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लेखक: space4knews

दशगजा इलाके में पुरुष का बेवारिसे शव मिला

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • सर्लाही के पर्सा गाउँपालिका–२ संग्रामपुर स्थित नेपाल-भारत सीमा के दशगजा इलाके में लगभग 50 वर्ष के पुरुष का बेवारिसे शव मिला है।
  • शव के पास मदिरा और भारतीय रुपये पाए गए हैं, शव का परीक्षण के लिए प्रादेशिक अस्पताल मलंगवा भेजा गया।

12 जेठ, सर्लाही। सर्लाही के पर्सा गाउँपालिका–२ संग्रामपुर इलाके में नेपाल-भारत सीमा के नजदीक दशगजा क्षेत्र में एक पुरुष का बेवारिसे शव मिला है।

जिला पुलिस कार्यालय सर्लाही के प्रवक्ता व डीएसपी सरोज राई के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 4 बजे सीमा स्तम्भ संख्या 317/2 के पास दशगजा के डिल में नेपाल की ओर लगभग 50 वर्ष के एक पुरुष का शव मिला है। मृतक का नाम और पहचान अभी तक पता नहीं चल पाई है।

पुलिस ने बताया कि घटनास्थल पर बोरे में रखी हुई मदिरा और कुछ भारतीय रुपये भी मिले हैं। स्थानीय लोगों ने शव देखकर पुलिस को सूचित किया था।

पुलिस ने कहा है कि शव का पोस्टमार्टम के लिए प्रादेशिक अस्पताल मलंगवा भेजने की तैयारी की जा रही है और इस संबंध में आगे जांच चल रही है।

गाईगोरे तस्करी पर पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार का नेपाल पर प्रभाव

झापा जिले में सोमवार पशुओं में लगने वाली खोरेत बीमारी से सम्बंधित कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में नेपाल से भारत की ओर गाईगोरे की अवैध निकासी विषय पर चर्चा हुई। वैटर्नरी अस्पताल एवं पशु सेवा विशेषज्ञ केंद्र भद्रपुर झापा के प्रमुख शीतल भट्टराई के अनुसार, सीमा से लगे भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद पहले होने वाली तस्करी फिर से एक महत्वपूर्ण विषय बन गई है। “अनौपचारिक बातचीत के दौरान यह बताया गया कि नेपाली हाट बाजार से किसान जो पशु नहीं खरीदते, उन्हें भारत की तरफ अवैध रूप से निकाला जाता है और भाजपा इस पर नियंत्रण के लिए कड़ाई कर रही है,” उन्होंने जानकारी दी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने गो-रक्षा पर जोर देते हुए नई नीतियां अपनाई हैं, जिसके कारण भारत के पशु हाट बाजार प्रभावित हुए हैं, ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं। अल जज़ीरा ने सोमवार को प्रकाशित खबर में बताया कि मुस्लिम पर्व ईद नजदीक आते हुए पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बाहरी इलाके में फैलता धुलागढ़ हाट बाजार सुनसान पड़ा है। नई भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 1950 के पशुबध संबंधित कानून को सख्ती से लागू करने की नीति लाई गई है। इस कानून में सार्वजनिक रूप से पशु वध पर रोक समेत कड़े प्रावधान शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल सरकार ने बांग्लादेश में अवैध व्यापार रोकने के लिए सीमा क्षेत्र में तारबाड़ लगाने का निर्णय लिया है। जानकारों के अनुसार, इस अवैध कारोबार में गाईगोरे की तस्करी भी शामिल है। यह तस्करी न केवल बिहार, झारखंड जैसे भारतीय राज्यों में बल्कि नेपाल से भी पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश की ओर की जाती है। “तारबाड़ लगाने के शुरू होते ही अवैध निकासी में काफी कमी आई है,” भट्टराई ने बताया, “सशस्त्र पुलिस और पशु क्वारंटीन प्रमुख इस संबंध में अधिक जानकारी रखते हैं।”

तपाईं सरकारलाई उत्तरदायी बनाउन सक्नुहुन्न ? – Online Khabar

सभामुखको क्षमता सम्बन्धमा नेपाली कांग्रेसको प्रश्न उठ्यो

१२ जेठ, काठमाडौं । प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेसले सभामुख डोलप्रसाद अर्यालको क्षमता सम्बन्धमा प्रश्न उठाएको छ। प्रतिनिधिसभाको बैठकमा नेपाली कांग्रेसका सांसद अभिषेक प्रताप शाहले प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाहलाई सदनमा उपस्थित गराउन किन रुलिङ नगरिएको भनेर प्रश्न गरेका छन्। ‘प्रधानमन्त्रीमाथि रुलिङ गर्ने अधिकार तपाईंलाई छ। कुनै पनि मन्त्री, प्रधानमन्त्री र सांसदलाई रुलिङ गर्ने अधिकार तपाईंको छ। त्यो अधिकार प्रयोग गर्नलाई कसले रोकेको छ?’ शाहले बताए। यसै क्रममा उनले सभामुखको क्षमतामाथि समेत प्रश्न उठाएका छन्। ‘यो सदन जान्न चाहन्छ, तपाईंलाई रुलिङ अधिकार प्रयोग गर्न कसले रोक्यो? कसले छेक्यो?’ शाहले भने, ‘तपाईं कार्यपालिकाप्रमुख प्रधानमन्त्रीलाई सदनप्रति जवाफदेह बनाउन सक्नुहुन्न र?’ यस विषयमा समग्र नेपालले जवाफ चाहिरहेको उनले बताए। सभामुखबाट रुलिङ गरि प्रधानमन्त्रीलाई सदनमा उपस्थित गराउनुपर्ने उनको आग्रह पनि छ। जवाफमा सभामुख अर्यालले प्रधानमन्त्री संसद्मा आउने तयारी गरिरहेका बताएका छन्। उनले छिट्टै प्रधानमन्त्रीले सदनमा आएर जवाफ दिने विषय बारम्बार दोहोर्‍याए। ‘माननीय सदस्यहरूले मिति माग्नुभएको छ। मिति, समय। सदन चलेकै दिन सम्माननीय प्रधानमन्त्रीज्यू आउनुहुनेछ। म सदन चलेकै दिन सम्माननीयज्यूलाई बोलाउँछु’ सभामुख अर्यालले भने। प्रधानमन्त्रीले समय तोक्नासाथ त्यसको सूचना सदनलाई दिने उनले बताए।

