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लेखक: space4knews

तराई मधेश को दो प्रदेशों में विभाजन की मांग

१३ जेठ, काठमाडौँ । तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी (तमलोपा) ने सरकार से सम्पूर्ण मधेश को दो प्रदेशों में विभाजित करने का सुझाव दिया है। पार्टी के अध्यक्ष वृषेशचन्द्र लाल के नेतृत्व वाली तमलोपा ने संविधान संशोधन बहस पत्र तैयार करने वाली कार्यदल को समग्र मधेश को पुनः पूर्वी और पश्चिमी मधेश के नाम से दो प्रदेशों में विभाजित करने का प्रस्ताव दिया है। पार्टी का कहना है कि अठार जिलों को मधेश प्रदेश में रखकर बाकी जिलों को अन्य प्रदेशों में शामिल करने से मधेश और थरूहट के लोगों को अपमानित महसूस हो रहा है।

संविधान जारी होने के बाद से ही प्रदेशों के सीमांकन विवादास्पद बने रहने का उल्लेख करते हुए तमलोपा ने कहा, ‘मधेश के आठ जिलों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों को जबरदस्ती अन्य प्रदेशों में समाहित किया गया है। यहाँ के मधेश और थरूहट के लोग अपनी पहचान और स्वशासन के अधिकार में अपमान महसूस कर रहे हैं। हम समग्र मधेश को पूर्वी और पश्चिमी मधेश के रूप में दो प्रदेशों में पुनः सीमांकन की मांग करते हैं।’ तमलोपा ने संविधान संशोधन संबंधी निर्वाचन प्रणाली, शासन स्वरूप सहित आठ बिंदुओं पर सुझाव भी प्रस्तुत किए हैं। पार्टी संघीयता को मजबूत बनाने पर जोर देती है।

सुझाव पत्र में लिखा है, ‘संविधान संशोधन द्वारा संघीयता को कमजोर करने या इसका स्वरूप बदलकर शक्तियों के केंद्रीकरण का कोई प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा।’ प्रदेश को निर्वाचन क्षेत्र मानकर पूर्ण समानुपातिक प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया गया है। ‘प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा के निर्वाचन में प्रदेश को निर्वाचन क्षेत्र मानते हुए पूर्ण समानुपातिक प्रणाली लागू की जाए,’ पार्टी ने कहा है। राष्ट्रीय सभा में भी जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की गई है। तमलोपा ने नेपाल के शासन स्वरूप के लिए ‘वेस्टमिन्स्टर बहुदलीय संसदीय लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था’ को सबसे उपयुक्त बताया है। साथ ही स्थानीय सरकार के चुनाव गैरदलीय आधार पर कराने की व्यवस्था करने का सुझाव भी तमलोपा ने दिया है।

ईरान युद्ध: विभिन्न देशों की मुद्राओं पर प्रभाव – कुछ सस्ती हुईं, कुछ महंगी हुईं

फरवरी के अंत में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध का प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अन्य क्षेत्रों तक भी फैल गया है। इस संघर्ष ने समुद्री व्यापार को बाधित किया है और वैश्विक वस्तु आपूर्ति को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति बढ़ी है और विश्व बाजार अस्थिर हो गए हैं। अनिश्चित आर्थिक समय में, निवेशक जोखिम भरे बाजारों से अपना धन निकालकर तुलनात्मक रूप से सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर में निवेश करते हैं। इस स्थिति का कई देशों की मुद्राओं पर असर पड़ा है; कुछ मुद्राएं सस्ती हुईं, कुछ में उतार-चढ़ाव देखे गए और कुछ मुद्राएं मजबूत हुईं।

ब्राजील के अर्थशास्त्री और APCI परामर्शदाता संस्था के प्रमुख आंद्रे पर्फेइतो के अनुसार, “तेल की कीमत सभी को प्रभावित करती है… मुद्राओं के उतार-चढ़ाव से यह प्रभाव बढ़ सकता है या कम हो सकता है।” मुद्रा मूल्य परिवर्तन का किसी देश और उसके नागरिकों पर पड़ने वाला प्रभाव कई अन्य आर्थिक तत्वों से जुड़ा होता है। विशेष रूप से ईंधन और खासकर तेल का बड़े पैमाने पर आयात करने वाले देश इस प्रभाव से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें भारत, इंडोनेशिया, फिलिपींस, थाईलैंड और मिस्र शामिल हैं।

ईरान युद्ध के बाद से भारतीय रुपये का विनिमय दर लगभग 5 प्रतिशत गिरा है। तेल की महंगाई के साथ रुपये की कीमत कई बार न्यूनतम स्तर पर पहुंची है। केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दर बढ़ाकर और डॉलर भंडार बेचकर अपनी मुद्राओं को बचाने का प्रयास किया है। इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक ने इन दोनों उपायों को अपनाया है। ब्याज दर में वृद्धि से बचतकर्ताओं को अधिक लाभ होता है, लेकिन ऋण चुकाने का खर्च बढ़ जाता है।

