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लेखक: space4knews

धौलागिरि और अन्नपूर्ण हिमालय पर्वतारोहण के लिए 44 लोगों को अनुमति मिली

23 चैत्र, म्याग्दी। इस वसंत ऋतु में धौलागिरि और अन्नपूर्ण हिमालय पर्वतारोहण के लिए 44 पर्वतारोहियों को अनुमति प्राप्त हुई है। म्याग्दी के धौलागिरि गाउँपालिका-4 में स्थित 8,167 मीटर ऊंचे धौलागिरि हिमालय और अन्नपूर्ण गाउँपालिका-4 में स्थित 8,091 मीटर ऊंचे अन्नपूर्ण हिमालय पर्वतारोहण के लिए उन्हें अनुमति पत्र जारी किए गए हैं।

पर्यटन विभाग के अनुसार, धौलागिरि पर्वतारोहण के लिए 2 समूहों में आठ महिलाओं समेत 17 लोगों ने अनुमति ली है। विभाग द्वारा हाल ही में जारी विवरण के अनुसार अन्नपूर्ण पर्वतारोहण के लिए चार समूहों में आठ महिलाओं समेत 27 लोगों को अनुमति मिली है। धौलागिरि पर्वतारोहण अनुमति से 7 करोड़ 56 लाख 4650 रुपैयाँ तथा अन्नपूर्ण पर्वतारोहण अनुमति से 12 करोड़ 4 लाख 9175 रुपैयाँ राजस्व प्राप्त हुआ है, जिसे विभाग की शाखा अधिकारी शर्मिला बंझाडे ने जानकारी दी।

उनके अनुसार वसंत ऋतु में अन्नपूर्ण, धौलागिरि सहित कुल 12 पर्वतारोहण के लिए 24 समूहों के 170 लोगों ने अनुमति ली है, जिससे 10 करोड़ 87 लाख 30 हजार रुपैयाँ से अधिक राजस्व संकलित किया गया है। दैनिक आधार पर पर्वतारोहण अनुमति लेने वालों की संख्या बढ़ रही है। पिछले शरद ऋतु में धौलागिरि हिमालय पर्वतारोहण के लिए 36 लोगों को अनुमति मिली थी जबकि अन्नपूर्ण पर्वतारोहण के लिए कोई अनुमति जारी नहीं हुई थी। पिछले वर्ष वसंत ऋतु में धौलागिरि पर्वतारोहण के लिए दो समूहों में 15 लोग और अन्नपूर्ण पर्वतारोहण के लिए 66 लोगों ने अनुमति लेकर तैयारी कर रहे थे। अन्नपूर्ण और धौलागिरि हिमालय के आधार शिविरों में पर्वतारोहण दल पहुंच गए हैं और पर्वतारोहण की तैयारी में जुटे हुए हैं। –रासस

ओली र लेखकमाथि बिहीबारसम्म अनुसन्धान सक्न सर्वोच्चको आदेश, अन्यथा थुनामुक्त गर्नू

सर्वोच्च का आदेश : ओली और लेखक के खिलाफ जांच 26 मार्च तक पूरी करनी होगी

23 चैत, काठमाडौं। सर्वोच्च अदालत ने पूर्वप्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और तत्कालीन गृहमंत्री रमेश लेखक के खिलाफ 26 चैत तक जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश विनोद शर्मा और सुनिल कुमार पोखरेल की पीठ ने ओली और लेखक को हिरासत में रखने की मांग खारिज कर दी है। लेकिन सर्वोच्च ने 26 चैत (बृहस्पतिवार) तक जांच पूरी न होने तक उन्हें थुनामुक्त करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, ‘ओली और लेखक को आपराधिक प्रक्रिया के तहत हिरासत से मुक्त कर अतिरिक्त जांच पूरी करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।’

भदौ 23 को हुए जनजीवी आन्दोलन में 19 लोगों की मृत्यु होने और उस दौरान हुए बल प्रयोग को नियंत्रित न कर पाने के आरोप में 14 चैत को ओली और लेखक को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के बाद जिल्ला अदालत काठमाडौं की अनुमति से उन्हें ज्यान जुर्म के मामले में हिरासत में रखे हुए हैं।

अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्ले ने ‘दृष्टिः समृद्धि, असमानता और सुधार की वर्षों पुरानी बहस’ पुस्तक का विमोचन किया

नेपाल आर्थिक पत्रकार समाज सेजन ने अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्ले की पुस्तक ‘दृष्टिः समृद्धि, असमानता और सुधार की वर्षों पुरानी बहस’ का सार्वजनिक विमोचन किया है। यह कार्यक्रम सोमवार को अर्थमन्त्रालय में आयोजित किया गया, जिसमें अर्थमन्त्री वाग्ले ने उक्त पुस्तक का अनावरण किया। इस पुस्तक में आठ गहरे और विश्लेषणात्मक लेख शामिल हैं, जो पूर्व के आर्थिक सुधारों पर आधारित बहसों को प्रस्तुत करते हैं।

पुस्तक ने विक्रम संवत २०७१ से २०८२ तक नेपाल की आर्थिक स्थिति, संरचनात्मक सुधार, डिजिटलाइजेशन, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यटन को मुख्य आर्थिक स्तंभ के रूप में दर्शाया है। अर्थमन्त्री वाग्ले ने कहा, “अतीत में उठाए गए आर्थिक सुधार के एजेंडे इस पुस्तक में समाहित हैं। पूर्व में, विषय विशेषज्ञों के रूप में सुधार के लिए कई बातें सुनी नहीं गईं।” उन्होंने सुधार कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा, “राजनीति में आने के पश्चात अब मैं उन्हीं एजेंडों को कार्यान्वित करने वाली कार्यकारी भूमिका निभा रहा हूँ।”

