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लेखक: space4knews

बैंक और वित्तीय संस्थाओं को स्थायी निक्षेप सुविधा प्रदान करने की व्यवस्था की समीक्षा होगी

समाचार सारांश

समीक्षा पूरी की गई है।

  • नेपाल राष्ट्र बैंक ब्याजदर करिडोर को और प्रभावी बनाने के लिए बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं को स्थायी निक्षेप सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था पुनः समीक्षा करने जा रहा है।
  • राष्ट्र बैंक ने मुद्रास्फीति बैंक के लक्ष्य से कम होने के बावजूद वैश्विक भूराजनीतिक तनाव के कारण मुद्रास्फीति में जोखिम बनने की चेतावनी दी है।
  • वर्तमान आर्थिक वर्ष 2082/83 की तृतीय त्रैमासिक समीक्षा के अनुसार वित्तीय प्रणाली में अत्यधिक तरलता होने पर भी समष्टिगत आर्थिक आंकड़ों पर प्रभाव नियंत्रण में बैंक सजग रहे, जिससे वित्तीय स्थिरता बनी हुई है।

1 जेठ, काठमाडौं । नेपाल राष्ट्र बैंक ब्याजदर करिडोर को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बैंक और वित्तीय संस्थाओं को स्थायी निक्षेप सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की पुनरावलोकन करने वाला है।

मौद्रिक नीति के वर्तमान आर्थिक वर्ष 2082/83 की तृतीय त्रैमासिक समीक्षा रिपोर्ट जारी करते हुए केन्द्रीय बैंक ने इस नीति सुधार की तैयारी के बारे में सूचित किया है।

राष्ट्र बैंक ने विदेशी विनिमय भंडार और मुद्रास्फीति को बैंक के लक्ष्य के अनुसार स्थिर रखने का अनुमान जताते हुए न्यून आर्थिक वृद्धि की स्थिति को देखते हुए चालू वर्ष की शुरुआत से लचीली मौद्रिक नीति का पालन कर रहा है।

ब्याजदर करिडोर, बैंक दर, अनिवार्य नगद मौज्दात और वैधानिक तरलता अनुपात से संबंधित वर्तमान नियम भी यथावत बनाए रखने के बारे में भी केन्द्रीय बैंक ने बताया है।

चालू वर्ष की मौद्रिक नीति मूल्य वृद्धि, बाह्य क्षेत्र और वित्तीय क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में सहायता प्रदान करने की उम्मीद रखती है।

मुद्रास्फीति बैंक के लक्ष्य से कम

राष्ट्र बैंक के अनुसार, मुद्रास्फीति वर्तमान में बैंक के निर्धारित लक्ष्य से कम है। हालांकि, विश्व के भूराजनीतिक तनाव के कारण मुद्रास्फीति पर दबाव पड़ने की जोखिम बनी हुई है, यह केन्द्रीय बैंक की चेतावनी है।

पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से पेट्रोलियम उत्पादों के दाम में बढ़ोतरी हुई है साथ ही उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल और कुछ उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। राष्ट्र बैंक के अनुसार, इस अवधि के दौरान नेपाल में पेट्रोल के दाम में 35 प्रतिशत और डीजल के दाम में 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

राष्ट्र बैंक ने अर्थव्यवस्था के बाह्य क्षेत्र को सहज बनाए रखा है। विप्रेषण प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चालु खाता, शोधनान्तर बचत और विदेशी मुद्रा भंडार क्रमशः बढ़ रहे हैं।

नेपाल में लगभग 40 प्रतिशत विप्रेषण पश्चिम एशिया से होता है और उस क्षेत्र में तनाव के कारण विप्रेषण और आयातित वस्तुओं की मूल्य वृद्धि से व्यापार घाटा बढ़ने का जोखिम है, यह केन्द्रीय बैंक की चेतावनी है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है।

इसी प्रकार, बैंक और वित्तीय संस्थाओं के निष्क्रिय कर्जे सामान्य रूप से बढ़े हैं। लेकिन आर्थिक गतिविधियों में सुधार के साथ इन कर्जों में भी सुधार आने की उम्मीद केन्द्रीय बैंक ने जताई है।

2082 चैत मसान्त तक बैंक और वित्तीय संस्थाओं की प्राथमिक पूंजी और पूंजी कोष की जोखिम आधारित संपत्ति से अनुपात नियामकीय मानकों के भीतर है और समग्र वित्तीय स्थिरता कायम है। पिछले तीन वर्ष से वित्तीय प्रणाली में अधिक तरलता का दौर चल रहा है।

वित्तीय प्रणाली में लंबे समय से अधिक तरलता के कारण समष्टिगत आर्थिक संकेतकों पर पड़ने वाले प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए बैंक सजग हैं, यह पुनरावलोकन रिपोर्ट में उल्लेखित है।

शैक्षिक अनुसंधान में योगदान बढ़ाने के लिए शिक्षा बजट बढ़ाने का सुझाव विशेषज्ञों ने दिया

द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालयों को शैक्षिक अनुसंधान के लिए बजट का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के डॉ. डिल्लीराज शर्मा ने निजी क्षेत्र के साथ सहयोग करके अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की बात कही। सम्मेलन में भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों ने नेपाल में शैक्षिक अनुसंधान को प्राथमिकता देने तथा सरकार को नीति निर्माण में बौद्धिक सहयोग प्रदान करने की बात कही। १ जेठ, काठमांडू।
विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालयों को शैक्षिक अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए शिक्षा बजट आवंटित करने की आवश्यकता पर बल दिया। द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, जो ललितपुर के कुमारीपाटी में मेगा कॉलेज में आयोजित हुआ था, में प्रतिभागियों ने गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए सरकारी निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में नेपाल, भारत, बांग्लादेश समेत कई देशों के अर्थशास्त्री उपस्थित थे।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय प्रबंधन संकाय के पूर्व डीन प्रोफेसर डॉ. डिल्लीराज शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों को निजी क्षेत्र के साथ मिलकर शैक्षिक अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए। डॉ. शर्मा ने कहा कि नेपाल में तौर-तरीकों में निवेश हुआ है, लेकिन खोज, अनुसंधान और नवीनता को प्राथमिकता न देने पर चिंता व्यक्त की। ‘सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कुशल प्रबंधन क्षमता अत्यावश्यक है। वैश्विक सोच को स्थानीय स्तर पर विस्तारित करना होगा। इसके लिए सरकार को शैक्षिक अनुसंधान को प्राथमिकता देनी होगी,’ उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में बजट वृद्धि करके ही वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम जनशक्ति का उत्पादन संभव है। भारत के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय प्रबंधन संकाय के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. हरेन्द्रकुमार सिंह ने कहा कि सफल शासन के लिए प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। डॉ. सिंह ने विश्व अर्थव्यवस्था के उदाहरण देते हुए कहा कि शक्तिशाली राष्ट्रों ने अनुसंधान में निवेश करके अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं।
उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच शैक्षिक क्षेत्र में पर्याप्त सहयोग नहीं है, इसलिए राजनीतिक व सांस्कृतिक संबंधों के समान शैक्षिक संबंधों को भी मजबूत करना आवश्यक है। मधेश विश्वविद्यालय प्रबंधन संकाय के डीन डॉ. अंजयकुमार मिश्र ने कहा कि प्रौद्योगिकी के विकास के साथ अनुसंधान में आने वाली चुनौतियों को नेपाल के अर्थशास्त्री पार कर सकते हैं। संघीय संसद के महासचिव पद्मप्रसाद पांडे ने कहा कि अर्थशास्त्री किसी भी देश के सहयोगी शक्ति होते हैं।
उन्होंने कहा कि नेपाल में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से देश के कानून और नीति निर्माण में सहायता मिलेगी। आयोजक मेगा कॉलेज, कुमारीपाटी के प्राचार्य डॉ. घनश्यामप्रसाद साह ने कहा कि द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत शोधपत्र, अनुसंधान निष्कर्ष और विमर्श राष्ट्रीय नीति निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग देंगे। नेपाल कमर्श एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. दीपेन्द्र कुमार चौधरी ने कहा कि नेपाल के शैक्षिक अनुसंधानकर्ता विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था तथा समसामयिक विषयों पर किए अध्ययन विश्वस्तरीय हैं। सम्मेलन के निष्कर्ष से सरकार को नीति निर्माण में बौद्धिक सहयोग मिलेगा, यह चौधरी का मानना है। शनिवार तक चलने वाले इस सम्मेलन में नेपाल के अधिकांश विश्वविद्यालयों के प्रबंधन संकाय के प्राध्यापक, शोधकर्ता और व्यापार, वाणिज्य, प्रौद्योगिकी एवं कानून के विद्यार्थी शामिल हैं।

