Skip to main content

लेखक: space4knews

पाँच दिन बाद गिरा शेयर बाजार, बढ़ा कारोबार

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा गरिएको।

  • नेप्से संकेतांक बुधवार को २४.४५ अंक की गिरावट के साथ २९३५ अंक पर पहुंचा।
  • बाजार गिरने के बावजूद कारोबार राशि १५ अरब ९ करोड़ हुई, जो पिछले दिन की तुलना में अधिक है।
  • व्यापार समूह में ३.४५ प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें विशाल बाजार का मूल्य ३.७७ प्रतिशत बढ़ा।

११ चैत्र, काठमांडू। पूर्व के लगातार पाँच कारोबारी दिनों में बढ़ने के बाद बुधवार को शेयर बाजार गिर गया। नेप्से संकेतांक पिछले दिन की तुलना में आज २४.४५ अंक गिरकर २९३५ अंक पर कायम रहा। इससे पहले नेप्से २३.८३ अंक की वृद्धि दर्ज कर चुका था।

बाजार के गिरने के बावजूद कारोबार राशि बढ़कर १५ अरब ९ करोड़ हो गई, जबकि पिछले दिन १४ अरब ८३ करोड़ थी। ४५ कंपनियों के मूल्य बढ़े, जबकि २१३ की घटावट हुई और ७ स्थिर रहे।

व्यापार समूह में सबसे अधिक ३.४५ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पिछले दिन भी यह समूह ९.९ प्रतिशत बढ़ा था। इस समूह में केवल दो कंपनियां सूचीबद्ध हैं, जिनमें से बाजार की सबसे मजबूत कंपनी विशाल बाजार का मूल्य ३.७७ प्रतिशत बढ़ा, जिसके कारण व्यापार समूह आज भी सबसे अधिक बढ़ा।

वहीं, उत्पादन एवं प्रसंस्करण समूह ०.४८ प्रतिशत बढ़ा। बाकी सभी समूहों के सूचकांक में गिरावट देखी गई। बैंकिंग १.४०, विकास बैंक २.३२, फाइनेंस २.०९, होटल एवं पर्यटन ०.०५, हाइड्रोपावर ०.१६, निवेश ०.५३, जीवन बीमा १.३९, माइक्रोफाइनेंस १.६४, निर्जीवन बीमा १.१५ तथा अन्य समूह १.७० प्रतिशत कम हुए।

५ कंपनियों के मूल्य में १० प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इनमें रिलायंस स्पिनिंग मिल्स, सोलु हाइड्रोपावर, सुपर खुदी हाइड्रोपावर, भुजुङ हाइड्रोपावर एवं होटल फॉरेस्ट इन शामिल हैं। इसके अलावा पन्चकन्या माइ हाइड्रो का मूल्य ९.७ प्रतिशत बढ़ा।

अभियान लघुवित्त का मूल्य सर्वाधिक ७.७४ प्रतिशत गिरा। साल्पा विकास बैंक का ६.९९, कॉर्पोरेट डेवलपमेंट का ६.७१, सिंधु विकास बैंक का ६.०९ प्रतिशत मूल्य कम हुआ। आज अधिक कारोबार करने वाली कंपनियों में ङादी ग्रुप, एपी पावर, शिवम सीमेंट, सुपर मादी हाइड्रोपावर और एसवाई पैनल शामिल हैं।

महासचive पाण्डे ने २४ भदौ को सुरक्षा जवानों की हताशा का अनुभव किया

संघीय संसद सचिवालय के महासचिव पद्मप्रसाद पाण्डेय ने २४ भदौ को सुरक्षा जवानों में हताशा का अनुभव किया। पाण्डेय ने संसद भवन को हुए नुकसान को कम करने के लिए पूर्व-निर्धारित Contingency Plan (आपातकालीन योजना) के अभाव को स्वीकार किया है। इसके साथ ही उन्होंने संसद भवन के सिंहदरबार परिसर में स्थानांतरण के बाद सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता भी जताई है। ११ चैत, काठमाडौं।

पाण्डेय ने बताया कि २४ भदौ को उन्होंने सुरक्षा जवानों में हताशा महसूस की। जांच आयोग की रिपोर्ट में उनका बयान शामिल है। आयोग के समक्ष बयान देते हुए पाण्डेय ने बताया कि भदौ २४ को काठमाडौँ और ललितपुर में कर्फ्यू के कारण वे घर पर ही थे। उन्होंने कहा, ‘उस दिन सुरक्षा जवानों में कुछ हताशा दिखी, जो मुझे महसूस हुई।’

उन्होंने कहा कि घटना से पहले उच्च जोखिम का आकलन नहीं किया गया था। उन्होंने स्वीकार किया, ‘संसद भवन को हुए नुकसान को कम करने के लिए पूर्वनियोजित Contingency Plan का अभाव था।’ इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियों में ROE (Rule of Engagement) जैसे औपचारिक ढांचे का व्यवस्थित रूप से न होना भी समस्या थी।

पाण्डेय ने सुझाव दिया कि भविष्य में जब संसद भवन सिंहदरबार परिसर में स्थानांतरित होगा, तब सरकार को सिंहदरबार की समग्र सुरक्षा योजना में संसद सुरक्षा प्रणाली को शामिल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुरक्षा स्तर को बढ़ाने के लिए पूर्वानुमान प्रणाली, पर्याप्त उपकरण, मजबूत अवसंरचना, ROE, अंतर-एजेंसी समन्वय का सुदृढ़ीकरण और नियमित जोखिम मूल्यांकन आवश्यक हैं।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बूढानीलकण्ठ-शिवपुरी ट्रेल रेस शनिवार आयोजित होगी

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के पश्चात तैयार।

  • बूढानीलकण्ठ नगरपालिका वार्ड ३ के आयोजन में शनिवार १५ किलोमीटर की दूरी का बूढानीलकण्ठ/शिवपुरी खुला ट्रेल रेस आयोजित होने जा रहा है।
  • दौड़ में पुरुष और महिला दोनों मिलाकर लगभग १५० खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, जिसकी जानकारी वार्ड सदस्य विकास तामाङ ने दी।
  • प्रतियोगिता का उद्देश्य आंतरिक पर्यटन को बढ़ावा देना और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को परिचित कराना है, ऐसा वार्ड अध्यक्ष आकाश धिताल ने बताया।

