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लेखक: space4knews

बसन्तपुर–गुफापोखरी–फुङलिङ सड़क का उन्नयन न होने से यात्रा जोखिमपूर्ण बनी

मदन भंडारी मार्ग की सड़क की खराब स्थिति के कारण यात्री, ड्राइवर और स्थानीय व्यवसायी दैनिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। खराब सड़क के चलते किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुँचाने में समस्या हो रही है, जिससे परिवहन लागत भी बढ़ गई है। तेह्रथुम जिला समन्वय समिति ने संबंधित अधिकारियों को सड़क सुधार की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। ३ वैशाख, तेह्रथुम। पूर्वी पहाड़ के हरे-भरे डोंगर, गुराँस से ढके जंगल, कुहासे से बंधे गुफापोखरी और हिमालयी दृश्य से सुसज्जित ताप्लेजुंग का फुङलिङ — ये सभी स्थान मदन भंडारी मार्ग से जुड़े हैं, जो यात्रियों का सपना है। इस नाम से विकास और गौरव का प्रतीक लगने वाला सड़क वर्तमान में यात्रियों के लिए पीड़ा, परेशानी और जोखिम का कारण बन गया है। बसन्तपुर बाजार के आरआर गार्डेन से गाड़ी ऊँचाई की ओर बढ़ने पर सड़क से धूल का गुबार उठने लगता है। कुछ किलोमीटर आगे खड्डे और गड्ढे गाड़ी को हिलाते हैं, जिससे यात्री सीट पकड़ने को मजबूर होते हैं और ड्राइवरों पर थकान और तनाव साफ दिखता है। सालों से सड़क का उन्नयन न होने से यात्री अपने गंतव्य की बजाय परेशानियों में फंसे हुए हैं। सर्दियों में सड़क कई जगहों पर धूल की चादर से ढक जाती है, जिससे वापसी पर आस-पास के घरों, दुकानों और पेड़ों पर धूल जम जाती है। बारिश के बाद सड़क की चिकनाहट से वाहन फिसलने और रुकने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब गुणवत्ता वाली सोलिंग ने समस्या और बढ़ा दी है।

इटहरी से दोस्तों के साथ गुफापोखरी घूमने आई एलिसा कटुवाल ने यात्रा का आनंद लेने की योजना बनाई थी। सोशल मीडिया पर देखे खूबसूरत दृश्यों ने उन्हें इस जगह आने के लिए प्रेरित किया था, लेकिन सड़क की स्थिति देखकर उन्हें बीच में ही वापसी करनी पड़ी। ‘ऐसी सड़क पर यात्रा संभव नहीं है,’ उन्होंने निराशा जताई, ‘प्राकृतिक सौंदर्य अत्यंत मनमोहक है, पर खराब सड़क ने यात्रा की खुशी कम कर दी।’

यह मार्ग न केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि रोजाना गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों और परिवहन व्यवसायियों के लिए भी समस्या बन चुका है। बसन्तपुर–ताप्लेजुंग मार्ग पर वर्षों से वाहन चला रहे ड्राइवर विनोद बस्नेत के अनुसार, सड़क की असंतोषजनक स्थिति के कारण आमदनी के मुकाबले खर्च ज्यादा हो गया है। ‘वाहन के पुर्जे बार-बार खराब होते हैं,’ वे कहते हैं, ‘बारिश में गाड़ी रोकनी पड़ती है, और वर्षा ऋतु में सड़क खोलने या बंद होने की जानकारी मिलना मुश्किल होता है।’ सड़क के संकीर्ण मोड़, टूटे हिस्से और कीचड़ से भरे तीव्र चढ़ाव दुर्घटना का खतरा बढ़ाते हैं। कई स्थानों पर दो गाड़ियां एक-दूसरे को पार करना मुश्किल होता है जिससे यात्री लंबा जाम झेलते हैं।

हालांकि सड़क की स्थिति खराब है, यह मार्ग पूर्वी नेपाल की प्रमुख पर्यटन और आर्थिक जीवनरेखा भी है। तेह्रथुम और ताप्लेजुंग को जोड़ने वाला यह रूट न केवल लोगों को जोड़ता है बल्कि संभावनाओं को भी सेतुबंध करता है। तीनजुरे–मिल्के–जलजले क्षेत्र (टिएमजे), गुफापोखरी, साँगु, मेन्छ्यायेम डाँडा, पाथीभरा, पाँचपोखरी, मंगलबारे और फुङलिङ जैसे पर्यटन स्थल इस मार्ग से जुड़े हैं, जहां हजारों पर्यटक यात्रा करते हैं। बसंत ऋतु में गुराँस के खिलने के वक्त यह क्षेत्र एक रंगीन बगान की तरह नजर आता है। स्थानीय और बाहरी पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने आते हैं, लेकिन सड़क की कमजोर हालत के कारण कई पर्यटक बीच में ही लौटने को मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय होटल व्यवसायी बताते हैं, ‘पर्यटक आते हैं, लेकिन ऐसा रास्ता देखकर दोबारा आने की इच्छा कम होती है।’

सड़क की खराबी का सबसे बड़ा प्रभाव किसानों पर पड़ा है। यहां उत्पादन होने वाले आलू, अदरक, सब्जी, दूध और अन्य कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना कठिन हो गया है। बढ़े परिवहन खर्च के कारण किसानों की आय घट रही है और कई बार उत्पादन समय पर बाजार तक नहीं पहुंचने के कारण नुकसान भी होता है, ऐसा लाक्पा शेर्पा ने बताया। वर्षों से सड़क उन्नयन का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। कुछ मामूली मरम्मत हुई हैं, लेकिन वे टिकाऊ नहीं हैं, स्थानीय लोग यह कहते हैं।

