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लेखक: space4knews

पुरानी साड़ी से बेटी के लिए मनमोहक परिधान तैयार किए जा सकते हैं

पुरानी साड़ी का पुनः उपयोग कर बेटी के लिए लहंगा, फ्रॉक, कुर्ता-पायजामा और स्कर्ट टॉप जैसे आकर्षक परिधान बनाए जा सकते हैं। साड़ी ऐसा परिधान है जो लगभग हर नेपाली महिला के पास होता है। खासकर विवाह, व्रतबंध, दशैं-तिहार जैसे विशेष अवसरों पर पहने जाने वाली सिल्क, बनारसी, पट्टू या जर्जेट जैसी साड़ियाँ कई महिलाएं वर्षों तक सुरक्षित रखती हैं। इन साड़ियों का कपड़ा उच्च गुणवत्ता का होता है, इसलिए उचित रखरखाव से यह दशकों तक टिक सकती हैं। लेकिन एक ही साड़ी बार-बार पहनने से बोरियत हो सकती है और कभी-कभी फैशन भी पुराना लगने लगता है। ऐसे में पुरानी साड़ी को फेंकने या कहीं डालने की बजाय नई विधि से रिसायकल कर उपयोग किया जा सकता है। खासकर बेटी या घर के छोटे बच्चों के लिए विभिन्न आकर्षक परिधान बनाए जा सकते हैं। इससे पुरानी साड़ी को नया जीवन मिलता है, खर्च की बचत होती है, पर्यावरण संरक्षण में सहयोग मिलता है और सबसे महत्वपूर्ण बात कि बच्चे को माँ के प्यार और स्नेह का एहसास होता है।

पुरानी साड़ी से बच्चों के परिधान बनाने के कई लाभ हैं। साड़ी में माँ के विवाह, विशेष समारोह या यादगार पलों की यादें शामिल होती हैं। वही कपड़ा से बना लहंगा या फ्रॉक पहनने पर बेटी को माँ से जुड़ा अनुभव होता है। पुरानी साड़ी से नया ड्रेस बनाने से आर्थिक बचत होती है क्योंकि नया कपड़ा खरीदना नहीं पड़ता। एक ही साड़ी से 2-3 बच्चे के कपड़े बनाए जा सकते हैं। इससे पर्यावरणीय प्रभाव भी सकारात्मक होता है क्योंकि कपड़ा फेंकने पर होने वाला प्रदूषण कम होता है और टेक्सटाइल कूड़ा घटता है। बच्चे की उम्र, रंग की पसंद और आकार के अनुसार डिजाइन किए जा सकते हैं। जरी, बॉर्डर या पल्लू के सुंदर हिस्से का उपयोग कर प्रीमियम लुक दिया जा सकता है। सिल्क या गुणवत्ता वाले कपड़े होने के कारण बच्चे के परिधान भी लम्बे समय तक टिकते हैं और धोने पर भी अच्छे रहते हैं।

पुरानी साड़ी से बनाए जाने वाले कुछ लोकप्रिय और आकर्षक डिज़ाइन में लहंगा-चोली, फ्रॉक, कुर्ता-पायजामा और स्कर्ट टॉप शामिल हैं। लहंगा-चोली में साड़ी के पल्लू वाले हिस्से को मुख्य स्कर्ट के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। नीचे के हिस्से में फ्लेयर देने के लिए अतिरिक्त कपड़ा जोड़ा जा सकता है। फ्रॉक के लिए साड़ी के विभिन्न हिस्से जोड़कर फूल फ्रॉक या अनारकली गाउन बनाया जा सकता है। कुर्ता-पायजामा के लिए साड़ी का पल्लू या जिउ का हिस्सा लेकर लंबा कुर्ता तैयार किया जा सकता है। स्कर्ट टॉप बनाने के लिए साड़ी के पल्लू या जिउ के हिस्से को ए-लाइन और सर्कुलर स्कर्ट में रूपांतरित किया जा सकता है।

चट्टान तोड़कर पानीघट्ट के चक्का बनाते हैं ६३ वर्षीय पुरानाराम

समाचार सारांश

एआई द्वारा तैयार। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • सल्यान के सिद्ध कुमाख गाउँपालिका-३ फँलाटेका पुरानाराम रेउले ४७ वर्षों से पारंपरिक पानी घट्ट बनाने के पेशे में हैं।
  • दम की बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद भी उन्होंने छह सदस्यीय परिवार पालने के लिए पानी घट्ट, जातो और सिलौटा बनाने का काम नहीं छोड़ा है।
  • उनके १५ वर्षीय पोते सुजन ने भी यह पेशा सीखकर जारी रखने की इच्छा जताई है।

१४ वैशाख, सल्यान । सल्यान के सिद्ध कुमाख गाउँपालिका-३ फँलाटेका ६३ वर्षीय पुरानाराम रेउले पारंपरिक पानी घट्ट बनाने के पेशे से परिचित हैं। ४७ साल पहले शुरू किया यह पेशा वे आज भी निरंतरता दे रहे हैं।

कठोर चट्टान तोड़कर सांचो और हथौड़े की मदद से पत्थर काटकर पानी घट्ट के चक्का, जातो के चक्का और सिलौटा बनाना उनकी दिनचर्या है। शारीरिक बीमारी के बावजूद भी रेउले ने परिवार चलाने के लिए यह पेशा नहीं छोड़ा है। वे दम की बीमारी से पीड़ित हैं।

