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लेखक: space4knews

आईपीएलमा पन्जाबको लगातार दोस्रो जित, चेन्नईको दोस्रो हार

आईपीएल में पंजाब की लगातार दूसरी जीत, चेन्नई को दूसरी हार का सामना

पंजाब किंग्स ने आईपीएल २०२६ में लगातार दूसरी जीत दर्ज की है। पंजाब ने चेन्नई सुपर किंग्स को ५ विकेट से हराया। चेन्नई ने २० ओवर में ५ विकेट खोकर २०९ रन बनाए थे। २० चैत्र, काठमाडौं।

पंजाब ने दिए गए २१० रन के लक्ष्य को १८.४ ओवर में ५ विकेट खोकर पूरा किया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने २९ गेंदों में ५० रन बनाए, जिसमें उन्होंने ४ चौके और ३ छक्के लगाए। ओपनर प्रियांश आर्य ने ११ गेंदों में ३९ रन बनाकर आक्रामक शुरुआत की। अन्य ओपनर प्रभसिमरन सिंह ने ४३ रन बनाए जबकि कूपर कोनोली ने २२ गेंदों में ३६ रन का योगदान दिया।

चेन्नई के लिए म्याट हेनरी और अन्शुल कम्बोज ने दो-दो विकेट लिए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी चेन्नई ने २० ओवर में ५ विकेट खोकर २०९ रन बनाए। आयुष म्हात्रे ने ४३ गेंदों में ७ चौके और ५ छक्कों की मदद से ७३ रन बनाए। शिवम दुबे ४५ रन पर नाबाद रहे, वहीं सरफराज खान ने ३२ और कप्तान रुतुराज गायकवाड़ ने २८ रन बनाए।

पंजाब के विजयकुमार वाइशाक ने २ विकेट लिए, जबकि जेवियर बार्टलेट, मार्को यानसेन और युजवेन्द्र चहल ने एक-एक विकेट झटके। लगातार दूसरी जीत के साथ पंजाब २ मैचों में ४ अंक लेकर शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। लगातार दूसरी हार झेलने वाली चेन्नई अंकहीन रहकर अंतिम स्थान पर है।

‘शोले’ निर्देशक भन्छन्- नेपाली फिल्मले नेपालीपन जोगाउनु अनिवार्य छ

‘शोले’ निर्देशक रमेश सिप्पी: नेपाली चलचित्रमा नेपालीपन संरक्षण आवश्यक है

भारतीय फिल्म ‘शोले’ के निर्देशक रमेश सिप्पी वर्तमान में काठमाडौँ में नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हैं। सिप्पी ने बताया कि ‘शोले’ केवल एक सफल फिल्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गई है, जिसने भारतीय फिल्म उद्योग की स्तर को नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा कि नेपाली फिल्म उद्योग का भविष्य उज्जवल है और नेपाली फिल्म निर्माता के लिए नेपालीपन को संरक्षित करना अनिवार्य है।

काठमाडौँ। भारतीय सिनेमा की प्रभावशाली और चर्चित फ़िल्म ‘शोले’ के निर्देशक रमेश सिप्पी फिलहाल नेपाली राजधानी काठमाडौँ में हैं। वे नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (निफ) के विशेष अतिथि के रूप में यहाँ आए हैं। यह सिप्पी का नेपाल का तीसरा दौरा है। उन्होंने ‘शोले’ को सामान्य कथा से ऊपर उठाकर एक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया है। कथावाचन शैली को नई दिशा देते हुए प्रत्येक पात्र को गहराई से चित्रित करने में सफल रहे हैं। उन्होंने बॉलीवुड को पश्चिमी शैली में प्रस्तुत करते हुए ‘लार्जर देन लाइफ’ की महत्ता तथा छोटे दृश्यों के प्रभाव को संतुलित रूप से दिखाया है।

सिप्पी के निर्देशन ने ‘शोले’ को मात्र एक सफल फ़िल्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक घटना बना दिया था, जिसने भारतीय फ़िल्म के मानकों को बदल दिया। ७९ वर्ष के सिप्पी ने पत्रकार विष्णु शर्मा से ‘शोले’, बॉलीवुड, नई कथावाचन शैली और नेपाली फ़िल्म उद्योग की गतिशीलता पर चर्चा की।

सिप्पी ने कहा, “मेरे लिए ‘शोले’ एक बार बनने वाली फ़िल्म थी, वह अंतिम फ़िल्म थी। मैं इसे फिर से नहीं बनाना चाहता। यदि आज बनानी होती तो मुझे नहीं पता कि कलाकारों को कैसे चुनता। क्योंकि उस समय जो कलाकार मिले वे स्वयं में एक अद्वितीय घटना थे। आज भी बेहतरीन कलाकार मौजूद हैं, पर वर्तमान परिस्थिति में पात्रों का चयन करना बहुत चुनौतीपूर्ण है।”

श्यान्टु र एरिका वर्षको सर्वोत्कृष्ट खेलाडी – Online Khabar

श्यान्टु व इरिका वर्षको उत्कृष्ट खेलाडी घोषित

करातेकी इरिका गुरुङ र टेबल टेनिस खेलाडी श्यान्टु श्रेष्ठले २०औं एनएनआइपीए स्पोर्ट्स अवार्डअन्तर्गत वर्षको उत्कृष्ट खेलाडी अवार्ड प्राप्त गरेका छन्। श्यान्टुले पेरिस ओलम्पिक्समा नेपालको प्रतिनिधित्व गर्दै टेबल टेनिसबाट पहिलो पटक ओलम्पिक छनोट भएका थिए। एनएनआइपीए अवार्डमा २६ खेलाडीलाई वर्षको उत्कृष्ट खेलाडीको रूपमा सम्मान गरियो र सबैले १५ हजार रुपैयाँ नगद पुरस्कार पाएका छन्। २० चैत, काठमाडौँ।

