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लेखक: space4knews

संशोधनको समय नदिई सभामुखले पास गरे कोशीको नीति तथा कार्यक्रम

सभापति ने संशोधन का समय दिए बिना कोशी प्रदेश की नीति एवं कार्यक्रम को मंजूरी दी

कोशी प्रदेश सभा ने संशोधन के लिए समय दिए बिना सरकार की नीति एवं कार्यक्रम को मंजूरी देने के बाद संसद में विवाद उत्पन्न हो गया है। नेकपा के संसदीय दल के नेता इन्द्रबहादुर आङ्बो ने सभापति पर संसदीय मान्यताओं और परंपराओं के खिलाफ संशोधन हेतु सांसदों के अधिकारों को छीनने का आरोप लगाया है। सभापति और विपक्षी सांसदों के बीच प्रश्नोत्तर जारी रहने से सदन अवरुद्ध हो गया और बैठक बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई है।

12 जेठ, विराटनगर। संशोधन का समय दिए बिना कोशी प्रदेश सरकार की नीति एवं कार्यक्रम को प्रदेश सभा से पारित कर दिया गया है। 7 जेठ को संसद में पेश की गई नीति एवं कार्यक्रम की चर्चा 10 जेठ से शुरू हुई थी। मंगलवार दोपहर को दूसरी बार हुई प्रदेश सभा की बैठक में मुख्यमंत्री हिक्मत कुमार कार्की ने सांसदों द्वारा उठाए गए प्रश्नों के उत्तर दिए, जबकि सभापति अम्बरबहादुर थापा ने इसे निर्णायक रूप से प्रस्तुत किया। सभापति ने सर्वसम्मति से नीति एवं कार्यक्रम पारित होने की घोषणा की।

विपक्षी दल ने संशोधन का समय दिए बिना पास किए जाने का विरोध करते हुए सदन को अवरुद्ध कर दिया। संसदीय मूल्यांकन और परंपराओं के खिलाफ बताते हुए विपक्षी सरकार पर संशोधन के लिए समय न दिए जाने का आरोप लगा रहे हैं। इस दौरान सभापति और विपक्षी सांसदों के बीच लंबा प्रश्नोत्तर हुआ। सभापति थापा ने सर्वसम्मति से नीति एवं कार्यक्रम पारित होने की घोषणा की, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने सभापति की भूमिका पर सवाल उठाए।

7 जेठ को प्रदेश सभा में पेश नीति एवं कार्यक्रम पर चर्चा हुई, लेकिन सभापति ने संशोधन प्रस्ताव दायर करने के लिए समय उपलब्ध नहीं कराया, यह आरोप प्रमुख विपक्षी नेकपा संसदीय दल के नेता इन्द्रबहादुर आङ्बो ने लगाया है। विपक्षी द्वारा प्रश्न उठाए जाने पर सभापति ने प्रदेश सभा नियमावली २०७४ को आधार बनाकर इसे पारित किए जाने का जवाब दिया। पूर्व मुख्यमंत्री और नेकपा सांसद राजेन्द्र राई ने संसदीय परंपरा याद दिलाते हुए सभापति से पूछा, ‘‘विधेयक या नीति एवं कार्यक्रम पढ़ते समय क्या हमें संशोधन दर्ज नहीं करना चाहिए या क्या सभापति को समय देना चाहिए?’’

सभापति थापा ने प्रदेश सभा नियमावली २०७४ के नियम 37 का हवाला देते हुए अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक सम्माननीय सदस्य नियमावली का अध्ययन कर आते हैं, और कुछ संशोधन होने पर स्वयं प्रस्तुत करते हैं, ऐसी मान्यता के अनुसार नियमावली सर्वसम्मति से बनाई गई है।’’ उनके जवाब पर भी विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शित किया। विपक्षी दल के नेता आङ्बो ने संशोधन के अधिकार छीन लिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘बीते दिनों सभापति द्वारा दिए गए समय के अंदर हमने संशोधन प्रस्तुत किए थे। विपक्षी यह जानना चाहते हैं कि नीति एवं कार्यक्रम से सहमति है या नहीं, किस आधार पर कहा जाता है? सभापति को संशोधन के लिए समय दिए बिना इसे पारित नहीं करना चाहिए।’

संसदीय परंपरा के अनुसार नीति एवं कार्यक्रम या विधेयक में संशोधन के लिए सामान्यतः 72 घंटे का समय दिया जाता है, जिसे आवश्यकतानुसार घटाया भी जा सकता है। लेकिन कोशी प्रदेश में बिना समय दिए हुई इस प्रक्रिया के कारण विवाद उत्पन्न हो गया। प्रश्नोत्तर के बढ़ने पर सभापति असहज स्थिति में आए और बुधवार सुबह 11 बजे तक बैठक स्थगित कर दी गई। ‘‘पहली बार बिना संशोधन के प्रदेश की नीति एवं कार्यक्रम सर्वसम्मति से पारित हुई है, यह सुनकर हम स्तब्ध हैं,’’ आङ्बो ने कहा, ‘‘विपक्ष का विरोध मुख्य रूप से संशोधन प्रस्ताव को लेकर है, सरकार ने यह प्रक्रिया इतनी जल्दबाजी में क्यों पूरी की? सभापति ने इतने महत्वपूर्ण विषय पर इतनी जल्दी क्यों फैसला किया?’’

संशोधनको समय नदिई सभामुखले पास गरे कोशीको नीति तथा कार्यक्रम

सभामुख ने संशोधन का समय न दिए कोशी प्रदेश का नीति तथा कार्यक्रम पास किया

समाचार सारांश

  • कोशी प्रदेशसभा ने संशोधन के लिए समय न देते हुए सरकार का नीति तथा कार्यक्रम पारित किया, जिसके बाद संसद में विवाद उत्पन्न हुआ।
  • नेकपा के संसदीय दल के नेता इन्द्रबहादुर आङ्बो ने सभामुख पर संसदीय मूल्य और परंपरा के विपरीत संशोधन करने वाले सांसदों का अधिकार छीनने का आरोप लगाया है।
  • सभामुख और विपक्षी सांसदों के बीच प्रश्नोत्तर बढ़ने व सदन के अवरुद्ध होने पर बैठक बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई।

12 जेठ, विराटनगर। संशोधन का समय दिए बिना कोशी प्रदेश सरकार का नीति तथा कार्यक्रम प्रदेशसभा से पारित हो चुका है। 7 जेठ को संसद में पेश किए गए नीति तथा कार्यक्रम पर चर्चा 10 जेठ से शुरू हुई थी।

मंगलवार दोपहर दूसरी बार हुई प्रदेशसभा बैठक में मुख्यमंत्री हिक्मतकुमार कार्की ने सांसदों द्वारा उठाए गए प्रश्नों के उत्तर दिए, उसके बाद सभामुख अम्बरबहादुर थापाले नीति तथा कार्यक्रम को निर्णायक रूप में प्रस्तुत किया।

सभामुख ने सर्वसम्मति से नीति तथा कार्यक्रम पारित होने की घोषणा की। इसके बाद विपक्षी दल ने संशोधन के लिए समय न दिए जाने का आरोप लगाकर सदन अवरुद्ध कर दिया।

संसदीय मूल्यों एवं परंपराओं के विपरीत सभामुख द्वारा संशोधन के लिए समय न देने के चलते विपक्षी नेकपा के सांसदों ने अवरोध खड़ा किया। इस बीच सभामुख और विपक्षी सांसदों के बीच लंबी प्रश्नोत्तर हुई।

