Skip to main content

लेखक: space4knews

खेल संघ विवाद समाधान के लिए सात सदस्यीय कार्यदल का गठन

राष्ट्रीय खेलकुद परिषद ने राष्ट्रीय खेल संघों में उत्पन्न विवादों को सुलझाने के लिए भान बहादुर चंद के संयोजन में सात सदस्यीय कार्यदल का गठन किया है। कार्यदल में राखेप के सदस्य कमल भट्टराई, सुवर्ण श्रेष्ठ, रंजना प्रधान, युवा एवं खेलकुद मंत्रालय के प्रतिनिधि, सरोज कुमार पोखरेल और सानुराज केसी शामिल हैं। कार्यदल को राष्ट्रीय खेलकुद विकास अधिनियम, २०७७ की धारा ४२ के अनुसार ४५ दिनों के भीतर समस्या समाधान के लिए सुझाव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

१० वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रीय खेलकुद परिषद (राखेप) ने देश के विभिन्न राष्ट्रीय खेल संघों में देखे गए विवादों के समाधान के उद्देश्य से भान बहादुर चंद की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कार्यदल का गठन किया है। राखेप की कार्यकारी समिति ने मंगलवार को हुई बैठक में राखेप सदस्य सचिव राम चरित्र मेहताको के नेतृत्व में इस कार्यदल गठन की जानकारी दी है।

हाल ही में नेपाली खेल क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संघों से लेकर संघों के आंतरिक विवादों समेत विभिन्न समस्याएं सामने आई हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए गठित इस कार्यदल में राखेप कार्यकारी समिति के सदस्य कमल भट्टराई, सुवर्ण श्रेष्ठ और रंजना प्रधान सदस्य हैं। इसके साथ ही युवा एवं खेलकुद मंत्रालय का एक प्रतिनिधि, सरोज कुमार पोखरेल और सानुराज केसी भी कार्यदल के सदस्य हैं।

राष्ट्रीय खेलकुद विकास अधिनियम, २०७७ की धारा ४२ के तहत गठित इस कार्यदल को खेल संघों की समस्याओं का समाधान करने हेतु ४५ दिनों के भीतर सुझाव देने का समय दिया गया है। विभिन्न राष्ट्रीय खेल संघों और महासंघों में आवधिक चुनाव, संगठन संरचना निर्माण, लेखा प्रबंधन, आर्थिक पारदर्शिता और संस्थागत संचालन सहित विषयों में उत्पन्न समस्याओं ने खेल क्षेत्र के विकास, सुशासन और अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे विवादों की पहचान कर समाधान के उपाय सुझाने तथा खेल क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास और सुधार के लिए आवश्यक सुझाव प्रदान करने हेतु यह कार्यदल गठित किया गया है।

काठमाडौंको वायु प्रदूषणले ‘निकै अस्वस्थ’को तह पार गर्‍यो

काठमाडौंको वायु प्रदूषण ‘धेरै अस्वस्थ’ स्तरमा पुगेको

काठमाडौंको वायु प्रदूषण आज अत्यन्त अस्वस्थ स्तरमा पुगेको छ र वायु गुणस्तर सूचकांक (एक्युआई) २४७ कायम भएको छ। हाल नेपाल विश्वका प्रदूषित देशहरूमा दोस्रो स्थानमा छ, जहाँ पहिलो स्थान पाकिस्तानको छ। नेपाल सरकारको सूचकांकअनुसार एक्युआई २०१–३०० लाई धेरै अस्वस्थ र ३०१ माथि खतरनाक मानिन्छ।

१० वैशाख, काठमाडौं। काठमाडौंको वायु प्रदूषण अत्यन्त खराब अवस्थामा पुगेको छ। आज उपत्यकामा वायु प्रदूषणले धेरै अस्वस्थ स्तर पार गरेको छ। स्विट्जरल्यान्डको IQAir बाट रियल टाइममा मापन गर्दा आज बिहान वायु गुणस्तर सूचकांक (एक्युआई) २४७ रहेको थियो, जुन समाचार तयार गर्ने समयमा २१६ मा झरेको छ। एक्युआई २०१ देखि ३०० बीचको स्तरलाई धेरै अस्वस्थ मानिन्छ।

नेपाल अहिले विश्वका प्रदूषित देशहरूको सूचीमा दोस्रो स्थानमा छ, जहाँ पाकिस्तान पहिलो स्थानमा छ। राजधानी काठमाडौं उपत्यकामा बाक्लो तुवाँलो देखिएको छ। नेपाल सरकारले स्वीकृत गरेको वायु गुणस्तर सूचकांक अनुसार ०–५० राम्रो, ५१–१०० मध्यम, १०१–१५० संवेदनशील समूहका लागि अस्वस्थ, १५१–२०० अस्वस्थ, २०१–३०० धेरै अस्वस्थ र ३०१ माथि खतरनाक स्तर मानिन्छ।

आज के तरकारी और फलफलों के मूल्य निर्धारण

१० वैशाख, काठमांडू। कालिमाटी फल और तरकारी बाजार विकास समिति ने आज के लिए कृषि उत्पादों के थोक मूल्य निर्धारित किए हैं। समिति के अनुसार बड़ी गोलभेंडा (भारतीय) का मूल्य प्रति किलो ८०, छोटी गोलभेंडा (स्थानीय) ५०, छोटी गोलभेंडा (भारतीय) ५५, छोटी गोलभेंडा (तराई) ६५, लाल आलू प्रति किलो २६ और लाल आलू (भारतीय) २५, सूखे प्याज (भारतीय) प्रति किलो ३७ निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार, गाजर (स्थानीय) प्रति किलो ६०, गाजर (तराई) ३०, बंदा (स्थानीय) ४५, बंदा (तराई) ३०, स्थानीय काउली ३०, स्थानीय (ज्यापु) काउली ४०, सफेद मूली ३०, सफेद मूली (हाइब्रिड) ३०, भन्टा लाम्चो ५० और भन्टा डल्लो ६० रूपये प्रतिकिलो कायम किया गया है।

