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लेखक: space4knews

नीतीश कुमार के 21 वर्ष के मुख्यमंत्री काल में बिहार का रूपांतरण कैसा रहा?


पटना के फूलबारी शरीफ स्थित एक गैरसरकारी संस्था में काम करने वाली फरिदा खातून अपने परिवार में सबसे अधिक शिक्षित सदस्य हैं। उन्होंने स्नातकोत्तर स्तर तक पढ़ाई पूरी की है।

मजदूरी करने वाले फरिदा के परिवार ने 2007 में उन्हें अररिया के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में दाखिला दिलवाया था।

फरिदा मूल रूप से मुस्लिम बहुल जिले अररिया की रहने वाली हैं, जहां मुस्लिम जनसंख्या 40 प्रतिशत से अधिक है।

फरिदा कहती हैं, ‘हम उस क्षेत्र में रहते थे जहां लड़कियों को केवल इस्लामी शिक्षा दी जाती थी। लेकिन मैं स्कूल में दाखिल हो गई। फिर स्कूल यूनिफॉर्म, सैनिटरी पैड, साइकिल, कन्या उत्थान योजना सहित कई योजनाओं का लाभ मिला और मैंने पटना विश्वविद्यालय से पोस्टग्रेजुएशन किया।’

‘तब लगता था कि नीतीश कुमार लड़कियों के नेता हैं, लेकिन हाल के कुछ वर्षों में ऐसा लगने लगा है कि वे केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व हैं। वे धर्म आधारित राजनीति में भी शामिल हुए हैं।’

फरिदा की ये टिप्पणी वाकई में नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा को दर्शाती है।

हाल ही में नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने लोक भवन जाकर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंपा।

साल 2000 में नीतीश कुमार सात दिन के लिए मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन स्थायी रूप से उनका कार्यकाल नवंबर 2005 से शुरू हुआ।

उन्हें ‘सुशासन बाबू’ के नाम से जाना गया। लेकिन पिछले वर्षों में उन्हें ‘पार्टी बदलने वाला व्यक्ति’ के रूप में देखा जाने लगा। उनके ऊपर कई ‘मेम’ बने और विश्लेषकों ने उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।

‘नीतीश जैसा कोई और नहीं’

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद उनके बेटे निशांत कुमार जब पटना के वीरचंद पटेल स्थित जेडीयू कार्यालय आए, तब काफी हलचल हुई।

फिर भी जेडीयू कार्यकर्ता उन्हें ‘दूसरा नीतीश’ नहीं मानते।

1977 के नीतीश के पहले चुनाव से साथ रहे अशोक कुमार कहते हैं, ‘नीतीश जैसा कोई और नहीं।’

बिहार के सरकारी कार्यालयों को टाइपराइटर से कंप्यूटर युग में लाना उनकी पहली बड़ी चुनौती थी। जिसमें भारतीय जनता पार्टी के नेता सुशील कुमार मोदी ने समर्थन दिया, जो हमेशा टैब लेकर चलते थे।

सुशील मोदी उप मुख्यमंत्री थे और अर्थ मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते थे।

1982 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व्यासजी कहते हैं, ‘नीतीश और सुशील मोदी दोनों तेज़ स्वभाव के थे। मैंने लालूजी के कार्यकाल भी देखे हैं। उनकी मुख्य भिन्नता यह है – लालू नेता थे, नीतीश एक उत्कृष्ट प्रशासक।’

‘वे बैठकों में नए विचारों का स्वागत करते थे और हर विभागीय बैठक में पिछली हिदायतों को याद रखते थे। बिहार को आगे बढ़ाने की उनकी तेज इच्छा थी।’

समाजवादी नीतीश का ‘वोट इंजीनियरिंग’

सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार ने राज्य की स्थिति पर ‘श्वेत पत्र’ जारी किया, जिसमें कहा गया कि ‘सभी विकास सूचकांकों में बिहार सबसे खराब स्थिति में है।’

नीतीश सरकार को कानून-व्यवस्था, सड़क, बिजली सहित बुनियादी ढांचे में सुधार के बड़े चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

कुर्मी जाति से आने वाले नीतीश कुमार को लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के लिए वोट इंजीनियरिंग करनी पड़ी।

अपनी रणनीति के लिए उन्होंने महिलाओं और अति पिछड़े वर्गों को चुना।

वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह ने अपनी पुस्तक ‘कितना राज, कितना काज’ में लिखा है, ‘नीतीश ने महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण दिया और पंचायत तथा स्थानीय निकायों में ईबीसी (अति पिछड़ा वर्ग) हिंदू और मुसलमानों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया।’

‘इससे उन्हें अपनी जाति के लोगों का विरोध सहना पड़ा, जो कहते थे कि वे दूसरों को फायदा पहुँचाने के लिए अपनी बलि दे रहे हैं। लेकिन नीतीश ने महिलाओं को भी पिछड़ा माना और यह स्वीकार किया।’

बाद में 2007 में महादलित आयोग का गठन किया गया।

नीतीश के लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण से उन्हें लगभग 20 प्रतिशत वोट मिलने की बात कही जाती है, हालांकि उनकी जनसंख्या लगभग सात प्रतिशत है।

‘खुद में मग्न’

नीतीश सरकार आने के बाद उनकी दो योजनाएं स्कूल यूनिफॉर्म और साइकिल को बदलाव की शुरुआत माना गया।

ग्रामीण इलाकों में साइकिल से स्कूल जाने वाली लड़कियों को यह बदलाव का प्रतीक माना गया।

यह दृश्य शुरुआती समाजवादी नीतीश के कल्याणकारी राज्य और कानून-व्यवस्था सुधार का संकेत था।

लेकिन बाद में सरकार पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बजाय केवल प्रचार करने का आरोप लगा।

नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी

सामाजिक कार्यकर्ता शाहिना परवीन कहती हैं, ‘नीतीश के शुरुआती कार्यकाल में कर्मठ कर्मचारी थे और महिलाओं के लिए अच्छा कदम उठाया गया, लेकिन बाद में स्थिरता खोई।’

‘नीतीश खुद अपने कामों में रमाने लगे। अंतिम दिनों में दिखावटी काम पर ज्यादा ध्यान दिया गया, जो प्रचार तो खूब होता है लेकिन टिकाऊ नहीं होता।’

