Skip to main content

लेखक: space4knews

विवादका बीच लम्कीचुहा प्रादेशिक अस्पताल उदघाटन – Online Khabar

स्थानीय विवादों के बीच लमकीचुहा प्रादेशिक अस्पताल का उद्घाटन

१४ जेठ, कैलाली। स्थानीय सरकार के साथ जारी विवाद के बीच कैलाली के लमकीचुहा प्रादेशिक अस्पताल का उद्घाटन किया गया है। सुदूरपश्चिम प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह ने मेयर सुशीला शाही के साथ चल रहे विवाद के बीच आज सुबह इस अस्पताल का उद्घाटन किया। विवाद जारी रहने के कारण उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान अस्पताल और आसपास के सड़कों पर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात कर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

१५ शय्याओं वाले इस लमकीचुहा अस्पताल का संचालन १५ से शुरू होना है, लेकिन प्रदेश सरकार और नगरपालिका के बीच संचालन संबंधी सहमति नहीं बन सकी है। सामाजिक विकास मंत्रालय ने पिछले वैशाख महीने में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. कमलेशप्रसाद यादव समेत तीन कर्मचारियों को अस्पताल में कार्य के लिए नियुक्त किया था। लेकिन मेयर शाही ने अस्पताल प्रादेशिक सरकार को हस्तांतरित न होने का हवाला देते हुए उन कर्मचारियों को काम पर आने से रोका, जिससे विवाद और भी बढ़ गया। इस विवाद के कारण गत वैशाख ३० को अस्पताल में तालाबंदी भी हुई, जिसने लमकी क्षेत्र को तनावग्रस्त बना दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लमकी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सुदूरपश्चिम के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह और मेयर सुशीला शाही के बीच आंतरिक द्वंद्व इस समस्या का मुख्य कारण है। मेयर शाही के समर्थक अस्पताल मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन या अवरोध कर सकते हैं, इसलिए आज सुबह से ही सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। मेयर शाही इस समय विदेश में हैं।

खोटाङ में बंदर नियंत्रण के लिए छह महीने रखवाली करने का सुझाव

१४ जेठ, खोटाङ । ‘अभी के लिए प्रत्येक वडामा दो से पाँच-छह किसान प्रहरी या किसान सेना रखकर बंदर को भगाया जा सकता है। किसान खेत-बारी में बंदर आने की सूचना देकर सहयोग कर सकते हैं,’ नेकपा एमाले खोटाङ के उपाध्यक्ष कुमार आचार्य ने कहा। कृषि फसल में क्षति पहुंचाने वाले जंगली जानवरों को नियंत्रित करने के उपाय खोजने के लिए खोटाङ जिला समन्वय समिति ने जेठ १३ गते किसानوں के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया था। उक्त कार्यक्रम में आचार्य ने बंदर नियंत्रण संबंधी अपनी राय रखी।

जिला समन्वय समिति के सभाहल में आयोजित कार्यक्रम में किसान, जनप्रतिनिधि, प्रशासन, सुरक्षा निकाय, कृषि से जुड़े कार्यालय और राजनीतिक दल के प्रतिनिधि बुलाए गए थे। सहभागी ध्यानबहादुर राई ने बंदर भगाने के लिए निश्चित वेतन सहित वर्ष में छह महीने रखवाली करने का सुझाव दिया। बंदर सहित जंगली जानवरों को भगाने के लिए रखवाली रखने पर सहमति जताने वाले किसान झमप्रसाद आचार्य ने प्रत्येक वडा में फसल संरक्षण समिति गठित कर स्थानीय सरकार के माध्यम से रखवाली प्रबंधन करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि रखवाली के माध्यम से बंदर पर निगरानी रखी जा सकेगी तथा फसल के पास आने पर उसे भगा भी जा सकता है।

किसान उद्धवप्रसाद आचार्य की भी यही राय है। बंदर भगाने के लिए नगरपालिका, गाउँपालिका या वडा कार्यालय द्वारा रखवाली की व्यवस्था करने पर किसान राहत प्राप्त कर सकेंगे, उनका विश्वास है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य निवेश करे तो बंदर नियंत्रण संभव होगा। संवाद में सहभागी किसानों ने बंदर भगाने के लिए रखवाली प्रबंधन से लेकर बंदर न खाने वाले फसल आयात करने, बंदरों को पकड़कर बंध्याकरण करने, अन्यत्र स्थानांतरित करने और आवश्यक पड़ने पर मारने के विषयों पर चर्चा की। सामुदायिक वन उपभोक्ता महासंघ के अध्यक्ष मोहन गुरुङ ने बंदर नियंत्रण के लिए परंपरागत ज्ञान और कौशल अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सरकार हर तीन साल में चैत महीने में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार बंदर भगाने का अभियान चलाए तो बंदर नियंत्रण संभव होगा। बंदर किसानों के लिए समस्या बन चुका है, लेकिन बंदर नियंत्रण के लिए अब तक पूर्ण उपाय नहीं मिल पाया है। बंदर सहित जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को कम करने के उपाय खोजने और शोध करने का कार्य जारी है, जिला समन्वय समिति खोटाङ के प्रमुख सनबहादुर राई ने बताया।

इजरायल की तैयारी: दक्षिण लेबनान में बड़े हमले के लिए क्षेत्र खाली करने के आदेश

क्षति

तस्बिर स्रोत, AFP

इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के क्षेत्र को खाली करने का आदेश जारी किया है।

