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लेखक: space4knews

सम्भव छ विद्यार्थी संगठनहरूको खारेजी ? – Online Khabar

विद्यार्थी संगठन समाप्त होने की संभावना: सरकार का फैसला और विरोध प्रदर्शन

प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने ६० दिनों के भीतर स्कूल और विश्वविद्यालयों से राजनीतिक विद्यार्थी संगठनों को हटाने का निर्णय लिया है। सरकार ने ९० दिनों के अंदर गैर-राजनीतिक विद्यार्थी काउंसिल या स्टूडेंट वॉइस स्थापित करने की योजना बनाई है। विद्यार्थियों के संगठनों ने इस निर्णय को तानाशाही क़रार देते हुए इसका विरोध किया है और आंदोलन की चेतावनी दी है। १६ चैत, काठमांडू। प्रधानमंत्री नियुक्ति के बाद से ही अपने ‘दृढ़ निर्णयों’ और उनकी लागू करने के लिए बालेन शाह की आलोचना और प्रशंसा दोनों हुई हैं। १३ चैत को बालेन की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में १०० महत्वपूर्ण कार्यों की सूची को मंजूरी मिली। इस सूची में सरकार की उस योजना को भी शामिल किया गया जिसमें ६० दिनों के अंदर स्कूल और विश्वविद्यालय से राजनीतिक छात्र संगठनों को हटाने का प्रावधान है। बालेन सरकार की इस कार्यतालिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ६० दिनों के भीतर दलीय संगठन हटाने होंगे। दलीय संगठनों ने शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट को रोकने के लिए इस कदम की आवश्यकता बताई है। इसी संदर्भ में सरकार ने विकल्प स्वरूप ९० दिनों में गैर-दलीय ‘विद्यार्थी काउंसिल’ या ‘स्टुडेंट वॉइस’ जैसी वैकल्पिक संरचना स्थापित करने का निर्णय लिया है।

सोशल मीडिया पर इस कदम का अधिकांश जनता ने स्वागत किया, लेकिन छात्र संगठनों ने असहमति व्यक्त की है। नेविसंघ के पूर्व अध्यक्ष दुजाङ शेर्पा ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘आग के घेरे में हाथ न डालें, यह जलाकर नष्ट कर सकता है।’ नेविसंघ के नेता दावा करते हैं कि बालेन शाह को ‘रैप गाने का अधिकार नेविसंघ ने ही दिया था।’ एमाले से जुड़े अनेरास्ववियु और माओवादी से जुड़े अखिल क्रांतिकारी ने भी सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है। वहीं, सरकार ने तर्क दिया है कि शिक्षा क्षेत्र से राजनीतिक हस्तक्षेप हटाना आवश्यक है। ‘शिक्षा में दलीय हस्तक्षेप के कारण छात्रों की वास्तविक आवाज़ दब रही है और शैक्षिक गुणवत्ता गिर रही है। इसलिए ६० दिनों में स्कूल/विश्वविद्यालय से दलीय विद्यार्थी संगठन हटाकर ९० दिनों के भीतर विद्यार्थी काउंसिल या स्टूडेंट वॉइस संचालित करने का निर्णय लिया गया है।’

नेपाल में छात्र आंदोलनों का इतिहास २००४ साल के ‘जयतु संस्कृतम्’ आंदोलन तक जाता है, जो राणा शासन के खिलाफ पहला संगठित छात्र विद्रोह था। २००६ में अखिल नेपाल विद्यार्थी फेडरेशन (अनेविफे) की स्थापना हुई। २०२२ में स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन (स्ववियु) का गठन हुआ। नेपाल विद्यार्थी संघ (नेविसंघ) की आधिकारिक स्थापना ६ वैशाख २०२७ को हुई थी। बीपी कोइराला और कृष्णप्रसाद भट्टराई की पहल पर पंचायती व्यवस्था के खिलाफ भूमिगत संघर्ष के लिए यह संगठन बनाया गया था। पिछले दशक में छात्र संगठनों की विचलित प्रवृत्ति ने शैक्षिक माहौल को प्रभावित किया है। स्ववियु चुनाव, शुल्क वृद्धि या राजनीतिक मांगों के नाम पर तोड़फोड़, आगजनी व अन्य उग्र घटनाएँ आम हो गई हैं।

छात्र संगठनों के अराजकतावाद से आम जनता और छात्र ही नहीं बल्कि उनके नेतृत्व भी परेशान हैं। त्रिभुवन विश्वविद्यालय में छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने उपकुलपति प्रो. खड्ग केसी के कार्यालय को तोड़फोड़ किया और शिक्षाध्यक्ष प्रो. दुविनन्द ढकाल के कार्यालय में तालाबंदी की। वार्षिक कैलेंडर के अनुसार स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर की प्रवेश प्रक्रिया, पढ़ाई-लिखाई व परीक्षा फॉर्म भरने का काम चल रहा था, ऐसे संवेदनशील समय में पदाधिकारियों पर शारीरिक हमले की धमकी और सोशल मीडिया पर चरित्र हत्या के प्रयास से प्रशासनिक कामों पर गंभीर असर पड़ा है, त्रिवि प्रवक्ता ने बताया।

छात्र नेता इस अस्तित्व संकट और विरोध के बीच सरकार के इस निर्णय से असहमत और असंतुष्ट हैं। उनका मानना है कि राजनीतिक दलों और संगठनों को खोलने की स्वतंत्रता से छेड़छाड़ कर सरकार संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए छात्र संगठनों को खत्म करने का प्रयास कर रही है। नेविसंघ के प्रवक्ता सूरज सेजुवाल ने कहा, ‘गंभीर मामला है। संविधान को नजरअंदाज करते हुए सुधार किया गया है। राजनीतिक विचार रखने का अधिकार मौलिक है। वर्तमान स्ववियु संरचना को हटाया नहीं जाना चाहिए। यह तानाशाही की ओर जाना है।’

विद्यार्थी संगठन के समाप्ति की संभावना और उसके प्रभावों पर शिक्षाशास्त्री विद्यानाथ कोइराला ने कहा, ‘विद्यार्थी संगठनों को बंद न करते हुए किस प्रकार सुधार संभव है, इस पर अपनी ऊर्जा केंद्रित करनी चाहिए।’ इस प्रकार, विद्यार्थी संगठनों के भविष्य और सरकार के फैसले के कार्यान्वयन पर गहरी निगाह रखी जा रही है।

सरकार ने वैदेशिक रोजगार में फंसे श्रमिकों के उद्धार में गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया

सरकार ने वैदेशिक रोजगार में फंसे श्रमिकों के उद्धार में बिना अनुमति चल रही गैरकानूनी संघ-संस्थाओं और समूहों की गतिविधियों पर रोक लगा दी है। वैदेशिक रोजगार विभाग ने बिना अनुमति उद्धार कार्य करना कानूनी उल्लंघन बताया है। समस्याग्रस्त श्रमिकों को विभाग या संबंधित दूतावास से सीधे संपर्क करने की अपील की गई है। १६ चैत्र, काठमांडू।

सरकार ने विभिन्न संघ-संस्थाओं के नाम पर चल रहे वैदेशिक रोजगार में फंसे श्रमिकों के उद्धार से जुड़े कामों को प्रतिबंधित किया है। श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली वैदेशिक रोजगार विभाग ने बताया कि कुछ संघ-संस्थाएं जिनका उद्धार कार्य विदेशी रोजगार में आए श्रमिकों के लिए था, वे कानूनी रूप से गलत गतिविधियों में लिप्त पाई गईं, जिसके कारण इस प्रतिबंध की घोषणा की गई।

