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लेखक: space4knews

खोटाङ में प्रधानमंत्री बालेन के पुतले का दहन

१८ जेठ, खोटाङ। खोटाङ के विद्यार्थी संगठनों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) का पुतला जलाया है। प्रधानमंत्री बालेन द्वारा रविवार को प्रतिनिधिसभा में ‘नेपाल ने भी भारत की सीमा में सेंध लगाई है’ जैसी विवादित टिप्पणी किए जाने के बाद सोमवार की शाम यहां के विद्यार्थी संगठनों ने विरोध स्वरूप उनका पुतला दहन किया। नेपाल विद्यार्थी संघ (नेविसंघ), अनेरास्ववियु, अखिल (क्रान्तिकारी) और अनेरास्ववियु ने जेठ १८ को शाम दिक्तेल में प्रधानमंत्री बालेन के पुतले का दहन किया।

विद्यार्थी संगठनों ने दिक्तेल के किरातचोक में प्रधानमंत्री बालेन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की। विद्यार्थी नेताओं का कहना था कि प्रधानमंत्री की यह अभिव्यक्ति नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्रता, सार्वभौमिकता और भौगोलिक अखंडता को कमजोर करने वाली है, इसलिए उनकी तत्काल राजीनामा हो। इससे पहले भी विद्यार्थी संगठनों ने रविवार दोपहर जिला प्रशासन कार्यालय में ज्ञापनपत्र सौंपते हुए नेपाल–भारत सीमा से जुड़ी प्रधानमंत्री बालेन की टिप्पणी को आपत्तिजनक, गैरजिम्मेदाराना और आत्मसमर्पणवादी करार दिया था।

इसी तरह, श्रम संस्कृति पार्टी खोटाङ ने भी प्रधानमंत्री बालेन के उक्त बयान के विरोध में प्रदर्शन किया। श्रम संस्कृति पार्टी ने सोमवार को दिक्तेल के रत्नपार्क में कुछ समय के लिए सांकेतिक नारेबाजी सहित विरोध प्रकट किया।

उदाउलान् नयाँ फुटबल शक्ति ? – Online Khabar

नया फुटबॉल शक्ति का उदय: 2026 विश्व कप में 48 देशों की भागीदारी

इस बार के विश्व कप फुटबॉल में 48 देश भाग ले रहे हैं, जिससे नए देशों को विश्व फुटबॉल जगत में स्थापित होने का मौका मिला है। 2026 के फीफा विश्व कप में टीमों की संख्या 48 कर देने से नए देशों को स्थापित होने का अवसर प्राप्त हुआ है। एशियाई क्वोटा वृद्धि का लाभ उठाते हुए जॉर्डन और उजबेकिस्तान के अलावा छोटे देशों कुराकाओ और केप वरदे पहली बार विश्व कप में चुने गए हैं। अफ्रीकी राष्ट्र डीआर कांगो, हैती और इराक ने लगभग 40 से 52 वर्षों बाद विश्व कप फुटबॉल में वापसी का अवसर पाया है। 18 जेठ, काठमांडू।

1930 से शुरू हुए फीफा विश्व कप फुटबॉल में एशियाई देश जापान 68 वर्षों के बाद पहली बार चयनित हुआ। 1998 के संस्करण से विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 24 से बढ़ाकर 32 कर दी गई थी, तब जापान ने विश्व कप में प्रवेश पाया था। टीमों की संख्या बढ़ाने पर एशिया क्षेत्र के कोटे को 2 से 4 किया गया, जिसका लाभ जापान ने उठाया। जापान ने पिछले विश्व कप संस्करण में मजबूत मानी जाने वाली जर्मनी और स्पेन को हराकर विश्व फुटबॉल जगत को चकित कर दिया था।

शुरुआती 16 संस्करणों में केवल दो बार विश्व कप खेलने वाला पुर्तगाल, 2002 के बाद के संस्करणों में मजबूत टीम के रूप में अपने आप को स्थापित कर चुका है। टीमों की संख्या बढ़ने से पुर्तगाल को भी फायदा मिला है। 1930 में हुए पहले फीफा विश्व कप में 13 देशों ने भाग लिया था। अब 23वें संस्करण तक पहुंचते-पहुंचते विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 48 कर दी गई है। इससे विश्व कप की पहुंच तो बढ़ी है, साथ ही नए देशों को विश्व कप फुटबॉल में स्थापित होने का अवसर भी प्राप्त हुआ है।

अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में आयोजित होने जा रहे फीफा विश्व कप 2026 में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है, जिससे 444 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले कुराकाओ का चयन सफल हुआ। अफ्रीकी राष्ट्र डीआर कांगो और हैती को भी 52 वर्षों बाद विश्व कप में वापसी का मौका मिला। इस बार टीमों की संख्या बढ़ने की वजह से एशियाई क्षेत्र से चयनित होने वाले कोटे में भी वृद्धि हुई है। जॉर्डन ने चयन खेल शुरू किए 40 वर्षों के बाद पहली बार विश्व कप में चयनित होने का गौरव पाया। इसी तरह, 444 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले छोटे देश कुराकाओ और केप वरदे पहली बार विश्व कप में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

इन देशों ने केवल विश्व कप खेलने का अवसर नहीं पाया है, बल्कि विश्व फुटबॉल में स्थापित होने का मौका भी हासिल किया है। विश्व कप में वे कुछ नए प्रतिद्वंदी और कुछ स्थापित टीमों के साथ खेलने का अवसर प्राप्त करेंगे। इससे विश्व कप में अपना प्रदर्शन दिखाते हुए इनके खिलाड़ी शीर्ष स्तर की लीग खेलने के अवसर भी पा सकते हैं। अधिक देशों के भाग लेने से विश्व कप के प्रति दर्शकों और समर्थकों का आकर्षण बढ़ेगा। इससे पर्यटन, टिकट बिक्री, प्रसारण अधिकार और प्रायोजन से भी अतिरिक्त आय बढ़ेगी।

हिमालयन बैंक और यूनियनपे के सहयोग से ‘आरएमबी कार्ड’ सेवा की शुरुआत

हिमालयन बैंक ने चीन भ्रमण करने वाले नेपाली लोगों के लिए यूनियनपे के सहयोग से चीनी मुद्रा में भुगतान करने योग्य आरएमबी कार्ड लॉन्च किया है। बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक शमशेर राणा और यूनियनपे के उपाध्यक्ष ज्वांग बेइ ने संयुक्त रूप से इस कार्ड सेवा का शुभारंभ किया है। इस कार्ड के माध्यम से चीन जाने वाले नेपाली आसानी से वहां चीनी मुद्रा में भुगतान कर सकेंगे। 18 जेठ, काठमांडू। हिमालयन बैंक ने यूनियनपे के साथ मिलकर आरएमबी कार्ड सेवा शुरू की है। बैंक और चीन के प्रमुख कार्ड ब्रांड यूनियनपे ने नेपाल में अपने स्थानीय ग्राहकों के लिए यह सेवा शुरू की है। नेपाली नागरिकों के लिए चीन यात्रा को सरल और सुलभ बनाने के लिए यह सेवा महत्वपूर्ण साबित होगी।