हिज्बुल्लाह पर नए हमले से पहले इसे “युद्ध क्षेत्र” घोषित किया गया है।

इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने स्थानीय निवासियों को सीमा से करीब 40 किलोमीटर (25 मील) दूर जहरानी नदी के उत्तर की ओर जाने का निर्देश दिया है।

IDF ने हिज्बुल्लाह पर बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए “कड़े कदम” उठाने की चेतावनी दी है।

पिछले 24 घंटों में 9 बार चेतावनी जारी

आक्रमण

तस्बिर स्रोत, AFP

17 अप्रैल 2024 को लागू हुए युद्धविराम के बाद यह सबसे बड़ा क्षेत्र खाली करने का आदेश है, जो लेबनान के लगभग 14 प्रतिशत क्षेत्र को कवर करता है।

दाउन्नेको घ्युखोलामा भारतीय बस दुर्घटना, ६ महिला घाइते

दाउन्नेको घ्युखोलामा भारतीय बस दुर्घटना, ६ महिलाएँ घायल

१४ जेठ, नवलपरासी। पूर्व–पश्चिम राजमार्ग अन्तर्गत पूर्वी नवलपरासीको बिनयी त्रिवेणी गाउँपालिका–२ घ्यूखोलामा भारतीय नम्बर प्लेटको बस दुर्घटना हुँदा ६ जना महिला घाइते भएका छन्। जिल्ला प्रहरी कार्यालयका अनुसार बिहीबार करिब ४ बजे यूपी ६२ डीटी २७८० नम्बरको बस दुर्घटना भएको हो। बसमा सवार ३५ यात्रुमध्ये ६ जना महिला घाइते भएका छन्। उनीहरूलाई बिनयी त्रिवेणी आधारभूत अस्पताल दुम्किबासमा प्रारम्भिक उपचारपछि थप उपचारका लागि मध्यबिन्दु प्रादेशिक अस्पताल डण्डा पठाइएको प्रहरीले जनाएको छ।

दुर्घटनामा भारत महाराष्ट्रकी ६२ वर्षीया सुशिला निगोत, ६९ वर्षीया सुशिला जीसी, ५८ वर्षीया संगिता बस्नेत, ४७ वर्षीया भासुली कादम, ४८ वर्षीया रेखा टाउरे र ४५ वर्षीया योगिता बलेरौ घाइते भएका छन्, प्रहरीले जनाएको छ। बस चालक भारतको आजमगढ जिल्लाका ४९ वर्षीय अनिल कुमारलाई प्रहरीले नियन्त्रणमा लिएको छ। दुर्घटनापछि राजमार्ग अवरुद्ध नभएको र घटनाबारे थप अनुसन्धान भइरहेको प्रहरीले जनाएको छ।

नेपाली कांग्रेस संसदीय दल की बैठक आज केंद्रीय कार्यालय सिंहदरबार में होगी

१४ जेठ, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस संसदीय दल की बैठक आज सुबह साढ़े ११ बजे सिंहदरबार में आयोजित की जाएगी। बजट प्रस्तुति से पूर्व इस बैठक में आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के बजट को संसद में कैसे प्रस्तुत किया जाएगा, इस विषय पर गहन चर्चा होने की कांग्रेस ने जानकारी दी है। संसद में बजट १५ जेठ को प्रस्तुत किया जाएगा।

विवादकाबीच लम्कीचुहा प्रादेशिक अस्पताल उदघाटन गरिँदै, सुरक्षा व्यवस्था कडा

लम्कीचुहा प्रादेशिक अस्पताल का उद्घाटन, सुरक्षा कड़ी की गई

सुदूरपश्चिम के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह द्वारा लम्कीचुहा प्रादेशिक अस्पताल का उद्घाटन करने के कारण उस क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। १५ शैय्या वाले इस अस्पताल के हस्तांतरण को लेकर मुख्यमंत्री शाह और मेयर सुशीला शाही के बीच विवाद हुआ था, जिसके कारण अस्पताल में तालाबंदी तक करनी पड़ी थी। मेयर शाही के समर्थक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, ऐसे आशंकाओं के चलते अस्पताल क्षेत्र में पुलिस तैनात की गई है। १४ जेठ, कैलाली।

मुख्यमंत्री शाह आज सुबह अस्पताल का उद्घाटन करने लम्कीचुहा आ रहे हैं। उनके पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं। १५ शैय्या वाले लम्कीचुहा अस्पताल के संचालन को लेकर प्रदेश सरकार और नगरपालिका के बीच अभी तक कोई सहमति नहीं बन सकी है। प्रदेश के सामाजिक विकास मंत्रालय ने अस्पताल संचालन के लिए मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर कमलेशप्रसाद यादव सहित तीन कर्मचारियों को गत वैशाख में नियुक्त किया था। लेकिन मेयर शाही ने अस्पताल प्रदेश को हस्तांतरित न किए जाने का हवाला देते हुए उन्हें हाजिर न होने का निर्देश दिया था, जिससे विवाद गहरा गया।

इसी विवाद के कारण गत वैशाख ३० को अस्पताल में तालाबंदी हुई और लम्की क्षेत्र में तनाव उत्पन्न हुआ। प्रादेशिक अस्पताल बनने की सभी प्रक्रियाएं पूरी करके प्रदेश सरकार ने बजट भी आबंटित कर दिया है, लेकिन नगरपालिका द्वारा अस्पताल हस्तांतरण से इनकार करने की वजह से विवाद बढ़ा और समस्या बनी हुई है। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सुदूरपश्चिम के मुख्यमंत्री कमलबहादुर शाह और मेयर सुशीला शाही के बीच आंतरिक विवाद के कारण समस्या उत्पन्न होने पर मेयर शाही के समर्थक प्रदर्शन और अवरोध कर सकते हैं, इसलिए आज सुबह से ही सुरक्षा में कड़ाई की गई है।

