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लेखक: space4knews

इजरायल ने इरानी नौसेना कमांडर अलिरेजा ताङसिरी के मारे जाने का दावा किया

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • इजरायल ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के नौसेना कमांडर अलिरेजा ताङसिरी को मारे जाने का दावा किया है।
  • इजरायली रक्षा मंत्री कात्ज ने ताङसिरी को ‘हर्मुज जलडमरु में बम विस्फोट और बाधा उत्पन्न करने के लिए सीधे जिम्मेदार’ बताया है।
  • अलिरेजा ताङसिरी को साल 2018 में आईआरजीसी नौसेना कमांडर नियुक्त किया गया था और 2019 में उन्होंने हर्मुज जलडमरु को बंद करने की धमकी दी थी।

काठमांडू। इजरायल ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नौसेना कमांडर अलिरेजा ताङसिरी को मारे जाने का दावा किया है।

इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल कात्ज ने ताङसिरी को ‘हर्मुज जलडमरु में बम विस्फोट और अवरोध पैदा करने जैसी आतंकवादी गतिविधियों में सीधे जिम्मेदार’ बताते हुए उनकी मौत की सूचना दी है।

इजरायली हमले में अलिरेजा समेत अन्य वरिष्ठ नौसेना कमांडर भी मारे गए हैं, उन्होंने कहा।

हालांकि, इरान ने अभी तक इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं की है।

अलिरेजा कौन हैं?

अलिरेजा ताङसिरी को वर्ष 2018 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) का नौसेना कमांडर नियुक्त किया गया था। इसके पहले वे 2010 से आईआरजीसी नौसेना के उपकमान्डर के रूप में सेवा दे रहे थे।

साल 2019 में उन्होंने इरान के तेल निर्यात में किसी भी प्रकार की बाधा आई तो हर्मुज जलडमरु बंद करने की धमकी दी थी।

सामूहिक नेतृत्वको प्रयासले सफल भयौं – Online Khabar

सामूहिक नेतृत्व के प्रयास से मिली सफलता – गृह मंत्री अर्याल

समाचार सारांश

  • गृहमंत्री ओम प्रकाश अर्याल ने कहा कि सामूहिक नेतृत्व के अनुसार काम करने से मंत्रालय ने बड़ी संकट से बाहर निकलने में सफलता प्राप्त की है।
  • अर्याल ने शांति सुरक्षा के सामान्यीकरण, सुशासन और चुनाव सफलतापूर्वक सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी पूरी होने का उल्लेख किया।
  • उन्होंने मंत्रालय के कर्मचारियों और सुरक्षा निकायों के प्रमुखों को धन्यवाद देते हुए कहा कि गलत धारणा को दूर कर काम करना चुनौतीपूर्ण है।

१२ चैत, काठमांडू। गृहमंत्री ओम प्रकाश अर्याल ने कहा है कि सामूहिक नेतृत्व के प्रयास से मंत्रालय ने सफलता प्राप्त की है। मंत्रालय से त्यागपत्र लेने से पहले बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि सामूहिक नेतृत्व की कोशिशों से सभी तय जिम्मेदारियां पूरी की गईं।

मंत्री अर्याल ने कहा, ‘सामूहिक नेतृत्व के प्रयास के बिना इतने बड़े संकट से आसानी से बाहर निकलना संभव नहीं था। व्यवसायिकता को केंद्र में रखकर काम करने से किसी भी चुनौती को सरलता से हल किया जा सकता है, यह मेरा अनुभव है।’

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति ने अपनी क्षमता और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया, जिसके लिए उन्होंने मंत्रालय के सचिव, विभिन्न शाखाओं, महाशाखाओं के कर्मचारी, सचिवालय के सहयोगी और सुरक्षा निकायों के प्रमुखों को धन्यवाद दिया।

अर्याल ने बताया कि कभी-कभी सत्य एक होता है लेकिन उसकी धारणा भिन्न होने से मनोबल गिर सकता है, इसलिए गलत धारणा को तोड़ते हुए काम करना चुनौतीपूर्ण होता है।

मंत्रालय का प्रभार संभालते हुए उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से तीन जिम्मेदारियां थीं – शांति सुरक्षा का सामान्यीकरण, सुशासन और चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराना। इनमें सभी के सहयोग से सफलता मिली।

उन्होंने शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए सभी पक्षों को धन्यवाद दिया और कहा कि इससे सुरक्षा कर्मियों का मनोबल कमजोर नहीं हुआ है, यह प्रमाणित होता है।

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में तैनात नेपाली शांति सैनिकों की अदलाबदली

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा पश्चात प्रकाशित।

  • सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में तैनात नेपाली शांति सैनिकों की अदलाबदली हुई है।
  • रिपुमर्दन गण की सातवीं डफ्फा और सैनिक पुलिस यूनिट की दसवीं डफ्फा को कालीबहादुर गण की आठवीं डफ्फा और सैनिक पुलिस यूनिट की ग्यारहवीं डफ्फा ने प्रतिस्थापित किया है।
  • इन दो डफ्फाओं के १७९ शांति सैनिकों का पहला दल आज मिशन क्षेत्र के लिए प्रस्थान किया है, जो सैनिक मुख्यालय जंगी अड्डा ने बताया है।

१२ चैत्र, काठमांडू। सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में तैनात नेपाली शांति सैनिकों की अदलाबदली हुई है।

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में तैनात रिपुमर्दन गण की सातवीं डफ्फा और सैनिक पुलिस यूनिट की दसवीं डफ्फा को कालीबहादुर गण की आठवीं डफ्फा और सैनिक पुलिस यूनिट की ग्यारहवीं डफ्फा ने प्रतिस्थापित किया है।

इन दोनों डफ्फाओं के १७९ शांति सैनिकों का पहला दल आज मिशन क्षेत्र के लिए प्रस्थान किया है, जैसा कि सैनिक मुख्यालय जंगी अड्डा ने बताया है।

इस मिशन में अपनी कार्य अवधि पूरी करने वाले २११ नेपाली शांति सैनिक ११ चैत्र को अपने देश लौट चुके हैं।