तेह्रथुम जिला समन्वय समिति के उपाध्यक्ष श्री कार्की के अनुसार, सड़क की स्थिति की सूचना संबंधित विभागों को दी गई है। ‘इस मार्ग का सुधार ना केवल आवश्यक है बल्कि अनिवार्य हो गया है,’ उन्होंने कहा, ‘सड़क के उन्नयन के बिना पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का विकास संभव नहीं है।’ स्थानीय युवा भी सड़क सुधार की मांग कर रहे हैं। यदि यह सड़क कालोपत्रे और व्यवस्थित बनती है, तो पूर्वी नेपाल का पर्यटन क्षेत्र नई ऊँचाइयों को छू सकता है। मदन भंडारी मार्ग सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि पूर्वी पहाड़ का भविष्य है। इस मार्ग से पर्यटक हिमालयी दृश्य देखने पहुंचते हैं, किसान अपनी उपज बाजार तक पहुंचाते हैं, मरीज उपचार के लिए शहर जाते हैं और विद्यार्थी पढ़ाई के लिए यात्रा करते हैं। लेकिन वर्तमान में यह मार्ग विकास की अनुभूति के बजाय निराशा और कष्ट दे रहा है।

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण यह क्षेत्र अभी भी संभावनाओं से भरा है, लेकिन इन संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने के लिए सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर सरकार को तत्काल ध्यान देना होगा।

लुम्बिनी प्रदेश सरकार द्वारा बजट खर्च में दिखाई दी कमज़ोरी

३ जेठ, सिद्धार्थनगर (भैरहवा)। चालू आर्थिक वर्ष समाप्ति में अभी दो माह शेष होने के बावजूद लुम्बिनी प्रदेश सरकार बजट क्रियान्वयन में धीमी गति से प्रगति कर रही है। योजना तथा विकास निर्माण का प्रभावकारी संचलन न होने के कारण प्रदेश सरकार ने अपने कुल खर्च की प्रगति ४० प्रतिशत से कम बनाए रखी है। अधिकांश मंत्रालयों ने आवंटित बजट का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं किया है, जो आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है।

प्रदेश सरकार ने चालू आर्थिक वर्ष के लिए पुँजीगत पक्ष हेतु २३ अरब ४७ करोड़ १४ लाख ६५ हजार ५९२ रुपये और चालू पक्ष हेतु १५ अरब ४३ करोड़ ८५ लाख ३५ हजार सहित कुल ३८ अरब ८१ करोड़ रुपये बजट विनियोजित किया था। वर्ष के १० महीने पूर्ण होने तक कुल बजट का मात्र ३९.९१ प्रतिशत ही खर्च हो पाया है। विशेषकर विकास सम्बंधित बजट खर्च में कमी देखी जा रही है।

प्रदेश लेखा नियंत्रक कार्यालय के अनुसार वैशाख मसांत तक चालू और पुँजीगत खर्च मिलाकर प्रदेश सरकार ने १३ अरब ७९ करोड़ ९१ लाख ८५ हजार ९४२ रुपये खर्च किए हैं। मुख्यमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय ने १० महीनों में मात्र २६.६६ प्रतिशत, अर्थात् १३ करोड़ ३७ लाख ८३ हजार रुपये खर्च किए हैं। युवा तथा खेलकूद मन्त्रालय ने ६ करोड़ ८ लाख ६१ हजार रुपये बजट में से केवल १६.३४ प्रतिशत खर्च किया है।

नेपाली सेनाले सार्वजनिक गर्‍यो र्‍याप गीत – Online Khabar

नेपाली सेनाले र्‍याप गीत ‘रेन्जर’ सार्वजनिक किया

नेपाली सेनाले आफ्नो आधिकारिक युट्युब च्यानलबाट ‘रेन्जर’ नामक र्‍याप गीत सार्वजनिक गरेको छ। ‘रेन्जर’ शब्द सेनामा विशेष तालिमप्राप्त लडाकूहरूलाई जनाउँछ। तीन दिन अघि सार्वजनिक भएको यो गीतलाई आज मध्याह्नसम्म २६ हजारभन्दा बढी दर्शकले हेरिसकेका छन्। गीतका शब्दहरू प्रताप मगरले रचेका छन्। बासुदेव धिमालले मुख्य निर्देशकको भूमिका निभाएका छन् भने सिद्धार्थ मोक्तान सहायक निर्देशकका रूपमा काम गरिरहेका छन्।

चितवन में जंगली कुकुरमुत्ता खाने से एक और की मृत्यु

चितवन के इच्छाकामना गाउँपालिका-१ कुलबांग में जंगली कुकुरमुत्ता खाने से दो लोगों की मृत्यु हो गई है। मृतकों में ९ वर्षीया नमुना चेपांग और ११ वर्ष के संजय चेपांग शामिल हैं। १३ वर्षीया मनिता चेपांग की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उनका भरतपुर अस्पताल में इलाज चल रहा है। ३ जेठ, चितवन।

चितवन में जंगली कुकुरमुत्ता खाने से मरने वालों की संख्या दो हो गई है। इच्छाकामना गाउँपालिका-१ कुलबांग के दो लोगों की मौत हुई है। मृतकों में ९ वर्षीया नमुना चेपांग और ११ वर्ष के संजय चेपांग शामिल हैं। जिला प्रहरी कार्यालय के प्रहरी नायब उपरीक्षक रविंद्र खनाल के अनुसार, नमुना की १ जेठ को मृत्यु हुई, जबकि संजय का शनिवार रात उपचार के दौरान निधन हो गया।

२९ वैशाख को श्यामबहादुर चेपांग के पाँच सदस्यीय परिवार ने जंगली कुकुरमुत्ता खाया था। इनमें से तीन लोग १ जेठ को बीमार होकर भरतपुर अस्पताल इलाज के लिए ले जाए गए। उपचार के दौरान नमुना की मृत्यु हो गई। १३ वर्षीया मनिता चेपांग वर्तमान में भरतपुर अस्पताल में उपचाराधीन हैं। पुलिस ने बताया कि बीमार मनिता की स्थिति गंभीर है।