भारतीय सीमा पर सतर्कता बढ़ाई गई, कोई अतिरिक्त रोहिंग्या नेपाल में प्रवेश नहीं हुआ

सुरक्षा जाँच

तस्बिर स्रोत, BBC/SHARADKC

तस्बिर का कैप्शन, अधिकारियों ने बताया कि सीमा पर सुरक्षा जांच और निगरानी बढ़ाई गई है

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 3 मिनट

अधिकारियों ने बताया कि भारत से शरणार्थी बने रोहिंग्या शरणार्थी नेपाल में प्रवेश करने की आशंका के कारण सीमा पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार भारतीय सीमा पार कर गैरकानूनी रूप से अन्य देशों के नागरिकों को नेपाल में प्रवेश करने से रोकने के लिए निगरानी और सक्रियता बढ़ा दी गई है।

अब तक अवैध रूप से नेपाल में प्रवेश किए जाने की कोई भी घटना रिपोर्ट नहीं हुई है, यह अधिकारियों ने स्पष्ट किया है।

विशेष रूप से कोशी प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सतर्कता बढ़ाई गई है, जिसका संबंध भारत के पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव से जोड़ा गया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बांग्लादेश और म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थियों के प्रति कड़ी नीति अपनाई है, और वहां सरकार बनने के बाद से रोहिंग्या को नेपाल में प्रवेश न करने देने के लिए विशेष निगरानी निर्देश जारी किए गए हैं।

सिरहामा सशस्त्रद्वारा चालु आर्थिक वर्षमा ९ करोड ८२ लाखभन्दा बढी अवैध सामान बरामद

सिरहा में सशस्त्र पुलिस ने चालू वित्तीय वर्ष में 9 करोड़ 82 लाख से अधिक अवैध सामग्री जब्त की

14 जेठ, सिरहा। सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल नं. 7 गण हेडक्वार्टर सिरहा ने चालू वित्तीय वर्ष में अवैध सामग्री की गिरफ्तारी के माध्यम से राज्य के राजस्व संग्रहण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गण के 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर जारी विवरण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2082/083 में अब तक 9 करोड़ 82 लाख 78 हजार 329 रुपये मूल्य की अवैध सामग्री जब्त कर संबंधित भन्सार कार्यालय को सौंपा गया है। सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल नं. 7 गण हेडक्वार्टर सिरहा के एसपी सुमन जंग थापा क्षेत्री के अनुसार, इस उपलब्धि से सीमावर्ती क्षेत्र में होने वाली अवैध चोरी-निकलासी और तस्करी पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

इसी तरह, वित्तीय वर्ष 2081/082 में भी 9 करोड़ 60 लाख 93 हजार 980 रुपये मूल्य की अवैध सामग्री जब्त कर भन्सार कार्यालय को सौंपा गया था, यह आंकड़ा भी सार्वजनिक किया गया है। सीमा सुरक्षा, राजस्व चुहावट नियंत्रण और अवैध गतिविधियों के रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए सशस्त्र पुलिस लगातार निगरानी, गश्ती और सूचना-आधारित कार्रवाई को प्रभावी बनाए हुए है। स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सशस्त्र प्रहरी बल मधेश प्रदेश प्रमुख कृष्ण ढकाल ने पुलिस और नागरिकों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के दुव्यवहार को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘नागरिक सेवा के दौरान किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लेकिन उसका प्रतिकार करने का पुलिस को अधिकार नहीं है। पुलिस का काम कानून का प्रवर्तन करना है, लेकिन नागरिकों को कष्ट पहुंचाने का कोई इरादा स्वीकार्य नहीं है।’

ढकाल ने कहा कि पुलिस संगठन जनता के कर से संचालित है, इसलिए प्रत्येक पुलिस अधिकारी को उत्तरदायी और जिम्मेदार होना चाहिए। स्थापना दिवस के अवसर पर सीमा सुरक्षा, राजस्व संरक्षण और नागरिक मैत्री पुलिस सेवा को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त कर कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख जिल्ला अधिकारी सुरेन्द्र पौडेल, जिल्ला समन्वय समिति सिरहा के अध्यक्ष दिनेश महतो, जिल्ला प्रहरी कार्यालय सिरहा के प्रमुख वासुदेव पाठक, विभिन्न स्थानीय सरकारों के प्रमुख और सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल नं. 7 गण सिरहा के एसपी सुमन जंग थापा क्षेत्री ने की।

विदेशी मुद्राओं के विनिमय दर में सामान्य उतार-चढ़ाव

१४ जेठ, काठमाडौं । नेपाल राष्ट्र बैंक ने आज विदेशी मुद्राओं के विनिमय दर में सामान्य गिरावट और वृद्धि का सिलसिला देखा होने की जानकारी दी है। राष्ट्र बैंक के अनुसार आज अमेरिकी डलर का क्रय दर १५२ रुपये ८१ पैसे और बिक्री दर १५३ रुपये ४१ पैसे है। इसी प्रकार, यूरोपीय यूरो का क्रय दर १७७ रुपये ८४ पैसे और बिक्री दर १७७ रुपये ५४ पैसे, ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग का क्रय दर २०५ रुपये ३२ पैसे और बिक्री दर २०६ रुपये १२ पैसे तथा स्विस फ्रैंक का क्रय दर १९४ रुपये ३२ पैसे और बिक्री दर १९५ रुपये ०८ पैसे निर्धारित किया गया है।

