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लेखक: space4knews

संविधान संशोधन में दलित अधिकारों को प्राथमिकता देने की मांग

२४ आसार, काठमाडौँ। स्वतन्त्र दलित नागरिक समाज नेपाल ने संविधान संशोधन प्रक्रिया में दलित समुदाय के अधिकारों, समानुपातिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और समावेशिता के विषयों को प्राथमिकता के साथ संबोधित करने हेतु सरकार, संघीय संसद और राजनीतिक दलों से आग्रह किया है। आज यहां आयोजित पत्रकार बैठक में संस्थान के संयोजक कर्णबहादुर नेपाली ने संविधान संशोधन को दलित अधिकारों को और सुदृढ़ बनाने का ऐतिहासिक अवसर मानने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय की सार्थक भागीदारी के बिना संविधान संशोधन सामाजिक न्याय के उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेगा और इसलिए संशोधन प्रक्रिया को सहभागिता, समावेशिता और मानवाधिकार के अनुरूप होना चाहिए। संस्थान ने छुआछूत और जातीय भेदभाव के खिलाफ संवैधानिक प्रावधानों को और प्रभावी बनाने, राज्य के सभी निकायों में समानुपातिक और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने, भूमिहीन दलितों के भूमि और आवास अधिकार स्पष्ट करने तथा राष्ट्रीय दलित आयोग को अधिकार-संपन्न बनाने की मांग की है।

भारत में 30 मिनट तक शेर के कब्जे में रहे पुरुष जीवित बचे

भारत के गुजरात में एक पुरुष जंगली शेर के हमले से बचने में सफल रहे। इस पशुपालक को जंगली शेर ने 30 मिनट तक दबाए रखा था। लेकिन वह शांत रहे और अंततः शेर अपने रास्ते चला गया।

गांव के लोग उन्हें शेर के कब्जे से छुड़ाने के लिए पत्थर फेंककर मदद कर रहे थे। शेर के हमले में घायल हुए वह पुरुष अस्पताल में उपचाराधीन हैं।

एफबीआई ने अर्जेंटीना फुटबॉल संघ पर धन शोधन के आरोप में जांच शुरू की

२४ असार, काठमाडौं। फ़ीफ़ा विश्वकप २०२६ में अपने खिताब की रक्षा कर रहे अर्जेंटीना पर मैदान के बाहर एक बड़ा विवाद छिड़ गया है। अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (एएफए) अब अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की प्रारंभिक जांच के घेरे में है। अर्जेंटीनी समाचार माध्यम ला नासियोन की रिपोर्ट के अनुसार, एफबीआई ने एएफए के अमेरिका में संचालित व्यावसायिक कारोबार और आर्थिक गतिविधियों की जांच शुरू की है। जांच का केंद्र तार द्वारा होने वाली आर्थिक धोखाधड़ी, कर चोरी और धन शोधन से संबंधित आशंकाएं हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि एफबीआई और वॉशिंगटन डीसी तथा मियामी के संघीय अभियोजक एएफए के अंतरराष्ट्रीय प्रायोजन और व्यावसायिक समझौतों से प्राप्त करोड़ों डॉलर कैसे अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से निकाले गए, इस पर जांच कर रहे हैं। जांच के केंद्र में फ्लोरिडा में दर्ता टूरप्रोडएन्टर एलएलसी नामक कम्पनी है। एएफए के अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग और आर्थिक कारोबार के प्रबंधन के लिए नियुक्त इस कंपनी के माध्यम से कम से कम ४ करोड २० लाख अमेरिकी डॉलर फ्लोरिडा स्थित ऐसे ‘शेल कंपनियों’ के जरिए स्थानांतरित करने का आरोप है, जिनके पास कर्मचारी या व्यावसायिक गतिविधि नहीं है।

अमेरिकी जांचकर्ताओं ने फिलहाल खेल व्यवसाय से जुड़े विशेषज्ञों और विभिन्न व्यक्तियों के बयानों को दर्ज किया है। जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या ये कारोबार अवैध धन छुपाने या कर चोरी के लिए इस्तेमाल किए गए हैं। अर्जेंटीना में भी जांच जारी है। एफबीआई की जांच शुरू होने से पहले ही अर्जेंटीना के कर और सीमा शुल्क विभाग (एआरसीए) की जांच में एएफए के मुख्यालय, राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र के साथ-साथ रासिंग क्लब और सान लोरेन्सो सहित १७ व्यावसायिक फुटबॉल क्लबों के ३० से अधिक स्थानों पर छापे मारे गए थे।

इसी बीच, अर्जेंटीना के संघीय न्यायाधीशों ने एएफए अध्यक्ष क्लॉडियो तापिया और कोषाध्यक्ष पाब्लो तोबिगिनो के खिलाफ लगभग १ करोड़ ३० लाख अमेरिकी डॉलर की कर चोरी के मामले में मुकदमा दर्ज किया है, साथ ही उनकी संपत्ति जब्त करने और कुछ समय के लिए विदेश यात्रा पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। एएफए ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है। पिछले दिसंबर में जारी एक विज्ञप्ति में संघ ने मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों को ‘पूर्वाग्रही और निराधार’ करार दिया था। एएफए ने टूरप्रोडएन्टर एलएलसी के साथ किए गए समझौते को कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया बताया है और इस समझौते की समीक्षा अर्जेंटीना और अमेरिका की अदालतों द्वारा की जा चुकी है, जिसमें कोई अनियमितता नहीं पाई गई। संघ ने उन कानूनी प्रक्रियाओं और खबरों को संस्था को अस्थिर करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा भी बताया है।

इस बीच, फ़ीफ़ा विश्वकप में खिताब की रक्षा कर रहे अर्जेंटीना के लिए मैदान के भीतर की चुनौतियों के साथ-साथ मैदान के बाहर यह जांच और भी दबाव पैदा कर रही है।

जीवनशैली के ४ सपनों का घर वापसी सपनों जैसी: एक पत्र, एक यात्रा और पुनर्मिलन

झापा। २०८३ असार के अंतिम दिन। भारत के कोलकाता स्थित नेपाल महावाणिज्यदूतावास में एक औपचारिक पत्र तैयार हो रहा था। वह पत्र किसी व्यापार समझौते या कूटनीतिक निर्णय के लिए नहीं था। उस पत्र में चार नेपाली बालक-बालिकाओं के जीवन में एक नया अध्याय शुरू होने की शुभ सूचना थी। पत्र में चार नाम थे – मीना विश्वकर्मा (१६ वर्ष), सीमा मुर्मु (१३ वर्ष), सुरज जोगी (१४ वर्ष) और माया तामांग (१७ वर्ष)। (बाल बालिकाओं की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए नाम बदले गए हैं)। मीना और सीमा एक ही जिले की थीं जबकि सुरज और माया अलग-अलग जिलों के। कागज पर लिखे ये नाम सामान्य लगते थे लेकिन हर नाम के पीछे एक अलग कहानी थी – बिछड़ने का दर्द, अनिश्चित भविष्य और अपने परिवार से फिर मिलने की गहरी आशा।

ये बालबालिकाएं भारत के पश्चिम बंगाल स्थित शैशली माटीगढा चिल्ड्रेन होम फ़ॉर गर्ल्स और हसाना कोवेनन्ट चैरिटेबल ट्रस्ट, कालिम्पोंग के संरक्षण में थीं। बाल गृह उनके लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल था। वहीं वे विद्यालय जाती थीं, पढ़ती थीं, नए दोस्त बनाती थीं और भविष्य के सपने बुनती थीं। लेकिन शाम होते ही उनका मन हमेशा अपने घर की आँगन की ओर जाता था। खिड़की के बाहर आकाश देखकर वे सोचतीं, ‘मेरा घर अब कैसा होगा? मेरे माता-पिता मुझे कितना याद कर रहे होंगे? दादी अभी भी मेरे रास्ते देखती होंगी?’

