२ असार, काठमांडू। चालू आर्थिक वर्ष में कोशी प्रदेश में चाय और कॉफी उत्पादन में वृद्धि देखी गई है। नेपाल राष्ट्र बैंक के अध्ययन के अनुसार, कोशी में चाय उत्पादन ०.९ प्रतिशत और कॉफी उत्पादन १७.६ प्रतिशत बढ़ा है। राष्ट्र बैंक की चालू वर्ष की अर्धवार्षिक रिपोर्ट में उल्लेख है कि कोशी प्रदेश की समग्र कृषि फसल उत्पादन ४.४ प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में उत्पादन में ७ प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
खाद्य, नकदी तथा अन्य फसलों में धान का उत्पादन ४ प्रतिशत घटा है जबकि मक्का ०.३, गेहूं २.५, कोदो ०.३, जौ १३.७, फापर २.५१ और आलू २ प्रतिशत बढ़ा है। तरकारी उत्पादन ६.४ प्रतिशत, फल-फूल २.६ और मसाला उत्पादन ११.८ प्रतिशत घटा है। इस प्रदेश के कुल खेती योग्य क्षेत्रफल का ३९.८ प्रतिशत क्षेत्र सिंचाई सुविधा से लैस है, जो पिछले वर्ष के ४०.८ प्रतिशत के मुकाबले कम है।
चालू वर्ष के पौष तक कोशी में दुग्ध उत्पादन १.९ प्रतिशत और मछली उत्पादन १६.५ प्रतिशत बढ़ा है जबकि मांस उत्पादन ५.१, अंडा १८.५ और ऊन उत्पादन ०.४ प्रतिशत घटा है। चालू वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर ३.१३ प्रतिशत रहने का प्रारंभिक अनुमान है। पिछले वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर २.७२ प्रतिशत थी। २०७८/७९ में कोशी का कुल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों का योगदान क्रमशः ३२.४७ प्रतिशत, १७.६७ प्रतिशत और ४९.८५ प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
“अनलाइनमार्फत मानिसहरू जति सजिलै ठगिन्छन्, त्यति नै सजिलै आफ्नो रकम फिर्ता पाउन सक्दैनन्।” यो भनाइ नेपाल प्रहरीको साइबर ब्यूरोका वरिष्ठ अधिकारीहरूको हो। साइबर सुरक्षाविज्ञहरूले यस्ता ठगीहरूबाट बाँच्नै सर्वोत्तम उपाय भएको सुझाव दिएका छन्। विश्वकप फुटबलका खेलहरू निशुल्क हेर्न पाइने भनाएर पठाइएका अनलाइन लिङ्कका कारण ठगीको समस्या बढिरहेको छ, जुन साइबर ब्यूरोको प्रमुख चुनौती बनेको छ। प्रहरी, बैंक तथा वित्तीय संस्थाहरूले यस्ता ठगीबाट बच्न बारम्बार सार्वजनिक सचेतना दिएका भए पनि समस्या दिनप्रतिदिन बढिरहेको देखिन्छ। अहिलेसम्म करिब २.२९ करोड रुपैयाँ गुमेको रिपोर्ट छ।
विश्वकप फुटबल प्रतियोगिता सुरु हुने जुन ११ मा साइबर ब्यूरोका प्रवक्ता प्रहरी उपरीक्षक दिलिप गिरीले जनाएका थिए कि उजुरी गर्नेहरूको संख्या ७७ र ठगी भएको रकम १ करोड ६८ लाख रुपैयाँ थियो। प्रतियोगिता सुरु भएको पाँच दिनभित्र उजुरी गर्नेहरूको संख्या ११५ पुगिसकेको र ठगी रकम २ करोड २९ लाख रुपैयाँ नाघिसकेको प्रहरीले जानकारी दिएको छ। यो तथ्यांक केवल उजुरी भएका घटनामा आधारित भएकाले ठगिएका व्यक्ति र रकम अझ बढी हुन सक्ने अनुमान गरिन्छ। “लापरवाही र अल्पलोभका कारण यो समस्या रोक्न नसकिएको देखिन्छ। निशुल्क हेर्ने लोभमा धेरैले फस्दैछन्,” गिरीले बताएका छन्।
प्रहरी, सञ्चार माध्यम र बैंकहरूले बारम्बार सचेतना दिए पनि अनुभवी मानिसहरू समेत सोचविचार नगरी ठगिन थालेका छन्। ठगहरूले रकम कसरी उजाड गर्छन् भने, सामाजिक सञ्जालमा निशुल्क फुटबल हेर्न “यो लिङ्क थिच्नुहोस्” भनि सन्देश पठाएर फसाउने गर्दछन्। त्यस्ता लिङ्कमा क्लिक गर्दा ‘एपीके’ नामक फाइल डाउनलोड गराउन बाध्य पारिन्छ र विभिन्न सर्तहरू स्वीकार गर्न लगाइन्छ। यस वर्ष २०२६ को फिफा विश्वकप फुटबल देख्न टेलिभिजनका लागि ९९९ रुपैयाँ र मोबाइलका लागि ५४९ रुपैयाँ शुल्क निर्धारण गरिएको छ।
साइबर सुरक्षा विज्ञ विजय लिम्बुले भनेका छन् कि मानिसहरूको कमजोरी र सरकारले कमजोर तत्परताका कारण ठगी बढेको छ। “मानिसहरू किन ठगिन्छन् भन्ने ठूलो प्रश्न हो र सरकारले राष्ट्रिय तहमा यसबारे सम्बोधन गर्नुपर्नेछ,” लिम्बुले बताए। विश्वकपको समयमा ठगी बढी हुने भएकाले यसलाई डेङ्गु रोगजस्तै प्रकोपसँग तुलना गर्दै सरकारले बेलैमा जागरुकता तथा रोकथामका कार्यक्रम अगाडि बढाउनुपर्छ भनी उनले सुझाए। नेपाल राष्ट्र बैंकका प्रवक्ताले अनलाइन ठगीविरुद्ध विभिन्न कदम चालिरहेको जानकारी दिए। “यदि ह्याकिङको शंका लाग्यो भने हामी मौखिक सूचना मात्रमा पनि ४८ घण्टासम्म खातामा रोक लगाउन सक्षम छौं,” उक्त प्रवक्ताले बताए।