ऑस्ट्रेलियाई डलर का क्रय दर १०८ रुपये ९७ पैसे और बिक्री दर १०९ रुपये ४० पैसे, कनाडाई डलर का क्रय दर ११० रुपये ४२ पैसे और बिक्री दर ११० रुपये ८६ पैसे, सिंगापुर डलर का क्रय दर ११९ रुपये ६० पैसे और बिक्री दर १२० रुपये ७ पैसे निर्धारित किया गया है। साथ ही, जापानी येन १० की क्रय दर ९ रुपये ५९ पैसे और बिक्री दर ९ रुपये ६२ पैसे, चीनी युआन का क्रय दर २२ रुपये ५३ पैसे और बिक्री दर २२ रुपये ७२ पैसे तथा सऊदी अरबियाई रियाल का क्रय दर ४० रुपये ७२ पैसे और बिक्री दर ४० रुपये ८८ पैसे है।

कतरी रियाल का क्रय दर ४१ रुपये ९४ पैसे और बिक्री दर ४२ रुपये १० पैसे, थाई भाट का क्रय दर ४ रुपये ६९ पैसे और बिक्री दर ४ रुपये ७० पैसे तथा यूएई दिरहम का क्रय दर ४१ रुपये ६१ पैसे और बिक्री दर ४१ रुपये ७७ पैसे निर्धारित किया गया है। मलेशियन रिंगित का क्रय दर ३८ रुपये ५४ पैसे और बिक्री दर ३८ रुपये ६९ पैसे, दक्षिण कोरियाई वन १०० का क्रय दर १० रुपये २० पैसे और बिक्री दर १० रुपये २४ पैसे, स्वीडिश क्रोना का क्रय दर १६ रुपये ४९ पैसे और बिक्री दर १६ रुपये ५५ पैसे तथा डेनिश क्रोना का क्रय दर २३ रुपये ८० पैसे और बिक्री दर २३ रुपये ८९ पैसे निर्धारित किया गया है।

केन्द्रीय बैंक के अनुसार हांगकांग डलर का क्रय दर १९ रुपये ५१ पैसे और बिक्री दर १९ रुपये ५८ पैसे, कुवैती दिनार का क्रय दर ४९५ रुपये २४ पैसे और बिक्री दर ५२० रुपये है। बहरीन दिनार का क्रय दर ४०५ रुपये ३३ पैसे और बिक्री दर ४६० रुपये ९२ पैसे तथा ओमानी रियाल का क्रय दर ३९६ रुपये ९० पैसे और बिक्री दर ३९८ रुपये ४६ पैसे है। भारतीय रुपये १०० की क्रय दर १६० रुपये और बिक्री दर १६० रुपये १५ पैसे निर्धारित की गई है। राष्ट्र बैंक ने आवश्यकतानुसार विनिमय दर को किसी भी समय संशोधित करने का वर्णन करते हुए बताया कि वाणिज्य बैंक अपने अनुसार अलग विनिमय दर उपयोग कर सकते हैं, इसलिए अद्यतन विनिमय दर केन्द्रीय बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगी।

एनसेलले पायो गुणस्तर र वातावरण सम्बन्धी आईएसओ ९००१ र १४००१ मान्यता

एनसेल ने गुणवत्ता और पर्यावरण प्रबंधन के लिए ISO 9001 और 14001 प्रमाणीकरण प्राप्त किया

एनसेल ने उत्कृष्ट सेवा और पर्यावरण प्रबंधन के लिए प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 9001 और 14001 प्रमाणीकरण प्राप्त किया है। ये दोनों अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण प्राप्त करने वाली नेपाल की पहली दूरसंचार सेवा प्रदायक कंपनी एनसेल बनी है। इससे पहले, एनसेल ने डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिए ISO 27001 और ISO 27701 प्रमाणीकरण को प्रमाणित और नवीनीकृत भी करवा चुका था। १३ जेठ, काठमाडौं। एनसेल ने विश्वसनीय ISO 9001 और 14001 मान्यता प्राप्त की है। ये मानक यह प्रमाणित करते हैं कि कंपनी उच्च गुणवत्ता वाली सेवा प्रदान करने और पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

ISO 9001 गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का वैश्विक मानक है, जो ग्राहकों की आवश्यकताएं और नियामक संस्थाओं के मानदंडों को पूरा करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है। वहीं, ISO 14001 पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली से जुड़ा मानक है जो संगठन को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार, कचरा प्रबंधन और कानूनी नियमों का पालन करने में सहायक होता है।

एनसेल के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी माइकल फोले ने कहा, ‘हम पहले ही ISO 27001 : 2022 (ISMS) और ISO 27701 : 2019 (PIMS) डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिए प्रमाणित हो चुके हैं, अब ISO 9001 और 14001 प्राप्त करना हमारी सेवा गुणवत्ता और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है।’

व्यवसाय के किसी भी क्षेत्र—बी2सी, बी2बी या बी2जी—के लिए ये मान्यताएं स्पष्ट करती हैं कि एनसेल की सेवाएं वैश्विक स्तर के प्रमाणित मानकों के अनुरूप संचालित हो रही हैं। कंपनी ने पुष २०८१ में ISO 27001 : 2022 (ISMS) और ISO 27701 : 2019 (PIMS) की मान्यता प्राप्त की थी और इन्हें नवीनीकृत भी किया है।

