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लेखक: space4knews

दक्षिण कोरिया और चेक रिपब्लिक के बीच रोमांचक मुकाबला होगा

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • फीफा विश्व कप 2026 के अंतर्गत दक्षिण कोरिया और चेक रिपब्लिक के बीच मैच 29 जेठ को मेक्सिको के ग्वाडालजारा स्टेडियम में होगा।
  • एशियाई राष्ट्र दक्षिण कोरिया लगातार 11वीं बार विश्व कप खेल रहा है जबकि चेक रिपब्लिक 20 वर्षों बाद फिर से विश्वपुरस्कार में वापसी कर रहा है।
  • फीफा रैंकिंग में 25वें स्थान पर स्थित दक्षिण कोरिया और 40वें स्थान पर स्थित चेक रिपब्लिक के बीच यह विश्व कप का इतिहास में पहली बार मुकाबला होगा।

28 जेठ, काठमांडू। फीफा विश्व कप 2026 का दूसरा मैच दक्षिण कोरिया और चेक रिपब्लिक के बीच खेला जाएगा। मेक्सिको के ग्वाडालजारा स्टेडियम में यह मैच शुक्रवार सुबह पौने 8 बजे से शुरू होगा।

विश्व कप के इतिहास में यह दोनों टीमों के बीच पहली बार मुकाबला होगा। अन्य प्रतियोगिताओं में इन दोनों टीमों के बीच 3 मैच हुए हैं, जिसमें प्रत्येक ने एक-एक जीत हासिल की है और एक मैच ड्रॉ रहा है। इनकी आखिरी भिड़ंत 2016 में हुई थी, जिसमें दक्षिण कोरिया ने 2-1 से जीत दर्ज की थी।

एशियाई राष्ट्र दक्षिण कोरिया लगातार 11वीं बार विश्व कप में हिस्सा ले रहा है, जबकि चेक रिपब्लिक 20 साल बाद विश्व मंच पर वापसी कर रहा है। दक्षिण कोरिया ने सन् 2002 में चौथा स्थान भी हासिल किया था।

उस समय कप्तानी करने वाले होंग म्युंग-बो अब टीम के मुख्य कोच हैं। चेक रिपब्लिक के 35 वर्षीय पूर्व कप्तान व्लादिमिर दारिदा ने टीम को विश्व कप तक पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संन्यास से वापसी की है और फिर से टीम के साथ शामिल हुए हैं।

दक्षिण कोरिया ने एएफसी क्वालीफाइंग में 16 मैचों में अपराजित रहते हुए केवल 8 गोल ही खाये और अपनी दबदबा कायम की। चेक रिपब्लिक अपने ग्रुप में क्रोएशिया के बाद दूसरे स्थान पर रही और प्ले-ऑफ में आयरलैंड और डेनमार्क को पेनाल्टी शूटआउट में हराकर कठिन परिस्थिति में भी परिणाम निकालने की क्षमता दिखायी।

दोनों टीमों की खेलने की शैली अलग-अलग होने के कारण यह मैच काफी रोमांचक होने की उम्मीद है।

फीफा रैंकिंग में 25वें स्थान पर दक्षिण कोरिया टीम में सन ह्युन-मिन, ली कांग-इन और किम मीन-जैसे प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं। इस ग्रुप में दक्षिण कोरिया को एक मजबूत टीम माना जाता है। इस ग्रुप में सह-आयोजक मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका भी शामिल हैं।

चेक रिपब्लिक फीफा रैंकिंग में 40वें स्थान पर है। चेक टीम में पैट्रिक सिक और आदम ह्लोजेक जैसे खतरनाक खिलाड़ी हैं, जो दक्षिण कोरिया को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

चेक रिपब्लिक ने अपने पिछले 5 मैच पूरे जीत दर्ज किये हैं। दक्षिण कोरिया ने इन 5 मैचों में 3 में जीत और 2 में हार का सामना किया है।

मैच: दक्षिण कोरिया बनाम चेक रिपब्लिक
तारीख और समय: 29 जेठ, सुबह 7:45 बजे से
स्थान: ग्वाडालजारा स्टेडियम
रेफरी: अमीन मोहम्मद ओमर

पिछले 5 परिणाम:
चेक रिपब्लिक – 5 मैच, 5 जीत
दक्षिण कोरिया – 5 मैच, 3 जीत

अतिक्रमित जमीन पर बने संरचना १५ दिनों के भीतर हटाने का निर्देश

समाचार सारांश

सारांश की संपादकीय समीक्षा की गई।

  • बागलुङ नगरपालिका ने सरकारी और सार्वजनिक जमीन पर हुए अतिक्रमण हटाने के लिए १५ दिन का सार्वजनिक सूचना जारी किया है।
  • निर्धारित समय में अतिक्रमित संरचना हटाने में असफल रहने पर नगरपालिका खुद इसे तोड़ेगी और इसका खर्च संबंधित पक्ष से वसूल करेगी।
  • स्थानीय प्रशासन संचालन अधिनियम, २०७४ के अनुसार सार्वजनिक जमीन की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेकर नगरपालिका ने यह कदम उठाया है।

२८ जेठ, गलकोट (बागलुङ) – बागलुङ नगरपालिका ने अतिक्रमित जमीन और संरचनाओं की खोज शुरू कर दी है। नगरपालिका ने बागलुङ बाजार सहित अन्य वाडा क्षेत्रों की सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जा और संरचना निर्माण के विषय में गहरी चिंता व्यक्त की है।

नगरपालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ईश्वरीप्रसाद शर्मा ने बताया कि सरकारी और सार्वजनिक जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए १५ दिनों की सूचना जारी की गई है।