2 असार, मान्म (कालीकोट)। दलित समुदाय के इतिहास को दर्शाने वाला लुहारेकोट तेजी से विकास कर रहा है। स्थानीय सरकार ने लुहारेकोट को धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है, जिससे इसकी महत्वता बढ़ रही है। कालीकोट के खाडांचक्र नगरपालिका–1, मान्म सदरमुकाम बाजार में स्थित लुहारेकोट को दलित समुदाय की वीरता और साहस का प्रतीक माना जाता है। सदरमुकाम की सिरानी में बने प्रतिमा सहित संरचना ने स्थानीय इतिहास और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, सामाजिक कार्यकर्ता बाले विश्वकर्मा ने बताया।
‘लुहार समुदाय के अनुसार इस स्थल का वास्तविक नाम ‘लुहारेकोट’ है। इसकी ऐतिहासिक पहचान का सम्मानपूर्वक संरक्षण होना चाहिए,’ उन्होंने कहा। स्थानीय मौखिक इतिहास, वंशावली और जनविश्वास के आधार पर लुहारेकोट का खांडाचक्र क्षेत्र के इतिहास में विशिष्ट स्थान है, खांडाचक्र नगरपालिका–2 के पञ्चदेव माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक लक्षिराम विश्वकर्मा ने जानकारी दी। ‘इस स्थल का संरक्षण, अध्ययन, शोध और प्रचार-प्रसार भावी पीढ़ियों के लिए आवश्यक है,’ उन्होंने जोड़ा, ‘स्थानीय जनश्रुति, मौखिक इतिहास तथा लुहार समुदाय में पीढ़ियों से चली आ रही वंशावली के आधार पर लुहारेकोट केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि लुहार समुदाय का राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में जाना जाता है।’
इस स्थान के इतिहास का सम्बन्ध लुहार समुदाय के प्रथम पूर्वज माने जाने वाले शान्ति लुवार से जुड़ा है और स्थानीय विश्वास के अनुसार शान्ति लुवार ही लुहारेकोट के संस्थापक एवं इस क्षेत्र के प्रारंभिक शासक थे, लक्षिराम ने बताया। ‘उस समय लुहारेकोट के नीचे, वर्तमान मान्म बाजार क्षेत्र में लुहार समुदाय की बड़ी बस्ती थी। वर्तमान प्रतिमा चौराहे से पूर्व की दिशा में लुहारेकोट तक का पूरा भूभाग लुहार समुदाय के अधीन माना जाता है,’ उन्होंने कहा। वर्तमान जिला अदालत और जिला समन्वय समिति के कार्यालय के आसपास क्षेत्र में लुहारों की पुरानी बस्ती होने की मान्यता है। उक्त बस्ती से ऊपर स्थित विशाल और ऊँची चट्टान को ही ‘लुहारेकोट’ कहा जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इसी चट्टान पर बैठकर राज्य संचालन, न्यायिक निर्णय, प्रशासनिक बैठक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर चर्चा होती थी। इसी कारण इस स्थान को तत्कालीन शासन केंद्र माना जाता है। वर्तमान में कालीकोट के खाडांचक्र नगरपालिकायें ने लुहारेकोट के इतिहास को दर्शाने हेतु वीरता के प्रतीक के रूप में प्रतिमा का निर्माण किया है, नगर उपप्रमुख गणेशबहादुर शाही ने बताया।
२ असार, काठमाडौं । कपर आधारित नई दवा मस्तिष्क में जमा विषाक्त प्रोटीन को हटाकर रोगी की स्मरणशक्ति सुधारने में सफल हुई है, ऐसा एक नए शोध में पाया गया है। ऑस्ट्रेलिया के मोनाश विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान ‘Cu(ATSM)’ नामक कपर युक्त कंपाउंड के माध्यम से अल्जाइमर रोग से प्रभावित मस्तिष्क की सफाई प्रणाली को पुनः सक्रिय किया है। यह दवा मस्तिष्क में हानिकारक ‘एमाइलोइड-बिटा’ प्रोटीन के जमाव को रोकती है और स्मृति क्षमताओं को पुनः मजबूत बनाती है।
यह दवा पहले से ही पार्किंसंस और एएलएस जैसे न्यूरोलॉजिकल विकारों के उपचार हेतु मानव में परीक्षण की जा चुकी है, इसलिए अल्जाइमर के लिए इसके क्लिनिकल ट्रायल जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। अल्जाइमर रोग में मस्तिष्क में धीरे-धीरे विषाक्त एमाइलोइड-बेटा प्रोटीन जमा होता है, जिसे रक्त-मस्तिष्क अवरोध (ब्लड-ब्रेन बैरिएर) में मौजूद विशेष ‘पी-ग्लाइकोप्रोटिन’ (P-gp) पंप्स साफ करते हैं। लेकिन रोगियों में ये पंप जब अपंग हो जाते हैं, तो मस्तिष्क में जमा फोहोर नसों को प्रभावित करने लगता है।