इबोला प्रकोप: डब्लूएचओ ने घोषित किया ‘वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल’

बिरामी

तस्बिर स्रोत, Reuters

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने प्रजातान्त्रिक गणतन्त्र कांगो के पूर्वी इटुरी प्रांत में फैले इबोला प्रकोप को वैश्विक चिंता का विषय मानते हुए “वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल” घोषित किया है।

अब तक २४६ संदिग्ध संक्रमित पाए गए हैं और ८० लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि डब्लूएचओ का कहना है कि यह प्रकोप अभी महामारी के स्तर तक नहीं पहुंचा है।

डब्लूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनॉम घेब्रेयसस ने कहा, “संक्रमितों की वास्तविक संख्या और प्रकोप के फैलाव क्षेत्र को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है।”

डब्लूएचओ ने बताया कि वर्तमान इबोला स्ट्रेन बुंडिबुग्यो नामक वायरस के कारण है और इसके लिए कोई दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।

प्रयोगशाला से पुष्टि हुए आठ संक्रमितों के अलावा इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया, सुनखानी के मोंगवालू और र्वाम्पारा नगर सहित अन्य जगहों पर संदिग्ध मरीजों और मौतों की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं।

विदेशीको गतिविधि निगरानी गर्न सीडीओको नेतृत्वमा समिति, डिजिटल डिभाइस पनि नियन्त्रणमा लिन सक्ने

विदेशी गतिविधि निगरानी के लिए CDO के नेतृत्व में समिति का गठन, डिजिटल उपकरण नियंत्रण की व्यवस्था

प्रस्तावित अध्यागमन विधेयक २०८३ में प्रत्येक जिले में विदेशी निगरानी के लिए समिति गठन करने का प्रावधान शामिल किया गया है। इस विधेयक में कूटनीतिक, पर्यटक, अध्ययन, कार्य, व्यावसायिक, प्रेस, आवासीय, गैरआवासीय नेपाली सहित विभिन्न प्रकार के वीज़ा स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं। साथ ही, विद्युत सामग्री की जांच और नियंत्रण के लिए महानिदेशक को अधिकार दिए गए हैं और वीज़ा आवेदन निजी संस्थाओं के माध्यम से कराने की व्यवस्था भी की गई है। ३ जेठ, काठमांडू।

प्रस्तावित अध्यागमन विधेयक २०८३ में कई नई व्यवस्थाएँ जोड़ी गई हैं। यह विधेयक सुझाव के लिए प्रस्तुत किया गया है और अध्यागमन ऐन २०४९ से भिन्न एवं अतिरिक्त विषय प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से, नेपाल प्रवेश करने वाले विदेशी नागरिकों की निगरानी के लिए समिति की व्यवस्था की गई है। विधेयक की धारा १६ में विदेशी निगरानी एवं पर्यवेक्षण का उल्लेख है।

विदेशी गतिविधियों की निगरानी हेतु प्रत्येक जिले में प्रमुख जिल्ला अधिकारी (CDO) के नेतृत्व में निगरानी एवं पर्यवेक्षण समिति गठित करने का प्रावधान है। इस समिति में पुलिस, सशस्त्र पुलिस, राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग के जिला प्रमुख, जिले के पर्यटन कार्यालय के प्रमुख और श्रम कार्यालय के जिला स्तर प्रमुख भी शामिल होंगे।

इसी तरह, वीज़ा के नए प्रकारों के बारे में भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है। अध्यागमन ऐन २०४९ में वीज़ा के प्रकार नियमों के अंतर्गत थे, जबकि २०८३ के विधेयक में कूटनीतिक, पर्यटक, अध्ययन, कार्य, व्यावसायिक, प्रेस, आवासीय, गैरआवासीय नेपाली, पर्वतारोहण, चलचित्र, खेलकूद और मेडिकल वीज़ा जैसे विभिन्न प्रकार विस्तृत रूप से सम्मिलित हैं। विदेशी निवास विवरण रजिस्टर करने का नया प्रावधान भी विधेयक में है। नेपाल आने वाले विदेशी को अपने निवास एवं संपर्क विवरण अध्यागमन जाँच स्थल पर पंजीकृत करना अनिवार्य होगा।

होटल, विश्वविद्यालय या अस्पतालों को अपने परिसर में निवासरत विदेशी व्यक्तियों का विवरण अध्यागमन विभाग की प्रणाली में उपलब्ध कराना होगा। कुछ असामान्य परिस्थितियों में वीज़ा शुल्क में छूट देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जैसे मार्ग बंद होना, कर्फ्यू लगना, महामारी फैलना, या दुर्घटना से अस्पताल में भर्ती होना।

वायुसेवा कंपनियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की गई है। नेपाल में प्रवेश पर प्रतिबंधित विदेशी को विमान द्वारा लाने पर संबंधित वायुसेवा कंपनी को अपने खर्च पर उसे वापस ले जाना होगा। गैरआवासीय नेपाली को विशेष सुविधा देते हुए उन्हें और उनके परिवार को १० वर्ष तक नि:शुल्क वीज़ा प्रदान करने का प्रावधान भी विधेयक में है।

नेपाली नागरिकों को विदेश प्रस्थान पर रोक लगाने के विषय में भी विधेयक में स्पष्टता है। अध्यागमन ऐन २०४९ की तुलना में २०८३ का यह विधेयक यह व्यापक रूप से स्पष्ट करता है कि किन परिस्थितियों में नेपाली नागरिकों को विदेश जाने से रोका जा सकता है, जिसमें अदालत का आदेश, आपराधिक जांच, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा जैसे विषय शामिल हैं।

डिजिटल उपकरण नियंत्रण से संबंधित व्यवस्था भी विधेयक में सम्मिलित है। विद्युत सामग्री की जांच एवं नियंत्रण के लिए महानिदेशक या नामित कर्मचारी को विदेशी के पास केवल पासपोर्ट ही नहीं, बल्कि अध्यागमन संबंधी सभी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और डेटा की जांच करने और नियंत्रण करने का अधिकार दिया गया है। विद्युत सामग्री से अभिप्राय सभी अध्यागमन से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डेटा हैं। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित निकाय पुलिस सहायता भी ले सकता है।