फैशन केवल कपड़े नहीं, आत्मविश्वास भी है

समाचार सारांश

  • सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करने की आदत से व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर होता है, इसलिए अपने शरीर को स्वीकार करना फैशन का पहला पाठ माना जाता है।

आज के डिजिटल युग में फैशन व्यक्ति के दैनिक जीवन से गहरे जुड़ा हुआ विषय बन गया है। सोशल मीडिया, टिकटोक, फिल्मों, सेलिब्रिटी संस्कृति और लगातार बदलते ट्रेंड हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप में प्रभावित कर रहे हैं।

सुबह से शाम तक मोबाइल पर विभिन्न प्रकार के फैशन, मेकअप, स्टाइल और ‘परफेक्ट’ शरीर की तस्वीरें देखने को मिलती हैं। इसलिए कई लोगों के मन में एक सवाल उठता है, ‘क्यों वह कपड़ा दूसरों को अच्छा लगता है, मुझे अच्छा नहीं लगता?’

अक्सर लोग पसंदीदा सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर या दोस्तों की स्टाइल की नकल करने की कोशिश करते हैं। वे उनसे मिलते-जुलते कपड़े खरीदते हैं, वैसा ही हेयरस्टाइल अपनाते हैं, वैसा ही मेकअप बनाते हैं, लेकिन फिर भी खुद को उतना आत्मविश्वासी या आकर्षक महसूस नहीं कर पाते।

इसका मुख्य कारण यह है कि फैशन केवल कपड़े नहीं है, यह व्यक्तित्व, शरीर की बनावट, आत्म-स्वीकारोक्ति और जीवनशैली से जुड़ा विषय है। सबसे पहले खुद को समझना सीखना चाहिए। दूसरों से तुलना किए बिना अपने शरीर, आराम और व्यक्तित्व के आधार पर स्टाइल बनाना जरूरी है।

हम सभी अलग हैं। किसी की आंखें, किसी की नाक, किसी का शरीर, किसी की ऊंचाई अलग होती है। यही अलगाव हमारी सुंदरता है। लेकिन हम इसे स्वीकार करने से पहले दूसरों जैसे बनने की कोशिश करते हैं।

तुलना करने की आदत आत्मविश्वास कैसे कमजोर करती है?

आजकल बहुत लोगों की सबसे बड़ी समस्या लगातार तुलना करना है। सोशल मीडिया पर किसी को अच्छा देखकर खुद को कम आंकने की आदत बढ़ रही है।

अगर किसी अभिनेत्री ने कोई ड्रेस पहनी और वह अच्छी लगी, तो वही कपड़ा खरीद लिया जाता है। यदि किसी टिकटॉक क्रिएटर का फैशन वायरल हो जाता है, तो वही फॉलो करने की कोशिश होती है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब वह कपड़ा पहनने पर असहज महसूस होता है। तब कई लोग सोचने लगते हैं, ‘मैं अच्छा नहीं हूं’, ‘मेरा शरीर ठीक नहीं है’, ‘मुझे कुछ भी सूट नहीं करता’।

समस्या कपड़े में नहीं, तुलना करने की सोच में है। हमने दूसरों को देखकर खुद का मूल्यांकन करना शुरू कर दिया है। सोच बन गई है कि केवल उनकी आंखें, नाक, शरीर हो तो ही हम अच्छे लगेंगे। लेकिन हमने कभी अपने शरीर को धन्यवाद नहीं दिया।

लोग अपने शरीर को अक्सर केवल बाहरी सुंदरता के आधार पर देखते हैं लेकिन शरीर द्वारा दैनिक जीवन में किए गए काम की कद्र कम करते हैं। हमारे पास आंखें हैं जो दुनिया दिखाती हैं, कान हैं जो सुनने में मदद करते हैं, हाथ हैं जो काम करने में सहायता करते हैं। हमें इन सबका सम्मान करना सीखना चाहिए।

जब तक व्यक्ति खुद को दूसरों से तुलना करना बंद नहीं करेगा, तब तक कोई भी फैशन उसे आत्मविश्वास नहीं दे सकता।

अपने शरीर को समझना ही फैशन का पहला पाठ है

कई लोग फैशन सुनते ही ट्रेंड, ब्रांड या महंगे कपड़े सोचते हैं, लेकिन असल में फैशन अपनी बॉडी को समझने से शुरू होता है। कपड़े तो शरीर पर ही पहने जाते हैं। शरीर को न समझकर फैशन को कैसे समझा जा सकता है?

हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। किसी की बांहों पर वजन ज्यादा होता है, किसी के कूल्हों पर, तो किसी के पेट के आसपास। कपड़ा पहनते समय किसी को ऊपर टाइट लग सकता है तो किसी को नीचे। यही बातें शरीर की बनावट यानी बॉडी शेप की जानकारी देती हैं।

आमतौर पर शरीर को पांच प्रकारों में विभाजित किया जाता है: त्रिकोणीय, उल्टा त्रिकोण, आयताकार, गोलाकार और ऑवरग्लास यानी डमरू के आकार जैसा। लेकिन कोई भी पूरी तरह से एक शेप में फिट नहीं होता, केवल मिल्दोजुल्दो संरचना होती है।

 

हम खुद को “पियर शेप”, “एप्पल शेप” जैसे नामों से जानते हैं, यह केवल शरीर की संतुलन समझने का तरीका है। खुद को किसी फल से तुलना करके तनाव लेने की जरूरत नहीं है।

शरीर की बनावट समझने के बाद कपड़ा चुनना आसान होता है। पता चलता है कि कौन-सी फिटिंग आरामदायक है, कौन-सा कट बेहतर दिखता है, कौन-से कपड़े शरीर को संतुलित दिखाते हैं।

आइडल बॉडी क्या होती है?

