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लेखक: space4knews

ओली के खिलाफ निष्पक्ष जांच आवश्यक है : प्रचण्ड


१५ चैत, काठमांडू। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के संयोजक पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने कहा है कि एमाले अध्यक्ष केपी ओली के खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

रविवार को नेकपा कार्यालय पेरिसडाँडा में संवाददाताओं से बात करते हुए प्रचण्ड ने राजनीतिक मांगों या पक्षपात से मुक्त, स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से ओली के खिलाफ जांच किए जाने पर जोर दिया।

‘कहीं भी राजनीतिक पक्षपात या आग्रह न हो। निष्पक्षता बनी रहे और स्वतंत्र तरीके से हो—यह मैं पहले ही कह चुका हूँ,’ प्रचण्ड ने कहा।

पूर्व प्रधानमंत्रियों की संपत्ति की जांच संसद में पहले ही उठाई गई थी, यह कार्य उन्हीं का है, उन्होंने बताया।

‘मैंने तो पहले संसद में कहा था कि सभी की जांच होनी चाहिए,’ प्रचण्ड ने कहा।

सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए शासकीय सुधारों के १०० बिंदुओं को अभी तक देखने का मौका नहीं मिला है, लेकिन विस्तार से अध्ययन कर प्रतिक्रिया दी जाएगी, यह भी उन्होंने जानकारी दी।

कर्मचारीका दलीय ट्रेड युनियन खारेजीको घोषणाले तरंग

सरकार के फैसले से राजनीतिक ट्रेड यूनियन खत्म करने का असर

समाचार सारांश: सरकार ने सार्वजनिक प्रशासन में राजनीतिक ट्रेड यूनियन हटाने और राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त करने का निर्णय लिया है। निजामती कर्मचारियों को किसी भी पार्टी या स्वार्थ समूह से जुड़े बिना काम करना अनिवार्य किया जाएगा। ट्रेड यूनियन के समर्थकों और विरोधियों के बीच मतभेद के कारण सरकार ४५ दिनों के भीतर निजामती सेवा विधेयक तैयार करने की योजना बना रही है। १५चैत्र, काठमाडौं। रास्वपाका वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह के नेतृत्व में सरकार गठन के दिन मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत शासकीय सुधार संबंधित १०० कार्यसूची में १२वें बिंदु में उल्लेख है कि “सार्वजनिक प्रशासन में राजनीतिक ट्रेड यूनियन समाप्त कर अवांछित हस्तक्षेप और अनौपचारिक दबाव को खत्म करते हुए निर्णय प्रक्रिया और सेवा प्रवाह को प्रभावी बनाया जाएगा”। सरकार सार्वजनिक प्रशासन को पूरी तरह राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखकर निष्पक्ष, तटस्थ और नागरिकों के प्रति उत्तरदायी बनाने की योजना बना रही है। इसके अनुसार, निजामती कर्मचारी, शिक्षक, प्राध्यापक और सभी राष्ट्रसेवक किसी भी पार्टी, समूह या स्वार्थ केंद्र के साथ सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संलग्न नहीं होकर कार्य करेंगे, और उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, सार्वजनिक प्रशासन में राजनीतिक ट्रेड यूनियन हटाने के विषय पर विभिन्न मत व्यक्त हो रहे हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञों और पूर्व कर्मचारियों का सरकार के इस निर्णय के पक्ष में कहना है, जबकि ट्रेड यूनियन से जुड़े कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। प्रशासनिक विशेषज्ञ काशीराज दाहाल का कहना है कि सभी लोग राजनीतिक ट्रेड यूनियन हटाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन कभी सफल नहीं हुए। उन्होंने कहा, “सभी दलों ने सरकार चलाते हुए ट्रेड यूनियन के प्रभावों का अनुभव किया है, लेकिन हटाना संभव नहीं था। इस निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए और इसे लागू किया जाना चाहिए।” कुछ पूर्व कर्मचारी भी पार्टी आधारित यूनियन की आवश्यकता न होने की बात कहते हैं। नापी अधिकारी शैलेन्द्र सिंह पार्टी से जुड़ी ट्रेड यूनियन न हटाने को निजामती प्रशासन सुधार के लिए बाधा मानते हैं। उन्होंने कहा, “पार्टी नहीं, गुट आधारित यूनियन भी देखी गई हैं, आधिकारिक ट्रेड यूनियन रहनी चाहिए। पार्टी संबंधित यूनियन जितनी जल्दी हटाई जाए, सबके लिए बेहतर होगा।”

राजनीतिक यूनियन से जुड़ी कई ट्रेड यूनियन कानूनी सलाह पर विभिन्न दलों से जुड़े कर्मचारियों के राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन नेटवर्क में शामिल हैं, जिनमें नेपाल निजामती कर्मचारी यूनियन, नेपाल निजामती कर्मचारी संगठन, नेपाल राष्ट्रीय निजामती कर्मचारी संगठन, एकीकृत सरकारी कर्मचारी संगठन, मधेशी निजामती कर्मचारी मंच और स्वतंत्र राष्ट्रसेवक कर्मचारी संगठन शामिल हैं। निजामती कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष उत्तम कटुवाल ने सरकार के फैसले के बाद आंतरिक चर्चा की जानकारी दी और कहा, “हम राजनीतिक ट्रेड यूनियन नहीं हैं, हम कानूनी रूप से परिभाषित राष्ट्रीय स्तर के ट्रेड यूनियन हैं।” मधeshi कर्मचारी मंच के अध्यक्ष लालबाबू यादव भी अपने संगठन को राजनीतिक संगठन मानने को तैयार नहीं हैं। २०६५ माघ में पंजीकृत यह संगठन मधेशी, थारू, मुस्लिम और दलित कर्मचारियों के अधिकार और हित के लिए स्थापित है, उनका दावा है। यादव कहते हैं, “राजनीतिक संगठन होना अच्छा नहीं है, लेकिन कर्मचारियों के हित के लिए बने संगठन आवश्यक हैं।” निजामती कर्मचारी संगठन की अध्यक्ष भवानी न्यौपाने दाहाल कानूनी परामर्श ले रही हैं और सभी ट्रेड यूनियन संयुक्त बयान जारी करने की तैयारी में हैं। वे सरकार के फैसले से असहमत दिखती हैं। “ट्रेड यूनियन के अधिकार हमने लंबे संघर्ष के बाद प्राप्त किए हैं। इसके लिए कई साथी नौकरी तक खो चुके हैं। कमियों को सुधारने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसे समाप्त नहीं होना चाहिए,” अध्यक्ष दाहाल का कहना है।

