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लेखक: space4knews

नेपाल राष्ट्र बैंक ने आधा दर्जन लघुवित्त संस्थाओं पर तेज सुधारात्मक कार्रवाई की

नेपाल राष्ट्र बैंक ने न्यूनतम पूँजी कोष अनुपात पूरा न करने वाले आरम्भ चौतारी, गणपति, सामुदायिक, नेरुडे और सीवाईसी सहित आधा दर्जन लघुवित्त संस्थाओं पर तेज सुधारात्मक कार्रवाई की है। केन्द्रीय बैंक ने कर्जा नोक्सानी व्यवस्थापन के तहत नियमों के विपरीत आमदनी दिखाने के आरोप में लघुवित्त के प्रमुख कार्यकारी अधिकारियों को सतर्क किया है।

धौलागिरी लघुवित्त के संचालक समिति पर सवारी साधन खरीद में वित्तीय नियमों का उल्लंघन करने तथा कर्मचारियों की पुनर्बहाली में त्रुटि करने का आरोप लगाते हुए बैंक ने संचालक समिति को भी चेतावनी दी है। १५ असार, काठमांडू। नेपाल राष्ट्र बैंक ने आधा दर्जन लघुवित्त वित्तीय संस्थाओं के खिलाफ तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक के इस कदम में आरम्भ चौतारी, गणपति, सामुदायिक, नेरुडे और सीवाईसी लघुवित्त वित्तीय संस्थाएं शामिल हैं।

बैंक के अनुसार, आरम्भ चौतारी ने २०८२ असार मसांत तक न्यूनतम पूँजी कोष अनुपात केवल ७.७७ प्रतिशत ही बनाए रखा है। यह अनुपात नियामकीय मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं के लिए छिटो सुधारात्मक कारबाही सम्बन्धी विनियमावली, २०७४ के अनुसार कार्रवाई की गई है। लघुवित्त वित्तीय संस्थाओं के लिए ८ प्रतिशत पूँजी कोष बनाए रखना आवश्यक है।

गणपति लघुवित्त वित्तीय संस्था ने भी पूँजी कोष अनुपात पूरा न करने के कारण कार्रवाई झेली है। २०८२ असोज मसांत तक इस संस्थान ने केवल ६.०६ प्रतिशत न्यूनतम पूँजी कोष अनुपात बनाए रखा था, जिसके कारण कार्रवाई हुई। सामुदायिक लघुवित्त वित्तीय संस्था ने २०८२ असार मसांत तक केवल ६.१२ प्रतिशत ही पूँजी कोष अनुपात बनाए रखा था, इसलिए यह भी कार्रवाई के दायरे में आई।

पहले हाफ में जापान ने ब्राजील को एक गोल से हराया, ब्राजील की बराबरी प्रयास असफल

फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 के अंतर्गत मैच में जापान ने ब्राजील के खिलाफ पहले हाफ में 1-0 की बढ़त बनाई है। जापान के काइसु सानो ने मैच के 29वें मिनट में अकेले गेंद लेकर बढ़ते हुए गोल किया। उन्होंने मैदान के बीचोबीच ब्राजील के खिलाड़ी का मिस पास पकड़कर अकेले गेंद आगे बढ़ाई और गोल किया। सानो की लंबी शॉट को ब्राजील के गोलकीपर एलिसन बेकर रोक नहीं पाए।

पाँच बार विश्व चैंपियन बन चुकी ब्राजील बराबरी करने का प्रयास कर रही है, लेकिन पहले हाफ तक सफल नहीं हो सकी है। जापान के गोलकीपर जिओन सुजुकी ने पहले हाफ में उत्कृष्ट रक्षात्मक प्रदर्शन किया है। 15 असार, काठमाडौँ।

जापान ने पहले हाफ में ब्राजील को एक गोल से किया पीछे, ब्राजील की बराबरी की कोशिशें जारी

एक गोल से पीछे होने के बावजूद पाँच बार के विश्व चैंपियन ब्राजील बराबरी का गोल करने में सफल नहीं हो पाया।

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • फीफा विश्व कप २०२६ के राउंड ऑफ ३२ मुकाबले में पहले हाफ में जापान ने ब्राजील को १-० से पीछे किया।
  • जापान के कैसु सानो ने २९वें मिनट में गोल करके ब्राजील के खिलाफ बढ़त दिलाई।
  • पाँच बार के विश्व चैंपियन ब्राजील ने बराबरी का प्रयास किया लेकिन पहले हाफ तक गोल नहीं कर पाया।

२९ जून, काठमांडू – फीफा विश्व कप २०२६ के राउंड ऑफ ३२ में जापान ने पहले हाफ में ब्राज़ील को १-० से पिछड़ने पर मजबूर किया।

संयुक्त राज्य अमेरिका के ह्यूस्टन स्टेडियम में खेल रहे इस मैच में जापान के कैसु सानो ने २९वें मिनट में टीम को बढ़त दिलाई।

सानो ने ब्राजील के खिलाड़ियों द्वारा दिया गया कमजोर पास रोकते हुए गेंद लेकर आगे बढ़े और गोल किया। उनका शक्तिशाली शॉट ब्राजील के गोलकीपर एलिसन बेकर्स तक नहीं पहुंच पाया।

जर्मनी के क्लब मेन्ज ०५ में खेलने वाले सानो के लिए यह जापान के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय गोल है।

वहीं, प्रयासरत ब्राजील पहले हाफ के समाप्त होने से पहले बराबरी का गोल करने में असफल रहा।

जापान के गोलकीपर ज़ियन सुजुकी ने पहले हाफ में शानदार प्रदर्शन किया।

 

आगामी बजट और कार्यक्रम की लागत अनुमान तथा बोलपत्र तैयारी असार माह के अंत तक पूरी करने का लक्ष्य

समाचार सारांश

  • सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०७८/८४ के बजट एवं कार्यक्रम की लागत अनुमान और बोलपत्र तैयारी का कार्य असार माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
  • मुख्यसचिव सुमनराज अर्याल की अध्यक्षता में हुई बैठक ने सभी मंत्रालयों को संगठन और प्रबंधन सर्वेक्षण निर्धारित समय में पूरा करने का निर्देश दिया है।
  • भदौ माह में हुए प्रदर्शन में क्षतिग्रस्त सरकारी सामग्री की लिलामी और लेखापरीक्षण न हुए निकायों के लेखापरीक्षण प्रक्रिया शीघ्र आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

१५ असार, काठमांडू। सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०७८/८४ के बजट और कार्यक्रम की लागत अनुमान तथा बोलपत्र की तैयारी का कार्य असार माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

२ असार को सम्पन्न सचिव बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रधान मंत्री तथा मंत्रिपरिषद् कार्यालय के अनुसार, मुख्यसचिव सुमनराज अर्याल की अध्यक्षता में हुई बैठक ने बजट और कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह निर्णय लिया है।

बैठक ने सभी मंत्रालयों को उनके अधीनस्थ निकायों सहित संगठन और व्यवस्थापन सर्वेक्षण को निर्धारित समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए हैं।

सचिव बैठक ने भदौ २३ और २४ तारीख को हुए प्रदर्शन के दौरान आगजनी या अन्य क्षति की गई सवारी वाहन, फर्नीचर एवं यंत्र उपकरणों को प्रचलित कानून के अनुसार मीनाहा या लिलामी के लिए जिन निकायों के कार्य बाकी हैं, उन्हें असार १५ के भीतर पूरा कर कार्यालय परिसर से हटाने का प्रावधान करने का निर्णय लिया है।

सभी मंत्रालय, विभाग और निकायों को महालेखा परीक्षक के ६३वें वार्षिक प्रतिवेदन में उल्लिखित बेरुजु मुद्दों का शीघ्र निपटान प्राथमिकता के साथ करने एवं साप्ताहिक प्रगति विवरण प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद् कार्यालय और बेरुजु फर्स्टआउट समिति को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने का भी निर्णय लिया गया है।

भदौ २३ और २४ को हुए प्रदर्शन में आगजनी के शिकार और लेखापरीक्षण नहीं हो सकने वाले निकायों से प्रचलित कानून के अनुसार लेखापरीक्षक कार्यालय के साथ समन्वय कर शीघ्र लेखापरीक्षण पूरा करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया। साथ ही सरकार ने शासकीय सुधार की १०० कार्यसूचियों में उल्लिखित कानून निर्माण और संशोधन विधेयकों को शीघ्र संघीय संसद में दायर करने का भी प्रावधान सुनिश्चित करने का निर्णय किया है।

