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लेखक: space4knews

‘सड़क का पिच और चौड़ा होना ही सुरक्षा की गारंटी नहीं’ – विशेषज्ञ की सलाह

नेपाल में जनधन के विशाल नुकसान का एक प्रमुख कारण सड़क दुर्घटना है। नेपाल दुनिया के सबसे ज्यादा दुर्घटना होने वाले देशों में से एक है। पिछले दस वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं ने २४ हजार से अधिक लोगों की मौत होने का आंकड़ा दिया है। पिछले पांच वर्षों में २,६६१ पैदल यात्रियों की मृत्यु हुई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 5 से 29 साल के बच्चों और युवाओं में मुख्य मृत्यु कारण सड़क दुर्घटना और चोटें हैं। दुनिया भर में 92% सड़क दुर्घटना की मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं।

नेपाल में प्रतिदिन सात लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं की वजह से होती है, जो न केवल मानवीय बल्कि सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी गंभीर प्रभाव डालती हैं। अधिकांश लोग दुर्घटना का दोष चालक पर डालते हैं, लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए सड़क, वाहन और उपयोगकर्ता (चालक, यात्री, पैदल यात्री) तीनों की जिम्मेदारी होती है।

इन सभी पक्षों के प्रति सतर्क, जागरूक रहने और आवश्यक होने पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी राज्य की होती है। सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए कानून, प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षित वाहन और सड़क, जिम्मेदार उपयोगकर्ता, और दुर्घटना के बाद प्रभावी उपचार और पुनर्वास आवश्यक हैं।

नेपाल में सड़कों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: राजमार्ग, सहायक मार्ग, जिला सड़क और ग्रामीण एवं कृषि सड़क। देश भर की सड़क लंबाई 1,04,906 किलोमीटर है, लेकिन कितनी सड़क सुरक्षित है इसका सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

सुरक्षित सड़क से आमतौर पर पिच और चौड़ी सड़क समझी जाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल चौड़ी और पिच सड़क सुरक्षित नहीं होती। सुरक्षित सड़क को चालक, यात्री और पैदल यात्री समेत सभी उपयोगकर्ताओं के जीवन को जोखिम मुक्त बनाना चाहिए। नेपाल में सड़कों की असुरक्षा दुर्घटना का प्रमुख कारण है।

प्रतिनिधि सभा सदस्य और सड़क इंजीनियर आशिष गजुरेल से सड़क दुर्घटनाओं में सड़क के किरदार पर हुई बातचीत के कुछ मुख्य अंश प्रस्तुत हैं:

हर दिन सड़क दुर्घटना में जनधन का नुकसान होता है। क्या सड़क की भूमिका होती है?

मूलतः सड़क दुर्घटना का मुख्य कारण असुरक्षित सड़क ही होती है। क्योंकि सड़क पर सभी प्रकार के वाहन और उपयोगकर्ता चलते हैं—मोटरसाइकिल, साइकिल, बस से लेकर पैदल यात्री और व्हीलचेयर उपयोगकर्ता तक। इसलिए सुरक्षा के पहले स्तंभ के रूप में सड़क की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

हमारे देश में अब एक लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क है, लेकिन केवल २५ हजार किलोमीटर सड़क ही सड़क विभाग द्वारा डिज़ाइन और निर्मित है। यह तथ्य सुरक्षित और असुरक्षित सड़कों की स्थिति स्पष्ट करता है।

हमने टोल और गांवों को जोड़ने के लिए गुणवत्ता रहित सड़कें बनाई हैं, जिससे हर साल हजारों मौतें हो रही हैं।

क्या सड़क विभाग द्वारा प्रमाणित २५ हजार किलोमीटर सड़क पूरी तरह सुरक्षित है?

यह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। संसाधन और बजट की कमी के कारण सुरक्षा के कई मानकों का पालन नहीं हो पाया है। उदाहरण के तौर पर काठमांडू से मुग्लिन तक की सड़क पर अब सुरक्षा रेलिंग लगनी शुरू हुई है, जबकि पूर्वी इलाकों में यह सुविधा नहीं है। पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा रेलिंग अनिवार्य होनी चाहिए, लेकिन वहां अधिकांशतः ऐसा नहीं है।

संसाधन और सोच की कमी से सड़क निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा की अनदेखी हुई, जो दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बनी।

क्या चौड़ी और पिच की गई सड़क ही सुरक्षित सड़क होती है?

बिल्कुल नहीं। पिच और चौड़ी सड़क होना सुरक्षा की एक शर्त हो सकती है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। राजमार्ग पर केवल वाहन होने चाहिए, लेकिन हमारे राजमार्गों पर गाय-भैंस चलती हैं, चाय पकाई और बेची जाती है, जो न तो राजमार्ग के लिए उचित है न ही शहरी सड़क की गुणवत्ता रखता है। शहरी सड़कों में व्यवस्थित बस स्टॉप, पैदल यात्री, साइकिल यात्री और विकलांगों के लिए सुविधा होनी चाहिए, जो अभी नहीं है।

सड़क का डिजाइन उसके स्थान के अनुसार होना चाहिए — ग्रामीण और शहरी सड़कें अलग होनी चाहिए। सभी उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का होना जरूरी है।

उदाहरण के लिए, कलंकी से कोटेश्वर तक सड़क को एक्सप्रेस वे बनाकर केवल गाड़ियों के सहज आवागमन के लिए बनाया गया, लेकिन लोग सड़क पार करने पर मजबूर थे, जो डिजाइन में शामिल नहीं था। इससे दुर्घटनाएं बढ़ीं, बाद में सुधार किया गया।

चौड़ी सड़कें ओवरस्पीड की प्रवृत्ति बढ़ाती हैं, और अध्ययन से पता चलता है कि तेज गति के कारण 90 प्रतिशत दुर्घटनाएं होती हैं।

सड़क सुरक्षित होने का मतलब केवल गाड़ियों का टकराव न होना नहीं, पैदल यात्रियों और साइकिल यात्रियों की पूरी सुरक्षा भी जरूरी है?

बिल्कुल सही। सभी के लिए सुरक्षित सड़क ही वास्तविक सुरक्षित सड़क है। सार्वजनिक परिवहन अगर सही जगह यात्री उतारने नहीं देता तो पीछे से आ रही गाड़ी दुर्घटना कर सकती है। इसलिए आठ-दस लेन की सड़क भी सुरक्षित नहीं मानी जाती।

जेब्रा क्रॉसिंग सही जगह होनी चाहिए और ट्रैफिक लाइट से जुड़ी होनी चाहिए। ढलान वाले स्थानों पर रखी गई जेब्रा क्रॉसिंग असुरक्षित होती है क्योंकि गाड़ी ब्रेक नहीं लगा पाती। गति सीमा और सुरक्षा सूचनाएं हर जगह उपलब्ध होनी चाहिए।

आप सड़क सुरक्षा के लिए कानून बना रहे हैं। सांसद के रूप में आपने इसे कैसे आगे बढ़ाया है?

सड़क पूर्वाधार ही नहीं, वाहन की स्थिति, उपयोगकर्ता अनुशासन, चालक की कौशल और नियम पालन सभी जरूरी हैं। नियम कड़ाई से लागू और तकनीकी रूप से उपयुक्त होना चाहिए। दुर्घटना के बाद बचाव और उपचार व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।

हम वर्तमान में सार्वजनिक परिवहन में CCTV कैमरे, GPS, सड़क मरम्मत और त्वरित बचाव प्रणाली को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं।

सड़क सुरक्षा कानून पिछले सात-आठ वर्षों से तैयार हो रहा है। यह वर्तमान में सुझावों के लिए महान्यायालय के कार्यालय में भेजा गया है और जल्द ही संसद में प्रस्तावित किया जाएगा। कानून लागू होने पर सड़क सुरक्षा परिषद भी बनेगी और सुरक्षा में नए रास्ते खुलेंगे।

जुर्माने की राशि बढ़ने से सड़क सुरक्षा बेहतर होगी क्या?

अंतरराष्ट्रीय अनुभव से पता चलता है कि जुर्माना बढ़ाने से दुर्घटनाओं में कमी आती है। कम जुर्माना होने पर लोग नियम तोड़ते हैं। जोखिम न बढ़े तो जुर्माना ज्यादा होने पर सुधार होता है। हालांकि, यह तुरंत प्रभावी नहीं होगा; संसद में चर्चा के बाद ही प्रभावशाली होगा।

गलती से होने वाले जुर्माने के प्रति लोग जो भावनाएं रखते हैं उनका कैसे ध्यान रखा जाएगा?

इस मामले में फीडबैक मिला है। जुर्माना न अधिक होना चाहिए न कम। इतना होना चाहिए कि लोग सचेत हों। हम इस संतुलन को बनाए रखकर काम करेंगे।

जेब्रा क्रॉसिंग पर कई लोग नियम नहीं मानते या उन्हें जानकारी ही नहीं होती। विदेशी देशों की तरह इन्हें ट्रैफिक लाइट से जोड़ना चाहिए, जो गाड़ी को लाल और पैदल यात्री को हरी बत्ती दिखाए। साथ ही हम्प और रैम्बल स्ट्रिप्स गति कम करती हैं और दुर्घटनाएं कम होती हैं।

कुछ जेब्रा क्रॉसिंग गलत जगह और ढलान वाले स्थानों पर हैं, जहां गति कम नहीं हो पाती।

विदेशों में 3D तकनीक का उपयोग होता है, नेपाल में क्यों नहीं?