सभामुख थापाले जब सर्वसम्मति से नीति तथा कार्यक्रम पारित होने की घोषणा की, तब विपक्षी सांसदों ने सभामुख की भूमिका पर सवाल उठाए।

7 जेठ को प्रदेशसभा में पेश किए गए नीति तथा कार्यक्रम पर चर्चा हुई, लेकिन सभामुख ने संशोधन प्रस्ताव दायर करने के लिए समय नहीं दिया, ऐसा प्रमुख विपक्षी नेकपा संसदीय दल के नेता इन्द्रबहादुर आङ्बो ने बताया।

विपक्षी द्वारा प्रश्न उठाने पर सभामुख ने प्रदेशसभा नियमावली २०७४ के अनुसार यह पारित बताया। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेकपा सांसद राजेन्द्र राई ने संसदीय परंपरा याद दिलाते हुए सभामुख से पूछा,

सरकार द्वारा विकसित ‘मोफा मित्र एप’ के माध्यम से विदेश में रहने वाले नेपाली कैसे कर सकते हैं शिकायत?

परराष्ट्र मंत्रालय के कांसुलर सेवा विभाग ने विदेश में रहने वाले नेपाली नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए ‘मोफा मित्र’ मोबाइल एप्लिकेशन शुरू किया है। परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने डिजिटल तकनीक के माध्यम से कांसुलर सेवाओं को और अधिक सहज तथा प्रभावकारी बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन कर इस एप का औपचारिक उद्घाटन किया है। इस एप के माध्यम से दर्ज की गई शिकायतें और अनुरोध सीधे संबंधित नेपाली मिशन तक पहुंचेंगे, विभाग की महानिदेशक दुरपदा सापकोटाले जानकारी दी है। १२ जेठ, काठमाडौं।

विदेश में रह रहे नेपाली नागरिकों के लिए सरकार ने ‘मोफा मित्र’ एप जारी किया है। परराष्ट्र मंत्रालय के कांसुलर सेवा विभाग द्वारा विकसित यह मोबाइल एप्लिकेशन एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर डाउनलोड किया जा सकता है। विभाग के सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी नविनकुमार झाकाका के अनुसार, इस एप में मुख्यतः चार विशेषताएं उपलब्ध हैं, जिनमें खोज एवं उद्धार, शव प्रबंधन, बीमा/क्षतिपूर्ति, और शिकायत/समस्या सेवा शामिल हैं। एप के माध्यम से किए गए अनुरोध की स्थिति, कार्रवाई प्रगति और जांच की जानकारी भी आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

इसी तरह, विदेश स्थित नेपाली मिशनों के सम्पर्क नंबर और ट्रैवल एडवाइजरी भी इस एप पर देखी जा सकती हैं। पासपोर्ट नंबर और जन्म तिथि दर्ज कराने पर आवेदन, शिकायत एवं अनुरोध करने की प्रक्रिया सरल हो जाती है। एप द्वारा विदेश में फंसे, अलपत्र या लापता नेपाली नागरिकों की खोज एवं उद्धार हेतु ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। मृतकों के शव प्रबंधन, बीमा तथा क्षतिपूर्ति राशि की मांग, तथा अन्य शिकायतें एवं समस्याएं दर्ज कराई जा सकेंगी। साथ ही आवेदन पर हुई कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी, विभाग ने बताया है।

इस एप का औपचारिक उद्घाटन परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल द्वारा किया गया। विभाग में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कांसुलर सेवाओं को अधिक सहज, नागरिकमैत्री, प्रभावशाली और तकनीकी-मित्र बनाने के लिए डिजिटल तकनीक के उपयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। इस एप के माध्यम से विदेश में उपस्थित नेपाली नागरिक और नेपाली मिशनों के बीच संपर्क, समन्वय तथा शीघ्र सूचना आदान-प्रदान में सहायता मिलने की उम्मीद जताई गई। कांसुलर सेवाओं से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं के प्रभावकारी समाधान में यह एप महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, मंत्री खनाल ने कहा।

विदेश में रहने वाले नेपाली अपनी शिकायतें सरकार के MoFA मित्र ऐप के जरिए कैसे दर्ज करें?

सारांश

कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा तैयार। संपादित और समीक्षा की गई।

  • परराष्ट्र मंत्रालय के कांसुलर सेवा विभाग ने विदेश में रहने वाले नेपाली लोगों की समस्याएं और शिकायतें हल करने के लिए ‘MoFA मित्र’ मोबाइल एप्लिकेशन शुरू किया है।
  • परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने इस ऐप का उद्घाटन करते हुए डिजिटल तकनीक के माध्यम से कांसुलर सेवा को और अधिक सुगम और प्रभावी बनाने का लक्ष्य स्पष्ट किया।
  • दर्ज शिकायतें और आवेदन अब विभाग के माध्यम से नहीं बल्कि सीधे संबंधित नेपाली मिशन तक पहुंचेंगे, निदेशक जनरल द्रुपद सापकोटाका अनुसार।

२५ जेठ, काठमांडू – विदेश में निवासरत नेपाली लोगों की समस्याओं और शिकायतों का समाधान करने के लिए सरकार ने ‘MoFA मित्र’ ऐप लॉन्च किया है।

परराष्ट्र मंत्रालय के कांसुलर सेवा विभाग द्वारा विकसित यह मोबाइल ऐप एंड्रॉयड व आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर डाउनलोड किया जा सकता है।

विभाग के आईटी अधिकारी नवीनकुमार झाका के अनुसार, इस ऐप में चार मुख्य खंड हैं: खोज तथा उद्धार, मर्ट्यूरी सेवा, बीमा/पश्चुवाई, और शिकायत/समस्या पंजीकरण।

झाका ने बताया कि उपयोगकर्ता अपने भेजे गए अनुरोध की स्थिति आसानी से ट्रैक कर सकेंगे और जांच या कार्रवाई के संबंध में अपडेट प्राप्त कर सकेंगे।

इसके साथ ही ऐप में विदेश में स्थित नेपाली मिशनों के संपर्क नंबर और यात्रा संबंधी सूचनाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। पासपोर्ट नंबर और जन्म तिथि का उपयोग करके शिकायत, गुनाह या सेवा अनुरोध आसानी से दर्ज किया जा सकता है।

विदेश में फंसे, अल्पत्रित या लापता नेपाली इस ऐप के जरिए ऑनलाइन खोज एवं उद्धार के लिए आवेदन कर सकेंगे। मृत्यु होने की स्थिति में मर्ट्यूरी प्रबंधन, बीमा व क्षतिपूर्ति समेत अन्य शिकायतें भी ऐप द्वार दर्ज की जा सकती हैं। विभाग ने बताया कि उपयोगकर्ता अपनी शिकायत की प्रगति से भी सूचित रहेंगे।

ऐप में नेपाली मिशनों के संपर्क विवरण, सेवा जानकारी, यात्रा सलाह और सुरक्षा अपडेट, कांसुलर सेवा संबंधी प्रश्नोत्तर तथा अन्य उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई गई है, विभाग ने बताया।

परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल ने विभाग में आयोजित समारोह में ऐप का औपचारिक उद्घाटन करते हुए बताया कि डिजिटल तकनीक से कांसुलर सेवा अधिक सुलभ, नागरिक-केंद्रित, प्रभावी और तकनीकी संचालित बनाना महत्वपूर्ण है।

यह ऐप विदेश में रहने वाले नेपाली और नेपाली मिशन के बीच सहज समन्वय, कुशल संचार तथा त्वरित सूचना आदान-प्रदान में सहायक होगा और सहायता प्रणाली को और मजबूत बनाएगा।

मंत्री खनाल ने बताया कि इस ऐप की भूमिका कांसुलर सेवाओं से संबंधित शिकायतों और समस्याओं के प्रभावशाली समाधान में महत्वपूर्ण होगी।

पहले विभाग ऑनलाइन शिकायतें और आवेदन प्राप्त करता था, जो विभाग के जरिए संबंधित मिशन तक पहुंचते थे। निदेशक जनरल द्रुपद सापकोटा ने कहा कि अब ऐप के जरिए सीधे मिशन तक अनुरोध भेजे जाएंगे।

सापकोटा ने कहा कि कांसुलर सेवा को अधिक सुलभ, सरल और प्रभावी बनाने के लिए विभाग आधुनिक और डिजिटल रूपांतरण पर खास ध्यान दे रहा है।

‘नेपाल को हवाई सुरक्षा सूची से हटाने में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई’

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा सहित।

  • नेपाल के हवाई क्षेत्र में विश्वास बनाए रखना नेपाल व यूरोपीय संघ दोनों का साझा लक्ष्य है, राजदूत वेरोनिका लोरेन्जो ने कहा।
  • ’यूरोपीय संघ ने कभी सेवा प्रदाता और नियामक को अलग करने के लिए कानूनी बदलाव करने को नहीं कहा है,’ राजदूत लोरेन्जो ने स्पष्ट किया।
  • नेपाल को हवाई सुरक्षा सूची से हटाने के लिए नियामक व्यवस्था में ठोस सुधार आवश्यक है, उन्होंने उल्लेख किया।

१२ जेठ, काठमांडू। नेपाल के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) की राजदूत वेरोनिका लोरेन्जो ने कहा है कि नेपाल के हवाई क्षेत्र में विश्वास पुनः स्थापित करना नेपाल और ईयू दोनों का साझा उद्देश्य है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल को ईयू के एयर सेफ्टी सूची से हटाने के लिए उड्डयन सुरक्षा में ठोस सुधार करना अति आवश्यक है।

२६ मई को नेपाल में ईयू सदस्य देशों के मिशन प्रमुखों के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजदूत लोरेन्जो ने बताया कि नेपाल की नई सरकार एयर सेफ्टी सूची के मुद्दे को गंभीरता से उठा रही है।

‘नई सरकार के आने के बाद मुझे एयर सेफ्टी सूची के विषय में अब तक जितना अधिक प्रश्न पूछा गया है, उससे पहले ऐसा अनुभव नहीं था,’ उन्होंने कहा, ‘हर मंत्री हर बैठक में इस मुद्दे को उठाते हैं, जो प्रगति का संकेत है।’

सन् २०१३ से नेपाल की एयरलाइन कंपनियों को यूरोपीय हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने से प्रतिबंधित किया गया है।

जब पूछे जाने पर कि अधिकांश नेपाली विमान यूरोप में निर्मित हैं और नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उड्डयन प्रणाली अपनाई है, फिर भी प्रतिबंध क्यों है, तो लोरेन्जो ने स्पष्ट किया कि समस्या विमान की उत्पत्ति से नहीं, बल्कि समग्र सुरक्षा निगरानी प्रणाली से संबंधित है।

‘यहाँ के अधिकांश विमान यूरोपीय हैं। एटीआर और एयरबस यूरोपीय कंपनियां हैं,’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन केवल विमान यूरोपीय मानकों पर बने होने या पायलटों के यूरोप में प्रशिक्षण लेने मात्र से यह नहीं कहा जा सकता कि नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और एयरलाइंस ने सभी सुरक्षा मापदंडों का पालन किया है।’

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईयू ने कभी नेपाल को नियामक निकाय और सेवा प्रदाता को अलग करने के लिए कानूनी परिवर्तन करने को बाध्य नहीं किया है।

‘यूरोपीय संघ ने सेवा प्रदाता और नियामक को अलग करने के लिए कानूनी बदलाव करने को कभी नहीं कहा है,’ उन्होंने कहा, ‘पर हम इस बात पर जोर देते हैं कि दोनों कार्य स्वतंत्र रूप से किए जाएं ताकि हितों के टकराव को रोका जा सके।’

लोरेन्जो के अनुसार, २०२३ में किए गए मूल्यांकन में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि नेपाल ने एयर सेफ्टी सूची से हटने के लिए आवश्यक प्रगति नहीं की है। इसके बाद नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई।

‘पिछले ढाई साल में इस कार्ययोजना पर बहुत कम प्रगति हुई है, अब इस पर काम करना आवश्यक है,’ उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि सुधार केवल पायलट लाइसेंसिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निरंतर प्रशिक्षण, प्रमाणीकरण प्रणाली और नागरिक उड्डयन की निगरानी व्यवस्था भी शामिल है।

‘सन् २०१३ से ही हम नेपाल को इन सुधारों को लागू करने और एयरलाइंस द्वारा न्यूनतम सुरक्षा मानकों का पालन करने में तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं,’ उन्होंने कहा।

उन्होंने नव नियुक्त महानिदेशक के साथ सहयोग और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद जताई।

‘नया महानिदेशक नियुक्त होने के बाद अब हम अधिक निकटता से काम करके सुधारात्मक कार्ययोजना में प्रगति कर सकेंगे,’ उन्होंने कहा, ‘जरूरी तैयारी पूरी होने के बाद भविष्य में नेपाल को एयर सेफ्टी सूची से हटाने की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है।’

लोरेन्जो ने कहा कि नेपाल पर प्रतिबंध जारी रहना ईयू के लिए भी सुखद बात नहीं है और नेपाल के हवाई क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय विश्वास का पुनः स्थापना अति आवश्यक है।

‘यह स्थिति हमें भी पसंद नहीं है,’ उन्होंने कहा, ‘नेपाल के हवाई क्षेत्र में विश्वास पुनः स्थापित करना हमारा साझा उद्देश्य है। यह पर्यटन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।’

गेडागुडी र भटमास बढी खाँदा उच्च रक्तचापको जोखिम ३० प्रतिशत कम

गेडागुडी और भटमास के सेवन से उच्च रक्तचाप का खतरा 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है

गेडागुडी और भटमास से बने खाद्य पदार्थों के नियमित सेवन से उच्च रक्तचाप के जोखिम को कम करने में अत्यंत प्रभावकारी होने का नया अध्ययन सामने आया है। ‘बीएमजे न्यूट्रिशन प्रिवेंशन एंड हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित इस विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने वालों में उच्च रक्तचाप होने की संभावना उल्लेखनीय रूप से कम होती है। विश्वभर के विभिन्न अध्ययनों के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट निष्कर्ष निकाला है।