करातेकी इरिका गुरुङ र टेबल टेनिस खेलाडी श्यान्टु श्रेष्ठले २०औं एनएनआइपीए स्पोर्ट्स अवार्डमा वर्षको उत्कृष्ट खेलाडीको अवार्ड प्राप्त गरे। नेपाल राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय खेलाडी संघको आयोजनामा काभ्रेपलाञ्चोकको बनेपा नगरपालिका स्थित चन्डेश्वरी मन्दिर परिसरमा भएको अवार्ड कार्यक्रममा श्यान्टुले टेबल टेनिसबाट ओलम्पिकको दक्षिण एसियाली छनोट जितेका थिए। उनी टेबल टेनिसबाट ओलम्पिकमा छनोट हुने पहिलो नेपाली खेलाडी बने र पेरिस ओलम्पिक्समा नेपालको प्रतिनिधित्व गरे। यही सफलतामा आधारित भएर उनलाई वर्षको उत्कृष्ट खेलाडी अवार्ड दिइयो।

स्टार कराते खेलाडी इरिका गुरुङले वर्ल्ड कराते वन यूथ लिगमा ऐतिहासिक रजत पदक जितिन् र अस्ट्रेलियन ओपन करातेमामा स्वर्ण पदक जितेर इतिहास रचिन्। करातेमा अन्तर्राष्ट्रिय पदक जित्न सफल इरिका लगातार दोस्रो वर्ष वर्षको उत्कृष्ट खेलाडी बनिन्। इरिका र श्यान्टुले उत्कृष्ट खेलाडी अवार्डसँगै एक लाख रुपैयाँ पनि प्राप्त गरे। प्रतिभाशाली पुरुष खेलाडीको अवार्ड तेक्वान्दोका अभिषेक बरालले र महिलाको अवार्ड बक्सिङकी स्वस्तिका तिरुवाले जिते।

अभिषेकले छैटौं कासाद एसियन तेक्वान्दो च्याम्पियनशिपमा रजत पदक हासिल गरे। स्वस्तिकाले आइएसएफ जिम्नासाइड समर गेम्समा स्वर्ण पदक जितेकी थिइन् र सन् २०२१ मा दुबईमा सम्पन्न एसियाली जुनियर बक्सिङमा पनि कास्य पदक प्राप्त गरेकी थिइन्। पारा खेलाडी सम्मानबाट एथलेटिक्सकी प्रवाह आङ्गदाम्बे सम्मानित भएकी छन्। प्रतिस्पर्धात्मक खेलमा प्रवेश गरेको एक वर्ष नपुगेकी आङ्गदाम्बेले उल्लेखनीय सफलता हासिल गरिन्। दुबई ग्रान्ड प्रिक्सबाट अन्तर्राष्ट्रिय डेब्यु गरेकी उनले नयाँ दिल्लीमा ३ दशमलव ९६ मिटर जम्प गर्दै टी–४७ लङजम्पमा रजत पदक जितिन्, जुन नेपाली पारा एथलेटिक्सकै ठूलो पदक हो।

भलिबल प्रशिक्षक कुमार राईलाई गजराज जोशी आदर्श खेल व्यक्तित्व पुरस्कार प्रदान गरियो। उनलाई सम्मान पत्रसहित ३५ हजार रुपैयाँ प्रदान गरियो। एनएनआइपीए पत्रकारिता पुरस्कारबाट वरिष्ठ फोटो पत्रकार उदिप्त सिंह क्षेत्री सम्मानित भए। उनले नगद ३५ हजार रुपैयाँ र सम्मान पत्र पाए र दुई दशक लामो खेलकुद फोटोग्राफी अनुभव राख्छन्। यसअघि विभिन्न २६ खेलका खेलाडीहरूलाई वर्षको उत्कृष्ट खेलाडी–२०८२ बाट सम्मान गरिएको थियो।

बिजेतालाई राष्ट्रिय खेलकुद परिषद्का सदस्य–सचिव रामचरित्र मेहता, राखेप कार्यकारी समितिका सदस्य कमलबहादुर भट्टराई, सुवर्ण श्रेष्ठ र भानबहादुर चन्द, राखेप सदस्य जगतसिंह धामी र जगत टमटा, बनेपा नगरपालिकाका मेयर शान्तिरत्न शाक्य र उपमेयर विमला सापकोटा दाहाल, खेलाडी संघका अध्यक्ष दीपक श्रेष्ठ र मानार्थ अध्यक्ष दीपक विष्टले संयुक्त रूपमा पुरस्कृत गरे। कार्यक्रममा सदस्य–सचिव मेहताले विभिन्न खेलका उत्कृष्ट खेलाडीलाई एउटै मञ्चमा भेला पारेर सम्मान गर्ने कार्य सराहनीय भएको बताए। काठमाडौं उपत्यकाबाहिर पहिलोपटक यो अवार्ड आयोजना गरिएको हो।

गोरखा सहकारीमा ४ अर्ब १२ करोड अपचलन, गैरसदस्यका नाममा ७८ करोड हिनामिना

गोरखा सहकारी में ४ अरब १२ करोड़ से अधिक राशि का गड़बड़ी, गैरसदस्यों के नाम पर ७८ करोड़ की ऋण वसूली

गोरखा बचत एवं ऋण सहकारी संस्थान के संचालकों ने ४ अरब १२ करोड़ रुपये से अधिक राशि का गड़बड़ी की है। सरकार ने सहकारी ठगी मामले में शामिल चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अध्यक्ष इमानसिंह राई और प्रमुख कार्यकारी अधिकारी लालबहादुर क्षेत्री भी शामिल हैं। सहकारी का कर्ज निवेश १ खरब ५२ करोड़ ४० लाख और बचतकर्ताओं की संख्या ३१ हजार ८ बताई गई है।

समस्याग्रस्त सहकारी प्रबंधन समिति के अनुसार संचालक तेजबहादुर तामाङ, डीबी बम्जन सहित अन्य ने उक्त राशि का दुरुपयोग किया है। जनआन्दोलन के बाद नई सरकार जब बालेन्द्र साह के नेतृत्व में बनी, तब शुक्रवार को गोरखा सहकारी से जुड़े चार व्यक्तियों को सहकारी ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार व्यक्तियों में ६१ वर्षीय सहकारी अध्यक्ष इमानसिंह राई, प्रमुख कार्यकारी अधिकारी लालबहादुर क्षेत्री, अविनकुमार राई और पूर्व लेखा सदस्य कर्णबहादुर राई शामिल हैं।

