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लेखक: space4knews

बुटवल में माइक्रो बस और ई-रिक्शा की टक्कर में एक की मौत

रुपन्देही के बुटवल उपमहानगरपालिका–९ कालिकापथ में माइक्रो बस और ई-रिक्शा की टक्कर में गोविन्द विक की मौत हुई है। घायल कृतिका आले मगर का लुम्बिनी प्रादेशिक अस्पताल में उपचार चल रहा है। माइक्रो बस चालक साजन परियार को पुलिस ने गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, दुर्घटना में ई-रिक्शा चालक, अर्घाखाँची पाणिनी गाउँपालिका–१ के निवासी और वर्तमान में बुटवल–३ गोलपार्क में रहने वाले ३२ वर्षीय गोविन्द विक की मृत्यु हुई। गंभीर चोटिल उन्हें लुम्बिनी प्रादेशिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई, जो इलाका प्रहरी कार्यालय बुटवल के प्रमुख डीएसपी निशान्त श्रीवास्तव ने बताया।

दुर्घटना में ई-रिक्शा पर सवार बुटवल–२ मैनाबगर की २३ वर्षीय कृतिका आले मगर भी घायल हुई हैं। उनका लुम्बिनी प्रादेशिक अस्पताल में उपचार चल रहा है। पुलिस के मुताबिक, तिनकुने से बसपार्क की दिशा में आ रही वायप्र०३००१ ज १२२९ नंबर की ईवी माइक्रो बस और विपरीत दिशा से आ रही रा १ ह ४४३४ नंबर की ई-रिक्शा आपस में टकरा गई थीं। दुर्घटना के बाद माइक्रो बस चालक, चितवन भरतपुर महानगरपालिका–१५ रामपुर के ३४ वर्षीय साजन परियार को पुलिस ने हिरासत में लेकर जांच कर रही है।

काठमाडौं के पूर्व सीडीओ रिजाल को हाजिरी जमानत पर रिहा करने का निर्णय

१७ चैत, काठमाडौं। आज सुबह ही गिरफ्तार किए गए काठमाडौं के पूर्व प्रमुख जिला अधिकारी छवि रिजाल को हाजिरी जमानत पर रिहा किया जाएगा। अपराध अनुसंधान कार्यालय की टीम ने रिजाल को सुविधानगर से गिरफ्तार किया था। वह जेएनजी आंदोलन के दौरान काठमाडौं के सीडीओ थे। रिजाल पर पिछले भाद्र २३ और २४ को हुए जेएनजी आंदोलन दमन का आरोप है। गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाली जांच आयोग ने रिजाल के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की थी। हालांकि, जिला पुलिस परिसर, काठमाडौं के एक अधिकारी ने जानकारी दी है कि उन्हें हाजिरी जमानत पर रिहा किया जाएगा।

रूस और चीन पश्चिम एशिया में सीधे क्यों शामिल नहीं हैं?

समाचार का सारांश

समीक्षा के बाद तैयार किया गया।

  • इरान और इजरायल के बीच संघर्ष अक्टूबर 7, 2023 के हमास के आक्रमण के बाद शुरू हुआ और फरवरी 28, 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले के बाद पूर्ण युद्ध का स्वरूप ले चुका है।
  • रूस इरान को रणनीतिक सहयोगी मानते हुए अप्रत्यक्ष सैन्य और तकनीकी सहायता दे रहा है जबकि इजरायल के साथ सुरक्षा समन्वय बनाए रखा है।
  • चीन मध्य पूर्व के युद्ध में सीधे सैन्य भागीदारी के बिना कूटनीतिक दबाव और अप्रत्यक्ष सहायता के जरिए अपने दीर्घकालिक आर्थिक और राजनीतिक हितों की रक्षा कर रहा है।

१७ चैत, काठमाडौँ । दशकों से इरान और इजरायल के बीच ‘छाया युद्ध’ चलता रहा है। साइबर हमले, वैज्ञानिकों की हत्या और प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से छोटे संघर्षों तक सीमित यह द्वंद्व अब सीधे युद्ध का स्वरूप लेने लगा है। अप्रैल 2024 में दमिश्क स्थित इरानी दूतावास पर इजरायली हमला और उसके जवाब में इरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल प्रहार ने इतिहास का नया अध्याय खोला है।

फिर फरवरी 28, 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने इरान पर व्यापक हवाई हमला शुरू किया, जिसके बाद यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में परिवर्तित हो गया। इरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनी की हत्या, परमाणु स्थलों, सैन्य ठिकानों और तेल अवसंरचना पर हमलों ने क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित किया। जवाब में इरान ने इजरायल के तेल रिफाइनरी, खाड़ी देशों के बंदरगाहों और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों को अंजाम दिया। यमन के हूथी विद्रोहियों ने इजरायल को निशाना बनाया और लेबनान की हिज़बुल्लाह की गतिविधियाँ भी बढ़ी हैं।

हर बड़े युद्ध में शक्तिशाली देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होते हैं। इस युद्ध में अमेरिका सीधे शामिल है, लेकिन विश्व की दो प्रमुख शक्तियाँ रूस और चीन अभी तक सीधे युद्ध में शामिल नहीं हुई हैं। ये देश कूटनीतिक दबाव और अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान कर रहे हैं, लेकिन सीधे सैन्य हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।

यह युद्ध कैसे शुरू हुआ?

