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लेखक: space4knews

अन्य दलों से आए नेताओं को समायोजित करने के लिए रास्वपा ने गठित किया संघीय नेतृत्व मञ्च

समाचार सारांश

संपादन समीक्षा पश्चात।

  • राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी ने अन्य दलों से आए नेताओं को समायोजित करने के लिए संघीय नेतृत्व मञ्च बनाया है।
  • संघीय नेतृत्व मञ्च को रास्वपा का विधान मान्यता नहीं देता और महाधिवेशन के बाद इसे समाप्त कर दिया जाएगा।
  • संघीय नेतृत्व मञ्च में वर्तमान में २५ सदस्य हैं, लेकिन उनकी भूमिका और अधिकार निर्धारित नहीं हैं।

९ वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने अंतरिम पार्टी संरचना बनाई है। अन्य दलों से रास्वपा में शामिल हुए और केन्द्रीय समिति में शामिल न हो पाए व्यक्तियों को समायोजित करने के लिए संघीय नेतृत्व मञ्च गठित किया गया है।

संघीय नेतृत्व मञ्च में अन्य दलों से रास्वपा में आए व्यक्ति और कार्यकर्ता को शामिल किया गया है। उपाध्यक्ष डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा प्रस्तुत अवधारणा के आधार पर यह मञ्च बनाया गया है।

महाधिवेशन तक के लिए संघीय नेतृत्व मञ्च गठित किया गया है, इसकी जानकारी प्रवक्ता मनिष झाले दी है। अन्य दलों से आए नेताओं को पार्टी के केन्द्रीय स्तर की संरचना में एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इस मञ्च का गठन किया गया है। महाधिवेशन के बाद इसे विघटित करने के लिए यह अल्पकालीन संरचना है।

संघीय नेतृत्व मञ्च को रास्वपा का विधान मान्यता नहीं देता। रास्वपा के विधान के अनुसार केन्द्रीय स्तर पर आठ संरचनाएं संचालित होती हैं, जिनमें राष्ट्रिय महाधिवेशन, केन्द्रीय परिषद्, केन्द्रीय समिति, सलाहकार परिषद्, अनुशासन आयोग, निर्वाचन आयोग, लेखा और विभाग शामिल हैं। संघीय नेतृत्व मञ्च विधान के बाहर बनाया गया है।

विवेकशील साझा दल से रास्वपा में आए नेताओं को एकत्रित करने के लिए अलग संरचना बनाकर संघीय नेतृत्व मञ्च की शुरुआत हुई थी। विवेकशील साझा दल के साथ एकता के बाद दल के १७ नेता इस मञ्च में रखे गए थे।

समीक्षा बास्कोटा, प्रकाशचन्द्र परियार, बिमला अधिकारी, रंजु दर्शना, पवित्रा थापा, बिमल तामांग, समुद्र केसी, दामोदर नेपाल, आशुतोष प्रधान, नवराज थापा, सुरज प्रधान, धनेज थापा, सुदन श्रेष्ठ, अजित खड़्का, रुस्तम अन्सारी, सुशील शाह और शीतल भूसाल को संघीय नेतृत्व मञ्च में सम्मिलित किया गया था।

विवेकशील साझा से इस मञ्च के १७ सदस्यों में से सात को बाद में केन्द्रीय समिति में शामिल किया गया। पूर्व विवेकशील साझा के समीक्षा बास्कोटा, प्रकाशचन्द्र परियार, रंजु दर्शना, सुरज प्रधान, नवराज थापा, आशुतोष प्रधान और धनेज थापा अब रास्वपा के केन्द्रीय सदस्य हैं। पूर्व विवेकशील साझा के १० नेता अभी भी संघीय नेतृत्व मञ्च में हैं।

रास्वपा के साथ एकता टूटने के बावजूद उज्यालो नेपाल पार्टी के केन्द्रीय सदस्यों को भी रास्वपा ने संघीय नेतृत्व मञ्च में मनोनीत किया है। उज्यालो नेपाल के डॉ. विशाल भंडारी, निर्देश सिलवाल, डॉ. तारा जोशी, डॉ. शंकर ढकाल, रीमा विश्वकर्मा, संजीव भट्टराई सहित कई सदस्य मञ्च में शामिल हैं। इनमें से दो सांसद भी हैं। जोशी ने डडेलधुरा से सीधे चुनाव जीता है जबकि विश्वकर्मा समानुपाती सांसद हैं।

सोमवार को रास्वपा ने संघीय नेतृत्व मञ्च का विस्तार किया है। केन्द्रीय समिति की बैठक में आठ और सदस्यों को मनोनीत करने का निर्णय लिया गया। तुलसीप्रसाद चौधरी, रामसिंह थारू, जीवन धामी, हरिशरण आचार्य, प्रेमा चौधरी, नवराज राणा, राजेन्द्रबहादुर अधिकारी और एकराज चौधरी को मञ्च में जोड़ा गया है। तीसरे विस्तार के बाद यह मञ्च २५ सदस्यीय हो गया है।

संघीय नेतृत्व मञ्च गठित होने के बावजूद, इसके सदस्यों की भूमिका और दायित्व स्पष्ट नहीं किए गए हैं। उनके अधिकार भी निर्धारित नहीं हैं।

मञ्च के एक सदस्य ने बताया, ‘कहा गया है कि यह केन्द्रीय सदस्य से नीचे की श्रेणी और जिम्मेदारियों वाला होगा। मञ्च का काम अभी निश्चित नहीं हुआ है और अभी तक एक भी बैठक नहीं हुई है।’

मञ्च के नेताओं के साथ पार्टी नेतृत्व की अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है।

प्रवक्ता झा के अनुसार, संघीय नेतृत्व मञ्च के सदस्यों को सलाह और सुझाव के लिए केन्द्रीय समिति की बैठक में आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘महाधिवेशन न होने की स्थिति में यह अल्पकालीन व्यवस्था है। महाधिवेशन में मुकाबला जीतने वाले ही केन्द्रीय सदस्य बनेंगे, जो हारेंगे वे इसमें शामिल नहीं होंगे।’

रास्वपा के विधान के अनुसार १२९ सदस्य वाली केन्द्रीय समिति है। बालेन शाह पक्ष के साथ एकता होते हुए भी केन्द्रीय समिति पूरी तरह नहीं बनी है। बालेन और पूर्व विवेकशील धारा के नेताओं को मिलाकर वर्तमान में रास्वपा के केन्द्रीय समिति का आकार ९२ सदस्य है।