नक्साल, काठमांडू स्थित मेरियट होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में बैंक की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक शमशेर राणा और यूनियनपे इंटरनेशनल की ओर से उपाध्यक्ष ज्वांग बेइ ने नेपाल में पहली बार इस कार्ड सेवा का शुभारंभ किया। इस कार्ड के उपयोग से ग्राहक और सेवा प्राप्तकर्ता उत्तरी पड़ोसी देश चीन यात्रा के दौरान वहां के एटीएम, पोस, क्यूआर कोड और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए लेनदेन चीनी मुद्रा (CNY) में आसानी से कर सकेंगे। बाजार में उपलब्ध अन्य उपकरणों की तुलना में यह कार्ड मितव्ययी और सर्वमान्य होगा, बैंक ने कहा।

बैंक की विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘व्यक्तिगत और संस्थागत रूप से यात्रा कर रहे विद्यार्थी, व्यवसायी और पर्यटक, जो नेपाल राष्ट्र बैंक के विदेशी विनिमय विभाग द्वारा स्वीकृत सीमा तक की राशि यूनियनपे आरएमबी कार्ड में लोड करेंगे, वे यूनियनपे के नेटवर्क से जुड़े अलिपे प्लस, विचैट, निहाओ चाइना जैसे क्यूआर और अन्य माध्यमों के जरिए चीनी मुद्रा में भुगतान कर सकते हैं।’

तरुण दल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के पुतला दहन और इस्तीफे की मांग की

नेपाली कांग्रेस के भ्रातृ संगठन तरुण दल ने सोमवार को त्रिचन्द्र कॉलेज के सामने प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए उनका पुतला दहन किया है। संसद में प्रधानमंत्री शाह द्वारा दी गई उस अभिव्यक्ति के खिलाफ, जिसमें कहा गया था कि नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है, विभिन्न दलों के संगठनों ने व्यापक आपत्ति जताई है और आंदोलन जारी रखा है। विपक्षी दलों ने निर्णय लिया है कि जब तक प्रधानमंत्री शाह माफी नहीं मांग लेते, संसद की सहज कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।

उसी दिन शाम को त्रिचन्द्र कॉलेज के सामने तरुण दल के छात्रों ने इकट्ठा होकर पुतला दहन किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री शाह से इस्तीफा देने की मांग की। शाह के संसद में दिए गए बयान के खिलाफ विभिन्न दलों के संगठनों ने आंदोलन शुरू किया है, और देश के अन्य हिस्सों में भी प्रधानमंत्री शाह के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं।

प्रधानमंत्री शाह ने रविवार को संसद की बैठक में संबोधन करते हुए दावा किया था कि नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है। इस अभिव्यक्ति के बाद व्यापक आलोचना और टिप्पणी हुई हैं। विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से बैठक कर यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रधानमंत्री माफी मांगें तब तक संसद की गतिविधियों को सहजता से आगे नहीं बढ़ने देना चाहिए।

तरुण दल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की प्रतिमा दहन किया (तस्वीरें)

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • नेपाली कांग्रेस के भ्रातृ संगठन तरुण दल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से इस्तीफा की मांग करते हुए सोमवार को ट्रिचंद्र कॉलेज के सामने उनकी प्रतिमा दहन की।
  • संसद में प्रधानमंत्री शाह द्वारा दिए गए बयान पर, जिसमें कहा गया कि नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है, विभिन्न दलों के संगठनों ने आपत्ति जताई और आंदोलन जारी रखा।
  • विपक्षी दलों ने निर्णय लिया कि प्रधानमंत्री शाह माफी नहीं माँगेंगे तब तक संसद की कार्यवाही सुचारु नहीं होने दी जाएगी।

18 जेठ, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस के भ्रातृ संगठन तरुण दल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की प्रतिमा दहन किया।

सोमवार शाम ट्रिचंद्र कॉलेज के सामने संगठन के छात्रों ने इकट्ठा होकर प्रतिमा दहन किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री शाह से इस्तीफा देने की भी मांग की है।

प्रधानमंत्री शाह के संसद में दिए गए बयान पर आपत्ति जताते हुए विभिन्न दलों के संगठनों ने आंदोलन शुरू किया है।

देश के अन्य स्थानों पर भी प्रधानमंत्री शाह के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

प्रधानमंत्री शाह ने रविवार को संसद की बैठक में कहा था कि नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है।

उनके बयान के बाद व्यापक आलोचना और टिप्पणियां हो रही हैं।

विपक्षी दलों ने संयुक्त बैठक कर तय किया है कि प्रधानमंत्री माफी मांगने तक संसद की कार्यवाही शांति से नहीं चलेगी।

संसद्‌मा विपक्षी एकतालाई सरकारकै निम्तो – Online Khabar

संसद में विपक्षी एकता बढ़ाने के लिए सरकार की पहल

१८ जेठ, काठमाडौं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बयान के खिलाफ विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है। सभी विपक्षी दलों के नेताओं की आज हुई संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक प्रधानमंत्री माफी नहीं मांगते और बयान वापस नहीं लेते, संसद का संचालन नहीं होगा। नेकपा के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल ने कहा, ‘सीमा अतिक्रमण संबंधी कल प्रधानमंत्री द्वारा संसद में दिया गया बयान राष्ट्रद्रोह माना गया है। इस बयान को संसद के रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री को संसद में देशवासियों के नाम माफी मांगनी चाहिए। इसलिए विपक्षी दलों ने संसद अवरुद्ध करने का निर्णय लिया है।’

आकस्मिक रूप से रविवार को संसद की बैठक में पहुंचे प्रधानमंत्री शाह ने सांसदों को जवाब देते हुए कहा था कि ‘नेपाल ने भी भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है।’ इस बयान के खिलाफ सोमवार को विपक्षी सांसदों ने संसद की बैठक में विरोध किया। नेपाली कांग्रेस की सांसद वासना थापा ने नेपाल द्वारा भारत की जमीन अतिक्रमण किए जाने के तथ्य की खोज की थी और अन्य सांसदों ने भी उनका समर्थन किया था। इसके बाद विभिन्न तरफ़ से आपत्ति जताते हुए विपक्षी दलों ने सिंहदरबार में संयुक्त बैठक की। २१ फागुन के चुनाव के बाद यह विपक्षी दल कांग्रेस, एमाले, नेकपा, राप्रपा और श्रम संस्कृति के नेताओं की पहली बैठक थी।

संयुक्त बैठक का प्रभाव संघीय संसद में भी देखा गया, जहां संयुक्त विरोध के कारण संसद अवरुद्ध हो गया। राष्ट्रिय सभा में तो पूरा सदन ही संयुक्त विरोध की स्थिति में है। वहां रास्वपा के ना होने के बावजूद यह माहौल नजर आ रहा है। एमाले राष्ट्रीय सभा संसदीय दल के नेता प्रेमप्रसाद दंगाल ने कहा, ‘इतिहास में कभी किसी ने इस तरह का राष्ट्रद्रोही बयान नहीं दिया, जिसका कोई तथ्य समर्थन न करता हो। इसलिए हम सभी को एक होकर कदम उठाना चाहिए।’ राष्ट्रीय सभा में कांग्रेस, एमाले, नेकपा, जसपा और जनमोर्चा ने संयुक्त बैठक कर प्रधानमंत्री के बयान को सुधारने के लिए दबाव डालने का निर्णय लिया है।