“१६ वर्ष की उम्र से मैं यह पेशा कर रहा हूँ। अपने बेटे, पोते और पत्नी सहित छह सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण करता हूँ,” उन्होंने बताया, “हाथ दर्द करता है, कमर दर्द करता है, मैं दम का मरीज हूँ। दूर नहीं जा सकता, यही काम कर परिवार चला रहा हूँ,” वे कहते हैं।

एक दशक पहले तक पानी घट्ट के लिए चक्कों की मांग इतनी अधिक होती थी कि वह पूरी करना मुश्किल हो जाता था। फिर नदी के घट्टों का बंद हो जाना मांग पर असर पड़ा, वे बताते हैं। हाल के दो सालों में बिजली से चलने वाले उपकरण आ जाने से फिर मांग बढ़ी है।

“१० से १२ साल पहले मांग इतनी बड़ी थी कि पूरी करना मुश्किल होता था, सालाना १२ से १६ लाख रूपये तक की बिक्री होती थी,” उन्होंने कहा, “लेकिन धीरे-धीरे नदी के घट्ट बंद होने से मांग कम हुई। पिछले दो वर्षों में बिजली से चलने वाले उपकरण आने से फिर कुछ मांग बढ़ी है, अब सालाना ६ से ७ लाख रूपये की बिक्री होती है।”

पोते का साथ

पछली पीढ़ी पारंपरिक पेशे में ज्यादा रूचि नहीं दिखाती जिससे इस कौशल के खत्म होने का खतरा बढ़ता जा रहा है, पुरानाराम रेउले ने बताया। वे खुद सीखाने की कोशिश करते हैं लेकिन नई पीढ़ी खास दिलचस्पी नहीं दिखाती। लेकिन उनका १५ वर्षीय पोता सुजन इस पेशे को सीखकर जारी रखने की दिशा में बढ़ रहा है।

कक्षा 10 में पढ़ रहे सुजन ने बताया कि छुट्टियों में वे घट्ट, जातो और सिलौटा बनाना सीख चुके हैं। “मेरी उम्र १५ वर्ष है। मैं कक्षा १० में पढ़ता हूँ। छुट्टियों में समय बेकार न जाए इसलिए दादाजी के साथ सीख रहा हूँ,” वे कहते हैं, “अब तक ६ जोड़ी जातो-सिलौटा बेच चुका हूँ। पढ़ाई के साथ-साथ इस पेशे को जारी रखने की इच्छा है।”

यदि सुजन जैसे युवाओं ने इस पेशे को आगे जारी रखा तो यह पारंपरिक पेशा अगली पीढ़ी तक जा कर जीवित रहेगा।

बाजार और कीमत

आकार के अनुसार एक जोड़ी पानी घट्ट के चक्के की कीमत ३० हजार से लेकर एक लाख रुपये तक होती है। वहीं, जातो २,५०० से ५,००० रुपये तथा सिलौटा ५०० से ३,००० रुपये तक बिकता है।

फिलहाल घट्ट के चक्के की तुलना में जातो और सिलौटा की मांग बढ़ रही है। रेउले द्वारा बने उत्पाद रुकुम, रोल्पा, सुर्खेत, दैलेख, जाजरकोट और दाङ तक पहुंचते हैं।

फँलाटेका दर्जन भर से अधिक परिवार इसी पेशे से जुड़े हुए हैं। इसी से वे अपने घर खर्च चलाते हैं। पारंपरिक कौशल और मेहनत पर आधारित इस पेशे का संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य तथा स्थानीय निकायों का ध्यान आवश्यक है, उनका कहना है।

९ महिनामा नेपाल बैंकको नाफा २ अर्ब ७९ करोड – Online Khabar

नेपाल बैंक के 9 महीनों का मुनाफा 2 अरब 79 करोड़ 29 लाख रुपये

नेपाल बैंक ने चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी त्रैमासिक में 2 अरब 79 करोड़ 29 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। बैंक के निष्क्रिय ऋण कुल ऋण का 4.96 प्रतिशत है, जो पहले 5.45 प्रतिशत था। बैंक का वितरण योग्य मुनाफा केवल 32 करोड़ 13 लाख रुपये है और आधार दर 4.71 प्रतिशत पर गिर गई है। 14 चैत, काठमांडू। नेपाल बैंक ने चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी त्रैमासिक वित्तीय रिपोर्ट सार्वजनिक की है। सार्वजनिक वित्तीय विवरण के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में चैत्र मसान्त तक बैंक ने 2 अरब 79 करोड़ 29 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। समीक्षा अवधि में बैंक का शुद्ध मुनाफा 0.34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बैंक की वार्षिक प्रति शेयर आय 25 रुपये 34 पैसा है। प्रति शेयर निवल मूल्य 272 रुपये 79 पैसा है। बाजार में प्रति शेयर का कारोबार मूल्य भी लगभग इसी स्तर पर है। बैंक के निष्क्रिय ऋण में कमी आई है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। कुल ऋण में निष्क्रिय ऋण की हिस्सेदारी 4.96 प्रतिशत है, जो पहले 5.45 प्रतिशत थी। 14 अरब 69 करोड़ 40 लाख रुपये की चुकता पूंजी वाले बैंक के रिज़र्व फंड में 25 अरब 39 करोड़ 1 लाख रुपये संचित हैं। बैंक की लाभांश वितरण क्षमता कमजोर बनी हुई है। वितरण योग्य मुनाफा कुल 32 करोड़ 13 लाख रुपये ही है, जो प्रति शेयर के हिसाब से मात्र 2 रुपये 92 पैसे होता है। बैंक की आधार दर भी घटकर 4.71 प्रतिशत रह गई है।