यह धीरे-धीरे आ रहा है, लेकिन अभी पूर्ण रूप से सभी जगह प्रयोग नहीं हुआ है।

 

८ दिनपछि भग्नावशेषबाट जिउँदै उद्धार भयो युवा

१८ असार, काठमाडौं। भेनेजुएलामा गएको भूकम्पपछि ८ दिन बितिसकेको अवस्थामा एक युवकलाई भग्नावशेषबाट जिउँदै उद्धार गरियो। उद्धारकर्ताहरूले १४० टन तौल भएका भग्नाका टुक्राहरूबाट उक्त युवकलाई बाहिर निकाल्न सफल भएका छन्। उनी हरनान गिल नामका छन्। अन्तर्राष्ट्रिय समाचारहरूमा उल्लेख छ कि जाँदाजाँदै उनलाई जीवित फेला पारेपछि करिब १०० घण्टासम्म उद्धार प्रयास जारी राखिएको थियो।
गत शनिबार युवक भग्नावशेषभित्र जीवित रहेको पत्ता चलेको थियो र त्यसपछि सयौं उद्धारकर्मीहरूले उनलाई बचाउन लामो अवधिसम्म प्रयास गरिरहे। यस उद्धार अभियानमा भेनेजुएला, चिली, कोस्टारिका, एल साल्भाडोर, मेक्सिको, पोर्चुगल र अमेरिकाका उद्धार टोलीहरूले महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह गरेका थिए। भेनेजुएलामा २४ जुनमा ७.६ र ७.२ रेक्टर स्केलका दुई ठूला भूकम्प आएको थियो जसले अहिलेसम्म २ हजार ३०० भन्दा बढी मानिसको ज्यान लिइसकेको छ। थप रूपमा, हजारौं मानिसहरू अझै बेपत्ता छन्।

काठमाडौं म्याराथनमा २४ घण्टाभित्रै २५०० भन्दा बढीले नाम दर्ता गराए

१८ असार, काठमाडौं । नेपालको प्रतिष्ठित सडक दौड प्रतियोगिता सिद्धार्थ बैंकको १८औं काठमाडौं म्याराथन २०२६ अब केवल १०० दिनमा आयोजना हुन लागेको छ। एनआरएस स्पोर्ट्स फाउन्डेसनको आयोजनामा यो प्रतियोगिता आगामी असोज २४ गते (अक्टोबर १०) दशरथ रंगशालाबाट शुरू हुनेछ। आयोजकका अनुसार यस वर्ष करिब १० हजार धावकहरूको सहभागिता रहने अपेक्षा गरिएको छ। दर्ता खुलाएको पहिलो २४ घण्टाभित्रै फुल म्याराथन, हाफ म्याराथन र १० किलोमिटर दौडका लागि २,५०० भन्दा बढी धावकले नाम दर्ता गरिसकेका छन्। यस पटक पहिलो पटक फुल म्याराथनमा २५ जना महिला धावक सहभागी भएका छन्। आयोजकले यसलाई नेपाली महिलाको आत्मविश्वास, साहस र खेलप्रतिको बढ्दो आकर्षणको ऐतिहासिक संकेतको रूपमा व्याख्या गरेका छन्।

प्रतियोगितामा फुल म्याराथन (४२.१९५ किमि), हाफ म्याराथन (२१ किमि), १० किलोमिटर, ५ किलोमिटर र ३ किलोमिटर दौड समावेश छ। विभिन्न उमेर समूहका साथै खुला, मास्टर्स, कलेज र विद्यालयस्तरीय प्रतिस्पर्धा पनि रहनेछ। यस संस्करणको विशेष आकर्षण ३ किलोमिटर ‘फ्यामिली रन’ रहनेछ, जसमा आमा, पिता र छोराछोरीसहित परिवारका कम्तीमा तीन सदस्यहरूले एउटै टोली बनाएर सँगै दौड्न सक्ने व्यवस्था गरिएको छ। यसले स्वस्थ जीवनशैलीसँगै पारिवारिक एकता प्रवर्द्धन गर्ने विश्वास आयोजकहरूको छ। यस वर्ष भारत, नर्वे, बेलायत, पोल्याण्ड, श्रीलंका, अमेरिका, बंगलादेश, चीन, इन्डोनेसिया, जापान र फ्रान्सलगायत देशहरूबाट १२० भन्दा बढी अन्तर्राष्ट्रिय धावकले सहभागिता सुनिश्चित गरिसकेका छन्। अन्य देशबाट पनि दर्ता जारी रहेको आयोजकले जानकारी दिएका छन्। प्रतियोगितालाई एकदिने कार्यक्रममा सीमित नराखी विद्यालय तथा कलेज अभियान, रनिङ क्लबहरूसँग सहकार्य, सामूहिक दौड र सामाजिक सञ्जाल अभियानमार्फत शहरव्यापी खेल अभियानका रूपमा अघि बढाइएको छ। वडा कार्यालय, स्थानीय तह र विभिन्न संघसंस्थाहरूको सकारात्मक सहकार्यले यस वर्षको काठमाडौं म्याराथन अझ भव्य, व्यवस्थित र उत्सवमय बनाउने लक्ष्य राखिएको छ। यस वर्षको काठमाडौं म्याराथनको नारा ‘बिल्ड हेल्दी लाइफस्टाइल’ रहेको छ। सीमित सिट बाँकी रहेका कारण इच्छुक धावकलाई यथाशीघ्र दर्ता गर्न आयोजकले अनुरोध गरेका छन्।

कर्णाली प्रदेशसभामा ‘मुर्दावाद’ के नारों के बीच बैठक बार-बार बाधित

१८ असार, सुर्खेत। आगामी आर्थिक वर्ष के बजट पर चर्चा के लिए आयोजित कर्णाली प्रदेशसभा की बैठक में गुरुवार दोपहर अचानक ‘मुर्दावाद!’ के नारों का गुंजन हुआ। इस प्रकार के नारों के साथ होने वाले विरोध की वजह सभामुख नन्दा गुरुङ की कार्यशैली बताई जा रही है। प्रदेश सरकार ने असार १ गते सदन में प्रस्तुत बजट से असंतोष व्यक्त करते हुए प्रमुख विपक्षी दलों ने बार-बार सभा अवरुद्ध की है। अब तक उन दलों ने यह तीसरी बार सदन को बाधित किया है। पहले सदन में लाल पुस्तिका न भेजे जाने, लोकप्रिय बैंक खाता बेटी कार्यक्रम को हटाए जाने, मंत्रियों द्वारा नियमावली का उल्लंघन कर योजना प्रस्तुत करने, नेताओं के नाम पर प्रतिष्ठान से स्मृति भवन तथा देवताओं की प्रतिमाओं तक का बजट लाने और उसे सुधारे जाने की मांग को लेकर विपक्षी दल सदन अवरुद्ध करते रहे हैं। कर्णाली प्रदेश में नेपाली कांग्रेस और नेकपा एमाले का गठबंधन वाली मजबूत सरकार है।

सदन को बाधित करने वाले दलों में प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा), राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) और पूर्व मुख्यमंत्री राजकुमार शर्माजी की टीम शामिल हैं। इस विवाद के बीच गुरुवार दोपहर तीन बजे प्रदेशसभा की बैठक बुलाई गई थी। थोड़ी देरी से शुरू हुई बैठक में राष्ट्रिय गान समाप्त होने के बाद राप्रपा की सांसद सन्तोषी शाही ने समय मांग किया। सभामुख ने अनुमति दी तो उन्होंने सरकार की मांगें पूरी न होने पर सदन में कामकाज जारी रखने की संभावना को कमजोर बताया। विपक्षी सांसदों ने तुरंत विरोध जताया। सभामुख नन्दा गुरुङ ने सदन संचालन के लिए कुछ समय सहयोग देने का अनुरोध किया, लेकिन विपक्ष ने विरोध जारी रखा।

सभामुख गुरुङ ने विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए कहा और यदि न चाहें तो बैठने का आग्रह करते हुए कहा, ‘आज की कार्यवाही आगे बढ़ेगी’ और सभा संचालित करवा दी। इसके बाद अर्थमंत्री राजीवविक्रम शाह को कर्णाली प्रदेश आर्थिक विधेयक–२०८३ पर विचार करने का प्रस्ताव प्रस्तुत करने का समय दिया गया। जब सभामुख विधेयक आगे बढ़ाना चाहीं तो विपक्षी सांसदों ने मंत्री शाह को रोस्टम तक जाने नहीं दिया और कुछ देर थोड़ी धक्कामुक्की भी हुई। सरकार अभी भी बजट पारित कराने की कोशिश कर रही थी। सरकार और सभामुख की कार्यशैली के खिलाफ विपक्ष ने ‘निरंकुश मुर्दावाद!’ के नारे लगाकर विरोध जताया। बढ़ते विरोध के बीच सभामुख गुरुङ ने आधे घंटे के लिए बैठक स्थगित कर दी। हालांकि बैठक फिर शुरू नहीं हो सकी। प्रदेशसभा सचिवालय ने शुक्रवार दोपहर १ बजे तक के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए सूचना लगाकर बैठक स्थगित के बारे में सूचित किया है।