वर्तमान में इस मिशन में नेपाली सेना के १,१०७ शांति सैनिक कार्यरत हैं।

कार्की आयोग के प्रतिवेदन पर ओली का जवाब – कारवाई की सिफारिशें निराधार


१२ चैत्र, काठमांडू। तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने गौरीबहादुर कार्की नेतृत्व वाली जांच आयोग द्वारा अपने खिलाफ की गई कारवाई सिफारिशों को निराधार बताया है। गुरुवार को एमाले मुख्यालय च्यासल में आयोजित कार्यक्रम में ओली ने कहा कि उन पर लगाए गए आपराधिक अभियोगों के लिए कोई न्यायिक आधार मौजूद नहीं है।

‘इस समय मुख्य रूप से नेकपा एमाले अध्यक्ष और तत्कालीन प्रधानमंत्री के विरुद्ध आपराधिक संहिता २०७४ की धारा १८१ और १८२ के तहत जांच और मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है,’ ओली ने कहा, ‘धारा १८१ और १८२ के अनुसार घटना स्थल पर व्यक्ति की उपस्थिति आवश्यक है और घटना उसी के माध्यम से सीधे घटनी चाहिए। चाहे वह दुर्भावना हो या लापरवाही, किसी भी स्थिति में उसकी उपस्थिति का प्रमाण जरूरी है।’

उन्होंने बताया कि अगर वह स्थान पर उपस्थित नहीं थे तो लापरवाही से हुई घटना की दलील न्यायिक रूप से आधारहीन होगी। ‘मैं पहले ही कह चुका हूं कि प्रधानमंत्री न तो गोली चलाते हैं और न ही आदेश देते हैं। अब बीच में लोग मारे गए हैं, इसका जिम्मा कौन लेगा?’ ओली ने सवाल उठाया।

इसके अलावा, न्यायाधीश और पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ व्यक्तियों द्वारा दी गई सिफारिशें बेहद निराधार और कानूनी दृष्टि से अनुपयुक्त हैं, ऐसा भी ओली ने कहा।

ओली ने बताया कि एमाले की दसवीं केन्द्रीय समिति ने इस आयोग के पदाधिकारियों पर पहले ही सवाल उठा दिए हैं।

‘पहले ही जिन लोगों ने पक्षपातपूर्ण और हमारे पार्टी के खिलाफ वैमनस्यपूर्ण दृष्टिकोण बनाए हुए थे, जिन्होंने अपने निर्णय पहले ही सुना दिए थे, उन्हें जिम्मेदारी सौंपना गलत था और इसलिए यथार्थ पर आधारित कोई सत्य तथ्य प्रतिवेदन आना संभव नहीं था, ऐसा हमने कहा था,’ ओली ने कहा।

ओलीको समीक्षा- अश्लील प्रचारबाट प्रहार भयो, यस्तासँग के बोल्ने भनेर चुप बस्यौँ

ओली का निरिक्षण: अश्लील प्रचार से होने वाले हमलों पर चुप्पी साधना हमने स्वीकार किया


१२ चैत, काठमाडौं। नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने पार्टी पर असत्य और अश्लील शैली में हो रहे प्रचार के समय पार्टी के सदस्यों द्वारा विरोध न कर पाने की समीक्षा की है। एमाले मुख्यालय च्यासल में गुरुवार को नवनिर्वाचित सांसदों को सम्बोधित करते हुए ओली ने निर्वस्त्र प्रचार का सामना न कर पाने के कारण एमाले के चुनाव हारने का दावा किया।

‘असत्य, अभद्र, अश्लील प्रचार से हम पर हमला हुआ। हमारी सभ्य शैली उस मुकाबले में असमर्थ रही,’ ओली ने कहा, ‘बल्कि ऐसी स्थिति में क्या कहना या विरोध करना है, इस सिलसिले में हम चुप्पी साधने लगे। हमने डटकर इसका सामना नहीं किया।’

उन्होंने यह बात खुद सांसदों को पहले भी कहा था। ‘मैंने कई वर्ष पहले कहा था – यदि गौ र नंगा दिखे तो शर्म नहीं माननी चाहिए, क्योंकि वह जाति ही ऐसी है। गोरु कभी वस्त्र नहीं पहनता,’ ओली ने कहा।

‘कोई अपनी मंशा के अनुसार निर्वस्त्र होता है, हमें उसकी भी सामना करनी होती है,’ ओली ने आगे कहा।

सामाजिक मीडिया से हो रहे हमलों का जवाब देने में पार्टी की एकजुटता न होने का भी ओली ने दावा किया। ‘हमें लगता था कि कोई और यह काम कर देगा, ऐसा प्रवृत्ति हमने अपना ली,’ उन्होंने कहा।

बोलने के लिए तैयार न होने की स्थिति के कारण सच्चाई जनता तक नहीं पहुँच पाई, उन्होंने बताया। ‘पार्टी में कुछ एक बोलते रहे, बाकी असमर्थ रहते रहे,’ उन्होंने कहा।

एमाले ने बुरे कार्यों से पीछे नहीं हटने की बात भी उन्होंने कही। उन्होंने कहा, ‘हम अच्छे कार्यों से पीछे हटे हैं, इसलिए निराश होना आवश्यक नहीं है। क्योंकि हम सत्य के रास्ते पर हैं।’

सिलाम साक्मामा सजी बालेन, इसका अर्थ क्या है?