मोनाश इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के प्रमुख लेखक डॉ. जे प्युन के अनुसार, ५६ दिनों के उपचार के दौरान इस नए कपरयुक्त औषधि ने उन पंपों की संख्या में २४ प्रतिशत की वृद्धि की और विषाक्त प्रोटीन की मात्रा में ४२ प्रतिशत की कमी लाई। इसका सकारात्मक प्रभाव यह रहा कि प्रयोगशाला में मूसों की सीखने और याददाश्त की क्षमता में लगभग ४४ प्रतिशत सुधार देखा गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि दवा का असर केवल पंपों की मरम्मत तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि मस्तिष्क की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले ‘माइक्रोग्लिया’ कोशिकाओं को भी सक्रिय करता है, जो विषाक्त प्लेक्स को नष्ट करती हैं।
शोध टीम के वरिष्ठ प्रोफेसर जोसेफ निकोलाज्जो ने कहा कि दवा की सुरक्षा परीक्षण पहले ही सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, और यह अल्जाइमर के प्रारंभिक लक्षणों वाले मरीजों के लिए आशाजनक नई उपचार पद्धति साबित होगी। विश्व के कई देशों में, खासकर ऑस्ट्रेलिया में, डिमेंशिया और अल्जाइमर मौत के मुख्य कारण माने जाते हैं, इसलिए इस शोध को चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
२ असार, काठमांडू। जापान में आयोजित होने वाले २०वें एशियाई खेल (एशियन गेम्स) के लिए तैराकी खिलाड़ियों के चयन प्रक्रिया में गंभीर धांधली और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने विरोध जताया है। नेपाल के नंबर एक तैराक इर्विन श्रेष्ठ, मेधावी केसी समेत अन्य खिलाड़ियों ने नेपाल तैराकी संघ पर पूर्व सूचना के बिना नियमों का उल्लंघन कर अचानक चयन मानदंड बदलने और खिलाड़ियों के मनोबल को कमजोर करने का आरोप लगाया है। मंगलवार को काठमांडू में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों ने खेल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।
मुख्य विवाद क्या है? नेपाल तैराकी संघ ने वैशाख १० को सूचना जारी कर २०८३ साल जेठ २३ और २४ को आयोजित होने वाले ‘तीसरे नेपाल एक्वाटिक चैंपियनशिप’ को एशियन गेम्स के ‘प्रि-क्वालिफिकेशन’ (प्रारंभिक चयन) के रूप में घोषित किया था। इस सूचना के अनुसार, उक्त प्रतियोगिता से महिला और पुरुष दोनों वर्ग में ८-८ खिलाड़ियों का चयन कर असार के तीसरे सप्ताह में ‘क्वालिफिकेशन’ (अंतिम चयन) प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। परंतु, जेठ २३ को पहले दिन का खेल समाप्त होने के बाद २४ तारीख को बिना कोई मुहर या हस्ताक्षर वाली एक सूचना सोशल मीडिया और खेल स्थल पर चस्पा कर दी गई, जिसमें इस चैंपियनशिप को ही ‘अंतिम चयन’ में बदल दिया गया। चौथाई से अधिक खेल खतम होने के बाद मानदंड में बदलाव होने पर खिलाड़ी इर्विन श्रेष्ठ ने इसे बड़े षड्यंत्र और धोखाधड़ी करार दिया।
‘आधे मैच के बाद बिना किसी मुहर और हस्ताक्षर के सूचना जारी करके प्रि-क्वालिफिकेशन को क्वालिफिकेशन में बदलना खेल नियमों के खिलाफ है। राष्ट्रीय खेल परिषद (राखेप) ने जेठ २२ को ५ दिनों के अंदर नाम भेजने को कहा था, जबकि आयोजक जापान ने असार १७ (१ जुलाई) तक समय दिया था। समय अभी बाकी है, तो नियम बदलने का फायदा किसे हुआ?’ नेपाल के नंबर १ तैराक इर्विन श्रेष्ठ ने यह प्रश्न उठाया। खिलाड़ियों ने तकनीकी लापरवाही और डोपिंग जांच के अभाव को भी गंभीर मामले के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि पहले दिन के मुकाबलों में अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार आधुनिक तकनीकी ‘टच बोर्ड’ की जगह हाथ से मापा गया स्टॉपवॉच इस्तेमाल किया गया।
अंतरराष्ट्रीय खेल के चयन में इस तरह की लापरवाही और बार-बार खेल तालिका तथा मानदंडों को बदलने से संघ की गैरजिम्मेदारी साफ जाहिर हुई है, खिलाड़ियों ने कहा। साथ ही, प्रतियोगिता में अनिवार्य ‘डोपिंग टेस्ट’ भी नहीं करवाया गया। राष्ट्रीय तैराक मेधावी केसी ने कहा कि इस अन्याय को सहना बड़ा पाप है क्योंकि खेल क्षेत्र में ऐसी अनियमितताएं होने से देश के प्रतिभाशाली खिलाड़ी विदेश पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘चाहे जो भी चयन हो, हमारे साथी होंगे, लेकिन प्रक्रिया पूर्व सूचना और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। हम भविष्य में नैतिकता और क्षमता रखने वाले खिलाड़ियों के अन्याय में न पड़ने के लिए आवाज उठा रहे हैं। अन्याय करने से बेहतर है उसे स्वीकार न करना।’
