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लेखक: space4knews

ऊर्जा मन्त्रालय और नेपाल उद्योग परिसंघ के बीच विद्युत् खपत रणनीति निर्माण को लेकर चर्चा

ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाइ मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ और नेपाल उद्योग परिसंघ के बीच ऊर्जा क्षेत्र के विकास और उन्नयन के लिए सहयोग को लेकर बातचीत हुई है। मंत्री श्रेष्ठ ने बताया कि सरकार विद्युत् निर्यात और आंतरिक खपत बढ़ाने की प्रक्रिया में लगा हुआ है और निजी क्षेत्र से सुझावों की उम्मीद कर रहा है। परिसंघ के अध्यक्ष वीरेन्द्रराज पाण्डे ने विद्युत् खपत बढ़ाने के लिए नीति बनाने और निजी क्षेत्र को आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय विद्युत् व्यापार की अनुमति देने का सुझाव दिया है।

सोमवार, १ वैशाख, काठमांडू में हुई इस चर्चा में मंत्री श्रेष्ठ ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सरकार निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विद्युत् निर्यात के साथ-साथ आंतरिक खपत को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर भी सरकार कार्य कर रही है। जलाशय और नवीकरणीय ऊर्जा के साथ विद्युत् खपत बढ़ाने की रणनीति को सरकार उच्च प्राथमिकता दे रही है। ऊर्जा क्षेत्र के माध्यम से देश के कुल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र से स्पष्ट सुझावों की अपेक्षा है।

नेपाल उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष वीरेन्द्रराज पाण्डे ने विद्युत् खपत बढ़ाने के लिए नीति अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि उद्योगों को आवश्यक ऊर्जा उत्पादन प्रदान कर ‘ह्विलिंग चार्ज’ के माध्यम से प्रसारण करने की नीति लागू की जानी चाहिए। उन्होंने निजी क्षेत्र को आंतरिक एवं अंतरराष्ट्रीय विद्युत् व्यापार की अनुमति देने का भी सुझाव दिया। अध्यक्ष पाण्डे ने संघीय सरकार की स्वीकृति के बाद सर्वे पूरी हो चुके और विद्युत् खरीद समझौता होना शेष सभी परियोजनाओं के साथ तत्काल विद्युत् खरीद समझौतों (पीपीए) पर हस्ताक्षर करने, विद्युत् खपत बढ़ाने वाली नीति बनाने, तथा जीवाश्म ईंधन आधारित उद्योगों को विद्युत् आधारित उपकरणों से प्रतिस्थापित करने के लिए प्रोत्साहन देने का अनुरोध किया। उन्होंने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भृकुटीमण्डपबाट ११ करोड उठाउन नसकेपछि तातेको समाज कल्याण

भृकुटीमण्डप की भूमि से 11 करोड़ रुपये किराया वसूली में असफलता से समाज कल्याण में गर्माया माहौल

समाचार सारांश

  • समाज कल्याण परिषद ने भृकुटीमण्डप स्थित भूमि पर किराया नहीं चुकाने वाले संघ-संस्थाओं और व्यवसायी दुकानों पर सोमवार ताला लगा दिया।
  • परिषद ने 10 करोड़ 54 लाख रुपये किराया न चुकाने वाले संस्थाओं और व्यवसायियों के नाम और राशि सार्वजनिक की।
  • काठमाडौं उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय पर सबसे अधिक 1 करोड़ 76 लाख रुपये किराया बाकी है, परिषद ने बताया।

30 चैत्र, काठमांडू। समाज कल्याण परिषद के भृकुटीमण्डप स्थित जमीन पर वर्षों से किराया न चुकाने वाले संघ-संस्था, निजी व्यवसायी की दुकानें एवं मीडिया कार्यालयों पर सोमवार को ताला लगा दिया गया।

परिषद ने किराया अनुबंध के तहत इस वर्ष के अंत तक (आज तक) बकाया किराया न देने वाले संस्थाओं और व्यवसायियों के नाम और बकाया राशि सार्वजनिक की है।

परिषद के सदस्य सचिव सरोजकुमार शर्मा के अनुसार सामाजिक संस्था, खाद्य एवं जूता दुकानें, मीडिया कार्यालय, छात्र संगठन आदि ने 10 करोड़ 54 लाख रुपये का किराया अभी तक नहीं दिया है। इससे पहले भी कई बार पत्राचार कर सूचित किया गया, बावजूद किराया भुगतान में अड़चन की जा रही है।

किराया की राशि जमा करने हेतु बार-बार दबाव बनाने पर भी वे अड़ियल बने रहे, इसलिए सोमवार को ताला लगाना पड़ा, परिषद ने स्पष्ट किया है।

21 चैत्र २०७८ को 35 दिन की मोहलत दी गई थी, इसके बाद माघ २०७८ में पत्राचार और फागुन २०७८ में 15 दिन की अतिरिक्त अवधि मिली, लेकिन इन सभी का उल्लंघन किया गया, इसी कारण ताला लगाना पड़ा, सरकार की ओर से जानकारी दी गई है।

परिषद ने 2054 साल से किराया न चुकाने वालों की सूची सार्वजनिक की है। सूची के अनुसार हरि अमात्य के नाम वाले 43 नंबर स्टॉल ने 2054 सावन से किराया नहीं चुकाया है। ऋषि धमला अध्यक्षता वाले रिपोर्टस क्लब का परिषद के प्रति 73 लाख 40 हजार 901 रुपये बकाया है।

सदस्य सचिव शर्मा के अनुसार 56 स्टालों ने किराया नहीं दिया है। इनमें से 36 स्टालों की गैरकानूनी रूप से अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरण की स्थिति में और समस्याएँ पाई गई हैं।

सोमवार को ताला लगाने गई परिषद के कर्मचारियों और कुछ व्यवसायियों के बीच विवाद भी हुआ। व्यवसायियों ने कहा कि दुकान की स्वामित्व परिवर्तन की जानकारी नहीं दी गई, और परिषद ने पुनः अनुबंध नहीं किया, जिससे किराया वसूली में समस्या आयी।

ताला लगाने वाली टीम से व्यवसायी ने शिकायत की, “दुकान की स्वामित्व परिवर्तन का विवरण अपडेट क्यों नहीं किया गया?” परिषद ने बताया कि इस समूह से 2 करोड़ 74 लाख रुपये किराया वसूली बाकी है।

भृकुटीमण्डप परिसर में 214 रोपनी जमीन में भवन, स्टाल, बूथ संचालित हैं। परिषद ने तंबू के लिए प्रति वर्ग फिट 86 रुपये और पक्के भवनों के लिए प्रति वर्ग फिट 96 रुपये किराया निर्धारित किया है।

सबसे अधिक किराया वसूलने वाले

परिषद ने बताया कि सबसे अधिक किराया न देने वाला संस्था काठमाडौं उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय है। इसका संचालनरत 68 नंबर स्टाल का 1 करोड़ 76 लाख 70 हजार 281 रुपये किराया अभी तक बकाया है। साथ ही 34 नंबर स्टाल का भी 1 करोड़ 13 लाख 53 हजार 95 रुपये किराया बाकी है।

उपभोक्ता मञ्च नेपाल का 45 लाख 57 हजार 907 रुपये और 1 तथा 2 नंबर स्टाल सामाजिक संघसंस्थाओं से 2054 माघ 2 से किराया लिया जाना था, जिसकी अवधि 2057 माघ में खत्म हो गई थी। प्रयासों के बावजूद किराया वसूली नहीं हो सकी है।

