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लेखक: space4knews

रविन्द्र ढाँट ‘रोड टु युएफसी’ सेमीफाइनल में प्रवेश

नेपाली एमएमए फाइटर रविन्द्र ढाँट युएफसी की चयन प्रतियोगिता रोड टु युएफसी सीजन ५ के सेमीफाइनल चरण में पहुँच गए हैं। १४ जेठ, काठमांडू। गुरुवार मकाऊ के गैलेक्सी एरिना में हुए क्वार्टरफाइनल मैच में फिलीपींस के किम्बर्ट अलिन्टोज़ोन को दूसरे राउंड में हराते हुए रविन्द्र ने सेमीफाइनल की यात्रा तय की है। ‘बझाङ का बाघ’ नाम से प्रसिद्ध ढाँट का समर्थन करने के लिए हजारों नेपाली प्रशंसक मौजूद थे।

रविन्द्र रोड टु युएफसी में जीत दर्ज करने वाले प्रथम नेपाली फाइटर बने हैं। सेमीफाइनल में वे जापान के योनुसुके मिनामी और न्यूजीलैंड के कासिब मर्डोक के बीच विजेता से मुकाबला करेंगे। शुरुआत में उनका सामना मैटी इयान से होना था, लेकिन मैटी के चोटिल होने के कारण फिलीपींस के किम्बर्ट अलिन्टोज़ोन ने उनकी जगह ली। बैंटमवेट वेट कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा कर रहे रविन्द्र विजेता बनते ही प्रतियोगिता के मुख्य स्टेज युएफसी में प्रवेश करेंगे। नेपाली एमएमए के एक प्रमुख फाइटर के रूप में, उन्होंने पिछले वर्ष भारत के ग्रेटर नोएडा में आयोजित मेट्रिक्स फाइट नाइट १७ में भारत के चुंगरेन कवरेन को नॉकआउट कर उपाधि जीती थी।

‘चाइना शक २.०’ को बढ्दो त्रासका बीच युरोपेली नेताहरू ‘तत्काल कदम चाल्न’ तयार

यूरोपियन नेता चीन के खिलाफ आर्थिक दृष्टिकोण को सख्त बनाने की तैयारी में

यूरोपियन कमीशन के नेता आगामी शुक्रवार की बहस के जरिए चीन के प्रति आर्थिक दृष्टिकोण को और सख्त बनाने की तैयारी में हैं। व्यापार आयुक्त मारोस सेफ्कोविच ने चीनी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता घटाने के लिए नया विविधीकरण उपकरण प्रस्ताव करने की योजना बनाई है। औद्योगिक मामलों के प्रमुख स्टीफन सेजुर्नी चीनी कंपनियों के कारण बाजार पर पड़े प्रभाव को रोकने के लिए विदेशी अनुदान नियंत्रण नियमावली के व्यापक उपयोग के पक्ष में हैं।

१४ जेठ, काठमांडू। यूरोपियन कमीशन के नेता आगामी शुक्रवार एक महत्वपूर्ण बहस में चीन के प्रति यूरोपीय संघ की आर्थिक नीति को सख्त करने की तैयारी कर रहे हैं। इससे इस वर्ष के अंत तक व्यापार एवं औद्योगिक उपायों की नई लहर शुरू होने का मार्ग खुलेगा। सूत्रों के अनुसार ब्रसेल्स में अब ‘चाइना शॉक २.०’ यानी ‘डी-इंडस्ट्रियलाइजेशन’ का डर बढ़ता जा रहा है। अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन समेत २७ आयुक्तों में से अधिकांश व्यापार और औद्योगिक नीतियों को और कड़ा करने के पक्ष में हैं।

व्यापार आयुक्त मारोस सेफ्कोविच एक नया ‘विविधीकरण उपकरण’ (डाइवर्सिफिकेशन इंस्ट्रुमेंट) प्रस्तावित करने जा रहे हैं, जो चीनी आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भरता कम करने का प्रयास करेगा और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कंपनियों से दो या अधिक देशों से तीन या अधिक आपूर्तिकर्ताओं को सुनिश्चित करने का अनुरोध करेगा। औद्योगिक मामलों के प्रमुख स्टीफन सेजुर्नी विदेशी अनुदान नियंत्रण नियमावली (फॉरेन सब्सिडीज रेगुलेशन – एफएसआर) के व्यापक उपयोग के पक्ष में हैं।

हालांकि इस उपकरण का अब तक व्यक्तिगत कंपनियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता रहा है, फ्रांसीसी आयुक्त सेजुर्नी इसे अनुदान प्राप्त चीनी कंपनियों से उत्पन्न ‘मार्केट डिस्ट्रॉर्शन’ के खिलाफ क्षेत्रीय एवं व्यापक स्तर पर लागू करना चाहते हैं। दोनों अधिकारी सेफगार्ड उपायों के अधिक उपयोग का समर्थन करते हैं, जिन्हें आपूर्ति में अत्याधिक वृद्धि होने पर टैरिफ या कोटा लगाने के आपातकालीन उपाय के रूप में देखा जाता है। रासायनिक और मशीनरी क्षेत्रों को लक्षित करते हुए, सेफगार्ड उपायों के माध्यम से सांत्वना-निरोधी और अनुदान विरोधी जांच को लगभग ६ महीनों में सीमित करने की योजना है। उनका मुख्य चिंता चीनी प्रतिस्पर्धियों की तेज वृद्धि से कुछ वर्षों में यूरोप के औद्योगिक आधार को व्यापक नुकसान पहुंचने का है। ये चीनी कंपनियां कीमत और गुणवत्ता दोनों में चीन, यूरोप और विश्व के अन्य बाजारों में अपने यूरोपीय प्रतिस्पर्धियों से आगे निकल रही हैं।

