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लेखक: space4knews

ट्राफिक कारबाहीमा २४ घण्टामा २० लाख ३९ हजार राजस्व सङ्कलन

२४ घंटे में ट्रैफिक कार्रवाई से २० लाख ३९ हजार रुपये राजस्व संग्रहित

२ जेठ, काठमाडौं। पिछले २४ घंटे में लगभग दो हज़ार २०० यातायात चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई में पकड़े गए हैं। इससे सरकार ने २० लाख ३९ हजार रुपये का राजस्व एकत्रित किया है। काठमाडौँ उपत्यका ट्राफिक प्रहरी कार्यालय के अनुसार, शराब पीकर वाहन चलाने वाले १६८, नियमों के विपरीत ‘राइड शेयरिंग’ करने वाले १५५, संकेत बत्ती का उल्लंघन करने वाले १३७ और अत्याधिक गति से वाहन चलाने वाले १५२ चालकों को कार्रवाई की गई है।

इसी प्रकार, ‘लेन’ अनुशासन का पालन न करने वाले १०२, निषिद्ध क्षेत्रों में हॉर्न बजाने वाले १७८, सड़क की पट्टी में वाहन पार्किंग करने वाले १२३, एकतरफा सड़क में वाहन चलाने वाले ११३ और अन्य विभिन्न यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले एक हजार ७२ चालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

टस जितकर अमेरिका ने नेपाल के खिलाफ पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया

२ जेठ, काठमाडौं । लिग २ के तहत आज हुए मुकाबले में अमेरिका ने नेपाल के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया है। अमेरिका ने टॉस अपने पक्ष में लेते हुए नेपाल को गेंदबाजी करने का मौका दिया। इस मैच में नेपाल के डॉ. ईशान पांडे अपना पहला वनडे डेब्यू कर रहे हैं। उन्हें करण केसी ने डेब्यू कैप प्रदान की है। डॉ. पांडे ने २०१९ में टी-२०आई डेब्यू कर चुके हैं और अब तक ४ टी-२०आई मैच खेल चुके हैं। उन्होंने घरेलू टूर्नामेंट जय ट्रॉफी और पीएम कप के साथ-साथ नेपाल ए टीम की तरफ से भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यह मैच टियू क्रिकेट मैदान में जारी है। आज के मैच में विनोद भण्डारी, अर्जुन कुमाल और करण केसी रिजर्व पर हैं।

नेपाली क्रिकेटर अंतिम समय में दबाव क्यों झेलने में नाकाम हो रहे हैं?

फिर एक बार वही घटना दोहराई गई। आईसीसी क्रिकेट विश्वकप लीग २ के स्कॉटलैंड के खिलाफ मैच में गुलशन झा अंतिम समय में दबाव झेलने में असफल रहे, जिससे नेपाल दो रन से हार गया। खास बात यह है कि हाल के कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय मैचों में हार के समय भी बल्लेबाजी क्रीज पर गुलशन झा ही थे। इसलिए उनकी चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। समर्थक आलोचना और समर्थन दोनों ही पक्षों में बहस कर रहे हैं।

दरअसल क्रिकेट का सुकून ही तब है जब मैच अंतिम ओवर तक जाता है। हालांकि बार-बार ऐसी गलतियां होने पर यह सवाल उठता है – नेपाली खिलाड़ी बड़े टीमों के खिलाफ दबाव क्यों सहन नहीं कर पा रहे? राष्ट्रीय टीम के पूर्व खिलाड़ी दीपेन्द्र चौधरी कहते हैं, “खिलाड़ियों द्वारा उस वक्त लिए गए निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसे ‘निर्णय क्षमता’ कहा जाता है।” नेपाली खिलाड़ियों की दबाव सहने और सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता में कहाँ कमी आ रही है, यही आज मुख्य बहस का विषय बना हुआ है।

गुलशन के संदर्भ में बात करें तो पिछले तीन बड़े मैचों को देखें। 2024 में अमेरिका/वेस्ट इंडीज टी20 विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ केवल एक रन की हार नेपाली क्रिकेट प्रशंसकों के लिए कभी न भूलने वाला अनुभव रहा। उस समय क्रीज पर गुलशन ही थे। एक रन लेने का मौका मिलने के बावजूद वह अत्यंत तनावपूर्ण क्षण में चूक गए थे। दो महीने पहले मुंबई टी20 विश्वकप में इंग्लैंड के खिलाफ 4 रन की हार भी एक बड़ा उदाहरण है, जिसमें लोकेश बम अंतिम समय में दबाव झेलने में विफल रहे। उस मैच में करण केसी ने स्ट्राइक लोकेश को दी और पिछली गेंद पर गुलशन झा बोल्ड हो गए थे।

बेल्जियम ने लुकाकु को शामिल करते हुए फीफा विश्व कप 2026 के लिए टीम घोषित की

बेल्जियम ने फीफा विश्व कप 2026 के लिए 26 सदस्यीय अंतिम टीम की घोषणा की है। चोट से जूझ रहे रोमेलु लुकाकु भी इस टीम में शामिल हैं। थिबाउट कोर्टवा, केविन दे ब्रूने और एक्सेल विटसल को चौथी बार विश्व कप में खेलने का मौका मिला है।

