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लेखक: space4knews

टीकापुर साहित्य महोत्सव का तृतीय संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न

टीकापुर में ‘टीकापुर साहित्य महोत्सव २०८२’ का तृतीय संस्करण चैत १३ से १५ तारीख तक सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह महोत्सव टीकापुर साहित्य समाज एवं सुदूरपश्चिम प्रज्ञाप्रतिष्ठान के संयुक्त आयोजन में रविवार को संपन्न हुआ। आयोजकों ने बताया कि महोत्सव में भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा, सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों को समाहित किया गया। महोत्सव के संस्थापक समन्वयक महेशविक्रम शाह के अनुसार, तृतीय संस्करण ‘थारू साहित्य तथा सांस्कृतिक उत्सव’ की विशेष सोच पर केंद्रित था।

महेशविक्रम शाह ने कहा, “हमारा प्रयास सुदूरपश्चिम प्रदेश की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत एवं स्थायी बनाते हुए बहुभाषिक-बहुसांस्कृतिक सहअस्तित्व का संदेश प्रवाहित करना रहा।” महोत्सव के दौरान २१ विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिनमें भाषा, साहित्य, कला, संगीत, स्थानीय जनजीवन, इतिहास, पहचान, राजनीति, समाज और समसामयिक मुद्दों पर गहन चर्चा एवं अंतरक्रिया हुई। महोत्सव में देश के प्रतिष्ठित भाषाविद्, साहित्यकार, कलाकार, सामाजिक विचारक, चिकित्सक, पत्रकार, शोधकर्ता, संस्कृतिविद्, विकास विशेषज्ञ तथा पर्यटन कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही।

महोत्सव की पहली श्रृंखला में कर्णाली नदी में जल विहार एवं थारू सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किये गए। दूसरी श्रृंखला में सड़क नाटक प्रदर्शन, लेखन कार्यशाला और प्रदेश स्तरीय कविता महोत्सव के कार्यक्रम संपन्न हुए। तृतीय श्रृंखला के अंतर्गत नाटक मंचन, थारू समुदाय की लोकसंस्कृति प्रदर्शन, बौद्धिक संवाद, काव्य श्रवण, ग़ज़ल श्रवण, संगीत कार्यक्रम तथा सुदूरपश्चिम का देउड़ा प्रस्तुत सहित विविध गतिविधियाँ आयोजित की गईं। चौथी श्रृंखला में थारू लोकसंस्कृतियों की महत्वपूर्ण विरासत लुप्तप्राय ‘रामलीला नाच’ का प्रदर्शन हुआ।

महोत्सव में साहित्य, कला और सामाजिक क्षेत्र के स्थापित व्यक्तित्वों के ज्ञान, अनुभव एवं सृजनात्मक यात्रा के प्रत्यक्ष संवाद ने स्थानीय पक्ष को लाभान्वित किया है, ऐसा महेशविक्रम शाह ने दावा किया। उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास टीकापुर नगर को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित होगा।” महोत्सव से स्थानीय पर्यटन संवर्द्धन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और सांस्कृतिक जागरूकता पर सकारात्मक प्रभाव की अपेक्षा की जा रही है।

बाल बच्चों के स्क्रीन समय को कम करने के पाँच उपाय

यदि आप अभिभावक हैं, तो मेटा और गूगल द्वारा जानबूझकर लत लगने वाले प्रकार के सामाजिक नेटवर्क बनाने के कारण एक युवती के मानसिक स्वास्थ्य को चोट पहुँची है, इस अमेरिकी अदालत के फैसले ने आपको सही ठहराया होगा। केली नामक उस युवती के वकीलों ने इंस्टाग्राम के ‘लोड’ होते रहने वाले पेज जैसे फीचर ‘इन्फिनिट स्क्रोल’ को लत लगने वाले स्वरूप का बताया था। अदालत के फैसले को सामाजिक नेटवर्क कंपनियों के लिए ‘निर्णायक क्षण’ कहकर सराहा गया है। लेकिन अपने छोटे बच्चों के स्क्रीन पर बिताए समय को कम करने की कोशिश करने वाले अभिभावकों के लिए इसका व्यावहारिक महत्व कम है। हमने बच्चों को फोन से कम समय के लिए भी दूर रखने के लिए कुछ विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं।

१. छोटी उम्र से शुरुआत करें और यथार्थवादी बनें। कई अभिभावक अपने बच्चों को पहले ही टैबलेट या स्मार्टफोन दे चुके होते हैं, इसलिए ये उपकरण देने से पहले अच्छी सोच-विचार आवश्यक है। लेकिन पूरी तरह फोन का इस्तेमाल बंद कराना सही विकल्प नहीं होता, बताती हैं बालमनोवैज्ञानिक डॉ. जेन गिल्मर। उनका कहना है, “आदतें बदलना हमेशा आसान नहीं होता।” वे कहती हैं कि स्क्रीन टाइम संबंधी विवाद के समय से बेहतर है कि परिवर्तन शांति और तटस्थ स्थिति में किया जाए। “शांत मन से बेहतर संवाद होता है।” पहले कदम के रूप में उनके बताये अनुसार घर में फोन रखने के लिए एक निश्चित जगह तय करें, जैसे कोई खास दराज। “चार्जर के लिए एक विशेष जगह तय करें ताकि फोन बंद रहते हुए भी चार्ज पर रखा जा सके और बात वहीं खत्म हो जाए।”

