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लेखक: space4knews

प्रिमनसुनमै करिब तेब्बर वर्षा, मनसुनमा खडेरीको आशंका

प्रि-मनसून में वर्षा सामान्य से तीन गुना अधिक, मानसून में पड़ सकता है सूखे का खतरा

समाचार समीक्षा के बाद तैयार किया गया। चैत से वैशाख तक नेपाल में प्रि-मनसून के दौरान असामान्य रूप से लगातार वर्षा, ओले और हिमपात हुआ है, जिससे ठंडे मौसम का अनुभव किया गया है। पश्चिमी वायु प्रणाली की सक्रियता के कारण प्रि-मनसून में सामान्य से तीन गुना अधिक बारिश हुई है और वैशाख के अंत तक 230 मिमी पानी गिर चुका है। मौसम विशेषज्ञों ने एल नीनो प्रभाव के कारण मानसून के दौरान कम वर्षा और अधिक गर्मी होने का अनुमान लगाया है और सतर्क रहने की सलाह दी है। 3 जेठ, काठमांडू। सामान्यतः चैत–वैशाख नेपाल में अत्यधिक गर्मी के मौसम के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस वर्ष हालात अलग नजर आ रहे हैं। वर्षाात्कार शुरु हो चुका है, लगातार बारिश होने से ठंडक महसूस हो रही है। गर्मी होने के बावजूद जैकेट पहननी पड़ रही है, जो असामान्य अनुभव है। लगातार बारिश होने का कारण समझने के लिए समुंद्र तक जाना होगा। मौसम विज्ञानों के अनुसार इस वर्ष हुई वर्षा प्रि-मनसून अर्थात् मानसून पूर्व के मौसमी प्रणाली की सक्रियता के कारण है। प्रि-मनसून मध्य फागुन से मध्य जेठ तक होता है, जो सामान्यतः गर्म मौसम का होता है, लेकिन इस वर्ष वैशाख तक बार-बार वर्षा, ओले और बर्फबारी हुई है। कुछ स्थानों पर तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं भी हुई हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति जेठ महीने तक जारी रह सकती है। वर्षा मुख्यतः तीन कारणों से होती है: सक्रिय पश्चिमी वायु, स्थानीय वायु और बंगाल की खाड़ी से आने वाली जलवाष्पयुक्त हवा का प्रभाव। पश्चिमी वायु (वेस्टर्न डिस्टर्बेन्स) पश्चिम से पूर्व की ओर बहने वाली हवा की प्रणाली है जो प्रि-मनसून और ठंड के मौसम में नेपाल में वर्षा और हिमपात कराती है। यह भूमध्यसागर क्षेत्र से होकर तुर्की, ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान होते हुए दक्षिण एशिया में फैलती है। यह ठंडी और नम हवा हिमालय क्षेत्र में पहुंचकर बादल और वर्षा का कारण बनती है, कभी-कभार ओला और आंधी भी लाती है। इस वर्ष सर्दियों के खत्म होते ही प्रि-मनसून में भी पश्चिमी वायु सक्रिय रही जिसके कारण हिमपात और ओले गिरने की घटनाएं हुई हैं, यह बात त्रिभुवन विश्वविद्यालय जल तथा मौसम विभाग के सहप्राध्यापक मदन सिग्देल ने बताई। उन्होंने चैत–वैशाख में बार-बार वर्षा और ठंडक महसूस होने का कारण बताते हुए कहा, ‘सर्दियों के बाद पश्चिमी वायु की सक्रियता अधिक होने के साथ ही स्थानीय वायु और जलवाष्प का पुनरावर्तन भी बढ़ा जिससे वर्षा की मात्रा बढ़ गई।’ मौसमविद् उज्ज्वल उपाध्याय के अनुसार फिलीपींस सागर में बने बड़े तूफान (हरिकेन) के कारण बनी वायुमंडलीय प्रणाली ने नेपाल समेत इंडोनेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड, लाओस और वियतनाम तक व्यापक क्षेत्र में वर्षा की। पश्चिमी वायु का प्रभाव जेठ तक बना रहेगा और नेपाल में वर्षा जारी रहने का अनुमान है। त्रिभुवन विश्वविद्यालय जल तथा मौसम विभाग के सहप्राध्यापक डॉ. विनोद पोखरेल ने भी जेठ माह के कुछ दिनों तक बारिश होने की संभावना जताई है। बादलों और वर्षा के कारण सूर्य की किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच पातीं जिससे पृथ्वी जल्दी गर्म नहीं हो पाती, इसलिए ठंडक महसूस होती है। नेपाल में भी ऐसी स्थिति देखी गई है। कुछ दिन पहले दोपहर में धूप के दौरान भी बादलों के कारण बारिश हुई और रात को आकाश साफ होता रहा। दिन में सूरज की गर्मी कम होने और रात को तेज ठंड होने से चैत–वैशाख में भी ठंडक बनी रहती है, मौसमविद् बताते हैं। ‘सबसे ज्यादा धूप आने और तापमान बढ़ने के समय भी घने बादल और आंधी की वजह से सूर्य की गर्मी जमीन तक नहीं पहुंच पाती, जिससे दिन का तापमान कम रहता है,’ उपाध्याय कहते हैं। ‘रात को आकाश साफ होने से जमीन और वातावरण का तापमान जल्दी गिरने के कारण सुबह और रात में अधिक ठंड लगती है।’

इस वर्ष प्रि-मनसून में कितनी वर्षा हुई?
प्रि-मनसून वह संक्रमणकाल होता है जो सर्दी के बाद और मानसून शुरू होने से पहले आता है। जल तथा मौसम विभाग के अनुसार मध्य फागुन से मध्य जेठ तक नेपाल में औसतन 200 से 230 मिमी वर्षा होती है, क्षेत्र के अनुसार भिन्नता रहती है। काठमांडू में प्रि-मनसून की औसत वर्षा लगभग 100 मिमी होती है, लेकिन इस वर्ष वैशाख के अंत तक 230 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य वर्ष से लगभग तीन गुना अधिक है। जेठ माह में भी वर्षा होने की संभावना के कारण इस वर्ष की प्रि-मनसून अवधि में वर्षा मात्रा और बढ़नी तय है। उपाध्याय ने काठमांडू के आंकड़े पेश करते हुए कहा, ‘पिछले 45 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार वैशाख और जेठ महीनों में औसत 100 मिमी वर्षा होती है, जबकि इस वर्ष वैशाख 25 तक 230 मिमी वर्षा हुई है। वैशाख अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए वर्षा तीन गुना तक पहुंच सकती है।’ 1981 से 2025 तक के आंकड़ों से प्रि-मनसून में वर्षा के उतार-चढ़ाव स्पष्ट होते हैं। मौसम विशेषज्ञ अशोक बख्रेल के अनुसार 1990 में सबसे अधिक 332.31 मिमी वर्षा हुई थी, इसके बाद 2000 में 322.85 मिमी, 2021 में 317.9 मिमी और 2020 में 315.59 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। 2025 में भी 274.21 मिमी वर्षा हुई थी। सबसे कम वर्षा 1992 में 138.01 मिमी दर्ज हुई। अन्य कम वर्षा वाले वर्षों में 1996 (141.56 मिमी), 2014 (154.91 मिमी) और 1995 (162.42 मिमी) शामिल हैं। ‘इन आंकड़ों से प्रि-मनसून वर्षा में तीव्र उतार-चढ़ाव साफ दिखता है,’ बख्रेल कहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रि-मनसून में पूर्वी नेपाल पश्चिमी हिस्से की तुलना में दो गुना से भी ज़्यादा वर्षा प्राप्त करता है। आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम नेपाल में औसतन 133.7 मिमी, मध्य नेपाल में 250.9 मिमी और पूर्वी नेपाल में 291.3 मिमी वर्षा होती है। इसका मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से आने वाली जलवाष्पयुक्त हवा और हिमालयी भौगोलिक संरचना को मौसम विशेषज्ञ मानते हैं।

