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लेखक: space4knews

अब सबै सार्वजनिक यातायातमा सीसीटीभी – Online Khabar

सार्वजनिक यातायात में सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य करने की सरकार की घोषणा

१४ चैत, काठमाडौँ। सरकारले सार्वजनिक यातायातका सबै प्रकारका साधनहरूमा सीसीटीभी क्यामेरा जडान अनिवार्य गर्ने घोषणा गरेको छ। सार्वजनिक यातायातमा हुने लैङ्गिक हिंसा रोक्ने उद्देश्यले सबै सवारी साधनमा सीसीटीभी स्थापना गर्ने निर्णय लिइएको हो। यसैगरी, राइड–शेयरिङ एपहरूमा एसओएस बटन राख्न अनिवार्य गरिनेछ, साथै आकस्मिक र खतरा सूचनाहरू प्रहरीसम्म तुरुन्तै पुर्‍याउने व्यवस्था आगामी ३० दिनभित्र जिल्ला स्तरिय सरकारले कार्यान्वयन गर्ने जनाएको छ। महिला यात्रुहरूको सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित गर्न सरकारले सातै प्रदेशमा निशुल्क ‘ब्लु बस’ सेवा सञ्चालन गर्ने योजना बनाएको छ। पहिलो चरणमा १०० दिन भित्र कम्तीमा २५ वटा बस सेवा सञ्चालनमा ल्याउने योजना तयार गरिएको छ।

कांग्रेस का स्पष्टिकरण: कोई आंदोलन तय नहीं, सरकार की निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं

समाचार सारांश की समीक्षा की गई है। नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने बताया कि फिलहाल कोई आंदोलन की योजना नहीं है। कांग्रेस सरकार की निष्पक्षता और व्यवहार की सुनिश्चितता मांग रही है और आवश्यकता पड़ने पर निर्णय लिया जाएगा। कांग्रेस ने आयोग की रिपोर्ट में २४ तारीख की घटना की जांच न होने पर आपत्ति जताई है और जांच की मांग की है। १४ चैत, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस ने साफ किया है कि वर्तमान में कोई आंदोलन कार्यक्रम निर्धारित नहीं है। शनिवार को पार्टी केन्द्रीय कार्यालय सानेपा में संसदीय सचेतना कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस प्रवक्ता देवराज चालिसे ने यह जानकारी दी। ‘‘सरकार का व्यवहार सकारात्मक प्रतीत हो रहा है। हमने सड़क आंदोलन या किसी अन्य कार्यक्रम पर निर्णय नहीं किया है,’’ उन्होंने कहा। कांग्रेस प्रवक्ता चालिसे ने कहा कि वह सरकार की निष्पक्षता और व्यवहार की पुष्टि चाहते हैं। ‘‘हम सरकार की निष्पक्षता और व्यवहार की सुनिश्चितता चाहते हैं। यदि कुछ विचार करना होगा तो फिर निर्णय लिया जाएगा,’’ उन्होंने जोड़ा। उन्होंने आयोग की रिपोर्ट में भदौ २३ की घटना जैसी २४ तारीख की घटना की जांच न होने पर सवाल उठाए। ‘‘२४ तारीख की घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह जनता को बताना जरूरी है कि २४ तारीख को किसने विध्वंस कराया था। दोषी कौन हैं, यह पता लगाना आवश्यक है,’’ उन्होंने प्रश्न किया।

किसानको उधारो २५ दिनभित्र भुक्तानी नगरे ब्याज लाग्ने

किसानों को उधारो व्यवसाय में २५ दिन के भीतर भुगतान न होने पर ब्याज सहित चुकाना होगा

१४ चैत, काठमाडौं। कृषि उत्पादन की खरीद में किए गए उधारो व्यवसाय का भुगतान अधिकतम २५ दिन के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करने का प्रावधान लागू करने का निर्णय लिया गया है। सरकार द्वारा जारी १०० कार्यसूचियों में इस विषय को शामिल किया गया है। किसानों द्वारा उत्पादित कृषि उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। उक्त अवधि के भीतर भुगतान न होने पर ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश शीघ्र जारी करने की तैयारी चल रही है।

कृषि उपज के बाजार पहुंच को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार सूचना प्रणाली संचालित की जाएगी और एसएमएस एवं डिजिटल माध्यमों के जरिए दैनिक मूल्य जानकारी किसानों तक पहुँचाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक पालिका में साप्ताहिक कृषि हाट बाजार संचालित करने के लिए स्थानीय तह को सहायता प्रदान की जाएगी, कृषि उपज के भंडारण और बाज़ारीकरण में सुधार के लिए ‘एक पालिका एक चिस्यान केन्द्र’ कार्यक्रम शुरू करने के विषय कार्यसूची में शामिल हैं।

प्रत्येक जिले में सार्वजनिक-निजी साझेदारी के तहत चिस्यान केंद्र स्थापित करने की योजना के अंतर्गत १० दिन के अंदर सम्भाव्यता अध्ययन करने का प्रावधान भी कार्यसूची में उल्लेखित है। प्रमुख कृषि उपज के न्यूनतम मूल्य सुरक्षा के अभाव के कारण किसानों को बाजार के अनियंत्रित उतार-चढ़ाव से हुए घाटे की समस्या से बचाने के लिए, ३० दिन के भीतर प्रमुख खाद्यान्न के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय सरकार ने लिया है। व्यावसायिक कृषि फार्म चलाने वाले किसानों को तीन माह के भीतर ‘स्वाइल हेल्थ कार्ड’ प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई है।

कांग्रेस का निष्कर्ष: सरकार का व्यवहार चयनात्मक है

संपादकीय समीक्षा सहित समाचार सारांश। नेपाली कांग्रेस ने भदौ २३ और २४ की दमन संबंधित आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन में सरकार के व्यवहार को ‘चयनात्मक’ बताया है। पार्टी ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े आयोग की सिफारिशों पर अध्ययन समिति गठित कर उन्हें लागू करने और अन्य विषयों को तत्काल लागू करने की आवश्यकता जताई है। कांग्रेस ने जल्दबाजी में गिरफ्तारी करने और एक ही घटना व रिपोर्ट में विभिन्न व्यवहार देखने को सरकार के ‘चयनात्मक’ रवैये का संकेत बताया है। १४ चैत, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस ने भदौ २३ और २४ को हुए दमन मामलों की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन में सरकार का चयनात्मक व्यवहार पाया है। पार्टी ने शनिवार को सम्पन्न संसदीय सचेतना कार्यक्रम के दौरान एक विज्ञप्ति जारी कर भदौ २३ और २४ की घटनाओं में सरकार के व्यवहार को ‘चयनात्मक’ बताया। ‘आयोग ने जिन व्यक्तियों और निकायों से संबंधित सुरक्षा व्यवस्था की सिफारिश की है, उनके लिए अध्ययन समिति बनाकर कार्यान्वयन करने की आवश्यकता है, जबकि अन्य विषयों को तुरंत लागू करने का निर्णय लिया गया है। भदौ २३ की एक ही घटना, एक ही जांच रिपोर्ट और समान प्रकार की सिफारिशों के बावजूद सरकार का व्यवहार “चयनात्मक” पाया गया है,’ कांग्रेस ने अपने बयान में कहा।