विभाग द्वारा जारी एक सूचना में बताया गया है कि ‘वैदेशिक रोजगार ऐन २०६४’ के अनुसार, अगर किसी नेपाली श्रमिक को उद्धार की आवश्यकता हो, तो यह कार्य केवल भारत सरकार और संबंधित देश में नेपाल के दूतावास एवं कूटनीतिक मिशन के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। कुछ गैरसरकारी संस्थाएं या व्यक्ति बिना कानूनी अधिकार के श्रमिकों या उनके परिवारों को प्रभावित कर उद्धार का भ्रम फैलाते पाया गया, इसलिए विभाग ने इन कार्रवाइयों को गैरकानूनी घोषित किया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति वैदेशिक रोजगार संबंधी किसी भी सेवा या उद्धार कार्य करना कानून का उल्लंघन होगा। इस संदर्भ में विभाग ने तमाम समस्याग्रस्त श्रमिकों को सीधा विभाग या दूतावास से संपर्क करने की सलाह दी है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अनधिकृत उद्धार प्रयासों से श्रमिकों के जोखिम और कानूनी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

शक्तिशाली बनाइँदै प्रधानमन्त्री कार्यालय – Online Khabar

प्रधानमंत्री कार्यालय को शक्तिशाली होते जाना

समाचार सारांश

तैयार किया गया। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • सरकार ने शासकीय सुधार के लिए 100 कार्यसूची जारी की हैं, जिसके तहत मंत्रालयों की संख्या कम कर प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
  • प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत अधिकारसंपन्न संपत्ति जांच समिति का गठन कर सार्वजनिक पदाधिकारियों की संपत्ति जांच की योजना आगे बढ़ाई गई है।
  • संविधान संशोधन बहस का नेतृत्व प्रधानमंत्री कार्यालय करेगा और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता तैयार करने का कार्य भी इस कार्यालय द्वारा किया जाएगा।

१५ चैत्र, काठमांडू। सरकार ने शासकीय सुधार के लिए शनिवार को १०० कार्यसूची सार्वजनिक की है। इन कार्यसूचियों के क्रियान्वयन से प्रधानमंत्री के पास और अधिक शक्तियां केंद्रित होंगी।

१०० कार्यसूचियों में से १३ प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् कार्यालय के क्षेत्राधिकार से संबंधित हैं। इसके तहत पुरानी संरचनाओं को हटाकर नई संरचना बनाने की योजना एक साथ आगे बढ़ाई जा रही है।

संविधान संशोधन बहस की अगुवाई करने से लेकर भ्रष्टाचार नियंत्रण, सार्वजनिक पद पर नियुक्त व्यक्तियों की संपत्ति जांच जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक विषय भी प्रधानमंत्री के अधीन संचालित होंगे।

कार्ययोजना के लागू होने पर सरकार की नीति निर्माण, कार्यान्वयन, निगरानी और सुधार में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषदकार्यलय की भूमिका और अधिक विस्तार पाएगी।

कार्यसूची के बिंदु संख्या ९ में कहा गया है कि मंत्रालयों की संख्या आवश्यकता से अधिक होने के कारण चालू खर्च बढ़ रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए ३० दिन के भीतर मंत्रालयों की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत नेपाल सरकार (कार्य विभाजन) नियमावली संशोधित कर संघीय मंत्रालयों की संख्या १७ कर दी जाएगी।

मंत्रालय संख्या के पुनरावलोकन के बाद दीर्घकालीन प्रबंधन करते हुए सेवा प्रवाह प्रभावित न हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय में ‘पुनर्संरचना प्रबंधन सचिवालय’ बनाया जाएगा जो जनशक्ति, बजट और कार्यक्रम प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन देगा।

कार्यसूची के बिंदु ११ के अनुसार अनुत्पादक, दोहराए गए कार्य क्षेत्र वाले तथा अनावश्यक वित्तीय बोझ पैदा करने वाले बोर्ड, समितियों, योजनाओं और संस्थागत संरचनाओं का जमीनी मूल्यांकन कर उन्हें समाप्त किया जाएगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय, अर्थ मंत्रालय, उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय और संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय के प्रतिनिधियों से उच्चस्तरीय कार्यदल बनाएगा, जो एक माह में स्पष्ट सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सौंपेगा।

इस प्रकार नई सरकार सरकारी संरचनाओं को संक्षिप्त करते हुए निर्णय प्रक्रिया में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् कार्यालय की भागीदारी अनिवार्य कर रही है, जिससे प्रधानमंत्री अधिक सशक्त होंगे।

मंत्रालयों पर नजर

कार्यसूची के बिंदु २ में बताया गया है कि सरकार समग्र कार्य प्रदर्शन को परिणाममुखी, प्रभावी, मापनीय और जवाबदेह बनाने के लिए नतीजाभित शासकीय प्रबंधन (डिलिवरी बेस्ड गवर्नेंस) लागू करेगी।

इसके तहत प्रत्येक मंत्रालय ७ दिनों के भीतर अपनी शीर्ष १० प्रमुख कार्य निर्धारित करेगा और उनकी समयसीमा, जिम्मेदार अधिकारी और प्रदर्शन संकेतक सहित कार्ययोजना प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत करेगा। मासिक प्रगति रिपोर्ट भी इसी कार्यालय को देनी होगी।

मंत्रालयों के काम की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की जाएगी, जिससे इस कार्यालय को कार्य प्रदर्शन नियंत्रक के रूप में स्वतंत्र अधिकार मिलेंगे।

‘इन कार्यों की मासिक प्रगति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय में प्रस्तुत कर नियमित निगरानी, मूल्यांकन और सार्वजनिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी’ कार्यसूची में उल्लेख किया गया है।

इससे मंत्रालयों के कामकाज पर प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका और मजबूत होगी।

मंत्रालयों के कार्यों के मापन, परियोजनाओं की प्रगति ट्रैकिंग और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में अलग संरचना स्थापित की जा रही है, जो कार्यसूची के बिंदु संख्या ६४ में वर्णित है।

यहां कहा गया है, ‘देश के निवेश, उत्पादन, निर्यात, उत्पादकता और विकास वित्त प्रणाली को एकीकृत, प्रभावी और परिणाममुखी बनाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन ‘प्रधानमंत्री कार्य प्रदर्शन इकाई’ तुरंत स्थापित की जाएगी।’

यह इकाई राष्ट्रीय प्राथमिकता प्राप्त परियोजनाओं के लिए मुख्य कार्य प्रदर्शन संकेतक, मंत्रालय स्तर की ट्रैकिंग और समस्या एवं अवरोध समाधान संयंत्र के साथ एक केंद्रीय डैशबोर्ड संचालित करेगी।

यह मॉडल पड़ोसी भारत, ब्रिटेन और कुछ दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों द्वारा अपनाए गए ‘डिलिवरी यूनिट’ मॉडल के समान है।

यानि, जब १०० बिंदुओं वाली कार्यसूची लागू होगी तब प्रधानमंत्री प्रत्येक मंत्रालय के काम में संपूर्ण रूप से संलग्न होंगे और मंत्रालय स्तर के कामों में भी प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद् कार्यालय शामिल रहेगा। अतः काम की रिपोर्टिंग भी प्रधानमंत्री के माध्यम से होगी।

कार्यसूची के बिंदु संख्या ४९ में विकास परियोजना प्रबंधन शामिल है। इसके तहत पुराने अधूरे, खराब हालात वाले और समय पर पूर्ण न हुए परियोजनाओं की पुनः समीक्षा कर बजट आवंटन किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री की प्रत्यक्ष भागीदारी होगी।

जमीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) स्वीकृति, ठेका टूटने जैसी प्रक्रियाएं सरल बनाई जाएंगी और अस्वस्थ एवं छूटे हुए ठेका परियोजनाओं की समस्याओं का ३० दिनों में अध्ययन दल बनाकर समाधान किया जाएगा। दल परियोजनाओं की यथार्थता और संभाव्यता का आंकलन करते हुए निरंतरता पर सिफारिश देगा।

‘यदि किसी परियोजना के लिए अंतर्निहित निकायों में समन्वय आवश्यक हो तो प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय तुरंत समन्वय और सुविधा प्रदान करेगा’ कार्यसूची में उल्लेख है।

अतिरिक्त रूप से राष्ट्रीय गौरव और बड़े रणनीतिक परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के लिए जमीन प्राप्ति, मुआवजा निर्धारण, पेड़ काटने और पर्यावरणीय प्रभाव अनुमोदन प्रक्रिया फास्ट ट्रैक तंत्र के माध्यम से लागू की जाएगी। प्रधानमंत्री इस कार्य में प्रत्यक्ष रूप से संलग्न रहेंगे।

‘संबंधित सभी निकायों के बीच समन्वय कर एकीकृत और स्वचालित मंजूरी प्रणाली लागू करने, अनावश्यक देरी और दोहरा प्रक्रियाएं हटाने, स्पष्ट समयसीमा निर्धारित कर क्रियान्वयन करने तथा परियोजनाओं के अवरोध दूर करने के लिए प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय द्वारा प्रत्यक्ष निगरानी और सुविधा प्रदान की जाएगी’ ऐसा कहा गया है।

डिजिटल शासन में प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका

डिजिटल से जुड़ी सभी संरचनाएं प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत लाई जा रही हैं। वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को खत्म कर प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत नया ‘सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक शासन कार्यालय’ स्थापित किया जाएगा।

यह योजना कार्यसूची के बिंदु संख्या ३९ में शामिल है।

‘प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय के अधीन सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक शासन कार्यालय स्थापित करने का कार्य ३ महीने के भीतर पूरा करना, वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को खत्म करना तथा सभी सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित सार्वजनिक निकायों को इस कार्यालय के अधीन संचालित करना सुनिश्चित करने की व्यवस्था बनाना’ कहा गया है।

नई संरचना से नेपाल की सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल शासन प्रणालियों में विद्यमान टुकड़े-टुकड़े संरचना, अंतर्संबंधों की कमी, मानकों तथा संस्थागत समन्वय की कमजोरियों का समाधान होगा। दक्ष जनशक्ति और तकनीकी क्षमता की कमी, सेवा प्रदायगी में प्रभावकारिता का अभाव सुधारा जाएगा और एक समेकित, सुरक्षित, दक्ष एवं परिणाममुखी डिजिटल शासन प्रणाली स्थापित की जाएगी।

कार्यसूची के बिंदु संख्या ३३ के अनुसार नागरिकों के डिजिटल विवरणों तक प्रधानमंत्री कार्यालय की पहुँच होगी।

‘डिजिटल हस्ताक्षर वर्तमान में प्रमाण पत्र के माध्यम से होते हैं, लेकिन भविष्य में एनआईडी कार्ड, बायोमेट्रिक या OTP के उपयोग से ई-हस्ताक्षर की सुविधा दी जाएगी ताकि नागरिक अपनी जानकारी प्रस्तुत कर सकें।’

राष्ट्रीय परिचयपत्र एवं पंजीकरण विभाग को भौतिक और संगठनात्मक रूप में सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय परिचयपत्र (एनआईडी) संख्या के आधार पर सभी सेवाओं में डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणीकरण प्रणाली लागू करने के लिए गृह मंत्रालय के संयोजन में अध्ययन कर एक माह के भीतर प्रधानमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

मतलब, डिजिटल सेवा, डेटा प्रबंधन और नागरिक सेवाओं के नियंत्रण में प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका रहेगी।

प्रधानमंत्री अधीन संपत्ति जांच समिति का गठन

सरकार की 100 बिंदु कार्यसूची के अनुसार प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय के अधीन अधिकारसंपन्न संपत्ति जांच समिति बनाई जा रही है। भ्रष्टाचार और अनुचित कर्तव्य दुरुपयोग अनुसंधान आयोग इसके लिए अलग अनुसंधान निकाय है, जबकि संपत्ति शुद्धीकरण अनुसंधान विभाग अवैध संपत्ति की जांच करता है।

अख्तियार आदि संरचनाओं से अलग और संबंधित मंत्रालयों से ऊपर, इस समिति को प्रधानमंत्री के अधीन स्थापित किया जा रहा है। कार्यसूची के बिंदु संख्या ४३ के अनुसार भ्रष्टाचार, संपत्ति छुपाने की प्रवृत्ति और दंडहीनता समाप्त करने के लिए १५ दिनों के भीतर यह समिति बनने वाली है।

इस समिति में कानून, अर्थशास्त्र, राजस्व और अनुसंधान क्षेत्र के विशेषज्ञ और संबंधित निकायों के प्रतिनिधि होंगे। आवश्यक कानूनी और तकनीकी प्रबंध विकसित कर जांच प्रक्रिया पारदर्शी और परिणाममुखी बनाएंगे।

नेपाल में लंबे समय से सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की संपत्ति जांच की मांग हो रही है। राजनीतिक दलों ने भी यह चुनावी प्रस्तावों में शामिल किया है।

नीति निर्माण, क्रियान्वयन, निगरानी और भ्रष्टाचार नियंत्रण के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रतिबद्धता तैयार करने और संविधान संशोधन की अगुवाई तक के अधिकार प्रधानमंत्री कार्यालय केंद्रित कर रहे हैं।

पहले चरण में २०६२/६३ से अब तक सार्वजनिक पद पर रहे प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारी और उच्च पदस्थ कर्मचारियों की संपत्ति का संकलन, प्रमाणीकरण और जांच की जाएगी।

दूसरे चरण में २०४८ से लेकर २०६१/६२ तक सम्मानित सार्वजनिक पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति की जांच होगी।

जांच प्रक्रिया कानूनी मानदंडों पर आधारित, निष्पक्ष तरीके से संचालित की जाएगी, और समिति की रिपोर्ट और सिफारिशों को संबंधित निकायों के माध्यम से लागू किया जाएगा।

इसका मतलब यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मंत्री, उच्च पदस्थ पूर्व कर्मचारी और संवैधानिक निकायों के पूर्व पदाधिकारी सभी की संपत्ति जांच में शामिल होंगे। समिति को केवल दस्तावेज जांचने का अधिकार नहीं, बल्कि विवरण संकलन, प्रमाणीकरण, वास्तविक स्रोत की जांच और संदिग्ध संपत्ति पर सिफारिश करने का अधिकार दिया गया है।

सरकारी अधिकारी इसे सार्वजनिक पदों पर रहे व्यक्तियों की व्यवस्थित संपत्ति जांच मानते हैं। इससे केवल औपचारिक विवरण प्रस्तुत करने और वास्तविक संपत्ति छुपाने की प्रवृत्ति खत्म होने की उम्मीद है।

हालांकि इसके नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। संपत्ति जांच में शामिल लोग, विशेष रूप से पुराने दलों के नेता दबाव में आ सकते हैं, जिससे प्रधानमंत्री अन्य दलों पर दबाव बनाने के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