इसी तरह, बोड़ी (तना) ५०, मटरकोसा ६०, घिउ सिमी (स्थानीय) ३०, घिउ सिमी (हाइब्रिड) ३०, राजमा ११०, भटमास कोसा १८०, तीता करेला ९०, लौकी ३०, परवर ८०, परवर (तराई) ८०, चिचिन्डो ५० रूपये प्रति किलो है। घिरौंला ३०, पकी हुई फर्सी ६०, हरी फर्सी (लाम्चो) ३०, हरी फर्सी (डल्लो) २५, भिंडी ६०, करेले ६०, सखरखण्ड ७५, पिंदालु ५० तथा स्कुस ६० रूपये प्रति किलो निर्धारित किए गए हैं।

रायसाग ६०, पालक १००, चमसूर ८०, तोरीसाग ४०, मेथी ८०, हरा प्याज ८०, बकुला ६०, च्याउँ (कन्य) २२८०, च्याउँ (डल्ले) ३५०, राजा च्याउँ ३०० और सिताके च्याउँ १,००० रूपये प्रति किलो तय किया गया है। कुरिलो ४५०, निगुरो ८०, ब्रोकली ८०, चुकंदर ५०, कोइराला ३००, लाल बंदा ५०, जीरी की साग ८०, ग्याठकोभी ५०, पार्सले १९०, सेलरी १८०, सौंफ की साग ८०, पुदीना १००, गान्तेमुला ५०, इमली १८०, तामा १५०, टोफू १५० और गुन्द्रुक २५० रूपये प्रति किलो निर्धारित हैं। सेब (झोले) २५०, सेब (फुजी) ३००, नींबू ३९०, केला दर्जन २५०, अनार ४००, अंगूर (हरा) २४०, अंगूर (काला) ३८०, तरबूज हरा ४५, भुइकटहर प्रति गोटा २५० रूपये हैं। काँकड़ी (स्थानीय) ४०, काँकड़ी (हाइब्रिड) १५, काँकड़ी (स्थानीय क्रॉस) ४०, खटखटहर ८०, नाशपाती (चीन) २५०, मेवा (नेपाली) ८०, मेवा (भारतीय) ९० तथा किवी ४५० और एवोकाडो ८०० रूपये प्रति किलो तय किए गए हैं। इसी प्रकार, अदरक १००, सूखा खुर्सानी ४५०, हरी खुर्सानी १००, हरी खुर्सानी (बुलेट) ८०, माछे खुर्सानी ८०, खुर्सानी अकबरे ५००, भेडे खुर्सानी ८०, हरी लहसुन ८० रूपये है। हरी धनिया ८०, सूखा लहसुन (चीन) २००, सूखा लहसुन (नेपाली) १३०, सूखा माछा १,०००, ताजा माछा (राहु) ३४०, ताजा माछा (बचुवा) ३१० और ताजा माछा (छड़ी) ३०० रूपये प्रति किलो निर्धारित किए गए हैं।

इरान में अमेरिकी संघर्ष के बीच जनजीवन कैसा चल रहा है?

इरान में दैनिक जीवन आंशिक रूप से सामान्य होता जा रहा है, लेकिन इंटरनेट प्रतिबंध, आर्थिक दबाव और युद्ध से उत्पन्न चिंता अभी भी बनी हुई है। उपयोगकर्ता ‘‘इंटरनेट प्रो’’ नामक वर्ग आधारित इंटरनेट पहुंच की असमानता और इसके सामाजिक विभाजन बढ़ाने वाले प्रभाव पर बहस कर रहे हैं। युद्ध से उत्पन्न मानसिक दबाव, आर्थिक तनाव और सामाजिक असमानताएं लोगों में चिंता और असुरक्षा बढ़ा रही हैं। १० वैशाख, काठमांडू। इरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में दैनिक जीवन आंशिक रूप से सामान्य होता दिख रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर इरानी उपयोगकर्ताओं के विभिन्न अनुभव साझा हो रहे हैं। यह एक ऐसी कहानी है जहां एक ओर जीवन को सामान्य रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर मानसिक थकान, आर्थिक दबाव और इंटरनेट पहुंच की असमानता को लेकर चर्चा भी जारी है। ये अनुभव कुछ व्यक्तियों की निजी झलक मात्र प्रस्तुत करते हैं और पूरे समाज का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। फिर भी यह स्पष्ट करता है कि पिछले कुछ हफ्तों में लगाए गए इंटरनेट प्रतिबंध, आर्थिक दबाव और युद्ध के कारण उत्पन्न चिंता अब तक बरकरार है। इन संदेशों के बीच स्थिति से निपटने के तरीकों में मतभेद भी दिखते हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने अभिव्यक्ति दी है कि कुछ लोग इस कठिन समय में रोजमर्रा की सामान्य बातों—जैसे कपड़े खरीदना या कैफे जाना—पर लिखना अनुचित मानते हैं। वे इसे वर्तमान परिस्थिति के प्रति बेपरवाही का प्रयास मानते हैं। युद्ध के बीच जीवन को आगे बढ़ाने का संघर्ष जारी है, लेकिन कुछ लोग अपनी ज़िंदगी आगे बढ़ाने के अधिकार का समर्थन करते हुए आवाज उठा रहे हैं। एक उपयोगकर्ता ने लिखा है— ‘‘मैंने कल रात से अब तक कई बार रोया है, फिर भी मैं अपने सुंदर कपड़े पहनकर दोस्तों के साथ घूमने जा सकता हूं और किसी को इस पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।’’ एक अन्य ने फुटबॉल की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, ‘‘हमारे दिमाग को भी कभी-कभी अन्य चीजों में व्यस्त होना जरूरी है… इसलिए, ‘सफ़ेद सिमकार्ड’ धारकों को दोष न दें।’’ (इरान में सफेद सिमकार्ड धारक बेहतर इंटरनेट पहुँच रखते हैं और आम नागरिकों को उपलब्ध नहीं कई साइटें चला सकते हैं)। एक अन्य उपयोगकर्ता ने लिखा, ‘‘यह सामान्य बात है… हमारे दिमाग को कुछ समय के लिए अन्य चीजों में व्यस्त करना जरूरी है ताकि हम टूट न जाएं। शायद हमारा जीवन इसी तरह लंबे समय तक यथावत रहेगा।’’

