नेपाल आईसीसी महिला चैलेंज ट्रॉफी 2026 के तहत अपने पहले मैच में 5 वैशाख को अमेरिका के खिलाफ रुवांडा के किगाली स्थित गहंगा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में प्रतिस्पर्धा करेगा। इस प्रतियोगिता में नेपाल, अमेरिका, इटली, रुवांडा और वनुआतु भाग ले रहे हैं और सभी टीमें डबल राउंड रॉबिन प्रणाली के अंतर्गत एक-दूसरे के खिलाफ दो बार खेलेंगीं। यह नेपाल महिला क्रिकेट टीम का रुवांडा में पहला मैच होगा, और टीम की कप्तानी इंदु बर्मा करेंगी।
5 वैशाख, काठमांडू। आईसीसी महिला चैलेंज ट्रॉफी 2026 के प्रथम मैदान पर नेपाल आज अमेरिका के खिलाफ मुकाबला करेगा। यह मैच रुवांडा के किगाली में स्थित गहंगा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में शाम पौने पाँच बजे से शुरू होगा। 18 अप्रैल से 1 मई तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में मेजबान रुवांडा के साथ नेपाल, अमेरिका, इटली और वनुआतु भाग ले रहे हैं।
सभी टीमों के बीच डबल राउंड रॉबिन नियम के अनुसार सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ दो मैच खेलेंगीं, जिसमें सबसे अधिक अंक प्राप्त करने वाली टीम चैंपियन बनेगी। नेपाल महिला टीम पहली बार रुवांडा में खेल रही है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने एसोसिएट सदस्य देशों को अवसर देने हेतु यह प्रतियोगिता पहली बार आयोजित की है। नेपाल, इस प्रतियोगिता के पांच प्रतिभागी टीमों में रैंकिंग में सबसे ऊपर (21वें स्थान) है।
नेपाल अपनी दूसरी मैच रविवार, 6 वैशाख को इटली के खिलाफ खेलेगा। इसके बाद तीसरा मैच बुधवार (9 वैशाख) को रुवांडा के खिलाफ, चौथा मैच गुरुवार (10 वैशाख) को वनुआतु के खिलाफ होगा। पांचवां मैच आगामी शनिवार (12 वैशाख) को फिर से अमेरिका से होगा। छठा मैच 14 वैशाख को रुवांडा, सातवां मैच 15 वैशाख को वनुआतु और आठवां मैच 16 वैशाख को इटली के खिलाफ रहेगा। नेपाल की टीम में शामिल हैं: इंदु बर्मा (कप्तान), पूजा महतो, बिंदु रावल, रुबिना क्षेत्री, रूबी पोदार, रोमा थापा, कविता जोशी, कविता कुँवर, सम्झना खड़का, अनु कड़ायत, सुमन विष्ट, रिया शर्मा, रचना चौधरी, मनिषा उपाध्याय।
सरकार ने सम्पत्ति जाँचबुझ छानबिन आयोग का गठन करने के बाद इसके स्पष्ट और विस्तृत कार्यक्षेत्र को लेकर भारी रुचि बढ़ी है।
मन्त्रीपरिषद की बुधवार हुई बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भण्डारी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है।
सरकार के प्रवक्ता तथा शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, युवा तथा खेल मंत्री सस्मित पोखरेल के अनुसार आयोग को ’२०६२/०६३ से २०८२/०८३ वर्ष तक सार्वजनिक पदों पर कार्यरत प्रमुख राजनैतिक पदाधिकारियों और उच्च पदस्थ कर्मचारियों की सम्पत्ति की जानकारी संकलित, प्रमाणीकरण तथा जांच पड़ताल करने’ का दायित्व सौंपा गया है।
हालांकि सरकार ने सार्वजनिक पद के किन स्तरों तक के व्यक्तियों को ‘प्रमुख राजनैतिक पदाधिकारी एवं उच्चपदस्थ कर्मचारी’ माना जाएगा, इस पर स्पष्टता नहीं दी है।
पहले भी सरकार ने २०५८ साल में तत्कालीन कार्यरत न्यायाधीश भैरवप्रसाद लम्साल के नेतृत्व में न्यायिक जांचबूझ आयोग बनाया था, जिसने २०४७ के बाद विभिन्न क्षेत्रों के व्यक्तियों की सम्पत्ति की जांच की थी।
उस समय कर्मचारियों सहित सम्पत्ति की व्यापक पड़ताल की गई थी।
सरकार के प्रवक्ता व मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा है कि जिन प्रधानमंत्री और मंत्रियों की सम्पत्ति इस समय चर्चा में है, उनकी जानकारी भी इस आयोग की जांच में शामिल होगी, लेकिन विस्तृत कार्यक्षेत्र उन्होंने स्पष्ट नहीं किया।
जानकारी का संकलन और प्रमाणीकरण कितना सहज है?