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण करके बनाई गई संरचनाएं और अतिक्रमित जमीन खाली कराना जरूरी है, यदि यह समयसीमा में नहीं किया गया तो नगरपालिका स्वयं इसे तोड़ने का कार्य शुरू कर देगी।

नगरपालिका ने शुक्रवार को जारी सार्वजनिक सूचना में सरकारी, सार्वजनिक, ऐलानी व व्यक्तिगत जमीन की सुरक्षा और अतिक्रमण नियंत्रण हेतु लागत वसूली का भी उल्लेख किया है।

सड़क, नदी किनारा और सार्वजनिक जमीन मिचाकर बनाए गए घर, दुकानों और दीवार जैसी संरचनाएं हटाने के लिए नगरपालिका ने आग्रह किया है। स्थानीय सरकार संचालन अधिनियम, २०७४ व मुलुकी देहानी संहिता, २०७४ के तहत यह जिम्मेदारी स्थानीय तह की है, इसलिए तत्काल अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई शुरू की गई है।

नगरपालिका के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर अतिक्रमण कर घर, दुकानें, पर्खाल जैसी संरचनाएं बनाई गई हैं, जिससे यातायात, सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण में बाधाएं आ रही हैं, इसी कारण यह सूचना जारी की गई है।

सम्पूर्ण अतिक्रमित जमीन खाली करने और संरचनाएं हटाने के लिए पंद्रह दिनों के भीतर सभी व्यक्ति, संस्था व मकान मालिकों से अनुरोध किया गया है। यदि समयसीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो नगरपालिका स्वयं यह कार्यवाही करेगी।

निर्धारित समय में अतिक्रमण हटाए जाने पर कानूनी प्रक्रिया जारी रखी जाएगी और उस दौरान किए गए संरचना हटाने या ध्वस्त करने के सभी खर्च संबंधित लोगों या संस्थाओं से वसूले जाएंगे।

३१ लाख रुपैयाँभन्दा बढीको अवैध विदेशी मुद्रासहित दुई बंगलादेशी नागरिक पक्राउ

काठमाडौंमा मलेसिया जान लागेका दुई बंगलादेशी नागरिकहरूलाई त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थलबाट ३१ लाख ५१ हजार रुपैयाँभन्दा बढीको अवैध विदेशी मुद्रा सहित पक्राउ गरिएको छ। पक्राउ परेका व्यक्तिहरू मोहम्मद इन्ताज अली र एमडी जाकिर होसेन हुन्, जसलाई थप अनुसन्धानको लागि राजस्व अनुसन्धान विभागमा पठाइएको छ। २८ जेठ, काठमाडौं।

ज्ञातव्य छ कि उक्त विदेशी मुद्रा काठमाडौंबाट मलेसिया जाँदै गरेको बाटिक एयरको उडानबाट त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल सुरक्षा कार्यालयले बरामद गरेको हो। पक्राउ परेका व्यक्तिहरूबाट मलेसियन रिंगेट, अमेरिकी डलर र नेपाली रुपैयाँ गरी कुल ३१ लाख ५१ हजार रुपैयाँ बराबरको अवैध विदेशी मुद्रा बरामद गरिएको छ। उनीहरूलाई अहिले राजस्व अनुसन्धान विभाग, हरिहर भवनमा पठाइएको छ।

अफगानिस्तान में दुर्लभ विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाओं पर तालिबान का गोलीबारी

अफगानिस्तान में विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर तालिबान ने गोली चलाई है। कड़े इस्लामी पोशाक नियमों के उल्लंघन के आरोप में महिलाओं की गिरफ्तारी शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद हेरात में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। विरोध कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए तालिबान ने गोलियां चलाई, ऐसा प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार इसमें दो लोगों की मृत्यु हो गयी है। हालांकि हेरात पुलिस का कहना है कि किसी की मौत नहीं हुई है। इस जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि करना संभव नहीं है।

फीफा विश्व कप 2026: चमकते खिलाड़ियों का परिचय

फीफा विश्व कप 2026 का उद्घाटन मुकाबला आज मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक एस्टेका स्टेडियम में खेला जाएगा। मेक्सिको की ओर से कप्तान एड्सन अल्वारेज और स्ट्राइकर राउल जिमेनेज मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, दक्षिण अफ्रीका के स्ट्राइकर लाइल फोस्टर और मिडफिल्डर तेबोहो मोकोना इस मैच में प्रमुख खिलाड़ी के तौर पर मैदान में होंगे।

आज के मैच में 80,000 से अधिक दर्शकों की उम्मीद है, जहां मेक्सिको एक शानदार शुरुआत की कोशिश कर रहा है जबकि दक्षिण अफ्रीका दुनिया को चौंकाने की रणनीति के तहत खेल रहा है। दोनों टीमों की रणनीतिक सफलता और मैच का परिणाम सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है, जिसमें मुख्य भूमिका निभाने वाले खिलाड़ियों का विस्तृत परिचय इस प्रकार है।

राउल जिमेनेज (स्ट्राइकर): मेक्सिको के आक्रमण की पूरी कमान संभालने वाले जिमेनेज विश्व कप के बड़े मंच पर अनुभवी खिलाड़ी हैं। वे विपक्षी पेनाल्टी बॉक्स में दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं। अल्वारो फिडाल्गो (प्लेमेकर): फिडाल्गो मैच के गति और लय को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार हैं।