मार्तडी-कोल्टी सडक कालोपत्रको काम अलपत्र, ठेकेदारले काम नगर्दा बर्सेनि करोडौं फ्रिज

मार्तडी-कोल्टी सडक कालोपत्र काम अलपत्र, ठेकेदारको सुस्तीले बर्सेनि करोडौं रुपैयाँ फिर्ता

मार्तडी-कोल्टी सडकखण्डको कालोपत्र काम ठेकेदार पीएस बानियाँ निर्माण सेवाले समयमा पूरा नगरेको कारण पूर्वाधार विकास कार्यालय अछामले कामलाई अलपत्र अवस्थामा राखेको जनाएको छ। गत आर्थिक वर्षको १५ करोड रुपैयाँको बजेटमा काम सम्पन्न नभएकाले १३ करोड ५० लाख रुपैयाँ फिर्ता पठाउनुपर्ने स्थिति आएको छ भने चालु आर्थिक वर्षमा २० करोड रुपैयाँ बजेट रहे पनि काम सुरु हुन नसकेको कार्यालय प्रमुख जङ्गबहादुर थापाले जानकारी दिनुभयो।

मार्तडी-कोल्टी सडक ४१ किलोमिटर लामो छ र यसको निर्माणका लागि १ अर्ब ५७ करोड बराबरको तीन प्याकेजमा टेन्डर भइसकेको छ, तर २६ वर्ष बितिसक्दा पनि सडक कार्य सम्पन्न हुन सकेको छैन। १० वैशाख, बाजुरा – बाजुराको मार्तडी-कोल्टी सडक खण्डअन्तर्गत ढम्कनेदेखि कोल्टीसम्म कालोपत्रको काम हाल अलपत्र अवस्थामा रहेको छ। निर्माण कम्पनीले समयमै काम नगरेको भन्दै पूर्वाधार विकास कार्यालय अछामका प्रमुख जङ्गबहादुर थापाले बताउनुभएको छ।

काम संचालन गर्ने पीएस बानियाँ निर्माण सेवाले समयमा काम नगरेको र वार्षिक रूपमा बजेट फिर्ता पठाइने प्रक्रिया भइरहेको कार्यालयले जनाएको छ। गत आर्थिक वर्षको १५ करोड रुपैयाँ बजेटको काम समयमा सम्पन्न नभएपछि १३ करोड ५० लाख रुपैयाँ फिर्ता हुन पुगेको थियो। यस आर्थिक वर्षमा २० करोड रुपैयाँ बजेट भए पनि ठेकेदारले काम सुरु नगरेको कार्यालय प्रमुख थापाले स्पष्ट पार्नुभयो।

पीएस बानियाँ निर्माण सेवा नेपाली कांग्रेसका नेता इन्द्रबहादुर बानियाँको नाममा रहेको छ। उहाँ बागमती प्रदेश सभा सदस्य तथा नेपाली कांग्रेस बागमती प्रदेशका सभापति हुनुहुन्छ। पीएस बानियाँ निर्माण सेवाका प्रतिनिधि तथा इन्जिनियर सरोज राईले विभिन्न कारणहरूले काममा ढिलाइ भएको स्वीकार गर्दै मेसिनहरू स्थलबाट हटाइएको र केही दिन भित्र काम सुरु हुने जानकारी दिनुभयो।

स्पष्ट नीतियों और क्रियान्वयन की आवश्यकता

समाचार सारांश

Generated by OK AI. Editorially reviewed.

  • नेपाल में छात्र केवल सैद्धांतिक ज्ञान की वजह से व्यावसायिक क्षेत्र में आसानी से प्रवेश नहीं पा रहे हैं, जिससे विदेश जाने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
  • इंटर्नशिप कार्यक्रम छात्र को वास्तविक कार्य में अनुभव और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
  • सरकार को स्पष्ट नीति बनाकर और निजी क्षेत्र के साथ सहयोग कर इस कार्यक्रम को स्थायी बनाने की आवश्यकता है।

नेपाल में प्रतिवर्ष हजारों छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं। लेकिन शैक्षणिक संस्थानों से प्राप्त केवल सैद्धांतिक ज्ञान के कारण वे व्यावसायिक क्षेत्र में आसानी से अवसर नहीं पा पाते, जिससे उनमें गहरी निराशा की वृद्धि होती है। फलस्वरूप, नई पीढ़ी के बड़े हिस्से में विदेश जाने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है।

अधिकांश युवाओं के विदेश जाने के मुख्य कारणों में देश में अवसरों की कमी, रोजगार खोजते समय अनुभव की मांग और बिना अनुभव व्यावसायिक कार्य करने का आत्मविश्वास का अभाव शामिल है। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए इंटर्नशिप को एक व्यावहारिक और परिणाममुखी उपाय के रूप में अपनाया जा सकता है। यह छात्रों को अपनी सीख को वास्तविक कार्य में इस्तेमाल करने का अवसर देता है, जिससे उनकी कौशल विकास के साथ-साथ आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। इसलिए, इंटर्नशिप सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावसायिक अभ्यास के बीच एक प्रभावी पुल का काम करता है।