तैराकी प्रशिक्षक मेघ लामाले बताया कि बार-बार खेल तालिका और चयन मानदंड बदलने से खिलाड़ियों की मानसिकता और तैयारी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इर्विन के अभिभावक महेश्वर श्रेष्ठ ने भी कहा कि नियमों और भावना के विपरीत चल रही चयन प्रक्रिया ने संघ की विश्वसनीयता को कम किया है। प्रशिक्षक लामाले कहा, ‘सूचनाएं कम और गलत आने के साथ बार-बार चयन मानदंड बदलने से खिलाड़ियों के साथ अन्याय हो रहा है। यदि खेल योजना के अनुसार खेल संपन्न हुआ तो परिणाम बेहतर होंगे।’
इर्विन श्रेष्ठ के अभिभावक महेश्वर श्रेष्ठ ने कहा कि खिलाड़ियों द्वारा कड़ी मेहनत और लक्ष्यों को पूरा करने के रास्ते में अनावश्यक अड़चनें आना एक गंभीर समस्या है। उन्होंने खेल नियमों और प्रक्रिया के अनुसार खेल आयोजन की अपील की। नियमों का उल्लंघन खेल संबंधी निकायों की विश्वसनीयता पर भी असर डालता है, उन्होंने ध्यान दिलाया।
सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को बुधवार असार ३ को सुनवाई के लिए बुलाया है। अदालत ने नेपाल तैराकी संघ, राष्ट्रीय खेल परिषद और नेपाल ओलंपिक समिति को लिखित जवाब पेश करने का आदेश भी दिया है। असार १७ तक खिलाड़ियों के नाम भेजने की समय सीमा रहने के कारण खिलाड़ियों ने तैराकी संघ से नियमों के अनुसार पुनः अंतिम चयन आयोजित कर गलती सुधारने का आग्रह किया है। खेल क्षेत्र में फैली ऐसी अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच नहीं हुई तो पूरे देश के खेल प्रतिष्ठा पर संकट आने की चेतावनी भी उन्होंने दी है।
फाइल तस्वीर २ असार, काठमांडू। विश्व शांति तथा आध्यात्मिक समाज ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कैलाश–मानसरोवर में पहली बार योग अभ्यास कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। समाज ने सोमवार को एक पत्रकार सम्मेलन के माध्यम से इस बात की जानकारी दी। समाज के अध्यक्ष रंजन शर्मा ने बताया कि कैलाश–मानसरोवर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य नेपाल को योग गुरु का देश के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राचीन योग, तपस्या, ध्यान और आध्यात्मिक सभ्यता को विश्व के सामने प्रस्तुत करना लक्ष्य है।
शर्मा के अनुसार योग दिवस मनाने के लिए असार ३ तारीख को वहां की यात्रा शुरू होगी। योग दिवस के दिन, असार ७ को कैलाश–मानसरोवर में सामूहिक रूप से योग और ध्यान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘भगवान शिव की तपोभूमि कही जाने वाली कैलाश–मानसरोवर क्षेत्र में नेपाल और नेपाली समुदाय की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग तथा आध्यात्मिक चेतना कार्यक्रम का आयोजन होना सभी नेपाली लोगों के लिए गर्व की बात है।’’
कैलाश–मानसरोवर की पवित्र ऊंचाई और हिमालय की शांत सुंदरता में योग केवल अभ्यास ही नहीं, बल्कि आत्मा के गहरे जागरण और जीवन को शांति की ओर ले जाने का पवित्र साधन बनने का उनका दृढ़ विश्वास है। कार्यक्रम में नेपाल, भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों से योगी, ध्यान साधक, योग शिक्षक, तपस्वी, शोधकर्ता, आध्यात्मिक अभियानकर्ता समेत १०० से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। विश्व शांति तथा आध्यात्मिक समाज के नेपाल सहित भारत, कतार, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन समेत ४७ देशों में शाखाएं और साधना केंद्र मौजूद हैं। कैलाश–मानसरोवर में होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय योग यात्रा एवं साधना से नेपाल की आध्यात्मिक पहचान, सांस्कृतिक कूटनीति, योग पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और युवा पीढ़ी में सकारात्मक चेतना के विस्तार की अपेक्षा जताई गई है।
तस्बिर का शीर्षक, सन् २०१३ में विश्व कप द्वारा आयोजित टूर के दौरान ट्रॉफी नेपाल पहुंची थीArticle Information
कई महान खिलाड़ी विश्व कप की ट्रॉफी को अपने हाथों में उठा चुके हैं। लेकिन ट्रॉफी के बारे में अक्सर चर्चा नहीं होती है या इसके दो अलग-अलग संस्करणों की बहुत कम जानकारी होती है।
विश्व कप की पुरानी ट्रॉफी को मौजूदा डिज़ाइन ने प्रतिस्थापित किए हुए 50 साल से अधिक हो चुके हैं।
फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफी में से एक मानी जाने वाली विश्व कप ट्रॉफी को दो अलग-अलग डिजाइन क्यों बनानी पड़ी?