हिमालय एयरलाइन्स首次启动काठमाडौं-सेन्जेन सीधा उड़ान सेवा

हिमालय एयरलाइन्स ने ४ जून २०२६ से काठमाडौं और चीन के सेन्जेन शहर के बीच सीधी उड़ान शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सेन्जेन बाओआन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सप्ताह में दो बार सीधी उड़ानें संचालित करेगी। ये उड़ानें प्रत्येक मंगलवार और गुरुवार को काठमाडौं से प्रस्थान कर बुधवार और शुक्रवार को वापस आएंगी।

नेपाल के निजी क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन हिमालय एयरलाइन्स ने काठमाडौं-सेन्जेन के बीच सीधा उड़ान संचालन का प्रस्ताव रखा है। इसे नेपाल की नागरिक उड्डयन इतिहास में महत्वपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया है। कंपनी अपार मांग को ध्यान में रखते हुए भविष्य में काठमाडौं-सेन्जेन-काठमाडौं मार्ग पर और उड़ानें बढ़ाने की योजना बना रही है, और फिलहाल सप्ताह में दो उड़ानें संचालित कर रही है।

हिमालय एयरलाइन्स के उपाध्यक्ष विजय श्रेष्ठ ने नई उड़ान शुरू होने पर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, ‘हिमालय एयरलाइन्स हमेशा चीन के नए गंतव्यों की खोज कर नियमित उड़ानें संचालित करता रहा है, इसलिए नए बाजार की पहचान में हमारा योगदान महत्वपूर्ण है।’ काठमाडौं-सेन्जेन-काठमाडौं मार्ग पर शुरू हुई यह उड़ान दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंध मजबूत करने, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने में सहायक होगी। इस रूट पर बुकिंग खुल चुकी है।

आइतबार विद्यालय सञ्चालन भएपछि शिक्षा मन्त्रालयद्वारा संघीय मामिला मन्त्रालयलाई सहयोगको अनुरोध

१८ जेठ, काठमाडौं । संघीय सरकारले निर्णय गरेबमोजिम देशभर आइतबार पनि विद्यालय सञ्चालन भएपछि शिक्षा मन्त्रालयले संघीय मामिला मन्त्रालयलाई सहयोगको आग्रह गरेको छ। शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्रालयले शनिबार र आइतबार विद्यालय बन्द गराउन स्थानीय तहसँग समन्वय र सहजीकरणको लागि भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयलाई पत्र पठाएको छ।

संघीय मामिला मन्त्रालयले स्थानीय तहमा प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत खटाउनेदेखि प्रदेश तथा स्थानीय सरकारसँग समन्वय गर्ने भूमिका निर्वाह गर्दछ। यसैले शिक्षा मन्त्रालयले जेठ ११ गते मन्त्रिस्तरीय निर्णयअनुसार संघीय मामिला मन्त्रालयलाई स्थानीय तहसँग समन्वय गर्न अनुरोधसहित परिपत्र जारी गरेको छ। उक्त पत्र हालसालै सार्वजनिक भएको छ।

पत्रको शीर्षक ‘विद्यालय सञ्चालनमा एकरूपता कायम गर्ने सम्बन्धमा’ राखिएको छ। पत्रमा उल्लिखित छ, ‘नेपाल सरकारको निर्णयअनुसार मिति २०८२/१२/२३ गतेदेखि लागू हुने गरी सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक निकाय र शैक्षिक संस्थाहरूमा शनिबार र आइतबार बिदा दिने निर्णयमा शैक्षिक संस्था पनि समावेश छन्। त्यसै अनुसार सम्पूर्ण स्थानीय तहलाई देशभरिका विद्यालयहरूमा उक्त निर्णय एकरूप रूपमा लागू गरी सार्वजनिक बिदा सुनिश्चित गर्ने समन्वय र सहजीकरण गर्न अनुरोध गर्दछौं।’

संघीय सरकारले हप्तामा दुई दिन विद्यालय बन्द गर्ने निर्णय गरेपछि पठनपाठनमा असर पर्ने र विद्यालयको शैक्षिक क्यालेन्डरमा प्रभाव पर्ने चिन्ता व्यक्त भइरहेका छन्। तर धेरै स्थानीय तहहरूले संघीय सरकारको निर्णय उल्लंघन गर्दै आइतबार पनि विद्यालय सञ्चालन गराइरहेका छन्।

अस्पतालमा अत्यासलाग्दो भिड, टिकट काट्ने लाइनमै बेहोस हुन्छन् बिरामी

अस्पताल में भीड़ के कारण मरीजों को हो रही परेशानी, टिकट कटाने की लाइन में थकावट

समाचार सारांश

  • चार दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों के बाद महाराजगंज स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में सोमवार को ओपीडी सेवा लेने आए मरीजों को घंटों तक परेशान होना पड़ा।
  • अस्पताल में कोटा प्रणाली और टिकट काउंटर की सुस्ती के कारण मरीजों को पीने का पानी और बैठने की जगह नहीं मिल पाई, जिससे वे टन्टलापुर की गर्मी में घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हुए।
  • अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. गोपाल सेढ़ाई ने मरीजों की संख्या में वृद्धि को गुणवत्तापूर्ण सेवा पर विश्वास का संकेत बताते हुए ऑनलाइन टिकट प्रणाली को सरल बनाने का काम जारी होने की जानकारी दी।

१८ जेठ, काठमांडू। 29 वर्षीय छोटू मोहम्मद अपनी पत्नी की गोद में सिर रखकर अस्पताल की बेंच पर सुस्ताए हुए हैं। उनका शरीर असामान्य रूप से सुन्न है। पेट सूजा हुआ है। आँखें पीली हो चुकी हैं। बोलने की कोशिश पर आवाज़ या तो नहीं निकलती या निकलते समय कांपती है।

सोमवार दोपहर 12 बजे महाराजगंज स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल (टीचिंग) पहुंचे तो ओपीडी टिकट काउंटर के आसपास भारी भीड़ देखी गई। छोटू के चेहरे पर न केवल बीमारी का दर्द बल्कि उपचार न मिलने की असहायता भी स्पष्ट थी।

आँखों में आँसू भरकर उन्होंने कहा, ‘मैं खड़ा नहीं हो पा रहा हूँ। इतनी गंभीर हालत में भी अब तक डॉक्टर को नहीं दिखा पाया।’

सरलाही से उपचार की आशा लेकर काठमांडू आए छोटू और उनकी पत्नी नहिमा खातून के लिए राजधानी का बड़ा अस्पताल भरोसे का केंद्र होना था, लेकिन उनका पहला अनुभव सिर्फ उलझन और निराशा ही रहा।