दल आधारित कर्मचारी संगठन, जो दायित्व भूल गए हैं, २०४८ के बाद बढ़े। २०४८ के चुनाव के बाद बने नेपाली कांग्रेस की सरकार लगभग एक हजार कर्मचारियों पर लगे कारावाही को वापस लेने का निर्णय लिया था। दलों के गठन के बाद कर्मचारी राजनीतिक नेतृत्व को अभिव्यक्त करना बंद कर चुके हैं। कुछ यूनियन पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक व्यवहार भी किया था। पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने कहा था कि कर्मचारी नहीं माने। लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष उमेशप्रसाद मैनाली ने बताया कि २०४६ के परिवर्तन के बाद कर्मचारी आंदोलन को बढ़ावा देने और दबाने के नाम पर राजनीतिक दल आधारित कर्मचारी संगठन बनाए गए। मैनाली ने कहा कि कर्मचारी संगठन अपने सेवाभोग और हितों पर काम करना भूल गए थे और पदोन्नति व स्थानांतरण पर ध्यान के कारण अनुशासन नहीं रहा। मैनाली ने कहा कि नेकपा एमाले के कर्मचारी संगठन का प्रभाव सबसे अधिक था। उन्होंने कहा, “एमाले अन्य दलों से आगे था। कांग्रेस में भी परिवारवाद था, लेकिन एमाले में दलगत आस्था पर काम हुआ। प्रशासन में दलगत हस्तक्षेप की नीति मजबूत थी।”

कैसे लागू होगा समाप्ति का निर्णय? नेपाल के संविधान के अनुच्छेद ३४(३) में हर श्रमिक को कानूनी रूप से ट्रेड यूनियन खोलने, उसमें शामिल होने और सामूहिक समझौता करने का अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही, निजामती कर्मचारी अधिनियम, २०४९ के दफा ५३ में ट्रेड यूनियन से सम्बंधित व्यवस्था है। ट्रेड यूनियन समर्थक इस प्रावधान को दिखाकर तर्क करते हैं कि ऐसे संगठन आवश्यक हैं। पूर्व अध्यक्ष पुण्यप्रसाद ढकाल कहते हैं, “प्रबंधन पक्ष महत्वपूर्ण है। आधिकारिक ट्रेड यूनियन जरूरी है। संविधान और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन किया जाना चाहिए।” संविधान विज्ञानी और प्रशासनिक विशेषज्ञ काशीराज दाहाल कहते हैं कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून श्रम और पूंजी से सम्बंधित व्यापारिक ट्रेड यूनियन को अधिकार देते हैं, लेकिन नीति निर्धारण में लगे लोगों के लिए ट्रेड यूनियनों की आवश्यकता नहीं। “अगर सभी कर्मचारियों को ट्रेड यूनियन का अधिकार देंगे, तो न्यायाधीश और सुरक्षा एजेंसियों को भी अधिकार देना होगा।”

सरकार ४५ दिनों के भीतर संघीय निजामती सेवा विधेयक तैयार करने की तैयारी में है। इससे पहले संघीय संसद में यह विधेयक कानूनी प्रक्रिया में था। परन्तु इसे लागू करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासनिक विशेषज्ञ दाहाल का सुझाव है कि सरकार को यह नीति प्रभावी बनाने के लिए कानूनी संशोधन के साथ इसे लागू करना चाहिए।

ओली और लेखक को ५ दिन की हिरासत में रखकर जांच जारी रखने की अनुमति

१० चैत, काठमाडौं। नेकपा एमाले के अध्यक्ष तथा पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और कांग्रेस के नेता तथा पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को हिरासत में रखकर अतिरिक्त जांच के लिए अदालत ने अनुमति दी है। रविवार को जिल्ला अदालत काठमाडौं के न्यायाधीश आनंदप्रसाद श्रेष्ठ की अदालत ने हिरासत अवधि ५ दिन और बढ़ाने का आदेश जारी किया, जिसकी जानकारी दीपक कुमार श्रेष्ठ ने दी। सरकारी वकील की ओर से उन्हें १० दिन तक हिरासत में रखने का अनुरोध किया गया था।

पिछले भदौ २३ और २४ को जनजीवन विरोध आंदोलन हुआ था, जिसमें दमन की कार्रवाई की गई थी। उस समय, उस आंदोलन के दौरान एमाले अध्यक्ष ओली प्रधानमंत्री थे जबकि कांग्रेस नेता लेखक गृहमंत्री थे। उस आंदोलन के समय हुई दमन की घटना की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली-लेखक के खिलाफ फौजदारी मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश के आधार पर आवश्यक गिरफ्तारी वारंट जारी कर शनिवार सुबह ओली और लेखक को हिरासत में लिया गया था। अदालत में आज लेखक स्वयं उपस्थित थे जबकि ओली की स्वास्थ्य स्थिति खराब होने के कारण त्रिवि शिक्षण अस्पताल से वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए।

महेश बस्नेत – Online Khabar

महेश बस्नेत के खिलाफ गिरफ्तारी साजिश का आरोप

नेकपा एमाले के सचिव महेश बस्नेत ने बताया कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी की साजिश रची जा रही है। उनका कहना है कि यह साजिश पार्टी अध्यक्ष केपी ओली के खिलाफ चल रहे आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई है। बस्नेत ने बताया कि तीन साल पहले उनके खिलाफ एक गलत शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसे पुलिस ने झूठा साबित किया था। इसके बाद फिर से पूरक शिकायत दर्ज हुई और मामला विचाराधीन है।

