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लेखक: space4knews

सरकार को महिलाओं के प्रति सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए: गीता गुरूंग

१२ जेठ, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस की सांसद गीता गुरूंग ने कुप्रथाओं और भेदभावपूर्ण कानूनों के कारण पीड़ित महिलाओं से सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। प्रतिनिधि सभा की मंगलवार की बैठक में उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा मांगी गई माफी केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह महिला प्रतिनिधित्व की सुनिश्चितता, आर्थिक सम्मान और आत्मनिर्भरता समेत होनी चाहिए।”

सांसद गुरूंग ने पिछले कुप्रथा और भेदभावपूर्ण कानूनों के कारण महिलाओं को हुई पीड़ा के लिए नेपाल सरकार द्वारा औपचारिक माफी की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने सरकार की नीति तथा कार्यक्रम में महिलाओं से संबंधित विषयों के अभाव की ओर संसद का ध्यान आकर्षित कराया।

“हमने सरकार की नीति तथा कार्यक्रम का अध्ययन किया, उसमें महिलाओं का विशेष समावेश दिखाई नहीं दिया,” उन्होंने कहा। आगामी बजट में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को न्याय की अनुभूति हो इस प्रकार का बजट लाने का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा, “आगामी बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में कुप्रथा के शिकार महिलाओं से लेकर शहरों में उद्योग और विभिन्न पेशा-व्यवसायों में सक्रिय महिलाओं को न्याय का अनुभव हो इस तरह का बजट लाया जाए।”

सांसद गुरूंग ने महिलाओं के योगदान का उचित सम्मान किए बिना देश के लोकतंत्र को अधूरा बताया। उन्होंने प्रथम जननिर्वाचित प्रधानमंत्री भीमपुर्व कोइराला द्वारा बैतडी की द्वारिकादेवी ठाकुरानी को स्वास्थ्य सहायक मंत्री नियुक्त करने का स्मरण करते हुए कहा, “वह केवल नेपाल की नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की पहली महिला मंत्री थीं।”

इलन मस्क का ‘ग्रोक’ चैटबोट अमेरिकी सरकार के लिए असफल साबित हुआ

इलन मस्क की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप ‘एक्सएआई’ ने खरबों डॉलर के एआई बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का दावा किया है। इस आधार पर मस्क की कंपनियों का बाजार मूल्यांकन अत्यंत उच्च रखा गया है। लेकिन, एक्सएआई का ‘ग्रोक’ चैटबोट अमेरिकी सरकारी क्षेत्र में पूरी तरह से असफल रहा है। यह तथ्य रॉयटर्स ने सरकारी दस्तावेजों और अधिकारियों से बातचीत के आधार पर उजागर किया है।

सरकारी आंकड़े क्या दिखाते हैं? 2025 के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अमेरिकी संघीय एजेंसियों में एआई के 400 से अधिक उपयोग के मामले हैं। इनमें से केवल तीन स्थानों पर ही ग्रोक एआई का उपयोग पाया गया है। इसके विपरीत, 234 कार्यों में ओपनएआई के चैटजीपीटी और माइक्रोसॉफ्ट को-पायलट का प्रयोग किया गया है। इसी तरह 33 कार्यों में गूगल का जेमिनी और 26 कार्यों में एन्थ्रोपिक का ‘क्लोड’ इस्तेमाल हुआ है। एक्सएआई ने अमेरिकी सरकारी एजेंसियों को आकर्षित करने के लिए ग्रोक का शुल्क प्रति एजेंसी केवल 42 सेंट रखा था, जो लगभग नि:शुल्क माना जा सकता है।

तकनीकी कंपनियाँ शुरूआत में ग्राहकों को अपने उत्पाद से परिचित कराने के लिए ऐसी रणनीतियाँ अपनाती हैं। लेकिन इतनी कम कीमत पर भी सरकारी कर्मचारी ग्रोक को पसंद नहीं करते। इस आंकड़े ने एक्सएआई के महत्वाकांक्षी व्यावसायिक मूल्यांकन पर प्रश्न उठाया है। मस्क ने बड़े कंपनियों और संस्थाओं के लिए एआई बनाकर खरबों डॉलर कमाने का दावा किया था, परंतु सरकारी क्षेत्र में इसकी मांग न होने से उनकी योजना अटक गई है।

विश्लेषकों के अनुसार सरकारी मान्यता न मिलने पर निजी कंपनियां भी ग्रोक के प्रति संदेहशील होंगी। यह ग्रोक की सुरक्षा और गुणवत्ता में कमी का संकेत हो सकता है। मस्क ने सरकारी क्षेत्र में ग्रोक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए बड़ी लॉबीिंग की थी। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ मिलकर पूरे देश में एआई लागू करने की घोषणा की थी। मस्क की डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियंसी (डोज) ने भी ग्रोक के इस्तेमाल के लिए दबाव डाला। लेकिन डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने अनुमति न देने के कारण ग्रोक के उपयोग से इंकार कर दिया। पेंटागन और अन्य मंत्रालयों ने भी ग्रोक को केवल परीक्षण स्तर पर रखा है और वर्तमान में ऊर्जा मंत्रालय एवं चुनाव सहायता आयोग ही इसका प्रयोग कर रहे हैं।

इन मंत्रालयों में ग्रोक का उपयोग सामान्य पत्र लेखन या सामाजिक मीडिया पोस्ट के लिए किया जाता है। अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ एक्सएआई का 200 मिलियन डॉलर का अनुबंध है, लेकिन वहाँ के कर्मचारी ग्रोक की बजाय अन्य प्रतिस्पर्धी एआई टूल्स को प्राथमिकता देते हैं। पेंटागन के अनुसंधान विभाग में इंजीनियरिंग विश्लेषण के लिए गूगल जेमिनी और कोडिंग के लिए क्लोड एआई का उपयोग होता है। वहां के तकनीशियन ग्रोक को बाजार का श्रेष्ठ मॉडल नहीं मानते। इसी क्रम में हाल ही में ग्रोक ने वेटरंस अफेयर्स मंत्रालय का एक अनुबंध भी खो दिया है, क्योंकि यह तकनीकी मानकों को पूरा नहीं कर पाया। व्यावसायिक बाजार में भी ग्रोक न केवल सरकारी क्षेत्र बल्कि निजी बाजार में भी पिछड़ रहा है।