फायदे और नुकसान
चैत–वैशाख में सामान्यत: पश्चिमी वायु प्रणाली हिमालय और पहाड़ी इलाकों में वर्षा और हिमपात कराती है। प्रि-मनसून की यह वर्षा कृषि, पेयजल उपलब्धता, वनाग्नि और आपदा जोखिम को सीधे प्रभावित करती है। विशेष भाव से मक्का और धान की बुवाई की तैयारी इस समय होती है, इसलिए इस वर्षा को कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार लगातार वर्षा और तापमान में गिरावट से ठहराव आया है और वनाग्नि की घटनाएं कम हुई हैं। लेकिन इसे पूरी तरह सकारात्मक नहीं कहा जा सकता। लगातार वर्षा से गेहूं, मसूर जैसे फसलों की कटाई में किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। नेपाल कृषि अनुसंधान परिषद (नार्क) के तकनीकी अधिकारी रामेश्वर रिमाल के अनुसार लगातार वर्षा के कारण पूर्वी तराई के कुछ जिलों के किसान मुग और जूट की खेती के लिए ज़मीन भी तैयार नहीं कर पाए हैं। ओले और आंधी ने मक्का, केला सहित फलों और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। विशेषतः वैशाख–जेठ में अत्यधिक वर्षा से मिट्टी जल्दी गीली होती है, जिसके कारण आगामी मानसून में भू-स्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। मौसम विज्ञानी बताते हैं कि प्रि-मनसून की सक्रियता या निष्क्रियता के आधार पर मानसून की वर्षा कम या ज्यादा होगी, यह निश्चित नहीं है। प्रशांत महासागर के तापमान, हिंद महासागर की स्थिति और जेट स्ट्रीम जैसे वैश्विक प्रणाली नेपाल के मानसून के स्वरूप निर्धारित करती हैं। वर्तमान में प्रशांत महासागर का तापमान औसत से अधिक यानी एल नीनो स्थिति में है, जबकि हिंद महासागर का तापमान सामान्य है। जल तथा मौसम विभाग ने इस वर्ष मानसून में सामान्यत: कम वर्षा और अधिक गर्मी की संभावना जताई है। नेपाल के कुछ इलाकों में सामान्य वर्षा होगी, लेकिन अधिकांश स्थानों पर औसत से कम बारिश की संभावना बताई गई है। मौसम विशेषज्ञ सुदर्शन हुमागाईं कहते हैं कि अनिश्चित और संवेदनशील मौसम के कारण मौसम के स्वरूप में बदलाव आ रहा है। कहीं बारिश समय पर नहीं होती, कहीं अत्यधिक होती है और कहीं सूखा पड़ता है। पिछली बार मधेस में मानसून के दौरान सूखा पड़ा था और सूखा ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया था। पूर्वी नेपाल में मानसून में देरी से गहन वर्षा और भूस्खलन के कारण बड़ी विपत्ति आई थी। जल तथा मौसम विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ मीनकुमार अर्याल ने कहा है कि इस वर्ष भी ऐसी स्थिति आ सकती है, इसलिए सतर्क रहना आवश्यक है। उनका कहना है, ‘मानसून शुरू होने पर कुछ दिन सूखा भी रह सकता है और कुछ जगह भारी वर्षा भी हो सकती है। यह नुकसान भी पहुँचा सकती है इसलिए हमेशा सावधान रहना जरूरी है।’ मौसम विज्ञानी डॉ. विनोद पोखरेल ने बताया कि इस वर्ष एल नीनो की स्थिति काफी ‘डरावनी’ है और इसका प्रभाव दक्षिण एशिया में अकाल की संभावना बढ़ा सकता है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा है, ‘आगामी 6 महीनों के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार यह स्थिति गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। एल नीनो दक्षिण एशिया में अकाल ला सकता है।’ विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा की अनिश्चितता और अस्थिरता जलवायु परिवर्तन से जुड़ी है। इसलिए जलवायु अनुकूलन योजना बनाने की सलाह दी जा रही है। मौसम विशेषज्ञ मदन सिग्देल ने कहा कि हाल के मौसमी घटनाएं नेपाल के मौसम प्रणालियों को और अधिक अस्थिर और संवेदनशील बना रही हैं। कुछ लोग इसे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मानते हैं, लेकिन सिग्देल कहते हैं, ‘सबसे पहले जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को प्रमाणित करना जरूरी है, फिर हमारी पारंपरिक धारणाओं और योजनाओं को संशोधित करके उसी के अनुसार कार्यक्रम बनाना चाहिए।’

कैलाली में नदी में डूबने से बालक की मृत्यु

३ जेठ, धनगढी। कैलाली में एक बालक नदी में डूबने से मृत्यु हो गई है। पुलिस के अनुसार, घोडाघोडी नगरपालिका–१० भाकलस्थित कांद्रा नदी में डूबने से एक बालक की मौत हुई है। मृतक स्थानीय भद्र बम के ९ वर्षीय पुत्र शुशील बम हैं। शनिवार दोपहर नहाने के दौरान नदी में डूबने के बाद वह लापता हो गए थे, जिसके बाद नेपाल पुलिस ने पहलमानपुर पुलिस चौकी से बचाव दल को भेजा था। पुलिस ने डूबे हुए स्थान से उन्हें बचाया और धनगढी के निसर्ग अस्पताल उपचार के लिए ले जाया गया। चिकित्सकों ने अस्पताल में उनका मृत्युप्रयोग किया। पुलिस ने इस घटना संबंधी आवश्यक जांच जारी रखी है।

भारत ने सोने के बाद चांदी के आयात में भी कड़ाई की

समाचार सारांश समीक्षित संपादकीय। भारत सरकार ने सोने के बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सिल्वर बार को ‘फ्री’ श्रेणी से ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में रखते हुए चांदी के आयात पर कड़ी नीति लागू की है। सरकार ने सोना और चांदी के आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है तथा एडवांस अथॉराइजेशन स्कीम के अंतर्गत सोने के आयात पर 100 किलोग्राम की सीमा निर्धारित की है। पश्चिम एशियाई संकट और बढ़ते तेल मूल्यों के कारण विदेशी मुद्रा बचाने के लिए भारत ने सोना-चांदी के आयात में सख्ती अपनाई है। 3 जेठ, काठमांडू।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने सोने के बाद चांदी के आयात पर भी कड़ी नीति अपनाई है। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिर्देशनालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सिल्वर बार को ‘फ्री’ श्रेणी से निकालकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ अर्थात् प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा अन्य प्रकार के सिल्वर बार को भी प्रतिबंधित आयात सूची में शामिल किया गया है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा संशोधित आयात नीति के तहत देश में चांदी के आयात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