बस्नेत ने गृह मंत्री सुदन गुरुङ पर अपने खिलाफ सूचना देने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए कहा, “मुझे गिरफ्तारी के जरिए हमारे अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के खिलाफ बदले की कार्रवाई के विरुद्ध उठे आंदोलन को कमजोर करने की साजिश चल रही है।” उन्होंने कहा कि तीन वर्ष पहले एक तृतीय पक्ष ने एक नकली व्यक्ति को आगे करके उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसे पुलिस जांच में फर्जी पाया गया।

बस्नेत ने आगे कहा, “यह कार्रवाई बालेन शाह के नेतृत्व वाली निरंकुश और अधिनायकवादी सरकार एवं गृह मंत्री सुदन गुरुङ के नेतृत्व में की गई एक अनैतिक कृत्य है।” उन्होंने कहा, “मेरी फोन बंद होने और मैं फरार होने की जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह की अफवाहें फैलाकर जनता का मत भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।

कोशी प्रदेश सभा बैठक में ओली और लेखक की रिहाई की मांग

कोशी प्रदेश के सांसदों ने पूर्वप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्वगृह मंत्री रमेश लेखक की रिहाई की मांग की है। सांसदों ने इन नेताओं को राजनीतिक प्रतिशोध के तहत गिरफ्तार किए जाने का आरोप लगाते हुए भदौ २३ और २४ की घटनाओं की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट को पक्षपाती बताया है। नए सरकार द्वारा मतभेद रखने वाले नेताओं के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध का खतरा देश को अस्थिर कर सकता है, यह सांसदों ने आगाह किया है।

१५ चैत्र, विराटनगर। कोशी प्रदेश के सांसदों ने पूर्वप्रधानमंत्री एवं नेकपा एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली तथा पूर्वगृह मंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के नेता रमेश लेखक की रिहाई की जोरदार मांग की है। भदौ २३ और २४ की घटना के दौरान दमन के आरोप में ओली और लेखक को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। रविवार को प्रदेश सभा की बैठक में सांसदों ने उनकी गिरफ्तारी को राजनीतिक बदला लेने के उद्देश्य से बताया और रिहाई की मांग की।

सांसद डोल्मा तामांग, सिर्जना राई, किशोरचन्द्र दुलाल, मीना श्रेष्ठ, गीतादेवी रेग्मी, खगेश्वरी पौडेल तथा होमबहादुर थाप ने नई सरकार बनने के साथ ही गिरफ्तारियों को गलत बताया और तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है। विशेष सत्र में बोलते हुए एमाले सांसद तिलकुमार मेन्यांग्बो ने नेताओं की गिरफ्तारी को आपत्तिजनक करार दिया। उन्होंने भदौ २३ और २४ की घटनाओं की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट ने देश को संघर्ष की ओर धकेलने का खतरा बताया।

एमाले लुम्बिनी सांसद रेखा शर्मा पक्राउ – Online Khabar

लुम्बिनी सांसद रेखा शर्मा गिरफ्तार

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार।

  • लुम्बिनी प्रदेशसभा सदस्य रेखा शर्मालाई काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान टोली ने धुम्बराही से गिरफ्तार किया है।

१६ चैत, काठमाडौं । लुम्बिनी प्रदेशसभा की सदस्य रेखा शर्मा गिरफ्तार हो गई हैं।

काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान टोली ने उन्हें कुछ समय पहले गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उन्हें काठमाडौं के धुम्बराही से गिरफ्तार किया।

उन पर एक बालिका को अपने घर में रखकर बालश्रम में लगाने का आरोप था।

शर्मा के खिलाफ मामला न चलाने की राय के साथ जिला सरकारी वकील कार्यालय, काठमाडौं में तैयार फाइल उच्च सरकारी वकील कार्यालय के माध्यम से महान्यायाधिवक्ता कार्यालय तक पहुंची थी।

बालिका के उद्धार के दौरान महानगरपालिका का नगरप्रहरी, वार्ड प्रतिनिधि और पुलिस भी स्थल पर पहुंचकर मुचुल्का एकत्रित कर चुके थे।

घटना का विवरण क्या है?

काठमाडौं महानगरपालिका में प्रशिक्षार्थी के रूप में उपस्थित कुछ विद्यार्थियों ने काठमाडौं के सामुदायिक विद्यालय में पढ़ने वाले, लेकिन माता-पिता से अलग रह रहे बाल बालिकाओं के अध्ययन से संबंधित सर्वेक्षण किया। इसी दौरान जब वे नाबालिका के विद्यालय पहुँचे तो पता चला कि उसे काम पर लगाया गया है और श्रमशोषण हो रहा था।

छह वर्षों से सांसद शर्मा के घर में रहकर काम कर रही वह नाबालिका बताई कि उस पर दौड़-धूप और कुटपिट होती थी।

घर के मालिक (प्रदेश सांसद रेखा कुमारी शर्मा का परिवार) उसे हाथ और पाइप से मारते थे, घर के काम जैसे पोछा लगाना, खाना बनाना और पौधों में पानी डालना आदि कार्य कराना मजबूर करते थे, जो नाबालिका ने बताया।

नाबालिका ने यह भी शिकायत की कि छह वर्षों से परिवार से मिलने नहीं दिया गया और दशैं त्योहार में भी घर जाने से मना किया गया। सर्वेक्षण दस्तावेजों के परीक्षण के दौरान अदालत ने नाबालिका से गोपनीय बात भी की थी। यातना मिलने का पता चलने पर काठमाडौं महानगरपालिका ने सांसद शर्मा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

बालिका की हालत कमजोर देखकर महानगरपालिका की कार्यदल ने उसे बचाकर संरक्षण गृह में रखा। बचाव के समय नगरप्रहरी, वार्ड प्रतिनिधि और नेपाल पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर साक्ष्य एकत्रित किए थे।