अध्यागमन विभाग को वीज़ा आवेदन और दस्तावेजों को संलग्न करने का काम कोई अनुमतिप्राप्त निजी संस्था या फर्म के माध्यम से कराने की नई व्यवस्था भी विधेयक में शामिल है।

सगरमाथा की चोटी पर मेस्सी की तस्वीर पहुंचाने वाले शेर्पा की इच्छा, मेस्सी से मिलकर उपहार देना चाहते हैं

सगरमाथा आरोही पेम्बा शेर्पा ने २०८२ वैशाख ३० गते पहली बार सगरमाथा की चुचुरो पर मेस्सी की तस्वीर ले जाकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। शेर्पा ने बताया कि वे मेस्सी से मिलकर सगरमाथा लेकर पहुँचे बैनर उन्हें भेंट के रूप में देना चाहते हैं।

३ जय, काठमांडू। सगरमाथा आरोही पेम्बा शेर्पा ने विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलर मेस्सी की तस्वीर विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर ले जाकर नया रिकॉर्ड बनाया है। मिर्गौला प्रत्यारोपण कराए ३८ वर्षीय शेर्पा २०८२ वैशाख ३० गते सगरमाथा चढ़ने में सफल हुए। वे मिर्गौला प्रत्यारोपण के बाद सगरमाथा चढ़ने वाले पहले व्यक्ति भी हैं। उसी दौरान उन्होंने विश्व के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर मेस्सी की तस्वीर सर्वोच्च शिखर तक ले गए।

विश्वकप २०२६ नजदीक आता देख और मेस्सी भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की तैयारी में हैं, तब तस्वीर सार्वजनिक करने का निर्णय लिया गया, उन्होंने बताया। सगरमाथा पर मेस्सी की तस्वीर पहुंचाने वाले वे पहले व्यक्ति हैं, यह उनका दावा है। उनका कहना है कि मेस्सी का जादुई खेल एवं विनम्र व्यक्तित्व ने किशोरावस्था से ही उनका ध्यान आकर्षित किया। कई बार उपाधि न मिलने पर भी मेस्सी की धैर्यवान बढ़त और साहस से उन्होंने जीवन में प्रेरणा ली है।

‘जब मेरे दोनों मिर्गौले खराब हो गए थे, तब मैं डायलिसिस पर निर्भर था और कई बार जीवन से हार मान चुका था,’ शेर्पा बताते हैं, ‘लेकिन मिर्गौला प्रत्यारोपण के बाद मुझे नई जिंदगी मिली और स्वस्थ होकर मैं सगरमाथा की चुचुरो तक पहुँचने में सफल हुआ।’ २०२२ के कतर विश्वकप में मेस्सी के नेतृत्व में अर्जेंटीना की जीत के समय, शेर्पा ने मिर्गौला प्रत्यारोपण कराए लगभग दो महीने ही हुए थे। मेस्सी का खुशी से हंसना और रोना टीवी पर देखने वाले शेर्पा के लिए यह मेस्सी के जीवन की सबसे बड़ी सफलता थी।

‘मैंने सोचा- वर्षों तक धैर्य रखकर मेस्सी विश्वकप जीत सकते हैं, तो मैं हिमाल चढ़ने में क्यों असफल रहूँ?’ शेर्पा कहते हैं, ‘उसी हौसले के साथ शरीर में अपने पिता का दिया मिर्गौला लेकर और हाथ में मेस्सी की फोटो वाला बैनर रखकर मैं सगरमाथा की चुचुरो तक पहुंचा।’ मेस्सी की विश्वकप ट्रॉफी चुमने की तस्वीर उन्होंने सगरमाथा के शिखर पर लेकर गए। वे मेस्सी से मिलकर यह बैनर उन्हें उपहार स्वरूप देना चाहते हैं। ‘मेरी एक इच्छा है कि मैं मेस्सी से सीधे मिलूं और आने वाले जन्मदिन पर यह ऐतिहासिक बैनर उन्हें भेंट दूं,’ उन्होंने कहा।

सोलुखुम्बु के दूधकोशी गाउँपालिका के स्थायी निवासी शेर्पा का २०७६ साल में दोनों मिर्गौले फेल होने का पता चला था। २०७९ कार्तिक २ गते भक्तपुर के शहीद धर्मभक्त प्रत्यारोपण केंद्र में उनका मिर्गौला प्रत्यारोपण किया गया। इसके डेढ साल बाद वे सगरमाथा आरोहण में सफल हुए।

परराष्ट्रमन्त्री का स्थानीय सरकारों से दीर्घकालीन योजना बनाने का आग्रह

परराष्ट्रमन्त्री शिशिर खनाल ने स्थानीय सरकारों को दीर्घकालीन योजना निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता जताई है। उन्होंने टोखा–छहरे सुरुङ मार्ग के विस्तार के दौरान वैकल्पिक मार्ग खोजने की जरूरत बताई और साङ्ला खोला करिडोर विकास संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए। ३ जेठ, काठमाडौं।

परराष्ट्रमन्त्री खनाल ने कहा है कि स्थानीय सरकारों को अल्पकालीन राजनीति से ऊपर उठकर दीर्घकालीन योजनाओं पर केंद्रित होना चाहिए। टोखा नगरपालिकाद्वारा आज आयोजित आर्थिक वर्ष २०८३/८४ के नीति, कार्यक्रम तथा बजट तर्जुमा के लिए सल्लाह सुझाव संग्रह कार्यक्रम में उन्होंने स्थानीय सरकार की दीर्घकालीन योजना निर्माण में भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर काम करने का समय आ गया है।