भारत की पश्चिम बंगाल सरकार, कोलकाता स्थित नेपाल महावाणिज्यदूतावास और नव अभियान नेपाल के निरंतर समन्वय तथा सहयोग से उन्हें सुरक्षित रूप से नेपाल वापस लाया गया। और अपने परिवारों से पुनर्मिलन करवाया गया। सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर बालकों को सुरक्षित रूप से उनके परिवारों के सुपुर्द कर दिया गया, यह जानकारी नव अभियान नेपाल के क्षेत्रीय संयोजक इन्द्रबहादुर बस्नेत ने दी। उनकी आँखों में कई भावनाएं झलकती थीं – थोड़ा डर, अधिक उत्सुकता और उससे भी ज्यादा आशा। वर्षों बाद वे अपने देश, अपनी मिट्टी और अपने परिवार की गर्माहट में लौटने में सफल हुए।

उस दिन कोई बड़ी समारोह नहीं था। न ज्यादा प्रचार हुआ, न कोई भीड़ जमा हुई। लेकिन उन चार परिवारों के लिए वह दिन जीवन का सबसे बड़ा उत्सव था। बिछड़ने के अंधकार के बाद आशा की किरण लौटने का दिन था। कभी-कभी एक सरकारी पत्र केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं होता, बल्कि टूटी हुई कड़ियों को जोड़ने वाला पुल बन सकता है। खोई हुई मुस्कानें लौटाने का माध्यम बन सकता है। और एक बच्चे को अपने घर के आँगन तक सुरक्षित पहुंचाने की आशा की यात्रा बन सकता है।

अर्थमन्त्रीहरूको समन्वयमा असारे बजेट खर्चको प्रवृत्ति निरन्तर जारी

२४ असार, काठमाडौं । चालु आर्थिक वर्ष २०८२/८३ को बजेट कार्यन्वयनको क्रममा तीन अर्थमन्त्रीहरूले अवसर पाएका छन्। तत्कालीन अर्थ मन्त्री विष्णुप्रसाद पौडेलले सार्वजनिक गरेको बजेट भदौ २०८२ पछि अर्थविद् रामेश्वर खनालले आफ्नो कार्यकालमा लागू गरे। चैत २०८२ देखि अर्थविद् डा. स्वर्णिम वाग्लेले त्यही बजेट कार्यन्वयन गर्दै आएका छन्। दुई विज्ञ अर्थमन्त्रीहरूले असार महिनामा केन्द्रित हुने खर्चको प्रवृत्ति हटाउन नीतिगत र व्यावहारिक पहलहरू गरेका हुँदाहुँदै पनि असारे खर्च फेरि पनि बढ्ने अवस्था देखिएको छ। महालेखा नियन्त्रकको कार्यालयका अनुसार चालु आर्थिक वर्षको लागि निर्धारण गरेको बजेट खर्च जेठ मसान्तसम्म १३ खर्ब ४६ अर्ब रुपैयाँ मात्र थियो, तर २३ असारसम्म पुग्दा १५ खर्ब १४ अर्ब रुपैयाँ नाघिसकेको छ। यसको अर्थ यस अवधिमा मात्रै १ खर्ब ६८ अर्ब २२ करोड रुपैयाँ खर्च भइसकेको छ। कार्यालयका अनुसार आर्थिक वर्ष सकिनु कम्तीमा सात दिनअघि भुक्तानी दिई निकासा र खर्च अद्यावधिक गरी भुक्तानी निकासा बन्द गर्नुपर्ने प्रावधान रहेको छ। आर्थिक कार्यविधि तथा वित्तीय उत्तरदायित्व नियमावली २०७७ अनुसार यस वर्ष बिहीबार राति १२ बजेदेखि निकासा बन्द गरिनेछ। यसैले अहिले अन्तिम केही घण्टामा सरकारी प्रणालीमा भुक्तानीको चर्को दबाव छ। महालेखाका अनुसार पछिल्लो दुई दिन (सोमबार र मंगलबार) मात्र सरकारले ४० अर्ब ३२ करोड रुपैयाँ भुक्तानी गरिसकेको छ। यसले देखाउँछ कि यस वर्ष पनि सरकारले असारे शैलीमा भुक्तानी गर्ने परिपाटी कायम नै राखेको छ।

नेपालमा असारे खर्च र तीव्र विकास काम यथावत् रहेको प्रवृत्ति नयाँ कुरा होइन। महालेखाले भनेका छन् कि आर्थिक वर्ष २०८१/८२ मा मात्र असार महिनामा कुल पूँजीगत बजेट खर्चको ३१.१८ प्रतिशत खर्च गरिएको थियो र त्यसमध्ये ५४ प्रतिशत चौथो त्रैमासमा खर्च भएको थियो। त्यस्तै सो वर्षको पहिलो त्रैमासमा १३ प्रतिशत, दोस्रोमा १२ प्रतिशत र तेस्रो त्रैमासमा २१ प्रतिशत मात्र पूँजीगत खर्च गरिएको थियो। चालु आवमा पनि यस्तै प्रवृत्ति दोहोरिएको छ। महालेखा अनुसार मंगलबारसम्म कुल विनियोजनको ३८.३५ प्रतिशत पूँजीगत बजेट खर्च भइसकेको छ। आइतबारसम्म १ खर्ब ४९ अर्ब २९ करोड रहेको पूँजीगत खर्च तीन दिनमा ७ अर्ब १३ करोडले मात्र बढेर १ खर्ब ५६ अर्ब पुगेको छ।

महालेखा परीक्षकको ६३ औं वार्षिक प्रतिवेदनले स्रोत उपलब्धता र खर्च क्षमता हेरेर बजेट तर्जुमा यथार्थपरक नबनाउँदा सरकारले समयमै बजेट खर्च गर्न नसकेको उल्लेख गरेको छ। आर्थिक वर्षको बीचमा गरिने सुधारले समेत असर नगरेको पाइएको छ। नीतिगत सुधारको प्रभाव व्यवहारमा न्यून रहेको बताउँदै सरकारले विकास निर्माणमा वर्षान्तमा हुने भुक्तानीलाई गति दिन र मन्त्रालयहरूबीच प्रक्रिया घटाएर बजेट खर्च बढाउन यस वर्ष आर्थिक कार्यविधि तथा वित्तीय उत्तरदायित्व नियमावलीमा संशोधन गरेको थियो। यसले पूँजीगत बजेट रकमान्तरको लागि अर्थ मन्त्रालयलाई धाउँदै नबस्नुपर्ने र सम्बन्धित निकायका लेखा उत्तरदायी अधिकृत (मन्त्रालय सचिव वा निकाय प्रमुख) लाई अधिकार दिने व्यवस्था गरेको थियो। यसले गर्दा रकमान्तरका फाइल अर्थ मन्त्रालयमा थुप्रिनबाट रोकिएर भुक्तानीमा गति आउने अपेक्षा गरिएको थियो तर तथ्यांकले त्यो प्रभाव देखाएको छैन।

सार्वजनिक खर्चमा गति नआउनुको अर्थ विश्लेषण गर्दा चालु आवको बजेट अर्धवार्षिक समीक्षा अनुसार अर्थ मन्त्रालयले सार्वजनिक खर्च अपेक्षित खबर नआएकाले पहिचान गर्न प्रयास गरेको थियो। मन्त्रालयका अनुसार वार्षिक बजेट तयारी गर्दा पुराना आयोजनामा कम बजेट राखी नयाँ योजनालाई प्राथमिकता दिइँदा वर्ष अन्त्यमा आफैँ रुचिमा रकमान्तरको सम्भावना बढ्छ। अर्को तर्फ आयोजना स्थलको जग्गा प्राप्ति, मुआब्जा निर्धारण, वन क्षेत्र प्रयोग, क्षतिपूर्ति लगायत प्रक्रिया पूरा नभएका आयोजनामा पनि पर्याप्त बजेट राखिएको पाइन्छ। चालु आव २३ र २४ भदौ आन्दोलनका कारण १ हजार ६ सय ९३ सरकारी कार्यालयका २ हजार १ सय ३४ भवनमा क्षति पुगेको थियो जसले विकास निर्माण र भुक्तानी प्रक्रियामा प्रतिकूल असर पारेको छ। अभिलेखमा समेत क्षति पुगेको थियो। यसले गर्दा विकास आयोजना प्रतिवेदन, आयोजना बनाउने तरिका, लागत र परियोजनाको आर्थिक, सामाजिक, वित्तीय तथा प्राविधिक विश्लेषण र मूल्यांकन गरी बजेट प्रस्ताव गर्न नसक्दा बजेट कार्यान्वयन योजना पालनामा प्रभाव परेको अर्थ मन्त्रालयको विश्लेषण छ।