एड्सन अल्वारेज (डिफेंसिव मिडफिल्डर): टीम के कप्तान अल्वारेज विपक्षी आक्रमणों को रोकने में माहिर हैं। दक्षिण अफ्रीका की तरफ से तेबोहो मोकोना (मिडफिल्डर) और लाइल फोस्टर (स्ट्राइकर) भी इस मुकाबले में अहम भूमिका निभाएंगे। मोकोना गेंद जीतने और काउंटर अटैक शुरू करने में सक्षम हैं, जबकि फोस्टर की रफ्तार मेक्सिको की रक्षा को चुनौती देगी।

सांसद कमला पन्त ने सरकार को चुनावी मत के दम्भ में न पड़ने की चेतावनी दी

नेपाली कांग्रेस की सांसद कमला पन्त ने चुनाव में प्राप्त मतों को दम्भ का आधार न बनाने के लिए सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। सांसद पन्त ने सीमा संबंधी प्रधानमंत्री के बयानों में प्रधानमंत्री की स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करने पर जोर दिया। उन्होंने देश को सहयोग, एकता और सहमति के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए सत्तारूढ़ दल से आग्रह किया है। २८ जेठ, काठमांडू।

सांसद पन्त ने केवल चुनावी मतों के आधार पर राजनीतिक वैधता रखने को अनुचित करार देते हुए सरकार को दम्भ से बचने की सलाह दी। उन्होंने राष्ट्रीय सभा के गुरुवार के सत्र में यह चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा सीमा संबंधी दिए गए बयान में स्पष्टता आनी आवश्यक है।

साथ ही उन्होंने देश को आपसी सहयोग, एकता और सहमति के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों से आग्रह किया। सांसद पन्त ने सभा की संवैधानिक तथा राजनीतिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए अपनी तत्परता व्यक्त की और सरकार से जिम्मेदार बनकर काम करने को कहा। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय सभा की अपनी अलग जिम्मेदारी है, और उसे पूरा करने के लिए हम तैयार हैं। लेकिन प्रधानमंत्री के प्रति दी गई मांग हटाई नहीं जा सकती। केवल चुनाव से राजनीति का नियंत्रण नहीं होता। आलोचना करना आसान है, लेकिन भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण है। हमारे इतिहास में कई बार दलों ने बड़ी मत हासिल की है। फिर भी मत को दम्भ का आधार बनाना जरूरी नहीं। जब माइक मिलता है तो बहुत कुछ कहना ठीक नहीं होता, इससे सरकार चलाने में भी समस्या होती है। नेपाल जैसे देश को सहयोग, एकता और सहमति पर आधारित होकर आगे बढ़ना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि सरकार के सकारात्मक कार्यों में विपक्षी दल मदद के लिए तैयार हैं और उन्हें डरने की आवश्यकता नहीं है।

ढेडुखोलामा पुल का निर्माण, पूर्वाधार मन्त्रालय के माध्यम से बजट आवंटित

समाचार सारांश

  • पर्सा के ठोरी गाउँपालिका-1 और 2 को जोड़ने वाले ढेडुखोला में पुल निर्माण के लिए सरकार ने बजट आवंटित किया है।
  • पूर्वाधार विकास मंत्रालय ने चितवन, पर्सा और मोरङ के लगभग एक दर्जन पुलों के निर्माण के लिए कुल 56 लाख रुपये का बजट पुनर्नियोजन किया है।
  • पर्सा क्षेत्र संख्या 4 के सांसद टेकबहादुर शाक्य ने कहा है कि ढेडुखोला पुल के निर्माण से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

28 जेठ, काठमांडू। पर्सा के ठोरी गाउँपालिका-1 और 2 नंबर वार्ड के बीच स्थित ढेडुखोला में पुल निर्माण किया जाएगा। ठोरी गाउँपालिका-1 के दीपक नगर और वार्ड नं 2 भञ्ज्याङ को जोड़ने वाले इस पुल के निर्माण के लिए बजट आवंटित किया गया है।

इस नदी पर पुल न होने की वजह से वर्षा के दौरान लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। बीमार होने से लेकर विद्यालय आने-जाने तक में लोग अनेक समस्याओं का सामना करते हैं।

काफी समय से यहाँ पुल न होने के कारण ठोरी होते हुए चितवन तथा जिला मुख्यालय वीरगंज तक आने-जाने में भी समस्या हो रही थी।

ढेडुखोला में पुल निर्माण के लिए बजट आवंटित होने पर सरकार पर दबाव बनाने का श्रेय स्वयं सांसद टेकबहादुर शाक्य को देते हुए उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र का पुल बनाना उनका एक लंबा सपना था जो अब पूरा होने जा रहा है।

उन्होंने कहा, “ढेडुखोला में पुल न होने के कारण दशकों से इस क्षेत्र के नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। अब जब पुल बन जाएगा तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। पुल निर्माण के लिए उचित बजट आवंटित हो इसकी मुझे पूरी आश्वस्ति है।”

सांसद शाक्य के अनुसार, यहाँ हुलाकी सड़क परियोजना से भी जल्द ही पुल निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

पूर्वाधार विकास मंत्रालय ने चितवन, पर्सा और मोरङ के लिए चुनी गई परियोजनाओं में ढेडुखोला पुल के निर्माण के लिए बजट भी शामिल किया है।

इन तीन जिलों के करीब एक दर्जन पुलों के लिए कुल 56 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। स्थानीय पूर्वाधार विकास विभाग के माध्यम से ये कार्यक्रम क्रियान्वित किए जाएंगे।