गोरखा सहकारी का कुल बचत (ब्याज सहित) ४ अरब १४ करोड़ १३ लाख रुपये है, जबकि कुल कर्ज (ब्याज व जुर्माना सहित) ४ अरब ४६ करोड़ ४० लाख रुपये है, जिसे समिति ने बताया है। संचालकों और उनके परिवार ने वर्षों से सहकारी से लिया गया ऋण नहीं चुकाया, जिससे संस्था में समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। डीबी बम्जन और उनके भाई तेजबहादुर बम्जन, जो सहकारी के सदस्य नहीं हैं, उन्होंने भी ऋण वर्षों से नहीं लौटाया है, जिससे समस्या और बढ़ी है।

सहकारी में डमी ऋणी दिखाए गए कुल ऋण का लगभग ७० प्रतिशत से अधिक उपयोग किया गया है। किसी भी ऋण का नियमित भुगतान नहीं हो रहा है। लंबे समय से न केवल ऋण की मूल राशि बल्कि ब्याज भी नहीं चुकाए जाने से समस्याएं पैदा हुई हैं, जैसा कि समिति की रिपोर्ट में उल्लेख है।

खाली खेतों में ‘एक पालिका, एक चिस्यान केन्द्र’ की घोषणा क्यों है प्रभावहीन?

समाचार सारांश: सरकार ने कृषि उत्पादन घाटा कम करने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए शीतभण्डार निर्माण में अरबों खर्च किए, फिर भी कई केंद्र अलपत्र पड़े हैं। बागमती प्रदेश के 10 में से केवल 2 शीतभण्डार ही संचालन में हैं, बाकी संरचनाएं बनने के बाद भी साझेदार निकायों द्वारा धनराशि न दिए जाने के कारण अलपत्र हैं। कृषि विभाग सभी स्थानीय तह में मौजूद छोटे और बड़े कोल्ड स्टोरों का विवरण इकट्ठा कर एकीकृत तथ्यांक तैयार करने की योजना बना रहा है। 20 चैत, काठमांडू।

कृषि क्षेत्र में उत्पादन घाटे को कम करने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से स्थापित शीतभण्डार (चिस्यान केन्द्र) वर्षों से सिर्फ राज्य के वेतन व्यय का माध्यम बने हुए हैं। पिछले दशक में सरकार ने शीतभण्डार निर्माण के लिए अरबों अनुदान वितरित किए, फिर भी इन्हें पर्याप्त उपयोग में नहीं लाया जा सका। संघीय, प्रदेश और स्थानीय सरकार द्वारा निश्चित अनुपात में अनुदान देने की नीति के कारण योजनाओं में शामिल निकाय केवल योजना प्राप्त कर रकम हिनामिना करने की प्रवृत्ति में रह गए, जिससे कृषि पूर्वाधार में बड़े स्तर पर समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।

कहीं भवन की संरचनाएं बनने के बाद भी संचालन में नहीं आ सके तो कहीं अनुदान लेकर जगमात्र निर्माण कर दिया गया, जो अब झाड़ियों में तब्दील हो चुका है। मनथली नगरपालिकाक साथ प्रदेश सरकार की संयुक्त निवेश से बने 500 टन क्षमता वाले चिस्यान केन्द्र का उपयोग तीन वर्षों से नहीं हो रहा है। 2080 साउन में मुख्य संरचना पूरी हो चुकी है, लेकिन अनावश्यक पूर्वाधार बनने से बचाने के लिए इसे चलाया नहीं गया। बागमती प्रदेश ने लगभग 80 करोड़ रुपये की निवेश से शुरू किए गए 10 शीतभण्डारों में से केवल 2 ही पूर्ण रूप से संचालन में हैं।

यह समस्या केवल बागमती प्रदेश तक सीमित नहीं है। सातों प्रदेशों में इसी प्रकार की योजनाएं हैं। कहीं बने हुए चिस्यान केन्द्र उपयोगविहीन हैं और कहीं निर्माणाधीन अवस्था में ही अलपत्र पड़े हैं। अब पुनः चिस्यान केन्द्र की चर्चा हो रही है। इसका कारण है – सरकार ने कृषि उत्पादन भंडारण और बाजार सुधार के लिए ‘एक पालिका, एक चिस्यान केन्द्र’ कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के वरिष्ठ नेता बालेन्द्र साह के नेतृत्व में शासकीय सुधार के 100 कार्य सार्वजनिक किए गए हैं, जिसमें प्रत्येक जिले में सार्वजनिक-निजी साझेदारी से चिस्यान केन्द्र स्थापित करने के लिए 10 दिन के भीतर संभाव्यता अध्ययन करने का निर्णय लिया गया है।

रवि लामिछाने: दलित समुदाय के लिए माफी पार्टी की ओर से है या राज्य की?

Ravi Lamichhane

छवि का स्रोत, RSS

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी के अध्यक्ष एवं नव निर्वाचित सांसद रवि लामिछाने ने प्रतिनिधि सभा की पहली बैठक में दलित समुदाय के प्रति भेदभाव के लिए माफी माँगी है। इस माफी को सकारात्मक संकेत के रूप में स्वीकार किया गया है, लेकिन कुछ दलित अधिकार कार्यकर्ता और विद्वान इसे राज्य की औपचारिक माफी नहीं मानने की सलाह देते हैं।

गुरुवार की बैठक में सांसद लामिछाने ने कहा कि यह माफी “पूरे पार्टी, प्रधानमन्त्री [बलेन्द्र शाह], और सरकार की ओर से” दलित समुदाय के लिए दी गई है।

पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में नए सरकार के नेतृत्वकर्ता के पहले संबोधन में दलित समुदाय के प्रति माफी मांगने की प्रतिबद्धता शामिल थी। सरकार द्वारा जारी १०० दिनों की कार्ययोजना के अनुसार, “१५ दिनों के अंदर औपचारिक राज्य माफी जारी की जाएगी और परिवर्तनकारी कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी।”