म्याग्दीखोला जलविद्युत् आयोजना निर्माण कार्य आरम्भ

१४ वैशाख, म्याग्दी। म्याग्दीको धवलागिरि गाउँपालिका–४ बगरमा ६५ मेगावाट क्षमताको म्याग्दीखोला जलविद्युत् आयोजनाको निर्माण कार्य सुरु भइसकेको छ। यस आयोजनालाई प्रवर्द्धन गर्ने हाइड्रो भिलेज प्रालिले पहुँचमार्ग (सडक), विद्युत्गृह, सुरुङ र प्रसारण लाइन निर्माण समानान्तर रूपमा अगाडि बढाइरहेको छ। बगर गाउँदेखि बाँध निर्माण स्थल दोभानसम्म डाइभर्सनमार्फत सडक निर्माण गरी बगरमा कार्यालय स्थापना गरिएको छ। आयोजनाका प्रमुख उत्तम पौडेलले विद्युत्गृहबाट निस्कने पानी थुनिने छान्न १,१३० मिटर लामो टेलरेस सुरुङ निर्माण शुरु गरिएको जानकारी दिए।

‘बगर–तातोपानी खण्डको भिरमा सडक निर्माण नहुँदासम्म म्याग्दी नदी किनारै किनार डाइभर्सन बनाएर बाँध निर्माण स्थल दोभानसम्म करिब १० किलोमिटर पहुँचमार्ग पुर्‍याएका छौँ,’ उनले भने, ‘टेलरेस टनेल excavation गर्न थालिएको छ। सिभिल ठेकेदार भूगोल इन्फ्रास्ट्रक्चर विद्युत्गृह, बाँध र मुख्य सुरुङ excavation को तयारीमा छ।’ म्याग्दी र कुनाबाङ खोलाको दोभानमा निर्माण हुने बाँधबाट ७५ मिटर लामो र ११.९ मिटर अग्लो बालुवा थिग्राउने पोखरी ‘डिसेन्डर’ मा पानी सञ्चय गरिनेछ। त्यसपछि ७१० मिटर लामो पाइपलाइनबाट ल्याएको पानीलाई ३,६०० मिटर लामो सुरुङमार्फत भित्र पुर्‍याउने योजना छ।

फेरि ७५० मिटर लामो पाइपलाइनबाट पानीलाई ६०७ मिटर उचाइको पहाडभित्र बनेको भूमिगत विद्युत्गृहमा खसालेर विद्युत् उत्पादन गरिनेछ, पौडेलले बताए। भूमिगत विद्युत्गृहमा ‘रन अफ रिभर’ प्रकृतिको यस आयोजनामा २०९ मिटर ठाडो सुरुङ, २३० मिटर ‘प्रेसर टनेल’, ५८७ मिटर ‘इनक्लाइन टनेल’ र ७५७ मिटर ‘पेनस्टक पाइप’का विभिन्न संरचनाहरू रहनेछन्। विद्युत्गृहमा तीन वटा युनिट टर्बाइनहरू समावेश गरिनेछन्। आयोजनाले प्रति घण्टा सुक्खा मौसममा ११७.८२ र वर्षात मौसममा २६४.४५ मेगावाट विद्युत् उत्पादन गर्ने योजना बनाएको छ।

बगर र तातोपानी बीचको पहाडमा बाहिरबाट ६४० मिटर लामो सुरुङ खनेर त्यसभित्र भूमिगत विद्युत्गृह निर्माणको काम भइरहेकामा छ। बगरदेखि १६.५ किलोमिटर टाढा रहेको डाँडाखेत सबस्टेशनबाट केन्द्रीय प्रणालीमा विद्युत् पठाउन १३२ केभी क्षमताको ‘डबल र मल्टि सर्किट’ प्रसारण लाइन निर्माण काम चलिरहेको छ, आयोजना जनसम्पर्क अधिकृत बुद्धिराज अधिकारीले जानकारी दिए। प्रति मेगावाट रु २० करोड दरले कुल रु १३ अर्ब लागत अनुमान गरिएको यस आयोजनाले विसं २०८४ चैतदेखि विद्युत् उत्पादन सुरु गर्ने लक्ष्य लिएको छ। सिभिल ठेकेदार गत पुस महिनादेखि परिचालित छ भने इलेक्ट्रोमेकानिकल र हाइड्रोमेकानिकल ठेकेदार छनोट प्रक्रियामा छन्, आयोजना व्यवस्थापक प्रमेश थापाले बताए। केहि दिनभित्रै भैँसीखर्क क्षेत्रमा नेपाली सेनाको ‘क्याम्प’ (आधार शिविर) स्थापना गर्ने तयारी भइरहेको छ। विस्फोटक पदार्थको सुरक्षा सुनिश्चित गर्न नेपाली सेनाको क्याम्प स्थापना गरेपछि मुख्य सुरुङ excavation सुरु गरिनेछ।

नेपाल सेना ने गर्भवती महिला का किया उद्धार

१४ वैशाख, काठमाडौं । प्रसूति के दौरान पीड़ा का सामना कर रही एक गर्भवती महिला का नेपाल सैनिक बल ने सफलतापूर्वक उद्धार किया है। यह उद्धार कार्य ढोरपाटन शिकार आरक्ष में सुरक्षा के लिए तैनात दुर्गाभञ्जन गुल्म से आये एक दल द्वारा किया गया। ढोरपाटन-८, देवीथान क्षेत्र की महिला को सेना ने सुरक्षित निकालकर उपचार हेतू ढोरपाटन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य चौकी में पहुँचाया।