रविवार की शाम वे टीचिंग गए थे। उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। किसी ने आकस्मिक कक्ष जाने का सुझाव दिया, जहाँ वे पहुंचे।

लेकिन वहाँ से कोई अपेक्षित उपचार नहीं मिला।

छोटू के अनुसार, चिकित्सकों ने उन्हें अगले दिन ओपीडी में दिखाने के लिए कहा और वापस भेज दिया। अपरिचित शहर में कहाँ जाएँ, क्या करें उन्हें पता नहीं था।

‘पूरा शरीर दर्द में है। यूरिन भी पीला आता है। लगता है मौत आने वाली है,’ उन्होंने दर्द बयान किया। ‘आकस्मिक में भर्ती होने के लिए एम्बुलेंस जरूरी थी, हम पैदल आए थे इसलिए वह भी नहीं हो पाया।’

फिर उन्होंने अस्पताल के पास एक होटल में रात बिताई।

सुबह लगभग 7 बजे वे फिर अस्पताल पहुंचे और ओपीडी की कतार में खड़े हुए। छोटू कमजोर थे और लंबे समय तक खड़े नहीं रह पाए। उनकी पत्नी नहिमा अच्छी तरह नेपाली भाषा नहीं समझती थीं। काफी पूछताछ और खोजबीन के बाद सुबह 9 बजे टिकट कटाई, लेकिन इसके बाद लंबा इंतजार शुरू हुआ।

समय बीतता गया पर छोटू की बारी नहीं आई। 11 बजे ओपीडी सेवा बंद हो गई।

दोपहर 12 बजे तक उन्होंने खाना भी नहीं खाया था।

पत्नी की गोद में सिर रखकर सोते हुए छोटू बार-बार यही कहते रहे – काश पहले उन्हें डॉक्टर दिखाने का मौका मिल जाता।

वे अस्पताल में भीड़ की ओर देखते और फिर आंखें बंद कर लेते। उनके लिए बीमारी से बढ़कर इंतजार ही काफी दुखद था।

कुछ महीनों पहले तक छोटू का जीवन सामान्य था। वे भारत में कपड़ा सिलाई का काम करते थे और परिवार चलाते थे।

लेकिन दो महीने पहले अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया। शरीर कमजोर होने लगा और आंखें पीली पड़ गईं। वे काम करने लायक भी नहीं रहे।

गांव लौटकर वीरगंज के अस्पताल में कुछ समय उपचार कराया पर कोई सुधार नहीं हुआ।

पड़ोसियों ने अंतिम आशा के तौर पर काठमांडू जाने की सलाह दी।

उसी उम्मीद के साथ छोटू रविवार सुबह अपने घर से काठमांडू चल पड़े, पर राजधानी पहुंचकर सहज उपचार प्रक्रिया नहीं मिली।

‘अच्छा उपचार होगा, यह सोचकर आए थे,’ वे भावुक होकर बोले, ‘लेकिन हमारे जैसे गरीबों की पीड़ा किसी को सुननी नहीं।’

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सोमवार सुबह लगभग 11 बजे अस्पताल पहुंचे तो ओपीडी टिकट काउंटर के आसपास लंबी लाइन लगी थी। अस्पताल के मुख्य भवन के बाहर तक लाइन फैली हुई थी। कई लोग पुराने रिपोर्ट्स लेकर खड़े थे।

घंटो लाइन में खड़े रहने से कई लोग थक कर ठंडे फर्श पर बैठ गए थे। कुछ दीवार से टिका कर बैठे थे।

उपचार लेने आए मरीजों के लिए टिकट लेना एक परीक्षा जैसा हो गया। अत्यधिक गर्मी से कष्ट और बढ़ गया।

लाइन में लगे अधिकांश मरीजों और परिजनों की शिकायत थी कि टोकन प्रणाली न होने के कारण लंबी लाइन में खड़े होना पड़ता है।

ओपीडी सेवा लेने आए मरीज टिकट काउंटर की सुस्ती, भीड़भाड़, बैठने की जगह न होने और सफाई की कमी के कारण गहरी परेशानी झेल रहे हैं।

अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ सेवा प्रबंध और अधिक अस्त-व्यस्त हो गया है।

‘मरीज बनकर अस्पताल आया, इलाज से पहले लाइन ने ही थका दिया,’ मरीज राधिका ढकाल ने गुस्सा जताया। ‘चार दिन अस्पताल बंद था। सुबह से लाइन में खड़े हैं, अभी तक इलाज नहीं मिला।’

14 से 17 जेठ तक सार्वजनिक छुट्टियों के कारण अस्पताल की ओपीडी सेवा बंद थी, जिसका बोझ सोमवार को एक साथ पड़ा।

नुवाकोट की ढकाल सुबह 9 बजे से लाइन में थीं लेकिन दोपहर 1 बजे तक इलाज प्रक्रिया न बढ़ पाने से वे कुपित थीं। उन्हें शरीर में दर्द की समस्या थी।

‘काउंटर खुलते ही हड्डी-जोड़े विभाग का कोटा खत्म हो गया कहा गया,’ उन्होंने कहा, ‘मरीज डॉक्टर को दिखाने आते हैं इसलिए उम्मीद रहती है, लेकिन टिकट न मिलने की बात सुनाई गई।’

सुबह के सत्र में डॉक्टर को नहीं दिखा पाने पर दोपहर की शिफ्ट में इलाज करने की कोशिश की। लेकिन बैठने की जगह न होने के कारण लाइन छोड़ने का डर था।

‘दो घंटे से ज्यादा लाइन में खड़ी रही। इलाज के लिए आई इंसान को पैर के रोग के साथ वापस जाना पड़ा,’ ढकाल ने शिकायत की।

चिकित्सा संवेदनशील विषय होने के नाते उन्होंने मांग की कि सरकार कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए या सेवा खुली रखने के लिए प्रोत्साहन भत्ता दे।

‘चार दिन बंद रहने के कारण अधिक काउंटर खोलना चाहिए था, कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए थी। मरीजों का दबाव अनुमानित था, लेकिन तैयारी नहीं थी, चारों तरफ अव्यवस्था है,’ वे कहती हैं।

तभी गर्मी और भीड़ ने एक मरीज को थका दिया। पसीना बहते देखकर किसी ने पानी दिया और सिर के ऊपर से शरीर पर पानी छिड़का।

भीड़ और गर्मी के कारण वह मरीज बेहोश सा हो गया और बाहर निकल गया। ‘ऐसी भीड़ और गर्मी में बेहोश सा हो गया हूँ। सरकारी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा कब सुधरेगी?’ मरीज ने कहा।

उसी भीड़ में उदयपुर से इलाज के लिए आईं गंगामाया राई मिलीं, जिन्होंने अस्पताल की अव्यवस्था पर शिकायत की। उन्होंने कहा, ‘सुबह बिना खाना खाए जांच कराने आई, साढ़े 11 बजे तक लाइन में हूँ, लेकिन काउंटर नहीं खुला।’

