ललितपुर महानगरपालिका–२७ सुनाकोठी की ४३ वर्षीय महिला को पुलिस टीम ने जंगल से सकुशल उद्धार किया है। महिला के पति ने वीडियो कॉल के माध्यम से ‘मर्न लगी हूँ’ की सूचना पुलिस को दी थी। तुरंत ही ललितपुर जिला प्रहरी परिसर की टीम महिला की खोज में निकल गई थी। खोजबीन के दौरान महिला को सुनाकोठी के जंगल से ढूंढ़ निकाला गया और फिलहाल महिला को महिला के परिजनों को सौंपा गया है, पुलिस ने बताया। १ वैशाख, काठमाडौं।
जीवन में उदय और अस्त की लीला आशा की गई अपेक्षाओं से भिन्न अनुभव और ज्ञान प्रदान करती है और ताश के महल की तरह सब कुछ बिखेर देती है। नेपाली जनता शासन-व्यवस्था, शांति और समृद्धि लाने के लिए अवसर देती है और समाज व्यक्ति की पहचान, नीयत और कर्म की सतत जांच करता है। जनता को उम्मीद है कि सुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता के आने से भ्रष्टाचार का अंत होगा और सदाचार से जनमत की प्रतिज्ञा पूरी होगी, जिसे अभी देखना बाकी है।
उदय और अस्त की लीला जीवन में आशा की गई शिक्षा से भिन्न होती है। इसलिए, ‘मैं’ कहने वाले को भी बिना बताए ताश के महल की तरह सब कुछ बिखेर दिया जाता है। बाएं मुड़ने से पहले दौड़ने की बात करने की यह हमारी आदत रही है। इसलिए बाज़ार में बने रहने के लिए समय की गति के अनुसार मरम्मत आवश्यक है। शुद्ध नीयत रखने वाले और सर्वज्ञ मानव इस दुनिया में कम ही मिलते हैं।
पास-पड़ोस, जोड़-तोड़ और बीच रास्ते में टकराने वाले लोगों से अधिक चोट लगती है। जो लोग हमें निष्पक्ष और साफ-सुथरा समझते हैं, वे हमें भ्रष्ट और दलाल भी समझते हैं। अवसर आने-जाने पर अमल न करने से हर व्यक्ति तनाव में रहता है। नेपाली वास्तव में क्रोधी और जल्दी निराश होने वाले स्वभाव के हैं।
जनता देश में सुशासन, शांति और समृद्धि लाने के लिए अवसर देती है। व्यक्ति की पहचान, नीयत और कर्म की जांच समाज और जनता द्वारा लगातार होती रहती है। समय की आपदा का सामना न कर पाने वाले बर्बाद हो जाते हैं और हर ओर पीछे छूट जाते हैं। सफलता, धन और परिचय पाने की इच्छा हर व्यक्ति के हृदय में पनपती है।
पद, धन, शक्ति और घनिष्ठ मित्रों के अनुरोधों से प्रत्येक व्यक्ति के मन में हलचल होती है। शीघ्र सुखी बनने की चाह में क्षणिक स्वार्थ में फिसलने से मजबूत आधार कमजोर पड़ जाता है। यदि समय अनुकूल हो तो दो सूत्र या नारे भूस्खलन की आग की तरह फैल जाएंगे।
जिज्ञासा है बालेन जी, अब जनता जानना, समझना और परिणाम खोज रही है। अब जब सुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता आएंगी तो भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा, ऐसा जनता कह रही है। देश की स्थिति, मानसिकता और परिप्रेक्ष्य के अनुसार पूर्ण बहुमत दिया गया है। हमें देखना है कि सदाचार जनमत की प्रतिबद्धता पूरी करता है या इच्छापूर्ति में विलय हो जाता है।
मेचीनगर नगरपालिका-४ बाहुनडाँगी के किसान रबि नेपाल ने 12 बीघा जमीन में 27 प्रकार की नगदे फसलें लगाकर आधुनिक मिश्रित खेती की है। नेपाल चाय, रबर, अगरुद, आंवला, कटहर, तेजपत्ता सहित दर्जनों नगदे फसलें एक ही जमीन पर उगा रहे हैं। उन्होंने नारियल की खेती को चाय के बगान के अंदर सहायक फसल के रूप में प्रयोग करते हुए कृषि पर्यटन और उत्पादन में नया आयाम जोड़ने की योजना बनाई है। 1 वैशाख, झापा। मेचीनगर नगरपालिका-४ बाहुनडाँगी के किसान रबि नेपाल ने एक ही जमीन पर 27 प्रकार की नगदे फसलें लगाकर आधुनिक मिश्रित खेती के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। पिछले 13 वर्षों से व्यावसायिक कृषि में लगे नेपाल ने 12 बीघा जमीन के हर कोने को उत्पादन से जोड़ते हुए मिश्रित नमूना खेती की है। चाय की खेती से कृषि यात्रा शुरू करने वाले नेपाल अब एक ही जमीन में चाय, रबर, अगरुद, आंवला, कटहर, तेजपत्ता समेत दर्जनों नगदे फसलें एक साथ उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले चरण में चाय रोपाई की और चाय के बगान के भीतर मिश्रित नगदे फसलें उगाई हैं। चाय तीन वर्ष, आंवला पाँच वर्ष, कटहर चार वर्ष, रबर पांचवें वर्ष और तेजपत्ता तीसरे वर्ष से उत्पादन दे रहे हैं।
‘शुरुआत में निवेश और मेहनत अधिक होती है, खनिजोत से लेकर गोदमेल और पौधों को विकसित करने में समय लगता है’, उन्होंने कहा, ‘तीन साल बाद उत्पादन मिलने लगता है और सात वर्ष तक सभी फसलें आय देने लगती हैं।’ उनके अनुसार फिलहाल बगान में 27 प्रकार की नगदे फसलें हैं। औषधीय गुणों से भरपूर अर्जुन, मोरिंगा, रुद्राक्ष से लेकर दैनिक भोजन में इस्तेमाल होने वाली दालचीनी और नींबू तक उत्पादन दे रहे हैं।
