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लेखक: space4knews

प्रधानमंत्री ने जेएनजी आंदोलन की रिपोर्ट सहित तीन महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक करने का निर्णय किया


११ चैत्र, काठमांडू। प्रधानमंत्री सुषिला कार्की ने तीन महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री कार्की ने भदौ २३ और २४ की घटनाओं से संबंधित जांच आयोग, २०८२ की रिपोर्ट, नेपाल बाल संगठन और बालमंदिर से जुड़ी उच्च स्तरीय जांच आयोग, २०७७ की रिपोर्ट और प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय द्वारा तैयार सुशासन मार्गचित्र, २०८२ को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री कार्की ने आज (बुधवार) भदौ २३ और २४ की घटनाओं के संबंध में जांच आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को संघीय संसद सचिवालय की पुस्तकालय में अभिलेख रूप में सुरक्षित कर सार्वजनिक किए जाने का निर्णय जताया है, जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार रामबहादुर रावल ने दी।

इसके पूर्व, कल (मंगलवार) उन्होंने नेपाल बाल संगठन और बालमंदिर से संबंधित उच्च स्तरीय जांच आयोग, २०७७ की रिपोर्ट को संघीय संसद सचिवालय की पुस्तकालय में अभिलेख रूप में सुरक्षित कर सार्वजनिक करने का निर्णय लिया था।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने गत चैत्र ३ तारीख को प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय द्वारा तैयार सुशासन मार्गचित्र, २०८२ के क्रियान्वयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय भी किया है। यह मार्गचित्र प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय द्वारा सार्वजनिक किया जाएगा।

जाँचबुझ आयोगको सुझाव : नेपालका सुरक्षा निकायलाई भारत र चीनमा प्रशिक्षण दिनुपर्छ

जाँचबुझ आयोग का सुझाव: नेपाल के सुरक्षा निकायों को भारत एवं चीन में प्रशिक्षण देना आवश्यक

११ चैत, काठमाडौं। जेनजी आन्दोलन जाँचबुझ आयोग ने नेपाल के सुरक्षा निकायों की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत और चीन के सुरक्षा निकायों के साथ समन्वयात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने का सुझाव दिया है। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इससे कूटनीतिक मुद्दों में सुधार होगा। नेपाल के सुरक्षा निकायों के प्रशिक्षण के लिए कूटनीतिक पहल आवश्यक बताई गई है। ‘सुरक्षा निकायों की क्षमता संवर्धन हेतु दो पड़ोसी देशों भारत और चीन के सुरक्षा निकायों के साथ समन्वयात्मक प्रशिक्षण कराया जाए, इसके लिए कूटनीतिक पहल की जाए,’ रिपोर्ट में उल्लिखित है।

आयोग ने नेपाल के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए राजदूतावासों और कूटनीतिक मिशन में नियुक्ति करते समय दलगतता की बजाय योग्य, सक्षम और प्रभावशाली व्यक्तित्वों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। ‘इसके लिए कलेजियम प्रणाली लागू की जानी चाहिए या सिर्फ परराष्ट्र विशेषज्ञों में से ही चयन होना चाहिए, तथा परराष्ट्र मंत्रालय के ८० प्रतिशत और बाकी के २० प्रतिशत अनुपात के आधार पर नीति अपनाई जानी चाहिए,’ रिपोर्ट में कहा गया है। प्रमुख सुधारात्मक बिंदुओं में परराष्ट्र मंत्रालय में प्रभावशाली कूटनीति के लिए विशेषज्ञ समूह “Think Tank” का गठन करना तथा कूटनीतिक समस्याओं के “Real Time” समाधान हेतु सुझावों के अनुरूप पहल करना शामिल है।

नेपाल-भारत सीमासंबंधी कालापानी, लिपुलेक और लिम्पियाधुरा विवाद वर्षो से लंबित हैं, जिन्हें सरकार-सरकार के बीच मजबूत कूटनीति के माध्यम से हल करना आवश्यक है। नेपाल-चीन संबंधों को और मजबूत करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावी बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच पूर्वाधार कनेक्टिविटी जैसे यातायात, रेलमार्ग और हवाई मार्ग के विकास हेतु द्विपक्षीय समझौतों को आगे बढ़ाना और मौजूदा समझौतों के प्रति तत्परता दिखानी चाहिए, रिपोर्ट में कहा गया है।

आर्थिक कूटनीति के क्षेत्र में MCC (मिलेनियम चैलेन्ज कॉर्पोरेशन), BRI (बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव), BIPPA (द्विपक्षीय निवेश प्रोत्साहन तथा संरक्षण समझौता) जैसे समझौतों के बारे में जनता को व्यापक रूप से जानकारी देना तथा देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा करते हुए समझौते करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। सुरक्षा निकायों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए भारत और चीन के सुरक्षा निकायों के साथ समन्वयात्मक प्रशिक्षण कराने हेतु कूटनीतिक पहल की जानी चाहिए, सुझाव आयोग ने दिया है।

अमेरिकी पुलिस के हेलिकॉप्टर की जगह लेगा ‘गार्डियन’ ड्रोन, ब्रिन्क कंपनी का उठान

११ चैत, काठमाडौं। सिएटल स्थित स्टार्टअप कंपनी ‘ब्रिन्क’ ने सार्वजनिक सुरक्षा में नवीनता लाने के उद्देश्य से अपना नया ड्रोन ‘गार्डियन’ लॉन्च किया है।

कंपनी के संस्थापक २३ वर्षीय ब्लेक रेसनिक के अनुसार, यह ड्रोन अमेरिकी पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक हेलिकॉप्टर का विकल्प बनने की क्षमता रखता है।

