26 मार्च को स्वीकृत सरकार के १००-बिंदु सुधार एजेंडे में सार्वजनिक यातायात सुधार को प्राथमिकता नहीं दी गई है।
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (राम्रोपा) ने केवल केबल ब्लू बस सेवा संचालन और लैंगिक हिंसा रोकथाम जैसे कुछ प्रतिबद्धताएं ही की हैं।
विशेषज्ञों ने संपूर्ण संगठनों को तोड़ने, रात्रीकालीन सेवा शुरू करने और सार्वजनिक यातायात में कठोर नियम लागू करने की आवश्यकता बताई है।
30 मार्च, काठमांडू — आम जनता के लिए सबसे जटिल समस्या सार्वजनिक यातायात ही है। यह माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (राम्रोपा) को पर्याप्त मत मिलने का एक कारण यही है।
लेकिन 26 मार्च को बालेंद्र साह के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत १००-बिंदु प्रशासनिक सुधार एजेंडे में सार्वजनिक यातायात सुधार के ठोस एजेंडे को प्राथमिकता नहीं दी गई है।
मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत इस एजेंडे में प्रमुखतः केवल राम्रोपा के अपने घोषणा पत्र में शामिल नीली बस सेवा संचालन का जिक्र है, जिसे पर्याप्त नहीं माना जाता। घोषणा पत्र में पहली प्राथमिकता के रूप में पहले १०० दिनों के भीतर २५ नीली बस सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सातों प्रदेशों में नि:शुल्क बस सेवा प्रदान करने का भी वादा किया गया है। इसके अलावा, सार्वजनिक यातायात में लैंगिक हिंसा रोकने के लिए वाहनों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के दो बिंदु ही घोषणा पत्र में शामिल हैं।
नेपाल में सार्वजनिक यातायात की गुणवत्ता और सुरक्षा अत्यंत जटिल विषय हैं। नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार रोजाना लगभग सात लोग सड़क दुर्घटना में मरते हैं। जबकि दोपहिया वाहन अधिक दुर्घटनाएं करते हैं, सार्वजनिक यातायात में दुर्घटना मृत्युदर अधिक है। शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक यातायात का प्रयोग करना आसान नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब तक संगठित शहरी यातायात व्यवस्था नहीं होगी, जनता के कष्ट दूर नहीं होंगे। कड़े नियम जैसे यात्रियों को निर्धारित स्टॉप पर ही चढ़ने-उतरने देना, सीट से अधिक यात्रियों को न बैठाना और निर्धारित समय के बाहर गाड़ी न रोकना कुछ सुधार ला सकते हैं।
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता मधव तिमल्सिना का मानना है कि वर्तमान सार्वजनिक यातायात व्यवस्था से बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। स्कूल के बच्चे भी कार्यालय जाने वाले यात्रियों की बसों में बढ़ा लिए जाते हैं जिससे मध्याह्न और शाम के समय अत्यधिक भीड़ हो जाती है।
इससे भीड़ के कारण सीट न मिलने पर यात्रियों को अत्यधिक असुविधा होती है।
वे सुझाव देते हैं कि स्कूलों को अपना यातायात साधन रखना चाहिए और विद्यार्थियों के लिए सार्वजनिक वाहनों के उपयोग पर कड़ाई से प्रतिबंध लगाना चाहिए।
वर्तमान में सार्वजनिक यातायात पूरी तरह से संगठनों द्वारा अनौपचारिक सहमतियों के तहत अत्यधिक नियंत्रित है। यह बसों को सीमित स्थानों पर ही यात्रु लेने के लिए मजबूर करता है और अन्य गाड़ियों को इंतजार कराता है, जिससे यात्रियों का समय बर्बाद होता है।
तिमल्सिना के अनुसार संगठनों को हटाने पर चालक आवश्यक स्टॉप पर अधिक गाड़ियां चला पाएंगे और सीट की कमी कम होगी। राज्य को इस सुधार में कड़ा भूमिका निभानी होगी, उनकी राय है।
नेपाल में सार्वजनिक यातायात आमतौर पर शाम 8 बजे के बाद बंद हो जाती है। “रात्रीकालीन सार्वजनिक यातायात सेवा का अभाव राज्य का सबसे बड़ा अन्याय है,” वे कहते हैं। “सभी लोग निजी वाहन का उपयोग नहीं करते और रात में टैक्सी या निजी वाहनों की लागत बहुत अधिक होती है।”
वे सरकार से रात में सार्वजनिक यातायात को सुरक्षित और नियमित बनाने पर जोर देते हैं। साथ ही, चालक और कंडक्टर के गैर-पेशेवर और असभ्य व्यवहार से भी यात्रियों के अनुभव खराब होते हैं।
इस समस्या को न सुलझाने पर सरकार पर जनता का भरोसा और अपेक्षाएं घट सकती हैं, उन्होंने चेतावनी भी दी।
छोटी और लंबी दूरी दोनों ही सार्वजनिक यातायात क्षेत्रों में समस्या है। चालक गुणवत्ता सुधार की बजाय किराया बढ़ाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
बुनियादी ढांचा, सड़क और पुलिस जांच की कमी को लेकर अक्सर समस्याएं छुपाई जाती हैं। निजी क्षेत्र का एकाधिकार और सरकार की नियामक शक्ति की कमी सार्वजनिक यातायात की बदतर स्थिति के मुख्य कारण हैं।
राम्रोपा के घोषणा पत्र में क्या है?
राम्रोपा के घोषणा पत्र में लंबी दूरी की बस सेवाओं में संपूर्ण संगठनों और कार्टेल को पूरी तरह समाप्त कर सुरक्षित सेवाओं के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का वादा किया गया है। प्रमुख शहरों में शहरी बस सेवाओं को प्रभावी, सुरक्षित, आरामदायक और भरोसेमंद बनाने की प्रतिबद्धता भी की गई है।
इस योजना के तहत एकीकृत प्रबंधन के अंतर्गत केंद्रीकृत टिकटिंग और किराया वितरण प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव शामिल है।
विद्युत बसों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कस्टम छूट देने और काठमांडू उपत्यका तथा तराई क्षेत्र के मुख्य मार्गों पर सार्वजनिक यातायात के लिए सतत मास्टर प्लान तैयार करने का प्रावधान भी रखा गया है।
सड़क सुरक्षा सुधार के लिए सभी सार्वजनिक वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग, एआई आधारित ट्रैफिक कैमरा, डिजिटल जुर्माना प्रणाली और कड़ा गति तथा लेन अनुशासन लागू करने की प्रतिबद्धता है। पहले वर्ष के भीतर दुर्घटना घटाने का प्रयास किया जाएगा। पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने की भी बात की गई है।
रेसलर भगवती खड़का को महिला की चरित्र हनन के आरोप में शान्तिनगर से गिरफ्तार किया गया है। साइबर ब्यूरो के एसपी दिलीपकुमार गिरी के अनुसार, उन्हें काठमांडू जिला अदालत से चार दिन की पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
पश्चात जब पीड़िता महिला ने साइबर ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई, तब भगवती खड़का को गिरफ्तार किया गया। एसपी गिरी के मुताबिक, उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से महिला की चरित्र हनन की थी।
सरकार ने ३० दिनों के भीतर तीन विधेयक तैयार करने और कानूनी निर्माण की समयसीमा निर्धारित करने का निर्णय लिया है। कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों की मंत्री सोविता गौतम ने शासकीय सुधार कार्यसूची के अंतर्गत विभिन्न मंत्रालयों के साथ कार्य को आगे बढ़ाया है। सरकार ने ४५ दिनों के भीतर संघीय निजामती सेवा विधेयक तथा ६० दिनों के भीतर सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक शासन विधेयक तैयार करने की योजना बनाई है। १७ चैत्र, काठमांडू। सरकार ने अब नए कानूनों के निर्माण और संशोधन की प्रक्रिया में निश्चित समय निर्धारित कर इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। १०० बिंदुओं वाली शासकीय सुधार कार्यसूची के तहत प्राथमिकता के आधार पर कानून निर्माण के लिए आवश्यक समय सीमा तय की गई है। कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों की मंत्री सोविता गौतम ने शासकीय सुधार की १०० बिंदुओं में शामिल संबंधित मंत्रालयों के साथ कार्य आगे बढ़ाए जाने की जानकारी दी।