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह ने प्रतिनिधि सभा सदस्यता की शपथ ग्रहण समारोह में विशेष सांस्कृतिक पोशाक पहनकर अपनी प्रस्तुति दी।

किरात समुदाय से जुड़े पारंपरिक सिलाम साक्मा पहनकर समारोह में भाग लेने पर उनका पहनावा सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

साधारण पोशाक से अलग यह पहनावा केवल बाहरी सुंदरता ही नहीं, बल्कि एक गहरे सांस्कृतिक महत्व को भी दर्शाता है।

किराती संस्कृत‍ि में सिलाम साक्मा को शुभचिन्ह माना जाता है। इसे मृत्यु या अपशकुन की राह रोकने वाला पवित्र प्रतीक माना जाता है। इसी कारण यह पहनावा विशेष अवसरों और धार्मिक-सांस्कृतिक संदर्भों में पहना जाता है।

शपथ ग्रहण समारोह में बालेन के सीने पर सजी सिलाम साक्मा ने उनकी पहचान को और भी अर्थपूर्ण एवं आकर्षक बना दिया है। पारंपरिक पोशाक को आधुनिक सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करना विविधता, पहचान और समावेशिता का सम्मान जताने वाला सन्देश भी देता है। इससे नेपाल समाज में परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय की झलक मिलती है।

बालेन की इस प्रस्तुति ने नेपाली राजनीति एवं सार्वजनिक जीवन में सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करना एकता और विविधता का सुंदर प्रतिबिंब दिखाया है।

पहले भी सार्वजनिक रूप से हर्क साम्पाङ ने सिलाम साक्मा पहनकर इसे चर्चा में लाया था। उसके बाद नेपाली फिल्म “जारी” समेत अन्य माध्यमों ने इसे और लोकप्रिय बनाकर सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सिलाम साक्मा क्या है?

लिम्बू भाषा में ‘सि’ का अर्थ मृत्यु, ‘लाम’ का अर्थ मार्ग और ‘साक्मा’ का अर्थ रोकना होता है। इसलिए सिलाम साक्मा का मतलब “मृत्यु के मार्ग को रोकना” होता है।

यह केवल एक वस्त्र का हिस्सा नहीं, बल्कि लिम्बू समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, आस्था और विश्वास से गहरा जुड़ा प्रतीक है। हाल के समय में इस प्रतीक के उपयोग में वृद्धि सांस्कृतिक जागरूकता और अपनी पहचान पर गर्व का संकेत है।

अतिथियों का स्वागत करते समय सिलाम साक्मा पहनना एक सामान्य प्रथा है। सार्वजनिक समारोहों और विवाह समारोहों में भाग लेते वक्त भी इसे छाती पर पहना जाता है।

कैसे बनता है?

हाथ से बुना हुआ चारकोनी सिलाम साक्मा किनारों पर फुर्कों से सजा होता है। इसे दो बाँस के फ्रेम में विभिन्न रंगों की धाका कपड़ों से आकर्षक रूप से तैयार किया जाता है। इसे दैवीय शक्ति को प्रसन्न करने, सुख, शांति और सद्भाव के लिए तङ्सिन (सांस्कृतिक रस्म) किया जाता है। सिलाम साक्मा को जीवन की रक्षा कवच के रूप में भी माना जाता है।

नवनिर्वाचित सांसदों की झोली में क्या है?


१२ चैत, काठमांडू। प्रतिनिधि सभा के नवनिर्वाचित सांसदों ने शपथ ग्रहण किया है।

सिंहदरबार स्थित संसद के अस्थायी भवन में आयोजित सभा में उन्होंने शपथ ली।

प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठ सदस्य अर्जुननरसिंह केसी ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रत्येक सांसद को संघीय संसद सचिवालय द्वारा एक-एक झोला भी उपलब्ध कराया गया। उस झोले में संविधान, प्रतिनिधि सभा नियमावली तथा संयुक्त बैठक संचालन नियमावली रखी गई है।

जाँच आयोग की रिपोर्ट लीक होने पर ‘भीड़ के मानसिक दबाव’ में कार्यान्वयन

जेन जी

तस्बिर स्रोत, EPA

जेन जी आन्दोलन से संबंधित जाँच आयोग की रिपोर्ट बुधवार को अचानक मीडिया में लीक होने के बाद दबाव में आई सरकार ने उसी दिन फैसला लिया कि इसे संघीय संसद सचिवालय की पुस्तकालय में अभिलेखित किया जाएगा और सार्वजनिक किया जाएगा।

सरकार और आयोग के पास ही माना जाने वाली वह संवेदनशील रिपोर्ट फैलने के बाद दिनभर प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय में इस विषय पर बैठकें हुईं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता हेमराज अर्याल ने कहा, “सरकार द्वारा गोपनीय रखे गए दस्तावेज कैसे सार्वजनिक हुए, इस पर जांच होगी। कौन और कैसे यह जांच करेगा, अभी तय नहीं हुआ है।”

एक संवैधानिक विशेषज्ञ के अनुसार, इस तरह की लीक से सरकार को रिपोर्ट को योजनाबद्ध तरीके से लागू करने में कठिनाई होगी और इसके कारण जनता के दबाव में आना पड़ सकता है।

काठमांडू विश्वविद्यालय के कानून विशेषज्ञ विपिन अधिकारी कहते हैं, “जनता की अवधारणा हमेशा कानूनी शासन के अनुकूल नहीं होती और न ही हमारी दंड प्रणाली के अनुसार कार्यान्वयन में सहायक होती है।”

एन्फा अध्यक्ष पद के उम्मीदवार दीर्घ केसी ने कहा- झापा चुनाव में भाग नहीं लेंगे

समाचार सारांश

संपादकीय रूपमा समीक्षा गरिएको।

  • दीर्घ केसी ने कहा कि राष्ट्रीय खेलकूद परिषद द्वारा निलंबन के बाद एन्फा चुनाव में भाग नहीं लेंगे।
  • केसी ने दावा किया कि चुनाव स्थल के बारे में उम्मीदवारों को भी जानकारी नहीं दी गई और चुनाव केवल फीफा-एएफसी को खुश करने के लिए हो रहा है।
  • पूर्व अध्यक्ष कर्मा छिरिङ शेर्पा ने कहा कि सरकार के फैसले के विरुद्ध जाना सही नहीं होगा इसलिए वे चुनाव में भाग नहीं लेंगे।

१२ चैत, काठमांडू। एन्फा अध्यक्ष पद के उम्मीदवार दीर्घ केसी (कुमार) ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय खेलकूद परिषद की निलंबन के बाद वे झापा में होने वाले एन्फा चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।

राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के निलंबन के पश्चात अखिल नेपाल फुटबॉल संघ की वार्षिक सभा के साथ-साथ आगामी चुनाव को लेकर आयोजित पत्रकार सम्मेलन में केसी ने कहा कि वे चुनाव में भाग नहीं लेंगे।

“राष्ट्रीय खेलकूद परिषद द्वारा निलंबन के स्थिति में हम झापा में होने वाले चुनाव में भाग नहीं लेंगे,” उन्होंने पत्रकार सम्मेलन में कहा।

उनका कहना था कि चुनाव होने के पूर्व तक सभी उम्मीदवारों को भी चुनाव स्थल के बारे में सूचित नहीं किया गया था। “उम्मीदवारों को ही पता नहीं था कि चुनाव कहां होगा,” उन्होंने जोड़ा।

केसी ने अपनी टीम की ओर से अपने विचार व्यक्त किए और दावा किया कि यह चुनाव केवल फीफा और एएफसी को खुश करने के लिए आयोजित हो रहा है।

“आगामी फीफा और एएफसी के चुनाव में नेपाल का प्रतिनिधि भाग ले सके, इसके लिए यह चुनाव हो रहा है ऐसा मुझे लगता है। इसलिए हम इस चुनाव में भाग नहीं लेंगे,” उन्होंने कहा।

केसी ने बताया कि उन्होंने नई कार्यसमिति की पहली बैठक से ही नियम अनुसार काम करने का आग्रह किया था, लेकिन ऐसा न हो पाने के कारण फुटबॉल विकास शुरू से ही नहीं हो पाया।

पत्रकार सम्मेलन में अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य पद के उम्मीदवार भी उपस्थित थे।

“सरकार के फैसले का विरोध करना उचित नहीं होगा, इसलिए हमने चुनाव से दूर रहने का निर्णय लिया है,” हिमालयन शेर्पा क्लब के अध्यक्ष और एन्फा के पूर्व अध्यक्ष कर्मा छिरिङ शेर्पा ने कहा।

कांग्रेसको १५ औं महाधिवेशन :  संस्थापन र देउवा पक्षको कसरी हुन्छ मिलन ?

कांग्रेस का 15वां महाधिवेशन : संस्थापन और देउवा पक्ष के बीच मेल कैसे संभव?

समाचार सारांश

  • नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन को लेकर पार्टी के अंदर सहमति न बनने से दो पक्षों के बीच विवाद जारी है।
  • विशेष महाधिवेशन से चयनित नेतृत्व और निर्वतमान नेतृत्व के बीच सहमति के प्रयास जारी हैं।
  • नेताओं ने पार्टी एकता के लिए साझा सहयोग और महाधिवेशन तैयारी समिति के गठन की जरूरत बताई है।

12 चैत, काठमांडू। केपी शर्मा ओली की अगुवाई वाली सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के पांच दिन बाद यानी 23 भदौ को नवयुवा समूह ने विरोध प्रदर्शन किया।

आंदोलन के दौरान 24 भदौ को नेपाली कांग्रेस के तत्कालीन सभापति शेरबहादुर देउवा तथा तत्कालीन विदेश मंत्री डॉ. आरजु राणा देउवा पर बूढानीलकण्ठ स्थित निवास पर प्रदर्शनकारियों ने हिंसक हमला किया।

प्रदर्शनकारियों ने देउवा के निवास में तोड़फोड़ और आगजनी भी की। हमले के 36वें दिन यानी 28 असोज को पूर्व प्रधानमंत्री देउवा केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए।

बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने उपसभापति पूर्णबहादुर खड्कालाई कार्यवाहक सभापति की जिम्मेदारी देने की घोषणा की। साथ ही देउवा ने नेतृत्व हस्तांतरण के लिए अपनी तत्परता भी जताई।

उन्होंने कहा कि 15वें महाधिवेशन द्वारा पार्टी नेतृत्व विधिवत तरीके से सौंपा जाएगा। देउवा ने बैठक में महाधिवेशन निर्धारित अवधि के भीतर सम्पन्न कराने के लिए केंद्रीय कार्यसमिति द्वारा गंभीर चर्चा कर आवश्यक निर्णय लेने का भरोसा जताया।

कार्यवाहक सभापति खड्काको अध्यक्षता में कांग्रेस के इतिहास में पहली बार 49 दिनों तक केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक चली। लेकिन 15वें महाधिवेशन को लेकर कांग्रेस में सहमति नहीं बन पाई।

तत्कालीन संस्थापन पक्ष, जो प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद सक्रिय हुआ, तथा तत्कालीन महामंत्री गगन थापा के समूह में महाधिवेशन को नियमित रूप से कराने को लेकर मतभेद पैदा हुए। इस बीच देउवा इलाज के लिए सिंगापुर गए और लौट चुके थे।

कार्यसमिति की बैठक जारी रहने के दौरान देउवा पर पार्टी में सभापति के पद पर सक्रियता बढ़ाने का आरोप थापा समूह ने लगाया। उस समूह ने नियमित महाधिवेशन की संभावना न देख पाने पर जनवरी के अंतिम सप्ताह में विशेष महाधिवेशन का आयोजन किया।

प्रदर्शनीमार्ग स्थित भृकुटीमंडप में हुए विशेष महाधिवेशन ने पार्टी के 14वें महाधिवेशन से चुनी गई केंद्रीय कार्यसमिति को भंग कर थापा के नेतृत्व में नई कार्यसमिति का चयन किया।

उससे पहले सानेपा में हुई तत्कालीन केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक में महामंत्री गगन थापा और विश्वप्रकाश शर्मा तथा सहमहामंत्री फरमुल्लाह मंसूर को साधारण सदस्य समेत नहीं रहने वाली सजा देने का निर्णय लिया गया।

कांग्रेस विवाद निर्वाचन आयोग तक पहुंचा। आयोग ने विशेष महाधिवेशन से चुनी गई कार्यसमिति को मान्यता दी। असंतुष्ट देउवा समूह सर्वोच्च न्यायालय गया।