कुछ देशों की मुद्राओं में उतार-चढ़ाव भी देखे गए हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीका, कोलंबिया, चिली और मैक्सिको शामिल हैं। ये मुद्राएँ विश्व बाजार की प्रवृत्ति के अनुसार ऊपर-नीचे होती रहती हैं। ब्राजील और मलेशिया जैसे ऊर्जा निर्यातक देशों ने तेल की कीमत बढ़ने से अपने निर्यात से आय बढ़ाई है। गोल्डमैन सैक्स और बैंक ऑफ अमेरिका जैसे वित्तीय संस्थानों ने ब्राजील के सरकारी ऋणपत्रों और शेयरों में तेज मांग का रिपोर्ट किया है।

चीन की मुद्रा स्थिर बनी हुई है, जिसका कारण सरकार के कड़े नियम और नीतियां हैं। ईरान युद्ध के बाद से रूसी रुवल सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनी है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, निवेशक परंपरागत रूप से सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं में निवेश कर रहे हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने ईरान युद्ध के कारण आर्थिक विकास धीमा होने और महंगाई बढ़ने का संकेत दिया है तथा विश्व अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण स्थिति में ले जाने की चेतावनी दी है।

शुक्रबार धेरै ठाउँमा वर्षा हुने, पश्चिमेलीलाई मिल्नेछ गर्मीमा राहत

शुक्रवार कई स्थानों पर वर्षा, पश्चिमी क्षेत्र के लोगों को गर्मी से राहत

१३ जेठ, काठमाडौं। मौसम विशेषज्ञों ने शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में वर्षा की संभावना जताई है। वर्षा गुरुवार शाम से शुरू होकर शुक्रवार की रात को अपेक्षाकृत अधिक होने का अनुमान है। जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के मौसम पूर्वानुमान महाशाखा के मौसमविद् रोजन लामिछाने के अनुसार, शुक्रवार को सुबह और दोपहर की तुलना में रात में वर्षा के अधिक होने की संभावना है। लामिछाने ने बताया, ‘शुक्रवार को सातों प्रदेशों में वर्षा की संभावना प्रतीत होती है। वर्तमान पहचानी गई स्थिति के आधार पर, हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।’

पश्चिमी तराई में वर्तमान में गर्म हवा का प्रभाव है, जहाँ भी शुक्रवार को बारिश होने के कारण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसमविद् लामिछाने के अनुसार, नेपाल में फिलहाल पश्चिमी हवा, स्थानीय हवाएँ और पूर्वी भूभाग के निकट न्यून चापीय क्षेत्र का प्रभाव है, जो बादलों के बढ़ने तथा मेघगर्जन और बिजली चमकने के साथ वर्षा होने का पूर्वानुमान देता है। इसी कारण आज और कल कुछ जिलों में तेज़ हवा चलने की संभावना भी बनी हुई है।

कुछ मौसमविदों ने सुदूरपश्चिम, कर्णाली, लुम्बिनी और गण्डकी के कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना भी उजागर की है। मौसमविद् विनोद पोखरेल ने फेसबुक पर गुरुवार शाम से शुक्रवार तक सुदूरपश्चिम से बागमती क्षेत्र तक कई स्थानों पर भारी वर्षा होने की जानकारी दी है। वहीं, मौसमविद् डॉ. धर्मराज उप्रेती ने भी शुक्रवार को कुछ इलाकों में भारी वर्षा और इससे बाढ़ के खतरे की चेतावनी दी है।

हालांकि जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के मौसम पूर्वानुमान महाशाखा ने इस लेख के तैयार होने तक भारी वर्षा के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की है। महाशाखा के मौसमविद् लामिछाने ने कहा, ‘अब तक सिर्फ हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। हमने भारी वर्षा की पुष्टि नहीं की है। अगर भारी वर्षा की संभावना उजागर होती है, तो हम कल तक अपडेट देंगे। वर्षा में तेजी से बदलाव होने के कारण वर्तमान में भारी वर्षा की निश्चित भविष्यवाणी करना कठिन है।’ उनके अनुसार, पश्चिमी नेपाल से शुरू हुआ वर्षा प्रणाली धीरे-धीरे पूर्व की ओर बढ़ेगा और सातों प्रदेशों के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना रहेगी। इसका वे नजदीकी निगरानी कर रहे हैं। मौसम पूर्वानुमान महाशाखा के अनुसार, आज पूर्वी और मध्य भूभाग में मेघगर्जन और हवाहुरी के साथ वर्षा की संभावना है, जबकि पश्चिम नेपाल के तराई जिलों में तापीय लहर जारी रहने का पूर्वानुमान है।