ढीले ओवर रेट के कारण पाकिस्तान पर डब्ल्यूटीसी में 8 अंक कटौती

समाचार सारांश

OK AI द्वारा तैयार। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में धीमी ओवर रेट के कारण पाकिस्तान क्रिकेट टीम पर कार्रवाई की गई।
  • ICC ने प्रत्येक धीमी ओवर पर खिलाड़ियों को मैच फीस का 5 प्रतिशत जुर्माना और विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप में 1 अंक कटौती का नियम लगाया।
  • पाकिस्तान के कप्तान शान मसूद ने आरोप स्वीकार किए।

1 जेठ, काठमांडू। बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में धीमी ओवर रेट के कारण पाकिस्तान क्रिकेट टीम पर जुर्माना लगाया गया है।

ICC ने पाकिस्तान को मैच फीस का 40 प्रतिशत जुर्माना और विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (डब्ल्यूटीसी) से 8 अंक कटौती की है।

मैच में पाकिस्तान निर्धारित समय से 8 ओवर देर से ओवर पूरा करता पाया गया। समय समायोजन के बाद भी टीम लक्ष्य से पीछे रही।

ICC के नियमों के अनुसार, प्रत्येक धीमी ओवर पर खिलाड़ियों पर मैच फीस का 5 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है।

साथ ही विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप में प्रत्येक धीमी ओवर के लिए 1 अंक कटौती का प्रावधान है।

यह कार्रवाई एमिरेट्स ICC एलीट पैनल के मैच रेफरी जेफ क्रोल ने की है। पाकिस्तान के कप्तान शान मसूद ने आरोप स्वीकार किए हैं, जिससे आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं मानी गई है।

मैच के दौरान अंपायर रिचर्ड केटलबरो और कुमार धर्मसेना, तीसरे अंपायर अल्लाउद्दिन पालेकर और चौथे अंपायर गाजी सोहेल ने संयुक्त रूप से आरोप दर्ज किए थे।

इस प्रकार पाकिस्तान के डब्ल्यूटीसी अंक 38 से घटकर 30 हो गए हैं।

मार्शको आक्रामक ब्याटिङमा लखनउले चेन्नईलाई हरायो

मार्श की आक्रामक पारी से लखनउ ने चेन्नई को हराया

मिचेल मार्श ने ३८ गेंदों में ९० रन की शानदार पारी खेलकर लखनउ सुपर जायंट्स को चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ जीत दिलाई। चेन्नई ने २० ओवर में ५ विकेट खोकर १८७ रन बनाए थे, जिसमें कार्तिक शर्मा ने सर्वाधिक ७१ रन झटके। मार्श के आक्रामक प्रदर्शन ने लखनउ को लक्ष्य सहजता से प्राप्त करने में मदद की। १ जेठ, काठमाडौं।

मार्श की ९० रनों की पारी के बाद आईपीएल २०२६ में लखनउ ने १८८ रन के लक्ष्य को १६.४ ओवर में ३ विकेट खोकर हासिल कर लिया। मार्श के आउट होने के बाद निकोलस पूरन ने १७ गेंदों में नाबाद ३२ रन जोड़े। जोश इंग्लिस ३६ रन बनाकर आउट हुए, जबकि मार्श और इंग्लिस ने पहले विकेट के लिए ११.४ ओवर में १३५ रन की अहम साझेदारी की। यह साझेदारी लखनउ की जीत की नींव साबित हुई।

चेन्नई के लिए मुकेश चौधरी और स्पेंसर जोनसन ने १-१ विकेट हासिल किए। मार्श दुर्भाग्यवश नॉन-स्ट्राइकर पर रन आउट हुए। चेन्नई ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए २० ओवर में ५ विकेट पर १८७ रन बनाए। कार्तिक शर्मा ने ४२ गेंदों में ६ चौके और ५ छक्के लगाते हुए सर्वाधिक ७१ रन बनाए। लखनउ के लिए आकाश सिंह ने ३ विकेट लिए, जबकि मोहम्मद शमी और शाहबाज अहमद ने १-१ विकेट चटकाए। इस जीत के साथ लखनउ के १२ मैचों में ८ अंक हो गए हैं, जबकि चेन्नई १२ मैचों में १२ अंकों के साथ पांचवें स्थान पर बना हुआ है।

आउटसोर्सिंग श्रमिकों के श्रम शोषण के खिलाफ श्रम मंत्रालय का सख्त कदम, नियमन हेतु पत्राचार

समाचार सारांश

  • सरकार ने आउटसोर्सिंग श्रमिकों के श्रम शोषण को रोकने के लिए नेपाल राष्ट्र बैंक और श्रमिक आपूर्तिकर्ता कंपनियों को श्रम कानूनों के तहत सख्त निर्देश दिए हैं।
  • श्रम विभाग ने बैंक और वित्तीय संस्थानों में काम करने वाले सुरक्षागार्डों को न्यूनतम वेतन एवं सेवा सुविधाएं न दिए जाने की शिकायत मिलने पर नियमन के लिए नेपाल राष्ट्र बैंक को पत्र भेजा है।
  • श्रम कानून के विपरीत सार्वजनिक खरीद कानून के तहत कम मूल्य में श्रमिक आपूर्ति की जा रही है, इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देशात्मक आदेश जारी किया है।