2 ज्येष्ठ, काठमांडू। बेल्जियम ने रोमेलु लुकाकु को अपनी टीम में शामिल करते हुए फीफा विश्व कप 2026 के लिए अंतिम टीम का एलान किया है। रेड डेविल्स के नाम से प्रसिद्ध बेल्जियम ने शुक्रवार को 26 सदस्यीय टीम सार्वजनिक की। मुख्य कोच रुडी गार्सिया ने लुकाकु को ‘आउट ऑफ शेप’ बताया बावजूद इसके उन्हें टीम में स्थान दिया गया है। चोट के कारण लुकाकु पिछले सीजन में केवल 69 मिनट ही मैदान पर खेल सके थे।

लुकाकु के अलावा थिबाउट कोर्टवा, केविन दे ब्रूने और एक्सेल विटसल भी चौथी बार विश्व कप खेलने वाले अनुभवी खिलाड़ी हैं। बेल्जियम की टीम में गोलकीपर के तौर पर थिबाउट कोर्टवा, सेने लामेन्स और माइक पेन्डर्स चुने गए हैं। डिफेंडर के रूप में टिमोथी कास्टाग्ने, जेनो डेबास्ट, मैक्सिम डे क्यूपर, कोनी डे विन्टर, ब्रांडन मेचेल, थोमस मुनियर, नाथान एगोए, जैक्विन सेयस और आर्थर थिएट शामिल हैं। मिडफील्डर में केविन दे ब्रूने, अमादोऊ ओनाना, निकोलस रास्किन, युरी थिएलमन्स, हांस वानाकेन् और एक्सेल विटसल मौजूद हैं। फॉरवर्ड में चार्ल्स दे केटेलाएरे, जेरेमी डोकु, मैथियास परनांडेज, रोमेलु लुकाकु, डोडी लुकबाकियो, डिएगो मोरेइरा, एलेक्सिस सायलमेकर्स और लियांड्रो ट्रोसार्ड शामिल हैं।

करेन्ट लगाएर मारेको आशंका – Online Khabar

पूर्वी नवलपरासी में गैँडा मृत पाया गया, करंट लगने से मौत की आशंका

पूर्वी नवलपरासी के कावासोती नगरपालिका १ स्याउली टोला में मृत अवस्था में पाए गए गैँडे को करंट लगाकर मारे जाने की आशंका जताई गई है। चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज से आए तकनीकी टीम ने मृत गैँडे का पोस्टमार्टम किया है और उसकी रिपोर्ट आज शाम तक आने की बात कही गई है। इस चालू आर्थिक वर्ष में निकुञ्ज और आसपास के क्षेत्रों में २० गैँडे विभिन्न कारणों से मरे हैं और गैँडा गणना २०८३ में स्थगित कर दी गई है। २ जेठ, चितवन।

पूर्वी नवलपरासी के कावासोती नगरपालिका १ स्याउली टोला में शुक्रवार सुबह मृत पाए गए गैँडे को करंट लगाकर मारे जाने की संभावना है। पूर्व-पश्चिम राजमार्ग से लगभग २ किलोमीटर उत्तर में भीम प्रसाद दर्जी के स्वामित्व वाले ऐलानी खेत के भीतर लगभग २५ वर्षीय नर गैँडा मृत पाया गया। गैँडा के मृत होने के पास विद्युत धराप के लिए उपयोग किए जाने वाले सामग्री भी डिविजन वन कार्यालय पूर्व नवलपरासी द्वारा बरामद किए गए हैं।

मृत गैँडे को डिविजन वन कार्यालय लेकर, चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज से आए तकनीकी दल ने पोस्टमार्टम किया। निकुञ्ज के सूचना अधिकारी अविनाश थापामगर ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आज शाम तक आएगी। पोस्टमार्टम के बाद गैँडा की एक खाल और १२ खुर सुरक्षित रूप से निकाले गए हैं, जबकि बाकी अंगों को डिविजन वन कार्यालय नवलपुर परिसर के भीतर गड्ढा खोदकर व्यवस्थित किया गया है। घटना स्थल के आसपास तलाशी के दौरान मृत गैँडे के स्थान से लगभग २०० मीटर दक्षिण में लोकाहा खोल के काँसघारी क्षेत्र में जिआई तार से बंधे २७ बाँस के खंभे छुपाए हुए मिले।

इसी तरह, घटना स्थल के उत्तर-पश्चिम दिशा में एक घर से सिंगल फेज विद्युतीय रिंग सहित लगभग १३ मीटर तार भी बरामद हुआ है। घटना स्थल से मिले साक्ष्य और परिस्थितियों से प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है कि गैँडे की मौत करंट लगने से हुई है। इसी आधार पर घटना स्थल की भोगचलन करने वाले दर्जी को हिरासत में लेकर जांच की जा रही है। डिविजन वन कार्यालय ने घटना की और जांच के लिए एक जांच अधिकारी नियुक्त कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की है, सूचना अधिकारी सुवास अधिकारी ने बताया।