११ चैत्र, काठमांडू। आंतरिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बूढानीलकण्ठ नगरपालिका वार्ड ३ के आयोजन में बूढानीलकण्ठ-शिवपुरी खुला ट्रेल रेस आगामी शनिवार (चैत्र १४) को आयोजित होगा।

दौड़ में पुरुष एवं महिलासहित लगभग १५० खिलाड़ियों के भाग लेने की उम्मीद है, प्रतियोगिता संयोजक और वार्ड सदस्य विकास तामाङ ने बताया। इस दौड़ की दूरी १५ किलोमीटर होगी।

दोनों वर्गों में शीर्ष तीन विजेताओं को क्रमशः ४० हजार, २५ हजार और १५ हजार रुपये नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। चौथे और पांचवें स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों को भी समान रूप से ५-५ हजार रुपये नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

दौड़ का उद्देश्य खेलकूद के माध्यम से पर्यटन का विकास और प्रवर्द्धन करना है, ऐसा वार्ड अध्यक्ष आकाश धिताल ने बताया। उन्होंने कहा, ‘खेलकूद के जरिए आंतरिक पर्यटन को बढ़ावा मिले और साथ ही इस क्षेत्र की विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य, संसाधनों और क्षमताओं के बारे में आम जनता को परिचित कराया जाए।’

यह दौड़ बूढानीलकण्ठ मंदिर से शुरू होकर राष्ट्रीय निकुञ्ज के गेट, घूम कत्ने, छाप भन्झ्याङ, महादेवथान, शिवपुरी, बाघद्वार, देउराली, मुलाबारी, नागी गुम्बा, और पुनः राष्ट्रीय निकुञ्ज के गेट होते हुए बूढानीलकण्ठ मंदिर पर समाप्त होगी।

‘ओली, लेखक र खापुङमाथि ज्यान मुद्दामै अनुसन्धान हुनुपर्ने देखिन्छ’

‘‘ओली, लेखक और खापुंग के खिलाफ हत्या के मामले में जांच होनी चाहिए’’

समाचार सारांश

समीक्षा की गई।

  • जेनजी आंदोलन के दमन के मामले में गठित आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, गृहमंत्री रमेश लेखक और पुलिस महानिरीक्षक चंद्रकुबेर खापुंग सहित चार उच्च अधिकारियों के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने की सिफारिश की है।
  • आयोग ने ओली की भूमिका को मानवीय क्षति रोकने में असफल बताते हुए गैर-जिम्मेदार माना है।
  • चार घंटे तक गोली नबंद होने की घटना को गैर-रेखीय (हेलचेक्राई) घटना कहा गया है।
  • गृह सचिव गोकर्णमणि दुवाड़ी, सशस्त्र प्रहरी महानिरीक्षक राजु अर्याल सहित अन्य चार लोगों के खिलाफ भी गैर-रेखीय कर हत्या का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

११ चैत्र, काठमांडू। जेनजी आंदोलन के दौरान दमन की जांच के लिए गठित आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, गृहमंत्री रमेश लेखक समेत चार उच्च अधिकारियों के खिलाफ हत्या के मामलों में जांच आगे बढ़ाने की सिफारिश की है।

गुप्त स्रोतों से प्राप्त रिपोर्ट सार्वजनिक प्रति में इन लोगों के खिलाफ २०७४ के मुलुकी अपराध संहिता की धारा १८१ के तहत जांच करने की सिफारिश की गई है।

सिफारिश में शामिल पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, गृहमंत्री रमेश लेखक, पुलिस महानिरीक्षक चंद्रकुबेर खापुंग हैं। उक्त धारा में कहा गया है कि ‘‘कोई भी लापरवाही से किसी का जीवन नहीं ले सकता।’’

अगर कोई ऐसा करता है तो उसे तीन से दस वर्ष की जेल और ३० हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

मुलुकी अपराध संहिता, २०७४ की धारा १८२ में कहा गया है कि ‘‘गैर-जिम्मेदाराना तरीके से हत्या न की जाए।’’ इस धारा के तहत गैर-जिम्मेदाराना हत्या करने वाले को तीन साल तक की जेल और ३० हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

जांच आयोग ने ओली की भूमिका पर कहा है, ‘‘प्रधानमंत्री के संसदीय प्रणाली में संसद भवन परिसर के बाहर लगभग चार घंटों तक गोली चलती रही, तब भी मृत और घायल हुए लोगों के बीच राज्य के सभी नागरिकों के अभिभावक के तौर पर मानवीय क्षति रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाना प्रधानमंत्री की बड़ी कमजोरी है।’’

एसईई के छात्र और क्षेत्र में पुलिस द्वारा पूछताछ के सवालों पर ओली ने गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया जिसके कारण आयोग ने उन्हें मानवीय क्षति रोकने के लिए कोई पहल नहीं करने के कारण गैर-जिम्मेदार बताया है।

रोकने का प्रयास क्यों नहीं हुआ?

ओली ने गोली चलाने का आदेश न देने और प्रदर्शनकारियों को पूर्वमन से हत्या करने के बजाय सुरक्षाकर्मियों द्वारा गोली चलाकर कुछ प्रदर्शनकारी मृत और घायल हुए जबकि रोकने का प्रयास नहीं करने पर आयोग ने सवाल उठाया है।

‘‘गोलीबारी रोकने के प्रयास न करने के कारण किशोर-किशोरियों समेत लोगों की मौत हुई है,’’ आयोग ने ओली की भूमिका पर कहा, ‘‘भदौ २३ की घटना में लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना कार्यवाही के कारण किशोर-किशोरियों की जान गई है, इसके लिए वे जिम्मेदार हैं।’’