अन्य दलों से आए सभी नेताओं को केन्द्रीय समिति में शामिल नहीं किया जा सका, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में संघीय नेतृत्व मञ्च का गठन किया गया है, प्रवक्ता झा ने बताया।

सकियो अमेरिकी सहायक विदेशमन्त्रीको नेपाल भ्रमण, रास्वपासँग दुई देशबीच साझेदारीबारे छलफल

अमेरिकी सहायक विदेशमंत्री समीर पल कपुर का नेपाल दौरा संपन्न, रास्वपा प्रमुख के साथ द्विपक्षीय भागीदारी पर चर्चा

अमेरिकी सहायक विदेशमंत्री समीर पल कपुर ने ९ वैशाख को समाप्त हुए अपने नेपाल दौरे में नेपाल-अमेरिका साझेदारी को मजबूत करने के विषय पर विचार-विमर्श किया। कपुर ने सत्ता पक्ष रास्वपा के सभापति, परराष्ट्र मंत्री और अर्थ मंत्री से भेंट कर द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक सहयोग के विस्तार पर बातचीत की। वे अमेरिकी निवेश सम्मेलन के लिए नेपाली प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा करते हुए प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं की खोज में लगे थे।

९ वैशाख, काठमाडौं। अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेशमंत्री समीर पल कपुर का नेपाल दौरा आज संपन्न हो गया। दौरे के दौरान उन्होंने उच्च स्तरीय बैठक में नेपाल और अमेरिका के बीच साझेदारी सुदृढ़ीकरण और व्यावसायिक संबंधों के विस्तार पर चर्चा की, ऐसा नेपाल स्थित अमेरिकी दूतावास ने जानकारी दी है।

भारतीय मूल के कपुर ७ वैशाख को काठमाडौं आए थे। बालेन सरकार के गठन के बाद काठमाडौं आने वाले सबसे वरिष्ठ विदेशी कूटनीतिज्ञ वे ही हैं। नेपाल में रहने के दौरान उन्होंने सत्ता पक्ष रास्वपा के सभापति रवि लामिछाने, परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल और अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले से अलग-अलग भेटवार्ता की। उन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने, निवेश को बढ़ावा देने और आर्थिक सहयोग के विस्तार के विषय में विचार साझा किए गए।

सहायक सचिव कपुर ने अमेरिका में आयोजित निवेश सम्मेलन में भाग ले रहे नेपाली प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिकी निवेश के अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी और नेपाली निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की और नेपाल में तेजी से विकसित हो रहे प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का अन्वेषण किया। दौरे के दौरान उन्होंने नेपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का भी अवलोकन किया। बौद्धनाथ स्तूपा और पाटन दरबार स्क्वायर का दौरा करते हुए उन्होंने बताया कि इन विरासतों के संरक्षण के लिए अमेरिका की तरफ से ‘एंबेसडर फंड फॉर कल्चरल प्रिजर्वेशन’ के माध्यम से सहायता प्राप्त हो रही है।

करिब एक सय स्थानीय तहहरूको संख्या तथा सीमा संशोधनका लागि प्रस्तावहरू

संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयमा स्थानीय तहको संख्या र सीमा संशोधन गर्न ९७ वटा प्रस्तावहरू पेश भएका छन्। नेपाल नगरपालिका संघले ८३ वटा वडाहरूमा सीमा र कार्यक्षेत्रको समस्या रहेको उल्लेख गर्दै तत्काल व्यवस्थापन गर्न सुझाव दिएको छ। संघले बुटवल महानगरपालिका स्थापना गर्ने र काठमाडौँ मेट्रो सिटी अवधारणा कार्यान्वयन गर्ने सुझाव पनि दिएको छ। ८ वैशाख, काठमाडौं।

लगभग एक सय आसपास स्थानीय तहको संख्या र सीमा संशोधन गर्नुपर्ने प्रस्तावहरू संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयमा पेश भएका छन्। तीमध्ये केही प्रस्ताव वडाको सीमा व्यवस्थापनसँग सम्बन्धित छन् भने केहीमा गाउँपालिकाहरू समेटेर नगरपालिका स्थापनाको प्रस्ताव गरिएको छ। मन्त्रालयमा पेश प्रस्तावहरूको अध्ययन गरेर नेपाल नगरपालिका संघले दुई महिनाअघि अर्को छुट्टै प्रतिवेदन संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयलाई बुझाएको छ।

नेपाल नगरपालिका संघका कार्यकारी निर्देशक र प्रतिवेदन तयार पार्ने टोलीका संयोजक कलानिधि देवकोटाले आफूहरूले तयार पारेको प्रतिवेदन मन्त्रालयमा पेश भइसकेको र त्यसमा थप प्रक्रिया भएको कुनै सूचना नभएको बताए। उनले भने, ‘हामीले आधारभूत रुपमा नगरपालिका बन्ने मापदण्ड पुगेका गाउँपालिका र नगरपालिकाहरूको सम्भावित स्तरोन्नतीको अध्ययन गरेका छौं।’

नेपाल नगरपालिका संघले बुटवल र वरपरका उपयुक्त क्षेत्रहरू समेटेर बुटवल महानगरपालिका बनाउन सुझाव दिएको छ। लुम्बिनी प्रदेशको अस्थायी राजधानी बुटवल बनाइए तापनि पछि दाङको राप्ती उपत्यकामा सारिएको छ। संघले बुटवललाई वरपरका उपयुक्त क्षेत्रहरू समेटेर महानगरपालिकाको रूपमा विकास गर्ने सम्भावना थप अनुसन्धान गर्न आवश्यक रहेको बताएको छ।

अमेरिका द्वारा युद्धविराम अवधि बढ़ाए जाने पर इरान में क्यों उभरी शंका?