टिकट लेने के लिए सेवाग्राही घंटों इंतजार करते हैं, फिर डॉक्टर से मिलने, एक्स-रे, रक्त परीक्षण आदि के लिए अलग लाइन में खड़े रहना पड़ता है।

‘सिर्फ लाइन ही हर जगह है। डॉक्टर को दिखाने में रात हो सकती है। रिपोर्ट कब आएगी?’ राई ने शिकायत की, ‘नई सरकार से स्वास्थ्य सेवा सुधार की उम्मीद थी, लेकिन परेशानी बढ़ गई।’

राई ने तत्काल टोकन प्रणाली लागू करने की मांग की। ‘टोकन प्रणाली से मरीजों को लंबी लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ता, पता रहता है कि बारी कब आएगी,’ उन्होंने कहा।

ओपीडी टिकट लाइन में दो घंटे से अधिक खड़े कृष्णप्रसाद नेपाल की भी ऐसी ही शिकायत थी। वे सोमवार सुबह अपनी पत्नी के इलाज के लिए टीचिंग आए थे।

सरदर्द और ऊपर की ओर खिंचाव की समस्या वाली पत्नी को इलाज से पहले तीन घंटे से ज्यादा लाइन में खड़ा रहना पड़ा, उन्होंने शिकायत की।

‘तीन घंटे से खड़े हूँ। गर्मी बहुत है, बैठने की जगह नहीं है, पानी भी नहीं है,’ उन्होंने पूछा सरकार कब तक लोगों को परेशानी देती रहेगी?

सेवाग्राही के दबाव को ध्यान में रखते हुए टिकट वितरण प्रणाली सुधार की आवश्यकता बताई गई।

‘कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर भी सेवा देनी चाहिए। मरीज घंटों भूखे लाइन में रहते हैं,’ नेपाल ने कहा, ‘इलाज के लिए आए मरीजों को और कष्ट नहीं देना चाहिए, सहज सेवा का माहौल बनाना चाहिए।’

दैनिक तीन हजार से अधिक मरीज आने वाला टीचिंग अस्पताल गरीब और वंचित वर्ग के लिए आशा और भरोसे का केंद्र है।

लेकिन दूर-दराज के लोकसेवाग्राही अपेक्षित सेवा न पाकर परेशानी झेलते हैं।

सार्वजनिक रूप से बैठने की पर्याप्त जगह न होने के कारण अस्पताल में घंटों लाइन में खड़े रहना और रिपोर्ट लेने के लिए दौड़ना कष्ट और बढ़ा देता है।

अव्यवस्थित भीड़ के कारण त्वरित और सुगम सेवा न मिलने से कई सेवाग्राही असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं।

उनमें नवलपुर से उपचार के लिए आई संगीता पोखरेल भी थीं।

घुटने दर्द की समस्या लेकर आईं पोखरेल ने अस्पताल की अव्यवस्था और देरी की आलोचना की।

‘यह नियम है या अव्यवस्था, समझ नहीं आया। लाइन में खड़े कहा गया टिकट खत्म हो गया। मरीजों के साथ अन्याय है।’

उन्होंने अस्पताल के शौचालय की भी शिकायत की। ‘शौचालय जाने की अनुमति नहीं है, दरवाजे पर लॉक नहीं है, गंदगी वहीं पड़ी है। अस्पताल मरीज ठीक कराने की जगह अब और स्वास्थ्य समस्या बढ़ाने लगा है।’

दो दिनों की छुट्टियों से स्वास्थ्यकर्मियों को राहत मिली लेकिन सेवा लेने आए मरीजों की परेशानी बढ़ गई।

सोमवार दोपहर अस्पताल के ओपीडी के आसपास की स्थिति दिखा रही थी – स्वास्थ्य सेवा में दो दिन की छुट्टियों ने मरीजों की परेशानी को और बढ़ा दिया है।

अस्पताल प्रशासन की दलील – भीड़ नहीं, गुणवत्ता सेवा पर भरोसे की बढ़ती संख्या है

अस्पताल प्रवक्ता डॉ. गोपाल सेढ़ाई के अनुसार अस्पताल में दिख रही भीड़ समस्या नहीं बल्कि यह सेवा लेने वाले मरीजों के बढ़ रहे विश्वास का संकेत है।

‘अस्पताल का नाम और सेवा अच्छी होने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ी है। हम इसे प्रबंधन दृष्टि से देखते हैं,’ उन्होंने कहा।

वर्तमान में टीचिंग में रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज आते हैं। गैर-छुट्टी के दिन मरीजों की संख्या 2,300 से 2,500 के बीच होती है।

ओपीडी टिकट काउंटर, फार्मेसी और बिलिंग काउंटरों पर ज्यादा भीड़ रहती है। ओपीडी सुबह 7 बजे काउंटर खुलते हैं और 11 बजे बंद हो जाते हैं। फिर दोपहर 1 बजे खुलने वाला ओपीडी शाम 5 बजे बंद होता है।

सुबह एक साथ कई मरीज अस्पताल आते हैं इसलिए भीड़ लगती है। मरीजों की संख्या घटाने के लिए दो साल से ऑनलाइन टिकट प्रणाली शुरू हुई है, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला।

‘ऑनलाइन टिकट शुल्क बढ़ा नहीं पाए। अस्पताल में 20 लाख रुपये का कारोबार क्यूआर कोड के माध्यम से होता है,’ उन्होंने बताया, ‘लेकिन मरीजों को ऑनलाइन टिकट प्रणाली समझाने में कमी है।’

ऑनलाइन प्रणाली को और सरल बनाने के लिए आईटी टीम के साथ सहयोग जारी है। साथ ही स्वयंसेवकों द्वारा मरीजों को ऑनलाइन टिकट कटवाने के लिए ओपीडी परिसर में बूथ लगाए जा रहे हैं।

अस्पताल ने कुछ विभागों में गुणवत्ता ध्यान में रखते हुए कोटा प्रणाली लागू की है। परंतु मरीजों को इसके बारे में स्पष्ट जानकारी न होने से असंतोष है। अब कोटा शेष संख्या को स्क्रीन पर दिखाने का प्रावधान तैयार है।

‘बढ़ते दबाव के कारण डॉक्टर सभी मरीजों को समय नहीं दे पाते। गुणवत्ता ध्यान में रखकर कुछ विभागों में कोटा प्रणाली लागू की गई है।’

पहले इस्तेमाल की गई टोकन प्रणाली प्रभावी नहीं पाई गई, इसके चलते हटा दी गई और कुछ समय के लिए मरीज कम आने की वजह से कोटा प्रबंधन बिगड़ा, जिस पर लाइन प्रणाली फिर से शुरू की गई।

अस्पताल ने कहा कि दोपहर के ओपीडी सेवा में सुबह की तुलना में भीड़ कम होती है इसलिए मरीजों से दोपहर की सेवा का उपयोग करने का आग्रह किया गया है। दोपहर 3 बजे के बाद अधिकांश ओपीडी में भीड़ कम होने का दावा किया गया है।