इंटर्नशिप के माध्यम से छात्र अपने कार्यक्षेत्र के चुनौतियों और अवसरों को नजदीक से समझने का मौका पाते हैं। इन्हीं कार्यक्रमों से वे कार्यस्थल के माहौल, टीम में काम करने के तरीकों, समय प्रबंधन, और पेशेवर जिम्मेदारियों जैसे पहलुओं पर सीधे अनुभव हासिल करते हैं, जो उन्हें भविष्य के रोजगार के लिए और अधिक सक्षम एवं प्रतिस्पर्धी बनाता है।

इसके सफल उदाहरण के तौर पर, इनोवेटिव इंजीनियरिंग सर्विसेज प्रा. लि. ने हाल ही में चार नवनिर्वाचित सिविल इंजीनियरों को इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत नए अवसर प्रदान किए हैं। कंपनी ने अपने अनुभवी इंजीनियरों की मार्गदर्शन में उन इंटर्नों को वास्तविक परियोजनाओं में शामिल किया। प्रारंभिक अवधि में ही इन इंटर्नों ने उल्लेखनीय प्रगति की और अनुभवी इंजीनियरों के स्तर का कार्य करने में सक्षम हुए। इससे यह साबित होता है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर नए इंजीनियर कम समय में उत्कृष्ट परिणाम दिखा सकते हैं।

सरकार को करने की आवश्यकता

हालांकि ऐसी पहल कुछ निजी कंपनियां स्वेच्छा से कर रही हैं, लेकिन इसका व्यापक प्रभाव सीमित रहता है। इसलिए इंटर्नशिप को संस्थागत और स्थायी बनाने के लिए सरकार की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। सरकार को इंटर्नशिप की महत्ता समझते हुए स्पष्ट नीति और क्रियान्वयन तंत्र विकसित करना चाहिए।

अगर कोई मंत्रालय अपने अधीन विभागों के माध्यम से सालाना लगभग 100 ऐसे कार्यक्रम चलाए और प्रति कार्यक्रम औसतन 5 इंटर्न शामिल करे, तो लगभग 500 युवाओं को सीधे व्यावसायिक कार्य का अनुभव मिलेगा।

पहले भी कुछ मंत्रालयों ने इंटर्नशिप कार्यक्रम किए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए क्योंकि इंटर्नों को वास्तविक कार्य में शामिल नहीं किया गया और प्रबंधन में कमी रही। इसे सुधारने के लिए सरकार को निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी करके व्यावसायिक कंपनियों के माध्यम से ये कार्यक्रम संचालित करने चाहिए।

इसके लिए संबंधित मंत्रालय अपने विभागों के माध्यम से कुछ वास्तविक परामर्श सेवा और अन्य कार्यक्रम इंटर्नों को करने के लिए टेंडर जारी कर सकते हैं, जिससे केवल इच्छुक कंपनियां इसमें भाग लें। अनुभवी पेशेवरों की निगरानी में इंटर्नों को शामिल करने से उन्हें वास्तविक कार्यानुभव मिलेगा।

यदि कोई मंत्रालय वार्षिक रूप से लगभग 100 ऐसे कार्यक्रम संचालित करता है और हर कार्यक्रम में औसतन 5 इंटर्न शामिल करता है, तो लगभग 500 युवा प्रत्यक्ष व्यावसायिक अनुभव प्राप्त करेंगे, और इसे अन्य मंत्रालयों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे हर वर्ष हजारों युवाओं को लाभ मिलेगा।

दीर्घकालिक रूप से, इस तरह के कार्यक्रम दक्ष, आत्मविश्वासी और अनुभवी जनशक्ति के उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। साथ ही, यह शिक्षित युवाओं के विदेश पलायन को कम करने और देश के भीतर अवसर पैदा करने में सहायक होगा।

अंततः, इंटर्नशिप को केवल शैक्षिक पूरक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखना होगा। राज्य, निजी क्षेत्र और शैक्षिक संस्थानों के सहयोग से ही ऐसी पहल प्रभावी और स्थायी बन सकती है।

सही नीति, स्पष्ट संरचना और प्रतिबद्ध क्रियान्वयन के साथ इंटर्नशिप नेपाल की नई पीढ़ी को सक्षम, आत्मनिर्भर और भविष्य के प्रति आशावादी बनाने में मदद करेगी और शिक्षित युवाओं के विदेश पलायन की समस्या को कम कर सकेगी।

(लेखक अनुप खनाल, इनोवेटिव इंजीनियरिंग सर्विसेज प्रा. लि. के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वह २०८१ साल के ‘चालिस मुनिका चालिस युवा’ पुरस्कार के विजेता भी हैं।)

अमेरिकी नौसेना सचिव को पद से तत्काल हटाया गया

राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ जोन फेलन।

तस्बिर स्रोत, Reuters

पढ़ने का समय: ३ मिनट

अमेरिकी नौसेना सचिव जोन फेलन को ट्रम्प प्रशासन से अलग कर दिया गया है, यह पेंटागन ने बताया है।

उनके पद से हटाए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया है, लेकिन पेंटागन के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी दी है कि यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

नौसेना के अंडर सेक्रेटरी हांग काओ को कार्यवाहक नौसेना सचिव नियुक्त किया गया है, यह सूचना प्रवक्ता सीन पार्नेल ने दी है।

नौसेना में नियुक्ति से पहले फेलन ने सेना में कभी सेवा नहीं की थी और वे राष्ट्रपति ट्रम्प के चुनाव अभियान के प्रमुख चंदादाताओं में से एक थे।

हाल के महीनों में ट्रम्प प्रशासन से सेना के कई उच्च अधिकारियों ने इस्तीफा दिया है।

बढ्दै गर्मीको पारो, तराईमा तातो लहरको चेतावनी

तराई क्षेत्रों में गर्मी की लहर की चेतावनी, अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान

जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने आज दोपहर तराई के पांच शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। विशेष रूप से भैरहवा और नेपालगंज में अत्यधिक गर्मी की संभावना विभाग ने जताई है।

अन्धकार को चीर कर उजाले का सृजन कर रहे विकटलाल चौधरी

१० वैशाख, घोडाघोडी (कैलाली)। जीवन में हमेशा उजाला देखने के लिए आँखों की जरूरत नहीं होती, कभी-कभी आत्मविश्वास, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति ही रास्ता दिखाते हैं। बर्दगोरिया गाउँपालिका–३, रानीकुण्डा के ४२ वर्षीय विकटलाल चौधरी इसका जीवंत उदाहरण हैं। जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने अंधकारमय भविष्य को पीछे छोड़कर उजाले की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने न केवल अपने लिए बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की यात्रा में खुद को समर्पित किया है। २०६५ से जगदम्बिके भगवती माध्यमिक विद्यालय में शिक्षण पेशे से जुड़े चौधरी पिछले १५ वर्षों से अधिक समय कक्षा में बिता चुके हैं। उनके लिए विद्यालय केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का लक्ष्य है। वे कक्षा में खड़े होकर आखों से न देख पाने के बावजूद विद्यार्थियों की क्षमता, संभावनाओं और भविष्य को आत्मदृष्टि से देखते हैं।

उनके पढ़ाए छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित हैं। ग्रामीण क्षेत्र से आए उन छात्रों की सफलता देखकर उन्हें उनका संघर्ष सार्थक लगता है। वे कहते हैं, ‘मेरे छोटे से ज्ञान से किसी के जीवन में बदलाव आया है तो इससे बड़ा सुख और क्या हो सकता है।’ पर उनकी जीवन यात्रा आसान नहीं रही। बचपन में उन्होंने पिता-माता दोनों खो दिए थे। पारिवारिक स्थिति कमजोर होती गई। दृष्टिहीन होने के कारण दैनिक जीवन और भी चुनौतीपूर्ण हो गया। उनके बड़े भाई भी दृष्टिहीन हैं और वे बहनों, भाभी और भांजी के साथ रहते हैं।

बाल्यकाल में सहनी पड़ी अपमान और पीड़ा आज भी यादों में ताज़ा है। गांव के कई लोग उन्हें ‘अंधा’ कहकर अपशब्द कहते और साथ चलने से डरते थे। चल फिर करना, स्कूल जाना तथा रोजमर्रा की जिंदगी पूरी करना सभी में चुनौतियाँ थीं। इन कठिनाइयों ने उन्हें कमजोर करने की बजाय और मजबूत बनाया। शुरू में वे सोचते थे कि पढ़ नहीं पाएंगे, लेकिन एक शिक्षक के सहयोग और प्रेरणा से उनकी सोच बदल गई। शिक्षक उनके घर आकर पढ़ाई में मदद करते और इससे आत्मविश्वास बढ़ने लगा। उन्होंने समझ लिया कि शारीरिक अक्षमता के बावजूद सीखने की इच्छा और मेहनत से संभावनाएं अनंत हैं।

एसएलसी उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने शिक्षण कार्य में कदम रखा। यह उनके लिए केवल नौकरी की शुरुआत नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने वाला मोड़ था। दृष्टिहीन होते हुए भी कक्षा में खड़ा होकर पढ़ाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने खुद को कमजोर कभी नहीं समझा। कमजोरी को ताकत बनाकर आगे बढ़े। पढ़ाई के साथ उन्होंने उच्च माध्यमिक स्तर भी पूरा किया। वे कक्षा में केवल पुस्तक की बातें नहीं करते बल्कि जीवन के अनुभव भी बाँटते हैं।

उनका पारिवारिक जीवन भी संघर्षपूर्ण है। उनकी पत्नी भी दृष्टिहीन हैं। वे दोनों १३ वर्षीय बेटी और दो वर्ष के छोटे बेटे की देखभाल साथ मिलकर करते हैं। उनकी बेटी भी कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रही है। घर के काम से लेकर माता-पिता की देखभाल तक सभी में सक्रिय है। चौधरी के जीवन में संगीत और साहित्य का भी विशेष स्थान है। कभी-कभी वे गीत गाते हैं, तो कभी कविताएं लिखते हैं। बचपन में लिखी उनकी कविता आज भी उनकी सोच को दर्शाती है: ‘आँखें बंद हों तो भी दिमाग बंद नहीं होता।’ इसी विश्वास ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की ऊर्जा दी है।

समाज में दिव्यांगता के प्रति नजरिया धीरे-धीरे सकारात्मक हो रहा है। ‘पहले जो लोग तिरस्कार करते थे वे आज सम्मान के साथ बुलाते हैं और सलाह लेते हैं,’ वे कहते हैं। गांव में जब भी कोई कार्यक्रम होता है, उन्हें विशेष रूप से बोलाया जाता है। वे अब सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अनुभव और प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। उनका मानना है कि दिव्यांग व्यक्तियों को दया नहीं बल्कि अवसर मिलना चाहिए। ‘हमारे कमजोर समझ कर पीछे नहीं रखना चाहिए, अवसर दिया जाए तो हम भी काम कर सकते हैं,’ उन्होंने कहा।

संसद के नए नियम से रवि लामिछाने को निलंबन से बचाने की संभावना

प्रतिनिधि सभा नियमावली के मसौदे में शामिल एक नियम पर आरोप लग रहे हैं कि यह भ्रष्टाचार और संपत्ति शुद्धीकरण के मुद्दों में फंसे सांसदों को निलंबन से बचाने की व्यवस्था करता है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद गणेश पराजुली की अध्यक्षता वाली समिति ने यह मसौदा तैयार कर सभामुख को सौंपा है, जिसमें सांसदों के मामले में नियमावली को प्रचलित कानूनों से ऊपर रखा गया है, ऐसा जानकारों का कहना है।