सूचना में चांदी के आयात सम्बन्धी नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने का उल्लेख है। इससे पूर्व सरकार ने बहुमूल्य धातुओं पर लागू आयात शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की थी तथा एडवांस अथॉराइजेशन स्कीम के तहत सोने के आयात की सीमा 100 किलोग्राम निर्धारित की थी। पश्चिम एशियाई संकट के कारण बढ़ रही आयात लागतों के बीच सरकार ने सोना और चांदी के आयात शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है ताकि अनावश्यक खरीद को रोका जा सके।

रात की किताब, माओ का बैज और रेड गार्ड का लाल पट्टा: सांस्कृतिक क्रांति के 60 साल के प्रतीक

अध्यक्ष माओकी तस्वीर वाली लाल किताब
तस्वीर का कैप्शन, अध्यक्ष माओ की छोटी लाल किताब अब तक प्रकाशित होने वाली दूसरी सबसे लोकप्रिय किताब है – सिवाय बाइबिल के जो इससे भी अधिक छपी है।

प्रकाशित

पढ़ने का समय: 3 मिनट

चीन में सांस्कृतिक क्रांति की 60वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है – वह दौर जब चीन ने उथल-पुथल भरे दशक देखे।

16 मई 1966 को कम्युनिस्ट नेता माओ ने देश को पूंजीवादी प्रभाव और सोच से मुक्त करने तथा अपने विरोधियों को समाप्त करने के लिए अभियान शुरू किया।

माओ के विचारों को फैलाने के लिए देशभर में युवाओं के ‘रेड गार्ड’ समूह को आगे किया गया।

उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को नष्ट किया, गिरफ्तारियां कीं और शिक्षकों, बुद्धिजीवियों व राज्य के ‘परंपरागत दुश्मनों’ से पूछताछ की गई तथा उन्हें अपमानित और पीटा गया।

इस क्रांति में लाखों लोग विस्थापित हुए और लगभग पांच लाख से लेकर बीस लाख लोगों की जान गई। यह उथल-पुथल तथा रक्तपात युग माओ के 1976 में निधन के बाद समाप्त हुआ।

कोलकाताले गुजरातलाई २९ रनले हराएर आईपीएल प्लेअफको मौका कायम राख्यो

कोलकाता नाइट राइडर्सले गुजरात टाइटन्सलाई २९ रनले हराएर आईपीएल प्लेअफको सम्भावना जोगाएको छ। कोलकाताले दिएको २४८ रनको विशाल लक्ष्य पछ्याएको गुजरातले २० ओभरमा ४ विकेट गुमाएर २१८ रन मात्र बनाउन सफल भयो। कोलकाताका फिन एलेनले ३५ बलमा ९३ रन बनाए भने गुजरातका कप्तान शुभमन गिलले ४९ बलमा ८५ रन जोड्दै कमजोर बचाव गरे।

३ जेठ, काठमाडौं। शनिबार इडेन गार्डेनमा सम्पन्न उच्च स्कोरको भिडन्तमा कोलकाताले २४८ रनको लक्ष्य उठाएको थियो। पहिले ब्याटिङ गर्दै, कोलकाताले २० ओभरमा २ विकेट गुमाएर २४७ रन बनायो। फिन एलेनले ३५ बलमा विस्फोटक ९३ रन बनाउँदै टीमको स्थिति मजबूत बनाएको थियो। अङ्कृष रघुवंशीले ४४ बलमा ८२ रन बनाए भने क्यामरन ग्रीनले २८ बलमा ५२ रनको उल्लेखनीय योगदान दिए।

गुजरातका बलरहरू दबाबमा परे। मोहम्मद सिराजले १ विकेट लिए पनि फिन एलेनको महत्वपूर्ण क्याच छुटेपछि टोली महँगो पर्‍यो। जवाफमा गुजरातका कप्तान शुभमन गिलले ४९ बलमा ८५ रन बनाए भने जस बटलरले ३५ बलमा ५७ रन र साई सुदर्शन २८ बलमा ५३ रनमा अविजित रहे। शुरुवाती सफलता पछि मध्य ओभरमा रन गति सुस्त भयो जसले गुजरातलाई लक्ष्यमा पुग्न असफल बनायो। कोलकाताका सुनिल नारायणले २ विकेट लिए भने वरुण चक्रवर्तीले किफायती बलिङ गर्दै गुजरातलाई दबाबमा राखे।

यस जीतसँगै कोलकाताले सिजनको पाँचौं जीत हासिल गर्दै ११ अंकका साथ अंक तालिकामा सातौं स्थानमा उक्लिएको छ भने गुजरात दोस्रो स्थानमा कायम रहेको छ।

काम, काम, काम – Online Khabar

काम, काम, काम – श्रम और रोजगार का वर्तमान अध्ययन

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने पाँच वर्षों के भीतर 12 लाख नए रोजगार सृजन करने का घोषणा किया है, जिसका उद्देश्य बाध्यात्मक पलायन को कम करना है। त्रिवि मानवशास्त्र विभाग के अध्ययन के अनुसार 35 जातियों को दैनिक 24 घंटे काम की कमी और अनियमित रोजगार की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने आर्थिक वर्ष २०७८/०८४ के नीति तथा कार्यक्रम में औद्योगिक नीति संशोधन एवं रिमोट वर्क नीति को लागू कर रोजगार को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने हालिया आम चुनाव से पहले एक पृष्ठ नागरिक करार जारी किया था। यह करार तीन भागों में विभाजित है – प्राथमिकता, वर्तमान स्थिति और लक्ष्य। करारपत्र की प्राथमिकता के बिंदु संख्या 3 में ‘काम, काम, काम’ शीर्षक उल्लिखित है। वर्तमान स्थिति में ‘अनौपचारिक, न्यून मजदूरी और उच्च बेरोजगारी; रोजाना 3,300 से अधिक युवाओं का पलायन’ बताया गया है, जबकि लक्ष्य में ‘बाध्यात्मक पलायन को घटाना, औपचारिक, सम्मानित, सुरक्षित और समावेशी 12 लाख नए रोजगार सृजन’ करने का लक्ष्य रखा गया है। प्राथमिकता क्षेत्रों में ‘आईटी, निर्माण, पर्यटन, कृषि, खनिज, उद्योग और सेवा व्यापार’ शामिल हैं। करारपत्र में कहा गया है, “यदि आप हमें एकल बहुमत दिलाते हैं और करार की शर्तों को पांच वर्षों में पूरा नहीं करते हैं, तो आगामी चुनाव में हमें दंड भुगतना होगा।”