निकुञ्ज के सूचना अधिकारी थापामगर के अनुसार चालू आर्थिक वर्ष के बैशाख तक निकुञ्ज एवं आसपास के क्षेत्रों में २० गैँडे विभिन्न कारणों से मरे हैं। इस आर्थिक वर्ष में गैँडा गणना का कार्यक्रम था, लेकिन समय की कमी के कारण इसे अगले वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया है। बजट की कमी के कारण पिछले वर्ष २०८१ में होने वाली गैँडा गणना २०८२ में टाली गई थी और २०८२ में फिर से समय कम होने की वजह से इसे २०८३ में स्थानांतरित कर दिया गया है। प्रत्येक चार वर्ष में होने वाली गैँडा गणना पिछली बार २०७७ चैत ९ से २७ तक हुई थी। सन् २०२१ में हुई इस गणना में देश के सभी राष्ट्रीय निकुñज और संरक्षण क्षेत्रों में कुल ७५२ गैँडों की संख्या दर्ज हुई थी, जिनमें से चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज में ही ६९४ गैँडे पाए गए।

सिन्धुपाल्चोक के गंजेखोला से १६२० भेप सामान सहित ७ गिरफ्तार

२ जेठ, काभ्रेपलाञ्चोक। सिन्धुपाल्चोक के भोटेकोशी गाउँपालिका-३ गंजेखोला से ५६ लाख ७० हजार मूल्य के १६२० भेप साथ सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जेठ १ की रात ९:३० बजे इलाका प्रहरी कार्यालय कोदारी की कमान में पुलिस निरीक्षक जगतबहादुर राई के नेतृत्व में छानबीन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि भोटेकोशी-३ बोक्चेन होते हुए चीन से अरनिको राजमार्ग के १० किलोमीटर नज़दीक भित्रिबाटो क्षेत्र से छुपाकर लाई गई भेप पाई गई।

पुलिस निरीक्षक राई के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों में सिन्धुपाल्चोक के भोटेकोशी-४ के ३५ वर्षीय गणेश खड्का, ४६ वर्षीय हिमाल खड्का, २४ वर्षीय विकास बि.क, ४८ वर्षीय रामबहादुर बि.क, १७ वर्षीय विशाल रक्पाल, ३७ वर्षीय मंगलबहादुर थामी तथा बाह्रबिसे नगरपालिका-५ के ४२ वर्षीय कान्छा तामाङ शामिल हैं। सभी को इलाका प्रहरी कार्यालय कोदारी में रखा गया है।

नेपाल-चीन सीमा पर स्थित तातोपानी नाका से पिछले एक महीने से यात्रु शाखा द्वारा किसी भी खाद्य सामग्री के आयात की अनुमति नहीं दी जा रही है। तातोपानी भन्सार कार्यालय ने मितेरीपुल स्थित यात्रु शाखा से बिना खाद्य एवं प्लांट क्वारंटाइन अनुमति के सामग्री आयात पर रोक लगा दी है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र का झोलेपोके व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। स्थानीय लोग सुबह जल्दी चीनी बाजार झामु जाते हैं और शाम को सामान लेकर लौटते हैं, लेकिन सरकारी नियम लागु होने से यह गतिविधियाँ अब रुकने लगी हैं।

ताइवान की स्वतंत्रता की घोषणा नहीं करेगा, फिर भी ट्रम्प की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ताइवान को चीन से औपचारिक स्वतंत्रता घोषित न करने की चेतावनी दी है। बीजिंग में अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ दो दिवसीय शिखर बैठक के समापन के बाद शुक्रवार को फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में ट्रम्प ने कहा, “मैं किसी को भी स्वतंत्रता की घोषणा करता नहीं देखना चाहता।” ताइवान पहले ही अपनी स्वतंत्र राष्ट्र होने की धारणा रखता है, इसलिए औपचारिक स्वतंत्रता घोषणा आवश्यक नहीं है, ऐसा ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन भी पहले ही कह चुके हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका लंबे समय से ताइवान का समर्थन करता आ रहा है, जिसमें आत्मरक्षा के लिए ताइवान की सहायता करना कानूनी रूप से बाध्यकारी है। इसके साथ ही, वाशिंगटन अक्सर चीन के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखकर इस गठबंधन को संतुलित करने का प्रयास करता है। अमेरिकी नीति जस की तस बनी हुई है, ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने ताइवान के इस स्वशासित द्वीप के प्रति “कोई प्रतिबद्धता प्रकट नहीं की है”। चीन ताइवान को अपनी प्रांत मानता है और आवश्यक होने पर बल प्रयोग करके कब्जा करने की इच्छा को अस्वीकार नहीं करता।

वाशिंगटन की स्थिति यह है कि वह ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता और चीनी सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार मानता है। बीजिंग ने ताइवान के राष्ट्रपति की खुलेआम आलोचना की है। इससे पहले ताइवान के राष्ट्रपति की व्यक्तिगत छवि को सार्वजनिक रूप से नकारात्मक रूप में भी प्रस्तुत किया गया था। ताइवान के कई निवासी खुद को एक अलग राष्ट्र का हिस्सा मानते हैं। अधिकांश जनता वर्तमान स्थिति का समर्थन करती है जिसमें न तो ताइवान स्वतंत्रता की घोषणा करता है और न ही चीन के साथ एकता करता है।

फॉक्स न्यूज को दिए गए इंटरव्यू में ट्रम्प ने ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं होने की पुष्टि की। “आप जानते हैं, युद्ध करने के लिए हमें 9,500 माइल (15,289 किलोमीटर) की दूरी पार करनी होगी। मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि वे शांत रहें। मैं चाहता हूं कि चीन शांत रहे।” ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ इस द्वीप को लेकर कई बातें की हैं। लेकिन अमेरिका ने ताइवान के संरक्षण के लिए कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है। राष्ट्रपति ट्रम्प के अनुसार शी जिनपिंग इस मुद्दे पर “बेहद सख्त” हैं और “स्वतंत्रता के लिए किसी भी प्रकार के आंदोलन को नहीं देखना चाहते”।