ओपन एआई के सीईओ साम अल्टम्यान ने कनाडा के स्कूल गोलीकांड में माफी मांगी

ओपन एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) साम अल्टम्यान ने कनाडा के एक स्कूल में हुए सामूहिक गोलीकांड के मुख्य आरोपी के चैटजीपीटी खाते से जुड़ी सुरक्षा एजेंसियों को पूर्व सूचना न देने के लिए माफी मांगी है। 10 फरवरी को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित टम्बलर रिज सेकेंडरी स्कूल में 18 वर्षीय जेसी वैन रूटलर ने अंधाधुंध गोलीबारी कर 6 छात्रों सहित उनके माता-पिता और भाई सहित कुल 8 लोगों की जान ले ली थी।

शुक्रवार को ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए पत्र में अल्टम्यान ने कहा कि उस समुदाय ने अत्यंत गहरी पीड़ा झेली है और उन्होंने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि आरोपी का चैटजीपीटी खाता घटना से लगभग आठ महीने पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया था।

पत्र में अल्टम्यान ने लिखा, ‘जिस महीने उस खाते पर प्रतिबंध लगाया गया था, उस बारे में कानूनी एजेंसियों को सूचित न कर पाने के लिए मैं हृदय से माफी मांगता हूं।’ ओपन एआई ने फरवरी में सीबीएस न्यूज को बताया था कि स्वचालित दुरुपयोग पहचान प्रणाली और मानव जांचकर्ताओं ने उस खाते को हिंसक गतिविधि के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना के कारण ‘फ्लैग’ किया था। हालांकि, उस समय कंपनी ने निष्कर्ष निकाला था कि वह उपयोगकर्ता तत्काल और गंभीर शारीरिक खतरे का कारण नहीं था, इसलिए पुलिस को सूचित न करने का निर्णय लिया गया। घटना के बाद कंपनी ने रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस के साथ सहयोग किया है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सुरक्षा प्रणालियों में सुधार करने की प्रतिबद्धता जताई है।

‘छोरो विदेशमै ढल्यो, यता उसको कमाइको घरै रहेन’ 

‘बेटा विदेश में ही रह गया, यहाँ उसकी कमाई का कोई ठिकाना नहीं रहा’

गोपाल नेपाली के बेटे ने सऊदी अरब में दो साल कड़ी मेहनत करके पैसा भेजा। उसी पैसे से घर बनवाया गया। छुट्टियों में आकर जाने के बाद वह यहीं रह गया। गोपाल के लिए मनोहरा बस्ती का घर केवल पत्थर और ईंटों का ढेर नहीं था, बल्कि वह उनके बेटे की यादों का बक्सा था।

सामान्य वर्षा में ही सिरहाका लक्ष्मीचोक क्षेत्र जलमग्न

सिरहा नगरपालिका वडा नं. २ के अंतर्गत लक्ष्मीचोक क्षेत्र में सामान्य वर्षा के दौरान पानी जमा होने से स्थानीय लोगों की दैनिक जीवनशैली प्रभावित हुई है। सड़क डिवीजन कार्यालय लहान के इंजीनियर अस्विन यादव के अनुसार सड़क की ऊँचाई कम और नाले की ऊँचाई अधिक होने के कारण पानी सीधे सड़क पर जमा हो रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर नाला निर्माण किए जाने के बावजूद पानी के निकास में समस्या होने के कारण स्थानीय लोग दीर्घकालीन समाधान की मांग कर रहे हैं। १४ वैशाख, सिरहा।

सामान्य वर्षा में ही सिरहा नगरपालिका वडा नं. २ के लक्ष्मीचोक क्षेत्र जलमग्न होने से स्थानीय लोगों की दिनचर्या बाधित हुई है। चोहर्वा–सिरहा सड़कखंड के अंतर्गत स्थित इस क्षेत्र में कल रात से आज सुबह तक हुई वर्षा के कारण सड़क पर पानी जमा हो गया था। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पिछले २४ घंटों में सिरहा नगर क्षेत्र में मात्र २९.२ मिलीमीटर वर्षा हुई थी। इस वर्षा से लक्ष्मीचोक के सामने माडर जाने वाली सड़क पर पानी जमा हो गया था, जिससे कुछ समय के लिए वाहन आवागमन बाधित हुआ। पानी के निकास न होने से स्थानीय लोगों ने अपने आप कोदालो से अस्थायी नाला बनाकर पानी निकलवाया।

स्थानीय राजकिशोर साह बनिया के अनुसार नाला निर्माण के समय पानी के निकास में आसानी की उम्मीद की गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘पहले की तुलना में समस्या और बढ़ गई है, सामान्य वर्षा में ही घर के सामने पानी जमा हो जाता है, बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।’ उन्होंने बताया कि इससे विद्यार्थियों के लिए भी स्कूल जाना कठिन हो गया है। अन्य स्थानीय ललित साह ने कहा कि सड़क पर पानी जमा होने से दैनिक जीवन अत्यंत असहज हो गया है। ‘‘उचित निकास न होने के कारण पानी सड़क पर ठहर जाता है, मजदूर, व्यापारी और विद्यार्थी सभी प्रभावित हो रहे हैं,’’ उन्होंने बताया।