सन् 2022 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय मानवशास्त्र विभाग ने ईस्ट-वेस्ट सेंटर, हवाई और पर्ड्यू विश्वविद्यालय (अमेरिका) के सहयोग से ‘नेपाल की 35 जातियां 24 घंटे कैसे बिताती हैं?’ विषय पर व्यापक अध्ययन किया था। अध्ययन का शीर्षक था ‘State of Social Inclusion: A Study of Time Allocation’। यह शोध सन् 2012 में पूरा किए गए ‘State of Social Inclusion in Nepal’ अध्ययन का उन्नत संस्करण था। चयनित जातियां बागमती और मधेस प्रदेश के विभिन्न आर्थिक एवं सामाजिक स्तरों से थीं। हिमाल से लेकर तराई-मधेस तक में ब्राह्मण, नेवार, गुरुङ, तामाङ, मुसहर जैसे समूह शामिल थे। इस परियोजना में मधेस के सात गांवों के विभिन्न जातियों के लोगों से साक्षात्कार, विषयगत चर्चा और दैनिक गतिविधियों का तथ्यांक संग्रह किया गया। मासिक, त्रैमासिक एवं वार्षिक स्थिति का भी विश्लेषण किया गया।

पाठक दैनिक काम की कमी को सभी स्थानों पर पाए गए आंकड़ों से स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। स्थानीय स्तर पर किसान कार्य, मजदूरी, खेत अधीनता और श्रमिक रोजगार में सीमित समय खर्च होता है, जो अनियमित और मौसमी प्रकृति का होता है। मुसहर बस्ती की स्थिति सबसे प्रभावशाली थी जहां अधिकांश लोगों को नियमित रोजगार की कमी और अधिकतर समय बेरोजगारी में बिताने का अनुभव था। “सरकार को पर्याप्त रोजगार देना चाहिए” की मांग सर्वत्र सुनाई दी। ऐसी परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि गांव और शहर दोनों जगह रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने पाँच वर्षों में 12 लाख रोजगार सृजन करने की योजना बनाई है, जिसका वार्षिक औसत लगभग 2 लाख 40 हजार रोजगार के बराबर है। देश में प्रति वर्ष 5 लाख श्रमिक श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं, जिनमें सभी को रोजगार नहीं मिल पाता। प्रतिदिन 3,300 युवा विदेश पलायन करते हैं, जो वार्षिक लगभग 11 लाख से अधिक होता है। यह आंकड़ा नेपाली श्रम बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर दर्शाता है।

सरकार को श्रम बाजार का विस्तार करने की चुनौती का सामना करना होगा तथा निर्मित रोजगार महंगाई नियंत्रण में सक्षम होगा या नहीं इसका परीक्षण भी होगा। केवल सरकारी रोजगार से पूरी मांग पूरी नहीं होगी; इसलिए व्यापक निजी क्षेत्र के सहयोग की आवश्यकता दिखाई देती है। शिक्षित युवाओं को देश में रोकने के लिए सरकारी व्यवस्था को और सुधारना होगा। शिक्षित युवाओं के डिग्री के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। शहर-केंद्रित रोजगार अवसरों के कारण संसाधन और शक्ति शहर में केंद्रित हो रहे हैं, जिससे गांव खाली हो रहे हैं। असंतुलित विकास के कारण गांव सुस्त पड़ गए हैं। जनसंख्या पुनर्वितरण और संतुलन बनाए रखने के लिए नीतियां और कार्यक्रम बनाकर गांव-केंद्रित रोजगार सृजन आवश्यक है। इससे न केवल शहर की भीड़ नियंत्रित होगी बल्कि गांव भी समृद्ध होंगे। यदि गांवों में बुनियादी सेवा और अवसर बढ़ाए जाएं तो लोग अपने गांव में ही रहने के लिए प्रेरित होंगे और अनावश्यक शहरी पलायन घटेगा।

सरकार ने हाल ही में वैधानिक मकान मालिक और सुकुम्बासी समस्या समाधान के लिए रणनीति बनाई है, जिसका सामाजिक सद्भाव पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुसहर, कायस्थ, मुस्कान सहित विभिन्न समुदाय सरकार से घर और रोजगार की समस्या का ठोस समाधान चाह रहे हैं। विदेशी रोजगार के विकल्प के रूप में घरेलू रोजगार सृजन अनिवार्य है, जो युवाओं को गांव में रहने के लिए प्रेरित करेगा। चीन ने जनसंख्या पुनर्संतुलन के लिए पूर्वी तटीय क्षेत्र से पश्चिमी भूभाग तक जनसंख्या स्थानांतरित करने की ठोस योजना चलाई है। इसमें सड़क, यातायात, विद्युत, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में व्यापक निवेश कर युवाओं को परियोजनाओं में संलग्न किया जा रहा है। ऐसी योजना नेपाली संदर्भ में भी आवश्यक है, जहां ग्रामीण उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और व्यवस्थित निवेश हेतु समर्पित नीतियां, योजनाएं व कार्यक्रम बनाए जाने चाहिए।

देश में स्टार्टअप व्यवसाय विकास की शुरुआत में हैं, पर नीतियों और परियोजनाओं में महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देता है। योग्य और अयोग्य उद्यमियों को आवश्यक मदद सुनिश्चित करने में सरकार की भूमिका अहम होगी। सरकार ने आर्थिक वर्ष २०७८/०८४ के लिए प्रस्तुत नीति तथा कार्यक्रम में रोजगार को विशेष प्राथमिकता दी है। इसमें औद्योगिक नीति संशोधन, राष्ट्रीय उद्यम प्रवर्धन सुविधा की स्थापना, नई रोजगार नीति की तैयारी, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सेवा प्रणाली के एकीकरण जैसे बिंदु शामिल हैं। रिमोट वर्क नीति के लिए कानूनी प्रावधान बनाने और विदेश लौटे युवाओं के कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित करने के प्रयास भी सरकार करेगी। इस दशक को रोजगार प्रवर्धन दशक घोषित करते हुए मध्यपहाड़ी लोकमार्ग के आसपास के शहरों को नई आर्थिक संभावनाओं से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है।

निष्कर्षत: राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी द्वारा पांच वर्षों में 12 लाख रोजगार सृजन की घोषणा प्रेरणादायक प्रतीत होती है, लेकिन नेपाली समाज की व्यापक रोजगार मांग के हिसाब से यह संख्या अपेक्षाकृत कम है। आज के युवा रोज़गार के लिए देश छोड़ रहे हैं, इसलिए रोजगार के सभी आयामों में विस्तार आवश्यक है। रोजगार से ही अधिक रोजगार सृजित होता है; अतः सरकार के वादों को व्यवहार में ज़मीन पर उतारने का दबाव है। अद्वितीय सरकार, युवा प्रधानमंत्री और चर्चित अर्थशास्त्री मंत्री के नेतृत्व में आगामी बजट और क्रियान्वयन पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद है। बजट प्रस्तुति के बाद नीति तथा कार्यक्रम के अनुसार विशेष संरचना बनाई जाएगी और क्रियान्वयन मार्गदर्शिका स्पष्ट होगी। रिमोट वर्क नीति को विशेष तवज्जो मिली है; दक्ष जनशक्ति विकास में सरकार की प्रगति सफलता का मापदंड होगा। वास्तविक रोजगार आवश्यकता के आधार पर सरकार को बड़ी जिम्मेदारी निभानी है और जनमत का सम्मान करते हुए अपने वादे पूरे करने होंगे।

आज अमेरिकी डलर और यूरो की दर स्थिर, अन्य मुद्राओं की स्थिति क्या है?