वहीं नाबालिका के पिता ने काठमाडौं आकर सर्वोच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण का निवेदन दायर किया था।

नई सरकार गठन के बाद शेयर बाजार में 71 अंक की गिरावट

नई सरकार गठन के बाद पहले दिन शेयर बाजार में 71 अंक की गिरावट आई है, जिससे नेप्से 2879 अंक पर आ गया है। आज बाजार में गिरावट के बावजूद कारोबार की राशि 15 अरब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो पिछले गुरुवार की तुलना में अधिक है। बाजार में गिरावट का कारण धरपकड़ और आंदोलनों से निवेशकों की मानसिकता पर प्रभाव पड़ना बताया जा रहा है। 15 चैत्र, काठमांडू।

बालेन साह के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद खुलने वाले पहले दिन शेयर बाजार में 71 अंक की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के साथ नेप्से 29 सौ के नीचे आ गया है। आज का बाजार 2879 अंक पर बंद हुआ। बाजार खुलते ही लगातार नीचे की ओर रहा। बाजार घटने के बावजूद कारोबार की राशि बढ़ी है। पिछले गुरुवार को 13 अरब 16 करोड़ की कारोबार राशि थी, जबकि आज 15 अरब 3 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।

9 कंपनियों के मूल्यों में बढ़ोतरी हुई जबकि 256 कंपनियों के मूल्य घटे, और एक कंपनी का मूल्य स्थिर रहा। शेयर बाजार के सभी समूह सूचकांक गिरावट में रहे। वित्त समूह में सबसे अधिक 3.38 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके साथ ही बैंकिंग 2.78, विकास बैंक 2.89, होटल एवं पर्यटन 2.25, हाइड्रोपावर 2.21, निवेश 2.98, जीवन बीमा 2.20, उत्पादन एवं प्रसंस्करण 1.07, माइक्रोफाइनेंस 2.11, गैर-जीवन बीमा 2.23, अन्य 2.52 और व्यापार 3.01 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

6 कंपनियों के मूल्य में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। 10 प्रतिशत मूल्य वृद्धि वाली कंपनियों में रिलायंस स्पिनिंग मिल्स, सुपरखुड़ी हाइड्रोपावर, रिजलाइन एनर्जी, सूर्यकुंड हाइड्रोइलेक्ट्रिक, भुजुङ हाइड्रोपावर और होटल फॉरेस्ट शामिल हैं। सीवाईसी नेपाल लघुवित्त के मूल्य में 7.1, सोलु हाइड्रोपावर के 3.5 प्रतिशत की बढ़त हुई है। वहीं, युनिक नेपाल लघुवित्त के मूल्य में 6.17, हिमाल दोलखा में 5.45, अभियान लघुवित्त में 5.39, माउंटेन हाइड्रो नेपाल में 5.37 प्रतिशत की गिरावट आई है।

आज जिन कंपनियों में अधिक कारोबार हुआ उनमें रिड़ी पावर, ङादी ग्रुप, सोलु हाइड्रोपावर, शिवम सिमेंट और नेशनल हाइड्रोपावर कंपनियां शामिल हैं। आज बाजार में गिरावट का कारण क्या है? नई सरकार बनने के बाद बाजार में उत्साह बढ़ने की उम्मीद थी। सरकार ने निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने वाले कुछ निर्णय भी लिए थे। लेकिन, बाजार की गिरावट का मुख्य कारण धरपकड़ और आंदोलन रहे हैं, ऐसा एक ब्रोकरेज संचालक ने बताया। उन्होंने कहा, ‘पिछले दिनों तेजी से बढ़ा बाजार, सरकार बनने के बाद आज गिरना कोई खास कारण नहीं था, लेकिन धरपकड़ और आंदोलन ने निवेशकों की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।’

पहले से ही बाजार एक चरण में बढ़ चुका था और लाभ भी बना हुआ था, इसलिए हाल के दिनों में धरपकड़ और आंदोलन शुरू होने के बाद रविवार को बिक्री का दबाव बढ़ गया, उनका कहना है। पिछले सप्ताह नेप्से 73 अंक बढ़ा था। एक महीने पहले नेप्से 2673 अंकों पर था और आज रविवार को बाजार खुलने पर यह 2950 अंक था। “कुछ निवेशक बेचने के लिए उचित समय की प्रतीक्षा कर रहे थे। नई सरकार बनने के अवसर पर सहज रूप से बड़े पैमाने पर शेयर बिक्री संभव हुई और इसका लाभ लिया गया होगा,” उन्होंने कहा।

अदालत का आदेश: ओली के प्रभावी उपचार के लिए प्रबंध करें

समाचार सारांश: काठमांडू जिला अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के प्रभावी उपचार के लिए ५ दिन की अवधि बढ़ा दी है। ओली को भक्तपुर के गुंडु स्थित आवास से हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वे आभासी माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए थे। जेएनजी आंदोलन के दमन के मामले की जांच करने वाली आयोग ने ओली और गृह मंत्री लेखक के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की अनुशंसा की थी। १५ चैत्र, काठमांडू – काठमांडू जिला अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के उपचार में प्रभावी आवश्यक प्रबंध करने का आदेश दिया है। रविवार को काठमांडू जिला अदालत के न्यायाधीश आनंदप्रसाद श्रेष्ठ की अदालत ने ५ दिन की अवधि बढ़ाते हुए प्रभावी उपचार की व्यवस्था करने के आदेश जारी किए। ‘प्रतिवादी केपी शर्मा ओली अस्वस्थ होकर अस्पताल में उपचाराधीन हैं, इसकी जानकारी प्राप्त होने पर प्रभावी उपचार की व्यवस्था करने का आदेश दिया गया है,’ न्यायाधीश श्रेष्ठ ने आदेश में उल्लेख किया। अस्पताल में भर्ती किए गए ओली बीमार होने के कारण आभासी माध्यम से अदालत में पेश हुए थे। ओली को शनिवार सुबह भक्तपुर के गुंडु स्थित आवास से हिरासत में लिया गया था। हाल ही में २३ और २४ भाद्र को हुए जेएनजी आंदोलन के दौरान दमन हुआ था। उस समय एमाले अध्यक्ष ओली प्रधानमंत्री थे जबकि कांग्रेस नेता रमेश लेखक गृह मंत्री थे। जांच आयोग ने इस दमन की जांच कर ओली और लेखक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी।

