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लेखक: space4knews

राजन और सुनमाया ने चाँगुनारायण राष्ट्रीय ट्रेल रन की उपाधि जीती

नेपाल आर्मी के राजन रोकाय और जुम्ला की सुनमाया बुढ़ाले चाँगुनारायण राष्ट्रीय ट्रेल रन के खुला ३६ किलोमीटर दौड़ में उपाधि जीती है। राजन ने २ घंटे ६ मिनट २३ सेकंड में दूरी पूरी की, जबकि सुनमायाने २ घंटे २७ मिनट १४ सेकंड में दौड़ समाप्त की। १९ वैशाख, काठमाडौं। नेपाल आर्मी के राजन रोकाय और जुम्ला की सुनमाया बुढ़ाले चाँगुनारायण राष्ट्रीय ट्रेल रन २०८३ की उपाधि जीती है। नेपाल एडवेंचर रनिंग महासंघ (एनएआरएफ) के आयोजन में शनिवार को भक्तपुर के चाँगुनारायण में हुए ट्रेल रन की खुला ३६ किलोमीटर दौड़ में पुरुष वर्ग में राजन और महिला वर्ग में सुनमाया विजेता बने। राजन ने निर्धारित दूरी २ घंटे ६ मिनट २३ सेकंड में पूरी की। ताप्लेजुङ के रमेश लिम्बु ने २ घंटे ७ मिनट ३० सेकंड में दूरी पूरी करके दूसरे स्थान पर रहे। नेपाल आर्मी के गोलपाल तामाङ तीसरे स्थान पर रहे। उन्होंने २ घंटे ७ मिनट ४२ सेकंड में दूरी पूरी की। नेपाल आर्मी के गजेन्द्र राई चौथे, प्रवल क्षेत्री पांचवें, राजेन्द्र तामाङ छठे, तिलक बहादुर सुनार सातवें, विरेन्द्र पाण्डे आठवें, विशाल नवें और रिखुलाल सिन्जाली मगर दसवें स्थान पर रहे। महिला वर्ग में विजेता सुनमाया बुढ़ाले निर्धारित दूरी २ घंटे २७ मिनट १४ सेकंड में पूरी की। सुनसरी की रोकाया दूसरे और निर्मला राई तीसरे स्थान पर रहीं। सुनसरी की खिलाड़ी ने २ घंटे ४४ मिनट ५३ सेकंड और निर्मलाने २ घंटे ४६ मिनट २९ सेकंड में दौड़ खत्म की। महिला वर्ग में एलिस विसकेफ चौथे, आङ फुर्बा शेर्पा पांचवें, काब्या रावल छठे, सपना गुरुङ सातवें, शासा श्रेष्ठ आठवें, मुना लिम्बु नवें और शारदा राई दसवें स्थान पर रही। यू-२० जूनियर वर्ग के ७ किलोमीटर पुरुष दौड़ में उत्तम तामाङ २१ मिनट ०९ सेकंड में पहले स्थान पर रहे। सुसन लामिछाने दूसरे और खकेन्द्र शर्मा तीसरे स्थान पर रहे। सुसान ने २१ मिनट १५ सेकंड और खकेन्द्र ने २१ मिनट १९ सेकंड में दूरी पूरी की। ७ किलोमीटर महिला दौड़ में शर्मिला गैरे पहले, गीता नेपाली दूसरे और मनिषा तामाङ तीसरे स्थान पर रही। गीता ने २७ मिनट ४८ सेकंड और मनिषा ने २८ मिनट २८ सेकंड में दौड़ पूरी की। गीता के परिणाम तकनीकी कारणों से स्थगित किए गए हैं। खुला ३६ किलोमीटर महिला एवं पुरुष वर्ग के विजेता को १ लाख रुपये, दूसरे को ७५ हजार और तीसरे को ५० हजार रुपये पुरस्कार दिया गया। चौथे को २५ हजार, पांचवें को १० हजार और छठे से दसवें स्थान तक के खिलाड़ियों को प्रति स्थान ३ हजार रुपये पुरस्कार मिला। यू-२० ७ किलोमीटर दौड़ में पहले स्थान पर ३० हजार, दूसरे को २० हजार और तीसरे को १० हजार रुपये पुरस्कार मिले जबकि चौथे को ५ हजार, पांचवें को ३ हजार और छठे से दसवें स्थान तक के खिलाड़ियों को प्रति स्थान १ हजार रुपये पुरस्कार मिला। पुरस्कार राशि में प्रचलित कानून के अनुसार १५ प्रतिशत कर कटौती होगी। ३६ किलोमीटर दौड़ चाँगुनारायण मंदिर से शुरू होकर त्रिशुल डाँडा, तेलकोट, श्री पंच महालक्ष्मी मंदिर, कार्तिके व्यू पॉइंट, नगरकोट व्यू टावर, मुहान पोखरी, पानी मुहान और पाइपलाइन रोड के रास्ते चाँगुनारायण नगरपालिका में समाप्त हुई। ७ किलोमीटर दौड़ भी चाँगुनारायण मंदिर से शुरू होकर त्रिशुल डाँडा के रास्ते चाँगुनारायण नगरपालिका में समाप्त हुई। चाँगुनारायण नगरपालिका के मेयर जीवन खत्री ने प्रतियोगिता का उद्घाटन किया। समापन समारोह में बागमती प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुरेश श्रेष्ठ मुख्य अतिथि थे, जबकि सचिव दीपेन्द्र सुवेदी, राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) के कार्यकारी समिति सदस्य भानु चन्द, राखेप बोर्ड सदस्य जगत धामी और संत कुमार महतो, फुल कॉन्टैक्ट कराटे महासंघ के अध्यक्ष सूर्य बुढाथोकी, प्रतियोगिता के प्रायोजक केएफसी के प्रतिनिधि संदीप कार्की, १४ पिक आउटडोर के विक्रम कार्की, जिला खेलकूद विकास समिति के अध्यक्ष राजु थापा और चाँगुनारायण नगरपालिका खेलकूद के रघु केसी समेत कई अन्य लोग उपस्थित थे।