विधायी काम में सक्रिय भूमिका

नीति निर्माण, क्रियान्वयन, निगरानी, भ्रष्टाचार नियंत्रण के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रतिबद्धता तैयार करने और संविधान संशोधन की अगुवाई के अधिकार प्रधानमंत्री कार्यालय में केन्द्रित हो रहे हैं।

कार्यसूची के बिंदु संख्या ३ में कहा गया है कि सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों का समावेश कर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता बनाई जाएगी।

‘नेपाल के संविधान के मूल स्वरूप, लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती और चुनाव के माध्यम से मिले जनादेश को संस्थागत रूप देना, सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों, वचनपत्र और प्रतिबद्धताओं में लागू हो सकने वाले विषयों का संश्लेषण कर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता तैयार करना और उस पर सरकार की साझा स्वामित्व स्थापित करना’ कहा गया है।

सरकार इसे नीति, कार्यक्रम और बजट से जोड़ने का प्रावधान करेगी।

अर्थात अब सरकार की नीति केवल सत्तारूढ़ दल के घोषणापत्र पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि यह बहुदलीय सहमति से तय कार्यक्रमों को राज्य नीति में परिवर्तित करने का प्रयास होगा। इसका नेतृत्व प्रधानमंत्री कार्यालय करेगा।

संविधान संशोधन जैसे राजनीतिक विषयों का बहस कोई स्वतंत्र आयोग या निकाय नहीं करेगा। इसके लिए संसदीय चर्चाएं और आवश्यक संरचनाओं के निर्माण में भी सरकार सक्रिय नहीं होगी।

सरकार की योजना अनुसार संसदीय चर्चाओं और अन्य संयंत्रों से सुझाव लेने के बजाय, प्रधानमंत्री कार्यालय राजनीतिक दलों के घोषणापत्र पढ़कर निर्णय लेगा।

१०० बिंदु कार्यसूची के अनुसार संविधान संशोधन बहस का नेतृत्व भी प्रधानमंत्री कार्यालय करेगा।

बिंदु संख्या ४ में कहा गया है, ‘देश के दीर्घकालीन राजनीतिक और संस्थागत सुधार, चुनाव प्रणाली आदि विषयों में संविधान संशोधन का राष्ट्रीय सहमति निर्माण करने के लिए प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय ७ दिनों के भीतर ‘संविधान संशोधन बहस पत्र’ तैयार करेगा, कार्यदल गठित करेगा और बहस को सहभागी, पारदर्शी और तथ्य आधारित बनाएगा।’

इसका मतलब है कि संविधान संशोधन जैसे राजनीतिक विषयों की बहस स्वतंत्र निकाय द्वारा नहीं, बल्कि सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय के द्वारा होगी।

खाड़ी क्षेत्र के लिए नई श्रम अनुमति तत्काल न देने का सुझाव

१६ चैत, काठमांडू। विदेश रोजगार के लिए खाड़ी क्षेत्र सहित युद्ध प्रभावित देशों में जाना चाहने वाले नए श्रमिकों को फिलहाल श्रम अनुमति न देने की सलाह दी गई है। श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपककुमार साह ने विभिन्न देशों में कार्यरत श्रम सचिवों के साथ हुई वर्चुअल बैठक में तत्काल नई श्रम अनुमति जारी न करने की सलाह दी है। इजरायल और अमेरिका के बीच तथा ईरान के साथ संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र और इजरायल समेत अन्य देशों में सुरक्षा खतरा बढ़ रहा है। युद्ध की स्थिति बढ़ने के कारण श्रम मंत्रालय ने १७ फागुन से सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान, इराक, यमन, जॉर्डन, लेबनान, तुर्की और इजरायल में नई श्रम अनुमति जारी करना बंद कर दिया था। इनमें से सात देशों में पुनः श्रम अनुमति खुली गई थी।

आज की वर्चुअल बैठक में श्रम सचिवों ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए नई श्रम अनुमति न जारी करने की सलाह दी है, जैसे श्रम मंत्रालय के प्रवक्ता पिताम्बर घिमिरे ने बताया। ‘‘विदा लेकर लौटने वाले, नेपाल आए हुए, कंपनियों द्वारा बुलाए गए या लौटने वाले टिका्टोक के साथ श्रमिकों को पुनः श्रम अनुमति देना उचित है,’’ घिमिरे ने कहा, ‘‘लेकिन कुछ दिन के लिए नए श्रम अनुमति देकर भेजना उपयुक्त नहीं है, यह चर्चा में आया है।’’

संबंधित देशों में श्रमिकों की आवासीय सुविधाओं, स्वास्थ्य परीक्षण, कार्यस्थल सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई है। मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया समेत अन्य देशों की वर्तमान जटिल स्थिति तथा वहां कार्यरत नेपाली श्रमिकों की स्थिति और समस्याओं पर भी चर्चा हुई, प्रवक्ता घिमिरे ने बताया। विदेश रोजगार बोर्ड द्वारा संचालित सेफ हाउस और शेल्टरों के लिए निर्धारित राशि के नियमित खर्च, संबंधित निकायों को समय-समय पर रिपोर्ट पेश करने, दूतावास एवं श्रम कांसुलर तथा श्रम सचिवों के माध्यम से गंतव्य देशों में आवश्यक सूचना का प्रवाह करने और प्राप्त शिकायतों एवं जानकारी का शीघ्र जांच करने की पहल करने पर भी विचार हुआ। दूतावासों में चल रहे सेफ हाउस और शेल्टरों के लिए मानक ड्राफ्ट तैयार करने पर भी चर्चा हुई, प्रवक्ता घिमिरे ने बताया।

वीर अस्पताल में वैशाख 20 तक महिलाओं के लिए नि:शुल्क कैंसर परीक्षण

16 चैत, काठमांडू। वीर अस्पताल ने सोमवार से महिलाओं के लिए नि:शुल्क कैंसर परीक्षण सेवा शुरू कर दी है। काठमांडू महानगरपालिका के सहयोग से वीर अस्पताल में आज से स्तन, गर्भाशय और सर्वाइकल कैंसर के नि:शुल्क परीक्षण की सुविधा प्रदान की जा रही है।

यह कैंसर परीक्षण सेवा आगामी वैशाख 20 तक संचालित की जाएगी। परीक्षण के उद्घाटन अवसर पर महानगरपालिका की कार्यवाहक प्रमुख सुनिता डंगोल ने बताया कि समय पर कैंसर की पहचान कर लेना जीवन रक्षा के लिए संभव है।

उन्होंने कहा, ‘समय पर जांच करके कैंसर की पहचान हो जाए तो उपचार आसान और कम खर्चीला होता है। यह जीवन बचाने में मदद करता है।’ कार्यक्रम में डंगोल ने स्वयं अपना कैंसर परीक्षण भी करवाया।

राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान प्रतिष्ठान के उपकुलपति प्रा. भूपेन्द्रकुमार बस्नेत ने भी कहा कि कभी-कभी कैंसर समय पर पहचाना न जा पाने पर यह भयावह हो जाता है, लेकिन यदि समय पर पता चल जाए तो उपचार संभव है।

अस्पताल के कार्यकारी निदेशक प्रा. दिलीप शर्मा ने महिलाओं को बार-बार कैंसर परीक्षण कराने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि कैंसर का डर नहीं दिखना चाहिए।

महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख दीपक केसी ने बताया कि देश की कोई भी महिला इस अस्पताल में आकर कैंसर परीक्षण करवा सकती है। उन्होंने बताया कि महानगरपालिका के 32 शहरी स्वास्थ्य संवर्धन केन्द्रों से रेफर कर वीर अस्पताल में कैंसर परीक्षण कराया जा सकेगा।