नेपाल में ये दोनों प्रमाणीकरण प्राप्त करने वाली पहली दूरसंचार प्रदायक कंपनी एनसेल ही है। ये प्रमाणपत्र नेपाल के तेजी से बढ़ते डिजिटल क्षेत्र में कंपनी के उत्कृष्ट संचालन और स्थिरता पर केंद्रित होने की पुष्टि करते हैं।

ग्राहकों के लिए इसका मतलब है—और भी भरोसेमंद नेटवर्क सेवा, उत्कृष्ट सेवा गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूल संचालन सुनिश्चित होना।

संस्कृत विश्वविद्यालय के उपकुलपति, शिक्षाधिकारी और कुलसचिव पद के लिए आवेदन आमंत्रित

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा किया गया।

  • नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के रिक्त उपकुलपति, शिक्षाधिकारी और कुलसचिव पदों के लिए नियुक्ति हेतु आवेदन मांगे गए हैं।
  • पदाधिकारियों के चयन और सिफारिश के लिए गठित समिति ने १० दिन का समय देते हुए बुधवार को आवेदन की घोषणा की है।
  • अध्यादेश के माध्यम से पदाधिकारी पदमुक्त होने के बाद कार्यविधि, २०८३ के अनुसार नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है।

१३ जेठ, काठमांडू। नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के रिक्त उपकुलपति, शिक्षाधिकारी और कुलसचिव पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन खुला कर दिया गया है।

नाम सिफारिश के लिए गठित चयन तथा सिफारिश समिति ने १० दिनों के भीतर आवेदन जमा करने का बुधवार को आह्वान किया है।

इस आवेदन आमंत्रण को कार्यविधि, २०८३ के अंतर्गत किया गया है।

अधिकारी अध्यादेश के कारण पदमुक्त हुए हैं, उसके पश्चात नई पदाधिकारी चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघको साधारणसभा जेठ २४ गते, नयाँ कार्यसमिति छानिने

वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ की विशेष साधारणसभा २४ जेठ को, नई कार्यसमिति का चयन होगा

नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ की विशेष साधारणसभा और नई नेतृत्व चयन के लिए आगामी २४ जेठ को निर्वाचन आयोजित किया जाएगा। पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद गठित प्रबंध समिति को जिल्ला प्रशासन कार्यालय काठमाण्डौ ने विशेष साधारणसभा एवं निर्वाचन करने की अनुमति प्रदान की है। संघ के अध्यक्ष भूवनसिंह गुरुङ् पर एकलौटी कार्य करने के आरोप के बाद महासचिव महेश बस्नेत सहित पदाधिकारियों ने १४ वैशाख को सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया था।

जिल्ला प्रशासन कार्यालय काठमाण्डौ द्वारा संघ को विधान, प्रचलित कानून और निर्धारित प्रक्रिया अनुसार कार्यवाहक रूप में संचालन के निर्देश देने के पश्चात यह मार्ग प्रशस्त हुआ है। जारी पत्र में संघ के अधिकांश पदाधिकारियों और सदस्यों ने इस्तीफा देने की जानकारी दी गई है। पत्रानुसार बहुमत पदाधिकारियों के इस्तीफा देने के कारण संघ की सलाहकार समिति ने विधान अनुसार कार्यसमिति के स्वतः विघटन को मानते हुए प्रबंध समिति गठित कर विशेष साधारणसभा बुलाने का निर्णय लिया है।

प्रबंध समिति २४ जेठ को विशेष साधारणसभा सहित नए नेतृत्व के चयन हेतु निर्वाचन की तैयारी कर रही है। प्रशासन ने उक्त प्रक्रिया विधान के अनुसार आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कार्यालय ने पहले भी संघ से आवश्यक विवरण मांगे थे, किन्तु पूर्ण विवरण प्राप्त नहीं हो सका। प्रबंध समिति ने विशेष साधारणसभा और निर्वाचन की तैयारी में किसी भी बाधा न आए इसके लिए प्रशासन से अनुरोध किया था, जिसके आधार पर प्रशासन ने पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

पत्र में उल्लेख है कि निर्वाचन न होने के कारण संघ, नेपाल सरकार के विभिन्न निकायों में प्रतिनिधित्व नहीं कर सका है और व्यवसायी हितों से जुड़े कार्य प्रभावित हुए हैं। जिल्ला प्रशासन कार्यालय ने संघ को विधान और कानून अनुसार नियमित कार्य एवं कार्रवाई करने, सम्बद्ध संस्थाओं को समय पर सूचना देने, स्वतंत्र तथा निष्पक्ष वातावरण में कार्य करने और कानून के अनुसार किसी प्रकार की बाधा न होने देने के निर्देश दिए हैं।

सुधन गुरुङ से اللجنة التحقيقية تستلم إفادته، التحقيق يقترب من النهاية

१३ जेठ, काठमाडौं । तत्कालीन गृहमन्त्री सुधन गुरुङलाई समन्वय गरेर छानबिन गर्दै आएको समितिले उनलाई बयान लिएको छ। समितिले मंगलबार र बुधबार गरी दुई दिन लगातार गुरुङसँग बयान लिएको हो। समितिका एक स्रोतले बयान लिएको कुरा पुष्टि गरेका छन्। ‘हामीले बयान लिइसकेका छौं। आवश्यकता परे फेरि बोलाउन सकिन्छ,’ समितिका स्रोतले जानकारी दिए। बयान लिनुअघि समितिले गुरुङमाथि लागेको आरोपहरूसम्बन्धमा सम्बन्धित क्षेत्रका पक्षसँग बुझ्ने तथा सम्पत्ति विवरणको गहिरो अध्ययन गर्ने कार्य गरेको जनाएको छ।