लोकतांत्रिक शहीद और घायलों का समाज 14 लाख 61 हजार 370 रुपये किराया देलिया बाकी है, पर पांच बार पत्राचार के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। यह संगठन भी परिषद की अनुमति के बिना खाद्य दुकान किराए पर दे चुका है।

राष्ट्रीय अपांग महासंघ का 1 करोड़ 16 लाख 32 हजार 27 रुपये और बालबालिका सम्बन्धी गैरसरकारी संस्था महासंघ नेपाल का 89 लाख 90 हजार 746 रुपये किराया बाकी है।

समाज कल्याण परिषद के भवन में किराया न देने वालों में नेकपा एमाले के छात्र संगठन अनेरास्ववियु भी शामिल है। उन्होंने 60 और 61 नंबर स्टॉल किराए पर लेकर २०७७ से अब तक किराया नहीं दिया है, परिषद ने बताया।

नेपाल राष्ट्रिय मानवअधिकार संरक्षण मञ्च का 21 लाख 85 हजार 957 रुपये एवं नेपाल पत्रकार महासंघ काठमांडू शाखा का 2062 माघ 19 से 33 लाख 7 हजार 421 रुपये किराया बकाया है। पांच बार पत्राचार और सार्वजनिक सूचना के बावजूद महासंघ अड़ियल बना रहा।

सेन्थेसिस एक्जीबिशन एंड इवेंट्स का 10 लाख, मंकला श्रेष्ठ जूता दुकान का 7 लाख 46 हजार 23, टीकाराम सितौला जूता दुकान का 11 लाख 80 हजार 625, कृष्णप्रसाद लामिछाने जूता दुकान का 8 लाख 98 हजार 163, यशोदाकुमारी सेठी खाद्य दुकान का 10 लाख 59 हजार 156, हरि अमात्य खाद्य दुकान का 5 लाख 15 हजार 664 किराया बाकी है।

नारायणकुमारी निरौला खाद्य दुकान का 2 लाख 73 हजार 13, बुद्धिराम भुसाल खाद्य दुकान का 6 लाख 87 हजार 734, मंजु तिमिल्सिना खाद्य दुकान का 9 लाख 7 हजार 710, चित्रबहादुर पंडित क्षेत्री खाद्य दुकान का 2 लाख 19 हजार 567 और नेपाल फोटो पत्रकार महासंघ का 20 लाख 68 हजार किराया बकाया होने पर आज ताला लगाया गया।

समाज कल्याण परिषद के सदस्य सचिव शर्मा ने कहा कि पूर्व में राजनीतिक दलों के संरक्षण के कारण किराया नहीं लिया गया। उन्होंने कहा, “राज्य को सहारा नहीं दिया गया, राजनीतिक संरक्षण भी रहा होगा। ताला लगाने के बाद एक सप्ताह का समय दिया है किराया चुकाने के लिए।” यदि उस अवधि में नहीं चुकाया गया तो राज्य अगले कदम उठाएगा।

पुस्तकालय में ताला लगाने के दौरान…

ताला लगाने के दौरान काठमाडौं उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय का माहौल अन्य जगहों से काफी अलग रहा। परिषद के सदस्य सचिव शर्मा के नेतृत्व में दलबल सहित पुस्तकालय में प्रवेश किया गया।

सुरक्षाकर्मियों सहित बड़ी संख्या में पुस्तकालय कक्ष में प्रवेश करने पर अध्ययनरत पाठक भयभीत और आक्रोशित हुए। विद्यालय एवं उच्च शिक्षा के लगभग दो दर्जन विद्यार्थी थे। शांतिपूर्ण माहौल में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बड़ी टीम देख कर भयभीत महसूस हुआ और पुस्तकालय में हंगामा शुरू हो गया।

किराया वसूली हेतु सरकार के गुंडागर्दी शैली अपनाने पर कुछ पाठकों ने नाराजगी जताई। एक छात्रा ने कहा, “पढ़ाई कर रहे थे, फिर आप लोग यहाँ क्यों आ गए? गुंडागर्दी शैली में। कल परीक्षा है, पढ़ाई के समय हमें उठा कर किराया की समस्या हल होती है? क्या पाठकों को ऐसे यातना दी जाएगी? व्यवस्थापक से बात होनी चाहिए। किराया दूसरी बात है, पढ़ाई पहले है।”

पाठकों के आक्रोशित होने पर परिषद के कर्मचारी पुस्तकालय से बाहर आ गए। परिषद के सदस्य सचिव सिंह पुस्तकालय व्यवस्थापक लीला भट्टराई से किराया देने का आग्रह कर रहे थे। कुछ देर बातचीत भी हुई।

सदस्य सचिव सिंह ने व्यवस्थापक भट्टराई को चेतावनी देते हुए कहा, “मुझे मिलने न आना लेकिन मंत्री और प्रधानमंत्री कहाँ गए? ऐसा न करें।” विद्यार्थी और अन्य पाठक अध्ययनरत थे, इसलिये पाँच बजे के बाद पुस्तकालय बन्द करने की सूचना दी गई और टीम बाहर निकल गई।

माघ 8 को परिषद ने काठमाडौं उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय को बकाया राशि जमा करने के लिए पत्राचार किया था। पुस्तकालय के व्यवस्थापक भट्टराई ने 75 प्रतिशत छूट दर पर किराया अनुबंध बताया और पूर्व अनुबंध के अनुसार किराया चुका रहे हैं। अब अचानक छूट से परे किराया सार्वजनिक किया गया है, उन्होंने बताया।

तस्वीरें : आर्यन धिमाल

ज्ञानेन्द्र शाह का नया वर्ष अपील: सभी पक्षों की मांगों को समेटते संवैधानिक समाधान खोजने का अनुरोध