४० किलोसम्मको लगेजमा ट्याग अनिवार्य गर्ने निर्णय

१४ जेठ, काठमाडौं । नेपाल यातायात व्यवसायी राष्ट्रिय महासंघले सबै सदस्यहरूलाई यात्रुको ४० किलोसम्मको लगेजमा ट्याग अनिवार्य गर्ने सम्बन्धमा परिपत्र जारी गरेको छ। काठमाडौंमा महाराजधनी कम्पनीसँग भएको सम्झौताअनुसार कार्यान्वयन गर्न काठमाडौं उपत्यका ट्राफिक प्रहरी कार्यालय र महासंघबीच सहमति भएपछि यस्तो निर्णय गरिएको महासंघका महासचिव डेकनाथ गौतमले जानकारी गराए।
उनका अनुसार, अब ४० किलोसम्मको सामान, सुटकेस, ब्याग तथा झिटीगुम्टामा लगेज टोकन अनिवार्य हुनेछ। महासंघले छोटो तथा लामो दुरीका सवारीसाधनहरूमा यो नियम लागू गरिने बताएका छन्। परिपत्रमा टोकनमा बुकिङ गर्ने कर्मचारी, चालक र कम्पनीको नाम उल्लेख गर्नुपर्ने पनि उल्लेख गरिएको छ।

विदेश में रहने वाले नेपाली नागरिकों से स्वदेश लौटने की सभामुख की अपील

सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने विदेश में रह रहे नेपाली नागरिकों से स्वदेश लौटने की अपील की है। धादिङ के सल्यानटार स्थित नृसिंहधाम में आयोजित पुरुषोत्तम महोत्सव में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यह आग्रह किया। यह कार्यक्रम १४ जेठ, मलेखु (धादिङ) में आयोजित किया गया था।

सभामुख अर्याल त्रिपुरासुन्दरी गाउँपालिका–१, सल्यानटार में एक महीने तक चलने वाले पुरुषोत्तम महोत्सव का अवलोकन करने गए थे, जहां उन्होंने यह विचार साझा किया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कहा कि सरकार देश के संविधान और कानूनों का पूर्ण पालक है।

ट्रम्प ने ओमान को क्यों दी धमकी? विश्लेषकों का नजरिया

१४ जेठ, काठमाडौं। बुधवार एक पत्रकार ने होर्मुज जलमार्ग पर व्यापार विनियमन के विषय में ईरान और ओमान की भूमिका के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से राय मांगी। पत्रकार ने पूछा – ‘क्या आप ईरान और ओमान को इस जलमार्ग का नियंत्रण करने देने के लिए कोई अस्थाई समझौता स्वीकार करेंगे?’ ट्रम्प ने धमकी भरे स्वर में जवाब दिया, ‘किसी का भी नियंत्रण वहाँ नहीं होगा। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और ओमान को भी अन्य देशों की तरह सभ्य व्यवहार करना चाहिए, नहीं तो हमें उन्हें उड़ा देना पड़ेगा।’ उनके उत्तर से प्रारंभ में ऐसा लगा कि उन्होंने गलती से ‘ईरान’ के स्थान पर ‘ओमान’ कह दिया होगा। लेकिन बाद में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस बयान की आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट के साथ इसे सोशल मीडिया पर साझा किया और उसी अरब देश के प्रति संकेत की पुष्टि की।

अमेरिका और ओमान के बीच २०० वर्षों से भी अधिक पुराना संबंध है और दोनों देशों को निकट सहयोगी राष्ट्र के रूप में जाना जाता है। सुरक्षा साझेदारी, मुक्त व्यापार समझौते, विज्ञान और तकनीकी सहयोग जैसी विभिन्न क्षेत्रों में उनकी साझेदारी है। ओमान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका भी निभाई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माएल बाघाई ने गुरुवार एक सार्वजनिक विज्ञप्ति में ‘अमेरिकी अधिकारियों की धमकी’ के बाद ओमान के प्रति एकजुटता जताई और बंदर अब्बास क्षेत्र में अमेरिकी हमले की निंदा की। इसके बाद अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान पर नया हमला किया, जो होर्मुज जलमार्ग के सैन्य क्षेत्र को निशाना बना रहा है।

कमजोर युद्धविराम के बीच यह इस सप्ताह ईरान पर दूसरा अमेरिकी हमला था। ईरानी पक्ष ने अमेरिका के इस कदम को ‘आक्रमण’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि ऐसी गतिविधियाँ दोहराई गईं, तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलमार्ग के आसपास चार खतरनाक ईरानी लड़ाकू ड्रोन गिराए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक आक्रमण का निशाना बंदर अब्बास पोर्ट में मौजूद ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन था, जहां पांचवां ड्रोन लॉन्च के लिए तैयार हो रहा था। पिछले सोमवार रात को अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदर अब्बास पर हमला किया था। सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हकिन्स ने जारी बयान में इसे ‘आत्मरक्षा के तहत हमला’ बताया है।

ईरान ने इसे अपने युद्धविराम का ‘गंभीर उल्लंघन’ मानकर आलोचना की है। एक उच्चस्तरीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल कतार में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्धविराम समझौते के दौरान इन हमलों को अंजाम दिया गया। ऐसे हमले और कमजोर युद्धविराम से पश्चिम एशिया का भविष्य अनिश्चितता में फंसा हुआ है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बुधवार बंदर अब्बास हवाई अड्डे के निकट एक अमेरिकी हवाई ठिकाने को निशाना बनाकर हमला किया है। हमले का स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन कुवैत के आकाश में मिसाइल और ड्रोन विफल करने की सूचना के बाद ईरान की यह घोषणा सामने आई।

