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साढ़े सात दशक के उत्खनन के बाद ‘सार्डिस’ को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया

११ असार, वाशिंगटन। लगभग साढ़े सात दशक के निरंतर उत्खनन और खोज के बाद, तुर्की के पश्चिमी हिस्से में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक नगर ‘सार्डिस’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। सन १९५८ से हार्वर्ड और कॉर्नेल विश्वविद्यालय के संयुक्त नेतृत्व में शुरू हुआ ‘हार्वर्ड-कॉर्नेल एक्सप्लोरेशन ऑफ एन्सिएंट सार्डिस’ विश्व की सबसे लंबे समय तक लगातार चलने वाली पुरातत्व परियोजनाओं में से एक है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने इतिहास लेखन में एक नया अध्याय जोड़ा है और दशकों की खोज तथा निरंतर पुरातात्विक प्रयासों के महत्व को पुनः प्रमाणित किया है।

साढ़े हजार वर्ष पुराना सार्डिस शहर ग्रीक, रोमन, बाइज़ेंटाइन और ओटोमन साम्राज्यों के उत्थान और पतन की गवाही देता है। विभिन्न ऐतिहासिक युगों में शासकों के बदलने के बावजूद यहां के उत्खनन कार्य दशकों तक निरंतर जारी रहे। कॉर्नेल विश्वविद्यालय के कला इतिहास एवं दृश्य अध्ययन के सह-प्राध्यापक बेंजामिन एंडरसन के अनुसार इस दीर्घकालिक परियोजना ने इतिहास को समझने के लिए एक ठोस और महत्वपूर्ण डेटा बेस तैयार किया है।

प्राचीन स्रोतों में सार्डिस का व्यापक उल्लेख मिलता है, लेकिन पिछले ७५ वर्षों की पुरातात्विक खोजों ने ही इस इतिहास को भौतिक साक्ष्यों के साथ जीवंत किया है। फलाम युग के लिडिया अधिराज्य की राजधानी रहा सार्डिस भूमध्य सागर और एनाटोलियन पठार के बीच रणनीतिक रूप से स्थित था, जिसने पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों को जोड़ने का जरिया बनाया। लिडियाई लोगों को विश्व में पहली बार सिक्के का आविष्कार करने का श्रेय मिलता है, और उनके राजा क्रोसस अपनी अपार संपत्तियों के कारण इतिहास में प्रसिद्ध थे।

यह पुरातत्व स्थल अमेरिकी पुरातत्व इतिहास में भी एक महत्वपूर्ण मोड़ का परिचायक है। बीसवीं सदी के प्रारंभिक उत्खननों में ऐतिहासिक ‘आर्टेमिस मंदिर’ और समाधि स्थल पाए गए, हालांकि कई कलाकृतियाँ क्षतिग्रस्त हुईं या अवैध रूप से अमेरिका ले जाई गईं। इनमे से एक विशाल स्तंभ आज भी न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में प्रदर्शित है।

वर्तमान में प्राकृतिक क्षय, आधुनिक कृषि, विस्फोटक पदार्थों और डोजर के उपयोग से होने वाले औद्योगिक खजाना चोरों ने सार्डिस के प्राचीन समाधि स्थलों एवं खजानों की सुरक्षा को बड़ी चुनौती बना दिया है। इसे लेकर यूनेस्को की संरक्षण नीतियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद जताई जा रही है।