ओडीआईमा इशान पाण्डेको डेब्यू – Online Khabar

ओडीआई में डॉ. इशान पांडे का पहला प्रदर्शन

२ जेठ, काठमाण्डौ। डॉ. इशान पांडे आज लिग २ के अंतर्गत अमेरिका के खिलाफ अपना ओडीआई डेब्यू कर रहे हैं। मैच शुरू होने से पहले ही उन्हें करण केसी से डेब्यू कैप प्राप्त हुआ है। उन्होंने २०१९ में टी-२०आई में डेब्यू किया था और अब तक ४ टी-२०आई खेल चुके हैं। घरेलू प्रतियोगिताओं जैसे जय ट्रॉफी, पीएम कप और नेपाल ए टीम के लिए उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आज के मैच में पिछले मुख्य खिलाड़ी विनोद भंडारी, अर्जुन कुमाल और करण केसी को बेंच पर रखा गया है।

मुग्लिन सड़क खंड में ‘लिडार स्पीड गन’ का उपयोग कर तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई

२ जेठ, मुग्लिन (चितवन) । ट्रैफिक पुलिस ने तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से नेपाल पुलिस के राजमार्ग सुरक्षा तथा ट्रैफिक प्रबंधन कार्यालय, रामनगर चितवन ने नारायणगढ–मुग्लिन सड़क खंड में ‘लिडार स्पीड गन’ तकनीक का उपयोग शुरू किया है। जोखिमपूर्ण क्षेत्र माने जाने वाले रामनगर–जुगेडी इलाके के जंगल के आस-पास रोजाना जांच अभियान संचालित करते हुए ट्रैफिक पुलिस तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले चालकों को नियंत्रण में लेना शुरू कर चुकी है। सड़कों पर तेज रफ्तार को दुर्घटना का मुख्य कारण मानते हुए आधुनिक तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा दिया गया है, इस बारे में कार्यालय प्रमुख डिल्लीनारायण पाण्डे ने जानकारी दी। बरसात के मौसम में सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ने के कारण यह प्रणाली प्रभावी साबित होने की उम्मीद है। पहले दिन ही निर्धारित मापदंडों के विपरीत तेज रफ्तार से वाहन चलाने वाले ६० से अधिक चालकों को कार्रवाई के तहत लाया गया, कार्यालय प्रमुख पाण्डे ने बताया। कर्णाली प्रदेश के सभी १० जिलों के सड़क खंडों में जहां दुर्घटनाएं अधिक होती हैं, वहां भी क्रमशः नियमित जांच चलाने की योजना है, उन्होंने कहा।

जेन जि आन्दोलन: छानबिन आयोग की रिपोर्ट अध्ययन प्रक्रिया कैसी है?

जेन जि आन्दोलन के दौरान हुई घटनाओं से संबंधित छानबिन आयोग द्वारा सुरक्षा तंत्र के सदस्यों के बारे में की गई सिफारिशों का अध्ययन करने के लिए गठित समिति का कार्यकाल आधा पूरा हो चुका है। समिति का नेतृत्व उच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश प्रेमराज कार्की कर रहे हैं, जबकि सदस्य के रूप में नेपाल पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक टेकप्रसाद राई और सशस्त्र प्रहरी बल के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक सुबोध अधिकारी शामिल हैं। पूर्व पुनरावेदन अदालत के न्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व में गठित इस आयोग की रिपोर्ट ने व्यापक विवाद उत्पन्न करने के बाद सरकार ने इस अध्ययन समिति का गठन किया है। समिति ने आयोग की रिपोर्ट में दी गई कारवाई की सिफारिशों को वर्गीकृत कर गहन अध्ययन करना शुरू कर दिया है, जैसा कि अध्यक्ष अधिकारी ने बताया।

समिति के संयोजक प्रेमराज कार्की कहते हैं, “हम सिफारिशों की प्रकृति, संबंधित व्यक्तियों के बयान और उद्धृत कानूनी प्रावधानों के आधार पर अलग-अलग तरह से अध्ययन कर रहे हैं।” समिति को छानबिन आयोग के प्रस्तुत रिपोर्ट में शामिल सुरक्षा तंत्र के पदाधिकारियों और सुरक्षा समिति में कार्यरत निजामती कर्मचारियों से जुड़ी सिफारिशों पर प्रचलित कानून के अनुसार और जांच कर सत्य तथ्य उजागर करने का दायित्व सौंपा गया है। आयोग की सिफारिशों को पूर्णता प्रदान करने वाली इस प्रक्रिया से सुरक्षा निकायों के अधिकारियों के विरुद्ध कारवाई का मार्ग खुलने की संभावना है, इसलिए इसके अध्ययन के नतीजों को बड़ी संवेदनशीलता से आगे बढ़ाने का विश्वास व्यक्त किया गया है।