ढेडुखोला में पुल के साथ ही ज्योतिफर्म से चोर्नीसम्म जाने वाले सड़क मार्ग पर पड़ने वाले सिर्सिया खोला, भवनी और पशुपतिनगर के बीच सिंगाही खोला, बबाँहाणि और बनिहार बाजार को जोड़ने वाले फन्टी खोला, धोबिनी गाउँपालिका-1 में घोडदैडा ओरिया नदी पर भी पुल निर्माण के लिए बजट रखा गया है। इसी योजना के तहत चितवन के रत्ननगर-16 हत्तीगढ़ से खैरहनी-4 कैयर खोला होते हुए गैडाहाल निकलने वाला पुल, भरतपुर महानगरपालिका-2 के पुंगीखोला, कयर खोला, घाँगर खोला और बेथरी खोला पर भी पुल निर्माण के लिए बजट आवंटित किया गया है।

विश्वकप फुटबल 2026: ‘‘आसानी से’’ रेड कार्ड दिखाने वाले रेफरी के तौर पर चीन का प्रतिनिधित्व

चीन इस बार के फीफा विश्वकप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया। लेकिन, प्रतियोगिता में चीन का ‘प्रतिनिधित्व’ एक रेफरी के जरिए होगा। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में 11 जून, गुरूवार से शुरू हो रहे विश्वकप में चीनी दर्शक 46 वर्षीय उसी रेफरी मा निंग का समर्थन करेंगे। माको तस्वीरों का उपयोग कर बनाए गए कई मीम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लेनोवो जैसी तकनीकी कंपनियां, हाइसेन्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्माता कंपनियां और अन्य बड़े ब्रांड उन्हें स्पॉन्सर कर रहे हैं। वे अपने सख्त स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। 2015 में शंघाई में आयोजित एक मैच में उन्होंने सात येलो कार्ड और तीन रेड कार्ड दिखाए थे। एक ही मैच में सबसे ज्यादा कार्ड दिखाने के कारण उन्हें “कार्ड मास्टर” उपनाम मिला।

वे पहली बार चार साल पहले कतर में हुए विश्वकप में शामिल हुए थे। ‘फार्थ ऑफिशियल’ के तौर पर उन्होंने मैदान के बाहर रेफरी की मदद की थी। यह उनका दूसरा विश्वकप होगा। मा निंग सोशल मीडिया पर रेडनोट और अन्य चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी सामग्री के जरिए करोड़ों व्यूज जुटा चुके हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने उनका समर्थन किया है, तो कुछ ने चीन में खेलों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। “हमारे पास मा निंग हैं, आपके पास कौन?” रेडनोट पर एक यूजर ने लिखा। “दूसरे देश अपनी टीमों के मैच देखते हैं, हम अपने रेफरी द्वारा कार्ड दिखाए जाने के पल देखेंगे,” एक अन्य व्यक्ति ने कहा।

वह वर्तमान में रेफरियों के दस दिन के कैंप में भाग लेने के लिए मियामी में हैं। उनके साथ दो अन्य चीनी सहायक रेफरी भी मौजूद हैं। सहायक रेफरी जो फे और वीडियो असिस्ट रेफरी फू मिंग दोनों मुख्य रेफरी के सहयोगी के रूप में मैदान के बाहर होंगे। मा निंग के अनुभव को विश्व फुटबॉल नियंत्रक संस्था फीफा ने 2011 में मान्यता दी थी। वे नानजिंग स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में भी अध्यापन करते हैं। आगामी विश्वकप के लिए अनुभव अर्जित करने के मकसद से उन्होंने दो हफ्ते पहले रेडनोट पर खाता खोला। रेडनोट चीन में इंस्टाग्राम जैसा लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है।

इस प्लेटफॉर्म पर उनके हजारों फॉलोअर्स हैं। रेडनोट पर उनकी पहली पोस्ट में उन्होंने पहने रेफरी की टीशर्ट की जेब से एक छोटा लाल नोटबुक दिखाया है। यह उनके चीनी नाम को दर्शाता है और उन्हें रेफरी के तौर पर मिले ‘रेड कार्ड’ प्रतिष्ठा को संकेत करता है। नियम के गंभीर उल्लंघन करने वाले खिलाड़ी को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेजा जाता है। अगली पोस्ट में वे सूटकेस पैक करते और विश्वकप के लिए जिम में व्यायाम करते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में नाटकीय संगीत भी जोड़ा गया है जबकि लेनोवो टैबलेट और अन्य उपकरण भी दिखाए गए हैं। “मैं यह काम आत्मविश्वास और दृढ़ता से करता हूँ। विश्वकप, हम आ रहे हैं,” कैप्शन में लिखा है।

चीन अब तक केवल एक बार 2002 में विश्वकप में शामिल हुआ है। उस समय चीन ने कोई भी मैच नहीं जीता और समूह चरण में ही बाहर हो गया। तब से चीन क्वालीफाइंग राउंड पार कर विश्वकप में शामिल नहीं हो सका है। पिछले दो दशकों में चीनी फुटबॉल क्षेत्र आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के आरोप में कुछ खिलाड़ियों, रेफरी और क्लब अधिकारियों को आजीवन प्रतिबंध का सामना भी करना पड़ा है।

मधेश के पर्यटन प्रचार के लिए ‘मधेश ट्रैवल मार्ट’ की शुरुआत

नेपाल पर्यटन बोर्ड के आयोजन में मधेश प्रदेश के पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार हेतु चार दिवसीय ‘मधेश ट्रैवल मार्ट’ शुरू किया गया है। नाट्टा मधेश प्रदेश के अनुसार इस मार्ट में नेपाल और भारत के 200 से अधिक पर्यटन व्यवसायी और सम्बंधित हितधारक शामिल होंगे। इस मेला का उद्देश्य मधेश के आठों जिलों के सांस्कृतिक एवं पर्यटन क्षेत्रों को भारतीय बाजार में बढ़ावा देना है। 28 जेठ, बारा।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के आयोजन में गुरुवार से मधेश ट्रैवल मार्ट शुरू हुआ। मार्ट के आयोजन से संबंधित जानकारी नेपाल एसोसिएशन ऑफ ट्रैवल्स एंड टूर ऑपरेटर (नाट्टा) मधेश प्रदेश ने गुरुवार को बाराको सिमरा में पत्रकार सम्मेलन में दी। वीरगंज, बारा और जनकपुर में अलग-अलग आयोजित इस कार्यक्रम में मधेश प्रदेश के पर्यटन स्थलों के प्रचार के साथ स्थानीय व्यंजन और संस्कृति को प्राथमिकता दी गई है, जिसका संयोजन नाट्टा मधेश प्रदेश कर रहा है।