ईरानी पक्ष ने अमेरिकी कदमों को ‘आक्रमण’ मानते हुए चेतावनी दी है कि यदि ऐसी गतिविधियां दोहराई गई तो वे ‘निर्णायक’ प्रतिक्रिया देंगे और परिणाम की पूरी जिम्मेदारी आक्रमणकारियों की होगी। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजिजी ने बुधवार को ट्रम्प की टिप्पणियों के जवाब में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ईरान अमेरिकी ‘रेड लाइन’ पर टिककर नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा निर्धारित रेड लाइन में यूरेनियम संवर्धन का अधिकार, होर्मुज जलमार्ग पर अधिकार और प्रतिबंधों को हटाने की मांग शामिल है।

अजिजी ने कहा, ‘ट्रम्प इस रणनीतिक गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहे हैं; कभी धमकियां देते हैं और कभी समझौते के लिए अपील करते हैं।’ इस बीच अमेरिका ने ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह संस्था होर्मुज जलमार्ग में जहाजों के आवागमन प्रबंधन के लिए ईरान द्वारा गठित की गई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि इस संस्था के साथ सहयोग करने वाले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की मदद कर सकते हैं और उन पर प्रतिबंध लगना संभव है।

‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ ने पिछले सप्ताह सार्वजनिक किए गए नक्शे में होर्मुज जलमार्ग के दोनों ओर व्यापक जल क्षेत्र पर तेहरान के दावे को फिर से दोहराया था। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, ‘ईरानी सैन्य प्रयास विश्व व्यापी समुद्री व्यापार को जबरन नियंत्रित करने की निरंतर कोशिशों से पता चलता है कि वहां की शासन व्यवस्था नकदी की कमी से जूझ रही है।’ ट्रम्प ने बुधवार को ईरान के साथ समझौते से अभी संतुष्ट न होने और प्रतिबंध हटाने पर कोई बातचीत नहीं करने का आरोप लगाया।

कई विश्लेषकों ने ट्रम्प के कुछ कदमों को ‘मैडमैन थ्योरी’ के विस्तार के रूप में देखा है। ट्रम्प ने कहा, ‘ईरान समझौता करना चाहता है और हम भी वही चाहते हैं। अभी यह स्थिति नहीं आई है, हम अभी संतुष्ट नहीं हैं लेकिन होंगे। अन्यथा हम पूरी कार्रवाई करेंगे।’ ट्रम्प की धमकियों और लगातार हमलों ने विभिन्न प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि कुछ देश भविष्य में अमेरिका के भूभाग बन सकते हैं, जो उनके कथित साम्राज्यवादी विस्तार की सोच को और विवादास्पद बनाता है।

इस प्रतिक्रिया में अमेरिका स्थित अधिकारवादी संस्था ‘डन’ के वकालत निदेशक राएद जरार ने ट्रम्प की टिप्पणियों को ‘माफिया जैसी’ बताया। जरार ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र के अनुच्छेद किसी भी राष्ट्र के खिलाफ सैन्य धमकी को निषिद्ध करते हैं और यह प्रतिबंध अमेरिका को भी बांधता है।’ उनके अनुसार, वाशिंगटन का उद्देश्य तेल मार्ग को पुनः खोलना है, लेकिन जलक्षेत्र के नजदीक एक अरब देश को ‘उड़ाने’ की धमकी देना कानूनी रूप से गलत मानसिकता है। इस मानसिकता ने फरवरी में युद्ध को जन्म दिया था। ‘ट्रम्प प्रशासन द्वारा कराए जाने वाले किसी भी युद्धविराम को राष्ट्रपति के मंत्रिपरिषद की अगली बैठक तक ही माना जा सकता है,’ उन्होंने कहा।

ईरानी विश्लेषक फोआद इजादी ने कहा – ईरान होर्मुज जलमार्ग पर अपनी रणनीति को सैन्य संघर्ष से हटाकर कानूनी सार्वभौमिकता की ओर मोड़ रहा है। ‘संयुक्त राज्य अमेरिका ११,००० किलोमीटर दूर है और उसकी अधिकारिता केवल मैक्सिको की खाड़ी तक सीमित है।’ इजादी के अनुसार, होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह से ईरान और ओमान के नियंत्रण में है और वहां कोई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र नहीं है। लेकिन तेहरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से नेविगेशन शुल्क वसूलने का अधिकार रखता है। ऐसा नियम तुर्की, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अपने जलमार्गों में भी लागू किया है।

कई जानकार ट्रम्प के कदमों को ‘मैडमैन थ्योरी’ के विस्तार के रूप में देखते हैं, जो सैन्य कारवाही की संभावना दिखाकर विरोधियों को दबाव में लाता है। ट्रम्प की धमकी को ‘गनबोट कूटनीति’ भी कहा जाता है, जिसमें सैन्य शक्ति के सहारे कूटनीति की जाती है। इसी कूटनीतिक आधार पर ट्रम्प ने ईरान और ओमान की संयुक्त जलमार्ग प्रबंधन प्रस्ताव को खारिज किया माना जाता है।