मूल ‘ज्युल रीमे ट्रॉफी’
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तस्बिर का शीर्षक, सन् १९६६ में विश्व कप जीतने के बाद इंग्लैंड ने मूल ‘ज्युल रीमे ट्रॉफी’ उठाई थी
फिफा ने विश्व कप का पहला आयोजन 1930 में किया था और पहली ट्रॉफी का उपयोग भी शुरू किया था। उस समय प्रतियोगिता ज्युल रीमे के नेतृत्व में थी जिनके सम्मान में इस ट्रॉफी का नाम रखा गया था।
रीमे फिफा के अध्यक्ष 1921 से 1954 तक सबसे लंबे समय तक रहे।
फ्रेंच मूर्तिकार अबेल लाफ्लूर ने डिज़ाइन की इस ट्रॉफी में ग्रीक मिथक की विजय की देवी नाइकी की आकृति है। नाइकी एक कप को उठाए हुए दिखाई देती हैं।
यह “स्टर्लिंग सिल्वर” यानी शुद्ध चांदी में हल्का ताम्र मिश्रण करके सोने की परत से सजाई गई थी और इसमें नीले रंग के बहुमूल्य पत्थर “लापिस लाजुली” लगाए गए थे।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फिफा के अधिकारी ओट्टोरिनो बारासी ने रोम में इस ट्रॉफी को नाज़ियों की पहुँच से बचाने के लिए अपने बिस्तर के नीचे जूते के बक्से में चुपा दिया था। वे इतालवी थे।
सन् 1966 में इंग्लैंड में विश्व कप शुरू होने से कुछ महीने पहले यह ट्रॉफी सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान चोरी हो गई थी।
उसके बाद पिकल्स नाम का कुत्ता दक्षिण लंदन के एक बगीचे में झाड़ियों के नीचे छिपाए गए ट्रॉफी को लेकर आया था जिसे एक अखबार में लपेटा गया था।
1970 में लगातार तीसरी बार विश्व कप जीतने के बाद ज्युल रीमे ट्रॉफी ब्राजील को स्थायी स्वामित्व में दे दी गई।
लेकिन वह ट्रॉफी 1983 में फिर चोरी हो गई। ब्राजील फुटबॉल एसोसिएशन के मुख्यालय से चोरी हुई ट्रॉफी कभी नहीं मिली और माना जाता है कि उसे पिघला दिया गया था। उस समय फिफा ने नई विश्व कप ट्रॉफी तैयार कर ली थी।
विश्व कप की आधुनिक ट्रॉफी
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तस्बिर का शीर्षक, विश्व कप की नई ट्रॉफी 1974 से उपयोग में लाई गई है
विश्व कप की नई ट्रॉफी इटली के कलाकार सिल्वियो गाज़ानिगा द्वारा बनाई गई है। उन्होंने यूईएफए यूरोपा लीग ट्रॉफी भी डिज़ाइन की है।
फिफा की विश्व कप की यह नई ट्रॉफी 36 सेंटीमीटर ऊँची और 18 कैरेट सोने से बनी है।
इसमें दो मानवीय आकृतियाँ पृथ्वी को ऊपर उठाए हुए दिखती हैं। फिफा के अनुसार यह डिज़ाइन “फुटबॉल की वैश्विक एकता और भावना” को दर्शाता है।
1974 में पश्चिम जर्मनी ने विश्व कप जीतकर पहली बार इस नई ट्रॉफी को उठाया था।
पुरानी ट्रॉफी खो जाने के बाद फिफा ने यह निर्णय लिया कि किसी भी टीम को ट्रॉफी स्थायी रूप से नहीं दी जाएगी।
विश्व कप विजेता टीम केवल खेल खत्म होने पर विशेष समारोह में ट्रॉफी को छू सकती है, लेकिन बाद में उन्हें सोने की परत वाली ट्रॉफी की प्रतिकृति से संतोष करना होता है।
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२ असार, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस के उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा और पूर्वमहामंत्री कृष्णप्रसाद सिटौला के बीच बैठक संपन्न हुई है। दोनों नेताओं के बीच मंगलवार को गृहजिला झापा में आमने-सामने बातचीत हुई। कांग्रेस झापा के सचिव कृष्ण हुमागाईं ने दोनों नेताओं के बीच वार्ता के दौरान ली गई तस्वीर सोशल मीडिया फेसबुक पर साझा की है। ‘आज पार्टी के पूर्वमहामंत्री कृष्णप्रसाद सिटौला और पार्टी के उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा के बीच झापा में वन टू वन वार्ता हुई,’ उन्होंने तस्वीर के साथ लिखा। कांग्रेस में संस्थापन और अन्य समूहों के बीच विवाद चरमोत्कर्ष पर पहुंचा हुआ है, ऐसे में दोनों नेताओं के बीच यह आमना-सामना एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। हालांकि, इस बैठक में हुई बातचीत के विषय वस्तु अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
२ असार, काठमाडौं । वर्तमान विश्व फुटबाल के सबसे प्रभावशाली स्ट्राइकरों में से एक एर्लिंग ब्रांट हालैंड हैं। क्लब फुटबाल में गोल करने वाली मशीन के रूप में प्रसिद्ध हालैंड का फिफा विश्वकप में खेलने का सपना साकार होने जा रहा है। हालैंड सहित नर्वे टीम ने २८ वर्षों बाद फिफा विश्वकप में पुनः प्रवेश किया है। समूह I में शामिल नर्वे ने इराक के साथ होने वाले मुकाबले में हालैंड विश्वकप में अपना डेब्यू करेंगे। इस मैच में सभी की निगाहें खासकर हालैंड पर टिकी होंगी। हालैंड ने Borussia Dortmund से लेकर Manchester City तक अपनी गोल करने की क्षमता दिखा रखी है और वे फिफा विश्वकप में भी इसी स्तर का प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखते हैं।