सरकारी सेवाओं में न्यून सुधार, झमेलों का समाधान नहीं हो पाया

१८ आसार, जनकपुर । धनुषा के धनौजी गाउँपालिका-५ के १९ वर्षीय सजन मुखिया बुधवार दोपहर करीब १२ बजे जिला प्रशासन कार्यालय धनुषा के राहदानी शाखा के खिड़की पर मिले।

विदेश जाने की जल्दी में उन्होंने खिड़की पर मौजूद कर्मचारियों से दस्तावेज दिखाते हुए पूछा, ‘मेरा पासपोर्ट बनकर आया है या नहीं? मोबाइल पर २० दिन में भी एसएमएस नहीं आया।’ वहां बैठी महिला कर्मचारी ने जांच कर जवाब दिया, ‘अब १५ दिन बाद आइएगा, तब तक बन चुका होगा।’

पासपोर्ट बनाने के लिए मुखिया २५ जेठ को कार्यालय आकर ऑनलाइन प्रोसेस पूरा कर चुके थे। कहा गया था कि २० दिन के भीतर पासपोर्ट बन जाएगा और फिर मोबाइल पर एसएमएस आएगा। लेकिन २० दिन में संदेश न आने पर वे बुधवार को कार्यालय पहुंचे।

उन्होंने कहा, ‘शुरुआती दिनों में बहुत दिक्कत हुई। लोग कहते हैं कि ७ दिन में पासपोर्ट दे देते हैं, लेकिन देखें २० दिन बाद भी नहीं आया। अब १५ दिन बाद आने को कहा जा रहा है।’ कर्मचारी के जवाब से निराश हुए उन्होंने कहा, ‘बालेन सरकार आने के बाद भी कार्यालय की सेवाओं में खास सुधार नहीं दिखा।’ जिला प्रशासन कार्यालय में राहदानी बनाने के बाद पासपोर्ट पाने में कम से कम २० दिन लगते हैं।

राज्य में राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) प्रधानमंत्री बनने के बाद सार्वजनिक संस्थानों में सेवा को आसान, सरल और झंझट मुक्त बनाने की नीति अपनाई गई थी।

पहली मंत्रीपरिषद बैठक में शासकीय सुधार के एक सौ कार्यसूची जारी की गई और सौ दिनों के भीतर सेवा में सुधार का लक्ष्य रखा गया। सुधार के बिंदु संख्या २१ में उल्लेख है कि ‘नागरिकों को तेज, सरल और बिचौलियामुक्त सेवा देने के लिए नागरिकता, राहदानी, राष्ट्रीय परिचय पत्र, और जिला प्रशासन कार्यालय से मिलने वाली सभी सेवाओं को डिजिटल तथा एकीकृत प्रणाली से संचालित किया जाएगा, नागरिकता की प्रतिलिपि तथा राहदानी सेवा किसी भी जिला प्रशासन कार्यालय से प्राप्त करने का प्रावधान तुरंत लागू किया जाएगा, वडास्तर से डिजिटल सिफारिश प्रणाली लागू होगी, राष्ट्रीय परिचय पत्र को अनिवार्य एकल परिचय प्रणाली के रूप में प्रयोग किया जाएगा तथा सभी सेवा प्रक्रियाओं को फेसलेस, टाइम-बाउंड और ट्रैकिंग योग्य बनाया जाएगा।’

राष्ट्रीय परिचय पत्र बनाने के लिए लगी लाइन।

बिंदु संख्या २६ में पासपोर्ट, नागरिकता, सवारी चालक अनुमति पत्र जैसी सेवाओं को तेज, सरल और बिचौलियामुक्त तरीके से पूर्वानुमानित समय में उपलब्ध कराने का प्रावधान है, साथ ही सभी सेवाओं को डिजिटल, समयबद्ध और बिना चेहरे के (मुँहावले रहित) रूप में बदलने की बात कही गई है।

लेकिन बालेन सरकार की शासकीय सुधार नीति के अनुसार काम हो रहा है या नहीं, इस पर जनता की मिश्रित प्रतिक्रिया है। मधेश प्रदेश की राजधानी जनकपुरधाम में कार्यालयों में मिलने वाले सेवाग्राही कहते हैं कि सुधार नजर नहीं आता तो किसी को संतोषजनक लगा है।

मिथिला नगरपालिका-५ के श्रीपुर के शंकरप्रसाद सिंह सुधार से संतुष्ट हैं। वे बुधवार को अपनी बेटी मनिषा के नागरिकता बनाने के लिए सुबह ९ बजे जिला प्रशासन कार्यालय पहुंचे थे और लगभग साढ़े १० बजे प्रतीक्षा कक्ष में बैठे थे। कर्मचारी उन्हें दोपहर १ बजे नागरिकता देने का आश्वासन दे चुके थे। कुछ घंटों में मिलने की गारंटी से उन्हें सेवा प्रवाह सरल लग रहा था।

उन्होंने कहा, ‘मेरे पास सारे कागजात थे। कर्मचारी ने तेजी से काम शुरू किया। दोपहर १ बजे नागरिकता देंगे कहकर मैं प्रतीक्षा कर रहा हूँ। पहले से सेवा में सुधार दिखता है, और आगे अच्छे सुधार की उम्मीद है।’

शंकरप्रसाद सिंह

लेकिन नागरिकता की प्रतिलिपि लेने गए क्षिरेश्वरनाथ नगरपालिका-८ के धनिकलाल महतो को पहले और अब में कोई सुधार महसूस नहीं हो रहा। वे बुधवार सुबह १०:४० बजे पत्नी अनारकुमारी के साथ कार्यालय के पीछे बैठे थे। वे एक दिन पहले मंगलवार दोपहर १२ बजे प्रतिलिपि लेने आए थे, लेकिन अभिलेख न मिलने की वजह से नई फाइल बनाने के लिए उन्हें जमीन का लालपूर्जा, परिवार के नागरिकता प्रतिलिपि आदि लाने को कहा गया था। वे वे सामान लेकर बुधवार कार्यालय आए थे, लेकिन कर्मचारी ने प्रतीक्षा करने के लिए कहा। उन्हें सेवा प्रवाह में वही जालझेल दिखाई दे रही है।

धनिकला दम्पत्ति

उन्होंने शिकायत की, ‘मैंने २०५६ में नागरिकता ली थी। अभिलेख इसी कार्यालय में थे। कर्मचारी कहते हैं कि खो गए। कौन कहाँ खो गया? फिर कहते हैं यह नहीं मिला, वह नहीं मिला। ये सब जालझेल है। अब मुझे कैसे समझाऊं कि बालेन सरकार के निर्देश से सेवा आसान हुई? प्रतिलिपि लेने में इतनी दिक्कत है।’

उनका कहना है कि जिला प्रशासन कार्यालय महोत्तरी से नागरिकता लेने के बाद गौशाला की बबिता नामक विवाहित बेटी आई। उसके लिए ऑनलाइन नागरिकता अन्वेषण करने पर इसकी आवश्यक्ता हुई। क्योंकि नागरिकता थोड़ा फटी हुई थी, इसलिए प्रतिलिपि मांगी गई। बेटी को इसके लिए ४ हजार रुपये देने को कहा गया, नहीं दिए तो पिता-माता की नागरिकता ऑनलाइन कराने के बाद ही प्रक्रिया पूरी होने दी गई।

जहां वे बैठे थे, वहां छत के नीचे पंखा नहीं था। गर्मी में नागरिक वहीं बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं।

अभिलेख शाखा के एक कर्मचारी के अनुसार कार्यालय में २०४९ से २०५९ तक के बीच नागरिकता प्राप्त अभिलेख काफी पुराना और फटा हुआ है। इसलिए इस अवधि में नागरिकता प्राप्त करने वालों की प्रतिलिपि के लिए नया अभिलेख बनाना पड़ता है।

जिला प्रमुख अधिकारी प्रेमप्रसाद लुइटेल ने बताया कि नागरिकता वितरण में एकद्वार प्रणाली लागू कर सुविधा दी गई है।

उन्होंने कहा, ‘नागरिकता शाखा में अब भीड़ कम है क्योंकि एकद्वार प्रणाली से सभी वडाओं से ऑनलाइन सिफारिश हो रही है, जिससे काम तेज हुआ है।’

पासपोर्ट, नागरिकता को घर तक डाक सेवा के माध्यम से पहुंचाने की सुविधा भी शुरू की गई है। हालांकि नागरिकों का कहना है कि वे आज भी कार्यालय आकर ही ले रहे हैं, अभी तक किसी ने घर पहुंचाने का विकल्प नहीं चुना।

जिला प्रशासन कार्यालय में करीब १०:३० बजे राष्ट्रीय परिचय पत्र लेने के लिए धनुषा के क्षिरेश्वरनाथ नगरपालिका-५ की ७० वर्षीय रामसागर देवी जल्दबाज़ होकर लाइन में खड़ी थीं।

पासपोर्ट बनाने जिला प्रशासन कार्यालय पहुँचे सजन (झोला लेकर)