पूर्वराजा ज्ञानेन्द्र शाह ने नए वर्ष २०८३ के अवसर पर सभी पक्षों से संवैधानिक समाधान खोजने में देरी न करने तथा दृढ़ संकल्प बनने का आवाहन किया है। उन्होंने कहा है कि निषेध, विभाजन, बंद और विद्रोह से देश कमजोर होगा और राजनीति में परस्पर राग, द्वेष और प्रतिशोध की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पूर्वराजा ने बताया कि राजनीति और शासन प्रणाली में केवल औपचारिक परिवर्तन हुए हैं और देश एक प्रयोगशाला की तरह बना हुआ है। ३० चैत्र, काठमांडू। पूर्वराजा ज्ञानेन्द्र शाह ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि संवैधानिक समाधान खोजने में विलंब न करें। उन्होंने सोमवार को नए वर्ष २०८३ की शुभकामनाओं के संदेश में स्पष्ट किया कि निषेध, राग और विभाजन जैसी राजनीति देश के लिए हानिकारक है। उन्हों ने कहा, “निषेध, फुट, बंद और विद्रोह से हम कमजोर होते हैं। परस्पर राग, द्वेष, प्रतिशोध राजनीति में नहीं होना चाहिए। जनचाहना को ध्यान में रखते हुए देश की भलाई को केंद्र में रखकर कदम आगे बढ़ाने में विलंब न करें। संवाद, सहमति और सहयोग से सभी पक्षों की मांगों को समाहित करते हुए संवैधानिक समाधान खोजने के लिए दृढ़ संकल्प बनाएं।” उन्होंने कहा कि राजनीति, राज्य व्यवस्था और प्रशासन प्रणाली में भले ही कई बदलाव हुए हों, लेकिन वे केवल औपचारिक परिवर्तन थे। देश को प्रयोगशाला की तरह देखे जाने और राष्ट्र निर्माण में पिछड़ने की बात भी उन्होंने कही। “राजनीति, राज्य व्यवस्था और प्रशासन प्रणाली में हमने कई परिवर्तन देखें, लेकिन वे केवल औपचारिक थे,” पूर्वराजा शाह ने कहा, “दलदल में उलझ कर हम बहुत पीछे रह गए हैं। लेकिन राष्ट्र की समृद्धि में काफी पिछड़ गए हैं। हमेशा प्रयोग, अभ्यास और विकल्प की तलाश में लगे रहे। नतीजतन हमारा देश केवल एक प्रयोगशाला बन गया।” नए वर्ष की पूर्वसंध्या पर ज्ञानेन्द्र शाह ने अपने संबोधन में कहा – “प्रिय नेपाली दाइबहिन तथा दाजुभाइ, हम नए वर्ष २०८३ में प्रवेश कर चुके हैं। इस पवित्र अवसर पर देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले सभी नेपाली भाइयों-बहनों को सुख और शांति की शुभकामनाएं देता हूँ। समय के प्रवाह के साथ देश और समाज को प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। पिछले दोषों और कमियों को सुधारते हुए बाधाओं को हटाकर हम उच्चतम लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए तभी नववर्ष का सार्थक अर्थ होगा।” उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विकास की दृष्टि से देश लगातार गिर रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति, राज्य व्यवस्था और शासन प्रशासन के क्षेत्र में काफी बदलाव हुए हैं, लेकिन केवल औपचारिक परिवर्तन ही हुए हैं। दलदल की स्थिति के बीच देश की समृद्धि और विकास में पीछे रहना निराशाजनक है। हमेशा प्रयोग और बदलाव की खोज जारी रही लेकिन असली स्थिरता नहीं आई। विधि, व्यवस्था या व्यक्तियों का परिवर्तन ही समस्या का समाधान नहीं है, यह बात हमें अनुभव से सीखनी होगी। उन्होंने युवा पीढ़ी की राजनीति और प्रशासन में बढ़ती भागीदारी को उत्साहजनक बताया और कहा कि शिक्षित और समर्पित युवा आने वाले समय में राष्ट्र के लिए फायदेमंद साबित होंगे। उन्होंने देश के समक्ष बहुमुखी समस्याओं को बताते हुए कहा कि आर्थिक स्थिति को सुधारने, पड़ोसी और मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने तथा आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता है। नए वर्ष में जीवन सुरक्षा, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और हक-हक़ूक की सुनिश्चितता हेतु सुरक्षा निकायों को चुस्त-दुरुस्त बनाने की रूपरेखा बनानी होगी। वर्तमान अस्थिर और अशांत विश्व में हमें अपनी सुरक्षा और उत्पादन की मजबूती पर गहरा ध्यान देना जरूरी है, ताकि आम नागरिक किसी प्रकार की शारीरिक, मानसिक या भौतिक कठिनाई न झेले। सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर देश को मजबूत बनाना होगा। देश की समृद्धि उसके संसाधनों के सही उपयोग और संस्कृति की रक्षा में निहित है, इसलिए हमें इन मूलभूत कर्तव्यों को बखूबी निभाना होगा। पूर्वराजा शाह ने फिर पुनः कहा कि निषेध, विभाजन, बंद और विद्रोह से देश कमजोर होता है, इसलिए ऐसे कार्य राजनीति में जगह नहीं होने चाहिए। उन्होंने बताया कि संवाद, सहमति और सहयोग से सभी पक्षों की मांगों को संवैधानिक समाधान में जोड़ते हुए देश के हित में कदम बढ़ाने का समय है। उन्होंने कामना की कि नेपाल शांति और उन्नति का देश बने, जो अपनी सांस्कृतिक पहचान और गौरव से विकसित हो। सभी नेपाली न्याय, शांति और खुशहाली प्राप्त करें, यही हमारी सर्वोच्च आकांक्षा है। श्री पशुपतिनाथ सभी का कल्याण करें। जय नेपाल।