नाट्टा मधेश के अध्यक्ष मोहन शर्मा ने शुक्रवार को वीरगंज में औपचारिक उद्घाटन के बाद जनकपुर तक विभिन्न गतिविधियों की जानकारी पत्रकार सम्मेलन में प्रदान की। ‘बारा–पर्सा समेत मधेश के आठों जिलों की संस्कृति और पर्यटन क्षेत्रों को जोड़कर कार्यक्रम आयोजित किया गया है,’ शर्मा ने बताया। वीरगंज महानगरपालिका और बर्दिबास नगरपालिक के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का सचिवालय बाराको जितपुरसिमरा उपमहानगरपालिका में स्थित है।

चार दिन तक चलने वाले मार्ट में स्थानीय तहों की भी सह-निवेशिता है, ऐसा आयोजकों ने जानकारी दी। ‘नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय तहों की सह-निवेशी में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है,’ नाट्टा मधेश प्रदेश के अध्यक्ष शर्मा ने कहा। मार्ट में नेपाल और भारत के विभिन्न शहरों से 200 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें पर्यटन व्यवसायी, पर्यटक, कंटेंट क्रिएटर और टूर ऑपरेटर शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आंतरिक रूप से मधेश के पर्यटन स्थलों को भारतीय पर्यटन बाजार में बढ़ावा देना है।

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद्का उपाध्यक्षको रूपमा विशाल श्रेष्ठले पदबहाली गरे

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद्को उपाध्यक्षमा नवनियुक्त विशाल श्रेष्ठले पदबहाली गरी खेलकुद विकासमा योगदान पुर्‍याउने विश्वास व्यक्त गरेका छन्। उनलाई साथै सदस्यहरू मोनालिसा खम्बु, सिक्का सुवाल श्रेष्ठ, शक्तिप्रसाद गौचन र पवन शाहीलाई परिषद्ले स्वागत गरेको छ। परिषद्को सदस्य सचिव रामचरित्र मेहताले नयाँ पदाधिकारीहरूलाई खेलकुदको पछिल्लो अवस्था तथा आगामी योजनाबारे जानकारी गराएका छन्। २८ जेठ, काठमाडौं।
नेपाल सरकारले विशाल श्रेष्ठलाई बुधबार उपाध्यक्षमा नियुक्त गरेको थियो। पदबहाली समारोहमा उपाध्यक्ष श्रेष्ठले खेलमैदानबाट व्यवस्थापकीय जिम्मेवारीमा आएर सबैको सहकार्यबाट खेलकुदको विकासमा योगदान दिने विश्वास व्यक्त गरे। परिषद्को सदस्य सचिव रामचरित्र मेहताले उपाध्यक्ष श्रेष्ठसहित नवनियुक्त सदस्यहरू मोनालिसा खम्बु, सिक्का सुवाल श्रेष्ठ, शक्तिप्रसाद गौचन र पवन शाहीलाई हार्दिक स्वागत गर्दै खेलकुदको पछिल्लो अवस्था सम्बन्धमा जानकारी गराउनु भयो। कार्यक्रममा शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्रालयका प्रमुख सल्लाहकार सिद्धि ब्यञ्जनकार र परिषद्का विभागीय तथा शाखा प्रमुखहरू पनि उपस्थित थिए।

आइफोन के प्रभाव से अमेरिका और विश्व में जन्मदर में उल्लेखनीय गिरावट

संयुक्त अध्ययन से पता चला है कि अमेरिका में 2007 में आइफोन के आविष्कार के बाद से जन्मदर में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है। सामान्यतः किसी देश की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ जन्मदर घटती है, लेकिन पिछले दो दशकों में विश्व के विभिन्न देशों में सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग रहीं, बावजूद इसके जन्मदर लगभग समान गति से घट रही है। अमेरिका के राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो के अध्ययन के अनुसार 1980 से 2007 तक अमेरिका में प्रजनन दर स्थिर थी, लेकिन 2007 के बाद इसमें निरंतर गिरावट देखी गई है। 2024 तक यह दर 22 प्रतिशत घटकर प्रति 1000 महिलाओं पर 54 हो गई है।

आइफोन की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में जन्मदर में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। अनुसंधान में 2007 से 2011 तक अमेरिका के उन क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया जहां एटी एंड टी नेटवर्क के माध्यम से आइफोन उपलब्ध कराया गया था। परिणामों से पता चला कि आइफोन की अधिक उपलब्धता वाले क्षेत्रों में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में जन्मदर 4.5 से 8 प्रतिशत तक और 20 से 24 वर्ष की महिलाओं में 3.2 से 6.6 प्रतिशत तक घट गई है। 2007 से 2011 के बीच 15 से 44 वर्ष की आयु वर्ग में कुल जन्मदर गिरावट का अनुमानित 33 से 52 प्रतिशत हिस्सा आइफोन के प्रभाव के कारण हो सकता है।