उनकी खेती की शैली नई और आकर्षक है। बड़े सुपारी बगान के भीतर मिर्च की लहलहाती फसल लगी है। मिर्च की लहरें सुपारी के पेड़ों पर आश्रित होकर फल रही हैं। हाल ही में उन्होंने चाय के बगान के भीतर एक नए प्रयोग के रूप में नारियल की खेती शुरू की है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने चाय के बगान में दो-दो पौधे हटाकर नारियल के पौधे लगाए। ‘चाय के बगान के अंदर सहायक फसल के रूप में नारियल की खेती यह पहला परीक्षण है। इससे झापा के कृषि पर्यटन और उत्पादन में नया आयाम जुड़ने की उम्मीद है’, उन्होंने कहा।
बाहुनडाँगी क्षेत्र के किसान हाथी, चीता, बन्दर सहित जंगली वन्यजीवों से प्रभावित हैं। चाय और नारियल जैसी फसलों को हाथी और बंदर से खास नुकसान नहीं होता, इसलिए किसान इन्हें वैकल्पिक खेती के रूप में उपयोग कर रहे हैं, नेपाल ने बताया। मिट्टी की जांच में पूर्व-पश्चिम राजमार्ग के बाहुनगाँडी, शनिश्चरे, बुधवारि क्षेत्र में नारियल की खेती उपयुक्त पाई गई है। एक नारियल के पेड़ से वार्षिक 17 से 18 हजार रुपये तक की आमदनी होती है, उनका कहना है। उन्होंने पिछले साल से सुपारी के बगान के भीतर नारियल लगाने शुरू किए हैं। ‘एक हजार पौधे लगाने की योजना है, पिछले साल 300 पौधे लगाए, इस साल 700 लगाऊंगा’, नेपाल ने कहा।
नारियल के पानी की बिक्री कच्चे फल की बिक्री की तुलना में ज्यादा होती है, इसलिए बाजार की कमी नहीं होगी, उन्होंने बताया। नारियल के पानी की मांग बाजार में बढ़ती जा रही है।
उनके 13 वर्षों के मिश्रित खेती के अनुभव के अनुसार नगदे फसलों के उत्पादन में बाजार की कोई समस्या नहीं है। सुपारी और तेजपत्ता सीधे बागानों से बिकते हैं और झापा में चाय व रबर के प्रसंस्करण के पर्याप्त उद्योग स्थापित हो चुके हैं। ‘बाजार खोजने और पहचानने में ध्यान देना जरूरी है, खेत में उत्पादन कर घर पर बैठे रहने भर से काम नहीं चलेगा’, नेपाल ने कहा, ‘एक बीघा जमीन पर व्यवस्थित मिश्रित खेती करने पर सालाना 8 से 9 लाख रुपये आसानी से कमा सकते हैं।’
अपनी मिट्टी में पसीना बहाने से पैसा कमाना है तो यूरोप या अमेरिका भागने की जरूरत नहीं, यह उनका सफल कृषि कार्य का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि युवाओं को मिश्रित खेती के प्रति आकर्षित करने के लिए सरकार को प्रोत्साहन नीति और कार्यक्रम लाना चाहिए। ‘जो तीन महीने में कमाना चाहते हैं उन्हें सब्जी, छह महीने में जो चाहते हैं उन्हें अनाज, और जो एक साल इंतजार कर सकते हैं उन्हें जड़ी-बूटी ठीक है’, उन्होंने खेती से आय के बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘लेकिन, तीन-चार वर्षों का धैर्य रखकर जो मिश्रित खेती करेगा उसे यह 50 साल तक लगातार आय देती रहेगी।’
फिनलैंड के तुरकु विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने क्वांटम प्रणालियों में एक ही समय में अतीत को भूलने और गुप्त रूप से याद रखने की क्षमता पाई है। श्रोडिंजर और हाईजेनबर्ग के सिद्धांतों को नए दृष्टिकोण से समझाते हुए क्वांटम स्मृति की बहुआयामी प्रकृति का खुलासा किया गया है। प्रोफेसर जिर्की पीइलो के अनुसार इस नई समझ का क्वांटम कंप्यूटिंग और सूचना प्रौद्योगिकी पर बड़ा प्रभाव पड़ने की उम्मीद की जा रही है। १ वैशाख, काठमांडू।
फिनलैंड के तुरकु विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने क्वांटम प्रणालियों की स्मृति पर एक नया और चमत्कारिक तथ्य खोजा है। ‘पीआरएक्स क्वांटम’ जर्नल में प्रकाशित इस शोध से पता चलता है कि क्वांटम सिस्टम अपने अतीत को एक साथ भूलने और अत्यंत गुप्त रूप से याद रखने की क्षमता रखते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी क्वांटम प्रणाली में स्मरणशक्ति है या नहीं, यह देखने का तरीका अहम होता है। इसका अर्थ है कि एक नजरिए से जो सिस्टम स्मृति विहीन लगता है, उसे दूसरे पहलू से देखने पर वे यादें स्पष्ट हो सकती हैं।