अधिक गेडागुडी खाने वालों में उच्च रक्तचाप का जोखिम 16 प्रतिशत तक घटा पाया गया है। इसी तरह, भटमास और उससे बने व्यंजन अधिक सेवन करने वालों में यह जोखिम 19 प्रतिशत तक कम दिखा है। अध्ययन के अनुसार, रोजाना निश्चित मात्रा में इन खाद्य पदार्थों का सेवन करने पर सबसे अधिक लाभ प्राप्त होता है। लगभग 170 ग्राम गेडागुडी के दैनिक सेवन से उच्च रक्तचाप के खतरे में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी देखी गई है।

इसी प्रकार, रोजाना 60 से 80 ग्राम भटमासजन्य खाद्य पदार्थों के सेवन से जोखिम 28 से 29 प्रतिशत तक घट जाता है। हालांकि, भटमास की मात्रा इसके अधिक लेने पर अतिरिक्त लाभ नहीं पाया गया, यह वैज्ञानिकों ने बताया है। यहां 100 ग्राम गेडागुडी या भटमास का मतलब पकाया हुआ एक कप या 5 से 6 चम्मच के बराबर मात्रा है।

इस अध्ययन में अमेरिका, यूरोप और एशिया के विभिन्न देशों में लंबे समय तक किए गए 12 अनुसंधानों के आंकड़ों को समाहित किया गया था। गेडागुडी और भटमास में पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो रक्तचाप को संतुलित करने में मदद करते हैं। वर्तमान में विश्वभर, विशेष रूप से यूरोप और ब्रिटेन में लोग गेडागुडी का कम सेवन करते हैं। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार यह अध्ययन लोगों को दैनिक आहार में प्रोटीन के मुख्य स्रोत के रूप में गेडागुडी और भटमास को प्राथमिकता देने का मजबूत आधार प्रदान करता है।

नेपाल राष्ट्र बैंकको सञ्चालक समिति ९ सदस्यीय बनाउन सरकारको प्रस्ताव

सरकारले नेपाल राष्ट्र बैंकको सञ्चालक समितिको सदस्य संख्या ७ बाट ९ मा वृद्धि गर्ने प्रस्ताव ल्याएको छ। नेपाल राष्ट्र बैंक ऐन २०५८ मा संशोधन गर्न तयार पारिएको विधेयक संघीय संसदको प्रतिनिधिसभामा दर्ता भइसकेको छ। यस विधेयकअनुसार हाल ३ जना रहेका गैरकार्यकारी स्वतन्त्र सञ्चालकहरूलाई ५ जना पुर्याउने प्रस्ताव गरिएको छ।

१२ जेठ, काठमाडौं। सरकारले राष्ट्र बैंक सञ्चालक समितिको सदस्य संख्या बढाउने प्रस्ताव अघि सारेको छ। यस अनुसार वर्तमान ७ सदस्यीय केन्द्रीय बैंकको सञ्चालक समिति ९ सदस्यीय गर्ने योजना छ। सरकारले नेपाल राष्ट्र बैंक ऐन २०५८ मा संशोधन गर्न तयार पारेको विधेयक अनुसार ९ सदस्यीय सञ्चालक समिति गठन गर्ने परिकल्पना गरिएको छ। उक्त विधेयक प्रतिनिधिसभामा दर्ता भइसकेको छ।

विधेयकमा उल्लेख छ, ऐनको दफा २० अनुसार योग्यता पुगेका व्यक्तिहरूबाट विभिन्न क्षेत्रको प्रतिनिधित्व गर्दै नेपाल सरकारले नियुक्त गर्ने ५ जना गैरकार्यकारी स्वतन्त्र सञ्चालक रहनेछन्। यसअघि आर्थिक, मौद्रिक, बैंकिङ, वित्तीय र वाणिज्य कानुनका क्षेत्रहरूमा प्रख्यात ३ जना गैरकार्यकारी सञ्चालक नियुक्त गरिएका थिए। केन्द्रीय बैंक सञ्चालक समितिको अध्यक्ष गभर्नर रहनेछन् भने सदस्यहरूमा अर्थ सचिव र दुई डेपुटी गभर्नर रहने व्यवस्था छ।

चार दिन से लापता महिला कांसघारी में मृत हालत में मिली, पति पर संदेह

१२ जेठ, विराटनगर। मोरङ के उर्लाबारी नगरपालिका–१ लक्ष्मीझार की ४३ वर्षीय नविता कान्दाङ्वा लिम्बू का शव बक्राहा खोला किनारे सड़े हुए हालत में पाया गया है। नविता के मृत पाए जाने के बाद पुलिस ने उनके पति दिलबहादुर लिम्बू को हिरासत में ले लिया है। नविता शनिवार सुबह ९ बजे घर से निकली थीं। उनके घर से निकलने से पहले परिवार में सामान्य विवाद हुआ था। इसके बाद चार दिन तक उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया। परिवार ने इस दौरान पुलिस को सूचित भी नहीं किया।

मंगलवार सुबह शव मिलने के बाद पुलिस ने पति दिलबहादुर पर संदेह जताते हुए जांच शुरू की है। दिलबहादुर ने पुलिस पूछताछ में कहा कि उन्होंने सामान्य बातचीत के बाद घर से बाहर जाना चुना था और वे खुद नविता को खोज रहे हैं। पुलिस के अनुसार आज सुबह स्थानीय लोग जो बिचे चराने गए थे, उन्होंने बक्राहा खोला किनारे कांसघारी में शव देखा। कपड़ों के आधार पर शव नविता का ही है। मोरङ पुलिस प्रवक्ता डीएसपी सन्तोष श्रेष्ठ ने बताया कि शव पूरी तरह सड़ा हुआ था, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही मामले की सच्चाई साफ कर सकेगी। शव को पोस्टमार्टम के लिए विराटनगर स्थित कोशी अस्पताल भेजा गया है। नविता के मायके पक्ष ने पति दिलबहादुर और परिवार के सदस्यों पर जांच की मांग की है।

‘विदेशका दूतावासहरूमा समेत बयान र बकपत्र गराउने सुविधा दिनू’

‘विदेशी दूतावासों में बयान और साक्ष्य उपलब्ध कराने का आदेश’

सर्वोच्च न्यायालय ने विदेश में रह रहे नेपाली नागरिकों को संबंधित देश के नेपाली दूतावास या कूटनीतिक मिशन के माध्यम से मामला संबंधी बयान और साक्ष्य प्रदान करने की सुविधा उपलब्ध कराने निर्देश दिया है। न्यायालय ने प्रौद्योगिकी के विकास और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को न्याय प्रणाली में सीमित न रखने का स्पष्ट उल्लेख किया है। इस आदेश के बाद विदेश में रह रहे कारण नेपाल में लंबित मामलों के स्थगित होने की स्थिति समाप्त होगी और कानूनी प्रक्रिया प्रभावी रूप से आगे बढ़ेगी, ऐसा विश्वास व्यक्त किया गया है। १२ जेठ, काठमाडौँ।

सर्वोच्च न्यायालय ने विदेश में निवासरत नेपाली लोगों को दूतावास या कूटनीतिक कार्यालय में आकर नेपाल में चल रहे मामलों में बयान और साक्ष्य देने की व्यवस्था करने का निर्णय लिया है। विशेष अदालत में विचाराधीन एक भ्रष्टाचार मामले में दिए गए आदेश के खिलाफ पुनरावलोकन में, सर्वोच्च अदालत ने विदेश स्थित नेपाली दूतावास और कूटनीतिक कार्यालयों में उपस्थित होकर बयान या साक्ष्य प्रदान करने वालों पर रोक लगाने से मना किया है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से विदेश में रहने वाले नेपाली नागरिकों के लिए नेपाल में चल रहे मामलों में भागीदारी करना सरल हो जाएगा।