मन्त्रिपरिषद्को २८ वैशाखको निर्णयअनुसार, उच्च अदालतका पूर्वन्यायाधीश अच्युतप्रसाद भण्डारी अध्यक्ष, महालेखा नियन्त्रक शोभाकान्त पौडेल र सहन्यायाधिवक्ता अच्युतमणि नेउपाने सदस्य रहने गरी गुरुङमाथि छानबिन गर्न समिति गठन गरिएको थियो। समितिले गुरुङसँग बयान लिएकै साथ छानबिन अन्तिम चरणमा पुगेको छ र केही दिन भित्र प्रतिवेदन बुझाउने तयारी भइरहेको समितिका स्रोतले बताए। अहिलेसम्म प्रतिवेदन लेखनको काम भइरहेकाले अन्तिम तयार अवस्थामा सरकारलाई बुझाइने बताइएको छ। समितिलाई दिइएको १५ दिनको समय सकिन लागेको कारण प्रतिवेदन तयार पार्न हतारसहित काम भइरहेको पनि भनिएको छ।

पहिले समिति अध्यक्ष भण्डारीले प्रतिवेदन स्पष्ट र किटान गरी समयमा बुझाउने जानकारी दिएका थिए। दोषी होस् वा निर्दोष, प्रमाणको आधारमा स्पष्ट प्रतिवेदन पेश गरिने उनको भनाइ थियो।

सुधनमाथिको आरोप के हो? सम्पत्ति शुद्धीकरण सम्बन्धी मामिलामा व्यवसायी दीपक भट्ट १९ चैतमा काठमाडौंबाट पक्राउ परेका थिए। उनी हाल पनि प्रहरी हिरासतमा छन्। हिरासतमा रहेका व्यवसायी भट्टसँग साझेदारी देखिएपछि सुधन गुरुङ विवादमा तानिएका थिए। गुरुङले आफ्नो सम्पत्ति विवरण सार्वजनिक गर्दा सेयर लुकाएको र विवादास्पद व्यापारीको कम्पनीमा सेयर रहेको विषय बाहिर आएपछि ९ वैशाखमा उनी प्रधानमन्त्री समक्ष राजीनामा दिएका थिए। उनको पेश गरिएको सम्पत्ति विवरणमा जग्गा, सुन लगायतका विषयमा विभिन्न टीकाटिप्पणीहरू समाजमा आएका थिए। राजीनामा दिने क्रममा गुरुङले फेसबुकमार्फत लेखेका थिए, ‘पछिल्ला दिनहरूमा नागरिक स्तरबाट सेयर लगायत विषयमा उठेका प्रश्न, टिप्पणी र जनचासोलाई मैले गम्भीरतापूर्वक लिएको छु। मेरो लागि पदभन्दा ठूलो नैतिकता छ। जनविश्वासभन्दा ठूलो शक्ति अरु केही छैन। मसँग सम्बन्धित विषयमा निष्पक्ष छानबिन होस्।’

राजीनामा दिएपछि २० दिनपछि, ३१ वैशाखमा सरकारले छानबिन समिति गठन गरेको थियो। गुरुङले आफ्नो नाममा लागेको आरोपका कारण मन्त्री पदबाट राजीनामा दिएका थिए। त्यसयता गृहमन्त्रालय प्रधानमन्त्रीकै मातहतमा सञ्चालित छ। छानबिन समितिले निर्दोष ठहराएमा गुरुङ पुनः गृहमन्त्री बन्न सक्ने सम्भावना पनि चर्चा गरिएको छ।

बेलायतमा बढ्दैछ नेपाली युवाको सम्बन्ध विच्छेद – Online Khabar

बेलायत में नेपाली युवाओं में बढ़ रहा है तलाक का सिलसिला

समाचार सारांश

  • लंदन स्थित नेपाली दूतावास से एक वर्ष में लगभग 260 लोगों ने तलाक के लिए अधिकृत वारण्ट जारी करवाए हैं।
  • बेलायत में आए नेपाली छात्र और दक्ष कामगारों के बीच आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव से तलाक की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
  • कार्यवाहक राजदूत विपिन दूवाड़ी ने जल्दबाजी में किए गए विवाहों के दीर्घकालीन दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक रहने का आग्रह किया है।

१३ जेठ, लंदन। यूनिवर्सिटी ऑफ रोहैम्पटन में अंडरग्रेजुएट स्तर पर डिजिटल मार्केटिंग की पढ़ाई करने के लिए पिछले सितंबर लंदन आए २२ वर्षीय विनोद (नाम परिवर्तित) ने शादी की और अपनी महिला आश्रित नेपाल में ही छोड़ दी। इसका कारण था कि ब्रिटेन सरकार के नवीनतम नियम के तहत रिसर्च और पीएचडी को छोड़कर आश्रितों को लाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

पहले वर्ष में कर्ज लेकर 10,000 पाउंड (लगभग 21 लाख रुपये) जुटाकर आए विनोद को लंदन पहुंचते ही नौकरी नहीं मिली। करीब चार महीने तक वे नौकरी से दूर रहे।