यह खोज क्वांटम मेकैनिक्स के दो मुख्य ऐतिहासिक सिद्धांतों, श्रोडिंजर और हाईजेनबर्ग की विधियों को नए तरीके से समझाती है। श्रोडिंजर की पद्धति समय के अनुसार क्वांटम अवस्था में होने वाले परिवर्तनों का अवलोकन करती है, जबकि हाईजेनबर्ग की पद्धति मापन योग्य गुणों पर केंद्रित होती है। शोधकर्ता दल ने दिखाया कि ये दोनों दृष्टिकोण पूरक होने के बावजूद स्मरणशक्ति की व्याख्या में अलग-अलग परिणाम देते हैं। कुछ स्मृति प्रभाव केवल क्वांटम अवस्थाओं के विश्लेषण से प्रकट होते हैं जबकि कुछ मापन योग्य गुणों के माध्यम से। इससे स्पष्ट होता है कि क्वांटम प्रणालियां अपनी पुरानी सूचनाओं को सभी दृष्टियों से छिपाकर रख सकती हैं।
इस वैज्ञानिक सफलता के भविष्य की क्वांटम तकनीकों पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। प्रोफेसर जिर्की पीइलो ने कहा कि क्वांटम उपकरणों में बाहरी पर्यावरण से आने वाले अवरोध या ‘शोर’ को नियंत्रित करने और उनके प्रभावों को तकनीक के लाभ में बदलने के लिए यह नई समझ अत्यंत आवश्यक है। यह क्वांटम कंप्यूटिंग और सूचना प्रौद्योगिकी के नए आयाम खोलेगा और ब्रह्मांड के सूक्ष्म कणों की कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेगा। क्वांटम स्मृति की बहुआयामी प्रकृति सशक्त और प्रासंगिक क्वांटम उपकरणों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने ‘ट्रूथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर जीसस क्राइस्ट जैसा दिखने वाली तस्वीर पोस्ट करने के बाद तीव्र आलोचना का सामना किया है। एआई तकनीक द्वारा बनाई गई इस तस्वीर में ट्रम्प अस्पताल के बिस्तर पर एक मरीज के रूप में उपचार लेते दिखाए गए हैं।
ट्रम्प ने पोप लियो चतुर्थ की कड़ी निंदा करते हुए एक लंबा पोस्ट प्रकाशित किया और कुछ ही घंटों में ‘ट्रूथ सोशल’ पर जीसस जैसा दिखने वाली अपनी तस्वीर साझा की। बाद में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने चिकित्सक के रूप में प्रस्तुत होना चाहा था। बीबीसी की पत्रकार सेरा स्मिथ ने इस वीडियो में ट्रम्प और पोप के बीच के विवाद तथा इस घटना में ट्रम्प के समर्थकों की प्रतिक्रियाओं की जानकारी दी है।
नई सरकार ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए तीन महीने के भीतर मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने की योजना प्रस्तुत की है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड मृदा की स्थिति की जानकारी और सुधार संबंधी सुझाव प्रदान करेगा। नेपाल ने मृदा में कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए नीतियाँ और कार्यक्रम लागू कर सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास शुरू किया है। हाल ही में सम्पन्न चुनाव के बाद बनी नई सरकार को जनता से उच्च उम्मीदें प्राप्त हुई हैं। लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ आए इस सरकार पर प्रभावी कार्य करने की जिम्मेदारी और भी अधिक है।
सरकार ने हाल ही में 100 सरकारी सुधार कार्यसूची जारी कर अपनी प्राथमिकताएं प्रस्तुत की हैं। कृषि, भूमि, आधारभूत संरचना और सेवा विकास से संबंधित कार्यसूची में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए उठाए जाने वाले प्रमुख कदमों में मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण को भी उच्च प्राथमिकता दी गई है। विकास का मूल आधार उत्पादन और उत्पादकता वृद्धि ही है, जो सीधे मृदा से जुड़ा विषय है। इसके लिए मृदा में कार्बन की मात्रा बढ़ाना आवश्यक है।
सरकार द्वारा प्रकाशित 100 कार्यसूची में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए शामिल तीन महत्वपूर्ण कार्यों में अंतिम बिंदु में व्यवसायिक कृषि फार्म संचालित करने वाले किसानों को तीन महीनों के भीतर मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने की व्यवस्था पूरी करने का उल्लेख है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड मृदा की स्थिति की जानकारी देगा, जिसमें मृदा में उपस्थित कार्बन सहित पोषक तत्व और अन्य मृदा स्वास्थ्य सूचकांक शामिल होंगे। मृदा में कार्बन की मात्रा मृदा गुणवत्ता का महत्वपूर्ण सूचक है और यह उत्पादन तथा उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नेपाल को वर्ष 2087 तक सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करना है। सतत विकास के 17 लक्ष्यों में से 9 सीधे मृदा से संबंधित हैं। स्वस्थ मृदा में कार्बन पदार्थ की मात्रा 4 प्रतिशत से अधिक होती है, जबकि नेपाल की कृषि भूमि में आमतौर पर यह मात्रा 2 प्रतिशत या इससे कम पाई जाती है। सरकार को कार्बन मात्रा बढ़ाने वाले कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देना होगा। मृदा में कार्बन वृद्धि एक साथ संभव नहीं है, मृदा स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित तरीके से कार्यक्रम संचालित करना आवश्यक होगा।