२. सहयोग करें। कड़े नियम बनाने के बजाय बड़े बच्चों और किशोरों को स्क्रीन टाइम के बारे में चर्चा में शामिल करना जरूरी बताती हैं बालमनोवैज्ञानिक डॉ. मरीहान बेकर। उनका कहना है, “मैं समझती हूं ये जगह तुम्हारे दोस्तों से जुड़ने के लिए है। न देने पर सामाजिक दबाव महसूस करना मैं समझ सकती हूं। इसलिए हमें यह चर्चा करनी होगी कि हम कैसे हमारे और तुम्हारे समय का संतुलन बना सकते हैं, जिससे तुम फोन से दूर रह पाओ।” अभिभावकत्व प्रशिक्षक ओलिविया एडवर्ड्स कहती हैं कि स्क्रीन टाइम कम करने के लिए बच्चे या किशोर से एक गहरा रिश्ता बनाना जरूरी है।

३. सीखने का मौका बनाएं। कई अभिभावक सामाजिक नेटवर्क के चलन और प्रवृत्तियों को समझने में संघर्ष करते हैं, लेकिन यह बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए स्क्रीन टाइम पर खुली चर्चा का अवसर भी बनता है। ओलिविया कहती हैं, “आप कह सकते हैं: ‘तुम्हें पता है सोशल मीडिया कैसे काम करता है? एप्स इसे कैसे आकर्षक बनाते हैं? लोग जितना देखते हैं उससे पैसे कमाते हैं, क्या तुम जानती हो?’” डॉ. जेन बताती हैं कि इस तरह अभिभावक अपने बच्चों को डिजिटल साक्षरता दे सकते हैं।

४. अच्छे व्यवहार का उदाहरण बनें। बच्चे अपने माता-पिता की नकल करते हैं, इसलिए स्क्रीन के अच्छे उपयोग की आदतें अपनाने के लिए खुद भी आत्मनिरीक्षण जरूरी है। मरीहान इसे थोड़े हल्के और मजेदार तरीके से करने का सुझाव देती हैं। “हम बच्चे से खुलकर कह सकते हैं, ‘हम सब इसमें दोषी हैं और फोन के साथ अपना रिश्ता बेहतर बनाना होगा, मैं अभी तक ऐसा नहीं कर पाया।'”

५. घबराएं नहीं। बच्चों को पालना कभी आसान नहीं था, लेकिन आज के स्क्रीन युग में हम सब प्रभाव समझ रहे हैं और यह एक चिंताजनक पहलू भी है। यूनिवर्सिटी ऑफ एसिक्स के डिजिटल संचार विशेषज्ञ डॉ. टोनी सैम्पसन अभिभावकों को अत्यधिक भय में नहीं होने की सलाह देते हैं। “अभिभावक अक्सर संचार के आतंक में पड़ जाते हैं और सोचते हैं कि हर किशोर का मस्तिष्क सोशल मीडिया की लत में फंसा हुआ है,” वे कहते हैं। लेकिन बच्चों और किशोरों के मस्तिष्क में ‘न्यूरोप्लास्टिसिटी’ नाम की क्षमता होती है, जो उन्हें परिस्थिति के अनुसार अनुकूलित और पुनः संभालने में सक्षम बनाती है।

“सोशल मीडिया ध्यान भंग नहीं करता, बल्कि ध्यान को कब्जा करता है और वाणिज्यिक सामग्री की ओर मोड़ता है,” वे आगे बताते हैं। “सकारात्मक तकनीक का उपयोग न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा देकर रचनात्मकता, अनुसंधान और सीखने को प्रोत्साहित करता है।”

राष्ट्रपतिद्वारा संसद् अधिवेशन आह्वान – Online Khabar

राष्ट्रपति ने संसद के अधिवेशन के लिए आमंत्रण दिया

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने चैत १९ तारीख को संघीय संसद के दोनों सदनों के अधिवेशन के लिए आमंत्रण दिया है। मंत्रिपरिषद की बैठक ने उसी दिन संसद के अधिवेशन के लिए राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिश की थी। यह नई सरकार के गठन के बाद संघीय संसद का पहला अधिवेशन है।

१६ चैत, काठमांडू। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संघीय संसद के दोनों सदनों के अधिवेशन के लिए आमंत्रण दिया है। सोमवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक ने चैत १९ तारीख को संसद के अधिवेशन के लिए राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिश की थी। इस निर्णय के आधार पर राष्ट्रपति पौडेल ने अधिवेशन के लिए आमंत्रण दिया है, यह जानकारी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता रितेशकुमार शाक्य ने दी। सरकार ने आगामी चैत १९ तारीख को दोपहर २ बजे संसद की बैठक बुलाने के लिए सिफारिश की थी। २१ फागुन को हुए चुनाव के बाद नई सरकार के गठन के बाद यह संघीय संसद का पहला अधिवेशन है।