“उन्होंने औपचारिक राज्य माफी जारी करने का भी उल्लेख किया। पार्टी नेता द्वारा की गई माफी पार्टी की प्रतिबद्धता है लेकिन राज्य की माफी नहीं है,” पूर्व नेपाल सरकार के सचिव एवं विद्वान मन बहादुर विश्वकर्मा ने टिप्पणी की। “राज्य की औपचारिक माफी सामान्यतः राष्ट्र प्रमुख — राष्ट्रपति — द्वारा दी जाती है, हालांकि प्रधानमंत्री इसे सिफारिश कर सकते हैं।”

“संसद में प्रधानमंत्री को प्रस्ताव लाना होगा, चर्चा कर पारित कराना होगा, फिर राष्ट्रपति को संसद में संबोधन या सार्वजनिक वक्तव्य के ज़रिए माफी मांगनी होगी। सरकारी गज़ेट में प्रकाशित नहीं होने तक इसे राज्य की तरफ से जारी माफी नहीं माना जा सकता,” उन्होंने आगे कहा।

क्षेत्राधिकार नाघेर जाँचबुझ आयोगको सिफारिस, ऐन मिचेर प्रधानमन्त्रीको निर्णय

जाँच आयोग की सिफारिश का उल्लंघन करते हुए प्रधानमंत्री का निर्णय, क्षेत्राधिकार का उल्लंघन

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा सहित संकलित जानकारी।

  • प्रधानमंत्री बालेन शाह ने चिकित्सा शिक्षा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए जेनजी आन्दोलन में घायल एकता शाह को अतिरिक्त छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है।
  • गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व में गठित आयोग ने जेनजी आन्दोलन से जुड़ी घटनाओं की जांच के बाद एकता को एमबीबीएस अध्ययन के लिए सिफारिश की थी।
  • चिकित्सा शिक्षा आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री के निर्देशन में अतिरिक्त छात्रवृत्ति कोटे के तहत एकता को एमबीबीएस पढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था।

२० चैत, काठमाडौं। चिकित्सा शिक्षा आयोग के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री बालेन शाह ने चिकित्सा शिक्षा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए जेनजी आन्दोलन में घायल एकता शाह को अतिरिक्त छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है।

यह निर्णय जेनजी आन्दोलन के घटनाक्रम की जांच के लिए गठित गौरीबहादुर कार्की आयोग द्वारा पिछले पुस माह में की गई सिफारिश के आधार पर लिया गया है।

जाँच आयोग का कार्यक्षेत्र केवल घटनाओं की अध्ययन और जांच तक सीमित है। लेकिन आयोग ने तत्कालीन सुशीला कार्की सरकार को पत्र लिखकर एकता को एमबीबीएस अध्ययन के लिए व्यवस्था करने की सिफारिश की थी।

इस पत्र में गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय को भी सूचना दी गई थी। इसी आधार पर सुशीला कार्की सरकार ने चैत १ को मंत्रिपरिषद का निर्णय लेते हुए आयोग को संबंधित दिशा-निर्देश दिया था। अब प्रधानमंत्री बालेन शाह ने चिकित्सा शिक्षा आयोग की बैठक में उक्त निर्देश का पालन करते हुए इस निर्णय को लागू करने का निर्णय लिया है।

चिकित्सा शिक्षा अधिनियम २०७५ के अनुसार मेरिट से बाहर किसी व्यक्ति को दाखिला देने की व्यवस्था नहीं है। जेनजी आन्दोलन में घायल व्यक्तियों की देखभाल सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन मेरिट प्रणाली को उल्लंघन करते हुए लिया गया निर्णय विवादास्पद है।

चिकित्सा शिक्षा सुधारक डॉ. गोविन्द केसी ने कहा कि इस तरह के निर्णय से सुशासन और मेरिट प्रणाली पर संकट आ सकता है।

गुरुवार को हुई आयोग की २४वीं बैठक में जेनजी आन्दोलन में घायल एकता को अतिरिक्त छात्रवृत्ति कोटे में एमबीबीएस अध्ययन की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया। यह निर्णय राजनीति और कानून दोनों का उल्लंघन था।

एमबीबीएस के लिए सीट निर्धारण, प्रवेश परीक्षा, परिणाम प्रकाशन और योग्यता अनुसार छात्रों का चयन होता है।

इस वर्ष ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और छात्र भी चयनित हो चुके हैं। फिर भी अधिनियम का उल्लंघन करते हुए एकता को अतिरिक्त छात्रवृत्ति कोटे में एमबीबीएस पढ़ाने का रास्ता खोल दिया गया है।

आयोग के एक सदस्य के अनुसार प्रधानमंत्री की भूमिका पर प्रश्न उठ रहा है, हालांकि बैठक में प्रधानमंत्री बालेन शाह मौजूद नहीं थे। सह-अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने बैठक की अध्यक्षता की।

बुधवार को आयोग के सदस्यों को प्रधानमंत्री कार्यालय से बैठक के लिए अध्यक्ष का निर्देश मिला था। एक सदस्य ने कहा, ‘‘अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश के बाद ही यह प्रस्ताव बैठक में आया था।’’

एक अन्य सदस्य ने भी कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री के दबाव में हुआ।

‘‘अध्यक्ष के निर्देश के बिना बैठक नहीं बुलाई जाती। भेजे गए पत्र में भी अध्यक्ष की अनुमति स्पष्ट है। प्रधानमंत्री के दबाव के कारण ही यह प्रस्ताव बैठक में लाया गया।’’

सुशीला कार्की सरकार के दौरान मंत्रिपरिषद का निर्णय था जिसे स्वास्थ्य मंत्री और आयोग की सह-अध्यक्ष निशा मेहता ने भी माना।

उन्होंने कहा, ‘‘यह निर्णय पिछली सरकार ने ही ले लिया था। वह प्रस्ताव आयोग की बैठक में रखा गया था।’’