जन्मदर में गिरावट के कारणों पर शोधकर्ताओं का कहना है कि स्मार्टफोन के बढ़ते प्रयोग ने लोगों के सामाजिक व्यवहार में बड़ा बदलाव लाया है। लोगों की आमने-सामने बातचीत में कमी आई है और यौन गतिविधियां भी घट गई हैं। साथ ही, ऑनलाइन अश्लील सामग्री का बढ़ता उपयोग और डिजिटल मनोरंजन ने जीवनशैली पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। स्मार्टफोन ने युवाओं को गर्भनिरोधक और गर्भपतन संबंधी सूचनाएं आसानी से उपलब्ध करवाना भी संभव बनाया है। यह प्रभाव न केवल अमेरिका तक सीमित है, बल्कि विश्वव्यापी भी है। सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रियों द्वारा 128 देशों में किए गए अध्ययन में समान परिणाम सामने आए हैं। अलग-अलग स्वास्थ्य प्रणालियों, धर्मों, कानूनों और आर्थिक स्थितियों के बावजूद स्मार्टफोन के व्यापक उपयोग के पश्चात जन्मदर में तेज गिरावट दर्ज की गई है।

स्क्रीन टाइम बढ़ने से सामाजिक सहभागिता में कमी आई है। 2003 में लोग प्रतिदिन औसतन 68 मिनट आमने-सामने बातचीत करते थे, जो 2019 तक घटकर 38 मिनट रह गई है, यह लगभग 44 प्रतिशत की कमी है। इसी प्रकार कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों पर बिताने वाला समय दैनिक 22 मिनट से बढ़कर 96 मिनट हो गया है, जो 336 प्रतिशत वृद्धि है। शोधकर्ता टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि आइफोन या स्मार्टफोन अकेले जन्मदर में गिरावट के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, लेकिन यह गिरावट का एक महत्वपूर्ण कारण जरूर हैं। विश्व के कई विकसित और विकासशील देशों में जन्मदर लगातार घट रही है। अमेरिका में प्रजनन दर अब ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। कनाडा में 2024 में प्रति महिला प्रजनन दर 1.25 रही, जो जापान, सिंगापुर और स्पेन जैसे देशों के अनुरूप है। चीन ने 2016 में अपनी एक संतान नीति समाप्त कर दी थी। जापान और दक्षिण कोरिया ने जन्मदर बढ़ाने के लिए भारी धनराशि खर्च की है, लेकिन उल्लेखनीय सफलता हासिल नहीं हो पाई है। इसी बीच भारत और ब्राजील जैसे मध्यम आय वाले देशों में भी जन्मदर तीव्र गति से कम हो रही है।

रोल्पामा मिनी ट्रक दुर्घटनामा एक जनाको मृत्यु

२८ जेठ, दाङ । रोल्पामा बिहीबार बिहान मिनी ट्रक दुर्घटना हुँदा एक जनाको घटनास्थलमै मृत्यु भएको छ। बल्लेखोलादेखि आलु बोकेर पोखरातर्फ जाँदै गरेको रा १ ख ३०४५ नम्बरको मिनी ट्रक संचालन हुँदै गर्दा अचानक सडक भासिएर दुर्घटना भएको हो। माडी गाउँपालिका–१ पात्लेस्थित बल्ले–झिनुवाभित्री सडकमा उक्त ट्रक दुर्घटना भएको थियो।

दुर्घटनामा सल्यानको बागचौर नगरपालिका–४ दुदिलाबोट निवासी ४७ वर्षीय चन्द्रबहादुर बस्नेतको मृत्यु भएको जिल्ला प्रहरी कार्यालय रोल्पाका प्रहरी निरीक्षक सुनिल थापाले जानकारी दिए। ट्रक चालक घाइते छन्। –रासस

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मृत्यु

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो गई है। भारत सरकार ने घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख को तलब कर विरोध दर्ज कराया है। अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी उल्लंघन के आरोप में इरान से तेल ढुलाई कर रहे जहाज पर हमला किया है। 28 जेठ, काठमाडौं।

ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। प्रारंभ में लापता बताए गए इन तीन भारतीय नागरिकों के शव मिलने की जानकारी भारत के बंदरगाह, जलमार्ग तथा यातायात मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को दी है। सोनोवाल ने ट्वीट में लिखा है, ‘यह हमारे लिए अपरिहार्य क्षति है। इस कठिन समय में मोदी सरकार दुखी परिवारों के साथ दृढ़ता से खड़ी है। मृतक परिवारों को आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उद्धार किए गए चालक दल के सदस्यों को तुरंत स्वदेश लौटाने तथा मृतक नाविकों के शव जल्द भारत लाकर अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने के निर्देश मैंने संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।’

घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख को तलब कर हमले की कड़ी निंदा की। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो कूएरा कजाकिस्तान यात्रा पर होने के कारण अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख जेसन मिक्स को बुलाया गया था। अमेरिकी हमले में फंसे भारतीय नागरिकों को ओमानी सेना ने सुरक्षित रूप से बचाकर निकाला है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि पलाऊ झंडे वाला सेटेबेलो टैंकर इरान से तेल की ढुलाई करके नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था, जिस कारण उस पर हमला किया गया। कमांड की जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘अमेरिकी सेना ने बार-बार चेतावनी देने के बाद भी चालक दल ने अवहेलना की, जिसके कारण एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन को लक्षित कर सटीक हथियार प्रहार किया।’

इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और समुद्री व्यापार मार्ग की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका ने 13 अप्रैल से इरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी शुरू की थी। तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव, समुद्री व्यापार सुरक्षा और विदेशी संघर्षों में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं। फिलहाल इरान और अमेरिका के बीच तनाव घटने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका ने इरान पर दोबारा हमला शुरू कर दिया है। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा इरान पर सैन्य हमला करने के बाद शुरू हुआ था, जिसमें इरान के सर्वोच्च नेता की मौत हुई थी। जवाबी कार्रवाई में इरान ने इज़राइल और अमेरिका के खाड़ी क्षेत्रीय सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए। इसके बाद संघर्ष तेजी से फैला और मार्च में लेबनान भी इसके प्रभाव में आ गया। अप्रैल में अमेरिका और इरान ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की सहमति दी थी, लेकिन लगातार आरोप-प्रत्यारोप, नए हमलों और बढ़ती अविश्वास के कारण यह युद्धविराम कमजोर पड़ गया है और बड़े सैन्य टकराव का खतरा जारी है।

तीन बार विश्वकप आयोजन करने विश्व का एकमात्र स्टेडियम ‘एस्टाडियो अज्टेका’

मेक्सिको का एस्टाडियो अज्टेका स्टेडियम दुनिया का पहला ऐसा स्टेडियम बनने जा रहा है जिसने तीन अलग-अलग फीफा विश्वकप उद्घाटन मैचों की मेजबानी की है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के संयुक्त आयोजन में 11 जून 2026 से शुरू होने वाले इस फीफा विश्वकप में 48 टीमें भाग लेंगी। ऐतिहासिक एस्टाडियो अज्टेका मैदान पर उद्घाटन मैच में मेजबान मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका आमने-सामने होंगी।

विश्व फुटबाल के इतिहास में कुछ मैदान केवल खेलने की जगह नहीं, बल्कि जीवंत इतिहास के रूप में स्थापित होते हैं। मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी में स्थित एस्टाडियो अज्टेका फुटबाल की दुनिया में ऐसा ही एक प्रमुख तीर्थस्थल है। इस स्टेडियम ने तीन फीफा विश्वकप (1970, 1986 और 2026) की सफल मेजबानी कर विश्व का पहला स्टेडियम बनने का गौरव प्राप्त किया है।

1970 के फीफा विश्वकप में, जब पेले के स्वर्ण युग के दौरान मेक्सिको ने पहली बार विश्वकप की मेजबानी की, तो अज्टेका स्टेडियम प्रतियोगिता का मुख्य केंद्र था। इस मैदान पर 31 मई 1970 को आयोजित उद्घाटन मैच में मेजबान मेक्सिको और सोवियत संघ के बीच मुकाबला हुआ, जो प्रतिस्पर्धात्मक रूप से बिना गोल के ड्रॉ रहा।

2026 के फीफा विश्वकप में, जो आधुनिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा, अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के संयुक्त आयोजन में 11 जून 2026 से विश्वकप का औपचारिक प्रारंभ होगा, जिसमें अब तक का सबसे बड़ा 48 टीमें हिस्सा लेंगी। इस प्रतियोगिता के साथ ही अज्टेका स्टेडियम फीफा विश्वकप इतिहास में तीन अलग-अलग संस्करणों के उद्घाटन मैचों की मेजबानी करने वाला विश्व का पहला स्टेडियम बन जाएगा।

बाल बालिकाओं का खेलने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं है

नेपाल की नीतियां खेल आधारित शिक्षण को शामिल करती हैं, लेकिन व्यवहार में अभिभावक और विद्यालय खेल और पढ़ाई को अलग-अलग ढंग से समझते हैं। बच्चों के समग्र विकास के लिए खेल को सीखने का आधार मानते हुए विद्यालय की गुणवत्ता मापने के नजरिए में बदलाव आवश्यक है। ‘बच्चे खेलते-खेलते सीखते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खेल में बच्चे कैसे सीखते हैं, यह सीखना जरूरी है।’ – ओ. फ्रेड डोनाल्डसन। ११ जून को अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे 2024 से औपचारिक रूप से मान्यता दी है। यह दिवस विश्वभर के बच्चों के खेलने के अधिकार और खेल के महत्व को याद दिलाता है। खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, सीखने और स्वस्थ बाल्यकाल का आधार है।

हर वर्ष इस दिवस के अवसर पर मैं, जो प्रारंभिक बाल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हूं, अपने आप से सवाल करता हूं – क्या हमारे बच्चे वास्तव में खेल पा रहे हैं? नेपाल की नीतियां, पाठ्यक्रम और प्रारंभिक बाल विकास संबंधी निर्देशों को देखने पर जवाब सकारात्मक लगता है। खेल आधारित सीखना, बाल-केंद्रित शिक्षा, अनुभव से सीखने जैसे विषय स्पष्ट रूप से मौजूद हैं। लेकिन स्कूल, शिक्षक और अभिभावकों के रोज़मर्रा के समन्वय में ऐसा महसूस होता है कि हमने खेल के महत्व को केवल कागजों पर मान्यता दी है, व्यवहार में पूरी तरह से लागू नहीं कर पाए हैं। विद्यालय संचालन के अनुभव ने मुझे बार-बार यह महसूस कराया है। हर अभिभावक अपने बच्चे का उज्जवल भविष्य चाहता है। शिक्षक भी बच्चे की अच्छी शिक्षा की कामना करते हैं। विद्यालय का उद्देश्य भी इसी दिशा में होता है। लेकिन कभी-कभी बेहतर भविष्य की चिंता में हम बच्चों की वर्तमान जरूरतों को कम आंकेते हैं।