स्रोत सहमति भएका परियोजनामा कम बजेट प्रस्ताव गरेर र प्राप्त बजेट सीमा बिना नयाँ आयोजना थप्दा भुक्तानीमा समस्या देखिएका छन्। यसले अधुरा आयोजना संख्या बढाउने र खर्च व्यवस्थापनमा समेत कठिनाइ ल्याएको छ। चालु आवको बजेटमा १६ जेठदेखि नै आयोजना कार्यान्वयन सक्ने प्रावधान राखिएको थियो तर त्यसदेखि नै प्राथमिकता अनुसार काम नभएको छ। नयाँ आयोजना तथा कार्यक्रमका लागि अबन्डामा राखिएको रकम समयमै बाँडफाँट नभएकाले पनि कार्यान्वयनमा ढिलाइ भएको छ।

आगामी वर्षको तयारी कस्तो छ? अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्लेले आगामी वर्ष पूँजीगत खर्च लक्ष्यअनुसार हुने, बजेट आकार संशोधन नगर्ने र सार्वजनिक खर्चमा हुने बेथिति हटाउने प्रतिबद्धता व्यक्त गरेका छन्। उनले सुधारका केही सूत्रहरू पनि प्रस्तुत गरेका छन्। अर्थमन्त्री वाग्लेको भनाइ अनुसार खरिद प्रक्रियामा सुधार योजना बनाइएको छ। रकमान्तर सहित स्रोत व्यवस्थापनमा लचकता नीति आगामी आवमा पनि कायम रहनेछ। वैकल्पिक वित्त परिचालन गर्दै आयोजना प्रमुखको स्थिरता सुनिश्चित गरी तोकिएको लागत र समयमा आयोजना सम्पन्न गर्न सरकारले मिसन मोडमा काम गराउने योजना बनाएको छ। चालु आवभित्र विकास आयोजनाको सनसेट कानुन संसदमा पेश गरिने घोषणा गरिएको छ। मोबिलाइजेसन पेश्की रकम आयोजमा मात्र खर्च हुन दिन ट्र्याकिङ व्यवस्था गर्ने र हाइब्रिड एनयूटी मोडेलमा पूर्वाधार आयोजना गर्न सकिने प्रारम्भिक पाइपलाइन तीन महिनाभित्र बनाउने योजना रहेको छ।

पश्चिम एसियाको द्वन्द्वका कारण इन्धन, बिटुमिन लगायत निर्माण सामग्रीको मूल्यवृद्धिले निर्माण व्यवसायीहरूलाई परेको कठिनाइ समाधान गर्ने घोषणाले बजेटमा स्थान पाएको छ। प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रीपरिषद्को कार्यालयका अनुसार ३ असारमा बसेको सचिव बैठकले आगामी आर्थिक वर्षको बजेट र कार्यक्रमको प्रभावकारी कार्यान्वयनका लागि लागत अनुमान र बोलपत्र आह्वानका काम असार मसान्तभित्रै पूरा गर्ने निर्णय गरेको छ।

संविधान संशोधन बहसपत्र बनाने वाली कार्यदल से विपक्ष का अलगाव: संशय या असहयोग का संकेत?

नेकपाक नेताओं के साथ चर्चा करते कार्यदल

तस्वीर स्रोत, PMO Nepal

तस्वीर का कैप्शन, कार्यदल ने पूर्वप्रधानमंत्रियों समेत विभिन्न स्तरों और समूहों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की थी

प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह ‘बालेन’ के राजनीतिक सलाहकार असीम शाह के नेतृत्व में गठित संविधान संशोधन बहसपत्र तैयार करने वाली कार्यदल से चार विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने एक साथ अलग होने की घोषणा की, लेकिन कार्यदल के एक सदस्य ने बताया कि वे उपलब्ध दस्तावेजों के साथ असार माह के अंत तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।

“हम अंतिम चरण में थे। कुल १२४ बिंदुओं तक सीमित होकर जिस किसी भी बिंदु पर सहमति होती, उस पर संशोधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और जहां सहमति नहीं होती, उन विषयों को बहस के लिए रखने हेतु रिपोर्ट बनाने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन अब उपलब्ध तथ्यों, हमारे बिंदुओं और प्राप्त सुझावों को समेटकर रिपोर्ट बनाएंगे,” राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद एवं कार्यदल सदस्य मोहनलाल आचार्य ने बताया।

उन्होंने कहा कि अंतिम समय में सवाल उठाते हुए कार्यदल से अलग होने वाले विपक्षी प्रतिनिधियों की मंशा पर उन्हें संशय हुआ है।

असार २२ तारीख को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के देव गुरुङ, जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) के सुरेन्द्र झा, राष्ट्रीय जनमोर्चा (राजमो) के मनोज भट्ट और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (लोसपा) के लक्ष्मणलाल कर्ण ने कार्यदल के ‘उद्देश्य और प्रक्रिया’ पर सवाल उठाकर अलग होने की जानकारी दी थी।

कार्यदल की शुरुआत नौ दलों के प्रतिनिधियों के साथ हुई थी, जिसमें नेपाली कांग्रेस शुरू से शामिल नहीं थी, जबकि नेकपा एमाले के प्रतिनिधि भी कुछ समय बाद अलग हो गए थे।

प्रशान्त क्षेत्र के देशों ने चीन के क्षेप्यास्त्र परीक्षण के विरोध में एकजुटता दिखाई

२४ असार, काठमाडौं। प्रशान्त महासागर में चीन द्वारा हाल ही में किए गए रणनीतिक क्षेप्यास्त्र परीक्षण के विरोध में प्रशान्त क्षेत्र के देशों ने कड़ा संयुक्त बयान जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानिज ने क्षेत्रीय सहमति के लिए इस बयान के मसौदे पर प्रशान्त टापू फोरम के सदस्य राष्ट्रों के बीच चर्चा जारी होने की जानकारी दी है। ब्रिसबेन में पापुआ न्यू गिनी, टोंगा और सामोआ के नेताओं के साथ सुरक्षा वार्ता से पहले पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री अल्बानिज ने कहा कि प्रशान्त क्षेत्र के देशों को एक स्वर में सशक्त संदेश देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि तैयार किया गया संयुक्त बयान बहुत ही कठोर स्वरूप का है।

चीन ने सोमवार को प्रशान्त महासागर में नकली वारहेड वाले रणनीतिक क्षेप्यास्त्र का परीक्षण किया था। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों ने इस परीक्षण की कड़ी आलोचना की है। निगरानी समूहों के अनुसार, क्षेप्यास्त्र सोलोमन द्वीप, नाउरू और तुवालू के बीच समुद्री क्षेत्र में गिरे हुए देखे गए थे। कई प्रशान्त देश, जो चीन की सहायता और पूर्वाधार ऋणों पर निर्भर हैं, बीजिंग की सार्वजनिक आलोचना करने में हिचक रहे हैं, लेकिन सोलोमन द्वीप ने भी मंगलवार को इस परीक्षण के प्रति अपनी असंतुष्टि जताई है।