१ जेठ, काठमांडू। आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत श्रमिकों के श्रम शोषण के मामलों के कारण सरकार ने सख्त कदम उठाया है।

सरकार ने नेपाल राष्ट्र बैंक, श्रमिक आपूर्तिकर्ता कंपनियों और संबंधित निकायों को पत्र भेज कर श्रम कानून के अनुसार श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा हेतु कड़ा निर्देश दिया है।

श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के श्रम और व्यवसायजन्य सुरक्षा विभाग ने राष्ट्र बैंक को अनुरोध किया है कि श्रमिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से आने वाले श्रमिकों के श्रम अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु बैंक और वित्तीय संस्थानों को निर्देश प्रदान करें।

बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में कार्यरत सुरक्षागार्ड, सफाई कर्मचारी, फ्रंटलाइनर, कार्यालय सहयोगी सहित श्रमिकों के श्रम शोषण के मामले सामने आने के पश्चात विभाग ने श्रम कानून के तहत नियंत्रण हेतु आग्रह किया है।

हाल ही में हेलो सरकार, श्रम मंत्रालय एवं श्रम विभाग में बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्सिंग श्रमिकों के खिलाफ श्रम शोषण की शिकायतों में वृद्धि हुई है।

विभाग के प्रवक्ता इंजीनियर मणिनाथ गोप ने बताया कि न्यूनतम वेतन न मिलने, अत्यधिक कार्यभार लगने जैसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। बढ़ती शिकायतों के कारण राष्ट्र बैंक को नियमन हेतु पत्राचार किया गया है।

श्रम कानून २०७४ की धारा ५९ के अनुसार श्रमिक आपूर्तिकर्ता कंपनियां सुरक्षा सेवा, सहायक सेवा, व्यवसाय सहायता सेवा एवं घरेलू सहायता सेवा में श्रमिकों को नियोजित कर सकती हैं।

परन्तु कई बैंक और वित्तीय संस्थाएं (मुख्य रोजगारदाता) तथा श्रमिक आपूर्तिकर्ता (रोजगारदाता) के बीच हुए समझौतों के अनुसार सुरक्षा कर्मियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन एवं श्रम कानून २०७४ व श्रम नियमावली २०७५ के अनुसार सेवा सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं, ऐसा विभाग ने शिकायतों में बताया है।

विभाग ने पहले भी श्रम कानून और नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु २७ चैत २०८२ को राष्ट्र बैंक को पत्र भेजा था, परंतु अनुपालन न होने पर पुनः श्रम मंत्रालय के निर्देश पर अनुरोध किया गया है।

श्रम नियमावली २०७५ के नियम ५६ के तहत प्रत्येक प्रतिष्ठान को पुस महीने के अंत तक श्रम ऑडिट कराना आवश्यक है। इसी नियम की उप-धारा (४) के अनुसार श्रम ऑडिट रिपोर्ट बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा राष्ट्र बैंक को प्रस्तुत करनी होती है।

विभाग ने उक्त प्रावधानों को कठोरता से लागू कराने हेतु राष्ट्र बैंक को पुनः पत्र भेजकर निर्देश देने कहा है।

साथ ही विभाग ने श्रमिक आपूर्तिकर्ता सभी कंपनियों, नेपाल मजदूर आपूर्तिकर्ता संघ एवं सुरक्षा व्यवसायी संगठन नेपाल को भी श्रम कानूनों के अनुसार श्रमिकों को सभी सेवा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

सेवा सुविधा न देने पर विभाग ने कड़ी कार्रवाई का सख्त चेतावनी दी है।

बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में कार्यरत सुरक्षागार्ड सहित श्रमिकों को न्यूनतम वेतन नहीं मिलना, अधिक घंटे काम कराना, त्योहारों के खर्च कम देना एवं श्रम कानून के तहत सेवा सुविधाएं न मिलने की शिकायतों पर विभाग ने श्रमिक आपूर्तिकर्ता कंपनियों को कड़े निर्देश देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।

श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय ने न्यूनतम वेतन न मिलने और अधिक काम लगाने की शिकायतों के मद्देनजर श्रमिकों के श्रम अधिकारों के कार्यान्वयन में कड़ाई दिखा रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय और हेलो सरकार में शिकायतें मिलने के बाद निकटस्थ अधिकारियों को दबाव के तहत सरकार ने श्रमिक शोषण के मामलों पर सख्त कदम उठाना शुरू किया है। आउटसोर्सिंग श्रमिक संगठन नेपाल ने २४ मंसिर २०८२ को श्रम विभाग में एक आवेदन दिया था।

श्रम कानूनों के विपरीत श्रमिक आपूर्ति के विरुद्ध आवेदनों के कारण उनका नियमन एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। लंबी सुनवाई न होने पर संगठन के अध्यक्ष नारायणप्रसाद खरेल ने प्रधानमंत्री कार्यालय, हेलो सरकार, राष्ट्रीय सतर्कता केंद्र आदि जगहों पर शिकायतें दर्ज करवाई थीं।

विभाग में दर्ज शिकायतों पर कोई सुनवाई न होने के कारण ये निकाय श्रम मंत्रालय पर दबाव डालने लगे थे।

अध्यक्ष खरेल के अनुसार श्रमिक आपूर्तिकर्ता श्रम कानूनों के बजाय सार्वजनिक खरीद कानून के तहत कम मूल्य पर कार्य कर रहे हैं।

‘जहां श्रम कानूनों के तहत होना चाहिए था, वहां सार्वजनिक खरीद कानून के अनुसार कम मुल्य पर कार्य दिया जा रहा था, जिससे टेंडर स्वीकृत के खिलाफ राष्ट्रीय सतर्कता केंद्र में शिकायत की गई,’ अध्यक्ष खरेल ने कहा, ‘विभाग में दर्ज आवेदन सुनवाई न होने पर मैं प्रशासनिक प्रमुखों के साथ राष्ट्रीय सतर्कता केंद्र में शिकायत दर्ज कराया, जिस पर से कार्रवाई शुरू हुई।’

सुरक्षागार्ड जैसे श्रमिकों के नियोजन में श्रम कानून की बजाय सार्वजनिक खरीद कानून के अनुसार कम मूल्य का अनुबंध होना आम बात हो गई है। इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में रिट दायर की गई थी और २५ वैशाख को सरकार के नाम पर निर्देशात्मक आदेश जारी हो चुका है।

श्रम कार्यालयों में इस प्रकार की शिकायतें बढ़ने के कारण एक ही संस्था पर २३२ से ३०० श्रमिकों को ठगने की भी शिकायतें दर्ज हो रही हैं।