एमाले सांसद शर्मालाई मुद्दा नचल्ने भएपछि बालेनले लेखेका थिए- ‘सरी नानु, समय आउँछ’

एमाले सांसद शर्मालाई मुद्दा नचल्ने भएपछि बालेन शाहले भने- ‘सॉरी नानु, समय आएगा’

१६ चैत, काठमाडौं। २०८१ माघ के अंतिम सप्ताह में एमाले लुम्बिनी प्रदेश सभा सदस्य रेखाकुमारी शर्मा के खिलाफ सरकारी वकील कार्यालय ने मुकदमा नचलाने की तैयारी की थी। शर्माजी को मुकदमा नचलाने की सिफारिश के साथ जिला सरकारी वकील कार्यालय, काठमाडौँ में फाइल बनी थी जो उच्च सरकारी वकील कार्यालय से होते हुए महान्यायाधिवक्ता कार्यालय तक पहुंची थी। खास तौर से उसी वर्ष जेठ १४ को महानगरपालिका की टीम ने सर्वे के दौरान प्रदेश सांसद शर्माजी के घर से एक बालिका को उद्धार किया था। उन्होंने लगातार हिंसा का सामना करने की बात कही थी और सर्वे में अपनी स्थिति बताने के बाद महानगर ने उन्हें सुरक्षित किया था। इसके बावजूद बाद में उक्त मामले को नचलाने का निर्णय लेकर फाइल माघ महीने के अंतिम सप्ताह में महान्यायाधिवक्ता कार्यालय गई।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए तत्कालीन काठमाडौँ महानगरपालिका के मेयर और वर्तमान प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा था कि किसी दिन समय आएगा। तत्कालीन मेयर शाह ने लिखा था, ‘सॉरी नानु, तुम्हारे उत्पीडकों के खिलाफ सरकार ने मुकदमा नचलाने का फैसला लिया है। घबराना मत। समय आएगा। ऐसे भेदभाव और अपराधों को कम करने और अपराध करने वालों को सजा दिलाने के लिए तुम्हें और तुम्हारे जैसे कई बच्चों को पढ़ना होगा और समाज को समझना होगा।’

उसी सांसद शर्माजी को रविवार आधी रात काठमाडौँ से पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

सरकार की १०० दिन की कार्ययोजना में वैदेशिक रोजगार क्षेत्र की उपेक्षा

समाचार सारांश की समीक्षा की गई है। बालेन साह के नेतृत्व वाली सरकार ने १०० दिनों के भीतर सम्पन्न करने वाले अपने १०० कार्यों की सूची में वैदेशिक रोजगार क्षेत्र को सीधे रूप से शामिल नहीं किया है। सरकार ने वैदेशिक रोजगार से संबंधित सेवा सुविधाओं को सहज बनाने और भ्रष्टाचार नियंत्रण करने के विषयों को अप्रत्यक्ष रूप से सूचीबद्ध किया है। मध्य पूर्व के घटनाक्रम का नेपाल पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन करने के लिए एक अंतरमंत्रालयीय अध्ययन कार्यदल गठित करने की योजना है।

१५ चैत्र, काठमांडू। बालेन साह नेतृत्व वाली सरकार ने अपनी १०० दिन की कार्यसूची जारी करते हुए वैदेशिक रोजगार क्षेत्र की उपेक्षा की है। सरकार की १०० दिन के भीतर की १०० कार्यसूची में राज्य द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा सुविधाओं को सरल बनाने जैसे विषय शामिल हैं। लेकिन, लगभग ७५ प्रतिशत परिवारों से जुड़ा हुआ वैदेशिक रोजगार क्षेत्र सीधे तौर पर सूची में नहीं है। घोषित सूची में श्रम तथा वैदेशिक रोजगार क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रुप से शामिल किया गया है, पर ३० लाख से अधिक वैदेशिक रोजगार में संलग्न श्रमिकों के अधिकारों और सुरक्षा के विषय स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाए गए हैं।

श्रम एवं आप्रवासन विशेषज्ञ रामेश्वर नेपाल ने बताया कि वैदेशिक रोजगार क्षेत्र को सीधे तौर पर सूची में उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘अगर एक चार-पांच शब्दों में इस क्षेत्र में व्याप्त विकृतियों पर कड़ी कार्रवाई की बात होती तो बेहतर होता। ऐसा लगता है कि इस क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया है।’ उन्होंने कार्यसूची में ‘हम इसका आरंभ करेंगे’ जैसे शब्दों में कंजूसी का भी उल्लेख किया। ‘मर्निंग शोज द डे’ कार्यक्रम के मुताबिक वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में अपेक्षित सुधार अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘वॉइसलेस कम्युनिटी और माइग्रेंट पॉपुलेशन सामाजिक दृष्टि से प्रभावशाली हैं, जो विदेश से राजनीतिक संदेश भी भेजते हैं, लेकिन इन्हें भुलाया गया लगता है।’