तनहुँको आँबुखैरनी गाउँपालिका–१ बरादीस्थित मर्स्याङ्दी नदीको ड्याममा नुहाउने क्रममा एक पुरुष बेपत्ता भएका छन्। सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल र जिल्ला प्रहरी कार्यालय तनहुँले बेपत्ता व्यक्ति खोजी कार्य जारी राखेका छन्। जिल्ला प्रहरी कार्यालय तनहुँका प्रहरी नायब उपरीक्षक श्रवणकुमार विकले हालसम्म बेपत्ता व्यक्ति फेला नपरेको जानकारी दिएका छन्।
१ वैशाख, तनहुँ। तनहुँको आँबुखैरनी गाउँपालिका–१ बरादीस्थित अकला मन्दिर नजिकै रहेको मर्स्याङ्दी नदीको ड्याममा नुहाउने क्रममा एक जना पुरुष बेपत्ता भएका छन्। स्थानीय तहका अनुसार ती पुरुषलाई टिका मगर (ढल्के) भनेर चिनिन्छ। जिल्ला प्रहरी कार्यालय तनहुँका अनुसार उनी नुहाउने क्रममा बेपत्ता भएका हुन्। घटनापछि सशस्त्र प्रहरी बल नेपालको टोली तुरुन्तै खोजी कार्यमा खटिएको छ। भानुस्थित सशस्त्र प्रहरीको टोलीले आज पनि निरन्तर खोजी जारी राखिरहेको छ। जिल्ला प्रहरी कार्यालय तनहुँका प्रहरी नायब उपरीक्षक श्रवणकुमार विकले भनेका छन् कि अहिलेसम्म कुनै पनि साक्ष्य वा बेपत्ता व्यक्ति फेला परेका छैनन्। घटनासम्बन्धी थप विवरण आउन बाँकी रहेको प्रहरीले जानकारी दिएको छ।
सरकार ने आगामी पांच वर्षों के भीतर सरकारी सेवाओं में २५ प्रतिशत नए और दक्ष जनशक्ति भर्ती करने की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का मसौदा सार्वजनिक किया है। इसमें सिविल सेवा में स्पष्ट कार्य प्रदर्शन सूचकांक, मूल्यांकन, पदोन्नति और व्यावसायिक विकास के नियमों समेत विधि जारी करने की व्यवस्था शामिल है। सेवाग्रहियों को सरकारी कार्यालयों में दौड़ते रहने की बाध्यता समाप्त की जाएगी, अनावश्यक समस्याओं को खत्म किया जाएगा और सार्वजनिक सेवा प्रवाह में टाइम कार्ड प्रणाली लागू करने का वादा किया गया है।
१ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने आगामी पांच वर्षों के भीतर सरकारी सेवाओं में २५ प्रतिशत नए और सक्षम जनशक्ति को भर्ती करने के कार्य को राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के रूप में आगे बढ़ाया है। हाल ही सम्पन्न चुनावों के बाद राष्ट्रीय दलों के घोषणापत्रों में शामिल शासकीय सुधारों के लिए प्रस्तुत मसौदे में सिविल सेवा में २५ प्रतिशत नए कर्मियों को जोड़ने की प्रतिबद्धता दर्ज है।
परिणाममुखी प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट कार्य प्रदर्शन सूचकांक, मूल्यांकन, पदोन्नति और व्यावसायिक विकास के प्रावधानों सहित सिविल सेवा संबंधित कानून शुरू किए जाने का उल्लेख मसौदे में है। कर्मचारी भत्तों सहित अन्य गैर-जरूरी अतिरिक्त सुविधाओं के स्थान पर मूल वेतन को उचित, नियमित और समयानुसार समायोजित कर लागू किया जाएगा।
सेवाग्रहियों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की बाध्यता हटाई जाएगी, मध्यस्थों और कर्मचारियों से सीधे मिलने के डर को कम किया जाएगा, तथा अनावश्यक झंझटों को समाप्त करने का भी संकल्प किया गया है। राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के मसौदा प्रतिवेदन में कहा गया है, ‘प्रक्रियाओं की समीक्षा कर पारंपरिक व जटिल स्तरीय टिप्पणियों और कागज आधारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। सार्वजनिक सेवा प्रवाह में टाइम कार्ड लागू किया जाएगा।’
सरकार के मुख्य सचिव ने बताया कि सभी राष्ट्रीय दलों के चुनावी घोषणापत्रों पर आधारित ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धता’ के अंतिम स्वरूप को तैयार करते हुए घोषणापत्रों में विद्यमान विरोधाभासी मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।
वालेन्द्र शाह (बालेन) के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल ही में जारी किए गए प्रशासनिक सुधारों के सौ-बिंदु कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय प्रतिबद्धता’ तैयार करने तथा इसे वार्षिक नीति, बजट और सुधार एजेंडों से जोड़ने की योजना कही गई थी।
इसी आधार पर प्रधानमंत्री और मन्त्रिपरिषद कार्यालय ने सोमवार को एक मसौदा तैयार कर सभी दलों से सुझाव मांगे हैं। यह मसौदा संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी दलों के वायदे/प्रतिज्ञा पत्रों के आधार पर बनाया गया है।
“सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों की समीक्षा कर के राष्ट्र के साझा विषयों में सबकी सहमति सुनिश्चित करना उद्देश्य है, मसौदा भी उसी के अनुसार तैयार किया गया है,” मुख्य सचिव सुमनराज अर्याल ने कहा।
“अब हम दलों से सुझाव प्राप्त करेंगे, उनका विश्लेषण कर के दलों के साथ बैठकर दस्तावेज को अंतिम रूप देंगे। इसका प्रतिबिंब सरकार की नीतियों में दिखेगा।”
सुझाव देने के लिए दलों को वैशाख १० तक का समय दिया गया है।
मुख्य विपक्ष सहित अन्य दलों ने राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में औपचारिक रूप से भाग लेने का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
“अगर हमारी प्रतिज्ञापत्र में शामिल मुद्दे लागू करने की सरकार इच्छुक है तो हम समर्थन देंगे,” नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने कहा, “लेकिन इस प्रकार के कवच के पीछे अगर सरकार प्रतिशोधात्मक राजनीति, दमन या लोकतंत्र कमजोर करने की कोशिश करती है, तो हम सावधान हैं। ऐसा न हो।”
नेकपा एमाले के उपाध्यक्ष रघुजी पंत ने कहा कि पार्टी में ऐसे मसौदे पर कोई चर्चा नहीं हुई है और अपनी प्रतिक्रिया अध्ययन के बाद ही देंगे।
सरकार द्वारा तैयार मसौदे में क्या है?
मसौदे में आर्थिक स्थिरता, सुशासन, आत्मनिर्भरता, रोजगार, ऊर्जा और पूर्वाधार विकास जैसे विषय शामिल हैं।
आर्थिक परिवर्तन के लिए “निर्धारित अवधि के भीतर आर्थिक एजेंडा पर प्रमुख राजनीतिक दलों में राष्ट्रीय सहमति कायम कर नेपाल को सम्मानजनक मध्यम आय वाला देश स्थापित करना तथा अगले पांच वर्षों में औसत सात प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर प्राप्त करते हुए प्रति व्यक्ति आय 3,000 डॉलर और सकल घरेलू उत्पाद को 100 अरब डॉलर के नजदीक पहुंचाना” उल्लेखित है।
सुशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण संबंधी प्रावधानों में “संवत् 2046 के बाद सार्वजनिक पदों पर आए लोगों की संपत्ति पारदर्शी और कानूनी प्रक्रियाओं से जांचने” का उल्लेख है। इसके अलावा सरकारी सेवा में पार्टी संबंधी घुसपैठ खत्म करने के लिए नीति और कानूनी उपाय करने, तथा सरकारी सेवा में पार्टी ट्रेड यूनियन समाप्त करने का भी उल्लेख है।
22 पेज के मसौदे में 18 मुख्य बिंदु शामिल हैं।
सरकार ने कहा है कि बातचीत के बाद तैयार होने वाला दस्तावेज़ नेपाल सरकार के साझा स्वामित्व में होगा।
इसका तत्काल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद कार्यालय में आवश्यक संरचना का गठन किया जाएगा।
चूँकि विभिन्न घोषणापत्र अपनी-अपनी विचारधारा और सिद्धांतों पर आधारित हैं, इसलिए उनमें विरोधाभासी वचनों को समायोजित करना एक चुनौती हो सकती है।
“इस विषय पर भी चर्चा जारी है। कुछ राजनीतिक मुद्दों पर सहमति बनेगी। इसमें हम कर्मचारी वर्ग शामिल नहीं हैं, अन्य मुद्दे उसी के अनुसार सुलझाए जाएंगे।”
अनुभव
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अतीत में दल सरकार बनाने के समय राजनीतिक गठबंधन के माध्यम से “न्यूनतम साझा कार्यक्रम” तय करते रहे हैं।
“हाल के वर्षों में दलों के बीच राष्ट्रीय सहमति के उदाहरण भी देखने को मिले हैं,” राजनीतिक विशेषज्ञ मिलन श्रेष्ठ ने कहा।
उनका मानना है कि यदि अन्य दलों का विश्वास लेकर सरकार आगे बढ़ती है तो यह सभी के लिए अच्छा होगा। “लेकिन केवल मसौदा बनने का मतलब नहीं कि दल स्वचालित रूप से सहमति देंगे।”
“सरकार और संसद के दैनिक काम में सत्ता पक्ष और विपक्ष अलग होते हैं, लेकिन राष्ट्रीय मामलों में बहुमत-अल्पमत की चिंता किए बिना राष्ट्रीय सहमति जरूरी होती है,” त्रिभुवन विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के उपप्राध्यापक भी रहे श्रेष्ठ ने कहा।
“सरकार सभी बातों में साझेदारी चाहे तो जरूरी नहीं, क्योंकि जब जवाबदेही की बात आती है तो वह विपक्ष की नहीं, सत्ता पक्ष की होती है।”
चिंताएँ
कांग्रेस प्रवक्ता चालिसे ने कहा कि जनता की सेवा, विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को आगे रखने वाली विदेश नीति पर राष्ट्रीय सहमति सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा होनी चाहिए।
“देश के हित में लिए गए कदमों में हम विपक्षी नहीं हैं, लेकिन काम में निष्पक्षता जनता को महसूस होनी चाहिए।”