आयोग ने ओली, लेखक और खापुंग के खिलाफ लापरवाही से काम करते हुए हत्या करने और गैर-जिम्मेदाराना कार्यवाही का आरोप लगाते हुए फौजदारी कानून के तहत जांच आगे बढ़ाने की सिफारिश की है। चार घंटे तक गोलीबारी न रुकने की घटना को गैर-जिम्मेदाराना बताया गया है।

चार अन्य के खिलाफ दूसरी जांच

आयोग ने उक्त तीन पदाधिकारियों के अलावा अन्य चार के खिलाफ भी दूसरी स्तर की कारवाई सिफारिश की है। गृह सचिव गोकर्णमणि दुवाड़ी, सशस्त्र प्रहरी महानिरीक्षक राजु अर्याल, राष्ट्रीय अन्वेषण विभाग के प्रमुख हुतराज थापा और तत्कालीन काठमांडू प्रमुख जिल्ला अधिकारी छवि रिजाल के खिलाफ भी धारा १८२ के तहत कारवाई करने की सिफारिश की गई है।

उन पर गैर-जिम्मेदाराना हत्या का आरोप है। इस अपराध के लिए तीन साल तक की जेल और ३० हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

ये अधिकारी सरकारी अधिकारों के उचित उपयोग में उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना कार्यवाही में सहयोगी पाए गए हैं।

विभागीय सिफारिश में शामिल अन्य

आयोग ने एआईजी सिद्धिविक्रम शाह, डीआईजी ओमबहादुर राणा, एसएसपी विश्वास अधिकारी, एसएसपी दीपशमशेर जबरा और एसपी ऋषिराम कंडेल के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

शाह ऑपरेशन प्रमुख नहीं थे, राणा उपत्यका पुलिस कार्यालय के कार्यवाहक प्रमुख थे। विश्वास अधिकारी काठमांडू जिला पुलिस परिसर के प्रमुख थे। जबरा उपत्यका पुलिस में कार्यरत थे। ऋषिराम कंडेल सिंहदरबार स्थित नेपाल पुलिस विशेष कार्यदल के प्रमुख थे।

आयोग ने इन सभी के कर्तव्यपालन में कमज़ोरी देखी है और कार्रवाई की सिफारिश की है।

सशस्त्र प्रहरी प्रधान कार्यालय के एआईजी नारायणदत्त पौडेल, काठमांडू सशस्त्र प्रहरी बाहिनीपति डीआईजी सुरेशकुमार श्रेष्ठ, विपद उद्धार यूनिट सिनामंगल के एसपी जीवन केसी के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

राष्ट्रीय अन्वेषण विभाग के सह-निदेशक कृष्णप्रसाद खनाल और काठमांडू जिला प्रमुख एवं सह-तদন্ত निदेशक रिबेनकुमार गच्छदार के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

सैनिक अधिकारियों जैसे राष्ट्रपति भवन शीतलनिवास सुरक्षा टीम प्रमुख मनोज बैदवार, बालुवाटार सुरक्षा टीम प्रमुख दिवाकर खड़का, सिंहदरबार सचिवालय सुरक्षा प्रमुख गणेश खड़का तथा संसद भवन सुरक्षा सैनिक सन्तोष ढुंगेल के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

आयोग ने बानेश्वर में मोटरसाइकिल पर आकर उकसाने वाले और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने वालों को संसद की ओर ले जाने वाले टीओबी सदस्यों के खिलाफ भी जांच कर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।

सुजुकी ई-भिटारा की बुकिंग शुरू, शुरुआती कीमत 49 लाख 99 हजार रुपये

समाचार सारांश

संपादकीय रूपमा समीक्षा गरिएको।

  • सिजी मोटोकर्प ने पोखरा में आयोजित वाडा ऑटो शो में अपनी पहली प्रीमियम बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन ई–भिटारा की बुकिंग शुरू की है।
  • ई–भिटारा की शुरुआती कीमत 49 लाख 99 हजार रुपये रखी गई है, जो सीमित अवधि के लिए उपलब्ध है।
  • सुजुकी ने 2030 तक 6 और नए इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च करने की योजना बनाई है।

11 चैत, काठमांडू। नेपाल में सुजुकी वाहनों के आधिकारिक वितरक सिजी मोटोकर्प ने अपनी बहुप्रतीक्षित पहली प्रीमियम बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन ई–भिटारा की बुकिंग शुरू कर दी है।

यह महत्वपूर्ण घोषणा बुधवार को पोखरा में आयोजित वाडा ऑटो शो में की गई, जहां कंपनी ने इसकी आकर्षक शुरुआती कीमत 49 लाख 99 हजार रुपये घोषित की।

कंपनी ने बताया कि यह विशेष शुरुआती कीमत सीमित अवधि के लिए ही उपलब्ध है। ‘‘जापानी ऑटोमेकर द्वारा लाई गई यह पहली प्रीमियम बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन है, जो नेपाल के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में जापानी विश्वसनीयता और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग को स्थापित करेगी,’’ कंपनी ने कहा।

‘‘यह वाहन दो उच्च क्षमता वाली बैटरी विकल्पों में उपलब्ध है, 49 और 61 किलोवाट आवर, जो क्रमशः 106 किलोवाट और 128 किलोवाट की दमदार पावर आउटपुट प्रदान करती हैं,’’ कंपनी ने एक विज्ञप्ति में बताया।

ई-भिटारा इस मूल्य श्रेणी में जापानी ब्रैंड से आने वाली पहली इलेक्ट्रिक वाहन है, जैसा कि सिजी मोटोकर्प ने बताया। ‘‘यह नवीनतम बैटरी तकनीक और उच्च सुरक्षा मानकों से लैस है,’’ कंपनी ने कहा। सुजुकी 2030 तक 6 और नए इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च करने की योजना बना रही है।

वरिष्ठ अधिवक्ता खड्काके संयोजकत्व में कांग्रेस की निर्वाचन समिति का गठन

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा सहित प्रस्तुत।

  • नेपाली कांग्रेस ने 15वें महाधिवेशन के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमबहादुर खड्काके संयोजकत्व में केंद्रीय निर्वाचन समिति का गठन किया है।
  • बुधवार को संपन्न केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में इस समिति के गठन का निर्णय लिया गया, जिसकी सूचना महामंत्री प्रदीप पौडेल ने दी।
  • खड्का कांग्रेस के केंद्रीय सदस्य हैं और पूर्व में नेपाल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