सरकार की १०० दिन की कार्यसूची में वैदेशिक रोजगार क्षेत्र में मौजूद विकृतियों और विसंगतियों को सुधारने की ओर भी संकेत मिले हैं। रोजगार सृजन, कौशल विकास और उद्यमशीलता को एकीकृत और सशक्त बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के सीटीईवीटी, श्रम मंत्रालय के व्यावसायिक एवं कौशल विकास संगठनों और उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक व्यवसाय विकास संस्थान को एकीकृत कर ६० दिनों के भीतर ‘रोजगार, कौशल तथा उद्यमशीलता केंद्र’ में विकसित करने की योजना है। यह केंद्र बेरोजगारों के पंजीकरण, सार्वजनिक रोजगार योजनाओं, स्थानीय कौशल की मांग का नक्शानिर्माण, प्रशिक्षण समन्वय, उद्यमशीलता सहकारिता और वैदेशिक रोजगार से लौटे मजदूरों के पुनः एकीकरण के कार्य करेगा।

इसी के साथ मध्य पूर्व में घटित घटनाक्रम के कारण नेपाल और नेपाली लोगों पर पड़ने वाले आर्थिक, वैदेशिक रोजगार, आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए भी एक कार्यदल बनाया जाएगा। यह अंतरमंत्रालयीय उच्चस्तरीय कार्यदल ७ दिनों के भीतर अल्पकालीन, मध्यकालीन और दीर्घकालीन नीतिगत एवं कार्यक्रमगत उपायों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

कार्यसूची की विभिन्न बिंदुओं जैसे १०, १३, १६, १८, १९, २१, २२, २३, २४, २६, २९, ३१, ३२, ३४, ३६, ४३, ५९ और ९५ में श्रम और वैदेशिक रोजगार क्षेत्र के विषयों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबोधित किया गया है। वैदेशिक रोजगार क्षेत्र सीधे नहीं दिखा, फिर भी भ्रष्टाचार नियंत्रण और सुशासन के बिंदुओं के माध्यम से इसे शामिल किया गया है, जो सरकार का दावा है।

बिंदु संख्या १० में सेवा प्रवाह को सरल और तेज़ बनाने का विषय है। वैदेशिक रोजगार जाने वाले मजदूर वर्तमान में पासपोर्ट से लेकर श्रम स्वीकृति प्राप्त करने तक विभिन्न परेशानियों का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी सेवा को सरल बनाना संभव होगा। इसी प्रकार, बिंदु संख्या १३ में कर्मचारियों को अनुशासित और उत्तरदायी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो वैदेशिक रोजगार से जुड़े कर्मियों पर भी लागू होगा।

बिंदु १६ के अनुसार कर्मचारी मूल्यांकन को परिणाम से जोड़ना, सरकारी कार्यालयों के मानकों में सुधार, डिजिटल प्रोफाइल निर्माण, नागरिक सेवा केंद्र स्थापित करना, सेवा प्रक्रियाओं का पुनर्गठन, २४ घंटे शिकायत प्रणाली को सुदृढ़ बनाना और सभी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना जैसे कदम वैदेशिक रोजगारियों को बेहतर सेवा देने में मदद करेंगे। श्रम विशेषज्ञ रामेश्वर नेपाल के अनुसार ये बिंदु उन परेशानियों को समाप्त करने की उम्मीद देते हैं जो सेवा प्राप्त करने के दौरान झेलनी पड़ती हैं।

श्रम मंत्रालय अतिरिक्त १० योजनाओं पर भी कार्य कर रहा है जो श्रम, रोजगार और वैदेशिक रोजगार क्षेत्र से संबंधित हैं। श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता पिताम्बर घिमिरे ने बताया कि १०० दिन की कार्यसूची में शामिल नहीं किए गए विषयों पर भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं। वे कहते हैं कि सूची में शामिल विषयों को तुरंत आगे बढ़ाया जाएगा और अन्य अंतरमंत्रालयीय विषयों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

प्रवक्ता घिमिरे ने कहा, ‘अन्य मंत्रालयों से जुड़े विषयों पर चर्चा चल रही है और मंत्रीजी भी इस विषय पर आगे चर्चा कर रहे हैं।’

नेपाली के अलावा १८ भाषाओं में ६७ सांसदों ने ली शपथ (सूची सहित)

१५ चैत, काठमाडौँ। नेपाली भाषा के अलावा १८ विभिन्न भाषाओं में ६७ प्रतिनिधि सभा के सदस्यों ने शपथ ग्रहण की है। इनमें सबसे अधिक २१ सदस्यों ने मैथिली भाषा में शपथ ली है। गत फागुन २१ गते चुनाव सम्पन्न हुआ था। इस निर्वाचन से चुने गए सांसदों ने इसी चैत १२ गते पद और गोपनीयता की शपथ ली है।

प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) १८२ सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। दूसरी सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस में ३८, तीसरी पार्टी नेकपा एमाले में २५, चौथी पार्टी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी में १७ सांसद हैं। इस निर्वाचन से एक नई पहचान बनाने वाली श्रम संस्कृति पार्टी पांचवीं बड़ी पार्टी है। श्रम संस्कृति पार्टी के ७ सांसद हैं जबकि राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के ५ सांसद हैं। इसके अतिरिक्त १ स्वतंत्र सांसद भी मौजूद है। सभी निर्वाचित सांसदों ने इसी चैत १२ गते शपथ ग्रहण किया।

रिकेल्टन र रोहितको अर्धशतकमा मुम्बईको कीर्तिमानी जित

रिकेल्टन और रोहित के अर्धशतकीय प्रदर्शन से मुंबई को अभूतपूर्व जीत

मुंबई इंडियंस ने आईपीएल क्रिकेट में कोलकाता नाइट राइडर्स को ६ विकेट से हराया है। ओपनर खिलाड़ी रायन रिकेल्टन ने ८१ और रोहित शर्मा ने ७८ रन बनाते हुए पहली विकेट के लिए १४८ रन की साझेदारी की। मुंबई ने १३ साल बाद अपने पहले मैच में जीत दर्ज की और २२१ रन के लक्ष्य को ५ गेंदें बचा कर पूरा किया।