९ वैशाख, काठमाडौं । इरानी अधिकारियों ने अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए युद्धविराम की अनुपालना को लेकर शंका जाहिर की है। इरानी संसद के सभापति मोहम्मद बगर गालिबाफ के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने अमेरिका पर अचानक हमला करने की संभावना जताते हुए युद्धविराम की पालना को लेकर संशय व्यक्त किया है। उन्होंने युद्धविराम बढ़ाने को निराधार बताया है।

मोहम्मदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘हारने वाला पक्ष शर्तें नहीं निर्धारित कर सकता। घेराबंदी जारी रखने का मतलब बमबारी से अलग नहीं है। इसका जवाब सैन्य कार्रवाई से दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अचानक हमले की तैयारी के तहत युद्धविराम की अवधि बढ़ाई गई है और अब इरान के आक्रमण का समय आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने २२ अप्रैल को युद्धविराम अवधि अनिश्चितकाल तक बढ़ाने की घोषणा की थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के आग्रह पर समय बढ़ाने का कदम उठाया गया, ऐसा उनका दावा है।

इरान के साथ वार्ता न पूरी होने तक ट्रंप ने युद्धविराम अवधि बढ़ाने की घोषणा की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि इरान के साथ वार्ता पूरी न होने तक युद्धविराम की अवधि बढ़ाई जाएगी। तेहरान के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत करने वाले प्रस्ताव के न आने तक इरान पर समुद्री नाकाबंदी जारी रहेगी, ट्रंप ने यह बयान दिया है। अमेरिका और इरान के बीच दो सप्ताह की युद्धविराम अवधि बुधवार को समाप्त होने वाली है। दूसरी चरण की वार्ता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वार्ता के लिए मंगलवार को इस्लामाबाद जाने वाले अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस फिलहाल वाशिंगटन में ही हैं। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि पेंस पाकिस्तान नहीं जाएंगे। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने CBS को बताया कि वे प्रत्यक्ष वार्ता की जानकारी देने की तैयारी कर रहे हैं।

इरान ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता के लिए किसी टीम भेजने का फैसला नहीं किया है, यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दी है। युद्धविराम बढ़ाने के इस फैसले का संयुक्त राष्ट्र ने स्वागत किया है। महासचिव एंतोनियो गण्टेरेश ने ट्रंप की घोषणा का समर्थन करते हुए सभी पक्षों से आग्रह किया है कि वे युद्धविराम का उल्लंघन किए बिना रचनात्मक वार्ता में भाग लें। गण्टेरेश ने पाकिस्तान की भूमिका को भी समर्थन देते हुए दीर्घकालीन समाधान की आशा व्यक्त की है।

पिछली युद्धविराम अवधि बढ़ाने से पहले अमेरिका ने इरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने का प्रयास किया था। सोमवार को अमेरिका के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने इरान, टर्की और संयुक्त अरब अमीरात से कारोबार करने वाले 14 व्यक्ति और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए जाने की घोषणा की। अमेरिका का आरोप है कि ये व्यक्ति और संस्थाएं इरान सरकार की ओर से हथियार खरीदने और उनके परिवहन में शामिल हैं।

सातवटा गिनिज वर्ल्ड रेकर्ड राखेका हरिचन्द्र सबैतिरबाट उपेक्षित

सात गिनिज वर्ल्ड रेकर्ड बनाने वाले हरिचन्द्र गिरी उपेक्षित बने हुए हैं

नेपाली सेनाका हरिचन्द्र गिरी ने ४ जनवरी २०२६ को चीन के चुंगकिंग स्थित युन्यांग में १०० सीढ़ियाँ केवल ४.७१ सेकंड में चढ़कर सातवाँ गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। गिरी ने २०२१ से २०२३ के बीच विभिन्न विधाओं में ७ गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके सभी प्रयास स्वयं की पहल और खर्च पर हुए हैं, इसलिए आर्थिक सहायता की अपील की है। ९ वैशाख, काठमाडौं।

गिरी ने केवल हाथों का सहारा लेकर ४.७१ सेकंड में १०० सीढ़ियाँ चढ़ी थीं। गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते समय उन्हें अनेक लोगों ने बधाई दी। हरिचन्द्र वहां भी अपनी ही जेब से गए थे। पिछले वर्ष ‘द ब्रिटेन्स गट टैलेंट’ के ऑडिशन के लिए जाते वक्त उन्होंने हाथ का सहारा लेकर उल्टा दिशा में आधा लीटर (५०० एमएल) नींबू पानी २४ सेकंड में पीते हुए गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।

गिरी ने यह कीर्तिमान १० सितंबर २०२५ को लंदन में गिनिज हैड ऑफिस में बनाया था। नेपाली सेना के शारीरिक प्रशिक्षण तथा खेलकूद केन्द्र के लांस कॉर्पोरल गिरी का यह छठा गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड था। उन्होंने चलते हुए टायर पर १ मिनट में १२० बार स्किपिंग करके “मोस्ट स्किप्स ऑन यान अपराइट टायर” विधा में गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल किया था।

गिरी ने १३ वर्ष पहले नेपाली सेना में प्रवेश किया था और अब तक सात गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड रखने के बावजूद वे हर जगह से उपेक्षित होने की शिकायत करते हैं। उन्होंने कहा, “मैंने जितने भी कौशल और कला प्रस्तुत किए, वे सभी मेरी अपनी पहल, मेहनत और खर्च में हुए। सरकार भी अपनी प्राथमिकताएँ रखती होगी, पर अब तक मुझे कोई मदद नहीं मिली।” उन्होंने कहा कि यदि उन्हें आर्थिक सहायता मिलती है तो वे ‘द ब्रिटेन्स गट टैलेंट’ के ऑडिशन में भाग ले सकते हैं और सहयोग की अपील की है।

गर्भपतन कराने के दौरान नर्सिंग होम और क्लिनिक दौड़ाने से २९ वर्षीय महिला की मृत्यु

८ वैशाख, बुटवल । गर्भपतन कराने के लिए नर्सिंग होम और क्लिनिक सहित चार स्वास्थ्य संस्थान घुमाते हुए पाल्पा की २९ वर्षीय महिला की मृत्यु हो गई है। गर्भपतन कराने के क्रम में पाल्पा बगनासकाली गाउँपालिका-२ की गीता पाण्डे की मृत्यु हुई है। लगभग १२ सप्ताह के भ्रूण की सेहत खराब होने के कारण गीता ५ वैशाख को अपने पति के साथ बुटवल इँटाभट्टी में स्थित खत्री नर्सिंग होम गई थीं। उन्हें इससे पहले २७ चैत को जाँच के लिए खत्री नर्सिंग होम लाया गया था। वहां डॉ. डीबी खत्री ने गर्भ असामान्य बताकर ४ वैशाख के लिए बुलाया था। गीता ५ वैशाख को खत्री नर्सिंग होम गईं। नर्सिंग होम ने लोकेशन मैप के साथ बुटवल अस्पताल लाइन पर स्थित जोनल फार्मेसी क्लिनिक भेज दिया। वहां की फार्मेसी ने बताया कि गर्भपतन के लिए १६ हजार रुपये शुल्क लगेगा, २ हजार अग्रिम लेकर दो प्रकार की दवाइयां दीं, यह जानकारी गीताके पति प्रकाश पाण्डे ने दी। जोनल फार्मेसी से उन्हें इन्दु लेखा क्लिनिक ले जाया गया, जहाँ गर्भपतन कराने के दौरान गीता की मृत्यु हुई, प्रकाश ने जानकारी दी। डॉ. सतिश रुपाखेती ने इन्दु लेखा क्लिनिक में जांच की। उन्होंने बताया, ‘जोनल फार्मेसी ने दो दवाइयाँ दी थीं। फार्मेसी के अनुसार शाम को एक गोली और सुबह एक गोली दी गई। अगले दिन बुलाए गए समय पर जोनल फार्मेसी गए, फिर दूसरी दवा दी गई।’ प्रकाश ने कहा, ‘कोई फार्म नहीं भरा गया था। फार्मेसी में दो घंटे आराम करने को कहा गया था। लेकिन दो घंटे बाद पीछे के रास्ते से इन्दु लेखा क्लिनिक ले जाया गया। वहां मुझे बाहर रखा गया और गीता को अंदर कमरे में ले जाकर क्या किया गया, मुझे पता नहीं।’ प्रकाश ने बताया कि गर्भपतन कराया गया भ्रूण उन्होंने नहीं देखा और जब उनकी पत्नी बेहोश हो गई, तो बिना सूचना दिए उन्हें लुम्बिनी सिटी अस्पताल के आपातकालीन कक्ष ले जाया गया जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

श्रीमती की मृत्यु पर प्रकाश ने स्वास्थ्य संस्थानों पर इलाज के नाम पर अत्यंत लापरवाही करने और व्यापार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जोनल फार्मेसी ने लोकेशन कार्ड और अन्य उपचार रिपोर्टें छुपाई हैं। ‘आर्थिक लाभ पाने के उद्देश्य से मिलकर बिना अनुमति भ्रूण फेंकने का आपराधिक जाल बनाया गया और बदनीयत रूप से लापरवाही की गई है। मुझे न्याय चाहिए,’ उन्होंने कहा, ‘कर्तव्यपलित मृत्यु के कारण मैं ने किटानी जाहेरी दी है।’

श्रीमती गीता की मृत्यु के मुख्य दोषी डॉ. डीबी खत्री और डॉ. सतिश रुपाखेती को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग करते हुए प्रकाश ने इलाका पुलिस कार्यालय बुटवल में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसके अलावा सन्ध्या बस्नेत (जोनल फार्मेसी/क्लिनिक संचालक), निलम घर्ती मगर (जोनल फार्मेसी), खगेन्द्रप्रसाद पाण्डे (इन्दु लेखा स्वास्थ्य क्लिनिक संचालक) के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर आवश्यक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है, ऐसा इलाका पुलिस कार्यालय के प्रमुख डीएसपी निशांत श्रीवास्तव ने बताया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सन्ध्या बस्नेत, निलम घर्ती मगर और खगेन्द्र पाण्डे शामिल हैं। मृतक के परिजन खत्री नर्सिंग होम, जोनल फार्मेसी और इन्दु लेखा क्लिनिक पर तालाबंदी कर चुके हैं। मृतक गीता रक्त संचार सेवा केंद्र भैरहवा की कर्मचारी थीं।

भारत में १५० रुपए में मिलने वाला पेट्रोल काठमांडू में क्यों बिकता है २१९ रुपए में?

भारत की सीमा से जुड़े रुपैडिहा बाजार में पेट्रोल की कीमत ९७ रुपये भारतीय अर्थात् नेपाली १५५ रुपये २० पैसे प्रति लीटर है। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश के रुपैडिहा के समीप नेपालगंज में पेट्रोल की कीमत २१६ रुपये ५० पैसे है। इसका मतलब है कि भारत की खुली सीमा से मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर पेट्रोल नेपाल की तुलना में ६१ रुपये सस्ता उपलब्ध है।

नेपाल के सीमावर्ती भारतीय बाजारों में पेट्रोल नेपाली बाजार की तुलना में ५० से ६० रुपये तक सस्ता मिलने से सीमा क्षेत्र के भारतीय पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने के लिए नेपाली वाहनों की भीड़ लगने लगी है। हालांकि, सस्ता होने के बावजूद भारत में पेट्रोल पंपों पर नेपाल की तरह आसानी से ईंधन नहीं मिल पाता, ऐसा अनुभवी लोग बताते हैं। भारत में ईंधन की कमी होने पर सस्ते दामों पर ईंधन लेने के लालच में वहां गए कई नेपाली घंटों लाइन में खड़े रहते हैं और कुछ खाली हाथ लौटने को मजबूर भी हुए हैं, ऐसा पीड़ित लोग बताते हैं।

नेपालगंज के सीमा के पार स्थित रुपैडिहा बाजार के कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल समाप्त होने की सूचना लगाई गई है। पेट्रोल उपलब्ध कराने वाले पंपों पर वाहन और मोटरसाइकिलों की लंबी कतारें देखी जाती हैं। नेपालगंज के जमुनाहा नाके से जुड़े रुपैडिहा के एक पेट्रोल पंप पर मिले सीएल चौधरी ने बताया कि उन्होंने डेढ़ घंटे लाइन में लगकर भारतीय १,००० रुपये के पेट्रोल की प्राप्ति की। उन्होंने कहा, “शुरू में लाइन में खड़े भारतीय नागरिकों ने कहा था कि नेपाली नंबर की मोटरसाइकिल को पेट्रोल नहीं देंगे, लेकिन मैंने सीधे पंप कर्मचारी से पूछा तो उन्होंने कहा ‘दूंगा’, तब मैं लगभग डेढ़ घंटे तेज धूप में लाइन में खड़ा रहा।”

भारत ने मार्च २७ को पेट्रोल और डीजल पर १० रुपये प्रति लीटर अंत स्टॉक शुल्क घटाने का फैसला किया था। भारत के पेट्रोलियम और गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत में पेट्रोल पर प्रति लीटर २६ रुपये और डीजल पर ८१ रुपये ९० पैसे का नुकसान उठाकर सरकार ईंधन की बिक्री कर रही है। नेपाल आयल निगम के प्रवक्ता मनोजकुमार ठाकुर के अनुसार भारत में ईंधन सस्ता होने का कारण है कि सरकार घाटा सहकर बिक्री कर रही है और करों में छूट दी है। नेपाल में ईंधन की कीमतें महंगी होने के कारण कई छात्र संगठन और राजनीतिक दल सरकार से छूट देने की मांग कर रहे हैं।

यस्तो छ एकता र विभाजनको श्रृंखला – Online Khabar

कम्युनिस्ट पार्टी का ७७वां स्थापना दिवस: एकता और विभाजन की यात्रा

९ वैशाख, काठमांडू। टूट-फूट का सामना कर रहे नेपाल के कम्युनिस्ट पार्टियां आज अपना स्थापना दिवस मना रही हैं। आज से ७७ साल पहले, भारत के कोलकाता में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई थी। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक महासचिव पुष्पलाल श्रेष्ठ थे, जबकि अन्य संस्थापक नेताओं में निरंजन गोविंद वैद्य, नरबहादुर कर्माचार्य, नारायणविलास जोशी और मोतिदेवी श्रेष्ठ शामिल थे। हालांकि, इस पार्टी के गठन में मनमोहन अधिकारी, तुलसीलाल अमात्य, केशरजंग रायमाझी जैसे नेता भी जुड़े थे। नेपाल में जहानियाँ राणाशासन के दौर में भूमिगत रूप से स्थापित इस पार्टी का उद्देश्य सामंतीवाद, दलाल-नौकरशाही पूंजीवाद और साम्राज्यवाद से नेपाली जनता और राष्ट्र को मुक्त करना था।

कम्युनिस्ट पार्टी के दूसरे महासचिव मनमोहन अधिकारी और तीसरे महासचिव तुलसीलाल अमात्य थे। इसी दौरान, कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने २०११ साल में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया था। २०१५ साल के पहले आम चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ने चार सीटें जीती थीं। तत्कालीन राजा महेन्द्र ने जननिर्वाचित सरकार को गिरा कर पंचायती व्यवस्था लागू करने के बाद नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी फिर से प्रतिबंधित हो गई। उस दौरान केशरजंग रायमाझी समर्थित पक्ष ने पंचायती व्यवस्था का समर्थन किया, जिससे पार्टी विभाजित हो गई। विभाजन के बीच झापा में तत्कालीन झापाली क्रांतिकारियों ने ‘वर्गशत्रु सफाया’ अभियान चलाते हुए झापा क्रांति के माध्यम से नेकपा माले और वर्तमान एमाले का रूप लिया। पुष्पलाल और मनमोहन के समूह अंततः २०४७ के बाद एमाले धारा में एकीकृत हुए।

मोहनविक्रम सिंह, निर्मल लामाले नेतृत्व किए विभिन्न समूह नेकपा चौम, नेकपा मोटा मशाल, नेकपा पतला मसाल, नेकपा एकता केन्द्र से होकर आज के माओवादी धारा में परिवर्तित हो गए हैं। हालांकि, मोहनविक्रम सिंह अभी भी पतला मसाल का नेतृत्व कर रहे हैं। २०१५ साल में चार सीटें जीतकर अस्तित्व में आई नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी पंचायती काल में विभिन्न धाराओं में विभाजित हो गई। २०४६ साल के जनआंदोलन के बाद तत्कालीन माले और मार्क्सवादी ने मिलकर बनाए गए एमाले संसद में ६९ सीटों के साथ सशक्त विपक्ष बने, जबकि तत्कालीन जनमोर्चा और वर्तमान माओवादी ९ सीटों के साथ तीसरे दल बने। २०५२ साल में माओवादी ने जनयुद्ध शुरू किया और संसदीय राजनीति छोड़ दी। माओवादी ने २०५१ साल के आम चुनाव का बहिष्कार किया, जिससे एमाले ८८ सीटों के साथ पहली पार्टी बनी और दक्षिण एशिया में पहली कम्युनिस्ट एकल सरकार बनाई। २०५४ साल में एमाले विभाजित हुई, जिसके बाद २०५६ की आम चुनाव में ७० सीटों के साथ पुनः दूसरी पार्टी बनी।

ऐतिहासिक जनआन्दोलन के बाद २०६४ में हुए पहले संविधान सभा चुनाव में नेकपा माओवादी प्रत्यक्ष क्षेत्र में बहुमत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनी। २०७० के दूसरे संविधान सभा चुनाव में एमाले दूसरी और माओवादी तीसरी पार्टी बनी। इस बीच नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी से मनमोहन अधिकारी, माधवकुमार नेपाल, पुष्पकमल दाहाल प्रचंड, झलनाथ खनाल, बाबुराम भट्टराई और केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री बने। २०७४ साल के प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा चुनाव में गठबंधन बनाकर लड़े गए दो कम्युनिस्ट पार्टियों, एमाले और माओवादी ने लगभग दो-तिहाई बहुमत से सीटें जीतीं। यह नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के करीब ७० साल के इतिहास में सबसे बड़ी सफलता थी। चुनावी गठबंधन के बाद २०७५ जेठ ३ को एमाले और माओवादी के बीच पार्टी एकता हुई और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) का गठन हुआ।

नेकपा के आंतरिक विवाद के चरम पर, सर्वोच्च अदालत ने इस एकता को रद्द कर दिया, जिससे अब एमाले और माओवादी फिर से पुराने स्वरूप में लौट आए हैं। उस समय सरकार का नेतृत्व कर रही नेकपा एमाले भी विभाजित हुई। एमाले से अलग होकर माधव कुमार नेपाल ने अपनी अगुवाई में नेकपा एकीकृत समाजवादी बनाई, जिसमें उन्होंने २८ केंद्रीय सदस्यों को शामिल कर २०७८ साल भदौ २ को निर्वाचन आयोग में पार्टी दर्ज कराई।

हाल के भदौ २३-२४ के जनजीवन क्रांति के बाद नेपाल की राजनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन के साथ कम्युनिस्ट पार्टियों में एकता और ध्रुवीकरण दिखाई दे रहा है। २०८२ कात्तिक १९ को प्रचंड नेतृत्व वाले नेकपा माओवादी और माधव नेपाल नेतृत्व वाली एकीकृत समाजवादी सहित १० कम्युनिस्ट घटकों ने मिलकर ‘नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी’ की घोषणा की। पार्टी के संयोजक प्रचंड एवं सहसंयोजक माधव कुमार नेपाल बने। बाद में इस पार्टी में करीब एक दर्जन छोटे समूह शामिल हुए।

परन्तु २१ फागुन के प्रतिनिधि सभा चुनाव में नई पार्टी रास्वपा ने अकेले १८२ सीटें जीतीं। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रत्यक्ष क्षेत्र में ८ और समानुपातिक तौर पर ९, कुल १७ सीटें ही हासिल कीं। नेकपा एमाले ने प्रत्यक्ष क्षेत्र में ९ और समानुपातिक में १६, कुल २५ सीटें जीतीं। चुनाव के तुरंत बाद बने बालेन सरकार ने जनजीवन क्रांति पर दमन के आरोप में तत्कालीन प्रधानमंत्री और नेकपा एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार किया।

अब प्रचंड सहित शीर्ष नेताओं की संपत्ति शुद्धिकरण समेत अन्य जांच चल रही है। चुनाव में घटते परिणाम और शीर्ष नेताओं के विवादित मामलों के कारण कम्युनिस्ट पार्टियां अस्तित्व संरक्षण की चुनौती में हैं। इसलिए कम्युनिस्ट पार्टी के ७७वें स्थापना दिवस के अवसर पर शुभकामना संदेश जारी करते हुए नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक प्रचंड ने नेपाल के समग्र कम्युनिस्ट आंदोलन के पुनर्गठन की आवश्यकता पर जोर दिया और इसके लिए आह्वान किया है।

आंतरिक विवाद के कारण कम्युनिस्ट पार्टियां टूट-फूट का सामना कर रही हैं और एकता के प्रयास विफल हो रहे हैं, जिससे नेता और कार्यकर्ता निराश हैं। वहीं, नेताओं में कम्युनिस्ट आचरण और व्यवहार के अभाव से आम जनता के बीच उनका प्रति वितृष्णा बढ़ी है।

पाकिस्तान के आग्रह पर अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम अवधि बढ़ाई, हमला स्थगित

समाचार सारांश

OK AI द्वारा निर्मित। सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ युद्धविराम अवधि बढ़ाने की घोषणा की है।
  • ट्रम्प ने युद्धविराम विस्तार करने का निर्णय पाकिस्तान के मध्यस्थों के आग्रह पर लिया है।
  • ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी को युद्ध की कार्रवाई बताते हुए युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया है।

९ वैशाख, काठमाडौँ। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ युद्धविराम अवधि बढ़ाने की घोषणा की है। उन्होंने तेहरान को युद्ध समाप्त करने के लिए अधिक समय देने हेतु आक्रमण स्थगित करने का भी संकेत दिया है।

मंगलवार को लिया गया यह निर्णय पाकिस्तान के मध्यस्थों के आग्रह पर हुआ, ऐसा ट्रम्प ने बताया। इससे पहले ट्रम्प ने बुधवार तक ईरान की सहमति न बनने पर आक्रमण करने की धमकी दी थी।

ट्रम्प ने कहा कि युद्धविराम अवधि में विस्तार के बावजूद ईरान पर नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘मैंने हमारी सेनाओं को नाकाबंदी जारी रखने और हर स्थिति के लिए तैयार रहने का निर्देश दे दिया है। उनकी प्रस्तावना आने तक और वार्ता निष्कर्ष तक युद्धविराम बढ़ाया जाएगा।’

हालांकि युद्धविराम कितने समय के लिए बढ़ाया गया है, इसका खुलासा ट्रम्प ने नहीं किया।

युद्धविराम विस्तार ट्रम्प प्रशासन के अचानक निर्णय बदलाव की मिसाल साबित हुआ है। सोशल मीडिया पर घोषणा करने से कुछ घंटे पहले ही ट्रम्प ने युद्धविराम न बढ़ाने और ईरान पर बड़ा हमला करने की चेतावनी दी थी।

वहीं, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी की आलोचना की, जिससे बुधवार निर्धारित वार्ता में उनकी भागीदारी अनिश्चित हो गई थी।

बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने युद्धविराम बढ़ाने के लिए ट्रम्प का धन्यवाद किया और कहा कि इस्लामाबाद संघर्ष समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा।

‘म आशा करता हूँ कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन जारी रखेंगे और इस्लामाबाद में होने वाली दूसरी चरण की वार्ता से स्थायी समाधान निकलेगा,’ शरीफ ने ट्विटर पर लिखा।

फिर भी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहने के कारण यह अभी अनिश्चित है कि युद्धविराम विस्तार से ईरान को वार्ता के लिए तैयार किया जा सकेगा या नहीं।

ट्रम्प के इस बयान पर ईरान की ओर से तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। तेहरान स्थित आधिकारिक तासनीम समाचार एजेंसी ने कहा है कि इसका औपचारिक नजरिया बाद में सार्वजनिक किया जाएगा।

मंगलवार को, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नाकाबंदी को ‘युद्ध की कार्रवाई’ बताते हुए मौजूदा युद्धविराम का उल्लंघन बताया था।

‘ईरान प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करने, अपने हितों की रक्षा करने और दबाव का सामना करने की कला जानता है,’ अराघची ने लिखा।

‘नेतृत्व विभाजन’ को लेकर ट्रम्प का दावा ‘गलतफहमी’

फरवरी २८ से अमेरिका और इजरायल ईरान पर आक्रमण कर चुके हैं, जिसमें सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह अली खामेनी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए हैं।

फिर भी तेहरान की सत्ता संरचना में स्पष्ट विभाजन नहीं दिखता, जहाँ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर नेतृत्व कर रहा है।

खामेनी के स्थान पर उनके बेटे मोज्तबा खामेनी हैं, जो पिछले महीने नियुक्त हुए और सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

तेहरान स्थित अल जज़ीरा संवाददाता अली हासेम के अनुसार, ट्रम्प का तेहरान के नेतृत्व में विभाजन होने और इसलिए वार्ता में सहमति न बनने का दावा ‘गलतफहमी’ पर आधारित हो सकता है।

‘पूर्व सर्वोच्च नेता खामेनी के निधन के बाद ईरान में नेतृत्व काफी एकीकृत है। नए नेता मोज्तबा खामेनी और उनका समूह पिछले १५ वर्षों से साथ काम कर रहे हैं और अभी निर्णय केंद्र यही समूह सक्रिय है,’ हासेम ने बताया।

८ अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह की प्रारंभिक युद्धविराम अवधि थी, पर लेबनान के शामिल होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण जैसे मुद्दों ने तनाव बरकरार रखा है।

युद्ध समाप्ति के लिए अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने, मिसाइल उत्पादन सीमित करने, और हिज़्बुल्लाह तथा हमास जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों को दी जाने वाली सहायता बंद करने की मांग कर रहा है।

ईरान ने शांति के उद्देश्य से घरेलू स्तर पर यूरेनियम समृद्धि करने के अधिकार पर अडिग रहते हुए अपनी सैन्य शक्ति या क्षेत्रीय संबंधों को समझौते का हिस्सा बनाने पर सहमति से इनकार किया है।

एक विवादित मुद्दा उच्चस्तरीय समृद्ध यूरेनियम भंडारण का भी है। ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान ने बम हमलों के प्रभावित स्थलों से परमाणु सामग्री हटाने पर सहमति जताई है, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसी सामग्री देश के बाहर नहीं ले जाएगा।

क्या एआई के कारण इंसान कम चतुर हो रहे हैं?