ब्राज़ील ने किया बराबरी गोल

मिडफील्डर कासेमिरो ने ५६वें मिनट में हेडर से गोल किया।

समाचार सारांश

समीक्षित सामग्री।

  • फीफा विश्व कप २०२६ के राउंड ऑफ ३२ मैच में ब्राज़ील ने जापान के खिलाफ बराबरी का गोल किया।
  • मिडफील्डर कासेमिरो ने ५६वें मिनट में हेडर से गोल कर मैच को बराबर पर लाया।
  • पहले जापान के काइसु सानो ने २९वें मिनट में गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई थी।

१५ असार, काठमांडू। फीफा विश्व कप २०२६ के राउंड ऑफ ३२ मैच में ब्राज़ील ने दूसरे हाफ में जापान के खिलाफ बराबरी का गोल किया।

अमेरिका के ह्यूस्टन स्टेडियम में खेले जा रहे इस मैच में मिडफील्डर कासेमिरो ने ५६वें मिनट में गाब्रियल मागल्हाएस के क्रॉस पर हेडर से गोल किया।

पहले हाफ में एक गोल से पीछे रहने के बाद ब्राज़ील ने दूसरे हाफ की शुरुआत से ही जापान पर दबाव बनाया। लेकिन जापान के गोलकीपर जिओन सुजुकी ने शानदार बचाव किया और ब्राज़ील का गोल नहीं हो सका।

फिर कासेमिरो ने गोल कर खेल को बराबर किया। कासेमिरो विश्व कप में गोल करने वाले ब्राज़ील के दूसरी उम्रदराज खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने ३४ वर्ष १२६ दिनों की उम्र में यह गोल किया। इससे पहले बेबटो ने ३४ वर्ष १३७ दिनों की उम्र में १९९८ में डेनमार्क के खिलाफ गोल किया था।

५२वें मिनट में ब्राज़ील के डानिलो के पास पर ब्रुनो गुमाइरेस के हेडर को जापान के गोलकीपर सुजुकी ने बेहतरीन बचाया था।

इसी तरह ५४वें मिनट में कासेमिरो द्वारा मारा गया शॉट जापान के डिफेंडर ने गोल लाइन से निकाल दिया।

इससे पहले जापान के काइसु सानो ने २९वें मिनट में गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई थी। उन्होंने ब्राज़ीलियन खिलाड़ी के मिस्ड पास को मैदान के बीच में कब्जा कर एकलौती बढ़त बनाते हुए गोल किया। सानो के दूर तक मारा गया शॉट ब्राज़ील के गोलकीपर एलिसन बेकर के लिए रोक पाना संभव नहीं था।

जर्मन क्लब माइनज ०५ से खेलने वाले काइसु सानो के लिए यह उनका पहला गोल भी है।

 

 

 

सहकारी क्षेत्र की बचत में ८ महीनों में एक खरब की कमी, कोपोमिस में विश्वसनीयता का अभाव

समाचार संक्षेप में परिचालनात्मक समीक्षा की गई है। चालू आर्थिक वर्ष के फागुन तक सहकारी क्षेत्र की कुल बचत लगभग एक खरब रुपये घटकर १० खर्ब २९ अरब रुपये तक सीमित हो गई है। सहकारी विभाग और कोपोमिस में उपलब्ध आंकड़ों के असंगत होने के कारण सहकारी संस्थाओं की आधिकारिक संख्या एवं विवरण की सटीकता निर्धारित करना आयोग के लिए कठिन साबित हुआ है। बचत एवं ऋण निवेश में कमी के साथ-साथ आठ महीनों में सहकारी सदस्यों की संख्या में लगभग आठ लाख की गिरावट आई है, जो विभाग ने उल्लेख किया है।

१५ असार, काठमाडौं। चालू आर्थिक वर्ष के फागुन तक सहकारी क्षेत्र की कुल बचत करीब एक खरब रुपये घटी है। गत असार तक सहकारी क्षेत्र की कुल बचत ११ खरब रुपये थी, जो ८ महीनों में लगभग एक खरब रुपये कम हुई है। सहकारी विभाग के अनुसार, गत आर्थिक वर्ष के असार मसांत तक सहकारी क्षेत्र की कुल बचत ११ खरब २५ अरब २८ करोड़ थी, जबकि चालू आर्थिक वर्ष के फागुन मसांत तक यह राशि १० खरब २९ अरब रुपये रह गई है।

हालांकि, कोपोमिस में मौजूद आंकड़ों की विश्वसनीयता घटती जा रही है। सहकारी क्षेत्र की अनियमितताओं की जांच कर रही आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोऑपरेटिव एंड पॉवर्टी रिलेटेड इंफॉर्मेशन सिस्टम (कोपोमिस) में भरोसेमंद और सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

‘कोपोमिस के संचालन को लगभग ८ वर्ष हो चुके हैं, फिर भी यह भरोसेमंद और विश्वसनीय आंकड़े प्रदान करने में असमर्थ रहा है,’ आयोग की रिपोर्ट में उल्लेख है, ‘कोपोमिस के आंकड़ों को मानें तो सहकारी संस्थाओं की संख्या भी सटीक नहीं हो पाती।’

अधिकारियों के अनुसार, सहकारी विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में भी असंगति पाई गयी है। विभाग के अनुसार, प्रत्येक आर्थिक वर्ष में दर्ता की गई सहकारी संस्थाओं की प्रदेशवार संख्या ३६,९४२ है। संघीयता लागू होने के बाद विभिन्न निकायों और स्तरों को प्रस्तुत फाइल विवरण में सहकारी संस्थाओं की संख्या ३४,७१० बताई गई है, जबकि कोपोमिस में आर्थिक वर्ष २०८१/८२ तक ४१,१८७ संस्थाओं का उल्लेख है।

प्रतिवेदन में आगे कहा गया है, ‘इस प्रकार देखकर सहकारी संस्थाओं की सटीक संख्या उपलब्ध कराने की स्थिति नहीं है। आंकड़ों को सटीक करने के लिए प्रबंधन आवश्यक है।’

मार्टिनेली के इन्जुरी टाइम गोल से ब्राजील ने फिफा विश्वकप २०२६ के अंतिम १६ में प्रवेश किया

पाँच बार के चैंपियन ब्राजील ने पहले हाफ में एक गोल से पिछड़ने के बाद स्थिति पलटते हुए जीत हासिल की है। इन्जुरी टाइम में गाब्रीएल मार्टिनेली का निर्णायक गोल ब्राजील के लिए जापान के खिलाफ २-१ की जीत लेकर आया, जिससे ब्राजील फिफा विश्वकप २०२६ के अंतिम १६ में पहुंच गया। खेल के २९वें मिनट में जापान के काइसु सानो ने गोल करके टीम को बढ़त दिलाई थी, लेकिन ब्राजील ने दूसरे हाफ में वापसी करते हुए मैच अपने नाम किया। मिडफिल्डर कासेमिरो ने ५६वें मिनट में हेडर से गोल करके खेल बराबरी पर ला दिया, जिससे वे ब्राजील के विश्वकप में गोल करने वाले दूसरे सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी बने।

१५ असार, काठमांडू। गाब्रीएल मार्टिनेली ने इन्जुरी टाइम में निर्णायक गोल किया और ब्राजील ने जापान को २-१ से हराकर फिफा विश्वकप २०२६ के अंतिम १६ के लिए अपनी जगह पक्की की। अमेरिका के ह्यूस्टन स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में मार्टिनेली ने दूसरे हाफ के इन्जुरी टाइम के छठे मिनट में निर्णायक गोल किया। अब ब्राजील अंतिम १६ में आइवरी कोस्ट और नॉर्वे के बीच विजेता के खिलाफ मुकाबला करेगा।

जापान के काइसु सानो ने २९वें मिनट में गोल करके अपनी टीम को बढ़त दिलाई थी। उन्होंने मैदान के मध्य हिस्से में ब्राजीलियाई खिलाड़ियों के बीच मिस पास लेकर अकेले ही गेंद को आगे बढ़ाते हुए गोल किया।