वृद्धावस्था भत्ता के लिए अब अनिवार्य राष्ट्रीय परिचय पत्र की आवश्यकता होने के कारण वे लेने आई थीं। सुबह ९ बजे आकर लाइन में लग गईं, लेकिन काउंटर तक पहुंचने में उन्हें डेढ़ घंटे से अधिक लगते थे। सेवा प्रवाह में असुविधा व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कोई सुधार नहीं दिख रहा।

उन्होंने कहा, ‘हम जैसे बुजुर्गों को लाइन में लगना पड़ता है। सेवा सरल होनी चाहिए, लेकिन कोई सुधार नहीं दिखता। हमें अभी भी बहुत तकलीफ होती है।’

राष्ट्रीय परिचय पत्र के लिए महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग लाइन थीं। गर्मी से बचने के लिए कुछ पुरुषों ने अपना गमछा हाथों से हवा लगाकर राहत पाने की कोशिश की। फोटो खींचने के काउंटर का प्रवेश एक ही द्वार से होता है और पर्याप्त काउंटर न होने के कारण लाइन धीमी गति से बढ़ रही थी।

लाइन में खड़े लोग दुखी थे। उनमें से ज्येष्ठ नागरिक रामसागर देवी के पीछे खड़ी सभेला नगरपालिका-१० की शोभा देवी भी नाखुश थीं। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। पहले और अब की सरकार में क्या फर्क है? तकलीफ पहली जैसी ही है।’

तराई-मधेश के भीषण गर्मी में कार्यालय के अंदर कर्मचारियों को पंखा मिला है, लेकिन बाहर प्रतीक्षा शेड में पंखा नहीं है। गर्मी में सेवाग्राही वहीं खड़े होकर समय बिताते हैं। परिसर में दो बड़े पेड़ की छाया कुछ राहत देती है।

शेड में पंखा लगाना चाहिए, ऐसा दावा करते हैं धनुषा के बटेश्वर गाउँपालिका-४ के डाडाटोल के परमेश्वर साफी, जो तेजी से सुधार न होने पर दुख व्यक्त करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘दूसरे जिलों में काम कितना सहज होता है। यहां असुविधा है। देखें, कर्मचारी पंखों के नीचे बैठे हैं, लेकिन गर्मी में शेड में पंखा नहीं है। बालेन सरकार से पहले कुछ आसान हुआ है, लेकिन सुधार और तेजी से होना चाहिए।’

जिला प्रमुख अधिकारी लुइटेल बताते हैं कि राष्ट्रीय परिचय पत्र देने में पहले से गति आई है। दो लाइनें हैं, भले ही लंबी हैं, लेकिन चार टेबल पर तस्वीर खींचा जाता है। जेष्ठ नागरिकों, विकलांगों और प्रसूता महिलाओं के लिए गोलघर से तेजी से परिचय पत्र बनाते हैं।

शासकीय सुधार की बिंदु संख्या २७ के तहत सरकारी सेवा को घर तक पहुंचाने के लिए डाक सेवा को आधुनिकीकरण कर पासपोर्ट, नागरिकता प्रतिलिपि, लाइसेंस आदि सरकारी दस्तावेज़ १०० दिन के भीतर घर पर पहुंचाने का प्रावधान है। लेकिन जिला प्रशासन कार्यालय में अभी भी उष्णकटिबंधीय गर्मी में सेवाग्राही लाइन लगाकर सेवा ले रहे हैं।

बालेन सरकार के शासकीय सुधारों पर सेवाग्राही की मिश्रित प्रतिक्रिया है। सेवा को पूरी तरह से सहज बनाए जाने की मांग है। कुछ कर्मचारी स्वयं सेवा प्रदान करने में असंतुष्ट भी हैं।

जिला प्रशासन भवन पुराना और जीर्ण-शीर्ण है। नया भवन निर्माण अंतिम चरण में है। धनुषा में मधेश प्रदेश की सबसे अधिक आबादी है, लेकिन इलाका प्रशासन एक ही यदुकोहा है।

अन्य जिलों में ३-४ इलाका प्रशासन होते हैं, जबकि धनुषा में क्षेत्रीय सेवाग्राही का दबाव इतना है कि संभालना मुश्किल हो रहा है। नया भवन दशहरे तक बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे सेवा में सुधार की उम्मीद है, ऐसा प्रजिअ लुइटेल का कहना है।

मालपोत में समान परेशानी, अन्य में भीड़ कम

भूमिसुधार तथा मालपोत कार्यालय धनुषा में ८५ वर्षीय जुगल ठाकुर दोपहर करीब १२:३० बजे २२० नंबर खिड़की के सामने बेंच पर बैठे थे। क्षिरेश्वरनाथ नगरपालिका-१ के रमदैयाभवाड़ी निवासी वे कर्मचारी से अपने काम के बारे में जानकारी मांग रहे थे। छुट्टे चार कठ्ठा जमीन के लिए वे एक साल से मालपोत कार्यालय में आते रहे हैं। काम न होने पर निराश होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने कहा, ‘मैं एक साल से छुट्टे जग्गे के काम के लिए आ रहा हूँ। कर्मचारी कहते हैं कि डॉक्यूमेंट नहीं मिला। लेकिन मैं उम्मीद लेकर आता रहता हूँ। पिछले पाँच दिनों से लगातार आ रहा हूँ। सारे दस्तावेज़ दे चुका हूं। अब सूचना निकलनी चाहिए, लेकिन पांच दिनों से वहीं अटका हुआ है। यहां अब भी काम आंखों देखा-देखी चलता है।’ मालपोत कार्यालय में काम में बाधा और सुस्ती के संबंध में उनकी शिकायत है।

काउंटर पर बैठे एक कर्मचारी ने पुष्टि की कि जुगल एक साल से बार-बार इसी काम के लिए आते रहे हैं। लेकिन काजात दस्तावेज सही तरीके से नहीं लाने के कारण काम में देरी हो रही है। ‘कुछ दिन पहले अंततः कागजात पहुंचे हैं, अब काम होगा,’ कर्मचारी ने कहा।

उसी फलक के सामने बैठे एक अन्य सेवाग्राही, महोत्तरी के पिपरा गाउँपालिका-६ के रतौली के सुरेश ठाकुर की भी शिकायत समान थी। वे एक महीने से गांव ब्लॉक जमीन के दाखा के लिए आ रहे हैं। सब कागजात पूरे होने पर भी कर्मचारी काम नहीं कर रहे, उन्होंने जताया।

उन्होंने कहा, ‘मैंने भूमिसुधार, नापी, गुठी कार्यालय से सभी दस्तावेज़ कर्मचारी के कहे अनुसार लाए हैं, लेकिन काम किए बिना टाल-मटोल की जा रही है। बालेन सरकार के समय भी ऐसा ही है।’

८५ वर्षीय जुगल ठाकुर

मालपोत कार्यालय में अभी भी लेखापढ़ी व्यवसायी के माध्यम से ही काम होताहै। लोग अपना निजी काम के लिए स्वयं आएं तो देरी होती है।

नापी कार्यालय अपेक्षाकृत व्यवस्थित दिखाई देता है। टोकन सिस्टम के अनुसार काम हो रहा है। ऑनलाइन काम के कारण आंतरिक राजस्व कार्यालय जनकपुर में भीड़ कम है। यातायात व्यवस्था कार्यालय जनकपुर में सेवाग्राही पिछले समय की तुलना में कम आए हैं; केवल चालक अनुमति पत्र बनवाने और नामांतरण कार्य के लिए ही लोग आते हैं। हालांकि यातायात विभाग में अभी भी बिचौलिये मौजूद होने की शिकायत आम है।

धनुषा के प्रजिअ लुइटेल का कहना है कि कार्यालयों में बिचौलियामुक्त होकर सेवा में सुधार हुआ है। ‘जिला प्रशासन सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में बिचौलिया मुक्त हुए हैं। काम की गति बढ़ी है। प्रक्रिया पूरी कर जल्दी काम किया जा रहा है।’

प्रादेशिक अस्पताल जनकपुर में सेवाग्राही की भीड़ अधिक है। लेकिन पर्याप्त जनशक्ति नहीं होने के कारण उपचार में नागरिकों को परेशानी होती है। यहां गुणात्मक सेवा प्रदान होना जरूरी है, ऐसा नागरिक मानते हैं।

जनकपुर में कई निजी अस्पताल, क्लिनिक और लैब मानकों के विरुद्ध संचालित हो रहे हैं। अधिक शुल्क लेने, लापरवाही करने और यहां तक कि जान तक लेने की घटनाएं होती हैं, लेकिन सरकार इसे नियंत्रित करने में नाकाम रही है। यह अव्यवस्था कम करने में विफलता का आम आकलन है।

हालांकि पहले की तुलना में कर्मचारी खुलेआम रिश्वत मांगने से डरते हैं, लेकिन फिर भी मध्यस्थों के हस्तक्षेप से रिश्वतखोरी की प्रवृत्ति नहीं रुक पाई है। नदी में अवैध दोहन पर नियंत्रण नहीं है। क्रसर माफिया का बोलबाला बना हुआ है, जिसमें स्थानीय सरकार से लेकर पुलिस प्रशासन तक की मिलीभगत है, यह भी आम शिकायतों में शामिल है।

 

राजस्व कार्यालय
नापी कार्यालय

 

वैज्ञानिकों ने अमेरिकी जलवायु रिपोर्ट को बताया तथ्यात्मक रूप से गलत, ग्लोबल वार्मिंग मानव गतिविधि के कारण