संयोजक कार्की ने कहा, “कारवाई के लिए सिफारिश किए गए विभिन्न व्यक्ति और पक्षों से आवश्यक जानकारी एकत्रित करने का कार्य चल रहा है।” “हम रिपोर्ट की सिफारिशों का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं और अधिक तथ्यों को जुटाने के लिए पूछताछ भी कर रहे हैं।” हालांकि कुछ विशेषज्ञ सुरक्षा निकायों के सदस्यों के विरुद्ध की गई कारवाई सिफारिशों के कार्यान्वयन में समिति की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। नेपाल पुलिस के अवकाशप्राप्त नायब महानिरीक्षक (डिआइजी) हेमन्त मल्ल के अनुसार समिति के गठन का कारण आयोग की रिपोर्ट में कुछ सिफारिशों में त्रुटि होने की संभावना हो सकती है।

समिति के कार्यकाल में वृद्धि के लिए सरकार को अनौपचारिक प्रस्ताव भेजे जाने की खबर है, लेकिन गृह मंत्रालय के प्रवक्ता से संपर्क करने का प्रयास विफल रहा। समिति के संयोजक कार्की ने इस प्रस्ताव पर टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि कुछ व्यक्तियों से और जानकारी लेने के लिए संबंधित निकायों को सूचित कर दिया गया है। “गंभीर प्रकृति के आरोपों और अभियोजन सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का और अध्ययन आवश्यक प्रतीत होता है,” कार्की ने कहा, “हम वर्तमान में सभी सुरक्षा निकायों और संबंधित तंत्र के साथ सहयोग करते हुए कार्य जल्दी पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।”

इतिहास, संस्कृति र पर्यटनको संगम (तस्वीरहरू) – Online Khabar

इतिहास, संस्कृति और पर्यटन का संगम स्थल

२ जेठ, तेह्रथुम। प्रकृति की पूजा करने और पत्थर को ऐतिहासिक प्रतीक मानने वाली लिम्बु सभ्यता। यहाँ की मौलिकता, संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक संरक्षित करने के उद्देश्य से तेह्रथुम के लालीगुराँस नगरपालिका द्वारा निर्मित ‘चो?लुङ पार्क’ आज पूर्वी नेपाल की एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक और पर्यटक स्थल बन चुका है। पत्थर से बने इस पार्क को अब केवल एक घुमने की जगह ही नहीं बल्कि लिम्बु समुदाय के इतिहास, जीवनशैली और सभ्यता का जीवंत संग्रहालय के रूप में स्थापित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर पार्क की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों आंतरिक एवं बाहरी पर्यटक आने लगे हैं। पार्क में आने वाले पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने इसे नगरपालिका की महत्वपूर्ण आमदनी का स्रोत भी बना दिया है।

लिम्बु समुदाय प्रकृति पूजक संस्कृति के लोगों के रूप में परिचित हैं। जंगल, नदी, मिट्टी और पत्थर उनके जीवन से गहरे जुड़े हैं। विशेष रूप से ‘लुङ’ अर्थात् पत्थर लिम्बु सभ्यता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक के संस्कारों में पत्थर लगाने की परंपरा लिम्बु समाज में प्राचीन काल से मौजूद है। नवजात शिशु के जन्म, विवाह, कुल पूजा, न्याय–न्यायालय और अंतिम संस्कार में पत्थर का उपयोग होता है। इसी मौलिक सभ्यता को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से चो?लुङ पार्क का निर्माण किया गया है। ‘चो?लुङ’ लिम्बुभाषा का शब्द है; ‘चो’ का अर्थ लक्ष्य और ‘लुङ’ का अर्थ पत्थर। इसका मतलब ‘चो?लुङ’ है लक्ष्य प्राप्ति का प्रतीकात्मक पत्थर।

पार्क में प्रवेश करते ही विभिन्न आकारों के ऊंचे-ऊंचे पत्थर के स्तंभ आगंतुकों का स्वागत करते हैं। ये पत्थर केवल सजावट का हिस्सा नहीं बल्कि लिम्बु सभ्यता का मौन इतिहास हैं। पार्क के विभिन्न हिस्सों में लगे पत्थर के स्तंभ प्राचीन लिम्बु समाज की सामाजिक संरचना, न्याय प्रणाली और सांस्कृतिक प्रथाओं को दर्शाते हैं। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार कभी-कभी गांव में विवाद निपटाने, सामाजिक निर्णय लेने या समझौता करने पर पत्थर लगाने की परंपरा थी। अर्जुन माबोहाङ के अनुसार, लिम्बु समुदाय की ऐतिहासिक पहचान खत्म होती जा रही थी, इसलिए पार्क निर्माण की अवधारणा सामने आई। उन्होंने कहा, ‘आज के जीवनशैली, न्याय–न्यायालय और सामाजिक व्यवस्था को पत्थर के माध्यम से अभिव्यक्त करने की परंपरा धूमिल हो रही थी। इसे संरक्षित करते हुए पर्यटन से जोड़ने के उद्देश्य से पार्क बनाया गया है। अब यह पार्क नगरपालिका की आमदनी का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।’