राष्ट्रपतिले जारी गरे ६ अध्यादेश, दुई वटा अध्ययनकै चरणमा

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेलले ६ अध्यादेश जारी गरे, दोश्रो दुई अध्यादेश अध्ययनाधीन

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेलले सरकारले सिफारिस गरेका आठमध्ये छ वटा अध्यादेश जारी गर्नुभएको छ। संवैधानिक परिषदसँग सम्बन्धित अध्यादेश र केही नेपालको ऐनमा संशोधनका लागि सिफारिस भएका अध्यादेशहरू वर्तमानमा आवश्यक अध्ययन प्रक्रियामा रहेको जानकारी प्राप्त भएको छ। पछिल्ला तीन दिनमा सार्वजनिक खरिद, सहकारी, सम्पत्ति शुद्धीकरण, स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, सार्वजनिक पदाधिकारी पदमुक्ति र विश्वविद्यालयसम्बन्धी अध्यादेशहरू जारी भएका छन्। १९ वैशाख, काठमाडौं।

सरकारले सिफारिस गरेका विभिन्न आठवटा अध्यादेशमध्ये राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेलले छ वटा अध्यादेश जारी गर्नुभएको छ। शनिबार अपराह्न राष्ट्रपति कार्यालयका प्रवक्ता रितेशकुमार शाक्यले थप तीन वटा अध्यादेश जारी गरिएको जानकारी दिनुभएको थियो। संविधानको धारा ११४ को उपधारा १ अनुसार राष्ट्रपति पौडेलले पछिल्ला तीन दिनमा यी छ वटा अध्यादेश जारी गराउनुभएको हो।

राष्ट्रपति कार्यालयका स्रोत अनुसार बाँकी दुईवटा अध्यादेश अहिले अध्ययनाधीन अवस्थामा रहेका छन्। संवैधानिक परिषदसँग सम्बन्धित उक्त अध्यादेशमा राष्ट्रपति पौडेलले विशेष चासो देखाउनु भएको छ। यसअघि सरकारले पटकपटक ती अध्यादेश सिफारिस गरिए पनि जारी गर्ने वा नगर्ने विषयमा अनिश्चयता देखिएपछि राष्ट्रपति पौडेलले कानुनविद्हरूसँग छलफल समेत गर्नुभएको थियो।

राष्ट्रपति कार्यालयको जानकारीअनुसार पछिल्ला तीन दिनमा ६ वटा अध्यादेशहरू जारी गरिएको छ। २०७८ वैशाख १७ गते सार्वजनिक खरिद (दोस्रो संशोधन) अध्यादेश, २०७८ र सहकारी (पहिलो संशोधन) अध्यादेश, २०७८ जारी गरिएका थिए। त्यस्तै वैशाख १८ गते सम्पत्ति शुद्धीकरण (मनी लाउन्डरिङ) निवारण (तेस्रो संशोधन) अध्यादेश जारी गरियो। आज (वैशाख १९, शनिबार) भने तीन वटा अध्यादेश एकैपटक जारी गरिएको छ।

नेकपि ने एकता राष्ट्रीय महाधिवेलन के कार्यक्रम की घोषणा की

१९ वैशाख, काठमांडू। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने आगामी मंसिर में एकता राष्ट्रीय महाधिवेलन आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी के संयोजक पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कार्य संयोजन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मंसिर ११ से १५ तारीख तक काठमांडू में महाधिवेलन होगा। इस कार्यक्रम की जानकारी शनिवार को पार्टी ने विज्ञप्ति के माध्यम से दी।

पार्टी ने निर्णय लिया है कि आगामी सावन समाप्ति तक सदस्यता नवीनीकरण और सदस्यता विस्तार अभियान चलाया जाएगा, भाद्र १५ तक वडा, भाद्र १६ से मसान्त तक पालिका, आश्विन मसान्त तक जिला, और कार्तिक १५ तक प्रदेश अधिवेशन पूरा किया जाएगा। पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश ज्वाला के अनुसार, आगामी जेठ समाप्ति तक केंद्र, प्रदेश, जिला, स्थानीय पालिका, वडा और टोल स्तर तक संगठनात्मक तथा पार्टी और जनवर्गीय/मोर्चा संगठनों का एकीकरण एवं समायोजन किया जाएगा। यह जानकारी प्रवक्ता ज्वाला ने आज जारी विज्ञप्ति में दी।

पार्टी की सभी समितियां वडा से केंद्र तक समानुपातिक और समावेशी सिद्धांतों के अनुसार निर्वाचित होंगी, तथा चुनी गई समितियों में अनुभवी, प्रौढ़, युवाओं व नवयुवाओं की समावेशिता रहेगी। युवा और नवयुवाओं का प्रतिनिधित्व ५० प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा। नेकपि ने देवप्रसाद गुरुङ, प्रकाश ज्वाला, प्रेमबहादुर सिंह, रनध्वज लिम्बू, रेखा शर्मा, गणेश विश्वकर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मुक्तिनारायण प्रधान और डॉ. खिमलाल देवकोटा, अधिवक्ता जगदेव चौधरी, डम्बर विक्रम कार्की और डॉ. रामबहादुर चौधरी को संविधान संशोधन हेतु सुझाव कार्यदल के सदस्य के रूप में नियुक्त किया है। पार्टी एकीकरण के बाद गठित कार्यसंयोजन समिति की चैती १९ से वैशाख १४ तक चली बैठक में पार्टी के अंतरिम विधान–२०८२ के अनुसार पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति को पूर्णता प्रदान करने का निर्णय लिया गया, इसकी जानकारी प्रवक्ता ज्वाला ने दी।