३ जेठ, काठमाडौं। नेपाल राष्ट्र बैंक ने आज (रविवार) के लिए विदेशी मुद्राओं के विनिमय दरों का निर्धारण किया है। राष्ट्र बैंक द्वारा निर्धारित विनिमय दरों के अनुसार, अमेरिकी डलर और यूरो की दर में स्थिरता बनी हुई है। आज अमेरिकी डलर की क्रय दर १५३ रुपये २५ पैसा और बिक्री दर १५३ रुपये ८५ पैसा है। यूरोपियन यूरो की क्रय दर १७८ रुपये ३८ पैसा और बिक्री दर १७९ रुपये ०८ पैसा कायम है।

यूके पाउंड स्टर्लिंग की क्रय दर २०४ रुपये ९५ पैसा और बिक्री दर २०५ रुपये ७५ पैसा है, जबकि स्विस फ्रैंक की क्रय दर १९५ रुपये १२ पैसा और बिक्री दर १९५ रुपये ८९ पैसा निर्धारित की गई है। ऑस्ट्रेलियन डलर की क्रय दर १०९ रुपये ७३ पैसा और बिक्री दर ११० रुपये १६ पैसा, कैनेडियन डलर की क्रय दर १११ रुपये ४७ पैसा और बिक्री दर १११ रुपये ९१ पैसा, सिंगापुर डलर की क्रय दर ११९ रुपये ८१ पैसा और बिक्री दर १२० रुपये २८ पैसा है।

जापानी येन के १० का क्रय दर नौ रुपये ६७ पैसा और बिक्री दर नौ रुपये ७१ पैसा है, चीनी युआन की क्रय दर २२ रुपये ५० पैसा और बिक्री दर २२ रुपये ५९ पैसा, सऊदी अरबी रियाल की क्रय दर ४० रुपये ८४ पैसा और बिक्री दर ४१ रुपये, क़तरी रियाल की क्रय दर ४२ रुपये ०४ पैसा और बिक्री दर ४२ रुपये २१ पैसा बनी हुई है।

राष्ट्र बैंक के अनुसार थाई भात की क्रय दर चार रुपये ७० पैसा और बिक्री दर चार रुपये ७२ पैसा, यूएई दिरहम की क्रय दर ४१ रुपये ७३ पैसा और बिक्री दर ४१ रुपये ८९ पैसा, मलेशियाई रिंगेट की क्रय दर ३८ रुपये ७९ पैसा और बिक्री दर ३८ रुपये ९४ पैसा है। दक्षिण कोरियाई वोन के १०० का क्रय दर १० रुपये २३ पैसा और बिक्री दर १० रुपये २७ पैसा, स्वीडिश क्रोना की क्रय दर १६ रुपये २६ पैसा और बिक्री दर १६ रुपये ३२ पैसा तथा डेनिश क्रोना की क्रय दर २३ रुपये ८७ पैसा और बिक्री दर २३ रुपये ९६ पैसा निर्धारित की गई है।

राष्ट्र बैंक ने हॉन्ग कॉंग डलर की क्रय दर १९ रुपये ५७ पैसा और बिक्री दर १९ रुपये ६५ पैसा, कुवैती दिनार की क्रय दर ५०० रुपये २४ पैसा और बिक्री दर ५०२ रुपये २० पैसा, बहरीन दिनार की क्रय दर ४०६ रुपये ३४ पैसा और बिक्री दर ४०७ रुपये ९३ पैसा, ओमानी रियाल की क्रय दर ३९८ रुपये ०५ पैसा और बिक्री दर ३९९ रुपये ६१ पैसा होने की जानकारी दी है। भारतीय रुपये के एक सौ के क्रय दर १६० रुपये और बिक्री दर १६० रुपये १५ पैसा निर्धारित की गई है। राष्ट्र बैंक ने बताया है कि यह विनिमय दर आवश्यकतानुसार कभी भी संशोधित की जा सकती है। वाणिज्य बैंक द्वारा निर्धारित विनिमय दर भिन्न हो सकती है और नवीनतम विनिमय दर नेपाल राष्ट्र बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।

मानसरोवर कैलाश दर्शनका लागि हुम्ला भित्रिन थाले तीर्थयात्री

मानसरोवर कैलाश दर्शन के लिए हुम्ला में तीर्थयात्रियों की बढ़ती आवक

३ जेठ, हुम्ला। वर्षा ऋतु की शुरुआत के साथ ही मानसरोवर कैलाश दर्शन के लिए आने वाले भारतीय धार्मिक पर्यटकों की संख्या सिमकोट में उल्लेखनीय रूप से बढ़ने लगी है। सत्र के आरंभ से ही नेपालगंज से हवाई मार्ग के माध्यम से जिले के मुख्यालय सिमकोट में उतरकर पर्यटक हिल्सा मार्ग से चीन के मानसरोवर कैलाश पर्वत दर्शन के लिए आ रहे हैं। केवल चार दिनों में ही १६९ तीर्थयात्रियों ने सिमकोट पहुंच बनाए हैं। सिमकोट हवाईअड्डे के प्रमुख महेन्द्र सिंह के अनुसार, मानसरोवर कैलाश दर्शन के लिए हुम्ला होते हुए आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या १६९ दर्ज की गई है।

उनके अनुसार, वैशाख ३० से चार दिनों के भीतर १४७ भारतीय तीर्थयात्री और २२ अन्य देशों के पर्यटक सिमकोट पहुंचे हैं। प्रतिकूल मौसम के बावजूद शनिवार को समिट एयर की तीन उड़ानों से ४७ तीर्थयात्रियों ने सिमकोट पहुंच बनाई। इनमें से २३ तीर्थयात्रियों के पास कैलाश मानसरोवर जाने की परमिट नहीं होने के कारण उन्हें सिमकोट में रुकना पड़ा। गत चैत २१ के मन्त्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार शनिवार और रविवार को सार्वजनिक अवकाश था, और परमिट न मिलने के कारण २३ भारतीय तीर्थयात्री सिमकोट में ठहरे हैं।

मानसरोवर कैलाश दर्शन के लिए आने वाले भारतीय धार्मिक पर्यटकों की आवक शुरू होने के बाद से चार दिनों के आंकड़े को देखते हुए इसमें और वृद्धि की उम्मीद है। विसं २०७२ के महाभूकंप के बाद से ही हिल्सा नाका के जरिए भारतीय पर्यटक आने लगे थे। हालांकि कोविड-१९ महामारी के कारण हिल्सा नाका बंद हो गया था, जिससे पर्यटकों की आवागमन में बाधा आई। पिछले वर्ष से चीन ने भारतीय पर्यटकों को हिल्सा नाका के माध्यम से मानसरोवर कैलाश यात्रा की अनुमति दी, जिसके बाद पिछले वर्ष के चार महीनों में लगभग ६५०० भारतीय पर्यटकों ने धार्मिक यात्रा की। इस वर्ष वैशाख ३० को पहली बार तीर्थयात्रियों ने सिमकोट पहुंच बनायी।

पूर्णबहादुर खड्काको विश्लेषण: गगन थापा सम्पूर्ण कांग्रेस सभापति बन्न सकेनन्, सानेपामा सीमित रहिए