विभिन्न मंत्रालयों से प्राप्त विधेयक और संबंधित कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय में फास्ट ट्रैक डेस्क स्थापित किया गया है। साथ ही संबंधित मंत्रालय अपने-अपने स्तर पर कानूनी निर्माण कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रत्येक मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किए गए कानून के मसौदे को कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय से कानूनी सलाह लेने के बाद ही मंत्रिपरिषद में प्रस्तुत किया जाएगा। संविधान लागू हुए १० वर्ष बीत जाने के बावजूद कार्यान्वयन से जुड़ी कई कानून तैयार नहीं हो पाए हैं। मंत्री गौतम ने कहा कि इस विषय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने १३ चैत्र को मंत्रालय की जिम्मेदारी ग्रहण करने के बाद कहा, ‘इस बार हमें अत्यन्त तीव्र गति से काम करना होगा। पूर्व में आवश्यक कानून पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाए। अब हमारा मंत्रालय निरंतर समन्वय कर कार्य को आगे बढ़ाएगा।’
मंत्री गौतम का मानना है कि संसद भी सरकार के साथ मिलकर तेजी से कानून निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा, ‘संसद के सदस्य भी कानून निर्माण के लिए उत्सुक हैं। उन्हें भी तेज़ गति से काम करना होगा। इस प्रकार संसद और सरकार दोनों को मिलकर तेजी से आगे बढ़ना होगा।’ सरकार ३० दिन के भीतर राष्ट्रीय सदाचार नीति भी जारी करने की तैयारी में है। सदाचार प्रवर्धन, सूचनादाताओं के संरक्षण और हित/स्वार्थ संघर्ष प्रबंधन में ३० दिनों के भीतर राष्ट्रीय सदाचार नीति प्रकाशित की जाएगी और संबंधित कानूनों का प्रारूपण एवं संशोधन कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार ने 100 दिन के भीतर पासपोर्ट, नागरिकता और लाइसेंस घर पर पहुंचाने वाली ‘गवर्नमेंट कुरियर सर्विस’ योजना लागू करने का लक्ष्य रखा है।
नेपाल हुलाक सेवा विभाग ने योजना के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कार्य ढांचा तैयार कर मंत्रालय में चर्चा हेतु भेजा है।
विशेषज्ञों ने योजना को सफल बनाने के लिए ऑनलाइन प्रणाली सुधार, हुलाक सेवा का आधुनिकीकरण और अंतर-निकाय समन्वय की आवश्यकता बताई है।
17 चैत्र, काठमांडू। एक सामान्य सिफारिश पत्र के लिए भी वार्ड कार्यालय के चक्कर लगाना पड़ता है। वहां से निकल कर नागरिकता, पासपोर्ट या लाइसेंस लेने उतावले चलते आधिकारिक दफ्तर की लाइन में लगना आम सेवा ग्रहण करने वालों की नियति है।
‘गांव-गांव में सिंहदरबार’ पहुंचने का नारा कई साल पहले भले ही लगाया गया हो, पर असलियत में सिंहदरबार के पेचीदा प्रक्रिया और फर्माइश मात्र गांव तक आई है।
आज के डिजिटल युग में भी सरकारी दफ्तरों में एक कक्ष से दूसरी कक्ष में फाइल भेजने या जमा करने के लिए विशेषज्ञ और ‘अतिरिक्त शुल्क’ की जरूरत होती है। बिना पैसे दिए काम नहीं होता और पूरे दिन लाइन में खड़े होने के बाद भी खाली हाथ लौटना आम समस्या है।
प्रौद्योगिकी में विकास हो चुका है, फिर भी नागरिकों को मूलभूत सरकारी सेवाएं प्राप्त करने में इस तरह की विडम्बना झेलनी पड़ती है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञ कहते हैं कि अधिकांश सरकारी कार्यालयों में ऑनलाइन सेवा शुरू करने के लिए जरूरी आधारभूत संरचना तैयार नहीं है, इसलिए सेवा उपयोगकर्ता समस्याओं का सामना करते हैं।
इसी पुरानी और धीमी प्रक्रिया के कारण रास्वपा वरिष्ठ नेता बालेन्द्र साह नेतृत्व वाली सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है।
सरकार की 100 दिनों की कार्यसूची में कहा गया है– ‘अब नागरिकों को सरकारी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे, पासपोर्ट, नागरिकता और लाइसेंस जैसे दस्तावेज घर पर पहुंचाए जाएंगे।’
कार्यसूची के बिंदु 27 में कहा गया है– ‘सरकारी सेवा घर पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुलाक सेवा का आधुनिकीकरण कर ‘गवर्नमेंट कुरियर सर्विस’ के रूप में विकसित किया जाएगा।’
इसका मतलब है कि अब आपको पासपोर्ट, नागरिकता प्रमाणपत्र या ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए कार्यालय नहीं जाना होगा; ये दस्तावेज सरकारी हुलाक द्वारा सीधे आपके घर पहुंचाए जाएंगे।
सरकार इस योजना को 100 दिनों के भीतर लागू करने की महत्वाकांक्षा रखती है। इसके लिए सुस्त हुई हुलाक सेवा को पुनः सक्रिय कर अत्याधुनिक ‘गवर्नमेंट कुरियर सर्विस’ में तब्दील करने का लक्ष्य है।
तकनीकी प्रगति के बावजूद अप्रचलित हो चुके हुलाक को स्मार्ट डिलिवरी सेंटर में बदलने की सरकार की योजना क्रांतिकारी नजर आती है, लेकिन इसे कार्यान्वित करना चुनौतीपूर्ण है।
रात को दो बजे पासपोर्ट विभाग की लाइन में खड़े होने वाले लोगों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि 100 दिन में उन्हें घर पर दस्तावेज मिल जाएंगे, वहीं कुछ लोगों में उम्मीद भी जागी है कि अब परेशानी कम होगी।
क्या सच में तकनीक सुधार, पता प्रणाली की कमी और अंतरमंत्रालय समन्वय की कठिनाइयों को पार कर सरकार 100 दिनों में योजना को व्यवहार्य बनाएगी?
सरकारी सेवाओं को ‘होम डिलीवरी’ के रूप में उपलब्ध कराना आकर्षक और जनहितैषी विचार है, जिससे जनता का समय एवं खर्च बचता है। लेकिन इसे लागू करने वाले हुलाक सेवा की क्षमता को लेकर आम जनता में संदेह भी है – ‘क्या हमारा हुलाक इसके लिए तैयार है?’
वर्तमान में निजी कुरियर सेवाओं के विस्तार और तकनीकी विकास ने सरकारी हुलाक सेवा को पीछे छोड़ दिया है। समय के साथ मेल न खाने के कारण इसकी प्रभावशीलता और व्यावसायिक क्षमता दोनों कमजोर हो गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी हुलाक सेवा चरम सुस्ती, पार्सल खोने और विश्वसनीयता की कमी के कारण निजी कुरियर से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकी। दशकों पुराने कानून, गांव स्तर पर कम पहुँच और खराब ग्राहक सेवा ने इसकी संरचना को और कमजोर कर दिया है।
सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ मनोहर भट्टराई का कहना है कि यह योजना संभव है और विश्व में लागू भी है, पर नेपाल में 100 दिन में पूर्ण कार्यान्वयन चुनौतीपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा कि योजना को सफल बनाने के लिए दस्तावेज जारी करने वाली ऑनलाइन प्रणाली और हुलाक सेवा दोनों को सुधारने की आवश्यकता है।
सरकार की घोषणा से राजनीतिक इच्छा शक्ति तो दिख रही है, लेकिन स्पष्ट नीति एवं रणनीति अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, भट्टराई ने बताया।
कार्यान्वयन के लिए तीव्र तैयारी
सरकारी घोषणापरांत हुलाक सेवा विभाग ने क्रियान्वयन के लिए तैयारियां तेज की हैं। विभाग का मानना है कि निजी कुरियर सेवाओं का नेटवर्क और अनुभव दुर्गम क्षेत्रों तक सेवा पहुंचाने में योजना को सफल बनाएगा।
विभाग ने इस योजना के संचालन के लिए आवश्यक कार्यढांचा तैयार कर मंत्रालय में चर्चा हेतु भेज दिया है।
निदेशक लिलाराज पौडेल के अनुसार, जनशक्ति, वाहन और पता पहचान की कमी प्रमुख चुनौतियां हैं।
फिलहाल विभाग के पास पर्याप्त वाहन नहीं हैं, जिससे देशभर घर-घर दस्तावेज पहुंचाने में कठिनाई होगी।
‘हमारे पास जनशक्ति है, लेकिन सेवा प्रदान करने के साधन और तरीके की कमी है,’ उन्होंने कहा। ‘मोटरसाइकिल हो या चौपांग्रे वाहन, वाहन की कमी मुख्य समस्या है।’
एक अन्य चुनौती सही ग्राहक पते की पहचान का प्रबंधन है। ऑनलाइन फॉर्म में दिए गए पते की पुष्टि करने के लिए कोई स्पष्ट प्रणाली नहीं बनाई गई है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई चाबहिल से जिला प्रशासन कार्यालय या पासपोर्ट विभाग जाकर आवेदन देता है, तो उसे किस स्थान पर पहुंचाना है, इसका स्पष्ट पता पहचान ढांचा बनाना होगा, उन्होंने बताया।
विभाग फिलहाल 33 जिला प्रशासन कार्यालयों तक पासपोर्ट पहुंचा रहा है, जहां से नागरिक खुद दस्तावेज लेते हैं।