11 चैत, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस ने 15वें महाधिवेशन के लिए केंद्रीय निर्वाचन समिति का गठन किया है।

बुधवार को हुई केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमबहादुर खड्काके संयोजकत्व में यह समिति बनाई गई है।

महामंत्री प्रदीप पौडेल ने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता खड्का के नेतृत्व में केंद्रीय निर्वाचन समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया है।

खड्का कांग्रेस के केंद्रीय सदस्य हैं और उन्होंने नेपाल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद भी संभाला है।

एचजेएनबीएल में आर्मी की सातवीं जीत

त्रिभुवन आर्मी क्लब ने हिमालयन जावा नेशनल बास्केटबॉल लीग २०२६ में अपनी सातवीं जीत पक्की कर ली है। बुधवार को सोलो बास्केटबॉल क्लब को ८८-७० के अन्तर से हराते हुए आर्मी ने महत्वपूर्ण विजय हासिल की। यह प्रतियोगिता नेपाली बास्केटबॉल संघ द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें ८ टीमें भाग ले रही हैं और विजेता टीम को ४ लाख नगद पुरस्कार दिया जाएगा।

आर्मी ने ११ चैत को काठमांडू में खेले गए इस मैच में १५ अंक हासिल कर तालिका में शीर्ष स्थान पर कब्ज़ा जमा लिया है। टाइम्स और गोल्डेनगेट के बराबर अंक होने के बावजूद आर्मी अंक अंतर के कारण आगे है। गोल्डेनगेट दूसरे और टाइम्स तीसरे स्थान पर हैं। सोलो को छठे हार का सामना करना पड़ा है और उसने केवल १० अंक इकट्ठे किए हैं।

मैच के पहले क्वार्टर में आर्मी २०-१६ से आगे था, लेकिन दूसरे क्वार्टर में सोलो ने ३३-१८ की बढ़त बना कर हाफटाइम तक ४९-३८ से बढ़त बनाई। तीसरे क्वार्टर में आर्मी ने २३-१० की दबदबा बनाते हुए ६१-५९ से बढ़त लेकर चौथे क्वार्टर में प्रवेश किया। चौथे क्वार्टर में भी आर्मी ने २७-११ की बढ़त बनाते हुए जीत सुनिश्चित की।

प्रतियोगिता के दूसरे संस्करण में कुल ५६ मैच खेले जाएंगे और शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में प्रवेश करेंगी। प्लेऑफ विजेता को ४ लाख नकद पुरस्कार मिलेगा, जबकि उपविजेता को २ लाख और तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को १ लाख पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (एमवीपी) को भी पुरस्कार दिया जाएगा।

‘नेपाली फुटबल यसै त समस्यामा छ, निलम्बनले थप अन्योलतामा लैजान्छ’

‘नेपाली फुटबल शुरू से ही समस्याओं में है, निलम्बन से और अधिक अंधकार फैल सकता है’

राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) ने निलम्बन का निर्णय लिया है, बावजूद इसके अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) का नेतृत्व चैत १३ गते चुनाव कराने के संकल्प पर कायम है। इसके परिणामस्वरूप एन्फा और राखेप के बीच विवाद और गहरा होने की संभावना है।

११ चैत, काठमांडू। लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद राखेप ने एन्फा को निलम्बित कर दिया है। एन्फा ने बिना अनुमति पूर्व चुनाव कराने की कोशिश की थी, जिससे राखेप के साथ विवाद उत्पन्न हुआ। अंततः बुधवार को आयोजित राखेप कार्यकारी समिति की बैठक में एन्फा को तीन महीने के लिए निलम्बित करने का निर्णय लिया गया।

राखेप ने खेलकूद विकास नियमावली के अनुच्छेद २९ के उपधारा २ के अनुसार कार्रवाई की है। उक्त उपधारा में उल्लेख है कि ‘यदि कोई संघ परिषद के निर्देशों का पालन नहीं करता तो उसे तीन महीने तक निलम्बित किया जा सकता है।’ एन्फा द्वारा नौ बिंदुओं को लागू कर जानकारी देने पर निलम्बन हटाने की व्यवस्था भी है।

अब उपधारा ३ के तहत निलम्बन हटाने के लिए एन्फा को निर्देशों का पालन करते हुए राखेप के पास आवेदन करना होगा। राखेप इसे जाँच कर निलम्बन हटाने का अधिकार रखेगा। अगर निलम्बन नहीं हटाया गया तो उपधारा ४ के तहत राखेप समिति को भंग कर तीन महीने के भीतर नई समिति गठित कर सकता है।

निलम्बन में रहते हुए भी एन्फा नेतृत्व चैत १३ गते चुनाव कराने के पक्ष में है। इससे एन्फा और राखेप के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना है। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय फुटबाल महासंघ फीफा नेपाल पर प्रतिबंध लगा सकता है, जो नेपाली फुटबाल के लिए गंभीर संकट सिद्ध होगा।

पूर्व युवा तथा खेलकूद मंत्री पुरुषोत्तम पौडेल के अनुसार राखेप का निलम्बन नेपाली फुटबाल को और समस्याओं में डाल देगा। उन्होंने कहा, ‘नेपाली फुटबाल पहले से ही समस्याओं से जूझ रहा है। टाइटल वितरण बंद है। उसके ऊपर निलम्बन से और समस्याएँ आयेंगी।’

पौडेल ने कहा कि खेलकूद के विकास के बजाय व्यक्तिगत स्वार्थों के चलते काम हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘खेलकूद का विकास इतना नहीं हो रहा जितना कि स्वार्थ काम कर रहे हैं। इसलिए स्वार्थ के आधार पर खेलकूद को नहीं चलाना चाहिए। खेलकूद एक पवित्र संस्था है और इसे सकारात्मक रूप में ही आगे बढ़ाना चाहिए। नेपाल में राजनीतिक प्रभाव से खेलकूद को देखा जाता है जो गलत है।’