वडा नं. २ के अध्यक्ष राकेश यादव ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए बार-बार निर्माण व्यवसायी और सड़क डिवीजन कार्यालय लहान को सूचित किया गया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। ‘‘जनता की शिकायतों के बावजूद सम्बंधित अधिकारी ध्यान नहीं देते,’’ उन्होंने कहा। इसी संदर्भ में सड़क डिवीजन कार्यालय लहान के इंजीनियर अस्विन यादव ने बताया कि नाले की ऊँचाई अधिक और सड़क की ऊँचाई कम होने के कारण पानी सीधे नाले में नहीं जाकर सड़क पर जमा हो जाता है। स्थानीय लोगों की मांग के बाद सड़क के स्तर उन्नयन की पहल शुरू की गई है। ‘‘तत्कालीन रूप से नाले में मौजूद सामान्य बंदिशें हटाकर पानी का निकास किया जा रहा है, स्थानीय लोगों से सहायता भी मांगी गई है,’’ उन्होंने कहा।

आर्थिक वर्ष ०८१/८२ में सड़क डिवीजन कार्यालय लहान ने लगभग ८ करोड़ रुपये की लागत से टेंडर जारी किया था। इसके प्रथम चरण में भगवत ग्रुप कंस्ट्रक्शन, काठमांडू ने ६ करोड़ रुपये में १,१०० मीटर नाला निर्माण की ठेका पाई थी जबकि दूसरे चरण में बोहदर माई एबी–वीरगंज ने २ करोड़ रुपये में ५०० मीटर नाला निर्माण की जिम्मेदारी संभाली थी। दोनों निर्माण कंपनियों ने अपना कार्य पूरा कर भुगतान भी ले लिया है, इंजीनियर यादव ने बताया। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए संरचनाओं के बावजूद राहत के बजाय समस्याएं बढ़ने से स्थानीय लोग आक्रोशित हैं। उन्होंने दीर्घकालीन समाधान के साथ तुरंत सुधार के लिए सम्बंधित निकाय से मांग की है।

क्रिप्टोकरेन्सी: निषेध से नियमन तक की यात्रा

नेपाल राष्ट्र बैंक ने क्रिप्टोकरेन्सी को पूर्णतः निषिद्ध कर दिया है और इसे मुलुकी अपराध संहिता २०७४ के दफा २६२ (क) के तहत फौजदारी अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। नेपाल में क्रिप्टोकरेन्सी के अवैध कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग की समस्या बढ़ती जा रही है, जिसमें कई युवा अनजाने में अपराधी गिरोहों के शिकार बन रहे हैं। विश्व के ७५ प्रमुख अर्थतंत्रों में से ४५ में क्रिप्टोकरेन्सी वैध है, जबकि नेपाल सहित १० देशों में इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है और नेपाल को नियमन के रास्ते पर चलना आवश्यक प्रतीत होता है।

मानव सभ्यता के इतिहास में विनिमय के माध्यम समय के साथ बदलते रहे हैं। वस्तु विनिमय से शुरू हुई यह यात्रा धातु मुद्रा, कागजी नोट के माध्यम से आज की अपारंपरिक डिजिटल मुद्रा तक पहुंच चुकी है। विश्व अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से डिजिटल हो रही है कि कल तक जिन तकनीकों की कल्पना करना कठिन था, वे आज हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं। पहले जब तक पैसे जेब में न होते थे, बाजार जाना असंभव समझा जाता था, आज हम केवल क्यूआर कोड स्कैन करके लगभग सभी आर्थिक लेनदेन क्रियान्वित करते हैं।

क्रिप्टोकरेन्सी की बात करते समय इसकी रीढ़ मानी जाने वाली ब्लॉकचेन तकनीक को समझना अत्यंत आवश्यक है। ब्लॉकचेन इंटरनेट पर चलने वाला एक साझा और सुरक्षित खाता है, जिसमें किए गए हर लेनदेन का विवरण विश्व के हजारों कंप्यूटरों पर एक साथ अपडेट होता है। तकनीकी भाषा में इन्हें नोड कहा जाता है। इस तकनीक में डेटा को क्रिप्टोग्राफिक तरीके से संरक्षित किया जाता है। इसलिए, एक बार जब यह विवरण खाते में दर्ज हो जाता है, तो कोई भी इसे मिटा नहीं सकता और न ही बदल सकता है।

नेपाल में हाल ही में क्रिप्टोकरेन्सी कारोबार पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कानूनी कदम बेहद गंभीर माने जा रहे हैं। मुलुकी अपराध संहिता २०७४ के दफा २६२ (क) में २०८१ वैशाख ३० को किए गए नवीनतम संशोधन के साथ यह विषय अब केवल राष्ट्र बैंक के निर्देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी तरह से फौजदारी अपराध के दायरे में आ गया है, जिससे सरकार की कड़ी नीति स्पष्ट होती है।

माली के रक्षामंत्री सादियो केमारो का आत्मघाती हमला में निधन

पश्चिम अफ्रीका के माली देश के रक्षामंत्री सादियो केमारो राजधानी बमाको नजदीक एक आत्मघाती ट्रक बम विस्फोट में निधन हो गया। माली की सरकारी टेलीविजन ने बताया कि विस्फोट में गंभीर रूप से घायल रक्षामंत्री की मृत्यु हो गई है। विद्रोही संगठन जमाअत नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन (जे.एन.आई.एम.) ने माली की सेना छावनियों पर हमला करने की जिम्मेदारी स्वीकार की है।