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आयोग को सम्पत्ति विवरण ‘संकलन’ करने का दायित्व सौंपा गया है।
लम्साल आयोग के कर्मचारी रहे सेवानिवृत्त उपमहान्यायुक्त ठोकप्रसाद शिवाकोटी कहते हैं कि वर्तमान आयोग के आदेश सार्वजनिक होने के बाद इसके विभिन्न पहलुओं का आकलन किया जाएगा।
उन्होंने याद किया, ‘अब जैसी सूचना प्राप्त हुई, उसके बाद विवरण जमा कराना होता था, कईयों ने जमा की गई सम्पत्ति की जानकारी प्रमाणीकरण के लिए अधिक स्पष्ट करने हेतु दोबारा जानकारी भी मांगी गई।’
“सूचना जारी होने के बाद संबंधित लोगों ने जब विवरण जमा किया तो प्रक्रिया आगे बढ़ी, यह मेरी याददाश्त में है,” शिवाकोटी ने बताया।
लम्साल आयोग ने एक वर्ष से थोड़ा अधिक समय में रिपोर्ट और कागजात सौंपे थे।
उस समय व्यापक क्षेत्र के व्यक्ति, अधिकारी और नेताओं की एक दशक की संपत्ति जाँच की गई थी। वर्तमान में निर्धारित अवधि दो दशकों की है।
‘उच्च’ पद माना जाता है, इसलिए जाँच का दायरा पहले से कम पदों तक सीमित हो सकता है परंतु सरकारी कर्मचारी, स्थानीय एवं प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल हुए तो संख्या बढ़ सकती है।
“आजकल अधिकांश विवरण कंप्यूटर सिस्टम में होने से जाँच पहले से आसान है,” एक नाम न बताने वाले अधिकारी कहते हैं, “घर-जमीन, शेयर और बैंक जमा की जानकारी अब हासिल करना आसान हो गया है।”
जटिल छानबिन
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जानकारी के प्रमाणीकरण में अस्वीकृति के बाद ही जांच पड़ताल शुरू होती है, जहां बयान और अतिरिक्त जानकारी ली जाती है। यह आयोग का मुख्य और जटिल चरण होता है।
लम्साल आयोग के सदस्य ज्ञाइन्द्रबहादुर श्रेष्ठ ने इसे बहुत पुराना मामला कहने में असमर्थता जताई थी।
आयोग की जांच प्रणाली वर्तमान अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग के समान है, जो मुकदमे चलाने का अधिकार रखता है, जबकि छानबिन आयोग सिफारिश करने अथवा पहचान करने का जिम्मेवार होता है।
विशेष अदालत के रजिस्ट्रार वेदप्रसाद उप्रेती ने लम्साल आयोग में कार्य करते हुए सम्पत्ति विवरण स्वघोषणा फॉर्म भरने का अनुभव साझा किया।
“प्राप्त विवरण का प्रारंभिक स्क्रिनिंग होता था, शंका होने पर आगे अध्ययन किया जाता और जरूरत पर बुलावा किया जाता,” उप्रेती ने बताया, “उसके बाद मामला गुप्त शाखा को भेजा जाता था और फिर हमें खबर नहीं होती थी।”
मुकदमा चलाने और सम्पत्ति जब्ती प्रक्रिया क्या है?
संशयास्पद विषय सामने आने पर आयोग अपनी रिपोर्ट में उसे उजागर करता है और मामला अभियोजन के लिए नियमित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाने की सलाह देता है।
भ्रष्टाचार, अकूत सम्पत्ति और सम्पत्ति शोधन जैसे मामले आ सकते हैं, ऐसा आयोग के सदस्यों का मानना है।
पिछला अनुभव बताता है कि नियमित न्यायिक प्रक्रिया काफी लंबी होती है; कई भ्रष्टाचार संबंधित मामले दहाई वर्षों से अदालतों के चरणबद्ध तरीके में लंबित हैं।
जानकारों के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद १५२ के तहत विशेष अदालत, न्यायिक निकाय या न्यायाधिकरण गठित करने की व्यवस्था है जो संघीय कानून के अनुसार लचीली व्यवस्था है।
एक पूर्व न्यायाधीश (नाम न बताने की शर्त पर) कहते हैं, “वर्तमान विशेष अदालत में मुकदमे चलाकर उच्चतम न्यायालय में विशिष्ट मामलों का शीघ्र निपटारा किया जा सकता है। सरकार चाहे तो संविधान के भीतर ही कोई अन्य त्वरित उपाय अपना सकती है।”
सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने अवैध सम्पत्ति का राष्ट्रीयकरण करने की घोषणा कर रखी है।
लेकिन न्यायालयों में न्यायाधीशों की संख्या और संगठनात्मक ढांचे के कारण अपेक्षित मामलों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ है और नियमित प्रक्रिया अवैध घोषित सम्पत्ति के राष्ट्रीयकरण में विलंब की वजह बन रही है, जानकारों का मानना है।