आधिकारिकता संबंधी विवाद न्यायालय में विचाराधीन होने के दौरान कांग्रेस 21 फागुन की प्रतिनिधि सभा चुनाव में उतरी। चुनाव में कांग्रेस को उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिला।

चुनाव में मिली हार की नैतिक जिम्मेदारी सभापति थापाले लेकर 3 चैत को इस्तीफा दिया। कांग्रेस ने 6 चैत को केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाकर 7 चैत को इस्तीफा अस्वीकार करने का फैसला किया।

इस्तीफे को अस्वीकार करने के बाद सभापति थापाले 10 चैत को दूसरी बैठक बुलाई। उस बैठक में अगले साल माघ 16-19 को पार्टी का 15वां महाधिवेशन आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

विशेष महाधिवेशन को मान्यता न मिलने वाली समूह के कारण, काठमांडू में होने वाले महाधिवेशन में भागीदारी संदिग्ध हो गई है। निर्वतमान सभापति देउवा के समूह ने विशेष महाधिवेशन को स्वीकार नहीं किया है।

एकपक्षीय महाधिवेशन संभव नहीं: देउवा समूह

संस्थापन पक्ष ने 15वें महाधिवेशन की कार्यतालिका पेश की है, लेकिन अन्य समूहों ने इसे एकपक्षीय बताते हुए असंभव करार दिया है। अन्य समूहों के नेताओं ने पार्टी एकता की आवश्यकता पर जोर दिया है।

नेता डॉ. प्रकाशशरण महत ने कहा, ‘अपने-अपने हिसाब से अधिवेशन तय करने से समाधान नहीं निकलेगा, इसलिए 22 तारीख के फैसले का इंतजार जरूरी है। एकता के लिए इसी तरह आगे बढ़ना आवश्यक है।’

उन्होंने नियमित अधिवेशन के लिए साझा सहयोग, हिस्सेदारी और विश्वसनीय माहौल बनाने पर जोर दिया, जिससे पार्टी एकीकृत होगी।

नेता मीन विश्वकर्मा ने भी कहा कि एकपक्षीय महाधिवेशन असंभव है। ‘बिना सहमति यह नहीं होगा,’ उन्होंने कहा।

14वें महाधिवेशन से चुने गए बागमती प्रदेश कार्यसमिति के सभापति इन्द्र बानियाँ ने कहा कि सभी मिलकर साझा महाधिवेशन आयोजित कर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने न्यायालय में चल रहे मामले को विन-विन समाधान से सुलझाकर महाधिवेशन कराना जरूरी बताया।

बानियाँ के अनुसार विशेष महाधिवेशन के केंद्रीय कार्यसमिति और निर्वाचन आयोग के फैसले अनुसार नए पदाधिकारियों और निर्वतमान कार्यसमिति के बीच संवाद कर समस्या का समाधान करना जरूरी है।

देउवा समूह के मधेस प्रदेश कार्यसमिति द्वारा निर्वाचित सभापति कृष्ण यादव ने भी दोनों पक्षों के बीच सहमति की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा, ‘महाधिवेशन आयोजक समिति बनाई जाए तो सभी नेता और कार्यकर्ता इसका स्वामित्व लेंगे। असंतुष्ट नेतृत्व को भी विचार करना चाहिए।’

मधेस प्रदेश सभापति यादव को पूरा भरोसा है कि सभी नेता एक साथ आगे बढ़ेंगे। बानियाँ और यादव दोनों ही अपने-अपने प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी हैं।

निर्वतमान सहमहामंत्री महेन्द्र यादव ने भी विशेष महाधिवेशन से चुने गए नेतृत्व और निर्वतमान नेतृत्व के बीच समन्वय कर 15वें महाधिवेशन की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा, ‘पार्टी को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। दोनों पक्षों को मिलना होगा। अलग होकर काम नहीं चल सकता। दोनों को मिलकर एक जगह बैठ कर जो करना है करना चाहिए। मेरी राय यही है।’

संस्थापन और देउवा पक्ष के बीच मेल कैसे होगा?

निर्वाचन आयोग से मान्यता प्राप्त नेतृत्व और अदालत में मान्यता पाए नेतृत्व के बीच सहमति के लिए प्रयास जारी हैं, दोनों पक्षों के नेताओं ने यह बात कही है।

निर्वतमान सहमहामंत्री यादव ने कहा, ‘हम पहल कर रहे हैं। अगर कांग्रेस एक नहीं हुई तो देश में अचानक घटनाएँ हो सकती हैं, जैसे पहले हुआ था।’

नेता महत ने नियमित महाधिवेशन के लिए साझा बिंदु खोजने और आयोजक समिति गठन की आवश्यकता बताई।

‘विशेष महाधिवेशन से जुड़े और न जुड़े पार्टी के बड़े नेता साझा बिंदु खोज कर नियमित महाधिवेशन करने के लिए आयोजक समिति बनाएंगे, तो नियमित महाधिवेशन से आए नेतृत्व को सार्वभौमिक रूप से स्वीकार कर आगे बढ़ सकते हैं,’ उन्होंने कहा।

नेता विश्वकर्मा ने शीर्ष नेताओं द्वारा महाधिवेशन तैयारी समिति गठन पर जोर दिया। ‘पूर्ण दाइ, शेखर दाइ और वे (संस्थापन) बैठकर चुनाव समिति और महाधिवेशन तैयारी समिति बना दें। पहले की कार्यसमिति खत्म नहीं करनी, उसे महाधिवेशन आयोजक समिति बनाना होगा। ऐसा करने से एकता हो जाएगी।’

निर्वतमान प्रवक्ता महत ने भी पार्टी में एकता के लिए हर स्तर की भूमिका जरूरी बताई। ‘पार्टी जिम्मेदारी में काम करने वालों को कठिन हालात में एकता के लिए योगदान करना चाहिए। इसलिए सभी स्तरों की भूमिका जरूरी है,’ उन्होंने आग्रह करते हुए कहा, ‘हमें स्वयं अपने-अपने स्तर पर भूमिका निभानी होगी।’