‘पंचायत में महिलाओं को आरक्षण दिया गया लेकिन कोई महिला मंत्री या विधायक नहीं बनीं। किए गए कार्यों ने महिलाओं की पारंपरिक भूमिका को सशक्त किया जैसे सिलाई यंत्र बांटना, पापड़-बड़ी बनाने के प्रशिक्षण।’

2025 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘जीविका दीदी’ को रोजगार शुरू करने के लिए 10,000 रुपये दिए गए, उस वक्त भी नीतीश की राजनीति में बदलाव की बात उठी।

जेडीयू के नेता कहते थे, ‘हमारे नेता पहले नीतियों से बदलाव लाते थे, अब चुनावी लालच के हथियार इस्तेमाल करते हैं।’

अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता – नीतीश के ‘थ्री सी’

नीतीश ने बार-बार कहा है कि वे ‘थ्री सी’ यानी अपराध, भ्रष्टाचार और साम्प्रदायिकता से समझौता नहीं करेंगे।

2005 में बिहार पुलिस के एडिजी अभय नंद कहते हैं, ‘नीतीश जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने मुझे बुलाकर कहा कि हमें कानून का शासन चाहिए।’

‘आर्म्स एक्ट, स्पीडी ट्रायल समेत गवाही प्रक्रिया में काम किया गया। ‘सैप’ (एसएपी) का गठन हुआ और पुलिस आधुनिकीकरण हुआ।’

लेकिन हाल के दिनों में कई घटनाएं हुईं जो नीतिश सरकार के विरुद्ध थीं, जैसे 2015 में मोकामा विधायक अनंत सिंह के घर में एक पत्रकार को बंधक बनाना।

रणवीर सेनाका प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के बाद उनके समर्थकों ने पटना में हिंसा फैलाई।

पटना के डाक बंगला चौराहे पर आगजनी और हिंसा हुई।

अधिवक्ता मणिलाल कहते हैं, ‘तब राज्य में 90 के दशक की जातीय हिंसा जैसी स्थिति आने का डर था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’

‘लेकिन औरंगाबाद, छपरा और बिहारशरीफ में दंगे हुए। भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया कि बिना रिश्वत कोई काम नहीं होता। नीतीश की पकड़ पहले जैसी नहीं रही।’

कई नई योजनाएं लेकिन जमीन पर कम सफलता

नीतीश ने सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए ‘जनता दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम शुरू किया।

‘इन्फॉर्मेशन कॉल सेंटर’, ‘आपकी सरकार आपके द्वार’, बिहार लोक सेवा अधिकार जैसी योजनाएं उत्साह से शुरू हुईं लेकिन बाद में कमजोर पड़ गईं।

इन्फॉर्मेशन कॉल सेंटर की स्थापना 2007 में हुई थी।

आरटीआई कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय कहते हैं, ‘शानदार शुरुआत के बाद अब यह बंद हो चुका है। जवाबदेही खत्म हो गई। कार्यकर्ता हत्या, धमकी और झूठे मामलों में फंसे हैं।’

शाहिना परवीन कहती हैं, ‘शिक्षा और स्वास्थ्य में काम हुआ, लेकिन शिक्षक और डॉक्टरों की गुणवत्ता न होने से प्रभाव कम हुआ। पीपीपी मॉडल ने निजीकरण बढ़ाया, जो प्रारंभिक शैली से अलग था।’

बिजली और सड़कों में सुधार

2006 के श्वेत पत्र के अनुसार, बिहार में औसत बिजली खपत 60 किलोवाट थी, लेकिन 2011-12 में यह बढ़कर 134 किलोवाट और 2025-26 में 374 किलोवाट हो गई है।

सड़क निर्माण 2005-06 में 835 किमी था, जो अब बढ़कर 1,19,067 किलोमीटर हो गया है। पुलों और फ्लाईओवर की वजह से दुनिया तेज हो गई है।

हालांकि नीतीश के दावे के अनुसार सभी कूंड़ों से पटना छह घंटे में पहुंचने की स्थिति अभी नहीं बनी है।

भूमि सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग क्षेत्रों में नीतीश सरकार अच्छी प्रगति नहीं कर सकी।

भूमि सुधार के लिए डी. बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में समिति और ‘कॉमन स्कूल सिस्टम’ के लिए मुचकुंद दुबे की अध्यक्षता में आयोग बनाया गया था।

पूर्व निदेशक डी.एम दिवाकर कहते हैं, ‘नीतीश का इरादा अच्छा था लेकिन संयुक्त रिपोर्ट लागू नहीं होती थीं। निजी संस्थाएं खुलीं लेकिन सार्वजनिक संस्थाएं कमजोर हुईं।’

‘पंचायत स्तर पर अनुशासनहीन शिक्षक नियुक्ति ने शिक्षा की गुणवत्ता को और कमजोर किया।’

वरिष्ठ पत्रकार अरुण श्रीवास्तव कहते हैं, ‘बिहार सरकार ठेकेदारों की सरकार बन गई है। फ्लाईओवर केवल मध्यवर्ग की जरूरतें पूरी करते हैं। सीमांतित बिहारी समाज की क्या स्थिति है?’

‘दस्तावेज में विकास की बातें उद्योग, रोजगार और पलायन में विफलता को दर्शाती हैं। इसमें बिहार सबसे पीछे है।’

नीतीश का बदलता क़िद्दन

2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन ने 243 में से 206 सीटें जीतीं, जिसमें जेडीयू को केवल 115 सीटें मिलीं और आरजेडी को 22।

लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में मोदी के उदय से असहमत नीतीश ने भाजपा छोड़ कर 2015 के चुनाव में आरजेडी-कांग्रेस के गठबंधन के साथ जंग लड़ी।

2015 में नीतीश ने बिहारी DNA नमूना दिल्ली भेज कर विरोध जताया।

बाद में 2017 में वे फिर से भाजपा गठबंधन में लौटे। 2022 में फिर आरजेडी-कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, लेकिन 2024 में उसे भी तोड़ दिया।

फिर उनकी पार्टी जेडीयू और भाजपा एक हो गई हैं। हाल के चुनाव में नीतीश ने बार-बार कहा कि उन्होंने आरजेडी के साथ गलती की, लेकिन अब वे कहीं नहीं जाएंगे।