यह संघर्ष अक्टूबर 7, 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमले से शुरू हुआ। इसके बाद इजरायल ने गाजा पर बड़े सैन्य अभियान चलाए। इरान ने हमास, हिज़बुल्लाह और हूथी प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से इजरायल और अमेरिका पर दबाव बढ़ाया। 2024 में इजरायल ने सीरिया स्थित इरानी दूतावास पर हमला किया और इरान ने प्रत्यक्ष मिसाइल हमले किए। जून 2025 में इजरायल और अमेरिका ने इरान के परमाणु स्थलों जैसे फोर्डो, नतान्ज़ और इस्फहान पर ‘ट्वेल्व-डे वार’ नामक अभियान चलाया।

फरवरी 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रम्प ने अधिकतम दबाव नीति अपनाई। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इरान पर परमाणु अप्रसार उल्लंघन का आरोप लगाया। फरवरी 28, 2026 को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी’ और ‘रोरिंग लायन’ अभियान शुरू किया।

इरान के तेहरान, इस्फहान सहित सैकड़ों लक्ष्यों पर व्यापक हमले हुए। सर्वोच्च नेता खामेनी की हत्या की घोषणा हुई और उनके बेटे मोज़तबा खामेनी ने नई सर्वोच्च नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। इरान ने हार्मुज स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी देते हुए तेल अवसंरचना पर हमले किए।

मार्च 31, 2026 तक स्थिति भयावह होती जा रही है। इजरायल के हाइफा रिफाइनरी में आग लगी है, तेहरान में विद्युत् आपूर्ति काटी गई है और खाड़ी देशों में ड्रोन हमले हुए हैं। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिका ने विशेष बल तैनात किए हैं और ट्रम्प ने हार्मुज जलसंधि की नाकाबंदी नहीं करने पर तेल एवं ऊर्जा प्रणालियों के विनाश की धमकी दी है। इरान भी अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ प्रतिकार का दावा कर रहा है। एक महीने के बावजूद युद्ध पूर्णरूप से तनावपूर्ण स्थिति बना हुआ है।

अमेरिका की निर्णायक भूमिका

अमेरिका इजरायल का मुख्य सहयोगी है। ट्रम्प प्रशासन ने इजरायल के अस्तित्व को अपने राष्ट्रीय हित से जोड़ दिया है। अमेरिका ने बी-2 बॉम्बर्स और टोमहॉक मिसाइल का उपयोग कर इरान के परमाणु स्थलों को ध्वस्त किया है। इजरायल ने अमेरिकी सेना को ‘रीयल-टाइम इंटेलिजेंस’ प्रदान की है और मिसाइल रक्षा प्रणाली में सहयोग दिया है।

अमेरिका में जनमत विभाजित है; सर्वेक्षणों के अनुसार 56% लोग युद्ध के खिलाफ हैं जबकि 44% समर्थन करते हैं। अधिकांश का मानना है कि यह युद्ध इजरायल के लाभ में है और अमेरिका के लिए फायदेमंद नहीं।

रूस की सतर्कता

रूस ने इरान पर हमले को ‘अधिकृत नहीं’ मानते हुए निंदा की है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया है। राष्ट्रपति पुतिन के प्रमुख सलाहकार सर्गेई लावरोव ने भी ‘आक्रमण रोकने’ की मांग की है। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इरान का पक्ष लिया है।

यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस पश्चिम एशिया की जटिलताओं को अधिक युद्ध में नहीं डालना चाहता। रूस की प्राथमिकता यूक्रेन में विजय प्राप्त करना है।

इरान ने यूक्रेन युद्ध के लिए ‘शाहेद’ ड्रोन और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई है, जबकि रूस ने इमरान को उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और गुप्त सूचनाएं प्रदान की हैं। दोनों देशों ने शंघाई सहयोग संगठन और BRICS के मंचों पर अमेरिका और पश्चिमी शक्तियों के प्रभाव को चुनौती देने का साझा उद्देश्य रखा है।

रूस और इजरायल के बीच अनौपचारिक नन-अटैक समझौता है। सीरिया में इजरायली हमलों पर रूस ने चुप्पी रखी है। रूस ने इरान के साथ सुरक्षा समन्वय बनाए रखा है और अमेरिका तथा इजरायल से मध्यमपूर्व में संतुलन बनाए रखने में सहायता की है।

रूस की सभी ऊर्जा यूक्रेन युद्ध पर केन्द्रित है। मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल के हस्तक्षेप से अमेरिकी संसाधन यूक्रेन से हटकर इस क्षेत्र में चले गए हैं। इससे रूस को यूक्रेन में अधिक आक्रामक होने का अवसर मिला है।

मध्यपूर्व युद्ध – Online Khabar

तेल की कीमतों में वृद्धि ने रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। युद्ध से पहले रूस की तेल आय पांच वर्ष के निम्नतम स्तर पर थी, लेकिन इरान युद्ध ने खाड़ी में तेल आपूर्ति प्रभावित कर कर ब्रेंट क्रूड का भाव 115 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ा दिया है। रूस का तेल और LNG निर्यात फरवरी की तुलना में 14% अधिक हो गया है।

चीन और भारत जैसे एशियाई खरीदार अधिक रूसी तेल खरीद रहे हैं ताकि इरानी तेल की कमी पूरी की जा सके। यह रूस को युद्ध-वित्त पोषण में सहायता देता है।