महत ने कहा कि मानसिक और भौतिक रूप से एकीकृत हुए बिना पार्टी मजबूत नहीं हो सकती। ‘जब तक हम मानसिक और भौतिक रूप से एक नहीं होंगे, यह पार्टी मजबूत नहीं होगी। आज की चुनौतीपूर्ण स्थिति में यह और भी कठिन है।’

महामंत्री प्रदीप पौडेल ने कहा कि वे चर्चा करके आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। ‘हम आगे बढ़ने के लिए चर्चा करने को तैयार हैं। वरिष्ठ नेताओं का अपमान या ठेस पहुंचाना हमारा उद्देश्य नहीं है।’

प्रतिनिधि सभा चुनाव के बाद पार्टी को ऊपर उठाने के विषय में वे केवल चिंतित हैं। ‘हम आज पार्टी को व्यवस्थित करने, पार्टी में एकता कायम करने और चुनाव बाद स्थिति सुधारने के लिए प्रयासरत हैं।’

सहमति के लिए पहल कौन करेगा?

14वें महाधिवेशन से चुनी गई कार्यसमिति के प्रचार विभाग के नेता विश्वकर्मा ने कहा कि अदालत से कोई भी पक्ष आधिकारिकता पाए, पार्टी एकता के लिए काम करना जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘पहल कौन करेगा? अधिकारिक गगनजी और पार्टी कार्यालय में वे मौजूद हैं। पार्टी कार्यालय में ही करना सबसे उचित होगा। अगर गगनजी या विश्वजी करेंगे तो जिम्मेदारी दिखेगी।’

नेता महत ने सहमति का माहौल बनाने के लिए अपने स्तर से योगदान देने की बात कही। ‘सहमति की राह बने, साझा सूत्र पर जुड़ सके इसके लिए मैं तैयार हूं। लेकिन संबंधित सभी पक्षों को भी ऐसा ही सोचना होगा।’

महामंत्री पौडेल ने कहा कि प्रक्रिया के अनुसार महाधिवेशन के लिए आगे बढ़ने में कोई संशय हो तो उसे ठीक करने को तैयार हैं।

उन्होंने कहा, ‘पार्टी का संचालन विधि-व्यवस्था से तय होता है। राजनीतिक दल से जुड़े कानून तय करते हैं। हम विधि और प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहे हैं। अगर कार्यशैली में कुछ गलती है तो सुधार के लिए तैयार हैं।’

देउवा पक्ष के नेताओं ने सहमति के लिए विशेष महाधिवेशन से नए नेतृत्व के चयन से पहले यानि पुस 30 की स्थिति पर लौटने की बात कही है। लेकिन संस्थापन पक्ष ने साफ कर दिया है कि अब पीछे लौटने की स्थिति नहीं है।

महामंत्री पौडेल ने कहा, ‘यह बहुत आगे बढ़ चुका है। अब नहीं रुकेगा। जहां तक प्रक्रिया पहुंची है, वहां से साथ चलें और आगे बढ़ें। उन्होंने खुद पार्टी को यहां तक पहुंचाया है। उनका सम्मान करना चाहते हैं। पार्टी में व्यापक एकता कायम करना चाहते हैं और सभी को शामिल करके 15वां महाधिवेशन कराने का प्रयास करेंगे।’

कुछ दिन पहले हुई बातचीत में नेता विश्वकर्मा ने कहा था कि अगर दोनों पक्ष 30 पुस को वापस लौटें, तो पार्टी में एकता होगी। ‘हमारे बीच उसी बिंदु पर विवाद हुआ था, अगर सभी वहीं लौटेंगे तो पार्टी एक होगी।’

वसंत ऋतु में हिमालय पर्वतारोहण की अनुमति शुरू, बुधवार तक 82 लोगों ने पाए परमिट

समाचार सारांश

संपादन समीक्षित।

  • वसंत ऋतु में हिमालय पर्वतारोहण की अनुमति देना शुरू किया गया है और बुधवार तक 10 समूहों के 82 लोगों को परमिट मिल चुका है।
  • सबसे अधिक परमिट अन्नपूर्ण प्रथम पर्वतारोहण के लिए जारी हुए हैं जहां 3 समूहों के 22 लोगों ने अनुमति पाई है, जबकि अमा दब्लम में 2 समूहों के 20 पर्वतारोहियों को अनुमति मिली है।
  • बुधवार तक सगरमाथा के लिए अभी तक अनुमति जारी नहीं हुई है, लेकिन कुल 1 करोड़ 84 लाख रुपये के रॉयल्टी संग्रहित हो चुके हैं।

12 चैत, काठमांडू। वसंत ऋतु में हिमालय पर्वतारोहण करने के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पर्यटन विभाग के अनुसार बुधवार तक कुल 10 समूहों के 82 लोगों को परमिट मिल चुका है।

विभाग के अनुसार मार्च 1 से बुधवार तक इसी संख्या में अनुमति जारी हुई है। इस अवधि में सबसे अधिक परमिट अन्नपूर्ण प्रथम पर्वतारोहण के लिए जारी हुए हैं, जहां 3 समूहों के 22 लोगों को अनुमति मिली है।

अमा दब्लम पर्वत पर 2 समूहों के 20 पर्वतारोहियों को परमिट मिला है। इस सत्र में सगरमाथा पर बड़ी संख्या में पर्वतारोही चढ़ाई के लिए आने की उम्मीद है। हालांकि, बुधवार तक सगरमाथा के लिए कोई परमिट जारी नहीं हुआ है। विभाग के अनुसार बुधवार तक जारी परमिट से 1 करोड़ 84 लाख रुपये से अधिक रॉयल्टी संग्रहित की जा चुकी है।

सिलाम साक्मा पहन कर शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे बालेन

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) ने शपथ ग्रहण समारोह में सिलाम साक्मा पहनी।
  • सिलाम साक्मा किराती संस्कृति में शुभता का प्रतीक माना जाता है और इसे मृत्यु तथा अपशकुन से बचाने वाला पवित्र चिन्ह समझा जाता है।