नगरपालिका के अनुसार, पार्क के दर्शनार्थी द्वारा भुगतान किए जाने वाले टिकट शुल्क से सरकार को आय हो रही है। इससे पार्क न केवल सांस्कृतिक केंद्र बनकर उभरा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण परियोजना भी बन गया है। हाल ही में तेह्रथुम, धनकुटा, पाँचथर, इलाम, झापा, मोरङ, सुनसरी सहित अन्य जिलों के साथ भारत के सिक्किम और दार्जिलिङ क्षेत्र से भी पर्यटक आने लगे हैं। मिक्लाजुङ गाउँपालिका से भ्रमण के लिए आए उपाध्यक्ष सन्तोष सेर्मा लिम्बु ने कहा कि सोशल मीडिया पर केवल देखे गए पार्क को सीधे देखने पर अनुभव अलग था। उन्होंने कहा, ‘यहाँ आकर समझ में आया कि यह केवल एक पार्क नहीं बल्कि एक जीवंत इतिहास है। लिम्बु सभ्यता को समझने वालों के लिए यह एक उत्कृष्ट स्थल साबित हुआ है।’

दो महीने बाद एन्फा पर लगी निलंबन समाप्त, क्या अब नेपाली फुटबॉल में जान आ पाएगी?

निलंबन समाप्त करने के बाद ही बैठक आयोजित करने के पक्ष में एन्फा ने अपनी सैद्धांतिक सहमति जताई, जिसके बाद राष्ट्र खेल परिषद ने यह निर्णय लिया है। इससे फिफा द्वारा नेपाल पर प्रतिबंध लगने का खतरा भी टल गया है।

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के साथ।

  • राष्ट्रीय खेलकूद परिषद ने चैत 11 को लगाए गए अखिल नेपाल फुटबॉल संघ के निलंबन को 1 जेठ को समाप्त किया।
  • सरकार, फिफा, और एन्फा के बीच बातचीत के बाद निलंबन हटाया गया, जिससे नेपाल को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध से बचाया गया।
  • निलंबन की वजह से रुकी प्रतियोगिताओं को एन्फा बातचीत करके फिर शुरू करने का संकल्प ले चुका है।

1 जेठ, काठमाडौं। राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) ने शुक्रवार को अखिल नेपाल फुटबॉल संघ (एन्फा) पर लगी निलंबन को हटा दिया है। चैत 11 को ‘अर्ली इलेक्शन’ प्रक्रिया पूरी न करने के कारण एन्फा को निलंबित किया गया था।

शिक्षा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल, राखेप सदस्य सचिव रामचरित्र मेहता और एन्फा महासचिव किरण राई सहित एक टीम की बातचीत के बाद राखेप ने निलंबन समाप्त करने का फैसला लिया। सदस्य सचिव मेहता ने बताया कि यह फ़ैसला नेपाली फुटबॉल के हित में सरकार द्वारा लिया गया है।

राखेप ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फिफा), एशियाई फुटबॉल महासंघ (एएफसी) और एन्फा के बीच निलंबन से संबंधित वर्चुअल बैठक की थी। बिंदुवार निर्णय न निकलने पर राखेप ने एन्फा को भौतिक संयुक्त बैठक के लिए प्रस्ताव दिया था।

लेकिन एन्फा ने निलंबन हटाए जाने के बाद ही बैठक करने की बात कही, जिसके बाद राखेप ने निलंबन को खत्म करने का निर्णय लिया। इससे फिफा द्वारा नेपाल पर प्रतिबंध लगने का खतरा भी खत्म हो गया है। इससे पहले फिफा ने चेतावनी दी थी कि निलंबन हटाए जाने तक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

‘यदि निलंबन समाप्त नहीं होता, तो फिफा-एएफसी के साथ कोई वार्ता संभव नहीं होती। निलंबन के दौरान वार्ता तक संभव नहीं थी। अब साफ़ चैंपियनशिप भी आ रही है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निलंबन हटाया है,’ सदस्य सचिव मेहता ने बताया।

राखेप ने एन्फा को कई बार ‘अर्ली इलेक्शन’ स्थगित करके स्तरवार चुनाव करने का निर्देश दिया था। निर्देश का उल्लंघन करने पर चुनाव से दो दिन पहले, चैत 11 को तीन महीने के लिए निलंबन लगाया गया था।

एन्फा प्रवक्ता सुरेश शाह ने सरकार और फिफा के साथ चर्चा कर समझौता कर आगे बढ़ने की प्रतिक्रिया दी। ‘हमारी वर्चुअल बैठक के बाद फिफा को नेपाल के मामले में अपनी चिंता थी। उस बैठक में हुई चर्चा और फिफा के सुझावों को ध्यान में रखते हुए अब सरकार, फिफा और एन्फा मिलकर आगे कैसे बढ़ना है यह तय करेंगे,’ उन्होंने कहा।

प्रवक्ता शाह ने कहा कि राज्य और फिफा के नियम अलग होने से दिक्कतें आती हैं। ‘हमें बाध्यता है कि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य के नियम मानें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिफा के नियमों का पालन करें। الدولة और فिफا के बीच मतभेद हैं, जिन्हें संवाद से सुलझाकर चुनाव और अन्य कार्य आगे बढ़ाएंगे।’

लगभग दो महीने तक लंबी निलंबन अवधि में नेपाली फुटबॉल लगभग ठप्प रहा था। इस कारण महिला खिलाड़ियों को थाईलैंड में आयोजित फिफा सीरीज छोड़नी पड़ी। घरेलू मैदान में हांगकांग के साथ खेली जाने वाली मैत्रीपूर्ण मैच में भी नेपाली खिलाड़ियों ने भाग नहीं लिया। इसी तरह से पुरुष और महिला लीग स्थगित थे और स्थिति अलपत्र हो गई थी।