सुकुम्वासी, भूमिहीनलाई जग्गा उपलब्ध गराउन यस्ता छन् सरकारको कार्ययोजना

सुकुम्वासी एवं भूमिहीनों को जमीन उपलब्ध कराने सरकार की विस्तृत कार्ययोजना

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद संकलित।

  • सरकार ने देशभर के भूमिहीन और सुकुम्वासी लोगों को एकीकृत आवास के माध्यम से पुनर्वास करने की योजना बनाई है।
  • मंत्रिपरिषद की बैठक ने ६० दिनों के भीतर भूमिहीन और सुकुम्वासी का डिजिटल डेटा संग्रह करने का निर्णय लिया है।
  • सरकार ने १००० दिनों के भीतर स्थानीय स्तर के साथ समन्वय कर परिवार सर्वेक्षण कर लाभार्थियों की पहचान करने की कार्ययोजना बनाई है।

१४ चैत, काठमाडौं। सरकार देशभर के भूमिहीन और सुकुम्वासी लोगों को आवश्यक जमीन उपलब्ध कराते हुए एकीकृत आवास के माध्यम से पुनर्वास की व्यवस्था कर रही है।

शुक्रवार को सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में इस योजना को १०० कार्यसूची में शामिल किया गया है।

सरकार की कार्ययोजना के अनुसार ६० दिनों के भीतर भूमिहीन, सुकुम्वासी और अव्यवस्थित बसने वालों का एकीकृत डिजिटल डेटा संग्रह किया जाएगा। साथ ही, १००० दिनों के भीतर समस्या समाधान के लिए स्थानीय स्तर के समन्वय में परिवार सर्वेक्षण किया जाएगा तथा स्पष्ट मानकों को लागू कर वास्तविक लाभार्थियों की पहचान की जाएगी।

सरकार की कार्ययोजना इस प्रकार है

देशभर के भूमिहीन, सुकुम्वासी और अव्यवस्थित बसने वालों का एकीकृत डिजिटल डेटा संग्रह और प्रमाणीकरण ६० दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, १००० दिनों के भीतर स्थानीय स्तर के साथ समन्वय कर परिवार सर्वेक्षण कर समस्या समाधान किया जाएगा। वास्तविक लाभार्थी की पहचान के लिए कट-ऑफ तिथि, आय स्तर तथा अन्य संपत्ति स्वामित्व सहित स्पष्ट मानदंड लागू किए जाएंगे। सार्वजनिक, ऐलानी और गुठी जमीन के अभिलेखों का अद्यतन, नक्शांकन और GIS आधारित डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। पहचाने गए सुकुम्वासी लोगों को चरणबद्ध तरीके से जमीन या शहरी क्षेत्रों में वैकल्पिक रूप से एकीकृत आवास (लैंड पूलिंग / अपार्टमेंट मॉडल) के माध्यम से पुनर्वास किया जाएगा। जमीन वितरण और पुनर्वास प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सार्वजनिक डैशबोर्ड संचालित किया जाएगा तथा कार्यक्रम का समन्वय, निरीक्षण और कार्यान्वयन संबंधित मंत्रालय की प्रत्यक्ष निगरानी में रहेगा।

प्रहरी मुख्यालय में रातभर चर्चा, ओली और लेखक की गिरफ्तारी के बाद तनाव

गृहमंत्री सुधन गुरुङ ने गौरीबहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए मंत्री परिषद के निर्णय की जानकारी दी। पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और निवर्तमान गृहमंत्री रमेश लेखक को जनजाति आन्दोलन में हिंसा करने और लोगों की जान लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। ओली और लेखक को हिरासत में रखने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण के बाद मियाद बढ़ाने हेतु सरकारी वकील कार्यालय के माध्यम से अदालत में पेश करना आवश्यक है। 14 चैत, काठमांडू।

नवनियुक्त गृहमंत्री सुधन गुरुङ ने शुक्रवार को पदभार ग्रहण करते हुए अपने अधीनस्थ सुरक्षा कर्मचारियों से कहा, “मंत्री परिषद के निर्णय के बाद आयोग की रिपोर्ट लागू की जाएगी।” उन्होंने गौरीबहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट लागू करने का संकेत दिया। सुधन ने सभी को सिर्फ जनजाति आन्दोलन ही याद नहीं दिलाया, बल्कि जनजाति शहीदों की स्मृति में एक मिनट मौन रखने का भी अनुरोध किया। पदभार ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने जनजाति आन्दोलन के घायल और शहीद परिवारों से मुलाकात की।

मंत्री परिषद की बैठक में निजी लाल नंबर प्लेट वाली कार खुद चलाकर उपस्थित हुए गृहमंत्री सुधन ने गृह मंत्रालय में दिए संकेत के अनुसार मंत्री परिषद ने कार्की आयोग की रिपोर्ट लागू करने का निर्णय लिया। सुरक्षा निकायों के विषय में और अध्ययन के लिए समिति गठित करने और अन्य पक्षों को तत्काल कार्यान्वित करने का निर्णय सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया। निर्णय के बाद गृह मंत्री सुधन ने नेपाल पुलिस के आईजीपी दानबहादुर कार्की और सशस्त्र पुलिस बल के आईजीपी राजु अर्याल से दो घंटे की परामर्श की।

प्रहरी मुख्यालय और सशस्त्र पुलिस बल हेडक्वाटर ने शनिवार सुबह कड़ी उपस्थिति का परिपत्र जारी कर जवानों से लेकर एसएसपी और एसपी तक सभी के उपस्थिति होने का निर्देश दिया। काठमांडू उपत्यका पुलिस ने तीनों जिलों (काठमांडू, ललितपुर, भक्तपुर) के पुलिस को स्टैंडबाय आदेश दिया। आगे चर्चा के लिए पुलिस प्रधान कार्यालय, नक्साल स्थित आईजीपी आवास में गृहमंत्री सुधन, गृहसचिव राजकुमार श्रेष्ठ, नेपाल पुलिस आईजीपी दानबहादुर कार्की, सशस्त्र पुलिस बल के आईजीपी राजु अर्याल, काठमांडू उपत्यका पुलिस कार्यालय के एआईजी ईश्वर कार्की और सशस्त्र पुलिस के एआईजी गणेश ठाडा मगर उपस्थित थे।