सुरक्षागार्डों के लिए श्रम विभाग ने मासिक न्यूनतम वेतन कम से कम २७,७३७ रुपये निर्धारित किया है, परंतु कुछ को अब तक केवल १९,५५० रुपये दिए जा रहे हैं।

धादिङ में 52 किलो अफीम और तीन तলো भरुवा बंदूक बरामद

धादिङ पुलिस ने बेनीघाट रोराङ गाउँपालिका–2 होवाङ से 51 किलो 980 ग्राम अफीम और तीन तलो भरुवा बंदूक बरामद की है। 35 वर्षीय वीरबहादुर तामाङ को लागुपदार्थ और हथियार सहित गिरफ्तार कर इलाका प्रहरी कार्यालय गजुरी में मामला दर्ज किया गया है। अन्य दो व्यक्तियों को भी भरुवा बंदूक के साथ गिरफ्तार कर आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। 1 जेठ, मलेखु (धादिङ)।

धादिङ पुलिस ने बड़ी मात्रा में अवैध लागुपदार्थ अफीम एवं हथियार बरामद किए हैं। दक्षिणी धादिङ के बेनीघाट रोराङ गाउँपालिका–2, होवाङ से 51 किलो 980 ग्राम शुद्ध अफीम बरामद हुआ है। जिला प्रहरी कार्यालय धादिङ के प्रहरी नायब उपरीक्षक प्रकाश दाहाल के अनुसार, तामाङ के घर की तलाशी में बकरा बांधने वाले गोठ में छिपाया हुआ एक तलो भरुवा बंदूक और दो डिजिटल तराजू बरामद किए गए।

तामाङ के सोने वाले कमरे के ओछ्यान के पास पांच प्लास्टिक बाल्टियों में भरा हुआ काला लेदो पदार्थ भी मिला है, जो अफीम जैसा प्रतीत होता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में तौला गया और इसका स्वयं का वजन 51 किलो 980 ग्राम पुष्टि किया गया। तामाङ पहले भी लागुपदार्थ मामलों में शामिल रह चुके और फरार थे। उन्हें हिरासत में लेकर लागुपदार्थ और अवैध हथियार संबंधित मामले दर्ज किए गए हैं।

पुलिस ने होवाङ से ही अन्य दो तलो भरुवा बंदूक के साथ 28 वर्षीय विराज तामाङ और सानोकान्छा तामाङ को उनके-उनके घरों से गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई शुरू की है। दोनों को उनके-उनके घरों से गिरफ्तार किया गया, इसकी जानकारी प्रहरी नायब उपरीक्षक दाहाल ने दी।

टेबलटेनिस के अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता निश्चल को आरम्भ विद्यालय ने दिया सम्मान

दक्षिण एशियाई यूथ टेबलटेनिस चैम्पियनशिप में रजत और कांस्य पदक विजेता निश्चल थापा क्षेत्री को गोल्कुपाखा स्थित आरम्भ संस्कार विद्यालय ने सम्मानित किया है। १ जेठ, काठमांडू। भारत के शिमला में ८ से ११ अप्रैल तक आयोजित इस प्रतियोगिता में निश्चल ने यू–१५ बॉयज डबल्स में रजत और यू–१५ बॉयज टीम इवेंट में कांस्य पदक प्राप्त किया था। आरम्भ के प्रधानाचार्य नरेशप्रसाद श्रेष्ठ और उपप्रधानाचार्य दिनेश श्रेष्ठ ने निश्चल को प्रशंसा पत्र एवं सम्मान चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

इसी अवसर पर दक्षिण कोरिया के इंचोन में हो रही अंतरराष्ट्रीय क्रिश्चियन टेबलटेनिस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली प्राज्ञा महर्जन को भी विदाई दी गई। निश्चल कक्षा ९ और प्राज्ञा कक्षा ७ में आरम्भ विद्यालय की छात्राएं हैं। आरम्भ दोनों को पूर्ण छात्रवृत्ति प्रदान करता है। २७ मई को होने वाली इस प्रतियोगिता में नेपाल से प्राज्ञा समेत छह खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करेंगे।

अन्य खिलाड़ियों में हिमाल विष्ट, योङगी पौडेल, सुरम्य शाक्य, रिजन शाक्य और रिवानमुनि वज्राचार्य शामिल हैं। प्रतियोगिता से पहले ये सभी खिलाड़ी इंचोन में १६ से २६ मई तक यांग योङजा टेबलटेनिस मिशन इंटरनेशनल कैंप में भाग लेंगे। टीम शनिवार प्रस्थान करेगी। कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्य श्रेष्ठ ने कहा कि निश्चल की सफलता ने न केवल विद्यालय की बल्कि पूरे राष्ट्र की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। उन्होंने बताया कि आरम्भ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के खेल सफर को आगे बढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करता आ रहा है। उन्होंने प्राज्ञा को भी सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। उपप्रधानाचार्य दिनेश श्रेष्ठ ने कहा कि आरम्भ विद्यालय का फोकस छात्रों के सर्वांगीण विकास पर है, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

निरुता महिला भलिबल टोलीको नयाँ कप्तान नियुक्त – Online Khabar

निरुता ठगुन्ना बनीं नेपाली महिला भलिबल टीम की नई कप्तान

नेपाली राष्ट्रीय महिला भलिबल टीम की नई कप्तान के रूप में आउटसाइड हिटर निरुता ठगुन्ना का चयन किया गया है। नेपाल भलिबल संघ की ६९वीं कार्यसमिति बैठक ने निरुता को टीम की कप्तान घोषित किया है। निरुता जेठ ८ से शुरू होने वाली काभा महिला भलिबल चैंपियनशिप में नेपाल की कप्तानी करेंगी।

निरुता २८ वर्षीया हैं और नेपाल एपीएफ क्लब से घरेलू भलिबल खेल रही हैं। उन्हें फ्रेंचाइजी भलिबल में कप्तान का भी अनुभव है। एवरेस्ट महिला भलिबल लीग में लगातार दो सत्र मधेश यूनाइटेड की कप्तानी उन्होंने पूरी की है। सन २०१९ में बांग्लादेश के ढाका में सम्पन्न एविसी एशियन महिला सेंट्रल जोन चैंपियनशिप में पहली बार राष्ट्रीय टीम में शामिल होने के बाद डेब्यू प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक भी जिता था।

पिछली कप्तान अरुणा शाही ऑस्ट्रेलिया जाने के कारण नेपाल भलिबल संघ ने काभा महिला भलिबल चैंपियनशिप के लिए बुलाए गए २० खिलाड़ियों के बंद प्रशिक्षण में अरुणा को शामिल नहीं किया था। इस कारण महिला टीम को नई कप्तान मिलने की बात सुनिश्चित थी। निरुता ने २०१९ से नेपाली महिला भलिबल टीम की स्वर्णिम यात्रा को जारी रखा है। वह राष्ट्रीय टीम से एक स्वर्ण पदक, दो रजत पदक और एक कांस्य पदक जीत चुकी हैं।