एक तकनीकी अनुसंधान संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार कॉर्पोरेट क्षेत्र में ग्रोक का उपयोग लगातार घट रहा है। पहले हजार उपयोगकर्ताओं में पांच लोग ग्रोक का इस्तेमाल करते थे, अब यह संख्या घटकर दो तक सीमित है। साथ ही ग्रोक उपयोगकर्ता चैटजीपीटी उपयोगकर्ताओं की तुलना में आधा भी समय इस एप में व्यतीत नहीं करते। यह स्पष्ट संदेश देता है कि ग्रोक एआई अमेरिकी कॉर्पोरेट और सरकारी बाजार की मुख्यधारा में सफलतापूर्वक प्रवेश नहीं कर पाया है। एआई बाजार में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई बहुत आगे हैं, जबकि एक्सएआई पीछे है।

ईयू की कालोसूची में शामिल होने वाला मामला: सरकार के ‘सक्रिय कूटनीतिक दबाव’ और रणनीतियां क्या हैं?

यूरोपीय संघ ने नेपाल की वायुसेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हैं। उच्च अधिकारियों ने कहा है कि प्रमुख चिंताओं को संबोधित करने वाला कानून संभवतः एक महीने के भीतर संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। मंगलवार को यूरोपीय संघ से संबद्ध देशों के गैरआवासीय राजदूतों और मिशन प्रमुखों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के साथ समूहवार बैठक की। पिछले दो दिनों में ईयू के 22 राजदूतों और मिशन उप प्रमुखों ने परराष्ट्र मंत्री शिशिर खनाल, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड्कराज पौडेल और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल से मुलाकात की। परराष्ट्र मंत्रालय ने बताया कि सरकार “सक्रिय रूप से सुधारात्मक कार्य कर रही है” तथा ईयू की हवाई सुरक्षा सूची के तहत नेपाली वायुसेवाओं पर लगाया गया प्रतिबंध हटाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और ईयू सदस्य देशों के राजदूतों के बीच मुलाकात सत्ता संभालने के बाद 25 चैत को नेपाल में तैनात विभिन्न देशों के राजदूतों और कूटनीतिक मिशन प्रमुखों के साथ समूह बैठक के बाद हुई। प्रधानमंत्री शाह ने मंगलवार को यूरोपीय यूनियन (ईयू) से जुड़े गैरआवासीय राजदूत और मिशन प्रमुखों के साथ संयुक्त बैठक की। प्रधानमंत्री कार्यालय के जारी विवरण में उल्लेख किया गया है कि लंबे समय से नेपाल ईयू के समक्ष कालोसूची हटाने के लिए पैरवी कर रहा है, हालांकि इसमें विशेष रूप से इस विषय का जिक्र नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा कि नई सरकार के गठन के बावजूद नीतिगत निरंतरता बनी रहेगी।

संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहसचिव जयनारायण आचार्य ने कहा कि ईयू के संबंधित क्षेत्रों को संबोधित करने के लिए “गहरी” बातचीत हुई है। “संवाद में फिलहाल कोई अवरोध नहीं है। विशेष रूप से हमारे नागरिक उड्डयन अधिनियम में संशोधन आवश्यक है। हम नियामक निकाय और संचालन निकाय को अलग करने की तैयारी में हैं और इसके लिए कानूनी मसौदा बन चुका है। मंत्रालय नियामक निकाय बनाने के लिए तैयार है,” उन्होंने कहा।

ईयू प्रतिनिधि के साथ हुई बैठकों में उन्होंने कहा, “संचार, कूटनीतिक दबाव और आवश्यक सुधारों के सभी पक्षों पर चर्चा हुई है और प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।” विशेषज्ञों के अनुसार, ईयू की सुरक्षा सूची में नेपाली वायुसेवाओं को शामिल करने से विश्व स्तर पर यह संदेश गया है कि नेपाल का हवाई सुरक्षा स्तर कमजोर है। नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के पूर्व महानिर्देशक राजकुमार क्षेत्री ने कहा, “हम यूरोप के लिए कोई विमान नहीं भेज सकते। भविष्य में जो भी नई कंपनियां आएंगी वे भी यूरोप नहीं जा पाएंगी। इस कारण यूरोप से नेपाल भी कोई विमान आने नहीं दिया जा रहा है।”

यूरोपीय संघ की ब्लैकलिस्ट: सरकार की सक्रिय कूटनीतिक पहल और रणनीतियों की व्याख्या

काठमाडौं के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सौर्या एयरलाइंस के विमान दुर्घटना के मलबे, 24 जुलाई 2024 को। आसपास लोग खड़े हैं।

तस्वीर स्रोत, NurPhoto via Getty Images

कैप्शन: 24 जुलाई 2024 को काठमाडौं के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सौर्या एयरलाइंस के दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे, और पास में लोग खड़े हैं।

यूरोपीय संघ ने नेपाल के एयरलाइंस पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने के लिए कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी रखे हैं। अधिकारियों ने इस बात का संकेत दिया है कि प्रमुख चिंताओं को संबोधित करने वाला कानून संसद में एक महीने के भीतर प्रस्तुत किया जा सकता है।

मंगलवार को यूरोपीय संघ से संबंधित देशों के गैर-निवासी राजदूत और मिशन प्रमुखों ने प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह के साथ समूह बैठक की।

पिछले दो दिनों में 22 यूरोपीय संघ के राजदूत और उप-मिशन प्रमुखों ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल, संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड्गराज पौडेल, तथा शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल से मुलाकात की।

परराष्ट्र मंत्रालय ने सरकार की “सुधारों में सक्रिय रूप से काम करने” पर जोर देते हुए यूरोपीय संघ की उड़ान सुरक्षा सूची में शामिल नेपाल के एयरलाइंस पर लगे प्रतिबंध हटाने पर बल दिया है।

प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के राजदूतों के बीच बैठक

प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह ने मंगलवार को यूरोपीय संघ के देशों के राजदूतों से मुलाकात की

तस्वीर स्रोत, RSS

कैप्शन: प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह ने मंगलवार को यूरोपीय संघ के विभिन्न देशों के राजदूतों से चर्चा की।

