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लेखक: space4knews

सचिव पुडासैनी – Online Khabar

सचिव पुडासैनी ने बजट निर्माण में प्राथमिकता निर्धारण का विवरण प्रस्तुत किया

पूर्वाधार विकास सचिव विश्वबाबु पुडासैनी ने बिना स्रोत स्वीकृति अधूरे पड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की नीति के साथ आगामी वित्तीय वर्ष के बजट निर्माण की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 60-75 प्रतिशत तक पूरा हो चुके कार्यों को सबसे पहले पूरा किया जाएगा और लगभग 600 परियोजनाओं के लिए 2 अरब रूपए की आवश्यकता होगी।

सचिव पुडासैनी ने राष्ट्रीय सभा की विकास, आर्थिक मामलों और सुशासन समिति की बैठक में आगामी बजट की तैयारी पर जानकारी देते हुए कहा, “पिछले वर्षों में उपभोक्ता समितियों के आधार पर बजट तो मिलता रहा, लेकिन स्रोत सुनिश्चित किए बिना विभिन्न परियोजनाएं चलाई गईं।” उन्होंने यह भी बताया कि अर्थ मंत्रालय को 600 परियोजनाओं के लिए 2 अरब रूपए की मांग की गई है।

मंत्रालय ने 77 जिलों में नए कार्यक्रम और डीपीआर (डिजाइन प्रिपरेशन रिपोर्ट) तैयार करने हेतु न्यूनतम 2 अरब रुपए की मांग की थी, जिसके बाद कुल 15 अरब रुपए के बजट सीमा वृद्धि का प्रस्ताव भी रखा गया, लेकिन सचिव पुडासैनी के अनुसार अर्थ मंत्रालय से अभी केवल 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त निधि मिलने का संकेत मिला है।

पुडासैनी ने जलापूर्ति परियोजनाओं का विवरण देते हुए कहा कि परियोजनाओं का बैंक में लगभग 4,800 परियोजनाएं दर्ज हैं। स्थानीय तह से प्राप्त मांग, प्रगति की स्थिति तथा आवश्यकताओं के आधार पर परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि न्यून बजट वाले और कम प्रगति वाले परियोजनाओं को आगामी वर्ष की योजनाओं में शामिल किया जाएगा।

कांग्रेस केन्द्रीय नीति, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण प्रतिष्ठान ने १२ उपसमितियाँ गठित कीं

नेपाली कांग्रेस के केन्द्रीय नीति, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण प्रतिष्ठान ने १२ उपसमितियाँ गठित की हैं। ये उपसमितियाँ भूमि व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, निर्वाचन सुधार सहित विभिन्न विषयों में कार्य करेंगी। प्रतिष्ठान ने आचार संहिता निर्माण के लिए मधु आचार्य के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति भी गठित की है। ४ जेठ, काठमांडू।

प्रतिष्ठान के प्रमुख उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक ने चार अलग-अलग विषयों पर चर्चा कर उपसमितियाँ गठित की हैं। बैठक में प्रतिष्ठान के सदस्यों में से १२ सदस्यों को प्रथम चरण में उपसमितियों के संयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई, इसकी जानकारी कार्यवाहक मुख्य सचिव कृष्णप्रसाद दुलाले दी।

उपसमितियाँ और इनके संयोजक इस प्रकार हैं:
१) भूमि व्यवस्था विशेष अभियान उपसमिति, संयोजन — डा. गोपाल दहित
२) आपदा प्रबंधन उपसमिति, संयोजन — मानबहादुर थापा
३) मानसिक स्वास्थ्य: जागरूकता अभियान उपसमिति, संयोजन — मोहना अन्सारी
४) सूचना, प्रौद्योगिकी और डिजिटल सुशासन उपसमिति, संयोजन — ई. दिपेश विष्ट
५) निर्वाचन प्रणाली सुधार: अवधारणा, संवाद और समन्वय उपसमिति, संयोजन — जनक चटौती
६) पूर्वाधार विकास अवधारणा, संवाद और दृष्टि उपसमिति, संयोजन — ई. अमृत ज्ञवाली
७) उद्यमशीलता, नवाचार और रोजगार उपसमिति, संयोजन — खगेन्द्र आचार्य
८) शिक्षा और शिक्षालय नीति एवं दृष्टि उपसमिति, संयोजन — डा. कृष्णप्रसाद पौडेल
९) बीपी ज्ञान केंद्र उपसमिति, संयोजन – प्रकाश लामिछाने
१०) जातीय भेदभाव विरुद्ध जागरूकता अभियान उपसमिति, संयोजन — एलिजा ढकाल
११) डिजिटल जागरूकता तथा तथ्य जांच उपसमिति, संयोजन — प्रकृति भट्टराई
१२) ‘ग्रीन टेबल’ उपसमिति, संयोजन — कंचन झा

उपसमितियाँ आगामी बैठक में प्रारंभिक रूपरेखा प्रस्तुत करेंगी। साथ ही, बैठक में प्रतिष्ठान की आंतरिक आचार संहिता निर्माण के लिए मधु आचार्य के संयोजन में पांच सदस्यीय समिति गठित होने की सूचना भी दी गई।

किम्ची में पाए जाने वाले प्रोबायोटिक बैक्टीरिया से शरीर से माइक्रोप्लास्टिक निकालने में मदद: अध्ययन

दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने किम्ची में मौजूद प्रोबायोटिक बैक्टीरिया को शरीर में पाए जाने वाले नैनोप्लास्टिक कणों को मल के जरिए बाहर निकालने में सहायक पाया है। ‘वर्ल्ड इंस्टिट्यूट ऑफ किम्ची’ के शोधकर्ताओं ने किम्ची में पाए जाने वाले लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ‘ल्यूकोनोस्टोक मेसेन्टेरोइड्स CBA3656’ को आंतों में प्लास्टिक कणों को आकर्षित करने वाला साबित किया है। प्रयोगशाला परीक्षणों में यह बैक्टीरिया 57 प्रतिशत प्लास्टिक कणों को चिपकाने में सफल रहा, और जब इसे चूहों पर प्रयोग किया गया तो मल के माध्यम से नैनोप्लास्टिक कणों के दोगुने निकलने का प्रमाण मिला।