दार्चुला से काठमांडू आकर त्रिभुवन आर्मी क्लब से भलिबल शुरू करने वाली निरुता ने स्कूल में विभिन्न खेल खेले थे। भलिबल में खास रुचि न होने के बावजूद खिलाड़ी निल अवस्थी के सुझाव ने उन्हें भलिबल खेलने के लिए प्रेरित किया। २०७२ साल में जिल्लास्तरीय राष्ट्रपति रनिंग शिल्ड में चयनित होने के बाद उसी वर्ष एसएलसी परीक्षा पूरी कर प्रदेश स्तरीय भलिबल खेलना शुरू किया।

‘भागबँटवारे के लिए गुटों की बैठक का कोई मतलब नहीं है’ – प्रदीप पौडेल

समाचार सारांश

  • नेपाली कांग्रेस के महामंत्री प्रदीप पौडेल ने प्रधानमंत्री की नीति एवं कार्यक्रम के प्रति गंभीरता न दिखाए जाने और संसद में उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया।
  • महामंत्री पौडेल ने कांग्रेस में समानांतर गतिविधियाँ और गुट बैठकों की स्थिति पर कड़ी आलोचना की और सभी असंतुष्ट नेताओं से समिति के अंदर चर्चा करने का आग्रह किया।
  • पौडेल ने कहा कि आगामी बजट जनता की अपेक्षाओं के अनुसार सुधार और सुशासन सुनिश्चित करते हुए लाना होगा।

मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के महामंत्री प्रदीप पौडेल ने सरकार की नीति एवं कार्यक्रम पर प्रधानमंत्री की गम्भीरता नहीं दिखाए जाने पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने संसद के प्रति प्रधानमंत्री की चरम उपेक्षा होने का भी आरोप लगाया है।

कांग्रेस में समानांतर गतिविधियाँ और गुट बैठकों के बीच महामंत्री पौडेल ने ‘शक्ति केंद्र बनाकर पार्टी में भागबँटवारा खोजने की प्रवृत्ति’ की कड़ी आलोचना की। कांग्रेस केन्द्रीय कार्यसमिति में हुए हालिया मनोनयन को विधानसम्मत बताया और सभी असंतुष्ट नेताओं से समिति के अंदर आकर चर्चा करने का आग्रह किया।

वर्तमान सरकार शक्तिशाली और जन अपेक्षित होने के कारण आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में कोई बहाना बनाने की जगह नहीं हैः महामंत्री पौडेल से हुई बातचीत से अंश:

सरकार ने हाल ही में नीति तथा कार्यक्रम जारी किया है। इसका नेपाली कांग्रेस ने कैसे स्वागत किया?

नीति तथा कार्यक्रम के आने के माहौल में कई प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने नीति तथा कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया। संसद में जब राष्ट्रपति ने नीति तथा कार्यक्रम पेश किया तो प्रधानमंत्री उपस्थित नहीं थे, जिससे उनकी प्रतिबद्धता का अभाव प्रतीत होता है।

नीति और कार्यक्रम पर चर्चा प्रधानमंत्री को संसद में जाकर करनी चाहिए और सवालों के जवाब देने चाहिए, लेकिन गम्भीरता नहीं दिखी। प्रधानमंत्री ने इसे हर साल की औपचारिकता मात्र माना है और संसद की अवहेलना की है।

संसद फिर बंद की गई, महत्वपूर्ण मुद्दे अध्यादेशों से लाए गए, उन्हें संसद के समक्ष लाने की इच्छा नहीं दिखी। राष्ट्रपति द्वारा वाचन हुआ, पर उस प्रक्रिया में न तो राष्ट्रपति का सम्मान देखने को मिला और न संसद का।

नीति और कार्यक्रम के विषय में भी जन समर्थन और अपेक्षा अनुरूप प्रगति नहीं दिखती। आशाओं और देश परिवर्तन की योजनाएँ नहीं हैं, केवल प्रस्तुति और प्रधानमंत्री के व्यवहार में विवाद हैं।

सरकार बनने के सौ दिन भी पूरे न हुए विपक्ष में इतना विरोध क्यों है?

सरकार के काम और व्यवहार से विरोध उत्पन्न होता है। सौ दिन भी पूरे न हुए विरोध के कई कारण सामने आ चुके हैं। यह विरोध सरकार की कमियों और खूबियों को दिखाता है। संसद और प्रक्रियाओं की अनदेखी तथा प्रधानमंत्री द्वारा संसद का उपेक्षा करना बेहद नकारात्मक है।

सरकार को विधि और प्रक्रियाओं के अनुसार ही काम करना चाहिए। विरोध से सरकार की कमजोरी स्पष्ट होती है। योगदान देने वालों और विरोध करने वालों दोनों के प्रति समान व्यवहार जरूरी है। अभी समय है परिपक्वता से काम करने का।

आगामी वित्तीय वर्ष का बजट कैसा होना चाहिए?

यह सरकार शक्तिशाली है और जनता का बड़ा विश्वास प्राप्त कर चुकी है। इसलिए आगामी बजट में जनता की अपेक्षानुसार सुधार और सुशासन लागू होना चाहिए। बजट में स्पष्ट सुधार योजनाएँ होनी चाहिए और शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसंरचना, सुरक्षा आदि सभी क्षेत्र शामिल होने चाहिए।

सुशासन केवल कम खर्च करके संभव नहीं है, बल्कि कार्यान्वयन और प्रतिबद्धता पर निर्भर है। पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि और महंगाई नियंत्रण के लिए स्पष्ट कार्यक्रम हो। स्वास्थ्य बीमा प्राथमिकता में होना चाहिए, जिसे सरकार को लेना जरूरी है।

बजट को दीर्घकालीन सुधार, असमानता घटाने और जनता के जीवनस्तर में सुधार लाने वाला बनाना होगा। पांच वर्षों के लिए स्थिर सरकार होने के कारण योजनाओं को निरंतरता मिलनी चाहिए और बहाना बनाने की अनुमति नहीं है।

प्रदेशों में कांग्रेस और एमाले के गठबंधन में खटपट की खबरें हैं?

प्रदेश और स्थानीय सरकारें गठबंधन की वजह से बनी हैं, जो अपरिहार्य है। लेकिन सरकार संचालन में कुछ बातों में संतुलन बनाना और सुधार जरूरी हैं। सरकार एक वर्ष में अच्छे संदेश के साथ काम करने की रणनीति बना रही है।

विभिन्न विवाद हो रहे हैं, पर मुख्य बात यह है कि गठबंधन टूटना नहीं चाहिए। सरकार में रहकर जनता के प्रति जवाबदेही वाली कार्यशैली पर केंद्रित हैं।

नेपाली कांग्रेस में असंतोष और गुटभेंट के संबंध में क्या कहा जाता है?