पावर संभालने के बाद वैशाख 10 (चैत 25) को प्रधानमंत्री शाह ने नेपाल में विभिन्न देशों के राजदूतों और कूटनीतिक मिशन प्रमुखों के साथ संयुक्त बैठकें एवं संवाद आयोजित किए हैं। मंगलवार को उन्होंने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के गैर-निवासी राजदूतों और मिशन प्रमुखों के साथ संयुक्त बैठक की।

कांग्रेस महिला संघले पायो पूर्णता – Online Khabar

कांग्रेस महिला संघ को पूर्णता मिली

समाचार सारांश

  • नेपाली कांग्रेस की भ्रातृ संस्था नेपाल महिला संघ की केन्द्रीय कार्यसमिति को मंगलवार को पूर्णता प्रदान की गई है।
  • संघ की अध्यक्ष मिनाकुमारी खरेल ने बताया कि सभापति गगन थापा के निर्देशानुसार कार्यसमिति को पूर्णता दी गई है।

१२ जेठ, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस की महिला संघ को पूर्णता प्राप्त हुई है।

संघ की अध्यक्ष मिनाकुमारी खरेल ने मंगलवार को केन्द्रीय कार्यसमिति को पूर्णता दी जाने की जानकारी दी है।

सभापति गगन थापाले उन्हें अध्यक्ष नियुक्त करते हुए कार्यसमिति को पूर्ण बनाने का आदेश दिया था।

खरेल ने बताया कि इसी आदेश के अनुसार समिति को पूर्णता प्रदान की गई है।

कौन-कौन हुए नियुक्त?

क्लाइमेट स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत स्कूलों में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाई गई

‘क्लाइमेट स्मार्ट सिटीज’ परियोजना के अंतर्गत काठमांडू और चितवन के २० सरकारी विद्यालयों को अनुदान प्रदान किया गया है। १२ जेठ, काठमांडू। इस परियोजना के मुख्य साझेदार संस्था एनिमल नेपाल ने विद्यार्थियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, कूड़ा प्रबंधन और मानव–जानवर–पर्यावरण के बीच सम्बंधों के बारे में जनचेतना बढ़ाने का कार्य किया है। एनिमल नेपाल लंबे समय से पशु कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय होकर काम कर रहा है, हालांकि इस वर्ष काठमांडू, भक्तपुर और ललितपुर के कुछ विद्यालयों के बाल क्लब समितियों के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया गया है।

इस परियोजना के अंतर्गत विद्यालयों में कंपोस्ट खाद उत्पादन, विद्यालय परिसर की सफाई, फूलों के पौधे लगाना, विद्यालय की दीवारों पर संदेशात्मक चित्र बनाना जैसे गतिविधियाँ संचालित की गई हैं। एनिमल नेपाल ने एक वर्ष के कार्यों की समीक्षा हेतु एक कार्यक्रम भी आयोजित किया। इस कार्यक्रम में सहभागी विद्यालयों के शिक्षक, बाल क्लब समिति सदस्य और अभिभावकों ने संस्था के कार्यों को अत्यंत सफल और उपलब्धिपूर्ण बताया। अभिभावकों ने बताया कि बच्चों में घर पर भी सड़ने वाले और न सड़ने वाले कूड़ा अलग-अलग संग्रह करने की आदत विकसित हुई है।

संस्था ने बाल क्लब समितियों को पानी पीने की बोतल, कैप टोपी, झोला, विभिन्न स्टेशनरी सामग्री और गार्डन की सफाई के लिए आवश्यक उपकरण भी वितरित किए थे। परियोजना के मुख्य साझेदार एनिमल नेपाल की कार्यक्रम संयोजक सुलक्षणा राणा के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना, जानवरों के प्रति की जाने वाली क्रूरता पर मानसिक प्रभाव कम करना और बच्चों में करुणा तथा समानुभूति की भावना विकसित करना है। क्रिएशन नेपाल के नेतृत्व में संचालित इस परियोजना में प्रत्येक विद्यालय में ‘क्लाइमेट स्मार्ट क्लब’ का गठन किया गया और विद्यार्थियों को नेतृत्व की भूमिका दी गई।

विद्यार्थी स्वयं योजना बनाकर पेड़ लगाना, कूड़ा वर्गीकरण, डस्टबिन प्रबंधन, नाटक प्रदर्शन और समुदाय की सफाई जैसे गतिविधियां आयोजित कर रहे हैं। इस प्रकार के विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण से बच्चों की नेतृत्व क्षमता का विकास होगा और दीर्घकालीन रूप से पर्यावरण संरक्षण तथा पशु प्रति सहानुभूति बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है।

दशगजा इलाके में पुरुष का बेवारिसे शव मिला

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • सर्लाही के पर्सा गाउँपालिका–२ संग्रामपुर स्थित नेपाल-भारत सीमा के दशगजा इलाके में लगभग 50 वर्ष के पुरुष का बेवारिसे शव मिला है।
  • शव के पास मदिरा और भारतीय रुपये पाए गए हैं, शव का परीक्षण के लिए प्रादेशिक अस्पताल मलंगवा भेजा गया।

12 जेठ, सर्लाही। सर्लाही के पर्सा गाउँपालिका–२ संग्रामपुर इलाके में नेपाल-भारत सीमा के नजदीक दशगजा क्षेत्र में एक पुरुष का बेवारिसे शव मिला है।

जिला पुलिस कार्यालय सर्लाही के प्रवक्ता व डीएसपी सरोज राई के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 4 बजे सीमा स्तम्भ संख्या 317/2 के पास दशगजा के डिल में नेपाल की ओर लगभग 50 वर्ष के एक पुरुष का शव मिला है। मृतक का नाम और पहचान अभी तक पता नहीं चल पाई है।

पुलिस ने बताया कि घटनास्थल पर बोरे में रखी हुई मदिरा और कुछ भारतीय रुपये भी मिले हैं। स्थानीय लोगों ने शव देखकर पुलिस को सूचित किया था।

पुलिस ने कहा है कि शव का पोस्टमार्टम के लिए प्रादेशिक अस्पताल मलंगवा भेजने की तैयारी की जा रही है और इस संबंध में आगे जांच चल रही है।

गाईगोरे तस्करी पर पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार का नेपाल पर प्रभाव