नर्वे और इराक दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला पुनरागमन का उत्सव होगा। नर्वे १९९८ के बाद पहली बार विश्वकप के मुख्य चरण में चुना गया है, जबकि इराक १९८६ के मैक्सिको विश्वकप के बाद ४० वर्ष बाद विश्वकप में वापसी कर रहा है। फिफा रैंकिंग में नर्वे ३१वें और इराक ५७वें स्थान पर है। नर्वे ने यूरोपीय क्वालीफाइंग में सर्वाधिक ३७ गोल करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। यह नर्वे की चौथी बार विश्वकप में उपस्थिति होगी। ‘दी लायंस ऑफ मेसोपोटामिया’ के नाम से परिचित इराक दूसरी बार विश्वकप में खेल रहा है और पहला जीत दर्ज करने की कोशिश करेगा। १९८६ के विश्वकप में इराक ने अपने सभी तीन ग्रुप मैच गंवाए थे। इराक ने इंटरकॉन्टिनेंटल प्लेऑफ में बोलिविया को २-१ से हराकर इस संस्करण के विश्वकप में जगह बनाई है। फ्रांस और सेनेगल जैसे मजबूत टीमों वाले समूह I को ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ माना जाता है। इसलिए विश्वकप में दोनों टीमें अपनी वापसी को सुखद परिणाम के साथ शुरू करना चाहती हैं। नर्वे और इराक के बीच मुकाबला बोस्टन स्टेडियम में नेपाली समयानुसार बुधवार सुबह पौने ४ बजे शुरू होगा।
२ जेठ, काठमाडौं। ललितपुर स्थित डीएवी स्कूल की चौथी मंजिल से गिरने से एक छात्र की मृत्यु हुई है। मृत छात्र चाबहिल निवासी १८ वर्षीय आर्यन सिंह हैं, जिनकी सूचना ललितपुर जिल्ला प्रहरी परिसर के वरिष्ठ उपरिक्षक एवं प्रवक्ता गौरव मिश्र ने दी। यह घटना सोमवार दोपहर साढ़े १२ बजे हुई। सिंह चौथी मंजिल से गिरे थे। उन्हें उपचार के लिए सुमेरु सिटी अस्पताल ले जایا गया था, जहां शाम साढ़े ६ बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में उनकी मृत्यु आत्महत्या की संभावित घटना प्रतीत हो रही है। स्कूल के सीसीटीवी फुटेज में भी उन्हें कूदते हुए देखा गया है, पुलिस ने यह जानकारी दी है। उनके पास से सुसाइड नोट भी मिला है। उस सुसाइड नोट का फॉरेन्सिक परीक्षण अभी बाकी है। एक जांच अधिकारी ने बताया, ‘सुसाइड नोट मिला है, लेकिन यह जांच की जानी है कि उसमें लिखे अक्षर वास्तव में उन्हीं के हैं या नहीं।’
२ असार, काठमांडू। पूर्व उपविजेता फ्रांस फ़ीफा विश्व कप २०२६ में पहली बार अफ़्रीकी राष्ट्र सेनेगल के सामने प्रतिस्पर्धा करेगा, तो २४ साल पुरानी वह याद दिलाई जाएगी। फ़ीफा विश्व कप में इन दोनों टीमों के बीच यह एकमात्र मैच था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ये दोनों टीमें इसी एक मैच में आमने-सामने आई थीं। पूर्व विजेता के तौर पर जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व कप में फ्रांस समूह चरण के पहले ही मैच में सेनेगल से हार गया था। परिणामस्वरूप सेनेगल ने १-० से जीत दर्ज की थी। समूह I में मौजूद इन दोनों टीमों का मैच बुधवार सुबह पौने १ बजे मैदान पर शुरू होगा। इस समय विश्व कप के लिए सबसे संतुलित टीम मानी जा रही फ्रांस को उपाधि का प्रबल दावेदार माना गया है, और सेनेगल के खिलाफ फ्रांस की नजर २४ साल पुरानी हार का बदला लेने पर टिकी है।
विश्व कप जीत चुके कप्तान कीलियन एम्बाप्पे के नेतृत्व में फ्रांसीसी टीम में वर्तमान में उस्मान डेम्बेले, माइकल ओलिस, डिजाएर डौ जैसे खिलाड़ी अग्रिम पंक्ति में हैं जबकि औरेलियन चुवामेनी और एड्रियन रेबियोट मिडफिल्ड संभालेंगे। इस बार फ्रांस को स्पेन के साथ उपाधि का मजबूत दावेदार माना जा रहा है और इसके लिए वह पहले मैच से ही बेहतरीन शुरुआत करना चाहता है। पिछले दिन स्पेन को नवागंतुक केप वर्दे ने गोलरहित बराबरी पर रोका था, जिसने कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया था। इसलिए फ्रांस भी पहले मैच में सेनेगल को कम आँकने वाला नहीं है। वर्तमान में सेनेगल अफ़्रीका की एक मजबूत टीम है। फीफा रैंकिंग में फ्रांस तीसरे स्थान पर और सेनेगल पंद्रहवें स्थान पर है।
फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेस्चांप खिलाड़ी और कोच दोनों के रूप में विश्व कप जीतने वाले चुनिंदा लोगों में से हैं। उन्हें इस विश्व कप को जीतकर फ्रांस के कोच के तौर पर अपनी यात्रा सफलता पूर्वक खत्म करने का अवसर मिला है। डेस्चांप विश्व कप के बाद अपनी जगह पूर्व कप्तान जिनेदिन ज़िदान को सौंपने की योजना बना रहे हैं। इसलिए अमेरिका में होने वाले विश्व कप में वह सर्वकालिक महान कोच बनने का मौका पाएंगे। अमेरिका में फ्रांस को दूसरी बार विश्व कप जीतने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही डेस्चांप सबसे अधिक विश्व कप जीतने वाले कोच बनने का रिकॉर्ड भी बना सकते हैं। अगर फ्रांस समूह के तीनों मैच जीतता है, तो डेस्चांप जर्मन कोच हेल्मुट शॉन के १६ मैचों के रिकॉर्ड को तोड़ देंगे।
२ असार, काठमाडौं। नेकपा एमाले के नेता विजय सुब्बा ने पार्टी के भीतर देखे जा रहे गतिविधियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है कि यदि असल नियत वाले नेताओं को नेतृत्व में नहीं लाया गया तो पार्टी का अंत नजदीक है। ‘आदरणीय पार्टी के निष्ठावान कमरेडों, मैं पार्टी निर्माण अभियान में हार मानने की स्थिति में नहीं हूं,’ उन्होंने कहा। ‘पार्टी को नष्ट कर रहे गैर कम्युनिष्ट विकृतियों और विसंगतियों को तुरंत ठीक करना जरूरी है, इस बात को मैंने सभी प्रमुख नेताओं को बार-बार बताया है, पार्टी के विधान, महाधिवेशन और विभिन्न स्तरों के अधिवेशन में स्पष्ट रूप से रखा है, लेकिन मुझे पार्टी विरोधी भाषण करने का आरोप लगाया गया।’
पार्टी के भीतर की गलत गतिविधियों को सुधारने के लिए समय न देने और चापलूस नेताओं को खुश करने की प्रवृत्ति से वर्तमान समस्या और बढ़ गई है, उन्होंने दावा किया। सभी समस्याओं को सामने लाकर वर्तमान स्थिति बनी है, यह सभी जानते हैं, उनका कहना है। उन्होंने आगे कहा, ‘यदि पार्टी के असल नियत वाले नेताओं को नेतृत्व से बाहर रखा गया, तो पार्टी के अंत का इंतजार करना होगा।’
२ असार, काठमाडौं। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता वर्षमान पुन ने संघीयता, समावेशिता तथा समुदायगत भाषा और सांस्कृतिक अधिकारों से वर्तमान सरकार और इसके नेतृत्व वाली पार्टी के पीछे हटने की संभावनाओं पर चिंता व्यक्त की है। मगर समुदाय के भुमे पर्व के अवसर पर दाङ के देउखुरी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने संविधान संशोधन के नाम पर जनता के प्राप्त अधिकार छीनने के प्रयासों को स्वीकार्य नहीं बताया।
उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन के माध्यम से नेपाली जनता की लंबी कुर्बानियों और संघर्षों से हासिल राजनीतिक उपलब्धियों को छीने जाने का प्रयास अस्वीकार्य होगा। २०७२ साल में संविधान जारी होने से पहले उठाए गए और संबोधित न किए गए जनतात्मक मुद्दों को संविधान में समायोजित किया जा सकता है, लेकिन प्राप्य अधिकारों को कोई छीनने का प्रयास कतई स्वीकार्य नहीं होगा, यह उनकी प्रमुख अपील है।
उन्होंने यह भी बताया कि २०५२ साल में शुरू हुए जनयुद्ध ने राज्य के उत्पीड़न में पड़े समुदायों को ऊपर उठाया तथा समाज में जागरूकता लाई है और उन प्राप्त अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी भी है। सरकार द्वारा संविधान संशोधन के लिए कार्यदल गठित कर जनता के अधिकारों पर चर्चा चलाए जाने के बीच, जनता के अधिकारों से राज्य को पीछे नहीं हटना चाहिए, यह उनकी स्पष्ट चेतावनी है।
2 असार, काठमांडू। एटलांटा स्टेडियम में मैच खत्म होते ही सभी कैमरे भोजिन्हा की ओर केंद्रित हो गए। उनकी आंखों से आँसू निकले। चार दशक से ऊपर उम्र के इस खिलाड़ी ने विश्व कप जैसी बड़ी जगह पर स्पेन जैसे मजबूत टीम के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया, इसलिए यह बिल्कुल स्वाभाविक था। विश्व कप के पहले मैच में, 40 वर्ष की उम्र में डेब्यू करते हुए, उपाधि के दावेदार टीम स्पेन को बिना गोल के बराबरी पर रोकना वे मुख्य नायक बने। यही हैं भोजिन्हा। एक दिन पहले तक जिनका नाम विश्व फुटबॉल में कम सुना गया था, वे स्पेन के खिलाफ खतरनाक प्रदर्शन के बाद विश्वव्यापी चर्चित हो गए हैं। अफ्रीकी राष्ट्र केप वर्डे ने फीफा विश्व कप 2026 में पहले मैच में 2010 के विश्व चैंपियन स्पेन को बिना गोल के बराबरी पर रोककर नया इतिहास रचते हुए, 40 वर्षीय गोलकीपर भोजिन्हा सुपरस्टार बन गए हैं।