दक्षिण कोरियाई वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस नए अध्ययन से पता चलता है कि पारंपरिक किण्वित व्यंजन ‘‘किम्ची’’ में मौजूद प्रोबायोटिक बैक्टीरिया शरीर से हानिकारक नैनोप्लास्टिक कणों को बाहर निकालने में सहायक है। ’वर्ल्ड इंस्टिट्यूट ऑफ किम्ची’ के शोधकर्ता बताते हैं कि यह बैक्टीरिया आंतों में मौजूद प्लास्टिक कणों को मजबूत रूप से आकर्षित करता है और मल के माध्यम से उन्हें शरीर से बाहर निकालने में दोहरी भूमिका निभाता है।

नैनोप्लास्टिक वे प्लास्टिक कण होते हैं जो 1 माइक्रोमीटर से भी छोटे होते हैं, और प्लास्टिक कचरे के धीरे-धीरे टूटने से बनते हैं। ये सूक्ष्म कण भोजन और पीने के पानी के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करते हैं। आकार में इतना छोटा होने के कारण ये कण आंत की सुरक्षा की दीवार को पार कर किडनी और मस्तिष्क जैसे संवेदनशील अंगों में जमा हो सकते हैं। इस कारण चिकित्सक इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती मानते हैं।

‘बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. से ही ली और डॉ. ताए वुङ ह्वन के नेतृत्व वाली टीम ने किम्ची से निकाले गए ‘ल्यूकोनोस्टोक मेसेन्टेरोइड्स CBA3656’ नामक लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया की भूमिका पर परीक्षण किए। वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में मानव आंत जैसा कृत्रिम वातावरण बनाया। सामान्य परिस्थितियों में, यह बैक्टीरिया 87 प्रतिशत प्लास्टिक कण चिपकाने में सक्षम था। लेकिन मानव आंत के जटिल वातावरण में सामान्य बैक्टीरिया की प्लास्टिक पकड़ क्षमता 3 प्रतिशत तक सीमित हो गई, जबकि किम्ची का यह विशेष बैक्टीरिया 57 प्रतिशत प्लास्टिक कण पकड़ने में सफल रहा।

इससे पता चलता है कि यह बैक्टीरिया मानव पाचन तंत्र में भी प्रभावी रूप से सक्रिय रह सकता है। प्रयोगशाला परीक्षणों के बाद वैज्ञानिकों ने जीवाणु रहित चूहों पर इसका प्रयोग किया। परीक्षण के दौरान किम्ची के इस प्रोबायोटिक बैक्टीरिया से उपचारित चूहों के मल में सामान्य चूहों के मुकाबले दोगुने से अधिक नैनोप्लास्टिक कण पाए गए। अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. से ही ली के अनुसार, प्लास्टिक प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरणीय समस्या नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य की गंभीर चुनौती बन चुका है। पारंपरिक किण्वित खाद्यों में मौजूद ये सूक्ष्मजीव भविष्य में शरीर में प्रवेश करने वाले पर्यावरणीय प्रदूषकों और प्लास्टिक कणों के विरुद्ध लड़ने वाला एक नया जैविक हथियार बन सकते हैं, वैज्ञानिकों का विश्वास है।

इजरायली महत्वाकांक्षाओं ने खाड़ी राष्ट्रों को कैसे सशक्त बनाया?

समाचार सारांश

समीक्षा गरिएको।

  • सन् २०२४ के वसंत ऋतु में ईरान ने पहली बार सीधे इसराइली क्षेत्र पर 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिन्हें अमेरिकी, ब्रिटिश, फ्रांसीसी और जॉर्डनियाई सेनाओं ने बीच में ही रोक दिया।
  • ईरान ने अमेरिकी-इसराइली हमले का जवाब देते हुए खाड़ी राष्ट्रों के हवाई अड्डे, बंदरगाह और तेल प्रसंस्करण केंद्रों पर हमला किया और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद कर दिया।
  • खाड़ी देशों ने अमेरिकी सुरक्षा साझेदारी में विविधता लाकर तुर्की, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, जापान और ब्रिटेन के साथ नए रक्षा समझौते किए हैं और इसरायल के क्षेत्रीय प्रभुत्व को स्वीकार करने से इनकार किया है।

सन् २०२४ के वसंत काल में, ईरान ने पहली बार सीधे इसराइल की भूमि पर हमला करते हुए 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइल दागी। अमेरिकी, ब्रिटिश, फ्रांसीसी तथा जॉर्डन की सेनाओं ने इन हमलों को शीघ्रता से रोक दिया। इस घटना ने खाड़ी देशों को एक स्पष्ट संदेश दिया: जब ईरान इसराइल पर हमला करता है, तो अमेरिका की अगुवाई में तुरंत सामूहिक प्रतिरोध होगा। लेकिन एक चुनौतीपूर्ण सवाल उठता है—यदि ईरान न केवल इसराइल बल्कि खाड़ी देशों को भी निशाना बनाए तो क्या होगा?

आज इस सवाल का जवाब सामने आ रहा है। 28 फरवरी को अमेरिकी और इसराइली हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी के अरब देशों के हवाई अड्डे, बंदरगाह, तेल प्रसंस्करण केंद्रों और जल आपूर्ति उद्योगों पर हमला किया और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद कर दिया, जिससे बहरीन, कुवैत और कतार के निर्यात ठप हो गए, जबकि ओमान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के व्यापार में भारी बाधा आई।

अमेरिकी सेना ने कुछ हमलों को रोकने में मदद की, पर यह क्षेत्रीय व्यापार और सुरक्षा प्रतिष्ठा को बड़ा झटका था। ईरान का उद्देश्य ही उस क्षेत्र की सुरक्षा प्रणाली को लक्षित करना था, जो अमेरिका-इसराइल की सैन्य गतिविधियों को सुविधाजनक बना रही थी।

खाड़ी देशों ने दशकों तक ईरान से टकराव में तटस्थता बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ सुरक्षा साझेदारी जारी रखी है, लेकिन वर्तमान हालात में वे अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। वे इसराइल के क्षेत्रीय प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करते और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