कुछ समय पहले एक अभिभावक से बातचीत हुई। उन्होंने पूछा, ‘मेरा बच्चा पूरे दिन खेलता है, पढ़ाई कब करेगा?’ उनके सवाल में प्यार और चिंता दोनों थे, लेकिन यह हमारे समाज में एक सोच को भी दर्शाता है। बहुत से लोग खेल और पढ़ाई को दो अलग चीज़ें मानते हैं। खेल को मनोरंजन और पढ़ाई को शिक्षा के रूप में देखते हैं। लेकिन प्रारंभिक बाल्यावस्था में हकीकत अलग होती है। बच्चों के लिए खेल ही सीखने का माध्यम है। जब बच्चे मित्रों के साथ भूमिका निभाकर खेलते हैं, वे भाषा सीखते हैं। जब ब्लॉक जोड़ते हैं, तो आकार, संतुलन और गणितीय सोच विकसित होती है। समूह में खेलते समय वे बारी-बारी का इंतजार करना, सहयोग और समस्या समाधान करना सीखते हैं। ये कौशल भविष्य के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण आधार हैं। लेकिन वर्तमान परिवेश प्रारंभिक शिक्षा के प्रति अभिभावकों और विद्यालय दोनों की अपेक्षाओं को बदल रहा है।

दुनिया से जुड़ने, अंतरराष्ट्रीय भाषा के महत्व और भविष्य की चिंता के कारण कई अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे कम उम्र से अक्षर पहचानना, लिखना और भाषा का प्रयोग सीखें। यह स्वाभाविक भी है। विद्यालय भी इन्हीं अपेक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से कभी-कभी खेल, कहानी, गीत, अभिनय और अनुभव आधारित शिक्षण का महत्व पर्याप्त रूप से नज़र नहीं आता। मुझे लगता है समस्या इच्छा या प्रतिबद्धता की नहीं, बल्कि सीखने की प्रकृति के बारे में साझा समझ की कमी है। हम सभी चाहते हैं कि बच्चे अच्छी शिक्षा पाएं। लेकिन प्रारंभिक वर्षों में सीखने के कई महत्वपूर्ण पहलू खेल के अंदर ही छिपे होते हैं, जिन पर व्यापक संवाद और जागरूकता की आवश्यकता है। खेल को पढ़ाई से अलग न मानकर सीखने के आधार के रूप में देखने की संस्कृति को मजबूत करना जरूरी है।

एक और महत्वपूर्ण विषय है बाहरी वातावरण में होने वाली शिक्षा। आज कई बच्चे अपना अधिक समय चार दीवारों के अंदर बिताते हैं। लेकिन सीखने की दुनिया कक्षा से कहीं बड़ी होती है। मिट्टी में खेलने, पौधों को देखने, पानी के साथ प्रयोग करने, खुले आसमान के नीचे दौड़ने या प्रकृति के साथ समय बिताने से जो अनुभव मिलते हैं, वे किसी किताब से संभव नहीं। शिक्षा क्रांति में कहा गया है— श्रेष्ठ शिक्षण कुछ हद तक बाहर ही मिलता है। सच कहूं तो बच्चों के लिए प्रकृति ही खुला स्कूल है। नेपाल जैसे प्राकृतिक विविधताओं वाले देश में आउटडोर लर्निंग के अवसर ज्यादा हैं। विद्यालय का मैदान, बगीचा, सामुदायिक खुला स्थान, खेत-खलिहान या गांव का परिवेश अपनी-अपनी जगह सीखने के स्रोत बन सकते हैं। लेकिन हम अभी भी शिक्षा को काफी हद तक किताब, कॉपी और कक्षा तक सीमित कर रहे हैं।

तो नीति और व्यवहार में दूरी क्यों है? मेरे अनुभव के अनुसार इसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। बहुत से अभिभावकों को यह जानकारी नहीं है कि खेल से शिक्षा मिलती है। अधिकतर शिक्षक खेल को महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन इसे रोज़ाना शिक्षण प्रक्रिया में प्रभावी रूप से जोड़ने के लिए निरंतर सहयोग की आवश्यकता होती है। विद्यालय अभिभावकों की अपेक्षाओं और बच्चों की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस दूरी को कम करने के लिए सभी का साझा प्रयास जरूरी है। अभिभावकों को खेल को समय की बर्बादी नहीं, बल्कि सीखने का माध्यम समझना होगा। विद्यालय को बच्चों के समग्र विकास को प्राथमिकता देनी होगी। शिक्षकों को निरंतर व्यावसायिक सहायता चाहिए। नीति निर्माताओं को भी कक्षा में खेल आधारित शिक्षण हो रहा है या नहीं, ध्यान देना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्यालय की गुणवत्ता मापने के नजरिए में बदलाव लाना। अच्छा विद्यालय वह नहीं है जहां बच्चे जल्दी बोलना या अंग्रेजी सीख लें, बल्कि वह जगह है जहां बच्चे खुश रहें, सवाल पूछ सकें, गलतियां कर सकें, खोज कर सकें और खेलते-खेलते सीखें। अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मैं सभी अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यालयों और संबंधित पक्षों से आग्रह करूंगी – बच्चों को खेलने दें। मिट्टी में खेलने दें। कहानियां सुनने दें। गीत गाने दें। सवाल पूछने दें। दौड़ने दें। प्रकृति से जुड़ने दें। क्योंकि बच्चे केवल खेलते ही नहीं, वे सीख रहे हैं और अपना भविष्य बना रहे हैं। शायद उसी दिन हम कह सकेंगे – खेलने का अधिकार अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर बच्चे के दैनिक जीवन में भी नजर आने लगा है। (रति शर्मा, विद्यालय नेतृत्व, शिक्षक क्षमता विकास और बाल केंद्रित सीखने के क्षेत्र में कार्यरत हैं।)