रूस-इंड्रान संबंध अब एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हुआ है। 2025 में दीर्घकालिक सहयोग समझौते ने इसे और मजबूत किया है। दोनों देश एक दूसरे को सैन्य उपकरण और तकनीक प्रदान करते हैं।

रूस ने इरान को युक्रेन युद्ध संबंधी ड्रोन तकनीक, पार्ट्स और उच्च गुणवत्ता वाली उपग्रह छवियां प्रदान की हैं। इसके अलावा, अमेरिकी युद्धपोतों और सैनिकों की जानकारी साझा करता है और ड्रोन संचालन रणनीति पर सलाह भी देता है।

फिर भी रूस का सहयोग अप्रत्यक्ष और सीमित है, उसने इरान में सीधे सैन्य हस्तक्षेप या अत्याधुनिक हथियार सप्लाई नहीं की है। इसके पीछे प्रमुख कारण यूक्रेन युद्ध में संसाधनों की कमी और रूस-इजरायल के बीच दीर्घकालिक नन-अटैक समझौता है।

इजरायल ने यूक्रेन को घातक हथियार नहीं दिए हैं और रूस पर कठोर प्रतिबंध नहीं लगाए हैं, इसलिए मास्को इजरायल को परेशान नहीं करना चाहता। सीरिया में रूस और इजरायल द्वारा ‘डि-कन्फ्लिक्ट मैकेनिज्म’ के जरिये सैन्य समन्वय जारी है। इसीलिए रूस सीधा हस्तक्षेप नहीं करता।

कूटनीतिक स्तर पर रूस इरान का समर्थन करता है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इरान के खिलाफ प्रस्तावों को निरस्त करता है।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मध्यपूर्व तनाव को दुनिया के लिए अस्थिरता बताते हुए शांति की अपील करते हैं, पर यह समर्थन भी सीमित है। रूस इरान को रणनीतिक साझेदार मानता है, लेकिन कोई सुरक्षा समझौता नहीं है, इसलिए वह रणनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहता है।

रूस की दीर्घकालीन नीति स्वार्थपूर्ण है। अगर इरान कमजोर होगा तो रूस का मध्यपूर्व में प्रभाव घटेगा, क्योंकि इरान रूस के ‘प्रतिरोध अक्ष’ का मुख्य स्तंभ है।

मध्यपूर्व युद्ध की अवधि बढ़ने से रूस को आर्थिक और राजनीतिक लाभ भी हो सकते हैं। तेल की कीमतें बढ़ने से बजट घाटा कटेगा और इरान को हथियार बेच कर राजस्व मिलेगा। यह अमेरिका को थकाएगा और रूस के ‘बहुध्रुवीय विश्व’ सिद्धांत को मजबूत करेगा।

रूस के आधिकारिक बयान और व्यवहार में फर्क है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़ी आलोचना के बाद भी व्यवहार में ‘पर्खो और देखो’ नीति अपनाई गई है। अमेरिका कमजोर हुआ तो रूस अधिक सक्रिय हो सकता है।

अब रूस कूटनीतिक दबाव, अप्रत्यक्ष तकनीकी सहायता और रणनीतिक प्रतीक्षा की नीति पर है, जो उसे जोखिम से बचाता है और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करता है।

चीन का दृष्टिकोण: कूटनीति, अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक रणनीति

बाहरी नजर में चीन का रुख रूस से अधिक सतर्क और कूटनीतिक है। विदेश मंत्री वांग यी ने इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। चीन युद्ध विराम और वार्ता का पक्षधर है। वह खाड़ी कनेक्टिविटी काउंसिल (GCC) देशों से संवाद कर क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दे रहा है।

चीन के मध्य पूर्व युद्ध में सीधे सैन्य भागीदारी न करने के पीछे आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं। चीन की विशाल अर्थव्यवस्था आयातित तेल पर निर्भर है, जिसमें इरान प्रमुख स्रोत है। हार्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ के तहत इरान चीन का रणनीतिक साझेदार है। 2021 में हुए 25-वर्षीय समझौते से लगभग 400 बिलियन डॉलर निवेश का लक्ष्य है, जिसे चीन सुरक्षित रखना चाहता है।

मध्यपूर्व तनाव : युद्धग्रस्त क्षेत्र की फोटो-विडियो, जोखिम में नेपाली

चीन की रणनीति मुख्यतः तीन भागों में बंटी है। पहली, चीन वैश्विक राजनीति में अमेरिका और इजरायल के एकाधिकार का विरोध करता है और बहुध्रुवीय विश्व का समर्थन करता है। लेकिन इरान के पक्ष में सीधे युद्ध में कूदना ताइवान और दक्षिण चीन सागर के तनाव के कारण बेहद जोखिमपूर्ण है।

दूसरी, चीन खुद को शांति मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। 2023 में सऊदी अरब और इरान संबंध सुधार में मुख्य भूमिका निभाई और अब ओमान और फ्रांस जैसे देशों के साथ वार्ता कर रहा है।

तीसरी, चीन अप्रत्यक्ष सहयोग प्रदान कर रहा है। युद्ध से पहले से चीन ने इरान को ड्रोन, मिसाइल पार्ट्स और सैन्य-सिविल सामग्री मुहैया कराई है। इरान ने राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य सहायता की पुष्टि की है, पर विस्तार से जानकारी गोपनीय है। शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स में संयुक्त सैन्य अभ्यास उनकी निकटता दिखाता है, फिर भी चीन ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया है।