राखेप के पूर्व सदस्य सचिव रमेशकुमार सिलवाल ने भी कहा कि निलम्बन का असर खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक सभी पर पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘निलम्बन का प्रभाव खिलाड़ियों, क्लबों, प्रशिक्षकों और दर्शकों सभी पर पड़ा है। राखेप को निलम्बन करने का अधिकार है, लेकिन निलम्बन के बाद इसका संचालन कौन करेगा यह सवाल उठता है।’

सिलवाल के अनुसार जब फीफा और एशियाई फुटबाल महासंघ (एएफसी) के साथ विवाद होगा, तब नेपाल पर प्रतिबंध लगने का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा, ‘राखेप नई समिति बनाएगा। देखना होगा कि फीफा और एएफसी उसे मान्यता देते हैं या नहीं। यदि नहीं दिया तो विवाद और बढ़ेगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘विवाद बढ़ने की स्थिति में हमारे फुटबाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।’

म्याद समाप्त पेय पदार्थ बिक्री करने वाले पिलग्रिम्स ग्रोसरी को 2 लाख जुर्माना

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा की गई।

  • वाणिज्य विभाग ने काठमाडौं स्वयम्भू स्थित पिलग्रिम्स ग्रोसरी द्वारा म्याद खत्म कोक और फैंटा जैसे पेय पदार्थों की बिक्री पाए जाने पर 2 लाख 1 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया है।
  • वाणिज्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 19 फर्मों का निरीक्षण करते हुए 2 फर्मों को जुर्माना और 17 फर्मों को सामान्य निर्देश दिए हैं।
  • ललितपुर भैंसेपाटी स्थित आरएस किराना एवं गैस दुकान को लेबल एवं मूल्य संबंधी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

११ चैत, काठमाडौं। म्याद समाप्त पेय पदार्थ विक्रय कर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को जोखिम में डालने के कारण काठमाडौं स्वयम्भू स्थित पिलग्रिम्स ग्रोसरी प्रा. लि. को २ लाख १ हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।

वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने बुधवार को किए गए बाजार निरीक्षण के दौरान पुष्टि की कि उक्त ग्रोसरी ने म्याद पार कर चुके उत्पादों की बिक्री की है और तुरंत जुर्माना लगाया गया।

विभाग के निरीक्षण अधिकारी अमितकुमार झा ने बताया कि अनुगमन के दौरान पिलग्रिम्स ग्रोसरी में म्याद समाप्त कोक, फैंटा समेत अन्य पेय पदार्थ बिक्री के लिए रखे पाए गए।

“कोक और फैंटा जैसे कोल्ड ड्रिंक की म्याद समाप्त होने के बाद भी बिक्री हो रही थी, इसलिए उपभोक्ता संरक्षण ऐन २०७५ के तहत तत्काल २ लाख १ हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है,” उन्होंने कहा।

ग्रोसरी ने इस एक्ट की धारा १६ (२) और धारा ३८ (ङ) के तहत अपराध किया था, जिस कारण धारा ३९ (१) (ख) के अनुसार कार्रवाई की गई है, विभाग ने बताया।

इसी प्रकार, ललितपुर के भैंसेपाटी स्थित आरएस किराना एवं गैस दुकान को भी लेबल और मूल्य से संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर १० हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

विभाग ने बुधवार को काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर के विभिन्न स्थानों पर १९ फर्मों का निरीक्षण किया था। जुर्माने के अलावा १७ फर्मों को सामान्य निर्देश भी दिए गए हैं।

राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष के अध्यक्ष पद पर आदर्शकुमार श्रेष्ठ की नियुक्ति, पदभार ग्रहण

समाचार सारांश

  • आदर्शकुमार श्रेष्ठ को राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • श्रेष्ठ ने 11 चैत्र को पदभार ग्रहण किया, जहां सदस्य सचिव डॉ. नरेश सुवेदी ने उनका स्वागत किया।
  • प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने अध्यक्ष नियुक्ति का अधिकार प्रयोग करते हुए श्रेष्ठ को आगामी पांच वर्षों के लिए मनोनीत किया।

11 चैत्र, काठमांडू। राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष के अध्यक्ष पद पर नियुक्त आदर्शकुमार श्रेष्ठ ने बुधवार को पदभार ग्रहण किया। वे कार्यालय पहुंचे और कोष के सदस्य सचिव डॉ. नरेश सुवेदी ने उनका कार्यालय में स्वागत किया।

प्रधानमंत्री तथा कोष की संरक्षक सुशीला कार्की ने उन्हें अध्यक्ष पद के लिए मनोनीत किया था।

संरक्षक के रूप में प्रधानमंत्री के पास अध्यक्ष नियुक्ति का अधिकार होता है, जिसके तहत प्रधानमंत्री कार्की ने श्रेष्ठ को नियुक्ति दी।

श्रेष्ठ प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के मुख्य व्यक्तिगत सचिव रह चुके हैं। प्रमुख सचिव को कोष में नियुक्त करने के बाद प्रधानमंत्री कार्की की आलोचना भी हुई थी।

उन्होंने इस पद पर आगामी पांच वर्षों के लिए नियुक्ति प्राप्त की है।

कार्की आयोगको प्रतिवेदनकै आधारमा मुद्दा चल्छ ? – Online Khabar

कार्की आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाकर क्या मामला आगे बढ़ेगा?