नेपाल सेमीफाइनल में इरान से पराजित, फाइनल में इरान और कजाखस्तान का मुकाबला

नेपाल में आयोजित कावा महिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में नेपाल को इरान के खिलाफ सीधे सेटों में हार का सामना करना पड़ा। त्रिपुरेश्वर स्थित कवर हॉल में गुरुवार को हुए मुकाबले में इरान ने २५-२०, २५-१५ और २५-११ के सीधे सेटों में नेपाल को पराजित किया। अब उपाधि के लिए इरान कजाखस्तान से भिड़ेगा, जिसने दूसरे सेमीफाइनल में भारत को हराया था।

नेपाल सेमीफाइनल में ३-० के सेट हारकर फाइनल में जगह बनाने में असफल रहा। घरेलू मैदान पर लगभग दो हजार दर्शकों ने नेपाल का समर्थन किया, लेकिन इरान ने नेपाली दर्शकों को चुप कराते हुए जीत हासिल की। कजाखस्तान ने पहले सेमीफाइनल में भारत को ३-० के सेटों से हराकर फाइनल में प्रवेश किया है।

समूह ए की दोनों टीमें सेमीफाइनल से बाहर हो गईं, जबकि समूह बी की टीमें फाइनल में पहुंची हैं। समूह चरण में इरान ने कजाखस्तान को सीधे सेटों में हराया था। पहले सेट में नेपाल ने १०-८ की बढ़त बनाई थी, लेकिन इरान ने टाइमआउट लेकर खेल पलटा और २५-२० से पहला सेट जीत लिया। दूसरे सेट में इरान ने २५-१५ से जीत दर्ज करते हुए २-० की बढ़त बना ली। तीसरे सेट में नेपाल का प्रदर्शन कमजोर रहा, इरान ने ८-२, १६-४, २२-९ की बढ़त बनाते हुए आसानी से सेट अपने नाम किया।

एनआरएनए कानुनको मस्यौदामाथि छलफल हुन्छः परराष्ट्र मन्त्री

परराष्ट्र मंत्री ने एनआरएनए कानून के मसौदे पर व्यापक चर्चा का ऐलान किया

परराष्ट्र मंत्री शिशिर ख़नाल ने गैरआवासीय नेपाली संबंधी विधेयक के मसौदे पर सभी हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा के बाद ही इसे संसद में प्रस्तुत करने की बात कही है। एसोसिएशन ऑफ नेपाली ओरिजिन (एएनओ) ने प्रस्तावित विधेयक की कुछ धाराओं को अव्यवहारिक बताया और उन्होंने मंत्री ख़नाल का ध्यान आकर्षित कराया है। मंत्री ख़नाल ने वर्तमान में सार्वजनिक किए गए मसौदे को “शून्य ड्राफ्ट” बताया और कहा कि संसद में पेश करने से पहले सभी की राय और सुझाव लिए जाएंगे। १४ जेठ, काठमाडौँ।

परराष्ट्र मंत्री शिशिर ख़नाल ने कहा कि गैरआवासीय नेपाली संबंधी विधेयक के वर्तमान सार्वजनिक मसौदे पर सभी संबंधित निकायों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक रूप से चर्चा की जाएगी। आज मंत्रालय में एएनओ केन्द्रीय समिति के उपाध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील कुमार पन्त के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि यह मसौदा एक प्रकार से ‘शून्य ड्राफ्ट’ है और इसे सभी पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही संसद में पेश किया जाएगा।

एएनओ ने इस विधेयक के सार्वजनिक मसौदे की कुछ धाराओं को अव्यवहारिक बताया तथा विदेश में बसे नेपाली लोगों को नेपाल से जोड़ने के लिए इसे पर्याप्त नहीं माना, जिसकी जानकारी मंत्री ख़नाल को दी गई। उन्होंने इस पत्र को ग्रहण करते हुए बताया कि उन्होंने इस विषय पर एक प्रश्नावली तैयार की है और संसद में विधेयक प्रस्तुत करने से पहले संबंधित सभी पक्षों से सलाह-मशविरा किया जाएगा।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष पन्त ने कहा कि प्रस्तावित कानून नेपाली पहचान और भावना को नेपाल से लंबे समय तक जुड़ा रखने वाला एक मजबूत सेतु होना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया है कि नेपाली उत्पत्ति वाले व्यक्तियों की परिभाषा में संशोधन आवश्यक है, साथ ही तीन पीढ़ियों तक और उससे बाहर के प्रवासी नेपाली मुद्दे को संबोधित करने हेतु व्यापक चर्चा और संशोधन जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल में एएनओ के महासचिव चूडामणि भट्टराई, बोर्ड ऑफ ट्रस्टी सदस्य बाबुकृष्ण कार्की, और एएनओ नेपाल के अध्यक्ष कृष्णप्रसाद सापकोटा भी उपस्थित थे।

नेपाल के पर्यटन विकास के लिए आवश्यक 10 कार्य

नेपाल के पर्यटन को सामान्य भ्रमण से अनुभव आधारित, उच्च मूल्य और स्थायी मॉडल की ओर ले जाना आवश्यक है। नेपाल में पर्यटन की असीम संभावनाएं होना कोई नई बात नहीं है। यह विषय लंबे समय से उठता रहा है, पर इसका पूर्ण उपयोग नहीं हो पाया है। सभी की मान्यता है कि पर्यटन से समृद्धि संभव है, लेकिन व्यवहार में कार्यान्वयन कमजोर दिखाई देता है। नीतियाँ और कार्ययोजनाएँ इस प्रकार नहीं बनाई गईं, जिसके कारण बड़ी संभावनाएं व्यर्थ रह गई हैं। अब विलंब करने का समय नहीं है। नेपाल के पर्यटन को सामान्य भ्रमण से अनुभव आधारित, उच्च मूल्य और स्थायी मॉडल की ओर ले जाना विशेष प्राथमिकता होनी चाहिए।