१२ चैत, काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।

वे सिलाम साक्मा पहनकर समारोह में उपस्थित हुए।

किराती संस्कृति में इसे शुभता का प्रतीक माना जाता है तथा यह मृत्यु और अपशकुन के मार्ग को रोकने वाला पवित्र चिन्ह भी माना जाता है।

नवनिर्वाचित सांसदहरूले लिए शपथ – Online Khabar

नवनिर्वाचित सांसदों ने लिया शपथ ग्रहण


१२ चैत, काठमाडौं । प्रतिनिधिसभा के नवनिर्वाचित सांसदों ने शपथ ग्रहण किया है। सिंहदरबार स्थित संसद के अस्थायी भवन में आयोजित सभा में उन्होंने शपथ ली।

प्रतिनिधिसभा के वरिष्ठ सदस्य अर्जुननरसिंह केसी ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

संसद सचिवालय के अनुसार ६३ सांसदों ने नेपाली के अलावा अपनी मातृभाषा में शपथ ली है।

सांसद अपने-अपने पारंपरिक वेशभूषा में शपथ ग्रहण के लिए सिंहदरबार पहुंचे।

प्रधानमंत्री शपथ ग्रहण कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए मुख्य सचिव से अनुरोध


१२ चैत, काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के शपथ ग्रहण कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए मुख्य सचिव से अनुरोध किया है।

महामंत्री कविन्द्र बुल्कोटी ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में शपथ ग्रहण समारोह की संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

आज चैत १२ को नव निर्वाचित प्रतिनिधि सभा के सदस्यों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम होगा, जबकि अगले दिन चैत १३ को रास्वपा के वरिष्ठ नेता बालेन शाह प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।

शपथ ग्रहण समारोह दोपहर १२:३४ बजे शीतल निवास में आयोजित होगा। इस समारोह में ७ शंख से शंखनाद किया जाएगा, १०८ बच्चों द्वारा स्वस्ति शांति पाठ होगा और १६ बौद्ध भिक्षु अष्टमंगल पाठ करेंगे।

इसके अलावा, बालेन शाह दोपहर २:१५ बजे सिंहदरबार में प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के कार्यालय में पद ग्रहण करने का कार्यक्रम है।

अवैध चुनढुंगा उत्खनन मामले में पांच लोगों के खिलाफ वन अनुशासनिक मामला दायर

समाचार सारांश

  • मकवानपुर के बकैया गाउँपालिका में अवैध चुनढुंगा उत्खनन मामले में पांच लोगों को दोषी मानते हुए वन अनुशासनिक मामला दायर किया गया है।
  • डिविजन वन कार्यालय ने सुकुलाल नेसुर और अन्य को वन अधिनियम, २०७६ की धारा 49(ग) के तहत दोषी करार देते हुए मुकदमा दायर किया है।
  • अवैध उत्खनन में गाउँपालिका की मिलीभगत पाई गई है, तथा पीड़ित संरक्षण अधिनियम, २०७५ के तहत क्षतिपूर्ति शुल्क निर्धारित कर मुकदमा दायर किया गया है।

12 चैत्र, हेटौंडा – मकवानपुर के बकैया गाउँपालिका में अवैध चुनढुंगा उत्खनन की घटना में डिविजन वन कार्यालय मकवानपुर ने पांच लोगों को दोषी मानते हुए वन अनुशासनिक मामला दायर किया है।

चुनढुंगा उत्खनन के लिए राष्ट्रीय वन क्षेत्र को छेड़कर सड़क बनाई गई थी, और सड़क खोदने के दौरान निकले मिट्टी के कारण पौधों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि सब डिविजन वन कार्यालय बकैया द्वारा किए गए स्थलगत जांच में हुई। इसके बाद उन पांचों को प्रतिवादी बनाकर वन अनुशासनिक मामला दर्ज किया गया। इनमें चार जग्गाधनी और एक व्यवसायी शामिल हैं।

कित्तों नंबर 132 के जग्गाधनियों सुकुलाल नेसुर, धनबहादुर घलान और प्रेमबहादुर मुक्तान को गिरफ्तार कर वन अधिनियम, २०७६ की धारा 49(ग) के तहत अपराध प्रमाणित होने पर डिविजन वन कार्यालय ने मामला दर्ज किया है।

नेसुर को एक लाख और धनबहादुर तथा प्रेमबहादुर ने 50-50 हजार रूपए जमानत के रूप में जमा कर छूट मिले हैं। जबकि अन्य जग्गाधनी वीरबहादुर घलान और व्यवसायी प्रकाश गौतम फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है, डिविजन वन प्रमुख राकेशप्रसाद चन्द्रवंशी ने जानकारी दी।

जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि सुकुलाल नेसुर ने कित्ता नंबर 131 और 132 के अन्य जग्गाधनियों से अनुमति लेकर चुनढुंगा उत्खनन किया और इसके लिए सड़क का निर्माण किया। धनबहादुर और प्रेमबहादुर ने नेसुर को अनुमति देकर उत्खनन में मदद की।

‘सुकुलाल नेसुर और श्रीॐ अटुट कंस्ट्रक्शन प्रालि, हेटौंडा-16 ने अपने स्वेच्छा से एक्सकैवेटर का उपयोग कर सड़क को अतिरिक्त चौड़ा किया। प्रतिवादी वीरबहादुर घलान के कित्ता नंबर 131 और राष्ट्रीय वन क्षेत्र में 5-6 मीटर चौड़ी तथा 191 मीटर लंबी सड़क खोदने की प्रक्रिया हुई, जो राष्ट्रीय वन क्षेत्र के कालिका ढाँडा और सर्वे लाइन से बाहर है,’ रिपोर्ट में उल्लेखित है।