महिलाओं के कैंसर परीक्षण के लिए महानगरपालिका ने अस्पताल को एक करोड़ 50 लाख रुपये प्रदान किए हैं। –रासस

चेन्‍नईमाथि राजस्थानको सहज जित – Online Khabar

राजस्थान ने चेन्नई को ८ विकेट से हराया

राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल क्रिकेट में चेन्नई सुपर किंग्स को ८ विकेट से आसानी से हराया है। सोमवार को गुवाहाटी में हुए मैच में चेन्नई ने जो १२८ रन का लक्ष्य दिया था, राजस्थान ने उसे १२.१ ओवर में २ विकेट खोकर पूरा कर लिया। ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने १५ गेंदों में अर्धशतक बनाते हुए १७ गेंदों में ५२ रन बनाए और आउट हुए। दूसरे ओपनर यशस्वी जैसवाल ने नाबाद ३८ रन बनाए। ध्रुव जुरेल ने १८ और कप्तान रियान पराग १४ रन बनाकर नाबाद रहे।

चेन्नई के दो विकेट अंशुल कम्बोज ने लिए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई टीम शुरुआत से ही लगातार विकेट खोती रही और दबाव में आई। संजू सैमसन और ऋतुराज गायकवाड़ दोनों ६ रन पर पवेलियन लौटे। आयुष्मान खररा शून्य रन पर और मयंक शर्मा २ रन पर आउट होने के बाद चेन्नई का स्कोर ३८-४ हो गया था। सरफराज खान ने १७, कार्तिक शर्मा ने १८ और शिवम दुबे ने ६ रन बनाकर जल्दी आउट होकर टीम को संकट में डाल दिया। चेन्नई की टीम ७४-७ की स्थिति तक पहुंच गई।

यहां सेジェमी ओवरटन ने ४३ रन बनाए और चेन्नई को अंतिम दो गेंदों से पहले ही ऑलआउट करने की कोशिश की, लेकिन टीम कुल १२७ रन पर ही ऑलआउट हो गई। राजस्थान की तरफ से जोफ्रा आर्चर, नान्द्रे बर्गर और रविंद्र जडेजा ने २-२ विकेट लिए जबकि ब्रिजेश शर्मा, संदीप शर्मा और रवि बिश्नोई ने एक-एक विकेट प्राप्त किया।

ब्रिटिश काउंसिल का ‘सर्वोत्कृष्ट व्यावसायिक साझेदार’ पुरस्कार अर्बिट ग्रुप को मिला

समाचार सारांश

  • ब्रिटिश काउंसिल ने दक्षिण एशिया में उत्कृष्ट व्यावसायिक साझेदार का पुरस्कार अर्बिट ग्रुप को दिया है।
  • अर्बिट ग्रुप के निदेशक सुनील रेग्मी ने लंदन में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्राप्त किया।
  • अर्बिट ग्रुप सन् 2017 से ब्रिटिश काउंसिल के साथ सहयोग करते हुए IELTS परीक्षा पंजीकरण करवा रहा है।

लंदन। ब्रिटिश काउंसिल ने दक्षिण एशिया में प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘सर्वोत्कृष्ट व्यावसायिक साझेदार’ पुरस्कार से अर्बिट ग्रुप को सम्मानित किया है। लंदन स्थित मिलेनियम होटल एंड रिसोर्ट में शुक्रवार शाम आयोजित समारोह में अर्बिट ग्रुप के निदेशक सुनील रेग्मी ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।

ब्रिटिश काउंसिल के हेड ऑफ ग्लोबल IELTS एंड्रयू मैकेंजी और ग्लोबल पार्टनरशिप मैनेजर बेन वेकफोर्ड ने यह पुरस्कार अर्बिट ग्रुप को प्रदान किया। यह पुरस्कार अर्बिट ग्रुप द्वारा शिक्षा, व्यावसायिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के विस्तार में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के सम्मान में दिया गया है।

दक्षिण एशिया के विभिन्न साझेदारों में अर्बिट ग्रुप ने दिखाए उत्कृष्ट प्रदर्शन, सेवा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों तथा संस्थाओं को जोड़ने के प्रयासों को विशेष रूप से प्रशंसा मिली है, निदेशक रेग्मी ने बताया।

“इस उपलब्धि ने अर्बिट ग्रुप की विश्वसनीयता और प्रभाव को और मजबूत किया है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र में इसके नेतृत्व की भूमिका को भी उजागर किया है,” उन्होंने कहा।

ब्रिटिश काउंसिल नेपाल के व्यावसायिक साझेदार अर्बिट ग्रुप सन 2017 से ब्रिटिश काउंसिल के साथ सहयोग करते हुए IELTS परीक्षा पंजीकरण करवा रहा है।

ब्रिटिश काउंसिल विश्व के 140 से अधिक देशों में IELTS परीक्षा का संचालन करता है। ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अध्ययन के लिए जाने वाले छात्रों के लिए IELTS अनिवार्य है।

ब्रिटिश काउंसिल के साउथ एशिया निदेशक तलाल मीर ने अर्बिट के साथ काउंसिल की रणनीतिक और व्यावसायिक साझेदारी भविष्य में और अधिक सशक्त होने के विश्वास व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नेपाल से विदेश पढ़ने जाने वाले विद्यार्थियों को ‘जेन्यूइन’ अनुभव प्राप्त होता है।

एचजेएनबीएल में टाइम्स और गोल्डेनगेट ने लगातार दसवीं जीत दर्ज की

समाचार सारांश

AI द्वारा निर्मित। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • टाइम्स और गोल्डेनगेट ने एचजेएनबीएल में लगातार दसवीं जीत हासिल की।
  • टाइम्स बास्केटबॉल क्लब ने सोलो बास्केटबॉल क्लब को ९५-७२ के अंतर से हराकर अपनी जीत की श्रृंखला दस तक बढ़ाई।
  • गोल्डेनगेट बास्केटबॉल क्लब ने ११ मैचों में अपनी दसवीं जीत दर्ज करते हुए शीर्ष स्थान कायम रखा है।

१६ चैत, काठमांडू। हिमालयन जावा नेशनल बास्केटबॉल लीग (एचजेएनबीएल) २०२६ में टाइम्स बास्केटबॉल क्लब और गोल्डेनगेट बास्केटबॉल क्लब ने सोमवार को अपनी जीतें बढ़ाईं।

त्रिपुरेश्वर स्थित दशरथ रंगशाला कवर हॉल में शनिवार को हुए मैच में टाइम्स ने सोलो बास्केटबॉल क्लब को ९५-७२ के बड़े अंतर से हराकर लगातार दसवीं जीत दर्ज की।

टाइम्स ने पहला क्वार्टर २८-२५ और दूसरा क्वार्टर २८-८ के स्कोर से अपने पक्ष में दिलाकर हाफटाइम तक ५६-३३ की बढ़त बना ली थी।

तब तीसरे क्वार्टर में टाइम्स ने २१-१८ की बढ़त बनाए रखी, जबकि चौथे क्वार्टर में सोलो ने २१-१८ से वापसी की।

टाइम्स ने लगातार दसवीं जीत के बाद ११ मैचों से २१ अंक बनाए, जबकि सोलो को नौवीं हार मिली और वह ११ मैचों में १३ अंकों के साथ पांचवें स्थान पर है।

टाइम्स के मनिष केसी को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया, जबकि श्रेयास बहादुर थापाले सर्वाधिक २४ अंक बनाए।