१४ वैशाख, काठमांडू। रक्षामंत्री केमारो के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है, जो आत्मघाती ट्रक विस्फोट के कारण हुआ। माली की सरकारी टेलीविजन ने भी तत्काल ही घायल रक्षामंत्री के मौत की सूचना दी थी। बताया गया है कि माली के राष्ट्रपति आसिमी गोइता का आवास भी इस हमले की लक्षित जगह बना। राष्ट्रपति गोइता को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

माली वर्तमान में हिंसा और अस्थिरता के बीच संघर्षरत है। राजधानी बमाको और अन्य शहरों में अनवरत आक्रामक चरमपंथी समूह शनिवार की सुबह से ही हमले कर रहे हैं। सैनिक शासन वाले माली में सैन्य छावनी, रक्षामंत्री के घर और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया गया है। चरमपंथी संगठन आज़ावत लिबरेशन फ्रंट (एफ.एल.ए.) ने रूसी भाड़े के सैनिकों के प्रस्थान के बाद इन क्षेत्रों पर नियंत्रण होने का दावा किया है।

विद्रोही समूह जमाअत नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन (जे.एन.आई.एम.) ने इस हमले में अपनी भूमिका स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने राष्ट्र के नेता जनरल गोइता, रक्षामंत्री केमारो के घर और सैन्य छावनीयों को निशाना बनाया है। अलजज़ीरा ने इस तरह के समन्वित हमले को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि इसने सैनिक पंक्तियों में भारी आतंक फैलाया है। युरोपीय परिषद के बाहरी संबंध विभाग के अफ्रीका निदेशक एलेक्स वाइंस ने कहा कि माली के अधिकारी इन हमलों से अचंभित हैं।

भजन किर्तनमा मदमग्न एमआरआर – Online Khabar

एमआरआर के युवा भजन-कीर्तन में मग्न

सुबह के ब्रह्म मुहूर्त में दादा-परदादा ‘ॐ जय जगदीश हरे’ गाते थे तो उन्हें सिरक की तरह सिमटते देखा जाता था। घंटी और शंख की ध्वनि तथा भजन की मधुर तान उन्हें न जागृत करती थी, न ही मोहित। वे तो कासेट प्लेयर पर ‘हो जा रंगीला रे’ बजाकर शरीर के अंगों को झूमाकर अपना दिन शुरू करते थे। सुबह की आरती में वे थाली नहीं घुमाते थे, पूजा-अर्चना नहीं करते थे, टीका-प्रसाद ग्रहण नहीं करते थे। अंततः भक्ति भजन के साथ शुरू होने वाली घर की दिनचर्या बदल गई। रविवार सुबह की पूजा-पाठ और शाम को सत्संग करने का पारंपरिक क्रम टूट गया। मिलेनियल्स और जेन-जेड के सम्मिलित इस पीढ़ी ने अचानक एक सौ अस्सी डिग्री का बदलाव किया। उन्होंने खैजड़ी उठाई, ढोलक बजाई, झ्याली पीटी। और भक्तिभाव से मगन होकर भजन-कीर्तन गाने लगे। आधुनिकता के रंग पहने, तकनीक की रफ्तार पकड़ चुके, विज्ञान के भरोसे चलने वाली यह पीढ़ी किस मानसिकता के साथ भजन-कीर्तन कर रही है? यह एक सुखद रहस्य है। इस रहस्य के पर्दा उठाने के लिए एमआरआर में प्रवेश करना पड़ा।

एमआरआर यानी मेन्स रूम रिलोडेड। लगभग 15 साल पहले किसी युवक ने अपनी इच्छा से फेसबुक पर एक पेज बनाया, जिसका नाम एमआरआर रखा। युवाओं का अपना एक समूह, जहां वे वर्चुअल चाय-गप कर सकें। 18 वर्ष से ऊपर, जुझारू और खुले विचारों वाले वैशालु के युवा इस पेज पर स्वागत पाते हैं। यहां वे अपना दिल खोलकर ‘ननवेज’ बातें कर अपनी असली पहचान दिखा सकते हैं। वे जो चाहे कह सकते हैं, अपनी सोच साझा कर सकते हैं। हल्के-फुलके गपशप, सामान्य समस्याएं और मनोरंजक जोक्स के साथ शुरू हुआ यह पेज एक अलग सत्ता बन गया। यह समूह पूरी दुनिया के समान विचारधारा वाले युवाओं को जोड़ता है। सामाजिक नेटवर्क पर युवा आवाज को एक सूत्र में बांधने की क्षमता इसी समूह में है। वे कभी चेतावनी देते हैं तो कभी साझा करते हैं। वे ‘स्वर्ण उम्र’ को मनमौजी खर्च के लिए नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी में योगदान करने की दिशा में लगाते हैं।

आखिरकार यह समूह बनभोज, भेंट, चर्चा में जुटा रहता है, कभी वृक्षारोपण के लिए एकजुट होता है, कभी सफाई अभियान में, कभी बचाव कार्यों में तथा स्वयंसेवा में। भौतिक योगदान के साथ अभूतपूर्व आध्यात्मिक जागृति की भी यह टोली शामिल होती है। सामूहिक भजन-कीर्तन इसी जागरण की एक कड़ी है। टिक टॉक, रील्स और इंस्टाग्राम पर व्यस्त युवा इससे भजन मंडली में जुड़ गए हैं। इसलिए विभिन्न स्थानों पर युवा मिलकर पूर्ण भक्तिभाव के साथ भजन-कीर्तन गा रहे हैं। वह वही पीढ़ी है जो धर्म-परंपरा से कुछ मोहभंग हुई थी, फिर उसी पीढ़ी ने भजन में स्वर मिलाकर स्वाभाविक रूप से टोल-मोहल्लों में इकट्ठा होना शुरू कर दिया है, और समाज यह बदलाव देख रहा है।