१) रिब्रांडिंग और रिपोजिशनिंग: हिमालय और पर्वतारोहण के अलावा सांस्कृतिक धरोहर, स्वास्थ्य, साहसिक गतिविधियाँ और आध्यात्मिक पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। लुम्बिनी को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक ध्यान केंद्र बनाने तथा नेपाल भ्रमण वर्ष जैसे अभियानों को निरंतर जारी रखते हुए व्यावसायिक प्रतिष्ठान और विपणन के साथ समन्वय स्थापित करना जरूरी है।

२) गुणवत्ता वाले पूर्वाधार: पर्यटन के लिए आवश्यक पूर्वाधार सुरक्षित और नियमित संचालन में रहना चाहिए। काठमांडू, पोखरा और लुम्बिनी में स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की क्षमता और प्रबंधन में सुधार कर हवाई नेटवर्क को सुगम बनाना होगा। सड़क नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी में भी सुधार की आवश्यकता है। पर्यटक बस और ट्रेकिंग मार्गों में भी बड़े सुधारों की जरूरत है।

३) सेवा गुणवत्ता और मानव संसाधन विकास: आतिथ्य सत्कार में असंगत होटल, रेस्तरां और मार्गदर्शकों को नियमित प्रशिक्षण और क्षमता विकास पर जोर देना चाहिए। इससे आतिथ्य को सम्मानजनक करियर के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। स्थानीय स्तर पर कौशल विकास केंद्र स्थापित कर विभिन्न तकनीकी दक्षताएँ भी प्रदान की जा सकती हैं।

४) नए गंतव्य और उत्पाद विकास: नेपाल के कई पर्यटक स्थलों पर भीड़ बढ़ने के कारण सेवा स्तर और आकर्षण नष्ट होने का खतरा है। ऐसी स्थिति में नए गंतव्य खोजने और विकास के लिए जल्द कदम उठाना आवश्यक है। रारा झील क्षेत्र को उच्च मूल्य का पर्यावरण पर्यटन केंद्र बनाना, उपरी मुस्ताङ को सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करना, चाय-कॉफी से जुड़े कृषि पर्यटन जैसी संभावनाओं को तत्काल तलाशा जा सकता है।

५) डिजिटल मार्केटिंग और प्रौद्योगिकी का उपयोग: Google, TripAdvisor, Booking.com जैसे प्लेटफार्मों पर प्रभावशाली उपस्थिति, OTA और ऑनलाइन बुकिंग सुविधाओं के साथ समन्वय, वर्चुअल टूर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर पर्यटन को बढ़ावा देना होगा।

६) नीतिगत सुधार और सुविधाएँ: पर्यटक प्रवेश अनुमति वितरण में वन-डोर पॉलिसी लायी जा सकती है। वीजा नीति को सरल और सहज बनाना चाहिए। कर छूट सहित प्रोत्साहनों को बनाए रखने से निजी क्षेत्र इस क्षेत्र में अधिक सहयोग कर सकता है।

७) सुरक्षा, स्वच्छता और विश्वास का माहौल: पर्यटक पुलिस को सशक्त बनाकर, स्वच्छता अभियानों, वन, पर्वत और नदी संरक्षण कार्यों को संचालित कर पर्यटन को सम्मानजनक बनाया जा सकता है।

८) पर्यटन की स्थिरता के लिए प्राथमिकता: ट्रेकिंग मार्गों में प्लास्टिक प्रतिबंध लगाना, स्थानीय सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देना, कूड़ा नियंत्रण के लिए प्रभावी योजनाएं लागू करना, एक गांव–एक उत्पाद जैसी परियोजनाओं को निरंतर जारी रखना।

९) उच्च मूल्य वाले पर्यटन रणनीतियाँ अपनाना: अब प्राथमिकता अधिक संख्या में पर्यटक लाने से अधिक, अधिक खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने की होनी चाहिए।

१०) सार्वजनिक और निजी सहभागिता: सरकार सभी व्यवसाय नहीं चला सकती और उसे नहीं भी चाहिए। उपयुक्त माहौल बनाकर निवेश की सुरक्षा, राजस्व सृजन के साधन विकसित करके और विभिन्न सुविधाएँ प्रदान करके निजी क्षेत्र को आकर्षित करना होगा।

अंत में, नेपाल के पास प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्म में बड़ी संभावनाएं हैं। इन्हें जोड़ने की जरूरत है। केवल संख्या नहीं, गुणवत्ता आधारित पर्यटन आवश्यक है। इसके लिए सिद्धार्थ हॉस्पिटैलिटी इस प्रकार के सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।