पूर्व राष्ट्रपति भण्डारी ने ओली के स्वास्थ्य का लिया हालचाल

१६ चैत, काठमांडू। पूर्व राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के स्वास्थ्य की जानकारी ली है। सोमवार को त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल महाराजगंज पहुंची पूर्व राष्ट्रपति भण्डारी ने ओली के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की। भण्डारी के निजी सचिव राजकुमार राई ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति भण्डारी ने चिकित्सकों से भी ओली की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बातचीत की।
पूर्व प्रधानमंतरी भी रह चुके ओली को भदौ २३ और २४ की घटनाओं की जांच के लिए बने गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व में जांच आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए सरकार के निर्देश पर पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें उपचार के लिए शिक्षण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। –रासस

एन्फा विवाद: अखिल नेपाल फुटबल सङ्घमा निर्वाचन र विवादों का इतिहास

अखिल नेपाल फुटबल सङ्घ (एन्फा) की स्थापना विसं २०१० में हुई थी। बहुदलीय व्यवस्था पुनर्स्थापित होने के बाद एन्फा में लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचन प्रक्रिया के माध्यम से नेतृत्व चयन शुरू किया गया है। हालांकि, एन्फा का यह निर्वाचन प्रक्रिया सहज और विवादमुक्त नहीं दिखी है। नेपाल की सबसे चर्चित खेल संस्था और इससे जुड़े बजट में बार-बार नेतृत्व चुनाव के दौरान विवाद उत्पन्न होते रहे हैं।

विसं २०४४ में दशरथ रंगशाला में आए तूफान के कारण ७१ से अधिक लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद खेलकूद पदाधिकारियों ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने वालों में तत्कालीन खेलकूद मंत्री केशरबहादुर विष्ट, राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्यसचिव शरदचन्द्र शाह और एन्फा अध्यक्ष कमल थापा शामिल थे। थापा के इस्तीफा देने के बाद चन्द्रबहादुर गुरुङ को एन्फा अध्यक्ष जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके पद छोड़ने के बाद ध्रुवबहादुर प्रधान कार्यवाहक अध्यक्ष बने। बाद में आदित्यध्वज जोशी एन्फा के नेतृत्व में आए, लेकिन उन्होंने भी इस्तीफा देने के बाद कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी पुरुषोत्तम श्रेष्ठ को दी गई।

गणेश थापा की नियुक्ति विसं २०५१ साल चैत्र २२ गते हुई थी। हालांकि, फीफा ने थापा को नहीं बल्कि रुक्म शम्शेर के नेतृत्व को मान्यता दी। थापा की तदर्थ समिति ने २०५२ असोज में चुनाव करवाया, जिसे फीफा ने स्वीकार किया और नेपाली फुटबल में थापा के नेतृत्व का युग शुरू हुआ। लेकिन, थापा के नेतृत्व में विवादों की श्रृंखला शुरू हो गई। २०६२/६३ में पुनः चुनाव के समय ‘बी’ डिवीजन के क्लबों ने १८-बिंदु मांगों के साथ आंदोलन शुरू किया। थापा द्वारा खिलाड़ियों के पारिश्रमिक बढ़ाने के कारण क्लबों को कठिनाई का सामना करना पड़ा।

असार ४, २०८३ तक उनकी कार्यकाल रहने के बावजूद एन्फा समिति ने २०८२ माघ २८ गते पहले से चुनाव कराने का निर्णय लिया। इस फैसले से विवाद भड़कने लगे। तहगत चुनाव न कर सीधे केंद्र के चुनाव करने को लेकर कई क्लबों और जिलों ने विरोध जताया। राखेप ने बिना स्वीकृति चुनाव न कराने के लिए एन्फा को पत्र भेजा और चुनाव स्थगित करने का निर्देश दिया। एन्फा ने जवाब दिया कि यह फीफा के निर्देशानुसार है और अपने विधान के अंतर्गत यह चुनाव कर रहा है, इसलिए चुनाव प्रक्रिया नहीं रोकी जाएगी। वर्तमान में एन्फा ने राखेप को निलंबित कर दिया है, लेकिन विवाद जारी है।

रूसी उपविदेशमंत्री गालुजिन ने युरासियाई सुरक्षा संरचना के क्षेत्रीय संगठन आधारित होने पर ज़ोर दिया

समाचार सारांश

  • रूसी उपविदेशमंत्री मिखाइल गालुजिन ने युरासिया की सुरक्षा संरचना को क्षेत्रीय संगठनों पर आधारित होने पर ज़ोर दिया है।
  • गालुजिन ने कहा कि युरासियाई सुरक्षा प्रणाली ‘समान और अविभाज्य सुरक्षा’ की अवधारणा पर आधारित होनी चाहिए।
  • उपविदेशमंत्री गालुजिन का तर्क है कि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा और विकास की जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी।