झापा जिले में सोमवार पशुओं में लगने वाली खोरेत बीमारी से सम्बंधित कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में नेपाल से भारत की ओर गाईगोरे की अवैध निकासी विषय पर चर्चा हुई। वैटर्नरी अस्पताल एवं पशु सेवा विशेषज्ञ केंद्र भद्रपुर झापा के प्रमुख शीतल भट्टराई के अनुसार, सीमा से लगे भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद पहले होने वाली तस्करी फिर से एक महत्वपूर्ण विषय बन गई है। “अनौपचारिक बातचीत के दौरान यह बताया गया कि नेपाली हाट बाजार से किसान जो पशु नहीं खरीदते, उन्हें भारत की तरफ अवैध रूप से निकाला जाता है और भाजपा इस पर नियंत्रण के लिए कड़ाई कर रही है,” उन्होंने जानकारी दी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने गो-रक्षा पर जोर देते हुए नई नीतियां अपनाई हैं, जिसके कारण भारत के पशु हाट बाजार प्रभावित हुए हैं, ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं। अल जज़ीरा ने सोमवार को प्रकाशित खबर में बताया कि मुस्लिम पर्व ईद नजदीक आते हुए पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बाहरी इलाके में फैलता धुलागढ़ हाट बाजार सुनसान पड़ा है। नई भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 1950 के पशुबध संबंधित कानून को सख्ती से लागू करने की नीति लाई गई है। इस कानून में सार्वजनिक रूप से पशु वध पर रोक समेत कड़े प्रावधान शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल सरकार ने बांग्लादेश में अवैध व्यापार रोकने के लिए सीमा क्षेत्र में तारबाड़ लगाने का निर्णय लिया है। जानकारों के अनुसार, इस अवैध कारोबार में गाईगोरे की तस्करी भी शामिल है। यह तस्करी न केवल बिहार, झारखंड जैसे भारतीय राज्यों में बल्कि नेपाल से भी पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश की ओर की जाती है। “तारबाड़ लगाने के शुरू होते ही अवैध निकासी में काफी कमी आई है,” भट्टराई ने बताया, “सशस्त्र पुलिस और पशु क्वारंटीन प्रमुख इस संबंध में अधिक जानकारी रखते हैं।”

तपाईं सरकारलाई उत्तरदायी बनाउन सक्नुहुन्न ? – Online Khabar

सभामुखको क्षमता सम्बन्धमा नेपाली कांग्रेसको प्रश्न उठ्यो

१२ जेठ, काठमाडौं । प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेसले सभामुख डोलप्रसाद अर्यालको क्षमता सम्बन्धमा प्रश्न उठाएको छ। प्रतिनिधिसभाको बैठकमा नेपाली कांग्रेसका सांसद अभिषेक प्रताप शाहले प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाहलाई सदनमा उपस्थित गराउन किन रुलिङ नगरिएको भनेर प्रश्न गरेका छन्। ‘प्रधानमन्त्रीमाथि रुलिङ गर्ने अधिकार तपाईंलाई छ। कुनै पनि मन्त्री, प्रधानमन्त्री र सांसदलाई रुलिङ गर्ने अधिकार तपाईंको छ। त्यो अधिकार प्रयोग गर्नलाई कसले रोकेको छ?’ शाहले बताए। यसै क्रममा उनले सभामुखको क्षमतामाथि समेत प्रश्न उठाएका छन्। ‘यो सदन जान्न चाहन्छ, तपाईंलाई रुलिङ अधिकार प्रयोग गर्न कसले रोक्यो? कसले छेक्यो?’ शाहले भने, ‘तपाईं कार्यपालिकाप्रमुख प्रधानमन्त्रीलाई सदनप्रति जवाफदेह बनाउन सक्नुहुन्न र?’ यस विषयमा समग्र नेपालले जवाफ चाहिरहेको उनले बताए। सभामुखबाट रुलिङ गरि प्रधानमन्त्रीलाई सदनमा उपस्थित गराउनुपर्ने उनको आग्रह पनि छ। जवाफमा सभामुख अर्यालले प्रधानमन्त्री संसद्मा आउने तयारी गरिरहेका बताएका छन्। उनले छिट्टै प्रधानमन्त्रीले सदनमा आएर जवाफ दिने विषय बारम्बार दोहोर्‍याए। ‘माननीय सदस्यहरूले मिति माग्नुभएको छ। मिति, समय। सदन चलेकै दिन सम्माननीय प्रधानमन्त्रीज्यू आउनुहुनेछ। म सदन चलेकै दिन सम्माननीयज्यूलाई बोलाउँछु’ सभामुख अर्यालले भने। प्रधानमन्त्रीले समय तोक्नासाथ त्यसको सूचना सदनलाई दिने उनले बताए।

फैशन केवल कपड़े नहीं, आत्मविश्वास भी है

समाचार सारांश

  • सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करने की आदत से व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर होता है, इसलिए अपने शरीर को स्वीकार करना फैशन का पहला पाठ माना जाता है।

आज के डिजिटल युग में फैशन व्यक्ति के दैनिक जीवन से गहरे जुड़ा हुआ विषय बन गया है। सोशल मीडिया, टिकटोक, फिल्मों, सेलिब्रिटी संस्कृति और लगातार बदलते ट्रेंड हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप में प्रभावित कर रहे हैं।

सुबह से शाम तक मोबाइल पर विभिन्न प्रकार के फैशन, मेकअप, स्टाइल और ‘परफेक्ट’ शरीर की तस्वीरें देखने को मिलती हैं। इसलिए कई लोगों के मन में एक सवाल उठता है, ‘क्यों वह कपड़ा दूसरों को अच्छा लगता है, मुझे अच्छा नहीं लगता?’

अक्सर लोग पसंदीदा सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर या दोस्तों की स्टाइल की नकल करने की कोशिश करते हैं। वे उनसे मिलते-जुलते कपड़े खरीदते हैं, वैसा ही हेयरस्टाइल अपनाते हैं, वैसा ही मेकअप बनाते हैं, लेकिन फिर भी खुद को उतना आत्मविश्वासी या आकर्षक महसूस नहीं कर पाते।

इसका मुख्य कारण यह है कि फैशन केवल कपड़े नहीं है, यह व्यक्तित्व, शरीर की बनावट, आत्म-स्वीकारोक्ति और जीवनशैली से जुड़ा विषय है। सबसे पहले खुद को समझना सीखना चाहिए। दूसरों से तुलना किए बिना अपने शरीर, आराम और व्यक्तित्व के आधार पर स्टाइल बनाना जरूरी है।

हम सभी अलग हैं। किसी की आंखें, किसी की नाक, किसी का शरीर, किसी की ऊंचाई अलग होती है। यही अलगाव हमारी सुंदरता है। लेकिन हम इसे स्वीकार करने से पहले दूसरों जैसे बनने की कोशिश करते हैं।

तुलना करने की आदत आत्मविश्वास कैसे कमजोर करती है?