पहले बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष करने वाले नीतीश अब विशेष पैकेज में संतुष्ट नजर आते हैं।

पहले ‘बिहार दिवस’ का भव्य आयोजन करके बिहारीत्व पर गर्व करने वाले नीतीश अब कमजोर होते दिख रहे हैं। जब वे सत्ता संभाले थे तो उनकी उम्र 54 वर्ष थी, आज वे 75 वर्ष के हो गए हैं।

(हिंदी सामग्री का अनुवाद)

श्रीमान्‌लाई फोन गरेर ‘मर्न’ लागेको बताएकी महिलाको सकुशल उद्धार

श्रीमान से फोन पर ‘मर्न वाली’ बताई गई महिला का सुरक्षित उद्धार

ललितपुर महानगरपालिका–२७ सुनाकोठी की ४३ वर्षीय महिला को पुलिस टीम ने जंगल से सकुशल उद्धार किया है। महिला के पति ने वीडियो कॉल के माध्यम से ‘मर्न लगी हूँ’ की सूचना पुलिस को दी थी। तुरंत ही ललितपुर जिला प्रहरी परिसर की टीम महिला की खोज में निकल गई थी। खोजबीन के दौरान महिला को सुनाकोठी के जंगल से ढूंढ़ निकाला गया और फिलहाल महिला को महिला के परिजनों को सौंपा गया है, पुलिस ने बताया। १ वैशाख, काठमाडौं।

नए सरकार के नए वर्ष के अवसर पर नई कविता

जीवन में उदय और अस्त की लीला आशा की गई अपेक्षाओं से भिन्न अनुभव और ज्ञान प्रदान करती है और ताश के महल की तरह सब कुछ बिखेर देती है। नेपाली जनता शासन-व्यवस्था, शांति और समृद्धि लाने के लिए अवसर देती है और समाज व्यक्ति की पहचान, नीयत और कर्म की सतत जांच करता है। जनता को उम्मीद है कि सुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता के आने से भ्रष्टाचार का अंत होगा और सदाचार से जनमत की प्रतिज्ञा पूरी होगी, जिसे अभी देखना बाकी है।

उदय और अस्त की लीला जीवन में आशा की गई शिक्षा से भिन्न होती है। इसलिए, ‘मैं’ कहने वाले को भी बिना बताए ताश के महल की तरह सब कुछ बिखेर दिया जाता है। बाएं मुड़ने से पहले दौड़ने की बात करने की यह हमारी आदत रही है। इसलिए बाज़ार में बने रहने के लिए समय की गति के अनुसार मरम्मत आवश्यक है। शुद्ध नीयत रखने वाले और सर्वज्ञ मानव इस दुनिया में कम ही मिलते हैं।

पास-पड़ोस, जोड़-तोड़ और बीच रास्ते में टकराने वाले लोगों से अधिक चोट लगती है। जो लोग हमें निष्पक्ष और साफ-सुथरा समझते हैं, वे हमें भ्रष्ट और दलाल भी समझते हैं। अवसर आने-जाने पर अमल न करने से हर व्यक्ति तनाव में रहता है। नेपाली वास्तव में क्रोधी और जल्दी निराश होने वाले स्वभाव के हैं।

जनता देश में सुशासन, शांति और समृद्धि लाने के लिए अवसर देती है। व्यक्ति की पहचान, नीयत और कर्म की जांच समाज और जनता द्वारा लगातार होती रहती है। समय की आपदा का सामना न कर पाने वाले बर्बाद हो जाते हैं और हर ओर पीछे छूट जाते हैं। सफलता, धन और परिचय पाने की इच्छा हर व्यक्ति के हृदय में पनपती है।

पद, धन, शक्ति और घनिष्ठ मित्रों के अनुरोधों से प्रत्येक व्यक्ति के मन में हलचल होती है। शीघ्र सुखी बनने की चाह में क्षणिक स्वार्थ में फिसलने से मजबूत आधार कमजोर पड़ जाता है। यदि समय अनुकूल हो तो दो सूत्र या नारे भूस्खलन की आग की तरह फैल जाएंगे।

जिज्ञासा है बालेन जी, अब जनता जानना, समझना और परिणाम खोज रही है। अब जब सुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता आएंगी तो भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा, ऐसा जनता कह रही है। देश की स्थिति, मानसिकता और परिप्रेक्ष्य के अनुसार पूर्ण बहुमत दिया गया है। हमें देखना है कि सदाचार जनमत की प्रतिबद्धता पूरी करता है या इच्छापूर्ति में विलय हो जाता है।

रबि की ‘मिश्रित खेती’ में 27 प्रकार की नगदे फसलें

मेचीनगर नगरपालिका-४ बाहुनडाँगी के किसान रबि नेपाल ने 12 बीघा जमीन में 27 प्रकार की नगदे फसलें लगाकर आधुनिक मिश्रित खेती की है। नेपाल चाय, रबर, अगरुद, आंवला, कटहर, तेजपत्ता सहित दर्जनों नगदे फसलें एक ही जमीन पर उगा रहे हैं। उन्होंने नारियल की खेती को चाय के बगान के अंदर सहायक फसल के रूप में प्रयोग करते हुए कृषि पर्यटन और उत्पादन में नया आयाम जोड़ने की योजना बनाई है। 1 वैशाख, झापा। मेचीनगर नगरपालिका-४ बाहुनडाँगी के किसान रबि नेपाल ने एक ही जमीन पर 27 प्रकार की नगदे फसलें लगाकर आधुनिक मिश्रित खेती के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। पिछले 13 वर्षों से व्यावसायिक कृषि में लगे नेपाल ने 12 बीघा जमीन के हर कोने को उत्पादन से जोड़ते हुए मिश्रित नमूना खेती की है। चाय की खेती से कृषि यात्रा शुरू करने वाले नेपाल अब एक ही जमीन में चाय, रबर, अगरुद, आंवला, कटहर, तेजपत्ता समेत दर्जनों नगदे फसलें एक साथ उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले चरण में चाय रोपाई की और चाय के बगान के भीतर मिश्रित नगदे फसलें उगाई हैं। चाय तीन वर्ष, आंवला पाँच वर्ष, कटहर चार वर्ष, रबर पांचवें वर्ष और तेजपत्ता तीसरे वर्ष से उत्पादन दे रहे हैं।