मोबाइल में चैटबॉट

तस्वीर स्रोत, Getty Images

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) जब लगातार संवेदनशील कार्य करने लगे हैं, तो शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इससे इंसानों के सोचने और काम करने की बौद्धिक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

शोधकर्ता नतालिया कोस्मिना ने सहायक नियुक्ति के लिए आवेदन पत्रों का अध्ययन किया, तो पाया कि सभी आवेदन पत्र एक जैसे, परिष्कृत लेकिन विषय से संबंधित नहीं थे। इन आवेदन पत्रों के सारांश विषय के अनुरूप नहीं थे।

उन्होंने यह नहीं पहचाना कि आवेदकों ने चाटजीपीटी, गूगल जेमिनी, क्लाउड जैसी एआई चैटबॉट का उपयोग करके पत्र तैयार किया था।

कोस्मिना माज़ाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में मानव और कंप्यूटर इंटरैक्शन में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में छात्रों में अध्ययन सामग्री भूलने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

एलएलएम पर निर्भरता बढ़ने के साथ ही छात्रों की संज्ञानात्मक क्षमता घटने की चिंता कोस्मिना को है, और वह इस विषय में और अध्ययन करना चाहती हैं।

कांग्रेसको निर्वाचन समीक्षा कार्यक्रम आज विराटनगरमा, सभापति गगन थापा सहभागी हुने

कांग्रेस का चुनावी समीक्षा कार्यक्रम आज विराटनगर में, अध्यक्ष गगन थापा होंगे शामिल

९ वैशाख, काठमांडौ। नेपली कांग्रेस ने आज कोशी प्रदेश के विराटनगर में अपना चुनावी समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया है। इस कार्यक्रम में अध्यक्ष गगन कुमार थापा सहित कई नेता भाग लेंगे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अध्यक्ष थापा सुबह ९:५० बजे विराटनगर हवाई अड्डे पर उतरेंगे और १०:३० बजे से समीक्षा कार्यक्रम की शुरुआत होगी, जिसकी जानकारी पार्टी की सहमहामंत्री डॉ. डिला संग्रौलाले दी।

उनके मुताबिक, पार्टी का उद्देश्य प्रदेश स्तरीय संगठन को मजबूत करना, चुनाव परिणामों की समीक्षा करना और आगामी रणनीति का निर्धारण करना है। कांग्रेस के कोशी प्रदेश नेतृत्व प्रबंधन और संगठन सुदृढ़ीकरण के विषयों पर भी बैठक में विशेष चर्चा होगी, जो सहमहामंत्री संग्रौलाले बताई।

कार्यक्रम में पार्टी के कोशी प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारी, केंद्रीय सदस्य, प्रदेश कार्यसमिति, संघीय व प्रदेश सांसद, जिला अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और पिछले चुनावों में प्रत्यक्ष तथा समानुपातिक उम्मीदवार शामिल होंगे। कांग्रेस ने हाल ही में विभिन्न प्रदेशों में चुनावी समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इससे पहले गण्डकी, लुम्बिनी, बागमती और मधेश प्रदेशों में समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं।

पार्टी नेतृत्व ने बताया है कि समीक्षा कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय तह से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन की स्थिति, चुनावी परिणाम, कमजोरियां और सुधार के संभावनाओं पर सीधे सुझाव लिए जाएंगे। इसके साथ ही आगामी राजनीतिक रणनीति, संगठन विस्तार, सक्रिय सदस्यता वृद्धि, १५वीं महाधिवेशन की तैयारियां और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर चर्चा होगी। कांग्रेस ने प्रदेश स्तरीय समीक्षा कार्यक्रमों को केवल चुनावी जीत-हार के विश्लेषण तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे संगठन पुनरूत्थान अभियान के रूप में आगे बढ़ाया है।

हतारमा श्रममन्त्री हटाएथे प्रधानमन्त्रीले, गृहमन्त्रीमाथि गम्भीर प्रश्न उठ्दा चुप

प्रधानमंत्री ने श्रम मंत्री को हटाया, गृह मंत्री पर उठे सवालों पर रखा मौन

समाचार संक्षेप
पूर्व श्रम मंत्री दीपककुमार साह पर स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में अपनी पत्नी को सदस्य पद पर नियुक्त करने के आरोप के बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने उन्हें पद से हटा दिया है। गृह मंत्री सुधन गुरुङ के दो माइक्रोइंश्योरेंस कंपनियों में 50 लाख रुपए के संस्थापक शेयर अपनी संपत्ति विवरण में न जोड़ने पर कानूनी सवाल उठे हैं। राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी (रास्वपा) की केंद्रीय समिति की बैठक में गृह मंत्री गुरुङ के विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई और पार्टी ने औपचारिक प्रतिक्रिया भी नहीं दी है। 8 वैशाख, काठमांडू।

स्वास्थ्य बीमा बोर्ड सदस्य पद पर अपनी पत्नी की नियुक्ति के आरोप के कारण तत्कालीन श्रम मंत्री दीपककुमार साह पर सवाल उठे। इस मामले में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने आंतरिक जांच की। उन्होंने साह से केवल सामान्य पूछताछ की और कोई औपचारिक स्पष्टीकरण नहीं लिया। इसके बजाय तुरंत उन्हें मंत्री पद से हटाने का निर्णय लिया। 13 दिन के भीतर साह का मंत्री पद समाप्त हो गया। प्रधानमंत्री बालेन्द्र के इस निर्णय को कई लोगों ने सुशासन के लिए एक ‘साहसी’ कदम माना।

लेकिन दीपक साह के मामले से अधिक गंभीर मामला गृह मंत्री सुधन गुरुङ से जुड़ा है, जिस पर प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी रास्वपा ने मौनता बनाए रखी है। इसी बीच, सभापति रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बीच बैठक हुई है। गृह मंत्री गुरुङ ने मंगलवार को भी रास्वपा के सभापति रवि लामिछाने से मुलाकात की है। हालांकि इस मामले पर सरकार और पार्टी ने कोई औपचारिक रुख नहीं अपनाया है। गृह मंत्री गुरुङ को लेकर व्यापक सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सोमवार को हुई रास्वपा की बैठक में इस विषय पर चर्चा नहीं हुई।