आजकल बहुत लोगों की सबसे बड़ी समस्या लगातार तुलना करना है। सोशल मीडिया पर किसी को अच्छा देखकर खुद को कम आंकने की आदत बढ़ रही है।

अगर किसी अभिनेत्री ने कोई ड्रेस पहनी और वह अच्छी लगी, तो वही कपड़ा खरीद लिया जाता है। यदि किसी टिकटॉक क्रिएटर का फैशन वायरल हो जाता है, तो वही फॉलो करने की कोशिश होती है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब वह कपड़ा पहनने पर असहज महसूस होता है। तब कई लोग सोचने लगते हैं, ‘मैं अच्छा नहीं हूं’, ‘मेरा शरीर ठीक नहीं है’, ‘मुझे कुछ भी सूट नहीं करता’।

समस्या कपड़े में नहीं, तुलना करने की सोच में है। हमने दूसरों को देखकर खुद का मूल्यांकन करना शुरू कर दिया है। सोच बन गई है कि केवल उनकी आंखें, नाक, शरीर हो तो ही हम अच्छे लगेंगे। लेकिन हमने कभी अपने शरीर को धन्यवाद नहीं दिया।

लोग अपने शरीर को अक्सर केवल बाहरी सुंदरता के आधार पर देखते हैं लेकिन शरीर द्वारा दैनिक जीवन में किए गए काम की कद्र कम करते हैं। हमारे पास आंखें हैं जो दुनिया दिखाती हैं, कान हैं जो सुनने में मदद करते हैं, हाथ हैं जो काम करने में सहायता करते हैं। हमें इन सबका सम्मान करना सीखना चाहिए।

जब तक व्यक्ति खुद को दूसरों से तुलना करना बंद नहीं करेगा, तब तक कोई भी फैशन उसे आत्मविश्वास नहीं दे सकता।

अपने शरीर को समझना ही फैशन का पहला पाठ है

कई लोग फैशन सुनते ही ट्रेंड, ब्रांड या महंगे कपड़े सोचते हैं, लेकिन असल में फैशन अपनी बॉडी को समझने से शुरू होता है। कपड़े तो शरीर पर ही पहने जाते हैं। शरीर को न समझकर फैशन को कैसे समझा जा सकता है?

हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। किसी की बांहों पर वजन ज्यादा होता है, किसी के कूल्हों पर, तो किसी के पेट के आसपास। कपड़ा पहनते समय किसी को ऊपर टाइट लग सकता है तो किसी को नीचे। यही बातें शरीर की बनावट यानी बॉडी शेप की जानकारी देती हैं।

आमतौर पर शरीर को पांच प्रकारों में विभाजित किया जाता है: त्रिकोणीय, उल्टा त्रिकोण, आयताकार, गोलाकार और ऑवरग्लास यानी डमरू के आकार जैसा। लेकिन कोई भी पूरी तरह से एक शेप में फिट नहीं होता, केवल मिल्दोजुल्दो संरचना होती है।

 

हम खुद को “पियर शेप”, “एप्पल शेप” जैसे नामों से जानते हैं, यह केवल शरीर की संतुलन समझने का तरीका है। खुद को किसी फल से तुलना करके तनाव लेने की जरूरत नहीं है।

शरीर की बनावट समझने के बाद कपड़ा चुनना आसान होता है। पता चलता है कि कौन-सी फिटिंग आरामदायक है, कौन-सा कट बेहतर दिखता है, कौन-से कपड़े शरीर को संतुलित दिखाते हैं।

आइडल बॉडी क्या होती है?

फैशन इंडस्ट्री ने लंबे समय तक ‘परफेक्ट बॉडी’ की धारणा बनाई पर अब यह सोच बदल रही है। आइडल बॉडी कोई सटीक माप नहीं होती। सौंदर्य के मानदंड समाज और संस्कृति के अनुसार भिन्न होते हैं।

किसी देश में गोरी त्वचा को सुंदर माना जाता है तो कहीं गेहुँआ रंग को आकर्षक; कहीं बड़े होंठ पसंद किए जाते हैं तो कहीं लंबी गर्दन। इसलिए खुद को मॉडल या सेलिब्रिटी से तुलना करना उचित नहीं।

मॉडल अपने शरीर के लिए काफी समय देते हैं, अपने जीवनशैली, आहार, फिटनेस पर ध्यान केंद्रित करते हैं। लेकिन हमारी जिंदगी अलग होती है। हम ऑफिस जाते हैं, घर संभालते हैं, बच्चों की देखभाल करते हैं, रोजाना के काम काज करते हैं।

हर व्यक्ति के अंदर कुछ न कुछ असुरक्षा होती है, लेकिन ज्यादातर लोग अपनी ही समस्याओं को बड़ा सोचते हैं। पर्सनल स्टाइल बाहरी नहीं, अंदर से आती है।

लोग अक्सर सोचते हैं ‘मुझे कौन-सा स्टाइल सूट करता है?’ इसका जवाब बाजार, टिकटक या सेलिब्रिटी में नहीं, अपने अंदर होता है और उसे खोजना पड़ता है।

पर्सनल स्टाइल का मतलब वह शैली है जो आपको आरामदायक, आत्मविश्वासी और प्राकृतिक महसूस कराती है।

‘मुझे क्या पसंद है, कौन-सा रंग पहनने से मैं अच्छा दिखता हूं, कौन-से कपड़े आरामदायक हैं, कौन-सा स्टाइल मेरे व्यक्तित्व से मेल खाता है’ — यही समझना पर्सनल स्टाइल है।

जब कोई अपनी स्टाइल पहचान लेता है, तब दूसरों से तुलना करने की जरूरत नहीं पड़ती। जब आंतरिक और बाह्य विश्व मेल खाते हैं, तो आए हुए आत्मविश्वास को कोई हरा नहीं सकता।

कई कपड़े होने के बाद भी ‘कुछ पहनने के लिए नहीं’ जैसा क्यों लगता है?