‘शुरुआत में निवेश और मेहनत अधिक होती है, खनिजोत से लेकर गोदमेल और पौधों को विकसित करने में समय लगता है’, उन्होंने कहा, ‘तीन साल बाद उत्पादन मिलने लगता है और सात वर्ष तक सभी फसलें आय देने लगती हैं।’ उनके अनुसार फिलहाल बगान में 27 प्रकार की नगदे फसलें हैं। औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन, मोरिंगा, रुद्राक्ष से लेकर दैनिक भोजन में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी और नींबू तक उत्पादन दे रहे हैं।

उनकी खेती की शैली नई और आकर्षक है। बड़े सुपारी बगान के भीतर मिर्च की लहलहाती फसल लगी है। मिर्च की लहरें सुपारी के पेड़ों पर आश्रित होकर फल रही हैं। हाल ही में उन्होंने चाय के बगान के भीतर एक नए प्रयोग के रूप में नारियल की खेती शुरू की है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने चाय के बगान में दो-दो पौधे हटाकर नारियल के पौधे लगाए। ‘चाय के बगान के अंदर सहायक फसल के रूप में नारियल की खेती यह पहला परीक्षण है। इससे झापा के कृषि पर्यटन और उत्पादन में नया आयाम जुड़ने की उम्मीद है’, उन्होंने कहा।

बाहुनडाँगी क्षेत्र के किसान हाथी, चीता, बन्दर सहित जंगली वन्यजीवों से प्रभावित हैं। चाय और नारियल जैसी फसलों को हाथी और बंदर से खास नुकसान नहीं होता, इसलिए किसान इन्हें वैकल्पिक खेती के रूप में उपयोग कर रहे हैं, नेपाल ने बताया। मिट्टी की जांच में पूर्व-पश्चिम राजमार्ग के बाहुनगाँडी, शनिश्चरे, बुधवारि क्षेत्र में नारियल की खेती उपयुक्त पाई गई है। एक नारियल के पेड़ से वार्षिक 17 से 18 हजार रुपये तक की आमदनी होती है, उनका कहना है। उन्होंने पिछले साल से सुपारी के बगान के भीतर नारियल लगाने शुरू किए हैं। ‘एक हजार पौधे लगाने की योजना है, पिछले साल 300 पौधे लगाए, इस साल 700 लगाऊंगा’, नेपाल ने कहा।

नारियल के पानी की बिक्री कच्चे फल की बिक्री की तुलना में ज्यादा होती है, इसलिए बाजार की कमी नहीं होगी, उन्होंने बताया। नारियल के पानी की मांग बाजार में बढ़ती जा रही है।

उनके 13 वर्षों के मिश्रित खेती के अनुभव के अनुसार नगदे फसलों के उत्पादन में बाजार की कोई समस्या नहीं है। सुपारी और तेजपत्ता सीधे बागानों से बिकते हैं और झापा में चाय व रबर के प्रसंस्करण के पर्याप्त उद्योग स्थापित हो चुके हैं। ‘बाजार खोजने और पहचानने में ध्यान देना जरूरी है, खेत में उत्पादन कर घर पर बैठे रहने भर से काम नहीं चलेगा’, नेपाल ने कहा, ‘एक बीघा जमीन पर व्यवस्थित मिश्रित खेती करने पर सालाना 8 से 9 लाख रुपये आसानी से कमा सकते हैं।’

अपनी मिट्टी में पसीना बहाने से पैसा कमाना है तो यूरोप या अमेरिका भागने की जरूरत नहीं, यह उनका सफल कृषि कार्य का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि युवाओं को मिश्रित खेती के प्रति आकर्षित करने के लिए सरकार को प्रोत्साहन नीति और कार्यक्रम लाना चाहिए। ‘जो तीन महीने में कमाना चाहते हैं उन्हें सब्जी, छह महीने में जो चाहते हैं उन्हें अनाज, और जो एक साल इंतजार कर सकते हैं उन्हें जड़ी-बूटी ठीक है’, उन्होंने खेती से आय के बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘लेकिन, तीन-चार वर्षों का धैर्य रखकर जो मिश्रित खेती करेगा उसे यह 50 साल तक लगातार आय देती रहेगी।’

क्वांटम भौतिकी में एक साथ भूलने और याद रखने वाली ‘क्वांटम प्रणाली’ के रहस्य की खोज

फिनलैंड के तुरकु विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने क्वांटम प्रणालियों में एक ही समय में अतीत को भूलने और गुप्त रूप से याद रखने की क्षमता पाई है। श्रोडिंजर और हाईजेनबर्ग के सिद्धांतों को नए दृष्टिकोण से समझाते हुए क्वांटम स्मृति की बहुआयामी प्रकृति का खुलासा किया गया है। प्रोफेसर जिर्की पीइलो के अनुसार इस नई समझ का क्वांटम कंप्यूटिंग और सूचना प्रौद्योगिकी पर बड़ा प्रभाव पड़ने की उम्मीद की जा रही है। १ वैशाख, काठमांडू।

फिनलैंड के तुरकु विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने क्वांटम प्रणालियों की स्मृति पर एक नया और चमत्कारिक तथ्य खोजा है। ‘पीआरएक्स क्वांटम’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध से पता चलता है कि क्वांटम सिस्टम अपने अतीत को एक साथ भूलने और अत्यंत गुप्त रूप से याद रखने की क्षमता रखते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी क्वांटम प्रणाली में स्मरणशक्ति है या नहीं, यह देखने का तरीका अहम होता है। इसका अर्थ है कि एक नजरिए से जो सिस्टम स्मृति विहीन लगता है, उसे दूसरे पहलू से देखने पर वे यादें स्पष्ट हो सकती हैं।

यह खोज क्वांटम मेकैनिक्स के दो मुख्य ऐतिहासिक सिद्धांतों, श्रोडिंजर और हाईजेनबर्ग की विधियों को नए तरीके से समझाती है। श्रोडिंजर की पद्धति समय के अनुसार क्वांटम अवस्था में होने वाले परिवर्तनों का अवलोकन करती है, जबकि हाईजेनबर्ग की पद्धति मापन योग्य गुणों पर केंद्रित होती है। शोधकर्ता दल ने दिखाया कि ये दोनों दृष्टिकोण पूरक होने के बावजूद स्मरणशक्ति की व्याख्या में अलग-अलग परिणाम देते हैं। कुछ स्मृति प्रभाव केवल क्वांटम अवस्थाओं के विश्लेषण से प्रकट होते हैं जबकि कुछ मापन योग्य गुणों के माध्यम से। इससे स्पष्ट होता है कि क्वांटम प्रणालियां अपनी पुरानी सूचनाओं को सभी दृष्टियों से छिपाकर रख सकती हैं।