ऐसा प्रस्ताव कानून के विपरीत क्यों लाया गया इस बारे में उन्होंने जवाब देने में असमर्थता जताई। ‘‘समझकर बाद में बताऊंगी।’’

आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अञ्जनीकुमार झा भी मंत्रिपरिषद निर्णय पर चर्चा का उल्लेख कर चुके हैं।

अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव क्यों रखा गया, इस प्रश्न पर वे मौन हैं।

आयोग के सदस्यों का कहना है कि यदि पिछली सरकार इस निर्णय को लागू करने का प्रयास कर रही थी, तो आयोग उसी समय प्रक्रिया को आगे बढ़ाता।

‘‘पिछले निर्णय का पालन अनिवार्य नहीं था। इसे रोका या पुनः समीक्षा किया जा सकता था।’’

‘‘अधिनियम के बाहर का निर्णय स्वीकार्य नहीं’’

आयोग के अनुसार छात्रवृत्ति का वितरण मेरिट और कानूनी मानकों के तहत होना चाहिए। लेकिन जेनजी आन्दोलन में घायल होने के कारण अतिरिक्त सीट देने से मेरिट प्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

राष्ट्रीय चिकित्सा शिक्षा अधिनियम, २०७५ के अनुसार सीट संख्या निर्धारण का अधिकार केवल आयोग के पास है। धारा १७ में उल्लेख है, ‘‘आयोग मापदंडानुसार विश्वविद्यालय, संस्थान एवं शिक्षण संस्थाओं के लिए निर्धारित सीटें तय करेगा।’’

उपधारा (३) में कहा गया है, ‘‘प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों को म्याचिंग प्रणाली अनुसार दाखिला देना अनिवार्य होगा।’’

पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. श्रीकृष्ण गिरी ने कहा कि कानून का उल्लंघन कर किसी को एमबीबीएस छात्रवृत्ति देना उचित नहीं।

‘‘चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कानून स्पष्ट हैं। इनका पालन आयोग का दायित्व है। बाहरी निर्देश से अधिनियम के विपरीत कोई निर्णय नहीं होना चाहिए।’’

चिकित्सा शिक्षा में समान अवसर के लिए मेरिट प्रणाली का कड़ाई से पालन आवश्यक है। ‘‘यदि सरकार कानून उल्लंघन करने की कोशिश करती है तो आयोग के उपाध्यक्ष को इसे रोकना चाहिए। इस प्रकार के कदम प्रणाली में समस्या पैदा करते हैं जिनके दुष्परिणाम होते हैं।’’

चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में पुरानी गलतियों को खत्म करने के लिए २०७५ में कानून लागू किया गया था।

पारदर्शिता, मेरिट और कानूनी प्रक्रिया का पालन दीर्घकालिक समाधान है, ऐसा उनका मानना है।

चिकित्सा शिक्षा सुधारक डॉ. गोविन्द केसी ने भी कहा कि यह निर्णय स्थापित प्रणाली पर प्रश्न उठाता है।

उन्होंने एमबीबीएस समेत सभी विषयों में प्रवेश योग्यता कानूनी क्रम के अनुसार ही होनी चाहिएं, यह स्मरण दिलाते हुए कहा कि नियमों के विपरीत निर्णय विधि शासन की भावना के खिलाफ होगा।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय कानून उल्लंघन है और प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे कानून को न तोड़ें।

जाँच आयोग ने की थी इस प्रकार सिफारिश

सुनसरी की एकता शाह २३ भदौ को जेनजी आन्दोलन के दौरान काठमाडौं के नयाँ बानेश्वर में हुए प्रदर्शन में बाएं घुटने में गोली लगने से घायल हुईं। इसके बावजूद उन्होंने एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा दी और ५७.५ प्रतिशत अंक लेकर नामांकन कराया।

एमबीबीएस में प्रवेश के लिए आयोग की परीक्षा अनिवार्य है, जिसमें उत्तीर्ण होने के बाद ही मेरिट सूची के अनुसार दाखिला प्रक्रिया आगे बढ़ती है, जिसके लिए सीट आयोग निर्धारित करता है।

हालांकि परीक्षा पास करने के बावजूद सीट नहीं मिलने के कारण वह प्रवेश नहीं कर पाईं। उनके पिता ने २७ कात्तिक को प्रधानमंत्री से आर्थिक कारणों से पढ़ाई जारी रखने में असमर्थता व्यक्त करते हुए छात्रवृत्ति की मांग की।

गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व में गठित जांच आयोग ने भदौ २३ और २४ की घटनाओं के संबंध में परिवार से पूछताछ की। इस दौरान एकता के पिता ने अपनी बेटी की इच्छा सरकार के समक्ष रखी। इसी आधार पर आयोग ने सरकार को सिफारिश की।

आयोग ने २८ पुस को प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय को एक सिफारिश पत्र भेजा।

पत्र में कहा गया, ‘‘गोली लगने से घायल एकता को नेपाल मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू हो चुकी हो, तब भी सरकार को भर्ना कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।’’

जेनजी आन्दोलन में हुई हिंसा और घटनाओं की जांच के लिए गठित आयोग ने अपनी अधिकार-सीमा से बाहर जाकर एकता को एमबीबीएस पढ़ाने हेतु प्रधानमंत्री को सिफारिश की।

जाँच आयोग की सिफारिश को ध्यान में रखते हुए १ चैत को मंत्रिपरिषद ने एकता को चिकित्सा शिक्षा पढ़ाने की व्यवस्था करने के लिए आयोग को निर्देशित किया।

शिक्षा मंत्रालय ने ३ चैत को छात्रवृत्ति के लिए आवश्यक धन जुटाने हेतु अर्थ मंत्रालय को पत्र लिखा और अर्थ मंत्रालय ने फागुन १४ को सहमति दी।

आयोग ने चैत १८ को २४वीं बैठक में छात्रवृत्ति प्रदान करने की सिफारिश की।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने सुशीला कार्की को जो सिफारिश की वह उचित नहीं थी, अब बालेन शाह प्रधानमंत्री के माध्यम से इसे लागू करने जा रहे हैं।’’