ओली र लेखकलाई आज अदालत उपस्थित गराइँदै – Online Khabar

ओली और लेखक को आज अदालत में पेश किया जाएगा

पूर्वप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्वगृहमंत्री रमेश लेखक को जेनजी आंदोलन दमन के आरोप में शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और आज उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा, पुलिस ने बताया। भाद्र २३–२४ को हुए जेनजी प्रदर्शन में ७६ लोगों की मौत हुई थी और दो हजार चार सौ से अधिक घायल हुए थे, साथ ही सिंहदरबार सहित सरकारी भवनों में आगजनी हुई थी। गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में बनी आयोग ने ओली और लेखक सहित जिम्मेदारों को दोषी मानते हुए सजा का सुझाव दिया था और नई सरकार ने रिपोर्ट लागू करने का निर्णय लिया था।

१५ चैत्र, काठमांडू। जेनजी आंदोलन को दबाने के आरोप में शनिवार को गिरफ्तार पूर्वप्रधानमंत्री और एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली तथा पूर्वगृहमंत्री और कांग्रेस नेता रमेश लेखक को आज काठमांडू जिला अदालत में पेश किया जाएगा। शनिवार को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण उन्हें अदालत में पेश नहीं किया गया था। पुलिस ने बताया कि दोनों नेताओं को आज अदालत में उपस्थित कराया जाएगा।

भाद्र २३–२४ को हुई जेनजी पीढ़ी के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़कने से पुलिस सहित ७६ लोगों की मौत हुई थी। इस घटना में दो हजार चार सौ से अधिक प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान सिंहदरबार, संसद भवन, सर्वोच्च अदालत, राष्ट्रपति आवास, पुलिस कार्यालय, व्यावसायिक क्षेत्र और निजी आवासों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट हुई थी। इस घटना की जांच के लिए गठित गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता वाली आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और तत्कालीन गृहमंत्री लेखक समेत जिम्मेदारों को दोषी मानते हुए दंड का सुझाव दिया था।

फागुन २१ को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद चैत्र १३ को बने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली पहली मंत्रिपरिषद की बैठक में आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का निर्णय लिया गया था। चैत्र १४ को सुबह ओली को भक्तपुर के गुण्डु स्थित आवास से और लेखक को भक्तपुर के कटुन्जे स्थित आवास से हिरासत में लिया गया था। हिरासत में लेने के बाद ओली को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए त्रिवि शिक्षण अस्पताल ले जाया गया था और चिकित्सकों की सलाह पर वहीं भर्ती किया गया है। लेखक को पुलिस के दो नंबर गण महाराजगंज में रखा गया है। पुलिस दोनों नेताओं को अदालत खुलते ही पेश करने की तैयारी में है।

‘मुटु की धड़कन तेज होने पर ओली को अस्पताल में भर्ती कराया गया’

समाचार सारांश संपादकीय परीक्षण के बाद तैयार। एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को शनिवार सुबह गिरफ्तार कर त्रिवि शिक्षण अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। ओली का दिल और गुर्दा रोग विशेषज्ञों की टीम द्वारा निगरानी में रखकर उपचार किया जा रहा है तथा विभिन्न परीक्षण जारी हैं। संक्रमण के खतरे के कारण उन्हें अस्पताल के कक्ष में रखकर उपचार किया जा रहा है, जिससे चिकित्सकों ने जानकारी दी है। १४ चैत्र, काठमांडू।

एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली वर्तमान में त्रिवि शिक्षण अस्पताल (टिचिंग अस्पताल) में उपचाराधीन हैं। शनिवार सुबह पुलिस ने उन्हें स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गिरफ्तार कर अस्पताल लाया था। आकस्मिक कक्ष में प्रारंभिक कुछ परीक्षण के बाद चिकित्सकों की सलाह के तहत अस्पताल में भर्ती किया गया। ओली फिलहाल ‘एनेक्स वन’ भवन के ५०१ नम्बर बिस्तर पर उपचाररत हैं और स्वास्थ्य परीक्षण जारी है।

उपचार में शामिल एक चिकित्सक के अनुसार, ओली की स्वास्थ्य स्थिति के लिए विभिन्न शारीरिक परीक्षण किए जा रहे हैं। गुर्दा और दिल रोग विशेषज्ञ टीम उन्हें निगरानी में रखकर उपचार दे रही है। उस चिकित्सक ने कहा, ‘सुबह अस्पताल आने पर उनका दिल की धड़कन तेज थी और पेट में भी दर्द था।’ एक्स-रे करने पर पेट में पथरी मिली है, जो पेट दर्द का कारण हो सकती है। फिलहाल पेट रोग विशेषज्ञ भी उसकी जांच कर रहे हैं।

दिल की स्थिति समझने के लिए ‘इको’ परीक्षण किया गया है और गुर्दे संबंधी परीक्षण भी हो रहे हैं। ओली दो बार गुर्दा प्रत्यारोपण करवा चुके हैं और नियमित रूप से प्रत्यारोपण के बाद की दवाइयाँ (इम्यूनोसप्रेसिव) ले रहे हैं। दिल के एंजियोप्लास्टी कराने के इतिहास के कारण वे दवाइयाँ, एंटीबायोटिक्स और थायरॉइड की दवाइयाँ भी ले रहे हैं। संक्रमण के उच्च जोखिम के कारण चिकित्सक उन्हें अस्पताल के कक्ष में सुरक्षित निगरानी के तहत उपचार कर रहे हैं। चिकित्सक कहते हैं, ‘अभी दिल और गुर्दे के और परीक्षण हो रहे हैं। सभी रिपोर्ट आने के बाद ही डिस्चार्ज या आगे उपचार का फैसला किया जाएगा।’

जनजी आन्दोलन पर दमन के आरोप में पूर्व प्रधानमंत्री ओली को शनिवार सुबह गुंडु निवास से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक भी आज ही गिरफ्तार हुए हैं। शनिवार सार्वजनिक अवकाश होने के कारण उन्हें रविवार को ही अदालत में पेश करने की तैयारी है।