९११ आपातकालीन सेवाओं के लिए डिज़ाइन किया गया यह ड्रोन ६० मील प्रति घंटे की गति से उड़ सकता है और इसकी बैटरी क्षमता ६२ मिनट तक चलने वाली है।

इस ड्रोन की सबसे प्रमुख विशेषता इसमें जोड़ा गया ‘स्टारलिंक’ पैनल है, जो इसे दुनिया के किसी भी कोने से इंटरनेट से जोड़ने में सक्षम बनाता है।

‘गार्डियन’ में ४के कैमरा, थर्मल इमेजिंग, और शक्तिशाली लाउडस्पीकर लगे हैं, जो ऊँचाई से भी वाहन के लाइसेंस प्लेट को स्पष्ट रूप से पढ़ने में सक्षम हैं। इसके साथ ही, इसका ‘चार्जिंग नेस्ट’ स्वचालित रूप से बैटरी बदलता है और आपातकालीन स्थितियों के लिए ‘डिफिब्रिलेटर’ तथा जीवनरक्षक दवाइयां भी उपलब्ध कराता है।

सैम अल्टमैन जैसे दिग्गज निवेशकों के समर्थन से, ब्रिन्क का मूल्यांकन वर्तमान में आधा अरब डॉलर तक पहुँच चुका है।

अमेरिकी प्रशासन ने चीनी ड्रोन निर्माता डीजेआई पर प्रतिबंध लगाने के बाद, रेसनिक अपनी कंपनी को ‘पश्चिम का डीजेआई’ बनाना चाहते हैं।

अमेरिका में लगभग २० हजार पुलिस विभाग और ३० हजार दमकल कार्यालयों को लक्षित करते हुए, रेसनिक का दावा है कि इस क्षेत्र में ६ से ८ अरब डॉलर का बाजार अवसर मौजूद है।

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पार्टियां प्रत्यक्ष सीट

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समानुपातिक कुल सीट

सिटी सफारी में सवार किशोरी के साथ बलात्कार, चालक गिरफ्तार


११ चैत, विराटनगर । सिटी सफारी से यात्रा कर रही एक किशोरी के साथ जबरदस्ती करणी करने के आरोप में सुनसरी के रामधुनी से एक चालक को गिरफ्तार किया गया है। चैत ६ गते की शाम १७ वर्षीय किशोरी को धरान के जंगल में ले जाकर पीट-पीटकर जबरदस्ती करने के आरोप में २६ वर्षीय रोशन विश्वकर्मा को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

जिला पुलिस कार्यालय सुनसरी के डीएसपी चन्द्र खड्का के अनुसार, पीड़ित किशोरी धरान स्थित अपने घर से मोरंग लौट रही थी, तभी वह बलात्कार की शिकार हुई। उस दिन वह शाम को भोटेपुल चोक पर गाड़ी का इंतज़ार कर रही थी।

इसी दौरान सफारी चालक ने यह कहते हुए कि अन्य गाड़ियाँ वहां नहीं रुकतीं, उसे बस स्टैंड तक पहुँचाने का भरोसा दिया और सफारी में बैठा लिया। लेकिन पुलिस के अनुसार, उसने साकेला पार्क के करीब जंगल में ले जाकर उस पर हमला किया।

पीड़िता ने दर्ज कराई गई लिखित शिकायत में बताया कि आरोपी ने उसे साकेला पार्क के जंगल में ले जाकर पीटा, जबरदस्ती की और मोबाइल फोन भी छीन लिया। गिरफ्तार विश्वकर्मा के खिलाफ अपहरण और जबरदस्ती करणी का मामला चलाने की तैयारी पुलिस कर रही है।

राखेपको निलम्बनमा पर्‍यो एन्फा – Online Khabar

राखेप द्वारा अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) को निलम्बन

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा पश्चात तयार।

  • राष्ट्रीय खेलकुद परिषद् ने अखिल नेपाल फुटबल संघ के नेतृत्व को तीन महीने के लिए निलंबित किया है।
  • एन्फा ने राखेप के निर्देशों की अवहेलना करते हुए १३ चैत को चुनाव आयोजित करने की तैयारी की थी।
  • राखेप ने एन्फा को २४ घंटे का अल्टिमेटम देकर चुनाव रोकने को कहा था।

११ चैत, काठमाडौं। राष्ट्रीय खेलकुद परिषद् (राखेप) ने अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) के नेतृत्व को निलंबित कर दिया है।

बार-बार दिए गए निर्देशों का पालन न करने पर राखेप ने खेलकुद विकास नियमावली २०७७ के दफा २९ के उपधारा (२) के आधार पर एन्फा नेतृत्व को निलंबित किया है।

इस प्रावधान के अंतर्गत किसी भी संघ ने परिषद द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया तो उसे तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है। इसी के तहत पंकज विक्रम नेम्बाङ के नेतृत्व वाली एन्फा तीन महीने के लिए निलंबित हो गई है।

राखेप ने कहा कि “विद्यमान कानून, नियम और संघ के स्वीकृत विधान के अनुरूप कार्यान्वयन की बार-बार लिखित रूप में दी गई निर्देशों को लागू करने के बजाय, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के निर्देशों को बाध्यकारी बताकर राष्ट्रीय कानून की श्रेष्ठता को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया है।”

राष्ट्रीय खेलकुद परिषद् से स्वीकृत विधान के तहत प्राप्त दायित्वों और जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाने के बजाय संस्थाएं खुद को स्वायत्त बताकर परिषद से मांगे गए संतोषजनक जवाब नहीं देतीं, यह राखेप का मानना है।