चीन के दीर्घकालिक नजरिए में मध्य पूर्व युद्ध लंबा चले तो अमेरिका कमजोर होगा और चीन का विश्व प्रभाव बढ़ेगा। हालांकि तेल आपूर्ति बाधित होने से उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। इसलिए चीन वर्तमान में ‘प्रतीक्षा और दबाव’ की नीति पर है, जिसमें वह कूटनीतिक रूप से इरान का पक्ष लेता है लेकिन व्यावहारिक रूप से राष्ट्रहित की रक्षा करता है। यदि युद्ध वैश्विक आर्थिक संकट लाए, तो चीन फिर मध्यस्थता कर विश्व मंच पर अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाएगा।

बीपी राजमार्गमा सवारी आवागमन बन्द – Online Khabar

बीपी राजमार्ग पर वाहनों का आवागमन पूर्णतया बंद

फाइल तस्वीर

खराब मौसम के कारण काभ्रे की ओर बीपी राजमार्ग के सड़क खंड पर वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। भारी वर्षा के कारण रोशी नदी का जलस्तर बढ़ा है, जिससे बाढ़ की संभावना बनी हुई है। इस स्थिति की जानकारी देते हुए जिला पुलिस प्रमुख एसपी कोमल शाह ने आवागमन बंद करने की पुष्टि की है। सड़क की स्थिति के बारे में जानकारी के लिए पुलिस को १०० और ट्रैफिक पुलिस को १०३ नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

१७ चैत्र, काभ्रेपलाञ्चोक। अस्थिर मौसम के कारण बीपी राजमार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। लगातार हो रही भारी बारिश से रोशी नदी का जलस्तर उच्च स्तर पर पहुँच चुका है और संभावित जोखिम को देखते हुए काभ्रे की ओर सड़क खंड पर सभी प्रकार के वाहन आवागमन के लिए तत्काल बंद कर दिए गए हैं, इस बात की जानकारी जिला पुलिस प्रमुख एसपी कोमल शाह ने दी। उन्होंने कहा, ‘लगातार बारिश के कारण रोशी नदी का जलस्तर बढ़ गया है और बाढ़ का खतरा है, इसलिए काभ्रे की ओर सड़क खंड को तत्काल के लिए बंद किया गया है।’ जनता सड़क की ताजा स्थिति जानने के लिए १०० (नेपाल पुलिस) तथा १०३ (ट्रैफिक पुलिस) पर संपर्क कर सकती है।

आमाके नाम पर नागरिकता मिलने में अब भी कठिनाइयां, पीड़ितों की शिकायतें

समाचार संक्षेप

समीक्षा किया गया।

  • कानूनी तौर पर आमाके नाम से नागरिकता ली जा सकती है, लेकिन लागू करने में कठिनाइयों के कारण कई नागरिक अभी भी बिना नागरिकता के हैं।

१७ चैत्र, काठमांडू। कानूनी रूप से आमाके नाम से नागरिकता लेने का प्रावधान मौजूद होने के बावजूद इसके सही संचालन में समस्याओं के कारण कई नेपाली नागरिक अब भी नागरिकता विहीन रहकर जीवन बिताने को मजबूर हैं।

मंगलवार को सिटिजनशिप अफेक्टेड पीपल्स नेटवर्क (सीएपीएन), नेशनलिटी फॉर ऑल (एनएफए) और ग्लोबल चैम्पियन फॉर इक्वल नेशनलिटी राइट्स (जीसीईएनआर) की संयुक्त आयोजन में “आमाके नाम से नागरिकता प्राप्त करने की कानूनी व्यवस्था, चुनौतियां और आवश्यक संवैधानिक संशोधन” विषय पर चर्चा संपन्न हुई।

चर्चा में शामिल लोगों ने बताया कि कानून में संशोधन के बाद भी व्यवहार में आमाके नाम से नागरिकता लेने में अब भी समस्या और परेशानियां बनी हुई हैं।

कार्यक्रम में एक पीड़ित ने अपनी शिकायत व्यक्त की कि उनकी मां नेपाली हैं और पिता भारतीय, फिर भी वे नेपाल में रहकर ३६ वर्षों तक नागरिकता प्राप्त नहीं कर पाए।

वह कहते हैं, ‘१६ वर्षों से प्रयास कर रहा हूँ, पर अभी भी अनागरिक ही हूँ। नागरिकता न मिलने के कारण पढ़ाई और रोजगार पर असर पड़ा, मानसिक समस्याएं भी झेलनी पड़ीं।’

इसी तरह एक अन्य प्रतिभागी ने भी कहा कि एकल मां के नाम से नागरिकता बनाते समय मां के चरित्र पर सवाल उठाए जाते हैं और अपमानजनक सवालों का सामना करना पड़ता है।

दुनिया के १९५ देशों में से १७२ देशों में बिना किसी शर्त के आमाके नाम से नागरिकता मिल सकती है। अभी भी २४ देशों में आमाके नाम से नागरिकता पाने में समस्या है जबकि एशिया के चार देश आमाके नाम से नागरिकता प्रदान नहीं करते।