पार्सल खोने की शिकायतों को निदेशक पौडेल ने ‘बाहरी अफवाह’ करार दिया। उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर कोई पार्सल खोने की शिकायत दर्ज नहीं हुई है और ईएमएस जैसी सेवाओं में नुकसान की भरपाई का प्रावधान भी है।
कुछ निजी कुरियर कंपनियां विदेश भेजने के लिए भी सरकारी हुलाक सेवा उपयोग करती हैं, उनका दावा है।
विभाग के पास कार्यालय से कार्यालय तक ट्रैकिंग प्रणाली मौजूद है, जिसे ग्राहक के घर तक पहुंचाने के लिए विकसित करना होगा, उनकी सलाह है।
योजना सकारात्मक, पर आउटसोर्सिंग व स्पष्ट कार्यप्रणाली आवश्यक
पासपोर्ट, नागरिकता और लाइसेंस घर पर पहुंचाने की योजना को प्रशासनविद् एवं पूर्व प्रशासन सुधार आयोग के अध्यक्ष काशीराज दाहाल ने सकारात्मक और लोकतांत्रिक बताया, साथ ही इसे सफल बनाने के लिए ठोस तैयारी और स्पष्ट प्रणाली की जरूरत बताई।
उनके अनुसार, यह योजना ‘सरकार को जनता के दरवाजे तक पहुंचाने’ की लोकतांत्रिक मान्यता को पुष्ट करती है और इसे प्रभावी तरीके से लागू करना चाहिए।
‘यह एक सकारात्मक व्यवस्था है, जो पहले नागरिकों को झेलनी पड़ने वाली दिक्कतों को मिटाएगी,’ दाहाल ने कहा।
आईटी के विकास से पारंपरिक हुलाक सेवा की भूमिका कम हो गई है, इसलिए यह हुलाक को आधुनिक कुरियर सेवा में बदलना उचित कदम है।
ललितपुर जिला हुलाक कार्यालय में पत्र मुझुसे देखते एक विद्यार्थी। तस्वीर : संत गाहा मगर
100 दिन की समयसीमा तो महत्वाकांक्षी है पर असंभव नहीं, दाहाल कहते हैं। उन्होंने तुरंत अभियान शुरू करने और बाद में इस योजना को संस्थागत रूप देने का सुझाव दिया।
‘सभी 77 जिलों में एक साथ जनशक्ति पर्याप्त नहीं हो सकती। जहां सुविधा हो वहां अभियान शुरू किया जा सकता है और बाद में विस्तार किया जा सकता है,’ उन्होंने कहा।
जनशक्ति और संसाधनों की कमी पूरी करने के लिए उन्होंने अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन उपाय सुझाते हुए निजी क्षेत्र के साथ सहकार्य (आउटसोर्सिंग) को बेहतर विकल्प माना।
‘यदि आवश्यक हो तो वर्तमान कुरियर संस्थाओं के साथ समझौता कर जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।’
पासपोर्ट, नागरिकता और लाइसेंस जैसे संवेदनशील दस्तावेज घर पर पहुंचाने में सुरक्षा और जवाबदेही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, इसलिए स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है, उन्होंने जोर दिया।
‘किसी संस्था को जिम्मेदारी देने की शर्त स्पष्ट होनी चाहिए और नुकसान होने पर मुआवजा देने का प्रावधान भी मौजूद रहे।’
इस योजना की सफलता के लिए पासपोर्ट विभाग, यातायात व्यवस्था विभाग, गृह मंत्रालय के अधीन निकाय और हुलाक सेवा विभाग के बीच सशक्त समन्वय आवश्यक है।
‘अंतर-समन्वय करते हुए एक समान कार्यव्यवस्था बनाकर लागू किया जाए तभी योजना सफल होगी।’
स्थानीय तकनीक सबसे अच्छा विकल्प
नास आईटी के संस्थापक अध्यक्ष रिचन श्रेष्ठ बताते हैं कि सरकारी दस्तावेज घर-घर पहुंचाने की योजना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, पर असंभव नहीं। नेपाल के स्टार्टअप द्वारा विकसित समाधान विदेशी तकनीकों से प्रभावी और बेहतर हैं।
नेपाल में व्यवस्थित पता व्यवस्था की कमी मुख्य चुनौती है, लेकिन इसे देश में विकसित समाधानों द्वारा सम्हाला जा सकता है।
‘गल्ली मैप्स, बाटो, कता हो जैसे लोकल स्टार्टअप पहले ही पता प्रबंधन समाधान कर चुके हैं, उन्हें प्रोत्साहन और सहयोग की जरूरत है,’ उन्होंने कहा।
डिलिवरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के लिए ‘रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम’ आवश्यक है और यह कठिन नहीं है।
‘जैसे ‘पठाओ’ जैसी सेवाएं दिखाती हैं, हमारे पास तकनीक है, बस हुलाक सेवा के लिए इसे अनुकूलित करना होगा।’
ग्रामीण क्षेत्र में सेवा विस्तार के दौरान आने वाली चुनौतियों को जल्दी चरणबद्ध तरीके से हल किया जा सकता है, उनका तर्क है।
शुरुआत में अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्रों से सेवा शुरू कर तकनीकी परीक्षण उपरांत इसे धीरे-धीरे ग्रामीण इलाकों में फैलाया जा सकता है।
‘सौ दिन में सब कुछ पूरा नहीं होगा लेकिन शुरुआत जरूर की जा सकती है।’
सरकार अगर स्थानीय स्टार्टअप्स के साथ सहयोग करती है तो योजना सफल होगी और इससे नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी, उनका विश्वास है।
१७ चैत, हेटौंडा। बागमती प्रदेश में सरकार का नेतृत्व कर रही नेपाली कांग्रेस ने मंत्रालयों की संख्या १४ से घटाकर केवल सात रखने का निर्णय लिया है। कांग्रेस के बागमती प्रदेश संसदीय दल ने मंगलवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद् के अतिरिक्त सात मंत्रालय स्थापित करने का फैसला किया है। काठमांडू में दल के नेता एवं मुख्यमंत्री इन्द्रबहादुर बानियाँ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वर्तमान सात निर्देशनालयों को दो में सीमित करते हुए पांच निर्देशनालयों को भी समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
इसी प्रकार, कर्मचारी दरबंदी में ७०१ पदों की कटौती करने का मसौदा तैयार कर सरकार में सहभागी दलों के बीच चर्चा कर पारित कराने के लिए सरकार से अनुरोध किया गया है। बागमती में कांग्रेस और नेकपा एमाले की संयुक्त सरकार काम कर रही है। एमाले पहले ही दल की बैठक में मंत्रालयों की संख्या घटाने का प्रस्ताव रख चुका है। प्रदेश प्रशासनिक पुनर्संरचना, पुनरावलोकन, अध्ययन और सुझाव समिति ने मुख्यमंत्री कार्यालय सहित कुल आठ मंत्रालयों को आवश्यक बताते हुए २७ फागुन को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
सरकार के पूर्व सचिव विमल वाग्ले के संयोजकत्व में रेश्मी राज पाण्डे, गोपीकृष्ण खनाल, जीवप्रभा लामा सदस्य एवं प्रदेश सचिव पूर्णबहादुर दर्जी सदस्य सचिव के रूप में गठित विशेषज्ञ टीम ने प्रदेश सरकार को निर्देशनालय, बोर्ड आदि संरचनाओं की आवश्यकता नहीं होने और ७०१ कर्मचारी पदों की कटौती करने का सुझाव दिया था। अध्ययन समिति ने मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद् कार्यालय के साथ-साथ आर्थिक मामला तथा योजना मंत्रालय, उद्योग, संस्कृति, पर्यटन एवं यातायात मंत्रालय, कृषि पशुपन्छी, भूमि व्यवस्था तथा सहकारी मंत्रालय, भौतिक पूर्वाधार विकास मंत्रालय बनाए रखने की सलाह दी है।
इसी तरह वन एवं वातावरण मंत्रालय, सहरी एवं स्थानीय विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं सामाजिक विकास मंत्रालय को भी बनाए रखने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में बागमती प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री कार्यालय, आंतरिक मामला तथा कानून, आर्थिक मामला तथा योजना, कृषि एवं पशुपन्छी, खानेपानी, ऊर्जा तथा सिंचाई, भौतिक पूर्वाधार, वन और वातावरण, श्रम रोजगार तथा यातायात, उद्योग वाणिज्य, भूमि तथा प्रशासन, संस्कृति पर्यटन, सहकारी तथा गरीबी निवारण, सामाजिक विकास, स्वास्थ्य और युवा तथा खेलकूद सहित कुल १४ मंत्रालय मौजूद हैं।
इसके अतिरिक्त कांग्रेस संसदीय दल की बैठक ने एक सप्ताह के भीतर प्रदेशसभा की बैठक आयोजित कराने के लिए प्रदेश सरकार से आग्रह करने तथा बागमती प्रदेश सभामुख पद के लिए कांग्रेस द्वारा दावेदारी करने का भी निर्णय लिया है।
नेपाली कांग्रेस के संस्थापक विरोधी समूह ने 14वें महाधिवेशन से चुनी गई केंद्रीय समिति की धुम्बराही में बैठक शुरू की है।
बैठक में समानुपातिक सांसद चयन में नियमों का उल्लंघन होने का आरोप लगाया गया।
महामंत्री प्रदीप पौडेल ने पार्टी में एकता पर जोर देते हुए कहा कि शक्ति एकता में निहित है।