रूसी उपविदेशमंत्री मिखाइल गालुजिन ने युरासिया की सुरक्षा संरचना को क्षेत्रीय संगठनों पर आधारित होना आवश्यक बताकर इस बात पर जोर दिया है।

उज्बेकिस्तान के तर्मेज में आयोजित ‘‘रूस-उज्बेकिस्तान: युरासिया में रणनीतिक साझेदारी’’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने यह विचार व्यक्त किया।

गालुजिन के अनुसार, युरासियाई सुरक्षा प्रणाली किसी भी देश के खिलाफ लक्षित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह ‘‘समान और अविभाज्य सुरक्षा’’ की अवधारणा पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें कोई भी राष्ट्र दूसरे राष्ट्र की सुरक्षा को खतरे में डाले बिना अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास न करे।

उपविदेशमंत्री गालुजिन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा प्रस्तावित ‘‘ग्रेटर युरासियन पार्टनरशिप’’ की अवधारणा को उज्बेकिस्तान की ‘‘उज्बेकिस्तान 2030’’ रणनीति के साथ संगत बताया।

उन्होंने कहा कि बाहरी शक्तियों के सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक दबाव से स्वतंत्र होकर क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा और आर्थिक विकास की पूरी जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी।

इस प्रक्रिया में कमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (सीआईएस), यूनियन स्टेट ऑफ़ रूस एंड बेलारूस, युरासियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) और कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रिटी ऑर्गनाइजेशन (CSTO) जैसे निकायों की भूमिका निर्णायक होगी, उनकी मानना है।

१६५
प्रत्यक्ष सिट

पार्टीहरू प्रत्यक्ष सिट

0 Seat

0 Seat

समानुपातिक कुल सिट

कर्णाली हाई अल्टिच्युड ट्रेनिंग सेंटर के लिए जुम्ला में जमीन प्राप्त

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • कर्णाली हाई अल्टिच्युड ट्रेनिंग सेंटर के लिए जुम्ला में 6,120 वर्ग मीटर की जमीन प्राप्त हुई है।
  • जुम्ला खेलकूद विकास समिति के कार्यालय प्रमुख कविदत्त न्यौपाने ने राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्य-सचिव रामचरित्र मेहता को जमीन का लालपुर्जा सौंपा।
  • पातारासी गाउँपालिका वार्ड 3, लोठचौर में स्थित यह जमीन लाउरो बोहरा, गोरबहादुर बोहरा और कुम्भर बोहरा ने प्रदान की है।

16 चैत्र, काठमांडू। कर्णाली हाई अल्टिच्युड ट्रेनिंग सेंटर के लिए जुम्ला में जमीन प्राप्त की गई है।

राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्य-सचिव रामचरित्र मेहता को जुम्ला खेलकूद विकास समिति के कार्यालय प्रमुख कविदत्त न्यौपाने ने सोमवार को इसका लालपुर्जा सौंपा।

पातारासी गाउँपालिका वार्ड 3, लोठचौर में स्थित यह जमीन लाउरो बोहरा, गोरबहादुर बोहरा और कुम्भर बोहरा ने उपलब्ध कराई है, ऐसा प्रमुख न्यौपाने ने बताया।

जमीन का क्षेत्रफल 6,120 वर्ग मीटर है।

महेश बस्नेतको प्रतिक्रिया– प्रतिशोधको राजनीतिविरुद्ध न्यायालयको कदम स्वागतयोग्य

महेश बस्नेतको प्रतिक्रिया– प्रतिशोधको राजनीतिविरुद्ध न्यायालयको कदम स्वागतयोग्य

१६ चैत, काठमाडौं । काठमाडौं जिल्ला अदालतले आफूविरुद्ध प्रहरीले पक्राउ पुर्जी नदिएकोमा नेकपा एमालेका सचिव महेश बस्नेतले अदालतको निर्णयलाई स्वागतयोग्य बताएका छन्। सोमबार फेसबुकमार्फत प्रतिक्रिया दिँदै सचिव बस्नेतले अदालतको आदेशलाई ‘प्रतिशोधको राजनीतिविरुद्ध न्यायालयले चालेको स्वागतयोग्य कदम’ रहेको बताएका छन्।
‘निरंकुश बालेन सरकार र कथित गृहमन्त्रीको निर्देशनमा झूटा मुद्दा लगाउँदै काठमाडौं जिल्ला प्रहरीले सरकारी वकिल मार्फत पक्राउ प्रक्रिया अघि बढाएको फाइलमा काठमाडौं जिल्ला अदालतले पक्राउ नगर्न आदेश दिएको छ,’ बस्नेतले लेखेका छन्, ‘यस निर्णयका लागि काठमाडौं जिल्ला अदालतप्रति हार्दिक धन्यवाद प्रकट गर्दछु। प्रतिशोधको राजनीतिविरुद्ध न्यायालयले चालेको यो कदम प्रशंसनीय छ।’
काठमाडौं जिल्ला अदालतले आज जाहेरी र सम्बन्धित सबै फाइल उच्च अदालत पाटनमा पुगेको भन्दै बस्नेतविरुद्ध पक्राउ पुर्जी जारी गर्ने अनुमति दिन अस्वीकार गरेको थियो।