सरकार ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की है। कुछ जानकार मानते हैं कि वर्तमान परिस्थितियों में निर्णय होगा इसलिए इसे अभी सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं है।
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सिरहाको जनता माध्यमिक विद्यालय चन्द्रालपुरले शिक्षक तथा कर्मचारी भर्तीको लागि नगरपालिकाको अनुमति नलई विज्ञापन प्रकाशित गरेको पुष्टि भएपछि भर्ती प्रक्रिया स्थगित गरिएको छ। नगरपालिकाको शिक्षा शाखाले विज्ञापन अघि बढाउन अनुमति वा सहमति लिनुपर्ने प्रावधान उल्लङ्घन भएको भन्दै विद्यालयबाट स्पष्टीकरण मागेको छ। विद्यालयका प्रधानाध्यापक ब्रह्मदेव सिंहले भने आन्तरिक कार्यविधिअनुसार विज्ञापन गरिएको बताएका छन्। ५ वैशाख, सिरहा।
गोलबजार नगरपालिका–८ मा अवस्थित जनता माध्यमिक विद्यालय चन्द्रालपुरले ठूलो संख्यामा शिक्षक तथा कर्मचारी भर्ना गर्न विज्ञापन निकालेको तर आवश्यक प्रक्रिया पूरा नगरी प्रकाशित गरेको भन्दै नगरपालिकाको शिक्षा शाखाले थप प्रक्रिया अघि नबढाउन निर्देशन दिएपछि उक्त विज्ञापन स्थगित गरिएको छ। शिक्षक भर्ना सम्बन्धी कामका लागि नगरपालिका तथा शिक्षा विकास तथा समन्वय इकाइसँग अनुमति वा सहमति लिनुपर्ने प्रावधान भएपनि विद्यालयले सो प्रक्रिया पूरा नगरेको नगरपालिकाका प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत तथा शिक्षा शाखा प्रमुख अनन्त पौडेलले जानकारी दिएका छन्।
विद्यालयले गत चैत ३० गते एक साताको समयसीमा राखेर १५ जना शिक्षक र कार्यालय सहयोगी तथा बस चालकसहित कुल १७ जना कर्मचारीको लागि विज्ञापन प्रकाशित गरेको थियो। शिक्षा शाखाले स्पष्टीकरण सोध्दा, प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत पौडेलका अनुसार विद्यालयले शिक्षक भर्ना सम्बन्धी कुनै समन्वय नगरेको पुष्टि भएपछि विज्ञापन स्थगित गरिएको र स्पष्टीकरण मागिएको हो। विद्यालयका प्रधानाध्यापक सिंहले नगरपालिकासँग छलफलपछि प्रक्रिया अघि बढाउने बताएका छन्। उनले भने, “हामीले कार्यविधिअनुसार विज्ञापन निकालेका हौं।”
समाचार सारांश समीक्षा पश्चात प्रस्तुत। धनकुटा एफ.एम. के आयोजन में ‘चियासँग कविता’ नियमित रूप से संचालित हो रहा है। शुक्रवार के कार्यक्रम में कवि उत्तम तुम्सा और डिआर फुयल ने लगभग एक दर्जन कविताएँ प्रस्तुत कीं, जबकि गायक तेजेन्द्र गंधर्व ने गीतों से मंच सजाया। यह कार्यक्रम २०८१ माघ में कुछ साहित्यप्रेमियों की बैठक से जन्मा ‘चियासँग कविता’ का स्वरूप २०८१ फागुन २ से हर शुक्रवार नियमित रूप से आयोजित हो रहा है। ५ वैशाख, धनकुटा।
सरंगी की मधुर धुन ने माहौल को पूर्णता से भर दिया था, और उस धुन के साथ मंच से निकले शब्द सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंच रहे थे। कविता पाठ करते समय कभी-कभी दमाहा बजाकर रंगत दी जाती थी तो कभी उत्साहपूर्वक मंच पर झूम उठते थे। दर्शक भावुक हो जाते या ताल में झूमकर आनंदित होते थे। पहली नज़र में यह एक नाट्य कार्यक्रम जैसा लग सकता था, परंतु यह वास्तव में एक कविता कंसर्ट का दृश्य था। शुक्रवार की दोपहर धनकुटा स्थित हमारे बहुमुखी पाठशाला के प्रांगण में आयोजित ‘चियासँग कविता’ कंसर्ट ने ऐसा मनोहर और आकर्षक दृश्य प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम ने साहित्य और संगीत का मेल प्रस्तुत करते हुए धनकुटा में एक नई सौंदर्य अनुभूति प्रदान की।