फैशन इंडस्ट्री ने लंबे समय तक ‘परफेक्ट बॉडी’ की धारणा बनाई पर अब यह सोच बदल रही है। आइडल बॉडी कोई सटीक माप नहीं होती। सौंदर्य के मानदंड समाज और संस्कृति के अनुसार भिन्न होते हैं।

किसी देश में गोरी त्वचा को सुंदर माना जाता है तो कहीं गेहुँआ रंग को आकर्षक; कहीं बड़े होंठ पसंद किए जाते हैं तो कहीं लंबी गर्दन। इसलिए खुद को मॉडल या सेलिब्रिटी से तुलना करना उचित नहीं।

मॉडल अपने शरीर के लिए काफी समय देते हैं, अपने जीवनशैली, आहार, फिटनेस पर ध्यान केंद्रित करते हैं। लेकिन हमारी जिंदगी अलग होती है। हम ऑफिस जाते हैं, घर संभालते हैं, बच्चों की देखभाल करते हैं, रोजाना के काम काज करते हैं।

हर व्यक्ति के अंदर कुछ न कुछ असुरक्षा होती है, लेकिन ज्यादातर लोग अपनी ही समस्याओं को बड़ा सोचते हैं। पर्सनल स्टाइल बाहरी नहीं, अंदर से आती है।

लोग अक्सर सोचते हैं ‘मुझे कौन-सा स्टाइल सूट करता है?’ इसका जवाब बाजार, टिकटक या सेलिब्रिटी में नहीं, अपने अंदर होता है और उसे खोजना पड़ता है।

पर्सनल स्टाइल का मतलब वह शैली है जो आपको आरामदायक, आत्मविश्वासी और प्राकृतिक महसूस कराती है।

‘मुझे क्या पसंद है, कौन-सा रंग पहनने से मैं अच्छा दिखता हूं, कौन-से कपड़े आरामदायक हैं, कौन-सा स्टाइल मेरे व्यक्तित्व से मेल खाता है’ — यही समझना पर्सनल स्टाइल है।

जब कोई अपनी स्टाइल पहचान लेता है, तब दूसरों से तुलना करने की जरूरत नहीं पड़ती। जब आंतरिक और बाह्य विश्व मेल खाते हैं, तो आए हुए आत्मविश्वास को कोई हरा नहीं सकता।

कई कपड़े होने के बाद भी ‘कुछ पहनने के लिए नहीं’ जैसा क्यों लगता है?

यह समस्या खासकर महिलाओं में होती है। अलमारी कपड़ों से भरी होती है लेकिन बाहर जाते समय लगता है, ‘मेरे पास पहनने को कुछ नहीं है।’ इसका कारण फैशन की कमी नहीं, स्पष्टता की कमी है।

अधिकतर लोग ट्रेंड, सेल, दूसरों की सलाह या ‘फोमो’ की वजह से कपड़े खरीदते हैं। असल में अपने लिए क्या चाहिए, यह नहीं जानते। इस वजह से अलमारी भरी रहती है, लेकिन इस्तेमाल में आने वाले कपड़े कम होते हैं। इसे हम रसोई की तुलना कर सकते हैं। रोजमर्रा के लिए चावल और दाल चाहिए लेकिन अगर रसोई में सिर्फ सॉस, स्नैक्स और ब्रेड हों तो समस्या होगी। वार्डरोब भी ऐसा ही होता है।

अगर अक्सर ऑफिस जाना है तो ऑफिस वियर ज्यादा होना चाहिए। अगर जीवनशैली साधारण है तो पार्टी वियर ज्यादा होने पर काम नहीं आता। कई लोग ट्रेंड के पीछे भागते हैं। एक सीजन में वायरल कपड़ा दूसरे में चलन में नहीं रहता। परिणामस्वरूप अलमारी भरी रहती है लेकिन रोजमर्रा के लिए जरूरी कपड़ों की कमी रहती है।

ऑफिस वियर में सादगी क्यों जरूरी है?

ऑफिस फैशन में सबसे महत्वपूर्ण है सादगी और बहुपयोगिता। ऑफिस के लिए न्यूट्रल रंग उपयुक्त होते हैं जैसे काला, सफेद, बेज, कैमल, ग्रे, नेवी ब्लू। ये रंग आसानी से अन्य रंगों के साथ मेल खाते हैं। अच्छी फिटिंग वाली शर्ट, सिंपल टीशर्ट, फॉर्मल पैंट, ब्लेज़र या कोट जैसे बेसिक कपड़े वार्डरोब में होने चाहिए। पहले चरण में अच्छी क्वालिटी के बेसिक कपड़े खरीदें, फिर उन्हें मिलाना आसान होता है।

मां बनने के बाद फैशन सेंस में बदलाव क्यों आता है?

मां बनना महिलाओं के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव है। शरीर, भावनाएं, समय, प्राथमिकताएं और आत्म-छवि सभी बदल जाती हैं। कई महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद खुद को भूल जाती हैं। “मैंने दो साल से खुद को आईने में देखा ही नहीं” जैसी बातें सुनने को मिलती हैं।

बच्चे की देखभाल में इतना समय और मानसिक ऊर्जा लगती है कि महिलाएं खुद को प्राथमिकता देना बंद कर देती हैं। शरीर में आए बदलाव से आत्मविश्वास कम हो जाता है। और समाज की टिप्पणियां समस्या को और बढ़ा देती हैं।

“कितनी मोटी हुई”, “अभी तक कम नहीं हुई”, “पहले कैसी थी अब कैसी है” जैसी टिप्पणियां महिलाओं को मानसिक रूप से कमजोर कर देती हैं।

मां बनने के बाद खुद को प्राथमिकता कैसे दें?

मां बनने के बाद भी महिलाओं को खुद को पूरी तरह से भूलना नहीं चाहिए। मानसिक रूप से स्वस्थ और खुश रहना जरूरी है। जब आप खुश होती हैं, तो वह खुशी परिवार में भी फैलती है।

इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। छोटे-छोटे सेल्फ केयर रूटीन से बड़ा फर्क पड़ता है। सुबह कुछ मिनट खुद के लिए निकालना, बाल सँवारना, त्वचा की देखभाल करना, अपने पसंद के कपड़े पहनना आत्मविश्वास वापस लाने में मदद करता है।

घर पर ही रहना हो तब भी पुराने कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं कि आप अच्छा महसूस न करें। घर में भी अपने लिए अच्छे कपड़े पहनने चाहिए।

नवजात माताओं के लिए आरामदायक और स्टाइलिश फैशन

बच्चा जन्माने के बाद कई महिलाएं अपने शरीर को छुपाने के लिए बड़े और ढीले कपड़े पहनती हैं। लेकिन शरीर छिपाने की बजाय सहज तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास करना चाहिए।