इसी दिन हुए एक अन्य मैच में गोल्डेनगेट बास्केटबॉल क्लब ने प्लेबक्स एरेना को ११२-५९ के विशाल अंतर से हराया।

इस मैच में गोल्डेनगेट के दिप्सन केसी को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

गोल्डेनगेट ने भी ११ मैचों में अपनी दसवीं जीत दर्ज की और टाइम्स के बराबर २१ अंक जुटाए।

प्लेबक्स को दसवीं हार का सामना करना पड़ा और ११ मैचों में १२ अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है।

टाइम्स और गोल्डेनगेट समान अंक के साथ हैं, लेकिन अंक अंतर के आधार पर गोल्डेनगेट शीर्ष स्थान पर है।

विभागीय टीम त्रिभुवन आर्मी क्लब १० मैचों में १९ अंकों के साथ चौथे स्थान पर है। आर्मी ने रविवार रात हुए मैच में रोएल को १०२-७५ से हराया।

आर्मी के निश्चल महर्जन ने सर्वाधिक २२ अंक बनाए और सयुन राई को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।

नेपाल बास्केटबॉल संघ (नेबा) द्वारा आयोजित इस दूसरे संस्करण के एचजेएनबीएल में ८ टीमें प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।

डबल राउंड रॉबिन सिस्टम में आयोजित लीग में कुल ५६ मैच होंगे। लीग चरण के बाद शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में प्रवेश करेंगी।

प्लेऑफ में लीग के पहले और दूसरे स्थान की टीमें पहली क्वालिफायर खेलेंगी, जबकि तीसरे और चौथे स्थान की टीमें एलिमिनेटर में भिड़ेंगी। पहली क्वालिफायर में हारने वाली टीम और एलिमिनेटर में जीतने वाली टीम की भिड़ंत दूसरी क्वालिफायर में होगी। पहली और दूसरी क्वालिफायर विजेताओं के बीच फाइनल मैच होगा।

प्रतियोगिता के विजेता को नगद ४ लाख रुपये पुरस्कार मिलेगा, उपविजेता को २ लाख रुपये, जबकि तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को १ लाख रुपये पुरस्कार दिया जाएगा। साथ ही, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को सबसे मूल्यवान खिलाड़ी (एमवीपी) पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

‘मिस वर्ल्ड’ को फिनाले ५ सेप्टेम्बरमा तय, लुनाको तयारी कस्तो छ ?

‘मिस वर्ल्ड’ फिनाले ५ सितंबर को, लुना की तैयारी कैसी है?

दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता ‘मिस वर्ल्ड’ का ७५वां संस्करण वियतनाम में ९ अगस्त से ५ सितंबर तक आयोजित किया जाएगा, आयोजकों ने अपनी जानकारी साझा की है। प्रतियोगिता की शुरुआत राजधानी हनोई में प्रतिभागियों के आगमन के साथ ९ अगस्त को होगी जबकि अंतिम मुकाबला ५ सितंबर को हो ची मिन्ह शहर में आयोजित किया जाएगा। नेपाल से मिस नेपाल वर्ल्ड २०२५ लुना लुइँटेल इस प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं और वह शारीरिक, मानसिक प्रशिक्षण तथा ‘ब्यूटी विथ पर्पज’ परियोजना में व्यस्त हैं।

इस वर्ष की मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता वियतनाम में हो रही है। आधिकारिक सूचना के अनुसार प्रतियोगिता की शुरुआत ९ अगस्त को होगी और अंतिम मुकाबला ५ सितंबर को तय किया गया है। इस ऐतिहासिक संस्करण की घोषणा २९ मार्च को सम्पन्न मिस वर्ल्ड वियतनाम के फाइनल समारोह में की गई थी। समारोह में मिस वर्ल्ड संगठन की अध्यक्ष जूलिया मॉर्ले और स्थानीय आयोजकों के प्रतिनिधि शामिल थे।

सन १९५१ में एरिक मॉर्ले द्वारा स्थापित मिस वर्ल्ड का पहला संस्करण लंदन में आयोजित हुआ था। इस वर्ष संगठन ‘ब्यूटी विथ ए पर्पज’ के सिद्धांत के साथ अपनी ७५ वर्षों की यात्रा का जश्न मना रहा है और ७५वां संस्करण प्रस्तुत कर रहा है। वर्तमान मिस वर्ल्ड की अध्यक्ष जूलिया मॉर्ले और वर्तमान मिस वर्ल्ड थाईलैंड की ओपाल सुचाटा भी वियतनाम में मौजूद हैं। उन्होंने स्थानीय आयोजकों के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की है। लुना महीनों से प्रतियोगिता की तैयारी में लगी हुई हैं।

कृषि विभाग ने चैते धान का समर्थन मूल्य सिफारिश किया

१६ चैत, काठमाडौं । कृषि विभाग ने चैते धान के लिए समर्थन मूल्य सिफारिश की है। विभाग ने किसानो को उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न २५ जिलों में स्थलगत अध्ययन सहित रिपोर्ट कृषि एवं पशुपालन विकास मंत्रालय को भेजी है। धान उत्पादन में लगने वाली लागत, बीज, खाद, श्रम, मुद्रास्फीति, बाजार मूल्य तथा उत्पादन लागत के विश्लेषण के आधार पर मूल्य निर्धारण हेतु सिफारिश की गई है, ऐसा विभाग के महानिर्देशक प्रकाश सञ्जेल ने जानकारी दी।

विभाग की टीम ने स्थलगत अध्ययन के पश्चात उत्पादन लागत, परिवहन खर्च, बाजार मूल्य और अन्य प्रासंगिक पहलुओं को शामिल करते हुए वैज्ञानिक मूल्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे मंत्रालय के सूचना अधिकारी महानन्द जोशी ने साझा किया। इस प्रस्ताव के आधार पर प्रति क्विंटल मूल्य निर्धारण के लिए संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श किया गया है और इसे मंत्रिपरिषद् में पेश करने की तैयारी है। मंत्रिपरिषद् के निर्णय के बाद ही मूल्य सार्वजनिक किया जाएगा।

धान के नमी मानदंड को भी मूल्यांकन में शामिल करते हुए किसान द्वारा उत्पादित धान का समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाएगा। यदि धान में १८ प्रतिशत तक नमी हो तो निर्धारित मूल्य लागू होगा, जबकि १८ प्रतिशत से अधिक नमी होने पर वजन कम करने का नियम लागू किया जाएगा, मंत्रालय ने बताया। सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर खाद्य व्यवस्था तथा व्यापार कम्पनी लिमिटेड के माध्यम से धान की खरीद की जाएगी। सरकार ने पिछले वर्ष प्रति क्विंटल दो हजार ८०० रूपये का समर्थन मूल्य निर्धारित किया था। –रासस

कर्णाली प्रदेश खेलकुद परिषद के नए सदस्य–सचिव चन्द ने ली शपथ

कर्णाली प्रदेश खेलकुद परिषद के नए सदस्य–सचिव रविन्द्र चन्द ने पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की है। सोमवार को सामाजिक विकास मंत्रालय में आयोजित एक कार्यक्रम में मंत्री घनश्याम भण्डारी ने चन्द को शपथ दिलाई। गत चैत १२ गते को आयोजित प्रदेश मन्त्रिपरिषद की बैठक में चन्द को परिषद के दूसरे सदस्य–सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। सदस्य–सचिव पद के लिए २१ लोगों ने आवेदन दिया था, जिनमें चन्द ने अन्तर्वार्ता में सर्वाधिक ६७.१७ अंक प्राप्त किए थे।