औपचारिकताओं से अधिक आत्मीयता दिखाए इस कार्यक्रम में उपस्थित लोग केवल दर्शक नहीं, बल्कि शब्द, धुन और अनुभूति के साथ एक समान यात्रा पर थे। जब कवि मंच पर खड़े होते हैं तो माहौल गंभीर हो जाता है। प्रेम, दुख, समाज और जीवन के विभिन्न आयाम कविता के माध्यम से प्रस्तुत होते हैं। हर कविता के बाद बजने वाली तालें दर्शकों के मन में उन शब्दों की गहराई का संकेत देती हैं। इसी क्रम में गीत की सुर ने वातावरण को नया रंग दिया। कार्यक्रम में कवि उत्तम तुम्सा एवं डिआर फुयल ने लगभग एक दर्जन कविताएं सुनाईं, जबकि गायक तेजेन्द्र गंधर्व ने आधा दर्जन गीत प्रस्तुत किए। संगीत और साहित्य के मिलन ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि भावनात्मक संबंधों को भी मजबूत किया।
रेडियो धनकुटा एफ.एम. १०६.२ मेगाहर्ट्ज के आयोजन में सम्पन्न ‘चियासँग कविता’ कंसर्ट का यह ५५वां अंक था। नेपाल पत्रकार महासंघ, धनकुटा के अध्यक्ष विदुर खवास ने बताया कि इस कार्यक्रम में आक्रोश, दुःख और प्रेम से भरी कविताएं सुनाई गईं। उन्होंने कहा कि धनकुटा में चियासँग कार्यक्रम के माध्यम से साहित्यिक वातावरण विकसित हो रहा है तथा यह कवि वर्ग का ठिकाना बनता जा रहा है। बाल, युवा और वृद्ध सभी इस कार्यक्रम में सक्रिय भाग लेते हैं, अपनी कृतियां प्रस्तुत करते हैं और दूसरों की रचनाएं सुनने की उत्सुकता दिखाते हैं। यह पहल २०८१ माघ में साहित्यप्रेमियों के एक जमावड़े से शुरू होकर २०८१ फागुन २ से हर शुक्रवार नियमित रूप से हो रही है।
विभिन्न व्यवसायों और व्यस्तताओं के बाबजूद साहित्यकारों को एक जगह जोड़ने का माध्यम यह आयोजन बना हुआ है, रेडियो धनकुटा एफ.एम. के अध्यक्ष गोपाल बराइली ने बताया। उनके अनुसार प्रतिभागियों को कविता, गजल, मुक्तक या गीत प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है और प्रत्येक अंक किसी अलग अध्यक्ष के नेतृत्व में संचालित होता है। फागुन १ को आयोजित ५०वें आयोजन के साथ ही इस कार्यक्रम ने अपना प्रथम वार्षिकोत्सव मनाया और विभिन्न साहित्यिक विधाओं में पुरस्कार वितरित किए। प्रत्येक वर्ष श्रेष्ठ कविताओं का संग्रह ‘‘चियासँग कविता’’ नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाता है। इस कार्यक्रम के निरंतर संचालन के लिए अक्षय कोष भी स्थापित किया गया है, यह जानकारी बराइली ने दी। ‘चियासँग कविता’ कंसर्ट में कोशी प्रदेश के आंतरिक मामला एवं कानून मंत्री इन्द्रमणि पराजुली ने कहा कि साहित्य समाज में परिवर्तन लाने में सक्षम है और यह कार्यक्रम धनकुटा तथा पूरे देश को सकारात्मक संदेश देता है। मंत्री पराजुली ने चियासँग कविता अक्षय कोष में १० हजार रुपये आर्थिक सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
शिवपुरी स्थित सैनिक कमांड तथा स्टाफ कॉलेज में 10 देशों के 92 सुरक्षा अधिकारीयों को कमांड एवं स्टाफ प्रशिक्षण दिया जाना शुरू किया गया है। नेपाली सेना के बलाधिकारी रथी प्रदीप केसी ने प्रशिक्षण के शुभारंभ अवसर पर कहा कि यह कार्यक्रम अनुभवों के आदान-प्रदान तथा व्यवहारिक योजना बनाने में सक्षम बनाएगा।
इस प्रशिक्षण में नेपाली सेना की 79 अधिकारीयों में 4 महिलाएं शामिल हैं, साथ ही नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस तथा राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग से 1-1 अधिकारी, चीन के 2 अधिकारी तथा अमेरिका, ब्रिटेन, बांग्लादेश, भारत, केन्या, मालदीव, नाइजीरिया एवं पाकिस्तान से 1-1 अधिकारी के साथ कुल 92 प्रतिभागी शामिल हैं। सैनिक कमांड तथा स्टाफ कॉलेज की स्थापना 14 पुष 2049 को की गई थी।
इस कॉलेज से अब तक कुल 1,308 नेपाली सेना, 17 नेपाल पुलिस, 29 सशस्त्र पुलिस, 20 राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग, 1 रक्षा मंत्रालय के अधिकारी और विभिन्न 132 अन्य देशों के कुल 1,507 अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