सानो के इस विस्फोटक शॉट को ब्राजील के गोलकीपर एलिसन बेकर बचा नहीं पाए। जर्मनी के क्लब मेइंज ०५ से खेलने वाले सानो का यह जापान के लिए पहला गोल भी था। दूसरे हाफ में ब्राजील ने मैच में वापसी की। मिडफिल्डर कासेमिरो ने ५६वें मिनट में हेडर से गोल किया था, जो गाब्रीएल मागल्हाएस की क्रॉस पर था। पहले हाफ में गोल से पिछड़ने के बावजूद ब्राजील ने दूसरे हाफ की शुरुआत से ही जापान पर दबाव बनाया लेकिन जापानी गोलकीपर जिओन सुजुकी ने जबरदस्त बचाव किया और गोल नहीं होने दिया।

उसके बाद कासेमिरो ने गोल कर खेल को बराबरी पर ला दिया। कासेमिरो ब्राजील के लिए विश्वकप में गोल करने वाले दूसरे सबसे बुजुर्ग खिलाड़ी बने, जिन्होंने ३४ साल १२६ दिन की उम्र में गोल किया। इससे पहले बेबेटो ने ३४ साल १३७ दिन की उम्र में १९९८ में डेनमार्क के खिलाफ गोल किया था। ५२वें मिनट में ब्राजील के डानिलो ने पास किया, जिस पर ब्रुनो गुमाइरेस ने हेडर किया था, लेकिन जापानी गोलकीपर सुजुकी ने शानदार बचाव किया। ५४वें मिनट में कासेमिरो के प्रहार को जापानी डिफेंडरों ने गोललाइन से बचाया। फिर विनीसियस का शॉट पोस्ट से टकराकर वापस आया।

जब मैच बराबरी की ओर बढ़ रहा था, ब्राजील के लिए इन्जुरी टाइम में मार्टिनेली ने विजयी गोल कर दिया। नकआउट चरण में पहली बार जीतने का लक्ष्य रखने वाली जापान अपनी बढ़त कायम नहीं रख सकी और हार गई। फिफा विश्वकप के नकआउट चरण में जापान इससे पहले भी बढ़त लेकर हार का सामना कर चुकी है।

बैंकों ने १४९ शाखाएं बंद कीं

१५ असार, काठमाण्डौ। चालू आर्थिक वर्ष में बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं ने देशभर में १४९ शाखा कार्यालय बंद किए हैं। विशेष रूप से वाणिज्य बैंक और विकास बैंकों ने महानगरपालिकाओं के भीतर अपनी कई शाखाएं बंद की हैं। शाखाएं बंद होने के बावजूद, बैंक कर्मचारियों में कटौती नहीं कर सकते। नेपाल राष्ट्र बैंक ने चालू आर्थिक वर्ष की मौद्रिक नीति की पहली त्रैमासिक समीक्षा के माध्यम से महानगरपालिकाओं में अधिक शाखाओं के मामले में समायोजन या विलय का प्रावधान किया था। मौद्रिक नीति के अनुसार, केन्द्रीय बैंक ने २०८२ मंसिर २९ को निर्देश जारी करते हुए कर्मचारी कटौती या अनावश्यक कष्ट दिए बिना शाखा एकीकरण की अनुमति दी है।

इसके अनुसार, काठमाण्डौ, ललितपुर, पोखरा, विराटनगर, वीरगंज और भरतपुर महानगरपालिकाओं में ७ वाणिज्य बैंक तथा ३ विकास बैंक की कुल ११८ शाखाएं विलय की गई हैं। हालांकि, चालू आर्थिक वर्ष में वैशाख तक कुल १४९ शाखाएं घट चुकी हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु पौडेल ने बताया, “डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के कारण महानगरपालिकाओं में शाखाओं के समायोजन की नीति लाई गई है। केन्द्रीय बैंक की इस नीति के बाद १० बैंक और वित्तीय संस्थाओं ने ११८ शाखाएं समेकित की हैं। डिजिटल लेनदेन अधिक होने वाले स्थानों पर ही आवश्यकतानुसार शाखाएं रखी गई हैं।”

चालू आर्थिक वर्ष के १० महीनों में वाणिज्य बैंकों ने १४१ शाखाएं बंद की हैं, प्रवक्ता पौडेल ने कहा, “शाखा समायोजन से ग्राहक सेवा में कोई कमी नहीं आनी चाहिए और कर्मचारियों की छंटनी नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने स्पष्ट किया, “कर्मचारियों को हटाना नहीं चाहिए और न ही हटाने हेतु अनुपयुक्त स्थानों पर तबादला किया जाना चाहिए। अब तक ऐसी कोई समस्या नहीं आई है।”

शाखाएं बंद होने के बाद कर्मचारियों को दूरदराज के इलाकों में भेजकर असुविधा नहीं दी जा सकती, प्रवक्ता ने बताया। यदि ऐसा होता है तो राष्ट्र बैंक हस्तक्षेप करेगा और कर्मचारियों के लिए शिकायत का प्रावधान है। समायोजन नीति लागू होने से पहले भी शाखाओं की संख्या में कमी आ रही थी। चालू आर्थिक वर्ष के १० महीनों में वाणिज्य बैंकों ने १४१, विकास बैंकों ने १५ शाखाएं बंद की हैं। वहीं, वित्त कंपनियों ने २ नई शाखाएं खोली हैं। समायोजन और मर्जर के कारण शाखाओं की संख्या में गिरावट आई है, प्रवक्ता ने बताया।

एक बैंककर्मी ने कहा, “ग्राहकों द्वारा शाखाओं पर आने की संख्या कम होने के कारण अधिक शाखाएं चलाना खर्चीला हो गया था, इसलिए केन्द्रीय बैंक ने समायोजन नीति लागू की है। इससे बैंक के खर्चे कम होंगे और डिजिटल लेनदेन बढ़ेगा।”

केन्द्रीय बैंक की शाखा समायोजन नीति लागू होने के बाद एनआईसी एशिया बैंक ने सबसे अधिक ४४ शाखाएं बंद की हैं। इसके अलावा कुमारी बैंक ने २४ और नपार्चेसन मेगा बैंक ने १८ शाखाएं समेकित की हैं। पिछले ६ महीनों में प्रभु बैंक ने १२, एभरेष्ट बैंक ने १, प्राइम कमर्शियल बैंक ने ७, और एनएमबी बैंक ने ४ शाखाएं समेकित की हैं। विकास बैंक में महालक्ष्मी ने ४, मुक्तिनाथ ने २, और सप्तकोशी ने २ शाखाएं समाहित की हैं। समायोजन और मर्जर के कारण चालू आर्थिक वर्ष के १० महीनों में कुल १४९ शाखाएं कम हुई हैं।

असार अंत में वाणिज्य बैंकों की शाखाओं की संख्या ५,९९ थी, जो वैशाख तक घटकर ४,९६३ रह गई है। इसी प्रकार, विकास बैंक शाखाएं २०८२ असार में १,१३२ थीं, जो २०८३ वैशाख में १,११९ रह गईं। वहीं, वित्त कंपनियों की शाखाएं २०८२ असार में २९१ से बढ़कर २०८३ वैशाख में २९३ हो गई हैं।

केन्द्रीय बैंक की शाखा समायोजन नीति में क्या प्रावधान हैं? बैंक और वित्तीय संस्थाओं द्वारा शाखाएं बंद करना, स्थानांतरित करना या एकीकृत करना केन्द्रीय बैंक की पूर्व अनुमति पर निर्भर है। इस नीति के अनुसार गत मंसिर में महानगरपालिकाओं में शाखाओं के समायोजन का निर्णय वित्तीय संस्थान स्वयं ले सकते हैं। विद्युत कारोबार के बढ़ने और शाखाओं की अधिकता के मद्देनजर महानगरपालिका में शाखाएं समेकित की जा सकेंगी, लेकिन सरकारी या सार्वजनिक संस्थाओं की शाखा समायोजन के लिए लिखित अनुमति आवश्यक है।

शाखा समायोजन से पहले सरोकार वाले पक्षों को कम से कम ९० दिन पहले राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र, संबंधित संस्थान की वेबसाइट और शाखा की सूचना पट्टिका पर सूचना प्रकाशित करना जरूरी है।

दो या अधिक शाखाओं के समायोजन के समय ग्राहक कर्ज चुकाना या सेवा बंद करना चाहे तो बिना किसी शुल्क के सेवा स्थगित या कर्ज चुकता कर सकता है। समायोजन के तीन कार्यदिवस के भीतर भी विवरण केन्द्रीय बैंक को प्रस्तुत करना आवश्यक है।