तस्वीर और वीडियो : चंद्रबहादुर आले।

वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ की कार्यसमिति का विघटन, विशेष साधारण सभा बुलाने का निर्देश

नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ की वर्तमान कार्यसमिति स्वतः विघटित हो गई है। बहुमत पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई है। संघ के अध्यक्ष भुवनसिंह गुरुङ की कार्यशैली के प्रति असंतोष व्यक्त करते हुए दो तिहाई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया था। जिला प्रशासन कार्यालय, काठमाडौँ ने प्रबंध समिति को विशेष साधारण सभा बुलाकर आगामी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।

जिला प्रशासन कार्यालय ने संघ के विधान अनुसार कार्यसमिति के स्वतः विघटन की पुष्टि की है और बताया कि सलाहकार समिति द्वारा गठित प्रबंध समिति को आगामी कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने पत्राचार के माध्यम से यह जानकारी दी कि कार्यसमिति के अधिकांश पदाधिकारियों के इस्तीफे के कारण कार्यसमिति विघटित हुई है।

संघ के विधान की धारा २ (९) के अनुसार, दो तिहाई से अधिक पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया है। इसी आधार पर कार्यसमिति के विघटन की पुष्टि हुई है। कार्यसमिति के विघटन के बाद सलाहकार समिति के निर्णय के अनुसार प्रबंध समिति का गठन किया गया है। प्रशासन ने प्रबंध समिति को विशेष साधारण सभा बुलाकर आगे की प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्देश दिया है।

प्रशासन ने इस प्रक्रिया में किसी को भी बाधा उत्पन्न करने से रोका है। यदि किसी ने निर्देशों के विपरीत कोई कार्य किया तो तुरंत जिला प्रशासन कार्यालय को सूचित करने का अनुरोध किया गया है।

काठमाडौं र ललितपुर के SSPs की पुनर्नियुक्ति – गृह मंत्रालय का फैसला

गृह मंत्रालय के आदेशानुसार, काठमाडौं और ललितपुर के SSPs समेत कुल 33 वरिष्ठ उपनिरीक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। काठमाडौं के SSP रमेश थापा को मधेश प्रदेश पुलिस कार्यालय में स्थानांतरित कर प्रधान कार्यालय अन्वेषण योजना निर्देशनालय में कार्यभार सौंपा गया है। ललितपुर के SSP होविन्द्र बोगटी को नेपाल पुलिस प्रधान कार्यालय राजमार्ग सुरक्षा तथा ट्रैफिक प्रबंधन महाशाखा नक्साल में नियुक्त किया गया है। 18 जेठ, काठमाडौं। जिल्ला प्रहरी परिसर काठमाडौं और ललितपुर के वरिष्ठ उपनिरीक्षकों (SSPs) की पुनः नियुक्ति की गई है। नेपाल पुलिस प्रधान कार्यालय मानव संसाधन विकास विभाग ने सोमवार शाम इस स्थानांतरण की जानकारी प्रदान की है। थापा को काठमाडौं से हटाकर मधेश प्रदेश पुलिस कार्यालय शांति सुरक्षा महाशाखा जनकपुर, धनुषा में नियुक्त किया गया है। उनके कार्यभार नेपाल पुलिस प्रधान कार्यालय अन्वेषण योजना तथा विकास निर्देशनालय में रहने की जानकारी दी गई है।

सीमावासीलाई सोध, सीमा कसले मिचेको छ ? – Online Khabar

सीमावासियों से प्रश्न: सीमा किसने छीनी है?

प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा व्यक्त किए गए कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है, की खबर के बाद संसद और सड़कों पर इसका व्यापक विरोध और चर्चा शुरू हो गई है। पश्चिम नवलपरासी के सुस्ता में निर्माणाधीन बांध के संबंध में भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने जिला अधिकारी स्तर पर चर्चा कर कार्य को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। सशस्त्र पुलिस ने पिछले तीन आर्थिक वर्षों में 2,690 सीमा स्तंभों की मरम्मत की है, जबकि भारतीय पक्ष की सक्रियता अपेक्षाकृत कम देखी गई है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री बनने के बाद ही जान पाया कि न केवल भारत ने, बल्कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। इस विषय पर दोनों पक्षों को मिलकर समाधान निकालना आवश्यक है।’’ उन्होंने बताया कि भारत ने नेपाली क्षेत्रों लिपुलेक, लिम्पियाधुरा और कालापानी पर कब्जा किया है, वहीं नेपाल ने भी सीमाओं का अतिक्रमण किया है। उनकी इस अभिव्यक्ति के कारण संसद और सड़कों दोनों जगह गहरा विवाद छिड़ गया है। विपक्षी दलों ने संसद के रिकॉर्ड से इस अभिव्यक्ति को हटाने की मांग की है।

सीमावासी विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। सशस्त्र पुलिस के सीमा विभाग में सेवा देकर सेवानिवृत्त पूर्व एआईजी के अनुसार विशेष रूप से southern सीमाओं पर विवाद होते रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान सीमा संबंधी समस्याएं और बढ़ गईं। पूर्व एआईजी नारायणबाबु थापा ने बताया कि सीमावासियों की भूमिका प्रथम सीमा रक्षक के समान है, इसलिए वे जो समस्याएं झेलते हैं, उस पर जानकारी दी गई है।

पश्चिम नवलपरासी के सुस्ता में बांध निर्माण का कार्य जारी है। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय द्वारा तटबंध निर्माण कार्य लगातार चल रहा है। करीब 14 करोड़ रुपये की ठेका राशि से यह कार्य हो रहा है। सीमा क्षेत्र में सशस्त्र पुलिस के एसपी गोविन्द खाती और सीडीओ दीपक नेपाली सहित की एक टीम ने अनुगमन किया है। भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने नए बांध के निर्माण से पहले चर्चा की आवश्यकता जताई है, जिसकी जानकारी सुरक्षा अधिकारियों ने दी है।

बिजली उपभोक्ताओं पर लगेगा ५% तथा पानी से लेकर अस्पताल-स्कूल तक १३% वैट

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ से बिजली पर मूल्य अभिवृद्धि कर (वैट) लागू करने का निर्णय लिया है।
  • नई व्यवस्था के तहत घरेलू उपभोक्ताओं पर ५ प्रतिशत और औद्योगिक एवं अन्य क्षेत्रों पर १३ प्रतिशत वैट लगेगा।
  • अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार न पड़े इसलिए साउन १ तारीख तक कर समायोजन किया जाएगा।

१८ जेठ, काठमाडौं । सरकार द्वारा बिजली पर लगाए गए मूल्य अभिवृद्धि कर (वैट) के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को ५ प्रतिशत जबकि सिंचाई, पेयजल, चार्जिंग आदि उपभोक्ताओं के लिए १३ प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।

सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ से बिजली पर वैट लागू करने की घोषणा अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने की है। उनके अनुसार आर्थिक विधेयक २०८३ में उल्लेख है कि ‘अंतिम उपभोक्ता को विद्युत सेवा प्रदान करने वाले को कर लगाते समय मूल्य में ५ प्रतिशत दर से कर निर्धारित करना होगा।’