तस्वीरमा हेर्नुस् बनेपाको चण्डेश्वरी जात्रा – Online Khabar

तस्वीरों में देखें बनेपा की चण्डेश्वरी जात्रा

समाचार सारांश

समीक्षा की गई।

  • काभ्रेको बनेपामा हर साल चण्डेश्वरी जात्रा चण्डी पूर्णिमा से तीन दिन तक मनाई जाती है।
  • जात्रा के पहले दिन सुबह मत पूजा (चिराग यात्रा) होती है और विभिन्न बाजा-गाजों के साथ चिराग जलेश्वर महादेव तक विसर्जित किया जाता है।
  • जात्रा में बनेपा के सभी नेवार समुदाय भोज करते हैं, रथ खींचते हैं और देवी की मूर्ति को विभिन्न खटों में रखकर पूजा-अर्चना करते हैं।

१९ वैशाख, काठमाडौं। काभ्रेको बनेपामा चण्डेश्वरी जात्रा चल रही है। यहाँ के निवासी हर वर्ष चण्डेश्वरी जात्रा मनाते हैं।

बनेपा के सात गांवों में हर वर्ष चंडी पूर्णिमा से तीन दिन तक जात्रा मनाई जाती है।

जात्रा के पहले दिन सुबह-सुबह मत पूजा (चिराग यात्रा) की जाती है।

धिमे, नायखिं, छुस्याल समेत विभिन्न बाजा-गाजों के साथ घरों से चिराग लेकर बनेपा के लायकु में इकट्ठा होकर जलेश्वर महादेव (जसिगा) तक जाकर विसर्जन करने की परंपरा है।

कल (शुक्रवार) सुबह पूजा के बाद बनेपाली तीन दिन तक इस जात्रा को भव्य रूप में मनाते हैं। जात्रा के दौरान बनेपा के सभी नेवार समुदाय के घरों में भोज होता है।

जात्रा के अनुसार यहाँ के घरों की सफाई की जाती है। खासकर पूर्णिमा से एक दिन पहले हनुमान ढोका से लायी जाने वाली तरबार (खड्ग) सहित सरकार की ओर से भी पूजा की जाती है। बुजुर्ग टोल-टोल में बैठकर भजन गाते हैं। सड़कों और गलियों में उत्सव का माहौल होता है।

जात्रा के शुरूआती दिन बनेपा के तीनधारा में बनाये गए पांग्रा में बिना देवता के खाली खट को भेड़ की बलि देने के बाद विभिन्न बाजा-गाजों के साथ युवक उसे चण्डेश्वरी तक ले जाते हैं।

रथ खींचते और उत्साह बढ़ाते हुए वे बाजार के हर घर की खिड़कियों से प्रोत्साहन पाते हैं। हर घर से तैयार प्रसाद झरोखों से रथ में विराजित चण्डेश्वरी को चढ़ाए जाते हैं।

पूर्णिमा के अगले दिन देवी सहित की खट को विधिपूर्वक पूजा करके फिर से बनेपा के बकुटोल की ओर लाया जाता है। बकुटोल को चण्डेश्वरी द्वारा दैत्यराज चण्डासुर के वध के बाद समाधि स्थल माना जाता है। वहाँ रथ पहुंचाने, भव्य स्वागत-सत्कार और बलि देने की परंपरा है।

इसके बाद खट को प्राचीन लायकू दरबार तक ले जाया जाता है। वहाँ से चण्डेश्वरी देवी की मूर्ति को एक छोटे खट में रखकर पुनः बकुटोल लाया जाता है। मूर्ति को छोटे खट में रखकर चण्डेश्वरी में पुनः पहुंचाने के बाद जात्रा समाप्त हो जाती है।

शक्तिशाली देवी मानी जाने वाली चण्डेश्वरी देवी की पूजा करने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। जात्रा में भाग लेने से ‘मांग पूरी होने’ का विश्वास है।

चण्डेश्वरी जात्रा में बनेपा के स्थानीय मानन्धर, भोछिभोया, राजवाहक समेत सभी नेवार समुदाय सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

प्रदीप ज्ञवालीः सरकार निर्वाचित सर्वसत्तावाद की ओर बढ़ रहा है, आरोप लगाया

१९ वैशाख, काठमाडौं। नेकपा एमाले के नेता प्रदीप ज्ञवाली ने सरकार पर निर्वाचित सर्वसत्तावाद की दिशा में बढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने शनिवार को जिला समन्वय समिति के जिम्मेदारी विषयक कार्यक्रम में कहा कि १०० दिनों तक चुप रहने का मन था, लेकिन सरकार की गतिविधियों ने कुछ बातें अवश्य बोलनी पड़ने वाली स्थिति बना दी है। “कुछ बातें न बोलना, रिकॉर्ड न करना और समाज को जागरूक न करना संभव नहीं है,” ज्ञवाली ने कहा।