तीन नए डाक टिकटों का विमोचन, संचार मंत्री का बयान- स्मार्ट डाक युग की शुरुआत

डाक सेवा विभाग ने पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व वाले तीन नए डाक टिकट जारी किए हैं। संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ। विक्रम तिमिल्सिनाले ने इन डाक टिकटों के प्रथम दिवस आवरण पर मुहर लगाई। मंत्री तिमिल्सिनाले ने डाक सेवा को समयानुकूल और प्रभावशाली बनाने तथा स्मार्ट डाक विकास को तीव्रता देने का आह्वान किया। १६ चैत, काठमांडू।

डाक सेवा विभाग ने जावा दाम (मुद्रा), धुर्कोट दरबार गुल्मी, और नृसिंह अवतार नृत्य (कार्तिक नृत्य) चित्रित डाक टिकट जारी किए हैं। सोमवार को विभाग के बबरमहल कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री डॉ। तिमिल्सिनाले इन तीनों डाक टिकटों के प्रथम दिवस आवरण पर मुहर लगाई। उन्होंने कहा, “देश की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ राष्ट्रीय पहचान को बनाए रखने में डाक टिकट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”

मंत्री ने डाक सेवा को नागरिकों के और अधिक करीब लाने तथा सार्वजनिक सेवा को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सरकार की सौ सूत्रीय मार्गदर्शिका के अनुसार कार्य की गति तेज करने हेतु विभाग को नई कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। साथ ही जनता में सकारात्मक अपेक्षाएं जागृत करने का भी आग्रह किया। मंत्री ने डाक सेवा को समयानुसार प्रभावी बनाते हुए स्मार्ट डाक विकास को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।

मंत्रालय की सचिव लक्ष्मीकुमारी बस्नेत ने डाक टिकटों के माध्यम से देश की पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन में सहायता मिलने की बात कही। डाक सेवा विभाग की महानिदेशक मनमाया पंगेनी भट्टराई ने डाक टिकटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोलने वाले राजदूत के रूप में महत्वपूर्ण स्थान बताते हुए कहा कि विभाग इतिहास, धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से निरंतर डाक टिकटों का प्रकाशन करता रहना चाहता है। कार्यक्रम में संचार मंत्री डॉ। तिमिल्सिनाले का विभाग की ओर से स्वागत किया गया और विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्रदान की गई।

इन्ट्रान्स और ब्रिज कोर्स बंद करने का निर्णय प्लस टू तक सीमित, उच्च स्तर की कक्षाओं को केवल विनियमित किया जाएगा

सस्मित पोखरेल शिक्षामंत्री

तस्बिर स्रोत, RSS

आगामी बैशाख से उच्च शिक्षा संबंधित तैयारी कक्षा बंद करने को लेकर शिक्षा मंत्रालय और शिक्षामंत्री के बीच भिन्न सूचनाओं के चलते भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मंत्रालय के सचिव ने सरकार द्वारा “केवल कक्षा बारहवीं तक की कक्षाएं बंद की जाएंगी” कहा है।

मंत्रालय के प्रवक्ता शिवकुमार सापकोटाले रविवार को प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि, “विद्यालय स्तर की विभिन्न कक्षाएं और उच्च शिक्षा स्तर के प्रवेश परीक्षा तैयारी कक्षा व ब्रिज कोर्स कार्यक्रम बैशाख १ से पूर्णतया बंद करने का मंत्री स्तरीय निर्णय लिया गया है।”

लेकिन कुछ समय बाद शिक्षा मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने फेसबुक के माध्यम से सूचना जारी करते हुए कहा कि “केवल कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए चल रही कुछ अतिरिक्त तैयारी कक्षाएं बंद की जाएंगी।” इस प्रकार कुछ लोगों ने उच्च शिक्षा की तैयारी कक्षा को लेकर अस्पष्टता महसूस की।

“मंत्री द्वारा कल शाम सोशल मीडिया पर लिखा गया वाक्य स्पष्ट है,” मंत्रालय के सचिव चूडामणि पौडेल ने कहा, “केवल कक्षा बारहवीं तक की कक्षाएं पूर्णतया बंद की जाएंगी, उच्चतर कक्षाओं को केवल विनियमित किया जाएगा, बंद नहीं किया जाएगा।”

सूचना वेबसाइट से हटा दी गई

शिक्षा मंत्रालय

तस्बिर स्रोत, Ministry of Education, Science & Technology

मंत्रालय द्वारा सामाजिक मीडिया और अन्य आधिकारिक संचार माध्यमों से प्रवक्ता द्वारा रविवार को जारी किया गया वक्तव्य हटा दिया गया है, जिससे इस विषय पर पुनः स्पष्ट सूचना आने की संभावना है।