धान में आत्मनिर्भरता और बीज में परनिर्भरता

नेपाल ने चालू आर्थिक वर्ष के 11 महीनों में 1 अरब 29 करोड़ 94 लाख रुपये के बराबर के 2,993 टन धान के बीज का आयात किया है। स्वदेशी हाईब्रिड जाति के धान के पर्याप्त विकास और उत्पादन न होने के कारण किसान विदेशी हाईब्रिड बीज पर निर्भर होने के लिए मजबूर हैं। सरकार भले ही धान के बीज में आत्मनिर्भरता का नारा दे रही हो, लेकिन हाईब्रिड बीज की कमी और कमजोर औपचारिक बीज उत्पादन प्रणाली के कारण आयात बढ़ता जा रहा है। 15 असार, काठमांडू। आज 15 असार को 23वां राष्ट्रीय धान दिवस मनाया जा रहा है। सरकार इस वर्ष “जलवायुमैत्री प्रौद्योगिकी, धान में आत्मनिर्भरता और समृद्धि” के मुख्य नारे के साथ धान दिवस मना रही है। लेकिन, “धान में आत्मनिर्भरता और समृद्धि” का नारा लगाते हुए भी किसान जो बीज रोपते हैं, वह हर साल 1 अरब रुपये से अधिक मूल्य में आयात किए जाते हैं। नेपाल में धान के बीज उत्पादन पर्याप्त होने और आंतरिक उत्पादन ही पर्याप्त होने के सरकारी दावे के बावजूद, उन्नत और विशेष रूप से हाईब्रिड (वर्णशंकर) जाति के बीज में किसानों की अधिक रुचि के कारण देश पूरी तरह से परनिर्भर दिखता है।

शुल्क विभाग के आंकड़ों के अनुसार धान के बीज का आयात पिछले वर्ष की तुलना में 11.42 प्रतिशत बढ़ा है। चालू आर्थिक वर्ष 2082/83 की 11 महीनों (साउन से जेठ अंत तक) में 1 अरब 29 करोड़ 94 लाख 32 हजार रुपये के बराबर के धान के बीज नेपाल में आए हैं। पिछले आर्थिक वर्ष के समान अवधि में 1 अरब 16 करोड़ 62 लाख 35 हजार रुपये के बीज का आयात हुआ था। मूल्य के आधार पर देखा जाए तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 13 करोड़ 31 लाख 97 हजार रुपये अधिक कीमत के धान के बीज का आयात हुआ है। मात्रा के आधार पर भी इस वर्ष धान के बीज का आयात बढ़ा है। पिछले वर्ष के 11 महीनों में 2,570 टन धान के बीज का आयात हुआ था, जबकि चालू आर्थिक वर्ष में समान अवधि में 2,993 टन बीज आयात हुआ है। शुल्क विभाग के आंकड़ों के अनुसार नेपाल में आयातित धान के बीज के 99 प्रतिशत से अधिक भाग की आपूर्ति पड़ोसी देश भारत और चीन करते हैं।

11 महीनों में केवल भारत से 1 अरब 14 करोड़ 25 लाख रुपये मूल्य के 2,669 टन धान के बीज का आयात हुआ है। इसी प्रकार, चीन से 15 करोड़ 67 लाख रुपये के 324 टन धान के बीज नेपाल में आए हैं। भारत और चीन के अलावा नेपाल ने कुछ मामूली मात्रा में परीक्षण या अन्य प्रयोजनों के लिए अन्य तीसरे देशों से भी बीज आयात किया है। वियतनाम से 148 किलो, ब्रिटेन से 12 किलो, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से 5-5 किलो तथा सऊदी अरब से 3 किलो धान के बीज नेपाल आए हैं। एक ओर बीज में आत्मनिर्भरता की ओर सरकारी दावा है और दूसरी ओर हर साल सवा अरब रुपये से अधिक के बीज का आयात होना नेपाल के कृषि अनुसंधान और किसानों की आवश्यकताओं के बीच बड़ी खाई को दर्शाता है।

शेख हसिना ने इस वर्ष बांग्लादेश वापसी का ऐलान किया

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसिना ने मृत्युदंड की सजा पाए होने के बावजूद इस वर्ष अपने देश वापसी का ऐलान किया है। वह लगभग दो वर्षों से भारत में रह रही हैं। मानवता के खिलाफ अपराध के मामलों में मृत्युदंड की सजा पाए 78 वर्षीय हसिना को बांग्लादेश सरकार ने ‘फरार’ घोषित किया था। अगस्त 2024 के आंदोलन के बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। उस समय छात्र नेतृत्व में हुए जन आंदोलन ने उनके 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया था।

हसिना ने भारतीय टेलीविजन चैनल एनडीटीवी को दिये गए साक्षात्कार में कहा कि उन्हें मृत्युदंड से कोई डर नहीं है। उन्होंने अपने खिलाफ दिए गए फैसले को गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, ‘मेरे खिलाफ कई साजिशें रची गईं। लेकिन हर साजिश को परास्त करते हुए मैं पांच बार जनता के मत से प्रधानमंत्री निर्वाचित हुई और देश के अभूतपूर्व विकास के लिए काम किया।’

पिछले वर्ष नवंबर में ढाका की एक अदालत ने हसिना को हिंसा भड़काने, हत्या का आदेश देने और अत्याचार रोकने में असफल रहने के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसी बीच, उनके दल अवामी लीग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध सुधार के लिए भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।

ढाका में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि पर्यटक वीजा प्रक्रिया 28 जून से पुनः शुरू होगी। उन्होंने कहा, ‘इससे हमारे दोनों संप्रभु देशों के नागरिकों के बीच संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है।’ शेख हसिना का सार्वजनिक रूप से स्वदेश वापसी का ऐलान और भारत द्वारा बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा पुनः शुरू करने का निर्णय दक्षिण एशियाई राजनीति तथा भारत–बांग्लादेश संबंधों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शेख हसीना का ऐलान – इस वर्ष ही बांग्लादेश लौटूंगी

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।

  • मृत्युदंड की सजा पाए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सभी षडयंत्रों को पार करते हुए इस वर्ष ही देश वापस लौटने का ऐलान किया है।
  • भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार माना जा रहा है।
  • सन् 2024 के आंदोलन के बाद भारत में रहने वाली हसीना ने अपने खिलाफ फैसले को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए मृत्युदंड से डरने की बात नहीं कही है।

15 असार, काठमांडू। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मृत्युदंड की सजा पाए होने के बावजूद इस वर्ष देश वापसी का ऐलान किया है। वह लगभग दो वर्षों से भारत में रह रही हैं।

मानवता के खिलाफ अपराध से संबंधित मामले में मृत्युदंड की सजा पाए 78 वर्षीय हसीना को बांग्लादेश सरकार ने ‘फरार’ घोषित किया था। सन् 2024 के अगस्त में हुए आंदोलन के बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत चली गई थीं। उस समय विद्यार्थी नेतृत्व वाले जनआंदोलन ने उनके 15 वर्षों के शासन का अंत किया था।

देश छोड़ने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से बहुत कम ही दिखाई दिया। इस साल जनवरी में नई दिल्ली में प्रेस क्लब से एक संबोधन के अलावा वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आईं।

भारतीय टेलीविजन चैनल एनडीटीवी को दिए गए एक साक्षात्कार में हसीना ने कहा कि वह मृत्युदंड से डरती नहीं हैं। उन्होंने अपने खिलाफ फैसले को गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक प्रेरित बताया।

उन्होंने कहा, ‘मेरे खिलाफ कई षड्यंत्र रचे गए। लेकिन हर षड्यंत्र को परास्त करते हुए मैं जनता के वोट से पांच बार प्रधानमंत्री चुनी गई और देश के अभूतपूर्व विकास के लिए काम किया।’

‘मृत्युदंड से कोई भय नहीं’

मृत्युदंड की सजा पाए होने के बावजूद बांग्लादेश लौटने को लेकर पूछे जाने पर हसीना ने कहा, ‘मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूं, सभी बाधाओं और षड्यंत्रों को पार करते हुए मैं इस वर्ष अपने देश वापस लौटूंगी।’