उन्होंने बताया कि सरकार की कार्यशैली को देखकर नेपाली जनता को उन लोकतांत्रिक अधिकारों के सिकुड़ने का खतरा दिखने लगा है, जो उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद हासिल किए हैं। २०२१ साल के पंचायतकाल में नेपाल के लोगों ने सबसे पहला अधिकार स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन का अधिकार प्राप्त किया था, जो उन्होंने संघर्ष कर सुरक्षित किया था। ज्ञवाली ने कहा, “तब दल प्रतिबंधित थे, नेता जेल में थे, लेकिन विद्यार्थी ने स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन का अधिकार २०२१ साल में जीत लिया था। आज उस अधिकार को कटौती का ऐलान किया गया है।”

ज्ञवाली ने कहा कि ट्रेड यूनियन का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित है। उन्होंने कहा, “हाँ, ट्रेड यूनियन, विद्यार्थी संगठन और दलों में विकृतियां हो सकती हैं, लेकिन दलों में विकृति होने के कारण दल-रहित व्यवस्था की कल्पना करना गलत है।”

उन्होंने तत्कालीन राजा महेन्द्र शाह द्वारा २०१७ साल में इसी तरह के कदम उठाए जाने को भी याद दिलाया। उन्होंने बताया कि स्वतंत्र मीडिया को मजबूत न बनने देने के लिए विज्ञापनों पर नियंत्रण लगाया गया है, जो लगभग प्रतिबंध के समान है। उन्होंने कहा, “सामाजिक संजाल में भी इसी तरह का माहौल है। स्वस्थ बहस न हो, इसके लिए संगठित समूह बनाकर अलग विचारों को दबाया और उत्पीड़ित किया जा रहा है।” ज्ञवाली ने यह सभी गतिविधियां निर्वाचित सर्वसत्तावाद की ओर बढ़ने के संकेत बताए। उन्होंने कहा, “मुझे चिंता है कि हम निर्वाचित सर्वसत्तावाद और निर्वाचित अलोकतांत्रिक शासन की तरफ बढ़ रहे हैं, इसके प्रारंभिक संकेत दिखने लगे हैं।”

इरान युद्ध के प्रभाव: सऊदी अरब में शराब की आपूर्ति में कमी

१९ वैशाख, काठमाडौं । इरान युद्ध के कारण सऊदी अरब में शराब की आपूर्ति प्रभावित हुई है। सऊदी अरब के शराब प्रेमियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि युद्ध के कारण शराब की आपूर्ति में देरी के साथ-साथ कमी भी देखी जा रही है। बीबीसी के अनुसार, सऊदी अरब में शराब बिक्री के लिए केवल एक ही सरकारी दुकान संचालित है। यह दुकान रियाद के कूटनीतिज्ञों के सरकारी आवास क्षेत्र के भीतर स्थित है। हाल ही में शराब खरीदने आए पाँच लोगों ने इस दुकान में महंगे दाम और सीमित ब्रांड उपलब्ध होने की जानकारी दी है। दुकान पर किसी भी नाम या बोर्ड का संकेत नहीं है। वर्ष २०२४ में गैर-मुस्लिम कूटनीतिज्ञों को लक्षित करते हुए यह दुकान खोली गई थी। पिछले वर्ष से यह दुकान गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिकों को भी शराब बेच रही है। सऊदी अरब में सन् १९५२ से शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है। लेकिन विदेशी कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने सीमित संख्या में लाइसेंस लेकर शराब की दुकानें संचालित करने की अनुमति दी है।

प्रदीप ज्ञवाली – Online Khabar

प्रदीप ज्ञवाली: नेकपा एमाले के लिए जिला स्तरीय समन्वय समिति आवश्यक है

१९ वैशाख, काठमाडौं। नेकपा एमाले के नेता प्रदीप ज्ञवाली ने अपनी पार्टी के लिए जिला समन्वय समिति की आवश्यकता व्यक्त की है। शनिवार को जिला समन्वय समिति की जिम्मेदारी संबंधी एक अन्तरक्रिया कार्यक्रम में बोलते हुए ज्ञवाली ने समन्वयात्मक विकास और संसाधनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला समन्वय समिति को अनिवार्य बताया। ‘जिला समन्वय समिति चाहिए या नहीं इस विषय में दल के दृष्टिकोण के अनुसार नेकपा एमाले इसे आवश्यक और प्रभावी मानता है,’ उन्होंने कहा।

ज्ञवाली ने सत्ताधारी होने पर कुछ नहीं किया जाने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘स्थानीय सरकार संचालन ऐन आकाश से गिरने वाली बारिश नहीं है, यह संघ, प्रदेश और स्थानीय तह के बीच के अंतर्संबंध और समन्वय के तहत सहज रूप में लागू हुआ है।’ उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा, ‘क्या यह पर्याप्त नहीं है तो बताइए। सत्ता में रहने के दौरान सोते रहे, अब आकर विरोध से समाधान नहीं निकलेगा।’

जिला समन्वय समिति की आवश्यकता पर ज्ञवाली ने दो महत्वपूर्ण पक्षों को रेखांकित किया। ‘पहला, यह विकास के संतुलन की बात करता है और इस संतुलन को देखने वाली संस्था संभवतः संविधान द्वारा ही इस प्रकार प्रावधानित की गई है,’ ज्ञवाली ने कहा। दूसरा पक्ष निगरानी का है। सुशासन, परियोजना कार्यान्वयन, प्राकृतिक संसाधन और सीमाओं से जुड़ी समस्याओं की निगरानी करने वाली संस्था जिला समन्वय समिति ही होगी, उन्होंने बताया। ‘यदि ऐसा है तो समन्वयात्मक एवं क्षेत्रीय संतुलन सहित विकास के लिए सिफारिश करने वाला प्राधिकरण तथा कार्यान्वयन की निगरानी करने और अनियमितता पाए जाने पर दंड-सजा की सिफारिश करने वाले अधिकारों से सुसज्जित जिला समन्वय समिति आवश्यक है,’ उन्होंने जोर दिया।