इस वैज्ञानिक सफलता के भविष्य की क्वांटम तकनीकों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। प्रोफेसर जिर्की पीइलो ने कहा कि क्वांटम उपकरणों में बाहरी पर्यावरण से आने वाले अवरोध या ‘शोर’ को नियंत्रित करने और उनके प्रभावों को तकनीक के लाभ में बदलने के लिए यह नई समझ अत्यंत आवश्यक है। यह क्वांटम कंप्यूटिंग और सूचना प्रौद्योगिकी के नए आयाम खोलेगा और ब्रह्मांड के सूक्ष्म कणों की कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेगा। क्वांटम स्मृति की बहुआयामी प्रकृति सशक्त और प्रासंगिक क्वांटम उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

डोनाल्ड ट्रम्प ने जीसस क्राइस्ट जैसा दिखने वाली अपनी तस्वीर क्यों हटाई

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने ‘ट्रूथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर जीसस क्राइस्ट जैसा दिखने वाली तस्वीर पोस्ट करने के बाद तीव्र आलोचना का सामना किया है। एआई तकनीक द्वारा बनाई गई इस तस्वीर में ट्रम्प अस्पताल के बिस्तर पर एक मरीज के रूप में उपचार लेते दिखाए गए हैं।

ट्रम्प ने पोप लियो चतुर्थ की कड़ी निंदा करते हुए एक लंबा पोस्ट प्रकाशित किया और कुछ ही घंटों में ‘ट्रूथ सोशल’ पर जीसस जैसा दिखने वाली अपनी तस्वीर साझा की। बाद में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने चिकित्सक के रूप में प्रस्तुत होना चाहा था। बीबीसी की पत्रकार सेरा स्मिथ ने इस वीडियो में ट्रम्प और पोप के बीच के विवाद तथा इस घटना में ट्रम्प के समर्थकों की प्रतिक्रियाओं की जानकारी दी है।

नयाँ सरकारलाई माटोमा कार्बन बढाउने चुनौती – Online Khabar

नई सरकार मृदा में कार्बन वृद्धि की चुनौती का सामना कर रही है

नई सरकार ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए तीन महीने के भीतर मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने की योजना प्रस्तुत की है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड मृदा की स्थिति की जानकारी और सुधार संबंधी सुझाव प्रदान करेगा। नेपाल ने मृदा में कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए नीतियाँ और कार्यक्रम लागू कर सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास शुरू किया है। हाल ही में सम्पन्न चुनाव के बाद बनी नई सरकार को जनता से उच्च उम्मीदें प्राप्त हुई हैं। लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ आए इस सरकार पर प्रभावी कार्य करने की जिम्मेदारी और भी अधिक है।

सरकार ने हाल ही में 100 सरकारी सुधार कार्यसूची जारी कर अपनी प्राथमिकताएं प्रस्तुत की हैं। कृषि, भूमि, आधारभूत संरचना और सेवा विकास से संबंधित कार्यसूची में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए उठाए जाने वाले प्रमुख कदमों में मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण को भी उच्च प्राथमिकता दी गई है। विकास का मूल आधार उत्पादन और उत्पादकता वृद्धि ही है, जो सीधे मृदा से जुड़ा विषय है। इसके लिए मृदा में कार्बन की मात्रा बढ़ाना आवश्यक है।

सरकार द्वारा प्रकाशित 100 कार्यसूची में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए शामिल तीन महत्वपूर्ण कार्यों में अंतिम बिंदु में व्यवसायिक कृषि फार्म संचालित करने वाले किसानों को तीन महीनों के भीतर मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने की व्यवस्था पूरी करने का उल्लेख है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड मृदा की स्थिति की जानकारी देगा, जिसमें मृदा में उपस्थित कार्बन सहित पोषक तत्व और अन्य मृदा स्वास्थ्य सूचकांक शामिल होंगे। मृदा में कार्बन की मात्रा मृदा गुणवत्ता का महत्वपूर्ण सूचक है और यह उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नेपाल को वर्ष 2087 तक सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करना है। सतत विकास के 17 लक्ष्यों में से 9 सीधे मृदा से संबंधित हैं। स्वस्थ मृदा में कार्बन पदार्थ की मात्रा 4 प्रतिशत से अधिक होती है, जबकि नेपाल की कृषि भूमि में आमतौर पर यह मात्रा 2 प्रतिशत या इससे कम पाई जाती है। सरकार को कार्बन मात्रा बढ़ाने वाले कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देना होगा। मृदा में कार्बन वृद्धि एक साथ संभव नहीं है, मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित तरीके से कार्यक्रम संचालित करना आवश्यक होगा।

मर्स्याङ्दी ड्याममा नुहाउने क्रममा एक पुरुष बेपत्ता

तनहुँको आँबुखैरनी गाउँपालिका–१ बरादीस्थित मर्स्याङ्दी नदीको ड्याममा नुहाउने क्रममा एक पुरुष बेपत्ता भएका छन्। सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल र जिल्ला प्रहरी कार्यालय तनहुँले बेपत्ता व्यक्ति खोजी कार्य जारी राखेका छन्। जिल्ला प्रहरी कार्यालय तनहुँका प्रहरी नायब उपरीक्षक श्रवणकुमार विकले हालसम्म बेपत्ता व्यक्ति फेला नपरेको जानकारी दिएका छन्।