“खेल संघ द्वारा राष्ट्रीय कानून एवं स्वीकृत विधान का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है तथा अखिल नेपाल फुटबल संघ को परिषद को भेजे गए लिखित जवाब में उचित कारण नहीं दिए गए। साथ ही राष्ट्रीय खेलकुद विकास नियमावली, २०७९ के उपनियमों का भी पालन नहीं किया गया। इसीलिए राष्ट्रीय खेलकुद विकास ऐन, २०७७ की धारा २९ उपधारा (२) के तहत तीन महीने के लिए निलंबित किया गया है,” पत्र में उल्लेख किया गया है।

एन्फा का वर्तमान नेतृत्व अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही विधान में न होने वाले अर्ली इलेक्शन कराने पर उतारू था, जिससे विवाद पैदा हुआ था।

एन्फा ने चुनाव की प्रक्रिया शुरू की तो राखेप ने बिना स्वीकृति चुनाव रोकने के लिए बार-बार पत्र जारी किया था। बावजूद इसके एन्फा ने १३ चैत को चुनाव आयोजित करने का निर्णय लिया, जिसके कारण राखेप ने कार्रवाई की।

राखेप ने मंगलवार को एन्फा को “कारवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?” इसका जवाब २४ घंटे के भीतर देने के लिए अल्टिमेटम भी दिया था। एन्फा ने चुनाव रोकने से मना कर दिया, जिसके बाद राखेप ने निलंबन की कार्रवाई की।

राखेप के निलंबन के बाद नेपाली फुटबॉल संकट में फंस सकता है। संभव है कि फिफा भी एन्फा को निलंबित कर सकता है, जिससे नेपाल को अंतरराष्ट्रीय खेल और फिफा की सहायता से वंचित होना पड़ सकता है।

राखेप ने कई नियमों का पालन करने के लिए एन्फा को निर्देश भी दिए हैं।

प्रमुख निर्देश:

१. राष्ट्रीय खेल संघ महासंघ के विधान में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावना और संक्षिप्त नाम जोड़ा जाना चाहिए, जो राष्ट्रीय खेलकुद विकास नियमावली, २०७९ के नियम ७ के खंड (झ) के अनुसार परिषद से अनुमोदित हो।

२. संघ के विधान में “ऐन” की परिभाषा में राष्ट्रीय खेलकुद विकास ऐन, २०७७ को शामिल किया जाना चाहिए।

३. संघ के विधान में “नियमावली” की परिभाषा में राष्ट्रीय खेलकुद विकास नियमावली, २०७९ को शामिल किया जाना चाहिए।

४. संघ के विधान में राष्ट्रीय खेलकुद विकास ऐन, २०७७ के दफा २२ के खंड (ग) के अनुसार हर चार वर्ष में लोकतांत्रिक तरीके से संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों का निर्वाचन होना अनिवार्य है।

५. राष्ट्रीय खेलकुद विकास ऐन, २०७७ के दफा २२ के उपदफा ४ और ५ अनुसार पदाधिकारियों और सदस्यों के निर्वाचन की व्यवस्था हो।

६. संघ के विधान की धारा २२ के अनुसार प्रदेश तथा जिला संघों को राष्ट्रीय खेलकुद विकास ऐन, २०७७ की धारा २३ और २४ के मुताबिक स्थानीय स्तर पर संघ गठन एवं खेल संरचना का निर्माण करना होगा, और तहगत निर्वाचन कर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

७. संघ के विधान में राष्ट्रीय खेलकुद विकास नियमावली, २०७९ के नियम ७ के खंड (ग) के अनुसार प्रत्येक खेल संघ को आर्थिक वर्ष समाप्ति के तीन महीने के भीतर साधारण सभा आयोजित करनी चाहिए, प्रत्येक चार वर्ष में आवधिक निर्वाचन करना चाहिए, और चुनाव के लिए परिषद से स्वीकृति लेनी चाहिए।

८. प्रचलित कानून के अनुसार संघ के विधान में आवश्यक संशोधन तथा परिमार्जन किए जाने चाहिए।

९. अखिल नेपाल फुटबल संघ के चुनाव से संबन्धित विधान की धाराएं ३३ से ३७ के बीच स्वीकृत विधान और नियमों के तहत समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

सड़क खोदते समय दबकर एस्कावेटर चालक की मौत

समाचार संक्षेप

अद्यतन विवरण सहित।

  • लमजुङ के मर्स्याङ्दी गाउँपालिका-२ में सड़क खोदने के दौरान एक एस्कावेटर चालक विक्की महतो दबने से घायल हो गए और उनकी मृत्यु हो गई।
  • पत्थरों के साथ भूस्खलन होकर दबने के बाद उन्हें बचा कर अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
  • पुलिस ने घटना की संपूर्ण जांच शुरू कर दी है और शव परीक्षण के लिए परिजनों के आने का इंतजार किया जा रहा है।

११ चैत्र, लमजुङ। लमजुङ के मर्स्याङ्दी गाउँपालिका-२ में सड़क खोदते समय दबकर आज एक एस्कावेटर चालक की मौत हो गई है।

भाचे-भदौरे सड़क खंड को चौड़ा करने के कार्य के दौरान नवलपुर (बर्दघाट सुस्ता पूर्व) के कावासोती नगरपालिका-१२ के स्थायी निवासी लगभग २० वर्षीय विक्की महतो एस्कावेटर सहित दब गए, जिससे उनकी मृत्यु हुई। यह जानकारी जिला पुलिस कार्यालय के प्रहरी नायब उपरीक्षक दीपेन्द्रकुमार बस्नेत ने दी।

पत्थरों के साथ भूस्खलन के कारण दबा हुआ विक्की महतो बचाया गया और बेसिसहर स्थित प्रदेश अस्पताल उपचार हेतु लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतक का शव अस्पताल में रखा गया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है। परिजन आने के बाद गुरुवार को शव परीक्षण किया जाएगा और शव सौंपा जाएगा। पुलिस मामले की संपूर्ण जांच कर रही है।