५ वैशाख, काठमाडौं। नेपाल राष्ट्र बैंक ने आज विदेशी मुद्राओं के विनिमय दरों को निर्धारित किया है। इसके अनुसार अमेरिकी डालर का खरीद मूल्य १४८ रुपये ३९ पैसे और बिक्री मूल्य १४८ रुपये ९९ पैसे रखा गया है। इसी प्रकार, यूरोपीय यूरो का खरीद मूल्य १७५ रुपये ०६ पैसे और बिक्री मूल्य १७५ रुपये ७६ पैसे, तथा यूके पाउंड स्टर्लिंग का खरीद मूल्य २०० रुपये ७५ पैसे और बिक्री मूल्य २०१ रुपये ५६ पैसे निर्धारित किया गया है। स्विस फ्रैंक का खरीद मूल्य १८९ रुपये ६५ पैसे और बिक्री मूल्य १९० रुपये ४१ पैसे रखा गया है।
ऑस्ट्रेलियन डालर का खरीद मूल्य १०६ रुपये ४० पैसे और बिक्री मूल्य १०६ रुपये ८३ पैसे, कनाडाई डालर का खरीद मूल्य १०८ रुपये ४९ पैसे और बिक्री मूल्य १०८ रुपये ९३ पैसे निर्धारित किया गया है। उसी प्रकार सिंगापुर डालर का खरीद मूल्य ११६ रुपये ६२ पैसे और बिक्री मूल्य ११७ रुपये ०९ पैसे कायम किया गया है। जापानी येन १० के लिए खरीद मूल्य ९ रुपये ३२ पैसे और बिक्री मूल्य ९ रुपये ३६ पैसे, चीनी युआन का खरीद मूल्य २१ रुपये ७५ पैसे और बिक्री मूल्य २१ रुपये ८४ पैसे, सऊदी अरब के रियाल का खरीद मूल्य ३९ रुपये ५६ पैसे और बिक्री मूल्य ३९ रुपये ७२ पैसे, कतर के रियाल का खरीद मूल्य ४० रुपये ७० पैसे और बिक्री मूल्य ४० रुपये ८६ पैसे निर्धारित है।
केन्द्रीय बैंक के अनुसार थाई भाट का खरीद मूल्य ४ रुपये ६३ पैसे और बिक्री मूल्य ४ रुपये ६५ पैसे, यूएई दिराम का खरीद मूल्य ४० रुपये ४० पैसे और बिक्री मूल्य ४० रुपये ५६ पैसे, मलेशियाई रिंगिटल का खरीद मूल्य ३७ रुपये ५४ पैसे और बिक्री मूल्य ३७ रुपये ७० पैसे, दक्षिण कोरियाई वॉन १०० का खरीद मूल्य १० रुपये ०३ पैसे और बिक्री मूल्य १० रुपये ०७ पैसे, स्वीडिश क्रोनर का खरीद मूल्य १६ रुपये १८ पैसे और बिक्री मूल्य १६ रुपये २५ पैसे तथा डेनिश क्रोनर का खरीद मूल्य २३ रुपये ४२ पैसे और बिक्री मूल्य २३ रुपये ५२ पैसे रखा गया है। राष्ट्र बैंक ने हांगकांग डालर का खरीद मूल्य १८ रुपये ९५ पैसे और बिक्री मूल्य १९ रुपये ०३ पैसे, कुवैती दिनार का खरीद मूल्य ४८४ रुपये ६२ पैसे और बिक्री मूल्य ४८६ रुपये ५८ पैसे, बहरीन दिनार का खरीद मूल्य ३९३ रुपये ५३ पैसे और बिक्री मूल्य ३९५ रुपये १२ पैसे, और ओमान रियाल का खरीद मूल्य ३८५ रुपये ४२ पैसे और बिक्री मूल्य ३८६ रुपये ९८ पैसे रखा है। इसी प्रकार भारतीय रुपये सौ के लिए खरीद मूल्य १६० रुपये और बिक्री मूल्य १६० रुपये १५ पैसे तय किया गया है। नेपाल राष्ट्र बैंक ने आवश्यकतानुसार इन विनिमय दरों को किसी भी समय संशोधित करने का अधिकार रखा है। वाणिज्य बैंक द्वारा निर्धारित विनिमय दरें अलग हो सकती हैं और नवीनतम विनिमय दरें केन्द्रीय बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगी।
विश्व सम्पदा क्षेत्रों में सूचीबद्ध काठमांडू के बसन्तपुर क्षेत्र की फाइल फोटो। ५ वैशाख, काठमांडू। सम्पदा संरक्षण और जनजागरण बढ़ाने के लिए आज विश्व सम्पदा दिवस मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ की शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संस्था (युनेस्को) के तहत स्थापित विश्व सम्पदा क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सन् १९८३ से प्रत्येक वर्ष १८ अप्रैल को यह दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई है। विश्व सम्पदा क्षेत्रों में वर्तमान में नेपाल के काठमांडू (बसन्तपुर, पाटन और भक्तपुर दरबार क्षेत्र, चांगुनारायण, पशुपतिनाथ, बौद्ध, स्वयम्भू), लुम्बिनी, चितवन और सगरमाथा राष्ट्रीय निकुञ्ज शामिल हैं।
इस अवसर पर आज सुबह राजधानी में आयोजित पदयात्रा कार्यक्रम का आयोजन वाग्मती प्रदेश सरकार के अधीन संस्कृति तथा पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत पर्यटन कार्यालय द्वारा किया गया है। कार्यालय प्रमुख पवनकुमार पोखरेल के अनुसार पदयात्रा गहनापोखरी से भाटभटेनी मंदिर तक निर्धारित की गई है। पदयात्रा समाप्ति के बाद हांडीगाउँ क्षेत्र के सांस्कृतिक महत्व पर एक अन्तरक्रिया कार्यक्रम भी किया जाएगा, जिसमें वाग्मती प्रदेश के संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री सुरेश श्रेष्ठ भी भाग लेंगे।