उसी अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष प्रमोद हमाल तथा सदस्य पवनकुमार थापा, पंखबहादुर मल्ल, भीमाकुमारी भुसाल, गोर्खबहादुर शाही और किरण किशोर सापकोटा ने भी शपथ ली। गत २०८१ पुष ४ गते से रिक्त चल रहे सदस्य–सचिव पद पर चन्द की नियुक्ति हुई है। इससे पहले, सदस्य–सचिव चयन के लिए गठित समिति ने गत माघ ३ गते अन्तर्वार्ता लेकर तीन नामों को सरकार के समक्ष सिफारिश की थी। सिफारिश में शामिल रविन्द्र चन्द, दीपक हमाल और प्रमोद हमाल में मूल्यांकन में चन्द ने सबसे अधिक ६७.१७ अंक प्राप्त किए थे। दीपक हमाल ने ६०.६३ और प्रमोद हमाल ने ५२.३७ अंक प्राप्त किए थे। सदस्य–सचिव पद के लिए शुरू में २१ लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से १० को अन्तर्वार्ता के लिए चुना गया था।

ओलीको स्वास्थ्य अवस्था सामान्य, चिकित्सक भन्छन्- डिस्चार्ज गर्न सकिन्छ

ओली की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य, चिकित्सकों ने डिस्चार्ज возможत बताया

समाचार सारांश

  • एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है और चिकित्सकों ने डिस्चार्ज संभव बताया है।
  • ओली की पित्तथैली में पथरी मिली है, परंतु तत्काल शल्यक्रिया आवश्यक नहीं, चिकित्सक जोखिम मूल्यांकन के बाद निर्णय लेंगे।
  • पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खड्का त्रिवि शिक्षण अस्पताल में भर्ती हैं जिनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है।

१६ चैत, काठमांडू। एमाले अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है, ऐसा उपचार में लगे चिकित्सकों ने बताया है।

शनिवार सुबह से भर्ती ओली को चिकित्सकों ने अब डिस्चार्ज करने योग्य बताया है। “सभी रिपोर्ट सामान्य हैं। चिकित्सकीय चर्चा के बाद उन्हें डिस्चार्ज करना संभव है,” उपचार में लगे एक चिकित्सक ने कहा।

शनिवार सुबह दिल की समस्या की रिपोर्ट के बाद चिकित्सकों ने अतिरिक्त परीक्षण किया। रविवार को ओली के शरीर में दिल की धड़कन की निगरानी के लिए “होल्टर मॉनिटर” लगाया गया, जो २४ से ४८ घंटे तक दिल की धड़कन की स्थिति पर नजर रखता है। रिपोर्ट के अनुसार दिल का कामकाज ठीक है, चिकित्सकों ने कहा।

मूत्र संक्रमण होने के बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखे, इसलिए चिकित्सकों ने मूत्र का कल्चर नमूना लिया है।

“मूत्र जांच में कुछ बैक्टीरिया पाए गए हैं, पर कोई विशेष लक्षण नहीं,” चिकित्सक ने कहा, “अधिक पुष्टि के लिए ‘यूरिन कल्चर’ किया गया है।”

शनिवार को एक्स-रे में ओली की पित्तथैली में पथरी मिली, पर फिलहाल सर्जरी के आवश्यक नहीं बताई गई है। गैस्ट्रो सर्जनों की टीम ने भी अभी ऑपरेशन करना जोखिम भरा बताया है।

ओली को दो बार किडनी प्रत्यारोपण हुआ है, उम्र और दिल की बीमारी के कारण चिकित्सक शल्य क्रिया जोखिमपूर्ण मानते हैं।

“उनकी पित्तथैली की पथरी को तुरंत निकालना आवश्यक नहीं है,” उपचार में लगे चिकित्सक ने कहा, “शरीर को गंभीर नुकसान न हो, इसलिए उचित समय पर ऑपरेशन करना बेहतर रहेगा।”

हालांकि ओली स्वयं पथरी निकालकर समस्या का समाधान चाहते हैं।

“उन्होंने कहा है कि पथरी बढ़ रही है, इसलिए ऑपरेशन करके निकालना उचित होगा,” चिकित्सक ने बताया, “लेकिन वर्तमान जोखिम का मूल्यांकन करके ही निर्णय लिया जाएगा।”

अस्पताल स्रोत के अनुसार ओली की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार होने के कारण डिस्चार्ज संभव है।

“वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रखने की आवश्यकता नहीं है,” एक अन्य चिकित्सक ने कहा, “एक-दो दिन निगरानी में रख कर डिस्चार्ज किया जा सकता है।”

शनिवार सुबह गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ओली का स्वास्थ्य परीक्षण के लिए त्रिवि शिक्षण अस्पताल लाया था। अस्पताल के आकस्मिक कक्ष में प्रारंभिक परीक्षण हुआ और ओली ने दिल की धड़कन में समस्या बताई।

इसके बाद चिकित्सकों ने अतिरिक्त परीक्षण के लिए ‘एनेक्स-१’ के बेड नंबर ५०१ में भर्ती किया।

२३ और २४ भदौ को हुए जनजी आंदोलन के दौरान ओली प्रधानमंत्री और रमेश लेखक गृह मंत्री थे। इस घटना की जांच के लिए गठित पूर्व न्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में आयोग ने ओली और लेखक को दोषी मानते हुए हत्या से संबंधित जांच की सिफारिश की थी।

प्रतिवेदन के आधार पर सरकार ने शनिवार सुबह ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार किया। जिला अदालत काठमांडू ने पाँच दिन की हिरासत मियाद दी, लेखक को नेपाल पुलिस के महाराजगंज स्थित २ नंबर गण में रखा गया और जांच की जा रही है, जबकि ओली स्वास्थ्य अवस्थाओं के कारण त्रिवि शिक्षण अस्पताल में हैं।

दीपक खड्कालाई पेट संबंधी समस्या

पूर्व ऊर्जा, जल स्रोत और सिंचाई मंत्री तथा कांग्रेस नेता दीपक खड्का को भी त्रिवि शिक्षण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जनजी आंदोलन के दौरान २४ भदौ को उनके घर से बरामद रकम से संबंधित संपत्ति शुद्धिकरण विभाग ने रविवार को गिरफ्तार किया था। अदालत ने सात दिन की न्यायिक हिरासत दी है।

रात में अचानक उच्च रक्तचाप और दस्त की समस्या के कारण उन्हें नर्भिक अस्पताल लाया गया था, जहां बेड न होने से तीन बजे त्रिवि शिक्षण अस्पताल रेफर किया गया।

अस्पताल स्रोत ने बताया कि खड्कालाई १०२९ नंबर बेड पर भर्ती किया गया है। दस्त और उल्टी के कारण अतिरिक्त निगरानी के लिए रखा गया है।

प्रारंभिक परीक्षण में खड्काको रक्तचाप नियंत्रित है और दस्त तथा उल्टी की समस्या कम हुई है।

अस्पताल ने कहा, “स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है, रिपोर्ट सामान्य हैं और लंबी अस्पताल अवधि आवश्यक नहीं।”

रक्त परीक्षण में हल्का संक्रमण पाया गया है। संक्रमण के दौरान बढ़ने वाला ‘ल्युकोसाइट काउंट’ सामान्य से अधिक है। “नर्भिक में करीब १७ हजार था, टिचिंग में लगभग १३ हजार है,” एक चिकित्सक ने बताया।

चिकित्सकों के अनुसार सामान्य ल्युकोसाइट काउंट ११ हजार से ऊपर होने पर संक्रमण माना जाता है। इसलिए खड्कालाई अभी एंटीबायोटिक दिया जा रहा है।