फाइल तस्वीर ।

अमेरिकी और इसराइली नेताओं के लिए यह सुरक्षा ढांचा तर्कसंगत था, जिसमें इसराइल क्षेत्रीय प्रभुत्व बनाए रखते हुए पड़ोसियों पर सैन्य श्रेष्ठता स्थापित कर सकता था। खाड़ी अरब देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी अस्थिरता फैलाने वाले सहयोगियों के खिलाफ इसराइल के साथ सहयोग करना चाहते थे।

लेकिन वर्तमान युद्ध स्पष्ट कर चुका है कि इसराइली क्षेत्रीय प्रभुत्व के प्रयासों ने खाड़ी देशों को जोखिम में डाल दिया है। इसराइल आक्रामक होकर युद्ध की घोषणा करने को तैयार दिख रहा है और पड़ोसियों के हितों की अनदेखी कर रहा है। अब कई खाड़ी नेता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाने को तत्पर हैं। वे हथियार आपूर्ति और सुरक्षा भागीदारी में विविधता ला रहे हैं तथा कूटनीतिक और सैन्य समन्वय को भी मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

साझा दुश्मन के प्रति साझा प्रतिक्रिया

खाड़ी के अरब राष्ट्र इसराइल को तब तक औपचारिक मान्यता देने को तैयार नहीं थे जब तक वह फिलिस्तीनी भूमि वापस नहीं करता। कुछ खाड़ी देश पिछले दशक में इसराइल के साथ सामान्यीकरण संबंध शुरू कर चुके हैं, मगर वे इसराइली प्रभुत्व को कभी स्वीकार नहीं करते।

एच. ए. हेलियर

इसराइल ने गाजा में अपने सैन्य अभियान में 70,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान ली है और वेस्ट बैंक को अपने क्षेत्र में सम्मिलित करने की योजनाएं बना रहा है। इसकी सैन्य गतिविधियों ने उसकी क्षेत्रीय प्रतिष्ठा कमजोर की है। खाड़ी नेता मानते हैं कि इस युद्ध में उनके हित इसराइल के हित से मेल नहीं खाते।

खाड़ी देशों ने ईरान पर अमेरिकी हमलों के विरुद्ध बातचीत के जरिए समाधान खोजने की कोशिश की, पर जैसे ही हमले शुरू हुए, ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया। इससे स्पष्ट हुआ कि खाड़ी देश अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के बिना तटस्थ रह नहीं सकते।

इस संघर्ष ने खाड़ी देशों को तीन मुख्य समूहों में विभाजित कर दिया है। ओमान संयम और संतुलन की नीति अपनाए हुए है, यूएई ईरान के साथ संबंध सुधार में विफलता के बाद कड़ी सुरक्षा नीति अपना रहा है, जबकि अन्य देश मध्यमार्गी या मिश्रित रुख रख रहे हैं।

आम तौर पर, खाड़ी देशों में ईरान के प्रति नापसंदगी है, जो ईरान के सहयोगियों द्वारा इराक, लेबनान और यमन में फैलाई गई अस्थिरता और हाल के खाड़ी हमलों से बढ़ी है।

बहुध्रुवीयता की ओर

ईरानी हमलों ने खाड़ी देशों को आपसी मतभेद दूर कर स्वतंत्र सुरक्षा संरचना बनाने के लिए प्रेरित किया है। दशकों से वे अमेरिका के साथ रक्षा संबंधों में रहे हैं, लेकिन अब वे उनमें विविधता लाने लगे हैं।

खाड़ी देश अमेरिका से हथियार और सैन्य उपकरणों पर निर्भरता घटाकर तुर्की, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, जापान और ब्रिटेन से वैकल्पिक आपूर्ति खोज रहे हैं। यूरोप भी खाड़ी देशों का विश्वसनीय सहयोगी बनने को तैयार है।

वे चीन के साथ आर्थिक और तकनीकी समझौतों को बढ़ाने की उम्मीद रखते हैं, पर सैन्य गारंटी के मामले में सतर्क रहेंगे। इस प्रकार वे विभिन्न साझेदारों के साथ कूटनीतिक फ्लेक्सिबिलिटी रखते हुए स्वयं को सशक्त बनाना चाहते हैं।

खाड़ी क्लब (गल्फ क्लब)

खाड़ी देशों को अपनी रक्षा संबंध और मजबूत करने की जरूरत है। हवाई रक्षा प्रणाली का समन्वय, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र साझा करना और एंटी-ड्रोन प्रौद्योगिकी को समेकित करना आवश्यक है। हालांकि ‘खाड़ी सहयोग परिषद्’ है, फिर भी सदस्यों के बीच प्रतिस्पर्धा रक्षा एकीकरण में बाधा डाल रही है।

सऊदी अरब और यूएई आंतरिक रूप से रक्षा उद्योग विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं, पर युद्ध के दौरान खाड़ी देशों को ‘इंटरसेप्टर मिसाइल’ की कमी का सामना करना पड़ा। यह स्पष्ट करता है कि भविष्य में रक्षा क्षमता स्वदेशी रूप से विकसित करनी होगी।

वाशिंगटन का मानना है कि ‘खाड़ी देश और इसराइल की सुरक्षा एक-दूसरे की पूरक है और सामान्यीकरण क्षेत्रीय स्थिरता लाएगा’, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस धारणा को गलत साबित किया है।

नेटन्याहू के क्षेत्रीय योजनाओं और अरब राष्ट्रों की आकांक्षाओं में गहरा अंतर है। खाड़ी देश ऐसी सुरक्षा प्रणाली चाहते हैं जो उनके संप्रभु हितों की रक्षा करे और इसराइल या ईरान के प्रभुत्व में न आए।

फॉरेन अफेयर्स से

फिफा विश्वकप २०२६: अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में होने वाले मैचों का कार्यक्रम और स्थल

संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा ने मिलकर फिफा विश्वकप २०२६ के आयोजन की मेज़बानी करने का निर्णय लिया है। इस लेख में आगामी जून महीने से शुरू होने वाली प्रतियोगिता के समूह विभाजन, समय सारणी, तथा मैचों के होस्ट स्टेडियम के विवरण शामिल हैं। खेल शुरू होते ही ताजा परिणाम और विभिन्न समूहों में शामिल टीमों की अंक तालिकाएँ तुरंत अपडेट की जाएंगी।

फिफा विश्वकप २०२६ के नॉकआउट चरण का मैच २८ जून को, २०:०० GMT+1 (पेनाल्टी) NaN – NaN (पेनाल्टी) (सोफी स्टेडियम) में आयोजित किया जाएगा। सभी समय GMT+1 के अनुसार निर्धारित किए गए हैं। यदि कार्यक्रम में कोई बदलाव होता है, तो इसकी ज़िम्मेदारी संबंधित स्रोत की नहीं होगी। नेपाल में GMT से ५ घंटे ४५ मिनट आगे है।

फ़ीफा विश्व कप २०२६: अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में होने वाले मैच – कौन सी टीम कहाँ और कब खेलेगी?