भक्तपुर में लिच्छविकालीन बिस्केट जात्रा के आयोजन में व्यस्तता

भक्तपुर में विश्वप्रसिद्ध बिस्केट जात्रा चैत २७ तारीख से नौ दिन आठ रात तक तांत्रिक विधि अनुसार मनाई जाएगी। गुठी संस्थान भक्तपुर ने भैरव और भद्रकाली के रथ निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहे होने की जानकारी दी है। जात्रा के अंतिम दिन वैशाख ५ को रथ को पाँचतले मंदिर में रखकर तांत्रिक विधि से पूजा कर जात्रा सम्पन्न करने की परंपरा है। २० चैत, भक्तपुर।

हर नए वर्ष भक्तपुरवासी नौ दिन आठ रात तक पारंपरिक तांत्रिक विधि से मनाने वाली विश्वप्रसिद्ध बिस्केट (बिस्का) जात्रा इस वर्ष चैत २७ शुक्रवार से शुरू हो रही है। नए वर्ष से चार दिन पहले भैरव के रथ खींचकर शुरू होने वाली यह जात्रा मुख्यतः चैत मसांत में इन्द्रध्वजा सहित लिंगो उठाने और वैशाख १ को दिन भर ल्यासिंखेल में लिंगो जात्रा मनाकर शाम को लिंगो उतारकर समाप्त की जाती है।

गुठी संस्थान भक्तपुर कार्यालय ने जात्रा के लिए आवश्यक भैरव और भद्रकाली के रथ निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहे होने की जानकारी दी है। टौमढी स्थित पाँचतले मंदिर प्रांगण में प्यागोडा शैली के तीन तलों वाले रथ का निर्माण तेज गति से हो रहा है, गुठी संस्थान भक्तपुर के प्रमुख आनन्दप्रसाद कर्माचार्य ने बताया। उन्होंने बताया कि भैरव के रथ का निर्माण पूर्ण होने के बाद भद्रकाली के रथ का निर्माण शुरू किया जाएगा। अब तक भैरव रथ निर्माण में विभिन्न आकार के लकड़ियों को तैयार करना, पहियों को जोड़ना, टूटे हुए सामानों की मरम्मत करना, टूटे धुरों की मरम्मत करना, चुकुल बदलना, नए आसी लगाना, छत की मरम्मत और रथ निर्माण का काम तेजी से चल रहा है।

चैत २६ तक रथ में रंग-रोगन तथा शोभा सजावट का कार्य किया जाएगा और २७ तारीख को सरकारी पूजा सुबह ११ बजे होगी, जनता के लिए पूजा दोपहर तीन बजे तक समाप्‍त करने के बाद दोपहर तीन बजे से रथ खींचना शुरू किया जाएगा, ऐसी तैयारी है, प्रमुख कर्माचार्य ने बताया। उन्होंने कहा, ‘रथ खींचने के लिए ठेकेदार को ९० हाथ लंबे मजबूत और बहुत सख्त रस्सी लाने का निर्देश दिया है, जात्रा व्यवस्थापन समिति की टीम भी रस्सी का परीक्षण करेगी। ५५ हाथ लंबे और नांगले जैसे चौड़े दो लिंगो बनाए गए हैं। इस वर्ष २७ तारीख को भैरव के रथ को दोपहर ३ बजे खींचकर जात्रा की शुरुआत करने की तैयारी की गई है।’

नवनिर्वाचित सभामुख डोलप्रसाद अर्याल रविवार को शपथ ग्रहण के लिए तैयार

२० चैत, काठमांडू । प्रतिनिधि सभा के नवनिर्वाचित सभामुख डोलप्रसाद अर्याल (डीपी) रविवार (चैत २२) को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने वाले हैं। राष्ट्रपति कार्यालय शीतल निवास से मिली जानकारी के अनुसार, उनका शपथ ग्रहण समारोह रविवार दोपहर साढ़े २ बजे निर्धारित किया गया है।

सभामुख अर्याल का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में आयोजित होगा। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शुक्रवार को संपन्न सभामुख पद के नामांकन के दौरान अर्याल अकेले उम्मीदवार थे और इस कारण निर्विरोध चुने गए हैं।

प्रधानमन्त्री शाहको प्रेस विज्ञमा दाहाल नियुक्त – Online Khabar

प्रधानमंत्री शाह के प्रेस विज्ञ में दीपा दाहाल की नियुक्ति

२० चैत्र, काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) के प्रेस एवं अनुसंधान विज्ञ पद पर पत्रकार एवं लेखिका दीपा दाहाल को नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री के सलाहकार और सचिवालय प्रबंधन कार्यविधि, २०७४ के अनुसार, दीपा दाहाल को शुक्रवार इस जिम्मेदारी का दायित्व सौंपा गया। दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता और अकादमिक क्षेत्रों में सक्रिय दाहाल ने शुक्रवार से अपना कार्यभार ग्रहण किया है।

दाहाल प्रधानमंत्री शाह की संचार रणनीति, मीडिया और अनुसंधान कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। भ्रष्टाचार नियंत्रण, सुशासन और सामाजिक न्याय से जुड़ी उनकी पत्रकारिता के अनुभव को सरकार की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए यह नियुक्ति की गई है। दीपा दाहाल के पास रेडियो, टेलीविजन, प्रिंट और ऑनलाइन संस्थानों में २० वर्षों से अधिक व्यावसायिक पत्रकारिता का समृद्ध अनुभव है।

हाल ही में वह उकालो डट कॉम में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में खोज पत्रकारिता कर रही थीं। वे त्रिभुवन विश्वविद्यालय के अंतर्गत पद्मकन्या बहुमुखी कैंपस में पिछले सात वर्षों से पत्रकारिता पढ़ा रही हैं और पत्रकारिता, संचार कौशल तथा मौलिक नेतृत्व (अथेंटिक लीडरशिप) विषयों की प्रशिक्षक भी हैं। दीपा दाहाल ने ‘कोविड: नसोचा, न भुगता संकट’ नामक अनुसंधानात्मक पुस्तक भी लिखी है।