१७ असार, काठमाडौं । जलवायु वैज्ञानिकों ने अमेरिकी सरकार द्वारा हाल ही में प्रकाशित जलवायु रिपोर्ट को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ बताते हुए चुनौती दी है, जिसमें यह दावा किया गया है कि ग्लोबल वार्मिंग मानव गतिविधि के कारण नहीं हो रही। यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट इंग्लिया के मानद प्रोफेसर बेंजामिन सैंटर और उनके वैज्ञानिक सहयोगी दशकों से उपग्रह डेटा के वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर इस सरकारी रिपोर्ट में गंभीर त्रुटियाँ पाई गई हैं और इसे जलवायु नीतियों के निर्माण के लिए आधार बनाने योग्य नहीं बताया है। प्रोफेसर सैंटर पृथ्वी के जलवायु तंत्र में मानव निर्मित ‘फिंगरप्रिंट’ की पहचान करने वाले विश्व के पहले शोधकर्ताओं में से हैं।

उनके ऐतिहासिक शोध के कारण 1995 में जलवायु परिवर्तन संबंधी अंतरसरकारी पैनल (IPCC) ने वैश्विक तापमान वृद्धि में ‘मानव जाति का स्पष्ट प्रभाव’ होने का निष्कर्ष निकाला था। हालांकि, जुलाई 2025 में अमेरिकी ऊर्जा विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट में सैंटर के शोध को उद्धृत करते हुए जलवायु परिवर्तन में मानव भूमिका को कम बताया गया था। रिपोर्ट जारी होने के ही दिन अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने 2009 के ऐतिहासिक ‘इंडेंजर्मेंट फाइंडिंग’ को रद्द करने का प्रस्ताव रखा था। इस माह ट्रम्प प्रशासन द्वारा इस कानूनी प्रावधान को रद्द करने के फैसले से जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ने की व्यापक आलोचना हो रही है।

इसी संदर्भ में ‘AGU एडवांसेज’ जर्नल में इस सप्ताह प्रकाशित शोध पत्र में प्रोफेसर सैंटर, मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की प्रोफेसर सुसान सोलोमन, यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट इंग्लिया के प्रोफेसर डेविड थॉम्पसन और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के प्रोफेसर चियांग फू की संयुक्त टीम ने अमेरिकी ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट की सख्त आलोचना की है। सैंटर के अनुसार, वायुमंडल में गैस संरचना में हो रहे परिवर्तन मानवजनित जलवायु परिवर्तन का निर्विवाद प्रमाण हैं, विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड जैसे ग्रीनहाउस गैसों की वजह से वायुमंडल की सबसे निचली परत ‘ट्रोपोस्फियर’ गर्म हो रही है, जबकि ऊपर की परत ‘स्ट्रैटोस्फियर’ ठंडी हो रही है।

पिछले 50 वर्षों से जलवायु मॉडल द्वारा ये अनुमान उपग्रह डेटा से मेल खाते आए हैं। लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट वायुमंडलीय तापमान परिवर्तन की प्रक्रियाओं को गलत तरीके से व्याख्यायित करती है, ऐसा वैज्ञानिकों का मानना है। रिपोर्ट में प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ होने के कारण मामला उठने पर इसे तैयार करने वाली टीम को सितंबर की शुरुआत में भंग कर दिया गया था, बावजूद इसके अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने अब तक इस रिपोर्ट को संशोधित या वेबसाइट से हटाया नहीं है। ऊर्जा मंत्री राइट अभी भी इसे जलवायु विज्ञान का विश्वसनीय स्रोत मानते हैं, जबकि प्रोफेसर सैंटर इसे पूरी तरह अविश्वसनीय और भ्रामक बताते हैं। उन्होंने कहा है कि सरकारी रिपोर्टों में किए गए ऐसे गलत वैज्ञानिक दावे पियर-रिव्यूड जर्नलों के माध्यम से सुधारना कूटनीतिक और कानूनी संघर्ष के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

विश्वकप इतिहास का पहला और अंतिम ‘महाभिड़ंत’

रियल मड्रिड में साथ बिताए गए सफल वर्षों के बावजूद विश्वकप के दो दशकों के इतिहास में रोनाल्डो और मोड्रिच पहली और अंतिम बार मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ भिड़ रहे हैं। १८ असार, काठमाडौँ। फिफा विश्वकप २०२६ के राउंड ऑफ ३२ में आज रात फुटबॉल इतिहास के दो दिग्गज – क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लुका मोड्रिच आमने-सामने होंगे। यूरोपीय फुटबॉल के इन दो पावरहाउस के बीच का यह मैच न केवल प्री-क्वार्टरफाइनल की राह है बल्कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में इन दो अनुभवी सितारों की विरासत बचाने की लड़ाई भी है। समूह चरण में कांगो और कोलंबिया के खिलाफ बराबरी तथा उज़्बेकिस्तान के खिलाफ जीत हासिल करते हुए पुर्तगाल अभी भी अपनी लय की तलाश में है। रॉबर्टो मार्टिनेज की टीम के पास विश्वस्तरीय प्रतिभा है, लेकिन टीम अपेक्षानुसार संगठित प्रदर्शन नहीं कर पाई है।

वहीं दूसरी ओर, इंग्लैंड से हार के बावजूद पनामा और घाना को हराकर नॉकआउट में स्थान बना चुकी क्रोएशिया अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और मिडफील्ड के अनुभव के बल पर पुर्तगाल को चौंकाने की तैयारी में है। वर्ष २००६ के विश्वकप से अपने-अपने देशों की जर्सी में विश्वकप खेलना शुरू करने वाले ये दो सुपरस्टार – रोनाल्डो और मोड्रिच – पिछले दो दशकों से विश्व फुटबॉल के शीर्ष स्थान पर बने हैं। रोचक तथ्य यह है कि लंबी अंतरराष्ट्रीय करियर और रियल मड्रिड में साथ बिताए सफल वर्षों के बावजूद विश्वकप के इस दो दशक लंबे इतिहास में रोनाल्डो और मोड्रिच पहली और अंतिम बार एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर रहे हैं।

पहले २०१८ और २०२२ के विश्वकप में क्रोएशिया को क्रमशः फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंचाने वाले मोड्रिच, जो विश्वकप के सर्वकालीन श्रेष्ठ मिडफील्डर में से एक माने जाते हैं, और ६ अलग-अलग विश्वकप में गोल करने वाले इकलौते खिलाड़ी रोनाल्डो के लिए यह मैच अंतरराष्ट्रीय मंच पर आखिरी और सबसे बड़ा चुनौती होगा। इन सभी परिस्थितियों के बीच एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि पहली ट्रॉफी की तलाश में लगे इन दोनों दिग्गजों में से किसी एक का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा। हेड-टू-हेड आंकड़ों में पुर्तगाल का पलड़ा भारी है। इन दोनों टीमों के बीच १० मुकाबलों में पुर्तगाल ने ७ बार जीत दर्ज की है, क्रोएशिया ने २ बार और १ मैच बराबरी पर समाप्त हुआ है।

विश्वकप के इतिहास में पुर्तगाल और क्रोएशिया पहली बार आमने-सामने होने जा रहे हैं। इससे पहले विश्वकप के मंच पर ये दोनों टीमें कभी भिड़ी नहीं थीं। टीम न्यूज के अनुसार पुर्तगाल की टीम में कोई बड़ा चोटिल खिलाड़ी नहीं है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो अग्रिम पंक्ति का नेतृत्व करेंगे, जबकि ब्रुनो फर्नांडीज और राफायल लियो उनका समर्थन करेंगे। ‘हमारी टीम में असाधारण क्षमता है, लेकिन नॉकआउट चरण में कोई गलती बर्दाश्त नहीं है। क्रोएशिया के पास अनुभवी खिलाड़ी हैं, हमें डिफेंस और अटैक में संतुलन बनाए रखना होगा,’ पुर्तगाल के मुख्य कोच रॉबर्टो मार्टिनेज ने कहा।

क्रोएशिया की टीम में भी कोई चोट की समस्या नहीं है। कप्तान लुका मोड्रिच और माटेओ कोवाशिक का मिडफील्ड संयोजन टीम के लिए महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, ९० मिनट तक उच्च गति बनाए रखना उनके लिए मुख्य चुनौती होगी। ‘हमने कठिन रास्ता तय करके यहां तक पहुंचा है। पुर्तगाल मजबूत टीम है, लेकिन दबाव में खेलना हमें अच्छी तरह आता है,’ क्रोएशिया के कोच ज़्लात्को डालिच ने कहा।

संभावित शुरुआती ११
पुर्तगाल : डियगो कोस्टा (गोलकीपर), जोआओ कंसलो, रुबेन डियास, रेनेटो वेइगा, नूनो मेंडीस, विटिन्हा, रुबेन नेवेस, ब्रुनो फर्नांडीज, जोआओ फेलिक्स, राफेल लियो, क्रिस्टियानो रोनाल्डो
क्रोएशिया : डॉमिनिक लिवाकोविच (गोलकीपर), जोसिप स्टानिचिच, जोसिप सुतालो, मारिन पोंग्राचिच, जोस्को ग्वार्डियोल, लुका मोड्रिच, माटेओ कोवाशिक, निकोला व्लासिक, पेटर सुखिच, इवान पेरिसिक, अंते बुदिमिर