17 चैत, काठमाडौं। छह महीनों से अंदरूनी विवादों में फंसी नेपाली कांग्रेस में चुनाव के बाद नया विवाद और तीव्र हो गया है। विशेष महाधिवेशन से चुनी गई केंद्रीय समिति को निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता मिलने के बाद पार्टी के अंदर असंतुष्ट समूहों ने समानांतर गतिविधियों को तेज कर दिया है।
संस्थापन-विरोधी समूह ने मंगलवार से 14वें महाधिवेशन में चुनी गई केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक शुरू की है। विशेष महाधिवेशन से पहले कांग्रेस के कार्यवाहक सभापति पूर्णबहादुर खड्काले पुराने कार्यसमिति के अस्तित्व का दावा करते हुए इस बैठक को बुलाया था।
सभापति गगन थापा के संस्थापक समूह द्वारा पार्टी के विधान उल्लंघन का आरोप लगाने और सख्त कार्रवाई की चेतावनी के बीच उपसभापति खड्काले इस बैठक का आयोजन किया है।
कार्यवाहक सभापति की हैसियत से खड्काले धुम्बराही स्थित होटल स्मार्ट में बैठक बुलाई है, जो बुधवार तक चलेगी। पहले दिन बैठक में 14वें महाधिवेशन से चुने गए 82 पदाधिकारी और केंद्रीय सदस्य के साथ दो प्रदेश सभापति भी शामिल थे।
खड्काले बैठक में पूर्वमंत्री डॉ. शशांक कोइराला और निवर्तमान सदस्य शेखर कोइराला को अपने बगल में बैठा कर संचालन किया। शेखर कोइराला बैठक स्थल पर अंतिम समय में पहुंचे।
उनके आगमन के बाद खड्काले सभी नेताओं को अपनी-अपनी सीटों पर बैठने के लिए कहा और बैठक आगे बढ़ाई गई। बैठक में कांग्रेस का कोई बैनर नहीं था और कोई आधिकारिक मिनट भी तैयार नहीं किया गया।
निवर्तमान सहमहामंत्री बद्री पाण्डे ने कहा कि दो दिन के लिए बुलाई गई यह बैठक एक गैर-आधिकारिक सभा है।
‘यह औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि अनौपचारिक सभा है,’ उन्होंने कहा, ‘यह सभा पार्टी को ध्रुवीकरण की बजाय एकजुट बनाने में मदद करेगी।’
लेकिन बैठक के बाहर नेता उमेशजंग रायमाझी ने इसे अलग तरह से व्याख्यायित किया। जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि इसे केंद्रीय समिति की बैठक कहा जाए या सभा, तो उन्होंने कहा, ‘यह दोनों हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चर्चा जारी रहती है, लेकिन यह देश, पार्टी और जनता के हित में होनी चाहिए।’
बैठक में 15 से अधिक नेताओं ने अपनी राय व्यक्त की है, लेकिन कोई औपचारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। निवर्तमान सभापति शेरबहादुर देउवा और नेता शेखर कोइराला के पैनल से चुने गए शीर्ष नेता बोलने से कतराते रहे।
कर्णाली प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जीवनबहादुर शाही ने कहा कि सभी को संगठित होकर आगे बढ़ना चाहिए और नए पार्टी खोलने के विकल्पों का उल्लेख भी किया है।
‘समानांतर गतिविधि करने की बजाय सभी मिलकर आगे बढ़ें और संवाद करें,’ उन्होंने कहा, ‘अगर संवाद नहीं करना चाहते तो नई पार्टी बनाएं, लेकिन समानांतर गतिविधि ठीक नहीं है।’
नेता शंकर भंडारी ने देश में विदेशी हस्तक्षेप के बढ़ने की बात कहते हुए कांग्रेस से संवैधानिक राजतंत्र और हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रयास करने का सुझाव दिया।
‘देश संकट में है। कांग्रेस को संवैधानिक राजतंत्र और हिन्दू राष्ट्र के लिए काम करना चाहिए,’ उन्होंने कहा।
निवर्तमान केंद्रीय सदस्य सरस्वती तिवारी ने फागुन 21 को हुए चुनाव में नियमित महाधिवेशन समर्थक नेताओं के नामांकन पर आपत्ति जताई है।
‘गगन थापा से टिकट लेकर आप क्यों गए? चुनाव क्यों लड़े?’ वह नाराज हुईं, एक नेता ने कहा, ‘चुनाव नहीं लड़ना भी संभव था, टिकट न चाहिए भी कह सकते थे।’
नेता मानबहादुर नेपाली ने समानुपातिक सीटों के बंटवारे में अन्याय होने की शिकायत की है।
‘पार्टी में कहीं-कहीं अन्याय हुआ और गलत लोगों को पार्टी में ले जाया गया,’ उन्होंने कहा, ‘पार्टी में सुधार होना चाहिए लेकिन अगर आपका भी हाथ दोषी हो तो कहता हूँ।’
समानुपातिक दलित कोटे में पहले नंबर पर रहे मानबहादुर नेपाली और पिछड़े क्षेत्र की पहली नंबर की विद्या तिमिल्सिना का नाम हटाए जाने पर भी निवर्तमान सदस्य ईश्वरी न्यौपाने ने आपत्ति जताई।
‘दलित कोटे से मानबहादुर नेपाली और पिछड़े क्षेत्र से विद्या तिमिल्सिना का नाम हटाना गलत है,’ उन्होंने कहा, ‘यह नियमों के खिलाफ है और निर्वाचन आयोग भी इसमें दोषी है।’
नियमों के खिलाफ प्रत्याशी चयन किए जाने पर न्यौपाने ने निर्वाचन आयोग और नेतृत्व को दोषी ठहराया।
खड्काले पार्टी के संस्थापक समूह पर समानुपातिक सांसद चयन में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
‘विशेष महाधिवेशन ने नियमित नियमों के विपरीत कार्य किया। पिछड़े क्षेत्र से विद्या तिमिल्सिना का नाम हटाकर असंबंधित व्यक्ति को रखा गया,’ उन्होंने कहा, ‘हमारे उम्मीदवार निष्पक्ष नहीं थे।’
नेता मानबहादुर विश्वकर्मा ने देश और पार्टी के दुर्घटना की ओर बढ़ने की चिंता जताई।
‘हम दुर्घटना की ओर बढ़ रहे हैं। मैंने कई बार चेतावनी दी है,’ उन्होंने बैठक में कहा।
नेता मोहन बस्नेत ने कांग्रेस को भू-राजनीतिक संकटपूर्ण स्थिति में बताया और कहा कि कम्युनिस्टों के साथ गठबंधन ने भू-राजनीतिक संतुलन बिगाड़ा है।
‘हम भू-राजनीतिक समस्याओं में फंसे हैं। नेताओं ने अपनी चालाकी देखी, हमारी बात नहीं सुनी,’ उन्होंने कहा।
सुदूरपश्चिम प्रदेश सभापति वीरबहादुर बलायर ने धुम्बराही बैठक को गलत अर्थ में न लेना संस्थापन पक्ष से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पार्टी की चिंता करते हुए गुस्सा करना उचित नहीं है।
जब पत्रकारों ने समानांतर गतिविधि करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया, ‘ऐसा कुछ नहीं है। यह पुरानी स्थिति है जो अब व्यापक स्तर पर हो रही है, इसे बड़ा मत बनाइए।’
बलायर के अनुसार पार्टी की एकता और समझदारी के प्रयास जारी हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अहंकार छोड़कर मध्यम मार्ग अपनाने का आह्वान किया।
बैठक से बाहर निकलते हुए नेता उमेशजंग रायमाझी ने कहा कि सभापति गगन थापा का चुनाव सर्लाही में ‘‘ग्रैंड डिजाइन’’ के तहत कराया गया।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय गिरिजाप्रसाद कोइराला के ‘‘ग्रैंड डिजाइन’’ को वर्तमान में लागू बताया।
‘गिरिजाप्रसाद कोइराला का ग्रैंड डिजाइन यही है,’ उन्होंने कहा, ‘गगनजी को सर्लाही कौन ले गया? वही डिजाइन है।’
उन्होंने मौजूदा चुनावी स्थिति को भी ‘‘डिजाइन’’ के अनुसार बताया।
‘निर्वाचन के वक्त सिंहदरबार जल रहा है, सेना का मुख्यालय सरकार है, चारों ओर सेना है, सेना पहले घेरे में है,’ रायमाझी ने कहा।
उन्होंने कहा कि देश को इस स्थिति से निकालने के लिए सभी पक्ष तैयार हों। ‘कांग्रेस के सभी पक्षों को संवाद करना होगा और महाधिवेशन में जाना होगा,’ उन्होंने कहा।
उनका विश्वास है कि कांग्रेस ही देश को संभालने वाली पार्टी होगी।
संस्थापन-विरोधी समूह की बैठक जारी रहने के बीच प्रवक्ता देवराज चालिसे ने सोशल मीडिया के माध्यम से धुम्बराही बैठक की निंदा की।
‘विभिन्न मत और असहमति लोकतांत्रिक पार्टी में स्वाभाविक हैं और इससे पार्टी परिपक्व और मजबूत बनती है,’ उन्होंने लिखा, ‘लेकिन जब असहमति मर्यादित संवाद से बाहर निकलकर समानांतर गतिविधि में बदल जाती है, तो वह पार्टी के लिए हानिकारक होती है।’
महाधिवेशन के नजदीक होने पर उन्होंने स्पष्ट योजना के साथ कार्यकर्ताओं का समर्थन हासिल करने पर ज़ोर दिया और पार्टी अनुशासन पालन की याद दिलाई।
‘महाधिवेशन नजदीक है। स्पष्ट योजना, ठोस तर्क और सकारात्मक ऊर्जा से कार्यकर्ताओं का दिल जीतना चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘नेतृत्व का रास्ता विधानानुसार खुला है और अनुशासन में कोई समझौता नहीं होगा।’