‘आगामी २०-२५ वर्षों के बाद आने वाली पीढ़ियाँ भी स्मरण कर सकें इसके लिए वर्तमान स्थानीय तह के जनप्रतिनिधियों के सामने इस प्रशंसनीय कार्य का अवसर है, इसलिए अल्पकालीन राजनीति की तुलना में दीर्घकालीन योजनाओं पर ध्यान देना आवश्यक है,’ मंत्री खनाल ने कहा। वे काठमाडौं क्षेत्र नं. ६ के सांसद भी हैं और उन्होंने टोखा के दक्षिणी क्षेत्र में घनघोर बस्तियों होने तथा उत्तरी क्षेत्र में खुली जमीन अभी भी उपलब्ध होने का उल्लेख करते हुए व्यवस्थित शहर निर्माण पर जोर दिया।

मंत्री खनाल ने टोखा की ऐतिहासिक नेवारी बस्तियों और शनिवार को लगने वाले बाजार को सुव्यवस्थित करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने टोखा में घर-आधारित ‘होमस्टे’ विकास की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। साथ ही, टोखा–छहरे सुरुङ मार्ग का विस्तार करते समय वहाँ के कई बस्तियों के मापदंडों के कारण आने वाली समस्याओं का हवाला देते हुए वैकल्पिक मार्ग की खोज की आवश्यकता पर बल दिया।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवप्रवर्तन मंत्रालय में ‘नवप्रवर्तन’ जोड़ने के बाद नए मंत्रालय के कार्य और चुनौतियां

शिक्षा मंत्रालय

तस्वीर स्रोत, Ministry of Education, Science & Technology

तस्वीर का शीर्षक, सरकार ने हाल ही में शिक्षा मंत्रालय से अलग विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवप्रवर्तन मंत्रालय का गठन किया है

सरकार ने नवप्रवर्तन को प्राथमिकता देते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा नवप्रवर्तन मंत्रालय का गठन किया है, जो एक सकारात्मक कदम है, हालांकि इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बजट आवंटन और नियम तथा कानून निर्माण महत्वपूर्ण होंगे, ऐसा विभिन्न हितधारकों ने बताया है।

पहले विज्ञान और प्रौद्योगिकी विषय कभी शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत, कभी वातावरण मंत्रालय से जुड़ा या स्वतंत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के रूप में काम करता रहा है। लेकिन यह पहली बार है जब नवप्रवर्तन को मंत्रालय के नाम में शामिल कर उसकी प्राथमिकता दी गई है।

“विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय पहले से अस्तित्व में है और राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवप्रवर्तन नीति, २०७६ भी पुरानी ही है। अब नवप्रवर्तन को शामिल करना उस नीति को जारी रखने या उसमें सुधार करने का प्रयास हो सकता है,” पर्यावरण वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता उत्तम बाबु श्रेष्ठ ने कहा।

पूर्व मंत्री और वर्तमान सांसद महावीर पुन लंबे समय से विज्ञान-प्रौद्योगिकी मंत्रालय को शिक्षा से अलग कर, अनुसंधान और नवप्रवर्तन शामिल करते हुए अलग मंत्रालय बनाने की मांग कर रहे थे। उन्होंने सरकार के नए कार्य विभाजन को लेकर खुशी जताई।

“इस विषय में मैंने बहुत संघर्ष किया, मंत्री रहते भी इसे अलग नहीं कर पाया था। अब वर्तमान बहुमत सरकार ने इसे अनिवार्य समझकर मैंने धरना दिया था,” उन्होंने कहा।

नेपालगंज मैराथन को एम्स का प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा किया गया।

  • इंटरनेशनल मैराथन एंड डिस्टेंस रेस एसोसिएशन (एम्स) ने नेपालगंज मैराथन को वर्ष 2080 में एम्स सामाजिक पुरस्कार देने का निर्णय लिया है।
  • एम्स का 25वां वर्ल्ड कांग्रेस जून 18–20 को नॉर्वे के ट्रॉम्सो में आयोजित होगा, जहां यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
  • नेपालगंज मैराथन के संस्थापक टीएस ठकुरी के अनुसार सामाजिक पहल और सकारात्मक कार्य के लिए यह सम्मान प्राप्त हुआ है।

3 जेठ, काठमांडू। वर्ल्ड रनिंग की साझा संस्था एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन एंड डिस्टेंस रेस (एम्स) ने नेपाल की संस्था नेपालगंज मैराथन को इस वर्ष का ‘एम्स सोशल अवार्ड’ प्रदान करने का निर्णय लिया है। विश्व के रेस आयोजकों में चयनित यह एम्स का अत्यंत प्रतिष्ठित पुरस्कार है।

नॉर्वे के ट्रॉम्सो में इसी जून 18–20 को आयोजित होने वाले एम्स के 25वें वर्ल्ड कांग्रेस में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। चयन समिति संयोजक और एम्स उपाध्यक्ष मार्था मोरालेस ने पुरस्कार के संबंध में जानकारी और बधाई दी है, जिसकी सूचना नेपालगंज मैराथन के संस्थापक टीएस ठकुरी को प्राप्त हुई है।

इससे पूर्व 2013 में ग्रेट ईथियोपियन रन (इथियोपिया), 2014 में टोक्यो मैराथन (जापान), 2015 में मैराथन इंटरनेशनल लाला (मैक्सिको), 2016 में म्यूनिख मैराथन (जर्मनी), 2017 में मैराथन दी लास फ्लोरेस मेडेलिन (कोलंबिया), 2018 में बेलग्रेड मैराथन (सर्बिया), 2019 में हार्मोनी जेनेवा मैराथन फॉर युनिसेफ (स्विटजरलैंड) को यह पुरस्कार मिला था। कुछ कारणों से कुछ वर्षों के लिए रोक लगा था, लेकिन इस वर्ष से यह पुरस्कार निरंतर प्रदान किया जाएगा, उपाध्यक्ष मार्था ने बताया।