आईजीपी कार्की ने बताया: जेनजी आन्दोलन में कमांड संभालने का मौखिक आदेश

समाचार सारांश

OK AI द्वारा सिर्जना गरिएको। सम्पादकीय समीक्षा गरियो।

  • तत्कालीन एआईजी दानबहादुर कार्की ने बताया कि जेनजी आन्दोलन के दौरान सहकर्मियों के दायित्व से हट जाने पर उन्होंने मौखिक आदेश पर काठमांडू उपत्यका पुलिस कार्यालय का कमांड संभाला।
  • कार्की ने कहा कि २४ भदौ को ४,३९६ पुलिस तैनात थे और सामाजिक संजाल बंद करने के बारे में तत्कालीन संचार मंत्री को प्रतिबंध हटाने का सुझाव दिया।
  • उन्होंने बताया कि जब कैदियों की जान खतरे में थी तो मानवाधिकार मानकों का पालन करते हुए रिकॉर्ड के साथ कैदियों को सीमित और विशेष परिस्थितियों में रिहा करने के निर्देश दिए गए।

११ चैत, काठमांडू। जेनजी आन्दोलन के दौरान सहकर्मियों के बीमार होने का बहाना बनाने पर अपने दायित्व से हट जाने पर तत्कालीन एआईजी (अब आईजीपी) दानबहादुर कार्की ने बताया कि उन्होंने मौखिक आदेश के तहत काठमांडू उपत्यका पुलिस कार्यालय का कमांड संभाला।

२३ और २४ भदौ को हुए जेनजी आन्दोलन की जांच के लिए गठित गौरीबहादुर कार्की नेतृत्व के आयोग को बयान देते हुए कार्की ने ये तथ्य बताए।

२३ भदौ तक वे पुलिस मुख्यालय के मानव संसाधन विभाग में कार्यरत थे, और उस समय काठमांडू उपत्यका पुलिस कार्यालय रानीपोखरी एआईजी रहित था। २४ भदौ को कोई भी एआईजी कमांड संभालने को तैयार नहीं था या बीमार होने का बहाना बना रहा था, जिसके कारण कार्की ने मौखिक आदेश पर कमांड संभाला।

२४ भदौ को वे सुबह ९ बजे कार्यालय पहुंचे और निर्देशन दिए, फिर गृह मंत्रालय गए। हिंसा, तोड़फोड़ और हमले की एक साथ घटनाओं के बीच निर्णय लेने में समय की कमी और दबाव था।

तत्कालीन उपत्यका में ४,३९६ पुलिस तैनात थे, कार्की ने बताया। सोशल मीडिया बंदी की खबर आने पर तत्कालीन संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुङ को सामाजिक संजाल प्रतिबंध खोलने का सुझाव दिया गया था।

२३ भदौ को संभावित नुकसान रोकने के लिए इस्तीफा जैसे उपायों की भी सिफारिश की गई थी।

राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने के जेल से बाहर आने पर भी कार्की ने बयान में कहा, “तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक पद के लिए अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा में कुछ प्रतियोगियों ने एक सुनियोजित शिकायत के माध्यम से दबाव बनाया, इसके प्रमाण मौजूद हैं।”

हिरासत में रखे कैदियों की रिहाई के बारे में कार्की ने कहा, “कैदियों की जान खतरे में होने की विशेष स्थिति में मानवाधिकार के न्यूनतम मानकों का पालन करते हुए रिकॉर्ड के साथ, उपस्थित होने की शर्त पर ही सीमित और विशेष परिस्थितियों में कैदियों को रिहा करने के निर्देश दिए गए थे।”

प्रदेश र स्थानीय सरकारको थप प्रभावकारिताका लागि आवश्यक संयोजनको जिम्मा विश्वप्रकाशलाई

प्रदेश और स्थानीय सरकार की प्रभावकारिता बढ़ाने के लिए आवश्यक समन्वय की जिम्मेदारी विश्वप्रकाश शर्मा को सौंपी गई

समाचार सारांश

समीक्षा कर संपादकीय जांच की गई।

  • नेपाली कांग्रेस ने प्रदेश और स्थानीय सरकार की समीक्षा, समन्वय और प्रभावकारिता बढ़ाने के लिए उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी है।
  • केन्द्रीय कार्यसमिति ने शर्मा को प्रदेश संसदीय दल, प्रदेश सरकार और स्थानीय तह में पार्टी के प्रतिनिधि जनप्रतिनिधियों की भूमिका की समीक्षा और समन्वय करने की जिम्मेदारी दी है।
  • शर्मा की संयोजकता में प्रदेश सभापति की भागीदारी से अध्ययन, परामर्श और प्रस्ताव के लिए एक अलग समिति का गठन किया जाएगा।

११ चैत्र, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस ने प्रदेश और स्थानीय सरकार की समीक्षा, समन्वय और प्रभावकारिता बढ़ाने के लिए आवश्यक समन्वय की जिम्मेदारी उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा को सौंपने का निर्णय लिया है।

केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक में बुधवार को उपसभापति शर्मा को प्रदेश और स्थानीय सरकार की समीक्षा, समन्वय एवं प्रभावकारिता बढ़ाने की जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया।

‘यह बैठक प्रदेश संसदीय दल, प्रदेश सरकार और स्थानीय तह में पार्टी द्वारा प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका की समीक्षा, समन्वय तथा प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक समन्वय की जिम्मेदारी उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा को देने का निर्णय करता है,’ महामंत्री प्रदीप पौडेल ने बैठक में सुनाए गए इस निर्णय को उद्धृत करते हुए एक केन्द्रीय सदस्य ने जानकारी दी।