पक्राउ परेपछि बिरामी भएको दाबी गर्दै उनलाई अस्पताल भर्ना गरिएको थियो। बिहीबार अदालतले आदेश दिएपछि उनी हिरासतबाट रिहा भए। शुक्रबार दिउँसो उनी अस्पतालबाट डिस्चार्ज भएका छन्।
काठमांडू के ठमेल से 28 नकली 500 रुपये के नोटों के साथ राम कुमार पाक्रिन और शिव घिसिंग को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से नकली नोट छापने में इस्तेमाल मशीन भी बरामद की गई है, जिसके बारे में जिला पुलिस परिसर काठमांडू के एसएसपी रमेश थापाले ने बताया।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में रौतहट के फूलबारी निवासी 32 वर्षीय राम कुमार पाक्रिन और सिन्धुली के घ्याङलेख गाउँपालिका–5 के 24 वर्षीय शिव घिसिंग शामिल हैं। उन्हें पुलिस वृत्त सोह्रखुट्टे की टीम ने गिरफ्तार किया है।
उनके पास से 500 रुपये के 28 नकली नोट और नकली नोट छापने में प्रयुक्त मशीन बरामद की गई है, जानकारी जिला पुलिस परिसर काठमांडू के एसएसपी रमेश थापाले ने दी।
गिरफ्तार आरोपियों की जांच के लिए काठमांडू जिला अदालत ने 5 दिनों की न्यायिक हिरासत अवधि दी है तथा जांच कार्य जारी है।
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक १३ दिन की हिरासत के बाद रिहा हुए, लेकिन उनके खिलाफ जांच अभी भी जारी है, ऐसा जानकारी नेपाल के जिला पुलिस परिसर काठमांडू के एसपी पवनकुमार भट्टराई ने दी। कार्की आयोग ने ओली और लेखक को दोषी ठहराते हुए मुलुकी फौजदारी संहिता की धारा १८१ और १८२ के तहत कार्रवाई की सिफारिश की थी, जिसे मंत्रिपरिषद ने लागू किया था। ४ वैशाख, काठमांडू।
पूर्व प्रधानमंत्री और नेकपा एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री एवं कांग्रेस नेता रमेश लेखक हिरासत से मुक्त होने के बाद भी पुलिस द्वारा उनकी जांच संपूर्ण रूप से जारी है। १३ दिनों की हिरासत के बाद रिहा हुए दोनों की जांच जारी रखने की पुष्टि जिला पुलिस परिसर काठमांडू के एसपी और प्रवक्ता पवनकुमार भट्टराई ने की। उन्होंने कहा, ‘हिरासत से रिहा होने के बाद जांच कैसे होगी इस बारे में सामान्य तौर पर प्रश्न उठे हैं, लेकिन उनकी जांच लगातार हो रही है।’
उनके अनुसार, जांच के लिए तामेली फाइल उठाकर पुलिस जांच प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। भदौ २३ को जेएनजी आंदोलन के दौरान हुई हत्याकांड से संबंधित नौ आवेदन काठमांडू परिसर में आए थे। सरकारी वकील कार्यालय के निर्णयानुसार २७ असोज को ये आवेदन तामेली में रखे गए थे। उन नौ आवेदन में से एक की तामेली पुलिस ने उठाकर जांच शुरू कर दी है। एसपी भट्टराई ने स्पष्ट किया, ‘एक आवेदन की तामेली उठाकर हम जांच कर रहे हैं। तथ्यों और सबूतों के संकलन का कार्य हो रहा है।’
वर्तमान में शव परीक्षा, मुचल्का, नवाचार एवं शव परीक्षण से संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन, सीसीटीवी फुटेज संग्रह और विश्लेषण, प्रत्यक्षदर्शियों और घटनास्थल पर मौजूद व्यक्तियों के दस्तावेजों की जांच कर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इस घटना की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में आयोग गठित किया गया था। इस आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने १३ चैत को लागू करने का निर्णय लिया था। इसके पश्चात १४ चैत की सुबह भक्तपुर स्थित निवास से ओली और लेखक को गिरफ्तार किया गया था। सर्वोच्च अदालत के आदेशानुसार वे २६ चैत को जमानत और हाजिरी पर रिहा हुए। गृह मंत्री सुधन गुरुङ भी अदालत के निर्णय से असंतुष्ट दिखे। गुरुङ ने सुरक्षा और गृह प्रशासन से संबंधित पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘रातभर कष्ट करके गिरफ्तार किया, अब अदालत ने छोड़ दिया। न्याय देना मंत्री का काम नहीं, न्यायाधीश बनना चाहिए।’