सगरमाथा चुचुरोमा पोखरा एभेन्जर्सको झण्डा फहरियो

१३ जेठ, काठमाडौं। नेपाली पर्वतारोहण गाइड तथा उच्च हिमाली क्षेत्रका चलचित्र निर्माता र प्रवर्द्धक पासाङ काजी शेर्पाले विश्वको सर्वोच्च शिखर सगरमाथा आरोहण गरी पोखरा एभेन्जर्सको झण्डा फहराएकी छन्। उनले आठौँ पटक सगरमाथा आरोहण गर्दै मे २३, २०२६ बिहान ३:५० बजे नेपाल प्रिमियर लिग (एनपीएल) टोली पोखरा एभेन्जर्सको झण्डा फहराएकी हुन्।

पोखरा एभेन्जर्सले जारी गरेको प्रेस विज्ञप्तिमा खेलकुदमार्फत जलवायु परिवर्तन र हिमाली हिमनदीहरूको संरक्षणबारे चेतना जगाउने साझा प्रतिबद्धताको प्रतीकस्वरूप सगरमाथाको शिखरमा आफ्नो झण्डा फहराइएको उल्लेख गरिएको छ। अध्यक्ष त्रिपाठीले भने, “एभेन्जर्सले नेपाली खेलकुदको भावना र ग्रासरुट क्रिकेटको विकास प्रवर्द्धन गर्दै जलवायु परिवर्तन र हिमनदी संरक्षणका मुद्दाहरूमा निरन्तर सहयोग गरिरहेको छ। हामी यो अभियानलाई केवल शिखरमा पुग्न मात्र सीमित राख्न चाहँदैनथ्यौं, यसलाई ठूलो उद्देश्यका लागि समर्पित गर्न चाहन्थ्यौं। यो हाम्रो हिमनदी संरक्षणको महत्व बुझाउने र जलवायु परिवर्तनबारे चेतना जगाउने साथै क्रिकेटको विकासलाई प्रोत्साहित गर्ने एउटा आह्वान हो।”

इज़रायल के तीव्र हमले में लेबनान में ‘बालबालिकाओं सहित दर्जनों की मौत’

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार हालिया इज़रायली हमले में कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं।

बाजुराको हिमाली गाउँपालिकाका अध्यक्षविरुद्ध हुम्लामा काठ तस्करीको उजुरी

हिमाली गाउँपालिकाका अध्यक्ष गोविन्द मल्लविरुद्ध हुम्लामा काठ तस्करी सम्बन्धी उजुरी दर्ता

अध्यक्ष मल्ल र स्थानीयहरूले बरामद गरेका सामग्रीहरू। १३ जेठ, हुम्ला। बाजुराको हिमाली गाउँपालिकाका अध्यक्ष गोविन्द मल्लसहित चार जनाविरुद्ध काठ तस्करी गरेको आरोपमा हुम्लामा मुद्दा दर्ता गरिएको छ। हुम्ला जिल्लाको खार्पुनाथ गाउँपालिका–३ लाम्पाटा च्याचउर वन क्षेत्रमा काठ र वन्यजन्तु तस्करी गर्ने आरोपमा हिमाली गाउँपालिकाका अध्यक्ष मल्लसहित चार जनाविरुद्ध उजुरी दर्ता गरिएको हो। थला सामुदायिक वन क्षेत्रमा अध्यक्ष मल्लको योजनामा काठ तस्करी भएको दाबी गर्दै उजुरी दर्ता गरिएको छ।

डिभिजन वन कार्यालय हुम्लाका अनुसार, हिमाली गाउँपालिकाका अध्यक्ष मल्ल, वडा नम्बर ३ का नरबहादुर गुरुङ, वडासदस्य पेमा गारा गुरुङ र हिमाल गुरुङविरुद्ध उजुरी परेको छ। थला सामुदायिक वनका अध्यक्ष देवराज रावल लगायतको टोलीले ती चार जनाविरुद्ध उजुरी दर्ता गराएको डिभिजन वन कार्यालय हुम्लाका प्रमुख महेश कुमाइले जानकारी दिएका छन्। गोब्रे सल्लाका काठ काट्न प्रयोग हुने दुई थान स्वचालित आरा, ७०० थान रूखका फल्याङ्ग, जंगलमा भेटिएको राष्ट्रिय पक्षी डाँफेको आधा शरीरको भाग र दुर्लभ जनावरको छाला पेमा गुरुङको घरमा फेला परेको उजुरीमा उल्लेख छ। राष्ट्रिय वन्यजन्तु संरक्षण ऐन २०७९ र वन ऐन २०७६ अनुसार कानुनी कारबाहीको माग गर्दै उजुरी दर्ता गरिएको डिभिजन वन कार्यालय हुम्लाका प्रमुख कुमाइले बताएका छन्। उनकी जानकारी अनुसार अनुसन्धानका लागि अधिकारी तोकेर वन्यजन्तुको पहिचानका लागि राष्ट्रिय विधि विज्ञान प्रयोगशालामा पठाइएको छ। – नरजन तामाङ