११ चैत्र, काठमांडू। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने गत भाद्र २३ और २४ तारीख के घटनाक्रम से जुड़ी जांच आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। बुधवार शाम प्रधानमंत्री के इस निर्णय से पहले ही मीडिया ने रिपोर्ट का पूरा पाठ प्रकाशित कर दिया था।

विशेष अदालत के पूर्व अध्यक्ष गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाली जांच आयोग की ९०७ पन्नों की रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, गृह मंत्री रमेश लेखक, पुलिस महानिरीक्षक चंद्रकुबेर खापुङ सहित अन्य के खिलाफ जान से मारने के अपराध में जांच आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई है।

चैत्र १ को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कार्की आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने का फैसला लिया गया था।

रिपोर्ट के आधार पर क्या किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं? ‘आयोग की रिपोर्ट कोर्ट के फैसले की तरह नहीं है, लेकिन इसके आधार पर सरकार अतिरिक्त अध्ययन और जांच कर सकती है,’ न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) कल्याण श्रेष्ठ ने कहा।

विशेषज्ञों के अनुसार, कोई भी जांच आयोग घटना में शामिल व्यक्ति को दोषी ठहराने में असमर्थ हो सकता है, लेकिन वह आगे की कार्रवाई के लिए सिफारिश तो कर सकता है। पूर्व प्रधान न्यायाधीश श्रेष्ठ रिपोर्ट को जांच का आधार माना जा सकता है।

कार्की के नेतृत्व वाला आयोग जांच आयोग अधिनियम, २०२६ के तहत गठित किया गया है। इस अधिनियम की धारा ३ उपधारा २ में उल्लेख है कि सार्वजनिक महत्व के मामले में जांच के लिए आयोग बनाया जा सकता है।

जांच आयोग घटना संबंधित तथ्य और जानकारी इकट्ठा करने के लिए बनाए जाते हैं। आयोग अपनी जांच के बाद अपनी राय दे सकता है, जबकि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सरकार के पास होता है, विशेषज्ञों ने बताया।

सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश गिरिशचंद्र लाल का कहना है, ‘आयोग अपनी राय प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर कौन दोषी है और किसके खिलाफ मामला चलेगा, यह निर्णय सरकार का होता है।’

टीकापुर घटना और डायरेक्टेड तथा ट्रक लाइन के राजस्व विवाद से जुड़े दो आयोगों का नेतृत्व कर चुके पूर्व न्यायाधीश लाल कहते हैं कि जांच आयोग के पास अभियोजन का अधिकार नहीं होता।

आयोग अपने काम की रिपोर्ट सौंपने के बाद अगले निर्णय का अधिकार सरकार का होता है। सिफारिशों के अनुसार संबंधित एजेंसियां अतिरिक्त जांच कर सकती हैं।

रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली, लेखक और खापुङ के खिलाफ नेपाली दंड संहिता २०७४ की धारा १८१(१) और १८२ के तहत अपराध मानते हुए सरकार से जांच, जांच-पड़ताल और अभियोजन की सिफारिश की गई है। धारा १८१ में लापरवाही से जान मारने पर ३ से १० वर्ष की कैद और ३० हजार से १ लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

वहीं धारा १८२ में बेरहमी से जान मारने का प्रावधान है, जिसके लिए दोषी को तीन वर्ष की कैद और ३० हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। आयोग ने तत्कालीन गृह सचिव गोकर्णमणि दुवाडी, सशस्त्र पुलिस महानिरीक्षक राजु अर्याल, राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग के प्रमुख हुतराज थापा और काठमांडू के प्रमुख जिल्ला अधिकारी छविलाल रिजाल के खिलाफ भी धारा १८२ के तहत जांच और मुकदमा चलाने की सिफारिश की है।

इस प्रकार के मामलों में सरकारी वकील और पुलिस मिलकर मुकदमा चलाते हैं। पूर्व न्यायाधीश लाल कहते हैं, ‘ऐसे मामले सरकारी कानूनों के तहत ही चलेंगे और अभियोजन पक्ष सरकार का होगा।’

रिपोर्ट की कुछ सिफारिशें नीति, कानूनी, संस्थागत और व्यवहार सुधार के माध्यम से लागू की जा सकती हैं, वरिष्ठ अधिवक्ता राजुप्रसाद चापागाईं ने बताया। उन्होंने कहा, ‘इस हेतु सरकार और संसद को आवश्यक पहल करनी होगी।’

चापागाईं के अनुसार आयोग की जांच पर पूरी तरह निर्भर नहीं किया जा सकता, यह केवल मार्गदर्शन प्रदान करती है। भाद्र २३ और २४ के उल्लंघन और हिंसा के मामलों की कार्रवाई के लिए सिफारिशों को लागू करना आसान नहीं होगा और सीधे लागू करना संभव नहीं है।

‘इन मामलों को फौजदारी जांच और अभियोजन प्रक्रिया से गुजरना होगा। अभियोजन प्रमाण आधारित होता है, इसलिए पर्याप्त सबूतों की आवश्यकता है,’ चापागाईं ने कहा, ‘आयोग की सिफारिशों के अनुसार अतिरिक्त जांच कर उचित प्रमाण जुटाकर फौजदारी प्रक्रिया पूरी कर मामला दर्ज किया जा सकता है।’

मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तथा फौजदारी कानून के सिद्धांत और विधिशास्त्र का उपयोग किया जा सकता है, उन्होंने बताया।

चापागाईं ने कहा, ‘सिफारिशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दण्डहीनता के दुष्चक्र को तोड़ने के लिए राज्य की इच्छाशक्ति जरूरी है। यह इच्छाशक्ति राज्य दिखाएगा या नहीं, यह समय के साथ स्पष्ट होगा।’

ग्लोबल आईएमई बैंक ने जारी किया पौभा कला से प्रेरित नया कैलेंडर–२०८३

समाचार सारांश

संपादकीय समिक्षा गरिएको ।

  • ग्लोबल आईएमई बैंक ने पौभा कला से प्रेरित नया कैलेंडर–२०८३ जारी किया है।
  • बैंक के अध्यक्ष चन्द्रप्रसाद ढकाल और तिलगंगा आंख प्रतिष्ठान के प्रो. डॉ. सन्दुक रुइत ने कैलेंडर का विमोचन किया।
  • बैंक पिछले कुछ वर्षों से नेपाली कला, साहित्य व संस्कृति के संरक्षण के लिए मौलिक चित्रों को शामिल करता आ रहा है।

११ चैत, काठमाडौं। ग्लोबल आईएमई बैंक ने पौभा कला से प्रेरित तस्वीरों के साथ नया कैलेंडर–२०८३ सार्वजनिक किया है।

