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विश्वकप फुटबल 2026: ‘‘आसानी से’’ रेड कार्ड दिखाने वाले रेफरी के तौर पर चीन का प्रतिनिधित्व

चीन इस बार के फीफा विश्वकप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया। लेकिन, प्रतियोगिता में चीन का ‘प्रतिनिधित्व’ एक रेफरी के जरिए होगा। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में 11 जून, गुरूवार से शुरू हो रहे विश्वकप में चीनी दर्शक 46 वर्षीय उसी रेफरी मा निंग का समर्थन करेंगे। माको तस्वीरों का उपयोग कर बनाए गए कई मीम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लेनोवो जैसी तकनीकी कंपनियां, हाइसेन्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्माता कंपनियां और अन्य बड़े ब्रांड उन्हें स्पॉन्सर कर रहे हैं। वे अपने सख्त स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। 2015 में शंघाई में आयोजित एक मैच में उन्होंने सात येलो कार्ड और तीन रेड कार्ड दिखाए थे। एक ही मैच में सबसे ज्यादा कार्ड दिखाने के कारण उन्हें “कार्ड मास्टर” उपनाम मिला।

वे पहली बार चार साल पहले कतर में हुए विश्वकप में शामिल हुए थे। ‘फार्थ ऑफिशियल’ के तौर पर उन्होंने मैदान के बाहर रेफरी की मदद की थी। यह उनका दूसरा विश्वकप होगा। मा निंग सोशल मीडिया पर रेडनोट और अन्य चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी सामग्री के जरिए करोड़ों व्यूज जुटा चुके हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने उनका समर्थन किया है, तो कुछ ने चीन में खेलों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। “हमारे पास मा निंग हैं, आपके पास कौन?” रेडनोट पर एक यूजर ने लिखा। “दूसरे देश अपनी टीमों के मैच देखते हैं, हम अपने रेफरी द्वारा कार्ड दिखाए जाने के पल देखेंगे,” एक अन्य व्यक्ति ने कहा।

वह वर्तमान में रेफरियों के दस दिन के कैंप में भाग लेने के लिए मियामी में हैं। उनके साथ दो अन्य चीनी सहायक रेफरी भी मौजूद हैं। सहायक रेफरी जो फे और वीडियो असिस्ट रेफरी फू मिंग दोनों मुख्य रेफरी के सहयोगी के रूप में मैदान के बाहर होंगे। मा निंग के अनुभव को विश्व फुटबॉल नियंत्रक संस्था फीफा ने 2011 में मान्यता दी थी। वे नानजिंग स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में भी अध्यापन करते हैं। आगामी विश्वकप के लिए अनुभव अर्जित करने के मकसद से उन्होंने दो हफ्ते पहले रेडनोट पर खाता खोला। रेडनोट चीन में इंस्टाग्राम जैसा लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है।

इस प्लेटफॉर्म पर उनके हजारों फॉलोअर्स हैं। रेडनोट पर उनकी पहली पोस्ट में उन्होंने पहने रेफरी की टीशर्ट की जेब से एक छोटा लाल नोटबुक दिखाया है। यह उनके चीनी नाम को दर्शाता है और उन्हें रेफरी के तौर पर मिले ‘रेड कार्ड’ प्रतिष्ठा को संकेत करता है। नियम के गंभीर उल्लंघन करने वाले खिलाड़ी को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेजा जाता है। अगली पोस्ट में वे सूटकेस पैक करते और विश्वकप के लिए जिम में व्यायाम करते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में नाटकीय संगीत भी जोड़ा गया है जबकि लेनोवो टैबलेट और अन्य उपकरण भी दिखाए गए हैं। “मैं यह काम आत्मविश्वास और दृढ़ता से करता हूँ। विश्वकप, हम आ रहे हैं,” कैप्शन में लिखा है।

चीन अब तक केवल एक बार 2002 में विश्वकप में शामिल हुआ है। उस समय चीन ने कोई भी मैच नहीं जीता और समूह चरण में ही बाहर हो गया। तब से चीन क्वालीफाइंग राउंड पार कर विश्वकप में शामिल नहीं हो सका है। पिछले दो दशकों में चीनी फुटबॉल क्षेत्र आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के आरोप में कुछ खिलाड़ियों, रेफरी और क्लब अधिकारियों को आजीवन प्रतिबंध का सामना भी करना पड़ा है।