पुस्तक में दक्षिण एशियाई देशों के बीच व्यापार लागत, संघीयता का आर्थिक सशक्तिकरण, मिलिवाहट वाला पूंजीवाद का अंत और अंतरराष्ट्रीय सहायता की बदलती प्रकृति जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की गई है। इसमें नेपाल की उत्पादकता में कमी की ओर संकेत करते हुए कहा गया है कि “सामान्य सुधार पर्याप्त नहीं होंगे, व्यापक और संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं।”

सेजन के अध्यक्ष भागवत भट्टराई ने बताया कि इस पुस्तक का प्रकाशन मुख्य रूप से अर्थमन्त्री के विचार और नेपाल की अर्थव्यवस्था के प्रति उनके दृष्टिकोण को आम नागरिकों और संबंधित पक्षों तक पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया है। साथ ही, यह पुस्तक पत्रकारों को अर्थमन्त्री की नीतियों और कार्यशैली का विश्लेषण करने में सहायक सिद्ध होगी।

फेवाताल के चार किलों के भीतर जमीन की स्थिति अध्ययन के लिए समिति का गठन

सरकार ने फेवाताल के चार किलों के भीतर जमीन की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने के लिए भूमि व्यवस्था मंत्रालय के अंतर्गत पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति फेवाताल क्षेत्र में स्थित सभी कित्तों की जमीन का यथार्थ विवरण संकलित कर अभिलेखित करेगी और सात दिनों के भीतर अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। 23 चैत्र, काठमांडू।

भूमि व्यवस्था, सहकारिता तथा गरीबी निवारण मंत्रालय ने भूमि व्यवस्था एवं अभिलेख विभाग के महानिर्देशक की संयोजकता में पांच सदस्यीय समिति बनाई है। समिति फेवाताल के चार किलों के भीतर जमीन की वर्तमान स्थिति और वहां मौजूद संरचनाओं का अध्ययन करेगी तथा फेवाताल क्षेत्र में आने वाली सभी कित्तों की जमीन का यथार्थ विवरण संकलन एवं अभिलेखीकरण की जिम्मेदारी भी निभाएगी।

ताल क्षेत्र में निजी और सरकारी दोनों प्रकार की जमीन की स्थिति, पंजीकरण स्थिति और उपयोग की विस्तृत जांच मंत्रालय द्वारा की जाएगी। मंत्रालय का उद्देश्य फेवाताल क्षेत्र की संरक्षण और प्रबंधन को प्रभावी बनाना है, जिसके लिए समिति का गठन किया गया है। समिति को ताल क्षेत्रफल में स्थित सभी कित्तों की पुष्ट विवरण के साथ सात दिन में रिपोर्ट तैयार कर जमा करने का निर्देश दिया गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा फेवाताल संरक्षण में दिखाई गई रुचि के बाद, पोखरा महानगरपालिका ने अतिक्रमित फेवाताल क्षेत्र को खाली कराने का अभियान शुरू किया है।

कामु प्रधानन्यायाधीश मल्ल – Online Khabar

कामुक प्रधानन्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल द्वारा महिलाओं के इतिहास और समावेशिता के महत्व पर प्रकाश डाला गया

२३ चैत्र, काठमांडू। सर्वोच्च न्यायालय की कार्यकारी प्रधानन्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ने स्पष्ट किया कि महिलाओं ने इतिहास रचा है, लेकिन इतिहास ने उन्हें उचित स्थान नहीं दिया। ऑनलाइनखबर द्वारा आयोजित ‘‘५०–प्रभावशाली महिला–२०८२’’ कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम मूकता को तोड़ते हैं। ‘‘हमारे समाज में महिलाओं ने वर्षों तक योगदान दिया है, पर इतिहास ने उन्हें स्थान नहीं दिया है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘उनके योगदान की आवाज़ कभी पर्याप्त रूप से बाहर नहीं आई है। इसी तरह के कार्यक्रम इतिहास की ऐसी मूकता को तोड़ते हैं।’’

साथ ही उन्होंने बताया कि समावेशिता किसी की कृपा या उपहार नहीं है बल्कि सभी का संवैधानिक अधिकार है। ‘‘समावेशिता कोई उपहार नहीं हैं, यह हमारे संविधान द्वारा सुनिश्चित व्यवस्था है जो समानता के अस्तित्व को स्वीकार करती है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘परंतु परिवर्तन साहसिक कदमों से ही संभव है और यही इस पहल का उदाहरण है।’’ उन्होंने ऑनलाइनखबर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के महिलाओं की साहसिक कहानियों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए आभार व्यक्त किया।

तालिम प्राप्त श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और सुविधा न देने पर कारवाही की चेतावनी: श्रम मंत्रालय

श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा मन्त्रालय ने तालिम प्राप्त श्रमिकों को श्रम ऐन २०७४ के अनुसार न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करने का आग्रह किया है। विभिन्न अस्पतालों, विद्यालयों और प्रतिष्ठानों में तालिम प्राप्त श्रमिकों को सुविधाएं न मिलने की शिकायतों के आधार पर मंत्रालय ने रोजगारदाताओं को सचेत किया है। कानून के विरुद्ध सुविधाएं न देने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की गई है एवं सभी संबंधित पक्षों से कानून का पूर्ण पालन करने का अनुरोध किया गया है। २३ चैत, काठमांडू।