यह समस्या खासकर महिलाओं में होती है। अलमारी कपड़ों से भरी होती है लेकिन बाहर जाते समय लगता है, ‘मेरे पास पहनने को कुछ नहीं है।’ इसका कारण फैशन की कमी नहीं, स्पष्टता की कमी है।

अधिकतर लोग ट्रेंड, सेल, दूसरों की सलाह या ‘फोमो’ की वजह से कपड़े खरीदते हैं। असल में अपने लिए क्या चाहिए, यह नहीं जानते। इस वजह से अलमारी भरी रहती है, लेकिन इस्तेमाल में आने वाले कपड़े कम होते हैं। इसे हम रसोई की तुलना कर सकते हैं। रोजमर्रा के लिए चावल और दाल चाहिए लेकिन अगर रसोई में सिर्फ सॉस, स्नैक्स और ब्रेड हों तो समस्या होगी। वार्डरोब भी ऐसा ही होता है।

अगर अक्सर ऑफिस जाना है तो ऑफिस वियर ज्यादा होना चाहिए। अगर जीवनशैली साधारण है तो पार्टी वियर ज्यादा होने पर काम नहीं आता। कई लोग ट्रेंड के पीछे भागते हैं। एक सीजन में वायरल कपड़ा दूसरे में चलन में नहीं रहता। परिणामस्वरूप अलमारी भरी रहती है लेकिन रोजमर्रा के लिए जरूरी कपड़ों की कमी रहती है।

ऑफिस वियर में सादगी क्यों जरूरी है?

ऑफिस फैशन में सबसे महत्वपूर्ण है सादगी और बहुपयोगिता। ऑफिस के लिए न्यूट्रल रंग उपयुक्त होते हैं जैसे काला, सफेद, बेज, कैमल, ग्रे, नेवी ब्लू। ये रंग आसानी से अन्य रंगों के साथ मेल खाते हैं। अच्छी फिटिंग वाली शर्ट, सिंपल टीशर्ट, फॉर्मल पैंट, ब्लेज़र या कोट जैसे बेसिक कपड़े वार्डरोब में होने चाहिए। पहले चरण में अच्छी क्वालिटी के बेसिक कपड़े खरीदें, फिर उन्हें मिलाना आसान होता है।

मां बनने के बाद फैशन सेंस में बदलाव क्यों आता है?

मां बनना महिलाओं के जीवन में सबसे बड़ा बदलाव है। शरीर, भावनाएं, समय, प्राथमिकताएं और आत्म-छवि सभी बदल जाती हैं। कई महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद खुद को भूल जाती हैं। “मैंने दो साल से खुद को आईने में देखा ही नहीं” जैसी बातें सुनने को मिलती हैं।

बच्चे की देखभाल में इतना समय और मानसिक ऊर्जा लगती है कि महिलाएं खुद को प्राथमिकता देना बंद कर देती हैं। शरीर में आए बदलाव से आत्मविश्वास कम हो जाता है। और समाज की टिप्पणियां समस्या को और बढ़ा देती हैं।

“कितनी मोटी हुई”, “अभी तक कम नहीं हुई”, “पहले कैसी थी अब कैसी है” जैसी टिप्पणियां महिलाओं को मानसिक रूप से कमजोर कर देती हैं।

मां बनने के बाद खुद को प्राथमिकता कैसे दें?

मां बनने के बाद भी महिलाओं को खुद को पूरी तरह से भूलना नहीं चाहिए। मानसिक रूप से स्वस्थ और खुश रहना जरूरी है। जब आप खुश होती हैं, तो वह खुशी परिवार में भी फैलती है।

इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। छोटे-छोटे सेल्फ केयर रूटीन से बड़ा फर्क पड़ता है। सुबह कुछ मिनट खुद के लिए निकालना, बाल सँवारना, त्वचा की देखभाल करना, अपने पसंद के कपड़े पहनना आत्मविश्वास वापस लाने में मदद करता है।

घर पर ही रहना हो तब भी पुराने कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं कि आप अच्छा महसूस न करें। घर में भी अपने लिए अच्छे कपड़े पहनने चाहिए।

नवजात माताओं के लिए आरामदायक और स्टाइलिश फैशन

बच्चा जन्माने के बाद कई महिलाएं अपने शरीर को छुपाने के लिए बड़े और ढीले कपड़े पहनती हैं। लेकिन शरीर छिपाने की बजाय सहज तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास करना चाहिए।

नवजात माताओं के लिए कॉटन के आरामदायक कुर्ते, शर्ट ड्रेस, फ्लोई स्कर्ट, साधारण टॉप, हल्का आउटवियर और आरामदायक फिटिंग वाले कपड़े उपयुक्त होते हैं। खासकर छाती और पेट के क्षेत्र में बदलाव आते हैं तो वहां आरामदायक डिजाइन चुनना चाहिए।

शरीर के उन हिस्सों को हाइलाइट किया जा सकता है जो आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।

 

राष्ट्रपालाई समझाएं: आधे जनसंख्या का प्रतिनिधित्व विपक्षी बेंच करता है : नेकपा

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • नेकपा के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल ने प्रधानमंत्री से संविधान से ऊपर न समझने और संसद के प्रति जवाबदेह बनने का आग्रह किया है।
  • संसद की नियमावली के अनुसार प्रधानमंत्री को संसद की रौस्टम पर खड़े होकर अनिवार्य संबोधन करना चाहिए, ऐसा दुलाल ने बताया।
  • विपक्ष के विरोध के बावजूद जबरदस्ती विधेयक पारित करने की सरकारी शैली के खिलाफ दुलाल ने बहुमत के घमंड से बचने की चेतावनी दी।

12 जेठ, काठमांडू। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से संविधान से ऊपर न समझने की अपील की है।

पार्टी की ओर से प्रतिनिधि सभा में विशेष समय में बोलते हुए, नेकपा के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल ने कहा कि संसद से जन्मा प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। प्रधानमंत्री शाह को संविधान से ऊपर समझा जाना गलत है और संसद में उन्हें जानकारी देनी चाहिए, ऐसा सरकार की ओर से कहा जाना चाहिए।

कम से कम एक मिनट के लिए भी प्रधानमंत्री को संसद के रोस्टम पर खड़े होकर संबोधन करना चाहिए, दुलाल ने बताया।