बैंक के कॉर्पोरेट कार्यालय कमलादी में आयोजित समारोह में बैंक के अध्यक्ष एवं नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के अध्यक्ष चन्द्रप्रसाद ढकाल तथा तिलगंगा आंख प्रतिष्ठान के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. सन्दुक रुइत ने संयुक्त रूप से इस कैलेंडर का विमोचन किया।

पौभा कला नेवार जाति की पारंपरिक चित्रकला है। “कैलेंडर में मुख्य रूप से काठमाण्डू उपत्यका में रहने वाले नेवाः समुदाय के साथ गहरा संबंध होने के कारण पौभा कला की दुर्लभ चित्रकारी को शामिल किया गया है,” बैंक ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा।

थांका कला के समान दिखने के बावजूद पौभा कला की अपनी विशिष्ट पहचान और दार्शनिक गहराई है। बैंक पिछले कुछ वर्षों से नेपाली कला, साहित्य, संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए अपने कैलेंडर में मौलिक चित्रों को शामिल करता रहा है।

बैंक ने २०७९ में नेपाल की प्राचीन मिथिला संस्कृति की झलक देने वाली चित्रकारी, २०८० में मंडला चित्रकला, और २०८१ में विभिन्न कालखंडों में स्वदेश लौटाए गए प्राचीन कलाकृतियों के चित्र समेटे हुए कैलेंडर प्रकाशित किए थे।

बैंक को बैंक आफ द इयर २०१४, बेस्ट इंटरनेट बैंक २०१६, बेस्ट बैंक नेपाल २०२४ व २०२५, यूरो मनी अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस २०२२, २०२४ व २०२५, बेस्ट बैंक ईएसजी नेपाल २०२४, बेस्ट एम्प्लॉयर सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। बैंक की शाखाएं ७७ सभी जिलों में संचालित हैं।

बागलुङ में एक ही नंबर के हजार के नकली नोटों की भारी संख्या में बरामदगी


११ चैत, बागलुङ । बागलुङ में हजार रुपये के नकली नोट बरामद हुए हैं। बागलुङ बाजार के विभिन्न बैंकों में एक ही नंबर वाले हजार के अनेक नोट पाए गए हैं।

नेपाल बैंक बागलुङ के अनुसार अब तक १८ से अधिक एक ही नंबर वाले हजार के नोट मिले हैं। बैंक में जमा करने के लिए लाए गए हजार के नोटों के गड्डे के अंदर नकली नोट पाए जाने की जानकारी नेपाल बैंक लिमिटेड बागलुङ शाखा के प्रमुख कृष्णबहादुर कुँवर ने दी।

बागलुङ में स्थित नेपाल बैंक, प्रभु बैंक, गरिमा विकास बैंक, एनएमबी बैंक एवं सिद्धार्थ बैंक सहित अन्य बैंकों में एक ही नंबर वाले हजार रुपये के नोट बरामद हुए हैं। कुँवर ने बताया कि झ ७९१६९०३३ नंबर वाले नोट दोहराए जाने लगे हैं और सभी से सतर्क रहने का आग्रह किया है।

नकली नोटों में कागज की गुणवत्ता, राष्ट्रीय फूल, स्टिकर एवं सुरक्षा चिन्हों में भिन्नता पाई गई है और नंबर भी एक जैसे दिखाई दिए हैं।

नेपाल राष्ट्र बैंक को भी नकली नोटों की जानकारी देने की बात बैंकर्स क्लब बागलुङ के अध्यक्ष श्रीजय श्रेष्ठ ने कही। उन्होंने अनुमान लगाया कि चैते दसैँ जैसे भीड़भाड़ वाले समय में नकली नोट अधिक मात्रा में आ सकते हैं। श्रेष्ठ ने बताया कि नकली नोट मोटे और जल्दी खराब होने वाले होते हैं इसलिए सभी से जागरूक होकर लेनदेन करने का अनुरोध किया गया।