नवजात माताओं के लिए कॉटन के आरामदायक कुर्ते, शर्ट ड्रेस, फ्लोई स्कर्ट, साधारण टॉप, हल्का आउटवियर और आरामदायक फिटिंग वाले कपड़े उपयुक्त होते हैं। खासकर छाती और पेट के क्षेत्र में बदलाव आते हैं तो वहां आरामदायक डिजाइन चुनना चाहिए।

शरीर के उन हिस्सों को हाइलाइट किया जा सकता है जो आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।

 

राष्ट्रपालाई समझाएं: आधे जनसंख्या का प्रतिनिधित्व विपक्षी बेंच करता है : नेकपा

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • नेकपा के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल ने प्रधानमंत्री से संविधान से ऊपर न समझने और संसद के प्रति जवाबदेह बनने का आग्रह किया है।
  • संसद की नियमावली के अनुसार प्रधानमंत्री को संसद की रौस्टम पर खड़े होकर अनिवार्य संबोधन करना चाहिए, ऐसा दुलाल ने बताया।
  • विपक्ष के विरोध के बावजूद जबरदस्ती विधेयक पारित करने की सरकारी शैली के खिलाफ दुलाल ने बहुमत के घमंड से बचने की चेतावनी दी।

12 जेठ, काठमांडू। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से संविधान से ऊपर न समझने की अपील की है।

पार्टी की ओर से प्रतिनिधि सभा में विशेष समय में बोलते हुए, नेकपा के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल ने कहा कि संसद से जन्मा प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। प्रधानमंत्री शाह को संविधान से ऊपर समझा जाना गलत है और संसद में उन्हें जानकारी देनी चाहिए, ऐसा सरकार की ओर से कहा जाना चाहिए।

कम से कम एक मिनट के लिए भी प्रधानमंत्री को संसद के रोस्टम पर खड़े होकर संबोधन करना चाहिए, दुलाल ने बताया।

“प्रधानमंत्री संविधान से ऊपर हैं, इसलिए उन्हें विशेष छूट मिलनी चाहिए, यह सरकार की ओर से सदन में आना चाहिए,” उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी सभामुख के माध्यम से सरकार से जवाब मांगती है। आखिर प्रधानमंत्री इसी संसद से चुना गया है और उसे संसद को संबोधित करना ही होगा। चाहे एक मिनट के लिए न हो, प्रधानमंत्री को रोस्टम पर आकर खड़ा होना ही पड़ेगा।”

दुलाल ने कहा कि शाह विपक्ष के भी प्रधानमंत्री हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से संविधान और प्रतिनिधि सभा की नियमावली के भीतर रहते हुए सदन का सम्मान करने का आग्रह करना उनका अधिकार है।

सत्तारूढ़ पक्ष की बहुमत होने के बावजूद विपक्ष के विरोध के बीच जब जबरदस्ती विधेयक पारित किया जाता है, तो वे सभामुख को इसे राष्ट्रपति के समक्ष प्रमाणीकरण के लिए भेजने की चुनौती भी देते हैं।

“कुछ दिन पहले विपक्ष के अवरोध के बीच वैकल्पिक वित्त संबंधी विधेयक पास किया गया। सत्तापक्ष के सांसदों को भी इसमें योगदान नहीं मिला। संसद में बहस और तर्क वितर्क के बाद ही महत्वपूर्ण विधेयक पारित होना चाहिए। यदि सरकार कहती है कि उनके पास बहुमत है तो फिर हमें यहाँ क्यों बैठना पड़ता है? जब सभी सरकारें विधेयक लाएंगी तो क्या सभामुख इसे राष्ट्रपति के पास भेज देंगे? इस प्रक्रिया का क्या मतलब है?” दुलाल ने सवाल किया।

संसद नियमावली के कुछ प्रावधानों को अपनी सुविधा अनुसार लागू करते हुए सत्तापक्ष ने प्रश्नोत्तर में प्रधानमंत्री को संसद में उपस्थित कराने की व्यवस्था का पालन नहीं किया, दुलाल ने कहा।

यदि प्रधानमंत्री को संसद में आकर बोलना जरूरी है तो यदि संविधान या कानून का उल्लंघन हो तो वे इसका सामना करने के लिए रेडियो (रास्वपालाई) को चुनौती देते हैं।

“नियमावली के अनुसार प्रधानमंत्री को संसद में आकर बोलना चाहिए, इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। यदि गलती है तो इसे सभामुख के माध्यम से बताएँ, हम जानना चाहते हैं कि हमें कैसे कारण बताने का मौका मिलेगा,” दुलाल ने कहा, “प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम 38(1) का उपयोग करने वाले को नियमावली के 61(1) का पालन करना चाहिए या नहीं? यह जवाब संसद में खोजना उचित होगा या नहीं?”

दुलाल ने कहा कि सदन में बहुमत होने के बावजूद यह न भूलें कि विपक्ष को भी आधे मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है।

“संसदीय व्यवस्था या लोकतंत्र में बहुमत हमेशा वास्तविक बहुमत को दर्शाता नहीं है। वर्तमान में सत्तारूढ़ दल के पास बहुमत है, इसे हमने स्वीकार किया। इसके साथ ही जो आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं वे विपक्षी बेंच में भी होने चाहिए, संसद को इसे समझना चाहिए,” उन्होंने कहा, “चुनावी प्रणाली में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों को प्रतिनिधित्व मिलता है। आधे नेपाली नागरिकों का प्रतिनिधित्व विपक्षी ने किया है और उनकी आवाज़ को भी महत्व देना चाहिए। यह सभी नेपाली की आवाज़ों को महत्व देना है।”

तयार भयो नयाँ संसद् : कुर्सीदेखि कार्पेटसम्म निलो (तस्वीरहरू)

नई संसद भवन तैयार : कुर्सी से कार्पेट तक नीले रंग की सजावट

नई संसद की बैठक कक्ष को नीले रंग से सजाया गया है। पर्दे, दीवारें, कार्पेट और सोफा सभी नीले रंग में हैं।

प्रधानमंत्री न आने तक संसद संचालन न करने पर विपक्षी दलों का सयुंक्त निर्णय

प्रतिनिधिसभा में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के संसद में न आने तक सदन संचालन रोकने का स्पष्ट रुख अपनाया है। नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले, और राप्रपा सहित विपक्षी दलों के प्रमुख सचेतकों ने प्रधानमंत्री से सांसदों के प्रश्नों के जवाब संसद में आने पर ही देने की मांग की है। श्रम संस्कृति पार्टी के आरोन राइ ने कहा, “प्रधानमंत्री संसद में आकर सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार नहीं हुए तक हमारा विरोध जारी रहेगा।” १२ जेठ, काठमाडौँ।

विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के संसद में न आने तक सदन के संचालन को बाधित करने का कड़ा फैसला लिया है। सोमवार को प्रतिनिधिसभा की बैठक में आकस्मिक समय, शून्य समय और विशेष समय समाप्त होने के बाद कार्यसूची पर जाने से पहले विपक्षी दलों ने विरोध जताया। सभामुक्त ने बोलने का समय देने के बाद विपक्षी दलों के सांसदों ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के उपस्थित न होने तक सदन का संचालन नहीं होगा।

नेपाली कांग्रेस की प्रमुख सचेतक बसना थापा ने कहा कि प्रधानमंत्री को नागरिकों के प्रश्नों का जवाब संसद में देना चाहिए। नेकपा एमाले के प्रमुख सचेतक ऐन महर ने संविधान तथा कानूनी प्रावधानों के अनुरूप प्रधानमंत्री की संसद में उपस्थिति को जरूरी बताया। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल ने सभी को संविधान और कानून का पालन करते हुए आगे बढ़ने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री को बैठकों में आने और रोस्टम पर खड़े होकर बोलने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन विपक्षी दलों की मांग है कि वे संसद में उपस्थित हों। श्रम संस्कृति पार्टी के आरोन राइ ने कहा कि यह इतिहास में एक संदर्भ स्थापित करने का विषय है और आने वाली पीढ़ी के लिए संदेश बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संख्या का गर्व अस्थायी है और पांच वर्ष बाद चुनाव होंगे, जिसके बाद नया समीकरण बन सकता है। ‘जब तक प्रधानमंत्री संसद में आकर सांसदों के प्रश्नों का जवाब नहीं देंगे, हमारा विरोध जारी रहेगा,’ उन्होंने कहा। राप्रपा की प्रमुख सचेतक खुश्बू ओली ने कहा कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति के लिए सत्ता पक्ष को भी पहल करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा, ‘जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद क्यों नहीं करना चाहते?’

प्रधानमंत्री के आने तक संसद अधिवेशन रोकने का विपक्षी दलों का ऐलान

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा सम्पन्न।

  • प्रतिनिधि सभा में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की उपस्थिति तक संसद के अधिवेशन को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है।
  • नेपाली कांग्रेस, एमाले, राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी सहित विपक्षी दलों के प्रमुख सांसदों ने प्रधानमंत्री से सांसदों के प्रश्नों के जवाब संसद में देने की मांग की है।
  • श्रम सांस्कृतिक पार्टी के आरोन राई ने कहा, “प्रधानमंत्री सांसदों के प्रश्नों के जवाब देने के लिए तैयार नहीं होंगे तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा।”

२५ मई, काठमांडू – विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि तब तक प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही नहीं चलेगी जब तक प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) संसद में उपस्थित नहीं होते।

सोमवार को आपातकालीन समय, शून्य घंटे और विशेष समय के बाद विपक्षी दलों ने एजेन्डा की ओर बढ़ने से पहले विरोध प्रदर्शन किया।

सभापति द्वारा वक्तव्य देने के लिए समय प्रदान किए जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने कहा कि प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में संसद की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।

नेपाली कांग्रेस की प्रमुख संसदीय सदस्य बसना थापा ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को जनता के प्रश्नों के जवाब देना आवश्यक है।

संसदीय दल के प्रमुख सदस्य अइन महरा ने संविधान और कानून के अनुसार प्रधानमंत्री का संसद में उपस्थित होना अनिवार्य बताया।

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सदस्य युवराज दुलाल ने सभी से संविधान और कानून का पालन करते हुए आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भले ही समय लगे, प्रधानमंत्री को संसद के रोस्ट्रम पर आकर संबोधित करना चाहिए।

श्रम सांस्कृतिक पार्टी के आरोन राई ने इतिहास में उदाहरण स्थापित करने और आने वाली पीढ़ी को संदेश भेजने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि जनमत की संख्या पर गर्व अस्थायी होता है, क्योंकि पांच साल बाद चुनाव नई परिस्थितियां लेकर आता है।

“हमारा विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक प्रधानमंत्री संसद में आकर सांसदों के प्रश्नों के जवाब देने को तैयार नहीं होते,” राई ने कहा।

राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी की प्रमुख सदस्य खुशी ओली ने सरकार से अपील की कि वे विपक्षी दलों के साथ मिलकर सुनिश्चित करें कि प्रधानमंत्री संसद में उपस्थित हों। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया, ‘आप जनप्रतिनिधियों से संवाद करने में अनिच्छुक क्यों हैं?’

विपक्षीको विरोधलाई रास्वपा सांसद जगदीश खरेलले भने ‘तमासा’

रास्वपाका सांसद जगदीश खरेलले विपक्षीको विरोधलाई ‘तमासा’ को रूपमा टिप्पणी गरे

१२ जेठ, काठमाडौं। प्रतिनिधिसभाको बैठकमा विपक्षीहरूले गरेको विरोधलाई सत्ता पक्षका रास्वपाका सांसद जगदीश खरेलले ‘तमासा’ भनेका छन्। संसदमा प्रधानमन्त्रीको जवाफदेहिता र उपस्थितिको माग गर्दै निरन्तर विरोध गरिरहेका विपक्षी दलहरूलाई उनी आरोप लगाउँदा बैठक केही समयका लागि स्थगित भएको छ। विरोधका बीचमा पनि संसदको कारबाही जारी रहेको थियो।

कार्यसूची अनुसार पर्यटन विधेयकमाथिको सैद्धान्तिक छलफलमा भाग लिन रोस्टममा उपस्थित सांसद खरेलले सुरुमा विपक्षीहरूलाई आरोप लगाउन थालेपछि फ्लोरमा उनीविरुद्ध विरोध गरिरहेका सांसदहरू झन आक्रोशित भएका थिए। कांग्रेस सांसद नरेन्द्रकुमार केरुङले खरेलको अभिव्यक्तिमाथि प्रतिक्रिया जनाउँदै रोस्टर तर्फ अघि बढ्न खोजे। यस क्रममा कांग्रेस प्रमुख सचेत वासना थापाले उनलाई थुम्थुम्याएर पछाडि हटाएकी थिइन्। यसअघि सभामुखले संसदमा अपमानजनक शब्द प्रयोग नगर्न पटक–पटक रुलिङ दिएका थिए।