उन नेताओं के अनुसार, प्रदेश सरकार में निरंतर बने रहने या न रहने तथा पूर्व की पारस्परिक सहमतियों के लागू करने के विषय में दृष्टिकोण बनाने हेतु प्रदेश सभापति की भागीदारी के साथ अध्ययन, परामर्श और प्रस्ताव के लिए शर्मा की संयोजकता में एक अलग समिति गठित की जाएगी।

मिथिला संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए महोत्सव का आयोजन होगा

समाचार सारांश

OK AI द्वारा तयार। सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • रंग मिथिला हेरिटेज एंड कल्चरल फेस्टिवल आगामी १५ और १६ चैत्र को काठमांडू के नेपाल पुलिस क्लब में आयोजित होगा।
  • महोत्सव संयोजक संगम गुप्ता ने बताया कि मिथिला सभ्यता की कला, संस्कृति, संगीत और परंपराओं के संरक्षण एवं प्रचार के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
  • दो दिवसीय इस कार्यक्रम में कलाकार, विद्वान एवं सांस्कृतिक साधक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे और मिथिला संस्कृति के राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार का लक्ष्य रखा गया है।

११ चैत्र, काठमांडू । रंग मिथिला हेरिटेज एंड कल्चरल फेस्टिवल आगामी १५ और १६ चैत्र को काठमांडू में आयोजित होगा।

रंग मिथिला संस्था के आयोजन में यह महोत्सव काठमांडू के नेपाल पुलिस क्लब में होगा, जिससे महोत्सव संयोजक संगम गुप्ता ने जानकारी दी।

मिथिला सभ्यता की समृद्ध कला, संस्कृति, संगीत तथा परंपराओं के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम में कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक साधक अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करेंगे और मिथिला संस्कृति की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने का लक्ष्य रखा गया है।

सभामुखले सुरक्षा निकायलाई गोली प्रहार रोक्न आदेश दिने व्यवस्था छैन – Online Khabar

सभामुख को सुरक्षा एजेंसियों को गोली चलाने से रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है

फाइल तस्वीर


समाचार सारांश

  • विघटित प्रतिनिधिसभा के सभामुख देवराज घिमिरे ने कहा है कि सभामुख के पास प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या सुरक्षा एजेंसियों को गोली चलाने से रोकने के लिए सीधे आदेश देने का कानूनी अधिकार नहीं है।
  • घिमिरे ने सुझाव दिया है कि संघीय संसद भवन की सुरक्षा के लिए सिंगल कमांड प्रणाली पर आधारित थ्रेट एनालिसिस के अनुसार स्पष्ट प्रोटोकॉल के साथ आवश्यक संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं।
  • घिमिरे ने भाद्र 23 और 24 की जनजी आंदोलन की घटना पर किसी ने जोखिम का अनुमान नहीं लगाया और सुरक्षा सर्तकता अपर्याप्त रही।

११ चैत, काठमांडू । विघटित प्रतिनिधिसभा के सभामुख देवराज घिमिरे ने कहा है कि सभामुख के पास प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या सुरक्षा एजेंसी को गोली चलाने से रोकने हेतु सीधे आदेश देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

यह बयान जांच आयोग की रिपोर्ट में शामिल है। आयोग को दिए बयान में घिमिरे ने कहा कि संघीय संसद भवन की सुरक्षा के लिए सिंगल कमांड प्रणाली पर आधारित थ्रेट एनालिसिस के अनुरूप स्पष्ट प्रोटोकॉल के साथ आवश्यक संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात करना अनिवार्य है।

जनजी आंदोलन के दौरान संघीय संसद की बैठक चल रही थी और नई बानेश्वर में स्थित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में तोड़फोड़ व आगजनी हुई थी।

आयोग में बयान देते हुए घिमिरे ने बताया कि भाद्र २३ को वह संसद सचिवालय सिंहदरबार में संसदीय सुनवाई समिति के अध्यक्ष पद की शपथ और विधेयक प्रमाणीकरण में व्यस्त थे।

भाद्र २४ को वह बालुवाटार में अपने निवास पर थे। उन्होंने कहा, ‘संघीय संसद भवन की सुरक्षा गृह मंत्रालय के अधीन सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है, सभामुख का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।’

उन्होंने कहा कि भाद्र २३ और २४ के आंदोलन की जोखिम किसी ने नहीं जानी और सुरक्षा तैयारी भी पर्याप्त नहीं थी।

घिमिरे ने बयान में कहा, ‘आगामी अधिवेशन से पहले सामान्य चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन जनजी आंदोलन के इतना बड़े खतरे का किसी ने अनुमान नहीं लगाया था, मुझे भी कोई विशेष सूचना नहीं मिली थी।’

भाद्र २३ को कुछ प्रदर्शनकारी संसद भवन परिसर के अंदर प्रवेश करने में सफल रहे। सुरक्षा एजेंसीयों को उम्मीद से अधिक संख्या में और अलग किस्म की भीड़ के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं हो पाई।

सुरक्षा एजेंसियों के बीच प्रभावकारी समन्वय का अभाव भी एक कारण था, उन्होंने उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘संसद भवन की दीवार, गेट और संरचनात्मक कमजोरियों के कारण सुरक्षा चुनौती बढ़ गई है। हालांकि, ऐसे संरचनात्मक सुधार और सुरक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी कार्यपालिका और गृह मंत्रालय के अधीन है, इसलिए मैंने सभामुख के रूप में पहले कोई विशेष पहल नहीं की।’

भाद्र २३ को संसद परिसर में गोलीबारी की सूचना दोपहर को मिली और इसके बाद उन्होंने संसद सचिवालय के महासचिव के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों से आवश्यक समन्वय करने निर्देश दिए।