प्रस्तावित नियमावली के नियम २५९ में कहा गया है, “प्रचलित कानून में जो भी लिखा हो, फिर भी सभा समिति और सदस्यों के मामले में यह नियमावली संघीय कानून के रूप में विशेष कानून की तरह लागू होगी।” इसमें आगे व्याख्या करते हुए कहा गया है कि “नियमावली प्रतिनिधि सभा सदस्य के विशेषाधिकार के रूप में बनी रहेगी।” इस व्यवस्था को पहले के संसद में निलंबित रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के मामले से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं।

प्रतिनिधि सभा नियमावली मसौदा समिति के अध्यक्ष गणेश पराजुली ने कहा है कि यह व्यवस्था किसी एक व्यक्ति को लक्षित नहीं करती। उन्होंने बताया, “राज्य के तीनों निकायों के अपने क्षेत्राधिकार होते हैं। संविधान की धारा १०४ नियमावली बनाने का अधिकार देती है।” कानून के जानकारों का मानना है कि यह व्यवस्था उन कानूनों को कमजोर करती है जिनके तहत लामिछाने संपत्ति शुद्धीकरण और भ्रष्टाचार निवारण के मामले झेल रहे हैं, साथ ही अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग के कानूनों को भी प्रभावित कर सकती है।

संपत्ति शुद्धीकरण निवारण कानून, २०६४ के धारा २७ के अनुसार, संपत्ति शुद्धीकरण के मामले दर्ज होने पर पदाधिकारी, कर्मचारी या राष्ट्रसेवक स्वचालित निलंबन में चले जाते हैं। इसी आधार पर २०८१ साल के पौष ८ तारीख को संघीय संसद सचिवालय ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष लामिछाने को निलंबित कर दिया था। परंतु प्रतिनिधि सभा में अभी अनुमोदित नहीं हुआ प्रस्तावित नियमावली का नियम २४७ कहता है कि “प्रचलित कानून के अनुसार तीन वर्ष या उससे अधिक की सजा पाए जाने या नैतिक पतन दिखाई देने वाले आपराधिक मामलों में अभियोग पत्र दायर होने तथा संसद सदस्य के पुर्पक्षकाल के लिए जेल में होने के दौरान निलंबन रहेगा।”

यमालको गोलमा बार्सिलोनाको जित – Online Khabar

बार्सिलोना ने यमाल के गोल से जीत दर्ज की

बार्सिलोना ने घरेलू मैदान पर सेल्टा विगो को १-० के अंतर से हराते हुए ला लीगा में अपनी बढ़त ९ अंकों तक पहुंचा दी है। लामिन यमाल ने ४०वें मिनट में पेनाल्टी से मैच का एकमात्र गोल किया। इस जीत के बाद बार्सिलोना ने ३२ मैचों में ८२ अंक हासिल कर लिए हैं, जबकि दूसरे स्थान पर मौजूद रियल मैड्रिड के ७३ अंक हैं। १० वैशाख, काठमांडू।

लामिन यमाल के एकमात्र गोल ने ला लीगा में शीर्ष स्थान बनाए रखने वाले बार्सिलोना को सेल्टा विगो पर १-० की जीत दिलाई और उनकी बढ़त मजबूत की। पिछले रात्रि सम्पन्न इस मुकाबले में बार्सिलोना ने घरेलू मैदान पर संकुचित जीत के साथ ३ अंक जोड़े। इस जीत के साथ बार्सिलोना ने दूसरे स्थान पर मौजूद रियल मैड्रिड से ९ अंकों की दूरी बनाए रखी। यमाल ने ४०वें मिनट में पेनाल्टी के द्वारा गोल किया, जो बार्सिलोना की बढ़त का कारण बना। हालांकि, फेरान टोरेस ने ५५वें मिनट में गोल किया, लेकिन वीएआर ने उसे वैध नहीं माना।

सुधन गुरुङ द्वारा भेडेटार में २० रोपनी जमीन ७ लाख में खरीदने पर विवाद

गृहमंत्री सुधन गुरुङ ने चैत्र ११ गते धनकुटा के सांगुरीगढी गाउँपालिका–६ में १९ रोपनी १५ आना जमीन खरीदी है। मालपोत कार्यालय ने जमीन का मूल्यांकन ६ लाख ९० हजार रुपये किया और उसी के अनुसार राजस्व जमा किया गया है। सांगुरीगढी गाउँपालिकाने उस क्षेत्र की जमीन का बाजार मूल्य प्रति रोपनी ५ लाख रुपये बताया है। ९ वैशाख, धनकुटा। बुधवार को अपने पद से इस्तीफा देने वाले गृहमंत्री सुधन गुरुङ ने धनकुटा में लगभग २० रोपनी जमीन कम कीमत में खरीदने पर विवाद उत्पन्न हुआ है। चैत्र १३ गते मंत्री पद पर नियुक्त हुए, उन्होंने चैत्र ११ गते धनकुटा के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र भेडेटार के निकट सांगुरीगढी गाउँपालिका–६ (पूर्व कार्कीछाप–५) में किता संख्या १६७ की १९ रोपनी १५ आना जमीन खरीदी थी।

मालपोत कार्यालय धनकुटा के अनुसार, गुरुङ ने यह जमीन जुनु लिम्बू से खरीदी है। जुनु लिम्बू के ससुर कर्णबहादुर मगर ने गुरुङ को अपनी बहू के नाम पर रखी हुई जमीन बेची है। हालांकि उन्होंने बिक्री मूल्य खुलासा करने से इनकार किया है। कर्णबहादुर ने कहा कि उनके बीच गोपनीय सहमति है और इसे सार्वजनिक न करने का अनुरोध किया है। गोरखा से प्रतिनिधि सभा सदस्य चुने गए गुरुङ ने जमीन पास करते हुए ६ लाख ९० हजार रुपये का मूल्यांकन कराया और उसी के अनुसार राजस्व भरा, मालपोत कार्यालय धनकुटा के प्रमुख कमलबहादुर थापा ने बताया।