२ जेठ, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेसका निवर्तमान कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्काले गगन थापा नेपाली कांग्रेसको सम्पूर्ण सभापति बन्न नसकेको उल्लेख गरेका छन्। शनिबार कर्णाली प्रदेशको सुर्खेतमा आयोजित जनमञ्चमा ‘नेपाली कांग्रेस बृहत्तर एकता र भावी कार्यदिशा’ विषयक विचार गोष्ठीमा उनले यस्तो अभिव्यक्ति दिएका थिए।

नेता खड्काले आफूलाई भेट्न आएका सभापति थापालाई समग्र पार्टीको सभापति बन्न सुझाव दिएको तर हालसम्म थापा केवल सानेपाको मात्र सभापति भएको बताएका छन्। ‘पार्टी विभाजनको बाटोमा छ, म त्यो बाटोमा जान हुँदैन भन्छु,’ केही दिनअघि थापा र उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मासँगको भेटमा आफूले भनेका कुरा सम्झँदै उनले भने, ‘तर पार्टी मिलाउने कि फुटाउने तपाईंहरूको जिम्मेवारी हो भन्ने मेरो कुरा हो।’

उनका अनुसार, अदालतले जिताएपछि आफूहरूले पनि थापालाई सभापति मानेको बताए। विशेष महाधिवेशनकै कारण कांग्रेस चुनावमा पराजित भएर ३८ सिटमा सीमित हुन पुगेको अवस्था आएको बताए। ‘विशेष महाधिवेशनले कांग्रेसलाई ३८ सिटमा सीमित गर्‍यो र रास्वपा दुई तिहाई नजिक पुग्यो। त्यो भएन भने देशको परिस्थिति पूरै फरक हुने थियो’, उनले भने।

दीर्घरोग बढाउन आन्द्राका साना कण जिम्मेवार रहने पुष्टि

दीर्घकालीन रोग बढ़ाने में आन्द्रा के सूक्ष्म कणों की भूमिका सिद्ध

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि मानव आन्द्रा में पाए जाने वाले सूक्ष्म कण उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले सूजन और विभिन्न दीर्घकालीन बीमारियों को जन्म देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘मार्सेल यूनिवर्सिटी जोन सी. एडवर्ड्स स्कूल ऑफ मेडिसिन’ में किए गए एक अध्ययन ने मानव पाचन स्वास्थ्य, मेटाबोलिज्म, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उम्र बढ़ने के बीच के संबंध को और स्पष्ट किया है। इस शोध में आन्द्रा के भीतर पाए जाने वाले ‘ल्युमिनल एक्जोसोम्स’ नामक सूक्ष्म कण शामिल थे। ये कण कोशिकाओं द्वारा प्रोटीन और आनुवंशिक सामग्री ले जाकर शरीर के अन्य हिस्सों के साथ संवाद करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

‘एजिंग सेल’ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, उम्रदराज या वृद्ध जीवों की आन्द्रा से निकाले गए एक्जोसोम्स में इन्सुलिन प्रतिरोध, सूजन और आन्द्रा की सुरक्षा वाली परत (गट बैरियर) को नुकसान पहुँचाने के संकेत पाए गए। वैज्ञानिकों ने परीक्षण में जब वृद्ध जीवों की आन्त्रायुक्त एक्जोसोम्स को युवा जीवों में स्थानांतरित किया, तो इन युवा जीवों में भी वृद्धावस्था में होने वाली मेटाबोलिक और सूजन संबंधी समस्याएँ देखी गईं। इस शोध का सबसे आश्चर्यजनक पहलू तब सामने आया जब युवा जीवों से लिए गए एक्जोसोम्स को वृद्ध जीवों में दिया गया, जिससे वृद्ध जीवों में उम्र के साथ होने वाली कई मेटाबोलिक परेशानियाँ कम हुईं।

यह शोध दर्शाता है कि यदि आन्द्रा का आंतरिक वातावरण स्वस्थ रखा जाए तो उम्र संबंधी रोगों से बचाव या उनके प्रभाव को कम करना संभव है। अध्ययन ने दिखाया है कि आन्द्रा की सुरक्षात्मक परत कमजोर होने पर वहां के हानिकारक तत्व आसानी से रक्त में मिलकर दीर्घकालीन सूजन उत्पन्न करते हैं, जो हृदय रोग, जिगर की बीमारियां और मधुमेह जैसे मेटाबोलिक रोगों के जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं। इस शोध के मुख्य लेखक प्रोफेसर अब्देलनाबी खलीफा के अनुसार, बढ़ती जैविक उम्र के साथ जुड़ा शारीरिक तनाव रोग की प्रक्रिया को तेज करता है। यदि इस प्रक्रिया को समझा गया तो भविष्य में उम्र के साथ जुड़ी बीमारियों के लिए नई और प्रभावशाली उपचार पद्धतियाँ विकसित करना संभव होगा। यह खोज जैविक उम्र की प्रक्रिया को धीमा करने तथा दीर्घकालीन रोगों से सुरक्षा करते हुए मानव जीवन को स्वस्थ बनाने की दिशा में बड़ी क्रांति साबित होने की उम्मीद है।

मर्दी पदयात्रा में लापता पर्यटक मृत पाए गए

मर्दी हिमाल पदयात्रा के दौरान लापता हुए काठमाडौँ के भिक्षु धामिसरो मर्दी के ऊपरी व्यूपॉइंट के नजदीक एक घाटी में मृत पाए गए हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शव को निकालने के लिए हेलिकॉप्टर का प्रयास किया गया, लेकिन हेलिकॉप्टर न आने के कारण टीम वापस हाइकैंप लौट गई है। भिक्षु व्यूपॉइंट पर कुछ समय दृश्यावलोकन के लिए गए थे और तब से लापता थे, वे सुरक्षा बल और स्थानीय लोग उन्हें तलाश रहे थे।

२ जेठ, कास्की। मर्दी हिमाल पदयात्रा के दौरान मर्दी के ‘व्यूपॉइंट’ से गत वैशाख ३० तारीख से लापता एक पर्यटक आज मृत अवस्था में पाया गया है। लापता व्यक्ति काठमाडौँ के संघाराम बुद्धविहार के भिक्षु धामिसरो बताए गए हैं। सुरक्षा बल एवं स्थानीय पर्यटन व्यवसायी की टीम द्वारा खोज के दौरान मर्दी हिमाल के ऊपरी व्यूपॉइंट पर स्थित बड़े पहाड़ की घाटी में शव मिला है, इसकी जानकारी मर्दी ट्रेक प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजकुमार तामाङ ने दी।

उनके अनुसार, बर्फ में कुछ निशान देखने के बाद उसे आधार मानकर बचाव दल ने खोज की तो विराट चट्टान के नीचे कपड़े दिखाई दिए और लगभग तीन घंटे लगाकर उस जगह तक पहुंचा गया। अध्यक्ष तामाङ ने बताया कि कठिन भू-परिस्थितियों की वजह से शव को निकालना संभव नहीं है। ‘जटिल भौगोलिक कारणों से व्यक्ति स्वयं लेकर ऊपर लाना असंभव है। हमने प्रशासन, पुलिस और स्थानीय सरकार को हेलिकॉप्टर से बचाव के लिए सूचित किया। चार घंटे तक प्रतीक्षा के बाद भी हेलिकॉप्टर नहीं आया तो हम वापस हाइकैंप लौट गए,’ उन्होंने कहा।