गुट और समूह होना नया नहीं है, लेकिन पार्टी का मुख्य लक्ष्य देश और जनता की सेवा है। गुटवाइयों से पार्टी कमजोर होती है। इसलिए असंतुष्ट नेताओं को समेटने और समस्या सुलझाने का प्रयास निरंतर चल रहा है।

नई समितियों में पुराने और अनुभवी नेताओं को शामिल करने की कोशिश हो रही है। विभाजन रोकने और पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सभी स्तरों पर चर्चा जारी है।

शक्ति केंद्र बनाकर भागबँटवारा खोजने की प्रवृत्ति को मिटाना जरूरी है। सभी एक साथ मिलकर समस्या सुलझाने को तैयार हैं। पार्टी युद्ध के लिए नहीं, विकास और नेतृत्व के लिए है।

मनोनीत नेताओं के बारे में क्या कहा गया?

मनोनीत नेताओं में योग्य और अभियान में लाये जा सकने वाले नेताओं को पार्टी में शामिल किया गया है। क्षमता और योगदान के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाती है। पार्टी में निर्णय सहमति से होते हैं, इसलिए विवाद से बचने की अपील की गई है।

शक्ति केंद्र बनाकर भागबँटवारा करना पार्टी के लिए हानिकारक है। हमारी कोशिश असंतुष्ट नेताओं और समूहों को पार्टी में शामिल करना है।

हाल ही में देउवा समूह द्वारा सम्पन्न बागमती प्रदेश स्तरीय बैठक और महाधिवेशन की तैयारियों के बारे में क्या कहा गया?

सहमति और साझा संयंत्र का निर्माण महाधिवेशन को निष्पक्ष और सफल बनाने के लिए जरूरी है। अचानक नई समिति बनाए बिना वर्तमान केन्द्रीय समिति के भीतर सहमति खोजने की नीति है। सभी वरिष्ठ नेताओं को शामिल करके सहमति और महाधिवेशन की तैयारी पर जोर दिया जा रहा है।

सदस्यता वृद्धि म्याद में पूरी नहीं हुई तो अधिवेशन में भागीदारी संभव नहीं है। नई सदस्यता नहीं, बल्कि पुराने सदस्यों का डिजिटल अपडेट जारी है। इससे पारदर्शिता और पार्टी संगठन मजबूत होगा।

मुख्य असंतुष्ट नेताओं को शामिल करने के प्रयास कैसे हैं?

उन नेताओं को साथ लाने का प्रयास चल रहा है। समिति में आकर सहयोग करने का अनुरोध है। पार्टी के अंदर एक जगह इकठ्ठा होकर सक्रिय और गतिशील बनाना अभियान देश भर में चल रहा है।

आंतरिक विवाद से ज्यादा पार्टी को आगे बढ़ाने का काम महत्वपूर्ण है। समय कम है, इसलिए जल्दी और प्रभावी महाधिवेशन की तैयारी की योजना है।

प्रदेशस्तरीय प्रशिक्षण और बैठक कार्यक्रमों में सहभागिता और भावना कैसी है?

निर्वाचन में पराजय और आंतरिक विवाद से साथियों में उत्साह कम है। पर अब पार्टी एकजुट होकर काम करने की ओर है। साथी मिलकर जनता के पक्ष में मजबूत भूमिका निभाने की भावना विकसित कर रहे हैं।

१३ भ्रातृ संगठनों के विघटन और नए नेतृत्व लाने के बारे में क्या कहा गया?

अधिक कार्य न होने के कारण भ्रातृ संगठनों की अवधि बढ़ाई नहीं गई। महिला संघ में नया नेतृत्व है, अन्य संगठनों में जल्द ही नए नेतृत्व के लिए चर्चा चल रही है। आवश्यक सहयोग और सहायता दी जाएगी।

अधिवेशन सम्पन्न न होने पर संगठन के विघटन की प्रक्रिया लागू हो सकती है।

नेपाल पुलिस के १४९ डीएसपी का एक साथ स्थानांतरण

नेपाल पुलिस ने १४९ पुलिस उप निरीक्षकों (डीएसपी) का एक साथ स्थानांतरण किया है। नेपाल पुलिस मुख्यालय के मानव संसाधन विकास शाखा ने शुक्रवार को डीएसपी के तबादले की जानकारी दी। १ जेठ, काठमांडू। इस स्थानांतरण में किस डीएसपी को कहाँ स्थानांतरित किया गया है, इसका विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

रामकृष्ण श्रेष्ठ बने दक्षिण एशियाई भारोत्तोलन महासंघ के महासचिव

नेपाल भारोत्तोलन संघ के अध्यक्ष रामकृष्ण श्रेष्ठ भारत के गांधीनगर में आयोजित सामान्य सभा के माध्यम से दक्षिण एशियाई भारोत्तोलन महासंघ के महासचिव पद पर निर्वाचित हुए हैं। श्रेष्ठ नेपाल ओलंपिक समिति के सचिव भी हैं और उन्होंने यह जिम्मेदारी नेपाली भारोत्तोलन के विकास में लगाने का संकल्प जताया है।

सामान्य सभा ने भारत के डॉ. सहदेव यादव को अध्यक्ष के रूप में चुना है, जो भारत भारोत्तोलन महासंघ के अध्यक्ष भी हैं। इसी प्रकार, मालदीव के इब्राहिम हमीद को प्रथम उपाध्यक्ष तथा श्रीलंका के संका रतनायके को उपाध्यक्ष के पद पर चयनित किया गया है। महासचिव पद पर चयनित होने के बाद श्रेष्ठ ने यह जिम्मेदारी नेपाली भारोत्तोलन के विकास पर केन्द्रित करने का प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

उन्होंने कहा, ‘मैं नेपाली भारोत्तोलन के लिए अधिक से अधिक अवसर तलाशूंगा। वर्तमान में दूसरे दक्षिण एशियाई भारोत्तोलन प्रतियोगिता को नेपाल में आयोजित करने का दावा मैं कर चुका हूँ और इस पर सभी लोगों ने सहमति भी जताई है।’

नेपाल प्रहरीका ४६ एसपीको एकैसाथ सरुवा (सूचीसहित) – Online Khabar

नेपाल पुलिस के 46 एसपी का एक साथ तबादला (सूची सहित)

नेपाल पुलिस के 46 पुलिस उपरीक्षक (एसपी) का एक साथ तबादला किया गया है। नेपाल पुलिस मुख्यालय मानव संसाधन विकास शाखा ने शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी दी है। इस तबादले में विभिन्न स्थानों पर कार्यरत एसपी को नई जिम्मेदारी दी गई है। 1 जेठ, काठमांडू।