पढ़ाई और काम का तनाव था, साथ ही आर्थिक भार, कर्ज चुकाने का दबाव, घरवालों और पत्नी की अपेक्षाओं ने उनके मनोबल को प्रभावित किया और वे डिप्रेशन में चले गए। घर से दूर अकेले रहना दंपती के बीच असमझदारी को बढ़ावा देने लगा। धीरे-धीरे उनके वैवाहिक जीवन में दरार आ गई और अंततः उन्होंने तलाक लेने का निर्णय लिया।

विनोद ने लंदन स्थित नेपाली दूतावास से अधिकृत वारण्ट बनवाकर नेपाल में तलाक दर्ज कराया।

इसी प्रकार एक और कहानी है, किंतु परिस्थिति भिन्न है। टियर टू वीजा पर दो साल पहले ब्रिटेन आए कैलाश की जोड़ी भी जीवनभर साथ निभाने का वादा पूरा नहीं कर सकी। एक रेस्तरां में काम करने वाले कैलाश ने नियोक्ता से किए गए समझौते के अनुसार पूरा समय काम किया, लेकिन हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में सप्ताहांत अधिक व्यस्त रहते हैं। उनकी जीवनसंगिनी को समय न मिलने की शिकायत थी। पैसों की बचत न हो पाना, नियमित शराब पीना, कभी-कभी जुआ जैसी आदतें और झगड़ों के कारण उनका घर टूटा।

नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में मैनेजमेंट पढ़ रहे ३१ वर्षीय प्रदीप (परिवर्तित नाम) और २२ वर्षीय सृष्टि की दुनिया रोमांचक थी। ब्रिटेन जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने और बेहतर भविष्य बनाने के सपने के साथ उन्होंने जल्दबाजी में कानूनी विवाह किया।

प्रदीप ‘मेन एप्लिकेट’ और सृष्टि ‘डिपेंडेंट वीजा’ लेकर लंदन में पहुंचे। लेकिन हिथ्रो एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद उनकी कठोर वास्तविकताओं ने उनके प्रेमिल जीवन को लंबे समय तक टिकने नहीं दिया।

ब्रिटेन आने के बाद प्रदीप का दिनचर्या विश्वविद्यालय के असाइनमेंट, लेक्चर्स और सख्त नियमों में व्यस्त हो गया। वहीं, घर का किराया, राशन और प्रदीप की अगली सेमेस्टर की महंगी फीस जुटाने की जिम्मेदारी सृष्टि के कंधों पर आ गई।

नेपाल में कभी कड़ी मेहनत न करने वाली सृष्टि को यहां रोजाना 12-13 घंटे स्टोर और केयर होम में काम करना पड़ता था। प्रदीप कॉलेज और आंशिक काम से थककर जब लौटते, तब सृष्टि काम पर निकल चुकी होती।

प्रदीप और सृष्टि के बीच दूरी बढ़ने लगी, जिससे वे एक कमरे में रहते हुए भी अजनबी बन गए। कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे का सहारा बनने की बजाय वे केवल समस्याएं बढ़ाने लगे। शादी के दो साल पूरे होने से पहले उन्होंने अलग होने और कानूनी तलाक लेने का निर्णय किया।

प्रदीप और सृष्टि की कहानी ब्रिटेन में उच्च शिक्षा लेने आई कई युवा जोड़ों से मेल खाती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट लंदन में एमएससी इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजमेंट के अंतिम सेमेस्टर के छात्र संदीप भट्टराई कहते हैं कि युवा पीढ़ी अब अपनी व्यक्तिगत पहचान, करियर और मानसिक शांति के विषय में ज्यादा समझदार हो रही है। ‘वे सामाजिक या पारिवारिक दबाव के कारण विषाक्त या असफल रिश्तों में नहीं रहना चाहते, जो एक सकारात्मक बदलाव है,’ भट्टराई कहते हैं। ‘परंतु जल्दबाजी में की गई शादी, वैवाहिक जीवन में आर्थिक और मानसिक चुनौतियों का पूर्वानुमान न लगाना और संकट के समय सही संवाद न कर पाना कई विद्यार्थियों का जीवन प्रभावित कर रहा है।’

दूतावास से सालाना 260 अधिकृत वारण्ट जारी

लंदन स्थित नेपाली दूतावास में तलाक के लिए अधिकृत वारण्ट बनाए जाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है, इसकी जानकारी कार्यवाहक राजदूत विपिन दूवाड़ी ने दी। उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2082 में लगभग 260 लोगों ने यहां से अधिकृत वारण्ट बनाए। ज्यादातर विद्यार्थी और स्किल्ड वीजा पर आए युवा आते हैं।’

नेपाल में वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से दर्ज हो तभी दूतावास से वारण्ट जारी किया जाता है। वहीं, ब्रिटेन में ही विवाह और तलाक करने वालों की स्थिति अलग होती है।

कार्यवाहक राजदूत दूवाड़ी ने बताया कि युवा अवस्था में तलाक से व्यक्ति को दीर्घकालिक भावनात्मक और सामाजिक प्रभाव पड़ सकते हैं, इसलिए अभिभावकों को भी अपने बच्चों की शादी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। ‘संवेदना और रिश्ते के मजबूत आधार न होने वाली विवाह संपूर्ण जीवन को प्रभावित कर सकते हैं,’ उन्होंने जोर दिया।

ब्रिटेन में लगभग 42 प्रतिशत विवाह एक चरण पर पहुंचकर तलाक में परिवर्तित हो जाते हैं।