“जैसे 2046 से राजनीति और प्रशासन में उच्च पदों पर रहे लोगों की गैरकानूनी संपत्ति अर्जन की जांच के मुद्दे पर हम तो रास्वपा के जन्म से पहले से ही आवाज उठाते रहे हैं,” उन्होंने कहा, “हमारे लिए मुख्य बात यह होनी चाहिए कि जांच आधार आस्था नहीं बल्कि अपराध हो। आधार के रूप में आस्था स्वीकार्य नहीं।”
राजनीतिशास्त्री श्रेष्ठ ने कहा कि विपक्षी दलों को कुछ हद तक समझौता करना होगा।
“सरकार के कुछ कदमों पर विपक्षी दल विरोध कर सकते हैं। सरकार दलों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है,” उन्होंने कहा, “इस काम में कुछ परिणाम आ सकते हैं, सलाह लेने की जरूरत है।”
“जैसे सभी दलों के घोषणापत्र में भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिबद्धता है, सुशासन और चुस्त प्रशासन का प्रावधान है, लेकिन यह सभी वर्ग और समुदाय को समेटता है या नहीं, इस तरह के सवाल उठ सकते हैं। साथ ही 2046 से बाद की जांच क्यों हो, उससे पहले की क्यों नहीं, इसपर भी विवाद हो सकता है।”
मुख्य सचिव अर्याल ने तैयार मसौदे को “अत्यंत प्रारंभिक” बताया।
“मूर्त रूप लेने से पहले चित्र स्पष्ट नहीं होता। हम अभी सलाह-मशविरे के चरण में हैं।”
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कुमार कट्टेल ‘जिग्री ब्रो’ और दीपकप्रसाद आचार्य ‘काकु’ के बीच फिर से सहयोग करने की पुष्टि हुई है, जिससे उनकी आगामी फिल्म ‘चिरंजीवी भवः’ का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। फिल्म की पटकथा अंतिम ड्राफ्ट में है और लगभग डेढ़ से दो महीनों के भीतर फिल्मांकन की तैयारी शुरू होने की जानकारी कुमार ने दी। यह फिल्म दो पीढ़ियों के बीच के रिश्ते को दर्शाने वाला सामाजिक ड्रामा होगा। काकु इसका निर्देशन करेंगे जबकि जिग्री कहानी लेखन की ज़िम्मेदारी संभालेंगे।
काठमांडू। टीवी श्रृंखलाओं के लोकप्रिय कलाकार कुमार कट्टेल ‘जिग्री ब्रो’ और दीपकप्रसाद आचार्य ‘काकु’ के बीच पुनः सहकार्य निश्चित हो गया है। ‘सक्किगो नि’ सीरियल के अन्त होने के बाद दोनों ने अलग-अलग फिल्में निर्देशित की थीं। काकु द्वारा निर्देशित ‘परान’ २०८२ साल की सबसे अधिक आमदनी वाली फिल्म साबित हुई, जबकि जिग्री ब्रो की ‘लाज शरणम्’ ने भी अपनी कमाई से अच्छा प्रदर्शन किया।
फिल्म निर्देशन में अलग नजर आने वाले ये दोनों कलाकार फिर से साथ आने जा रहे हैं। उनकी इस साझा फिल्म ‘चिरंजीवी भवः’ की घोषणा नए वर्ष २०८३ के मौके पर सोशल मीडिया के माध्यम से की गई। वर्तमान में स्क्रिप्ट अंतिम ड्राफ्ट में है और आगामी डेढ़ से दो महीनों में फिल्मांकन की तैयारी शुरू हो जाएगी, यह जानकारी कुमार ने दी।
यह फिल्म दो पीढ़ियों के बीच की अंतर्मुखी कहानी को प्रदर्शित करेगी। कुमार ने कहा, ‘यह वर्तमान समय की कहानी है। दो पीढ़ियों के बीच क्या खो गया है, क्या गुम है और किन बातों की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, ये सब इस कहानी में उभर कर सामने आएगा।’ यह दोनों कलाकारों की दूसरी निर्देशन परियोजना होगी। काकु निर्देशन संभालेंगे, जबकि जिग्री कथा लेखन में योगदान देंगे। जिग्री ने आगे कहा, ‘बीच में हम भले अलग दिखे हों, लेकिन हम साथ ही थे।’
उनके अनुसार यह फिल्म सामाजिक नाटक (सोशल ड्रामा) के जनरर में बनेगी। फिलहाल निर्माता और कलाकार चयन प्रक्रिया जारी नहीं है। केवल वही कलाकार कास्ट किए जाएंगे जो पटकथा के मुताबिक न्यायोचित हों। जिग्री ब्रो और काकु पिछले ८ वर्षों से ‘भद्रगोल’, ‘सक्किगो नि’ सहित कई टीवी सीरियल्स में साथ काम कर रहे हैं।
माइक्रोसॉफ्ट अपनी ‘माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट’ में ‘ओपन-क्ला’ जैसे हमेशा सक्रिय रहने वाले एजेंट सुविधा को जोड़ने की तैयारी कर रहा है। यह नया फीचर खासतौर पर कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए लक्षित है और यह क्लाउड तथा लोकल दोनों वातावरणों में संचालित होने की संभावना रखता है। कंपनी ने इस तकनीक को आगामी जून में आयोजित ‘बिल्ड कॉन्फ्रेंस’ में सार्वजनिक करने की योजना बनाई है।
माइक्रोसॉफ्ट ‘माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट’ में ‘ओपन-क्ला’ जैसी सुविधाएँ जोड़ रहा है। ‘द इन्फॉर्मेशन’ के अनुसार, यह नया फीचर मुख्य रूप से कॉर्पोरेट उपयोगकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है और ओपन सोर्स के मुकाबले अधिक सुरक्षा प्रदान करेगा। ‘ओपन-क्ला’ एक ऐसा उपकरण है जो उपयोगकर्ता के कंप्यूटर पर रहकर मनुष्यों की ओर से विभिन्न कार्य स्वतः संपन्न कर सकता है। माइक्रोसॉफ्ट भी इसी प्रकार का एजेंट विकसित कर रहा है, जो जटिल और बहुआयामी कार्यों को लंबे समय तक संभालने में सक्षम होगा।