गृह मंत्री गुरुङ ने दो माइक्रोइंश्योरेंस कंपनियों में खरीदे गए शेयर अपनी संपत्ति विवरण में शामिल नहीं किए हैं। उनके शेयर खरीदने के स्रोत और विवादित व्यक्ति से संबंध पर सवाल उठे हैं। हालांकि उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन पार्टी ने इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की है। रास्वपा के नेता पहले तो इस मामले में मुखर थे, लेकिन अब चुप्पी साधे हुए हैं। पत्रकारों के बार-बार सवाल करने पर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है।

कांग्रेस ने लिडरशिप एकेडेमी संचालित करने का निर्णय, जनप्रतिनिधि बनने के लिए कक्षाएं पूरी करना अनिवार्य

८ वैशाख, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेस ने पार्टी के आंतरिक और सार्वजनिक नेतृत्व विकास को सशक्त बनाने के उद्देश्य से ‘कांग्रेस लिडरशिप एकेडेमी’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह एकेडेमी पार्टी के केन्द्रीय नीति अनुसन्धान तथा प्रशिक्षण प्रतिष्ठान के अंतर्गत संचालित होगी और कांग्रेस द्वारा इसे ‘ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट’ के रूप में परिभाषित किया गया है। इस एकेडेमी के माध्यम से पार्टी के सक्रिय सदस्यों को कांग्रेस के इतिहास, आदर्श, विचारधारा, आर्थिक नीति, विकास नीति और सामाजिक नीतियों के बारे में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। सक्रिय सदस्यता नवीनीकरण करने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी की नीतियों, कार्यक्रमों, प्राथमिकताओं तथा नवीनतम नीतिगत विषयों पर नियमित पुनः ताजगी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

एकेडेमी पार्टी की ओर से निर्वाचित स्थानीय, प्रदेश एवं संघीय जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगी। आगामी चुनावों में जनप्रतिनिधि बनने की इच्छा रखने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए आधारभूत एवं विषयगत ज्ञान, कौशल तथा नेतृत्व विकास से संबंधित विशिष्ट कक्षाएं संचालित की जाएंगी। कांग्रेस के प्रवक्ता देवराज चालिसे ने कहा, ‘जो लोग नेतृत्व में जाना चाहते हैं, उन्हें ज्ञान, कौशल, प्रबंधकीय क्षमता और समग्र रूप से सक्षम बनाना हमारा लक्ष्य है।’

महामंत्री प्रदीप पौडेल ने इस एकेडेमी को कार्यकर्ताओं को राज्य प्रणाली के प्रति सशक्त बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में बताया। उन्होंने कहा, ‘‘राज्य प्रणाली, संवैधानिक व्यवस्था, विभिन्न स्तरों की सरकारों की जिम्मेदारियां और प्रशासनिक क्षमताओं के विषय में जानकारी देने हेतु यह प्रशिक्षण संस्था संचालित की जा रही है।’’ महामंत्री पौडेल के अनुसार, सार्वजनिक जिम्मेदारी संभालने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए निर्वाचन से कम से कम तीन महीने पूर्व ‘पब्लिक पॉलिसी’ की कक्षा अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। एकेडेमी के माध्यम से निर्धारित कक्षा पूरी करने को ही पार्टी की उम्मीदवारता चयन और अन्य जिम्मेदारियों पर सीधा प्रभाव डालेगा।

प्रवक्ता चालिसे ने इस एकेडेमी को ‘स्कूल’ की संज्ञा दी। उन्होंने बताया, ‘‘इसका अपना पाठ्यक्रम होता है और यह तीन महीने का कोर्स है।’” चालिसे ने स्पष्ट किया कि कोर्स पूरी न करने वाले कार्यकर्ता किसी भी उम्मीदवार के रूप में मान्य नहीं होंगे। ‘‘कोर्स पूरी न करने वाले उम्मीदवार मान्य नहीं होंगे,‘‘ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य राजनीतिक पारदर्शिता और मेरिटोक्रेसी स्थापित करना है।’’ कांग्रेस इस एकेडेमी को पार्टी की दीर्घकालीन क्षमता विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आधार मान रही है।

कहाँ पुग्यो देउवा दम्पतीविरुद्ध रेड नोटिस प्रक्रिया ?

देउवा दंपती के खिलाफ रेड नोटिस प्रक्रिया किस चरण में है?

पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी डॉ. आरजु राणा देउवा के खिलाफ २४ चैत्र को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। हालांकि, गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद अब तक उनके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी नहीं हुआ है। देउवा दंपती विदेश में हैं और नेपाल लौटना बाकी है। ८ वैशाख, काठमांडू।

गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद भी देउवा दंपती को नेपाल लाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी जारी है। हालांकि, गिरफ्तारी वारंट जारी हुए दो सप्ताह बीत चुके हैं, फिर भी रेड नोटिस जारी नहीं किया गया है। पुलिस प्रधान कार्यालय ने इस संदर्भ में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। नेपाल पुलिस के केंद्रीय प्रवक्ता तथा डीआईजी अविनारायण काफ्ले ने इस विषय को जांच के दायरे में बताते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है।

जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार अब तक देउवा दंपती के खिलाफ रेड नोटिस के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (एनसीबी), काठमांडू ने इंटरपोल को औपचारिक रूप से पत्राचार नहीं किया है। ‘केवल गिरफ्तारी वारंट के आधार पर रेड नोटिस के लिए पत्राचार नहीं किया जा सकता। इसके लिए ठोस आधार और कागजी प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। वह प्रक्रिया अभी बाकी है, इसलिए फिलहाल पत्राचार नहीं किया गया है,’ सूत्र ने बताया।

गिरफ्तारी वारंट जारी होने के समय देउवा दंपती विदेश में ही थे। वे चुनाव से पहले १४ फाल्गुन को चिकित्सा कारणों से सिंगापुर गए थे और वहां से ७ चैत्र को हांगकांग पहुंचे थे। इंटरपोल के माध्यम से रेड नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पुलिस प्रधान कार्यालय के तहत नेशनल सेंट्रल ब्यूरो द्वारा आगे बढ़ाई जाएगी। नोटिस जारी होने पर इंटरपोल के १९६ सदस्य देश देउवा दंपती को गिरफ्तार कर सकेंगे।