“प्रधानमंत्री संविधान से ऊपर हैं, इसलिए उन्हें विशेष छूट मिलनी चाहिए, यह सरकार की ओर से सदन में आना चाहिए,” उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी सभामुख के माध्यम से सरकार से जवाब मांगती है। आखिर प्रधानमंत्री इसी संसद से चुना गया है और उसे संसद को संबोधित करना ही होगा। चाहे एक मिनट के लिए न हो, प्रधानमंत्री को रोस्टम पर आकर खड़ा होना ही पड़ेगा।”

दुलाल ने कहा कि शाह विपक्ष के भी प्रधानमंत्री हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से संविधान और प्रतिनिधि सभा की नियमावली के भीतर रहते हुए सदन का सम्मान करने का आग्रह करना उनका अधिकार है।

सत्तारूढ़ पक्ष की बहुमत होने के बावजूद विपक्ष के विरोध के बीच जब जबरदस्ती विधेयक पारित किया जाता है, तो वे सभामुख को इसे राष्ट्रपति के समक्ष प्रमाणीकरण के लिए भेजने की चुनौती भी देते हैं।

“कुछ दिन पहले विपक्ष के अवरोध के बीच वैकल्पिक वित्त संबंधी विधेयक पास किया गया। सत्तापक्ष के सांसदों को भी इसमें योगदान नहीं मिला। संसद में बहस और तर्क वितर्क के बाद ही महत्वपूर्ण विधेयक पारित होना चाहिए। यदि सरकार कहती है कि उनके पास बहुमत है तो फिर हमें यहाँ क्यों बैठना पड़ता है? जब सभी सरकारें विधेयक लाएंगी तो क्या सभामुख इसे राष्ट्रपति के पास भेज देंगे? इस प्रक्रिया का क्या मतलब है?” दुलाल ने सवाल किया।

संसद नियमावली के कुछ प्रावधानों को अपनी सुविधा अनुसार लागू करते हुए सत्तापक्ष ने प्रश्नोत्तर में प्रधानमंत्री को संसद में उपस्थित कराने की व्यवस्था का पालन नहीं किया, दुलाल ने कहा।

यदि प्रधानमंत्री को संसद में आकर बोलना जरूरी है तो यदि संविधान या कानून का उल्लंघन हो तो वे इसका सामना करने के लिए रेडियो (रास्वपालाई) को चुनौती देते हैं।

“नियमावली के अनुसार प्रधानमंत्री को संसद में आकर बोलना चाहिए, इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। यदि गलती है तो इसे सभामुख के माध्यम से बताएँ, हम जानना चाहते हैं कि हमें कैसे कारण बताने का मौका मिलेगा,” दुलाल ने कहा, “प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम 38(1) का उपयोग करने वाले को नियमावली के 61(1) का पालन करना चाहिए या नहीं? यह जवाब संसद में खोजना उचित होगा या नहीं?”

दुलाल ने कहा कि सदन में बहुमत होने के बावजूद यह न भूलें कि विपक्ष को भी आधे मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है।

“संसदीय व्यवस्था या लोकतंत्र में बहुमत हमेशा वास्तविक बहुमत को दर्शाता नहीं है। वर्तमान में सत्तारूढ़ दल के पास बहुमत है, इसे हमने स्वीकार किया। इसके साथ ही जो आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं वे विपक्षी बेंच में भी होने चाहिए, संसद को इसे समझना चाहिए,” उन्होंने कहा, “चुनावी प्रणाली में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों को प्रतिनिधित्व मिलता है। आधे नेपाली नागरिकों का प्रतिनिधित्व विपक्षी ने किया है और उनकी आवाज़ को भी महत्व देना चाहिए। यह सभी नेपाली की आवाज़ों को महत्व देना है।”

प्रधानमंत्री न आने तक संसद संचालन न करने पर विपक्षी दलों का सयुंक्त निर्णय

प्रतिनिधिसभा में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के संसद में न आने तक सदन संचालन रोकने का स्पष्ट रुख अपनाया है। नेपाली कांग्रेस, नेकपा एमाले, और राप्रपा सहित विपक्षी दलों के प्रमुख सचेतकों ने प्रधानमंत्री से सांसदों के प्रश्नों के जवाब संसद में आने पर ही देने की मांग की है। श्रम संस्कृति पार्टी के आरोन राइ ने कहा, “प्रधानमंत्री संसद में आकर सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार नहीं हुए तक हमारा विरोध जारी रहेगा।” १२ जेठ, काठमाडौँ।

विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के संसद में न आने तक सदन के संचालन को बाधित करने का कड़ा फैसला लिया है। सोमवार को प्रतिनिधिसभा की बैठक में आकस्मिक समय, शून्य समय और विशेष समय समाप्त होने के बाद कार्यसूची पर जाने से पहले विपक्षी दलों ने विरोध जताया। सभामुक्त ने बोलने का समय देने के बाद विपक्षी दलों के सांसदों ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के उपस्थित न होने तक सदन का संचालन नहीं होगा।

नेपाली कांग्रेस की प्रमुख सचेतक बसना थापा ने कहा कि प्रधानमंत्री को नागरिकों के प्रश्नों का जवाब संसद में देना चाहिए। नेकपा एमाले के प्रमुख सचेतक ऐन महर ने संविधान तथा कानूनी प्रावधानों के अनुरूप प्रधानमंत्री की संसद में उपस्थिति को जरूरी बताया। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सचेतक युवराज दुलाल ने सभी को संविधान और कानून का पालन करते हुए आगे बढ़ने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री को बैठकों में आने और रोस्टम पर खड़े होकर बोलने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन विपक्षी दलों की मांग है कि वे संसद में उपस्थित हों। श्रम संस्कृति पार्टी के आरोन राइ ने कहा कि यह इतिहास में एक संदर्भ स्थापित करने का विषय है और आने वाली पीढ़ी के लिए संदेश बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संख्या का गर्व अस्थायी है और पांच वर्ष बाद चुनाव होंगे, जिसके बाद नया समीकरण बन सकता है। ‘जब तक प्रधानमंत्री संसद में आकर सांसदों के प्रश्नों का जवाब नहीं देंगे, हमारा विरोध जारी रहेगा,’ उन्होंने कहा। राप्रपा की प्रमुख सचेतक खुश्बू ओली ने कहा कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति के लिए सत्ता पक्ष को भी पहल करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा, ‘जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद क्यों नहीं करना चाहते?’