बयानों और साक्ष्यों के आधार पर प्रतिवादी सुकुलाल नेसुर और ॐ अटुट कंस्ट्रक्शन प्रालि, हेटौंडा-16 ने बिना अनुमति राष्ट्रीय वन क्षेत्र फड़ानी की, खनिज पदार्थों का अवैध उत्खनन किया, और वन अधिनियम, २०७६ की धारा 49(ग) के तहत अपराध किया जाना साबित होने पर उनके खिलाफ धारा 50(3) के तहत सजा की मांग के साथ मकवानपुर जिला अदालत में मुकदमा दायर करने का निर्णय लिया गया है। अन्य प्रतिवादियों धनबहादुर, प्रेमबहादुर और वीरबहादुर नेसुर के साथ मिलीभगत कर अपने आप को इस अपराध के लिए उकसाया और कित्ता नंबर 131 तथा 132 की जमीन से चुनढुंगा उत्खनन कर बिक्री की अनुमति दी, जिसके कारण उन्हें भी धारा 54 के तहत अपराधी माना गया है और उसी धारा के तहत सजा की मांग की गई है।

साथ ही, पीड़ित संरक्षण अधिनियम, २०७५ की धारा 41 के तहत क्षतिपूर्ति शुल्क निर्धारित कर पीड़ित राहत कोष में जमा करने की मांग के साथ मामला दायर किया गया है, डिविजन वन प्रमुख चन्द्रवंशी ने बताया।

तास्वास कोलखोप पहुँच सड़क २०७८ साल में ही गाउँपालिका ने बनवाई थी। बकैया गाउँपालिका के 12 नंबर वार्ड कार्यालय ने पांच लाख बजट में तीन मीटर चौड़ी और 2011 मीटर लंबी सड़क आर्थिक वर्ष २०७८/७९ में निर्मित की थी। उक्त सड़क का स्तरोन्नति नेसुर समेत निर्माण कंपनी ने अपनी पहल पर की, डिविजन वन ने बताया। नेसुर का कहना है कि दो साल तक पहल करने के बावजूद पालिका ने सड़क का स्तरोन्नति नहीं की, इसलिए उन्होंने अपने स्तर पर इस रास्ते का निर्माण किया ताकि यहां से निकलने वाले चुनढुंगा को ओसारपसार किया जा सके।

अवैध चुनढुंगा उत्खनन घटना का विवरण

मकवानपुरगढी और बकैया गाउँपालिका की सीमा क्षेत्र में पड़ने वाले चपकी खानी इलाके में पूर्व दिशा से महीनों से अवैध रूप से चुनढुंगा का उत्खनन हो रहा था। बकैया गाउँपालिका कार्यालय की मिलीभगत से 12 नंबर वार्ड के चपकी खानी क्षेत्र में निजी जमीन के नाम पर लगातार चुनढुंगा उत्खनन और बिक्री की गैरकानूनी गतिविधि जारी थी।

चुनढुंगा वाला क्षेत्र सरकार की संपत्ति है और उत्खनन के लिए खनिज एवं भूगर्भ विभाग की अनुमति अनिवार्य है। क़ानूनी व्यवस्था होने के बावजूद चुनढुंगा का अवैध उत्खनन जारी था। इस बाबत पहले भी समाचार प्रकाशित हुआ था। इसके बाद डिविजन वन कार्यालय ने मंसीर 19 तारीख को सब डिविजन बकैया के प्रमुख वन अधिकृत शरु श्रेष्ठ के नेतृत्व में जांच दल भेजा था।

डिविजन वन प्रमुख चन्द्रवंशी के अनुसार २० कात्तिक २०८० को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर खनिज विभाग की सहमति से उत्खनन के लिए गाउँपालिका को लिखित सूचना दी गई थी, लेकिन पालिका ने इसका अनुपालन नहीं किया। अवैध उत्खनन में खुद गाउँपालिका भी दोषी पाई गई होने के बावजूद डिविजन वन ने कानूनी कार्रवाई जारी रखी है।

गाउँपालिका की 29 असोज 2082 की कार्यपालिका बैठक में वडा नंबर 12 स्थित चपकी इलाके की सुकुलाल नेसुर के नाम वाली (कित्तांकन नंबर 132 की 11 रोपनी 6 आना 2 पैसा 3 दाम) जमीन पर चुनढुंगा उत्खनन और ढुलाई की अनुमति दी गई थी। लेकिन, जमीन मालिक नेसुर एक निर्माण कंपनी का उपयोग कर इसे सामान्य माटी बताते हुए चुनढुंगा का उत्खनन कर बिक्री कर रहे थे।

खनिज एवं खानी पदार्थ अधिनियम, 2042 की धारा 3 में स्पष्ट है कि नेपाल के अंतर्गत निजी या सरकारी भूमि की सतह और भूगर्भ में पाए जाने वाले सभी खनिज पदार्थ नेपाल सरकार की सामान्‍य संपत्ति हैं। खनिज उत्खनन के लिए खनिज पदार्थ नियमावली 2056 की नियम 14 की उप-धारा (1) और (2) तथा अनुसूची 7 में स्पष्ट निर्देश हैं।

गाउँपालिका ने चुनढुंगा को सामान्य धूप-मिट्टी के रूप में परिभाषित करने की कोशिश की, परंतु क़ानून ने इसे अस्वीकार किया है। खनिज पदार्थ नियमावली 2056 की नियम 3 के अनुसूची 1 के अनुसार चुनढुंगा को ‘अधातु खनिज’ में शामिल किया गया है और इसे मूल्यवान खनिज माना जाता है।

मकवानपुर के अधिकांश पहाड़ों में चुनढुंगा पाया जाता है। यह क्षेत्र महाभारत पर्वत श्रृंखला के पूर्वी भाग में आता है। पश्चिमी क्षेत्र जैसे राक्सिराङ से भीमफेदी, मकवानपुरगढी, बागमती और बकैया गाउँपालिका में चुनढुंगा प्रचुर मात्रा में मौजूद है। इन सब क्षेत्रों में हेटौंडा स्थित सरकारी स्वामित्व वाली हेटौंडा सीमेंट उद्योग, शिवम सीमेंट तथा रिद्धिशिद्धि सीमेंट की निजी खनियां भी स्थित हैं।