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उद्योग बजट में कटौती के बावजूद नीतिगत सुधारों से उद्योगपतियों में उत्साह

सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०७८/७९ के लिए उद्योग एवं वाणिज्य क्षेत्र का बजट १८ प्रतिशत घटाकर ८ अरब ३१ करोड़ रुपये निर्धारित किया है। निवेशकों को सभी सेवाएं एक ही स्थान से उपलब्ध कराने के लिए आगामी तीन महीनों के भीतर ‘निवेश एक्सप्रेस’ अवधारणा लागू करने की घोषणा की गई है। २७३ प्रकार की कच्ची वस्तुओं पर सीमा शुल्क दर कम की गई है और ३६० वस्तुओं पर अंतःशुल्क समाप्त किया गया है।

१५ जेठ, काठमांडू। सरकार ने उद्योग और वाणिज्य क्षेत्र को उत्पादन उन्मुख बनाने का दावा करते हुए बजट में कटौती की है। आगामी आर्थिक वर्ष २०७८/७९ का बजट अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा प्रस्तुत किया गया, जो चालू आव के मुकाबले १ अरब ८३ करोड़ रुपये कम है। कुल बजट केवल ८ अरब ३१ करोड़ रुपये विनियोजित किया गया है। उद्योग क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार और निवेश एक्सप्रेस लागू करने के बावजूद बजट १८ प्रतिशत कम किया गया है। सरकार ने निवेशकों को सभी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए आगामी तीन महीनों में निवेश एक्सप्रेस लागू करने की घोषणा की है। इसके अंतर्गत कंपनी पंजीकरण, वित्तीय सेवाएं, कर प्रक्रियाएं और वीजा आवेदन तक सभी सेवाएं शामिल होंगी। “निवेश बोर्ड से स्वीकृत परियोजनाओं के लिए अन्य निकायों से अतिरिक्त मंजूरी नहीं ली जाएगी,” बजट में उल्लेख है। स्वीकृत परियोजनाओं के लिए निवेश वीजा उपलब्ध कराया जाएगा। शेयर हस्तांतरण, कर भुगतान, संपत्ति मूल्यांकन, ऋण भुगतान, लाभांश वितरण और परिसमापन प्रक्रियाएं भी सुव्यवस्थित की जाएंगी।

नेपाल उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष वीरेंद्रराज पांडे ने निवेश और लाभ वापसी प्रक्रिया में सरलता लाने वाले बजट को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, “बजट विश्वास और निवेश दोनों बढ़ाएगा। विदेशी निवेशकों को लाभ बाहर ले जाने में कठिनाई थी, अब केवल सूचना देकर इसे सम्भव बनाया गया है, जो अच्छा है। कई सिफारिशें भी बजट में शामिल हुई हैं।” औद्योगिक अवसंरचना और ऊर्जा में सहूलियत की नीति को आगे बढ़ाया जाएगा। मोतिपुर और मयूरधाप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण और संचालन निजी क्षेत्र द्वारा किया जाएगा। विशेष आर्थिक क्षेत्रों में कर, सीमा शुल्क, आयात-निर्यात और निवेश के सभी निर्णय एक ही केंद्र से लिए जाने के लिए ‘विशेष आर्थिक प्रशासन क्षेत्र’ बनाया जाएगा। उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए विद्युत् डिमांड शुल्क की समीक्षा और विद्युत् शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी। उद्योगों को उपलब्ध कराई जाने वाली जमीन पर निर्मित संरचनाएं बैंकिंग उद्देश्यों के लिए गिरवी रखी जा सकेंगी।

पूंजी अभाव के कारण पूर्ण क्षमता से संचालित न होने वाले उद्योगों के लिए ‘व्यावसायिक पुनरुत्थान ऋण’ की व्यवस्था की गई है। औद्योगिक अवसंरचना के लिए ६५ करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। नव उद्यम, नवप्रवर्तन और तकनीक को मुख्य औद्योगिक सुधार के रूप में लेते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवप्रवर्तन में न्यूनतम १ प्रतिशत पूंजीगत व्यय विनियोजित किया गया है। स्टार्टअप के लिए केवल ऋण नहीं बल्कि प्रारंभिक चरण में अनुदान, संभावित उद्यम के लिए सहूलियतपूर्ण ऋण और विस्तार चरण के लिए वृद्धि पूंजी की व्यवस्था की जाएगी। अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा, “नवउद्यमों को पहचान, कौशल, बाजार और वित्तीय पहुंच के अनुसार, लाभ आधारित कर छूट, सार्वजनिक खरीद में प्राथमिकता और डिजिटल पंजीकरण के माध्यम से मजबूत किया जाएगा।”