प्रधानमंत्री के आने तक संसद अधिवेशन रोकने का विपक्षी दलों का ऐलान

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा सम्पन्न।

  • प्रतिनिधि सभा में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की उपस्थिति तक संसद के अधिवेशन को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है।
  • नेपाली कांग्रेस, एमाले, राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी सहित विपक्षी दलों के प्रमुख सांसदों ने प्रधानमंत्री से सांसदों के प्रश्नों के जवाब संसद में देने की मांग की है।
  • श्रम सांस्कृतिक पार्टी के आरोन राई ने कहा, “प्रधानमंत्री सांसदों के प्रश्नों के जवाब देने के लिए तैयार नहीं होंगे तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा।”

२५ मई, काठमांडू – विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि तब तक प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही नहीं चलेगी जब तक प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) संसद में उपस्थित नहीं होते।

सोमवार को आपातकालीन समय, शून्य घंटे और विशेष समय के बाद विपक्षी दलों ने एजेन्डा की ओर बढ़ने से पहले विरोध प्रदर्शन किया।

सभापति द्वारा वक्तव्य देने के लिए समय प्रदान किए जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने कहा कि प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में संसद की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।

नेपाली कांग्रेस की प्रमुख संसदीय सदस्य बसना थापा ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री को जनता के प्रश्नों के जवाब देना आवश्यक है।

संसदीय दल के प्रमुख सदस्य अइन महरा ने संविधान और कानून के अनुसार प्रधानमंत्री का संसद में उपस्थित होना अनिवार्य बताया।

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सदस्य युवराज दुलाल ने सभी से संविधान और कानून का पालन करते हुए आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भले ही समय लगे, प्रधानमंत्री को संसद के रोस्ट्रम पर आकर संबोधित करना चाहिए।

श्रम सांस्कृतिक पार्टी के आरोन राई ने इतिहास में उदाहरण स्थापित करने और आने वाली पीढ़ी को संदेश भेजने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि जनमत की संख्या पर गर्व अस्थायी होता है, क्योंकि पांच साल बाद चुनाव नई परिस्थितियां लेकर आता है।

“हमारा विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक प्रधानमंत्री संसद में आकर सांसदों के प्रश्नों के जवाब देने को तैयार नहीं होते,” राई ने कहा।

राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी की प्रमुख सदस्य खुशी ओली ने सरकार से अपील की कि वे विपक्षी दलों के साथ मिलकर सुनिश्चित करें कि प्रधानमंत्री संसद में उपस्थित हों। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया, ‘आप जनप्रतिनिधियों से संवाद करने में अनिच्छुक क्यों हैं?’

विपक्षीको विरोधलाई रास्वपा सांसद जगदीश खरेलले भने ‘तमासा’

रास्वपाका सांसद जगदीश खरेलले विपक्षीको विरोधलाई ‘तमासा’ को रूपमा टिप्पणी गरे

१२ जेठ, काठमाडौं। प्रतिनिधिसभाको बैठकमा विपक्षीहरूले गरेको विरोधलाई सत्ता पक्षका रास्वपाका सांसद जगदीश खरेलले ‘तमासा’ भनेका छन्। संसदमा प्रधानमन्त्रीको जवाफदेहिता र उपस्थितिको माग गर्दै निरन्तर विरोध गरिरहेका विपक्षी दलहरूलाई उनी आरोप लगाउँदा बैठक केही समयका लागि स्थगित भएको छ। विरोधका बीचमा पनि संसदको कारबाही जारी रहेको थियो।

कार्यसूची अनुसार पर्यटन विधेयकमाथिको सैद्धान्तिक छलफलमा भाग लिन रोस्टममा उपस्थित सांसद खरेलले सुरुमा विपक्षीहरूलाई आरोप लगाउन थालेपछि फ्लोरमा उनीविरुद्ध विरोध गरिरहेका सांसदहरू झन आक्रोशित भएका थिए। कांग्रेस सांसद नरेन्द्रकुमार केरुङले खरेलको अभिव्यक्तिमाथि प्रतिक्रिया जनाउँदै रोस्टर तर्फ अघि बढ्न खोजे। यस क्रममा कांग्रेस प्रमुख सचेत वासना थापाले उनलाई थुम्थुम्याएर पछाडि हटाएकी थिइन्। यसअघि सभामुखले संसदमा अपमानजनक शब्द प्रयोग नगर्न पटक–पटक रुलिङ दिएका थिए।

रास्वपाका संसदीय दलका उपनेता गणेश पराजुलीदेखि एमाले संसदीय दलका नेता रामबहादुर थापासम्मका अभिव्यक्तिहरू संसदीय रेकर्डबाट हटाइएका छन्। खरेलले भने, ‘म आज गहिरोसँग महसुस गरें, सरकारले किन आठवटा अध्यादेश ल्याउनुपर्‍यो भन्ने कुरा बुझे।’ उनले थपे, ‘संसद यसरी नै सञ्चालन हुँदै आएको विगत वर्षदेखि हामीले २०७२ सालमा संविधान निर्माण भएको बेला बनाउनु पर्ने कानून निर्माण गर्न नसकेको यो तमासाले स्पष्ट देखाएको छ।’ उनले विपक्षीहरूमाथि चोर औँला देखाउँदै विरोधलाई तमासा भने।

उनले भने, ‘संसदीय तमासा जुन हामी देखाइरहेका छौं, सँधै सकारात्मक हुँदैन।’ जनताको प्रतिनिधित्व गर्ने र कानुन बनाउनुपर्ने सन्दर्भमा विपक्षी दलका सांसदहरू पनि जिम्मेवार हुनुपर्ने उनले जोड दिए। ‘प्रधानमन्त्री उपस्थित हुने वा नहुने कुराले कानुन बनाउने प्रक्रियामा अवरोध पुऱ्याउन सक्छ?’ खरेलले प्रश्न उठाए। कलाकारिय अभिव्यक्तिपछि विपक्षी सांसदहरू थप उग्र बने। त्यसपछि सभामुख अर्यालले प्रतिनिधिसभाको बैठक १५ मिनेटका लागि स्थगित घोषणा गरे।