अर्थमंत्री वाग्ले ने सरकार की स्पष्ट नीति के तहत बिजली पर ५ प्रतिशत रिड्यूस्ड वैट लागू करने की बात कही है, लेकिन आर्थिक विधेयक और आंतरिक राजस्व विभाग की व्याख्या के अनुसार घरेलू ग्राहक के अलावा अन्य सभी उपभोक्ताओं को १३ प्रतिशत वैट देना होगा।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के विद्युत महसुल संकलन विनियमावली २०७८ के तहत बिजली के १३ प्रकार के ग्राहक होते हैं। इनमें से घरेलू वर्ग को ५० यूनिट तक बिजली पर वैट नहीं लगेगा, और उससे अधिक की खपत पर ५ प्रतिशत वैट लगेगा, ऐसा आंतरिक राजस्व विभाग के निदेशक शिव शर्मा ने बताया।

“प्राधिकरण द्वारा घरेलू ग्राहकों को प्रदान की गई बिजली पर ५ प्रतिशत वैट लगेगा, जबकि उद्योग और अन्य सभी ग्राहक को बिक्री के समय १३ प्रतिशत वैट लगाया जाएगा,” निदेशक शर्मा ने कहा। “आर्थिक विधेयक की धारा ५५ में उल्लिखित अंतिम उपभोक्ता सिर्फ घरेलू उपभोक्ता हैं, इसलिए अन्य सभी ग्राहकों को १३ प्रतिशत वैट देना होगा।”

 

घरेलू उपभोक्ता के अलावा औद्योगिक ग्राहक वैट में पंजीकृत होने के कारण १३ प्रतिशत वैट का क्रेडिट प्राप्त कर सकेंगे, जिससे वैट पंजीकृत पर लागत अधिक नहीं बढ़ेगी।

प्राधिकरण केवल घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए ही नहीं, बल्कि १३ प्रकार के अन्य ग्राहकों को भी बिजली बेचता है, ऐसा प्राधिकरण के पूर्व उपकार्यकारी निर्देशक प्रबल अधिकारी ने बताया।

“नेपाल विद्युत प्राधिकरण की विनियमावली अनुसार वे सभी अंतिम ग्राहक हैं, और सरकार की परिभाषा के अनुसार उन्हें भी ५ प्रतिशत वैट लागू होना चाहिए,” अधिकारी ने बताया।

उन्होंने कहा कि बजट भाषण में अंतिम उपभोक्ता की परिभाषा अलग दी गई है। “यदि अंतिम उपभोक्ता की बात करें तो २५० यूनिट से अधिक बिजली इस्तेमाल करने वाले घरेलू ग्राहक हैं, लेकिन सरकार ने ऐसा स्पष्ट नहीं किया। बिजली व्यापार की पर्याप्त जांच किए बिना नीति बनाई गई है,” उन्होंने कहा।

आंतरिक राजस्व विभाग के निदेशक शर्मा भी मानते हैं कि घरेलू ग्राहक के अलावा सभी पर १३ प्रतिशत वैट लागू होगा।

नई व्यवस्था के तहत बिजली पर १३ प्रतिशत वैट लगाने वाले क्षेत्र

  • औद्योगिक क्षेत्र
  • व्यावसायिक क्षेत्र
  • गैर-व्यावसायिक (सरकारी कार्यालय, स्वामित्व वाली संस्थाएं, स्कूल, विश्वविद्यालय, अस्पताल आदि)
  • सिंचाई
  • पेयजल
  • सड़कबत्ती
  • यातायात (सार्वजनिक यातायात और चार्जिंग स्टेशन सहित)
  • धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल
  • अस्थायी बत्ती
  • गैर-घरेलू (दूतावास, विदेशी मिशन, स्कूल, होटल आदि)
  • मनोरंजन व्यावसाय
  • सामुदायिक थोक उपभोक्ता

विद्युत उत्पादक पर वैट नहीं लगेगा, प्राधिकरण को क्रेडिट नहीं मिलेगा

विद्युत् उत्पादकों को जनता को बिजली बेचते समय ५ प्रतिशत कर लगाने का प्रावधान है परंतु विद्युत प्राधिकरण को क्रेडिट नहीं मिलेगा, ऐसा आंतरिक राजस्व विभाग के निदेशक शर्मा ने बताया।

विद्युत उत्पादक जब नेपाल विद्युत प्राधिकरण को बिजली बेचेंगे तो उन पर वैट नहीं लगेगा, यह व्यवस्था आर्थिक विधेयक में शामिल की गई है। आर्थिक विधेयक ने विद्युत उत्पादन और बिक्री को वैट से छूट प्रदान की है। घरेलू उपयोग के लिए मासिक ५० यूनिट तक बिजली पर कर छूट का प्रावधान भी है।

सरकार ने प्रारंभिक विधेयक में इस प्रकार की व्यवस्था नहीं की थी; पहले विधेयक में घरेलू उपयोग हेतु ५० यूनिट तक बिजली पर कर छूट का प्रावधान था।

 

सोमवार को अर्थ मंत्रालय की वेबसाइट पर नया आर्थिक विधेयक अपलोड होते ही विद्युत शक्ति कारोबार करने वाले व्यवसाय को भी बिक्री पर वैट न लगाने की व्यवस्था जोड़ी गई।

अब विद्युत उत्पादक जब प्राधिकरण को बिजली बेचेंगे तो वैट नहीं देना होगा। निदेशक शर्मा ने बताया कि वैट के कारण मूल्य में किसी प्रकार का भार न पड़े इसलिए इस प्रकार की व्यवस्था की गई है।

शुरू में कानून में घरेलू उपयोग के ५० यूनिट से अधिक सभी बिजली पर वैट लागू था, लेकिन सरकार ने आर्थिक विधेयक में संशोधन कर विद्युत योजना को वैट से मुक्त कर दिया, ऐसा संरक्षक अधिकारी शेषमणि दाहाल ने बताया।

“विधेयक में अंतिम उपभोक्ता की परिभाषा विवादास्पद है; प्राधिकरण उद्योग को उपभोक्ता मानता है या नहीं। यदि माने तो ५ प्रतिशत वैट लगेगा, अंतिम उपभोक्ता घरेलू ही हैं तो बाकी पर १३ प्रतिशत वैट लगेगा,” उन्होंने कहा।

बहरहाल, यदि प्राधिकरण कर संग्रह कर क्रेडिट नहीं देता तो उसे वैट नहीं कहा जा सकता, ऐसा एक पूर्व कर अधिकारी ने बताया।

“क्रेडिट और रिफंड न देने वाले कर को वैट नहीं कहा जा सकता,” उन्होंने कहा, “विद्युत उत्पादक से बिजली खरीदने पर १३ प्रतिशत देना होगा पर उपभोक्ताओं को ५ प्रतिशत लेना अलग तरह की स्थिति है।”

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार आर्थिक विधेयक में बदलाव कर रही है, जिससे नीति निर्माण में समस्या हो रही है।