कुशल मल्ल की शानदार बल्लेबाजी से आर्मी ने बागमती को पराजित किया

त्रिभुवन आर्मी क्लब ने पीएम कप क्रिकेट में कुशल मल्ल की नाबाद ९० रनों की शानदार पारी की बदौलत बागमती द्वारा दिए गए २०९ रनों के लक्ष्य को ७ विकेट पर पूरा किया। कुशल मल्ल ने अंतिम २ ओवरों में ३५ रन आवश्यक थे, जिसमें उन्होंने ५ छक्के लगाकर आर्मी की जीत सुनिश्चित की। बागमती को ४ मैचों में यह तीसरी हार मिली, जबकि आर्मी ने ४ मैचों में ३ जीत और एक मैच बिना नतीजे के खेला है।

१५ चैत, काठमाण्डौ। कुशल मल्ल की बेहतरीन बल्लेबाजी के दम पर त्रिभुवन आर्मी क्लब ने पीएम कप क्रिकेट में अपनी अपराजित उड़ान जारी रखी। २८ ओवरों में घटाए गए मैच में बागमती द्वारा दिए गए २०९ रनों के लक्ष्य को आर्मी ने आखिरी गेंद से एक गेंद पहले ७ विकेट खोकर हासिल किया। मल्ल ने ५८ गेंदों में ३ चौके और ८ छक्कों की मदद से नाबाद ९० रन बनाए। ओपनर तृतराज दास ने ५४ और नरेन साउद ने २६ रन बनाए।

मजबूत लक्ष्य का पीछा करते हुए आर्मी ११८-५ के स्कोर पर थी। इस स्थिति से मल्ल ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अंतिम २ ओवरों में जब ३५ रन की जरूरत थी तब पाँच छक्के लगाकर अकेले ३३ रन बनाए। २७वें ओवर में मल्ल ने सन्दीप लामिछाने के खिलाफ तीन छक्के लगाते हुए २२ रन बनाए।

बागमती के लिए इशान पांडे और विवेक मगर ने दो-दो विकेट लिए, जबकि रिजन ढकाल, सन्दीप लामिछाने और सोनु देवकोटा को एक-एक विकेट मिला।

पहले बल्लेबाजी करते हुए टॉस हारने वाली बागमती ने निर्धारित २८ ओवरों में ७ विकेट गंवाकर २०८ रन बनाए। आशुतोष घिरैया ने सर्वाधिक ३८ रन बनाए जबकि पवन थापा ने ३५ रन जोड़े। आर्मी की ओर से नरेन साउद ने ४ विकेट हासिल किए, वहीं शाहब आलम, दुर्गेश गुप्ता और बसिर अहमद ने एक-एक विकेट लिया।

प्रतियोगिता में आर्मी ने ४ मैच खेले हैं, जिनमें से ३ में जीत हासिल की है और एक मैच बिना नतीजे का रहा है। बागमती को ४ मैचों में तीसरी हार का सामना करना पड़ा है।

ओलीलाई पक्राउ गर्नुको कारण पेश गर्न सर्वोच्चको आदेश

सर्वोच्च अदालत ने ओली को गिरफ्तार करने के कारण सरकार को बताने का निर्देश दिया

सर्वोच्च अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार किए जाने के कारण सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। ओली की पत्नी राधिका शाक्य ने अपने पति को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखे जाने का दावा करते हुए सर्वोच्च अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।

जेनजी आंदोलन की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली और तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक के खिलाफ जांच की सिफारिश की थी। १६ चैत, काठमांडू। सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश मेघराज पोखरेल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कारण बताओ आदेश जारी किया है। भदौ २३ और २४ को जेनजी आंदोलन की घटनाओं में तत्कालीन प्रधानमंत्री के रूप में ओली द्वारा किए गए कार्यों को लेकर सवाल उठे थे।

सरकार द्वारा जेनजी आंदोलन की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली के खिलाफ जांच करने का सुझाव दिया था। इसी सिफारिश के आधार पर तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक को भी जांच के लिए अनुशंसित किया गया था। इस आधार पर शनिवार सुबह ओली और लेखक को गिरफ्तार कर लिया गया था।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र को ज्ञानेन्द्र शाही ने कर्णाली के लिए 9 बिंदु प्रस्तुत किए

राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी के संसदीय दल के नेता ज्ञानेन्द्र शाही ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह को कर्णाली प्रदेश के विकास के लिए 9 बिंदुओं का प्रस्ताव दिया है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र ने कर्णाली के सतत और समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताई और आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। इस बैठक में कर्णाली प्रदेश से निर्वाचित सभी सांसद मौजूद थे। 16 चैत, काठमांडू।