बैंकिंग समूह की तेज वृद्धि ने शेयर बाजार में सुधार लाया, कारोबार में हुआ इजाफा

१८ असार, काठमाडौँ। पिछले दिन ४४ अंक बढ़ने के बाद शेयर बाजार में गुरुवार को ८.७८ अंक की वृद्धि हुई है। आज बैंकिंग समूह की तेज वृद्धि ने समग्र शेयर बाजार को मजबूत बनाया है। इस वृद्धि के साथ नेप्से परिसूचक २६६१ अंक पर कायम है। सात कारोबारी दिनों तक निरंतर घटावट की प्रवृत्ति में रहे बाजार ने बुधवार से वृद्धि की गति पकड़ ली है। आज बाजार दिनभर लाल रंग में रहने के बाद अंतिम ४५ मिनटों में तेजी पकड़कर अंततः हरे रंग में बंद हुआ। कारोबार राशि भी बढ़ी है। पिछले दिन ३ अरब ८६ करोड़ के कारोबार की तुलना में आज यह ४ अरब ११ करोड़ तक पहुंचा है। हालांकि अधिकांश कंपनियों के मूल्य में गिरावट देखी गई है। कुल १०८ कंपनियों के मूल्य बढ़े, १५२ कंपनियों के मूल्य घटे और १३ कंपनियों के मूल्य स्थिर रहे।

बड़ी पूंजी वाली कंपनियों में मुख्य रूप से वाणिज्य बैंकिंग के मूल्य बढ़ने से, जबकि अन्य कई कंपनियों के मूल्य घटने के बावजूद बाजार में वृद्धि देखी गई है। बैंकिंग समूह के कारण ही आज बाजार हरे रंग में बंद हुआ। इस समूह का सूचक सबसे अधिक २.०४ प्रतिशत वृद्धि दर्ज किया गया है। इसके अलावा फाइनेंस समूह ने ०.२८ प्रतिशत, जीवन बीमा ०.१६ प्रतिशत और माइक्रोफाइनेंस ०.०५ प्रतिशत की वृद्धि की है। वहीं, विकास बैंक ०.११, होटल और पर्यटन ०.१३, जलविद्युत ०.२६, निवेश ०.०३, उत्पादन तथा प्रसंस्करण ०.८६, निर्जीवन बीमा ०.३४, अन्य ०.२० और व्यापार ०.५० प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

चार कंपनियों ने १५ प्रतिशत से अधिक मूल्य वृद्धि दर्ज की है। १५ प्रतिशत मूल्य वृद्धि वाली कंपनियों में कालंगा हाइड्रोपावर, स्नो रिवर फल्स, सानीगढ हाइड्रोपावर और अपर लोहोरेखोला जलविद्युत कम्पनी शामिल हैं। इनमें से तीन कंपनियाँ हाल ही में सूचिबद्ध हुई हैं। इसी प्रकार धौलागिरी लघुवित्त का मूल्य १३.६७, आत्मनिर्भर लघुवित्त का १०.०९ और क्रेस्ट माइक्रोलाइफ इंश्योरेंस का ९.५३ प्रतिशत बढ़ा है। भुजुङ हाइड्रोपावर का मूल्य ९.४३, सामुदायिक लघुवित्त ७.८३, सीवाईसी लघुवित्त ७.२३ और कॉर्पोरेट डेवलपमेंट बैंक का मूल्य ५.५६ प्रतिशत घटा है। आज सबसे अधिक कारोबार वाली कंपनियों में लक्ष्मी सनराइज बैंक, रिलायंस स्पिनिंग मिल्स, नबिल बैंक, ग्लोबल आईएमई बैंक, आँखुखोला जलविद्युत कम्पनी और साहस ऊर्जा शामिल हैं।

एंगेज्मेंट के लिए एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की चोटी पर पहुंचे जोड़े

एंगेज्मेंट के लिए ४४३ मीटर ऊंचे इमारत की चोटी पर पहुंचे इस जोड़े को देखें। उन्होंने ४४३ मीटर ऊंची इमारत से भी ऊपर स्थित ‘स्पाइर’ की चोटी पर जाकर वहां से शांति का एक संदेश देते हुए बड़ा बैनर फहराया। एक व्यक्ति ने घुटने टेककर प्रस्ताव रखा, जिसके बाद वे नीचे उतरे। वे कम से कम १० मिनट तक इमारत की चोटी पर रुके रहे। पुलिस ने बताया कि बाद में उन दोनों रूसी नागरिकों को हिरासत में लिया गया।

स्विट्जरल्यान्ड और अल्जीरिया: खिलाड़ियों पर होगी नजर

१८ असार, काठमाडौं। फीफा विश्वकप २०२६ के राउंड ऑफ ३२ के तहत कल सुबह कनाडा के वैंकूवर में बीसी प्लेस स्टेडियम में स्विट्जरल्यान्ड और अल्जीरिया आमने-सामने होंगे। समूह ‘बी’ में शीर्ष स्थान हासिल कर नकआउट चरण में पहुंचे यूरोपीय पावरहाउस स्विट्जरल्यान्ड उच्च मनोबल के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है। दूसरी ओर, समूह ‘जे’ के अंतिम मैच में ऑस्ट्रिया के साथ ३-३ रोमांचक ड्रॉ खेलने के बाद उत्कृष्ट तीसरे स्थान पर पहुंची अफ्रीकी टीम अल्जीरिया किसी भी ताकतवर टीम को चौंकाने को तैयार है।

विश्वकप इतिहास में पहली बार ये दोनों टीमें प्रतिस्पर्धात्मक मुकाबले में आमने-सामने होंगी, और इस ‘कर या मर’ मुकाबले में दोनों टीमों के प्रमुख खिलाड़ियों का प्रदर्शन निर्णायक साबित हो सकता है। स्विट्जरल्यान्ड के रुबेन भार्गास (विंगर), जो घायल निकोला अस्चेर जैसे विंगर की अनुपस्थिति को पूरा करते हुए स्विस आक्रमण में तेज़ी लाने की चुनौती से जूझ रहे हैं। उन्होंने इस विश्वकप के समूह चरण में पहले ही १ गोल और २ असिस्ट कर चुके हैं। टीम के कप्तान और अनुभवी मिडफील्डर ग्रानिट जाका मैच की गति नियंत्रित करने और रक्षा पंक्ति को सँवारने के मुख्य स्तंभ हैं।

अल्जीरिया के रियाद माहरेज (विंगर), अल अहली के अनुभवी खिलाड़ी और टीम के कप्तान हैं। माहरेज की कुशल ड्रिब्लिंग और फ्री-किक स्विस रक्षा के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। अमीन गुइरी (फॉरवर्ड) ने ऑस्ट्रिया के साथ मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए अल्जीरिया के प्रमुख गोलकर्ता के रूप में अपना स्थान बना लिया है। मैनचेस्टर सिटी के डिफेंडर रयान एत-नूरी अपनी आक्रामक ओवरलैपिंग के लिए जाने जाते हैं, जो बाएँ विंग पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दीपेन्द्र अग्रवाल के नियंत्रण में भोटेकोशी हेली रिसॉर्ट : निवेशकों को धोखा देकर बकाया ऋण न चुकाने का आरोप

१८ आसार, काठमाडौं। शेयर कारोबारी दीपेन्द्र अग्रवाल ने सिन्धुपाल्चोक के भोटेकोशी हेली रिसोर्ट एंड स्पा को संचालित करने तथा दायित्वों का भुगतान करने का दावा करते हुए कंपनी पर कब्जा किया है, लेकिन बैंक के ऋण और पुराने निवेशकों का पैसा वह नहीं चुका रहे हैं।

रिसॉर्ट की संपत्ति और दायित्वों की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इसे संचालित करने का दावा करते हुए पुराने निवेशकों से शेयर खरीदे थे। लेकिन न तो बैंक का ऋण चुका पाए हैं और न ही शेयर बेचने वाले निवेशकों को पैसा मिला है। उल्टे, बैंक द्वारा नीलामी की सूचना जारी किए जाने के बाद निवेशकों के नाम सार्वजनिक हुए हैं और वे और भी असुविधाजनक स्थिति में आ गए हैं।

रिसॉर्ट के नाम पर नेपाल बैंक में करीब ३२ करोड़ रुपये का ऋण है। अग्रवाल ने लंबे समय से इसकी किस्तें नहीं भरी हैं। जब कर्ज जोखिम में पड़ा, तो बैंक ने रिसॉर्ट को धरोहर मानकर नीलामी बिक्री के लिए सूचना जारी की।

बैंक ने पहले दो बार नीलामी प्रक्रिया के बावजूद रिसॉर्ट बिका नहीं, अब गोपनीय बोलियों की प्रक्रिया की सूचना दी गई है। यह प्रक्रिया भाद्र २९ तक खुली है। लेकिन अग्रवाल ने रिसॉर्ट पर ताला लगा रखा है, जबकि वह कंपनी पर कब्जा किए हुए हैं।

कोविड-१९ और सिन्धुपाल्चोक की भूस्खलन समस्याओं के कारण रिसॉर्ट संचालन में कठिनाई आई, जिसके बाद पुराने निवेशकों से शेयर बेचकर बैंक ऋण चुकाने का प्रयास शुरू किया गया था। होटल संचालक सुवास प्रधान ने नए निवेशक लाने की जिम्मेदारी ली।