मर्दी के लोकैंप में रात गुजार कर अगले दिन समुद्र सतह से ४२०० मीटर ऊंचाई पर स्थित मर्दी के व्यूपॉइंट पहुंचे भिक्षु ने अपने झोले को टीस्प (टी स्टैंड) पर रखा और थोड़ी देर आसपास का नज़ारा देखने के लिए निकले थे। वे शाम तक वापस नहीं लौटे और अगले दिन स्थानीय लोगों ने खोज शुरू की। दो दिन तक खोजने पर भी उनकी कोई सूचना नहीं मिली। शनिवार को सुरक्षा बल पहुंचे और स्थानीय लोगों के साथ पुनः खोज तेज की गई।

प्रतिनिधिसभामा आएन अध्यादेशहरू स्वीकृत गर्ने प्रस्ताव

प्रतिनिधिसभाले अध्यादेशहरू पारित गर्ने प्रस्ताव अघि बढाउन असमर्थ

२ जेठ, काठमाडौं। सरकारले संसद् अधिवेशन नभएको समयमा विभिन्न ८ वटा अध्यादेश ल्याएको थियो। ती अध्यादेशहरू अधिवेशन सुरु भएकै दिन गत वैशाख २८ मा संघीय संसद्को दुवै सभामा पेश गरिएका थिए। संसद अधिवेशन नभएको हुँदा सरकारले सार्वजनिक खरिद (दोस्रो संशोधन) अध्यादेश, सार्वजनिक पदाधिकारीको पदमुक्ति सम्बन्धी विशेष व्यवस्था अध्यादेश तथा संवैधानिक परिषद् (काम, कर्तव्य, अधिकार र कार्यविधि) (पहिलो संशोधन) अध्यादेश ल्याएको छ। सम्पत्ति शुद्धीकरण (मनी लाउन्डरिङ्ग) निवारण (तेस्रो संशोधन) अध्यादेश, केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने अध्यादेश, भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरिबी निवारण मन्त्री प्रतिभा रावलले ल्याइएको सहकारी (पहिलो संशोधन) अध्यादेश, स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान सम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने अध्यादेश र विश्वविद्यालयसम्बन्धी केही नेपाल ऐन संशोधन गर्ने अध्यादेश पनि जारी भएका छन्।

संघीय संसद्को दुवै सदनमा पेश भइसकेका यी अध्यादेशहरू दुवै सदनबाट पारित भएपछि सरकारलाई अध्यादेश प्रतिस्थापन विधेयक ल्याउने बाटो खुल्नेछ। अध्यादेश सदनमा पेश भएको ६० दिनभित्र प्रतिस्थापन विधेयक ल्याई दुवै सदनबाट पारित गराउनु पर्ने र राष्ट्रपतिसामू प्रमाणीकरण गरी ऐनमा रूपान्तरण गराउनु पर्ने हुन्छ। तर सरकारले यसपटक अध्यादेश स्वीकृत गर्ने प्रस्ताव कहिले ल्याउने हो भन्ने टुंगो छैन। प्रतिनिधिसभाले आगामी असार १५ गतेसम्मका लागि ल्याएको संसदीय क्यालेन्डरमा अध्यादेश स्वीकृत गर्ने विषय समावेश गरिएको छैन।

सरकारले चाहे यस्तो प्रस्ताव अघि बढाउन सक्छ र सभामुखले संसद्का कार्यसूची परिवर्तन गर्न सक्ने स्थिति छ, तर संसदीय क्यालेन्डरमा अध्यादेश स्वीकृत गर्ने विषय समावेश नभएको हो। संविधानको धारा ११४ मा अध्यादेशसम्बन्धी प्रावधान छ। उपधारा २ को (क) मा भनिएको छ, ‘जारी भएपछि बसेको संघीय संसदको दुवै सदनमा पेश गरिनेछ र दुवै सदनले स्वीकार नगरेमा स्वतः निष्क्रिय हुनेछ।’ प्रतिनिधिसभाबाट अध्यादेश स्वीकृत गराउन सरकारले कठिनाइ छैन। सत्तारुढ दल रास्वपा प्रतिनिधिसभामा दुई सिट कम भए पनि दुई तिहाइ बहुमतमा रहेको छ। तर राष्ट्रिय सभामा रास्वपाको उपस्थिती छैन। विपक्षी दलहरूले सुरुदेखि नै अध्यादेशको विरोध गरिरहेका छन्। उनीहरूले अध्यादेश अस्वीकृत गर्न आग्रह गर्दै संसद सचिवालयमा सूचनाहरू दर्ता गराएका छन्। नेकपा एमालेले आठवटै अध्यादेश अस्वीकृत गर्ने सूचना दर्ता गरेको छ। नेपाली कम्युनिष्ट पार्टीले चार र नेपाली कांग्रेसले दुई वटा अध्यादेश अस्वीकृत गर्न सूचनाहरू दर्ता गराएका छन्। कांग्रेसले संवैधानिक परिषद् र केही नेपाल ऐन संशोधन सम्बन्धी विधेयकलाई मात्र अस्वीकृत गर्ने गरी सूचना दर्ता गरेको छ। नेकपाले संवैधानिक परिषद्, केही नेपाल ऐन संशोधन, सार्वजनिक पदाधिकारीहरूको पदमुक्ति र विश्वविद्यालयसम्बन्धी अध्यादेशहरू अस्वीकृत गरिनुपर्ने सूचना दर्ता गरेको छ।

प्रतिनिधिसभाको मासिक र पाक्षिक सम्भावित कार्यतालिका :

सेती प्रादेशिक अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से स्कार्पियो में आग लगी

सेती प्रादेशिक अस्पताल के पार्किंग क्षेत्र में रखी गई स्कार्पियो में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने के कारण आग लग गई। धनगढ़ी उपमहानगरपालिका-५ के 40 वर्षीय मुकुंद जोशी द्वारा चलाई गई गाड़ी पूरी तरह से जलकर नष्ट हो गई, यह जानकारी जिला पुलिस कार्यालय ने दी है। आग लगने से कोई मानवीय क्षति नहीं हुई, और दमकल, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस तथा नगर पुलिस के सहयोग से आग पर नियंत्रण पाया गया। २ जेठ, धनगढ़ी।

शनिवार शाम साढ़े ५ बजे धनगढ़ी उपमहानगरपालिका-५ के 40 वर्षीय मुकुंद जोशी द्वारा चलाई गई बा.प्र.०१–०२७ च ००७४ नंबर की स्कार्पियो अस्पताल के पार्किंग में रखी हुई थी, जब उसमें आग लग गई, जिला पुलिस कार्यालय ने यह बताया है। जिला पुलिस कार्यालय के पुलिस निरीक्षक लोक राज जोशी ने आग लगने से स्कार्पियो के जलने की पुष्टि की है। उनके अनुसार, मरीज के लिए वाहन में जुड़ा ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से आग लगी। आग लगने के कारण स्कार्पियो पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। धनगढ़ी उपमहानगरपालिका की दमकल टीम के सहयोग से स्थानीय पुलिस, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस और नगर पुलिस के समन्वय में आग पर काबू पाया गया। पुलिस ने जानकारी दी है कि इस घटना में कोई मानवीय नुकसान नहीं हुआ।