चीन का क्वाड बैठक पर असंतोष, क्षेत्रीय सहयोग में किसी तीसरे पक्ष को निशाने पर नहीं लेना चाहिए

१३ जेठ, काठमाडौँ। चीन ने ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के समावेश वाले ‘क्वाड’ समूह के प्रति अपनी पुरानी असंतोष फिर से व्यक्त की है। चीन का कहना है कि देशों के बीच कोई भी सहयोग या समझौता क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देना चाहिए, लेकिन उसे किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाना चाहिए। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वे किसी विशेष समूह या गुटबंदी को समर्थन नहीं देने की स्पष्टता देना चाहते हैं। उन्होंने खासतौर पर जोर देते हुए कहा कि देशों के बीच सहयोग से क्षेत्रीय राष्ट्रों के बीच पारस्परिक विश्वास और सहयोग कमजोर नहीं होना चाहिए।

ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को भारत में बैठक कर चीन की इस अभिव्यक्ति का विरोध किया था। इस बैठक में चारों देशों के नेताओं ने प्रशांत महासागर स्थित द्वीप राष्ट्र फिजी में संयुक्त रूप से एक बंदरगाह निर्माण करने पर सहमति व्यक्त की। साथ ही, उन्होंने महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा सुरक्षा संबंधी कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।

फिफा विश्व कप के लिए अमेरिका की फुटबॉल टीम घोषित, एडम्स और रोबिन्सन सहित

समाचार सारांश

Created by AI, professionally reviewed.

  • अमेरिका ने फिफा विश्व कप 2026 के लिए 26 सदस्यीय अंतिम टीम का घोषणा की है।
  • घोषित टीम में क्रिस्टियन पुलिसिक, वेस्टन मैककेनी, टायलर एडम्स और एंटनी रोबिन्सन जैसे प्रमुख खिलाड़ी शामिल हैं।
  • मेजबान अमेरिका समूह ‘डी’ के तहत 13 जून को पैराग्वे के खिलाफ अपना पहला मैच खेलेंगे।

13 जून, काठमांडू। अमेरिका ने फिफा विश्व कप 2026 के लिए 26 सदस्यीय फाइनल टीम की घोषणा की है।

ट्रेनर मॉरिसियो पोचेटिनो ने टायलर एडम्स और एंटनी रोबिन्सन को टीम में शामिल किया है। साथ ही, क्रिस्टियन पुलिसिक, वेस्टन मैककेनी, जियो रेना और हाजी राइट भी टीम के सदस्य हैं।

मेजबान अमेरिका समूह ‘डी’ के तहत 13 जून को पैराग्वे के खिलाफ अपना पहला मैच खेलेगा। इसके बाद वे ऑस्ट्रेलिया और तुर्की के साथ मुकाबला करेंगे।

अमेरिका की विश्व कप टीम :

गोलकीपर: क्रिस ब्रैडी, मैट फ्रिज, मैट टर्नर

डिफेंडर: मैक्स आर्फस्टेन, सर्जिनो डेस्ट, एलेक्स फ्रिमैन, मार्क मैकेंजी, टिम रिम, क्रिस रिचर्ड्स, एंटनी रोबिन्सन, माइल्स रोबिन्सन, जो स्कैली, एस्टन ट्रस्टी

मिडफील्डर: टायलर एडम्स, सेबेस्टियन बेर्हाल्टर, वेस्टन मैककेनी, क्रिस्टियन रोल्डन, ब्रेंडन आरोनसन, क्रिस्टियन पुलिसिक, जियो रेना, मालिक टिलमैन, टिम वेआ, अलेजांद्रो जेंडेजास

फॉरवर्ड: फोलारिन बालोगुन, रिकार्डो पेप्पी, हाजी राइट

हाकिमीलाई समेट्दै मोरक्कोको विश्वकप टोली घोषणा – Online Khabar

मोरक्को ने विश्व कप 2026 के लिए टीम घोषित की, अचरफ हाकिमी टीम में शामिल

मोरक्को ने फीफा विश्व कप 2026 के लिए अपनी अंतिम टीम का ऐलान कर दिया है। चोट के बावजूद कप्तान अचरफ हाकिमी को टीम में शामिल किया गया है, जबकि पूर्व चेल्सी विंगर हाकिम जिएच टीम से बाहर रहे। मोरक्को, जिसका विश्व रैंकिंग में आठवां स्थान है, अपनी विश्व कप यात्रा 19 जून को स्कॉटलैंड के खिलाफ शुरू करेगा।