समानांतर गतिविधि बढ़ने के बाद महामंत्री प्रदीप पौडेल ने नेता-कार्यकर्ताओं से पार्टी की एकता बनाए रखने का आग्रह किया है।
धुम्बराही बैठक शुरू होने से पहले फेसबुक पर उन्होंने कहा, ‘प्रतिकूलता के बीच भी हम टूटे नहीं। मैं सिर्फ महामंत्री नहीं, बल्कि एक ईमानदार कार्यकर्ता हूं—हम एकजुट हैं।’
पौडेल ने कहा कि नेपाली कांग्रेस के इतिहास में एकता ही शक्ति रही है, इसलिए संकट के समय पार्टी मजबूत है और एकता की ताकत फिर से प्रकट होगी।
‘मैं नेपाली कांग्रेस के सभी नेता-कार्यकर्ताओं से अनुरोध करता हूं—शक्ति एकता में है, इसलिए हमारा भविष्य उज्ज्वल होगा,’ महामंत्री पौडेल ने कहा।
समाचार सारांश: राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने पुरानी राजनीतिक पार्टियों को डरा-धमकाकर संपत्ति शुद्धीकरण को आगे बढ़ाया है, जिससे सेयर बाजार में बड़ा गिरावट आई है। नेकपा एमाले के अध्यक्ष एवं पूर्वगृह मंत्री को गिरफ्तार किए जाने तथा एमाले की सड़कों पर जारी आंदोलन से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने के कारण निवेशकों में चिंता पैदा हुई है। नेपाल स्टॉक एक्सचेंज का नेप्से इंडेक्स बुलिस ट्रेंड में होने के बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के फैसलों से बाजार में सुधार (करेक्शन) आवश्यक हो गया है। १७ चैत्र, काठमांडू। जनजी आंदोलन के बाद राजनीतिक स्थिरता आने की उम्मीद के बीच सेयर बाजार ने ‘बुलिस ट्रेन्ड’ पकड़ लिया था, लेकिन इस सप्ताह असामान्य गिरावट दर्ज की गई है। २१ फागुन को संपन्न प्रतिनिधि सभा चुनाव में लगभग दो तिहाई मत प्राप्त करने वाली राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) की सरकार ने पुरानी राजनीतिक दलों को तंग करने, सेयर बाजार की उपेक्षा करने तथा संपत्ति शुद्धीकरण को प्राथमिकता देने के चलते धन बाजार में भारी कमी आई है। नई सरकार ने नेकपा एमाले अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार को ही गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद नेपाली कांग्रेस के नेता एवं पूर्व गृह मंत्री रमेशकुमार लेखक को भी गिरफ्तार किया गया। कुछ शीर्ष नेताओं के खिलाफ संपत्ति शुद्धीकरण जांच शुरू होने से सेयर बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा है। केवल रविवार और सोमवार को ही सेयर बाजार सूचकांक में ११९ अंक की गिरावट आई है। नेकपा एमाले के सड़क आंदोलन ने राजनीतिक स्थिरता में अनिश्चितता बढ़ाई है और निवेशक इसे लेकर डर गए हैं, जिससे बाजार में भारी गिरावट आई है, यह सभी संबंधित पक्षों की आम समझ है। हालांकि, नेपाल स्टॉक एक्सचेंज (नेप्से) का परिसूचक बुलिस ट्रेन्ड में होने के कारण विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक विकास के लिए यह करेक्शन आवश्यक है। चुनाव के निश्चित होने के बाद सेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखा गया, लेकिन मतगणना के बाद बाजार नकारात्मक हो जाना एक पारंपरिक प्रवृत्ति है। इस बार एक पार्टी के लगभग दो तिहाई जनादेश हासिल करने के कारण निवेशकों ने राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद लगाई थी। सरकार द्वारा पुरानी राजनीतिक दलों के प्रति अपनाए गए रुख को बाजार ने विरोध स्वरूप व्यक्त किया है, एक निवेशक ने बताया। ‘‘बाजार दीर्घकालिक सुधार के रास्ते पर है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘हाल ही में नेप्से घटने का कारण सरकार के कुछ ताजा निर्णय हैं, जो कुछ समय के लिए सीमित प्रभाव डालेंगे, लेकिन आने वाले दिनों में बाजार में वृद्धि निश्चित है।’’
१७ चैत, सुर्खेत। इनिसा विक मौत मामले में संलग्न चारों आरोपितों को सुर्खेत जिला अदालत ने पुर्पक्ष की अवधि के लिए जेल में रखने का आदेश दिया है। बाल न्यायाधीश दीपक ढकाल की एकल अदालत ने मंगलवार को चारों आरोपितों को पुर्पक्षकाल के लिए बाल सुधार गृह भेजने का निर्णय दिया है। इनिसा के साथ बलात्कार के बाद हत्या की गई है, इस आधार पर चारों आरोपितों के खिलाफ जबरदस्ती करणी और हत्या के प्रयास के अभियोग पत्र दायर किए गए थे। सभी चारों आरोपी नाबालक हैं। फिलहाल उन्हें पुर्पक्ष के लिए बाल सुधार गृह भेजा गया है, लेकिन मामले का अंतिम फैसला अभी बाकी है, अदालत के सूचना अधिकारी उज्वल रावल ने बताया।
‘चारों आरोपितों को पुर्पक्षकाल के लिए बाल सुधार गृह में भेजने का आदेश दिया गया है,’ रावल ने कहा, ‘घटना की गंभीरता और प्रारंभिक सबूतों के आधार पर, जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक उन्हें जेल में ही रखा जाएगा और मामला आगे बढ़ाया जाएगा।’ पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष दिया था कि इनिसा के साथ सामूहिक बलात्कार नहीं, बल्कि अकेले बलात्कार हुआ था। चैत्र ११ तारीख को यह रिपोर्ट सरकारी वकालत कार्यालय में प्रस्तुत की गई थी। इनिसा के प्रेमी बताए जाने वाले १६ वर्षीय नाबालक ने कहा था कि यह एक सहमति से होने वाला संबंध था, और वह अचानक बेहोश हो गई थीं। उन्होंने पीछा अस्पताल ले जाने के लिए अपने साथियों को बुलाने की बात भी कही थी। हालांकि, रविवार को सरकारी वकिल कार्यालय ने योजनाबद्ध तरीके से सामूहिक बलात्कार होने का आरोप लगाते हुए चारों अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने भी मंगलवार को चारों को पुर्पक्ष के लिए बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दिया।
गत फागुन २३ की सुबह, इनिसा विक ने ट्यूशन पढ़ने जाने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन उन्हें वीरेन्द्रनगर–४ के जनजागरण सामुदायिक वन में बेहोशी की हालत में पाया गया। पुलिस ने उन्हें कर्णाली प्रदेश अस्पताल पहुंचाया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उसी दिन, पुलिस ने उनके प्रेमी बताए गए १६ वर्षीय युवक को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी। उसके बयान के बाद, तीन अन्य किशोरों को भी हिरासत में लेकर जांच जारी रखी गई। इनिसा मृत्यु मामले में न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा है कि जबतक आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तबतक वे शव को नहीं उठाएंगे। इनिसा का शव २४ दिनों से कर्णाली प्रदेश अस्पताल के शव गृह में रखा हुआ है।
१७ चैत, काठमाडौं । कूपर कोनोली ने अपनी डेब्यू मैच में अर्धशतक लगाकर पन्जाब किंग्स को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) २०२६ में विजयी शुरुआत दिलाई है। मंगलवार को मुल्लानपुर में खेले गए मैच में पन्जाब ने गुजरात टाइटन्स को ३ विकेट से हराते हुए २ अंक हासिल किए। गुजरात द्वारा दिए गए १६३ रनों के लक्ष्य को पन्जाब ने ५ गेंद शेष रहते हुए ७ विकेट खोकर पूरा किया।
ऑस्ट्रेलिया के २२ वर्षीय ऑलराउंडर कोनोली ने गेंदबाजी तो नहीं की लेकिन बल्लेबाजी में ४४ गेंदों में ५ चौके और ५ छक्कों की मदद से नाबाद ७२ रन बनाए। ओपनर प्रभसिमरन सिंह ने ३७ रन जोड़े जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने १८ रन का योगदान दिया। प्रभावी सबका के रूप में दूसरी पारी में मैदान में उतरे प्रसिध ने १० ओवर बाद गेंदबाजी शुरू की। उन्होंने अपनी शुरुआती १० गेंदों पर केवल ३ रन देकर ३ विकेट ले लिए थे, जिससे पन्जाब पर दबाव बना था, लेकिन सेट बल्लेबाज कोनोली ने पन्जाब को जीत दिलाई।