पिछले साल नवंबर में ढाका की एक अदालत ने हसीना को हिंसा भड़काने, हत्या का आदेश देने और अत्याचार रोकने में विफल रहने के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

इस बीच उनके दल अवामी लीग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। एक समय बांग्लादेश का सबसे लोकप्रिय राजनीतिक दल माना जाने वाला अवामी लीग अब कानूनी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

भारत–बांग्लादेश संबंधों में सुधार

पिछले दो वर्षों में भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। विद्यार्थी आंदोलन के बाद हसीना के सत्ता से हटने और भारत जाने के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। तब से बांग्लादेश बार-बार हसीना की प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है।

सन् 2026 के फरवरी में हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पार्टी की स्पष्ट बहुमत प्राप्ति के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार नजर आने लगा है।

नई सरकार के गठन के साथ द्विपक्षीय संवाद में तेजी आई है। इसी माह से भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जारी करने की प्रक्रिया पुनः शुरू की है।

ढाका स्थित भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने 25 जून को पर्यटक वीजा प्रक्रिया 28 जून से पुनः शुरू होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘इससे हमारे दोनों संप्रभु देशों के नागरिकों के बीच संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है।’

पहले भारत ने चिकित्सा वीजा जारी करना भी पुनः शुरू किया था।

सीमा और आव्रजन के विषय अभी भी संवेदनशील

भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध हैं लेकिन कुछ मसलों पर मतभेद कायम हैं।

खासकर सीमा पार हो रहे अवैध आव्रजन का विषय दोनों के बीच प्रमुख विवाद का बिंदु है। भारत अवैध प्रवासी पाए गए लोगों को बांग्लादेश लौटाता रहा है, जिससे समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव होता रहा है।

ऐसी स्थिति में शेख हसीना का सार्वजनिक रूप से देश लौटने का ऐलान और भारत का बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा पुनः शुरू करना दक्षिण एशियाई राजनीति एवं भारत-बांग्लादेश रिश्तों के संदर्भ में महत्वपूर्ण घटनाएं मानी जा रही हैं।

१२ वर्षों के बाद अंतिम १६ में पहुंचने के लक्ष्य के साथ जर्मनी और पाराग्वे की टक्कर कैसी रहेगी?

समाचार सारांश

  • फीफा विश्व कप 2026 के 32 टीमों के नॉकआउट चरण में आज चार बार के विजेता जर्मनी और दक्षिण अमेरिकी टीम पाराग्वे आमने-सामने होंगे।
  • समूह विजेता जर्मनी अपनी प्रतिष्ठा पुनः स्थापित करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा जबकि पाराग्वे अनुशासित रक्षात्मक शैली में अप्रत्याशित पलटवार की योजना बना रहा है।
  • 2002 के विश्व कप में जर्मनी ने पाराग्वे को 1-0 से हराया था और इस बार पाराग्वे उस परिणाम को पलटने का प्रयास करेगा।

15 असार, काठमांडू। फीफा विश्व कप 2026 के 32 टीमों के नॉकआउट चरण के तहत अमेरिका के बोस्टन स्टेडियम में आज चार बार के विश्व विजेता जर्मनी और दक्षिण अमेरिकी टीम पाराग्वे के बीच मुकाबला होगा।

समूह चरण का विजेता बनकर नॉकआउट में पहुंचे जर्मनी इस मैच में मजबूत दावेदार के रूप में उतरने वाला है। हालांकि, समूह के अंतिम मैच में इक्वेडर से 2-1 की हार के बाद टीम में थोड़ी सतर्कता देखी गई है।

पाराग्वे, जिसने समूह से श्रेष्ठ तीसरा स्थान हासिल कर नॉकआउट में जगह बनाई है, विश्व फुटबॉल में एक और बड़ा ‘अपसेट’ करने का लक्ष्य रखता है।

टर्की के खिलाफ समूह चरण के दूसरे हाफ में 10 खिलाड़ियों के साथ 1-0 की बहादुरी से जीत दर्ज कर पाराग्वे ने अपनी सख्त रक्षात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया है।

यह ‘कर या मर’ मैच में जर्मनी अपनी आक्रमक छवि फिर से दर्ज करने की कोशिश करेगा जबकि पाराग्वे अनुशासित रक्षात्मक संरचना द्वारा यूरोपीय महान खिलाड़ियों को चौंकाने की योजना बना रहा है।

2014 में खिताब जीतने के बाद जर्मनी दो संस्करणों में समूह चरण में ही बाहर हो चुका है। इसलिए 12 वर्षों बाद अंतिम 16 में पहुंचने का लक्ष्य जर्मनी के सामने है और पाराग्वे उसे रोकने की रणनीति बना रहा है।

यात्रा अब तक

जर्मनी: समूह चरण में दो जीत और एक हार के साथ समूह विजेता बनकर नॉकआउट पहुंचे जर्मनी ने पहले दो मुकाबले प्रभावशाली जीत दर्ज कर अंतिम 32 की यात्रा आसान बनाई। अंतिम मैच में इक्वेडर से हार कुछ चेतावनी जरूर थी, लेकिन शीर्ष स्थान सुनिश्चित किया। कोच जूलियन नैगेल्समैन की टीम अभी भी खिताब की मुख्य दावेदारों में है।

पाराग्वे: कठिन समूह से श्रेष्ठ तीसरा स्थान हासिल कर नॉकआउट में पहुंचा पाराग्वे समूह में संयमित रक्षात्मक खेल दिखा चुका है। विशेष रूप से टर्की के खिलाफ दूसरे हाफ में 10 खिलाड़ियों के साथ 1-0 से जीत दर्ज करना सबसे उल्लेखनीय था। सीमित मौके का सदुपयोग कर अंक जोड़े और अब बड़ी चुनौती के लिए तैयार है।

हेड-टू-हेड

जर्मनी और पाराग्वे ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में केवल दो बार ही आमना-सामना किया है। इनमें से जर्मनी ने एक मैच जिता है और दूसरा रोमांचक 3-3 की बराबरी पर समाप्त हुआ था।

विश्व कप मुख्य प्रतियोगिता में ये दोनों टीमें 2002 कोरिया/जापान विश्व कप के राउंड ऑफ 16 में एक बार मिली थीं, जहां जर्मनी ने 1-0 से जीत हासिल की थी। उस मैच में ओलिवर नेउबेल ने 88वें मिनट में निर्णायक गोल किया था और जर्मनी क्वार्टरफाइनल में पहुंचा था।

टीम समाचार

जर्मनी: मुख्य सेंटर-बैक निको स्लोटरबेक कूर्कुच्चा की चोट के कारण बाहर हैं, जो जर्मनी के लिए बड़ी खबर है। कोच जूलियन नैगेल्समैन 4-2-3-1 फॉर्मेशन में जोसुवा किमिच, एंटोनियो रुदिगर, जोनाथन ताह और डेविड राउम को रक्षा में उतार सकते हैं। मिडफील्ड में फेलिक्स मेचे और अलेक्जेंडर पाव्लोविच होंगे, जबकि आक्रमण में लिरॉय साने, जमाल मुसियाला, फ्लोरियन विर्ट्ज और काई हावर्ट्ज जिम्मेदारी संभालेंगे।

पाराग्वे: मिडफील्ड के महत्वपूर्ण खिलाड़ी डिएगो गोमेज दो पीले कार्ड के कारण निलंबित हैं। स्टार फॉरवर्ड मिगुएल अल्मिरॉन एक मैच की सजा पूरी करके लौट आए हैं। कोच गुस्तावो अल्फारो 4-4-2 संरचना में जुआन होसे कासेरेस, विक्टर भेलाज़्क्वेज, गुस्तावो गोमेज और जूनियर अलोनसो को रक्षा में उतार सकते हैं। मिडफील्ड में अल्मिरॉन, एंड्रेस कुबस, माटियास गालार्जा और मौरिसियो होंगे, जबकि फ्रंटलाइन में जूलियो एन्सिसो और गेब्रियल अभालोस जिम्मेदारी लेंगे।

रणनीतिक द्वंद्व

जर्मनी गेंद पर नियंत्रण बनाए रख कर निरंतर आक्रमण की शैली अपनाता है जबकि पाराग्वे अनुशासित रक्षात्मक संरचना और तेज काउंटरअटैक में विश्वास करता है। इसलिए मैच का परिणाम काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि जर्मनी पाराग्वे की घनी रक्षा को कितनी प्रभावी ढंग से भेद पाता है। वहीं, अल्मिरॉन और एन्सिसो की तेजी का सदुपयोग कर पाराग्वे जर्मनी की रक्षा पंक्ति को चुनौती दे सकता है।