प्रधानमंत्री अल्बानिज टोंगा के प्रधानमंत्री लॉर्ड फकाफानुआ, पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे और सामोआ के प्रधानमंत्री ला’ओलियालिमालिएटोआ ल्युएटा श्मिट के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशान्त क्षेत्र की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय राष्ट्रों को स्वयं जिम्मेदारी उठानी होगी। ऑस्ट्रेलिया चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति के अंतर्गत प्रशान्त क्षेत्र के देशों के साथ सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ रग्बी लीग और रग्बी यूनियन कार्यक्रमों के माध्यम से भी अपने संबंधों का विस्तार कर रहा है।

चीन के क्षेप्यास्त्र परीक्षण उसी दिन हुआ जब ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच एक नए रक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर हुए। कैनबरा ने हाल के वर्षों में दक्षिण प्रशान्त के विभिन्न देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाया है। फिजी के रक्षा मंत्री पियो टिकोडुआडुआ ने कहा है कि उन्होंने चीनी दूतावास को परीक्षण न करने की पूर्व चेतावनी दी थी। उनका मानना है कि इस प्रकार का क्षेप्यास्त्र परीक्षण क्षेत्रीय विश्वास और पारस्परिक सम्मान को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि परीक्षण के समय चीन का क्षेप्यास्त्र निगरानी जहाज युआन वांग–५ फिजी के बंदरगाह पर था, जिसे उन्होंने एक असामान्य संयोग बताया है।

सांसद श्रद्धा कुँवर क्षेत्री ने जनप्रिय समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से आग्रह किया

२४ असार, काठमाडौं । राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी की सांसद श्रद्धा कुँवर क्षेत्री ने सरकार से जनता की सामान्य समस्याओं पर गंभीर ध्यान देने की मांग की है।

प्रतिनिधि सभा के अधिवेशन के शून्य समय में बोलते हुए उन्होंने वर्तमान सरकार के १०० दिन पूरे करने का स्मरण कराया।

उन्होंने कहा, ‘सरकार गठन को सौ दिन पूरे हो गए हैं। सरकार ने सुशासन और प्रभावशाली सार्वजनिक सेवाओं पर केंद्रित होने का संदेश देने में सफलता प्राप्त की है। इसके लिए मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं।’

फिर भी उन्होंने यह उजागर किया कि कुछ लोगों की समस्याएँ यथावत बनी हुई हैं।

‘विशेष रूप से रुपन्देही क्षेत्र संख्या १ की कई महिलाएं फोन कर अपनी बात रखती हैं। बाजार में बढ़ती महंगाई है। घरेलू और रसोई सामग्री की कीमतों के बढ़ने से जीवनयापन में कठिनाई हो रही है,’ सांसद क्षेत्री ने संसद में बताया।

उन्होंने बताया कि असार महीने में किसान दिन भर खेतों में काम करके जब घर लौटते हैं तो विद्युत समस्याओं के कारण कई बार असुविधा होती है। ‘बत्ती जाने की वजह से शाम को बच्चों को भी सुलाना मुश्किल होता है,’ उन्होंने कहा।

‘किसानों के दैनिक जीवन में परेशानी हो रही है,’ सांसद क्षेत्री ने कहा।

एक तरफ सेवा पाने के लिए पैसे देने पर भी सहज सेवा न मिलना, तो दूसरी तरफ अप्रत्याशित महंगाई ने हर नागरिक के दैनिक जीवन पर बड़ा प्रभाव डाला है, उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।

‘मैं सरकार से अनुरोध करना चाहती हूं कि सुशासन और समृद्धि की संरचना तैयार करते हुए तत्काल नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन की सामान्य समस्याओं पर भी सरकार गंभीरता से ध्यान दे।’

अमेरिका–इरान संघर्ष: ट्रम्प ने इरान के साथ युद्धविराम ‘खत्म’ होने की घोषणा की, तेल बाजार में उछाल

दोनों देशों के बीच हमले और पलटवार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका–इरान युद्धविराम “खत्म” होने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, “मैं अब उनके साथ ‘मोलभाव’ नहीं करना चाहता, वे बुरे लोग हैं। वे बीमार हैं। उन्हें बीमार लोगों द्वारा नेतृत्व किया जा रहा है। वे हानिकारक और हिंसक व्यक्ति हैं। अगर उनके पास परमाणु हथियार होते तो वे उनका उपयोग कर चुके होते। मेरे विचार में, अब यह खत्म हो चुका है।” ट्रम्प ने यह भी कहा कि इरान के साथ बातचीत जारी रखना समय की बर्बादी है।

पृष्ठभूमि में, मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल से भरे तीन टैंकरों पर हमला होने के बाद अमेरिका ने 80 से अधिक इरानी लक्ष्यों पर हमला किया था। तेल टैंकरों पर हुए हमले की जिम्मेदारी इरान ने नहीं ली है। हालांकि, अमेरिका के हमले के बाद इरान ने बाहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अवसंरचना पर हमला करने की चेतावनी भी दी है। पिछले महीने तेहरान और वाशिंगटन के बीच “सब मोर्चों पर” युद्धविराम विस्तार के लक्ष्य के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

इसी बीच नाटो के प्रमुख मार्क रट ने इरान पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अमेरिकी हमले को “पूर्णतः आवश्यक” बताया है। दूसरी ओर, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बोर गालिबाफ ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का दावा किया है।

ट्रम्प के युद्धविराम समाप्त होने की घोषणा के साथ ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतें तुरंत बढ़ गईं। उनकी बात सार्वजनिक होने से पहले वेस्ट टैक्सास इंटरमीडिएट (WTI) तेल का मूल्य 76 अमेरिकी डॉलर से थोड़ा कम था, लेकिन तुरंत ही बढ़कर 78 डॉलर हो गया। तेल की कीमतें और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

ट्रम्प ने इरान समझौते को खत्म बताया, इरान ने दिया कड़ा जवाब

२४ असार, काठमाडौं । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान के साथ हुए शांति समझौता पत्र (एमओयू) को अब समाप्त घोषित किया है। उन्होंने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन में कहा, ‘उनसे बातचीत करना समय की बर्बादी है।’ इससे पहले, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिका द्वारा इरान पर किए गए आक्रमण के जवाब में बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दावा किया था। ट्रम्प की यह प्रतिक्रिया उसी के तुरंत बाद आई है।

तुर्की में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन में भाषण देते हुए ट्रम्प ने इरान पर स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाकर युद्धविराम उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने इरान को ‘धोखेबाज खिलाड़ी’ बताते हुए कड़ी आलोचना की। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अब इरान के साथ कूटनीतिक वार्ता में उलझने की बजाय अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करेगा। उन्होंने इरान को ‘दुष्ट और विकृत विचारधारा वाले लोगों का शासन’ कहा।

ट्रम्प की इस ताजा टिप्पणी को वाशिंगटन और तेहरान के बीच रिश्तों में बढ़ते तनाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इरान के साथ संभावित कूटनीतिक समझौता लगभग असफल होता दिखाई दे रहा है। इरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक बयान में कहा कि अमेरिकी हमलों, इरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंध, और लेबनान में हिज़बुल्लाह के साथ इज़राइल के जारी तनाव जैसे मुद्दों ने समझौते के मूल तत्वों को निष्प्रभावी बना दिया है।

अराघची ने कहा, ‘इरान अपनी क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी कदम से नहीं हिचकिचाएगा।’ उन्होंने खाड़ी क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘अगर वहां से इरान पर कोई हमला होगा, तो हम उसके स्रोत और शुरूआती स्थान को निशाना बनाएंगे।’ इससे पहले अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया था कि अमेरिकी सेना ने इरान के ८० से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में इरान ने बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कुछ हमले किए हैं।

फीफा विश्व कप में चमका केप वर्डे, चीन के साथ खास तालमेल

२४ असार, काठमाडौं। फीफा विश्व कप २०२६ में पहली बार भाग लेकर विश्वभर में अपनी छाप छोड़ने वाला अफ्रीकी द्वीप राष्ट्र केप वर्डे की सफलता में चीन की भी अहम भूमिका रही है। मात्र पाँच लाख से थोड़ी अधिक जनसंख्या वाला केप वर्डे ने विश्व कप में पदार्पण करते हुए नकआउट चरण तक का सफर तय किया। राउंड ऑफ ३२ में विश्व चैम्पियन अर्जेंटीना के खिलाफ अतिरिक्त समय में ३-२ से कठिन हार के बावजूद भी उसने अपनी प्रदर्शन से विश्व फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया।