वर्तमान में परीक्षणाधीन इस तकनीक की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं: एक हमेशा सक्रिय रहने वाला एजेंट, जो केवल उपयोगकर्ता के आदेश का इंतजार नहीं करेगा बल्कि स्वयं पहल करेगा। क्लाउड और लोकल दोनों में चलने की संभावना वाले इस नए फीचर में उपयोगकर्ता का एजेंट उसके अपने कंप्यूटर (लोकल) पर चलेगा या क्लाउड में, यह अभी निश्चित नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट ने एंथ्रोपिक के ‘क्लोड’ मॉडल के साथ सहयोग करते हुए अपने कुछ एजेंटों को शक्ति देने के लिए इस मॉडल का उपयोग कर रहा है।
‘द वर्ज’ के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट इस नई तकनीक को आगामी जून में ‘बिल्ड कॉन्फ्रेंस’ में प्रस्तुत करने की संभावना जता चुका है। वर्तमान में ‘ओपन-क्ला’ उपयोग करने वालों में ‘मैकिन्टॉस मिनी’ डेस्कटॉप बहुत लोकप्रिय है। इसलिए माइक्रोसॉफ्ट विशेष रूप से अपने विंडोज उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखते हुए यह नई सुविधा लेकर आ रहा है। कंपनी इस नए एजेंट की सुरक्षा और क्षमताओं के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान करेगी।
सरकार ने 18 बिंदुओं वाला राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पत्र का मसौदा तैयार किया है, जिसमें सहकारी के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार सृजित करने का उल्लेख है। सरकार ने गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र को नेपाल राष्ट्र बैंक के सीधे और सशक्त सुपरिवेक्षण प्रणाली के अंतर्गत लाने का प्रतिबद्धता व्यक्त की है। सहकारी बचतकर्ताओं की आय की सुरक्षा हेतु एकीकृत बचत सुरक्षा कोष स्थापित किया जाएगा, जिससे संकटग्रस्त संस्थाओं के बचतकर्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। 1 वैशाख, काठमांडू।
सहकारी के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार सृजित करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने 18 बिंदुओं वाला राष्ट्रीय प्रतिबद्धता पत्र का मसौदा तैयार किया है। यह मसौदा प्रतिनिधि सभा में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी छह राष्ट्रीय दलों के घोषणापत्रों पर आधारित है। इस मसौदे को सार्वजनिक करते हुए सरकार ने सहकारी एवं लघुवित्त के अनियंत्रित और ढीले नियमन को समाप्त करके गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र को राष्ट्र बैंक की सशक्त और सीधे सुपरिवेक्षण प्रणाली में लाने की प्रतिबद्धता जताई है।
सहकारी और लघुवित्त को कर्जा सूचना केन्द्र से जोड़ा जाएगा तथा कर्जाएं केवल वास्तविक क्षमता के आधार पर दी जाएंगी। इसके साथ ही, उत्पादनशील, बिना धित्तो सामूहिक जमानी और स्थानीय कौशल आधारित उद्यमशीलता कर्जे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के अनुसार सहकारी संस्थाओं के नियमन और मानकों का निर्धारण संघ करेगा, जबकि प्रदेश और स्थानीय तह सहकारी संस्थाओं के पंजीकरण, अभिलेख और सुव्यवस्थित शासन प्रणाली को प्रभावी बनाएंगे।
सहकारी पंजीकरण, रिपोर्टिंग, निगरानी और सूचना प्रणाली को पूर्णतया डिजिटल किया जाएगा। साथ ही, सहकारी के व्यवसायीकरण, ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और ई-कॉमर्स के माध्यम से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। इसके साथ-साथ, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और सीमांतित समुदायों को लक्षित कर सहकारी के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार सृजित किया जाएगा।
टर्की के सानलिउर्फा प्रांत के एक स्कूल में गोली चलाने वाले किशोर को सुरक्षा बलों ने नियंत्रण में लेने के दौरान मार गिराया।
इस घटना में कुल 16 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 10 छात्र, 4 शिक्षक, 1 पुलिसकर्मी और 1 कैफेटेरिया कर्मचारी शामिल हैं।
गवर्नर हसन सिल्डाक ने बताया कि किसी की मृत्यु नहीं हुई है और घायलों में से 4 का स्वास्थ्य मध्यम है।
टर्की के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सानलिउर्फा के एक स्कूल में अंधाधुंध गोली चलाने वाले किशोर की पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत हो गई।
सानलिउर्फा के गवर्नर हसन सिल्डाक के अनुसार सुरक्षा बलों ने उसे नियंत्रण में लेने का प्रयास किया, जिस दौरान विशेष ऑपरेशन में वह मारा गया।