रास्वपाका संसदीय दलका उपनेता गणेश पराजुलीदेखि एमाले संसदीय दलका नेता रामबहादुर थापासम्मका अभिव्यक्तिहरू संसदीय रेकर्डबाट हटाइएका छन्। खरेलले भने, ‘म आज गहिरोसँग महसुस गरें, सरकारले किन आठवटा अध्यादेश ल्याउनुपर्‍यो भन्ने कुरा बुझे।’ उनले थपे, ‘संसद यसरी नै सञ्चालन हुँदै आएको विगत वर्षदेखि हामीले २०७२ सालमा संविधान निर्माण भएको बेला बनाउनु पर्ने कानून निर्माण गर्न नसकेको यो तमासाले स्पष्ट देखाएको छ।’ उनले विपक्षीहरूमाथि चोर औँला देखाउँदै विरोधलाई तमासा भने।

उनले भने, ‘संसदीय तमासा जुन हामी देखाइरहेका छौं, सँधै सकारात्मक हुँदैन।’ जनताको प्रतिनिधित्व गर्ने र कानुन बनाउनुपर्ने सन्दर्भमा विपक्षी दलका सांसदहरू पनि जिम्मेवार हुनुपर्ने उनले जोड दिए। ‘प्रधानमन्त्री उपस्थित हुने वा नहुने कुराले कानुन बनाउने प्रक्रियामा अवरोध पुऱ्याउन सक्छ?’ खरेलले प्रश्न उठाए। कलाकारिय अभिव्यक्तिपछि विपक्षी सांसदहरू थप उग्र बने। त्यसपछि सभामुख अर्यालले प्रतिनिधिसभाको बैठक १५ मिनेटका लागि स्थगित घोषणा गरे।

विपक्ष की अवरोध के बावजूद सभापति ने संसद की कार्यसूची आगे बढ़ाई

विपक्ष की अवरोध के बीच सभापति डोलप्रसाद अर्याल ने संसद की कार्यसूची आगे बढ़ाई है। विपक्ष प्रधानमंत्री बालेन शाह की संसद में उपस्थिति की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

१२ जेठ, काठमांडू। विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद सभापति डोलप्रसाद अर्याल ने संसद की कार्यसूची को आगे बढ़ाया है। विपक्ष ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की उपस्थित होने की मांग करते हुए संसद में विरोध जताया है। इन विरोधों के बीच भी सभापति अर्याल ने कार्यसूची को जारी रखने का निर्णय लिया है।

साथ ही, पर्यटन मंत्री खडकराज पौडेल ने संसद में पर्यटन विधेयक २०८२ पर विचार करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। सभा की अन्य कार्यसूचियों में भी सभापति ने काम को आगे बढ़ाया है।

इज़रायल ने लेबनान में फिर से हवाई हमला किया, हिजबुल्लाह ने दिया जवाबी प्रहार

इज़रायली सेना ने लेबनान के विभिन्न भागों में फिर से बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। यह हमला इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू द्वारा हिजबुल्लाह के खिलाफ संघर्ष को और सख्त बनाने की घोषणा के बाद किया गया है। इज़रायली सैन्य बलों ने पूर्वी लेबनान की बेका घाटी समेत अन्य क्षेत्रों को निशाना बनाया है।

ईरान समर्थित लेबनानी सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह ने भी तत्काल जवाबी कार्रवाई की है। हिजबुल्लाह ने इज़रायली सेना, टैंक्स एवं बंकरों पर २२ ड्रोन और रॉकेट दागे जाने की जानकारी दी है। कुछ समय पहले दोनों पक्षों के बीच ४५ दिनों के लिए युद्धविराम की सहमति हुई थी, लेकिन द्विपक्षीय संघर्ष अभी तक रोक नहीं पाया है।

प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने कहा है कि इज़रायल मौजूदा समय में हिजबुल्लाह के साथ युद्धरत है। उन्होंने सेना को हिजबुल्लाह के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब तक ६०० से अधिक लड़ाके मारे जाने का दावा इज़रायल ने किया है। कुछ इज़रायली मंत्री इस लड़ाई को लेबनान की राजधानी बेरूत तक ले जाने की बात कर रहे हैं।

यह विवाद पिछले २८ फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमला किया था। ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु के बाद हिजबुल्लाह ने उनकी हत्या का बदला लेने के लिए इज़रायल पर क्षेप्यास्त्र दागे थे। इसके बाद से इज़रायल ने लेबनान में बड़े हमले और सैन्य परिचालन की शुरुआत की। अब तक इज़रायली हमलों में लेबनान में ३,००० से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। लगातार बमबारी के कारण लेबनान के १० लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं।

कोलम्बिया की टीम ने फिफा विश्व कप 2026 के लिए रोड्रिग्वेज को शामिल करने की घोषणा की

फिफा विश्व कप 2026 के लिए कोलम्बिया की अंतिम टीम की घोषणा कर दी गई है, जिसमें कप्तान जेम्स रोड्रिग्वेज भी शामिल हैं। 34 वर्षीय मिडफील्डर रोड्रिग्वेज इस सत्र स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण कई मैच नहीं खेल पाए थे। मार्च महीने में फ्रांस के खिलाफ दोस्ताना मैच के बाद उनकी तबियत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें विश्व कप टीम में शामिल किया गया है।

कोलम्बिया जून 1 को कोस्टारिका और जून 7 को जॉर्डन के साथ दोस्ताना मैच खेलेगा। विश्व कप के ग्रुप ‘के’ में शामिल कोलम्बिया अपना पहला मैच जून 17 को उज्बेकिस्तान के खिलाफ खेलेगा। इसके बाद वे डीआर कांगो और पोर्चुगल के खिलाफ मुकाबले में उतरेंगे।