आपराधिक मामलों में प्रतिवादी बनाये गए और वर्तमान में विदेश में रह रहे व्यक्तियों को भी मामले की प्रक्रिया में शामिल करने का मार्ग खुलेगा। नेपाल में अदालत के अतिरिक्त अन्य माध्यमों से अभियुक्तों के बयान और मामलों के गवाहों के साक्ष्य प्रदान करने की प्रथा पिछले कुछ वर्षों से चल रही है। विशेष अदालत समेत कुछ अदालती फैसलों में विदेश में स्थित कुछ वकीलों को बहस में भाग लेने की अनुमति भी मिल रही है। लेकिन, अब तक विदेश में रह रहे नेपाली नागरिकों को अदालत में बयान या साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग को उदारतापूर्वक स्वीकार करने की व्याख्या की है। हाल के समय में डिजिटल परिवर्तन तीव्र गति से हो रहा है, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को रोकने की बजाय इसे नियमबद्ध करने का निष्कर्ष निकाला है। न्यायाधीश हरि फुयाल और बालकृष्ण ढकाल की संयुक्त पीठ द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, ‘प्रौद्योगिकी के विकास और उपयोग से भौगोलिक सीमाएं घट रही हैं और न्याय प्रशासन में उसके उपयोग से नेपाल की अदालतों में सकारात्मक सुधार होगा।’

सऊदी अरब में ४ महीने से फंसे ७० नेपाली ड्राइवरों की समस्या

काठमांडू के अल शाहिद ओवरसीज़ के माध्यम से सऊदी अरब पहुंचे ७० नेपाली चालक चार महीनों से काम और वेतन न मिलने के कारण फंसे हुए हैं। फंसे हुए इन चालकوں में से कुछ को सुरक्षा उपकरण के बिना श्रम कार्य में लगाया गया है जबकि कई को भोजन और आवास की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। विदेश रोजगार के लिए लाखों रुपये खर्च करके सऊदी आए इन पीड़ितों ने न्याय के लिए वहां के श्रम अदालत में भी मुकदमा दर्ज कराया है।

सऊदी अरब पहुंचने वाले साठ से अधिक नेपाली ड्राइवर काम न मिलने के कारण लगभग चार महीने से फंसे हुए हैं। ये लोग काठमांडू मेट्रोपोलिटन सिटी–४ चंडोल में स्थित अल शाहिद ओवरसीज़ के माध्यम से सऊदी गए थे। इस ओवरसीज़ ने सऊदी में अनुभवी ५० और नेपाली लाइसेंस वाले १५० ड्राइवरों की मांग की थी। सऊदी की मेहन ह्यूमन रिसोर्स कंपनी में हेवी ड्राइवर के रूप में गए ६४ लोगों में से अधिकांश नेपाली अब तक काम नहीं पा सके हैं।

फरवरी में श्रम स्वीकृति लेकर सऊदी पहुंचे इन लोगों ने अब तक काम न मिलने की बात कही है। इन्हें समूहों में विभिन्न स्थानों पर रखा गया है। सऊदी और खाड़ी देशों के हेवी ड्राइवर लाइसेंसधारियों में से कुछ को ही काम पर लगाया गया है। नेपाली लाइसेंसधारी और सऊदी के हल्के वाहनों के लाइसेंसधारकों को भी अब तक काम पर नहीं भेजा गया है। मैनपावर द्वारा जारी विज्ञापन में सऊदी अरब के लाइसेंसधारियों के लिए मासिक १,६०० रियाल वेतन और ट्रिप भत्ते की व्यवस्था का उल्लेख है।

सऊदी की मेहन ह्यूमन रिसोर्स कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में अल शाहिद ओवरसीज़ द्वारा किए गए करारनामे में हेवी ड्राइवर का मासिक वेतन १,८०० सऊदी रियाल, दैनिक ८ घंटे और साप्ताहिक ६ दिन काम, एक दिन की छुट्टी, २ वर्षों की करार अवधि, भोजन और आवास की व्यवस्था कंपनी द्वारा की जाने का उल्लेख था। नेपाल में अपनी समस्याएं बताने पर मैनपावर के निदेशक राउत ने समस्या का समाधान हो रहा है, इस आश्वासन का वर्णन श्रमिक करते हैं।

रोल्पा में तूफान से गिरा पेड़, दो लोगों की मौत

रोल्पा जिले के थवांग में तूफान के कारण गिरे पेड़ ने 60 वर्षीय रुजू झांکری और 50 वर्षीय मनबुजी झांकरी की जान ले ली है। ये दोनों व्यक्ति थवांग प्राथमिक अस्पताल में मरीज से मिलने के बाद घर लौट रहे थे, तभी तेज हवा के साथ पेड़ गिर गया और वे दुर्घटना का शिकार हो गए। इस हादसे में घायल रुजू झांकरी वहीं मौके पर मृत पाई गईं, जबकि मनबुजी झांकरी को उपचार के लिए पोखरा ले जाते वक्त रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। 12 जेठ, दांग।

रोल्पा पुलिस के प्रवक्ता, पुलिस निरीक्षक सुनील थापा नेपाली ने पुलिस को दी जानकारी में बताया कि थवांग में हुई इस घटना में मृतक महिलाएं थवांग गाउँपालिका-2 हेलोवांग की निवासी रुजू झांकरी (60 वर्ष) और मनबुजी झांकरी (50 वर्ष) हैं। उन्होंने कहा कि रुजू झांकरी घटना स्थल पर ही मारी गईं, जबकि मनबुजी झांकरी को कास्की के पोखरा उपचार के लिए ले जाते हुए रास्ते में ही उनका निधन हो गया।

दोनों महिलाएं सोमवार शाम थवांग प्राथमिक अस्पताल में मरीज से मिलने गई थीं और घर लौट रही थीं, तभी शाम को बारिश के साथ आई तूफानी हवा के कारण रास्ते पर ऊपर से पेड़ गिर गया, जिससे वे पेड़ के नीचे आ गईं। मामले की जानकारी मिलते ही थवांग क्षेत्रीय पुलिस कार्यालय से पुलिस निरीक्षक रामचंद्र बगाले के नेतृत्व में पुलिस की टीम घटना स्थल पर पहुंची और घायलों को बचाया गया।

करोडभन्दा कमका योजना नबन्ने, चुनावसम्मै गठबन्धन – Online Khabar

मधेश प्रदेश के तीन राजनीतिक दलों के बीच 15 बिंदुओं पर सहमति, चुनाव से पहले गठबंधन जारी रखने का फैसला

मधेश प्रदेश के सत्ता साझा करने वाले तीन दलों ने आगामी चुनाव तक गठबंधन को बनाए रखने का निर्णय करते हुए 15 बिंदुओं पर समझौता किया है। इस सहमति के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष से मंत्रिपरिषद् को 9 सदस्यों तक सीमित किया जाएगा और बजट में एक करोड़ रुपये से कम के योजनाएं नहीं बनाई जाएंगी। मुख्यमंत्री कृष्णप्रसाद यादव, एमाले के सरोज कुमार यादव और नेकपा के युवराज भट्टराई द्वारा हस्ताक्षर होते ही रुका हुआ सरकार विस्तार कार्य पुनः शुरू हो गया है। 12 जेठ, जनकपुरधाम।