१ वैशाख, तनहुँ। तनहुँको आँबुखैरनी गाउँपालिका–१ बरादीस्थित अकला मन्दिर नजिकै रहेको मर्स्याङ्दी नदीको ड्याममा नुहाउने क्रममा एक जना पुरुष बेपत्ता भएका छन्। स्थानीय तहका अनुसार ती पुरुषलाई टिका मगर (ढल्के) भनेर चिनिन्छ। जिल्ला प्रहरी कार्यालय तनहुँका अनुसार उनी नुहाउने क्रममा बेपत्ता भएका हुन्। घटनापछि सशस्त्र प्रहरी बल नेपालको टोली तुरुन्तै खोजी कार्यमा खटिएको छ। भानुस्थित सशस्त्र प्रहरीको टोलीले आज पनि निरन्तर खोजी जारी राखिरहेको छ। जिल्ला प्रहरी कार्यालय तनहुँका प्रहरी नायब उपरीक्षक श्रवणकुमार विकले भनेका छन् कि अहिलेसम्म कुनै पनि साक्ष्य वा बेपत्ता व्यक्ति फेला परेका छैनन्। घटनासम्बन्धी थप विवरण आउन बाँकी रहेको प्रहरीले जानकारी दिएको छ।

‘पांच वर्षों में २५ प्रतिशत नए सिविल सेवा कर्मियों की भर्ती की प्रतिबद्धता’

सरकार ने आगामी पांच वर्षों के भीतर सरकारी सेवाओं में २५ प्रतिशत नए और दक्ष जनशक्ति भर्ती करने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का मसौदा सार्वजनिक किया है। इसमें सिविल सेवा में स्पष्ट कार्य प्रदर्शन सूचकांक, मूल्यांकन, पदोन्नति और व्यावसायिक विकास के नियमों समेत विधि जारी करने की व्यवस्था शामिल है। सेवाग्रहियों को सरकारी कार्यालयों में दौड़ते रहने की बाध्यता समाप्त की जाएगी, अनावश्यक समस्याओं को खत्म किया जाएगा और सार्वजनिक सेवा प्रवाह में टाइम कार्ड प्रणाली लागू करने का वादा किया गया है।

१ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने आगामी पांच वर्षों के भीतर सरकारी सेवाओं में २५ प्रतिशत नए और सक्षम जनशक्ति को भर्ती करने के कार्य को राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के रूप में आगे बढ़ाया है। हाल ही सम्पन्न चुनावों के बाद राष्ट्रीय दलों के घोषणापत्रों में शामिल शासकीय सुधारों के लिए प्रस्तुत मसौदे में सिविल सेवा में २५ प्रतिशत नए कर्मियों को जोड़ने की प्रतिबद्धता दर्ज है।

परिणाममुखी प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट कार्य प्रदर्शन सूचकांक, मूल्यांकन, पदोन्नति और व्यावसायिक विकास के प्रावधानों सहित सिविल सेवा संबंधित कानून शुरू किए जाने का उल्लेख मसौदे में है। कर्मचारी भत्तों सहित अन्य गैर-जरूरी अतिरिक्त सुविधाओं के स्थान पर मूल वेतन को उचित, नियमित और समयानुसार समायोजित कर लागू किया जाएगा।

सेवाग्रहियों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की बाध्यता हटाई जाएगी, मध्यस्थों और कर्मचारियों से सीधे मिलने के डर को कम किया जाएगा, तथा अनावश्यक झंझटों को समाप्त करने का भी संकल्प किया गया है। राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के मसौदा प्रतिवेदन में कहा गया है, ‘प्रक्रियाओं की समीक्षा कर पारंपरिक व जटिल स्तरीय टिप्पणियों और कागज आधारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। सार्वजनिक सेवा प्रवाह में टाइम कार्ड लागू किया जाएगा।’

वालेन्द्र शाह: सभी दलों के चुनावी घोषणापत्र को मिलाकर ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धता’ तैयार करने की कोशिश कर रही सरकार

प्रधानमन्त्री वालेन्द्र शाह

तस्बिर स्रोत, EPA

सरकार के मुख्य सचिव ने बताया कि सभी राष्ट्रीय दलों के चुनावी घोषणापत्रों पर आधारित ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धता’ के अंतिम स्वरूप को तैयार करते हुए घोषणापत्रों में विद्यमान विरोधाभासी मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।

वालेन्द्र शाह (बालेन) के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल ही में जारी किए गए प्रशासनिक सुधारों के सौ-बिंदु कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धता’ तैयार करने तथा इसे वार्षिक नीति, बजट और सुधार एजेंडों से जोड़ने की योजना कही गई थी।

इसी आधार पर प्रधानमंत्री और मन्त्रिपरिषद कार्यालय ने सोमवार को एक मसौदा तैयार कर सभी दलों से सुझाव मांगे हैं। यह मसौदा संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी दलों के वायदे/प्रतिज्ञा पत्रों के आधार पर बनाया गया है।

“सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों की समीक्षा कर के राष्ट्र के साझा विषयों में सबकी सहमति सुनिश्चित करना उद्देश्य है, मसौदा भी उसी के अनुसार तैयार किया गया है,” मुख्य सचिव सुमनराज अर्याल ने कहा।

“अब हम दलों से सुझाव प्राप्त करेंगे, उनका विश्लेषण कर के दलों के साथ बैठकर दस्तावेज को अंतिम रूप देंगे। इसका प्रतिबिंब सरकार की नीतियों में दिखेगा।”

जिग्री र काकुबीच सहकार्य पक्का, दुवै मिलेर फिल्म ‘चिरञ्जीवी भवः’ बनाउने

जिग्री और काकु ने मिलकर फिल्म ‘चिरंजीवी भवः’ बनाने का किया संकल्प

कुमार कट्टेल ‘जिग्री ब्रो’ और दीपकप्रसाद आचार्य ‘काकु’ के बीच फिर से सहयोग करने की पुष्टि हुई है, जिससे उनकी आगामी फिल्म ‘चिरंजीवी भवः’ का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। फिल्म की पटकथा अंतिम ड्राफ्ट में है और लगभग डेढ़ से दो महीनों के भीतर फिल्मांकन की तैयारी शुरू होने की जानकारी कुमार ने दी। यह फिल्म दो पीढ़ियों के बीच के रिश्ते को दर्शाने वाला सामाजिक ड्रामा होगा। काकु इसका निर्देशन करेंगे जबकि जिग्री कहानी लेखन की ज़िम्मेदारी संभालेंगे।