अचरफ हाकिमी अप्रैल में बायर्न म्यूनिख के खिलाफ चैंपियंस लीग सेमीफाइनल मैच में चोटिल हो गए थे, जिसके कारण वे कुछ समय तक मैदान से बाहर थे। फिर भी उन्हें विश्व कप टीम में जगह मिली है। टीम में नुसाएर मजराउई, इसा डियोप, ब्राहिम डियाज़, सोफियान अम्राबात और बिलाल एल खाननूस जैसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी भी शामिल हैं।

मोरक्को ग्रुप ‘सी’ में है और समूह चरण में स्कॉटलैंड, ब्राजील और हाइती के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा। मोरक्को का पहला मैच 19 जून को स्कॉटलैंड के खिलाफ होगा। टीम में गोलकीपर यासिन बोनू, मुनिर मोहामेदी, अहमद तागनाउती, डिफेंडर नुसाएर मजराउई, अचरफ हाकिमी और मिडफील्डर समिर एल मौराबेत जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।

क्या पुराना समझौतों का युग खत्म हो गया है?

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा।

  • अमेरिका और चीन के संबंधों को निर्देशित करने वाले ‘तीन संयुक्त वक्तव्यों’ का युग पूरी तरह समाप्त होने की चेतावनी चीनी विश्लेषक झु फेंग ने दी है।
  • अमेरिकी आंतरिक राजनीति के कारण ताइवान मामले पर बीजिंग और वाशिंगटन के बीच व्यापक राजनीतिक समझदारी बनना संभव नहीं होगा, ऐसा विश्लेषक झु का कहना है।
  • चीन ने ताइवान को अमेरिकी हथियार बेचने के कार्य का विरोध करते हुए ताइवान जलमार्ग में शांति बनाए रखना दोनों देशों का साझा बिंदु बताया है।

काठमांडू। अमेरिका और चीन के संबंधों को मार्गदर्शित करने वाले ‘तीन संयुक्त वक्तव्य’ (थ्री जॉइंट कम्युनिक्स) के युग के ‘पूरी तरह समाप्त’ होने की चेतावनी एक प्रमुख चीनी विश्लेषक ने दी है।

नानजिंग विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज’ के डीन झु फेंग ने अमेरिकी आंतरिक राजनीति के कारण ताइवान मामले में बीजिंग और वाशिंगटन के बीच कोई व्यापक राजनीतिक समझौता होना ‘अवास्तविक’ हो सकता है, ऐसा माना है।

इस महीने की शुरुआत में चीनी राष्ट्रपति सी चिनफिंग और उनके अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के बीच महत्वपूर्ण शिखर वार्ता हुई थी। इस वार्ता के बाद बीजिंग ने दोनों नेताओं के बीच ‘रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक संबंध’ बनाने पर सहमति जताई और इसे एक बड़ा मील का पत्थर बताया।

इसके बाद व्हाइट हाउस ने भी उसी वाक्यांश को दोहराते हुए कहा कि संबंधों को ‘निष्पक्षता और पारस्परिक लाभ के आधार पर आगे बढ़ाना चाहिए।’

झु फेंग के अनुसार, यह दोनों देशों की समझ और नीतिगत रूपरेखा को मेल करने वाले द्विपक्षीय प्रयासों को दर्शाता है, जो भविष्य के संबंधों के लिए नया आधार तैयार करेगा।

मकाऊ सेंटर फॉर रीजनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज द्वारा ट्रंप के बीजिंग दौरे की समीक्षा के लिए आयोजित एक वेबिनार में झु ने कहा, “चीन-अमेरिका संबंधों में तीन संयुक्त वक्तव्यों का वास्तविक और नीतिगत प्रभाव अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।”

अभी की द्विपक्षीय बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष केवल नए संयुक्त वक्तव्य जारी होने-नहोने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी कि बीजिंग और वाशिंगटन कैसे व्यावहारिक संवाद के माध्यम से विशिष्ट नीतिगत परिणाम उत्पन्न करते हैं।

झु ने आगे कहा कि दोनों देश ‘संरचनात्मक, दीर्घकालिक और रणनीतिक’ प्रतिस्पर्धा के चरण में प्रवेश कर चुके हैं।

1972, 1978 और 1982 में हस्ताक्षरित ये तीन संयुक्त वक्तव्य अब तक बीजिंग और वाशिंगटन के राजनीतिक संबंधों का आधार रही हैं।

ये समझौते मुख्यत: ताइवान मामले पर दोनों पक्षों द्वारा अपनाई जाने वाली नीतिगत दिशानिर्देशों को निर्धारित करते हैं। 1949 से ताइवान मुद्दा चीन और अमेरिका के बीच सबसे पुराने और जटिल विवादों में से एक है।

बीजिंग ताइवान को चीन का हिस्सा मानता है और आवश्यक होने पर बल प्रयोग करके देश में पुनः शामिल करने का पक्षधर है।