कोलम्बिया की विश्व कप टीम में गोलकीपर के रूप में कामिलो भार्गास, अल्वर्रो मोंटेरो और डेविड ओस्पिना शामिल हैं। डिफेंडरों में देविन्सन सांचेज, जॉन लुकुमी, येरी मिना, विलर डिट्टा, डैनियल मुñoज, सैंटियागो आरियास, जोहान मोजिका और डेइवर माचाडो शामिल हैं। मिडफील्ड में रिचर्ड रियोस, जेफरसन लेर्मा, केविन कास्तानो, जुआन कामीलो पोर्तिया, गुस्तावो पुर्ता, जॉन आरियास, होरखे कारास्कल, जुआन फर्नांडो क्विन्तेरो, जेम्स रोड्रिग्वेज और जामिंटन काम्पाज शामिल हैं। फॉरवर्ड में जुआन कामीलो हेर्नान्डेज, लुइस डियाज, लुइस सुआरेज, कार्लोस आंद्रे गोमेज़ और जॉन कॉर्डोबा हैं।

ट्याक्सीको नयाँ दर्ता खोल्न सांसद महावीर पुनको माग

सांसद महावीर पुन ने टैक्सी के नए पंजीकरण खोलने के लिए सरकार से की अपील

प्रतिनिधि सभा सदस्य महावीर पुन ने ग्रामीण क्षेत्रों में संचार विस्तार के लिए कोष में जमा लगभग 16 अरब रुपये तुरंत परिचालित करने की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘गांव-गांव में इंटरनेट और टेलीफोन पहुँचाने के लिए बजट नहीं है ऐसा नहीं है, बल्कि मौजूद धनराशि का उपयोग न हो पाना समस्या है।’ उन्होंने कहा कि Kathmandu में पिछले दो दशकों से टैक्सी के नए पंजीकरण पर रोक के कारण सिण्डिकेट सक्रिय हो गया है और इस व्यवस्था को हटाने के लिए सरकार को आग्रह किया। 12 जेठ, काठमांडू।

प्रतिनिधि सभा सदस्य महावीर पुन ने ग्रामीण दूरसंचार कोष में जमा राशि का उपयोग तुरंत करने का सरकार का ध्यान आकर्षित किया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में संचार सेवाएं बेहतर हो सकें। प्रतिनिधि सभा की मंगलवार की बैठक में विशेष समय लेकर बोलते हुए सांसद पुन ने कहा कि कोष में अरबों रुपये जमा हैं, लेकिन सरकार खर्च नहीं कर पा रही है, जिसके कारण ग्रामीण जनता संचार सेवाओं से महरूम हो रही है। उन्होंने कहा, ‘गांव-गांव में इंटरनेट और टेलीफोन पहुँचाने के लिए बजट नहीं है ऐसा नहीं है, जो पैसा है वह खर्च नहीं किया जा रहा है। सदन में केवल मांग करने के बजाय संचार मंत्रालय और प्राधिकरण पर दबाव डालना आवश्यक है कि वे इस कोष की राशि का परिचालन करें।’

सांसद पुन के अनुसार नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण के अंतर्गत ग्रामीण दूरसंचार कोष में वर्तमान में करीब 16 अरब रुपये जमा हैं। यह कोष 2053 साल से सेवाग्रहियों द्वारा टेलीफोन उपयोग के एवज में दी गई भुगतान राशि का 2 प्रतिशत कटौती करके संकलित किया गया है। सांसद पुन ने बताया कि काठमांडू उपत्यका में टैक्सी के नए पंजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगने के कारण सिण्डिकेट सक्रिय हुआ है और इस व्यवस्था को हटाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वि.सं. 2057 में लगभग 7 हजार 5 सौ टैक्सी पंजीकृत थीं और 2072 के भूकंप के बाद 1 हजार 5 सौ टैक्सियां और जुड़ीं, जिससे कुल 9 हजार के लगभग टैक्सी परिचालित हैं। पिछले दो दशकों में काठमांडू की जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने के बावजूद टैक्सियों की संख्या न बढ़ने से मिलेमतो और सिण्डिकेट को प्रोत्साहन मिला है, यह उनका तर्क है।

सन्धिखर्क नगरपालिकाबाट कर सेवा सुरू

अर्घाखाँचीको सन्धिखर्क नगरपालिकाले आन्तरिक राजस्व कार्यालयसँग सहकार्य गर्दै स्थानीय तहबाटै करदाता सेवा सुरू गरेको छ। नगरपालिकाका प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत प्रमोद खनाल र आन्तरिक राजस्व कार्यालय कृष्णनगरका प्रमुख कर अधिकृत कृष्णप्रसाद न्यौपानेले सम्झौतामा हस्ताक्षर गरेका छन्। यसअघि सामान्य कर सेवा लिन कपिलवस्तुको कृष्णनगरसम्म जानुपर्ने झन्झट सन्धिखर्कका ३५ सयभन्दा बढी करदाताका लागि अन्त्य भएको छ।

सन्धिखर्क नगरपालिकामा ३५ सयभन्दा बढी करदाता सेवाग्राही रहेका छन्। स्थानीय तहबाटै करसम्बन्धी सेवा सुरू भएपछि सेवाग्राहीहरू सहज, छिटो र झन्झटमुक्त सेवा पाउने भन्दै उत्साहित भएका छन्। नगरपालिकाले आयोजना गरेको कार्यक्रममा नगर प्रमुख कृष्णप्रसाद श्रेष्ठले ब्यानर वाचन गर्दै उद्घाटन गरेका थिए। कार्यक्रममा प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत प्रमोद खनाल र आन्तरिक राजस्व कार्यालय कृष्णनगरका प्रमुख कर अधिकृत कृष्णप्रसाद न्यौपानेले सम्झौतापत्रमा हस्ताक्षर गरी सेवा कार्यालयको शुभारम्भ घोषणा गरेका हुन्।

शुभारम्भकै अवसरमा कस्तुरी एग्रो रिसोर्ट एण्ड इभेन्ट्स प्रालिका सञ्चालक राजन आचार्यलाई स्थायी लेखा नम्बर (प्यान) दर्ता प्रमाणपत्र हस्तान्तरण गरिएको थियो। नगर प्रमुख कृष्णप्रसाद श्रेष्ठ र नगर उपप्रमुख मिश्रा आचार्यको उपस्थितिमा प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत प्रमोद खनालले प्रमाणपत्र हस्तान्तरण गरी सेवाको औपचारिक शुरुआत गरेको जानकारी दिइएको छ। नगर प्रमुख कृष्णप्रसाद श्रेष्ठले स्थानीय सरकारले नागरिकको घरदैलोमै सेवा पुर्‍याउने उद्देश्यअनुसार कर सेवा सञ्चालन गरेको बताए।