काठमांडू। टीवी श्रृंखलाओं के लोकप्रिय कलाकार कुमार कट्टेल ‘जिग्री ब्रो’ और दीपकप्रसाद आचार्य ‘काकु’ के बीच पुनः सहकार्य निश्चित हो गया है। ‘सक्किगो नि’ सीरियल के अन्त होने के बाद दोनों ने अलग-अलग फिल्में निर्देशित की थीं। काकु द्वारा निर्देशित ‘परान’ २०८२ साल की सबसे अधिक आमदनी वाली फिल्म साबित हुई, जबकि जिग्री ब्रो की ‘लाज शरणम्’ ने भी अपनी कमाई से अच्छा प्रदर्शन किया।

फिल्म निर्देशन में अलग नजर आने वाले ये दोनों कलाकार फिर से साथ आने जा रहे हैं। उनकी इस साझा फिल्म ‘चिरंजीवी भवः’ की घोषणा नए वर्ष २०८३ के मौके पर सोशल मीडिया के माध्यम से की गई। वर्तमान में स्क्रिप्ट अंतिम ड्राफ्ट में है और आगामी डेढ़ से दो महीनों में फिल्मांकन की तैयारी शुरू हो जाएगी, यह जानकारी कुमार ने दी।

यह फिल्म दो पीढ़ियों के बीच की अंतर्मुखी कहानी को प्रदर्शित करेगी। कुमार ने कहा, ‘यह वर्तमान समय की कहानी है। दो पीढ़ियों के बीच क्या खो गया है, क्या गुम है और किन बातों की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, ये सब इस कहानी में उभर कर सामने आएगा।’ यह दोनों कलाकारों की दूसरी निर्देशन परियोजना होगी। काकु निर्देशन संभालेंगे, जबकि जिग्री कथा लेखन में योगदान देंगे। जिग्री ने आगे कहा, ‘बीच में हम भले अलग दिखे हों, लेकिन हम साथ ही थे।’

उनके अनुसार यह फिल्म सामाजिक नाटक (सोशल ड्रामा) के जनरर में बनेगी। फिलहाल निर्माता और कलाकार चयन प्रक्रिया जारी नहीं है। केवल वही कलाकार कास्ट किए जाएंगे जो पटकथा के मुताबिक न्यायोचित हों। जिग्री ब्रो और काकु पिछले ८ वर्षों से ‘भद्रगोल’, ‘सक्किगो नि’ सहित कई टीवी सीरियल्स में साथ काम कर रहे हैं।

माइक्रोसॉफ्ट ने कंप्यूटर में हमेशा सक्रिय रहने वाले एजेंट का परीक्षण शुरू किया

माइक्रोसॉफ्ट अपनी ‘माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट’ में ‘ओपन-क्ला’ जैसे हमेशा सक्रिय रहने वाले एजेंट सुविधा को जोड़ने की तैयारी कर रहा है। यह नया फीचर खासतौर पर कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए लक्षित है और यह क्लाउड तथा लोकल दोनों वातावरणों में संचालित होने की संभावना रखता है। कंपनी ने इस तकनीक को आगामी जून में आयोजित ‘बिल्ड कॉन्फ्रेंस’ में सार्वजनिक करने की योजना बनाई है।

माइक्रोसॉफ्ट ‘माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट’ में ‘ओपन-क्ला’ जैसी सुविधाएँ जोड़ रहा है। ‘द इन्फॉर्मेशन’ के अनुसार, यह नया फीचर मुख्य रूप से कॉर्पोरेट उपयोगकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है और ओपन सोर्स के मुकाबले अधिक सुरक्षा प्रदान करेगा। ‘ओपन-क्ला’ एक ऐसा उपकरण है जो उपयोगकर्ता के कंप्यूटर पर रहकर मनुष्यों की ओर से विभिन्न कार्य स्वतः संपन्न कर सकता है। माइक्रोसॉफ्ट भी इसी प्रकार का एजेंट विकसित कर रहा है, जो जटिल और बहुआयामी कार्यों को लंबे समय तक संभालने में सक्षम होगा।

वर्तमान में परीक्षणाधीन इस तकनीक की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं: एक हमेशा सक्रिय रहने वाला एजेंट, जो केवल उपयोगकर्ता के आदेश का इंतजार नहीं करेगा बल्कि स्वयं पहल करेगा। क्लाउड और लोकल दोनों में चलने की संभावना वाले इस नए फीचर में उपयोगकर्ता का एजेंट उसके अपने कंप्यूटर (लोकल) पर चलेगा या क्लाउड में, यह अभी निश्चित नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट ने एंथ्रोपिक के ‘क्लोड’ मॉडल के साथ सहयोग करते हुए अपने कुछ एजेंटों को शक्ति देने के लिए इस मॉडल का उपयोग कर रहा है।

‘द वर्ज’ के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट इस नई तकनीक को आगामी जून में ‘बिल्ड कॉन्फ्रेंस’ में प्रस्तुत करने की संभावना जता चुका है। वर्तमान में ‘ओपन-क्ला’ उपयोग करने वालों में ‘मैकिन्टॉस मिनी’ डेस्कटॉप बहुत लोकप्रिय है। इसलिए माइक्रोसॉफ्ट विशेष रूप से अपने विंडोज उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखते हुए यह नई सुविधा लेकर आ रहा है। कंपनी इस नए एजेंट की सुरक्षा और क्षमताओं के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान करेगी।

सरकार ने सहकारी के माध्यम से रोजगार सृजन के लिए 18 बिंदुओं वाला प्रतिबद्धता पत्र का मसौदा तैयार किया

सरकार ने 18 बिंदुओं वाला राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पत्र का मसौदा तैयार किया है, जिसमें सहकारी के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार सृजित करने का उल्लेख है। सरकार ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र को नेपाल राष्ट्र बैंक के सीधे और सशक्त सुपरिवेक्षण प्रणाली के अंतर्गत लाने का प्रतिबद्धता व्यक्त की है। सहकारी बचतकर्ताओं की आय की सुरक्षा हेतु एकीकृत बचत सुरक्षा कोष स्थापित किया जाएगा, जिससे संकटग्रस्त संस्थाओं के बचतकर्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। 1 वैशाख, काठमांडू।