मंत्रालय की विज्ञप्ति में उल्लेख है कि विभिन्न अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थाओं, निजी और संस्थागत विद्यालयों तथा अन्य प्रतिष्ठानों में कार्यरत तालिम प्राप्त श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और अन्य सुविधाएं न मिलने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इस संदर्भ में रोजगारदाताओं को सचेत किया गया है। श्रम ऐन २०७४ की धारा १८ उपधारा (३) के अनुसार तालिम प्राप्त श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, बीमार अवकाश, उपदान, संचय कोष, बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

हालांकि, स्वास्थ्यकर्मी, नर्सिंग स्टाफ, शिक्षक और अन्य कर्मचारी सहित विभिन्न प्रतिष्ठानों में कार्यरत तालिम प्राप्त श्रमिकों को ये सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायतें मंत्रालय तक पहुंच रही हैं। इस विषय पर मंत्रालय ने गंभीर ध्यानाकर्षण किया है। मंत्रालय ने सभी रोजगारदाताओं को कानून के अनुसार न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा संबन्धी कड़ाई से पालन करने की चेतावनी दी है। कानून के विपरीत सुविधाएं न दिए जाने पर कारवाही की जाएगी, यह भी मंत्रालय ने स्पष्ट किया है। संबंधित सभी प्रतिष्ठान, संस्थान एवं सरोकारवालों से कानून का पूर्ण पालन करने का आग्रह किया गया है।

बागमती मुख्यमन्त्री बानियाँ ने कहा- UML के साथ भागीदारी को लेकर मुझे कोई जानकारी नहीं

२३ चैत, हेटौंडा। बागमती प्रदेश के मुख्यमन्त्री ईन्द्रबहादुर बानियाँ ने नेपाली कांग्रेस और नेकपा एमाले के बीच पहले हुई मुख्यमन्त्री की आलोपालो भागीदारी को लेकर खुद को पूरी तरह अनभिज्ञ बताया है। सत्ता साझा करने वाले दल UML द्वारा कांग्रेस से किए गए पिछले समझौते के तहत नेतृत्व हस्तांतरण के विषय पर चर्चा चल रही है, इस बीच मुख्यमन्त्री बानियाँ ने भागीदारी संबंधी किसी भी जानकारी की जिम्मेदारी से इंकार किया है। ‘‘भागीदारी के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। पार्टी नेतृत्व को भी इस बाबत कुछ पता नहीं है,’’ उन्होंने सोमवार को मुख्यमन्त्री कार्यालय में हुए मुख्यमन्त्री और मंत्रियों के साथ संवाददाता परिचर्चा में कहा, ‘‘यहाँ कांग्रेस और UML के मंत्री मौजूद हैं, लेकिन उन्हें भी जानकारी नहीं है।’’

कांग्रेस और UML के बीच पिछले वर्ष साउन महीने में संयुक्त सरकार के गठन के समय २०/२० महीने की अवधि के लिए मुख्यमन्त्री की आलोपालो भूमिका निभाने पर सहमति हुई थी, तब UML के समर्थन से कांग्रेस के दल नेता बहादुरसिंह लामा मुख्यमन्त्री नियुक्त हुए थे। लामा के कांग्रेस दल के सपा सदस्यों का कहना है कि उन्होंने UML संसदीय दल के नेता जगन्नाथ थपलियालाई सत्ता हस्तांतरण करने का समझौता किया था। थपलिया ने पूर्व समझौते के अनुरूप फागुन के बाद नेतृत्व हस्तांतरण की मांग उठाई है। लेकिन एक साल बाद जब लामा मुख्यमन्त्री बने, तब बानियाँ ने कांग्रेस संसदीय दल में बहुमत हासिल कर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर उन्हें पद से हटाया था। वर्तमान आर्थिक वर्ष २०८१/८२ के बजट के दौरान पार्टी के अंदर के विवाद के बाद, बानियाँ ने बहुमत सांसद जुटाकर तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा के समर्थन से लामा को हटाकर खुद मुख्यमन्त्री बने। बानियाँ २० साउन २०८२ को मुख्यमन्त्री बने। ९ साउन २०८२ को मुख्यमन्त्री लामा के विरुद्ध २१ सांसदों ने बानियाँ के नेतृत्व में अविश्वास प्रस्ताव दायर किया। १३ साउन को हुए मत विभाजन में २२ मत अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में और १५ मत विरोध में पड़े, जिसके कारण लामा ने दल नेता का पद खो दिया था। १४ साउन को दल का नेता चुनने के लिए हुए चुनाव में बानियाँ ने लामा को हराकर मुख्यमन्त्री बनने का मार्ग प्रशस्त किया। इससे पहले १३ पुस २०७९ को हुए दल नेता चुनाव में बानियाँ पांच मतों से लामा से हार गए थे।

दुई दिने सार्वजनिक बिदाको तेस्रो प्रयास कति प्रभावकारी होला ?

दो दिन की सार्वजनिक छुट्टी लागू करने के तीसरे प्रयास की प्रभावकारिता कैसी होगी?