विश्वकप फुटबल २०२६ का संकेत करती तस्वीर

प्रकाशित

पढ़ने का समय: १ मिनट

संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा संयुक्त रूप से फीफा विश्व कप २०२६ का आयोजन करने जा रहे हैं।

इस सामग्री में आगामी जून महीने से शुरू होने वाली प्रतियोगिता के समूह विभाजन, समय सारिणी, और मैचों के स्टेडियमों सहित विस्तृत जानकारी शामिल है।

मैच शुरू होने के बाद ताजा परिणाम और विभिन्न समूहों में मौजूद टीमों की अंक तालिका तुरंत अपडेट की जाएगी।

फीफा विश्व कप २०२६

नॉकआउट चरण


    • (पेनाल्टी)


      NaN


      NaN


      (सोफी स्टेडियम)

सभी समय GMT+1 के अनुसार निर्धारित किए गए हैं। यदि समय सारिणी में परिवर्तन होता है तो उसकी जिम्मेदारी नहीं ली जाएगी। नेपाल का समय GMT से ५ घंटा ४५ मिनट आगे है।

स्कटल्याण्ड के खिलाफ कप्तान रोहित ने अधशतक पूरा किया

आईसीसी क्रिकेट विश्व कप लीग–2 के तहत स्कटल्याण्ड के खिलाफ नेपाल के कप्तान रोहित पौडेल ने 76 गेंदों पर अधशतक पूरा किया है। रोहित ने 2 चौके और 1 छक्का लगाकर वनडे में अपनी 12वीं अधशतकीय पारी खेली।

इस मैच में इशान पांडे ने भी अधशतक पूरा किया। यह मुकाबला 4 जेठ को काठमांडू में खेला गया था।

महन्थ ठाकुर – Online Khabar

महन्थ ठाकुर ने मधेस में चुरे दोहन और बजट क्रियान्वयन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए

जनता समाजवादी पार्टी के संरक्षक महन्थ ठाकुर ने मधेस क्षेत्र में चुरे दोहन और बजट क्रियान्वयन की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण मानसून के दौरान कटाव और बाढ़ की समस्या उत्पन्न होने तथा राज्य संस्थाओं द्वारा इस पर उचित ध्यान न दिए जाने की बात कही। ४ जेठ, काठमांडू।

राष्ट्रिय सभा के अधीन विकास, आर्थिक मामले एवं सुशासन समिति की बैठक में सोमवार को अपने विचार व्यक्त करते हुए अध्यक्ष ठाकुर ने कहा कि विकास योजनाएं मौजूद होने के बावजूद व्यवहार में प्रतिकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने चुरे और भावर क्षेत्र के अनियंत्रित दोहन के कारण मधेस में बड़ी समस्या उत्पन्न होने की जानकारी दी।

उनके अनुसार, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से मानसून में उत्तर की ओर कटाव और दक्षिण की ओर डूबने जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। कई महीनों तक बस्तियाँ पानी में डूबी रहने के बावजूद राज्य संस्थाओं की ओर से आवश्यक ध्यान न दिए जाने पर उन्होंने असंतोष व्यक्त किया।

अध्यक्ष ठाकुर ने बजट आवंटन और व्यय प्रक्रिया की पारदर्शिता न होने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘हम चुरे विनाश की बात कर रहे हैं, लेकिन वहां से पत्थर, मिट्टी और बालू निकालने का काम निरंतर जारी है। विकास निर्माण की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जनता को महसूस हो इस तरह क्रियान्वित होनी चाहिए,’ उन्होंने बल देते हुए कहा।

मनास्लु बेस क्याम्प पहुँचने के बाद सांस लेने में परेशानी

९ मई २०१३ को दिन मनास्लु पर्वतारोहण को ७०वां वर्ष पूरा हुआ है। मनास्लु पर्वत ८१६३ मीटर ऊँचा जोखिमपूर्ण हिमालयी पर्वत है जहां कई दुर्घटनाएं हुई हैं। मनास्लु पर चढ़ने वाले पर्वतारोहियों की संख्या जोखिम के बावजूद लगातार बढ़ती जा रही है। ९ मई को मनास्लु पर्वतारोहण दिवस मनाया जाता है। जोखिमपूर्ण पर्वत के रूप में प्रसिद्ध मनास्लु पर्वतारोहण को ७० साल पूरे हो गए हैं। मैं हाल ही में मनास्लु बेस कैम्प पहुंचा हूँ। वहां पहुंचते ही मैंने सोचा, मैं इतना देर से क्यों आया, इसके लिए मन में पछतावा हुआ।

बुढीगंडकी नदी के किनारे स्थित गोरखा के उपल्ला गांवों की रूपरेखा, बनावट और सौंदर्य का आनंद लेते हुए गोरखा के सिर्दिवास से पैदल यात्रा शुरू की गई। गोरखा बाजार से आरुघाट होते हुए सिर्दिवास तक जीप से यात्रा की गई। इसके बाद जगत, नामरुंग और लो होते हुए तीन दिन का सफर तय किया। अंततः सामागाँव पहुँचा गया और अगले सुबह बेस कैम्प जाने की तैयारी की गई। ३५३० मीटर की ऊंचाई पर स्थित सामागाँव बेहद ठंडा था। वहां के वातावरण ने ऑक्सीजन के स्तर को महसूस करने में सहायता की। सुबह से ही मनास्लु बेस कैम्प की ओर बढ़ना शुरू किया। ४८०० मीटर की ऊंचाई पर पहुंचते ही शहर के जीवन की थकान से थकी हुई सांस लेना आसान हुआ।

