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मधेश सरकार ने 41 अरब के बजट का किया सार्वजनिक, उपभोक्ता समितियों को कमजोर बनाने की नीति घोषित

मधेश सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के लिए 41 अरब 13 करोड़ 6 लाख रुपये का बजट सार्वजनिक किया है। वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए बजट में एक करोड़ रुपये से कम लागत वाली योजनाओं के लिए बजट आबंटित न करने की नीति अपनाई गई है। बजट में ‘मुख्यमंत्री बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ कार्यक्रम को संशोधित कर ‘महिला स्वरोजगार कार्यक्रम’ संचालित करने की व्यवस्था की गई है।

अर्थ मंत्री युवराज भट्टराई ने सोमवार को प्रदेशसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए बताया कि ‘मेड इन मधेश, समृद्ध प्रदेश’ साझा संकल्प को साकार करने हेतु यह बजट लाया गया है। हालांकि, इस नारे का व्यावहारिक प्रभाव कितना प्रभावशाली होगा, इस पर संशय व्यक्त किया जा रहा है। बजट में चालू खर्च के लिए 14 अरब 66 करोड़ 32 लाख 29 हजार रुपये यानी कि 35.64 प्रतिशत और पूंजीगत खर्च के लिए 26 अरब 47 करोड़ 53 लाख 71 हजार रुपये यानी कि 64.36 प्रतिशत विनियोजित किया गया है।

बजट में विकास परियोजनाओं को खुली प्रतिस्पर्धा के माध्यम से लागू करने का उल्लेख है। वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए एक करोड़ रुपये से कम लागत वाली योजनाओं के लिए बजट विनियोजन न करने, नए वाहन खरीद पर रोक लगाने तथा अनुत्पादक खर्च में कटौती कर पूंजीगत निर्माण में निवेश बढ़ाने की नीति अपनाई गई है। इस बजट को पूर्व सचिवों ने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा है कि यह उपभोक्ता समितियों को कमजोर बनाने के लिए एक करोड़ रुपये से कम लागत वाली विकास योजनाओं को निरुत्साहित करेगा।

बजट में सरकार ने उत्पादन और रोजगार वृद्धि का लक्ष्य रखा है। इसमें कृषि और उद्योग क्षेत्रों के आधुनिकीकरण एवं नवाचार के माध्यम से प्रदेश के भीतर रोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का उल्लेख है। इसके लिए किसानों को प्रत्यक्ष अनुदान उपलब्ध कराने और डिजिटल किसान कार्ड वितरण की योजना बनाई गई है। सरकार का विश्वास है कि इससे अनुदान वितरण प्रक्रिया में दलालों की भूमिका समाप्त होगी।