उन्होंने कहा, ‘बल प्रयोग के सिद्धांत और क्रमबद्धता पर प्रश्न उठाए गए, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने जोखिमपूर्ण स्थिति में भी राज्य की संपत्ति, संसद भवन और जनता के धन की सुरक्षा के लिए पूरा प्रयास किया।’

बल प्रयोग के सिद्धांत, गोली चलाने की आवश्यकता और औचित्य जैसे विषय सुरक्षा नीति, कानून और परिस्थिति के आधार पर संबंधित विशेषज्ञ और एजेंसियों को मूल्यांकन करना चाहिए, उन्होंने कहा।

अंत में उन्होंने कहा, ‘यह विषय सभामुख के स्पष्ट क्षेत्राधिकार में नहीं आता। सभामुख के पास प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या सुरक्षा एजेंसियों को गोली चलाने से रोकने का आदेश देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संघीय संसद भवन की सुरक्षा हेतु सिंगल कमांड प्रणाली पर आधारित थ्रेट एनालिसिस के अनुरूप स्पष्ट प्रोटोकॉल के साथ उचित संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात करने की व्यवस्था होनी चाहिए – यह मेरा सुझाव है।’

यातायात व्यवसायियों की चेतावनी- यदि सरकार किराया नहीं बढ़ाएगी तो हम खुद ही वसूल करेंगे

समाचार सारांश

  • नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रीय महासंघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि किराया नहीं बढ़ाया गया तो वे खुद से अधिक किराया वसूल करेंगे।
  • यातायात व्यवस्था विभाग ने यात्रुवाहक वाहनों में ११.३३ प्रतिशत किराया बढ़ाने की सिफारिश की है, लेकिन मंत्रालय ने किराया नहीं बढ़ाया है।
  • नेपाल आयल निगम द्वारा डीजल पर प्रति लीटर १० रुपये मूल्य वृद्धि के बाद व्यवसायी किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

११ चैत, काठमांडू। यातायात व्यवसायियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि वह किराया नहीं बढ़ाएगी तो वे खुद किराया बढ़ाकर वसूल करेंगे।

बुधवार को जारी विज्ञप्ति में नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रीय महासंघ ने किराया स्वयं घोषित कर वसूल करने की चेतावनी दी है। यातायात व्यवस्था विभाग ने यात्रुवाहक वाहनों के लिए ११.३३ प्रतिशत किराया बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन भौतिक पूर्वाधार तथा यातायात मंत्रालय ने किराया नहीं बढ़ाया है, इसलिए महासंघ ने यह चेतावनी जारी की है।

‘किराया समायोजन के लिए अनुरोध करने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण व्यवसायी रोजाना लाखों रुपये घाटे में सेवा चला रहे हैं, जिससे सेवाएं बंद करने की स्थिति आ रही है। यातायात व्यवस्था विभाग द्वारा किराया समायोजन की सिफारिश के अनुसार किराया घोषित करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, इसलिए हम किराया समायोजन की जोरदार मांग कर रहे हैं,’ महासंघ के महासचिव डेकनाथ गौतम ने जारी विज्ञप्ति में कहा है।

नेपाल आयल निगम द्वारा २ चैत से लागू होने वाले डीजल के दाम में प्रति लीटर १० रुपये वृद्धि के बाद यातायात व्यवसायी किराया बढ़ाने के इच्छुक हैं।

फागुन २१ गतेको निर्वाचनलाई मानक बनाउने आवश्यकता: प्रधानमन्त्री कार्की

समाचार सारांश

चयन गरिएको समाचार।

  • प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन, २०८२ के मानक आगामी चुनावों में भी बरकरार रखने की आवश्यकता जताई।
  • उन्होंने बताया कि इस निर्वाचन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की प्रतिष्ठा बढ़ाई और लोकतंत्र को मजबूती दी।
  • प्रधानमंत्री कार्की ने लगभग १० लाख युवा मतदाताओं द्वारा उत्साहपूर्वक मतदान कर स्वच्छ, स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सम्पन्न करने की जानकारी दी।

११ चैत, काठमाडौँ । प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन, २०८२ के सफल आयोजन के संदर्भ में कहा है कि निर्वाचन आयोग द्वारा स्थापित मानक आगामी चुनावों में भी बनाए रखना आवश्यक है।

प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन, २०८२ की सफलता के अवसर पर निर्वाचन आयोग नेपाल ने आज बहादुरभवन स्थित कार्यालय परिसर में आयोजित जलपान समारोह में प्रधानमंत्री कार्की ने कहा कि देश के किसी भी मतदान केन्द्र पर पुनःमतदान किए बिना शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव का सफल संचालन हुआ, यह मानक आगामी चुनावों में भी बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘इस बार के चुनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की छवि को बहुत बेहतर बनाया है, इससे नेपाल के प्रति सम्मान बढ़ा है, इस चुनाव ने संवैधानिक प्रणाली और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है तथा इससे लोकतंत्र का संवर्धन भी हुआ है।’

प्रधानमंत्री कार्की ने याद दिलाया कि भदौ के अंतिम सप्ताह में प्रधानमंत्री नियुक्ति के समय कानूनी और राजनीतिक उठापटक तथा सुरक्षा संवेदनशीलता थी, लेकिन उस स्थिति से चुनाव सम्पन्न कर लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में सफलता मिली।

उन्होंने बताया कि प्रारंभिक दिनों में चुनाव चुनौतीपूर्ण था, लेकिन आयोग के संकल्प और सरकार के सहयोग से यह संभव हो पाया।

चुनाव घोषणाक्रम जारी अध्यादेश के अनुसार, लगभग १० लाख युवा मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक मतदाता नामावली में पंजीकरण कर चुनाव में भाग लिया और जनप्रतिनिधि चुने गए, यह जानकारी भी प्रधानमंत्री कार्की ने दी। उन्होंने स्वच्छ, स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा भयमुक्त चुनाव सम्पन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग का धन्यवाद दिया।