बेस कैम्प में बहुत कुछ अनुभव करने को मिला। सूरज की पहली किरण मनास्लु के शिखर पर पड़ते ही और धीरे-धीरे नीचे उतरते समय बर्फ में ताप के कारण राफ़ दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है जैसे सूरज निकलते ही पर्वत का जन्म होता है। यह मनास्लु पर्वतारोहण का मौसम है, जिसकी ऊंचाई ८१६३ मीटर है। पर्वतारोहण के इच्छुुक लोगों की भीड़ है। ढोवाली भारी सामान ले जा रहे हैं, कामगार निवास की व्यवस्था के लिए मिट्टी संभाल रहे हैं। वहां कोई भी आराम की स्थिति में नहीं था।

इतने लंबे समय तक ठंडे और ऊंचे स्थान पर रहने के बाद मुझे सांस लेने में दिक्कत हुई और सांस रुकी हुई महसूस हुई। ऑक्सीमीटर ने SPO2 स्तर कम दिखाया। वहीं कॉफी और थुक्पा खाकर मैं वापस लौटने लगा। नीचे की ओर उतरते हुए मन नियंत्रण से बाहर था। आगे वीरेंद्र ताल के आकार ने मन को आकर्षित किया जबकि भारी सामान उठाए ढोवालों और खच्चरों की पीड़ा देखकर मन भारी हो गया। मनास्लु खुद ही जोखिमपूर्ण पर्वतों में शामिल है। यह विश्व का आठवां सबसे ऊँचा पर्वत है। हिमस्खलन, खराब मौसम और कठिन मार्ग के कारण यहां अनेक दुर्घटनाएं हुई हैं। चाहे जितना भी जोखिम हो, ७० वर्षों के पश्चात भी मनास्लु आरोहण करने वाले पर्वतारोहियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

मनास्लु बेस कैम्प पहुंचने के बाद सांसें बंद हो गईं!

समाचार सारांश

OK AI द्वारा निर्मित। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • 9 मई 2070 को मनास्लु पर्वतारोहण के 70वें वर्ष पूर्ण हुए।
  • मनास्लु पर्वत 8163 मीटर ऊंचा खतरनाक पर्वत है जहाँ कई दुर्घटनाएँ हुई हैं।
  • जोख़िम के बावजूद मनास्लु पर्वतारोहण करने वाले पर्वतारोहीयों की संख्या बढ़ती जा रही है।

9 मई, यानी मनास्लु पर्वतारोहण दिवस का 70वां वर्ष। खतरनाक पर्वत के रूप में प्रसिद्ध मनास्लु पर्वतारोहण को 70 वर्ष पूरे हो गए हैं। मैं अभी-अभी मनास्लु बेस कैम्प पहुंचा हूँ। वहाँ पहुंचकर मैंने सोचा, मैं इतना देर क्यों हुआ, दिल में पछतावा हुआ।

बुढीगण्डकी नदी के किनारे गोरखा के उपल्ला गांवों का स्वरूप, बनावट और सुंदरता का आनंद लेते हुए गोरखा के सिर्दिबास से पैदल यात्रा शुरू की। गोरखा बाजार से आरुघाट होते हुए सिर्दिबास तक जीप से यात्रा की। फिर तीन दिन लगाकर जगत, नामरुंग और ल्हो से होकर आखिरकार सामागाँव पहुंचे और अगले दिन बेस कैम्प जाने की तैयारी की।

3530 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सामागाँव बहुत ठंडा था। वहाँ का माहौल ऑक्सीजन के स्तर को महसूस करने में मदद करता था। सुबह से ही रास्ता चलते मनास्लु बेस कैम्प की ओर बढ़े। 4800 मीटर की ऊंचाई पर पहुँचते ही शहर की जीवनशैली में थकावट से थके हुए फेफड़ों को सांस लेने में राहत मिली।

चाहते हुए मनास्लु के नाम पर एक कविता लिखी:

मनास्लु !
तुम कितने सुंदर हो
पास से
महसूस कर रहा हूँ,
तुमसे छूकर टूट नहीं सकता,
अद्भुत और विशाल हो तुम,
तुम्हारे करीब आते
जीवन का आधार समझ आता है,
तुम निर्मल हो,
छूने से दाग लगते हैं तुम्हें,
हिम्मतें खो जाती हैं,
जब तुम नहीं होते
हर मौसम इतिहास रचते हो,
पर जलवायु परिवर्तन से
तुम भी मुश्किल में हो शायद?
सभ्यता का झंडा फहराते हुए
तुम्हें नमूना बनना होगा,
प्रदूषण से लाखों पर्यटकों को आकर्षित करना होगा,
प्रिय मनास्लु !
मैं बार-बार तुम्हें मिलने
जल्दबाजी में आऊंगा,
तुम्हारे विश्वास के साथ
इस दिल में एक छोटा स्वर्ग बनाऊंगा।

बेस कैम्प में बहुत कुछ अनुभव किया। सूरज की पहली किरण जब मनास्लु के शिखर पर पड़ती है और धीरे-धीरे नीचे आती है, बर्फ पर ताप पड़ने से रेफ़्लेक्शन होती है। ऐसा लगता है जैसे सूरज उगते ही हिमालय जन्मता है। पहली मुस्कान हिमालय गर्भ से बाहर निकलने के बाद देता है। फिर हिम पर सूरज की चमक पड़ते ही हिमालय चमक उठता है, जैसे नवजात शिशु की ललाट पर माँ की ममता झलकती है।

यह मनास्लु पर्वतारोहण का सत्र है, जिसकी ऊंचाई 8163 मीटर है। पर्वतारोहण के इच्छुकों की भीड़ है। बोझा उठाए हुए भरिये सामान ले जा रहे हैं, कामगार रहने की जगह बनाने के लिए मिट्टी संभाल रहे हैं। वहाँ कोई खाली समय नहीं ले रहा। पर्वतारोहण की कामना स्वरूप धूप जल रही है, हवा बह रही है और हेलीकॉप्टर भी नियमित उड़ रहा है। उन पर्वतारोहियों को देख कर मन में फिर एक कविता उमड़ी:

जिज्ञासा और डर
चढ़ाई से पहले चेहरे पर भारी दिखते थे
पर्वतारोही के,
खुशी और सफलताएँ
इतनी तेज थीं,
चढ़ाई के बाद
उसी चेहरे पर धन्यवाद दिखा,
सभी पर्वतारोहीयों का धन्यवाद!
जो हमें धूल चुमवा कर
हिम्मत जगाना सिखाते हैं,
अभाव और दुःख को शक्ति में बदलने का संकल्प दिखाते हैं,
जुड़वा से समाधान नहीं होने की कहानी बताते हैं,
दर्द को जीतने वाली अनोखी ऊर्जा हैं वे,
अपने ऊपर विश्वास रखकर आगे बढ़ना सिखाते हैं।
उन सभी पर्वतारोहीयों का धन्यवाद!
जो कठिन पहाड़ों पर
साहस के बीज बोते हैं
इतिहास रचते हैं,
जो कांटों पर चढ़कर
आत्मविश्वास के खूबसूरत फूल तोड़ते हैं।

इतनी देर ठंडी ऊंचाई पर बैठने के बाद मेरी सांस लेने में दिक्कत हुई और ऐसा लगा जैसे सांस रुक गई हो। ऑक्सीमीटर ने SPO2 स्तर कम दिखाया। वहीं कॉफी और थुक्पा खाकर मैं वापस लौटने लगा। उतरते हुए मन नियंत्रण से बाहर था। आगे वीरेंद्र ताल का आकार मन को लुभा रहा था और भारी सामान उठाए भरिये और खच्चरों की मेहनत देखकर मन थोड़ा दुखी हुआ। कई झरनों को पार करते हुए प्रकृति का हिस्सा बन कर मैं आनंदित था।

उस रात सामागाँव में बिताकर गोरखा लौटते हुए मनास्लु की छाया मुझे आकर्षित करती रही। वह निमंत्रण वास्तव में अनोखा था। मैं एक विशेष संकल्प लेकर आया था, और उसे पूरा करना था।

मनास्लु स्वयंप ही जोखिम वाले पर्वतों में आता है। यह विश्व का आठवाँ सबसे ऊंचा पर्वत है। हिमस्खलन, खराब मौसम और कठिन रास्तों के कारण यहाँ कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

जोखिम के बावजूद, 70वाँ वर्ष पूरा होने पर भी मनास्लु पर चढ़ने वाले पर्वतारोहीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

सांसद सुवेदी ने टारिगाउँ विमानस्थल की उपेक्षा पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया

४ जेठ, काठमाडौं। दाङ के टारिगाउँ विमानस्थल की उपेक्षा के विषय को लेकर राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद कमल सुवेदी ने सरकार का ध्यान आकर्षित कराया है। उन्होंने प्रतिनिधि सभा के सोमवार के सत्र में कहा, ‘‘वि.सं. २०११ साल में स्थापित दाङ के टारिगाउँ विमानस्थल को सात दशक गुजरने के बावजूद अभी तक विस्तार नहीं किया जा सका है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘यह विमानस्थल दाङ सहित सल्यान, प्युठान, रोल्पा और रुकुम के लाखों लोगों की जीवनधारा है, लेकिन अब तक इसे उपेक्षित किया गया है।’’
सांसद सुवेदी ने लमही–घोराही–तुलसीपुर चार लेन सड़क, राप्ती राजमार्ग, दाङ–सुर्खेत सड़क तथा दामोदर मार्ग और तुलसीपुर–खिलतपुर सड़क की भी अत्यंत दयनीय स्थिति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इन सड़कों की खराब स्थिति के कारण जनता को दैनिक जीवन में कठिनाइयों और दुर्घटना के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। आगामी बजट में टारिगाउँ विमानस्थल के विस्तार और इन रणनीतिक सड़कों के सुधार के लिए पर्याप्त बजट आवंटित करने की उन्होंने सरकार से मांग की है।

विश्वकप क्रिकेट लिग २: स्कटल्यान्ड के खिलाफ नेपाल की महत्वपूर्ण जीत, पांचवें स्थान पर पहुँचा

शीर्ष स्थान पर मौजूद स्कटल्यान्ड के खिलाफ छह विकेट की प्रभावशाली जीत हासिल करते हुए नेपाली राष्ट्रीय क्रिकेट टीम ने आईसीसी विश्वकप लिग २ की शीर्ष ५ में अपनी जगह बनाई है। सन्दीप लामिछाने और ललितनारायण राजवंशी की स्पिन गेंदबाजी ने विरोधी टीम को ३९.१ ओवर में १९४ रन पर समेट दिया। इसके बाद कप्तान रोहित पौडेल और ईशान पाण्डे के अर्धशतकों की मदद से नेपाल ने ३८.१ ओवर में लक्ष्य पूरा किया।

लिग २ श्रृंखला में पिछड़ रही नेपाली टीम पहली बार शीर्ष ५ में पहुंची है। आज के २ अंक जोड़ते हुए नेपाल तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंचा और नामिबिया के साथ बराबरी की स्थिति बना ली है। नामिबिया और नेपाल दोनों के पास २२ अंक हैं। लेकिन रन रेट के मामले में नेपाल बेहतर स्थिति में रहने के कारण नामिबिया को छठा स्थान मिला है। कनाडा सातवें स्थान पर है। नेपाल ने २४ मैचों में २१ अंक जोड़े हैं जबकि पहले पीछे रही यूएई के १४ अंक हैं।

बिना किसी दबाव के ये अहम अंक हासिल करना नेपाल के लिए खुशी की बात रही। कुल ५८ रन की समझदारी भरी साझेदारी के बाद ओपनर जोड़ी कुशल भुर्तेल (२८ रन) और आशिफ शेख (२९ रन) के बीच हुई एक गलतफहमी के कारण आशिफ रन आउट हो गए। उस खराब स्थिति में कुशल भी ‘एलबीडब्ल्यू’ होकर आउट हो गए, जिससे नेपाल की पारी थोड़ी कठिन हो गई। लेकिन इसने मैच पर कोई बड़ा असर नहीं डाला।