दक्षिण एशिया में अकेले नेपाल ही है जहां आमाके नाम पर नागरिकता लेना कठिन है। संविधान में इसे मान्यता देने के बाद भी विभिन्न शर्तों के साथ नागरिकता नियमावली में संशोधन किया गया है। पीड़ित और संबंधित समूहों ने इसका विरोध करते हुए ध्यानाकर्षण कराया है।

कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने कानूनी व्यवस्था को प्रभावी बनाने, प्रक्रिया को सरल और सम्मानजनक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

नेपाली कांग्रेस ने १६५ उम्मीदवारों के साथ चुनावी समीक्षा के लिए केन्द्रीय प्रतिनिधियों की नियुक्ति की

नेपाली कांग्रेस ने फागुन २१ को प्रतिनिधि सभा सदस्य पद के उम्मीदवारों के साथ चुनावी समीक्षा करने के लिए केन्द्रीय प्रतिनिधियों की नियुक्ति की है। महामंत्री प्रदीप पौडेल ने चैत १० और ११ को आयोजित केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक के निर्णय के अनुसार प्रेस नोट जारी कर यह जानकारी दी। सातों प्रदेशों में १६५ निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों के साथ समिक्षात्मक चर्चा और क्षेत्रगत अध्ययन किया जाएगा।

महामंत्री पौडेल द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है, “नेपाली कांग्रेस केन्द्रीय कार्यसमिति की २०८२ चैत्र १० और ११ को सम्पन्न बैठक के निर्णय के अनुसार चुनाव समीक्षा और कांग्रेस की आगामी रणनीति से संबंधित चर्चा हेतु सातों प्रदेशों में नेपाली कांग्रेस की ओर से १६५ निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों के साथ चुनावी समिक्षात्मक चर्चा और क्षेत्रगत अध्ययन किया जाएगा।”

नियुक्त प्रतिनिधियों का विवरण इस प्रकार है: कोशी प्रदेश विराटनगर – २०८२ चैत्र २३ को डा. डिला संग्रौला पन्त, मधेश प्रदेश जनकपुर – २०८२ चैत्र २५ को फरमुल्लाह मंसुर, बागमती प्रदेश हेटौडा – २०८३ वैशाख ७ को बहादुर सिंह लामा, गण्डकी प्रदेश पोखरा – २०८२ चैत्र २७ को देवराज चालिसे, लुम्बिनी प्रदेश दाङ – २०८२ चैत्र २९ को योगेन्द्र चौधरी, कर्णाली प्रदेश सुर्खेत – २०८३ वैशाख ३ को कर्णबहादुर बुढा, और सुदूरपश्चिम प्रदेश कैलाली – २०८३ वैशाख ५ को प्रकाश रसाइली।

अपोलो ८ और आर्टेमिस २: चंद्रमा की कक्षा से खींची गई पृथ्वी की पहली रंगीन तस्वीर

चंद्रमा की कक्षा से खींची गई यह पृथ्वी की पहली रंगीन तस्वीर है। ‘अर्थराइज’ नामक यह तस्वीर सन् 1968 में ‘अपोलो ८’ मिशन में शामिल एक अंतरिक्ष यात्री ने खींची थी। इस मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने पहली बार चंद्रमा की परिक्रमा की थी। पचास वर्ष बाद नासा फिर से ‘आर्टेमिस २’ के माध्यम से अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की परिक्रमा पर भेज रहा है। इस मिशन से पृथ्वी की नई तस्वीरें प्राप्त होने की उम्मीद है।

बालकुमारीको एसडीपीएल ट्रेड प्रालिलाई २ लाख जरिबाना

बालकुमारी स्थित एसडीपीएल ट्रेड प्रा. लि. को २ लाख रुपये जुर्माना

१७ चैत्र, काठमाण्डौ । वाणिज्य, आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभागले ललितपुरको बालकुमारीमा अवस्थित एक व्यावसायिक फर्मलाई २ लाख रुपैयाँको जरिवाना लगाएको छ। मंगलवार गरिएको बजार अनुगमनको क्रममा उपभोक्ता संरक्षण ऐनको उल्लङ्घन भएको पाइएपछि एसडीपीएल ट्रेड प्रा. लिलाई उक्त जरिवाना गरिएको हो। विभागले काठमाडौं उपत्यकाका विभिन्न स्थानहरूमा सञ्चालित अन्य २१ व्यावसायिक फर्महरूको पनि अनुगमन गरेको बताएको छ। ती फर्महरूलाई तत्काल सुधारका लागि सामान्य निर्देशन पनि दिइएको छ।

बाल बालिकाओं के सुरक्षित वर्तमान के बिना समृद्ध नेपाल की संभावना नहीं

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • मानसिं वाइबा मकवानपुर के बकैया-६, ज्यामिरे के बालक हैं, जिन्हें बाल श्रम से मुक्त कराया गया और जो अब स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

मैं मानसिं वाइबा हूँ। मेरा घर मकवानपुर जिले के बकैया-६, ज्यामिरे में है, जिसे अब भी अत्यंत दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। मैं एक बालक था जो बालश्रम में फंसा था और वहां से उद्धार पाया हूँ।

मेरे परिवार के पास दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से होती थी। मेरे माता-पिता वृद्ध हैं, बहनों की शादी हो चुकी है, और मैं एक अकेला बेटा हूँ इसलिए परिवार की जिम्मेदारी मुझे संभालनी पड़ती है। मेरी हालत देखकर गाँव के ठेकेदार ने मुझे बहकाया, ज्यादा कमाई का लालच दिया। पढ़ाई की इच्छा होने पर भी मैं गलैँचा बुनने काठमाडौँ आ गया।

मेरी उम्र तब मात्र ११ वर्ष थी, जाड़े का मौसम था। मेरे पास पतली शर्ट और पैंट ही थीं। उस समय गलैंचों के धागे पर सोकर काम किया, लेकिन न तो वे पैसे देते, न कोई और सुविधा। इतनी श्रमशोषण देख मैं वहां से भागकर होटल में बर्तन धोने लगा। वहां के मजदूर भड़कीली शराब पीकर रात में मुझे पीटते थे।

साहू- साहूनी से ज़्यादा तो वे लोग जो उनके रिश्तेदार थे, वे बस थोड़ी गाली देते पर कुछ अधिक नहीं करते थे। सताए जाने के बाद मैंने हिम्मत करके पुलिस चौकी जाकर अपनी समस्या बताई।

इसके बाद चाइल्ड रेस्क्यू नेपाल, नेपाल पुलिस और ईस्थर बेन्जामिन स्मृति संस्था की मदद से मेरा बचाव हुआ, जो विक्रम संवत २०७२ की घटना है।

ईस्थर बेन्जामिन स्मृति संस्था ने मुझे संरक्षण दिया, पढ़ाई, लेखन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं। मैंने वहां अपने घर की समस्याएं भी बताईं जिससे परिवार को कुछ मदद मिल सकी।

मैंने वहां करीब तीन साल पढ़ाई की। बाद में गांव में रहकर पढ़ाई जारी रखने की इच्छा हुई, और संस्था की मदद से मैंने गांव में ही पढ़ाई जारी रखी। आठवीं कक्षा पूरी करने के बाद कोविड महामारी के बाद मैं फिर काठमाडौँ आया और पढ़ाई जारी रखी। अब उसी संस्था के सहयोग से मैं १२वीं कक्षा पास कर स्नातक की पढ़ाई कर रहा हूं।

आज मैं एक जागरूक नागरिक के रूप में खड़ा हूँ लेकिन मेरे जैसी स्थिति हजारों बच्चे देश में झेल रहे हैं। ऐसी बाल समस्याओं को सरकार क्यों संबोधित नहीं कर पा रही?

नेपाल के संविधान ने बालकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, संरक्षण, शोषण से सुरक्षा व सम्मानजनक जीवन के अधिकार सुनिश्चित किए हैं। बालश्रम कानूनों ने बालश्रम को प्रतिबंधित किया है। इसके बावजूद बच्चे विभिन्न रेस्तरां, मोटरसाइकिल वर्कशॉप, कल-कारखानों में काम करने को मजबूर हैं और शोषित हो रहे हैं।

सन् 2021 की नेपाल बालश्रम रिपोर्ट के अनुसार लगभग 11 लाख से अधिक बच्चे अभी भी बालश्रम में हैं। उनमें से कई मेरी ही तरह बड़ी समस्याएँ झेल रहे हैं।

मैंने नियम-कानून के सहारे अपनी जिंदगी बदली, लेकिन मेरे हजारों भाई-बहन शोषण की चपेट में हैं। इन कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन एवं संबंधितों को राहत देना अति आवश्यक है। आने वाले दिनों में बालश्रम और बालशोषण रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।

मैं बाल संरक्षण क्षेत्र में स्वयंसेवक और प्रशिक्षार्थी के रूप में बचाए गए बच्चों से बातचीत करता हूँ। श्रम और बेचबिखन में फंसे तथा अभिभावक विहीन बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र और नागरिकता न मिलने की समस्या भी जटिल है, जो उनकी उच्च शिक्षा और नागरिक अधिकारों को प्रभावित करती है।

यदि राज्य प्रभावी नीतियां और कार्यक्रम लागू करे तो सुरक्षित भविष्य संभव है, ऐसा मेरा अनुभव है।

संविधान और प्रचलित कानूनों के अनुसार बालश्रम के प्रति शून्य सहिष्णुता और प्रभावी कार्यान्वयन के साथ बालकों का उचित उद्धार, संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित करना आवश्यक है।

बालकों के सुरक्षित वर्तमान के बिना समृद्ध नेपाल का भविष्य संभव नहीं है। इस विषय को राष्ट्रीय प्राथमिकता देते हुए ठोस, समयबद्ध और परिणाममुखी पहल करने का पुनः हार्दिक अनुरोध करता हूँ।

रौतहट अदालत के डिट्ठा लबकुमार सिंह 50 हजार रुपये रिश्वत के साथ गिरफ्तार

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने रौतहट जिला अदालत में कार्यरत डिट्ठा लबकुमार सिंह को 50 हजार रुपये रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया है। आयोग के अनुसार, उन्होंने अदालत के फैसले के अनुसार दाखिला पुर्जी तैयार कर जमीन की फुकुवा कराने के एवज में सेवाग्राही से रिश्वत ली थी। इसी कारण से अख्तियार के हेटौडा स्थित कार्यालय से मंगलवार को पौने 4 बजे उन्हें अदालत परिसर से पकड़ा गया। १७ चैत, काठमांडू। रौतहट जिला अदालत के डिट्ठा लबकुमार सिंह को अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने अदालत के फैसले के अनुरूप दाखिला पुर्जी तैयार कर जमीन फुकुवा कराने के सिलसिले में सेवाग्राही से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आयोग ने बताया कि वे रिश्वत लेते हुए अदालत परिसर से ही पकड़े गए।