विशेष रूप से कप्तान और गोलकीपर जसिमार इवोरा डायस (भोजिन्हा) के उत्कृष्ट बचावों ने उन्हें विश्वस्तर पर चर्चा में ला दिया। विश्व कप में भोजिन्हा द्वारा पहने गए फुटबॉल बुट एक चीनी कंपनी द्वारा निर्मित पाए गए। दक्षिण-पूर्वी चीन के फुजियान प्रांत में स्थित छुफेंग स्पोर्ट्स ने ये जूते बनाए थे, जिन्हें उन्होंने विश्व कप के दौरान इस्तेमाल किया। प्रतियोगिता से पहले कंपनी ने २०० से अधिक जोड़ी फुटबॉल बुट बना रखे थे और विश्व कप के लिए अतिरिक्त २० जोड़ी तैयार की। भोजिन्हा के बेहतरीन प्रदर्शन के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कंपनी को इसकी जानकारी हुई। इसके बाद ब्रांड के जूते खरीदने वाले समर्थकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई, कंपनी ने यह जानकारी दी।

केप वर्डे की विश्व कप यात्रा का चीन से एक और गहरा संबंध भी है। टीम ने विश्व कप क्वालीफायर्स से पहले की अपनी तैयारी और ऐतिहासिक क्वालीफाइंग मैच राजधानी प्राया में बने राष्ट्रीय स्टेडियम में खेली, जिसे चीन की सहायता से बनाया गया था। यह स्टेडियम, जिसकी क्षमता १५,००० दर्शकों की है, २०१४ में चीनी आर्थिक सहयोग से निर्मित हुआ। चीन के लिए केप वर्डे के राजदूत अर्लिंडो डो रोसारियो ने कहा कि चीन ने देश के खेल विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, पर्यटन और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा है।

विश्व कप से बाहर होने के बाद केप वर्डे टीम ने चीनी समर्थकों को विशेष धन्यवाद दिया। “हमारे समर्थन के लिए सभी चीनी नागरिकों के प्रति हम आभारी हैं। आपके द्वारा दिखाए गए प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद,” टीम ने संदेश जारी किया।

१९७६ में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित होने के बाद से चीन ने केप वर्डे में विभिन्न बुनियादी ढाँचाओं के निर्माण में निवेश किया है। राष्ट्रीय स्टेडियम के साथ-साथ बांध, विश्वविद्यालय परिसर और सरकारी भवनों के निर्माण में भी चीन ने सहयोग किया है। इसी बीच, चीन में रहने वाले व्यवसायी लिन जी ने भोजिन्हा की मां को अमेरिका में विश्व कप खेलने गए अपने बेटे के लिए अमेरिकी वीजा प्राप्त कराने में आर्थिक और प्रशासनिक सहायता दी, जो चीन में काफी चर्चा में रहा। भोजिन्हा के विश्व कप प्रदर्शन और इन घटनाओं के बाद चीन में केप वर्डे के प्रति रुचि उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, अर्जेंटीना के खिलाफ मैच के २४ घंटे के भीतर केप वर्डे से संबंधित ऑनलाइन खोजों में २०० प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई।

पिछले वर्ष, चीन और केप वर्डे के बीच लगभग ११६ मिलियन अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जिसमें अधिकांश हिस्सा चीन से होने वाले निर्यात का था।

थलाराले पशु कल्याण संबंधी ऐन जारी किया

काठमांडू। नेपाल में पशु कल्याण को व्यवस्थित करने वाला कोई विशेष राष्ट्रीय कानून अभी तक नहीं बना है। पशु स्वास्थ्य, पशु सेवा और पशुजन्य उत्पादों से संबंधित विभिन्न कानून मौजूद होने के बावजूद पशुपक्षियों पर होने वाले क्रूर व्यवहार को रोकने के लिए कोई अलग कानूनी प्रावधान नहीं है। इसी कमी को दूर करने के प्रयास के तहत बझांग की थलारा गाउँपालिका ने ‘पशुपक्षी व्यवस्थापन तथा कल्याण ऐन, २०८३’ जारी किया है। इस २२ पृष्ठ लंबी इस कानून में पशुपक्षियों के संरक्षण, पंजीकरण, स्वास्थ्य, आश्रय, परिवहन, श्रम उपयोग, संक्रामक रोग नियंत्रण, पशुओं पर होने वाले क्रूर व्यवहार की रोकथाम से लेकर बेवारिसे और घायल पशुओं के प्रबंधन तक के विषय शामिल हैं।

पशु कल्याण को केवल नैतिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय सरकार की जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने का प्रयास इस ऐन में किया गया है। पांच स्वतंत्रताओं को कानूनी मान्यता देते हुए इस कानून ने पशुपक्षियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘फाइव फ्रिडम्स’ अर्थात पांच आधारभूत स्वतंत्रताओं को कानूनी रूप से शामिल किया है। इसके तहत पशुओं को भूख और प्यास से मुक्त होना, भय और पीड़ा से मुक्त रहना, शारीरिक असुविधा से मुक्त होना, रोग और चोट से सुरक्षित रहना तथा अपनी प्राकृतिक प्रवृत्तियों का पालन करने का अधिकार प्राप्त होगा।

प्रत्येक पशु का अभिलेख रखने की व्यवस्था के तहत इस ऐन ने पालतू पशुओं का निःशुल्क पंजीकरण करने का प्रावधान किया है। पंजीकृत पशुओं की प्रजाति, आयु, लिंग सहित अन्य विवरण स्थानीय वाई कार्यालय द्वारा संजोया जाएगा। बेवारिसे पशु तथा सार्वजनिक स्थानों में रह रहे बंदरों की भी गणना एवं अभिलेखीकरण का प्रावधान किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर सटीक आंकड़ों के आधार पर योजनाएं बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

पशुओं पर होने वाले क्रूर व्यवहार को प्रतिबंधित करते हुए इस ऐन ने पशुओं को पीटना, धारदार या विद्युत उपकरणों से यातना देना जैसे कृत्यों को निर्दयी व्यवहार माना है। इसके साथ ही किसी भी जीव को जीवित अवस्था में उबालकर या पकाकर खाने पर भी स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है।