बिस्केट जात्राको तैयारी तेजी से आगे बढ़ रही है

समाचार सारांश

AI द्वारा निर्मित। संपादकीय समीक्षा की गई।

  • भक्तपुर में नौ दिन आठ रात तक चलने वाले ऐतिहासिक बिस्केट जात्रा की तैयारी तेजी से चल रही है।
  • चैत्र २७ से शुरू होने वाले जात्रा में भैरव और भद्रकाली के रथ निर्माण कार्य चैत्र २६ तक पूरा किए जाएंगे, यह जानकारी प्रेम सिल्पकार ने दी।
  • जात्रा के अंतिम दिन वैशाख ५ को, भैरव के रथ को दो सौ फुट लंबी चार-चार डोरियों से बांधकर टोल के निवासी दोनों तरफ से तान कर अपने-अपने टोलों में लेकर उत्सव मनाने की परंपरा है।

२० चैत्र, काठमांडू। भक्तपुर में नौ दिन आठ रात तक आयोजित होने वाली ऐतिहासिक बिस्केट जात्रा की तैयारी तेजी से आगे बढ़ रही है।

जात्रा के लिए भक्तपुर के टौमढी में स्थित पाँचतले मंदिर प्रांगण में भैरव और भद्रकाली के रथ निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है।

हर नए वर्ष भक्तपुरवासी परंपरागत तांत्रिक विधि अनुसार नौ दिन आठ रात तक मनाने वाली बिस्केट जात्रा इस वर्ष चैत्र २७ से प्रारंभ होगी।

नए वर्ष के चार दिन पूर्व भैरव के रथ को तानकर शुरू होने वाली जात्रा मुख्य रूप से चैत्र के अंत में इन्द्रध्वज सहित लिंगो उठाने की परंपरा से जुड़ी है और वैशाख १ को लिंगो जात्रा लासिंग्खेल में मनाने के बाद शाम को लिंगो तोड़कर जात्रा का समापन किया जाता है।

जात्रा के लिए भैरव और भद्रकाली के रथ निर्माण कार्य चैत्र २६ तक पूरा किया जाएगा, यह जानकारी रथ निर्माता प्रेम सिल्पकार ने दी है।

चैत्र २७ की दोपहर तांत्रिक विधि अनुसार भैरवनाथ के रथ पर खड़्ग, तरवार और निशान स्थापित होने के बाद अपराह्न से रथ तानने की परंपरा चलती है।

वैसे ही, वैशाख ५ को जात्रा के अंतिम दिन, शुरुआती दिन की तरह प्रसिद्ध पाँचतले मंदिर के टौमढी टोल से भैरव के रथ को दो सौ फुट लंबी चार-चार डोरियों से बांधकर निचले और ऊपरी टोल के निवासी दोनों तरफ से तानकर अपने-अपने टोलों में लेकर जाने की परंपरागत उत्सव मनाई जाती है।

गौतमश्री बहुउदेशीय सहकारी का व्यवस्थापक रवीन बिष्ट गिरफ्तार

काठमाडौं के कुलेश्वर में स्थित गौतमश्री बहुउदेशीय सहकारी संस्था के व्यवस्थापक रवीन बिष्ट को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें आगे की जांच के लिए जिल्ला प्रहरी परिसर, काठमाडौं भेजा गया है। रवीन बिष्ट पर लगभग साढ़े पांच अरब रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है और काठमांडू जिल्ला अदालत से समय लेकर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

२० चैत, काठमाडौं। कुलेश्वर स्थित गौतमश्री बहुउदेशीय सहकारी संस्था लिमिटेड के व्यवस्थापक को गिरफ्तार किया गया है। पाँचथर के फिदिम नगरपालिका–४ के निवासी ४१ वर्षीय रवीन बिष्ट को पुलिस ने नियंत्रण में लिया है। काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय की टीम ने उन्हें काठमांडू से गिरफ्तार किया है। अपराध अनुसन्धान कार्यालय के एसपी मनोहर भट्ट ने बताया कि उन्हें आगे की जांच के लिए जिल्ला प्रहरी परिसर, काठमांडू भेजा गया है।

गिरफ्तार रवीन बिष्ट के खिलाफ काठमांडू जिल्ला अदालत से समय लेकर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उस सहकारी संस्था पर लगभग साढ़े पाँच अरब रुपये से अधिक की राशि की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

युद्धका कारण ३८ जना नेपालीको शव ल्याउन समस्या – Online Khabar

युद्ध के कारण ३८ नेपाली शवों को लौटाने में समस्या


२० चैत, काठमाडौं । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण ३८ नेपाली नागरिकों के शवों को वापस लाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इज़राइल–अमेरिका और ईरान के बीच द्वंद्व के चलते खाड़ी क्षेत्र सहित पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों से ३८ नेपाली शवों को लाने में समस्या उत्पन्न हुई है।

विभिन्न कारणों से निधन वाले इन व्यक्तियों के शव हवाई मार्ग से लाने में अवरोध आ जाने के कारण यह समस्या आई है, ऐसा विदेश मंत्रालय ने बताया है।

शव लाने के लिए आवश्यक प्रयास जारी हैं और शीघ्र ही शव नेपाल लाए जाएंगे, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल क्षेत्री ने जानकारी दी।

सऊदी अरब में १७, संयुक्त अरब अमीरात में १५, कतर में २, बहरीन में १ और इज़राइल (२ साइप्रस और १ इज़राइल) में कुल ३ नेपाली शव रोके गए हैं। इन शवों को नेपाल लाने के प्रयास चल रहे हैं, प्रवक्ता पौडेल ने स्पष्ट किया।

दूसरी ओर, चैत १८ गते कुवैत से ९ नेपाली शव लाए गए थे। कुवैत एयरवेज की उड़ान के माध्यम से ये ९ शव और २९१ यात्री भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अन्तरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरे।

कपिलवस्तु में मिलने वाला व्रत का चावल ‘तिन्ना’