अध्यादेश के माध्यम से कांग्रेस और एमाले के बीच हिस्सेदारी पूरी

१४ जेठ, विराटनगर। कोशी प्रदेश सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम में संशोधन करते हुए आठ महीने से नेतृत्व विहीन कोशी प्रदेश खेलकूद विकास बोर्ड के पदाधिकारियों की नियुक्ति की है। अधिनियम में संशोधन करते हुए सत्तारूढ़ दल नेकपा एमाले और नेपाली कांग्रेस के बीच हिस्सेदारी के आधार पर बोर्ड के पदाधिकारी और सदस्य नियुक्त किए गए हैं। पूर्व में सदस्य सचिव पर्शुराम बस्नेत के कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद बोर्ड में नेतृत्व का अभाव होने के कारण प्रदेश में खेलकूद गतिविधियां सुस्त पड़ गई थीं।
बुधवार की रात सामाजिक विकास मंत्री रामप्रसाद महतो ने बोर्ड में दो उपाध्यक्षों और सदस्य सचिव सहित ११ सदस्यों की नियुक्ति की। नियुक्तियों में एक उपाध्यक्ष, सदस्य सचिव और पाँच सदस्य एमाले से नियुक्त किए गए हैं। कांग्रेस से उपाध्यक्ष सहित ६ सदस्यों की नियुक्ति हुई है।
दोनों दलों के बीच हिस्सेदारी को लेकर ३० वैशाख को प्रदेश खेलकूद संशोधन प्रथम अध्यादेश–२०८१ जारी किया गया था। अधिनियम में उपाध्यक्ष और सदस्य सचिव सहित कुल सदस्यों की संख्या १५ निर्धारित थी। अध्यादेश के माध्यम से संशोधन कर एक उपाध्यक्ष और २५ सदस्यों का प्रावधान किया गया है। बोर्ड के सदस्य सचिव के पद पर एमाले की ओर से इनरुवा के विप्लव घोष नियुक्त किए गए हैं। महिला उपाध्यक्ष के रूप में एमाले की नेता विराटनगर की संतोषी श्रेष्ठ नियुक्त हुई हैं। पुरुष उपाध्यक्ष का पद नेपाली कांग्रेस के हिस्से में है। कांग्रेस से पूर्व खिलाड़ी वसन्त अर्याल उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। बोर्ड के सदस्यों में विराटनगर की बीना बस्नेत, केशव भट्टराई, किशोरविक्रम साह, टीकाराम पुरी, दुर्गा कठायत और बालजित राई शामिल हैं। पदाधिकारियों और सदस्यों का कार्यकाल चार वर्ष का होगा।

रवि लामिछाने के भारत दौरे पर बालेन शाह नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों पर उठ सकते हैं सवाल

अगले सप्ताह भारत दौरे पर जाने वाले राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने का दिल्ली में बड़ा स्वागत किया जाएगा, ऐसा भारतीय विश्लेषकों ने बताया है। उनका कहना है कि बालेन शाह नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अपनाई गई कुछ नीतियों पर भारत द्वारा लामिछाने से प्रश्न पूछे जा सकते हैं। शाह की सरकार के गठन के बाद दिल्ली से निमंत्रण पाने वाले वे पहले उच्चस्तरीय सत्ताधारी नेता हैं। पिछले साल भाद्र में हुए जनजीविका आंदोलन के बाद संपन्न चुनाव में रास्वपाले प्रतिनिधि सभा में लगभग दो तिहाई बहुमत प्राप्त किया था।

प्रधानमंत्री शाह ने कूटनीतिक मुलाकातों को सीमित रखा है और विदेश नीति पर स्पष्ट दृष्टिकोण सार्वजनिक नहीं किया है, जिसके कारण नई दिल्ली सत्ताधारी दल के नेताओं से सरकार की नीतियों के बारे में अधिक स्पष्टता मांग सकती है, एक भारतीय विशेषज्ञ ने कहा। एक नेपाली विशेषज्ञ ने भी कहा कि उच्च स्तरीय बैठक होने का अनुमान है लेकिन रवि लामिछाने ‘सावधानीपूर्वक’ तरीके से भारतीय पक्ष के साथ संवाद करेंगे।

यह दौरा भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के निमंत्रण पर हो रहा है। दिल्ली में पहुंचने के बाद पार्टी अध्यक्ष लामिछाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित अन्य अधिकारियों से बातचीत करेंगे। रास्वपा नेताओं ने बताया कि इस भ्रमण में अध्यक्ष के साथ उनके निकट दो नेता — सहमहामंत्री विपिनकुमार आचार्य और सचिवालय सदस्य दीपकराज बोहरा भी रहेंगे।

भारतीय सेना के सेवानिवृत्त जनरल अशोक मेहता, जो रास्वपा नेता भी हैं, को विश्वास है कि नई दिल्ली में उनका गर्मजोशी से स्वागत होगा और भारत की सत्ताधारी पार्टी तथा उच्च पदस्थ अधिकारी सभी विषयों पर उनसे चर्चा करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “यदि वे चाहें तो लिपुलेक क्षेत्र पर भी वार्ता हो सकती है, हालांकि इस बारे में कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी जा सकती। लामिछाने नई सरकार को भारत का पूर्ण समर्थन देने का संदेश लेकर लौटेंगे।”

एसियन गेम्स क्रिकेट छनोट खेल के लिए जाने वाली नेपाली टीम की विदाई

१४ जेष्ठ, काठमांडू। सिंगापुर में ३१ मई से शुरू होने वाले एशियाई गेम्स क्रिकेट चयन खेल में भाग लेने के लिए नेपाली पुरुष क्रिकेट टीम की विदाई की गई है।

नेपाल क्रिकेट संघ (क्यान) ने गुरुवार को एक कार्यक्रम के तहत एशियाई गेम्स क्रिकेट चयन खेल में भाग लेने वाली नेपाली टीम का सम्मान करते हुए विदाई दी।

यह चयन प्रतियोगिता ८ जून तक चलेगी और इसमें ८ देश भाग ले रहे हैं। समूह ‘ए’ में नेपाल के साथ मलेशिया और चीन शामिल हैं। समूह ‘बी’ में ओमान, हांगकांग, बहरीन और सिंगापुर हैं।

दोनों समूहों के शीर्ष दो स्थानों पर रहने वाली टीमें एशियाई गेम्स के लिए चयनित होंगी। नेपाल अपनी पहली मैच ३१ मई को चीन के खिलाफ खेलते हुए प्रतिस्पर्धा की शुरुआत करेगा।