सुदूरपश्चिममा क्षयरोगको समस्या बढ्दै, चालु आर्थिक वर्षमा ६५ जनाको मृत्यु

सुदूरपश्चिम में क्षयरोग की समस्या बढ़ती जा रही है, चालू आर्थिक वर्ष में 65 लोगों की मौत


11 चैत्र, सुदूरपश्चिम। जनस्वास्थ्य की प्रमुख समस्याओं में से एक क्षयरोग की समस्या सुदूरपश्चिम प्रदेश में लगातार बढ़ती जा रही है।

क्षयरोग के उपचार के लिए ‘डॉट्स’ कार्यक्रम (चिकित्सक की देखरेख में दवा देने की विधि) प्रभावी साबित हो रहा है, लेकिन समुदाय में अपेक्षित संख्या में रोगी सामने नहीं आ पा रहे हैं, जिससे इस रोग की समस्याएँ बढ़ रही हैं, स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया है। स्वास्थ्य निर्देशनालय दिपायल के क्षय–कुष्ठ निरीक्षक मनोज ओझा ने कहा कि लक्ष्य के अनुसार रोगी खोजने में असमर्थता के कारण रोग की गंभीरता बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, ‘हमारे देश में उपचार पद्धति अच्छी है, लेकिन उपचार के दायरे में न आने वाले व्यक्तियों के कारण रोग से होने वाली मौतों का अनुमान है।’ उन्होंने बताया, ‘प्रदेश भर में 40 प्रतिशत रोगी आज भी उपचार में नहीं आ पा रहे हैं।’

लक्षण दिखने वाले रोगियों का समय रहते स्वास्थ्य संस्था में न आना, सभी जगहों पर पीसीआर (रोग का पता लगाने की जांच) की पहुँच नहीं होना, जांच के काम में क्षेत्रीय स्तर पर कमी होना, और लक्षणों के बावजूद उपचार में देरी जैसे कारणों से रोगियों की संख्या बढ़ रही है, ओझा ने बताया।

जनसंख्या का दबाव, आवागमन, भारत के साथ खुली सीमा, गरीबी और जनचेतना की कमी जैसी चुनौतियाँ क्षयरोग नियंत्रण में बाधाएँ पैदा कर रही हैं, स्वास्थ्यकर्मी बताते हैं।

प्रदेश में दर्ज मरीजों में 65 वर्ष से ऊपर के केवल 26 प्रतिशत रोगी हैं। सबसे ज्यादा मरीज कैलाली जिले में पाए गए हैं, जबकि प्रति लाख जनसंख्या के हिसाब से कंचनपुर में सबसे अधिक रोगी दर्ज हैं।

प्रदेश में वार्षिक क्षयरोगी की संख्या बढ़ रही है। आर्थिक वर्ष २०७७/७८ में 2826, २०७८/७९ में 3424, २०७९/८० में 3214, २०७९/८१ में 3618, जबकि आर्थिक वर्ष ०८१/८२ में 3648 मरीज दर्ज किए गए हैं, स्वास्थ्य निर्देशनालय के आंकड़े दिखाते हैं।

चालू आर्थिक वर्ष के माघ महीने तक प्रदेश में 1840 क्षयरोगी मरीज पाए गए हैं। इनमें कैलाली में 812 और कंचनपुर में 504 मरीज हैं। आर्थिक वर्ष ०८१/८२ के माघ मसांत तक डोटी में 78, अछाम में 83, बैतड़ी में 83, बझाङ में 58, बाजुरा में 81, डडेलधुरा में 72 और दार्चुला में 69 क्षयरोग के मरीज पहुंच चुके हैं।

चालू वर्ष में प्रदेश के कुल मरीजों में 65 लोगों की मृत्यु हुई है, निर्देशनालय ने यह जानकारी दी है। नेपाल में क्षयरोगी में से 75 प्रतिशत से अधिक फेफड़ों के क्षयरोग से पीड़ित होते हैं। इसके अलावा ग्रंथि, गला, पेट, जिगर, गुर्दा और मस्तिष्क में भी क्षयरोग संक्रमण होते हैं।

सरकार क्षयरोग का उपचार निशुल्क कर रही है। सरकारी योजना है कि सन् 2035 तक क्षयरोग को समाप्त कर इससे होने वाली मृत्यु में 95 प्रतिशत की कमी लाई जाए।

लंबे समय तक खांसी आना, बलगम में खून आना, सांस लेने में परेशानी या छाती में भारीपन, अचानक वजन कम होना, अधिक पसीना आना और थकान महसूस होने पर नजदीकी स्वास्थ्य चौकी जाकर स्वास्थ्य परीक्षण करवाने का स्वास्थ्यकर्मियों ने सुझाव दिया है। –रासस

१० वर्ष पहिले छोरा बिते, अहिले छोरी इनिसा – Online Khabar

प्रहरी ने जांच रिपोर्ट सौंपा

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के साथ।

  • नेपाल पुलिस ने १६ वर्षीया इनिसा विक की मौत के मामले की जांच पूरी कर रिपोर्ट जिला सरकारी वकील कार्यालय में सौंप दी है।
  • पुलिस ने गिरफ्तार चारों आरोपियों के खिलाफ जान से मारने और बलात्कार के आरोपों में मामला चलाने की सिफारिश की है।
  • पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने तक इनिसा के शव को कर्णाली प्रदेश अस्पताल के शव गृह में रखने का फैसला किया है।