बाएं हाथ के ईशान पाण्डे और कप्तान रोहित पौडेल ने आराम से खेल को नियंत्रित करते हुए जीत दिलाई। राष्ट्रीय जर्सी में दूसरा मैच खेल रहे ईशान ने करियर का पहला अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने ६१ गेंदों में ५ चौके और २ छक्के लगाए। वे मार्क वाट द्वारा ‘कट एंड बोल्ड’ होकर आउट हुए। रोहित ने धैर्यपूर्वक ७८ गेंदें खेलकर अपना १२वां एकदिवसीय अर्धशतक जमाया और ७४ रन पर नाबाद रहे।

स्पिनरों के काबू में आने के कारण पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय सही साबित हुआ। शुरुआत में स्कटलैंड के खिलाड़ी आक्रामक नजर आ रहे थे, खासकर ब्रान्डन म्याकमुलेन ने ४४ गेंदों में ७३ रन बनाकर प्रभावशाली प्रदर्शन किया। लेकिन नेपाली स्पिनरों ने खेल पर नियंत्रण पाते हुए स्कटलैंड की रन गति को कम किया। म्याकमुलेन के आउट होने के बाद स्कॉट्स के विकेट लगातार गिरने लगे। टीम ४० ओवर से अधिक खेल नहीं पाई।

सन्दीप लामिछाने ने विश्व क्रिकेट में सबसे कम एकदिवसीय मैच खेलकर १५० विकेट लेने वाले गेंदबाज का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। सन्दीप ने ७३ पारियों में १५० विकेट लिए हैं। पिछले रिकॉर्ड के धारक ऑस्ट्रेलियाई मिचेल स्टार्क थे, जिन्होंने ७७ पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी। सन्दीप ने पहले ओवर की पहली गेंद पर ही ओपनर जॉर्ज मुन्सी को बोल्ड कर अपना विकेट संख्या १४९ पर पहुंचाया था।

स्कटलैंड को हराकर नेपाल पांचवें स्थान पर पहुँचा

समाचार सारांश

  • नेपाल ने स्कटलैंड को 6 विकेट से हराकर ICC क्रिकेट विश्व कप लीग 2 में पांचवें स्थान पर अपनी जगह बनाई।
  • कप्तान रोहित पौडेल ने नाबाद 74 रन बनाकर नेपाल को 195 रनों के लक्ष्य को हासिल करने में मदद की।
  • अब नेपाल शुक्रवार को अमेरिका के खिलाफ श्रृंखला का अंतिम मैच खेलेगा।

4 जेठ, काठमाडौं। ICC क्रिकेट विश्व कप लीग 2 के तहत सोमवार को खेले गए मुकाबले में नेपाल ने पहले स्थान पर बने स्कटलैंड को 6 विकेट से मात दी। इस श्रृंखला में यह नेपाल की दूसरी जीत है, जिससे वह लीग 2 की अंक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।

कीर्तिपुर के त्रिभुवन विश्वविद्यालय क्रिकेट मैदान में स्कटलैंड द्वारा बनाए गए 195 रनों के लक्ष्य को नेपाल ने 38 ओवर 1 गेंद पर 4 विकेट खोकर पूरा किया।

नेपाल की जीत में कप्तान रोहित पौडेल ने सर्वाधिक योगदान देते हुए 74 रन नाबाद बनाए। उन्होंने 98 गेंदों पर 5 चौके और 2 छक्के लगाए। रोहित ने इशान पाण्डे के साथ तीसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की। इशान ने 61 गेंदों पर 55 रन बनाकर आउट हुए, जिसमें 5 चौके और 2 छक्के शामिल थे।

ओपनर कुशल भुर्तेल और आसिफ शेख ने पहले विकेट के लिए 58 रन की साझेदारी की। कुशल 28 और आसिफ 29 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद कप्तान रोहित और इशान ने टीम को संभाला। उपकप्तान दीपेन्द्रसिंह ऐरी 2 रन पर आउट हुए जबकि आरिफ शेख 8 रन पर नाबाद रहे। गेंदबाजी में स्कटलैंड के मार्क वाट ने 2 और ब्रेन्डन मैकमुलेन ने 1 विकेट लिया।

पहले बल्लेबाजी करते हुए स्कटलैंड 39 ओवर 1 गेंद में 194 रन पर ऑलआउट हो गया। स्कटलैंड के लिए ब्रेन्डन मैकमुलेन ने 73 रन बनाए जिसमें उन्होंने 44 गेंदों पर 6 छक्के और 6 चौके लगाए। माइकल इंग्लिस ने 72 गेंदों में 51 रन की पारी खेली। जॉर्ज मुन्से 21, फिन्ले मैकक्रेथ 6, कप्तान रिची बेरिंगटन 12 रन पर आउट हुए। अन्य खिलाड़ियों में माथ्यु क्रॉस 1, मार्क वाट 20, माइकल लिस्क 1, ओली जोन्स 2 रन पर बिना स्कोर बनाए आउट हुए, वहीं ओलीवर डेविडसन बिना खाता खोले आउट हुए।

नेपाल के स्पिनर ललित राजवंशी ने शानदार गेंदबाजी की। लंबे समय से विकेट नहीं लेने वाले ललित ने स्कटलैंड के खिलाफ 8 ओवर में 32 रन देकर 4 विकेट लिए। सन्दीप लामिछाने ने 10 ओवर में 47 रन खर्च कर 3 विकेट लिए। सन्दीप ने ओडिबई में सबसे तेज 150 विकेट का रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 73 मैचों में यह उपलब्धि हासिल की, जबकि 7 साल पहले मिशेल स्टार्क ने 77 मैचों में यह रिकॉर्ड बनाया था। नन्दन यादव, सम्मपाल कामी और दीपेन्द्रसिंह ऐरी ने एक-एक विकेट लिया।