अमेरिका और कई अन्य देश ताइवान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देते हैं, लेकिन वाशिंगटन ताइवान को हथियार बेचता है और किसी भी बल प्रयोग से नियंत्रण स्थापित करने के प्रयासों का विरोध करता है।

1972 के ‘शंघाई वक्तव्य’ में कहा गया है कि ताइवान जलमार्ग के दोनों ओर के सभी चीनी एक ही चीन के हैं और ताइवान भी चीन का हिस्सा है, जिसे अमेरिका स्वीकार करता है।

1979 के संयुक्त वक्तव्य के माध्यम से वाशिंगटन ने ताइपेई (ताइवान) के साथ कूटनीतिक संबंध तोड़कर बीजिंग को मान्यता दी। उसी वर्ष अमेरिकी कांग्रेस ने ‘ताइवान रिलेशन एक्ट’ पारित किया।

1982 में हस्ताक्षरित तीसरे संयुक्त वक्तव्य में अमेरिकी सरकार ने ताइवान को हथियार की बिक्री कम करने और अंततः समाप्त करने का आशय व्यक्त किया था।

लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन प्रशासन ने ताइवान को सुरक्षा देने के ‘6 आश्वासन’ भी दिए थे, जिन्हें 2016 में अमेरिकी कांग्रेस ने सम्मानित किया।

झु फेंग के अनुसार, चीन-अमेरिका उच्च नेतृत्व के बीच की शिखर वार्ता से ताइवान को हथियारों की पूरी तरह बिक्री रोकने की अमेरिकी प्रतिबद्धता की उम्मीद करना ‘पूर्ण रूप से अवास्तविक’ है।

उन्होंने कहा, “अमेरिकी आंतरिक राजनीति में ताइवान को लंबे समय से राजनीतिक लाभ के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है।”

‘क्या चीन और अमेरिका के बीच ताइवान विषय में कोई नई व्यापक राजनीतिक सहमति बन सकती है?’ झु ने प्रश्न किया, ‘मेरी व्यक्तिगत राय में यह व्यावहारिक नहीं है।’

ट्रंप के कथनों को उद्धृत करते हुए झु ने बताया कि ट्रंप ‘किसी को स्वतंत्र होते नहीं देखना चाहते’ और युद्ध के लिए लंबी यात्रा पर जाने की इच्छा नहीं रखते, जो ‘खूब अच्छी बात’ है।

गुरुवार को अमेरिकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हांग काओ ने आंतरिक सैनिक सामग्री की कमी का हवाला देते हुए ताइवान को 14 अरब अमेरिकी डॉलर के हथियार बिक्री को ‘रोक दिया’ गया बताया था। लेकिन पेंटागन ने इस निर्णय पर अंतिम निर्णय ट्रंप का ही बताया।

इसके जवाब में बीजिंग ने शुक्रवार को कहा कि ताइवान को अमेरिकी हथियार बिक्री पर उसकी ‘दृढ़ विरोध’ हमेशा ‘स्पष्ट और अटल’ रही है।

14 मई को ट्रंप के साथ संवाद में चीनी राष्ट्रपति शी ने कहा, ‘ताइवान प्रश्न चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।’ उन्होंने ताइवान जलमार्ग में शांति और स्थिरता बनाए रखना बीजिंग और वाशिंगटन के बीच सबसे बड़ा साझा बिंदु बताया।

झु ने कहा कि बीजिंग ने इस मामले में ‘रचनात्मक’ दृष्टिकोण अपनाया है और यह साझा बिंदु एक ‘लचीला’ अवधारणा है जो वाशिंगटन को महत्वपूर्ण संकेत देता है।

जब तक ताइवान के स्वतंत्रता समर्थक ‘अतिरिक्त सीमाएं’ (रेड लाइन) नहीं पार करते, बीजिंग बल प्रयोग करके देश के एकीकरण में जल्दबाजी नहीं करेगा, उन्होंने कहा।

नेपाल में इबोला का खतरा: कांगो से लौटने वाले नेपाली शांति सैनिकों को 21 दिन क्वारंटीन, सरकार ने सुरक्षा बढ़ाई

चेहरे और शरीर को ढकते हुए कपड़े, चश्मा और मास्क पहने लोग

तस्वीर स्रोत, Getty Images

तस्वीर कैप्शन, प्रतीकात्मक तस्वीर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला महामारी के प्रति वैश्विक चिंता बढ़ने के कारण हाल ही में इसे ‘वैश्विक स्वास्थ्य संकट’ घोषित किया है। इसी संदर्भ में, कांगो से लौटने वाले नेपाली शांति सैनिकों को विशेष सावधानी के साथ प्रबंधित किया जा रहा है, ऐसा नेपाली सेना के प्रवक्ता ने बताया।