उपाध्यक्ष मार्था ने पत्र में नेपालगंज मैराथन के संस्थापक ठकुरी को लिखा, ‘हमें यह सूचित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि नेपालगंज मैराथन इस वर्ष के प्रतिष्ठित एम्स सोशल अवार्ड के प्राप्तकर्ता के रूप में चुना गया है।’ उन्होंने यह भी कहा कि दौड़ की दुनिया में यह पुरस्कार बहुत सम्मानित माना जाता है।

‘प्रत्येक वर्ष श्रेष्ठ मैराथनों को दिया जाने वाला यह पुरस्कार खेल के सतत विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उत्कृष्ट प्रथाओं को मान्यता प्रदान करता है,’ उन्होंने कहा, ‘इस पुरस्कार के माध्यम से आपके और आपकी संस्था के सामाजिक पहल और सकारात्मक कार्यों का सम्मान किया गया है। एम्स अन्य सदस्य संस्थाओं को भी इस तरह के उत्कृष्ट अभ्यास अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहता है। हम आशा करते हैं कि यह उपलब्धि आपको और सफल बनाएगी। पुरस्कार पाने पर हार्दिक बधाई।’

नेपालगंज मैराथन वर्ष 2015 से लगातार आयोजित हो रहा है। कोविड काल में भी नेपाल सरकार के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस मैराथन ने टोक्यो ओलंपिक के लिए खिलाड़ियों के चयन में भूमिका निभाई थी।

लंबे सशस्त्र संघर्ष का औपचारिक अंत समझाने वाले 5 मंसिर 2063 के समझौते की स्मृति में वर्ष 2072 से नेपालगंज ने मैराथन यात्रा शुरू की। बहुदलीय, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक शहर को शांति, सद्भाव और एकता से जोड़ने के लिए मैराथन को एक माध्यम बनाकर नेपालगंज ने लगभग एक दर्जन भगिनी कार्यक्रम संचालित किए हैं।

स्कूलों के बच्चों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करते हुए इसके अनुकूलन के लिए प्रोत्साहित करने वाले गौघाट ग्रीन और राप्तीसोनारी नेचर रन दो वर्ष से लगातार चल रहे हैं।

रात्रि में भी सुरक्षित महसूस कराने के उद्देश्य से नेपालगंज 10 किलोमीटर नाइट रन के दो संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं। इसके साथ ही विश्व में नेपाली विरासत के प्रचार-प्रसार के लिए काठमांडू 25 किलोमीटर हेरिटेज रेस पिछले वर्ष से शुरू की गई है। कर्णाली प्रदेश में भी कर्णाली हाफ मैराथन स्थापित है।

लोकतंत्र में संवाद और बहस को जरूरी मानते हुए नेपालगंज डिस्कोर्स की श्रृंखला ‘नेपालगंज कनक्लेव’ के छह संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। पिछले वर्ष एम्स की बोर्ड बैठक सहित नेपाल इंटरनेशनल रनिंग कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ, जिसमें 18 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस वर्ष वन ग्लोबल माइल के अंतर्गत नेपाल में कोहलपुर माइल भी शुरू हो रहा है।

साथ ही नेपाल रनिंग मैगजीन निरंतर प्रकाशन में है। नेपालगंज मैराथन के संस्थापक टीएस ठकुरी ने बताया कि वे विभिन्न अवधारणाओं पर काम करते हुए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त हुए हैं।

‘हम दौड़ को समाजीकरण और सांस्कृतिक स्वरूप देने का प्रयास करते हैं,’ उन्होंने कहा, ‘यह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हमें नई ऊर्जा देगा और नेपाल को विश्व में पहचान दिलाएगा।’

नेपाल के रनिंग क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए पिछले वर्ष एम्स ने टीएस ठकुरी को नेपाल के लिए आधिकारिक दूत नियुक्त किया था।

सिरहामा झाडीमा लुकाएको २७६ किलो गाँजा बरामद – Online Khabar

सिरहा में झाड़ी में छुपाए गए २७६ किलो गाँजा पुलिस ने बरामद किया

३ जेठ, सिरहा। सिरहा में पुलिस ने बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली दवा गाँजा बरामद की है। करजनहा नगरपालिका–११ क्षेत्र से पुलिस ने २७६ किलो गाँजा कब्जे में लिया है। इलाका полиции कार्यालय मिर्चैया से पुलिस निरीक्षक जीवकांत चौधरी के नेतृत्व वाली टीम शनिवार शाम करजनहा नगरपालिकाक कार्यालय से लगभग ३०० मीटर दूर झाड़ी वाले क्षेत्र में तलाशी के दौरान ११ बोरों में पैक कर छुपाए गए गाँजा को बरामद करने में सफल रही। बरामद गाँजा इलाका पुलिस कार्यालय मिर्चैया में रखा गया है। जिला पुलिस कार्यालय सिरहा के प्रवक्ता डीएसपी रमेशबहादुर पाल ने बताया कि मामले की आगे जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गाँजा किसने और कहां से लाकर यहां छुपाया था।

‘फ्री वीजा फ्री टिकट’ के नाम पर ठगी, 3 लाख रुपये लेने वाला मैनपावर एजेंट गिरफ्तार

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा के बाद तैयार।

  • मलेशिया जाने वाले सप्तरी के अजयकुमार यादव से 3 लाख रुपये मांगने वाले मैनपावर कंपनी के कर्मचारी गिरफ्तार हुए हैं।
  • सरकार द्वारा निर्धारित 10 हजार रुपये की जगह 3 लाख रुपये वसूलने की पुष्टि होने पर तीनकुने पुलिस ने उक्त कर्मचारियों को हिरासत में लिया।
  • श्रम मंत्री यादव के सचिवालय ने विदेश रोजगार में समस्या आने पर सीधे श्रम मंत्रालय से संपर्क करने का आह्वान किया है और गिरफ्तार एजेंटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।