प्रदीप अधिकारीको अनुसन्धान राडारमा देखिएका नवीनराज बस्नेत स-परिवार जर्मनी गए

प्रदीप अधिकारी से जुड़े नवीनराज बस्नेत परिवार सहित जर्मनी की उड़ान पर

समाचार संक्षेप जांच के बाद। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के निलंबित महानिदेशक प्रदीप अधिकारी से जुड़े ठेकेदार नवीनराज बस्नेत २७ चैत्र को परिवार सहित जर्मनी के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार अधिकारी के खिलाफ संपत्ति शुद्धिकरण और संगठित अपराध जैसी जांच कर रहा है। जांच में यह सामने आया है कि अधिकारी को धमकी देने, तांत्रिक विधि का उपयोग करने और उग्रवादी संगठन स्थापित करने का प्रयास किया गया। ३० चैत्र, काठमांडू। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (क्यान) के निलंबित महानिदेशक प्रदीप अधिकारी से सीधे जुड़े ठेकेदार नवीनराज बस्नेत अपने परिवार के साथ विदेश चले गए हैं। प्रदीप अधिकारी से संबंधित विषयों पर खबर प्रकाशित होने के तीन दिन बाद बस्नेत विदेश गए हैं। दोलखा के ३७ वर्षीय बस्नेत वर्तमान में भक्तपुर के एक आवासीय क्षेत्र में रहते थे और उन्होंने २७ चैत्र शुक्रवार को त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल से प्रस्थान किया। उच्च सूत्रों के अनुसार बस्नेत कतर एयरवेज की क्यूआर ६४७ उड़ान के माध्यम से जर्मनी गए हैं। वह अपनी पत्नी एलिसा गौतम के साथ विदेश गए हैं। कतर एयरवेज की यात्री सूची में बस्नेत का नाम १३वें स्थान पर दर्ज है। बस्नेत के संलिप्तता में अधिकारी ने सामसुम मामले को सुलझाने के लिए सत्ताकेंद्रों के माध्यम से धांधली की, तांत्रिक और अंडरवर्ल्ड डॉन के नाम लेकर धमकी दी; इस विषय पर २४ चैत्र को खबर प्रकाशित हुई थी। खबर के प्रकाशन के बाद बस्नेत ने आरोपों का खंडन किया था, लेकिन तीन दिन बाद परिवार सहित विदेश चले गए। उनके विदेश जाने से आरोपों की पुष्टि हुई है, जांचकर्ताओं का कहना है। भ्रष्टाचार के आरोप में अख्तियार ने १७ मंसिर को अधिकारी को गिरफ्तार कर मामला दायर किया था। भक्तपुर के नलिंचोक हेलिपोर्ट निर्माण में अनियमितता के मामले में अधिकारी को २१ मंसिर को दल्लील बाजार कारागार भेजा गया था। नलिंचोक हेलिपोर्ट सम्बन्धी मामले के साथ ही पोखरा अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल में भ्रष्टाचार के दो मामले अधिकारी के खिलाफ दर्ज हैं। नलिंचोक हेलिपोर्ट और पोखरा विमानस्थल के भ्रष्टाचार मामलों में जेल में बंद अधिकारी के खिलाफ अब भी संपत्ति शुद्धिकरण, संगठित अपराध से जुड़े विषयों की जांच चल रही है। इसी प्रक्रिया में नवीनराज बस्नेत की भागीदारी भी पाई गई है। वह अधिकारी के करीबी व्यक्ति हैं और अख्तियार को मनाने में सक्रिय हैं। बस्नेत वे व्यक्ति हैं जिन्होंने तीन साल पहले भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थल के अंदर टैक्सी वे और एप्रोन का ठेका प्राप्त किया था। यह ठेका आशिष-क्षमादेवी-बुद्ध हिमाली जेवी समूह को मिला था। उस समय बस्नेत क्षमादेवी समूह से जुड़े थे। अधिकारी और बस्नेत के व्हाट्सएप चैट में अख्तियार को मनाने की स्पष्ट बातचीत पाई गई है। बस्नेत ने राजेश बज्राचार्य के माध्यम से अधिकारी को भ्रष्टाचार मामले को समाप्त करने का आश्वासन दिया था। प्रदीप अधिकारी ने २३ नवंबर २०२५ को रात ११:०७ बजे व्हाट्सएप पर नवीन बस्नेत को लिखा, ‘राजेश दाइ से बात हो गई।’ बस्नेत ने ११:१० बजे जवाब दिया, ‘कर रहा हूँ’ तथा अगले संदेश में कहा, ‘बासँग भी मिलूंगा। दाइ, मैं आपके साथ हूँ।’ २५ नवंबर की रात ११:१० बजे बस्नेत ने अधिकारी को संदेश भेजा, ‘धीरे-धीरे, दाइ, टेंशन मत लेना, करूंगा।’ अख्तियार को मनाने में नाकामयाब होने के बाद अधिकारी पर तांत्रिक प्रयोग करने, उग्रवादी संगठन खोलकर धमकी देने और अख्तियार प्रमुख प्रेम राई को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने का प्रयास भी सामने आया है। उग्रवादी संगठन का लैटर पैड भी बस्नेत ने व्हाट्सएप के जरिए अधिकारी को भेजा था। डिजिटल फॉरेंसिक लैब (डीएफएल) की रिपोर्ट के अनुसार यह लैटर पैड बस्नेत के मोबाइल नंबर से प्रसारित हुआ। उस पत्र में प्रकाश पाठक ने अख्तियार प्रमुख समेत १० लोगों को मारने की धमकी दी थी। धमकी वीडियो के माध्यम से दी गई थी और पाठक ने इसके लिए २ करोड़ रुपए सुपारी हासिल की थी। तांत्रिक विधि से आरोप मुक्त होने के लिए प्रदीप अधिकारी ने भारत के आसाम राज्य के गुवाहाटी में कामाख्या देवी मंदिर के तांत्रिक बाबा, सरया किन्नेरा (जय जगदम्बे) का सहयोग लिया है। अधिकारी ने अख्तियार प्रमुख राई की तस्वीर भेजकर तांत्रिक क्रियाकलाप कराए और जय जगदम्बे बाबा ने मंत्र पढ़कर राई की मूर्ति नष्ट करने का वीडियो भी अधिकारी को भेजा। वर्तमान में फरार बस्नेत उस व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं जो २०७७ वैशाख १० को तत्कालीन समाजवादी पार्टी के टूटने के दौरान महोत्तरी में पार्टी के सांसद एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र यादव को काठमांडू लाने वाले अपहरण कांड में भी शामिल थे। पूर्व में बस्नेत का नाम गुंडागर्दी से भी जोड़ा जाता रहा है।

विद्यालयों को छात्रवृत्ति विवरण सार्वजनिक करने के लिए शिक्षा मंत्रालय का निर्देश

समाचार सारांश: शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नियमों के अनुसार छात्रवृत्ति प्रदान न करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए स्थानीय निकायों से अनुरोध किया है। मंत्रालय ने निजी और सार्वजनिक विद्यालयों से कहा है कि वे छात्रवृत्ति के १० प्रतिशत आवंटन का विवरण आईएमआईएस में तत्काल अपडेट करें। विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों की जानकारी माता-पिता के लिए आसानी से उपलब्ध कराने हेतु सार्वजनिक करें और इसे नियमित रूप से अपडेट करें।

३० चैत्र, काठमांडू। शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नियम के अनुरूप छात्रवृत्ति न देने वाले विद्यालयों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठाने हेतु सभी स्थानीय निकायों से समन्वय और सहयोग करने का अनुरोध किया है।

आज मंत्रालय ने संघीय मामले तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय को पत्र लिखकर शिक्षा अधिनियम और नियमावली के अनुसार निजी तथा सार्वजनिक विद्यालयों द्वारा छात्र संख्या के आधार पर निर्धारित १० प्रतिशत छात्रवृत्ति उपलब्ध कराए जाने की जानकारी आईएमआईएस में अपडेट की गई है या नहीं, इस पर निगरानी एवं सहायता करने के लिए स्थानीय निकायों से आग्रह किया है।

अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा संबंधित अधिनियम, २०७५ के तहत निजी निवेशित विद्यालयों तथा सार्वजनिक शैक्षिक गुठी के अंतर्गत संचालित विद्यालयों को छात्र संख्या के अनुपात में निशुल्क शिक्षा और स्थान आरक्षण प्रदान करना आवश्यक है। शिक्षा नियमावली, २०५९ के अनुसार संस्थागत विद्यालयों को कुल छात्र संख्या का कम से कम १० प्रतिशत गरीब, विकलांग, महिला, दलित एवं आदिवासी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देनी होती है। इस प्रावधान के तहत सभी विद्यालयों को निर्धारित प्रतिशत के अनुसार छात्रवृत्ति प्रदान करना अनिवार्य है।

मंत्रालय ने छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों का विवरण विद्यालयों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत संग्रह करने और आईएमआईएस में शीघ्र अपडेट करने का अनुरोध किया है। साथ ही, छात्रवृत्ति प्राप्त छात्रों का विवरण अभिभावकों द्वारा आसानी से देखे जाने के लिए विद्यालयों को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है। यदि कोई विद्यालय इस जानकारी को अपडेट नहीं करता है तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई कर अपडेट करवाने का प्रावधान भी पत्र में उल्लिखित है।

बुटवल-गोरुसिङ्गे सडकका ठेकेदार भन्छन्- स्वदेशमा माटो पाइएन, विदेशबाट अलकत्रा आएन

बुटवल-गोरुसिङ्गे सडक ठेकेदारों की शिकायत: देश में मिट्टी की कमी के कारण विदेश से फंसे हुए सामग्री उपलब्ध नहीं

समाचार सारांश: बुटवल–गोरुसिङ्गे सड़क स्तरोन्नति में मिट्टी, बजरी और नदीजन्य पदार्थों की कमी से निर्माण कार्य बाधित हुआ है। लट १ के लिए आवश्यक 8 लाख 79 हजार घनमीटर मिट्टी में से अब तक केवल 69 हजार ही उपलब्ध हुई है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण बिटुमिन आयात प्रभावित होने से कालोपत्रे कार्यों में जोखिम देखा जा रहा है। 30 चैत, बुटवल। बुटवल–गोरुसिङ्गे सड़क स्तरोन्नति के निर्माण में नदीजन्य सामग्री की कमी के कारण काम प्रभावित हुआ है। सड़क विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी फिलिंग आवश्यक है। लेकिन कपिलवस्तु के कोठी नदी से बुटवल के पाखापानी तक फैले लट १ क्षेत्र में मिट्टी, बजरी और नदीजन्य सामग्री की कमी के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ा है। आयोजन ने सभी प्रक्रियागत कार्य पूरे कर लिए हैं, फिर भी कई स्थानीय तहों ने वन क्षेत्र होने का हवाला देकर मिट्टी निकालने पर रोक लगा दी है, जिससे निर्माण कंपनियों को काम रोक देना पड़ा है, ठेकेदारों ने यह बताया। निकासी स्वीकृत और कर दाखिल किए गए क्षेत्रों में भी वन क्षेत्र होने का बहाना बनाते हुए नदीजन्य पदार्थ निकालने नहीं देने से रोजाना सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो रहे हैं और उपकरण चलाने में अक्षम हैं, निर्माण कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट मैनेजर गौरीशंकर महतो ने बताया।