ज्ञानेन्द्र शाही ने विशेष रूप से कर्णाली प्रदेश के विकास, अवसंरचना, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सुधार के लिए 9 बिंदुओं का प्रस्ताव रखा है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र भी प्रदेशगत मुद्दों पर सांसदों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। शाही ने रोजगार सृजन और स्थानीय संसाधनों के सही उपयोग को भी अपनी मांगों में शामिल किया है।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र ने जवाब में कहा कि कर्णाली प्रदेश के सतत और समावेशी विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और आवश्यक नीतिगत एवं संरचनात्मक सहायता उपलब्ध कराएगी। इस अवसर पर कर्णाली प्रदेश के सभी निर्वाचित सांसद उपस्थित थे।

रमेश लेखक की रिहाई के लिए दायर याचिका में सर्वोच्च अदालत ने कारण बताओ आदेश दिया

रमेश लेखक

तस्बिर स्रोत, Nepal Photo Library

सर्वोच्च अदालत ने पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक की रिहाई के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कारण बताओ आदेश जारी किया है।

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की रिहाई की मांग वाली अन्य याचिकाओं का निर्णय अभी शेष है।

सर्वोच्च अदालत के सहायक प्रवक्ता निराजन पांडे ने बताया, “एक याचिका में कारण बताओ आदेश जारी हुआ है। दूसरी में भी आज ही आदेश आने की संभावना है।”

पूर्व गृहमंत्री लेखक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर जारी कारण बताओ आदेश के संबंध में उन्होंने कहा, “कारण बताओ आदेश जारी होने के बाद यह मामला अब संयुक्त इजलास में सुना जाएगा।”

पूर्व गृहमंत्री लेखक के लिए उनकी पत्नी यशोदा लेखक द्वारा दायर याचिका की सुनवाई न्यायाधीश कुमार रेग्मी की इजलास में हुई थी।

स्पिन गेंदबाजी के प्रदर्शन ने गण्डकी प्रदेश को पीएम कप में ऐतिहासिक जीत दिलाई

राष्ट्रीय टीम के कप्तान रोहित पौडेल समेत अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाले खिलाड़ियों वाली एपीएफ टीम को हराने में गण्डकी के बल्लेबाजों और गेंदबाजों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

समाचार सारांश

  • गण्डकी प्रदेश क्रिकेट टीम ने पीएम कप में विभागीय टीम एपीएफ को हराकर इतिहास रचा।
  • 21 ओवर के मैच में गण्डकी ने एपीएफ को 43 रन से पराजित किया।
  • कप्तान बिपिन खत्री ने स्पिन गेंदबाजी को जीत में अहम योगदान बताया।

15 चैत, काठमाडौं – गण्डकी प्रदेश क्रिकेट टीम ने पीएम कप में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। विभागीय टीम एपीएफ क्लब को तल्लो मुलपानी क्रिकेट मैदान पर हराकर गण्डकी ने नया इतिहास रचा है।

पीएम कप के इतिहास में पहली बार किसी विभागीय टीम को हराते हुए गण्डकी ने महत्वपूर्ण 43 रन की जीत हासिल की। वर्षा के कारण खराब पिच की वजह से मैच को 21 ओवर में सीमित किया गया था।

राष्ट्रीय टीम के कप्तान रोहित पौडेल सहित अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले खिलाड़ियों से लैस एपीएफ टीम को हराने में गण्डकी के स्पिन गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया जबकि बल्लेबाजों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

बल्लेबाजी में गौरव विक, दीपक डुम्रे, अर्जुन कुमाल और कप्तान बिपिन खत्री ने अहम रन बनाए। यह टी-20 जैसा मुकाबला था जिसमें 150 रन का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।

गेंदबाजी में स्पिनरों ने शुरू से ही दबदबा बनाए रखा तथा एपीएफ के शीर्ष क्रम को भंग किया। अपराजित रहे रोहित पौडेल और सिब्रिन श्रेष्ठ की संयुक्त कोशिश ने टॉप आर्डर में दबाव बनाया। सुवास भण्डारी ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया और एपीएफ को कोई मौका नहीं दिया।

बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज और कप्तान बिपिन खत्री ने विभागीय टीम एपीएफ को पराजित करने में निर्णायक भूमिका निभाई। स्पिनर अपराजित पौडेल को ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया।

कप्तान बिपिन खत्री ने इस जीत को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, ‘पहले भी चुनौती को संभालने का विश्वास खिलाड़ियों में था। हम सभी ने एक बेहतर टीम इकाई के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया। टी-20 फॉर्मेट होने की वजह से आज खेल में आसानी हुई।’

उन्होंने आगे कहा, ‘मध्य प्रदेश में जाने से पहले जीत के साथ जाना चाहते थे। यह जीत आगामी मैचों के लिए हमारा आत्मविश्वास बढ़ाएगी। हम बेहतर निर्णय लेकर आगे बढ़ेंगे।’

स्पिन गेंदबाजी का दबदबा, एपीएफ की बल्लेबाजी विफल

21 ओवर के मैच में एपीएफ ने लोकेश बम के साथ आसिफ को ओपनिंग जोड़ी के रूप में भेजा था। लेकिन लोकेश ने केवल 9 गेंदों पर अपराजित स्पिनर पौडेल की गेंद पर 14 रन पर आउट होकर वापसी की।