‘इथा’: इतिहास और कथा का अनोखा संगम

‘इथा’ उपन्यास इतिहास और कथा को अनुपम संयोजन प्रस्तुत करते हुए २४०० साल पहले के सामाजिक, राजनीतिक और लैंगिक मुद्दों को उजागर करता है। इस उपन्यास की तीन महिला पात्र नयनतारा, सैरन्द्री और वसुधा स्त्री अस्तित्व, शक्ति और विद्रोह के प्रतीक के रूप में अपनी भूमिका निभाती हैं। ‘इथा’ धार्मिक अंधविश्वास, पितृसत्तात्मक संरचना और सत्ता-धर्म संबंधों पर तीव्र आलोचना करते हुए वर्तमान सामाजिक प्रश्नों को भी सामने लाता है।

यदि आपको केवल कथा में रुचि है तो केशव दाहाल की नई पुस्तक ‘इथा’ आपकी पसंद हो सकती है; और यदि आप केवल इतिहास में रुचि रखते हैं तो भी यह उपन्यास आपको आकर्षित करेगा। दोनों रुचियां हो तो यह और भी आनंददायक होगा। क्योंकि ‘इथा’ में आपको इतिहास और कथा का अनोखा मिश्रण मिलेगा। जब मैंने ‘इथा’ पढ़ी तो मुझे यही अनुभव हुआ कि इतिहास जैसा कथा और कथा जैसा इतिहास है।

उपन्यास की शुरुआत वसुधा के विद्रोह से होती है। शरीर पर लगे दाग के कारण विवाह से अस्वीकृत वसुधा का आत्मदाह केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि यह पितृसत्तात्मक मूल्यों और सामाजिक संरचना के खिलाफ एक मौन लेकिन तीव्र विरोध है। यहीं से उपन्यास का केंद्रीय स्वर निर्धारित होता है – पुरुषप्रधान अहंकार और स्त्री विरोधी अन्याय का पर्दाफाश।

नयनतारा इस उपन्यास की मुख्य पात्र हैं और उनका विद्रोह उपन्यास की रीढ़ है। राजा प्रमाति के अहंकार और नयनतारा के प्रतिरोध से यह दिखता है कि स्त्री केवल पीड़ित नहीं बल्कि संघर्ष करने वाली शक्तिशाली पात्र भी है। उपन्यास धार्मिक अंधविश्वास का कठोर आलोचना करता है और यहां धर्म सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि सत्ता और शक्ति प्राप्ति का माध्यम भी है।

‘इथा’ पढ़ना केवल कथा पढ़ना नहीं, बल्कि एक युग, चेतना और विद्रोह को महसूस करना है। यह मनोरंजन के साथ-साथ सवाल उठाने और वर्तमान मान्यताओं के पुनर्विचार के लिए प्रेरित करता है।

इरान को परमाणु हथियार हासिल करने की किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी: ट्रम्प

२० वैशाख, काठमाडौं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार प्राप्त करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रम्प के अनुसार, यदि इरान को परमाणु हथियार मिलते हैं, तो यह पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा होगा, और इसीलिए अमेरिका को इरान के खिलाफ युद्ध करना पड़ सकता है। शनिवार को फ्लोरिडा में आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रम्प ने कहा, ‘अगर हमने ऐसा नहीं किया होता तो उनके पास परमाणु हथियार होते और इज़राइल, पश्चिम एशिया तथा यूरोप तबाह हो जाते। हम मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्तियों के हाथों परमाणु हथियार जाने बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते।’ उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने मध्य पूर्व को एक बड़ी परमाणु आपदा से बचाया है।

इसी बीच, ट्रम्प ने इरान के युद्ध रोकने के उद्देश्य से भेजे गए नए प्रस्ताव को फिर से अस्वीकार किया है। इससे पहले 26 और 27 अप्रेल को इरान द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को ट्रम्प पहले ही खारिज कर चुके हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, इरान के नए प्रस्ताव में परमाणु मुद्दे का कोई उल्लेख न होने के कारण ट्रम्प असंतुष्ट हैं। दूसरी ओर, इरान ने होर्मुज जलसंधि को तुरंत खोलने और परमाणु मामले को बाद में वार्ता के लिए स्थगित करने की मांग की है, जबकि ट्रम्प दोनों को एक साथ पूरा करने पर जोर दे रहे हैं।

उन्होंने पहले ही इरान से कहा है कि वार्ता की मेज पर आने से पहले उसे संशोधित यूरेनियम वापस करना होगा। अमेरिका में विवाद तब बढ़ गया जब ट्रम्प ने कहा कि युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की अनुमति जरूरी नहीं है। 1973 के ‘वार पावर्स’ कानून के तहत किसी राष्ट्रपति को युद्ध शुरू करने के 60 दिनों के भीतर संसद से अनुमति लेनी होती है, नहीं तो 1 मई तक सैन्य कार्रवाई रोकनी होती है। लेकिन ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि युद्धविराम के बाद यह 60 दिन की सीमा ठप है। ट्रम्प ने इरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए संसद से अनुमति न लेने की बात कही है और जो लोग अनुमति मांगते हैं उन्हें ‘देशभक्त नहीं’ बताया है।