गत भदौ २३ और २४ को हुए जेएनजी आंदोलन के दौरान केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री और रमेश लेखक गृहमंत्री थे। २३ भदौ को ही सुरक्षा बलों की गोलीबारी से काठमांडू में १९ और अन्य जिलों में २, कुल २१ लोगों की मौत हुई थी। २४ भदौ सहित कुल ७६ लोगों की मृत्यु हुई थी। इस घटना की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में आयोग गठित किया गया था। कार्की आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ओली और लेखक को दोषी मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी। उन्हें मुलुकी फौजदारी संहिता के धारा १८१ और १८२ के तहत दंडित करने की सिफारिश की गई। धारा १८१ के अनुसार ‘किसी की लापरवाही के कारण उसकी हत्या करना अपराध है।’ २३ भदौ के जेएनजी आंदोलन में सरकारी बलों के उपयोग और उसे रोकने में निराशा जताने के आरोप वे दोनों पर थे। कार्की आयोग की सिफारिशें मंत्री वालन शाह के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद ने लागू की थीं, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई।
४ वैशाख, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेस की आधिकारिकता विवाद से जुड़ी रिट में बहस पूरी हो गई है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश शारंगा सुवेदी और नृपध्वज निरौलाको इजलास में गुरुवार से सुनवाई शुरू हुई थी। आज शुक्रवार को रिट निवेदक पक्ष और विपक्ष के वकीलों ने बहस की। जवाबी बहस के बाद विपक्ष की तरफ से कांग्रेस के उपसभापति विश्वप्रकाश शर्माले अंतिम बहस पेश की है। बहस समाप्त हो जाने के कारण आज ही निर्णय आने की संभावना है।
पिछले वर्ष के अंत में, काठमाडौं के भृकुटीमण्डप में आयोजित विशेष महाधिवेशन में १४वें महाधिवेशन से निर्वाचित शेरबहादुर देउवा नेतृत्व वाली कार्यसमिति को भंग कर गगन थापा के नेतृत्व में नई कार्यसमिति का चयन किया गया था। विशेष महाधिवेशन द्वारा चुनी गई इस कार्यसमिति को निर्वाचन आयोग ने वैधानिकता प्रदान की थी। इसके बाद, आयोग के इस निर्णय के खिलाफ देउवा सहित पूर्व कार्यसमिति के तत्कालीन कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्काले सर्वोच्च अदालत का रुख किया था।
सर्वोच्च अदालत द्वारा गगनकुमार के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस को आधिकारिकता प्रदान किए जाने के बाद, उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ‘नई ऊर्जा के साथ हम आगे बढ़ेंगे’ और सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प जताया।
विश्वप्रकाश शर्मा ने कहा कि वे सभी की जीत और हित सुनिश्चित करते हुए, परिवर्तनित कांग्रेस को और अधिक सशक्त बनाएंगे और नई संभावनाओं की यात्रा पर आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं। ४ वैशाख, काठमांडू। उन्होंने कहा, ‘‘नई ऊर्जा के साथ हम आगे बढ़ेंगे। श्रद्धेय सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे।’’
गगन थापा के अध्यक्षत्व में माला पहनाते हुए एक तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा, ‘‘सभी की विजय, सभी के हितों को सुनिश्चित करते हुए आगे बढ़ेंगे। परिवर्तनित कांग्रेस को और मजबूत बनाकर नई संभावनाओं की यात्रा पर आगे बढ़ेंगे।’’
अपने ट्वीट में उन्होंने आगे कहा, “नई ऊर्जा के साथ हम आगे बढ़ेंगे! श्रद्धेय सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे! सभी की विजय / सभी के हित सुनिश्चित करते हुए आगे बढ़ेंगे! परिवर्तनित कांग्रेस को और मजबूत बनाकर नई संभावनाओं की यात्रा पर आगे बढ़ेंगे! जय नेपाल!”
४ वैशाख, काठमाडौं। २५ वर्ष की सजा भुगत रहे एक फरार कैदी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार व्यक्तियों में मकवानपुर के निवासी ४२ वर्षीय संतोष उर्फ यज्ञकुमार सापकोटा शामिल हैं। उन्हें काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय की टीम ने गिरफ्तार किया है।
२ चैत्र २०७७ को बल्खु में ३२ वर्षीया संतोषी श्रेष्ठ की हम्मर से हत्या करने के मामले में सापकोटा को दोषी पाया गया था। काठमाडौं जिल्ला अदालत ने २९ भदौ २०७८ को उन्हें जन्मकैद, अर्थात २५ वर्ष की कैद की सजा सुनाई थी।
सजा भुगत रहे सापकोटा २४ भदौ को जनजागरण आन्दोलन के दौरान सुन्धारा कारागार से फरार हो गए थे। ललितपुर के हरिसिद्ध से गिरफ्तार किए गए सापकोटा को पुनः कैद भुगतने के लिए सुन्धारा कारागार भेजा गया है।
४ वैशाख, काठमाडौं। संघीय संसद के तहत कुल १६ संसदीय समितियाँ हैं। इनमें से ६ समितियों की अध्यक्षता महिला सांसद कर रही हैं। संघीय संसद दो सदनों में विभाजित है। राष्ट्रिय सभा में ४ संसदीय समितियाँ हैं, जिनमें से दो समितियों की अध्यक्ष महिला हैं और दो पुरुष। राष्ट्रिय सभामान सार्वजनिक नीति तथा प्रत्यायोजित विधायन समिति की अध्यक्ष पूजा चौधरी हैं, जबकि संघीयता सशक्तिकरण तथा राष्ट्रिय सरोकार समिति की अध्यक्ष जयन्ती देवी राई हैं। विकास, आर्थिक मामिला तथा सुशासन समिति के अध्यक्ष कृष्णप्रसाद पौडेल हैं और विधायन व्यवस्थापन समिति के अध्यक्ष कृष्ण बहादुर रोकाय हैं।
प्रतिनिधि सभा में १० संसदीय समितियाँ हैं। दोनों सदनों में दो संयुक्त समितियाँ भी गठित हैं। इन समितियों का अधिवेशन सोमबार सम्पन्न हुआ। शुक्रवार निर्वाचित १२ संसदीय समिति के अध्यक्षों में से ४ महिला हैं। कानुन, न्याय तथा मानवअधिकार समिति की अध्यक्ष समीक्षा बास्कोटा हैं, महिला तथा सामाजिक मामिला समिति की अध्यक्ष आकृति अवस्थी हैं, अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध तथा पर्यटन समिति की अध्यक्ष सुम्नीमा उदास हैं, और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सूचना प्रविधि समिति की अध्यक्ष ओजस्वी शेरचन हैं। बाकी समितियाँ पुरुष अध्यक्षों के नेतृत्व में हैं। राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति के अध्यक्ष हरि ढकाल हैं, कृषि, सहकारी तथा प्राकृतिक स्रोत समिति के अध्यक्ष अशोककुमार चौधरी हैं, पूर्वाधार विकास समिति के अध्यक्ष आशिष गजुरेल हैं, संसदीय सुनुवाइ समिति के अध्यक्ष बोधनारायण श्रेष्ठ हैं, उद्योग, वाणिज्य तथा श्रम तथा उपभोक्ता हित समिति के अध्यक्ष रहबर अन्सारी हैं, और अर्थ समिति के अध्यक्ष कृष्णहरि बुढाथोकी हैं। सार्वजनिक लेखा समिति के अध्यक्ष भरत खड्का हैं और राज्य के निर्देशक सिद्धान्त, नीति तथा दायित्व के कार्यान्वयन अनुगमन तथा मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष गणेश कार्की हैं।
नेप्से सोमवार से नई सर्किट ब्रेक व्यवस्था लागू कर रहा है। इसके अनुसार, कारोबार शुरू होने के दो घंटे के अंदर परिसूचक ५ प्रतिशत बढ़ने या घटने पर पहला ब्रेक लगेगा। पहला सर्किट ब्रेक लगने पर १५ मिनट के लिए कारोबार स्थगित किया जाएगा और उसके बाद यदि परिसूचक ८ प्रतिशत बढ़े या घटे तो दूसरा ब्रेक लगकर उस दिन के लिए कारोबार बंद हो जाएगा। इससे पहले तीन सर्किट ब्रेक की व्यवस्था थी, लेकिन अब दोहरे सर्किट ब्रेक रखे जाएंगे और सर्किट ब्रेकर की सीमा बढ़ाई गई है। ४ वैशाख, काठमाडौं।
सोमवार से शेयर बाजार में नई सर्किट ब्रेक व्यवस्था लागू होने जा रही है। नेप्से ने वर्तमान कारोबार संचालन विनियमावली में संशोधन कर आगामी सोमवार से नए नियम लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के अनुसार, कारोबार शुरू होने के दो घंटे के भीतर नेप्से परिसूचक पिछले दिन की तुलना में ५ प्रतिशत बढ़ते या घटते ही पहला सर्किट ब्रेक लागू होगा। उसके बाद १५ मिनट के लिए कारोबार रुका रहेगा। १५ मिनट के बाद खुलने वाले कारोबार में यदि नेप्से परिसूचक ८ प्रतिशत बढ़ता या घटता है, तो उसी दिन के लिए कारोबार स्थगित कर दिया जाएगा। अब बाजार में दो ही सर्किट ब्रेक लागू होंगे, लेकिन सर्किट ब्रेकर की सीमा बढ़ाई गई है। पहले नियम के अनुसार तीन सर्किट ब्रेक होते थे। पहले, एक घंटे के भीतर परिसूचक ४ प्रतिशत बढ़ने या घटने पर पहला सर्किट ब्रेक लगाकर २० मिनट के लिए कारोबार स्थगित किया जाता था। फिर खुलने वाले कारोबार में ५ प्रतिशत बढ़ने या घटने पर दूसरा सर्किट ब्रेक लगाकर ४० मिनट के लिए कारोबार स्थगित किया जाता था। इसके बाद ४० मिनट बाद खुले कारोबार में पिछले दिन की तुलना में समग्र नेप्से परिसूचक ६ प्रतिशत बढ़ने या घटने पर तीसरा सर्किट ब्रेक लागू होता था।