रूस की चेतावनी: ‘प्राइस सिलिंग’ लागू करने वाले देशों को तेल की आपूर्ति बंद

रूसी उपविदेशमंत्री आंद्रेई रुदेन्को ने स्पष्ट किया है कि रूस उन देशों को किसी भी स्थिति में तेल की आपूर्ति नहीं करेगा जो रूसी तेल पर ‘प्राइस सिलिंग’ लागू करते हैं। रुदेन्को ने जापान द्वारा लगाई गई मूल्य सीमा को ‘बाजार विरोधी और आपूर्ति श्रृंखला को नष्ट करने वाला उत्तेजक कदम’ बताया। उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में ऊर्जा बाजार अत्यंत अस्थिर है, कमी और मूल्य वृद्धि हो रही है, ऐसे समय में रूस अपने राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा के लिए ऐसे उकसावे भरे कदम उठाने वालों को तेल नहीं बेचेगा।’

उपविदेशमंत्री रुदेन्को के अनुसार जापान और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा लगाया गया यह प्रतिबंध वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त चुनौती है। यदि किसी देश ने आधिकारिक रूप से तेल आपूर्ति के लिए अपील की, तो रूस उन देशों के साथ अपने संबंधों तथा आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय करेगा। वर्तमान में पश्चिमी एशिया में युद्ध और हर्मुज जलसंधि के बंद होने के कारण दुनिया भर में ईंधन के दाम प्रति लीटर 2 यूरो से ऊपर जाने का खतरा बना हुआ है, और रूस की यह चेतावनी विश्व अर्थव्यवस्था में और अधिक हलचल पैदा कर रही है।

नेपाल सरकार द्वारा वैदेशिक रोजगार और श्रम स्वीकृति में किए गए बदलाव और शेष कार्य

वैदेशिक रोजगारीमा जान लागेका दुई महिला राहदानी र कागजपत्र हाथ में लिए त्रिभुवन विमानस्थल के क्षेत्र में

तस्वीर स्रोत, Getty Images

तस्वीर का शीर्षक, सरकार द्वारा उठाए गए हालिया कदम से श्रम स्वीकृति का प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और सुविधाजनक हुई है, अधिकारियों का कहना है।

वैदेशिक रोजगार के लिए श्रम स्वीकृति में टोकन प्रणाली हटाए जाने के बाद प्रति दिन अधिक आवेदकों को स्वीकृति मिलने लगी है, अधिकारियों ने बताया।

वैदेशिक रोजगार विभाग के अनुसार, पहले काठमांडू से रोजाना लगभग 900 व्यक्तियों को श्रम स्वीकृति मिलती थी, लेकिन अब औसत रूप से लगभग 2,000 लोगों को प्रतिदिन स्वीकृति मिल रही है।

“कई कार्यालयों में भी आवेदन के दिन ही सेवाग्राही श्रम स्वीकृति प्राप्त कर रहे हैं,” व्यक्तिगत श्रम स्वीकृति शाखा के हरिप्रसाद चपाई ने बताया।

“टोकन प्रणाली हटाए जाने के बाद सेवाग्राहीयों को पहले जैसी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती।

विभाग के उपमहानिर्देशक और प्रवक्ता चंद्रबहादुर शिवाकोटी ने सोमवार को देशभर और विदेश में स्थित कूटनीतिक कार्यालयों में कुल 3,197 श्रम स्वीकृति जारी होने की जानकारी दी।

मन्त्री पोखरेल का ग्रासरूट स्तर से खिलाड़ी उत्पादन पर जोर

नवनियुक्त युवा तथा खेलकुद मन्त्री सस्मित पोखरेल ने खेलकुद को ग्रासरूट स्तर से जोड़कर खिलाड़ी उत्पादन पर जोर देने की बात कही है। मन्त्री पोखरेल ने कहा कि खेल क्षेत्र में चुनौतियाँ और अवसर दोनों मौजूद हैं, इसलिए काम करके दिखाना आवश्यक है और दीर्घकालीन विकास में दक्षता का विशेष महत्व है। राखेप के बोर्ड अध्यक्ष के रूप में वे सातदोबाटो स्थित अन्तर्राष्ट्रीय खेलकुद परिसर हातामा निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण करने पहुंचे थे। १७ चैत, काठमाडौं।

मन्त्री पोखरेल ने राष्ट्रीय खेलकुद परिषद् (राखेप) द्वारा मंगलवार को त्रिपुरेश्वर स्थित कार्यालय राखेप हातामै आयोजित कार्यक्रम में कहा कि खेलकर प्रदर्शन करना और ग्रासरूट स्तर से ही खिलाड़ी उत्पादन करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि खेल क्षेत्र में चुनौतियां और अवसर दोनों हैं, इसलिए केवल शब्दों से नहीं बल्कि काम करके दिखाना होगा, साथ ही संबंधित सभी की दक्षता का सम्मान करते हुए खेलकुद के दीर्घकालीन विकास में इसका उपयोग करना आवश्यक है।