सर्लाही में ईंट भट्टे की दीवार गिरने से तीन मजदूरों की मौत, दो घायल

समाचार सारांश

सम्पादकीय रूपमा समीक्षा गरियो।

  • सर्लाही के हरिपुर नगरपालिका-5 के कृष्ण ईंट उद्योग में दीवार गिरने से तीन मजदूरों की मौत हो गई और दो घायल हुए हैं।
  • मृतकों में गोडैता नगरपालिका-7 के 50 वर्षीय फिताई मंसूर, गोडैता-9 के 35 वर्षीय शम्भु राउत और भारत के लखीमपुर के 35 वर्षीय अंगद कुमार शामिल हैं।
  • पुलिस ने बताया कि शाम 6:30 बजे बचाव किया गया और घायल को प्रादेशिक अस्पताल मलंगवा भेजा गया, साथ ही जेसीबी के माध्यम से खोज और हटाने का कार्य जारी है।

1 जेठ, जनकपुरधाम। सर्लाही जिले के हरिपुर नगरपालिका-5 स्थित कृष्ण ईंट उद्योग में ईंट निकालते समय एक दीवार गिरने से तीन मजदूरों की मृत्यु हो गई और दो लोग घायल हो गए।

इलाका पुलिस कार्यालय हरिपुर के अनुसार शुक्रवार शाम लगभग 6 बजे कौडेना बाजार निवासी बिरेन्द्र चौधरी के कृष्ण ईंट उद्योग में ईंट निकालते वक्त दीवार गिर गई, जिससे मजदूर दब गए।

मृतकों में गोडैता नगरपालिका-7 रामवन के 50 वर्षीय फिताई मंसूर, गोडैता नगरपालिका-9 के 35 वर्षीय शम्भु राउत और भारत के लखीमपुर के 35 वर्षीय अंगद कुमार शामिल हैं, जो पुलिस ने पुष्टि की है।

चिकित्सा परीक्षण में उन्हें मृत घोषित किया गया। इसके अलावा मलंगवा नगरपालिका-7 के 32 वर्षीय तुलसी महतो और 52 वर्षीय सत्यनारायण महतो घायल हो गए हैं।

तुलसी महतो का उपचार प्रादेशिक अस्पताल मलंगवा में जारी है, जबकि सत्यनारायण महतो स्थानीय क्लिनिक मजुर्वा में उपचाराधीन हैं, पुलिस ने बताया।

सर्लाही पुलिस ने बताया कि शाम 6:30 बजे सूचना मिलने पर तुरंत घटनास्थल पहुंच कर बचाव कर घायल मजदूरों को प्रादेशिक अस्पताल मलंगवा भेजा गया।

घटनास्थल पर जेसीबी का उपयोग कर और खोज बीन तथा सफाई का कार्य जारी है, पुलिस ने कहा।

सदन बोलाएर विश्वासको मत लिनबाट किन ब्याक भए मधेशका मुख्यमन्त्री ?

मधेश के मुख्यमन्त्री ने क्यों की सदस्यसभा बुलाने से वापसी जबकि विश्वास मत लेना था आवश्यक?

समाचार सारांश

संपादकीय रुप से समीक्षा किया गया।

  • मधेश प्रदेशसभा की बैठक में मुख्यमन्त्री यादव ने विश्वास मत लेने से पीछे हटते हुए आगामी जेठ 8 को विश्वास मत लेने की तैयारी की है।
  • जनमत पार्टी ने विश्वास मत लेने के प्रस्ताव को वापस लिए जाने पर आपत्ति जताते हुए सभामुख की भूमिका पर सवाल उठाया है।
  • जसपा नेपाल और लोसपा के एकीकरण से जसपा नेपाल मधेश प्रदेशसभा का सबसे बड़ा दल बन गया है, जिससे सरकार में असंतोष उभर रहा है।

1 जेठ, जनकपुरधाम। शुक्रवार सुबह 11 बजे मधेश प्रदेशसभा की बैठक मुख्यमन्त्री कृष्णप्रसाद यादव से विश्वास मत लेने के लिए बुलाई गई थी।

जनमत पार्टी ने 21 वैशाख को अपना समर्थन वापस लेने के बाद प्रदेश प्रमुख ने सरकार के सिफारिश पर सातवें अधिवेशन की पहली बैठक आह्वान की थी। लेकिन 11 बजे बुलाए गए सदन में असमंजस देखी गई। मुख्यमन्त्री यादव ने विश्वास मत लेने से पीछे हट गए।

फिर भी, बैठक दोपहर 3 बजे से सातवें अधिवेशन की पहली बैठक के रूप में चलने लगी, पर मुख्यमन्त्री ने विश्वास मत नहीं लिया।

इसके मुख्य कारणों में अपनी ही पार्टी नेपाली कांग्रेस के भीतर असंतुष्टों द्वारा फ्लोर क्रास करने का खतरा बताया गया है। कांग्रेस के एक नेता के अनुसार, सभापति गगन थापा और नेता डॉ. शेखर कोइराला पक्ष के सात प्रदेश सांसदों के फ्लोर क्रॉस की संभावना से मुख्यमन्त्री यादव ने विश्वास मत न लेने का निर्णय किया।

मुख्यमन्त्री यादव ने विश्वास मत न लेने का दूसरा कारण सत्ता गठबंधन में तनाव बताया है। सत्ता साझेदार जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल ने संसदीय दल की बैठक में विश्वास मत देने का निर्णय नहीं किया था। इसलिए उन्होंने कार्यव्यवस्था परामर्श समिति में विश्वास मत लेने का प्रस्ताव वापस लिया।

आगामी जेठ 8 को विश्वास मत लेने की तैयारी कांग्रेस के प्रमुख सचेतक कुमारकांत ने बताई है। वहीं बैठक को मनमाना तरीके से बुलाकर अपना प्रस्ताव वापस लेने पर जनमत पार्टी ने आपत्ति व्यक्त की है।

जनमत के सांसद संजय कुमार यादव ने ‘छापामार शैली’ में नियमावली के विपरीत कार्यसूची में बदलाव का आरोप लगाया है। उन्होंने सभामुख की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘हमें 11 बजे बैठक बुलाई जाती है और 12 बजे कार्यव्यवस्था समिति की बैठक में पता चलता है कि मुख्यमन्त्री ने विश्वास मत देने का प्रस्ताव वापस ले लिया है। प्रस्ताव वापस लेने का अधिकार है, लेकिन मनमानी तरीके से प्रस्ताव वापस लेना आज दिखा।’

गठबंधन के अंदर सरकार के प्रदर्शन को लेकर गहरा असंतोष है, जो सदन में भी दिखा। सत्तासाझेदार दल ने उपभोक्ता समिति के माध्यम से योजनाओं के चिट्ठी बिक्री- वितरण पर असंतोष जाहिर किया है।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) की प्रदेश सांसद बेची लुङ्गेली ने आरोप लगाया कि योजनाओं की चिट्ठी खुलेआम बेची जा रही है। ‘मंत्रालय की योजनाओं की चिट्ठी खुलेआम बिक्री हो रही है। यदि यह स्थिति जारी रही तो सरकार आधिकारिक कार्यालय खोलकर डाक वितरण के माध्यम से भी योजना बेच सकती है,’ उन्होंने कहा।