नेपाली टीम के सदस्य: दीपेन्द्र सिंह ऐरी (कप्तान), रोहित पौडेल, लोकेश बम, नंदन यादव, करण केसी, कुशल भुर्तेल, संदीप जोरा, संदीप लामिछाने, आरिफ शेख, शाहब आलम, आसिफ शेख, कुशल मल्ल, शेर मल्ल एवं सोमपाल कामी।

तस्वीरें: विकास श्रेष्ठ

यसरी बिस्तार गरिँदै छ काँकडभिट्टा-लौकही खण्ड  – Online Khabar

काँकडभिट्टा-लौकही खण्ड विस्तार कार्य में प्रगति

१४ जेठ, काठमांडू। पूर्व–पश्चिम महेन्द्र राजमार्ग को एशियन हाइवे मानकों के अनुसार विस्तार किया जा रहा है। महेन्द्र राजमार्ग विस्तार के अंतर्गत काँकडभिट्टा–लौकही खण्ड में इस समय भी वही मापदंडों के अनुरूप कार्य चल रहा है। हालांकि, राजमार्ग विस्तार का कार्य धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। निर्माण कंपनी के अनुसार, ईंधन मूल्य वृद्धि और निर्माण सामग्री की कमी के कारण इस खण्ड के विस्तार में बाधा आ रही है। नेपाल–भारत सीमा पर स्थित मेची नदी पर चार लेन की पुल निर्माण के बाद नेपाल 6 वर्ष पहले ही ए ग्रेड के एशियन हाइवे से जुड़ चुका है। पूर्व–पश्चिम महेन्द्र राजमार्ग एशियन हाइवे के रूट–2 पर आता है जबकि वीरगंज–कोदारी खण्ड रूट–42 पर स्थित है।

महेंद्र राजमार्ग के काँकडभिट्टा-लौकही खण्ड के पूर्वी हिस्से में इब्रास्कन कालिका जेवी द्वारा कार्य किया जा रहा है। इस खण्ड में 22 किलोमीटर सड़क पर पहली परत की कालोपत्रक के लिए बेस बिछाने का काम जारी है, वहीं कहीं-कहीं कालोपत्रक का कार्य भी शुरू हो चुका है। पूर्वी खण्ड के काँकडभिट्टा–सीतापुरी कुल 45 किलोमीटर लंबाई में 10 अरब 94 लाख रुपैयाँ की लागत से सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर है। इस खण्ड का ठेका 2 कार्तिक 2080 में निर्धारित किया गया था।

संखुवासभा में पहाड़ टूटने के खतरे के कारण दो परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया

१४ जेठ, संखुवासभा । संखुवासभा के मकालु गाउँपालिका–२ सेदुवा में पहाड़ टूटने के खतरे के बढ़ने के कारण दो परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया है। पहाड़ टूटने के खतरे को ध्यान में रखते हुए नरबहादुर चुवान और मिठी घिमिरे के परिवारों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। १२ जेठ की रात हुई लगातार बारिश के कारण चुवान और घिमिरे के घर उच्च जोखिम में आ गए थे, इसकी जानकारी संखुवासभा के पुलिस उपरीक्षक कुमारप्रसाद मैनाली ने दी।
फिर से पहाड़ टूटने की संभावना और दोनों घरों को नुकसान पहुंचने के डर के कारण स्थानीय प्रशासन के समन्वय में इन परिवारों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया, उन्होंने बताया। नरबहादुर और मिठी के परिवारों को हिमान्द्री माध्यमिक विद्यालय के भवन में स्थानांतरित किया गया है, मैनाली ने कहा। दो परिवारों को नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से गुरुवार को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

पर्यटकों के दैनिक खर्च में १९ प्रतिशत की गिरावट

१४ जेठ, काठमाडौं । नेपाल भ्रमण पर आए पर्यटकों के औसत दैनिक खर्च में १९ प्रतिशत की कमी आई है। सरकार द्वारा हाल ही में प्रकाशित आर्थिक सर्वेक्षण में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के बावजूद उनके खर्च में गिरावट देखने को मिली है। नेपाल पर्यटन व्यवसायी संघ के अध्यक्ष कुमारमणि थापाले ने कहा, “पर्यटक खर्च नहीं करेंगे तो पर्यटन से देश की समृद्धि हासिल करना कठिन होगा।” उन्होंने बताया कि नेपाल आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा के दौरान अधिक खर्च करना आवश्यक होने के बावजूद वे खुलकर खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं। थापाले ने आगे कहा, “यात्रा टिकट का मूल्य ही लगभग तीन हजार अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाता है। ऐसी स्थिति में पर्यटक नेपाल आकर खर्च कटौती करने को मजबूर होते हैं। हम पर्यटकों को खर्च करने के लिए प्रेरित करने वाला माहौल तैयार करने में असमर्थ हैं।”

संघ के अध्यक्ष थापाले ने विलासी पैकेज (लक्जेरियस पैकेज) लागू कर पर्यटकों को खर्च करने के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सड़क सुविधाओं को मजबूत करना, खर्च बढ़ाने के लिए कलात्मक संरचनाएँ तैयार करना और यात्रा शुल्क को कम करने जैसे उपाय अपनाने चाहिए। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णीम वाग्ले द्वारा बुधवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण २०८२/८३ के अनुसार सन् २०२४ में एक पर्यटक ने औसतन ४०.८४ अमेरिकी डॉलर खर्च किया था, जबकि सन् २०२५ में यह राशि घटकर ३३.०८ अमेरिकी डॉलर रह गई है। इससे दैनिक खर्च में १९ प्रतिशत की गिरावट प्रमाणित होती है।