११ चैत्र, सुर्खेत। नेपाल पुलिस ने १६ वर्षीय बच्ची इनिसा विक की मौत के मामले की जांच पूरी कर सरकारी वकील कार्यालय में रिपोर्ट जमा की है। जिला पुलिस कार्यालय सुर्खेत के प्रवक्ता और डीएसपी मोहनजंग बुढथापा ने बताया कि जांच पूरी कर रिपोर्ट जिला सरकारी वकील कार्यालय को सौंप दी गई है।

उन्होंने कहा, ‘पुलिस ने आरोपी के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट सरकारी वकील कार्यालय में प्रस्तुत की गई है।’ आगे की कार्रवाई अब सरकारी वकील कार्यालय की होगी। पुलिस ने रिपोर्ट के निष्कर्ष के संबंध में अधिक जानकारी नहीं दी है।

डीएसपी बुढथापा के अनुसार इस घटना से संबंधित कुछ तकनीकी रिपोर्टें प्राप्त हो चुकी हैं और कुछ अभी भी आना बाकी हैं। ‘अभी दो रिपोर्टें आना बाकी हैं। चूंकि ये रिपोर्टें अदालत में केस की सुनवाई के दौरान भी पेश की जा सकती हैं, इसलिए रिपोर्ट पहले ही सौंप दी गई है,’ उन्होंने बताया।

इनिसा घटना की जांच के लिए सुर्खेत आए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) की टीम ने जांच पूरी कर रविवार को ही काठमांडू वापस लौट गई है। गुर्भाकोट–६, बडाखोली की स्थायी निवासी और वर्तमान में वीरेन्द्रनगर–१ में रहने वाली १६ वर्षीय इनिसा की २३ फागुन को वीरेन्द्रनगर में मौत हुई थी।

२३ फागुन की सुबह लगभग ६ बजे, ट्यूशन पढ़ने जाने वाली इनिसा उसी दिन सुबह करीब ९ बजे वीरेन्द्रनगर–४ के सहिद पार्क के पास जनजागरण सामुदायिक वन में बेहोशी की हालत में मिली थीं। पुलिस ने उन्हें प्रदेश अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उसी दिन पुलिस ने एक १६ वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया था। उसकी बयान के आधार पर २४ फागुन को तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर जांच आगे बढ़ाई गई। घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार ने सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या का दावा करते हुए गिरफ्तार चारों आरोपियों के खिलाफ जान से मारने और बलात्कार के मुकदमे दर्ज किए थे।

पुलिस की रिपोर्ट में गिरफ्तार चारों आरोपियों के खिलाफ मामला चलाने की सिफारिश की गई है। २३ फागुन को गिरफ्तार १६ वर्षीय युवक मुख्य आरोपी बताया गया है। २४ फागुन को गिरफ्तार अन्य तीन युवकों के बयान और विभिन्न स्थानों के सीसीटीवी फुटेज का समय मेल खाने की पुलिस ने पुष्टि की है।

‘अब तक २४ फागुन को गिरफ्तार उन तीन युवकों में किसी की संलिप्तता पुष्टि नहीं हुई है,’ जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘वे घटना स्थल पर लगभग ९ बजे मदद के लिए पहुंचे थे। यह सीसीटीवी फुटेज से साबित होता है।’

पुलिस का कहना है कि २४ फागुन को गिरफ्तार हुए तीनों युवक अपने मित्र की मदद के लिए घटना स्थल पर गए थे। वे घटना में संलिप्त नहीं हैं, लेकिन वहां लापरवाही बरतने के आरोप में शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने उचित समय पर पुलिस को सूचना नहीं दी, और बजाय इसके दूसरों को देर से जानकारी दी, जिससे सामान्य कारणों से भी इनके खिलाफ मामला चल सकता है।

घटना को १९ दिन बीत गए हैं, लेकिन इनिसा का शव अभी भी कर्णाली प्रदेश अस्पताल के शव गृह में रखा हुआ है। पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने तक अंतिम संस्कार न करने का निर्णय लिया है।

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व सबसे हिंसक दौर से गुजर रहा है : संयुक्त राष्ट्र

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विश्व द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से सबसे हिंसक दौर से गुजर रहा है।
  • मध्य पूर्व के युद्ध ने विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालते हुए तेल, ईंधन और गैस के दाम बढ़ा दिए हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से सुरक्षा परिषद के फैसलों को लागू कर संघर्ष खत्म करने हेतु कूटनीतिक प्रयास करने का आग्रह किया है।

११ चैत, जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विश्व वर्तमान में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे हिंसक दौर से गुजर रहा है। खासकर मध्य पूर्व क्षेत्र में तेज हुए संघर्षों ने आम नागरिकों के जीवन को गहरा असर पहुँचाया है और इसका असर वैश्विक स्तर पर फैल रहा है।

संयुक्त राष्ट्र परियोजना सेवा कार्यालय के कार्यकारी निदेशक जोर्ज मोरेइरा दा सिल्वा के अनुसार, हिंसा और अस्थिरता के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, और यह संख्या हर घंटे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व के संघर्ष की सीमा लांघकर विश्व अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है, जिससे तेल, ईंधन तथा गैस की कीमतों में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिसका प्रभाव विश्वव्यापी हो रहा है।

विशेष रूप से एशिया और अफ्रीका के विकासशील देशों पर इसका ज्यादा विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस वर्ष विश्व भर में भूखमरी की समस्या और गम्भीर होने की आशंका है और प्रभावित लोगों की संख्या करोड़ों तक पहुंच सकती है।

संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से सुरक्षा परिषद के निर्णयों को लागू करने और कूटनीतिक एवं शांति पूर्ण उपायों द्वारा संघर्ष समाप्त करने का आग्रह किया है।

यह कार्यालय विश्व के १०० से अधिक देशों में परियोजना प्रबंधन, खरीद एवं अवसंरचना विकास से संबंधित सेवाएं प्रदान करता आ रहा है।