स्कटलैंड के खिलाफ खेल से पहले सातवें स्थान पर मौजूद नेपाल इस जीत के बाद दो पायदान ऊपर उठते हुए पांचवें स्थान पर पहुंच गया। नेपाल ने 27 मैचों में 22 अंक हासिल कर लिये हैं। वहीं 28 मैच खेले नामीबिया भी 22 अंकों के साथ रन रेट के आधार पर छठे स्थान पर है। 24 मैचों में 21 अंक वाले कनाडा सातवें और 24 मैचों में 14 अंक वाले संयुक्त अरब अमीरात अंक तालिका के निचले हिस्से में हैं।

हारने के बावजूद स्कटलैंड 31 मैचों में 38 अंकों के साथ पहला स्थान बनाए हुए है। अमेरिका 26 मैचों में 36 अंक लेकर दूसरे तथा ओमन 28 मैचों में 31 अंक लेकर तीसरे स्थान पर है। नेदरलैंड्स 24 मैचों में 28 अंक लेकर चौथे स्थान पर है। अब नेपाल श्रृंखला का अंतिम मैच शुक्रवार को अमेरिका के खिलाफ खेलेगा।

विश्वप्रकाश शर्मा – Online Khabar

नेपाली कांग्रेस उपसभापति विश्वप्रकाश शर्माले पार्टीलाई सशक्त बनाउन गुटहरू तोड्ने रणनीति अघि बढाउने घोषणा

नेपाली कांग्रेसका उपसभापति विश्वप्रकाश शर्माले गुटहरू भत्काएर पार्टीलाई अझ सशक्त बनाउने नीति अघि बढाउने बताएका छन्। उनले विशेष महाधिवेशनमा सहभागी नभएका व्यक्तिहरूलाई समेत जिम्मेवारी प्रदान गर्ने योजना रहेको जानकारी दिए। शर्माले सदस्यता अद्यावधिक प्रक्रियामा अविश्वास नगर्न र वडा सभापतिलाई विश्वास गर्न सबैलाई आग्रह गरे।

४ जेठ, काठमाडौं। शर्माले सोमबारदेखि काभ्रेको धुलिखेलमा सुरु भएको ‘प्रदेश र स्थानीय तह केन्द्रित प्रदेश स्तरीय भेला’लाई सम्बोधन गर्दै उक्त कुरा भने। उनले भने, “विशेष महाधिवेशनमा सहभागीहरूलाई मात्र जिम्मेवारी दिएर हाम्रो पार्टीको विभाजनलाई बल पुग्नेछ। तर, विशेषमा सहभागी नभएका व्यक्तिहरूलाई समेत समेट्दै क्रमशः जिम्मेवारी दिइरहेका छौं र अझै थप समावेश गरिनेछ। यसैलाई हामी गुट भत्काएर पार्टीलाई बलियो बनाउने बाटो मान्छौं।”

उपसभापति शर्माले पार्टीका क्रियाशील सदस्यहरूलाई सदस्यता अद्यावधिक गर्न पनि आग्रह गरे। उनले भने, “गगन थापालाई विश्वास नगर्नु ठीक होला, तर आफ्नै वडाको पार्टी सभापतिलाई विश्वास गर्नुस्।” साथै सदस्यता अद्यावधिक प्रक्रियामा कसैप्रति शंका वा अविश्वास गर्नु आवश्यक नरहेको बताए।

कोरी बस्टर्ड: असाधारण विशेषताओं वाला अनोखा पक्षी

कोरी बस्टर्ड दुनिया का सबसे भारी उड़ने वाला पक्षी है, जिसका वजन 18 से 20 किलोग्राम तक हो सकता है। कोरी बस्टर्ड ज़मीन पर ही निवास करता है और आवश्यक होने पर तीव्र दौड़ सकता है तथा शक्तिशाली हमला कर सकता है। मानव गतिविधियों के कारण कोरी बस्टर्ड के प्राकृतिक आवास घटते जा रहे हैं और यह संकट में है। अफ़्रीका के विशाल सवाना क्षेत्र में अनेक अनोखे और शक्तिशाली जीव रहते हैं। शेर, चीता, हाथी और गैंडा जैसे प्राणी हमेशा लोगों के ध्यान का केंद्र होते हैं। लेकिन उसी विशाल मैदान में एक ऐसा पक्षी भी रहता है, जिसके असाधारण गुणों के बावजूद काफी कम चर्चा होती है। वह पक्षी है — कोरी बस्टर्ड।

कोरी बस्टर्ड दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है। विशाल शरीर, शक्तिशाली पैर, बड़े पंख और आकर्षक प्रजनन प्रदर्शन उसे प्रकृति की अद्भुत कृतियों में से एक बनाते हैं। देखने में यह पक्षी शांत और सुस्त लगता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर यह तेज़ दौड़ सकता है। यह खतरनाक हमला कर सकता है और उड़कर स्वयं को बचा सकता है। इसका जीवनशैली, व्यवहार और संघर्ष वैज्ञानिकों को भी आकर्षित करता है।

कोरी बस्टर्ड की जीवनशैली अन्य पक्षियों से काफी अलग होती है। अधिकांश पक्षी पेड़ों पर रहते हैं या लंबे समय तक आसमान में उड़ते हैं, जबकि कोरी बस्टर्ड ज़मीन पर रहना पसंद करता है। यह खुली घास वाली मैदानों, सूखे सवाना और झाड़ियों वाले इलाकों में पाया जाता है। यह ज़मीन पर चलते हुए भोजन की तलाश करता है। इसकी चाल आमतौर पर बहुत धीमी होती है। आराम से मैदान में चलते हुए यह अपने आस-पास सतर्क नजर रखता है। लेकिन जब खतरा महसूस करता है तो अचानक तेज़ दौड़ सकता है। इसके पैर बहुत मजबूत होते हैं। आवश्यकता पड़ने पर यह कठोर हमला भी कर सकता है, जो शिकारी को चोट पहुँचा सकता है।

कोरी बस्टर्ड आमतौर पर छोटे समूहों में रहता है। एक समूह में 5–6 पक्षी हो सकते हैं। कभी-कभी 30–40 तक के बड़े समूह भी देखे जा सकते हैं। इस प्रकार समूह में रहने से वे खतरे का पता जल्दी लगा पाते हैं और शिकारी से बचने की संभावना बढ़ जाती है।