गुजरात ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी की और २० ओवर में ६ विकेट के नुकसान पर १६२ रन बनाए। शुरुआत अच्छी रही लेकिन गुजरात अच्छी फिनिशिंग नहीं कर पाया। कप्तान शुभमन गिल ने ३९ रन बनाए और जॉस बटलर ने ३८ रन जोड़े। १० ओवर के बाद गुजरात का स्कोर ८४-२ था, लेकिन अगले १० ओवर में उसने केवल ७८ रन ही जोड़ पाया। पन्जाब के विजयकुमार वाइसाक ने ४ ओवर में ३४ रन दे कर ३ विकेट लिए जबकि युजवेंद्र चहल ने ४ ओवर में २८ रन देकर २ विकेट हासिल किए। आईपीएल में बुधवार को दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच मुकाबला होगा।
१७ चैत, काठमाडौं। गृहमंत्री सुधन गुरुङ ने नेकपा एमाले के कार्यकर्ताओं द्वारा दुर्व्यवहार झेल रहे वरिष्ठ नागरिकों से मुलाकात की है। मंगलवार को ललितपुर स्थित अपने निवास पर गुरुङ ने इन वरिष्ठ नागरिकों से भेंट की। अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे एमाले कार्यकर्ताओं ने उनके ऊपर हमला किया था।
सड़क पर चल रहे इन वरिष्ठ नागरिकों पर हमला करने के आरोप में ललितपुर की गोदावरी नगरपालिका–१० टाखेल निवासी आरबी शर्मा या राम शरण शर्मा बजगाईं को गिरफ्तार किया गया है। गृहमंत्री ने उनसे मिलने के बाद पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों ने उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है। उनके सचिवालय के अनुसार गृहमंत्री गुरुङ ने अपने कार्य पूरे कर निवास लौटते समय ये वरिष्ठ नागरिकों से मुलाकात की।
७ चैत, काठमाडौँ। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्रियों ने पाँच बिंदुओं वाली साझा सुझाव सूची जारी की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशहाक डार ने बीजिंग के दौरे के दौरान मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से भेंट की। इस मुलाकात में दोनों मंत्रियों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का अवलोकन किया। दोनों ने समस्या के समाधान के लिए पाँच सूत्रीय साझा सहमति प्रस्तुत की।
तत्काल युद्ध रोकना आवश्यक: दोनों विदेश मंत्रियों ने तुरंत युद्ध को रोकने और इसके विस्तार को रोकने के लिए सभी संभव प्रयास करने का आह्वान किया। साथ ही, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुँचाने और ले जाने की अनुमति देने पर जोर दिया। शीघ्र शांति वार्ता शुरू करनी होगी: दोनों ने जल्द से जल्द शांति वार्ता प्रारंभ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनकी साझा राय के अनुसार इरान और खाड़ी देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय स्वतंत्रता एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विवाद समाधान के लिए वार्ता और कूटनीतिक माध्यम ही प्रभावी विकल्प हैं, इस बात पर दोनों पक्ष सहमत हैं। आम नागरिकों और गैरसैन्य क्षेत्र की सुरक्षा: सैन्य संघर्ष के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, यह उनकी धारणा है। दोनों देशों ने नागरिकों और गैरसैन्य क्षेत्र में तत्काल हमलों को रोकने और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का पूर्ण पालन करने का आग्रह किया है।
साथ ही ऊर्जा, जल शुद्धिकरण संयंत्र, विद्युत गृह और शांतिपूर्ण परमाणु संरचनाओं पर कोई आक्रमण न किया जाए, इसका भी उन्होंने अनुरोध किया। समुद्री मार्ग की सुरक्षा: स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज तथा उसके आसपास के क्षेत्र विश्वव्यापी वस्तु और ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं, इसे रेखांकित करते हुए दोनों विदेश मंत्रियों ने वहां फंसे जहाजों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही।
जनता और व्यावसायिक जहाजों के शीघ्र और सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना भी उनकी साझा प्राथमिकता है। इसके साथ ही, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में सामान्य आवागमन नियमित रूप से बनाए रखने पर भी सहमति बनी। संयुक्त राष्ट्र की भूमिका: चीन और पाकिस्तान ने बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था को प्रोत्साहित करने, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रसंघ चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित स्थायी शांति के लिए व्यापक समझौतों का समर्थन करने का साझा दृष्टिकोण जताया है।
अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फीफा) के अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो ने पुष्टि की है कि इरान विश्व कप में भाग लेगा और सभी मैच पूर्व निर्धारित शेड्यूल के अनुसार अमेरिका में ही खेले जाएंगे। इरान जून १५ और २१ को लॉस एंजिलिस में न्यूज़ीलैंड और बेल्जियम के खिलाफ खेलेगा, जबकि जून २६ को सिएटल में मिस्र के खिलाफ मुकाबला होगा।
इन्फान्टिनो ने एएफपी से कहा, ‘इरान विश्व कप में होगा। वे एक बहुत मजबूत टीम हैं और मैं इससे बहुत खुश हूं। मैच उसी ड्रॉ के मुताबिक निर्धारित स्थानों पर आयोजित होंगे।’ इरान फुटबॉल महासंघ के उपाध्यक्ष महदी मोहम्मदनाबी ने बताया कि फीफा के नियम सबसे महत्वपूर्ण हैं और वे फीफा के फैसलों का सम्मान करते हैं।
अमेरिका-इज़रायल और इरान के बीच जारी तनाव के कारण इरान की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता थी। इससे पहले इरान फुटबॉल महासंघ ने अपने मैचों को अमेरिका से हटाकर मेक्सिको में कराने के लिए फीफा से चर्चा की बात कही थी।
इन्फान्टिनो ने हाल ही में तुर्की में कोस्टारिका के खिलाफ इरान की ५-० की मैत्रीपूर्ण विजय भी देखी। उन्होंने कहा, ‘मैंने टीम, खिलाड़ियों और कोच से बात की है, सब कुछ ठीक है।’ महदी मोहम्मदनाबी ने भी बताया कि इन्फान्टिनो के समर्थन से खिलाड़ियों को अतिरिक्त ऊर्जा मिली है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् (आईसीसी) का वार्षिक सम्मेलन इस वर्ष स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में 8 से 11 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। हाल ही में सम्पन्न वर्चुअल बोर्ड बैठक में इस स्थान की पुष्टि की गई है, जबकि क्रिकेट संबंधित समाचार संस्था क्रिकबज ने यह जानकारी दी है। सम्मेलन का नेतृत्व आईसीसी के अध्यक्ष जय शाह करेंगे। यह सम्मेलन आईसीसी महिला टी-20 विश्वकप के समापन के तुरंत बाद आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन में एसोसिएट सदस्यों के प्रतिनिधित्व के संबंध में महत्वपूर्ण चुनाव भी होंगे। 17 सदस्यीय बोर्ड के लिए एसोसिएट देशों से 3 निदेशक चयनित किए जाएंगे, जिनका कार्यकाल दो वर्ष का होगा। चुनाव में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि उम्मीदवार बनने की उम्मीद जताई जा रही है। संभावित उम्मीदवारों में रवांडा के स्टीफन मुसाले, नामीबिया के डॉ. रुडी भान भुरेन, बर्मुडा के नील स्पेइट, अमेरिका के शंकर रंगनाथन शामिल हैं। वर्तमान एसोसिएट प्रतिनिधि गुरुमूर्ति पलानी, मुबाशिर उस्मानी, महिंद्रा वल्लिपुरम तथा उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा भी प्रतिस्पर्धा करने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले, कतर के दोहा में 25 से 27 मार्च तक होने वाली बोर्ड बैठक पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण स्थगित कर दी गई थी।
टोटनहम हॉटस्पर ने इटालियन कोच रोबर्टो डे जेर्बी को पाँच साल के समझौते पर नया मुख्य प्रशिक्षक नियुक्त किया है। डे जेर्बी को सत्र के बचे हुए सात मैचों में टोटनहम को रिगेशन से बचाने की चुनौती दी गई है। फिलहाल टोटनहम प्रीमियर लीग में 17वें स्थान पर है और रिगेशन ज़ोन से केवल एक अंक ऊपर है। टीम के रिगेट होने की स्थिति में भी उनके अनुबंध में बाहर निकलने (रिगेशन क्लाज) की कोई व्यवस्था नहीं है।