आयोजना के आंकड़ों के अनुसार लट 1 के लिए लगभग 8 लाख 79 हजार 169 घनमीटर मिट्टी तथा बजरी और लगभग 8 लाख 71 हजार 46 घनमीटर नदीजन्य सामग्री आवश्यक है। लेकिन अब तक मिट्टी और बजरी की दिशा में केवल 69 हजार 277 घनमीटर ही उपलब्ध हुई है। नदीजन्य पदार्थ की 62 हजार 597 घनमीटर प्रत्यक्ष गठित की गई है, जबकि अन्य स्रोतों से 60 हजार 410 घनमीटर जुड़ने के बाद कुल 1 लाख 23 हजार 7 घनमीटर ही उपलब्ध हुई है, महतो ने बताया। अभी भी करीब 8 लाख 9 हजार 891 घनमीटर मिट्टी और बजरी तथा 7 लाख 48 हजार 38 घनमीटर नदीजन्य सामग्री की कमी बनी हुई है।

बुटवल उपमहानगरपालिक ने नदीजन्य पदार्थों की निकासी में सबसे अधिक देरी और लापरवाही की है, ठेकेदारों ने शिकायत की। महतो ने कहा, ‘विदेश से आयात की गई सामग्री आवश्यक कार्यों में प्रभाव नहीं डालती, लेकिन देश में उपलब्ध मिट्टी, बजरी और नदीजन्य सामग्री की कमी से काम रुकना विडंबना है।’ लट 1 के लगभग 25 किलोमीटर हिस्से के लिए लगभग 20 लाख घनमीटर मिट्टी आवश्यक होती है, लेकिन अब तक केवल 1 लाख 23 हजार 7 घनमीटर ही उपलब्ध हुई है, इसलिए काम सुचारु गति से नहीं हो पा रहा है, आयोजन की प्रमुख इंजीनियर कुशलता न्यौपाने ने बताया।

जबकि लट 2 क्षेत्र में यह समस्या नहीं है जहां आवश्यक से अधिक सामग्री उपलब्ध हो चुकी है। ‘लट 1 में मिट्टी की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। पुल, कॉल्वर्ट और नाली निर्माण के अलावा मिट्टी फिलिंग का काम लगभग रुक सा गया है,’ उन्होंने कहा। ‘अभी भी 8 लाख 10 हजार घनमीटर मिट्टी तथा बजरी और 7 लाख 49 हजार घनमीटर नदीजन्य पदार्थ की जरूरत है, और स्थानीय तहों की देरी से निर्धारित समय में निर्माण संभव नहीं होगा।’

सड़क निर्माण के लिए विभिन्न स्थानीय तह और विभागों के बीच समझौते हो चुके हैं और राजस्व भी जमा किया गया है, फिर भी निकासी प्रक्रिया में अवरोध जारी है, जिसके लिए न्यौपाने ने चिंता जताई। ‘आगामी दो वर्षों में इस आयोजन को पूरा करने की योजना है, लेकिन अब तक केवल 23 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। आवश्यक सामग्री की कमी के कारण लक्ष्य के अनुसार प्रगति नहीं हो पाई है।’

सभामुख ने संसद् भवन निर्माण कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश दिए

सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने निर्धारित समय सीमा के भीतर संसद् भवन निर्माण कार्य पूरा करने के लिए सहरी विकास मंत्रालय के कर्मचारी और निर्माण कंपनी को निर्देश दिए हैं। २०७६ असोज १८ को दिन संसद् भवन निर्माण के लिए सात अरब ९४ करोड़ रुपये में समझौता हुआ था, और अब तक छह बार समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है। भवन का लगभग ९४ प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है और सहरी विकास मंत्रालय ने निर्माण कार्य आगामी जेठ ९ तक पूरा करने का निर्देश दिया है। ३० चैत्र, काठमांडू।

सभामुख डोलप्रसाद (डिपी) अर्याल ने संसद् भवन निर्माण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। सहरी विकास मंत्रालय के कर्मचारियों और निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ आज हुई बैठक में उन्होंने भवन निर्माण कार्य को समय से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में राष्ट्रियसभाका अध्यक्ष नारायणप्रसाद दाहाल, प्रतिनिधिसभाका उपसभामुख रूबीकुमारी ठाकुर और राष्ट्रियसभा उपाध्यक्ष लिलाकुमारी भण्डारी भी उपस्थित थे।

विसं २०७६ असोज १८ को दिन तुन्डी शेख जेभी के साथ संसद् भवन निर्माण के लिए सात अरब ९४ करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। शुरू में तीन वर्षों के भीतर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक छह बार समय बढ़ाया जा चुका है। नवीनतम समझौते के अनुसार निर्माण कार्य आगामी जेठ ९ तक पूरा करना अनिवार्य होगा। वर्तमान में भवन का लगभग ९४ प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है, ऐसा सहरी विकास मंत्रालय ने बताया है। भवन के इंटीरियर का ठेका केसी श्यामसुन्दर बानिया जेभी को २ अरब ३४ करोड़ रुपये में दिया गया है, जबकि छत का निर्माण कार्य चेनलिंक इंजीनियरिंग को ३ करोड़ ८० लाख रुपये में सौंपा गया है।

५० तस्वीर जसले सम्झाइरहनेछन् २०८२ – Online Khabar

५० तस्वीरों में यादगार वर्ष २०८२


३० चैत, काठमांडू। आज २०८२ साल का आखिरी दिन है। इस वर्ष नेपाली जनता ने कई उतार-चढ़ाव का सामना किया। बाढ़ और भूस्खलन से लेकर वर्षों से जमे पुराने राजनीतिक दलों के बहिर्गमन तक, २०८२ साल ने कई घटनाओं को देखा है।

विशेष रूप से भाद्र के तीसरे सप्ताह में हुए जेनजेड आंदोलन और उसके बाद की घटनाएँ इस वर्ष के केंद्र में रहीं। तत्कालीन केपी शर्मा ओली नेतृत्व वाली सरकार द्वारा सामाजिक मीडिया को बंद करने के फैसले के खिलाफ युवाओं ने सड़कों पर प्रदर्शन किया।

इन्हीं प्रदर्शनों के कारण ओली नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से हटना पड़ा। इसी क्रम में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ जिसने चुनाव कराए।

२०८२ के अंत में, पुराने राजनीतिक दलों के लिए इसे भूलने वाला वर्ष और नए दलों के लिए यादगार वर्ष माना गया।

पश्चिम एशिया में दिखे संघर्ष के प्रभाव ने नेपाली बाजार में महंगाई को इस वर्ष झेलने के लिए मजबूर किया।

राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेलकूद सहित विभिन्न क्षेत्रों में इस वर्ष को यादगार बनाने वाली ५० तस्वीरें प्रस्तुत हैं—

 

चोरी हुई ५० मोटरसाइकल और स्कूटर मालिकों को लौटाए गए

काठमाडौं उपत्यका के विभिन्न स्थानों से चोरी हुई ५० मोटरसाइकल और स्कूटर अपने मालिकों को वापस कर दिए गए हैं। काठमाडौं उपत्यका ट्राफिक पुलिस कार्यालय ने गत साउन से अब तक ३९४ वाहन मालिकों को वाहन सौंपा है। चोरी में संलिप्त ३६ व्यक्तियों को गिरफ्तार कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई हेतु पुलिस परिसर भेजा गया है।

काठमाडौं उपत्यका ट्राफिक पुलिस कार्यालय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रहरी उपरीक्षक नवराज अधिकारी ने ३३ मोटरसाइकल और १७ स्कूटर संबंधित मालिकों को आज हस्तान्तरित किए। ट्राफिक पुलिस ने विभिन्न स्थानों से बरामद वाहनों की जांच के दौरान कुछ वाहनों पर असली नंबर प्लेट और कुछ पर नकली नंबर प्लेट लगे होने की पुष्टि की। बरामदगी वाले स्थानों में भीमढुङ्गा, स्वयम्भू, नेपालटार, चमती, कपन, थली, बौद्ध, साँखु, नयाँबस्ती, गोकर्ण, माछापोखरी, महाराजगंज, सुकेधारा, पुल्चोक, साङ्ला, फस्कु, चापागाँउ, गठ्ठाघर, एयरपोर्ट, कमलबिनायक, मालिगाउँ, काँडाघारी, जनसेवा, जम्बुडाँडा, मण्डिकाटार और चुनदेवी शामिल हैं।

आज लौटाए गए ५० वाहनों के साथ, गत साउन से काठमाडौं उपत्यका ट्राफिक पुलिस ने कुल ३९४ वाहनों के मालिकों को वाहन सौंपे हैं। चोरी हुई २२ दोपहिया वाहनों सहित चोरी में शामिल ३६ आरोपियों को गिरफ्तार कर विभिन्न पुलिस परिसर एवं थाना में आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा गया है। चोरी और वाहन चोरी से बचाव के लिए ट्राफिक पुलिस ने वाहनों को सुरक्षित स्थान पर पार्क करने एवं हैंडल लॉक, डिस्क लॉक तथा सुरक्षा सिस्टम लगाने की सिफारिश की है।

प्रदीपले मुद्दा मिलाउन खोजेका थिए जेनजीको साथ, मिलाउछु भन्नेको हातमा दिए ५ लाख

प्रदीप ने मुद्दा सुलझाने के लिए जेनजी के साथ दोनों हाथों में ५ लाख रुपये दिए थे

समाचार सारांश

  • निलंबित क्यान महानिर्देशक प्रदीप अधिकारी ने भ्रष्टाचार के मामले को सुलझाने के लिए जेनजी के साथ संपर्क किया है।
  • अधिकारी ने जेनजी सुलझाने वाले व्यक्ति से बैठक और रकम का लेनदेन डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट में दर्ज पाया गया है।
  • अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार, संगठित अपराध तथा आपराधिक साजिश से जुड़ी जांच चल रही है।

३० चैत, काठमांडू। भ्रष्टाचार के आरोप में न्यायिक प्रक्रिया के लिए फिलहाल डिल्लीबजार कारागार में बंद नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (क्यान) के निलंबित महानिर्देशक प्रदीप अधिकारी ने मुद्दा सुलझाने के लिए अंतिम समय में जेनजी का भी साथ खोजा है।

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान कार्यालय ने भक्तपुर के नलिन्चोक में बने हेलिपोर्ट और पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में हुई भ्रष्टाचार की जांच अंतिम चरण में पहुंचा दी थी और मामले की दायर करने की प्रक्रिया शुरू करने वाला था। इससे बचने के लिए उन्होंने जेनजी नेताओं से संपर्क किया।

शुरुआती दिनों में भैरहवा में टैक्सी वे और एप्रोन के ठेका लेकर काम कर चुके अधिकारी ने अपने पुराने परिचित नवीनराज बस्नेत के जरिए अख्तियार में मामला सुलझाने की कोशिश की थी।

उस समय बस्नेत ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के निजी सचिव राजेश बज्राचार्य के माध्यम से अख्तियार प्रमुख प्रेमकुमार राई से मामले निपटाने का संवाद भी किया था, जो पहले ही सार्वजनिक हो चुका है।

लेकिन यह प्रयास विफल होने पर अधिकारी ने भारतीय तांत्रिक बाबा ४३ वर्षीय सरया किन्नेरा (जय जगद्ब्बे) का इस्तेमाल किया। उस तांत्रिक बाबा को अख्तियार प्रमुख की तस्वीर भेजकर तांत्रिक विधि से नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई गई थी।

जैसे-जैसे प्रयास असफल हुए, राई को हत्या की धमकी देकर इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया गया था, जिसके लिए फिलीपींस में रहने वाले अधिकारी के पूर्व साथी प्रकाश पाठक की मदद ली गई थी। धमकी देकर इस्तीफा दिलाने में सफलता मिलने के बाद १० करोड़ तक देने की बात कही गई और २ करोड़ की सुपारी भेजने का पता चला है।

लेकिन राई ने इस्तीफा नहीं दिया और मामला रुका नहीं, इसलिए अधिकारी ने जेनजी कार्यकर्ता की मदद भी मांगी।

अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल की डिजिटल फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एक व्यक्ति से जेनजी सुलझाने के लिए बातचीत की है।

अधिकारी ने एक जेनजी नेता का नाम लेते हुए कहा, “इनको क्या चाहिए मैं तैयार हूं।”

जवाब में कहा गया, “मैं मिलाता हूं” और अधिकारी ने उस जेनजी नेता से मिलने के लिए भी कहा।

जेनजी सुलझाने वाले ने कहा – “ओके।”

अधिकारी ने कहा, “थोड़ा जल्दी।”

जेनजी सुलझाने वाले ने जवाब दिया – “मैं सेट करता हूं।”

इसके बाद अधिकारी ने कहा – “मेरे बारे में बात करते हैं, ऐसे व्यक्ति चाहिए।”

मिलाने वाले ने कहा – “लंबी ड्राइव पर लेकर बात करूंगा, २ दिन में आपसे मिलूंगा।”

फिर अधिकारी ने दो जेनजी का नाम लेते हुए कहा – “उनके जरिए उसे काम करवाऊंगा।” (यहां प्रदीप अधिकारी द्वारा बताए गए जेनजी नेताओं के नाम नहीं खोले गए हैं क्योंकि जांच जारी है और सबूत नहीं मिले हैं।)

अधिकारी ने पूछा – “ऑफिस में ही लेकर आओ।”

जेनजी सुलझाने वाले ने कहा – “परसों लाऊंगा।”

इस संवाद की सत्यता पुष्टि होना बाकी है, लेकिन एक जेनजी नेता अधिकारी के कार्यालय पहुंचते भी देखे गए हैं।

अधिकारी ने दो जेनजी नेताओं के नाम लेकर पूछा – “कौन पावरफुल है?”

जवाब में उस व्यक्ति ने एक नाम लिया और अधिकारी ने फिर पूछा – “कौन-कौन हैं, लड़कों को लेकर सड़क पर ले आएंगे?”