संध्याकाल का समय है। हल्की लालिमा लिए सूर्य अस्त हो रहा है। किसी मंदिर परिसर का सात्विक वातावरण है। जीन्स और टी-शर्ट पहने युवा आमने-सामने बैठे हैं। सिर पर ढाका टोपी, गले में रुद्राक्ष और रामनामी लिए। खैजड़ी, ढोलक और झ्याली की ताल पर वे एकसाथ गाना शुरू करते हैं— ‘लीला हो रही है…हा, राम तुम्हारे मंदिर में’। कोई धीरे-धीरे अर्धवृत्ताकार घूमते हुए नाचता है, कोई सुरों में तब्दीलियां करता है। माहौल ऐसा मादक होता है, मानो ये कोई हिप्पी युग के युवा हों जो ‘हरे राम हरे कृष्ण’ गा रहे हों—गिटार की धुन पर। ‘अभी अभी चलना शुरू हुआ जीवन आधा वृंदावन में… कृष्ण के साथ, राधा का धर्म आधा-आधा होता है या नहीं हे राधा…अहै….’ संध्या भजन की यह लहर धीरे-धीरे बढ़ती है। युवाओं का समूह बढ़ता जाता है। देखते ही देखते यह एक नदी के प्रवाह की तरह विशाल तरंग बन जाती है। अंत में यह लहर काठमाडौं के किसी मंदिर को पार कर चितवन, बुटवल, भैरहवा, हेटौंडा, पोखरा तक फैलती है। और इसकी गूंज दुबई, क़तर, मलेशिया से होती हुई जापान और फिनलैंड तक पहुँच जाती है। ‘एमआरआर भजन मंडली’ के बैनर के साथ युवा गर्व के साथ स्टेटस लिखते हैं, ‘एमआरआर भजन अब फलाने स्थान पर भी’। भक्ति, संगीत और आराधना के इस युवा समूह ने स्वयं एक अभियान जैसी शक्ल ले ली है। ‘एमआरआर भजन’ शीर्षक के तहत विभिन्न दिनांक, स्थान और समय पर नियमित भजन-कीर्तन का सिलसिला चलता है।

लगभग एक वर्ष पूर्व की बात है। एमआरआर समूह के युवक भृकुटीमंडप में मिलते, बातचीत करते, चाय पीते और फुटसल खेलते थे। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ‘क्या भजन-कीर्तन किया जाए?’ यह बात यहीं से शुरू हुई। एमआरआर के संस्थापक संतोषकुमार थापा बताते हैं, ‘उसके बाद हमने काठमाडौं में एक शाम भजन-कीर्तन का आयोजन किया।’ उस वक्त कुछ युवा इकट्ठा हुए। शहर की मादक शाम में घूमते हुए वे किसी मंदिर में ‘हरे राम हरे कृष्ण’ के भजन गा रहे थे। यहीं से भजन-कीर्तन की यह श्रृंखला शुरू हुई और धीरे-धीरे युवा इसमें जुड़ते गए। ‘शुरुआत में हम सीमित स्थानों पर भजन-कीर्तन करते थे’ संतोष बताते हैं, ‘बाद में बुटवल, पोखरा, हेटौंडा आदि में एमआरआर के साथी भी इसे शुरू करने लगे। अब यह न केवल नेपाल में, विदेश में भी फैला हुआ है।’ इस क्रेज का स्तर इतना बढ़ चुका है कि साप्ताहिक भजन अब एक बड़ा उत्सव बन गया है। जहां जहां युवा भजन-कीर्तन के लिए बैठते हैं, वहां स्थानीय लोग भी सात्विक भीड़ में शामिल होते हैं। वे उमंग से हिस्सा लेते हैं, भक्तिभाव से नाचते और गाते हैं। ‘आज कुछ मठ-मंदिरों ने हमें आमंत्रित करना शुरू कर दिया है’ संतोष कहते हैं, ‘खुशी की बात यह है कि नव वर्ष की पूर्व संध्या पर हमें पशुपतिनाथ से भजन के लिए बुलावा मिला।’ जब युवा एकजुट होकर उल्लासपूर्ण वातावरण में भजन-कीर्तन करने लगते हैं तो कई पूछते हैं, ‘कितना खर्च होगा, हम भी यहां भजन कार्यक्रम करना चाहते हैं।’ ‘लेकिन हम पैसा लेकर भजन-कीर्तन नहीं करते’ संतोष कहते हैं, ‘यह पूरी तरह निशुल्क है। इसमें कोई तैयारी नहीं करती, बस स्वाभाविक रूप से जुटती है।’ ‘फलाने जगह, फलाने तिथि को भजन होगा।’ फेसबुक पर होने वाले इन सार्वजनिक सूचनाओं को देखकर युवा मानो आज्ञाकारी हो जाते हैं और निर्धारित जगह व समय पर पहुंचकर भक्तिपूर्ण वातावरण में भजन-कीर्तन में भाग लेते हैं। केवल विशेष मौके या फुर्सत में नहीं, बल्कि नियमित रूप से वे भजन-कीर्तन में शामिल हो रहे हैं। काठमाडौं समेत अन्य क्षेत्रों में साप्ताहिक भजन होते रहते हैं। डिस्को से लेकर शराबखानों तक मस्ती करने वाली युवा लहर अब सौम्य, शांत और आध्यात्मिक चेतना से प्रफुल्लित हुई है। संतोष कहते हैं, ‘यह एक जागरण की लहर है। हमारे पूर्वजों ने जो उपहार दिया था, वह युवाओं को आध्यात्मिक शुद्धि की ओर ले जा रहा है।’