व्हाइट हाउस ने अमेरिकी संसद को औपचारिक रूप से सूचना दी है कि इरान के साथ युद्ध समाप्त हो चुका है। हालांकि वहां अमेरिकी सेना की उपस्थिति जारी है, लेकिन इस युद्ध के जारी रहने का कोई संकेत नहीं है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलसंधि के पारगमन के दौरान कर न देने पर किसी भी कंपनी को, जो इरान को धन हस्तांतरित करती है, प्रतिबंध लगाया जा सकता है। चाहे वह राशी चैरिटी के नाम पर ही क्यों न दी जाए, उस पर भी कार्रवाई होगी। होर्मुज जलसंधि में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है। पहले जहां रोजाना लगभग 130 जहाज गुजरते थे, वहां अब रोजाना दस से कम जहाज ही चलते हैं।

पेंटागन के अनुमान के अनुसार अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी के कारण इरान को तेल राजस्व में लगभग 4.8 अरब डॉलर (करीब 456 अरब भारतीय रुपए) का नुकसान हुआ है। अमेरिकी सेन्ट्रल कमांडर ने राष्ट्रपति ट्रम्प को इरान के खिलाफ संभावित हमलों के वैकल्पिक योजनाओं की जानकारी दी है। अमेरिका ने पश्चिम एशिया के सहयोगियों (इजराइल, कतार, कुवैत, यूएई) को 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदे की मंजूरी दी है। इरान में खबरें आ रही हैं कि राष्ट्रपति और संसद के सभापति विदेश मंत्री अब्बास अराघची को हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया में अमेरिकी अड्डों को भारी नुकसान: सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इरान के हमलों से मध्य पूर्व के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को अभूतपूर्व क्षति हुई है। इरान ने कुवैत के कैंप ब्यूरीन सहित आठ देशों के कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों में बोइंग E-3 सेंट्री विमान से लेकर महत्वपूर्ण रडार सिस्टम तक को नष्ट कर दिया गया है, जिसकी कीमत लगभग 50 करोड़ डॉलर है।

सुकुमवासी : बालेनको ‘शो-पीस’ !

सुकुमवासी : बालेनको ‘शो-पीस’

क्षणिक बस्तिहरूमा रहने कमजोर नागरिकहरू वर्तमानमा राज्यको न्यूनतम सुविधा बिना आवासमा संघर्ष गरिरहेका छन्। हजारौं बालबालिकाको शिक्षा समाप्त भइसकेको छ। सुत्केरीहरू चीसो भुइँमा रहँदै भोलिका मतदाताहरूलाई बचाउने प्रश्नमा हरसम्भव प्रयास गरिरहेका छन्।

गुइगाड खोलाको पुल १५ वर्षपछि पनि पूरा नहुनु, यात्रामा जोखिम कायम

बाजुराको सदरमुकाम मार्तडीलाई जोड्ने गुइगाड खोलाको ट्रस ब्रिज पुल जीर्ण भई जोखिमपूर्ण अवस्थामा पुगेको छ। अहिले एक पटकमा एउटा मात्रै गाडी आवतजावत गर्न अनुमति दिइएको छ। सडक डिभिजन कार्यालय साँफेबगरले ठेकेदार कम्पनीलाई ५ करोड २८ लाख रुपैयाँ निकासा गरिसकेको भए पनि पुलले लोड टेस्टमा ३० टन भार समेत धान्न सकेको छैन। २०६८ सालदेखि निर्माण सुरु गरिएको पुलमा कमजोर सामग्री प्रयोग भएको र म्याद थपिए पनि निर्माण सम्पन्न नभएपछि स्थानीयहरूले पुनःनिर्माण आवश्यक रहेको बताउँदै आएका छन्।

गुइगाड खोलाको यो पुलमा यातायात सञ्चालन भइरहेको छ, तर जोखिमपूर्ण अवस्थामा रहेकोले सडक डिभिजन कार्यालय साँफेबगरले एक पटकमा मात्र एकै गाडी आवतजावत गर्न साइनबोर्ड टाँसेको छ। ट्रस ब्रिज पुल निर्माण कम्पनीको लापरवाहीका कारण पुल जीर्ण अवस्थामा पुगेको हो। २०६८ असारमा सडक डिभिजन कार्यालय साँफेबगर र राजेन्द्र थिगिन जेभीबीच २०७० साउन ३० भित्र निर्माण सम्पन्न गर्ने सम्झौता भएको थियो। कम्पनीले ५ करोड ९६ लाख १ सय १२ रुपैयाँमा ठेक्का लिएर काम सुरु गरेको भए पनि समयमा पूरा गर्न सकेन।

२०७५ मा निर्माण कम्पनीले काम सम्पन्न गरेको सूचना पाएपछि गरिएको चेकजाँचमा कमजोर र आवश्यक सामग्री अनुमानित मापदण्डअनुसार प्रयोग नगरिएको देखिएको छ। पुलले ४५ टन लोड धान्नुपर्ने भएता पनि लोड टेस्ट गर्न आएका इन्जिनियर टोलीले ३० टन भार समेत धान्न नसकेको कारण पुलमा लचकता देखिएको छ। स्थानीय शिक्षक बहादुर थापाले पुल पुनःनिर्माण आवश्यक रहेको बताएका छन्। सडक डिभिजन कार्यालयले ठेकेदार कम्पनीलाई करिब ९५ प्रतिशत रकम निकासा गरिसकेको छ।

कसरी ठम्याउने अधिनायकवादको प्रारम्भिक लक्षण ?

अधिनायकवादी प्रवृत्तिका प्रारम्भिक संकेतहरू कसरी चिन्ने?