मधेश प्रदेश की सत्ता में हिस्सेदार तीन दलों के बीच 15 बिंदुओं पर सहमति स्थापित हुई है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) की असंतुष्टि के कारण पिछले तीन दिनों से सरकार का विस्तार प्रभावित था। इसी स्थिति में आज तीनों दलों- नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले और नेकपा- ने चुनाव तक सरकार को निरंतर बनाए रखने व एक करोड़ से कम मूल्य की योजनाएं न बनाने की सहमति की। इसके बाद सरकार विस्तार की प्रक्रिया पुनः गति पकड़ रही है।

सहमति पत्र में सरकार चलाने वाले साझेदार दलों के बीच आपसी समन्वय और समझदारी के आधार पर तेज़ी से कार्य करने का उल्लेख है। साथ ही आम जनता को प्रत्यक्ष रूप से सुशासन का अनुभव कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई गई है। तीनों दलों ने वित्तीय वर्ष 2083/084 के बजट निर्माण में विकास योजनाओं के लिए एक करोड़ रुपये से कम का विनियोजन नहीं करने का निर्णय लिया है।

इसी तरह, आगामी आर्थिक वर्ष से वर्तमान मंत्रिपरिषद् की संख्या घटाकर मुख्यमंत्री सहित 9 सदस्यों तक सीमित करने का उल्लेख है। मंत्रालयों का वितरण करते समय मुख्यमंत्री पद साझा रहेगा, जबकि नेकपा (एमाले) और नेपाली कांग्रेस को तीन-तीन तथा नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को दो मंत्रालय प्राप्त होंगे। इस समझौते के अनुसार विकास निर्माण योजनाएं खुली और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से संचालित की जाएंगी और वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही विकास निर्माण के कार्य आरंभ किए जाएंगे।

इतिहास में दर्ज सात महत्वपूर्ण बजट

समाचार सारांश सुवर्ण शमशेर ने २१ माघ २००८ में नेपाल का इतिहास में पहला बजट प्रस्तुत किया था। तत्कालीन अर्थमंत्री भरतमोहन अधिकारी ने आर्थिक वर्ष २०५१-५२ के बजट के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा भत्ता और ‘अपने गांव अपने हाथों बनाएं’ कार्यक्रम शुरू किए थे। अर्थ राज्य मंत्री महेश आचार्य ने आर्थिक वर्ष २०४८-४९ के बजट के तहत नेपाल में आर्थिक उदारीकरण और खुले बाजार अर्थव्यवस्था की नीति लागू की थी। १२ जेठ, काठमाडौं। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने प्रधानमंत्री की ओर से आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की नीति तथा कार्यक्रम पर उठे प्रश्नों के जवाब देने से पहले या विनियोजन विधेयक के सिद्धांत और प्राथमिकताओं पर उठी चिंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे हमेशा याद करने वाला बजट है – वह बजट जो सुवर्ण शमशेर ने २१ माघ २००८ को पेश किया था। विपक्ष के सांसदों द्वारा बजट की पारंपरिक दृष्टि से आलोचना करने पर अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा, ‘बजट संबंधी शब्द वही हैं जो २००८ साल में सुवर्ण शमशेर के बजट में शामिल थे।’ केवल शब्दों से नीति में सुधार जरूरी होता है, इसलिए आलोचना करना तार्किक नहीं माना जा सकता। अर्थमंत्री वाग्ले ने २००८ साल के बजट को याद किया, इस तरह नेपाल में इतिहास के रूप में दर्ज किए जाने वाले सीमित आर्थिक वर्ष के बजट ही आए हैं। आज नए बजट से पहले हम पिछले ७५ वर्षों में इतिहास रचने में सफल सात प्रमुख बजटों पर चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक माहौल ने वाग्ले को ऐसे महत्वपूर्ण बजट लाने का अवसर दिया है, परंतु वह अवसर वह किस प्रकार उपयोग करेंगे यह देखना बाकी है। २००८ साल : नेपाल का पहला आधिकारिक बजट २१ माघ २००८ को सुवर्ण शमशेर द्वारा प्रस्तुत यह बजट नेपाल का पहला आधिकारिक बजट था। उस समय राणा शासन के कारण राज्य संचालन में अनियमितता थी और आमदनी एवं खर्च की जानकारी किसी के पास नहीं थी। २००७ साल में प्रजातंत्र स्थापित होने के बाद सुवर्ण शमशेर ने बजट में लिखा है, ‘अब देश में लोकतांत्रिक और जवाबदेह सरकार है जिससे राष्ट्र की आमदनी और खर्च की जानकारी हमें और सम्पूर्ण विश्व को मिलेगी।’ उन्होंने यह बताते हुए गर्व महसूस किया कि वे प्रजातंत्र के पहले अर्थमंत्री के रूप में इतिहास में पहला बजट प्रस्तुत कर रहे हैं। इस पहले बजट में २००७ साल की अनुमानित आमदनी २ करोड़ ९० लाख और व्यय २ करोड़ ४६ लाख रूपए अंकित था। बजट का कुल आकार ५ करोड़ २५ लाख रुपये था जिसमें अनुमानित आमदनी ३ करोड़ ५ लाख रुपये थी। राणा शासन के शोषण में गरीब जनता को आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने के पहले कदम के रूप में यह बजट स्वर्ण अक्षरों में नेपाल के इतिहास में दर्ज है। २०१६/१७ : जननिर्वाचित सरकार का पहला बजट – कराधान की आरंभिक पहचान जननिर्वाचित सरकार का पहला बजट २०१६/१७ में प्रस्तुत किया गया। तत्कालीन उपप्रधानमंत्री तथा अर्थमंत्री सुवर्ण शमशेर ने २५ साउन २०१६ को संसद में बजट पेश किया था। इस बजट में प्रजातंत्र के बाद ७ से ८ वर्षों तक राजनीतिक अस्थिरता का उल्लेख था जिसने जनता के जीवन स्तर में ज्यादा सुधार नहीं किया। नेपाल की पंचवर्षीय योजना इसी दौरान आरंभ हुई थी। इस बजट के माध्यम से सरकार ने पहली बार आयकर लागू किया। व्यापार लाभ तथा वेतन पर कर निर्धारण किया गया था। बीपी कोइराला सरकार ने जमीन पर मालपोत कर भी लगाया था। उस समय बजट का आकार २४ करोड़ ८९ लाख रुपये था। कृषि, पेयजल, ग्रामीण विकास और व्यापार को प्राथमिकता दी गई थी। २०४१/४२ : उदार वित्तीय नीति – निजी बैंक खोलने का मार्ग प्रशस्त २६ असार २०४१ को अर्थमंत्री डॉ. प्रकाशचन्द्र लोहनी ने उदार वित्तीय नीति सहित २०४१/४२ के ऐतिहासिक बजट की घोषणा की। इस बजट ने निजी क्षेत्र के लिए सहज पहल की। मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए डॉ. लोहनी ने नए बैंक खोलने और वित्तीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की नीति अपनाई। इस बजट में वाणिज्य बैंक अधिनियम संशोधन, फाइनेंस कंपनी खोलने की अनुमति और कृषि में निवेश को अनिवार्य किया गया। कुल बजट ६ अरब ८० करोड़ रुपये था। २०४८/४९ : आर्थिक उदारीकरण और खुले बाजार अर्थव्यवस्था की नीति गिरिजाप्रसाद कोइराला के नेतृत्व में अर्थ राज्य मंत्री महेश आचार्य ने २७ असार २०४८ को जो बजट प्रस्तुत किया वह आर्थिक उदारीकरण की महत्वपूर्ण देन है। इसने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की नीति लेकर आई और व्यापार, विद्युत, बैंकिंग, हवाई सेवा और मीडिया में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया। इसी बजट में सार्वजनिक संस्थाओं में निवेश घटाकर निजीकरण शुरू करने और प्रबंधन सुधार की घोषणा की गई। निजी वित्त कंपनियां और वाणिज्य बैंक खोलने की अनुमति दी गई। विदेशी मुद्रा संबंधी नियमों को भी सरल बनाया गया। बजट का आकार २६ अरब ६४ करोड़ था। २०५१/५२ : सामाजिक सुरक्षा और ‘अपने गांव अपने हाथों बनाएं’ आर्थिक वर्ष २०५१/५२ के बजट दो बार प्रस्तुत हुए। पहली बार ३१ असार को महेश आचार्य ने पेश किया और बाद में एमाले नेतृत्व वाली अल्पमत सरकार ने ११ पुष को भरतमोहन अधिकारी द्वारा पूरक बजट पेश किया। इस बजट ने गांवों को विकास का केन्द्र बनाने का नारा दिया और गांव विकास समितियों को सीधे बजट देने की नीति अपनाई। सामाजिक सुरक्षा के तहत पांच जिलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत कार्यक्रम शुरू किया गया और अगले वर्ष ७५ जिलों में ७५ वर्ष से ऊपर के नागरिकों को मासिक भत्ता देने की घोषणा की गई। इस बजट में सार्वजनिक संसाधनों के सदुपयोग और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए कानूनी पहल शुरू की गई। बजट का कुल आकार ४२ अरब ६९ करोड़ था। २०६५/६६ : महत्वाकांक्षी बजट और ‘उभरती आर्थिक विकास’ २०६२/६३ के आंदोलन के बाद पहली जननिर्वाचित सरकार ने डॉ. बाबुराम भट्टराई के नेतृत्व में आर्थिक वर्ष २०६५/६६ का महत्वाकांक्षी बजट पेश किया। उन्होंने कहा, ‘एक युग से दूसरे युग में बड़ी छलांग के लिए जोखिम लेना जरूरी है।’ इस बजट में पहली बार १०,००० मेगा वाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया। निवेश बोर्ड के गठन का निर्णय लिया गया और पूर्व राजा की संपत्ति जनता के हित में खर्च करने की घोषणा की गई। सामाजिक सुरक्षा भत्ते वर्गीकृत किए गए तथा विभिन्न समुदायों के लिए भत्ते की नीतियां लायी गईं। बजट ने पूर्वाधार विकास को प्राथमिकता दी और कर्मचारियों के वेतन में समानता लाई। २ खरब ३६ अरब रुपये का यह बजट पूर्ववर्ती बजटों की तुलना में काफी बड़ा था। २०७२/७३ : रामशरण महत का ‘विश्व के सर्वश्रेष्ठ अर्थमंत्री’ बजट २०७२ के विनाशकारी भूकंप के बाद संकट के समय अर्थमंत्री डॉ. रामशरण महत ने २०७२/७३ का बजट पेश किया। भूकंप पुनर्निर्माण में तेजी से प्रगति करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर ४ अरब डॉलर की प्रतिबद्धता हासिल की। यह बजट न केवल पुनर्निर्माण का प्रतीक था, बल्कि वित्तीय पहुंच का विस्तार और निवेश प्रोत्साहन की शुरआत भी था। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण कोष की स्थापना हुई और ७४ अरब रुपये आवंटित किए गए। निजी आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता योजनाएं लागू की गईं तथा निवेश सम्मेलन की घोषणा भी की गई। इस आर्थिक वर्ष का बजट ८ खरब १९ अरब रुपये के बराबर था।