‘हमारा सुदूरपश्चिम हम पहचानते हैं’ अभियान के तहत धनगढी के मेयर के नेतृत्व में टीम एपी बेस कैंप के लिए रवाना

१४ वैशाख, धनगढी। धनगढी उपमहानगरपालिका के मेयर गोपाल हमाल के नेतृत्व में एक टीम ने एपी बेस कैंप यात्रा शुरू की है। सुदूरपश्चिम प्रदेश के पर्यटन वृद्धि के लिए धनगढी उपमहानगरपालिका ने ‘हमारा सुदूरपश्चिम हम पहचानते हैं’ नारे के साथ अभियान की शुरुआत की है। मेयर हमाल के नेतृत्व वाली ३० सदस्यों की टीम सोमवार सुबह धनगढी से एपी बेस कैंप की ओर यात्रा आरंभ कर चुकी है। इस १० दिनों की यात्रा में टीम का लक्ष्य एपी हिमाल के बेस कैंप तक पहुंचना है।

सुंदर सुदूरपश्चिम के अभियन्ता भी रहे मेयर हमाल ने बताया कि स्थानीय सरकार की ओर से हिमाल और पर्यटन क्षेत्रों के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है। एपी बेस कैंप यात्रा में जनप्रतिनिधि के साथ-साथ कर्मचारी, व्यापारी और विभिन्न आम जनता की भी भागीदारी है। टीम को धनगढी से बाजागाजा और फूलमालाओं से विदाई दी गई है। इस अभियान से सुदूरपश्चिम के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद व्यक्त की गई है।

ट्रम्प और प्रशासन के अधिकारियों को हत्या की धमकी

आइतवार जारी किए गए एक बयान में व्हाइट हाउस ने कहा है कि ट्रंप और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को हत्या की धमकी मिलने के बावजूद वे डरे नहीं हैं।

शनिबारदेखि अवरुद्ध बिपी राजमार्ग अझै खुलेन – Online Khabar

शनिवार से अवरुद्ध बीपी राजमार्ग अभी तक नहीं खुल पाया

१४ वैशाख, काभ्रेपलाञ्चोक। पिछले शनिवार शाम से अवरुद्ध बीपी राजमार्ग अभी तक संचालन में नहीं आ सका है। १२ तारीख शनिवार को रोशी खोलामा आई बाढ़ से बिगड़े डाइवर्‍शन रविवार को अधिकांश स्थानों पर बनाए गए थे, लेकिन १३ तारीख रविवार शाम की बारिश ने इन डाइवर्‍शन को बहा दिया था। राजमार्ग के चिउरीबास, नार्के और चार सौ से अधिक स्थानों पर रविवार को बनाए गए डाइवर्‍शन बह चुके हैं।

इलाका प्रहरी कार्यालय मंगलटार के प्रमुख प्रहरी निरीक्षक ईश्वर कार्की के अनुसार, रोशी खोलाके द्वारा उधमित १३ स्थानों के बीच ८ स्थानों पर डाइवर्‍शन बनाए गए थे, लेकिन रविवार शाम की बारिश ने इन्हें फिर से क्षतिग्रस्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि सोमवार सुबह से फिर से डाइवर्‍शन बनाने का कार्य शुरू किया गया है। शनिवार को रोशी खोल की बाढ़ ने चौकीडाँडा, घुमाउने, चारसय बेँसी, गिम्दी बेँसी, नार्के, चिउरीबास, बोक्सीकुना, कालढुंगा, डालाबेशी, बुलढुंगा तथा माम्ती में बने डाइवर्‍शन को बहा दिया था, जबकि सिन्धुली की तरफ आँपघारी और नेपालथोक में भी डाइवर्‍शन बह चुके हैं।

प्रहरी के अनुसार, सड़क डिविजन कार्यालय और ठेकेदार कंपनी मौसम में सुधार आने पर क्षतिग्रस्त डाइवर्‍शन की मरम्मत कर यातायात पुनः संचालन में लाने की तैयारी कर रहे हैं।

पश्चिम गुल्मी में विद्युत सेवा बाधित, मरम्मत कार्य जारी

१४ वैशाख, गुल्मी। पश्चिम गुल्मी क्षेत्र में रविवार दोपहर से विद्युत सेवा बाधित है। वस्तु सब-स्टेशन के अंतर्गत ११ केवी वस्तु फीडर के पैनल में अचानक आग लगने के कारण विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई है। पैनल में आए खराबी को ठीक करने के लिए प्राविधिक टीम सक्रिय है और इसे पूर्ण रूप से मरम्मत करने में कुछ समय लगेगा। इस फीडर से सेवा प्राप्त करने वाले धुर्कोट वस्तु, धुर्कोट राजस्थान और धुर्कोट वाग्ला सहित पश्चिम गुल्मी के कई क्षेत्रों में विद्युत सेवा ठप होने की जानकारी मिली है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण गुल्मी वितरण केंद्र ने मरम्मत कार्य जारी रखा है, इसलिए सेवा पुनः शुरू होने में कुछ समय लगेगा। उपभोक्ताओं से धैर्य बनाए रखने का अनुरोध किया गया है।