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सांसद डॉ. अच्युत लामिछाने ने पूरे राष्ट्र के खेलकुद को आगे बढ़ाने के लिए सबको मिलकर कार्य करने पर जोर देते हुए नेपाल खेलकुद विज्ञान प्रतिष्ठान (सान) को और प्रभावकारी बनाने की आवश्यकता बताई। राखेप के सदस्य-सचिव रामचंद्र मेहताले राखेप बोर्ड और कार्यसमिति की संरचना, क्षेत्र, बजट, पूर्वाधार स्थिति, राष्ट्रीय खेल संघ, कर्मचारी पद, खिलाड़ियों के अटके पुरस्कार, मिशन–२०२६ के तहत वर्तमान में रुके विशेष प्रशिक्षण, आंतरिक संसाधन और ऐन संशोधन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

इससे पहले मन्त्री पोखरेल का सदस्य-सचिव मेहतासहित राखेप कार्यकारी समिति, बोर्ड सदस्य, विभागीय प्रमुख, शाखा प्रमुख और कर्मचारीयों ने स्वागत किया। स्वागत समारोह के बाद मन्त्री पोखरेल ने सातदोबाटो स्थित अन्तर्राष्ट्रीय खेलकुद परिसर हातामा निर्माणाधीन जेनजी पार्क, खेलकुद विज्ञान अनुसन्धान केन्द्र, उच्च प्रदर्शन केन्द्र और पौडी पोखरी का निरीक्षण किया।

प्रधानमन्त्रीको प्रेस सहजकर्तामा बजगाईं नियुक्त

प्रधानमंत्री के प्रेस सहजकर्त्ता के रूप में सुरेंद्र बजगाईं नियुक्त

समाचार सारांश

समीक्षित।

  • प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के प्रेस सहजकर्त्ता के रूप में सुरेंद्र बजगाईं नियुक्त किए गए हैं।
  • बजगाईं को स्वकीय शाखा अधिकृत के समान सेवा सुविधाएं प्राप्त कर नियुक्ति मिली है।
  • वे मेयर शाह के सचिवालय में कार्यरत रहे और पत्रकारिता में सक्रिय हैं।

१७ चैत्र, काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के प्रेस सहजकर्त्ता के रूप में सुरेंद्र बजगाईं को नियुक्त किया गया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बजगाईं को स्वकीय शाखा अधिकृत के रूप में सेवा सुविधाएं प्रदान कर प्रधानमंत्री शाह के प्रेस सहजकर्त्ता के पद पर नियुक्त किया गया है।

बजगाईं इससे पहले बालेन के काठमांडू महानगरपालिका मेयर रहते प्रेस संयोजक के रूप में भी कार्यरत रह चुके हैं। ललितपुर निवासी बजगाईं पत्रकारिता में सक्रिय हैं।

वे मेयर शाह के सचिवालय में रहकर काम करते रहे और हालिया चुनावों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

पूर्णबहादुर खड्काले समानुपातिक उम्मेदवार हटाए, अदालत जाने तैयारी में हैं

नेता पूर्णबहादुर खड्काले नेपाली कांग्रेस के समानुपातिक सांसद चयन में नियमों के उल्लंघन का दावा किया है। खड्का ने जानकारी दी है कि दलित कोटे से समानुपातिक सूची में शामिल मानबहादुर नेपाली भी अदालत पहुंच चुके हैं। विशेष महाधिवेशन के बाद कांग्रेस के अंदर विवाद बढ़ा है और पार्टी प्रवक्ता देवराज चालिसे ने चेतावनी दी है। १७ चैत्र, काठमांडू।

नेपाली कांग्रेस के नेता पूर्णबहादुर खड्काले पार्टी के संस्थापक समूह द्वारा नियमों का उल्लंघन करने की जानकारी दी है। उन्होंने काठमांडू के धुम्बराही स्थित होटल स्मार्ट में अपने समूह के नेताओं को संबोधित करते हुए समानुपातिक सांसद चयन में नियमों का उल्लंघन होने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘विशेष महाधिवेशन ने नियमों का उल्लंघन किया। समानुपातिक में पिछड़े क्षेत्र से प्रथम नंबर की विद्या तिमिल्सिना का नाम हटाकर क्लस्टर में नामहीन पुरुष खस आर्य कोटा के ७ नंबर पर मौजूद कालीबहादुर सहकारी को नामित किया गया,’ उन्होंने बैठक में कहा, ‘हमारे उम्मीदवार अदालत गए हैं।’

खड्का ने दलित कोटे से समानुपातिक सूची में शामिल उम्मीदवार मानबहादुर नेपाली के भी अदालत पहुंचने की जानकारी दी। ‘दलित कोटे से मानबहादुर नेपाली भी अदालत गए हैं,’ खड्का ने बैठक में कहा। पार्टी के तत्कालीन महामंत्री गगनकुमार थापा और विश्वप्रकाश शर्मा सहित के समूह ने गत माघ १ को विशेष महाधिवेशन सम्पन्न कर नया नेतृत्व चुना, जिसके बाद कांग्रेस के भीतर विवाद बढ़ गया है। वर्तमान में विशेष समूह के खिलाफ कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा और नेता शेखर कोइराला का समूह एकजुट है। वे लगातार संयुक्त विचार-विमर्श कर रहे हैं। वहीं पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता देवराज चालिसे ने इस अलग समूह को पार्टी अनुशासन का पालन करने की चेतावनी दी है।