सर्वेक्षण में बताया गया है कि सन् २०२५ से केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक पर्यटन प्रबंधन सूचना प्रणाली (सिटिएमआइस) के माध्यम से पर्यटक आगमन और प्रस्थान तिथि दर्ज होने के बाद खर्चों की गणना स्वचालित हो गई है, जिससे यह परिणाम सामने आया है। सर्वेक्षण के अनुसार सन् २०२५ में नेपाल भ्रमण करने वाले पर्यटकों की संख्या १.३ प्रतिशत बढ़कर १,६२,३६५ हो गई, जो सन् २०२४ में १,१४,७,५४८ थी। पर्यटन में ६०.२ प्रतिशत पर्यटक छुट्टियाँ और मनोरंजन के लिए आते हैं।

तीर्थयात्रियों की संख्या सबसे अधिक १४.४ प्रतिशत है, जो कि संघ के अध्यक्ष थापाले ने बताया। पदयात्रा और पर्वतारोहण के लिए आने वाले पर्यटक १४.२ प्रतिशत तथा अन्य विभिन्न उद्देश्यों (व्यापार, अध्ययन, भ्रमण) से आने वाले पर्यटक ११.२ प्रतिशत हैं। पर्यटकों के ठहराव की अवधि भी बढ़ी है; सन् २०२४ में औसत ठहराव १३.३० दिन था जो सन् २०२५ में बढ़कर १६.३४ दिन हो गया है। सन् २०२५ में आए पर्यटकों में लगभग २,९३,००० भारत से, १,१३,००० अमेरिका से, ९६,००० चीन से, ५९,००० ब्रिटेन से, ५८,००० बांग्लादेश से, ५०,००० ऑस्ट्रेलिया से, ३८,००० श्रीलंका से, ३०,००० थाईलैंड से, ३०,००० जर्मनी से, २५,००० जापान से तथा अन्य देशों से ३,७१,००० पर्यटक आए हैं। सर्वेक्षण ने सन् २०२५ में भ्रमण आय में ४.८ प्रतिशत की वृद्धि भी दर्शाई है। सन् २०२४ के आर्थिक वर्ष में पर्यटन से प्राप्त भ्रमण आय ८३ अरब ३९ करोड़ ४० लाख रुपए थी।

ठमेल पर्यटन विकास परिषद के उपाध्यक्ष सहदेव धमला ने कहा कि यदि पर्यटक पर्याप्त खर्च नहीं करेंगे तो कुल राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान कम होगा। उन्होंने कहा, “अभी पर्यटकों को गुणवत्तायुक्त खरीदारी के लिए आवश्यक वस्तुओं की कमी है।” धमला ने आगे कहा, “पर्यटकों की मांग के अनुसार सेवा प्रदाय में सुधार आवश्यक है। सेवा और गुणवत्तायुक्त वस्तुओं के उत्पादन में राज्य को निवेश बढ़ाना होगा।”

‘अमेरिका-चीन युद्ध आने पर परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा’

एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रक्षा अध्ययन संस्थान ने ताइवान विवाद के चलते अमेरिका और चीन के बीच युद्ध की स्थिति में इसे परमाणु विनाश में तब्दील होने की चेतावनी दी है। ब्रिटेन के लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) ने गुरुवार को जारी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के मुख्य कमांड और संचार केंद्रों को निशाना बनाने की स्थिति में हैं, जिससे परमाणु युद्ध भड़क सकता है। यह रिपोर्ट सिंगापुर में इसी सप्ताह शुरू हो रहे एशिया के सबसे बड़े वार्षिक रक्षा सम्मेलन ‘सैंगरी-ला डायलॉग’ की पूर्व संध्या पर जारी की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, विश्व इस समय नए परमाणु हथियारों की होड़ में है और इसका केंद्र एशिया-प्रशांत क्षेत्र है। पिछले वर्षों में चीन ने अन्य परमाणु शक्तियों की तुलना में अपनी परमाणु हथियार क्षमता को तेज़ी से बढ़ाया है, अमेरिकी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक चीन के पास लगभग 1000 परमाणु वारहेड होने का अनुमान है। वर्तमान में अमेरिका के पास 3700, रूस के पास 4400 सक्रिय परमाणु हथियार हैं, जबकि चीन के पास लगभग 620 हथियार हैं।

आईआईएसएस के वरिष्ठ फेलो डेनियल सालिसबरी ने बताया कि शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी और सोवियत संघ के बीच हथियार नियंत्रण को लेकर लंबी बातचीत होती रही, लेकिन वर्तमान में अमेरिका और चीन के बीच इस तरह की कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है। इस महीने की शुरुआत में बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शिखर वार्ता हुई थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार उस वार्ता में परमाणु सुरक्षा को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

इस रिपोर्ट पर चीन ने असंतोष व्यक्त किया है। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ियाङ बिन ने आईआईएसएस की रिपोर्ट को वास्तविक स्थिति से अलग बताया है। उन्होंने ताइवान मामले को चीन का आंतरिक मसला बताया और कहा कि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने अमेरिका को ताइवान के मसले पर बेहद सावधानीपूर्वक कदम उठाने की चेतावनी दी है। सिंगापुर में 29 से 31 मई तक आयोजित होने वाले रक्षा सम्मेलन में अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ हिस्सा लेंगे। चीन के रक्षा मंत्री डोंग ज़ुन की भागीदारी की पुष्टि अभी नहीं हुई है।