स्पेन के खिलाफ भोजिन्हा ने एक मजबूत दीवार की तरह प्रदर्शन किया। स्पेन के फॉरवर्ड्स उन्हें पार नहीं कर पाए। युवा फुटबॉल स्टार लामिन यमाल ने दूसरे हाफ में खेला, पर केप वर्डे के खिलाफ कोई खास प्रभाव नहीं डाल पाए। करीब 5 लाख से कम आबादी वाले छोटे द्वीप राष्ट्र केप वर्डे के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में 40 साल के भोजिन्हा मुख्य नायक साबित हुए। स्पेन के विश्वप्रसिद्ध स्ट्राइकरों को निराश करते हुए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ़ द मैच’ अवॉर्ड मिला। अब भोजिन्हा विश्व फुटबॉल और सोशल मीडिया पर बेहद चर्चित हो चुके हैं। मैदान में स्पेन को रोकने वाले भोजिन्हा के सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्पेन के खिलाफ बहादुरी से खेलते हुए, स्पेन ने 74 प्रतिशत से अधिक गेंद नियंत्रण और 27 गोल प्रयास किए, लेकिन ये सभी प्रयास भोजिन्हा ने सफलतापूर्वक रोके। उन्होंने 7 शानदार बचाव किए और स्पेन को आसान गोल करने से बचाया। अगर वे नहीं होते, तो स्पेन आधा दर्जन गोल कर सकता था।
मैच के बाद भोजिन्हा ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि वीजा समस्याओं और आर्थिक कारणों से उनकी मां अमेरिका आकर मैच नहीं देख पाईं, और दादा-दादी का न होना उन्हें भावुक कर गया। ‘मैं रो पड़ा क्योंकि मुझे पालने वाले मेरे दादा-दादी दुर्भाग्यवश यहां नहीं हैं। वे मेरे लिए सब कुछ हैं,’ उन्होंने कहा। ‘मेरी मां भी वीजा के कारण यहां नहीं आ सकीं क्योंकि खर्चा था। मैं चाहता था कि वे यह मैच देखें।’ 25 साल की उम्र में राष्ट्रीय टीम में डेब्यू करने वाले भोजिन्हा का असली नाम जोसिमार जोसे अवोरा डियास है और भोजिन्हा उनका उपनाम है। वे केप वर्डे के मिन्डेलो में जन्मे हैं। अधिकांश आधुनिक फुटबॉलर अपने खेल की शुरुआत बचपन में ही करते हैं, पर भोजिन्हा ने 25 वर्ष की उम्र में ही व्यावसायिक फुटबॉल खेलना शुरू किया।
वे केप वर्डे, मोल्डोवा, रोमानिया, साइप्रस और पुर्तगाल की लोअर डिविजन क्लब्स में खेल चुके हैं। फिलहाल पुर्तगाली क्लब चावेस से जुड़े हुए हैं। 2012 में राष्ट्रीय टीम में डेब्यू करने के बाद अब तक 90 मैच खेल चुके हैं। 10 साल से अधिक राष्ट्रीय टीम में रहने के कारण भोजिन्हा टीम के महत्वपूर्ण सदस्य बन चुके हैं। केप वर्डे को पहली बार विश्व कप में क्वालीफाई कराने में भी उनकी भूमिका निर्णायक रही। 40 साल 12 दिन की उम्र में विश्व कप में पदार्पण करने के बाद वे विश्व कप में डेब्यू करने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। मिस्र के गोलकीपर एसा हल हदारी 45 साल की उम्र में विश्व कप में डेब्यू कर चुके हैं। भोजिन्हा ने टीम की एकता को सबसे बड़ा हथियार बताया। ‘हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी एकता है,’ उन्होंने कहा। ‘कई लोग सोचते थे कि हम यहाँ फिर से मजे लेने आए हैं, पर हमारे पास अच्छी टीम है और हम प्रतिस्पर्धा करने आए हैं। यह हमारा पहला मौका है, लेकिन हमारा लक्ष्य बेहतरीन प्रदर्शन करना है।’
इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या अचानक बढ़ गई है। स्पेन के खिलाफ प्रदर्शन के बाद भोजिन्हा एक रात में ही चर्चा में आ गए। मैच से पहले उनके लगभग 50,000 फॉलोअर्स थे, जो अब 5 मिलियन से अधिक हो गए हैं और संख्या बढ़ रही है। भोजिन्हा विश्व कप 2026 के सबसे बड़े ‘ब्रेकआउट स्टार’ और इंटरनेट सनसनी बन चुके हैं। न तो उनका कोई बड़ा क्लब अनुबंध है, न ही वे युवा हैं, लेकिन उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत ने उन्हें विश्व मंच पर खुद को साबित करने का उदाहरण दिया है। उनकी उत्कृष्ट प्रदर्शन और केप वर्डे के विश्व कप डेब्यू में यह ऐतिहासिक बराबरी हमेशा विश्व कप इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगी।
वह अंतरिक्ष यान जिसने हमारे सौरमंडल के प्रति हमारी पूरी सोच ही बदल दी। शुरुआत में केवल पाँच साल तक काम करने के लिए भेजे गए दो अंतरिक्ष यान सौरमंडल के सबसे दूरस्थ हिस्सों में यात्रा कर रहे हैं। नासा द्वारा ‘भोइजर’ मिशन के तहत बनाए गए ये ‘प्रोब’ अब तक बनाए गए मानव निर्मित वस्तुओं में सबसे दूर पहुंच चुके हैं।
इस परियोजना में शामिल वैज्ञानिक डा. लिन्डा स्पिल्कर ने बताया है कि ये प्रोब कैसे हमारे सौरमंडल की समझ और दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल चुके हैं। भविष्य में ‘एलियन’, यानी बाहरी अंतरिक्ष के जीव, इन प्रोब्स को खोज कर पृथ्वी का दौरा कर सकते हैं, ऐसी संभावना भी जताई जा रही है।