उनले अब नागरिकले सामान्य कर सेवा लिन टाढा जान नपर्ने व्यवस्था भएको उल्लेख गर्दै आगामी दिनमा प्रविधिमैत्री, छिटो र प्रभावकारी सेवा विस्तार गरिने जानकारी दिए। प्रमुख कर अधिकृत कृष्णप्रसाद न्यौपानेले कर सेवा अब प्रविधिमार्फत अझ सरल, पारदर्शी र प्रभावकारी बनाइने बताए। नेपाल सरकार मन्त्रिपरिषद्को निर्णयअनुसार सेवाग्राहीका दरबन्दी सेवा कार्यालयहरू खारेज गरी ती कार्यालयबाट प्रदान गरिने आयकर सेवा स्थानीय तहबाटै सञ्चालन गर्ने व्यवस्था कार्यान्वयनमा आएको जानकारी दिएका छन्।

प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत प्रमोद खनालले स्थानीय तहबाट सेवा सुरू भएसँगै नगरपालिकाप्रति नागरिकको विश्वास अझ मजबुत हुने विश्वास व्यक्त गरे। उनले भने, नगरपालिकाले सेवा प्रवाहलाई थप व्यवस्थित बनाउँदै करदातामैत्री वातावरण सिर्जना गर्ने लक्ष्य लिएको जनाएको छ। यसअघि सामान्य करसम्बन्धी सेवा लिन सेवाग्राहीहरूलाई कपिलवस्तुको कृष्णनगरसम्म जानुपर्थ्यो। अब आफ्नै नगरपालिकाबाट सेवा उपलब्ध हुन थालेपछि ठूलो राहत हुनेछ। नगरपालिकाले पहिलोपटक सञ्चालनमा ल्याएको कर सेवा कार्यालयले व्यवसायी, उद्योगी र सर्वसाधारणलाई प्रत्यक्ष लाभ पुर्याउने विश्वास गरिएको छ। कर सेवा स्थानीय तहबाट सञ्चालन भएपछि नागरिकमैत्री शासन व्यवस्था अझ मजबूत हुने अपेक्षा गरिएको छ।

सन्धिखर्क नगरपालिका से कर सेवा शुरू

समाचार सारांश

  • अर्घाखाँची के सन्धिखर्क नगरपालिका ने आंतरिक राजस्व कार्यालय के सहयोग से स्थानीय तह से ही कर सेवा शुरू की है।
  • नगरपालिका के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी प्रमोद खनाल और आंतरिक राजस्व कार्यालय कृष्णनगर के प्रमुख कर अधिकारी कृष्णप्रसाद न्यौपाने ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • पहले सामान्य कर सेवा के लिए कपिलवस्तु के कृष्णनगर तक जाना पड़ता था, जो सन्धिखर्क के 3500 से अधिक करदाताओं के लिए अब समाप्त हो गया है।

12 जेठ, अर्घाखाँची । अर्घाखाँची के सन्धिखर्क नगरपालिका ने करदाता सेवा शुरू करने का औपचारिक शुभारंभ किया है। सन्धिखर्क नगरपालिका में 3500 से अधिक करदाता हैं।

स्थानीय तह से कर संबंधी सेवा शुरू होने के बाद सेवाग्राही अधिक सहज, तेज और बिना झंझट के सेवा मिलने पर उत्साहित हैं।

नगरपालिका द्वारा आयोजित कार्यक्रम में नगरप्रमुख कृष्णप्रसाद श्रेष्ठ ने उद्घाटन करते हुए बैनर पाठ किया। कार्यक्रम में प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी प्रमोद खनाल और आंतरिक राजस्व कार्यालय कृष्णनगर के प्रमुख कर अधिकारी कृष्णप्रसाद न्यौपाने ने समझौते पर हस्ताक्षर कर सेवा कार्यालय के शुभारंभ की घोषणा की।

शुभारंभ के अवसर पर कस्तूरी एग्रो रिसॉर्ट एंड इवेंट्स प्रा.लि. के संचालक राजन आचार्य को स्थायी लेखा संख्या (पैन) पंजीकरण प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया। नगरप्रमुख कृष्णप्रसाद श्रेष्ठ और नगर उपप्रमुख मिश्रा आचार्य की उपस्थिति में प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी प्रमोद खनाल ने प्रमाणपत्र सौंपकर सेवा की औपचारिक शुरुआत की सूचना दी।

कार्यक्रम में नगरप्रमुख कृष्णप्रसाद श्रेष्ठ ने बताया कि स्थानीय सरकार नागरिकों के घर-द्वार तक सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से कर सेवा संचालन कर रही है। उन्होंने कहा कि अब नागरिकों को सामान्य कर सेवा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और भविष्य में तकनीकी-सक्षम, तेज और प्रभावी सेवा विस्तार की योजना है। “स्थानीय सरकार का मुख्य कर्तव्य नागरिकों को सहज सेवा उपलब्ध कराना है, इसी उद्देश्य से हम कर सेवा नगरपालिका से शुरू कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।

प्रमुख कर अधिकारी कृष्णप्रसाद न्यौपाने ने बताया कि कर सेवा अब तकनीक के माध्यम से और भी सरल, पारदर्शी और प्रभावी होगी। नेपाल सरकार के मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार, सेवाग्राही के लिए आवश्यक सेवा कार्यालयों को बंद कर दिया गया है और इन सेवाओं को स्थानीय तह से संचालन में लाया गया है।

प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी प्रमोद खनाल ने कहा कि स्थानीय तह से सेवा शुरू होने से नागरिकों का नगरपालिका पर विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि नगरपालिका सेवा प्रवाह को व्यवस्थित कर करदाताओं के अनुकूल वातावरण बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

पहले सामान्य कर सेवा ग्रहण के लिए सेवाग्राही को कपिलवस्तु के कृष्णनगर तक जाना पड़ता था। कर समाप्ति प्रमाणपत्र और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण समय, श्रम और आर्थिक लागत अधिक थी, जिससे स्थानीय व्यवसायी और आम जनता परेशान थे। अब यह सुविधा अपनी नगरपालिका से मिलने लगी है, जिससे बड़ी राहत मिलेगी।

नगरपालिका द्वारा पहली बार प्रारंभ किए गए कर सेवा कार्यालय से व्यवसायी, उद्योगपति और आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। कर सेवा स्थानीय तह से संचालित होने के बाद नागरिक-मैत्री शासन व्यवस्था मजबूत होने की भी संभावना जताई जा रही है।