२३ चैत्र, काठमांडू। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और उससे उत्पन्न ईंधन संकट के कारण सरकार ने दो दिन की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है। सप्ताह में छ दिन कार्यालय खुले रखने के बजाय पांच दिन खोलने और कार्य समय बढ़ाने की नीति के तहत सरकार ने आज (सोमवार से) कार्यालयों के समय में बदलाव कर सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के अनुसार, शैक्षिक संस्थाओं को छोड़कर अन्य कार्यालय सुबह ९ बजे से शाम ५ बजे तक खुलेंगे। उन्होंने कहा, “शैक्षिक संस्थाओं को छोड़कर कार्यालय समय सुबह ९ से शाम ५ बजे तक कायम किया गया है।” नेपाल में सार्वजनिक और सेवा क्षेत्र में सप्ताह में ४० घंटे काम करने की प्रथा है। पहले दैनिक ७ घंटे और शुक्रवार को ५ घंटे, कुल ४० घंटे कार्यालय समय निर्धारित था। नई व्यवस्था के अनुसार अब प्रतिदिन ८ घंटे काम करके सप्ताह में पाँच दिन कार्यालय चलाने का प्रावधान रखा गया है।

सरकार के निर्णय के बाद देशभर के न्यायालयों ने भी सोमवार से सुबह ९ बजे कार्यालय खुलने की सूचना दी है। सुरक्षा एजेंसियों और अन्य औपचारिक कार्यों के समय-सारणी में भी अब बदलाव होगा। निजी क्षेत्र ने भी समय तालिका परिवर्तन करने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि शैक्षिक संस्थानों के लिए लागू नियम स्पष्ट नहीं किए गए हैं, तथा अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वालों के लिए भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह तीसरा प्रयास है जब तीन दशकों में ऐसी व्यवस्था लागू की जा रही है। २०५६ साल से पहले की प्रथाओं को देखें तो नेपाल में दो दिन की सार्वजनिक छुट्टी देना यह तीसरा प्रयास माना जाएगा। पुराने दो प्रयास कुछ कारणों से सफल नहीं हो पाए थे। २०४८ साल की प्रशासन सुधार आयोग ने कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए सप्ताह में पाँच दिन कार्यालय खोलने का सुझाव दिया था। कांग्रेस नेता कृष्णप्रसाद भट्टराई की सरकार ने २०५६ में यह प्रथा शुरू की थी। यह व्यवस्था १ साउन २०५६ से केवल काठमांडू उपत्यका में लागू की गई थी।

इस अवधि में सेवा प्रदायगी और सेवा प्राप्तकर्ताओं की सहूलियत के लिए दो दिन की छुट्टी की अवधारणा लागू हुई थी और लगभग दो वर्ष तक चली। शेरबहादुर देवू प्रधान मंत्री रहते २०७९ साल में फिर से दो दिन की छुट्टी शुरू की गई। १ जेष्ठ २०७९ से सुबह डेढ़ बजे से शाम डेढ़ बजे तक कार्यालय खुलने का प्रावधान किया गया था। तब व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा की कमी के कारण यह व्यवस्था लागू की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना था। लेकिन करीब एक महीने के भीतर यह प्रथा प्रभावी साबित नहीं हुई। संकट समाधान के प्रयास में अन्य देशों ने वर्षों से सप्ताह में दो दिन की छुट्टी का अभ्यास जारी रखा है, जबकि नेपाल में इसे अक्सर संकट समाधान का उपाय माना जाता है।

ईंधन संकट और ट्रैफिक जाम की समस्या के सामने आने पर ही नेपाल सरकार ने दो दिन की सार्वजनिक छुट्टी की अवधारणा लागू की है। पर्यटन मंत्रालय ने २०७७ साल में कोविड महामारी के बाद थमे हुए अर्थव्यवस्था को पुनः शुरू करने और आंतरिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए दो दिन सरकार छुट्टी देने विषय पर अध्ययन और तैयारी शुरू की थी। उस समय मंत्रालय के सहसचिव कमलप्रसाद भट्टराई के नेतृत्व में गठित कार्यदल ने रिपोर्ट भी तैयार की थी। रिपोर्ट के अनुसार, १२७ में से ११५ देशों में सप्ताह में दो दिन की छुट्टी है और ९१ प्रतिशत देशों में सात दिन में दो दिन की छुट्टी होने पर साप्ताहिक काम का समय ४० घंटे या उससे कम सीमित किया गया है। नेपाल के एकात्मक व्यवस्था में सेवा उपभोक्ताओं को दुर्गम क्षेत्रों से मुख्यालय तक आना पड़ता था। अब अधिकांश सेवाएं स्थानीय स्तर पर प्रदान की जा रही हैं। इसलिए अध्ययन समिति ने निष्कर्ष निकाला कि दो दिन की सार्वजनिक छुट्टी से सेवाग्राहियों को पहले जैसी समस्या नहीं होगी।

२०७७/७८ के बजट के आधार पर समिति ने दो दिन की छुट्टी से खर्च कटौती का अनुमान लगाया था। वार्षिक लगभग एक अरब ६५ लाख रूपए की बचत होने का दावा किया गया था। आंतरिक पर्यटन में सहायता के दृष्टिकोण से किया गया अध्ययन दिखाता है कि दो दिन की छुट्टी पारिवारिक तनाव कम करेगी, पर्याप्त आराम और मनोरंजन से उत्पादकता बढ़ेगी और आंतरिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकारी, सैनिक, पुलिस, निजी और सरकारी विद्यालयों के लगभग पांच लाख कर्मचारी दो दिन की छुट्टी पाने पर उनके आश्रितों के २५ लाख परिवारों को पारिवारिक समय मिलेगा, अध्ययन का निष्कर्ष था। यदि इनमें से लगभग आठ लाख लोग नजदीक के स्थानों पर भ्रमण करें तो आंतरिक पर्यटन को फायदा होगा और यह देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। अध्ययन समिति ने कहा कि दो दिन की छुट्टी मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालेगी: आर्थिक रूप से कर्मचारियों और कार्यालय की उत्पादकता बढ़ाना, खर्च में कटौती करना और आंतरिक पर्यटन को बढ़ावा देना। साथ ही लैंगिक समानता और पारिवारिक जीवन को सहज बनाने में भी यह मदद करेगी। समिति ने सार्वजनिक संस्थानों में सप्ताह में दो दिन छुट्टी देने और निजी क्षेत्र को भी ऐसा निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करने की सिफारिश की थी।