कपिलवस्तु जिले के कृष्णनगर नगरपालिकांतर्गत अजिगरा ताल क्षेत्र तिन्ना चावल उत्पादन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इसे लाल जंगली चावल भी कहा जाता है। यह खासतौर पर दलदली जमीन में पाया जाने वाला चावल है। अंग्रेज़ी में इसे ‘Red Wild Rice’ कहा जाता है जबकि इसका वैज्ञानिक नाम ‘Oryza rufipogon’ है। यह चावल उच्च फाइबर, प्रोटीन, खनिज और कार्बोहाइड्रेट युक्त होता है। साथ ही यह ग्लूटेन मुक्त तथा बिना पॉलिश किया गया आयरन युक्त अनाज है, जो प्राकृतिक रूप से दलदली क्षेत्र में उगता है। इसे मुख्यतः सात्विक और फाइबरयुक्त भोजन के रूप में माना जाता है। प्राकृतिक तालाब पारिस्थितिकी तंत्र में वृद्धि करता है और प्रायः कीटनाशक, रसायनिक पदार्थ या सिंचित उर्वरकों का उपयोग नहीं होने के कारण यह बिलकुल शुद्ध रहता है। यह डिटॉक्सीफिकेशन और स्वास्थ्य के लिए उपवास आहार में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है।

तिन्ना चावल एक दुर्लभ और पौष्टिक जंगली लाल रंग का चावल है। विशेषकर हिन्दू त्योहारों जैसे छठ, हरितालिका तीज, ऋषि पंचमी, एकादशी आदि पर व्रती लोग इसे पकाकर चावल के रूप में खाते हैं। इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो रक्त में चीनी की मात्रा नियंत्रण में मदद करता है। इसका रंग गहरा लाल भूरा से लेकर तीव्र गहरा लाल रंग तक फैला होता है और कभी-कभी मिट्टी या नटी की खुशबू भी आती है। यह रंग चोकर तह में पाए जाने वाले प्राकृतिक एंथोसायनिन पिगमेंट्स के कारण उत्पन्न होता है। पकाते समय यह लाल भूरा और टोनो रंग तीव्र दिखाई देता है।

स्थानीय किसान राम विलास यादव के अनुसार तिन्ना चावल को तिन्नी, तिनिया और तुम्बा सहित कई अन्य नामों से जाना जाता है। यह चावल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्टूबर से दिसंबर तक सिमसार के आसपास के स्थानीय लोग इसे जंगल से इकट्ठा करते हैं और इसे प्रायः ‘व्रत का चावल’ कहा जाता है। तिन्ना चावल नेपाल के ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक विविधता और सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाजार में इसकी मांग बढ़ने पर कपिलवस्तु के किसान ताल के आसपास खेती भी करने लगे हैं। वर्तमान में इस चावल की कीमत कपिलवस्तु बाजार में प्रति किलो 230 रुपये तक पहुंच चुकी है।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय के वनस्पति शास्त्री प्रो. डॉ. मोहन प्रसाद देवाकोटा के साक्षात्कार में बताया गया कि तिन्ना चावल घास वाले मैदान, दलदली क्षेत्र, कृत्रिम स्थलीय और जलीय स्थानों तथा समुद्री क्षेत्रों में बढ़ता है। तिन्ना या लाल चावल को 2017 में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने खतरे की रेड लिस्ट में शामिल किया था। तथापि इसे सबसे कम चिंता वाली श्रेणी में रखा गया है, जो इस प्रजाति पर कोई बड़ा खतरा नहीं होने का संकेत है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार तिन्ना चावल नेपाल के अलावा ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन (जियांग्सू, हुनान, गुआंगशी, ग्वांगडोंग, युन्नान), कोलम्बिया, इक्वाडोर, गुयाना, हांगकांग, भारत के विभिन्न राज्यों, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, पपुआ न्यू गिनी, फिलिपीन, श्रीलंका, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम में भी पाया जाता है।

गेटा अस्पताल और पाठ्यपुस्तक मुद्रण में शिक्षा मंत्री पोखरेल की रुचि

समाचार सारांश

समीक्षात्मक रूप से तैयार।

  • शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र लिमिटेड और चिकित्सा शिक्षा आयोग का स्थलीय निरीक्षण किया।
  • मंत्री पोखरेल ने दोनों सरकारी संस्थानों को सरकार द्वारा आवश्यक सहयोग और सुविधाएं प्रदान करने का आश्वासन दिया।
  • पोखरेल ने कैलाली स्थित गेटा अस्पताल को गेटा विश्वविद्यालय संचालित करने के लिए कानूनी बाधाएं हटाने के निर्देश दिए।

21 चैत, काठमांडू । शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र लिमिटेड और चिकित्सा शिक्षा आयोग का स्थलीय निरीक्षण किया है।

मंत्री पोखरेल की टीम ने आज भक्तपुर के सानोठिमी स्थित इन दोनों कार्यालयों का अवलोकन भ्रमण किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री पोखरेल ने इन संस्थानों को सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग और सुविधाएं प्रदान करने का संकल्प व्यक्त किया।

उन्होंने सहयोग और सहकार के संभावित क्षेत्रों को पहचाने जाने तथा समन्वय के साथ आगे बढ़ने पर विश्वास भी जताया।

अपने वक्तव्य में मंत्री पोखरेल ने कहा, ‘इन दोनों सरकारी संस्थानों को और अधिक सहयोग व सहकार दिया जाएगा। मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को बैठकों के माध्यम से समझदारी बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।’

पोखरेल ने जनक शिक्षा केंद्र में पुस्तक मुद्रण सहित अन्य संरचनाओं का निरीक्षण किया और केंद्र की समग्र स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने समय पर पुस्तकें छाप कर छात्रों तक पहुंचाने का निर्देश भी दिया।

साथ ही मंत्री पोखरेल ने चिकित्सा शिक्षा आयोग की स्थिति और गतिविधियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने गेटा अस्पताल कैलाली को गेटा विश्वविद्यालय संचालित करने के लिए कानूनी अड़चनें दूर करने के निर्देश दिए तथा शीघ्र कार्रवाई करने पर जोर दिया।

इन दोनों संस्थानों के अधिकारीयों ने उनकी वर्तमान स्थिति, गतिविधियां और आगामी कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं।