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लेखक: space4knews

गूगल ने ‘जेमिनी एआई’ आधारित नया लैपटॉप ‘गूगलबुक’ लॉन्च करने की तैयारी शुरू की

गूगल 15 साल पुराने क्रोमबुक कॉन्सेप्ट को बदलने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम और क्रोमओएस की खासियतों को मिलाकर एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित लैपटॉप ‘गूगलबुक’ पेश किया है। यह केवल एक ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं, बल्कि जेमिनी एआई की शक्ति से लैस एक ‘इंटेलिजेंस सिस्टम’ है, जो उपयोगकर्ताओं के दैनिक कार्यों को स्वयं समझकर उन्हें आसान बनाएगा।

जेमिनी इंटेलिजेंस और मैजिक पॉइंटर गूगलबुक की सबसे बड़ी और खास विशेषताएं हैं, जो इसके कर्सर में दिखाई देंगी। गूगल डीपमाइंड टीम के सहयोग से विकसित ‘मैजिक पॉइंटर’ माउस के कर्सर को एक एआई एजेंट में तब्दील कर देगा। स्क्रीन पर कर्सर हल्का सा मूव करते ही जेमिनी एआई सक्रिय हो जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि उपयोगकर्ता किसी ईमेल में दिए गए तारीख पर कर्सर लाते हैं, तो यह खुद ब खुद कैलेंडर में मीटिंग सेट करने का विकल्प देगा। इसी तरह, स्क्रीन पर अपने कमरे की फोटो और नए सोफे की फोटो का चयन करने पर ये दोनों एक साथ मिलाकर तुरंत कमरे में सोफा कैसा दिखेगा उसकी विज़ुअलाइज़ेशन करेगा।

सरल भाषा में विजेट बनाने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिसमें उपयोगकर्ता अपनी जरूरत के अनुसार सामान्य भाषा में विजेट का विवरण लिखकर कस्टमाइज्ड विजेट बना सकेंगे। जेमिनी इंटरनेट, जीमेल और कैलेंडर जैसे ऐप्स से जानकारी इकट्ठा कर एक डैशबोर्ड तैयार करेगा। उदाहरणतः यदि आप यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो जेमिनी होटल बुकिंग, फ्लाइट विवरण और यात्रा की तारीख का काउंटडाउन करते हुए खूबसूरत विजेट आपकी डेस्कटॉप स्क्रीन पर बना देगा।

चूंकि गूगलबुक एंड्रॉइड तकनीक पर आधारित है, यह फोन और लैपटॉप के बीच की दूरी कम करेगा। लैपटॉप पर काम करते समय अगर भूख लगे तो फोन का फूड डिलीवरी ऐप लैपटॉप स्क्रीन पर खोलकर ऑर्डर किया जा सकेगा। ‘क्विक एक्सेस’ फीचर फोन में मौजूद फाइलों को बिना ट्रांसफर किए सीधे लैपटॉप के फाइल ब्राउजर में देखने, खोजने और उपयोग करने देगा।

गूगल ने एसर, असूस, डेल, एचपी और लेनोवो जैसी विश्व प्रसिद्ध कंपनियों के साथ साझेदारी की है ताकि नए श्रेणी के लैपटॉप्स प्रीमियम सामग्री और बेहतरीन क्राफ्टमैनशिप के साथ बाजार में आ सकें। इन गूगलबुक्स के बाहरी कवर पर ‘ग्लोबार’ लाइट होगी, जो एआई सक्रिय होने पर आकर्षक चमक देगी और यह ना सिर्फ दृश्य रूप से बल्कि एआई इंटरैक्शन के लिए भी उपयोगी होगी। इस नई तकनीक के विस्तृत विवरण और पहले गूगलबुक लैपटॉप इस वर्ष के अंत तक बाजार में उपलब्ध होंगे।

नीति तो है, लेकिन कार्यान्वयन की कमी है

समाचार सारांश समीक्षा किए गए तथ्यों पर आधारित है। नेपाल ने 2012 में क्लाइमेट बजट टैगिंग प्रणाली लागू कर जलवायु वित्त प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभाई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर इस प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन न होने के कारण जलवायु वित्त की निगरानी और रिपोर्टिंग कमजोर है। नेपाल को जलवायु वित्त के प्रभावी अनुगमन और पारदर्शिता सुनिश्चित कर अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से और अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त करनी होगी। नेपाल को अक्सर दूरदर्शी जलवायु नीति वाले देशों में गिना जाता है। विश्व मंच पर जलवायु वित्त पर मजबूत आवाज बुलंद करते हुए नेपाल समुदाय की उत्तरजीविता बढ़ाने और अनुकूलन क्षमता सुदृढ़ करने के लिए अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त की मांग करता रहा है।

विश्व के जलवायु जोखिम वाले शीर्ष 10 देशों में शामिल होने के साथ ही नेपाल 2012 में ‘क्लाइमेट बजट टैगिंग’ (CBT) लागू करने वाला पहला देश है। यह प्रणाली जलवायु परिवर्तन से जुड़े सार्वजनिक व्यय को वर्गीकृत एवं निगरानी के लिए बनाई गई है। अर्थ मंत्रालय इसका संचालन करता है। यह प्रणाली गतिविधि स्तर से अधिक परियोजना स्तर पर लागू की जाती है। इसके तहत राष्ट्रीय स्तर के परियोजनाओं को जलवायु कार्यों में योगदान के आधार पर प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या तटस्थ माना जाता है। फिर इन्हें अनुकूलन, न्यूनीकरण या मिश्रित लाभ के क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है। जलवायु वित्त प्रबंधन और निगरानी को सशक्त करने के लिए अर्थ मंत्रालय ने 2017 में ‘क्लाइमेट चेंज फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क’ (CCFF) भी मंजूर किया है।

नेपाल की जलवायु परिवर्तन नीति, राष्ट्रीय अनुकूलन योजना (NAP) और राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) ने जलवायु उत्तरजीविता और कम-कार्बन उत्सर्जन के प्रति विकास प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। सरकार ने स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण सुनिश्चित करने के लिए ‘लोकल अडाप्टेशन प्लान ऑफ एक्शन’ (LAPA) मॉडल को भी बढ़ावा दिया है। साथ ही कुल जलवायु वित्त के 80 प्रतिशत स्थानीय स्तर पर पहुँचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। कागज पर ये नीतियां, प्रणालियां और संरचनाएं प्रभावशाली लगती हैं और विश्व स्तरीय प्रथाओं तथा संस्थागत सोच पर आधारित हैं। परन्तु वास्तविकता अलग है। मौजूद प्रणाली अस्तित्व में है, लेकिन स्थानीय सरकार के अधिकारियों के साथ बातचीत में निष्कर्ष यही मिला कि जलवायु बजट टैगिंग तो है, लेकिन व्यवहार में इसका उपयोग बहुत कम होता है।

अधिकांश स्थानों पर अधिकारी इस विषय में अवगत नहीं हैं या इसे प्रभावी रूप से लागू करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण नहीं प्राप्त कर पाए हैं। स्थानीय योजना और बजट प्रक्रियाओं में CBT को शामिल करने के संस्थागत प्रयास सीमित हैं। इसका मतलब यह नहीं कि जलवायु-संबंधी कार्य नहीं हो रहे हैं। नगरपालिका स्तर पर ऊर्जा, कृषि, वन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नियमित बजट आवंटित हो रहा है। लेकिन इन्हें व्यवस्थित रूप से जलवायु वित्त के तहत टैग, मॉनिटर या रिपोर्ट नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप जलवायु-संबंधी बड़े निवेश औपचारिक प्रणाली के बाहर रहते हैं। उदाहरण के तौर पर देवचुली और गैँडाकोट नगरपालिकाओं के बजट का प्रारंभिक विश्लेषण करने पर पाया गया कि वार्षिक बजट का लगभग 10 से 15 प्रतिशत खर्च जलवायु-संबंधी माना जा सकता है, लेकिन टैगिंग न होने के कारण ये आंकड़े रिपोर्टिंग प्रणाली में सम्मिलित नहीं हैं।

स्थानीय अधिकारी स्वयं इस कमी को स्वीकार करते हैं। एक नगरपालिका के अधिकारी ने कहा, ‘काम तो हो रहा है, अब समझ में आ रहा है कि ये जलवायु-संबंधित हैं। लेकिन अब तक इन्हें जलवायु हस्तक्षेप के रूप में अभिलेखित नहीं किया गया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम सहभागी प्रक्रियाओं द्वारा वार्षिक योजना बनाते हैं, लेकिन मेरी जानकारी में जलवायु टैगिंग का कोई उपयोग नहीं हुआ है।’ वैश्विक स्तर पर जलवायु वित्त विस्तार के दौर में नेपाल को संसाधन न मिलने का जोखिम है। ऐसा इसलिए नहीं कि पैसा उपलब्ध नहीं है, बल्कि इसका उपयोग दर्शाने वाले तंत्र का पूरी तरह से संचालित न होना समस्या है। यह दर्शाता है कि स्थानीय तह के कई कर्मचारी जलवायु वित्त तंत्र से अनजान हैं या जलवायु बजट निर्माण, रिपोर्टिंग और निगरानी के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमता नहीं रखते।

योजना शाखा के अधिकारियों के अनुसार, योजना प्रक्रिया शुरू होने से पहले आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाए तो CBT को शामिल किया जा सकता है। निगरानी क्यों महत्वपूर्ण है? शुरू में यह समस्या तकनीकी लग सकती है, लेकिन प्रभाव बहुत गहरा होता है। उचित निगरानी के बिना यह स्पष्ट नहीं होता कि नेपाल जलवायु क्षेत्र में कितना निवेश कर रहा है। ऐसे निवेश कितने प्रभावी हैं, यह मापना भी कठिन होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से और अधिक जलवायु वित्त आकर्षित करने के अवसर कमजोर हो सकते हैं। विश्वव्यापी जलवायु वित्त प्रणाली आज पारदर्शिता, प्रदर्शन और जवाबदेही के आधार पर चल रही है। ‘ग्रीन क्लाइमेट फंड’ (GCF), ‘ग्लोबल एनवायरनमेंट फॅसिलिटी’ (GEF) और ‘एडाप्टेशन फंड’ जैसे कोष नेपाल जैसे जोखिम वाले देशों से केवल प्रतिबद्धताएं नहीं, बल्कि मापन योग्य परिणाम भी मांगते हैं। अगर नेपाल यह स्पष्ट नहीं कर पाता कि जलवायु वित्त कहां और कैसे खर्च हो रहा है, तो ये अवसर खो सकते हैं।

समान पहुंच का प्रश्न: जलवायु वित्त किसे मिल रहा है? नेपाल की जलवायु नीतियां गरीब परिवारों, महिलाओं, सीमान्तकृत समुदायों और जलवायु जोखिम वाले क्षेत्रों के निवासियों को प्राथमिकता देने की बात निरंतर दोहराती हैं। लेकिन खर्च का स्पष्ट अभिलेख न होने से यह सुनिश्चित करना कठिन होता है कि ये समुदाय वास्तव में लाभान्वित हो रहे हैं या नहीं। मुख्य सवाल यही है: क्या जलवायु वित्त सबसे जोखिमग्रस्त समुदायों तक पहुंच रहा है? वर्तमान स्थिति से ऐसा लगता है कि अधिक संसाधन सशक्त या प्रभावशाली समुदायों को मिलते हैं, जबकि दूरदराज के जोखिमग्रस्त क्षेत्र छूट सकते हैं। निगरानी और प्राथमिकता निर्धारण के स्पष्ट तंत्र न होने के कारण समानता का लक्ष्य केवल नीति तक सीमित रह सकता है। योजना प्रक्रियाओं में जलवायु बजट टैगिंग के न होने से ये असंतुलन और बढ़ता है।

भविष्य की चुनौती: वैश्विक जलवायु कोष परिणाम आधारित वित्त, पारदर्शिता और जवाबदेही पर केंद्रित हो रहे हैं, ऐसे में नेपाल को इन स्रोतों का उपयोग करने के लिए अपनी क्षमता साबित करनी होगी। यही कारण है कि नेपाल एक द्विविधा में है। जलवायु वित्त की निगरानी के लिए नीति और संस्थागत व्यवस्था तो बनाई गई है, लेकिन व्यवहार में इन्हें प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है। जब दुनिया भर में जलवायु वित्त बढ़ रहा है, नेपाल के पास संसाधन न मिलने का खतरा है। ऐसा इसलिए नहीं कि पैसा नहीं है, बल्कि उपयोग दिखाने वाले तंत्र पूरी तरह से क्रियाशील नहीं हैं। स्थानीय सरकार जलवायु निवेश का प्रभाव और उपयोग नहीं दिखा पाती, जिससे विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से वित्तीय अवसरों का लाभ उठाना कठिन हो जाता है।

इसी बीच नेपाल में जलवायु वित्त सुशासन की एक और चुनौती बढ़ती अनुकूलन आवश्यकताओं और घरेलू वित्तीय क्षमता के असंतुलन की है। राष्ट्रीय अनुकूलन योजना (NAP) 2021/2050 ने जलवायु उत्तरजीविता को राष्ट्रीय प्राथमिकता माना है, लेकिन इसकी लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय जरूरतें बाहरी स्रोतों पर निर्भर हैं। GCF, एडाप्टेशन फंड, GEF, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दाता संस्थाएं इसके प्रमुख स्रोत हैं। लेकिन इन कोषों तक पहुंचने के लिए जलवायु बजट निगरानी, पारदर्शी रिपोर्टिंग और प्रभाव के प्रमाण आवश्यक हैं। खासकर प्रदेश और स्थानीय स्तर पर संस्थागत तथा तकनीकी क्षमताएं कमजोर दिखती हैं।

मजबूत शासन व्यवस्था, प्रभावी डेटा प्रणाली, स्थानीय क्षमता वृद्धि और संस्थागत समन्वय के माध्यम से नेपाल जलवायु वित्त की जरूरत और कार्यान्वयन के बीच का अंतर कम कर सकता है। इस अंतर को कैसे कम करें? इसके लिए सभी स्तरों पर जलवायु वित्त सुशासन, संस्थागत क्षमता और जवाबदेही प्रणालियों को मजबूत बनाना आवश्यक है। सबसे जरूरी कदम है स्थानीय योजना और बजट प्रक्रिया में जलवायु बजट टैगिंग को संस्थागत रूप देना। जलवायु संबंधित निवेश को केवल परियोजना स्तर पर ही नहीं, बल्कि गतिविधि स्तर पर भी टैगिंग करना होगा ताकि अनुकूलन और न्यूनीकरण में वास्तविक योगदान का मापन हो सके। इससे स्थानीय सरकार यह स्पष्ट दिखा सकेगी कि जलवायु वित्त कहां खर्च हो रहा है और इससे क्या उपलब्धियां मिली हैं। क्षमता विकास भी समान रूप से आवश्यक है। नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और स्थानीय एवं प्रदेश स्तर पर जलवायु-केंद्रित कर्मचारियों की नियुक्ति से योजना निर्माण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकती है।

साथ ही, सशक्त ‘मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन’ (MRV) प्रणाली का विकास जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय जलवायु कोष ऐसे निवेश से होने वाले जोखिम कम करने और उत्तरजीविता बढ़ाने के प्रमाण मांगते हैं। इसलिए डेटा प्रणाली, प्रभाव मूल्यांकन और अभिलेखीकरण प्रक्रियाओं को मजबूत करना आवश्यक है। संघीय, प्रदेश और स्थानीय सरकारों के बीच समन्वय और स्वामित्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल जलवायु वित्त की जिम्मेदारी विभिन्न निकायों में अलग-अलग है, जिससे दोहराव और कमजोर रिपोर्टिंग की समस्या उत्पन्न होती है। स्पष्ट भूमिकाओं के साथ नियमित विकास योजनाओं में जलवायु वित्त को शामिल करने से प्रणाली और प्रभावी हो सकती है।

निष्कर्ष: नेपाल ने जलवायु वित्त के लिए मजबूत नीतिगत संरचना बनाई है। अब इसका चुनौतीपूर्ण चरण है इसे प्रभावी ढंग से लागू करना। अंततः जलवायु वित्त केवल नीति या बजट का विषय नहीं है, बल्कि यह वह सहायता है जो सबसे जरूरतमंद समुदायों तक पहुंचनी चाहिए। यदि प्रणाली केवल कागजों तक सीमित रह गई तो जलवायु वित्त का वादा भी कागज तक सीमित रह जाएगा। लेकिन अगर ये प्रणालियां व्यवहार में उतार दी गईं तो ये समुदाय की उत्तरजीविता बढ़ाने वाला सशक्त माध्यम बन सकती हैं। इसलिए, मजबूत शासन व्यवस्था, प्रभावी डेटा प्रणाली, स्थानीय क्षमता विकास और संस्थागत समन्वय के माध्यम से नेपाल जलवायु वित्त की आवश्यकता और क्रियान्वयन के बीच का अंतर धीरे-धीरे खत्म कर सकता है। लेखक फॉरेस्ट एक्सन नेपाल में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संबंधी विषयों के शोधकर्ता हैं।

ट्रम्प और सी के दौर में ताइवान का भू-राजनीतिक महत्व

प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे स्थित ताइवान एक छोटा द्वीप राष्ट्र है। यह देश पाँच दशकों से अधिक समय से संयुक्त राज्य अमेरिका और जनवादी गणराज्य चीन के बीच भू-राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। सन् 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष माओ त्सेतुंग के बीच हुए समझौते से लेकर मई 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शिखर सम्मेलन तक, ताइवान दोनों महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक संवाद में सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दा रहा है।

1960 के दशक के अंत में चीन और सोवियत संघ के बीच वैचारिक मतभेद तीव्र हो गए थे। 1969 में हुई रक्तपातपूर्ण सैन्य झड़प ने अमेरिका को चीन के साथ वार्ता की मेज पर लाया। ताइवान का मुद्दा 1949 तक जाता है, जब च्यांग काई-शेक की राष्ट्रवादी सरकार ताइवान में शरण ले चुकी थी। अमेरिका ने ताइवान को वैध सरकार के रूप में मान्यता दी थी। माओ ने कहा था कि ताइवान के मुद्दे को सौ साल तक इंतजार किया जा सकता है, लेकिन सोवियत संघ के खतरे का सामना अभी करना जरूरी है।

1972 में निक्सन के चीन दौरे ने शीत युद्ध के कालीन मौन को तोड़ दिया। इस दौरे के बाद ताइवान ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी सदस्यता खो दी और बीजिंग को चीन का आधिकारिक प्रतिनिधि मानकर सुरक्षा परिषद में स्थायी स्थान दिया गया। ट्रम्प के कार्यकाल में ताइवान का महत्व और बढ़ गया, जब अमेरिका ने ताइवान के साथ अपने सम्बंधों को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया। ताइवान ने अपनी सुरक्षा बजट बढ़ाते हुए ‘असिमेट्रिक युद्धनीति’ अपनानी शुरू कर दी।

मई 2026 में ट्रम्प और शी के शिखर सम्मेलन में ताइवान को ‘अमेरिका-चीन संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा’ के रूप में केंद्र में रखा गया। शी ने चेतावनी दी कि यदि ताइवान के मुद्दे को सावधानीपूर्वक प्रबंधित नहीं किया गया तो संघर्ष फैल सकता है। ताइवान की सुरक्षा अमेरिका के लिए केवल लोकतंत्र की रक्षा नहीं, बल्कि आर्थिक और सैन्य प्रभुत्व का भी प्रश्न बन गई है। ताइवान को एक विशेष भू-राजनीतिक ‘फ्लैशपॉइंट’ के रूप में माना जाता है।

अमेरिकाविरुद्ध ओपनिङ जोडीको कमाल – Online Khabar

नेपाल की ओपनिंग जोड़ी ने अमेरिका के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया

पुरानी जोड़ी को फिर से ओपनिंग पर उतारकर नेपाल ने अमेरिका के खिलाफ मैच में कुशल–आसिफ जोड़ी की मजबूती दिखाई। आईसीसी विश्व कप क्रिकेट लीग-2 के तहत नेपाल ने अमेरिका की टीम को 37 ओवर में 196 रनों का लक्ष्य पूरा कर शानदार जीत हासिल की। कुशल भुर्तेल ने 120 गेंदों में 120 रन की नाबाद शतकीय पारी खेली जबकि आसिफ शेख ने 58 रन बनाकर आउट हुए। दीपेन्द्रसिंह ऐरी ने 7 ओवर 3 गेंदों में 4 विकेट लेकर अमेरिका की गेंदबाजी पर दबाव बनाया। (2 जेठ, काठमाडौं)

शनिवार के मैच में आईसीसी विश्व कप क्रिकेट लीग-2 के तहत नेपाल ने अमेरिका के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन कर जीत दर्ज की। मजबूत दिख रही अमेरिका के खिलाफ नेपाल ने मजबूती से खेला। अमेरिका के खिलाफ जीत में नेपाल की टॉप ऑर्डर बल्लेबाजी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे समय से कमजोर चल रही टॉप ऑर्डर ने शनिवार को विश्वास और उम्मीद जगाने वाला प्रदर्शन किया। नेपाल नई प्रतिभाओं को भी अवसर दे रहा है।

कुछ दिन पहले संपन्न नेपाल-ओमान-यूएई श्रृंखला में पहले दो मैचों में आसिफ शेख और कुशल भुर्तेल ने ओपनिंग की थी लेकिन शुरुआत खराब रही। तीसरे मैच में ओपनिंग जोड़ी में बदलाव किया गया। यूएई के खिलाफ विनोद भंडारी और अर्जुन कुमाल ने ओपनिंग की और 25 रन पर पहली विकेट गवाई। चौथे मैच में भी विनोद और आसिफ ने ओपनिंग की। वर्तमान श्रृंखला के पहले मैच स्कॉटलैंड के खिलाफ विनोद और आसिफ ने ओपनिंग की लेकिन सफल नहीं रहे।

अमेरिका के खिलाफ दूसरे मैच में नेपाल ने पुरानी जोड़ी कुशल और आसिफ को पुनः ओपनिंग के लिए चुना। उन्होंने 145 रनों की ओपनिंग साझेदारी की और जीत का आधार बनाया। कुशल ने अभूतपूर्व नाबाद शतकीय पारी खेली जबकि आसिफ 58 रन बनाकर आउट हुए। त्रिवि क्रिकेट मैदान पर अमेरिका द्वारा दिए गए 196 रनों का लक्ष्य नेपाल ने 37 ओवर में हासिल कर लिया। कुशल ने 118 गेंदों में 120 रन की नाबाद पारी खेली, जिसमें 13 चौके और 4 छक्के शामिल थे।

कुशल भुर्तेल ने कहा, ‘टॉप ऑर्डर की शुरुआत अच्छी नहीं हो रही थी। आज मैं और आसिफ ने अच्छी शुरुआत की है, शतक से ज्यादा खुशी महसूस हो रही है।’ कुशल और आसिफ की साझेदारी नेपाल की ODI ओपनिंग में दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी बनी है। आसिफ ने 72 गेंदों में 58 रन बनाए जबकि डेब्यू करने वाले ईसान पांडे ने 30 गेंदों में 20 रन बनाकर नाबाद रहे।

दीपेन्द्रसिंह ऐरी द्वारा बनाए गए मोमेन्टम से त्रिवि क्रिकेट मैदान पर पहले विकेट टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने वाली अमेरिका ने 22 रन पर पहला विकेट खोया। 122-1 से 73 रन और जोड़े पर 9 विकेट खो दिए। दीपेन्द्र ने 7 ओवर 3 गेंदों में 24 रन देकर 4 विकेट लिए। सोमपाल कामी ने 2 विकेट लिए जबकि संदीप लामिछाने और गुल्संज़ ने 1-1 विकेट लिया।

अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन में ताइवान की गंभीर चिंता

बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता में ताइवान की विशेष रुचि बनी हुई है। अमेरिका और ताइवान के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं होने के बावजूद दोनों के बीच मजबूत अनौपचारिक रिश्ते हैं, जिसके चलते ताइवानी नेतृत्व इस यात्रा और ट्रम्प की हालिया अभिव्यक्तियों का बारीकी से विश्लेषण कर रहा है। अमेरिकी मीडिया फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता। उन्होंने कहा, यदि वर्तमान स्थिति बनी रहती है तो चीन भी संतुष्ट होगा और अमेरिका का समर्थन होगा, इसलिए कोई भी पक्ष एकतरफा स्वतंत्रता की घोषणा करे, तो वह उचित नहीं होगा। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को बताया, ‘‘मैं किसी को स्वतंत्र होते नहीं देखना चाहता। आपको पता है, युद्ध के लिए हमें 9,500 मील की यात्रा करनी होगी, मैं ऐसी स्थिति की तलाश में नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि वे शांति बनाए रखें और चीन भी शांत रहे। हम युद्ध नहीं चाहते, और यदि वर्तमान जैसी स्थिति बनी रहती है तो मुझे लगता है कि चीन भी संतुष्ट होगा। लेकिन मैं नहीं चाहता कि कोई आए और कहे, ‘अमेरिका हमारा समर्थन कर रहा है, इसलिए आओ स्वतंत्रता घोषित करें।’”

ट्रम्प की इन बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग-चिन ने शनिवार को कहा कि ट्रम्प की बातों का अर्थ समझने के लिए ताइवान को और स्पष्टता की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान को अमेरिकी हथियार बेचने की अनुमति अमेरिकी कानून देता है और ताइवान-अमेरिका हथियार समझौता हमेशा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता का आधार रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार राष्ट्रपति लाइका के प्रवक्ता ने भी कहा कि अमेरिका का ताइवान को हथियार बेचना उसकी सुरक्षा प्रतिबद्धता का हिस्सा है और इससे क्षेत्रीय हमलों का सामना करने के लिए साझा प्रतिरोध में मदद मिलती है। ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग ने बताया कि उनकी टीम अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन पर लगातार नजर बनाए हुए है और अमेरिका तथा अन्य मित्र देशों के साथ अच्छी संवाद स्थापित किया है।

उन्होंने कहा कि ताइवान क्षेत्र सदैव शांति और स्थिरता का रक्षक रहा है, और चीन द्वारा लिए गए आक्रामक सैन्य कदम और सत्तावादी दमन से क्षेत्रीय खतरे बढ़े हैं। ताइवान के अधिकांश नागरिक चाहते हैं कि चीन के साथ संबंध वर्तमान यथास्थिति में बने रहें। इससे पहले भी ताइवान की स्वतंत्रता से जुड़ा विषय पर अमेरिका की नरम नीति पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। फरवरी 2025 में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट से वाशिंगटन की ताइवानी स्वतंत्रता के विरोध की परंपरागत प्रतिबद्धता हटाई थी, जिस पर चीन ने तीव्र आपत्ति जताई थी।

बडिमालिका भ्रमण के दौरान बेहोश हुए सतर्कता केंद्र के लेखा अधिकारी का निधन

२ जेठ, काठमाडौं। बाजुरा जिले के बडिमालिका भ्रमण के लिए जाते समय बेहोश हुए राष्ट्रीय सतर्कता केंद्र, काठमाडौं के लेखा अधिकारी की मृत्यु हो गई है। जिला पुलिस कार्यालय बाजुरा के अनुसार, मृतक व्यक्ति सतर्कता केंद्र में कार्यरत ५६ वर्षीय लेखा अधिकारी विश्वराज पन्थी हैं। उनकी स्थायी पता भैरहवा बताया गया है।

पुलिस के अनुसार, पन्थी सहित चार सदस्यों की टीम बडिमालिका दर्शन के लिए बाजुरा गई थी। गंतव्य की ओर जाते समय बडिमालिका नगरपालिका-८ के अंतर्गत खारे जंगल में पन्थी बेहोश हो गए थे। वहां से उन्हें बचाया गया और शुक्रवार सुबह ५:४५ बजे जिला अस्पताल मार्तडी पहुंचाया गया। अस्पताल पहुंचने पर ५:५० बजे चिकित्सकों ने उनकी मृत्यु की घोषणा की। पन्थी के साथ राष्ट्रीय सतर्कता केंद्र में कार्यरत उपसचिव शिवहरी न्यौपाने, शाखा अधिकारी जीवन घिमिरे तथा लेखापाल उमेश शर्मा भी बडिमालिका दर्शन के लिए बाजुरा गए थे, पुलिस ने जानकारी दी है।

प्रिन्स और रशिला ने दोहरी उपाधि जीतीं, आर्मी टीम बनी चैंपियन

एपीएफ के प्रिन्स दाहाल और नेपाल आर्मी की रशिला महर्जन ने ४२वें राष्ट्रीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में सिंगल्स की उपाधि हासिल की है। प्रतियोगिता में आर्मी ने 3 स्वर्ण पदक जीतकर टीम चैंपियनशिप का खिताब जीता जबकि एपीएफ ने 2 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इस प्रतियोगिता में सातों प्रदेश और तीन विभागीय टीमों सहित कुल 10 टीमों के 115 खिलाड़ियों ने भाग लिया। 2 जेठ, काठमांडू।

प्रिन्स दाहाल पुरुष सिंगल्स में और रशिला महर्जन महिला सिंगल्स में राष्ट्रीय चैंपियन बने हैं। त्रिपुरेश्वर स्थित राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) की कवर हॉल में पुरुष सिंगल्स के फाइनल मैच में, प्रिन्स ने आर्मी के विधान अधिकारी को 21–16, 21–3 के सीधे सेट में हराकर लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती। इससे पहले प्रिन्स ने २०७९ साल में पहली बार राष्ट्रीय उपाधि जीती थी।

महिला सिंगल्स में, रशिला ने तीन बार की राष्ट्रीय चैंपियन नङ्शल तामाङ को सीधे सेट में 21–18, 21–18 से पराजित किया। यह रशिला की तीसरी उपाधि है, जिनमें २०७६ और २०७९ में मिलीं उपाधियां भी शामिल हैं। आर्मी की अमिता गिरी और रिहाना शेरचन तीसरे स्थान पर रहीं। सिंगल्स की उपाधि जीतने वाले प्रिन्स और रशिला ने डबल्स में भी स्वर्ण पदक जीते।

नेपाल बैडमिंटन संघ द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में महिला डबल्स में आर्मी की रशिला और अमिताका जोड़ी विजेता बनी। इस जोड़ी ने कोशी प्रदेश की रोजी राय और निसम सुब्बा की जोड़ी को 21–17, 21–17 के सेटों में हराया। पुरुष डबल्स के फाइनल में एपीएफ के प्रिन्स और देवराज राणाका जोड़ी ने एपीएफ के भोजबहादुर गुरुङ और क्षितिज खनाल की जोड़ी को 21–10, 21–18 से पराजित किया। मिक्स डबल्स में आर्मी के विधान और अमिताका जोड़ी प्रथम स्थान पर रही।

प्रतियोगिता में आर्मी ने 3 स्वर्ण पदक जीतकर टीम चैंपियनशिप का खिताब जीता। आर्मी को 1 लाख रुपये नकद पुरस्कार के साथ टीम चैंपियन ट्रॉफी प्रदान की गई। अंतिम फाइनल स्पर्धा मिक्स डबल्स जिसमें आर्मी के दोनों खिलाड़ी शामिल थे, के कारण टीम चैंपियन अंतिम तक तय हो चुका था। विजेताओं को नेपाल ओलंपिक समिति के अध्यक्ष जीवनराम श्रेष्ठ, उपाध्यक्ष चतुरानंदराज वैद्य, महासचिव राजीव श्रेष्ठ और सदस्य लाक्पा छिरिंग लामा के साथ आयोजक संघ के अध्यक्ष रामजीबहादुर श्रेष्ठ ने समारोह में पुरस्कृत किया।

चीनप्रति ट्रम्पको यू-टर्नप्रति समर्थकहरूमा कस्तो छ तरंग ?

ट्रम्प के चीन नीति में यू-टर्न के बाद समर्थकों की प्रतिक्रिया कैसी है?

इसी सप्ताह ट्रम्प ने बीजिंग का दौरा पूरा किया। ट्रम्प ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में रेड कार्पेट पर पहुंचे थे। सैकड़ों बच्चे झंडे लहरा रहे थे। एक सैनिक बैंड अमेरिकी राष्ट्रगान ‘स्टार-स्पैंगल्ड बैनर’ बजा रहा था।

सुदूरपश्चिम में सरकार परिवर्तन को चर्चाएं तेज

सुदूरपश्चिम प्रदेश में नेपाली कांग्रेस और एमाले के बीच सरकार परिवर्तन की तैयारी तेजी से हो रही है। मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह ने शीघ्र निर्णय की मांग करते हुए एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और सभापति गगनकुमार थापासँग चर्चा की है। एमाले अध्यक्ष ओली और सभापति थाप ने तीन दलों के सहयोग से आगे बढ़ने की संभावना और सरकार परिवर्तन तथा मंत्री फेरबदल के विषय में बातचीत जारी होने की पुष्टि की है। सुदूरपश्चिम में कांग्रेस और एमाले के सत्ता समीकरण विवाद के कारण मुख्यमंत्री शाह का पद अस्थिर है और वे पार्टी नेतृत्व के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

प्रदेश सरकार परिवर्तन की चर्चाओं ने सुदूरपश्चिम में बड़ी हलचल मचा दी है। नेपाली कांग्रेस और नेकपा एमाले के नेताओं के बीच प्रदेश सरकार के नेतृत्व में बदलाव के लिए गहन प्रयास हो रहे हैं। कांग्रेस और एमाले ने पुराने समीकरण को बनाए रखते हुए प्रदेश सरकार परिवर्तन या पुनर्गठन पर चर्चा शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सुदूरपश्चिम के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह हाल ही में काठमांडू पहुंचे हैं। शाह ने भक्तपुर के गुण्डु में जाकर एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और पार्टी के सभापति गगनकुमार थाप के साथ बातचीत की है।

शाह ने प्रदेश सरकार के मामले में जल्दी निर्णय लेने का आग्रह किया है। सूत्रों के अनुसार, “मुख्यमंत्री ने अलग-अलग अवसरों पर एमाले के अध्यक्ष ओली और सभापति थाप से बातचीत की है। उनका मुख्य अनुरोध है कि प्रदेश सरकार का शीघ्र निर्णय लिया जाए,” एक निकट सूत्र ने बताया। एमाले अध्यक्ष ओली ने कहा कि शाह को प्रदेश सरकार में नेकपा के अन्य पक्षों को भी शामिल करने पर चर्चा हो रही है, जबकि सभापति थाप ने सभी दलों के बीच संवाद जारी रहने की बात कही है।

हालांकि, कुछ एमाले नेताओं का मानना है कि ओली मुख्यमंत्री हिम्मत कार्की से संतुष्ट नहीं हैं, इसलिए वे कांग्रेस को छोड़ सकते हैं। “कांग्रेस ने कोशी प्रदेश लेकर सुदूरपश्चिम की एमाले को छोड़ने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन हमारे अध्यक्ष ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है,” एक नेता ने बताया। हालांकि परस्पर विचार-विमर्श के बाद दो या तीन दिनों के भीतर निर्णय होने के संकेत भी मिल रहे हैं।

संविधान संशोधन के लिए कांग्रेस जेनजी नेताओं से विचार-विमर्श करेगी

२ जेठ, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस संविधान संशोधन के लिए जेनजी नेताओं से राय-सुझाव लेने जा रही है। इस चर्चा के लिए कांग्रेस ने रविवार दोपहर २ बजे केन्द्रीय कार्यालय सानेपा में जेनजी नेताओं को बुलाया है। कांग्रेस की संविधान संशोधन अध्ययन तथा सुझाव प्रस्तुत करने वाली समिति ने जेनजी नेताओं से राय-सुझाव संकलित करने के उद्देश्य से यह बैठक बुलायी है। इसके लिए १८ जेनजी नेताओं को पत्र भी भेजा गया है, कांग्रेस ने बताया। इस चर्चा में कांग्रेस अध्यक्ष गगन थापा, संविधानविद तेजमान श्रेष्ठ, प्रो. कृष्ण खनाल सहित अन्य सहभागी होंगे।

पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी अचानक ईरान के तेहरान पहुंचे

२ जेठ, काठमांडू। पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी शनिवार अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे हैं। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA ने नकवी के पूर्व सूचना के बिना तेहरान आगमन की जानकारी दी है। IRNA ने स्रोतों के हवाले से कहा है कि पाकिस्तान के गृहमंत्री नकवी तेहरान के कुछ उच्च अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास और वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है। इसी सिलसिले में गृहमंत्री नकवी का अचानक तेहरान पहुंचना माना जा रहा है। पाकिस्तान ने तीन दशक बाद पहली बार अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष शांति वार्ता का आयोजन किया था, लेकिन अब तक यह वार्ता सफल नहीं हो पाई है।

टेबलटेनिस टीम दक्षिण कोरिया के लिए रवाना

समाचार सारांश

OK AI द्वारा तयार गरिएको। सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • दक्षिण कोरिया के इंचोन में 16 से 26 मई तक आयोजित यांग यांग जा टेबलटेनिस अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने हेतु 6 सदस्यीय नेपाली टीम कोरिया के लिए रवाना हुई है।
  • प्रशिक्षण के बाद 27 मई को होने वाली अंतरराष्ट्रीय क्रिश्चियन टेबलटेनिस प्रतियोगिता में नेपाली टीम हिस्सा लेगी।
  • प्रशिक्षण शिविर में नेपाल के अलावा फिलीपींस, लाओस और मंगोलिया के 25 खिलाड़ी प्रतिभाग करेंगे, जबकि शिविर का नेतृत्व ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता यांग यांग जा करेंगी।

2 जेठ, काठमांडू। दक्षिण कोरिया के इंचोन में 16 से 26 मई तक आयोजित यांग यांग जा टेबलटेनिस मिशन (YTTA) अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए 6 सदस्यीय नेपाली टीम शनिवार को दक्षिण कोरिया के इंचोन के लिए रवाना हुई।

प्रशिक्षण के बाद ये खिलाड़ी 27 मई को होने वाली अंतरराष्ट्रीय क्रिश्चियन टेबलटेनिस प्रतियोगिता में भाग लेंगे।

प्रशिक्षण शिविर और प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों में यू-13 वर्ग में रिवानमुणि बज्राचार्य और प्राज्ञा महर्जन, यू-16 वर्ग में रिजन शाक्य और सुरम्या शाक्य तथा यू-19 वर्ग में हिमाल बिष्ट और योङ्गी पौडेल शामिल हैं। टीम के व्यवस्थापक हान्न को हैं और अखिल नेपाल टेबलटेनिस संघ के कोषाध्यक्ष ज्याकी महर्जन ने यह जानकारी दी है।

इस प्रशिक्षण शिविर के लिए खिलाड़ियों का चयन 5 अक्टूबर 2025 को ललितपुर के भैंसेपाटी स्थित नेपाल एपीएम क्लब में हुआ था। प्रतियोगिता में यू-13, यू-16 और यू-19 आयु वर्गों में छात्र-छात्राओं ने 6 विधाओं में प्रतिस्पर्धा की थी। प्रत्येक विधा के विजेताओं को दक्षिण कोरिया के प्रशिक्षण शिविर के लिए चुना गया, कोषाध्यक्ष महर्जन ने बताया।

प्रशिक्षण शिविर में नेपाल के साथ-साथ फिलीपींस, लाओस और मंगोलिया के कुल 25 खिलाड़ी भाग लेंगे।

शिविर का नेतृत्व 1988 के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता दक्षिण कोरियाई प्रसिद्ध टेबलटेनिस खिलाड़ी यांग यांग जा करेंगी। प्रतिभागी खिलाड़ी उनके और उनके कोच की टीम के साथ सीधे प्रशिक्षण पाने का अवसर प्राप्त करेंगे।

यांग यांग जा पिछले 7 वर्षों से नेपाली टेबलटेनिस के विकास में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं। उन्होंने नेपाल में तीन बार टेबलटेनिस क्लीनिक्स का आयोजन किया है और नेपाली युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने में लगातार सहायता प्रदान कर रही हैं। कोषाध्यक्ष महर्जन ने शनिवार को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टीम को विदाई दी।

मष्तिष्कघात र हृदयघातको मुख्य कारण – Online Khabar

मस्तिष्काघात और हृदयाघात के मुख्य कारणों में नई वैज्ञानिक खोज

वैज्ञानिकों ने खोजा है कि विश्व के हर पाँच में से एक व्यक्ति में मस्तिष्काघात और हृदय संबंधी रोगों से मृत्यु के खतरे में एक वंशानुगत और छुपा हुआ कोलेस्ट्रोल जोखिम होता है। साधारण रक्त परीक्षण में कोलेस्ट्रोल की मात्रा सामान्य दिखने के बावजूद, इस विशेष प्रकार का तत्व हृदय स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, यह नया शोध बताता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, रक्त में पाया जाने वाला यह छुपा हुआ कोलेस्ट्रोल कण ‘लिपोप्रोटीन ए’ या Lp(a) कहलाता है। यह खराब कोलेस्ट्रोल जैसे दिखता है, पर इसमें एक अतिरिक्त प्रोटीन होता है जो इसे हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए और भी हानिकारक बनाता है। यह समस्या पूरी तरह वंशानुगत होती है और इसके कोई बाहरी लक्षण नहीं होते। इसलिए विश्व के लगभग 20 प्रतिशत लोग इस जोखिम के साथ जी रहे हैं, पर उनके पास इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कनाडा के मॉन्ट्रियल में आयोजित ‘सोसाइटी फॉर कार्डियोवैस्कुलर एंजियोग्राफी एंड इंटरवेंशन’ 2026 के वैज्ञानिक सम्मेलन में यह रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा संचालित तीन बड़े अध्ययनों में भाग लेने वाले 40 वर्ष से अधिक उम्र के 20,070 वयस्कों के रक्त नमूनों का परीक्षण कर यह निष्कर्ष निकाला गया। लगभग चार वर्षों के निगरानी अवधि के दौरान Lp(a) की मात्रा 175 nmo/L या उससे अधिक होने वाले व्यक्तियों में हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं पाई गईं। ऐसे मरीजों में हृदय रोग से मृत्यु की संभावना 49 प्रतिशत और मस्तिष्काघात का खतरा 64 प्रतिशत अधिक होता है। विशेष रूप से, पहले से हृदय रोगग्रस्त व्यक्तियों में इस मात्रा का अधिक होना जोखिम को और बढ़ाता है।

वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुभाष बनर्जी के अनुसार, यह अध्ययन पहली बार Lp(a) के उस स्तर को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है जो मरीज को मृत्यु और स्ट्रोक के जोखिम में डालता है। उन्होंने कहा कि चाहे उम्र कोई भी हो, लोगों को एक बार साधारण और सस्ता रक्त परीक्षण कर अपने शरीर में इस वंशानुगत जोखिम की जांच करानी चाहिए। यदि रक्त में इसकी मात्रा अधिक पाई जाती है तो डॉक्टर की सलाह अनुसार अन्य जोखिमों जैसे एलडीएल कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करना और हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के उपाय कड़ाई से अपनाने चाहिए। भविष्य में इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर उपचार की नई विधियाँ विकसित की जा रही हैं, जिससे यह जानकारी मरीजों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी रहेगी, वैज्ञानिकों का विश्वास है।

बास नेपाल काठमाडौं शाखाको अध्यक्षमा मेनुका शाही चयन

२ जेठ, काठमाडौं । युवा सशक्तीकरण तथा सामाजिक उत्तरदायित्वको क्षेत्रमा सक्रिय रहेको बास नेपाल काठमाडौं शाखाको अध्यक्षमा मेनुका शाही चयन भएकी छन्। अध्यक्षत्व सम्हालेपछि शाहीले संस्थाको उद्देश्य, नीति तथा सामाजिक अभियानलाई अझ प्रभावकारी रूपमा अघि बढाउने प्रतिबद्धता व्यक्त गरेकी छन्। उनले युवाको नेतृत्व विकास, सामाजिक सचेतना, मानव अधिकार, सुशासन र सकारात्मक परिवर्तनको क्षेत्रमा संस्थालाई थप सक्रिय र परिणाममुखी बनाउने योजना प्रस्तुत गरिन्। शाहीका अनुसार, संस्थालाई पारदर्शी, उत्तरदायी र जनमुखी बनाउँदै सदस्यहरूबीच सहकार्य, समन्वय तथा सहभागितामूलक नेतृत्वलाई मुख्य प्राथमिकतामा राखिनेछ।

साथै, सामाजिक विकृति विरुद्ध सचेतनामूलक कार्यक्रमहरू, युवाहरूको क्षमता अभिवृद्धि तथा समाजसेवामूलक गतिविधिहरू निरन्तरता दिइने उनले बताइन्। शनिबार काठमाडौंको भृकुटीमण्डपमा सम्पन्न छैटौं अधिवेशनबाट शाही अध्यक्षमा चयन भएकी हुन्। शाखाकी निवर्तमान अध्यक्ष शकुन्तला शाहको अध्यक्षतामा सम्पन्न उक्त अधिवेशनबाट उपाध्यक्ष, सचिव, सहसचिव र कोषाध्यक्षमा क्रमशः सुशीला धमाला, रमेश विश्वकर्मा, जगदिश्वरी शाह र निश्चल न्यौपाने चयन भएका छन्। सदस्यहरूमा पार्वती पौडेल अधिकारी, कमलप्रसाद शर्मा, रोशन पान्डे र निरुता उप्रेती छनोट भएका छन्।

भारत द्वारा चीनी निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध: कारण और प्रभाव

भारत ने 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस निर्णय के मुख्य कारण गन्ने के उत्पादन में कमी और उर्वरक आयात में आ रही बाधाएँ हैं। यह प्रतिबंध भारत सरकार की घरेलू चीनी आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की प्राथमिकता को दर्शाता है और इसके परिणामस्वरूप प्रमुख चीनी कंपनियों के शेयर बाजार में गिरावट आई है। निर्यात प्रतिबंध से अफ्रीकी देशों को ब्राजील या थाईलैंड से चीनी आयात करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है, जबकि भारत के चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। 2 जून, काठमांडू।

बुधवार को भारत ने चीनी निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक के लिए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इस वर्ष गन्ने के उत्पादन के लक्ष्य से कम रहने का अनुमान और उर्वरक आयात में ईरान युद्ध के कारण गंभीर बाधाएँ उत्पन्न होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रतिबंध बढ़ती महंगाई के खतरे के बीच स्थानीय चीनी आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है। भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और एक प्रमुख निर्यातक देश है।

जबकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, चीनी निर्यात पर लगाये गए इस प्रतिबंध ने कई सवाल भी उठाए हैं। बाजार ने भी नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए गुरुवार को प्रमुख चीनी कंपनियों के शेयर लगभग 6 प्रतिशत गिर गए। इंडियन शुगर एंड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा, “यह प्रतिबंध सावधानीपूर्वक लगाया गया है। हम निर्यात की समग्र स्थिति के संबंध में संतुलित समीक्षा की अपेक्षा कर रहे थे, खासकर जब कुछ समझौतें पहले ही हो चुके हैं।”