रोक दिए गए टूर्नामेंट और आगामी गतिविधियों के बारे में बातचीत करके आगे बढ़ने का एन्फा ने आश्वासन दिया है। ‘पहले चरण में साफ है। साफ चैंपियनशिप में नेपाली टीम कैसे विजयी हो सकती है, इस रणनीति पर काम करेंगे,’ उन्होंने कहा, ‘रोक दी गई प्रतियोगिताएं हैं, जिन पर चर्चा और समीक्षा कर निर्णय लेंगे।’

राखेप ने एन्फा को कई बार निर्देश दिया था कि ‘अर्ली इलेक्शन’ स्थगित कर स्तरवार चुनाव करें। लेकिन निर्देश का उल्लंघन करते हुए चुनाव से दो दिन पहले चैत 11 को तीन महीने के लिए निलंबित किया गया था।

नेपाल फुटबॉल खिलाड़ी संघ के अध्यक्ष विक्रम लामा ने कहा, ‘सत्ता प्राप्त करने से परे फुटबॉल के विकास और स्थिरता को प्राथमिकता देना चाहिए। इससे व्यवस्थापकीय सुधार होते हुए काम बेहतर होगा।’

उसके बाद भी एन्फा शीर्ष नेतृत्व चुनाव के लिए झापा पहुंचा था, लेकिन अंतिम समय में चुनाव स्थगित कर वापस लौट आया। सूत्रों के अनुसार बिना शर्त स्तरवार चुनाव करने के मौखिक समझौते के बाद राखेप ने निलंबन समाप्त किया है।

‘सत्ता पाने के बजाय फुटबॉल के विकास पर ध्यान देना चाहिए’

नेपाल फुटबॉल खिलाड़ी संघ के अध्यक्ष विक्रम लामा ने कहा कि अब एन्फा नेतृत्व संयमित होकर फुटबॉल के हित में काम करे। ‘रोक दी गई प्रतियोगिताएं हैं। हमें यह सोचते हुए योजना बनानी चाहिए कि कब और कैसे आगे बढ़ना है। नेपाली फुटबॉल कैसी स्थिति में पहुंचेगा, इसका रोडमैप बनाना चाहिए,’ उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा, ‘सत्ता पाने की चाह से ज्यादा फुटबॉल विकास को प्राथमिकता देने से दीर्घकालिक स्थिरता आएगी और व्यवस्थापकीय सुधार कर उत्कृष्ट कार्य हो सकेगा।’

शालबाताना घाटी में कभी था मंगल ग्रह पर महासागर होने का प्रमाण

२ जेठ, काठमाडौं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ‘मार्स एक्सप्रेस’ मिशन ने मंगल ग्रह के भूमध्यरेखा के निकट स्थित एक विशाल घाटी की तस्वीर जारी की है। इस तस्वीर ने लाल ग्रह के जलजीवन और ज्वालामुखीय इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। लगभग १,३०० किलोमीटर लंबी ‘शालबाताना घाटी’ नामक इस क्षेत्र ने अरबों वर्ष पहले मंगल ग्रह पर विशाल बाढ़ और महासागर के होने के मजबूत प्रमाण प्रस्तुत किए हैं, वैज्ञानिकों ने बताया।

वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग ३.५ अरब वर्ष पहले जमीन के नीचे का पानी अचानक सतह पर निकलने से हुई भीषण बाढ़ ने इस घाटी का निर्माण किया। इस घाटी की चौड़ाई लगभग १० किलोमीटर और गहराई ५०० मीटर से अधिक है। इस क्षेत्र में देखे गए गहरे खड्ड और बहते पानी द्वारा बने घुमावदार आकारों से संकेत मिलता है कि मंगल ग्रह कभी वर्तमान से कहीं अधिक गर्म और नमीपूर्ण था।

अंतरिक्ष यान द्वारा खींची गई नयी तस्वीर में ‘केओटिक टेरेन’ नामक भूगर्भीय संरचना दिखाई दे रही है। माना जाता है कि जमीन के नीचे जमाए गए बर्फ के पिघलने से ऊपर की सतह धंस गई और यह आकृति बनी। घाटी के कुछ भागों में काले और नीले रंग के चिन्ह भी दिखे हैं, जो ज्वालामुखीय राख माने जाते हैं, जिसे बाद में मंगल ग्रह की हवा ने वहां जमा किया है, यह वैज्ञानिकों की राय है।

इस क्षेत्र में ज्वालामुखी से निकली लावा द्वारा बने समतल मैदान और प्राचीन क्रेटर भी स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। शालबाताना घाटी के अंत में स्थित ‘क्राइसे प्लानिटिया’ क्षेत्र मंगल ग्रह की सबसे निचली इलाक़ों में से एक है। कई प्राचीन जलमार्ग यहीं समाप्त होते हैं, इसलिए वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि यहाँ कभी एक विशाल महासागर भी था। यदि यह तथ्य प्रमाणित होता है, तो मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं संबंधी शोध में एक नया आयाम जुड़ जाएगा।

सन् २००३ में प्रक्षेपित ‘मार्स एक्सप्रेस’ यान बीते दो दशकों से मंगल ग्रह की सतह को निकट से अन्वेषण करता आ रहा है। इस यान में लगे ‘हाई रेजोल्यूशन स्टेरियो कैमरा’ द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों ने मंगल ग्रह के भूगर्भीय विकास को समझने में वैश्विक वैज्ञानिकों की सहायता की है।

