रालय की एक इकाई पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन पारित करती है, फिर भी दूसरी इकाई अनुमति नहीं देती और परियोजना को रोक देती है। यह गलत है। निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रालय से सहजीकरण आवश्यक है।’’

कार्की ने कहा कि पाँच वर्षों से बिना पेड़ कटान और भूमि उपयोग अनुमति दिए लगातार रोक लगाई जा रही है, तथा अन्य विभागों से अनुमति मिलने पर भी परियोजनाओं का काम रुकता रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार 10 वर्षों में 30,000 मेगावाट उत्पादन लक्ष्य बढ़ा रही है, किंतु इस तरह की घटनाएँ बढ़ने पर यह लक्ष्य हासिल नहीं हो सकेगा।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार सनसेट नीति लाने की तैयारी कर रही है, ऐसे में मंत्रालय को परियोजनाओं के लिए सहजीकरण बढ़ाना चाहिए। मंत्री चौधरी ने बताया कि जलविद्युत परियोजनाओं के काम के लिए आवश्यक सहजीकरण दिया जाएगा और विकास परियोजनाओं में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए नीति में सुधार जल्द किया जाएगा।

सिन्धुपाल्चोक में वर्तमान में निजी क्षेत्र द्वारा निम्नलिखित परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं: 36.5 मेगावाट ब्रह्मायणी जलविद्युत परियोजना, 20.52 मेगावाट माथिल्लो ब्रह्मायणी जलविद्युत परियोजना, 9.7 मेगावाट ब्रह्मायणी ए जलविद्युत परियोजना, 40 मेगावाट बलेफी खोला जलविद्युत परियोजना, तथा 46 मेगावाट माथिल्लो बलेफी जलविद्युत परियोजना। कुल मिलाकर ये पाँच परियोजनाएं 153 मेगावाट स्थापित क्षमता की हैं, जिनके काम को लाङटाङ राष्ट्रीय निकुञ्ज ने पत्र लिखकर रोकने का निर्देश दिया है।

नेपाल सरकार ने विभिन्न निकायों से परियोजना विकास अनुमतियां दी हैं तथा वन मंत्रालय ने पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट स्वीकृत की है। निर्माण प्रक्रिया जारी है, ऐसे में निकुञ्ज प्रशासन को काम रोकने के बजाय सहजीकरण करना चाहिए। देश के विकास के लिए सरकार को निजी क्षेत्र के साथ सहयोग करना चाहिए, यह बात इप्पान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहनकुमार डाँगी ने जोर देकर कही।

इप्पान ने राष्ट्रीय निकुञ्ज तथा वन्यजीव संरक्षण विभाग के महानिदेशक डॉ. बुद्धिसागर पौडेल से भी मुलाकात कर निकुञ्ज के भीतर परियोजना निर्माण रोकने के निर्देशों में सुधार कर वन मंत्रालय द्वारा पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार काम करने की मांग की है।