महिलाको सहभागिता बढ्यो, नेतृत्व प्रभावकारिता बढेन

महिलाओं की भागीदारी बढ़ने पर भी नेतृत्व की प्रभावकारिता कम ही है

समाचार सारांश: विक्रम संवत १९९० के दशक में नेपाल में गैरसत्तात्मक कई दलों की राजनीति की शुरुआत हुई, जहां बौद्धिक और राजनीतिक व्यक्तियों ने लोकतांत्रिक आंदोलन की नींव रखी। माओवादी आंदोलन (वि.सं. २०५२–२०६३) के दौरान महिलाओं ने सैनिक, नेता और रणनीतिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाकर महिला सहभागिता के कोटा प्रणाली का रास्ता खोला। नेपाल के संविधान २०७२ ने संसद और स्थानीय स्तर पर कम से कम एक तिहाई महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया, जिसके बाद २०७४ के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगभग ४० प्रतिशत से ऊपर पहुँच गई है।

नेपाल में गैरसत्तात्मक रूप से दलगत राजनीति की शुरुआत वि.सं. १९९० के दशक से मानी जाती है। उस समय सामाजिक-राजनीतिक परिस्थिति जटिल थी, जहां राणा शासन का निरंकुश शासन था और नागरिक स्वतंत्रताएं सीमित थीं। लेकिन विभिन्न बौद्धिक और राजनीतिक व्यक्तित्वों ने मिलकर लोकतांत्रिक आंदोलन की आधारशिला रखी। वि.सं. १९९३ में स्थापित नेपाल प्रजा परिषद् राष्ट्रीय स्तर की पुरानी राजनीतिक संस्थाओं में से एक मानी जाती है, जिसने राजनीतिक जागृति फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद नेपाली राष्ट्रीय कांग्रेस (नेका) की स्थापना हुई, जिसने राजनीति में संस्थागत रूप से आंदोलन को मजबूत किया। इसका पहला राष्ट्रीय सम्मेलन सन् १९४७ जनवरी २५–२६ को भारत के कोलकाता में आयोजित हुआ (बस्नेत, २०६५)। इस सम्मेलन ने न केवल राजनीतिक परिवर्तन की मांग की बल्कि लैंगिक असमानता और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को भी पहचाना एवं समान अधिकार का प्रस्ताव पारित किया।

उस समय की सामाजिक संरचना बेहद पितृसत्तात्मक थी, जहां महिलाओं को शिक्षा, संपत्ति, निर्णय प्रक्रिया और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी से वंचित रखा गया था। महिला शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और राजनीतिक जागरूकता की आधारशिला माना जाता था, जिसने भविष्य में महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में लाने का मंच तैयार किया। माओवादी पार्टी ने प्रारंभिक चरण में महिला सहभागिता को विशेष महत्व दिया। वि.सं. २०५२–२०६३ के सशस्त्र संघर्ष में महिलाएं सैनिक, राजनीतिक प्रशिक्षक, नेता और रणनीतिक निर्णयकर्ता के रूप में सक्रिय थीं। पार्टी ने महिला सदस्यों के नेतृत्व विकास, संगठनात्मक प्रशिक्षण और समानुपातिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने का वचन दिया। इन अनुभवों ने नेपाल में महिलाओं के लिए कोटा प्रणाली, समानुपातिक प्रतिनिधित्व और संविधान सभा में पर्याप्त भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया। वैश्विक लैंगिक समानता की बहस और नेपाल की राजनीतिक प्रगति के अनुरूप नेकपा (एमाले) ने २०५३ में राष्ट्रीय परिषद के दूसरे बैठक में प्रत्येक समिति में कम से कम एक महिला सदस्य शामिल करने का निर्णय लिया (नेकपा–एमाले, २०५३)। यह नेपाल की दलगत राजनीति में पहला औपचारिक महिला कोटा निर्णय था, जिसने पार्टी के भीतर महिला प्रतिनिधित्व को संस्थागत रूप दिया।

२०७४ के बाद नेपाल में महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व लगभग ४० प्रतिशत से अधिक हो गया है, जो समावेशी प्रगति का संकेत है। हालांकि सीधे चुनाव में अवसर सीमित हैं, कोटा प्रणाली पर निर्भरता, पितृसत्तात्मक सोच और निर्णय प्रक्रियाओं में सीमित प्रभाव जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। नेपाल के इतिहास में बहादुर और प्रभावशाली महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय रहा है। विभिन्न कालखंडों में महिलाओं ने राष्ट्र, समाज और समुदाय के संरक्षण में साहसिक भूमिका निभाई है। सन् १८१४–१६ के ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ युद्ध में महिलाएं वीरता से संघर्ष कर रही थीं, जैसे नालापानी युद्ध में सैनिक समर्थन, घायलों का इलाज और विरोध प्रदर्शित करना (कुँवर, २०६५)। आधुनिक नेपाल की निर्माता योगमाया न्यौपानेली को माना जाता है, जिन्होंने बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाई और राणा शासन के अन्याय के विरुद्ध विरोध किया।

२००३ साल के श्रमिक आंदोलन और २००४ साल के नागरिक आंदोलन में महिलाएं सक्रिय रहीं, और इसी वर्ष मंगलादेवी सिंह के नेतृत्व में नेपाल महिला संघ की स्थापना हुई। २००७ साल में राणा शासन का अंत हुआ और बहुदलीय व्यवस्था शुरू हुई, तब भी महिला आंदोलन ने शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक सहभागिता को निरंतर आगे बढ़ाया। चुनौतियां बनी रहने के बावजूद सामाजिक स्तर पर लैंगिक जागरूकता और महिलाओं की भूमिका सक्रिय हो रही है। २०६२/६३ के गणतांत्रिक आंदोलन में महिलाओं की सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय थी। महिलाओं की समस्याओं को वर्ग, जाति, भाषा, क्षेत्र, धर्म के अनुसार भिन्न होने की स्वीकृति के साथ संविधान निर्माण में समावेशन और समानता को सुनिश्चित किया गया। २०६३ माघ १ के अंतरिम संविधान ने एक तिहाई महिला उम्मेदवारी और समान अधिकार सुनिश्चित किए। नए संविधान २०७२ में महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर कठोर प्रावधान और संरचनात्मक मान्यताएं जोड़ी गईं। विशेष रूप से स्थानीय अधिकारियों में ४० प्रतिशत से अधिक महिला भागीदारी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिर भी नेतृत्व स्तर पर महिलाओं की संख्या सीमित है। संविधान की धारा ३८ महिलाओं को समान वंशीय अधिकार, समानुपातिक भागीदारी, प्रजनन अधिकार, हिंसा के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को क्षतिपूर्ति का प्रावधान देती है। संघीय और प्रादेशिक संसदों में कम से कम एक तिहाई महिला भागीदारी निर्धारित है। संविधान लागू होने के बाद २०७४ के संघीय चुनाव में प्रतिनिधि सभा में करीब ३३ प्रतिशत महिलाएँ पहुँचीं। हालांकि प्रत्यक्ष निर्वाचित महिलाओं की संख्या कम थी। २०७९ के चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व ३३.८ प्रतिशत पहुंच गया है। प्रदेश सभाओं में महिलाओं की भागीदारी भी २०७४ में ३४.३६ प्रतिशत से बढ़कर २०७९ में ३६.४ प्रतिशत हो गई है। स्थानीय तहों में २०७४ के चुनाव में कुल प्रतिनिधियों में ४०.९५ प्रतिशत महिलाएं थीं, जो २०७९ में बढ़कर ४१.२१ प्रतिशत हो गईं। इसके बावजूद नेतृत्व स्तर पर महिलाओं की संख्या सीमित ही है। कुल मिलाकर, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है, लेकिन प्रत्यक्ष चुनावों में कम अवसर, कोटा प्रणाली पर निर्भरता, नेतृत्व कमी, दल संरचनाओं में असमानता और पितृसत्तात्मक सोच चुनौतियां बनी हुई हैं।