भावनात्मक दूरी, अलग रहना, कम बातचीत, असमझदारी, गलतफहमी, घरेलू हिंसा, आर्थिक समस्याएं, मध्य जीवन संकट और व्यभिचार को तलाक के मुख्य कारण माना जाता है।

‘सर्वसम्मति’ या ‘बहुमत’? कोशी प्रदेशसभा में विवाद के कारण बैठक रद्द

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा किया गया।

  • कोशी प्रदेशसभा की नीति तथा कार्यक्रम पारित करने की प्रक्रिया में उत्पन्न विवाद के कारण बैठक १६ जेठ तक स्थगित की गई है।
  • सभामुख ने नीति तथा कार्यक्रम को सर्वसम्मति से पारित घोषित किया, जिसके बाद प्रतिपक्षी सदस्यों ने सदन में अवरोध किया।
  • विवाद के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री राजेंद्र राई ने रोस्टरम पर जाकर माइक्रोफोन छीनने का प्रयास किया, जिसे मर्यादापालकों ने रोका।

१३ जेठ, विराटनगर। कोशी प्रदेश सरकार की नीति तथा कार्यक्रम पारित करने की प्रक्रिया में उत्पन्न विवाद के कारण प्रदेशसभा की बैठक १६ जेठ तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

बुधवार को हुई बैठक में मुख्य प्रतिपक्षी दल के सांसदों ने अवरोध किया और रोस्टरम घेरने के चलते सभामुख अम्बरबहादुर विष्ट ने आधे घंटे के लिए बैठक स्थगित की। बाद में बैठक नहीं हो सकी और सूचना लगाकर स्थगित करने की घोषणा की गई।

प्रदेशसभा सचिवालय के सूचना अधिकारी निरोज ढकाल के अनुसार अगली बैठक १६ जेठ को दोपहर १ बजे होगी।

मंगलवार को सभामुख विष्ट ने संशोधन के लिए समय दिए बिना नीति तथा कार्यक्रम को ‘सर्वसम्मति’ से पारित घोषित किया, जिसके बाद प्रतिपक्षी दल ने विरोध जताया। उनका दावा है कि बिना समर्थन के सर्वसम्मति कहना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।

बुधवार बैठक शुरू होते ही प्रतिपक्षी दल के नेता इन्द्रबहादुर आङ्बो ने कहा कि संसद की स्थापित मान्यता को तोड़कर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। उन्होंने पूछा, ‘जो प्रतिपक्षी मानने को तैयार नहीं, उसका कार्यक्रम सर्वसम्मत कैसे हो सकता है?’ उन्होंने आगे कहा, ‘जब तक इसे बहुमत से पारित घोषित नहीं किया जाता, सदन नहीं चल सकता।’

सभामुख ने प्रतिपक्षीय अवरोध के बावजूद कार्यसूची आगे बढ़ाने की कोशिश की तो सदन में तनाव पैदा हो गया। जब सभामुख ने जसपा सांसद निर्मला तावा लिम्बू को बोलने का अवसर दिया, तब आक्रोशित पूर्व मुख्यमंत्री और नेकपा सांसद राजेन्द्र राई रोस्टरम की ओर दौड़ पड़ے।

उन्होंने रोस्टरम पर पहुंचकर माइक्रोफोन छीनने का प्रयास किया, जिसे मर्यादापालकों ने रोक दिया। इस दौरान सदन में कुछ तनाव उत्पन्न हुआ। विवाद के बीच सभामुख विष्ट ने कहा कि नियमावली के अनुसार ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। उन्होंने बताया कि किसी ने संशोधन का प्रस्ताव दायर नहीं किया और ‘नहीं’ कहने वाला भी नहीं आया, इसलिए परंपरा के अनुसार इसे सर्वसम्मति माना गया। नीति तथा कार्यक्रम पारित हो जाने के बाद इसे वापस लेने की प्रक्रिया नहीं है।

‘बहुमत’ दावा का मूल बिंदु

पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रतिपक्षी सांसद राजेन्द्र राई ने कहा कि नीति तथा कार्यक्रम पारित करते समय सभामुख पर सत्तापक्ष का प्रभाव था।

उनका कहना है कि सभामुख ने विधि और संसदीय प्रचलन की उपेक्षा करते हुए काम किया।

‘सभामुख की मंशा से ज्यादा यह अज्ञानता या सत्तापक्ष के दबाव के कारण है कि वे विधि का उल्लंघन कर रहे हैं,’ उन्होंने कहा, ‘कल संशोधन के लिए समय भी नहीं दिया गया और आज विरोध के बावजूद प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई।’

सभामुख द्वारा जबरदस्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने पर उन्होंने विरोध जताया। ‘हमारा इरादा रोस्टरम घेरने का था। बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला था, अगर मिलता तो बोलना और घेरना दोनों काम साथ-साथ कर लेते,’ उन्होंने कहा, ‘मैं रोस्टरम घेरने आया था।’

प्रतिपक्षी का कहना है कि सदन से पारित नीति तथा कार्यक्रम को ‘सर्वसम्मति’ नहीं बल्कि बहुमत की प्रक्रिया से पारित बताना चाहिए। ‘हमने पारित करने की प्रक्रिया के दौरान भी विरोध किया था। विरोध के बावजूद सभामुख द्वारा सर्वसम्मति कहना गलत है,’ उन्होंने कहा, ‘हमारा आग्रह है कि इसे सर्वसम्मति न कहकर ‘बहुमत’ से पारित बताया जाए।’