प्रधान ने दीपेन्द्र अग्रवाल को नए निवेशक के रूप में परिचित कराया। प्रधान और अन्य निवेशकों के बीच नई निवेशक को बहुमत शेयर देने तथा सम्पत्ति-दायित्व की जिम्मेदारी लेने के समझौते हुए थे।

पहले चरण में चिनबहादुर रानाभाट के नाम पर १७ लाख शेयर अग्रवाल को हस्तांतरित किए गए। अग्रवाल ने नेपाल बैंक का ६ करोड़ ९० लाख रुपये बकाया भुगतान किया था। लेकिन शेयर बेचने वाले रानाभाट को उससे जुड़ा ७ करोड़ रुपये बकाया मिला नहीं।

अधिक ७ लाख ३७ हजार शेयर प्रधान ने अग्रवाल को देने पर सहमत हुए, पर निवेशक समिरकुमार नेपाल का कहना है कि वे शेयर नहीं मिले। उन्होंने कहा, ‘प्रधान के अनुरोध पर रानाभाट ने अग्रवाल को १७ लाख शेयर नामांतरित कर दिए, लेकिन प्रधान ने रानाभाट को भुगतान नहीं किया, इसलिए प्रधान अब बैंकिंग अपराध के कारण जेल में हैं।’

अग्रवाल ने बैंक ऋण नहीं चुकाने से व्यक्तिगत जमीनदार बने पुराने निवेशकों को बैंक ने दवाब दिया, जिससे समस्या उत्पन्न हुई है, यह नेपाल का कहना है। ‘हम सभी नामांतरण कर चुके हैं, पर बैंक कर्जा तिर्न और व्यक्तिगत जमीनदारी हटाने के लिए अग्रवाल पर दबाव डालता है,’ उन्होंने कहा।

प्रधान के अनुसार, अग्रवाल ने शेयर बिक्री की रकम और बैंक के ऋण दोनों नहीं चुकाए, जिससे वे अतिरिक्त शेयर भी नहीं दे पाए। इस कारण निवेशकों को धोखा देने का आरोप लगा है।

अग्रवाल ने खुद को फंसा हुआ बताया और अब तक १८ करोड़ रुपये का भुगतान कर समान मूल्य के शेयर लिए हैं। उन्होंने कहा, ‘नेपाल बैंक में ६.९० करोड़ ऋण अदा किया, सुवास को ४.९६ करोड़, और हिमालयन बैंक के खाते में अन्य राशि रखकर कुल १८ करोड़ दिए हैं।’

उन्होंने परियोजना पूरी कर पांच सितारा सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए रिसॉर्ट चलाने के उद्देश्य से निवेश किया। ‘मैंने कुछ पुराने शेयरधारकों को ब्लैकलिस्ट होने से बचाया, पर अब जुए में हारा हूं।’

२०७८ आसार १० को रिसॉर्ट के नए और पुराने शेयरधारकों की बैठक हुई थी। शेयरधारक चिनबहादुर रानाभाट की अध्यक्षता में इस बैठक ने रिसॉर्ट के दायित्व और बैंक ऋण की जिम्मेदारी नए शेयरधारक को लेने का निर्णय किया था।

तब तक रिसॉर्ट के शेयरधारकों में क्रिस्टल प्रधान, सुवास प्रधान, दीपेन्द्र अग्रवाल, उमेश गुप्ता, जयप्रकाश अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, छेवांग याङजॉम घिसिंग, मिता मुरारका और सरस्वती सेढाई थे। समिरकुमार नेपाल, एलिस रानाभाट, छिरिंग शेर्पा और चिनबहादुर रानाभाट आमंत्रित सदस्य थे।

इसके बाद २०७८ भदौ २८ को नया प्रबंधन समिति बनी, जिसका अध्यक्ष दीपेन्द्र अग्रवाल थे। कुछ समय के लिए होटल संचालन भी हुआ और अग्रवाल ने हिमालयन बैंक के माध्यम से बैंकिंग करने का दावा किया। उन्होंने होटल में अतिरिक्त १५ करोड़ रुपये निवेश किया है।

नेपाल ने कहा, ‘अग्रवाल ने ऋण नहीं चुकाया, पुराने शेयरधारकों को बैंक की व्यक्तिगत गारंटी से नहीं हटाया। बैंक कर्ज माफी कार्यवाही में हम पर दबाव डालता है। नीलामी सूचना में हमारा नाम है।’

रिसॉर्ट पब्लिक लिमिटेड कंपनी में परिवर्तित हो चुका है, लेकिन विवाद बढ़ने पर अग्रवाल ने ८ माघ २०७८ को एकतरफा रूप से प्रबंधन समिति में बदलाव किया। नेपाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने गैर-निवेशकों को समिति में शामिल किया।

२०७९ की आम सभा तक अग्रवाल ने अपनी अध्यक्षता वाली समिति को भंग कर हरिप्रसाद चापगाईं की अध्यक्षता में नई प्रबंधन समिति गठित कराई।

कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय के अनुसार रुगु खत्री, प्रेमलाल लामिछाने, भीमकुमार प्रधान, रामायण गुप्ता और विश्वनाथ नए निदेशक हैं।

वर्तमान में रिसॉर्ट में १७ लाख शेयर दीपेन्द्र अग्रवाल के नाम हैं। साथ ही सुवास प्रधान और परिवार के नाम पर १४ लाख शेयर हैं। समिति के सदस्यों के बीच प्रधान ने ५ लाख ५८ हजार शेयर रखने और शेष शेयर अग्रवाल को देने पर सहमति बनी।

बैंक की ऋण वसूली विभाग ने २०७९ जेष्ठ १ को सार्वजनिक सूचना जारी कर ३५ दिन की नीलामी प्रक्रिया शुरू की। बैंक ने ऋणी को ऋण चुकाने के लिए २०७९ आसार ४ तक अंतिम समय दिया है।

इस ऋण की व्यक्तिगत गारंटी चिनबहादुर रानाभाट (कास्की), समिरकुमार नेपाल (मोरंग), छिरिंग शेर्पा (सिन्धुपाल्चोक) तथा सुवास प्रधान (नुवाकोट) ने दी है।

रानाभाट ने कहा, ‘मैंने शेयर बेचे, पैसा नहीं मिला और बैंक का कर्ज भी व्यक्तिगत गारंटी से वापस नहीं हुआ। सभी जिम्मेदारियां अग्रवाल के पास नहीं हैं।’

अमेरिका में कार के अंदर भालू देख लोगों में मचा हड़कंप

कार की अगली सीट पर काले रंग का भालू बैठे देख लोग अचंभित रह गए। सामने आए १६ मिनट लंबे वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग भालू को कार से बाहर निकालने की कई बार कोशिश कर रहे हैं। अंततः, वे सफलता पा गए और भालू को कार से बाहर निकाल दिया। दोनों, भालू और लोग, बिना किसी चोट के अपने-अपने रास्ते चले गए।

फीफा विश्वकप में पहली बार स्विट्जरलैंड और अल्जीरिया आमने-सामने

१८ असार, काठमाडौं। फीफा विश्वकप २०२६ के राउंड ऑफ ३२ के तहत कल सुबह कनाडा के वैंकूवर स्थित बीसी प्लेस स्टेडियम में दो अलग महाद्वीपीय फुटबॉल शैलियों का रोमांचक मुकाबला होने जा रहा है। ग्रुप ‘बी’ में मेजबान कनाडा और बोस्निया को हराकर ७ अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल करने वाला यूरोप का पावरहाउस स्विट्जरलैंड बेहतरीन फार्म में है। वहीं, ग्रुप ‘जे’ के अंतिम मुकाबले में ऑस्ट्रिया के साथ ३-३ की रोमांचक बराबरी खेलते हुए उत्कृष्ट तीसरे दर्जे की टीम के रूप में आने वाला अफ्रीकी राष्ट्र अल्जीरिया किसी भी मजबूत टीम को चौंका देने की क्षमता रखता है। इस मैच का एक और रोचक और भावनात्मक पहलू यह है कि अल्जीरिया के वर्तमान मुख्य कोच व्लादिमीर पेतकोविक पहले ७ वर्षों (सन् २०१४ से २०२१ तक) स्विट्जरलैंड की राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व कर चुके थे। उनके मार्गदर्शन में स्विट्जरलैंड ने यूरो २०२० में फ्रांस को नकआउट खेल में हराकर क्वार्टर फाइनल तक ऐतिहासिक यात्रा तय की थी। आज वही पेतकोविक अपने पुराने खिलाड़ियों ग्रानित जाका, मैनुएल अकांजी और ब्रिल एम्बोलो के सामने रणनीति तैयार करते नजर आएंगे।