ट्रैफिक पुलिस ने १० दिनों में डेढ़ करोड़ रुपये राजस्व वसूला, उठ रहे हैं सवाल

ट्रैफिक नियम उल्लंघन पर एक लाख तक जुर्माना प्रस्तावित विधेयक पर बहस चल रही है, उसी दौरान सोमवार को ट्रैफिक पुलिस ने काठमांडू उपत्यका से २२ लाख रुपये से अधिक जुर्माना वसूला है। मंगलवार को ट्रैफिक पुलिस ने सिंहदरबार के भीतर अव्यवस्थित रूप से पार्क किए गाड़ियों पर ‘व्हील लॉक’ लगाकर चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की तस्वीरें जारी की थीं। काठमांडू उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के अनुसार, पिछले १० दिनों में ही उपत्यका से कुल एक करोड़ ४७ लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया है। पिछले वर्ष चैत्र के अंतिम सप्ताह में उपत्यका ने अधिकतम १३ लाख रुपये तक जुर्माना वसूला था, जबकि वैशाख से हर माह लगभग एक करोड़ रुपये के आस-पास जुर्माना एकत्र हो रहा है।
कार्यालय के प्रवक्ता नरेशराज सुवेदी के अनुसार, पुलिस ने सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के अभियान के रूप में कार्रवाई और जुर्माना बढ़ाए हैं। “हाल ही में गृह मंत्री और पुलिस महानिरीक्षक द्वारा समुदाय, नागरिक और घर-घर तक जागरूकता कार्यक्रम पहुंचाने के निर्देश दिए जाने के बाद १ असार से व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं,” सुवेदी ने बताया। “जागरूकता के साथ ही उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है।”
चार साल पहले गठित सार्वजनिक यातायात सुधार कार्यदल के पूर्व सचिव शरदचन्द्र पौडेल ने कहा कि पुलिस के जरिये जुर्माना पर केंद्रित रहने से आम जनता में असंतोष और आक्रोश बढ़ सकता है, जिस पर राज्य के निकायों को ध्यान देना चाहिए। “जुर्माना बढ़ाकर सरकार के अधिकारीयों को प्रभावित करने का प्रयास नेतृत्व द्वारा बार-बार किया जाता देखा गया है। कुछ प्रोत्साहित करते हैं, तो कुछ निरुत्साहित,” पौडेल ने कहा। उपत्यका ट्रैफिक पुलिस प्रमुख रहने के साथ ही कार्यरत रह चुके नेपाल पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक उमेशराज जोशी ने बताया कि पुलिस राजस्व वसूलने के उद्देश्य से काम नहीं करती। “ऐसा नहीं है, यह गलतफहमी है और ऐसा नहीं होना चाहिए। कानून इसे मजबूत बनाना चाहिए,” उन्होंने कहा।
अनेक देशों में ट्रैफिक नियम उल्लंघन को अपराध नहीं माना जाता है, विशेषज्ञ कहते हैं। यातायात व्यवस्था विभाग के पूर्व महानिदेशक पौडेल ने भी कहा कि पुलिस को भारी जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। “अधिकांश देशों में पुलिस को जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं होता। अदालत या अन्य अधिकारियों को मामला ले जाना चाहिए,” उन्होंने कहा। “पुलिस का व्यक्ति बंदूक लिए व्यक्ति होता है। नागरिक उसके सामने बात नहीं कर पाते, अपनी बात नहीं रख सकते। उन्होंने जितना काटा, उतना काटा।” नेपाल में ट्रैफिक पुलिस हथियार तो नहीं रखती, पर सुरक्षा के लिए अन्य पुलिस के साथ संयुक्त जांच करती है, प्रवक्ता सुवेदी ने जानकारी दी।
ट्रैफिक पुलिस द्वारा जुर्माना वसूलने को लेकर नेपाल में पूर्व भी बहस हो चुकी है और बड़े जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं दिया गया है, सुवेदी ने बताया। वर्तमान कानून बड़ी राशि के जुर्माने का अधिकार केवल यातायात कार्यालय को देता है। “हालांकि उन्होंने अधिक अधिकार मांगे भी हैं, लेकिन जुर्माना न्यायाधीश या अधिकारियों को ही है,” उन्होंने स्पष्ट किया। “यदि पुलिस को कानून देता है, तो यह किस तरह दिया जाए, निगरानी कैसे हो और अनुशासन किस प्रकार लागू हो, यह सब नियोजन आवश्यक है।” लगभग दस साल पहले से ट्रैफिक पुलिस को जुर्माना वसूलने से मिलने वाला १५% कमीशन बंद कर दिया गया था। उस समय सामान्य गलती करने वाले चालकों पर भी कड़ी कार्रवाई होने की शिकायतें आईं, इसलिए यह व्यवस्था समाप्त की गई।
पिछले हफ्ते राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के सांसद ज्ञानबहादुर शाही ने कहा था कि चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली राज्य सड़क की खराब स्थिति के कारण हुए नुकसान की भरपाई भी करे। “यदि नागरिक को जुर्माना देना पड़ता है और राज्य ने गलती की है तो जुर्माना कौन देगा?” उन्होंने सवाल उठाए थे। सड़क कमजोर होने के कारण दुर्घटना पर राज्य जिम्मेदार न बने इस पर भी शाही ने सवाल किया। पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक जोशी के अनुसार, ‘जब तक जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, समस्या खत्म नहीं होती’, पुलिस राजस्व वसूलने के लिए काम नहीं करती, लेकिन बिना जुर्माना लिए चालकों को रोकती भी नहीं। “ट्रैफिक का काम राजस्व जुटाना नहीं है। गलती करने वालों से जुर्माना लेना ही सभी चीज़ नहीं है। जुर्माने के साथ जनजागरूकता भी जरूरी है,” जोशी ने कहा। “राज्य ऐसा है कि पुलिस न हो तो भी लाल बत्ती पर कोई नहीं रुकता। पहले ट्रैफिक पुलिस को खोजते हैं, फिर बत्ती देखते हैं, यह हमारी वास्तविकता है।” हालांकि उन्होंने बताया कि लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता पहले से बढ़ी है। उपत्यका ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, लाल बत्ती न मानने वाले रोजाना लगभग १०० चालक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। फुटपाथ पर गैरकानूनी पार्किंग पर भी समस्या बनी रहती है।
प्रवक्ता सुवेदी के अनुसार तेज गति से वाहन चलाने, मोबाइल उपयोग करने और निर्धारित क्षमता से अधिक सामान ले जाने वाले चालकों के खिलाफ भी कार्रवाई होती है। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों पर जुर्माना लगाने के बाद लोगों में अनियंत्रित सिगरेट पीने की मात्रा कम हुई है, यह उदाहरण देते हुए पूर्व एआईजी जोशी ने कहा कि जुर्माना सन्देशात्मक होना चाहिए। “गलती करने वालों पर सख्त होना जरूरी है लेकिन ऐसा अंतिम अपराध जैसा नहीं दिखाना चाहिए,” उन्होंने कहा।
ट्रैफिक पुलिस ने सड़क पर ‘स्टंट’ करते हुए वाहन चलाने वालों को खोजकर कार्रवाई करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। इस शैली की काफी प्रशंसा हुई है। सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत मिलने पर उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का विवरण दिखाते हुए वीडियो डालने पर रोजाना १५ से २० शिकायतें आ रही हैं, उपत्यका ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता सुवेदी ने बताया। “नागरिक और पुलिस मिलकर कार्रवाई करेंगे तो पुलिस न होने पर भी निगरानी का भाव उत्पन्न होता है,” उन्होंने कहा। अब कई जगह सीसीटीवी के जरिए पुलिस निगरानी करती है और उल्लंघन करने वालों को कार्रवाई करती है। ट्रैफिक पुलिस पर ‘राहत देकर’ कार्रवाई करने की शिकायतों के बाद सूचना बोर्ड लगाकर जांच का अभ्यास अधिक व्यवस्थित हुआ है। पूर्व एआईजी जोशी ने कहा कि नियमों के साथ-साथ पूर्वोत्तर बोर्डर में सुधार भी जरूरी है। “सड़क सुविधाओं में ट्रैफिक को प्राथमिकता मिले,” उन्होंने कहा।

मेसी ने विश्वकप इतिहास में लिखा एक और अविश्वसनीय अध्याय

विश्व चैंपियन अर्जेंटिना अंतिम २० मिनट बचे रहते हुए इजिप्ट के खिलाफ २–० से पीछे होने की स्थिति में विश्वकप से बाहर होने के खतरे का सामना कर रहा था। २४ असार, काठमांडू। लियोनेल मेसी की आंखें नम थीं। एटलांटा स्टेडियम के बीच मैदान में वे अपने साथियों के कंधों पर सिर रखकर भावुक थे। कुछ देर पहले तक वे आंसू विश्वकप से दर्दनाक विदाई के हो सकते थे। लेकिन खेल खत्म होने तक वे आंसू राहत, गर्व और एक और ऐतिहासिक वापसी की खुशी से झलक रहे थे।