मुख्य खिलाड़ी

जर्मनी के लिए जमाल मुसियाला, फ्लोरियन विर्ट्ज और काई हावर्ट्ज पर सभी की नजरें होंगी। पाराग्वे के मिगुएल अल्मिरॉन, जूलियो एन्सिसो और कप्तान गुस्तावो गोमेज टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी माने जाते हैं।

मैच : जर्मनी बनाम पाराग्वे
तिथि और समय : 16 असार, सुबह 2:15 बजे
स्थान : बोस्टन स्टेडियम, अमेरिका
प्रत्यक्ष प्रसारण : हिमालय स्पोर्ट्स

नई सरकार ने बदनाम तरीके को बढ़ावा दिया

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार।

  • सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विभिन्न शीर्षकों पर 90 अरब 30 करोड़ 95 लाख रुपये अबंडा बजट आवंटित किया है।
  • वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत इस बड़े आकार के अबंडा बजट ने खर्च के दुरुपयोग और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. पुष्पराज कँडेल ने इस प्रवृत्ति की आलोचना करते हुए कहा कि यह बजट को स्वार्थ के अनुसार खर्च करने का प्रयास है।

15 असार, काठमांडू। आवंटन विधेयक की मंत्रालयगत चर्चा के दौरान डेढ़ सप्ताह पहले विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महावीर पुन ने संसद में एक खुलासा किया।

उनके अनुसार मंत्री बनने से पहले उन्हें ‘अबंडा’ शब्द का अर्थ नहीं पता था, जो बिना बजट शीर्षक के एकमुश्त राशि रखे जाने को कहते हैं। लेकिन कुल बजट का 1 प्रतिशत से अधिक राशि अबंडा के रूप में आवंटित कर मंत्री का पद दिया गया, जबकि कोई कार्यक्रम नहीं मिला। मंत्री पुन के अनुसार विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार मंत्रालय को साढ़े 3 करोड़ रुपये का अबंडा बजट दिया गया है।

यह मंत्रालय बिल्कुल नया नहीं है। मंत्री के अनुसार यह मंत्रालय सातवीं बार पुनः स्थापित किया गया है। नवाचार नाम आने से पूर्व यह पूर्ण मंत्रालय था जो बजट लेकर कार्यक्रम संचालित करता था। लेकिन इस बार सरकार ने पुन पर बड़ा विश्वास जताते हुए साढ़े 3 करोड़ रुपये अबंडा बजट में आवंटित किया है, जिससे उन्हें खर्च करने की स्वतंत्रता मिली है।

सरकार आकस्मिक खर्च के लिए कुछ राशि अबंडा में रखती है, सामान्यतः अधिकांश बजट खर्च योग्य शीर्षकों में बांटा जाता है।

लेकिन अबंडा बजट में खर्च योग्य शीर्षक नहीं होते और वित्त मंत्रालय आवश्यकतानुसार खर्च शीर्षकों में ब्रेकडाउन करके पैसे खर्च करता है। इससे त्वरित खर्च में बड़ी राशि रखकर सार्वजनिक वित्त में गलत उदाहरण बनता है।

पिछले वर्षों से कुल बजट का लगभग 5 प्रतिशत राशि अबंडा में रखी जाती है। इस वित्तीय वर्ष में 78 अरब बजट अबंडा था, जबकि आगामी वर्ष के लिए 90 अरब आवंटित किया गया है। पूर्व सचिव के अनुसार राजनेता अपनी योजनाओं को बजट में शामिल करवाने के लिए तथा पर्याप्त अध्ययन न होने के कारण शीर्षक नहीं भेद पाते इस कारण अबंडा बजट रखे जाते हैं।

अबंडा बजट अधिक रखनें को वित्तीय अनुशासन के हिसाब से गलत माना जाता है। एक अन्य पूर्व सहसचिव के अनुसार अबंडा बजट कहाँ खर्च होगा पता नहीं चलता, न कार्यक्रम बनते हैं और न ही लागत का हिसाब होता है।

डीपीआर नहीं बनी परियोजनाओं के बजट अबंडा में रखे जाते हैं और आगे जरूरत के मुताबिक विभिन्न खर्च शीर्षकों से अन्य मंत्रालयों को वितरित किया जाता है।

इस बार वित्त मंत्रालय ने सबसे बड़ा अबंडा बजट रखा है। आगामी आर्थिक वर्ष के व्यय अनुमान विवरण (लाल किताब) के अनुसार वित्त मंत्रालय ने विभिन्न शीर्षकों में 90 अरब 30 करोड़ 95 लाख बजट रखे हैं।

यह अबंडा बजट चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान से भी बड़ा है। संशोधित अनुमान के अनुसार चालू वर्ष में 8 अरब 77 करोड़ 71 लाख रुपये खर्च होने की अपेक्षा है।

इस बार संसद में विपक्ष की आवाज कमजोर है। पर कुछ सत्तारूढ़ दल के सदस्य जैसे बदनकुमार भंडारी ने भी अबंडा में रखे गए बड़े बजट को पारदर्शिता पर सवाल उठाने वाला बताया है।

संसद में प्रश्नों के उत्तर में वित्त मंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उन्होंने पारंपरिक उत्तर देते हुए आकस्मिकता और नए मंत्रालयों में विस्तृत कार्यक्रम तैयार न होने के कारण ज्यादा राशि अबंडा में रखनी पड़ी दलील दी।

मंत्रियों ने सांसदों को कहा है: “यदि कोई कार्यक्रम छूट गया हो तो मंत्रालय आएं, उसे संबोधित किया जाएगा।” पूर्वाधार विकास मंत्री सुनिल लम्साल ने यह बात कई बार दोहराई। वित्त मंत्री वाग्ले ने भी सांसदों को संबोधित करने का आश्वासन दिया है।

इससे स्पष्ट होता है कि सरकार पर्याप्त राशि अबंडा बजट में रखकर स्वेच्छा से योजना लागू करने की स्थिति में है, जो राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एवं सांसद डॉ. पुष्पराज कँडेल की भी राय है। उन्होंने कहा, “वित्त मंत्रालय अकेले 8 खरब के करीब बजट खर्च कर रहा है, और अतिरिक्त 90 अरब अबंडा बजट भी है। यह प्रवृत्ति बजट को स्वार्थानुसार खर्च करने की कोशिश है।”

वित्त मंत्रालय अबंडा बजट कहां खर्च करता है?

लाल किताब के अनुसार वित्त मंत्रालय ने विभिन्न मदों में आवंटित बजट से प्रमुख रूप से खास व्यक्तियों के भ्रमण खर्च के लिए 10 करोड़ रुपये रखे हैं, जबकि चालू वर्ष में ऐसा खर्च 7 करोड़ रुपये था।

प्रतिनिधि मंडल भ्रमण और स्वागत खर्च में 17 करोड़ रुपये आवंटित हैं। बड़े मुआवज़े के लिए 8 अरब रुपये का बजट रखा गया है। कस्टम वापसी के लिए 20 करोड़ अलग रखे गए हैं।

आकस्मिक प्रशासन के लिए 38 अरब 1 करोड़ रुपये बजट रखा गया है, जिसे मंत्रालय अपने इच्छानुसार खर्च कर सकता है। आपदा, राहत और पुनर्स्थापन के लिए 18 अरब 79 करोड़ आवंटित हैं।

विकास कार्यक्रमों के लिए 19 अरब 23 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो वित्त मंत्रालय अपने अपने विवेक से खर्च कर सकता है। यह राशि पूंजीगत खर्च में भी जोड़ी जा सकती है।

पूंजीगत अधूरे परियोजनाओं के लिए केवल 4 अरब रुपये रखे गए हैं। पिछले वर्ष वित्त मंत्रालय ने गंडकी आर्थिक त्रिभुज परियोजना को अबंडा में रखा था, लेकिन चालू और आगामी वर्ष में इसका बजट जारी नहीं रहा।

संघीय सरकार ने अबंडा बजट के माध्यम से खर्च प्रवृत्ति को स्थापित किया है, जबकि प्रदेश और स्थानीय सरकारें भी इसे अपना रही हैं। महालेख की 63वीं रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय सरकारें हर वर्ष 6 अरब रुपये से अधिक अबंडा बजट रखकर खर्च कर रही हैं। महालेख यह प्रवृत्ति रोकने का सुझाव दे रहा है।

राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष कँडेल ने कहा कि बड़े अबंडा बजट से स्वार्थानुसार खर्च की प्रवृत्ति पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

वित्त मंत्रालय के पूर्व सचिव का कहना है कि अबंडा में रखे गए बजट का जथाभावी और अपारदर्शी खर्च होना सही नहीं है।

उन्होंने कहा, “संसद में शीर्षक खोलकर बजट आवंटन विवरण प्रस्तुत करना अच्छा होता है। अबंडा बजट को कम करना चाहिए। बिना अध्ययन के परियोजनाओं को अबंडा में रखने की प्रवृत्ति को कम करना होगा, लेकिन अबंडा बजट खर्च भी प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। इसलिए बजट को भ्रष्टाचार नहीं मानना चाहिए।”

ब्राजिल की जर्सी इस बार क्यों खास है?