घर नहीं भेजा जाता, वेतन भी नहीं मिलता – सऊदी में फंसे नेपाली कामगारों की समस्या

खबर सारांश

समीक्षा के लिए तैयार।

  • सऊदी अरब के रियाद स्थित हुसैन बिन अली अतीफा में काम कर रहे ५० से अधिक नेपाली कामगारों ने पांच से छह महीने तक वेतन न मिलने की शिकायत करते हुए मदद की मांग की है।
  • पीड़ितों ने बताया कि कंपनी ने खाना, रहने और पानी जैसी मूल सुविधाएं नहीं दी हैं, काम में अनियमितता की है और धमकी भी दी है।
  • नेपाल के मैनपावर, स्थानीय एजेंट और दूतावास में शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर आवाज उठाई है।

२३ चैत, काठमांडू। सऊदी अरब के रियाद में हुसैन बिन अली अतीफा में कार्यरत नेपाली कामगार संकट में हैं। काठमांडू के गौशाला स्थित नेपाल लाइफ रिक्रूटमेंट समेत विभिन्न मैनपावर कंपनियों के माध्यम से लगभग दो साल पहले सऊदी पहुंचे ये कामगार समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

लंबे वक्त से कंपनी ने वेतन, खाना, रहने और पानी की सुविधा तक नहीं दी है, इस कारण वे मदद की गुहार लगा रहे हैं। ५० से अधिक नेपाली जिन्होंने दो सालों के श्रम अनुबंध के तहत बिल्डिंग निर्माण का काम किया है, वे इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।

५० डिग्री तापमान में काम करते हुए भी ठेकेदार वेतन नहीं देता, काम से रोकता है और खाना-पानी की कमी भी बताई गई है। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें पांच से छह महीने से वेतन नहीं मिला है। ऑनलाइन बातचीत में पीड़ितों ने कहा कि नेपाल और सऊदी दोनों जगह मौजूद मैनपावर और ठेकेदार ने समस्या को और बढ़ा दिया है।

एक पीड़ित ने बताया, ‘‘कंपनी ने पांच-छह महीने से वेतन नहीं दिया है, खाना और रहने की सुविधा भी नहीं प्रदान की जा रही। कुछ का तीन महीने, कुछ का चार और कुछ का छह महीने का वेतन बाकी है। कई बार दबाव दिया, लेकिन कंपनी कहती रही ‘देंगे’, पर अभी तक कुछ नहीं मिला। काम पर लगाती है, वेतन नहीं देती।’’

उन्होंने बताया कि कंपनी कभी एक महीने के लिए काम देती है और अगले महीने काम नहीं आती है; छुट्टी का वेतन भी काटा जाता है। ‘‘काम से गैरहाजिर रहने पर छुट्टी दी जाती है, लेकिन वेतन में कटौती की जाती है।’’ वेतन ४०० से ६०० रियाल तक मिलता है, जबकि उनका मासिक वेतन १५०० रियाल तय था। ‘‘६०० रियाल से न खुद का खर्च पूरा होता है न परिवार को भेजा जा सकता है।’’

कंपनी का दावा है कि फ्री वीजा पर भेजा गया है, जबकि वे २ लाख से अधिक खर्च करके गए हैं। ‘‘हमने २ लाख २५ हजार तक कर्ज लेकर गए थे, लेकिन कंपनी फ्री वीजा बताती है,’’ पीड़ित ने कहा।

नेपाल से जाते समय मैनपावर और एजेंट ने बताया था कि दैनिक १० घंटे काम होगा, जिसमें से ९ घंटे काम और १ घंटा आराम। लेकिन कामगारों के अनुसार उन्हें काम के दिनों में पूरे १० घंटे काम करना पड़ता है, और ओवरटाइम का एक पैसा भी नहीं मिलता।

एक पीड़ित ने कहा, ‘‘जितना भी ओवरटाइम किया, कोई पैसा नहीं मिला। आवागमन दूर है और काम की जगह से रहने की जगह तक आना-जाना २ से ३ घंटे लगता है। काम के दिन १० घंटे काम और आने-जाने में १२ से १६ घंटे लग जाते हैं।’’

कंपनी को समस्या बताने पर सुनवाई नहीं हुई। नेपाल में मौजूद मैनपावर, स्थानीय एजेंट और दूतावास में शिकायत करने के बावजूद कोई समाधान नहीं मिला। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर अपनी समस्या जगजाहिर की, जिसके बाद कंपनी ने उन पर दबाव और बढ़ा दिया।

‘‘कोई सुनवाई नहीं होने पर मजबूर होकर वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। एक महीने से तो नाश्ता भी नहीं दिया जाता,’’ उन्होंने कहा।

पिछले १५ दिनों से काम पर नहीं लगाया गया है, और घर भेजने की मांग करने पर धमकी मिलती है कि दो साल पूरे किए बिना घर नहीं भेजा जाएगा। ‘‘मारने-पीटने की धमकी दी जाती है, कहते हैं कि दो साल पूरा होना जरूरी है।’’ उन्होंने बताया कि कम्पनी में काम करने वाले सभी नेपाली इसी समस्या का सामना कर रहे हैं, और आवाज उठाने पर धमकी मिलती है।

‘‘एक महीने से नाश्ता बंद है, काम नहीं होता तो नाश्ता और खाना दोनों बंद कर दिए जाते हैं,’’ वे बताते हैं।