इतिहास में दर्ज सात बजट

समाचार सारांश

  • सुवर्ण शमशेर ने 21 माघ 2008 को नेपाल का इतिहास का पहला बजट सार्वजनिक किया।
  • तत्कालीन अर्थमंत्री भरतमोहन अधिकारी ने आर्थिक वर्ष 2051-52 के बजट के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा भत्ता और ‘अपने गाँव खुद बनाएं’ कार्यक्रम शुरू किया।
  • अर्थ राज्य मन्त्री महेश आचार्य ने आर्थिक वर्ष 2048-49 के बजट से नेपाल में आर्थिक उदारीकरण और खुला बाजार अर्थव्यवस्था की नीति लागू की।

12 जेठ, काठमांडू। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले जब प्रधानमंत्री की ओर से आगामी आर्थिक वर्ष 2083/84 के नीति तथा कार्यक्रम पर उठे प्रश्नों के उत्तर देने से पहले या विनियोजन विधेयक के सिद्धांत एवं प्राथमिकताओं पर उठे चिंताओं का समाधान करते हैं, तो वह हमेशा याद करते हैं – 21 माघ 2008 को सुवर्ण शमशेर द्वारा प्रस्तुत नेपाल का पहला बजट।

विपक्षी सांसदों द्वारा बजट पर पारंपरिक अर्थों में आलोचना किए जाने पर अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा था, ‘बजट से जुड़े शब्द वे ही हैं जो 2008 साल में सुवर्ण शमशेर के बजट में शामिल थे।’ शब्दों से मात्र नीति में सुधार आवश्यक होता है, इसलिए आलोचना को उन्होंने तर्कपूर्ण नहीं माना।

अर्थमंत्री वाग्ले के 2008 के बजट की याददाश्त की तरह नेपाल में इतिहास रचने जैसे कुछ सीमित आर्थिक वर्षों के बजट ही आए हैं। आज नए बजट आने से पहले हम पिछले 75 वर्षों में इतिहास बनाने में सफल सात बजटों पर चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक परिवेश ने वाग्ले को ऐसे महत्वपूर्ण बजट लाने का मौका दिया, लेकिन यह देखना बाकी है कि वे इसे कैसे उपयोग करेंगे।

2008 साल: नेपाल का पहला बजट

21 माघ 2008 को सुवर्ण शमशेर द्वारा प्रस्तुत यह बजट नेपाल का पहला आधिकारिक बजट था। उस समय राणा शासन के कारण राज्य संचालन में बहिष्कार था और राजस्व तथा खर्च की जानकारी किसी के पास नहीं थी।

2007 साल में प्रजातंत्र स्थापना के बाद सुवर्ण शमशेर ने बजट में लिखा है, ‘अब देश में लोकतांत्रिक और जवाबदेह सरकार होने के कारण राष्ट्र की आय और व्यय के बारे में खुद तथा विश्व को जानकारी मिल सकेगी।’ उन्होंने प्रजातंत्र के प्रथम अर्थमंत्री होने के नाते इतिहास में पहला बजट पेश कर पाने पर गर्व महसूस किया।

पहले बजट में 2007 साल के अनुमानित आय और खर्च का उल्लेख था; आय 2 करोड़ 90 लाख और खर्च 2 करोड़ 46 लाख रूपये। इस बजट का कुल आकार 5 करोड़ 25 लाख रूपये था और अनुमानित आय 3 करोड़ 5 लाख थी।