अधिकांश लोगों के लिए ब्राजिल की जर्सी सुनते ही पीला रंग, हरे किनारों और मैदान पर दौड़ते खिलाड़ी की तस्वीर दिमाग में आती है। वह जर्सी हमेशा भावनाओं, पहचान और फुटबॉल के जादू से जुड़ी होती है। ब्राजिल ने फीफा विश्व कप 2026 की तैयारी में अपने खिलाड़ियों की जर्सी के भीतर जीपीएस ट्रैकिंग और सेंसर्स से लैस स्मार्ट वेस्ट को एक रणनीतिक हथियार बना लिया है। ये स्मार्ट वेस्ट खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति, थकान के स्तर और मैदान की गतिविधियों का वास्तविक समय डेटा प्रदान करते हैं, जिससे कोच वैज्ञानिक निर्णय ले सकते हैं। विभिन्न क्लबों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन आंकड़ों को एकीकृत करते हुए ब्राजिल ने अपने फुटबॉल ढांचे में तकनीकी उपयोग को और गहरा किया है और भविष्य के फुटबॉल को अपनाया है।

जब ब्राजिल की जर्सी की बात होती है, तो पीले रंग, हरे किनारों और मैदान पर दौड़ते खिलाड़ी की छवि सबसे पहले दिमाग में आती है। वह जर्सी फुटबॉल प्रेमियों के लिए भावना और पहचान का प्रतीक है। लेकिन अब वह पुराना चित्र ही काफी नहीं है, अब उसमें स्मार्ट ट्रैकर भी जोड़ दिया गया है। फीफा विश्व कप 2026 में उतरते समय ब्राजिल के खिलाड़ी जान पाएंगे कि उन्हें जर्सी के साथ जीपीएस ट्रैकिंग वेस्ट भी पहननी होगी। यह वेस्ट खिलाड़ी के शरीर की लगातार निगरानी करता है; कितनी दूरी दौड़ी, कितनी गति थी, कब थकान हुई, शरीर की सीमा कहीं पार तो नहीं हुई जैसे सभी आंकड़े जमा करता है। ‘स्मार्ट बॉडी’ इस वेस्ट में जीपीएस ट्रैकर के साथ-साथ मोशन सेंसर, एक्सेलेरोमीटर और हृदय गति मापने वाले उपकरण होते हैं। ये उपकरण खिलाड़ी की गतिविधियों में बाधा डाले बिना समय-समय पर डेटा संग्रह करते हैं।

ब्राजिल के खेल विज्ञान प्रमुख गुइल्हेर्मे पासोस कहते हैं, ‘हमने स्मार्ट वेस्ट को विश्व कप सफलता से जोड़कर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपकरण बनाया है।’ प्रदर्शन विशेषज्ञों के अनुसार कोच केवल थकान देखकर नहीं बल्कि स्थान एवं निर्णय क्षमता के आधार पर भी खिलाड़ी का आकलन करते हैं। डेटा के उपयोग से गलत तरीके से कम प्रदर्शन दिखने का जोखिम होता है, लेकिन सही इस्तेमाल से यह सही समय पर सही खिलाड़ी चुनने में मददगार बनता है। क्लब और राष्ट्रीय टीम के बीच डेटा नेटवर्क ब्राजिल के कई खिलाड़ी दुनिया के विभिन्न क्लबों और लीगों में खेलते हैं — स्पेन, इंग्लैंड, इटली, फ्रांस आदि। राष्ट्रीय टीम के साथ उनका समय सालभर सीमित रहता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मैचों से कुछ दिन पहले ही सभी एक साथ मिल पाते हैं।

फिर सवाल उठता है, यदि यह तकनीक इतनी उपयोगी है तो सभी देश इसे पूरी तरह क्यों नहीं अपनाते? जीपीएस ट्रैकिंग और स्मार्ट वेस्ट फुटबॉल में नई तकनीक नहीं, लेकिन इसके उपयोग की गहराई भिन्न है। कुछ देश और क्लबों के लिए यह वैज्ञानिक आधार की तरह उपयोगी है, जबकि कुछ के लिए यह अत्यधिक नियंत्रण और डेटा पर निर्भरता जैसी लगती है। फुटबॉल में पारंपरिक सोच अभी भी प्रबल है, जहाँ खेल को अंतःप्रेरणा, रचनात्मकता और मानवीय निर्णय पर आधारित माना जाता है।

ब्राजिल की पीली जर्सी हमेशा से नहीं थी। 1950 के विश्व कप फाइनल में घरेलू मैदान मर्कानास्टेडियम में उरुग्वे से अप्रत्याशित हार के बाद ब्राजिल में बड़ा शोक छाया। उस टीम ने सफेद जर्सी पहनी थी और उस हार को ‘माराकानाज़’ कहा जाता है। इसके बाद सफेद जर्सी छोड़ कर नई राष्ट्रीय पहचान बनाई गई। देशव्यापी प्रतियोगिता के आधार पर पीली जर्सी, हरे किनारे और नीली शॉर्ट्स वाला नया खेल वस्त्र चुना गया। इसी जर्सी ने पेले, रोमाल्डो व रोनाल्डो जैसे महान खिलाड़ियों को सफलता की कहानी दी। समय के साथ खेल शैली, प्रशिक्षण और खेल विज्ञान में बदलाव आए। अब उस पीली जर्सी के भीतर जीपीएस ट्रैकर, सेंसर्स और डेटा विश्लेषण तकनीक छिपी है।

‘असामान्य जुर्माना भी ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर असर नहीं करता’

समाचार सारांश

संपादकीय द्वारा पुनरावलोकित।

  • काठमांडू उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय ने १ असार से एक माह तक ट्रैफिक जागरूकता महाअभियान चलाया है, जिसका लक्ष्य सड़क दुर्घटनाएं कम करना है।
  • ट्रैफिक प्रमुख एसएसपी सुरेश काफ्ले ने सड़क दुर्घटना रोकने के लिए तकनीकी आधारित ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क उपयोगकर्ताओं के अनुशासन की आवश्यकता बताई।
  • उपत्यका ट्रैफिक पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण करने वाली मोटरसाइकिलों और ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों पर कार्रवाई तेज कर दी है।

नेपाल में जनधन का बड़ा नुकसान होने का एक प्रमुख कारण सड़क दुर्घटनाएं हैं। नेपाल विश्व में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं वाला देश रहा है। पिछले दशक में 24 हजार से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं। पिछले पाँच वर्षों में अकेले 2,661 पैदल यात्री अपने प्राण खो चुके हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार 5 से 29 वर्ष की उम्र के बच्चों और युवाओं की मृत्यु का प्रमुख कारण सड़क दुर्घटनाओं में हुए घातक चोटे हैं। विश्वव्यापी सड़क दुर्घटना मृत्यु का 92 प्रतिशत हिस्सा निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होता है।

नेपाल में रोजाना औसतन सात लोगों की जान ले लेने वाली सड़क दुर्घटनाएं केवल मानव क्षति ही नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी गंभीर प्रभाव डालती हैं। अधिकतर लोग दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी चालक को देते हैं, लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए सड़क, वाहन और उपयोगकर्ता (चालक, यात्री, पैदल यात्री) सभी पक्ष जिम्मेदार होते हैं।