इस समय डीआर कांगो और युगांडा में इबोला के संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। वहां नेपाली लोगों की आवागमन कम है, लेकिन कांगो में शांति मिशन में कई नेपाली तैनात हैं।

नेपाली सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत ने बीबीसी न्यूज से कहा कि कांगो में तैनात सभी नेपाली सैनिक अब तक संक्रमण से सुरक्षित हैं।

“कांगो के तीन स्थानों पर हमारे सैनिक हैं। इटुरी प्रांत के पेनी, बु्निया और माबीबी में, बु्निया में संक्रमित लोगों की संख्या थोड़ी ज्यादा है,” उन्होंने कहा, “वहां तैनात हमारे सैनिकों को सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया गया है।”

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी यह भी कहते हैं कि शांति मिशन में जाने वाले सुरक्षा कर्मियों के साथ सतर्कता और समन्वय बनाए रखा जा रहा है।

बयारपट्टी छोटी भन्सार हटाउने निर्णयविरुद्ध प्रधानमन्त्रीको पुतला दहन

बरियारपट्टी की छोटी सीमा शुल्क कार्यालय हटाने के निर्णय के विरोध में प्रधानमंत्री का पुतला दहन

१३ जेठ, सिरहा। सिरहा के बरियारपट्टी स्थित छोटी सीमा शुल्क कार्यालय हटाने के निर्णय के विरोध में आक्रोशित नागरिकों ने मशाल जुलूस निकालकर प्रधानमंत्री वालेंद्र शाह (बालेन) का पुतला दहन किया है। सरकारी निर्णय के खिलाफ सड़क पर आंदोलन कर रहे स्थानीय निवासी और व्यापारी सीमा शुल्क पुनःस्थापना की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाज़ी भी की। आक्रोशित नागरिकों का कहना है कि छोटी सीमा शुल्क कार्यालय बंद होने से स्थानीय व्यापार, रोजगार और राजस्व संग्रहण पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र में निगरानी कमजोर होने से तस्करी का खतरा बढ़ गया है।

मंगलवार शाम निकाले गए मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी शामिल थे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय तत्काल वापस नहीं लिया गया तो और कड़ा आंदोलन किया जाएगा। वडानंबर ३ के अध्यक्ष एवं आंदोलन संयोजक विनोद यादव ने कहा कि जनहित के खिलाफ यह निर्णय अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह पद से इस्तीफा देने को भी तैयार हैं। स्थानीय व्यापारी चन्देश्वर यादव के अनुसार, सीमा शुल्क संचालन के लिए स्थानीय लोगों ने अनुदान में जमीन उपलब्ध कराई थी और उक्त कार्यालय से मासिक ८ से १० लाख रुपये तक राजस्व संग्रहित होता था। स्थानीय अगुवाओं ने कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे और भी सशक्त आंदोलन करेंगे।

आजका लागि विदेशी मुद्राहरूको विनिमय दर सार्वजनिक

१३ जेठ, काठमाडौं । नेपाल राष्ट्र बैंकले बुधबारका लागि विदेशी मुद्राहरूको विनिमय दर सार्वजनिक गरेको छ । राष्ट्र बैंकका अनुसार अमेरिकी डलरको खरिददर रु १५२ दशमलव ०८ र बिक्रीदर रु १५२ दशमलव ६८ कायम गरिएको छ । युरोपियन युरोको खरिददर रु १७७ दशमलव ०९ र बिक्रीदर रु १७७ दशमलव ७९, बेलायती पाउण्ड स्टर्लिङ्गको खरिददर रु २०५ दशमलव २४ र बिक्रीदर रु २०६ दशमलव ०५ तथा स्वीस फ्राङ्कको खरिददर रु १९४ दशमलव ६४ र बिक्रीदर रु १९५ दशमलव ४१ तोकिएको छ ।

त्यसैगरी, अष्ट्रेलियन डलरको खरिददर रु १०९ दशमलव ०३ र बिक्रीदर रु १०९ दशमलव ४६, क्यानाडियन डलरको खरिददर रु ११० दशमलव १० र बिक्रीदर रु ११० दशमलव ५४, सिङ्गापुर डलरको खरिददर रु ११९ दशमलव ०६ र बिक्रीदर रु ११९ दशमलव ५३ राखिएको छ । जापानी येन १० को खरिददर रु ९ दशमलव ५७ र बिक्रीदर रु ९ दशमलव ६१, चिनियाँ युआनको खरिददर रु २२ दशमलव ४२ र बिक्रीदर रु २२ दशमलव ५० तथा साउदी अरेबियन रियालको खरिददर रु ४० दशमलव ५३ र बिक्रीदर रु ४० दशमलव ६९ कायम गरिएको छ ।