क्यानलाई कारबाही अगाडि बढाउने निर्देशनको पत्र मन्त्रालयमै फर्कियो

क्यानविरुद्ध कारबाही अगाडि बढाउन मन्त्रालयमा फिर्ता गरिएको निर्देशन पत्र

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद्ले (राखेप) क्यानको उजुरी अख्तियारमा तामेलीमा परेको जवाफ दिएको भए पनि मन्त्रालयले राखेप र मन्त्रालयबाट गरिएको छानबिन फरक रहेको दाबी गरेको छ। शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्री सस्मित पोखरेलले १४ वैशाखमा नेपाल क्रिकेट सङ्घलाई (क्यान) अन्तिम स्पष्टीकरण सोधी कारबाही अगाडि बढाउने निर्णय गरेका थिए। राष्ट्रिय खेलकुद परिषद्ले मन्त्रालयको निर्देशनपत्र प्राविधिक कारणले फिर्ता गरेको र क्यानसँग आवश्यक कागजात मागेर छानबिन गर्न निर्देशन दिएको छ। नेपाल प्रिमियर लिगको पहिलो संस्करणको छानबिन अपूरो रहेको र क्यानले आवश्यक कागजात नपठाउँदा कारबाही निलम्बनसम्म पुग्न सक्ने खतरा रहेको बताइएको छ।

१ जेठ, काठमाडौँ। शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्री सस्मित पोखरेलले १४ वैशाखमा नेपाल क्रिकेट सङ्घ (क्यान) लाई अन्तिम पटक स्पष्टीकरण सोधेपछि कारबाही अगाडि बढाउने निर्णय गरेका थिए भने मन्त्रालयले सोही दिन राष्ट्रिय खेलकुद परिषद् (राखेप) लाई निर्देशनसहित पत्र पठाएको थियो। नेपाल प्रिमियर लिग (एनपीएल) को पहिलो संस्करणको छानबिनका क्रममा क्यानले सहयोग नगरेको प्रमाणित भएसँगै मन्त्रालयले राखेपलाई कारबाही अगाडि बढाउन निर्देशन दिएको हो। तर, राखेपले उक्त पत्र मन्त्रालयमै फिर्ता पठाएको जानकारी आएको छ।

मन्त्रालयको पत्रमा अस्पष्टता रहेकाले राखेपले बिहीबार थप स्पष्टिकरणका लागि पत्राचार समेत गरेको छ। ‘राखेपको कार्यकारी सदस्यको नेतृत्वमा बनेको समितिको प्रतिवेदन हामीसँग छ, तर मन्त्रालयले गठन गरेको समितिको प्रतिवेदन छैन; अलमल रहेको कारण स्पष्टोत्तर माग्न पत्र पठाएका हौं,’ राखेपका स्रोतले बताए। मन्त्रालयले भने अख्तियारबाट आएको पत्र पठाइएको नभएको दाबी गरेको छ। ‘मन्त्रालयले निर्देशन दिएपछि क्यानलाई नपठाउने भनेको छैन, तर स्थिति अस्पष्ट छ,’ स्रोतले उल्लेख गरे।

राखेप सदस्यसचिव रामचरित्र मेहताले प्राविधिक कारणले पत्र मन्त्रालयमा फिर्ता भएको जानकारी दिएका छन्। ‘उनीहरूको पत्रमा प्राविधिक समस्या भएको कारण फिर्ता पठाइएको हो,’ उनले भने। मन्त्रालयका सूचना अधिकारी जगदीश पराजुलीले मन्त्रीस्तरीय निर्णयअनुसार राखेपलाई क्यानसँग कागजात मागेर छानबिन गर्न निर्देशन गरिएको बताएका छन्। ‘छानबिन रोकिएपछि राखेपलाई कागजात मागेर छानबिन गर्न भनिएको हो। राखेपको उजुरी अख्तियारमा तामेलीमा छ भन्ने पनि पत्र आएको छ,’ उनले भने, ‘उजुरीहरू फरक छन्। मन्त्रालयबाट भइरहेको छानबिन फरक छ। त्यही कारण तामेलीमा भएकाले राखेपले सोधेको पत्र आएको हो।’ अब मन्त्री पोखरेलसँग छलफल गरेर निर्णय लिइने उनले बताए। ‘मन्त्रालयबाट अहिलेसम्म कुनै निर्णय भएको छैन। मन्त्रीसँग सल्लाह गरेर मन्त्रालयमा छलफलपछि टुंगो लाग्नेछ,’ उनले जोड दिए।

भारत ने चीनी निर्यात पर रोक लगाते ही नेपाल में आत्मनिर्भरता पर चर्चा शुरू

२ जेठ, काठमाडौं । भारत द्वारा चीनी निर्यात पर रोक लगाने के कुछ ही दिनों बाद नेपाल में चीनी क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के मुद्दे पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्री गौरी कुमारी ने संबंधित पक्षों को बुलाकर इस विषय पर संवाद भी प्रारंभ कर दिया है। मंत्री गौरी कुमारी ने हाल ही में नेपाल चीनी उत्पादक संघ के पदाधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ उपभोक्ता हित, बाजार मूल्य स्थिरता और चीनी की सहज उपलब्धता पर चर्चा की है, जैसा कि मंत्रालय ने जानकारी दी है।

चर्चा के दौरान, देश को चीनी में आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्नत किस्म के ऊखू की खेती द्वारा उत्पादन बढ़ाने की योजना को आगे बढ़ाने पर बातचीत हुई है। संबंधित पक्षों ने उद्योग मंत्रालय को कृषि, वन तथा वातावरण मंत्रालय के साथ समन्वय करके नेपाल में संचालित चीनी उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और किसानों को ऊखू की खेती में आधुनिक तकनीक प्रयोग के लिए सुविधाएं प्रदान करने का सुझाव दिया है। उद्योगपतियों ने भी बाजार में चीनी को नियमित रूप से सुगम और सुलभ मूल्य पर उपलब्ध कराने का वचन दिया है।

बाजार में चीनी की कमी नहीं होने देने के लिए आपूर्ति मंत्रालय ने उत्पादन प्रोत्साहन, आपूर्ति प्रबंधन, बाजार निगरानी और नियंत्रण को प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। उद्योगपति एवं व्यवसायी उत्पादन व उत्पादकता वृद्धि, स्वच्छ बाजार विकास और उपभोक्ता हित संरक्षण में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आपूर्ति मंत्रालय के प्रवक्ता नेत्रप्रसाद सुवेदी ने बताया कि मंत्रालय आम नागरिकों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़े चीनी समेत अत्यावश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। नेपाल में संचालित चीनी उद्योग में मौजूद चीनी और खाद्य व्यवस्था तथा व्यापार कम्पनी लिमिटेड एवं साल्ट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा आयातित चीनी लगभग आठ महीनों की मांग को पूरा करने में सक्षम है, जैसा कि मंत्रालय ने बताया। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं और संबंधित पक्षों से कहा है कि वे चीनी की अनावश्यक जमाखोरी न करें और चीनी की उपलब्धता तथा आपूर्ति में किसी भी तरह की समस्या न हो इसके लिए सतर्क रहें।