अपूरो सूचना, समन्वय अभाव – Online Khabar

अपर्याप्त सूचना और समन्वय की कमी

समाचार सारांश में की गई संपादकीय समीक्षा के अनुसार, जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी के संबंध में सुरक्षा निकायों के बीच पर्याप्त सूचना उपलब्ध न होने का संकेत जांच आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देखा गया है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दिए गए बयानों में जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी से जुड़ी सूचनाओं में असंगतता उजागर हुई है। २३ और २४ भदौ को हुई घटनाओं में सुरक्षा निकायों के बीच समन्वय की गंभीर कमी देखी गई है। ११ चैत्र, काठमांडू। गत २३ और २४ भदौ को सम्पन्न जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी के बारे में सुरक्षा निकायों के बीच पर्याप्त सूचना साझा नहीं होने की स्थिति जांच आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सूचना संग्रहण की प्रमुख जिम्मेदारी निभाने वाले राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग से लेकर नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस और नेपाली सेना तक सभी में आवश्यक सूचनाओं के अभाव का बड़ा दोष पाया गया है। सुरक्षाकर्मियों के बयानों और घटनाओं के विवरणों में जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी के बारे में विभिन्न भिन्न जानकारियाँ मिली हैं। पुलिस अधिकारियों के बीच भी आंदोलन की तैयारी को लेकर मिली सूचनाओं में उल्लेखनीय विरोधाभास रहा है। तत्कालीन आईजीपी चन्द्रकुवेर खापुङ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन होने की जानकारी दी थी। वहीं, तत्कालीन एआईजी और वर्तमान आईजीपी दानबहादुर कार्की ने रेडिट, डिस्कॉर्ड, एक्स जैसे सोशल नेटवर्किंग साइटों पर हुई चर्चाओं की सूचना मिलने की बात कही है। कार्की ने बयान में कहा, “जेएनजीआइ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रेडिट, डिस्कॉर्ड, एक्स जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स की सूचना निगरानी करते हुए जिला सुरक्षा समिति की बैठक में सुरक्षा योजना पारित की गई और ४,३९६ पुलिस कर्मी परिचालित किए गए।” कार्य विभाग के तत्कालीन एआईजी सिद्धीविक्रम शाह ने भी टिकटक, फेसबुक, रिल्स, डिस्कॉर्ड जैसे माध्यमों पर जेएनजीआइ आंदोलन संबंधी सूचनाएँ तीव्र गति से फैलने पर तत्कालीन आईजीपी को जानकारी दी। काठमांडू उपत्यका पुलिस कार्यालय की रानीपोखरी शाखा के तत्कालीन कार्यवाहक प्रमुख डीआईजी ओम राना ने कहा कि आंदोलन की प्रकृति की उम्मीद से भिन्न थी। काठमांडू के तत्कालीन एसएसपी विश्व अधिकारी ने पूर्व सूचना अनुमान लगाने में असमर्थता व्यक्त की। २०७९ भदौ २२ को केंद्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के निष्कर्ष के अनुसार प्रदर्शनकारियों की संख्या ३ हजार से ५ हजार के बीच अनुमानित की गई थी। उन्होंने पूर्व सूचना के विश्लेषण में कमजोरियां होने को भी स्वीकार किया। शांतिपूर्ण आंदोलन की उम्मीद में २३ भदौ को राष्ट्रीय सभागार में राष्ट्रपति के संबोधन की तैयारी की गई थी। पुलिस अधिकारियों ने यह उम्मीद जताई थी कि जेएनजीआइ आंदोलन सामान्य रहेगा और अधिकतम ५ हजार लोग भाग लेंगे। जबकि नेपाली सेना के प्रधानसेनापति का मत इससे अलग था। २२ भदौ को हुई केंद्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के संदर्भ में प्रधानसेनापति अशोकराज सिग्देल ने कहा, “राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग और अन्य सुरक्षा निकायों ने आंदोलन के बड़े स्तर पर होने की जानकारी दी थी।” हालांकि, उसी समय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक नहीं हुई थी। प्रधानसेनापति के बयान के बावजूद राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग के तत्कालीन प्रमुख हुतराज थापाले विपरीत जानकारी दी। थापाले कहा कि प्रदर्शनकर्ताओं की संख्या अनुमानित रूप से ३,५०० से ५,००० के बीच थी। ये सभी बयान दर्शाते हैं कि राज्य की सुरक्षा संरचना में सूचना संग्रहण के क्षेत्र में गंभीर कमी थी तथा जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी को लेकर सुरक्षाकर्मियों के बीच सूचना असामान्य और अपकृत थी। इससे आंदोलन का स्पष्ट विश्लेषण, रणनीतिक योजना बनाना और फिल्ड ऑपरेशन को सफलतापूर्वक संचालित करने में असमर्थता प्रकट हुई। अपर्याप्त सूचनाओं की स्थिति में सुरक्षा निकायों के बीच २३ और २४ भदौ की घटनाओं में समन्वय का अभाव चरम पर था। सुरक्षाकर्मी के बयान इस बात की पुष्टि करते हैं। काठमांडू के तत्कालीन एसएसपी विश्व अधिकारी ने कहा, “नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के बीच टैक्टिकल मूवमेंट में कभी-कभी समयांतराल होता था और कमांड क्लियरेंस प्रक्रिया समन्वय में बाधाएं उत्पन्न करती थी।” नेपाली सेना ने यदि स्थिर ड्यूटी संभाली होती तो पुलिस भीड़ नियंत्रण में पूरी तरह केंद्रित हो सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। संसद भवन परिसर में आंदोलन नियंत्रित करने के लिए लगाए गए विशेष कार्यदल के तत्कालीन एसपी ऋषिराम कँडेल ने सुरक्षा निकायों के बीच समन्वय कम रहने की बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “२३ भदौ को सशस्त्र पुलिस अपनी नजदीक होने के बावजूद अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा सकी और २४ भदौ को नेपाली सेना के १०-१२ सदस्यों का दल पुलिस महानिरीक्षक के गेट पर आक्रमण बढ़ने के बाद तटस्थ रहना पड़ा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में समन्वय की कमजोरी स्पष्ट हुई।” काठमांडू के अन्य एसपी अपिलराज बोहरे ने भी सशस्त्र पुलिस बल और सेना की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “एपीएफ और सेना ने अंतिम क्षणों में ही भागीदारी जताई लेकिन दोनों सुरक्षा निकायों से अपेक्षित व्यावसायिक सहयोग, संयंत्रगत प्रतिक्रिया और सामूहिक समन्वय नहीं दिखा।” समन्वय की कमी के मद्देनजर प्रधानसेनापति सिग्देल ने समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, “२३ भदौ को संसद भवन क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति जटिल हो गई थी, इसलिए पूर्व निर्णय के अनुसार अन्य सुरक्षा निकायों के साथ समन्वय कर आवश्यक सुरक्षा तैयारी करने का निर्देश दिया है।”

पेट्रोल, डिजेल और मट्टीतेल के दाम प्रति लीटर १५ रुपये बढ़ाए गए


११ चैत, काठमाडौँ। नेपाल आयल निगम ने पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में वृद्धि की है। निगम ने बुधवार शाम पेट्रोल, डिजेल और मट्टीतेल के दाम प्रति लीटर १५-१५ रुपये बढ़ाए जाने की सूचना दी है।

मूल्य वृद्धि के बाद, पेट्रोल की कीमत पहले वर्ग के लिए प्रति लीटर १६९ रुपये ५० पैसे से बढ़कर १८४ रुपये हो गई है, जबकि दूसरे वर्ग के लिए १८६ रुपये और तीसरे वर्ग के लिए १८७ रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

इसी प्रकार, डिजेल/मट्टीतेल की कीमत पहले वर्ग में १४९ रुपये ५० पैसे से बढ़कर १६४ रुपये ५० पैसे हुई है, जबकि दूसरे वर्ग के लिए १६६ रुपये और तीसरे वर्ग में १६७ रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

आयल निगम ने पहले वर्ग में चारआली, विराटनगर, जनकपुर, अमलेखगंज, भलवारी, नेपालगंज, धनगढी और वीरगंज को शामिल किया है, जबकि दूसरे वर्ग में सुर्खेत और दाङ तथा तीसरे वर्ग में काठमाडौँ, पोखरा और दिपायल को श्रेणीबद्ध किया है।