“कर नीति बनाने में तैयारी आवश्यक है, अन्य देशों में वर्षों लगते हैं, लेकिन सरकार जल्दीबाजी में काम कर रही है,” उन्होंने कहा।

अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा कि बिजली का मूल्य कम कर के उपयोगकर्ता के लिए कीमत अधिक न बढ़ाएंगे। उन्होंने साउन १ तारीख तक कर समायोजन का वचन भी दिया।

“विद्युत नियमन आयोग को अनुरोध कर कीमत समायोजित करेंगे, प्रति यूनिट ५० पैसा कम करना भी राहत होगी,” उन्होंने सोमवार को काठमाडौं में कहा।

वैट लगाने पर कई बार चर्चा होने के बाद मैं पहली बार इसे प्रभावशाली बनाने का प्रयास कर रहा हूँ, उन्होंने कहा। नेपाल सरकार के स्वामित्व में ७०० मेगावाट बिजली उत्पादन प्लांट होने के कारण राहत देने की तैयारी है।

उन्होंने कहा कि बिजली पर वैट लगाना देश के दीर्घकालिक हित में है।

विद्युत उत्पादकों को वैट न लगाना गलत: हितधारक

विद्युत उत्पादक वर्षों से बिजली पर वैट लगाने की मांग कर रहे हैं, पर उत्पादक को वैट न लगाने को गलत बताया गया है।

“हम परियोजना निर्माण के दौरान ली गई वस्तुओं पर वैट देते हैं, लेकिन बिजली बेचते समय वैट न लगने से वैट वापसी नहीं होती, जिससे विद्युत योजना की लागत बढ़ती है और बिजली मूल्य भी बढ़ता है,” उन्होंने कहा।

इसलिए उत्पादक की बिकी हुई बिजली पर वैट लगना चाहिए, उनकी मांग जारी है।

किन बल्झिरहन्छ सीमा विवादको घाउ ? – Online Khabar

किन किनारा विवाद लगातार जारी है?

भारत ने नेपाली भू-भाग में सुरक्षा बल तैनात करके अतिक्रमण किया है। लेकिन प्रधानमंत्री बालेन ने संसद के रोस्टम पर खड़े होकर चल रहे सीमाई विवादों को इस तरह प्रस्तुत किया जैसे नेपाल ही भारत की भूमि में सेंध लगा रहा हो, और इस दृष्टिकोण को एक ही मंच पर रखकर अभिव्यक्ति दी। प्रधानमंत्री की ऐसी अभिव्यक्ति ने नेपाल के राजनीतिक और कूटनीतिक परिप्रेक्ष्य में पुनः हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रवादी धारा के कुछ लोग प्रधानमंत्री बालेन के बयान को गंभीर राष्ट्रद्रोह मान रहे हैं। संसद में विपक्षी दलों ने भी प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांग लिया है। सड़कों पर भी तीव्र विरोध जारी है।

इसी प्रकार, सीमा विवाद को हल्के में देखने वाले कुछ लोग प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन कर रहे हैं और इसे समाधान के नए रास्ते के रूप में व्याख्यायित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की उक्त अभिव्यक्ति राष्ट्रद्रोहात्मक है या नहीं, यह समय ही बताएगा। तथापि, नेपाल का भारत के साथ सीमा विवाद के समाधान में लिया गया इस रुख को यह आत्मघाती कहा जा सकता है। नेपाल-भारत सीमा विवाद का इतिहास लगभग दो सौ वर्षों का है। सुगौली संधि से लेकर प्रधानमंत्री बालेन द्वारा संसद में दिए गए हालिया बयान तक, नेपाल-भारत सीमा विवाद के विभिन्न आयाम और पहलू जुड़े हुए हैं।

कई संधियाँ और समझौतियाँ हो चुकी हैं, फिर भी कई उल्लंघन भी हुए हैं। इसके कारण भारत की भूमि मिचने की प्रवृत्ति से नेपाल और नेपाली जनता को पीड़ाएँ सहनी पड़ी हैं। लेकिन सीमा विवाद का समाधान युद्ध के माध्यम से संभव नहीं है। जितने भी राष्ट्रवादी नारों को बार-बार दोहराया जाए वे अकेले समाधान नहीं दे सकते। अंतिम समाधान का एकमात्र माध्यम कूटनीतिक वार्ता ही हैं। उस वार्ता में अपनी स्थिति कमजोर बनाए बिना प्रधानमंत्री बालेन ने यह क्यों कहा कि “नेपाल ने भी भारत की भूमि मिची है”? आज यह एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण प्रश्न बन गया है।

प्रस्तुत है: नेपाल-भारत सीमा विवाद में सुगौली संधि से लेकर प्रधानमंत्री बालेन के संसद में दिए गए अंतिम अभिव्यक्ति तक का संक्षिप्त वीडियो ब्रिफिंग:

सभामुख डोलप्रसाद अर्याल: नेपाली मूल के लोगों को अलग और व्यापक तरीके से समाहित किया जाना चाहिए

१८ जेष्ठ, काठमांडू। सभापति डोलप्रसाद (डीपी) अर्याल ने कहा है कि विश्व के किसी भी देश में रहने वाले नेपाली मूल के लोगों को नेपाल को अलग और व्यापक ढंग से समाहित करना चाहिए। उन्होंने नेपाली मूल के नागरिकों के छाता संगठन एसोसिएशन ऑफ नेपाली ओरिजिन (एएनओ) के प्रतिनिधिमंडल से सोमवार को सिंहदरबार स्थित अपने कार्यकक्ष में भेंट कर इस विषय पर चर्चा की।

सभापति अर्याल ने नेपाली मूल के लोगों को संबोधित करते हुए नेपाल के राष्ट्रीय हित के अनुसार कानून बनाने और आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के दौरान एएनओ के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सुशीलकुमार पंत ने कहा कि चाहे कितनी भी पीढ़ियाँ हों, नेपाली मूल के लोगों को सांस्कृतिक रूप से नेपाल से जोड़ने और जहां कहीं भी वे रहें, नेपालीपन की रक्षा करने के लिए एक ऐसा वातावरण बनाने में एएनओ सक्रिय है।

पंत ने वर्तमान में चर्चा में चल रहे गैरआवासीय नेपाली संबंधित कानून के मसौदे में नेपाली मूल के व्यक्तियों की परिभाषा समेत अन्य विषयों पर अपने संगठन की ओर से दिए गए सुझावों को शामिल करने का आग्रह किया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने एएनओ की ओर से तैयार किया गया ज्ञापन सभापति अर्याल को सौंपा। ज्ञापन में कानून के मसौदे में शामिल कुछ बिंदुओं को असंगत, अव्यावहारिक और विदेशों में पीढ़ियों से बसे नेपाली लोगों को नेपाल से जोड़ने के लिए अपर्याप्त बताते हुए ऐसे प्रावधानों को हटाने की मांग की गई है। एएनओ के प्रतिनिधिमंडल ने परराष्ट्र सचिव अमृत राई से भी भेंट कर उक्त कानून में शामिल करने के लिए सुझावपत्र सौंपा था।