२०४८ से २०१५ तक विभिन्न चुनावों में महिलाओं की भागीदारी सीमित थी। सन् २०१५ के चुनाव में केवल एक महिला सांसद निर्वाचित हुई थीं। संविधान सभा के चुनाव के बाद समानुपातिक प्रणाली ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा दिया था। पहली संविधान सभा में करीब १९७ महिला सदस्य थीं और दूसरी में १७६ महिला सदस्य थीं। २०७४ से २०७९ तक के राजनीतिक विकास ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया, लेकिन नेतृत्व और प्रभावकारिता में अभी भी कमी है। नेपाल में हाल के वर्षों में युवा वर्ग की राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता बढ़ी है। विशेष रूप से सन् १९९७ के बाद जन्मे युवा डिजिटल प्लेटफार्मों से सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय आवाज उठा रहे हैं। जेनजी आंदोलन २३ भदौ २०८२ को शुरू हुआ, जिसमें ७६ लोगों की मृत्यु हुई, यह राजनीतिक और सामाजिक असंतोष की एक महत्वपूर्ण घटना रही। सरकार ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी। इसके पश्चात नेपाल ने पहली महिला प्रधानमंत्री प्राप्त की, जिन्होंने महिला नेतृत्व के इतिहास में नया अध्याय शुरू किया। सुशीला कार्की ने नेतृत्व क्षमता का उदाहरण प्रस्तुत किया और महिलाओं के सर्वोच्च पद तक पहुँचने का सकारात्मक सन्देश दिया। प्रधानमंत्री कार्की के मुख्य चुनौती युवा मांगों का समाधान, आर्थिक संकट प्रबंधन और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना थे। दलों के बीच विश्वास पुनर्स्थापन कर नए चुनाव या संविधान संशोधन हेतु साझा एजेंडा लाना आवश्यक था।

२०८२ फागुन २१ को प्रतिनिधि सभा का चुनाव महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। नेपाल ने संविधान में प्रतिनिधि सभा में कम से कम ३३ प्रतिशत महिला सुनिश्चित की है, लेकिन प्रत्यक्ष उम्मीदवार महिलाओं की संख्या कम थी। कई दल केवल समानुपातिक सूची से प्रतिनिधित्व पूरा करने की कोशिश में लगे थे, जिसने संरचनात्मक असमानता को बनाए रखा। नेपाल में महिला राजनीतिक भागीदारी इतिहास में संघर्षपूर्ण, प्रभावशाली और सुधारात्मक रही है। प्रारंभिक चरणों में महिलाएं सीमित भूमिकाओं में थीं, लेकिन माओवादी आंदोलन, महिला संगठनों और समानुपातिक प्रणाली ने इस भूमिका को मजबूत किया। संविधान ने पर्याप्त महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है, फिर भी प्रत्यक्ष चुनावों में कम अवसर, नेतृत्व की पहुंच सीमितता, दल संरचनाओं में असमानता और पितृसत्तात्मक सोच मौजूद है। २०७४–२०७९ के बीच महिला प्रतिनिधित्व में सुधार हुआ है, लेकिन समानुपातिक नेतृत्व और प्रभावकारिता के लिए समग्र आत्मनिरीक्षण और संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। अंततः, नेपाल में महिला राजनीतिक भागीदारी मात्र संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि नेतृत्व, निर्णय और नीति निर्माण में प्रभावशाली भूमिका निभाने पर केंद्रित होनी चाहिए। इतिहास से वर्तमान तक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में महिलाओं के नेतृत्व और योगदान ने लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति सुनिश्चित की है।

विदेशी मुद्राओं के कल के विनिमय दर निम्नलिखित हैं

१५ चैत्र, काठमांडू । नेपाल राष्ट्र बैंक ने रविवार के लिए विदेशी मुद्राओं के विनिमय दर निर्धारित किए हैं। निर्धारित विनिमय दर के अनुसार अमेरिकी डॉलर की खरीद दर १५१ रुपये ४१ पैसे और बिक्री दर १५२ रुपये ०१ पैसे है। यूरोपीय यूरो की खरीद दर १७४ रुपये ३२ पैसे और बिक्री दर १७५ रुपये ०१ पैसे, ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग की खरीद दर २०१ रुपये ४१ पैसे और बिक्री दर २०२ रुपये २० पैसे, स्विस फ्रैंक की खरीद दर १८९ रुपये ९२ पैसे और बिक्री दर १९० रुपये ६७ पैसे निर्धारित की गई है।

ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की खरीद दर १०४ रुपये ३७ पैसे और बिक्री दर १०४ रुपये ७९ पैसे, कनाडाई डॉलर की खरीद दर १०९ रुपये ३२ पैसे और बिक्री दर १०९ रुपये ७५ पैसे, सिंगापुर डॉलर की खरीद दर ११७ रुपये ६४ पैसे और बिक्री दर ११८ रुपये १० पैसे तय की गई है। जापानी येन १० की खरीद दर ९ रुपये ४७ पैसे और बिक्री दर ९ रुपये ५१ पैसे, चीनी युआन की खरीद दर २१ रुपये ९१ पैसे और बिक्री दर २१ रुपये ९९ पैसे, सऊदी अरब रियाल की खरीद दर ४० रुपये ३५ पैसे और बिक्री दर ४० रुपये ५१ पैसे, कतर रियाल की खरीद दर ४१ रुपये ४४ पैसे और बिक्री दर ४१ रुपये ६१ पैसे निर्धारित की गई है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार थाई बात की खरीद दर ४ रुपये ६० पैसे और बिक्री दर ४ रुपये ६२ पैसे, यूएई दिरहम की खरीद दर ४१ रुपये २३ पैसे और बिक्री दर ४१ रुपये ३९ पैसे, मलेशियन रिंगित की खरीद दर ३७ रुपये ७३ पैसे और बिक्री दर ३७ रुपये ८८ पैसे, दक्षिण कोरियाई वन १०० की खरीद दर १० रुपये ०३ पैसे और बिक्री दर १० रुपये ०७ पैसे, स्वीडिश क्रोना की खरीद दर १६ रुपये ०५ पैसे और बिक्री दर १६ रुपये ११ पैसे तथा डेनिश क्रोना की खरीद दर २३ रुपये ३३ पैसे और बिक्री दर २३ रुपये ४२ पैसे निर्धारित की गई हैं।

राष्ट्र बैंक ने हांगकांग डॉलर की खरीद दर १९ रुपये ३३ पैसे और बिक्री दर १९ रुपये ४० पैसे, कुवैती दिनार की खरीद दर ४९३ रुपये ७६ पैसे और बिक्री दर ४९५ रुपये ७१ पैसे, बहरीन दिनार की खरीद दर ४०१ रुपये ५७ पैसे और बिक्री दर ४०३ रुपये १६ पैसे, ओमानी रियाल की खरीद दर ३९३ रुपये २८ पैसे और बिक्री दर ३९४ रुपये ८४ पैसे बताई है। भारतीय रुपए की सौ की खरीद दर १६० रुपये और बिक्री दर १६० रुपये १५ पैसे निर्धारित की गई है। राष्ट्र बैंक ने आवश्यकतानुसार इन विनिमय दरों में किसी भी समय संशोधन करने का अधिकार रखा है। वाणिज्यिक बैंक द्वारा निर्धारित विनिमय दर अलग हो सकती है और अद्यतन विनिमय दर केंद्रीय बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।

कांग्रेस नेता एवं पूर्वमन्त्री दिपक खड्का पक्राउ – Online Khabar

कांग्रेस नेता एवं पूर्वमंत्री दिपक खड्का गिरफ्तार

१५ चैत, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस के नेता एवं पूर्व ऊर्जा मंत्री दिपक खड्का को गिरफ्तार किया गया है। संपत्ति शोधन से जुड़े मामले की जांच के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया है, सूत्रों ने जानकारी दी है।

नेपाल कबड्डी लिग सिजन २ के ६ टीम मालिकों की घोषणा

नेपाल कबड्डी लिग सिजन २ के टीम मालिकों की घोषणा कर दी गई है। नेशनल इन्वेस्टमेंट होल्डिंग्स की भवानी राणा ने विराटनगर बाहुबली टीम का स्वामित्व लिया है। एस्ट्रोनिक्स मैनेजमेंट के साथ किए गए 10 साल के समझौते का उद्देश्य नेपाल कबड्डी के व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना है। १५ चैत्र, काठमांडू।

आगामी जेठ २२ से शुरू हो रहे नेपाल कबड्डी लिग (एनकेएल) सिजन २ में हिस्सा लेने वाली ६ टीमों के मालिकों का उद्घाटन कर दिया गया है। एस्ट्रोनिक्स मैनेजमेंट द्वारा होटल याक एण्ड यती में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में एनकेएल सिजन २ की ६ फ्रेंचाइजी टीमों के मालिकों की घोषणाएं की गईं। नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ की पूर्व अध्यक्ष भवानी राणा कबड्डी लिग में शामिल हुई हैं। उनकी कंपनी नेशनल इन्वेस्टमेंट होल्डिंग्स ने विराटनगर टीम का स्वामित्व हासिल किया है। इस टीम का नाम बदलकर विराटनगर बैंडिट्स से विराटनगर बाहुबली कर दिया गया है।

पहले सत्र के विजेता जनकपुर नाइट्स का स्वामित्व नेको इन्श्योरेंस लिमिटेड के पास ही है। उपविजेता काठमाडौं मावरिक्स टीम का स्वामित्व काठमाडौं मावरिक्स प्रा. लि. के पास है। वहीं, फेवा कंस्ट्रक्सन ने पोखरा लेकर्स का स्वामित्व लिया है जबकि मोराई कॉर्पोरेशन ने बुटवल बुल्स की टीम का अधिग्रहण किया है। इसके साथ ही हिमालयन राइडर्स का नाम बदलकर बुटवल बुल्स कर दिया गया है। धनगढी वाइल्डकैट्स प्रा. लि. ने सुदूरपश्चिम प्रदेश के प्रतिनिधि टीम धनगढी वाइल्डकैट्स का स्वामित्व लिया है।

देश में लोकप्रियता हासिल करते एनकेएल की व्यावसायिक और व्यापारिक सगाई पर खुशी जताते हुए एस्ट्रोनिक्स मैनेजमेंट के प्रमुख अमितकुमार बेगानी ने कहा, ‘पहले संस्करण को हमने भव्य रूप से आयोजित किया था। दूसरा संस्करण इससे भी बेहतर होगा। कॉर्पोरेट परिवारों की भागीदारी लिग की उत्कृष्टता को बढ़ाएगी। हमारा लक्ष्य नेपाली कबड्डी को विश्वव्यापी उत्कृष्टता की ओर ले जाना है।’ कार्यक्रम में नेपाली राष्ट्रीय स्तर पर श्रीलंकाई राजदूत रुवन्थी डेलपिटिया, अखिल नेपाल कबड्डी संघ के महासचिव अरविंदकुमार झल सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। महासचिव झल ने बताया कि एस्ट्रोनिक्स मैनेजमेंट के साथ नेपाल कबड्डी लिग के लिए 10 साल का समझौता हुआ है, जो देश के कबड्डी खेल के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। एनकेएल को व्यवसायिक तरीके से संचालित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। जेठ २२ से शुरू होने वाले एनकेएल सिजन २ के खिलाड़ियों के ड्राफ्ट के लिए देशी खिलाड़ियों का चयन पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त 15 देशों के 100 से अधिक विदेशी खिलाड़ियों ने भी नाम दर्ज कराया है, आयोजकों ने बताया।