कतारी रियालको खरिददर रु ४१ दशमलव ७२ र बिक्रीदर रु ४१ दशमलव ८८, थाई भाटको खरिददर रु ४ दशमलव ६८ र बिक्रीदर रु ४ दशमलव ७० तथा यूएई दिर्हामको खरिददर रु ४१ दशमलव ४० र बिक्रीदर रु ४१ दशमलव ५७ तोकिएको छ । मलेसियन रिङ्गिटको खरिददर रु ३८ दशमलव ४८ र बिक्रीदर रु ३८ दशमलव ६३, दक्षिण कोरियाली वन १०० को खरिददर रु १० दशमलव ०४ र बिक्रीदर रु १० दशमलव ०८, स्विडिस क्रोनरको खरिददर रु १६ दशमलव ३९ र बिक्रीदर रु १६ दशमलव ४६ तथा डेनिस क्रोनरको खरिददर रु २३ दशमलव ७० र बिक्रीदर रु २३ दशमलव ७९ कायम गरिएको राष्ट्र बैंकले जनाएको छ।

केन्द्रीय बैंकका अनुसार हङकङ डलरको खरिददर रु १९ दशमलव ४१ र बिक्रीदर रु १९ दशमलव ४९, कुवेती दिनारको खरिददर रु ४९५ दशमलव ८६ र बिक्रीदर रु ४९७ दशमलव ८२, बहराइन दिनारको खरिददर रु ४०३ दशमलव ४० र बिक्रीदर रु ४०४ दशमलव ९९ तथा ओमानी रियालको खरिददर रु ३९५ दशमलव ०१ र बिक्रीदर रु ३९६ दशमलव ५७ कायम रहेको छ । भारतीय रुपैयाँ १०० को खरिददर १६० रुपैयाँ र बिक्रीदर १६० रुपैयाँ १५ पैसा तोकिएको छ । राष्ट्र बैंकले आवश्यकतानुसार यस विनिमयदरमा जुनसुकै समयमा संशोधन गर्न सक्ने जनाएको छ । वाणिज्य बैंकहरूले तोक्ने विनिमयदर फरक हुन सक्ने र अद्यावधिक विनिमयदर राष्ट्र बैंकको वेबसाइटमा उपलब्ध हुने जनाइएको छ।

रास्वपा परित्याग गरेकी ममता शर्मालाई कांग्रेसले बनायो केन्द्रीय सदस्य

रास्वपा छोड़कर ममता शर्मालाई कांग्रेसले बनाया केन्द्रीय सदस्य

१२ जेठ, काठमांडू। प्रतिनिधि सभा निर्वाचन के दौरान रास्वपा छोड़कर नेपाली कांग्रेस में शामिल हुईं ममता शर्मालाई पार्टी के सभापति गगन थापाले केन्द्रीय सदस्य पद के लिए मनोनीत किया है। मंगलवार को सभापति थापाले ममता शर्मालाई कांग्रेस के केन्द्रीय कार्यसमिति सदस्य के रूप में मनोनीत किया। कांग्रेस के केन्द्रीय कार्यालय के कार्यवाहक मुख्य सचिव कृष्णप्रसाद दुलाल ने भी शर्मा को केन्द्रीय समिति सदस्य बनाने की पुष्टि की है। ममता शर्मा पहले रास्वपा के मधेश प्रदेश की संस्थापक सभापति थीं। निर्वाचन के दौरान उन्होंने रास्वपा के कानून और विधान के विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होना चुना था।

मधेसमा मन्त्रिपरिषद्को विस्तार: पाँच नयाँ मन्त्रीहरूको नियुक्ति

१२ जेठ, जनकपुरधाम । मधेस प्रदेश सरकारले मन्त्रिपरिषद्को विस्तार गरेको छ। मुख्यमन्त्री कृष्णप्रसाद यादवको सिफारिसमा प्रदेश प्रमुख सुरेन्द्र लाभ कर्णले पाँच मन्त्रीहरूलाई नयाँ पदमा नियुक्त गरेका छन्। अर्थ मन्त्रालयमा नेकपाका युवराज भट्टराई, भौतिक पूर्वाधार मन्त्रालयमा एमालेका मोहम्मद समिर, श्रम तथा यातायात मन्त्रालयमा शारदादेवी थापा, युवा तथा समाज कल्याण मन्त्रालयमा लखनदास र शिक्षा तथा संस्कृति मन्त्रालयमा मनोज सिंह नियुक्त भएका छन्। त्यस्तै, कांग्रेसबाट स्वास्थ्य मन्त्रालयमा नगेन्द्र शाहलाई नियुक्त गरिएको छ। यसअघि यो मन्त्रालय जंगीलाल रायले सम्हाल्दै आएका थिए र उनलाई हटाइएको छ। नवनियुक्त मन्त्रीहरूले आजै पद तथा गोपनीयताको शपथ ग्रहण गरेका छन्।