१५ चैत्र, काठमांडू। ओपनर जोड़ी रायन रिकेल्टन और रोहित शर्मा ने अर्धशतक सहित शतकीय साझेदारी की, जिससे मुंबई इंडियंस ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) क्रिकेट में शानदार जीत हासिल की। बंगलेखेद स्टेडियम में रविवार शाम खेले गए इस मैच में मुंबई ने कोलकाता नाइट राइडर्स को ६ विकेट से हराया। कोलकाता द्वारा दिए गए २२१ रन के लक्ष्य को मुंबई ने ५ गेंदें बाकी रहते हुए ४ विकेट खोकर हासिल किया। यह मुंबई का अब तक का सबसे बड़ा रनों का पीछा है।

३००वां टी-२० मैच खेल रही मुंबई ने इस मैच में एक नया कीर्तिमान बनाया। रिकेल्टन ने ४३ गेंदों पर ४ चौके और ८ छक्के लगाते हुए ८१ रन जोड़े, जबकि रोहित ने ३८ गेंदों पर ६ चौके और ६ छक्के के साथ ७८ रन बनाए। इन दोनों ने पहली विकेट के लिए १४८ रन की साझेदारी निभाई। तिलक वर्मा ने १४ गेंदों में २० रन बनाए। कप्तान हार्दिक पंड्या ११ रन अविजित और नमन धीर ५ रन अविजित रहते हुए मैदान में हैं।

कोलकाता की ओर से वैभव अरोरा, सुनिल नरायण और कार्तिक त्यागी ने समान रूप से एक-एक विकेट लिया। रिकेल्टन रन आउट हुए।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी कोलकाता ने २० ओवर में ४ विकेट के नुकसान पर २२0 रन बनाए। अजिंक्य रहाणे ने ४0 गेंदों पर ३ चौके और ५ छक्के के साथ ६७ रन बनाए। अंगकृष रघुवंशी ने ५१ रन, फिन एलेन ने ३७ रन और रिंकु सिंह ने ३३ रन अविजित बनाए।

मुंबई के शारदुल ठाकुर ने ४ ओवर में ३९ रन देकर ३ विकेट लिए, जबकि कप्तान हार्दिक पंड्या ने १ विकेट लिया।

मुंबई ने १३ साल बाद आईपीएल के अपने पहले मैच में जीत दर्ज की है। २०१३ से मुंबई को हमेशा अपने पहले मैच में हार का सामना करना पड़ता था।

अल्टिच्युड एयर हेलिकॉप्टर दुर्घटना रिपोर्ट: ‘व्हाइट आउट’ स्थिति की पुष्टि

संक्षिप्त समाचार १२ कार्तिक २०८२ को सोलुखुम्बु के लोबुचे में अल्टिच्युड एयर का हेलिकॉप्टर ‘९एन–एएमएस’ ‘व्हाइट आउट’ स्थिति में था, इसकी पुष्टि हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हेलिकॉप्टर के अवतरण के वक्त ‘व्हाइट आउट’ की स्थिति और हेलिपैड पर ताजा बर्फ के कारण दृश्यता में कमी आई, जिससे दुर्घटना हुई। सरकार द्वारा गठित समिति ने उड़ान नियंत्रण, खतरे का आकलन और हेलिपैड पर स्पष्ट मार्कर रखने के सुझाव दिए हैं। १५ चैत, Kathmandu। १२ कार्तिक २०८२ को सोलुखुम्बु के लोबुचे में हुई अल्टिच्युड एयर की ‘९एन–एएमएस’ रजिस्ट्रेशन नंबर वाले हेलिकॉप्टर की ‘व्हाइट आउट’ स्थिति में होने की पुष्टि हुई है। दुर्घटना के बाद सरकार द्वारा गठित समिति की जांच की अंतिम रिपोर्ट संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रविवार को प्रकाशित की।

रिपोर्ट के अनुसार, हेलिकॉप्टर के अवतरण के दौरान ‘व्हाइट आउट’ स्थिति उत्पन्न हुई थी। लोबुचे में अवतरण के समय हेलिपैड ताजा बर्फ से ढका हुआ था, जिससे दृश्यता प्रभावित हुई थी। पायलट ने अवतरण के दौरान हेलिकॉप्टर में असंतुलन महसूस किया था। इसी दौरान मुख्य रोटर जमीन से टकराने पर हेलिकॉप्टर पलट गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुर्घटना में कोई मानवीय हानि नहीं हुई, लेकिन हेलिकॉप्टर को गंभीर क्षति पहुँची।

यह हेलिकॉप्टर चार्टर उड़ान पर था और उस दिन यह उसकी छठी उड़ान थी। तकनीकी कारणों से किसी समस्या का पता नहीं चला।

रिपोर्ट में लुक्ला में पर्याप्त जिम्मेदार अधिकारियों के अभाव के कारण उस क्षेत्र में उड़ान का प्रभावी नियंत्रण और जोखिम आकलन पर सवाल उठाएं गए हैं। पायलट ने ताजा बर्फ़ से ढके हेलिपैड पर कम दृश्यता के बावजूद अवतरण जारी रखने से दुर्घटना हुई, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है। ‘व्हाइट आउट’ स्थिति में पायलट असंतुलित हेलिकॉप्टर को नियंत्रित न कर पाने के कारण हेलिकॉप्टर पलटा।

उड़ान के दौरान लोबुचे में ग्राउंड स्टाफ नहीं था जिससे पायलट को सहायता नहीं मिल सकी। इस समस्या को दूर करने के लिए सभी हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों को व्यस्त समय में सब–बेसों पर अनिवार्य कर्मचारी रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, उड़ान से पहले पायलटों को अवतरण स्थल की स्थिति और मौसम की विस्तृत जानकारी रखने की भी सिफारिश की गई है।

दुर्गम क्षेत्र और बचाव उड़ानों के लिए पूर्व उड़ान जोखिम मूल्यांकन तैयार करने की भी रिपोर्ट ने सिफारिश की है। इसके अलावा, लोबुचे जैसे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों के हेलिपैडों पर स्पष्ट और स्तरित मार्कर लगाने की सलाह भी दी गई है। उच्च हिमालय क्षेत्र की उड़ानों के लिए निर्देशिका बनाने की सिफारिश भी रिपोर्ट में शामिल है।