हेड टू हेड अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल इतिहास में इन दोनों टीमों के बीच अब तक केवल मैत्रीपूर्ण मैच हुए हैं, जिनमें दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता है। फीफा विश्वकप के मंच पर स्विट्जरलैंड और अल्जीरिया पहली बार आमने-सामने होंगे। स्विट्जरलैंड लगातार चौथी बार विश्वकप के अंतिम १६ में पहुंचने का रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में है, जबकि अल्जीरिया २०१४ के बाद पहली बार विश्वकप के नकआउट मैच में जीत हासिल करने के लिए उतर रहा है। टीम समाचार में, मुख्य कोच मुरात याकिन की स्विस टीम को किसी भी नए चोटिल खिलाड़ी की समस्या नहीं है। समूह चरण में धमाल मचा चुके १८ वर्षीय युवा सनसनी जोहान मन्जाम्बी को शुरुआती ११ में मौका मिलने की मजबूत संभावना है, जो कप्तान ग्रानित जाका और ब्रिल एम्बोलो के साथ मिलकर आक्रामक मोर्चा संभालेंगे। ‘हमारी टीम सही दिशा में है। पेतकोविक स्विस फुटबॉल को अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन मैदान में भावनात्मक संबंध नहीं चलता। हमारा लक्ष्य केवल क्वार्टर फाइनल तक पहुँचना है,’ प्रशिक्षक याकिन ने कहा।

चोट की कोई समस्या न होने के बावजूद अल्जीरिया के लिए कप्तान रियाद महरेज और अमिन गुइरी की फार्म काफी महत्वपूर्ण होगी। डिफेंस में थोड़ी कमजोरी दिखी है, लेकिन काउंटर-अटैक में टीम काफी घातक है। ‘स्विट्जरलैंड मेरे लिए घर जैसा है, वहाँ मेरे कई पुराने दोस्त हैं। लेकिन आज मैं अल्जीरिया की जर्सी में हूँ और हम इतिहास रचने के लिए मैदान में उतरेंगे,’ कोच व्लादिमीर पेतकोविक ने कहा।

संभावित शुरुआती ११
स्विट्जरलैंड : ग्रेगर कोबेल (गोलकीपर), लुका जाकेज, मैनुएल अकांजी, रिकार्डो रोड्रिगेज, निको एल्वेडी, रेमो फ्रुलर, ग्रानित जाका (कप्तान), जिब्रिल सो, जोहान मन्जाम्बी, रूबेन भार्गास, ब्रिल एम्बोलो
अल्जीरिया : लुका ज़िदान (गोलकीपर), रामी बेन्सेबाइनी, एइसा मांडी, राफिक बेलघाली, रायन एइत-नोरी, इब्राहिम माजा, हिचाम बौदाउइ, हुसेम औअर, रियाद माहरेज (कप्तान), अमिन गुइरी, फारेस चाइबी

मैच: स्विट्जरलैंड बनाम अल्जीरिया
तिथि और समय: १९ असार, सुबह ८:४५ बजे
स्थान: बीसी प्लेस, वैंकूवर
प्रत्यक्ष प्रसारण: हिमालय स्पोर्ट्स

‘बालेन शाह पुराने प्रधानमंत्रियों की समस्याओं को दोहरा रहे हैं’

राजनीतिक विश्लेषक भाष्कर गौतम ने सरकार की कार्यशैली में ऐतिहासिक ज्ञान की कमी और संस्थागत विधियों पर व्यक्ति का प्रभुत्व नजर आने की बात कही है। उन्होंने कहा, “सरकार ने स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने की बजाय सिंहदरबार में सत्ता केंद्रीकृत कर सुशासन और सेवा प्रवाह में बाधाएं उत्पन्न की हैं।” छँटनी-छँटनी कार्रवाई की नीति से दण्डहीनता बढ़ी है और इससे कानूनी शासन की नींव कमजोर होने का खतरा है, गौतम ने चेतावनी दी। बालेन शाह नेतृत्व वाली सरकार इस सप्ताह सौ दिनों का कार्यकाल पूरा कर रही है। एक सौ कामों के एजेण्डे के साथ शुरू हुई इस सरकार ने इस अवधि में राज्य के निकायों में क्या सुधार किए और जनता तक सेवाएं कैसे पहुंचाईं, इस पर समीक्षा हो रही है।

गौतम ने कहा, “नेपाल में २००७ या २०१७ से शासन करने वाले सभी नेता विकास की बात करते हैं। लेकिन हर नया शासक अपनी मूर्खता को नेपाली जनता की मूर्खता साबित करने की कोशिश करता है।” उन्होंने ऐतिहासिक विस्मृति का उदाहरण देते हुए कहा, “पिछले राजा महेन्द्र, वीरेन्द्र या पूर्व प्रधानमंत्रियों ने जो किया, वही काम आज बालेन शाह दोहरा रहे हैं।” उन्होंने बालेन के विकास गति बढ़ाने के प्रयास को केवल ऐतिहासिक अज्ञानता बताया और चेतावनी दी कि इससे संस्थाएं दीर्घकालिक रूप से कमजोर होंगी।

गौतम ने कहा, “नेपाल में राजनीतिक दल और प्रधानमंत्री संस्थागत रूप से शासन करने में सक्षम नहीं रहे हैं।” उन्होंने माना, “छँटनी-छँटनी पकड़ने और कार्रवाई करने की नीति राजनीति को विकृत करती है और कानूनी शासन के मूल्यों को चोट पहुंचाती है।” उन्होंने कहा कि बालेन की सरकार में भी इसी तरह की जल्दबाजी और तेज़ी देखी गई है, जो संस्थाओं को कमजोर करने का संकेत है।

अंत में उन्होंने कहा, “जब तक प्रणालीगत सुधार नहीं होंगे, केवल डिजिटल सुधार और दिखावटी कामों से सही सुशासन संभव नहीं होगा।”

सरकार ने 100 दिनों में घर-घर पासपोर्ट और लाइसेंस पहुँचाने में उल्लेखनीय प्रगति की

नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद 5,700 से अधिक पासपोर्ट और 1,000 से ज्यादा सवारी चालक अनुमति पत्र नागरिकों के घर-घर तक पहुंचा दिए जाने की बात बताते हुए, सरकारी कुरियर सेवा के रूप में हुलाक सेवा को और सुदृढ़ बनाने के लिए प्रत्येक वार्ड में हल्कारा की आवश्यकता बताई गई है, हुलाक सेवा विभाग की महानिदेशक ने जानकारी दी। वर्तमान में हुलाक सेवा विभाग में 4,619 पद हैं। इसके अलावा स्थानीय सरकार के समन्वय से प्रतिदिन लगभग 5,000 अतिरिक्त हुलाक कर्मचारी दो घंटे पालिका हुलाक का कार्य कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ द्वारा सत्ता संभालते ही जारी किए गए शासकीय सुधार सम्बंधित 100 कार्यसूची के 27वें बिंदु में पासपोर्ट, नागरिकता प्रतिलिपि और लाइसेंस सहित सरकारी दस्तावेजों को हुलाक सेवा के माध्यम से घर-घर तक पहुंचाने की व्यवस्था 100 दिनों के भीतर लागू करने का लक्ष्य रखा गया था। 100 दिनों की अवधि के अंदर पासपोर्ट को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था 75 जिलों में की गई है और सात जिलों में परीक्षण स्वरूप सवारी चालक अनुमति पत्र वितरण शुरू किया गया है, सूचना तथा संचार मंत्रालय ने यह जानकारी दी है।

हुलाक सेवा विभाग ने पासपोर्ट विभाग के साथ समझौते के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से जिले के प्रशासन कार्यालय तक पासपोर्ट पहुंचाते आए थे। लेकिन प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह के नेतृत्व में जारी 100 बिंदु कार्यसूची के अनुसार, हुम्ला और भोजपुर को छोड़कर 75 जिलों में व्यक्ति के घर-घर तक पासपोर्ट पहुंचाने का कार्य शुरू किया गया है, अधिकारियों ने बताया। सूचना एवं संचार मंत्रालय ने इस अवधि में जिला हुलाक कार्यालयों में प्राप्त 2,60,000 से अधिक पासपोर्टों में से 5,728 पासपोर्ट संबंधित व्यक्ति के घर-घर भेजे जाने की जानकारी दी है।

महानिदेशक मनमाया भट्टराई पंगेनी ने कहा, “पहले पासपोर्ट जिला प्रशासन कार्यालय तक पहुंचता था। वहाँ पहुंचने के बाद हमने घर-घर पहुंचाना शुरू किया है। हम पासपोर्ट विभाग के साथ पूरक समझौता करने जा रहे हैं, जिससे सेवाएँ सीधे यहाँ से सेवाग्राही तक पहुंचाई जा सकेंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि जिलों में प्रशासन कार्यालय और हुलाक कार्यालय के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

सवारी चालक अनुमति पत्र घर-घर पहुंचाने के विषय में पंगेनी ने कहा कि अब तक लाइसेंस घर तक पहुंचाने हेतु औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, लेकिन अपनी पहल से सात जिलों में सवारी चालक अनुमति पत्र घर-घर पहुंचाने की शुरुआत की गई है। कास्की, मोरङ, बाँके, सुनसरी, बझाङ, कालिकोट और पर्सा में 1,000 से अधिक लोगों को सवारी चालक अनुमति पत्र घर तक पहुंचाया जा चुका है।

महानिदेशक पंगेनी ने कहा, “हमारे सभी हुलाक कर्मचारियों ने अपने-अपने प्रदेश के निर्देशनालय के माध्यम से प्रदेश सरकार के साथ समन्वय किया है। हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्ष में लाइसेंस भी घर तक पहुंचाने में सफल होंगे।”