3 जेठ, काठमांडू। मलेशिया में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करने के लिए सप्तरी के अजयकुमार यादव की फ्लाइट गत वैशाख 29 गते निर्धारित थी। सरकार की ‘फ्री वीजा फ्री टिकट’ नीति के तहत मैनपावर कंपनी को प्रोसेस कराने पर अधिकतम सिर्फ 10 हजार रुपये देने होते हैं, जबकि यादव ने पहले ही 70 हजार रुपये नकद दे दिए थे।

फिर भी, कोटेश्वर स्थित ‘ग्रांड स्वीट जॉब’ नामक मैनपावर ने ‘3 लाख रुपये से कम एक रुपया भी नहीं लूंगा’ कह दिया, जिसके कारण वे मलेशिया नहीं जा पाए। रोजगारदाता कंपनी ने वीजा और टिकट पहले ही भेज दिया था। 3 लाख रुपये न देने पर अजय का विदेश जाने का सपना अधूरा रह गया।

जब मैनपावर कंपनी ने बाकी 2 लाख 20 हजार रुपये 3 जेठ को जमा करने पर उड़ान का इंतजाम करने का वादा किया, तब अजय ने पैसों की व्यवस्था की। वे नाइट बस लेकर शनिवार सुबह काठमांडू आए।

कंपनी के एक कर्मचारी ने शनिवार सुबह अजय को फोन कर पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज अपने पास होने की बात कही और उन्हें तीनकुने गैरीगांव स्थित पेट्रोल पंप के सामने पैसा लेकर आने को कहा।

अजय पहले ही अपनी समस्याएं युवा, श्रम और रोजगार मंत्री रामजी यादव के सचिवालय में बता चुके थे। वे मंत्री यादव के निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता भी हैं।

अजय की समस्या हल करने के लिए मंत्री यादव के निजी उपसचिव सरोज यादव सक्रिय हुए। उन्होंने कुछ पत्रकारों की उपस्थिति में तीनकुने पुलिस स्टेशन पर पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में मैनपावर कर्मचारियों और अजय के बीच बातचीत करवाई।

मैनपावर कंपनी के वीजा शाखा में काम करने वाले कर्मचारियों ने पहले अजय से पैसा मांगा। अजय ने कहा कि वे पासपोर्ट और दस्तावेज तभी देंगे जब पूरा पैसा मिले। इसके बाद कुछ विवाद हुआ। तुरंत पुलिस ने कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया।

‘फ्री वीजा फ्री टिकट’ के तहत केवल 10 हजार रुपये खर्च होने चाहिए थे, लेकिन 3 लाख रुपये वसूलने की बात स्वीकार होने के बाद पुलिस ने कर्मचारियों को तीनकुने से काठमांडू उपत्यका अपराध जांच कार्यालय ले जाया।

‘ग्रांड स्वीट जॉब’ के गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों के कब्जे से चार पासपोर्ट, फ्लाइट टिकट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए। वे चारों लोगों से रकम लेकर कागजात देने की योजना बना रहे थे।

विदेशी रोजगार के नाम पर सरल कामगारों से ठगी करने और ‘फ्री वीजा फ्री टिकट’ नियम की अवहेलना कर लाखों रुपये वसूलने वाले मैनपावर एजेंटों के गिरफ्तार होने से यह साबित हुआ कि आम नागरिक किस प्रकार ठगे जा रहे हैं, मंत्रालय ने कहा।

श्रम मंत्री यादव के निजी सचिव सरोज यादव ने कहा, ‘आज तीनकुने गैरीगांव में हम एक आम नेपाली को ठगी से बचा पाए हैं। इस विशेष योजना में सहयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों को हार्दिक धन्यवाद।’

यादव मलेशिया में सिक्योरिटी गार्ड के काम के लिए जाने वाले थे। उन्होंने झापा स्थित मैनपावर शाखा से सभी प्रक्रिया पूरी की थी।

सरकार द्वारा निर्धारित आधिकारिक शुल्क केवल 10 हजार रुपये है, पर मैनपावर ने यादव से 3 लाख 10 हजार रुपये मांगे।

मैनपावर ने पहले 10 हजार रुपये छोड़ने का प्रस्ताव दिया था लेकिन 3 लाख रुपये में समझौता कराया। पीड़ित यादव ने टिकट और अन्य प्रक्रियाओं के लिए पहले ही 70 हजार रुपये नकद दिए लेकिन बाकी न देने तक पासपोर्ट, श्रम स्वीकृति और हवाई टिकट देने से मना कर मैनपावर ने उन्हें बंधक बना दिया।

गिरफ्तार एजेंट ने प्रारंभ में कहा कि पैसे लेकर ही कागजात देंगे, जब पुलिस ने सवाल किया कि ‘फ्री वीजा फ्री टिकट’ वाले देश में 3 लाख रुपये क्यों लिए, तो वे चुप रहे।

पुलिस की सक्रियता से यादव का पासपोर्ट, श्रम स्वीकृति, बीमा और हवाई टिकट बरामद कर उन्हें सौंप दिया गया है, जिससे अब उनकी मलेशिया जाने की संभावना सुनिश्चित हुई है।

पीड़ित यादव ने कहा, ‘शुरुआत में मैनपावर कहा करता था कि पैसा नहीं लगेगा और इंटरव्यू पास होने पर सब ठीक हो जाएगा, लेकिन वीजा मिलने के बाद 3 लाख रुपये न देने पर जाने की अनुमति नहीं दी गई। गरीब को कर्ज लेकर पैसे जुटाने पड़ रहे हैं, ऐसे ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।’

श्रम मंत्री यादव के सचिवालय ने विदेश रोजगार में समस्या आने पर सीधे श्रम मंत्रालय से संपर्क करने का आग्रह किया है। गिरफ्तार एजेंटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस जांच जारी है।