कुछ ने ५ महीने वेतन न मिलने की बात कही, जबकि कुछ ने ४ से ६ महीने तक वेतन न मिलने की शिकायत की। ‘‘टॉयलेट के लिए मस्जिद जाना पड़ता है, यहां टॉयलेट के दरवाज़े पर ताला लगा है,’’ उन्होंने कहा।

इटहरी के मोबिरा ओवरसीज से आये एक अन्य पीड़ित ने मैनपावर और एजेंट से ध्यान न दिए जाने की बात कही। कर्ज लेकर परिवार छोड़कर काम के लिए गए उन्हें काम, वेतन और सेवा मांगने पर धमकी और कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।

‘‘यहां आने का मकसद परिवार को पैसे भेजकर बच्चों की पढ़ाई, अच्छा खाना और कपड़े देना था। लेकिन यहां आकर हमें उल्टा दंड मिलता है। दो दिन काम करो तो चार दिन छुट्टी मिलती है,’’ उन्होंने कहा।

बीमारी होने पर इलाज नहीं मिलता, बीमा करवाने की बात कही गई थी लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ, यह भी उन्होंने बताया।

नेकपा एमालेले मतदाता नामावली संकलनमा सक्रिय रहन निर्देशन दियो

२३ चैत, काठमाडौं । नेकपा एमालेले आगामी स्थानीय तह तथा प्रदेश सभा निर्वाचनको तयारीको रूपमा मतदाता नामावली संकलन र अद्यावधिक कार्यमा मातहतका समितिहरूलाई सक्रिय रहन निर्देशन दिएको छ। निर्वाचन आयोगले चैत २२ गतेदेखि मतदाता नामावली संकलन पुनः सुरु गरेको जानकारी गराएको छ। साथै, निर्वाचन कार्यालयले सबै नगरपालिका र वडा समितिहरूलाई सो विषयमा आवश्यक कार्यवाही गर्न पत्रमार्फत आदेश गरेको छ।

आर्टिमिस 2: चंद्रमा की परिक्रमा के दौरान अंतरिक्षयात्रियों का पृथ्वी से संपर्क टूटा रहेगा

ओराइअन कैप्सूल से गत सप्ताह लिया गया पृथ्वी का नया चित्र

तस्वीर स्रोत, Nasa/Reid Wiseman

तस्वीर का शीर्षक, ओराइअन कैप्सूल से गत सप्ताह लिया गया पृथ्वी का नया चित्र

आर्टिमिस अभियान के अंतरिक्षयात्री अब तक पृथ्वी से सबसे दूर जाएंगे।

जितना वे दूर हैं, उतना ही पृथ्वी उन्हें छोटी दिखती है। वे टेक्सास के ह्यूस्टन स्थित नियंत्रण कक्ष के साथ लगातार संपर्क में थे। नासा की टीम से संवाद करते हुए भी उन्हें घर की गर्माहट महसूस नहीं होती।

लेकिन जल्द ही यह संपर्क टूट जाएगा।

सোমवार रात ब्रिटिश समर टाइम (BST) अनुसार 23:47 बजे (नेपाली समय अनुसार मंगलवार सुबह 4:32 बजे) वे चंद्रमा की सतह की परिक्रमा करते हुए अंतरिक्षयान और पृथ्वी के बीच संचार खो देंगे।

चंद्रमा रेडियो और लेजर संकेतों को लगभग 40 मिनट के लिए रोक देगा। आर्टिमिस अभियान के चार सदस्य इस दौरान लगभग 40 मिनट तक अंतरिक्ष के अंधकार में अकेले रहेंगे।

संसद्‌मा सभामुख र सांसदहरूलाई समान कुर्सी – Online Khabar

सभामुख एवं सांसदों के लिए संसद में समान स्तर की कुर्सी व्यवस्था

समाचार सारांश शैक्षणिक समीक्षा के बाद तैयार किया गया। सभामुख डोलप्रसाद अर्याल के सुझाव के अनुसार प्रतिनिधि सभा हॉल में सभामुख और सांसदों के लिए समान प्रकार की कुर्सी व्यवस्था की गई है। प्रतिनिधि सभा की सोमवार को हुई बैठक में 21 सदस्यीय कार्यव्यवस्था परामर्श समिति का गठन किया गया। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद गणेश पराजुली की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा नियमावली मसौदा समिति का गठन किया गया। 23 चैत्र, काठमांडू।

प्रतिनिधि सभा हॉल में सभामुख और सांसदों के लिए समान प्रकार की कुर्सियाँ रखी गई हैं। पहले सभामुख को विशेष प्रकार की कुर्सी दी जाती थी। इस बार भी सभामुख चुनाव से पहले सभामुख और सांसदों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की कुर्सियाँ रखी गई थीं। लेकिन सभामुख डोलप्रसाद अर्याल के आने के बाद सभामुख और सांसदों के लिए समान प्रकार की कुर्सी व्यवस्था की गई है। संघीय संसद सचिवालय के सहसचिव एवं प्रवक्ता एकराम गिरी के अनुसार, ‘सभामुख ने समान कुर्सी व्यवस्था का आग्रह किया, इसलिए रंग में फर्क रखते हुए सभामुख और सांसदों के लिए समान कुर्सियाँ रखी गई हैं।’

सोमवार को हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में दो अलग-अलग समितियाँ गठित की गईं। 21 सदस्यीय कार्यव्यवस्था परामर्श समिति का गठन किया गया है। इस समिति में अचुतम लामिछाने, अप्सना बानु, आरेन राई, केपी खनाल, कामिनी चौधरी, क्रान्तिशिखा धिताल, खुश्बु ओली, गणेशसिंह ठगुन्ना, गुरुप्रसाद बराल, गंगालक्ष्मी अवाल, तपेश्वर यादव, देवराज पाठक, नरेन्द्रकुमार केरुङ, प्रकाशचन्द्र परियार, निशा डाँगी, बोधनारायण श्रेष्ठ, मीनाकुमारी यादव, युवराज दुलाल, राजन गौतम, डा. राम लामा और विपिनकुमार आचार्य सदस्य हैं। इसी तरह, सोमवार के प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रतिनिधि सभा नियमावली मसौदा समिति का भी गठन किया गया। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद गणेश पराजुली की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति के सदस्यों में डा. ओजश्वी शेरचन, ऐन महर, खुश्बु ओली, खगेन्द्र सुनार, गजलासमिम मिश्रानी, तपेश्वर यादव, ध्रुवराज राई, निशा डाँगी, निश्कल राई, वलावती शर्मा, मधु चौलागाईं, रेखाकुमारी यादव, यज्ञमणि न्यौपाने और सुलभ खरेल शामिल हैं। समिति की अवधि 14 दिन निर्धारित की गई है।

१४ नाउर और १० झारल का शिकार जारी

समाचार सारांश

  • ढोरपाटन शिकार अभयारण्य में फागुन–वैशाख के दूसरे शिकार मौसम में विदेशी शिकारी नाउर, झारल और बँदेल का शिकार कर रहे हैं।
  • इस वर्ष 14 नाउर, 10 झारल और 13 बँदेल के शिकार की अनुमति दी गई है, और विदेशी शिकारी प्रतिस्पर्धा के आधार पर अनुमति प्राप्त कर रहे हैं।
  • अभयारण्य की सुरक्षा नेपाली सेना २०७३ साल से कर रही है, और शिकारी आमतौर पर करीब 30 से 35 लाख खर्च करते हैं।

23 चैत, बागलुङ। बागलुङ के ढोरपाटन में इस समय दूसरा शिकार मौसम चल रहा है। इस दौरान विदेशी पर्यटक सक्रिय रूप से शिकार में लगे हुए हैं।

नेपाल के एकमात्र शिकार अभयारण्य ढोरपाटन में विदेशी उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के शिकार ब्लॉकों में हैं। इस वर्ष 14 नाउर और 10 झारल के शिकार की अनुमति दी गई है, जिसका जानकारी ढोरपाटन शिकार अभयारण्य के रेंजर सागर सुवेदी ने दी है।

फागुन–वैशाख के दूसरे शिकार मौसम में कई शिकारी ढोरपाटन में शिकार में व्यस्त हैं, जबकि कुछ विदेशी शिकारी नेपाल आने की तैयारी कर रहे हैं।

रेंजर सुवेदी के अनुसार, इस वर्ष के दूसरे मौसम में 13 बँदेल के शिकार की अनुमति भी दी गई थी। ढोरपाटन अभयारण्य ने विभिन्न शिकार ब्लॉकों में वन्य प्राणी विभाग के अनुमति से शिकार की अनुमति प्रदान की है।

ग्लोबल सफारी प्रालि के माध्यम से आए अमेरिकी नागरिकों ने एक नाउर और एक झारल का शिकार कर वापस लौट गए हैं, जबकि हिमालयन सफारी नेपाल के जरिए आए अमेरिकी और डेनिश नागरिक शिकार में लगे हुए हैं, जैसा कि सुवेदी ने बताया।

विदेशी शिकारी नाउर और झारल के शिकार के लिए प्रतिस्पर्धा के जरिए राजस्व चुका कर अनुमति प्राप्त करते हैं। दूसरे मौसम के दौरान अभयारण्य के कर्मचारी और नेपाली सेना शिकार ब्लॉक में शिकारी के साथ सक्रिय रहते हैं।

दूसरे मौसम में हिमालयन वाइल्ड लाइफ आउटफिटर के माध्यम से डेनिश नागरिक को फागुने ब्लॉक में एक नाउर, एक झारल और एक बँदेल का शिकार करने की अनुमति मिली है।

साथ ही, ओपन नेपाल वाइल्ड लाइफ सफारी एंड ट्रेक प्रालि के माध्यम से अमेरिका, बेल्जियम और फ्रांस के नागरिकों को सुनदह और सेङ ब्लॉक में तीन नाउर, दो झारल और एक बँदेल के शिकार की अनुमति मिली है।

इसी प्रकार, नेपाल ट्रैवल एक्सपिडिशन प्रालि के माध्यम से घुस्तुङ ब्लॉक में तीन नाउर, तीन झारल और तीन बँदेल के शिकार के लिए रूसी, अफ्रीकी और फ्रांसीसी नागरिक नेपाल आने की तैयारी में हैं।

राष्ट्रीय निकुंज एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग के अनुसार, वर्ष का पहला शिकार मौसम अषाढ़–मंसिर और दूसरा शिकार मौसम फागुन–वैशाख होता है, जिसमें व्यवस्थित तरीके से दो चरणों में शिकार किया जाता है। विदेशी शिकारी सहित समूह को 15 दिनों में निर्धारित ब्लॉक में शिकार करना आवश्यक होता है।

जंगल में आवास करने वाले शिकारी अभयारण्य में प्रवेश के बाद केवल निर्धारित समय में ही शिकार कर सकते हैं। साहसिक यात्रा और रोमांचकारी शिकार अनुभव के लिए ढोरपाटन विदेशी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय गंतव्य बनता जा रहा है।

राष्ट्रीय निकुंज एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग हर मौसम में इलेक्ट्रॉनिक बोली के माध्यम से शिकार कोटा और राजस्व दर निर्धारित करता है।