सांगुरीगढी गाउँपालिका अध्यक्ष जितेन्द्र राई अनुसार, गुरुङ द्वारा खरीदी गई जमीन सड़क से जुड़ी नहीं है। बावजूद इसके, वहां जमीन का बाजार मूल्य प्रति रोपनी ५ लाख रुपये बताया गया है। यदि प्रति रोपनी ५ लाख के हिसाब से मूल्यांकन किया जाए तो खरीदी गई जमीन की असल कीमत लगभग एक करोड़ रुपये हो सकती है। सांगुरीगढी गाउँपालिका वडा नं. ६ के वडाध्यक्ष दीपक मगर ने कहा कि गुरुङ के खरीदे गए क्षेत्र में प्रति रोपनी ५ लाख रुपये के दर से ही लेन-देन होता है। गाउँपालिका ने उस क्षेत्र की जमीन को ‘व्यावसायिक प्रयोजन के लिए उपयुक्त’ बताया है।

वडाध्यक्ष मगर ने कहा कि १९ रोपनी १५ आना जमीन को ६ लाख ९० हजार रुपये जैसी कम कीमत में पाना असंभव है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जमीन किस सटीक स्थान पर खरीदी गई है। गुरुङ की खरीदी गई जमीन भेडेटार से लगभग ३ किलोमीटर पूर्व की ओर स्थित है। वडा कार्यालय द्वारा ‘सड़क नहीं होने’ की सिफारिश के बाद मालपोत ने न्यूनतम सरकारी मूल्यांकन के आधार पर मंजूरी दी, मालपोत कार्यालय धनकुटा ने बताया।

सांगुरीगढी गाउँपालिका के अनुसार वहां जमीन की कीमत प्रति रोपनी ५ लाख रुपये है और वैसा ही लेन-देन होता है। अधिकारी मालपोत कार्यालय के प्रमुख थापा के मुताबिक सरकारी मूल्यांकन और बाजार मूल्य में अंतर हो सकता है। निवृत्त मंत्री गुरुङ ने अपने संपत्ति विवरण में यह जमीन खरीद का उल्लेख किया है, लेकिन उसकी वास्तविक कीमत और स्रोत सार्वजनिक नहीं किए हैं।

प्रशोधित यूरेनियम क्या है, इरान के पास कितना है और क्या वह परमाणु हथियार बना रहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे के अनुसार, तेहरान ने युद्ध समाप्त करने के समझौते के तहत अपने प्रशोधित यूरेनियम का भंडार सौंपने का आश्वासन दिया है, जिससे फिर से काफी ध्यान आकर्षित हुआ है। लेकिन सोमवार को इरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिब्जादेह ने इस दावे का खंडन करते हुए असोसिएटेड प्रेस से कहा कि यह संभव नहीं है। दोनों पक्षों के बीच और शांति वार्ता जारी है और यह विषय वार्ता के मुख्य एजेंडे में बना रहेगा।

लेकिन वास्तव में प्रशोधित यूरेनियम क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? पृथ्वी की सतह पर यूरेनियम एक प्राकृतिक तत्व है। इसके दो प्रकार के आइसोटोप होते हैं: यू-२३८ और यू-२३५। प्राकृतिक यूरेनियम में ९९% यू-२३८ होता है जो ‘चेन रिएक्शन’ को उत्पन्न नहीं कर सकता। जबकि ०.७% यू-२३५ होता है जो आसानी से विखंडित हो सकता है और परमाणु विखंडन अर्थात् परमाणु फिसन की प्रक्रिया में ऊर्जा निकालने के लिए उपयोगी है।

प्रशोधन के विभिन्न स्तरों के अनुसार यूरेनियम का उद्देश्य भिन्न होता है। कम प्रशोधित यूरेनियम में ३ से ५% यू-२३५ होता है जिसे व्यावसायिक परमाणु ऊर्जा केंद्रों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें नियंत्रित ‘चेन रिएक्शन’ संभव है, लेकिन हथियार बनाने के लिए यह स्तर पर्याप्त नहीं होता। उच्च प्रशोधित यूरेनियम में यू-२३५ की मात्रा २०% या उससे अधिक होती है और इसे अनुसंधान रिएक्टरों में उपयोग किया जाता है। परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम में लगभग ९०% यू-२३५ होना आवश्यक होता है।

सन् २०१५ के समझौते के अनुसार, चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, अमेरिका और ब्रिटेन सहित छह वैश्विक शक्तियों ने इरान को ३.६७% से अधिक यूरेनियम प्रशोधित करने और अपने भंडार को ३०० किलोग्राम से अधिक न रखने की प्रतिबंध लगाया था।

वर्तमान वार्ताओं में इरान के पास मौजूद प्रशोधित यूरेनियम के भविष्य को लेकर चर्चा हो रही है। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि इरान के पास लगभग ४४० किलोग्राम उच्च श्रेणी में प्रशोधित यूरेनियम है।

इरान बार-बार कहता रहा है कि उसके परमाणु केंद्र केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय आणविक ऊर्जा संगठन (IAEA) ने भी इरान में सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम के कोई प्रमाण नहीं मिलने की पुष्टि की है।

जेमिनी फर होममा ‘कन्टिन्यूड कन्भर्सेसन’ सुरु, अब बारम्बार भन्नुपर्दैन ‘Hey Google’

जेमिनी फर होम में ‘कन्टिन्यूड कन्भर्सेसन’ फीचर जोड़ा गया, अब बार-बार ‘Hey Google’ बोलने की जरूरत नहीं