हरेक अधिनायकवादी सोचमा एउटा साझा विशेषता हुन्छ – उनीहरू लोकतन्त्रको प्रक्रियालाई झन्झटिलो, ढिलो र अप्रभावकारी भनेर चित्रण गर्छन्। यसका लागि उनीहरूले संसदलाई निष्क्रिय बनाउने, बहसलाई अवरुद्ध गर्ने, नीति निर्माण प्रक्रिया जानाजानी ढिलो बनाउने र त्यसपछि भन्छन्, ‘लोकतन्त्र ढिलो र असक्षम छ।’

बालाजु स्थित बुद्धज्योती विद्यालय में डोजर का संचालन

सरकार ने नदी के किनारे अवैध रूप से बनाए गए संरचनाओं को हटाने के क्रम में बालाजु स्थित बुद्धज्योती बाल उद्यम आधारभूत विद्यालय में डोजर चलाया है। शनिदिन सुबह बालाजु, स्वयम्भू सहित अन्य क्षेत्रों में नदी के पास डोजर का उपयोग किया गया। काठमांडू में दूसरे चरण की अवैध संरचना हटाने की मुहिम के अंतर्गत सरकार ने पहले चरण में थापाथली, मनोहरा, सिनामंगल और गैरीगाउँ के आसपास की संरचनाओं को हटाया था। १९ वैशाख, काठमांडू।

नदी किनारे अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन पर बनाए गए संरचना हटाने के प्रयत्नस्वरूप सरकार ने बालाजु स्थित बुद्धज्योती बाल उद्यम आधारभूत विद्यालय में भी डोजर चलाया है। शनिवार सुबह बालाजु, स्वयम्भू और अन्य क्षेत्र के नदी के आसपास डोजर सक्रिय हैं। इस बीच, काठमांडू महानगरपालिका–१९ के अंतर्गत आने वाले बुद्धज्योती बाल उद्यम आधारभूत विद्यालय में डोजर संचालित किया गया। इससे पहले शुक्रवार को बल्खु, बालाजु, शंखमुल और वंशीघाट इलाकों में बसे सुकमवासि बस्तियों के घरों को गिराया गया था। सरकार ने कल से काठमांडू में दूसरे चरण में अवैध संरचनाओं को हटाने का काम शुरू किया है। पहले चरण में थापाथली, मनोहरा, सिनामंगल और गैरीगाउँ के आस-पास की संरचनाएं हटा दी गई थीं।

अभिनय, अन्तर्राष्ट्रिय फिल्ममा नयाँ व्यवस्था, एआईबारे स्पष्ट नीति – Online Khabar

अभिनय एवं अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म के लिए नए नियम, एआई उपयोग पर स्पष्ट नीति जारी

एकेडेमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने अस्कर पुरस्कार के नियमों और योग्यता मानदंडों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब अभिनय श्रेणी में एक कलाकार को एक ही वर्ष में एक से अधिक बार नामांकन मिल सकता है। अंतर्राष्ट्रीय फिल्म के नामांकन में अब देश की बजाय फिल्म को प्राथमिकता दी जाएगी और निर्देशक का नाम ट्रॉफी पर अंकित होगा।

एकेडेमी ने इन परिवर्तनों को अपने लगभग सौ वर्षों के इतिहास में सबसे बड़े फैसलों में से एक बताया है। अब मुख्य और सहायक अभिनय दोनों वर्गों में यदि किसी कलाकार की एक से अधिक प्रस्तुतियां शीर्ष पांच में आती हैं, तो वह सभी नामांकनों के लिए पात्र होगा। इससे लियोनार्डो डिकैप्रियो जैसे कलाकारों को एक ही वर्ष में दो प्रमुख भूमिकाओं के लिए नामांकित होने का अवसर मिलेगा।

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म श्रेणी में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब फिल्में अस्कर पुरस्कार के लिए दो तरीकों से भेजी जा सकेंगी: पहला, देश या क्षेत्र द्वारा आधिकारिक चयन; दूसरा, किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रमुख पुरस्कार जीतने के बाद सीधे नामांकन के लिए पात्र होना। इस वर्ष के मान्य महोत्सवों में बर्लिन, कान्स, सनडांस, टोरंटो और वेनिस शामिल हैं।

एकेडेमी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग संबंधी भी स्पष्ट नियम जारी किए हैं। अभिनय श्रेणी में केवल “मानव द्वारा वास्तविक रूप में निभाई गई” भूमिकाओं को ही मान्यता दी जाएगी। लेखन श्रेणी में भी केवल हस्तलिखित स्क्रीनप्ले स्वीकार किए जाएंगे। ये बदलाव अस्कर प्रतियोगिता और इसकी संरचना पर गहरा प्रभाव डालने वाले हैं। आगामी ९९वें एकेडेमी अवार्ड्स में इन नए नियमों का प्रभाव कैसा होता है, इस पर काफी निगाहें टिकी हुई हैं।

अभिनय, अन्तर्राष्ट्रिय फिल्ममा नयाँ व्यवस्था, एआईबारे स्पष्ट नीति – Online Khabar

अभिनय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के लिए नई व्यवस्था, एआई पर स्पष्ट नीति जारी

समाचार सारांश

समीक्षा किया गया।

  • एकेडेमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंस ने ऑस्कर अवार्ड की नियमावली और पात्रता मानदंडों में बड़े बदलाव किए हैं।
  • अभिनय श्रेणी में एक ही कलाकार की एक से अधिक प्रस्तुतियां एक ही वर्ष में नामांकन के योग्य होंगी।
  • अंतरराष्ट्रीय फिल्म वर्गीकरण में देश की बजाय फिल्म को नामांकित किया जाएगा और निर्देशक का नाम ट्रॉफी पर अंकित होगा।