राणा शासन की शोषित जनता को आर्थिक स्वतंत्रता दिलाने के पहले कदम के रूप में यह बजट स्वर्ण अक्षरों में नेपाल के इतिहास में अंकित है।

2016/17: जननिर्वाचित सरकार द्वारा पहला बजट – करों में प्रारंभिक पहचान

जननिर्वाचित सरकार का पहला बजट 2016/17 में प्रस्तुत किया गया। तत्कालीन उपप्रधानमंत्री तथा अर्थमंत्री सुवर्ण शमशेर ने 25 साउन 2016 को संसद में बजट पेश किया।

इस बजट में लोकतंत्र के बाद 7-8 वर्षों तक राजनीतिक अस्थिरता की बात की गई थी, जिससे आम जनजीवन में सुधार के लिए पर्याप्त परिणाम नहीं निकले थे। इस समय नेपाल में पंचवर्षीय योजना भी शुरू हुई थी।

इस बजट से सरकार ने पहली बार आयकर लगाना शुरू किया। व्यापार लाभ या वेतन पर कर लगाया गया। बीपी कोइरालाकी सरकार ने जमीन पर मालपोत कर भी लगाया। उस समय का बजट 24 करोड़ 89 लाख रूपये था। कृषि, पेयजल, ग्रामीण विकास और व्यापार को प्राथमिकता दी गई थी।

2041/42: उदार वित्तीय नीति – निजी बैंक खोलने का मार्ग प्रशस्त

26 असार 2041 को अर्थमंत्री डॉ. प्रकाशचन्द्र लोहनी ने उदार वित्तीय नीति सहित 2041/42 का ऐतिहासिक बजट पेश किया। इस बजट ने निजी क्षेत्र के अनुकूल पहल की।

मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए डॉ. लोहनी ने नए बैंक खोलकर वित्तीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की नीति अपनाई। इस बजट में वाणिज्य बैंक अधिनियम संशोधन, फाइनेंस कंपनी खोलने की सुविधा और कृषि में निवेश अनिवार्य किया गया। बजट का आकार 6 अरब 80 करोड़ रूपये था।

2048/49: आर्थिक उदारीकरण और खुली बाजार अर्थव्यवस्था की नीति

गिरिजाप्रसाद कोइराला नेतृत्व में अर्थ राज्य मंत्री महेश आचार्य ने 27 असार 2048 को इस बजट को जारी किया, जो आर्थिक उदारीकरण की महत्वपूर्ण दस्तावेज था। इसने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई और व्यापार, विद्युत, बैंकिंग, हवाई सेवा और मीडिया में निजी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित किया।

इस बजट ने सार्वजनिक संस्थानों में निवेश में कटौती कर निजीकरण शुरू करने तथा प्रबंधन सुधार की घोषणा की। निजी वित्त कंपनी और वाणिज्य बैंक खोलने की अनुमति दी गई। विदेशी मुद्रा का प्रावधान भी सरलीकृत किया गया। बजट का आकार 26 अरब 64 करोड़ रूपये था।

2051/52: सामाजिक सुरक्षा और ‘अपने गाँव खुद बनाएं’

आर्थिक वर्ष 2051/52 के बजट को दो बार प्रकाशित किया गया। पहला 31 असार को महेश आचार्य ने पेश किया और बाद में एमाले नेतृत्व की अल्पमत सरकार ने 11 पुष को भरतमोहन अधिकारी के माध्यम से पूरक बजट प्रस्तुत किया।

इस बजट ने गाँव को विकास का केंद्रबिंदु बनाने की नीति अपनाई और सीधे गाँव विकास समितियों को बजट भेजने की व्यवस्था की। सामाजिक सुरक्षा के पायलट परियोजना के तौर पर पांच जिलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत कार्यक्रम शुरू किया गया, जबकि अगले वर्ष 75 जिलों में 75 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को मासिक भत्ता प्रदान करने की घोषणा की गई।

सार्वजनिक संसाधनों के उचित उपयोग और योजना क्रियान्वयन में सुधार लाने के लिए कानूनी प्रयास भी इसी बजट से शुरू हुए। बजट का आकार 42 अरब 69 करोड़ रुपये था।

2065/66: महत्वाकांक्षी बजट और ‘तेज आर्थिक विकास’

2062/63 के आंदोलन के बाद पहली जननिर्वाचित सरकार ने डॉ. बाबुराम भट्टराई के नेतृत्व में 2065/66 का महत्वाकांक्षी बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा था, ‘एक युग से दूसरे युग में बड़ा छलांग लगाने के लिए कुछ जोखिम उठाना जरूरी है।’

इस बजट में पहली बार 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया। निवेश बोर्ड स्थापना का निर्णय लिया गया और पूर्वराजा की संपत्ति जनता के हित में खर्च करने की घोषणा की गई। सामाजिक सुरक्षा भत्ता वर्गीकरण के साथ विभिन्न समुदायों के लिए भत्ता नीति लाई गई।

बजट ने आधारभूत संरचना विकास को प्राथमिकता दी और कर्मचारियों का वेतन समान किया। 2 खरब 36 अरब रुपये के इस बजट का आकार पूर्व के मुकाबले कहीं बड़ा था।

2072/73: रामशरण महत का ‘विश्व का श्रेष्ठ अर्थमंत्री’ बनाने वाला बजट

2072 के विनाशकारी भूकंप के बाद की आपदा के बीच अर्थमंत्री डॉ. रामशरण महत ने 2072/73 का बजट प्रस्तुत किया। भूकंप के बाद पुनर्निर्माण में आक्रामक वृद्धि करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों तथा 4 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता कायम की।

यह बजट सिर्फ पुनर्निर्माण का प्रतीक ही नहीं बल्कि वित्तीय पहुँच विस्तार और निवेश प्रोत्साहन का आरंभ था। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण कोष की स्थापना की गई और 74 अरब रुपये का आवंटन किया गया। निजी आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता योजना और निवेश सम्मेलन की भी घोषणा की गई। इस आर्थिक वर्ष का बजट 8 खरब 19 अरब रुपये के बराबर था।

प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत दो विधेयक प्रतिनिधि सभा से पारित

१२ जेठ, काठमांडू । प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) द्वारा प्रस्तुत किए गए दो विधेयक प्रतिनिधि सभा से पारित हो गए हैं। मंगलवार को आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में ‘प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन (प्रथम संशोधन) विधेयक २०८३’ और ‘मतदाता नामावली (प्रथम संशोधन) विधेयक २०८३’ को पारित किया गया। ये दोनों विधेयक प्रधानमंत्री बालेन ने गत वैशाख २५ को प्रतिनिधि सभा में दायर किए थे।

सोमवार को हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में भी इन्हीं दो विधेयकों को पारित किया गया था। अब ये विधेयक राष्ट्रीय सभा को प्रस्तुत किए जाएंगे। राष्ट्रीय सभा में भी पारित होने के बाद इन्हें फिर से प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा। राष्ट्रीय सभा में हुए संशोधनों को जब प्रतिनिधि सभा द्वारा स्वीकृत किया जाएगा, तब इन्हें सभामुख के माध्यम से प्रमाणित कर राष्ट्रपति कार्यालय भेजा जाएगा। राष्ट्रपति द्वारा प्रमाणीकरण के बाद ये विधेयक कानून के रूप में लागू हो जाएंगे।