विश्व चैंपियन अर्जेंटिना अंतिम २० मिनट शेष रहते इजिप्ट से २–० से पिछड़ कर आयोजक प्रतियोगिता में बाहर होने की कगार पर थी। स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर निराश चेहरे के साथ ऊपर झुके ३९ वर्षीय मेसी का दृश्य करोड़ों समर्थकों के दिलों को भारी कर रहा था। उस वक्त कई लोग मान रहे थे कि यह विश्वकप मेसी का आखिरी मैच हो सकता है। परंतु अर्जेंटिना हार मानने को तैयार नहीं था। अंतिम १४ मिनट में तीन गोल लगाकर अर्जेंटिना ने मैच ३–२ में पलट दिया और विश्वकप इतिहास की सबसे रोमांचक वापसी में से एक को अंजाम दिया।

निराशा से शुरू हुई यह रात अंत में उत्सव में बदल गई। ३९ वर्ष की उम्र में भी उनका जादू आज भी वैसा ही चमक रहा है। मेसी अब पहले जैसे लगातार दौड़ते नहीं हैं। वह अधिकतर समय चलते हुए खेल की गति को देखते हैं। लेकिन कब दौड़ना है, कब पास देना है और कब प्रहार करना है, यह निर्णय लेने में उनका फुटबॉल मस्तिष्क अब भी दुनिया के सबसे तेज में से एक है। इजिप्ट के गोलकीपर मोस्तफा शोबेर ने शुरू से ही अद्भुत प्रदर्शन किया। पहले हाफ में मेसी की पेनाल्टी बचाकर उन्होंने अर्जेंटिना पर अतिरिक्त दबाव डाला।

यह विश्वकप इतिहास में मेसी द्वारा चूकी हुई आठवीं पेनाल्टी थी, और यह भी एक रिकॉर्ड है कि एक ही विश्वकप में (शूटआउट को छोड़कर) दो पेनाल्टी चूकने वाले वह पहले खिलाड़ी बने। यासेर इब्राहिम और मोस्तफा जिको के गोल के कारण इजिप्ट २–० से आगे था, जिससे विश्व चैंपियन की यात्रा लगभग खत्म लग रही थी। लेकिन इसके बाद मैदान पर फिर से मेसी ने जादू दिखाया। ७९वें मिनट में उनकी शानदार क्रॉस को क्रिस्टियन रोमेरो ने हेडर से गोल में बदला और अर्जेंटिना को मैच में वापस लाया। चार मिनट १८ सेकंड बाद मेसी ने खुद बाईं पैर से जोरदार शॉट मारा जो क्रॉसबार में जाकर टकराया और जाल छुने से गेंद गोल हुई, जिससे स्कोर २–२ हुआ। इजिप्ट ने अंत तक संघर्ष किया, फिर भी इंजुरी टाइम में एन्जो फर्नांडीज के निर्णायक हेडर ने अर्जेंटिना को ३–२ की अविश्वसनीय जीत दिलाई।

आंसू, उत्सव और अमर तस्वीरें: अंतिम सिटी बजते ही कुछ मिनट पहले निराश दिख रहे मेसी को उनके साथियों ने कंधे पर उठाकर हवा में उछाला। अर्जेंटिना के समर्थकों ने लंबे समय तक स्टेडियम नहीं छोड़ा और गीत गाकर जीत का जश्न मनाया। मेसी के आंसू हार के नहीं थे, बल्कि यह विश्वकप में एक बार फिर चमत्कार रचने की संतुष्टि के थे। विश्वकप इतिहास में एक और कीर्तिमान इस मुकाबले के साथ मेसी ने कायम किया। वे नकआउट चरण के लगातार छह मैचों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बने। इस विश्वकप में उनका गोल संख्या आठ पहुंच गई है, जो १९७० में जर्मनी के गर्ड मुलर द्वारा पहले पांच मैचों में किए गए १० गोलों के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

पिछले नौ विश्वकप में मेसी ने कुल १६ गोलों में सीधे योगदान दिया है – १३ गोल और तीन असिस्ट। अर्जेंटिना की इस जीत ने प्रतियोगिता के नकआउट समीकरण भी बदल दिए हैं। यदि अर्जेंटिना हार जाता तो इंग्लैंड का क्वार्टरफाइनल का रास्ता काफी आसान लगता। लेकिन अब इंग्लैंड अगर क्वार्टरफाइनल में नॉर्वे को हराता भी है, तो फाइनल तक पहुंचने के लिए मेसी की अगुवाई में अर्जेंटिना से भिड़ना पड़ सकता है। पूर्व इंग्लिश गोलकीपर पॉल रॉबिन्सन ने कहा, ‘यह अविश्वसनीय था। अर्जेंटिना लगभग प्रतियोगिता से बाहर था, लेकिन फिर मेसी आए और पूरी कहानी बदल दी।’

अर्जेंटिना केवल मेसी के बलबूते खड़ा नहीं है। इस टीम में प्रतिभा, अनुभव और हार न मानने की मानसिकता भरपूर है। लेकिन जब सबसे कठिन समय आता है, तब मेसी साबित करते हैं कि वे क्यों सर्वकालीन महानतम खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, जब रोमेरो ने पहला गोल किया तब अर्जेंटिना के जीतने की संभावना केवल ०.६ प्रतिशत थी। लेकिन विश्व चैंपियन ने असंभव को संभव कर दिखाया। विश्वकप के कई नाटकीय मैचों में यह मुकाबला भी इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा। और इसके केंद्र में फिर से लियोनेल मेसी थे। आंसुओं से शुरू हुई रात अंत में एक और अमर विश्वकप कहानी में बदल गई।

‘मैं संविधान नहीं पढ़ता, लेकिन वहां सभी के रहने का अधिकार है’

सरकार ने पिछले वैशाख में काठमांडू के सुकुमवासी बस्तियों को डोजर लगाकर खाली कराया था। उन बस्तियों में रहने वाले लोगों को होल्डिंग सेंटर में भेजा गया। सरकार ने २५ हजार रुपये और तीन महीने तक किराया देने की व्यवस्था की थी, फिर भी लगातार उन्हें हटाने की कार्रवाई जारी है। सुकुमवासी लोगों का कहना है कि सरकार ने पूर्व तैयारी किए बिना ऐसा किया। होल्डिंग सेंटर में रहने वाले लोगों की समस्याओं और उनके समाधान के बारे में संयुक्त राष्ट्रीय सुकुमवासी मोर्चा के उपाध्यक्ष पवन गुरुङ से संत गाहा मगर ने संवाद किया:

आपकी उम्र कितनी हुई?

मैं फिलहाल ६९ वर्ष का हूँ।

आप कहां जन्मे?

मैं काठमांडू में ही जन्मा हूँ, भीमसेनगोलो के आसपास।

क्या वहां आपका घर था?

पहले से मेरा अपना घर नहीं था, हम मकान मालिक के भवन में किराए पर रहते थे। वहीं बड़ा हुआ।

सरकार ने वैशाख में काठमांडू की नदी किनारे की बस्तियां हटाने से पहले आपका घर शंखमूल में था, है ना?

हाँ, वहां घर था।

आप शंखमूल में कितने वर्षों से रह रहे हैं?

मैं २०३० साल से वहां रहता आ रहा हूँ। माँ को अपने साथ लेकर मैं वहां गया था। उस समय घर का किराया नहीं चुका पाने की वजह से मकान से बाहर निकाल दिया गया था। बाद में पंचायती काल में वॉर्ड अध्यक्ष ने बताया कि शंखमूल में बड़ा जमीन का टुकड़ा है, इसलिए वहीं रहने लगा।

वह वॉर्ड अध्यक्ष कौन थे?

हाँ, १० नंबर वॉर्ड के अध्यक्ष थे। उस समय ३१ और १० नंबर वॉर्ड एक ही थे, बाद में अलग हुए। मैं अभी भी १० नंबर वॉर्ड में वोट डालता हूँ। उस समय भी सिफारिश लेकर वहीं रहने आया था।

आप और आपकी मां वहां पहुंचने से पहले वहां कौन था?