पहले मैच में सेंचुरी बनाने वाले आसिफ को भी अपराजित ने 14 रन पर पवेलियन भेज दिया। इसी बीच कप्तान रोहित भी सिब्रिन श्रेष्ठ की गेंद पर बोल्ड हो चुके थे।

पहले खेल में ओपनिंग करने वाले दीपक बोहरा 6 और संदीप जोरा 8 रन पर क्रमशः पौडेल और सिब्रिन की गेंद पर आउट होकर एपीएफ की पारी धराशायी हो गई, जो 47-5 पर सीमित रह गई।

आगे के बल्लेबाज युवराज खत्री 7 रन पर, अमरसिंह राउटेला बिना स्कोर के आउट हुए, और टीम 61-7 तक पहुंची। सुमित महर्जन ने टीम को कुछ देर संभाला, लेकिन कमलसिंह ऐरी 17 और सुमित 22 रन पर आउट हुए।

गण्डकी के अपराजित ने 5 ओवर में 31 रन देकर 3 विकेट लिए। सिब्रिन ने 4 ओवर में 25 रन खर्च करते हुए 3 विकेट झटके, जबकि सुवास भण्डारी ने 2 और कप्तान बिपिन ने 1 विकेट लिया।

खेल के बाद बात करते हुए अपराजित ने कहा कि जीत में योगदान देकर खुशी हुई। उन्होंने कहा, ‘हमने बड़े स्ट्राइकर्स को नियंत्रित करने की योजना बनाई और अच्छी गेंदबाजी की जो सफल रही।’

उन्होंने आगे कहा, ‘आज हमारे पास कई स्पिनर थे और एनपीएल खेलने का अनुभव रखने वाले खिलाड़ी भी थे, जिससे जीत का मनोबल बढ़ा।’

उनका लक्ष्य है कि वे आगामी मुकाबलों में भी अच्छा प्रदर्शन करें और टीम को जय ट्रॉफी प्रतियोगिता के लिए क़्वालीफाई कराएं।

कप्तान बिपिन ने कहा, ‘गेंद घूम रही थी और गति भी कम थी, इसलिए हमने शुरू से ही स्पिनर पर भरोसा रखा। अपराजित और सिब्रिन ने बेहतरीन गेंदबाजी की।’

बल्लेबाजी में गण्डकी का प्रभावशाली प्रदर्शन

वर्षा के कारण प्रभावित तल्लो मुलपानी क्रिकेट मैदान पर पानी सूखने के बाद खेल देर से शुरू हुआ और ओवर घटाकर 21 ओवर का मैच हुआ। टॉस जीतकर गण्डकी ने बल्लेबाजी का फैसला किया।

ओपनर गौरव विक और अर्जुन कुमाल ने अच्छी शुरुआत दी। गौरव ने 37 और अर्जुन ने 25 रन बनाए, हालांकि दोनों आउट हुए, पर टीम ने एक मजबूत आधार तैयार किया।

दीपक डुम्रे ने 34, कप्तान बिपिन खत्री ने नाबाद 20 और दिनेश बुढामगर ने 19 रन बनाए, जिससे गण्डकी ने 150 रन का लक्ष्य बनाया।

ओवरकास्ट मैदान की स्थिति में यह स्कोर अच्छा माना गया और गण्डकी ने सफलतापूर्वक इसे बचाया। कप्तान बिपिन ने कहा कि इस तरह की परिस्थितियों में खेलने का अभ्यास है।

उन्होंने कहा, ‘हम पोखरा के खिलाड़ी हैं, ऐसी परिस्थितियों में खेलना हमारी आदत है। अच्छा योगफल होने के कारण इसे बचाने का भरोसा था।’

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गण्डकी ने प्रतियोगिता में पहली जीत दर्ज करते हुए 4 मैचों में 3 अंक जोड़े और अंतिम स्थान छोड़कर आठवें स्थान पर पहुंच गई है। एपीएफ भी 4 मैचों में 3 अंक के साथ सातवें स्थान पर है।

अब बाकी के सभी पीएम कप के मैच मधेश प्रदेश में होंगे। अब तक त्रिभुवन आर्मी क्लब और मधेश प्रदेश ही अपराजित टीमें हैं। आर्मी ने 4 मैचों में 3 जीत के साथ 7 अंक बनाकर शीर्ष स्थान बनाया है।

पुलिस 4 मैचों में 5 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि मधेश 5 अंकों के साथ नेट रन रेट से तीसरे स्थान पर है। सुदूरपश्चिम 3 मैचों में 4 अंक लेकर चौथे, लुम्बिनी और कर्णाली समान 3 अंक लेकर पांचवें और छठे स्थान पर हैं।

चार मैचों में 1 जीत और 2 अंकों के साथ बागमती नवां स्थान पर है जबकि कोशी 4 मैचों में 1 अंक लेकर अंतिम स्थान पर है।