इस हिंसक घटना में कुल 16 लोग घायल हुए हैं।
घायल व्यक्तियों में 10 छात्र, 4 शिक्षक, 1 पुलिस अधिकारी और 1 कैफेटेरिया कर्मचारी शामिल हैं।
गवर्नर के अनुसार किसी की जान नहीं गई है और सभी घायलों को तुरंत बचाया गया तथा पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अस्पताल में भर्ती घायलों में से 4 की हालत मध्यम है जबकि बाकी की स्थिति सामान्य है, अधिकारियों ने बताया।
पुलिस उस किशोर द्वारा स्कूल में गोली चलाने के उद्देश्य की जांच कर रही है।
टर्की के सरकारी टीवी चैनल TRT ने गवर्नर के हवाले से इस घटना का विस्तृत विवरण साझा किया है और बताया है कि सुरक्षा बलों के समय रहते हस्तक्षेप के कारण और बड़ी जनहानि नहीं हुई।
सरकार ने खेलकुद को राष्ट्रीय единता, मानव विकास और आर्थिक समृद्धि का आधार मानते हुए दक्षिण एशिया का खेलकुद केंद्र बनाने के लिए गंभीर प्रयास शुरू किए हैं। सरकार ने सातों प्रदेशों में अत्याधुनिक खेल अवसंरचना बनाने और त्रिभुवन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान का स्तरोन्नयन करने की योजना सार्वजनिक की है। साथ ही, खेल प्रशासन में राजनीतिक नियुक्तियां हटाकर पेशेवर नेतृत्व और पारदर्शी बजट प्रणाली लागू करने तथा महिलाओं और समावेशी खेलों को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई गई है। १ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने खेलकुद को प्राथमिकता देते हुए नेपाल को दक्षिण एशिया का खेलकुद केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य लिया है।
फागुन २१ को संपन्न प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद बने बालेन शाह नेतृत्व वाली सरकार ने शासकीय सुधार के तहत जारी एक सौ कार्यसूची के अनुसार खेलकुद को राष्ट्रीय एकता, मानव विकास और आर्थिक समृद्धि के आधार के रूप में विकसित करने की नीति बनाई है। इस कार्यसूची को चुनाव में भाग लेने वाले छह प्रमुख दलों के घोषणा पत्र और प्रतिबद्धताओं के आधार पर तैयार किया गया है। सरकार ने सातों प्रदेशों में अत्याधुनिक और पहुँच योग्य खेल अवसंरचना का निर्माण करने, अधूरे रंगशालाओं को समय पर पूरा करने और त्रिभुवन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्तरोन्नयन करने की योजना प्रस्तुत की है।
खेल प्रशासन में राजनीतिक नियुक्तियां हटाकर पेशागत नेतृत्व और पारदर्शी बजट प्रणाली लागू करने की नीति भी अपनाई गई है। विद्यालय स्तर से ही प्रतिभाओं की पहचान कर खेल को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाने और नियमित प्रतियोगिताओं के माध्यम से उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने साहसिक खेल, अल्ट्रा मैराथन समेत अन्य क्षेत्रों को राष्ट्रीय गौरव के रूप में बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने की योजना भी शुरू की है। इसके साथ ही नेपाल को साहसिक खेल पर्यटन का मुख्य गंतव्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
खेलों को पेशा बनाते हुए खिलाड़ियों को उचित पारिश्रमिक, नियमित लीग और समय पर पुरस्कार उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया जाएगा। साथ ही महिलाओं और समावेशी खेलकूद को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन कर खेल पर्यटन को बढ़ावा देने तथा ‘क्रिकेट कूटनीति’ के माध्यम से नेपाल की अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने के उद्देश्य को भी आगे रखा है।
1 वैशाख, काठमाडौँ। सरकारले आगामी पाँच वर्षभित्र गरीबी दर १० प्रतिशतसम्म झार्ने प्रतिबद्धता सार्वजनिक गरेको छ। छ वटा राजनीतिक दलहरूको घोषणापत्रमा आधारित राष्ट्रिय प्रतिबद्धतामा सरकारले गरीबी दर आगामी पाँच वर्षभित्र आधा घटाउने लक्ष्य राखेको हो। हाल गरीबी दर २०.२७ प्रतिशत छ। तर आगामी पाँच वर्षभित्र यसलाई आधा घटाउने प्रतिबद्धता सरकारले सार्वजनिक गरेको छ।
‘निजी, सहकारी र सार्वजनिक क्षेत्रबीच सन्तुलित र पूरक विकासको मोडलमार्फत आर्थिक तथा सामाजिक असमानता कम गरी पाँच वर्षभित्र बहुआयामिक गरीबी दर १० प्रतिशतमा झारिनेछ,’ प्रतिबद्धतामा उल्लेख गरिएको छ। सरकारले आगामी पाँच वर्षमा औसत आर्थिक वृद्धिदर सात प्रतिशतसम्म पुर्याएर प्रतिव्यक्ति आय तीन हजार डलर र कुल गार्हस्थ्य उत्पादन १०० अर्ब डलरको नजिक पुर्याउने लक्ष्य राखेको प्रतिबद्धतामा उल्लेख छ।