ग्लोबल सफारी प्रालि के माध्यम से सुनदह और दोगाड़ी ब्लॉक में अमेरिकी और डेनिश नागरिकों को चार नाउर, दो झारल और चार बँदेल के शिकार की अनुमति मिली है।

हिमालयन सफारी नेपाल प्रालि के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को दो नाउर, एक झारल और दो बँदेल के शिकार की अनुमति मिली थी, जिसमें एक नाउर और एक झारल का शिकार हो चुका है। ट्रेक एंड डीलर्स प्रालि के जरिए स्पेनिश नागरिक को एक झारल, एक नाउर और एक बँदेल की अनुमति मिली है, जैसा कि सुवेदी ने बताया।

इस वर्ष के पहले शिकार मौसम में लगभग तीन करोड़ तीन लाख राजस्व संकलित हुआ है और दूसरे मौसम में शिकारी आने का सिलसिला जारी है, जिससे राजस्व संकलन हो रहा है।

शिकारी पिछले फागुन के दूसरे सप्ताह से बन्दोबस्ती सामग्री समेत नेपाल आना शुरू कर चुके हैं। विदेशी शिकारी अक्सर हेलीकॉप्टर के माध्यम से सीधे शिकार ब्लॉक पहुंचते हैं।

2044 साल में स्थापित यह शिकार अभयारण्य पूर्वी रुकुम, बागलुङ और म्याग्दी जिलों में फैला हुआ है, लेकिन इसका मुख्यालय बागलुङ के ढोरपाटन घाटी में स्थित है।

शिकार करते समय नेपाली सहयोगी और अभयारण्य के कर्मचारी भी विदेशी शिकारी के साथ कार्यरत होते हैं। विभाग हर वर्ष नाउर और झारल के शिकार कोटे का निर्धारण करता है।

नाउर और झारल के मूल्य, ब्लॉक रिजर्वेशन, लाइसेंस, हेलीकॉप्टर और अन्य बन्दोबस्ती सामग्री तैयार करने में एक व्यक्ति लगभग 30 से 35 लाख रुपये खर्च करता है।

शिकार का अवसर केवल विदेशी और धनाढ्य व्यक्तियों के लिए ही उपलब्ध है और नेपाली इस अवसर से वंचित हैं। अभयारण्य की सुरक्षा २०७३ साल से नेपाली सेना द्वारा की जा रही है।

ढोरपाटन में शिकार के बाद नाउर के साथ तस्वीरें लेते विदेशी पर्यटक। तस्वीर: ढोरपाटन शिकार अभयारण्य

राष्ट्रिय सभाको उपाध्यक्ष पदमा निर्वाचित हुईन् एमालेकी लिला भण्डारी (फोटोहरू सहित)

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा के बाद तैयार।

  • राष्ट्रिय सभा उपाध्यक्ष पद के लिए नेकपा एमाले की सांसद लिलाकुमारी भण्डारी सोमवार के बैठक में निर्विरोध निर्वाचित हुईं।
  • माघ ११ को सम्पन्न राष्ट्रिय सभा निर्वाचन में वह सुदूरपश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं।
  • राष्ट्रिय सभा के सदस्य उन्हें बधाई दे चुके हैं।

२३ चैत, काठमाडौं। राष्ट्रिय सभा के उपाध्यक्ष पद पर नेकपा एमाले की सांसद लिलाकुमारी भण्डारी निर्वाचित हुई हैं। सोमवार को आयोजित राष्ट्रिय सभा की बैठक में उन्हें निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया।

माघ ११ को सम्पन्न राष्ट्रिय सभा के चुनाव में वह सुदूरपश्चिम प्रदेश से निर्वाचित हुई थीं। राष्ट्रिय सभा के सदस्यों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

पाकिस्तान का प्रस्ताव: आज ही युद्धविराम की संभावना

२३ चैत, काठमांडू। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तीव्र संघर्ष को रोकने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने एक विशेष योजना पेश की है, जिसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ नाम दिया गया है। रॉयटर्स के अनुसार, यदि यह योजना सफल होती है तो सोमवार से ही तत्काल युद्धविराम लागू होगा और विश्व के महत्वपूर्ण व्यावसायिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पुनः संचालित होगा। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुल्ला ने रविवार रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी भान्स, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची से बातचीत करने के बाद यह मसौदा तैयार किया है।

इस प्रस्तावित समझौते में दो चरण निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण में आज ही से तुरंत युद्धविराम लागू करने और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ खोलने पर सहमति बनी है। दूसरे चरण में अगले १५ से २० दिनों के भीतर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रत्यक्ष वार्ता कर दीर्घकालीन शांति समझौते को अंतिम रूप देने की योजना है। इस व्यापक समझौते में ईरान को परमाणु हथियार निर्माण नहीं करने का वचन देना होगा, जबकि इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने और रोके गए ईरानी संपत्तियों को मुक्त कराने की शर्त रखेगा।

ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे अमेरिका और इज़रायल से भविष्य में पुनः आक्रमण न होने की पूर्ण गारंटी के साथ दीर्घकालीन युद्धविराम चाहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई दिनों से युद्ध समाप्ति के लिए कड़ा दबाव डाला है, वहीं पाकिस्तान, चीन और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थकर्ताओं ने भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई है। अभी तक ईरान और अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों ने कहा है कि आज ही एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर होने की संभावना प्रबल है। छः सप्ताह से जारी इस युद्ध ने विश्व बाजार में तेल की कीमतों और सुरक्षा क्षेत्र में गंभीर संकट उत्पन्न किया है, जिससे इस कूटनीतिक पहल को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है।