डे जेर्बी ने कहा, ‘इस विश्व के प्रतिष्ठित क्लबों में से एक में काम करने का अवसर पाकर मैं बेहद खुश हूँ। क्लब के भविष्य के प्रति स्पष्ट महत्वाकांक्षा है और मैं इसे पूरा करने के लिए यहाँ आया हूँ।’ टोटनहम ने इससे पहले कोच इगोर टुडोर के साथ सहमति में उनका इस्तीफा स्वीकार किया था। डे जेर्बी क्लब की पहली पसंद थे और रविवार को हुई सफल बातचीत के बाद उन्हें तुरंत नियुक्त किया गया है।
डे जेर्बी का पहला मैच 12 अप्रैल को सन्डरलैंड के खिलाफ होगा और इसके बाद वह अपने पूर्व क्लब ब्राइटन के साथ मुकाबला करेंगे। टोटनहम के स्पोर्टिंग डायरेक्टर जोहान लाङ ने कहा, ‘डे जेर्बी हमारी पहली पसंद थे। वह आधुनिक और आक्रामक कोचिंग शैली के बेहतरीन प्रशिक्षकों में से एक हैं।’
नेपाल में गैर-संचारी रोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और सालाना 1 लाख 93 हजार से अधिक लोग इन बीमारियों के कारण मृत्यु दर झेलते हैं।
मिर्गौला रोगी हस्तिमाया लिम्बू और रामबहादुर तामाङ ने मिर्गौला प्रत्यारोपण कराया, लेकिन उपचार के खर्च ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया।
सरकार ने गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए बहुक्षेत्रीय योजना लागू की है, लेकिन रोकथाम की अपेक्षा इलाज पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
१७ चैत, काठमांडू। झापाकी ५५ वर्षीय हस्तिमाया लिम्बू की जीवन कहानी किसी फिल्म की तरह है। जब उनके पति संपर्क विहीन हो गए, तो उन्होंने दो पुत्रियों की जिम्मेदारी अकेले उठाई और २०७३ साल में ओमान जाना पड़ा।
ओमान में हस्तिमाया की दिनचर्या बहुत कठिन थी। सुबह ५ बजे से लेकर रात ११ बजे तक घरेलू कामगार के रूप में लगातार काम करना पड़ता था। उन्होंने कहा, ‘सफाई, खाना बनाना, कपड़े धोना सभी काम करती थी,’ उन्होंने उन दिनों को याद करते हुए कहा, ‘दिन-रात काम करने से शरीर बहुत दुखता था। कभी-कभी पेनकिलर लेना पड़ता था।’
अत्यधिक गर्मी में भी वह गीला पानी पीती थीं। अत्यधिक काम के दबाव से पेशाब और मल रोकना पड़ता था। इस आदत ने स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला। खाने की इच्छा कम हुई, कमर में दर्द होने लगा और लगातार उल्टी होती रही। एक दिन वह बेहोश हो गईं, तब उनके मालिक ने उन्हें अस्पताल ले गए। अस्पताल में होश खुलने पर पता चला कि दोनों मिर्गौले काम करना बंद कर चुके थे, जिससे वह स्तब्ध रह गईं।
चार दिन तक डायलासिस कराने के बाद नियोक्ता ने उन्हें नेपाल वापस भेज दिया। नेपाल लौटने के बाद कोरोना महामारी ने उनके लिए और चुनौती खड़ी कर दी। डायलासिस के दौरान कोरोना संक्रमण से उनकी सेहत गंभीर हो गई।
हस्तिमाया लिम्बू, जिनका मिर्गौला प्रत्यारोपित किया गया है।
संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। उनकी बहन मिर्गौला दान के लिए तैयार थीं, लेकिन पित्ताशय में पथरी पाए जाने के कारण पित्ताशय निकालना पड़ा। चैत २०८० में हस्तिमाया का मिर्गौला प्रत्यारोपण सफल रहा। इसके लिए उन्होंने कहा, ‘६० लाख से अधिक खर्च हो चुका है।’
‘जहां काम करती थी, वहां रोजाना मांस के व्यंजन बनते थे, खासकर बहुत तैलीय मांस उन्हें पसंद था,’ उन्होंने कहा, ‘शायद तैलीय मांस खाने के कारण मेरे मिर्गौले प्रभावित हुए हैं।’
अब वह कुछ समय के अंतराल पर फॉलो-अप के लिए त्रिवि शिक्षण अस्पताल जाती हैं। ‘अब जीने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है,’ हस्तिमाय ने कहा, ‘दवाइयों की लागत ही महीने के १५ हजार रूपए होती है।’
ऐसा ही अनुभव काभ्रेका ५२ वर्षीय रामबहादुर तामाङ को भी है। जो काठमांडू में किराये पर रहकर दैनिक मजदूरी करते थे और परिवार पालते थे। वह सुबह काम पर जाते और शाम को घर लौटते।
‘एकाकी रहने पर खाना बनाने का मन नहीं करता था। सुबह-शाम बाजार से ही खाने का सामान लेते थे,’ उन्होंने बताया, ‘इसका असर स्वास्थ्य पर भी पड़ा।’
उन्होंने माना कि बाजार में आसानी से मिलने वाले तैलीय, तले हुए, और जंक फूड स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।
रामबहादुर को थकान, शरीर सुन्नापन और धीरे-धीरे स्वास्थ्य बिगड़ने की समस्या होने लगी। जब वे गम्भीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे, तो मिर्गौला फेल बताया गया। वे कुछ वर्षों तक डायलासिस पर रहे।
दो साल पहले उनके पुत्र ने मिर्गौला दान किया और सफल प्रत्यारोपण हुआ, लेकिन आर्थिक तंगी ने परिवार को सड़क पर ला दिया।
‘बाजार में मिलने वाले तैलीय और जंक फूड का अधिक सेवन किया था,’ उन्होंने याद किया, ‘उसी आदत से मिर्गौले खराब हुए।’
सरकार ने मिर्गौला प्रत्यारोपण के लिए ५ लाख रूपए की सहायता दी थी, लेकिन दवाइयों और अन्य खर्च ने वह राशि पूरी नहीं की। ‘इलाज के लिए अपने घर और जमीन बेचनी पड़ी,’ उन्होंने बताया।
ये उदाहरण दर्शाते हैं कि गैर-संचारी रोगों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. केदार बराल के अनुसार, ‘जीवनशैली और खानपान में बदलाव से रोग बढ़ रहे हैं।’
विशेषज्ञों के मतानुसार पिछले वर्षों में खानपान व जीवनशैली में आए बदलावों के कारण रोगों का खतरा बढ़ा है। पहले मुख्य मौतों का कारण संक्रामक रोग थे, लेकिन अब गैर-संचारी रोग प्रमुख हो गए हैं।
नेपाल के १० प्रमुख मृत्यु कारणों में से ८ गैर-संचारी रोग हैं। रोग बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार सालाना १,९३,३३१ लोग गैर-संचारी रोगों से मरते हैं।
हार्ट और रक्त नली रोगों में सालाना ४६,३९९ लोगों की मृत्यु होती है। दीर्घ श्वास रोग से ४०,७९२ नेपाली अकाल मृत्यु के शिकार होते हैं। ट्यूमर और कैंसर से सालाना २१,६५३ लोगों की जान जाती है। अन्य रोगों से भी हजारों मौतें होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली और अस्वस्थ खानपान है। नेपाल में ७१ प्रतिशत मृत्यु इन रोगों के कारण होती है।
पाटन स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान के प्रो. डॉ. मधुसूदन सुवेदी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में रोगी संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। पहले शारीरिक श्रम अधिक होता था, लेकिन अब मोटरसाइकिल, स्कूटर पर निर्भरता बढ़ी है।
गैर-संचारी रोगों के उपचार के खर्च ने कई परिवारों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। सालाना पाँच लाख से अधिक नागरिक गरीबी रेखा के नीचे गिर गए हैं।
डा. सुवेदी के मुताबिक बाजार के तैलीय, संसाधित और फास्ट फूड के कारण दिल, मधुमेह, कैंसर की घटनाएं बढ़ी हैं।
‘हम सोचते हैं कि हम स्वस्थ भोजन करते हैं, लेकिन विषाक्त भोजन से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है,’ वे कहते हैं।
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र कोजू कहते हैं कि बाजार में मिलने वाले कई खाद्य पदार्थों में वसा की मात्रा अत्यधिक होती है। तली हुई तथा फ्रोज़न चीज़ें ट्रांस फैट से भरपूर होती हैं, जो लंबी अवधि में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
ट्रांस फैट कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे को बढ़ाता है तथा दिल, किडनी और दिमाग के रोगों का खतरा बढ़ाता है।
तैलीय खाद्य पदार्थों में, जैसे बिस्कुट, कुकीज, समोसा, चिप्स, केक, पिज़्ज़ा, मोमोज़ आदि की खपत बढ़ी है।
विपन्नों के गैर-संचारी रोग खर्च ५ वर्षों में दोगुना
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन बीमारियों से पीड़ित गरीब नागरिकों को दवाओं और उपचार में सहायता देने वाले कार्यक्रम में पांच सालों में सेवा लेने वालों की संख्या दो गुना हो गई है। कैंसर, हृदय रोग, डायलासिस, किडनी ट्रांसप्लांट जैसे रोगों के मरीज बढ़े हैं।