प्रश्नैप्रश्न माथि उभिएका बालेनको अभिभारा

प्रश्नों का सामना कर रहे बालेन का नेतृत्व

बालेन अब केवल प्रश्नकर्ता ही नहीं हैं, बल्कि रास्वपा के पक्षधर भी नहीं हैं। लगभग दो तिहाई मतों के साथ सत्ता में आने वाले इन व्यक्तियों ने खुद को जितना भी जवाबदेह बनाने की कोशिश की हो, उनकी प्रासंगिकता अभी भी साबित होगी।

लाओस प्रस्थान के बाद नेपाली फुटबॉल टीम घोषित, अन्जन विष्ट टीम में नहीं

एएफसी एशियन कप क्वालीफाइंग के तहत लाओस के खिलाफ मैच के लिए नेपाली राष्ट्रीय फुटबॉल टीम शनिवार को लाओस के लिए प्रस्थान कर चुकी है। अखिल नेपाल फुटबॉल संघ को राष्ट्रीय खेल परिषद द्वारा निलंबित किए जाने के बाद एन्फा ने तत्कालीन परिस्थिति में टीम को लाओस भेजा था। नए मुख्य कोच गुग्लिएल्मो एरेना के डेब्यू मैच के लिए पांच नए खिलाड़ियों को शामिल करते हुए टीम की घोषणा की गई है।

लाओस पहुंचने के बाद एन्फा ने रविवार सुबह अपने फेसबुक पेज के माध्यम से नेपाली टीम का घोषणा की है। गोलकीपर किरण चेम्जोङ की कप्तानी में घोषित टीम में नेपाल के लिए संयुक्त रूप से सबसे अधिक 13 गोल करने वाले अन्जन विष्ट शामिल नहीं हो सके। नवनियुक्त मुख्य कोच एरेना के पहले मैच में पांच नए चेहरे शामिल किए गए हैं।

नई खिलाड़ियों में गोलकीपर योगेश धिमाल, मिडफील्डर पेम्बा दोर्जे लामा और मिलन राय, तथा फॉरवर्ड युवराज खड्का और रोमन भुजेल हैं। योगेश और रोमन राष्ट्रीय लीग में प्लानिंग बॉयज यूनाइटेड से खेलते हैं जबकि मिलन चर्च बॉयज और युवराज एपीएफ के खिलाड़ी हैं।

एशियन कप क्वालीफाइंग के तहत नेपाल को लाओस के खिलाफ अपना मैच घरेलू मैदान पर खेलना था, लेकिन हाल ही में दशरथ रंगशाला अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए अयोग्य घोषित होने की वजह से यहां मैच आयोजित नहीं हो सका। खेल परिषद के कार्यकारी निकाय राखेप द्वारा एन्फा को निलंबित किए जाने के कारण नेपाली फुटबॉल की वर्तमान स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। समूह एफ में शामिल नेपाल एशियन कप के लिए क्वालीफाई करने की दौड़ से पहले ही बाहर हो चुका है।

ट्रम्प के खिलाफ अमेरिका भर में 3,000 से अधिक स्थानों पर लाखों लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन

अमेरिका भर में 3,000 से अधिक स्थानों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। मिनेसोटा के सेंट पॉल में ट्रम्प की कठोर अप्रवासन नीति के विरुद्ध एक विशाल रैली आयोजित की गई थी। यूरोप के विभिन्न शहरों में भी अमेरिकी नागरिकों ने ट्रम्प प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन किए। 15 चैत, काठमांडू। अमेरिका के प्रमुख शहरों से लेकर छोटे गांवों तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारी संख्या में प्रदर्शन हो रहे हैं। ‘किंग्सनो किंग्स’ अर्थात् ‘कोई राजा नहीं’ नारे के साथ यह राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों का तीसरा संस्करण है। इससे पहले भी लाखों लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और अपनी असंतुष्टि जताई है। शनिवार को अमेरिका भर में 3,000 से अधिक जगहों पर छोटे-बड़े रैलियां आयोजित की गईं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से ट्रम्प प्रशासन की नीतियों को निशाना बनाया, जिनमें खासतौर पर ईरान के साथ संभावित युद्ध, सख्त संघीय अप्रवासन नीति और बढ़ती महंगाई प्रमुख थे। आयोजकों का कहना था कि यह लोकतंत्र की रक्षा और निरंकुश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण नागरिक विद्रोह है। जारी विज्ञप्ति में कहा गया, “किंग्सट्रम्प हम पर निरंकुश शासक की तरह राज करना चाहते हैं, लेकिन यह अमेरिका है और शक्तियां जनता के हाथ में हैं, न कि किसी राजा या उनके धनी सहायक के हाथ में।”

इसी बीच व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को नजरअंदाज करते हुए इसे ‘किंग्सट्रम्प डिरेन्जमेन्ट थेरापी’ यानि ट्रम्प विरोधी अंध विरोध से मुक्त होने के लिए आवश्यक उपचार करार दिया। एक प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में सिर्फ वे पत्रकार चिंतित हैं जिन्हें समाचार लिखने के लिए पैसा मिलता है।

आंदोलन का मुख्य केंद्र – मिनेसोटा
शनिवार को ‘किंग्सनो किंग्स’ आंदोलन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कार्यक्रम मिनेसोटा के सेंट पॉल में स्थित स्टेट कैपिटल बिल्डिंग के बाहर हुआ। जनवरी में संघीय अप्रवासन एजेंसी की कार्रवाई में दो अमेरिकी नागरिक – रेनी निकोल गुड और एलेक्स प्रेटी की मृत्यु के बाद यह राज्य ट्रम्प की अप्रवासन नीति विरोध का केंद्र बन गया है। उनकी मौत ने पूरे देश में गहरा आक्रोश और संगठित विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया। हजारों लोग प्लेकार्ड लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करते नजर आए और इस रैली में उच्च पदस्थ डेमोक्रेट नेता भी मौजूद थे। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने ट्रम्प की अप्रवासन नीतियों की कड़ी आलोचना की। सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने मिनेसोटा के लोगों का सम्मान करते हुए इसे अमेरिकी इतिहास के एक अभूतपूर्व और खतरनाक क्षण के रूप में वर्णित किया। सांसद इल्हान ओमार ने कहा, “हम मिनेसोटा के लोग भिन्न दृष्टिकोण के हैं,” और नागरिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाई। रैली में प्रसिद्ध रॉक संगीतकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने नया विरोध गीत ‘स्ट्रिट्स ऑफ मिनियापोलिस’ प्रस्तुत कर भीड़ को उत्साहित किया, उन्होंने मिनेसोटा को पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। अभिनेत्री और प्रगतिशील कार्यकर्ता जेन फोंडा ने रैली में उपस्थित न होकर मृतक रेनी गुड की पत्नी, बेका गुड का संदेश पढ़कर सुनाया।

वाशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क में मानव सागर
शनिवार दोपहर से अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी की सड़कें प्रदर्शनकारियों से भरी हुई थीं। हजारों लोग नेशनल मॉल और लिंकन मेमोरियल की सीढ़ियों पर जमा हुए थे। पिछले बार की तरह इस बार भी प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और प्रशासन के अन्य शीर्ष अधिकारियों की पुतलियाँ बनाई थीं। उन्होंने वर्तमान प्रशासन को हटाने और ट्रम्प को गिरफ्तार करने की मांग के साथ नारे लगाए। वर्जीनिया के आर्लिंग्टन से एक विशाल समूह पुल पार करते हुए राजधानी में दाखिल हुआ। इसी तरह न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर, मैनहट्टन और अन्य स्थानों पर भी हजारों लोगों ने मार्च किया। भीड़ की संख्या बढ़ने पर पुलिस को सामान्यतः व्यस्त सड़कों को बंद करना पड़ा। पिछली अक्टूबर में न्यूयॉर्क में पांच मुख्य स्थलों पर एक लाख से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हुए थे, वाशिंगटन पुलिस ने बताया था। इस बार भी ईरान युद्ध के विरोध और अप्रवासन नीति के खिलाफ बैनर दिखाए गए। न्यूयॉर्क के प्रदर्शन में ट्विच स्ट्रीमर हसन पिकर और टिकटॉक स्टार हैरी सिसन समेत प्रगतिशील प्रभावशाली हस्तियों ने युवाओं को लोकतंत्र बचाने का आह्वान किया।

लॉस एंजिल्स, शिकागो और अन्य प्रमुख शहरों में भी जोश
पश्चिमी तट के शहरों में भी प्रदर्शन की ऊर्जा उच्च रही। लॉस एंजिल्स के ग्लोरिया मोलिना ग्रैंड पार्क में हजारों जुटे जहां वातावरण अलग और सृजनात्मक था। वहां साल्सा संगीत बज रहा था और प्रदर्शनकारी ‘बच्चा ट्रम्प’ नामक 20 फुट ऊँचा विशाल गुब्बारा उड़ाते देखे गए। कुछ ने फ्लेमिंगो और शार्क जैसे इन्फ्लेटेबल पोशाकें पहन रखीं थीं और ‘अप्रवासन एजेंसी खत्म करो’ के बैनर भी रखे हुए थे। हालांकि, डाउनटाउन के संघीय भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई और कुछ को गिरफ्तार किया गया, लॉस एंजिल्स पुलिस ने बताया। शिकागो के ग्रांट पार्क और पोर्टलैंड में भी हजारों लोग संगीत बैंड के साथ मार्च करते नजर आए। पूर्व सैनिक क्रिस होली ने कहा, “देश में हो रहे अन्याय को देखकर मैं पहली बार सड़कों पर आया हूं। मैं ट्रम्प प्रशासन की नीतियों से बेहद असहमत हूं।”

रिपब्लिकन गढ़ और छोटे शहरों में भी असंतोष
‘किंग्सनो किंग्स’ आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल बड़े डेमोक्रेट बहुल शहरों तक सीमित नहीं है। आयोजकों के अनुसार लगभग आधे प्रदर्शन उन राज्यों में हुए जो पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी के गढ़ माने जाते हैं। इनमें टेक्सास (डलास, फोर्ट वर्थ), फ्लोरिडा, जॉर्जिया, इडाहो, यूटाह और अलास्का जैसे राज्य शामिल हैं। मिसिगन के हवेल और केंटकी के शेल्बीविल जैसे छोटे शहरों में भी ईरान युद्ध विरोधी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्लेकार्ड लिए लोग दिखे। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारी समस्याएं एक समान समझी जाएं, अगर हम सब एक साथ खड़े हों तो परिवर्तन संभव है।”

अंतरराष्ट्रीय एकजुटता
न केवल अमेरिका में, यूरोप में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों ने भी ट्रम्प प्रशासन के विरोध में प्रदर्शन किए। फ्रांस के पेरिस, ब्रिटेन के लंदन और पुर्तगाल के लिस्बन में जमा लोगों ने ट्रम्प को फासीवादी और युद्ध अपराधी बताते हुए उनकी सरकार से हटाने की मांग की।

ट्रम्प क्या कहते हैं?
जनवरी 2025 में व्हाइट हाउस में पुनः स्थापित होने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रपति अधिकारों का व्यापक विस्तार किया है। उन्होंने कार्यकारी आदेशों के जरिए संघीय सरकार के विभिन्न विभागों को विघटित करने की कोशिश की है और राज्य के गवर्नरों के विरोध के बावजूद कई अमेरिकी शहरों में नेशनल गार्ड तैनात किया है। इसके अलावा राजनीतिक विपक्षियों के खिलाफ अभियोजन की दिशा में न्याय विभाग के शीर्ष अधिकारियों को निर्देश देने के आरोप भी लगे हैं। आलोचक ट्रम्प के इन कदमों को असंवैधानिक और अमेरिकी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा मानते हैं। हालांकि ट्रम्प इसे देश के संकट के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक बताते हैं। तानाशाह होने के आरोप को वे उन्मादपूर्ण बताते हुए खारिज कर चुके हैं। पिछले अक्टूबर में फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा था, “मुझे राजा कहा जा रहा है, पर मैं कोई राजा नहीं हूं।” अक्टूबर की रैली में लगभग 7 लाख लोगों की भागीदारी हुई थी। इस बार भी प्रदर्शनकारियों की ऊर्जा और उत्साह कम नहीं हुआ है। आयोजक आगामी 1 मई को श्रमिक अधिकारों, आप्रवासी समुदाय और सार्वजनिक स्कूलों के समर्थन में होने वाले वार्षिक ‘किंग्समे डे’ प्रदर्शन के लिए व्यापक जनसहभागिता जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। देश भर में युद्ध, महंगाई और सख्त अप्रवासन नीतियों के कारण जनसामान्य में बढ़ती असंतोष आगामी मध्यावधि चुनावों पर किस प्रकार का राजनीतिक प्रभाव डालती है, यह विषय अब कई लोगों की चिंता का केन्द्र बन गया है। एक मैनहट्टन निवासी प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम केवल अपने भविष्य के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क पर आए हैं।” नागरिकों की इस आवाजू श्रृंखला के तुरंत बंद होने का कोई संकेत नहीं दिखता।