
नेपाल में हर साल विषालु जंगली च्याउ सेवन के कारण औसतन ५० लोगों की मृत्यु होती है। वर्षा ऋतु की शुरुआत होते ही जंगल, खेत, घास वाले मैदान और सड़े हुए लकड़ी के आसपास विभिन्न प्रकार के च्याउ उगने लगते हैं। ग्रामीण इलाकों में जंगली च्याउ तोड़कर खाने की प्रथा बहुत पुरानी है। अधिकांश लोग स्वाद, परंपरा और आर्थिक कारणों से जंगली च्याउ इकट्ठा करते हैं। हर वर्ष नेपाल में विषाक्त च्याउ के सेवन से लोग बीमार पड़ते हैं, अस्पताल में भर्ती होते हैं और कुछ मामलों में उनकी मृत्यु भी हो जाती है। इसलिए वर्षा ऋतु में च्याउ खाने के दौरान विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।
नेपाल में जमीन पर उगने वाली लगभग १३०० प्रजातियों में से १०० प्रजातियां विषाक्त प्रमाणित हुई हैं जबकि १०० से अधिक च्याउ खाने योग्य मानी जाती हैं। कुछ च्याउ में ऐसे विषैले तत्व होते हैं जो यकृत, गुर्दा, तंत्रिका तंत्र और हृदय पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। विशेष रूप से एमानिटा, गैलेरीना जैसे कुछ जाति के च्याउ अत्यंत खतरनाक होते हैं। नेपाल में पाए जाने वाले सबसे खतरनाक विषाक्त च्याउ में डेथ कैप – एमानिटा फेलोइड्स, डिस्ट्रॉइंग एंजल – एमानिटा विआरोज़ा, और फ्लाई एगारिक – एमानिटा मस्केरिया शामिल हैं।
विषाक्त च्याउ कैसे पहचानें? लैब परीक्षण के बिना विषाक्त च्याउ की पहचान करना आसान नहीं होता। हालांकि कुछ सामान्य संकेतों और विशेषताओं पर ध्यान दिया जा सकता है। अत्यधिक चमकीले या आकर्षक रंग वाले च्याउ विषैले हो सकते हैं। सफेद गिल्स और पैर पर थैली जैसे भाग वाले च्याउ भी घातक हो सकते हैं। सड़े हुए लकड़ी और नमी वाले स्थानों पर उगने वाले च्याउ विषाक्त हो सकते हैं। केवल स्थानीय नामों पर भरोसा न करें और घरेलू परीक्षणों पर विश्वास न करना भी महत्वपूर्ण है।
च्याउ खाने पर अपनाने योग्य सावधानियों में परिचित च्याउ ही खाना, बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना, कच्चे च्याउ न खाना, अपरिचित च्याउ इकट्ठा न करना और च्याउ रात को न खाना शामिल है। विषाक्त च्याउ खाने के बाद लक्षण तुरंत या कुछ घंटों में दिख सकते हैं। इस स्थिति में प्राथमिक उपचार के रूप में तत्काल स्वास्थ्य संस्थान ले जाना, बची हुई च्याउ सुरक्षित रखना और घरेलू दवाओं पर भरोसा न करना अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीण इलाकों में जनजागरण कार्यक्रम चलाना, पोस्टर और सूचना सामग्री का उपयोग करना, सोशल मीडिया का उपयोग करना और बच्चों को शिक्षा देना जैसे उपाय विषाक्त च्याउ से बचाव में मदद कर सकते हैं। डॉ. मित्र पाठक कृषि, वन तथा वातावरण मंत्रालय के तहत वनस्पति विभाग के वनस्पति अनुसंधान केंद्र सल्यान के कार्यालय प्रमुख हैं और विषाक्त च्याउ से बचाव के लिए सक्रिय जागरूकता अभियान चला रहे हैं।