सहकारी के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार सृजित करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने 18 बिंदुओं वाला राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पत्र का मसौदा तैयार किया है। यह मसौदा प्रतिनिधि सभा में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी छह राष्ट्रीय दलों के घोषणापत्रों पर आधारित है। इस मसौदे को सार्वजनिक करते हुए सरकार ने सहकारी एवं लघुवित्त के अनियंत्रित और ढीले नियमन को समाप्त करके गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र को राष्ट्र बैंक की सशक्त और सीधे सुपरिवेक्षण प्रणाली में लाने की प्रतिबद्धता जताई है।

सहकारी और लघुवित्त को कर्जा सूचना केन्द्र से जोड़ा जाएगा तथा कर्जाएं केवल वास्तविक क्षमता के आधार पर दी जाएंगी। इसके साथ ही, उत्पादनशील, बिना धित्तो सामूहिक जमानी और स्थानीय कौशल आधारित उद्यमशीलता कर्जे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के अनुसार सहकारी संस्थाओं के नियमन और मानकों का निर्धारण संघ करेगा, जबकि प्रदेश और स्थानीय तह सहकारी संस्थाओं के पंजीकरण, अभिलेख और सुव्यवस्थित शासन प्रणाली को प्रभावी बनाएंगे।

सहकारी पंजीकरण, रिपोर्टिंग, निगरानी और सूचना प्रणाली को पूर्णतया डिजिटल किया जाएगा। साथ ही, सहकारी के व्यवसायीकरण, ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और ई-कॉमर्स के माध्यम से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। इसके साथ-साथ, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और सीमांतित समुदायों को लक्षित कर सहकारी के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार सृजित किया जाएगा।

टर्की के स्कूल में गोली चलाने से १६ घायल, हमलावर किशोर की मौत

समाचार सारांश

लेखकीय समीक्षा गरिसकिएको।

  • टर्की के सानलिउर्फा प्रांत के एक स्कूल में गोली चलाने वाले किशोर को सुरक्षा बलों ने नियंत्रण में लेने के दौरान मार गिराया।
  • इस घटना में कुल 16 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 10 छात्र, 4 शिक्षक, 1 पुलिसकर्मी और 1 कैफेटेरिया कर्मचारी शामिल हैं।
  • गवर्नर हसन सिल्डाक ने बताया कि किसी की मृत्यु नहीं हुई है और घायलों में से 4 का स्वास्थ्य मध्यम है।

टर्की के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सानलिउर्फा के एक स्कूल में अंधाधुंध गोली चलाने वाले किशोर की पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत हो गई।

सानलिउर्फा के गवर्नर हसन सिल्डाक के अनुसार सुरक्षा बलों ने उसे नियंत्रण में लेने का प्रयास किया, जिस दौरान विशेष ऑपरेशन में वह मारा गया।

इस हिंसक घटना में कुल 16 लोग घायल हुए हैं।

घायल व्यक्तियों में 10 छात्र, 4 शिक्षक, 1 पुलिस अधिकारी और 1 कैफेटेरिया कर्मचारी शामिल हैं।

गवर्नर के अनुसार किसी की जान नहीं गई है और सभी घायलों को तुरंत बचाया गया तथा पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अस्पताल में भर्ती घायलों में से 4 की हालत मध्यम है जबकि बाकी की स्थिति सामान्य है, अधिकारियों ने बताया।

पुलिस उस किशोर द्वारा स्कूल में गोली चलाने के उद्देश्य की जांच कर रही है।

टर्की के सरकारी टीवी चैनल TRT ने गवर्नर के हवाले से इस घटना का विस्तृत विवरण साझा किया है और बताया है कि सुरक्षा बलों के समय रहते हस्तक्षेप के कारण और बड़ी जनहानि नहीं हुई।

नेपाल को दक्षिण एशिया का खेलकुद केंद्र बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता

सरकार ने खेलकुद को राष्ट्रीय единता, मानव विकास और आर्थिक समृद्धि का आधार मानते हुए दक्षिण एशिया का खेलकुद केंद्र बनाने के लिए गंभीर प्रयास शुरू किए हैं। सरकार ने सातों प्रदेशों में अत्याधुनिक खेल अवसंरचना बनाने और त्रिभुवन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान का स्तरोन्नयन करने की योजना सार्वजनिक की है। साथ ही, खेल प्रशासन में राजनीतिक नियुक्तियां हटाकर पेशेवर नेतृत्व और पारदर्शी बजट प्रणाली लागू करने तथा महिलाओं और समावेशी खेलों को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई गई है। १ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने खेलकुद को प्राथमिकता देते हुए नेपाल को दक्षिण एशिया का खेलकुद केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य लिया है।

फागुन २१ को संपन्न प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद बने बालेन शाह नेतृत्व वाली सरकार ने शासकीय सुधार के तहत जारी एक सौ कार्यसूची के अनुसार खेलकुद को राष्ट्रीय एकता, मानव विकास और आर्थिक समृद्धि के आधार के रूप में विकसित करने की नीति बनाई है। इस कार्यसूची को चुनाव में भाग लेने वाले छह प्रमुख दलों के घोषणा पत्र और प्रतिबद्धताओं के आधार पर तैयार किया गया है। सरकार ने सातों प्रदेशों में अत्याधुनिक और पहुँच योग्य खेल अवसंरचना का निर्माण करने, अधूरे रंगशालाओं को समय पर पूरा करने और त्रिभुवन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्तरोन्नयन करने की योजना प्रस्तुत की है।

खेल प्रशासन में राजनीतिक नियुक्तियां हटाकर पेशागत नेतृत्व और पारदर्शी बजट प्रणाली लागू करने की नीति भी अपनाई गई है। विद्यालय स्तर से ही प्रतिभाओं की पहचान कर खेल को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाने और नियमित प्रतियोगिताओं के माध्यम से उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने साहसिक खेल, अल्ट्रा मैराथन समेत अन्य क्षेत्रों को राष्ट्रीय गौरव के रूप में बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने की योजना भी शुरू की है। इसके साथ ही नेपाल को साहसिक खेल पर्यटन का मुख्य गंतव्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

खेलों को पेशा बनाते हुए खिलाड़ियों को उचित पारिश्रमिक, नियमित लीग और समय पर पुरस्कार उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया जाएगा। साथ ही महिलाओं और समावेशी खेलकूद को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन कर खेल पर्यटन को बढ़ावा देने तथा ‘क्रिकेट कूटनीति’ के माध्यम से नेपाल की अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने के उद्देश्य को भी आगे रखा है।