जसपा नेपाल चुनाव के समय से ही मधेश-केंद्रित दलों के साथ मिलकर अपने नेतृत्व में सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। यही कारण है कि जनमत पार्टी सरकार से बाहर हो गई। जनमत के समर्थन वापस लेने के दूसरे दिन जसपा नेपाल भी विश्वास मत लेने की तैयारी में था लेकिन नेतृत्व ने तुरंत सरकार न छोड़ने का निर्देश देकर इसे रोका। जसपा नेपाल अनुकूल समय की प्रतीक्षा कर रहा है। सरकार को लेकर जसपा के अंदर दो धड़े नजर आते हैं।

लोसपा नेपाल के साथ एकीकरण ने जसपा नेपाल को सदन का सबसे बड़ा दल बना दिया है। इसलिए अपने नेतृत्व में सरकार बनाने की मांग बढ़ रही है। दोनों दलों के बीच एकता बुधवार को कानूनी मान्यता भी प्राप्त कर चुकी है।

यद्यपि लोसपा कानूनी रूप से जसपा में विलीन हो गया है, संयुक्त बैठक अभी तक नहीं हो पाई। जसपा नेपाल के एक सांसद ने कहा, ‘बैठक होकर सरकार को लेकर निर्णय लेकर सभी को एकमत होकर विश्वास मत देना चाहिए। कानूनी रूप से संयुक्त हैं लेकिन बैठक न होने के कारण निर्णय नहीं हो पाया।’

इसी वजह से सातवें अधिवेशन की पहली बैठक में जसपा नेपाल और लोसपा के अलग-अलग प्रतिनिधि शुभकामनाएं दे रहे थे। जसपा नेपाल के पूर्व मुख्यमन्त्री लाल बाबू राउत ने संदेश दिया जबकि लोसपा की रमिता प्रधान ने भाषण दिया।

संसद का समीकरण

107 सदस्यीय मधेश प्रदेशसभा में 25 सांसदों के साथ जसपा नेपाल सबसे बड़ा दल बन चुका है। जसपा नेपाल के 17 और लोसपा के 8 सांसद निर्वाचित हुए थे।

पहले सबसे बड़ा दल नेकपा एमाले के 24 सांसद थे, कांग्रेस के 22, नेकपा के 15, जनमत के 12 तथा राप्रपा और संघीय समाजवादी के एक-एक सांसद हैं।

वैशाख 27 को सत्ता साझेदार कांग्रेस, जसपा नेपाल, नेकपा और लोसपा ने वर्तमान सरकार को निरंतरता देने का फैसला किया था। इसके तहत मुख्यमन्त्री यादव से यथाशीघ्र विश्वास मत लेने को कहा गया था।

लेकिन शुक्रवार तक स्थिति कुछ अस्थिर दिखी, जिसे मुख्यमन्त्री यादव ने महसूस किया। हालांकि किसी भी सत्तारूढ़ दल ने वर्तमान सरकार का विकल्प चुने जाने का निर्णय नहीं लिया है।

जसपा नेपाल के नेता और पूर्व मुख्यमन्त्री लाल बाबू राउत ने कहा, ‘जसपा नेपाल इस समय वर्तमान सरकार को ही निरंतरता देगा और समर्थन करेगा।’ उन्होंने कहा, मुख्यमन्त्री यादव आज सहज महसूस नहीं कर रहे हैं इसलिए अगले दिन विश्वास मत लेने का निर्णय लिया गया।

मुख्यमन्त्री यादव ने विश्वास मत लेने की तारीख आगे बढ़ाने के पीछे पार्टी केंद्र के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। नेकपा के एक सांसद के अनुसार कांग्रेस, एमाले और नेकपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच सातों प्रदेशों में समीकरण बनाते हुए आगे बढ़ने की चर्चा जारी है।

मधेश में अलग समीकरण होने के बावजूद अन्य प्रदेशों में कांग्रेस-एमाले गठबंधन की सरकारें हैं। वर्तमान में उन सरकारों में नेकपा को भी शामिल करते हुए पुनर्गठन की तैयारी की जा रही है, सूत्रों ने बताया।

कैलाली में कांग्रेस देउवा पक्ष द्वारा सदस्यता अद्यतन का विरोध

१ जेठ, धनगढी। कैलाली में नेपाली कांग्रेस के निवर्तमान सभापति शेरबहादुर देउवा के पक्ष ने क्रियाशील सदस्यता अद्यतन करने के निर्णय का विरोध किया है। जिला सभापति नारायणदत्त भट्ट सहित अन्य नेताओं ने इस निर्णय को अनुचित बताते हुए विरोध जताया है। सदस्यता अद्यतन अभियान के तहत केन्द्रीय कार्यसमिति ने जगतप्रसाद जोशी को कैलाली तैनात किया है। उन्होंने शुक्रवार को कैलाली के नेताओं के साथ विचार-विमर्श के लिए बैठक बुलाई थी, लेकिन सभापति भट्ट समेत नेताओं ने चर्चा से इनकार कर दिया।

इसके बाद कैलाली निर्वाचन क्षेत्र संख्या ५ के क्षेत्रीय सभापति भीम पडाल की अध्यक्षता में नेता दोपहर में पार्टी कार्यालय में बैठक करने पहुंचे। हालांकि, पार्टी सभापति भट्ट के निर्देश पर कार्यालय सचिव प्रयागराज जोशी ने पार्टी कार्यालय बंद कर दिया। सभापति गगन थापा के समर्थक नेताओं ने जिला सभापति भट्ट पर कार्यालय बंद कराने का आरोप लगाया है। कार्यालय बंद होने के कारण, क्षेत्रीय सभापति की अध्यक्षता में धनगढी के एक होटल में बैठक सम्पन्न हुई।

“क्या पार्टी कार्यालय केवल जिला सभापति की निजी संपत्ति है? क्या सभापति के अलावा किसी को वहाँ बैठक करने या प्रवेश करने की अनुमति नहीं है?” क्षेत्रीय सभापति पडाल ने कहा, “यह सभापति की अव्यवस्थापूर्ण और गैरजिम्मेदाराना हरकत है।” कार्यालय बंद होने के बाद बैठक ने क्रियाशील सदस्यता अद्यतन के लिए सभी नेता एवं基层 कार्यसमिति के साथ समन्वय करने का निर्णय लिया। “सदस्यता अद्यतन के लिए वार्ड समितियों को पर्याप्त समय नहीं मिला है,” उन्होंने कहा। जिला सभापति भट्ट ने कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यालय बंद करने का कोई निर्देश नहीं दिया है और कार्यालय सचिव बाहर होने के कारण कार्यालय बंद हो सकता है।