आर्थिक तौर पर खर्च भी दोगुना हो चुका है। वित्त वर्ष २०७७/७८ में २१४ करोड़ रुपए खर्च हुए, जबकि २०८१/८२ में यह ४४२ करोड़ रुपए पहुँच गया।
यह सेवा अब स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के माध्यम से भी उपलब्ध हो रही है। कड़ी बीमारियों से पीड़ित ४६ हजार से अधिक गरीब वर्ग बीमा के तहत सेवा प्राप्त कर चुके हैं।
स्वास्थ्य सेवा विभाग के विश्लेषण के अनुसार उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर रोगों में बीमा सेवा लेने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। बीमा में होने वाले दावों का लगभग आधा हिस्सा गैर-संचारी रोगों का है।
नसर्ने रोगों के मरीज़ों में वृद्धि और आर्थिक बोझ स्वास्थ्य प्रणाली पर बढ़ रहा है, मल्ल बताते हैं।
नागरिकों का अपने खर्च पर इलाज का हिस्सा करीब ४० प्रतिशत है। किडनी, मधुमेह, कैंसर, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग दीर्घकालीन आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं।
स्वास्थ्य अर्थशास्त्री घनश्याम गौतम के अनुसार यह एक दीर्घकालीन समस्या है। रोकथाम ज्यादा प्रभावी और लाभकारी है, सरकार को इलाज की जगह रोकथाम में निवेश करना चाहिए।
धूम्रपान, असंतुलित आहार, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और तनाव ने समस्या को बढ़ाया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक स्वास्थ्य सेवा के दौरान औसतन २७ हजार रुपए खर्च होते हैं, जो लंबी अवधि में वित्तीय समस्या उत्पन्न कर सकते हैं।
नेपाली आमतौर पर बीमारी होने पर ही इलाज पर ध्यान देते हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भगवान कोइराला कहते हैं कि बीमारी न होने देना, रोकथाम और नियमित परीक्षण अनिवार्य है।
डॉ. कोइराला का कहना है कि सरकार को अब उपचार से अधिक रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए।
प्रदूषण और जंक फूड से फैलता रोगों का जाल
विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, अस्वस्थ खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और तनाव रोगों को बढ़ाता है।
धुलिखेल अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र कोजू के अनुसार अब युवाओं में भी दिल का दौरा पड़ रहा है, जिसका मुख्य कारण धूम्रपान है।
हृदय और रक्त नली रोगों से स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा है। वीर अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. राजीव झकाले का अनुमान है कि आने वाले ८-१० वर्षों में स्ट्रोक सबसे बड़ा मृत्यु कारण बन सकता है।
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. राजु पंगेनी का कहना है कि दीर्घकालीन श्वास रोग ९० प्रतिशत से अधिक मरीजों को प्रभावित करता है जिनमें COPD, दमा और अस्थमा शामिल हैं।
डॉ. पंगेनी के अनुसार ४० वर्ष से ऊपर के लोगों में दमा रोग ज्यादा होता है और वायु प्रदूषण व धूम्रपान इसके मुख्य कारण हैं।
‘वातावरण प्रदूषण और अस्वस्थ खान-पान से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है,’ उन्होंने बताया।
कैंसर विशेषज्ञ डॉ. विवेक आचार्य ने खराब खान-पान, असंतुलित जीवन और अस्वस्थ जीवनशैली को कैंसर के खतरे का मुख्य कारण बताया।
कैंसर बढ़ाने में पैकेज्ड, जंक फूड और संसाधित खाद्य पदार्थों का विवादित उपयोग जुड़ा है।
अत्यधिक मांस, जंक फूड और तैलीय खाना पाचन तंत्र के कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं, डॉ. आचार्य ने बताया।
‘दिनभर बैठने और कम सक्रियता वालों में मोटापा और कैंसर का खतरा अधिक होता है,’ वे कहते हैं।
पहले नेपाल में ज्यादातर घर पर बने भोजन का सेवन होता था, लेकिन अब फास्ट फूड और संसाधित भोजन की खपत बढ़ी है।
गैस्ट्रोएंटरॉलोजिस्ट डॉ. भूपेन्द्रकुमार बस्नेत के अनुसार तेल का अधिक इस्तेमाल पाचन समस्याएं और कैंसर बढ़ाता है।
रसायनों का भी स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
पाचन रोगों का समय पर पता न चलने से उपचार जटिल होता है और मृत्यु दर बढ़ती है।
मिर्गौला रोग भी एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बन गया है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे से इसकी वृद्धि हो रही है।
मिर्गौला रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकुमार काफ्ले के अनुसार मिर्गौला फेल होने पर प्रत्यारोपण या डायलासिस जरूरी हो जाता है।
लेकिन यह हर किसी के लिए संभव नहीं है और कई मरीजों को जीवनभर डायलासिस पर निर्भर रहना पड़ता है, जो बड़ी चुनौती है।
मिर्गौला रोगियों की संख्या सालाना ३ हजार से बढ़ रही है। हजारों मरीज प्रत्यारोपण के इंतजार में हैं, पर वार्षिक मात्र २०० प्रत्यारोपण होते हैं।
वीर अस्पताल में उपचार के लिए आए नागरिक /फाइल तस्वीर
सरकार की रोकथाम की अपेक्षा उपचार केंद्रित नीति
स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय के अनुसार गैर-संचारी रोग महामारी के रूप में फैल रहे हैं। सरकार ने २०२१-२०२५ के लिए बहुक्षेत्रीय रोकथाम कार्यक्रम लागू किया है और २०२६-२०३० के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
कार्ययोजना का उद्देश्य हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और दीर्घ रोगों से होने वाली अकाल मृत्यु दर को ३३ प्रतिशत कम करना है।
लेकिन इसके लिए सभी स्तरों और निकायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
गैर-संचारी रोगों के मुख्य कारण स्वास्थ्य क्षेत्र से परे भी हैं, जैसे प्रदूषण, कूड़ा प्रबंधन, कीटनाशक और रासायनिक पदार्थ।
पिछली योजना में बहुक्षेत्रीय अवधारणा शामिल करने का प्रयास हुआ, लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन नहीं हो सका। अब नीति, संसाधन और कार्यक्रमों का स्पष्ट समन्वय करने की योजना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों को भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले तत्वों को कम करने के लिए कदम उठाने होंगे, डॉ. विकास देवकोटा ने बताया।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. केदार बराल कहते हैं कि गैर-संचारी रोग जीवनशैली से जुड़े हैं, इसलिए जीवनशैली सुधारना जरूरी है। ‘सरकार इलाज पर ज़्यादा ध्यान दे रही है, रोकथाम में अब भी सुधार की आवश्यकता है,’ उन्होंने कहा।
डॉ. शरद वन्त ने कहा कि सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों के साथ सहयोग करना अनिवार्य है। नीति निर्माण और कार्यान्वयन अभी भी कमजोर है।
डॉ. रिता थापा ने बताया कि गैर-संचारी रोग महामारी के रूप में फैल रहे हैं और जीवनशैली व आदतें मुख्य कारण हैं।
वीर अस्पताल में उपचार के लिए आए नागरिक /फाइल तस्वीर
‘बच्चे धूम्रपान उत्पादों का सेवन करते हैं और अभिभावक जंक फूड खिलाते हैं। शारीरिक सक्रियता कम हो रही है और तनाव बढ़ रहा है,’ डॉ. थापा ने कहा।
सरकार इलाज पर अधिक खर्च कर रही है लेकिन रोकथाम के प्रति कम ध्यान दे रही है, उन्होंने जोड़ा।
थापा के अनुसार स्कूल स्तर से स्वास्थ्य जीवनशैली की शिक्षा जरूरी है क्योंकि किशोरावस्था में धूम्रपान और जंक फूड की शुरुआत होती है।
विकसित देशों में ये रोग नियंत्रण में हैं, लेकिन नेपाल जैसे विकासशील देशों में गैर-संचारी रोग महामारी की तरह फैल रहे हैं।
चिकित्सा समाजशास्त्री मधुसूदन सुवेदी ने कहा कि सरकार को रोकथाम, स्क्रीनींग और जनजागरूकता कार्यक्रमों में निवेश बढ़ाना चाहिए।
डा. दास ने कहा कि धूम्रपान, अस्वस्थ खानपान और निष्क्रिय जीवनशैली इन रोगों के मुख्य कारण हैं और इनके ऊपर कर वृद्धि जरूरी है।
स्वास्थ्य अर्थशास्त्री गौतम ने साबित किया कि इलाज की तुलना में रोकथाम में निवेश लंबे समय में सस्ता और प्रभावी है।