इन तीनों पक्षों के सभी संबंधित को सतर्क रहने और आवश्यक कार्रवाई के लिए सरकार जिम्मेदार है। सुरक्षित यात्रा के लिए आवश्यक कानून, उनका प्रभावी संचालन, सुरक्षित वाहन व सड़क, जिम्मेदार उपयोगकर्ता तथा दुर्घटना के बाद प्रभावी उपचार और पुनर्वास अनिवार्य हैं।

काठमांडू उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय, रामशाहपथ ने १ असार से एक महीने तक ट्रैफिक जागरूकता महाअभियान चलाया है। उपत्यका में ट्रैफिक नियम उल्लंघन और सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण लाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है।

जहां पैदल यात्रियों का जेब्रा क्रॉसिंग से गुजरते हुए भी मौत का खतरा रहता है, वहीं बढ़ते यातायात दबाव, ट्रैफिक संकेतों की कमी और अवसंरचना के अभाव ने सड़कों पर चालक स्थिति को उलझन भरा बना दिया है। इस विषय पर उपत्यका ट्रैफिक पुलिस प्रमुख एसएसपी सुरेश काफ्ले से हुई बातचीत का संपादित अंश प्रस्तुत है।

आपने हाल ही में जिम्मेदारी संभाली है, इससे पहले और बाद में ट्रैफिक स्थिति को लेकर आपकी क्या अनुभूति है?

मैं काठमांडू का निवासी हूं, इसलिए पहले से यहां की ट्रैफिक समस्या पता थी। लेकिन जिम्मेदारी लेने के बाद समस्याएं और स्पष्ट रूप में दिख रही हैं। वर्तमान में विभिन्न विभागों से मिलकर समाधान की तलाश में हैं।

अभियान में कौन-कौन से कार्यक्रम शामिल हैं?

यह अभियान सड़क उपयोगकर्ताओं को रोज़ाना होने वाली दुर्घटनाओं और उनके कारणों की जानकारी देने के लिए है। हम प्रत्येक नागरिक को यह समझा रहे हैं कि कैसे निर्धारित जगहों पर क्रॉसिंग करें, आकाश-सेतु पुल और जेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग करें और लेन अनुशासन का पालन करें।

पहले भी ऐसे अभियान हुए हैं, फिर भी नियम उल्लंघन जारी है। इसका क्या कारण है?

पहले के अधिकारियों के प्रयास सराहनीय थे। आँकड़े बताते हैं कि मरने और घायल होने वालों की संख्या में कुछ कमी आई है। हमारी आकांक्षा शून्य है। आने वाले दिनों में हमें तकनीक की मदद और नागरिकों की भागीदारी जरूरी है।

काठमांडू उपत्यका की मुख्य ट्रैफिक समस्या क्या है?

सबसे बड़ी समस्या विविध प्रकार के वाहनों का बिना नियम के चलना है। दोपहिया, चारपहिया एवं अन्य वाहन समय-स्थान अनुसार नहीं चलते, लेन अनुशासन का अभाव है और सड़क उपयोगकर्ताओं का अनुशासनहीन व्यवहार मुख्य बाधाएं हैं।

वाहनों की स्थिति का निरीक्षण आप स्वयं करते हैं?

यह यातायात विभाग की जिम्मेदारी है। हमारे पास वाहन परीक्षण के लिए सीमित तकनीक है लेकिन समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं।

१५९० ट्रैफिक पुलिस होने के बावजूद समस्या क्यों है?

केवल भौतिक उपस्थिति से समाधान नहीं होता, तकनीक उपयोग जरूरी है। हम ‘फेसलेस ट्रैफिकिंग’ यानी तकनीक आधारित निगरानी पर जोर दे रहे हैं। इससे पुलिसकर्मियों का जोखिम भी कम होगा।

ट्रैफिक पुलिस के लिए क्या चुनौतियां हैं?

उन पर अत्यधिक काम का दबाव और जोखिम पाया जाता है। धूल, धुआं, ध्वनि प्रदूषण जैसी समस्याएं उन्हें प्रभावित करती हैं। हमने उनकी सुरक्षा के लिए मास्क, चश्मा जैसे उपकरण उपलब्ध कराए हैं।

फेसलेस ट्रैफिकिंग के लिए कौन-कौन सी तकनीक इस्तेमाल की जा रही है?

सरकार तकनीक आधारित निगरानी को बढ़ावा दे रही है। हमने एआई सम्मिलित कैमरे और नंबर प्लेट पढ़ने वाले एनपीआर कैमरे लगाए हैं, जो नियम उल्लंघन करने वालों की सहज निगरानी और कार्रवाई में मदद करते हैं।

थापाथली में ट्रैफिक पुलिस के बिना भी प्रबंधन कैसे संभव है?

कुछ चौराहों पर पूरी तरह से तकनीकी निगरानी की व्यवस्था है। कंट्रोल रूम से टीम निगरानी करती है और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई होती है।

सभामुख की गाड़ी द्वारा नियम उल्लंघन पर जुर्माना लगाए जाने की खबरें सार्वजनिक हैं। ऐसी कार्रवाई कितनी प्रभावी है?

हम स्टंट प्रदर्शन नहीं करते। सड़क सुरक्षा सभी के लिए जरूरी है। नियम उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई होती है। सीसीटीवी निरंतर निगरानी करता है और उचित कार्रवाई होती रहती है।

नशे में गाड़ी चलाने की समस्या बढ़ रही है, खासकर स्कूल बस चालकों में?

यह सामाजिक बिमारी की तरह फैल रही है। हम लम्बी दूरी, एम्बुलेंस, कचरा वाहन, और स्कूल बस चालकों की सैम्पल जांच कर रहे हैं। कई लोगोंपर कार्रवाई हो चुकी है।

ट्रैफिक पुलिस और सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच हो रहे अभद्र व्यवहार को कैसे रोका जाएगा?

हमने आचार संहिता लागू की है जिसमें अनावश्यक प्रश्न न पूछना, हाथ मिलाने की परंपरा रोकना, सभ्य और संयमित व्यवहार अनिवार्य है। इससे दुर्व्यवहार कम होगा।

जुर्माने को ५० हजार तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। क्या इससे नियम उल्लंघन में कमी आएगी?

जुर्माना ही एकमात्र समाधान नहीं है। सड़क नियम उल्लंघन से जीवन जोखिम में पड़ता है। जुर्माना इतना होना चाहिए कि लोग सचेत हों। जितना ज्यादा जुर्माना होगा, नियम पालन की मानसिकता बढ़ेगी।

अगर जुर्माना बढ़ा भी दिया गया तो भी नियम उल्लंघन हो रहा है, इसका क्या समाधान है?

जुर्माना के बिना भी सभी को नियम पालन की जागरूकता होनी चाहिए। सड़क पर मनुष्य का जीवन अनमोल है, धन से भी ज्यादा। इसलिए सभी से आग्रह है कि नियमों का पालन करें।

सड़क अवसंरचना और ट्रैफिक संकेतों की स्थिति क्या है?

अवसंरचना में सुधार की प्रक्रिया जारी है। हम जुर्माने को नियम पालन के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण मानते हैं। जल्द ही अवसंरचना सुधारना और नियम पालन को प्रभावी बनाना अनिवार्य होगा।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या योजना है?

अधिकांश दुर्घटनाएं पैदल यात्रियों की असावधानी के कारण होती हैं। हमने अभियान के दौरान आम जनता को सड़क नियम पालन को लेकर जागरूक किया है। पैदल यात्रियों को भी नियमों का पालन करना होगा।

अधिक आवाज में मोटरसाइकिल चलाने की समस्या बढ़ी है, इसे कैसे नियंत्रित किया जा रहा है?

हमें इस विषय में बहुत शिकायतें मिलती हैं। ट्रैफिक पुलिस ने उन मोटरसाइकिलों को कड़ी कार्रवाई के तहत लिया है। लगभग डेढ़ सौ मोटरसाइकिलों पर कार्रवाई हुई है। आवाज कम करने और नियम पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी हैं।

अंत में नागरिकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

सड़क हम सबकी साझा संपत्ति है। सभी को नियमों का पालन करना होगा। पैदल यात्रियों को भी हमेशा नियमों के अनुसार और दाहिनी तरफ चलना चाहिए, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

सड़क सुरक्षा श्रृंखला-१

सड़क सुरक्षा श्रृंखला-२