काठमाडौँ। गूगल ने अपने स्मार्ट होम उपकरणों में उपयोगकर्ताओं की प्रमुख मांग को ध्यान में रखते हुए ‘कन्टिन्यूड कन्भर्सेसन’ नामक नई सुविधा पेश की है। अब उपयोगकर्ता जेमिनी डिवाइस के साथ और भी अधिक प्राकृतिक एवं सहज तरीके से संवाद कर सकेंगे। इस फीचर में, पहले बार “Hey Google” कहकर प्रश्न पूछने पर जेमिनी जवाब देगा और उसके बाद कुछ सेकंड तक माइक्रोफोन सक्रिय रहेगा। उपकरण पर दिखाई देने वाली बलगती रोशनी (Pulsing lights) माइक्रोफोन सक्रिय होने का संकेत देती है। इससे अगले प्रश्न के लिए फिर से “Hey Google” कहने की आवश्यकता नहीं होगी।

इस अपडेट में चार मुख्य सुधार किए गए हैं: संदर्भयुक्त बातचीत: पिछले गूगल असिस्टेंट की तुलना में जेमिनी वार्तालाप के संदर्भ को समझता है, जिससे बार-बार एक ही बात दोहराने की जरूरत नहीं रहती और संवाद अधिक स्वाभाविक होता है। बहुभाषिक समर्थन: यह सुविधा केवल अंग्रेज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की सभी समर्थित भाषाओं और क्षेत्रों में उपलब्ध है। घरेलू संवाद अलग करने की क्षमता: स्मार्ट AI परिवार के सदस्यों के सामान्य बातचीत और जेमिनी को दिए गए आदेशों में फर्क कर सकता है, जिससे अनावश्यक उत्तर कम मिलेंगे।

सभी के लिए आसान पहुँच: एक बार सक्रिय होने पर घर के सभी सदस्य और मेहमान इसका उपयोग कर सकेंगे। इसे सक्रिय करने के लिए उपयोगकर्ता को अपने ‘गूगल होम’ ऐप की सेटिंग्स में जाकर ‘जेमिनी फर होम वॉइस असिस्टेंट’ के अंतर्गत ‘कन्टिन्यूड कन्भर्सेसन’ विकल्प चुनना होगा। इससे स्मार्ट होम उपकरणों के साथ इंटरैक्शन और प्रभावी तथा तेज़ होने की उम्मीद है।

संरचनात्मक संकट और नीतिगत कमजोरी ने नेपाली खेलकूद को अनिश्चितता में डाल दिया है

युवा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल की प्राथमिकता मुख्यतः शिक्षा क्षेत्र पर केंद्रित नजर आ रही है। उनके निर्णय ज्यादातर शिक्षा मंत्रालय से जुड़े हैं, जिससे खेलकूद क्षेत्र उपेक्षित महसूस कर रहा है। राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) वैकल्पिक नेतृत्व के अधीन पांच महीने से ज्यादा समय बीत चुका है और आगामी 20वें एशियाई खेलों में नेपाली खिलाड़ियों की भागीदारी अब भी अनिश्चित बनी हुई है। जब तक खेलकूद मंत्रालय अलग नहीं होगा, नीतिगत स्पष्टता और नेतृत्व की कमी दीर्घकालिक योजनाओं, बजट प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय तैयारी में बाधा डालती रहेगी।

राखेप और एन्फा के मध्य विवाद ने फुटबॉल सहित विभिन्न खेल संघों में अस्थिरता बढ़ाई है और खिलाड़ियों को घोषित पुरस्कार भी नहीं मिल पाए हैं। बालेन सरकार बनने के बाद भी पिछली कमजोरियों के सुधार और पुरस्कार वितरण की उम्मीदों से खिलाड़ी निराश हैं। ये कुछ उदाहरण ही नेपाली खेल क्षेत्र की वर्तमान निराशाजनक स्थिति को दर्शाते हैं। प्रचंड के मजबूत सरकार के बावजूद भी नेपाली खेलकूद क्षेत्र को अनिश्चितता से बाहर निकालने में विफल रह गई है।

खेलकूद क्षेत्र में अस्थिरता स्पष्ट है। हालांकि सरकार अभी शुरुआती चरण में है, फिर भी बालेन नेतृत्व वाली सरकार से खेलकूद क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लेने की उम्मीद खिलाड़ियों में बनी हुई है। फिलहाल नेपाली खेलकूद में स्पष्ट नीतियाँ नहीं हैं और कुशल नेतृत्व की कमी से संपूर्ण खेलकूद व्यवस्था कमजोर हो रही है।

राखेप के नेतृत्व की कमजोरी के कारण पूरी खेलकूद प्रणाली अस्त-व्यस्त दिखती है। युवा तथा खेलकूद मंत्रालय और राखेप का नेतृत्व नेपाली खेलकूद के भविष्य को अनिश्चित दिशा में ले जा रहा है। 2081 साल में कर्णाली प्रदेश में होना था 10वां राष्ट्रीय खेलकूद बार-बार तारीखें स्थगित होने से भी संभव नहीं हो पाया है, जो खिलाड़ियों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। यदि नेपाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर पदक जीतना चाहता है तो राष्ट्रीय खेलकूद जैसे बड़े आयोजन नियमित रूप से कराने आवश्यक हैं।

नेपाल में खेलकूद क्षेत्र मैदानी संचालन न होकर मैदान के बाहर कमजोर हो रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन प्रभावित हुआ है। नेपाली खेलकूद को इस संकट से बाहर निकालने के लिए कुछ ठोस और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। मंत्रालय और राखेप में स्पष्ट नेतृत्व आवश्यक है। सदस्य सचिव और संघों के नेतृत्व नियुक्ति में पारदर्शिता लानी होगी। खिलाड़ियों के पुरस्कार, बीमा, रोजगार और करियर सुरक्षा जैसे खिलाड़ी-केंद्रित नीतियां बनाना अनिवार्य है।