खनन, पेट्रोलियम और पर्यावरणीय प्रबंधन क्षेत्रों के समुचित संचालन के लिए ‘खनन एवं खनिज प्राधिकरण’ की स्थापना की घोषणा की गई है। दैलेख में पेट्रोलियम व्यावसायिक उत्पादन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। धौलाधौली लोहा उद्योग में सरकार की भागीदारी कम कर सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल लागू करने की योजना है। खनन और बड़े उद्योगों को विद्युत् पहुंच, सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए ५० करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पारंपरिक बॉयलर की जगह इलेक्ट्रिक बॉयलर लगाने के लिए २२ करोड़ रुपये प्रावधान है।

वैदेशिक वाणिज्य में सहूलियत के लिए कच्चे माल पर सीमा शुल्क दर तैयार वस्तुओं से कम से कम एक श्रेणी कम करने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए २७३ प्रकार के कच्चे माल पर सीमा शुल्क दर कम की गई है और ११ तह के सीमा शुल्क को ७ तह में सीमित किया गया है। व्यापार तथा औद्योगिक लॉजिस्टिक गुरुयोजना के कार्यान्वयन के लिए १ अरब १८ करोड़ रुपये विनियोजित किए गए हैं। उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष पांडे ने बताया कि इससे घरेलू उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा, “हमने तैयार वस्तुओं और कच्चे माल के सीमा शुल्क में कम से कम ५ से १० प्रतिशत अंतर की मांग की थी, २७३ वस्तुओं के सीमा शुल्क दर घटाकर वह अंतर कायम रखा गया है। यह उत्पादन को प्रतिस्पर्धी बनाएगा।” उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र की मांग के अनुसार अंतःशुल्क (एक्साइज ड्यूटी) विषय भी बजट में शामिल किया गया है। “स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली तथा जैविक ईंधन उपयोग करने वाली वस्तुओं पर ही अंतःशुल्क लगाना चाहिए, अब ३६० वस्तुओं पर अंतःशुल्क समाप्त किया जाएगा,” उन्होंने कहा।

सीमा शुल्क प्रक्रिया में सुधार करते हुए उत्कृष्ट व्यवसायियों के लिए ‘ब्लू लेन’ के माध्यम से तेज जांच-पास प्रणाली लाई जाएगी और कारोबार मूल्य पर आधारित ऑनलाइन जांच-पास प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा। नियामक संस्थाओं को मजबूत कर सिंडिकेट, कार्टेलिंग, काला बाजारी, मुनाफाखोरी और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को समाप्त किया जाएगा। ईंधन मूल्य स्थिरता के लिए ‘फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट’ का अध्ययन किया जाएगा और पेट्रोल पंपों पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन नीति अपनाई जाएगी।

कर प्रणाली सुधार और विवादास्पद कर निपटान में भी सकारात्मक पहल की गई है। अध्यक्ष पांडे ने बताया, “व्यक्तिगत आयकर की सीमा बढ़ाई गई है और अधिकतम कर दर में १० प्रतिशत की कटौती की गई है। विवादित कर मामलों में १ प्रतिशत भुगतान पर जुर्माना माफ करने का प्रावधान है। इससे व्यवसायियों को अनावश्यक बोझ से राहत मिलेगी।” वित्तीय सुधार के रूप में व्यक्तिगत क्रेडिट स्कोरिंग प्रणाली पहली बार लागू की जाएगी और ‘पीयर-टू-पीयर लेनदेन’ का नियमन होगा। कृषि, उद्योग, पर्यटन और जलविद्युत क्षेत्रों में दीर्घकालिक स्थिर ब्याज दर पर ऋण प्रवाह की नीतिगत रूपरेखा लागू की जाएगी। बैंकिंग क्षेत्र के खराब ऋण प्रबंधन के लिए ‘राष्ट्रीय संपत्ति प्रबंधन कंपनी’ आगामी पुष मासांत तक स्थापित की जाएगी। मंत्री वाग्ले ने यह जानकारी दी।