लॉस एंजिल्स। एकेडेमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंस ने ऑस्कर अवार्ड के नियमों और पात्रता मानदंडों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। लगभग सौ वर्षों के इतिहास में इन्हें सबसे बड़े निर्णयों में से एक माना जा रहा है।

अभिनय श्रेणी में बड़ा बदलाव

अब से अभिनय में, मुख्य और सहायक दोनों श्रेणियों में एक ही कलाकार की एक से अधिक प्रस्तुतियां एक ही वर्ष में नामांकन के लिए पात्र होंगी। यदि वे प्रस्तुतियां शीर्ष पांच में आती हैं तो सभी योग्य मानी जाएंगी।

इसका मतलब, यदि लियोनार्डो डिकैप्रियो ने एक ही वर्ष में दो उत्कृष्ट मुख्य भूमिकाएं निभाईं, तो दोनों के लिए ‘बेस्ट एक्टर’ के लिए नामांकन संभव होगा। पहले ऐसा था कि यदि एक ही कलाकार की कई प्रस्तुतियां शीर्ष पांच में हो, तो केवल सबसे अधिक वोट पाने वाली एक ही पात्र होती थी।

अब यह नियम हटा दिया गया है और अन्य श्रेणियों की तरह इस पर भी लागू किया गया है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2000 में स्टीवन सोडरबर्ग को ‘एरिन ब्रकोविच’ और ‘ट्रैफिक’ दोनों फिल्मों के लिए निर्देशन श्रेणी में नामांकन मिला था और उन्होंने ‘ट्रैफिक’ से जीत हासिल की थी। अब ऐसा अभिनय में भी संभव होगा।

अंतरराष्ट्रीय फिल्म के लिए नई राह

अंतरराष्ट्रीय फिल्म (पहले ‘फॉरेन लैंग्वेज फिल्म’) श्रेणी में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब ऑस्कर के लिए फिल्मों को नामांकित करने के दो तरीके होंगे।

पहला, पहले की तरह देश या क्षेत्र द्वारा आधिकारिक तौर पर नामित कर भेजना। दूसरा, किसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पुरस्कार जीतने पर सीधे नामांकन के लिए पात्र होना।

इस वर्ष मान्य प्रमुख महोत्सवों में शामिल हैं: बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (गोल्डन बियर), कान्स फिल्म फेस्टिवल (पाल्मे डी’ओर), सनडांस फिल्म फेस्टिवल (वर्ल्ड सिनेमा ग्रांड जूरी अवार्ड), टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (प्लेटफॉर्म अवार्ड), वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (गोल्डन लायन) आदि।

पहले ‘एनाटॉमी ऑफ ए फॉल’ जैसी फिल्मों को, जिन्होंने कान्स में बड़े पुरस्कार जीते भी, यदि उनका देश नामांकन के लिए न भेजे तो नामांकन नहीं मिल पाता था। अब ऐसी फिल्में भी नामांकित हो सकेंगी।

फिल्म को ही मिलेगा श्रेय, निर्देशक का नाम भी होगा ट्रॉफी पर

अब अंतरराष्ट्रीय फिल्म श्रेणी में देश की जगह फिल्म को नामांकित किया जाएगा। अवार्ड निर्देशक पूरी टीम की ओर से ग्रहण करेंगे और ट्रॉफी पर निर्देशक का नाम भी अंकित होगा। इससे पहले ऐसी व्यवस्था नहीं थी और निर्देशक का ऑस्कर गणना में यह श्रेणी शामिल नहीं होती थी।

एआई पर स्पष्ट नीति जारी

एकेडेमी ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम बनाए हैं। अभिनय श्रेणी में केवल वही भूमिका नामांकन के लिए पात्र होगी जो वास्तविक रूप से मानव द्वारा निभाई गई हो। लेखन में भी केवल मानव द्वारा लिखा गया स्क्रीनप्ले मान्य होगा।

अन्य प्रमुख बदलाव

अभिनय में केवल उन्हीं भूमिकाओं को पात्र माना जाएगा जो फिल्म के आधिकारिक क्रेडिट में हों और कलाकार की सहमति से हों।

कास्टिंग श्रेणी में पुरस्कार की संख्या अधिकतम 2 से बढ़ाकर 3 किया गया।

सिनेमैटोग्राफी श्रेणी के लिए प्रारंभिक सूची में 20 फिल्मों तक की अनुमति।

मेकअप और हेयरस्टाइलिंग में मतदान के अंतिम चरण में भागीदारी अनिवार्य।

मूल गीत श्रेणी में अंतिम क्रेडिट में उपयोग स्पष्ट नियमों के अधीन होगा।

विजुअल इफेक्ट्स श्रेणी में अंतिम मतदान से पहले अनिवार्य वीडियो अवलोकन।

लेखन में केवल मानव द्वारा लिखा गया स्क्रीनप्ले मान्य होगा।

इन बदलावों का क्या प्रभाव होगा?

ये बदलाव ऑस्कर प्रतियोगिता और संरचना को काफी प्रभावी बनाएंगे। खासकर अभिनय श्रेणी में एक ही कलाकार के कई नामांकन संभव होंगे और अंतरराष्ट्रीय फिल्म क्षेत्र में विश्व की श्रेष्ठ फिल्मों को अधिक अवसर मिलेंगे।

आगामी 99वें एकेडमी अवार्ड (14 मार्च) में इन नियमों के प्रभाव कैसे दिखेंगे, यह सभी का ध्यानाकर्षण का विषय है।