३२ औं पटक सगरमाथा शिखरमा पुगे कामिरिता – Online Khabar

कामिरिता शेर्पाले ३२वीं बार सगरमाथा आरोहण सफलता पूर्वक पूरा किया

कीर्तिमान स्थापित करने वाले पर्वतारोही कामिरिता शेर्पाले ३२वीं बार सगरमाथा की सफल चढ़ाई पूरी की है। सेवन समिट ट्रेक्स के अनुसार, उन्होंने १७ मई २०२६ की सुबह १०:१२ बजे सगरमाथा के शिखर पर पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की। कामिरिता और उनकी टीम इस समय बेस कैंप की ओर उतराई कर रहे हैं और काठमांडू में उनका भव्य स्वागत होने जा रहा है।

५६ वर्षीय कामिरिता शेर्पा, जिन्हें ‘एवरेस्ट मैन’ के नाम से जाना जाता है, विश्व के सबसे अधिक बार सगरमाथा चढ़ने वाले पर्वतारोही हैं। फेसबुक पर सेवन समिट ट्रेक्स ने बताया, “३२वीं सफल चढ़ाई के बाद कामिरिता और उनकी टीम फिलहाल बेस कैंप की ओर नीचे आ रहे हैं। काठमांडू में उनकी सुरक्षित वापसी की कामना करते हुए भव्य स्वागत की तैयारियां चल रही हैं।”

कामिरिता ने सन् १९९४ में सगरमाथा की चढ़ाई शुरू की थी और सन् २०२६ तक उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में अद्वितीय सफलता प्राप्त की है। वे न केवल नेपाल में, बल्कि विश्व पर्वतारोहण समुदाय में भी एक उत्कृष्ट प्रतीक के रूप में सम्मानित हैं।

रास्वपाले रसुवामा नयाँ जिल्ला समिति गठन, वसन्त भट्टको नेतृत्वमा

३ जेठ, काठमाडौं । राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ले रसुवामा नयाँ जिल्ला समिति गठन गरेको छ । यसअघि समिति भंग गरेपछि रास्वपाले शनिबार वसन्त भट्टको नेतृत्वमा नयाँ समिति गठन गरेको हो । उपसभापतिमा दावा लामा, सचिवमा रविन्द्र लोप्चन, सह सचिवमा रविन्द्र तामाङलाई चयन गरिएको छ । सदस्यहरुमा निर्मल घले, सानुमाया तामाङ, सुशील खतिवडा, युवराज घले र कृष्णबहादुर घले रहेका छन् ।

नयाँ नेतृत्व चयनका लागि पार्टीले स्वस्तिका लामिछानेको नेतृत्वमा निर्वाचन समिति गठन गरेको थियो । तीन सदस्यीय निर्वाचन समितिका थप दुई सदस्यमा इन्दिरा गौतम र जानुका सुवेदी थिए । रसुवा जिल्लामा भेला तथा तदर्थ समिति गठन गर्नका लागि केन्द्रीय तहका नेताहरु उपस्थित थिए । महामन्त्री भूपदेव शाहसहित संगठन विभागका सचिव शंकर श्रेष्ठ, सांसद यज्ञमणि न्यौपाने, बागमतीका सभापति डा. अच्यृत्तम लामिछाने, बागमती महामन्त्री सुरेन्द्र भट्ट लगायतका नेताहरु रसुवा पुगेका थिए ।

भेलामा बोल्दा महामन्त्री शाहले प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाहको नेतृत्वको सरकारले उत्कृष्ट सुरुवात गरेको दाबी गरे । ‘अहिले हामी काम गरिरहेका छौं । म यो भन्दिन कि, हामी सफल भइसकेका छौं । हामीले जनताका अपेक्षा पुरा गरिसक्यौं म भन्दिन तर त्यसको सुरुवात उत्कृष्ट भएको छ,’ शाहले भने । उनले भने, देश विकासका लागि तीनै तहको सरकारमा रास्वपा हुनुपर्नेछ । ‘त्यही कारणले आसन्न प्रदेश सभामा पनि राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीले सातै प्रदेशमा सरकार बनाउनु पर्ने आवश्यकता छ’, शाहले थपे, ‘स्थानीय तहमा पनि अधिकांश स्थानीय तहहरु जित्नुपर्ने हाम्रो आवश्यकता र देशको बाध्यता हो । त्यसैले हामीले संघीय निर्वाचन मात्र जितेका छौं, देशले जित्न अझै बाँकी छ ।’

इरान युद्ध पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूएई राष्ट्रपति के बीच टेलीफोन बातचीत

३ जेठ, काठमाडौं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच इरान युद्ध और मध्य पूर्व की ताजा स्थिति को लेकर टेलीफोन वार्ता हुई है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के अनुसार, दोनों नेताओं ने शांति स्थापना के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद को जारी रखने के महत्व पर जोर दिया है।

एमिरेट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार शनिवार को हुई इस टेलीफोन वार्ता में मध्य पूर्व के हालिया घटनाक्रम और इसके क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर प्रभावों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने जलमार्ग की स्वतंत्रता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इस संकट के प्रभावों पर विचार-विमर्श किया। इस चर्चा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने हेतु द्विपक्षीय सहयोग और संयुक्त प्रयासों की समीक्षा भी की गई।

पुतिन ने रूस और यूक्रेन के बीच कैदी अदला-बदली में यूएई के लगातार मध्यस्थता प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने यूक्रेन युद्ध से जुड़े मानवीय पहलों में यूएई के सकारात्मक योगदान की भी प्रशंसा की।

इरान और यूएई के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी युद्ध के बीच दोनों देशों के बीच भी तनाव तेजी से बढ़ा है। यूएई का दावा है कि युद्ध के दौरान इरान ने बार-बार यूएई पर हमले किए हैं। दूसरी ओर, इरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूएई पर अमेरिका और इज़राइल का सक्रिय साझेदार होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि यूएई इरान के खिलाफ हो रहे हमलों में सीधे शामिल है। इसके जवाब में यूएई ने कहा है कि इरान केवल अपने हमलों को औचित्य प्रदान करने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है।