नासाको ‘रोमन’ टेलिस्कोपले खोज्नेछ अन्तरिक्षका अदृश्य न्युट्रोन ताराहरू

नासा के ‘रोमन’ टेलिस्कोप से खोजे जाएंगे अंतरिक्ष के अदृश्य न्यूट्रॉन तारे

२ जेठ, काठमाडौं। नासा का आगामी शक्तिशाली अंतरिक्ष टेलिस्कोप ‘नैंसी ग्रेस रोमन’ हमारे आकाशगंगा (मिल्की वे) में छिपे लाखों अदृश्य न्यूट्रॉन तारों के रहस्यों को खोलने की उम्मीद है। ‘एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स’ जर्नल में प्रकाशित नए अध्ययन के अनुसार यह टेलिस्कोप गुरुत्वाकर्षण की मदद से इन वस्तुओं की पहचान करने के साथ-साथ उनका वजन भी माप सकेगा। न्यूट्रॉन तारे विशाल तारों के सुपरनोवा विस्फोट के बाद बचे अत्यंत घने अवशेष होते हैं। इनका आकार एक छोटे शहर के समान होता है, लेकिन उनका द्रव्यमान (मास) सूरज से अधिक होता है।

अधिकांश न्यूट्रॉन तारे अकेले होते हैं और प्रकाश उत्सर्जित नहीं करते, इसलिए अब तक के शक्तिशाली टेलिस्कोप इन्हें देख नहीं पाए हैं। वर्तमान में हम केवल कुछ हजार ही न्यूट्रॉन तारे खोजे हैं, जबकि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आकाशगंगा में १० करोड़ से अधिक ऐसे तारे हो सकते हैं। रोमन टेलिस्कोप न्यूट्रॉन तारों को सीधे नहीं बल्कि ‘ग्रैविटेशनल माइक्रोलेन्सिंग’ नामक तकनीक के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से खोजेगा। जब कोई न्यूट्रॉन तारा किसी दूर के तारे के सामने से गुजरता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण पृष्ठभूमि के तारे की रोशनी को मोड़कर उसे चमकीला कर देता है।

अध्ययन की प्रमुख लेखिका जोफिया काज्मरिच के अनुसार, रोमन टेलिस्कोप न केवल तारे की चमक में आए बदलाव (फोटोमेट्री) को मापेगा, बल्कि उसकी स्थिति में सूक्ष्म हलचल (एस्ट्रोमेट्री) को भी रिकॉर्ड करेगा। न्यूट्रॉन तारे अत्यंत घने होते हैं इसलिए इनसे उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण प्रभाव बहुत मजबूत होता है, जिससे वैज्ञानिक इन अदृश्य वस्तुओं के द्रव्यमान को सटीक रूप से ज्ञात कर सकेंगे। यह मिशन यह भी समझने में मदद करेगा कि न्यूट्रॉन तारे अंतरिक्ष में इतनी तेज गति (सैंकड़ों मील प्रति सेकंड) से क्यों चल रहे हैं। सुपरनोवा विस्फोट के दौरान मिलने वाली ‘किक’ के कारण ये तारे आकाशगंगा में विचरण करते हैं। रोमन टेलिस्कोप ऐसे अकेले न्यूट्रॉन तारों के द्रव्यमान वितरण और गति का अध्ययन करके तारा विकास और विनाश के चक्र को नए तरीके से समझेगा। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर द्वारा संचालित यह टेलिस्कोप डेटा भेजना शुरू करने के कुछ महीनों के भीतर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा, ऐसा वैज्ञानिकों का भरोसा है। यह न्यूट्रॉन तारे और ब्लैक होल के बीच अंतर को भी स्पष्ट करेगा।

यस्तो छ आज विदेशी मुद्राको भाउ – Online Khabar

आजको विदेशी मुद्रा विनिमय दर यसप्रकार छ

२ जेठ, काठमाडौं । नेपाल राष्ट्र बैंकले आज विदेशी मुद्राको विनिमय दर सार्वजनिक गरेको छ। राष्ट्र बैंकका अनुसार, आज अमेरिकी डलरको खरिद दर १५३.२५ र बिक्री दर १५३.८५ कायम गरिएको छ। त्यस्तै, युरोको खरिद दर रु १७८.३८ र बिक्री दर १७९.०८ तोकिएको छ भने बेलायती पाउण्ड स्टर्लिङको खरिद दर २०४.७५ र बिक्री दर २०५.७५ निर्धारण गरिएको छ। नेपाल राष्ट्र बैंकले भारतीय रुपैयाँ १०० को खरिद दर १६०.०० र बिक्री दर १६०.१५ निर्धारण गरेको जनाएको छ। त्यस्तै, अस्ट्रेलियन डलर, क्यानडियन डलर, सिङ्गापुर डलर, जापानी येन, चिनियाँ युआन, साउदी अरब रियाल, कतारी रियाल, यूएई दिरामलगायतका अन्य मुद्राको विनिमय दर पनि सार्वजनिक गरिएको छ। राष्ट्र बैंकले आवश्यकताअनुसार जुनसुकै समयमा विनिमय दर संशोधन गर्न सकिने जनाएको छ।