जेनजी सुलझाने वाला व्यक्ति एक और नाम भी लेकर आया है।

ऐसे ही, क्यान से जेनजी सुलझाने वाले ने ५ लाख नगद भी लिया।

क्यान की कर्मचारी चाँदमाला श्रेष्ठ ने वह रकम नगद लेकर भेजी थी।

रकम लेने कार्यालय पहुंचने पर चाँदमाला श्रेष्ठ ने प्रदीप को मेसेज किया – “…को देने वाला? पाँच तो दिया, पर छह की उम्मीद थी।”

अधिकारी ने जवाब दिया – “ओके।”

चाँदमाल ने पूछा – “एक मैं दूं?”

अधिकारी ने कहा – “इतना तो है! अब इतनी महंगाई हो गई है। सर को दिक्कत हुई है। बाद में करेंगे, कॉल कर।”

जेनजी सुलझाने वाले ने क्यान कार्यालय में दूसरे व्यक्ति को भी भेजकर पैसा लिया। क्यान कर्मचारी विष्णुप्रसाद पौडेल के माध्यम से चाँदमाला श्रेष्ठ के कार्यालय में ५ लाख नगद लेने का प्रमाण मिला है।

इस संदिग्ध ५ लाख के लेनदेन के बारे में अधिकारी कहते हैं कि यह उनका व्यक्तिगत पैसा है। उनका कहना है, ‘अपने खिलाफ आई झूठी खबरों का खंडन करने और जनमानस तक सही संदेश पहुंचाने के लिए में उन लोगों के साथ काम कर रहा हूँ। मैंने अपनी व्यक्तिगत सैलरी, भत्ते और अन्य आय से यह पैसा खर्च कर उपलब्ध करवाया है। क्यान ने इस मामले में कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है।’

वहीं, जेनजी कार्यकर्ता कहलाने वाले अर्जुनबहादुर शाही ने भी क्यान कार्यालय निरीक्षण करने का बहाना बना कर अधिकारी को धमकी दी थी। यह घटना भी संशयास्पद मानी जा रही है। क्यान पहुंचने के बाद अख्तियार कार्यालय जाकर अख्तियार प्रमुख राई से इस्तीफा मांगने की घटना की भी जांच चल रही है।

२७ मंसिर को भ्रष्टाचार के आरोप में अख्तियार ने गिरफ्तार किए अधिकारी २१ मंसिर को न्यायिक प्रक्रिया के लिए जेल भेजे गए थे। उस दौरान पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में हुए भ्रष्टाचार के मामले में भी उन पर विधिक कार्रवाई शुरू हुई।

अभी उन पर संपत्ति शुद्धीकरण, संगठित अपराध, आपराधिक लाभ न लेने और आपराधिक साजिश रचने जैसी धाराओं में जांच चल रही है।

टिप्पणी: जेनजी सुलझाने वाली बातचीत करने वाला व्यक्ति रवि सिंघल है, जिसने दिवाकर ढुंगाना को क्यान भेजकर रकम ली है।

महालक्ष्मी विकास बैंक ने नए वर्ष २०७८ के लिए योजनाों की घोषणा की

महालक्ष्मी विकास बैंक ने नए वर्ष २०७८ को डिजिटल प्रवर्द्धन वर्ष के रूप में मनाते हुए मोबाइल बैंकिंग उपयोगकर्ताओं के लिए एक गोलाप्रथा का आयोजन किया है। बैंक ने मोबाइल बैंकिंग उपयोगकर्ताओं को मिलने वाले रिवार्ड पॉइंट्स को बढ़ावा देते हुए प्ले स्टोर और ऐप स्टोर से डाउनलोड किए जाने वाले एप के माध्यम से पॉइंट्स का उपयोग करने की व्यवस्था की है। ३० चैत्र, काठमांडू।

ग्राहकों को आधुनिक, सुरक्षित और सहज बैंकिंग सेवा प्रदान करने वाले महालक्ष्मी विकास बैंक ने नए वर्ष २०७८ को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएँ सार्वजनिक की हैं। बैंक की योजना के अनुसार, जो नया वर्ष डिजिटल प्रचार वर्ष माना जाएगा, मोबाइल ऐप ‘महालक्ष्मी स्मार्ट साथी’ के जरिए बैंक के सभी सक्रिय मोबाइल बैंकिंग उपयोगकर्ताओं को वैशाख महीने के पहले सप्ताह में कम से कम एक सफल लेन-देन करना होगा। इस प्रक्रिया के तहत आयोजित गोलाप्रथा में तीन उपयोगकर्ता आकर्षक भ्रमण पैकेज जीत सकेंगे।

जीतने वाले तीन उपयोगकर्ताओं को आंतरिक पर्यटन के अंतर्गत पोखरा, चितवन और मनकामना की यात्रा उनके जोड़ों के साथ करने का मौका मिलेगा। साथ ही, डिजिटल बैंकिंग को प्रोत्साहित करने के लिए मोबाइल बैंकिंग उपयोगकर्ताओं द्वारा किए गए विभिन्न डिजिटल लेन-देन पर मिलने वाले रिवार्ड पॉइंट्स को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। उपयोगकर्ता के मोबाइल बैंकिंग पर प्राप्त रिवार्ड पॉइंट्स बैंक के एप में जमा होंगे, जिन्हें प्ले स्टोर और ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

नए वर्ष २०७८ के अवसर पर बैंक ने सुलभ ब्याज दरों पर गृह ऋण सेवा भी शुरू की है। महालक्ष्मी गृह ऋण योजना के अंतर्गत आवासीय/व्यावसायिक घर और जमीन की खरीद, घर निर्माण, अपार्टमेंट की खरीद, घर में वृद्धि/पुनर्निर्माण/मरम्मत के लिए न्यूनतम २ वर्ष से अधिकतम ३० वर्षों की अवधि के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। बैंक ने बताया कि इस ऋण की ब्याज दर ७ वर्ष की अवधि के लिए स्थिर रहेगी।

नेपाल आयल निगम की प्रतिबद्धता: भारी घाटा सहकर आपूर्ति बनाए रखने का प्रयास

नेपाल आयल निगम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि के कारण लगभग सात अरब इक्यानवे करोड़ पैंसठ लाख रुपये के घाटे का सामना कर रहा है। निगम ने एलपी गैस सिलेंडर पर प्रति सिलेंडर ३३१ रुपये २५ पैसे और डीजल पर प्रति लीटर ८७ रुपये ९९ पैसे के घाटे की जानकारी दी है। सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रमपूर्ण सूचनाओं पर ध्यान देते हुए निगम ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने पर उचित मूल्य संशोधन किया जाएगा। ३० चैत्र, काठमांडू।

नेपाल आयल निगम ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत और लाभ-हानि से संबंधित सोशल मीडिया पर फैल रही नकारात्मक सूचनाओं पर गंभीर ध्यानाकर्षण व्यक्त किया है। निगम ने सोमवार को जारी सूचना में बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमत अत्यधिक बढ़ने के कारण वे साप्ताहिक रूप से लगभग सात अरब इक्यानवे करोड़ पैंसठ लाख रुपये के घाटे में हैं। निगम के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की चैत्र १७ की तिथि वाली नवीनतम मूल्य सूची के अनुसार पेट्रोलियम पदार्थों की खरीद लागत अत्यंत महंगी है।

सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में सबसे अधिक घाटा एलपी गैस और डीजल पर है। मूल्य समायोजन के बावजूद निगम को सिलेंडर पर ३३१ रुपये २५ पैसे तथा डीजल पर प्रति लीटर ८७ रुपये ९९ पैसे का घाटा हो रहा है। पेट्रोल पर प्रति लीटर २ रुपये ३२ पैसे, मट्टी तेल पर ३६ रुपये ७० पैसे और आंतरिक हवाई ईंधन पर ९२ पैसे प्रति लीटर का घाटा है। आईओसी द्वारा उपलब्ध कराई गई कीमतों के अनुसार निगम को पेट्रोल खरीदने पर प्रति लीटर २ सय २१ रुपये ३२ पैसे का खर्च होता है, जबकि खुदरा बिक्री मूल्य केवल २ सय १९ रुपये निर्धारित है।

इन जटिल आर्थिक परिस्थितियों और भारी घाटे के बावजूद निगम ने पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की सुगमता और प्रबंधन बनाए रखने का दावा किया है। निगम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस स्थिति को समझने और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों पर भरोसा न करने का सभी उपभोक्ताओं से आग्रह किया है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने पर नेपाल में भी उचित मूल्य समायोजन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

पृथु बास्कोटा कर्पोरेट टी–१० लिगका ब्रान्ड एम्बासडर नियुक्त

पृथु बास्कोटा कर्पोरेट टी-१० लीग के ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त

पृथु बास्कोटा कोर्पोरेट टी-१० लीग के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने ब्रांड एम्बेसडर बनने पर अत्यंत उत्साहित और गर्व महसूस किया है। कोर्पोरेट टी-१० लीग वैशाख १० से १७ तारीख तक काठमांडू के तल्लो मुलपानी क्रिकेट मैदान में आयोजित किया जाएगा।

काठमांडू स्पोर्ट्स एंड इवेंट्स प्रा. लि. द्वारा आयोजित कोर्पोरेट टी-१० लीग के लिए नेपाली राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी पृथु बास्कोटा को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया गया है। आज आयोजित औपचारिक कार्यक्रम में उन्हें लीग का ब्रांड एम्बेसडर के रूप में सार्वजनिक किया गया। पृथु बास्कोटा नेपाल के अनुभवी क्रिकेटरों में से एक माने जाते हैं।

बास्कोटा अपनी स्थिर प्रदर्शन और खेल के प्रति समर्पण के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने नेपाल राष्ट्रीय टीम से खेलते हुए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में बोलते हुए बास्कोटा ने कहा कि कोर्पोरेट टी-१० लीग का ब्रांड एम्बेसडर बनने पर वे अत्यंत उत्साहित और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

काठमांडू स्पोर्ट्स एंड इवेंट्स प्रा. लि. के निदेशक ज्योति भंडारी ने पृथु बास्कोटा का ब्रांड एम्बेसडर के रूप में स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘पृथु जैसे अनुभवी और प्रेरणादायी खिलाड़ी के साथ हमारी प्रतियोगिता और भी ऊंचाई पर पहुंचेगी, इस बात का हमें विश्वास है।’

वैदेशिक रोजगार विभाग और अध्यागमन विभाग के बीच समन्वय की कमी से श्रमिकों को समस्या

वैदेशिक रोजगार विभाग और अध्यागमन विभाग के बीच वैदेशिक रोजगार के लिए आवश्यक कागजातों को लेकर समन्वय की कमी देखी गई है। वैदेशिक रोजगार विभाग ने हवाई टिकट, बिल और सेवा शुल्क की रसीद अनिवार्य दिखाने को कहा है, जबकि अध्यागमन विभाग ने पासपोर्ट और श्रम स्वीकृति के अलावा अन्य कागजात आवश्यक नहीं होने पर स्पष्टता प्रदान की है। वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ ने नीतिगत सुधार किए बिना सेवा शुल्क की रसीद को अनिवार्य बनाने से श्रमिकों को परेशानी होगी, इसलिए इस व्यवस्था को हटाने की मांग की है। ३० चैत, काठमाडौं।

वैदेशिक रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों के विषय में वैदेशिक रोजगार विभाग और अध्यागमन विभाग के बीच समन्वय कमज़ोर पाया गया है। श्रमिकों को विदेश भेजने के मामले में दोनों विभागों के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर विवाद होता रहा है। पहले भी इसी तरह की समस्या दोनों विभागों के बीच उत्पन्न हो चुकी है। वर्तमान में हवाई अड्डे पर वैदेशिक रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों को दिखाने वाले अतिरिक्त कागजात को लेकर दोनों निकायों के बीच विवाद है। वैदेशिक रोजगार विभाग ने एयरपोर्ट पर हवाई टिकट, उसका बिल और मैनपावर को अदा की गई सेवा शुल्क की रसीद दिखाना अनिवार्य करने का निर्देश जारी किया है।

वहीं अध्यागमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट और श्रम स्वीकृति ही न्यूनतम आवश्यक दस्तावेज हैं। इस नीतिगत असहमति ने दोनों विभागों के बीच विवाद को फिर से उभार दिया है। इससे पहले भी २०८० असार में वैदेशिक रोजगार विभाग से श्रम स्वीकृति प्राप्त करके जोर्डन और कुवैत जाने वाले नेपाली कामगारों को त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लौटाने के बाद दोनों विभागों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ था। कुवैत जाने वाले १३८ नेपाली श्रमिकों को अध्यागमन विभाग ने वापस लौटा दिया था।

अध्यागमन विभाग ने एक विज्ञप्ति जारी कर अपने कार्यक्षेत्र के भीतर रहकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें श्रम संबंधी समस्याओं को संबंधित निकायों के बीच चर्चा, समन्वय और सहयोग के माध्यम से समाधान करने का संकल्प भी व्यक्त किया गया है। वैदेशिक रोजगार विभाग ने चैत २३ को जारी सूचना में वैदेशिक रोजगार के लिए जाने वालों को एयरपोर्ट पर हवाई टिकट, बिल और सेवा शुल्क की रसीद दिखाना अनिवार्य किया था।

हालांकि सामान्यतया पासपोर्ट, श्रम स्वीकृति और हवाई टिकट दिखाकर ही यात्रा करना संभव है। वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ के महासचिव महेश बस्नेत ने कहा है कि वैदेशिक रोजगार कानून संशोधन की प्रक्रिया जारी है, इसलिए नीतिगत सुधार के बिना अनावश्यक निर्णय नहीं लिए जाने चाहिए। श्रम मंत्रालय के अधिकारियों ने भी विभाग की इस सूचना के बारे में पर्याप्त जानकारी न मिलने की बात कही है।

सभामुख अर्याल ने पूर्व सभामुखों के साथ संसदीय अभ्यास पर की चर्चा

३० चैत, काठमाडौं। प्रतिनिधि सभा के सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने संसदीय अभ्यास और प्रणाली से संबंधित विषयों पर पूर्व सभामुखों के साथ चर्चा की है। चैत २२ गते सभामुख पद पर निर्वाचित अर्याल ने आज पूर्व सभामुख देवराज घिमिरे और अग्निप्रसाद सापकोटा से मुलाकात की। इस अवसर पर नेपाल के संसदीय अभ्यास, पिछले अनुभवों, संघीय संसद के प्रभावी संचालन, विधायन प्रक्रिया के सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों पर व्यापक बातचीत हुई, यह जानकारी सभामुख के सचिवालय ने दी है।