उसी दिन हेलिकॉप्टर कप्तान विवेक खड़्का उस उड़ान में ही सवार थे। लुक्ला से सुबह ७:४१ बजे उड़ान भरने वाला हेलिकॉप्टर ७:५२ बजे लोबुचे पहुंचा था।

जिल्ला अदालतले ओली र लेखकलाई हिरासतमा राख्न म्याद थप गर्न स्वीकृति दियो

जिल्ला अदालत काठमाडौंले पूर्व प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली र तत्कालीन गृहमन्त्री रमेश लेखकलाई हिरासतमा राख्न पाँच दिन म्याद थप गरेको छ। सर्वोच्च अदालतले हिरासतमा राख्न अनुमति माग व्यवहार्य ठहर गर्दै पाँच दिनको म्याद थप गर्ने आदेश जारी गरेको हो। भदौ २३ को प्रदर्शनमा भएको घटनामा आपराधिक आरोपमा ओली र लेखकलाई पक्राउ गरी जिल्ला अदालतमा बुझाइएको थियो।

जिल्ला अदालतका न्यायाधीश आनन्दकुमार श्रेष्ठको इजलासले जरुरी पक्राउ पुर्जीको अनुमति मागलाई स्वाभाविक मान्दै त्यसको समर्थन गरेको छ। अदालतले प्रारम्भिक मितिदेखि लागू हुनेगरी पाँच दिनको म्याद थप गरेको छ। सर्वोच्च अदालतले आदेशमा उल्लेख गरेको छ, ‘ओली र लेखकलाई हिरासतमा राख्न अनुमति माग व्यवहार्य देखिएकाले हिरासतमा राखी आवश्यक प्रक्रिया पूरा गर्न ५ (पाँच) दिनको म्याद थपको अनुमति दिएको छ।’

आरोपितहरूको बयान लिनुपर्ने, घटनामा संलग्न व्यक्तिहरूबाट विवरण सङ्कलन गर्नुपर्ने र कार्की आयोगको प्रतिवेदन अध्ययन गर्नुपर्ने मागका कारण प्रहरीले ओली र लेखकलाई हिरासतमा राख्न आग्रह गरेको थियो। अदालतले दिएको म्याद शनिबार बिहानदेखि गणना सुरु गरिनेछ। त्यसपछि म्याद पूरा भए पश्चात् प्रहरीले ओली र लेखकलाई पुनः अदालतमा पेश गर्नुपर्नेछ। भदौ २३ को प्रदर्शनमा १९ जनाको मृत्यु भएको थियो।

कार्की आयोगले जेएनयू आन्दोलनमा भएको दमनलाई बेवास्ता गर्दै जनसंपत्तिमा क्षति पुर्याएको तथा आपराधिक लापरबाही गरेको आरोपमा तत्कालीन प्रधानमन्त्री ओली, गृहमन्त्री लेखक, प्रहरी महानिरीक्षक खापुङ, काठमाडौंका एसएसपी विश्व अधिकारी, गृहसचिव गोकर्णमणि दुवाडी र प्रमुख जिल्ला अधिकारी छवि रिजाललाई कारबाहीका लागि सिफारिस गरेको थियो। मन्त्रिपरिषद्को बैठकले सुरक्षा निकायका लागि अर्को समिति बनाएर अध्ययन गर्ने र त्यसको निष्कर्षको आधारमा अघि बढ्ने निर्णय गरेको छ।

हाउण्ड्सको सातौँ जित – Online Khabar

केभिसी हाउण्ड्स का सातवाँ लगातार विजय

केभिसी हाउण्ड्स ने हिमालयन जाभा नेशनल बास्केटबॉल लीग २०२६ में लगातार सात मैच जीतते हुए अपनी बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा है। पहले तीन मैचों में पराजित होने के बाद हाउण्ड्स ने अपनी वापसी करते हुए सात मैच लगातार जीतकर शानदार प्रदर्शन किया है। प्रतियोगिता के विजेता को ४ लाख रुपये नकद पुरस्कार, उपविजेता को २ लाख तथा तीसरे स्थान पर रहने वाले को १ लाख रुपये नकद दिया जाएगा। १५ चैत, काठमाडौं।

हिमालयन जाभा नेशनल बास्केटबॉल लीग (एचजेनएबिएल) २०२६ में केभिसी हाउण्ड्स ने लगातार सातवीं जीत दर्ज की है। त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला कवर हॉल में रविवार शाम हुए मैच में हाउण्ड्स ने कीर्तिपुर को ७९-६९ के बड़े अंतर से हराया। हाउण्ड्स ने कीर्तिपुर के खिलाफ पहला क्वार्टर २५-२१, दूसरा १७-११, तीसरा ११-१५ और चौथा २६-२२ से जीता।

शुरुआती तीन मैचों में हार का सामना करने के बावजूद हाउण्ड्स ने दमदार वापसी करते हुए लगातार जीत का सिलसिला कायम रखा है। १० मैचों में सात जीत के साथ १७ अंक जोड़ने के बाद हाउण्ड्स वर्तमान में चौथे स्थान पर है। हाउण्ड्स के असिम श्रेष्ठ को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया है। कीर्तिपुर को यह आठवीं हार है और १० मैचों में उनके कुल अंक १२ हो गए हैं।

शनिवार रात हुए दूसरे मैच में गोल्डेनगेट बास्केटबॉल क्लब ने सोलो बास्केटबॉल क्लब को १००-६० के बड़े अंतर से हराते हुए नौवीं जीत हासिल की। गोल्डेनगेट ने १० मैचों में १९ अंक हासिल कर लिए हैं। गोल्डेनगेट के जैन खान को मैन ऑफ द मैच चुना गया है। नेपाल बास्केटबॉल संघ (नेबा) के आयोजन में हो रहे इस दूसरे संस्करण के एचजेनएबिएल में ८ टीमें भाग ले रही हैं।