पहले वहां एक महिला भी थी जो वॉर्ड अध्यक्ष के घर में काम करती थीं। उन्होंने कहा था, ‘दीदी भी वहां हैं, साथ रहो और खुश रहो।’ हम २०३० साल भाद्र में गए थे। कुछ ही समय में लगभग ५०-६० परिवार झोपड़ी बनाकर रहने लगे। उस वक्त प्लास्टिक नहीं था, बोरे और छ्वाली से झोपड़ी बनाई थी।

क्या इतने वर्षों से आपने वहां जमीन अपना माना?

जितना खुद बनायो, वही हमारा हो गया। बोरे से ईंट बनाई, फिर मिट्टी का घर और ७२ साल में सीमेंट का घर बनाया। वह भी २०८३ साल वैशाख १८ को सरकार ने ढहा दिया। मेरा घर नष्ट हो गया।

क्या २०७२ के भूकंप ने भी घर तोड़ा था?

भूकंप ने मिट्टी का घर तोड़ दिया था, फिर से सीमेंट का घर बनाया।

घर बनाने में कितना खर्च हुआ?

ऋण लेकर और कमाकर बनाया था, ५-७ कमरे वाला घर। राहत के लिए प्रयास भी किया लेकिन लालपुर्जा नहीं होने की वजह से नहीं मिला।

घर टूटने के बाद बहुत दुख हुआ और आँसू भी आए। उस बस्ती में मेरा घर ही नहीं, सामाजिक संबंध और रिश्तेदार भी थे। अब वो सब नहीं हैं। दशहरे-तिहार में बहुत आते थे, अब कोई नहीं आता।

ऋण लेकर घर बनाया था, किन्नर को श्राप भी दे चुके हैं कि घर तोड़ने वालों को। सरकार गैरकानूनी बसोबास बताते हुए घर तोड़ रही है। आप सुकुमवासी मोर्चा के उपाध्यक्ष हैं, इस पर क्या टिप्पणी है?

मैं नेता नहीं हूं, लेकिन सुकुमवासी क्षेत्र में काम करने वाला कार्यकर्ता हूं। हमें आरोप लगाकर घर तोड़ा गया, जबकि हमारे पास सिफारिश थी। लालपुर्जा न होने के कारण नक्शा पास नहीं था, लेकिन कानूनी रूप से अनुमति थी।

सरकार का आरोप हमें सहना पड़ा।

क्या स्थानीय सरकार ने समन्वय किया होता तो रहना संभव था?

हाँ, स्थानीय सरकार के पास भी सिफारिश थी। २०४४ और २०४६ साल में नापी हो चुकी थी, जमीन और घर अलग थे, लेकिन फील्डबुक में नाम नहीं था।

आपका बुद्ध टोल में घर था, अब तो घर और बस्ती दोनों कहा जा सकता है, है ना?

हाँ, मैं ५३ वर्षों से वहीं था, लेकिन अब घर नहीं है।

वैशाख १२ को थापाथली, मनोरम सहित अन्य बस्तियां खाली कराई गईं, और १८ को शंखमूल सहित। आपको भी वहीं से उठना पड़ा?

मैंने कभी सोचा भी नहीं था। मैं संविधान पढ़ना नहीं जानता, लेकिन वहां लिखा है कि सभी को रहने का अधिकार है। २०७६ में भूमि कानून संशोधन ने १० वर्षों से रहने वालों को जमीन देने का प्रावधान किया था। हम निश्चित थे कि हम नहीं टूटेंगे।

लेकिन १८ तारीख को डोजर आकर काफी जल्दी घर गिरा दिया गया। जब मैं वहां से बाहर निकला तो रोया, सोचकर अभी भी आंसू आते हैं।

भूमि अधिनियम अनुसार भूमिहीन और सुकुमवासियों को निःशुल्क जमीन देने कहा गया था, पर सरकार कहती है कि बस्ती जोखिमपूर्ण होने से हटाई गई।

वह बहुत जोखिमपूर्ण नहीं थी। जिस इलाके में हम रहते थे, वह बाढ़ से कभी प्रभावित नहीं हुआ। नीचे हरी-भरी जगह, सड़क, और घाट थे। कभी-कभी बाढ़ का पानी आता था लेकिन घर तक नहीं पहुंचा।

सरकार ने ऐसा क्यों किया, मुझे नहीं पता। अभी भी हमें होल्डिंग सेंटर में रहने को कहा जा रहा है, लेकिन कहाँ और कैसे यह स्पष्ट नहीं है।

आप होल्डिंग सेंटर कैसे पहुंचे?

रंगशाला जाते समय मैंने पूछा कि व्यवस्था मैं करूं या सरकार। मैंने कहा सपाट घर टूटे तो मैं कहां जाऊं? खोले के पास बहा दो या थानकोट के बड़े पहाड़ से फेंक दो।

फिर भक्तपुर के खरिपाटी होल्डिंग सेंटर में रहे?

हाँ, वहां रहा। कमरे नहीं मिलने पर काठमांडू में रात बिताई। अब वहां आया हूँ।

सरकार ने शुरू में २५ हजार रुपये और तीन महीने तक १५ हजार रुपये किराया देने की बात कही है। खाने की भी व्यवस्था नहीं होने की खबरें हैं, क्या सच है?

पहली बार २५ हजार मेरे खाते में आए। महीने के १५ हजार किराया भी दिए जाने की बात है। पर कौन देगा यह स्पष्ट नहीं है। उम्मीद है। बागमती सभ्यता समिति ने बैठक कर कुछ निर्णय लेने वाला है।

होल्डिंग सेंटर में कितने दिन रहने होंगे?

अभी रोक नहीं है, लेकिन रहने भी मुश्किल है। वहाँ रहने पर भी खाना खुद बनाना पड़ता है।

होल्डिंग सेंटर में आई समस्याओं का समाधान कैसे होगा?

सरकार को जमीन का प्रबंधन करके होल्डिंग सेंटर में ही सारना चाहिए। घर तोड़ने से पहले यह व्यवस्था होनी चाहिए थी।

आगे का समाधान क्या होगा?

कमरा न मिलने तक रहने की व्यवस्था होनी चाहिए। कुछ बुजुर्ग और असहाय हैं, उनकी सरकार को देखभाल करनी चाहिए। हमारे समुदाय का लोगों द्वारा तिरस्कार किया जाता है। खोले के किनारे रहने वाले को कष्ट देना बहुत तकलीफदेह है।

दीर्घकालीन समाधान के लिए क्या किया जाना चाहिए?

संविधान ने सभी को बास का अधिकार दिया है। भूमि मंत्री बालेन्द्र शाह ने भी जमीन देने का आश्वासन दिया है, इसके लिए धन्यवाद। पर कब होगा? हम ५०० दिनों के भीतर उम्मीद लगाए हुए हैं। इस स्थिति में कैसे जियें? मैं बूढ़ा और रोगी हूँ, चिंता रहती है कि कैसी स्थिति में रहना होगा। जल्दी व्यवस्था हो।

२०७२ में प्राकृतिक आपदा आई, अब सरकार आई, ऐसा कहता हूँ। सरकार बाद में कुछ कहने में असमर्थ रहती है। आवाज उठाने पर पुलिस पकड़ती है।

कई मांगें रखने में डर लगता है। बूढ़ों को जेल में डालने की बात आती है तो डर लगता है। मुझे कभी जेल नहीं देखी, लेकिन सोचकर डर लगता है। जल्दी व्यवस्था की हार्दिक विनती है।

क्या शहर के भीतर जगह मिलना संभव नहीं? सरकार को विकल्प तलाश करना चाहिए। तब आप लोग क्या करेंगे?

हम चाहते हैं कि अपने ही वार्ड या पड़ोसी वार्ड, काठमांडू जिले के भीतर या उपत्यका में कहीं भी बसने को मिले।

इसके लिए सुकुमवासी समुदाय से चर्चा होनी चाहिए। सरकार यदि वार्ताकार बनकर उपयुक्त स्थान देती है तो हम स्वीकार करेंगे, लेकिन जिनके पास जमीन और घर नहीं है, उन्हें भी मंजूरी देनी होगी।

तस्वीर/वीडियो: शंकर गिरी