इरान-यमन संघर्ष में जुड़ा हुथी समूह, स्थिति और गंभीर होने की आशंका

क्षेप्यास्त्र हमला

तसवीर स्रोत, ANADOLOU GETTY IMAGES

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यमन के इरान समर्थित हुथी समूह ने लगभग एक महीने पहले इजरायल और अमेरिका द्वारा तेहरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध में पहली बार इजरायल पर हमला करने की पुष्टि की है।

इस समूह ने “संवेदनशील इजरायली सैन्य क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए” बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम इजरायल द्वारा इरान, लेबनान, इराक और फिलिस्तीन क्षेत्रों पर हो रहे आक्रमण के जवाब में उठाया गया है।

इस समूह ने कहा है कि जब तक सभी मोर्चों पर हमले बंद नहीं होते, उनकी कार्रवाई जारी रहेगी।

इसके पहले, इजरायल रक्षा बलों ने यमन से दागे गए मिसाइलों को सफलतापूर्वक परास्त कर दिया था।

युद्ध में नया मोर्चा

बीबीसी जेरुसलम के मध्य पूर्व ब्यूरो प्रमुख जो फ्लोटो के अनुसार, यमन का हुथी समूह कुछ सप्ताह से इरान के समर्थन में था और इसलिए उनकी युद्ध में भागीदारी की उम्मीद थी।

बधाई-शुभकामना दिन मन्त्रालय नआउनू – Online Khabar

रास्वपा ने मंत्रालयों में बधाई एवं शुभकामना देने के दौरान भीड़भाड़ से बचने का आग्रह किया

रास्वपा ने प्रधानमंत्री और मंत्रियों को बधाई एवं शुभकामना देने के लिए मंत्रालयों में भीड़भाड़ न करने की पार्टी के नेताओं और शुभचिंतकों से अपील की है। रास्वपा केंद्रीय अनुशासन आयोग के कार्यवाहक प्रमुख रमाकांत रिमाल ने कहा है कि अनावश्यक मुलाकातों से सरकार के कार्य संचालन में बाधा उत्पन्न हो सकती है, इसलिए ऐसा करने से बचा जाए।

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ने और तेज सेवा प्रवाह में समस्या आने की संभावना के कारण ऐसा न करने के निर्देश जारी किए गए हैं।’ १६ चैत, काठमांडू। पार्टी के नेता, सदस्य और शुभचिंतक मंत्रालयों में जाकर नवनियुक्त प्रधानमंत्री और मंत्रियों को बधाई एवं शुभकामना देते हुए अनावश्यक मुलाकात, शाल और फुलमाला पहनाने, फोटो लेने जैसे कार्य पार्टी अनुशासन और विवादास्पद नजर आने लगे हैं।

इसीलिए केंद्रीय अनुशासन आयोग ने इस प्रकार के कार्यों से बचने का आग्रह किया है। ‘नागरिक सेवा को प्राथमिकता देने और प्रभावी कार्य संचालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री एवं मंत्रियों को बधाई देने के दौरान मंत्रालय में अनावश्यक मुलाकात, जमावड़ा और भीड़भाड़ से सरकार के कार्य में विलंब होगा, कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होगी और समग्र सरकार की प्रणाली पर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए सभी पार्टी पदाधिकारियों और सदस्यों को कड़ा निर्देश जारी किया गया है कि ऐसा कार्य न करें,’ विज्ञप्ति में उल्लेख है।

महिला उद्यम प्रवर्धन में संचार माध्यम की भूमिका पर चर्चा

१६ चैत, काठमाडौं। महिला उद्यमशीलता के प्रवर्धन में संचार माध्यम की भूमिका पर संचारिका समूह नेपाल ने सोमवार काठमाडौं में विशेषज्ञों के साथ एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में मुख्यधारा के संचार माध्यमों द्वारा महिला उद्यमियों के विषय को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है, इस पर विस्तृत चर्चा हुई। चर्चा में भाग लेने वाले संपादक, नागरिक समाज के प्रतिनिधि, मानवाधिकारकर्मी और पत्रकारों ने महिलाओं के छोटे-छोटे उद्यमों की कहानियों को भी सकारात्मक दृष्टिकोण से संचार माध्यमों में प्रस्तुत करने पर जोर दिया।

संचारिका समूह ने जिआईजेड नेपाल के सहयोग से देशभर की महिला उद्यमियों के संघर्ष और सफलताओं पर आधारित २१ ‘उद्यमी महिला’ शीर्षक वाली फैलोशिप स्टोरीज प्रकाशित की हैं, इसकी जानकारी दी गई। बाह्रखरी के प्रधान संपादक हरिबहादुर थापाले कहा कि वर्तमान में राजनीतिक विषयों को ही प्राथमिकता मिलने के बावजूद महिला उद्यमियों की प्रेरणादायक कथाओं को मुख्यधारा में लाना एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि छोटे उद्यमों के प्रेरणादायक विषयों को उजागर करने से अन्य महिलाओं को उद्यमशीलता में जुड़ने का उत्साह मिलेगा।

कार्यक्रम में महिला उद्यमी श्याम बदन श्रेष्ठ ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि महिला उद्यमी परिवार की जिम्मेदारी के साथ-साथ बचाए गए समय में व्यवसाय कर रही हैं, फिर भी संचार माध्यमों ने इन्हें पर्याप्त मंच नहीं दिया है। उन्होंने संचार माध्यमों से प्रेरणा और बाजार प्रवर्धन में सहयोग की आवश्यकता बताई। मानवाधिकारकर्मी चरण प्रसाईं ने कहा कि महिला उद्यम से जुड़े मुद्दों को मानवाधिकार के दृष्टिकोण से उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के छोटे उद्यमों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता बढ़ाने में संचार माध्यमों की भूमिका अहम है।

संचारिका समूह की सलाहकार एवं पूर्वअध्यक्ष बबिता बस्नेत ने डिजिटल माध्यमों के जरिए महिला उद्यम के प्रचार-प्रसार को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छोटे उद्यमों के संघर्ष की कहानियां डिजिटल प्लेटफार्म से व्यापक रूप से प्रसारित की जा सकती हैं। अधिवक्ता पुनदेवी महर्जन ने कहा कि सफलताओं की कहानियों के साथ-साथ कानूनी पक्ष को भी संचार माध्यमों को सशक्त करना चाहिए। जिआईजेड नेपाल की कम्पोनेंट मैनेजर बिनिजा नेपाल ने महिला उद्यमशीलता के प्रवर्धन में संचार माध्यमों और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत छह महीने के अध्ययन प्रतिवेदन के अनुसार विभिन्न प्रदेशों में महिला संबंधी समाचार विषयों में भेद है। सुदूरपश्चिम और कर्णाली प्रदेश में छाउपडी और स्वास्थ्य संबंधी विषय अधिक उठाए गए हैं, जबकि अन्य प्रदेशों में उद्यमशीलता, डिजिटल व्यवसाय और राजनीतिक सहभागिता से जुड़े समाचार प्राथमिकता में पाए गए हैं। संचारिका समूह नेपाल की अध्यक्ष कमला पन्थी ने कहा कि संचार माध्यमों में अब भी महिलाओं की सफलताओं के मुकाबले हिंसा, बलात्कार और आरोप जैसे नकारात्मक विषयों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। कार्यक्रम में २१ फैलो, संपादक, मेंटर, नागरिक समाज के प्रतिनिधि, अधिवक्ता एवं महिला उद्यमियों की उपस्थिति रही।