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लेखक: space4knews

समूह ‘जी’: अप्रत्याशित परिणाम दिए सक्ने समूह

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • फीफा विश्वकप 2026 के समूह ‘जी’ में बेल्जियम, मिस्र, ईरान और न्यूजीलैंड शामिल हैं।
  • इस समूह को अनुभव, रणनीति और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा माना जा रहा है।
  • बेल्जियम के कोच रुडी गार्सिया आक्रामक खेल शैली अपनाकर ट्रॉफी जीतने का प्रयास कर रहे हैं।

6 जेठ, काठमांडू। फीफा विश्वकप 2026 के तहत समूह ‘जी’ में बेल्जियम, मिस्र, ईरान और न्यूजीलैंड शामिल हैं। इस समूह को अनुभव, रणनीति और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा माना जा रहा है।

यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ओशिनिया के चार अलग-अलग शैली के दल एक ही समूह में होने की वजह से प्रतिस्पर्धा बहुत ही रोचक होने वाली है।

समूह का स्पष्ट फेवरेट बेल्जियम है, लेकिन मोहम्मद सलाह के नेतृत्व में मिस्र, हमेशा अनुशासित और मजबूत प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले ईरान, और लंबे अंतराल के बाद विश्वकप में लौटे न्यूजीलैंड ने समूह को खुला बनाया है।

शीर्ष स्थान के लिए बेल्जियम अग्रणी दिखता है, फिर भी दूसरे स्थान की लड़ाई अंतिम मैच तक जारी रहने का अनुमान है।

बेल्जियम

पिछले एक दशक में बेल्जियम की ‘गोल्डेन जेनरेशन’ ने विश्वकप ट्रॉफी का सवाल हमेशा उठाए रखा, लेकिन वह ट्रॉफी जीतने में सफल नहीं हो पाई। अब 2026 में बेल्जियम एक नए ‘ट्रांजिशन फेज’ में है।

केविन डी ब्रूइने और रोमेलु लुकाकू जैसे अनुभवी खिलाड़ी अंतिम विश्वकप में हैं, वहीं जैरेमिक डोकू, लोइस ओपेंडा और चार्ल्स डी केटेलायर जैसे युवा सितारे टीम की नई ऊर्जा हैं।

कोच रुडी गार्सिया 4-3-3 और 4-2-3-1 के बीच आसानी से परिवर्तन करते हुए आक्रामक, हाई प्रेसिंग स्टाइल अपना रहे हैं। पहले हमेशा उपाधि के अंडरडॉग रहे बेल्जियम इस बार अलग तरीके से खेलने की कोशिश करेगा।

सर्वश्रेष्ठ परिणाम – तीसरा स्थान (2018), अंतिम भागीदारी – 2022

मिस्र

मिस्र अपनी इतिहास में चौथी बार और 2018 के बाद पहली बार विश्वकप में लौटा है। कोच हुसाम हसन के लिए यह खास यात्रा है, क्योंकि वे खिलाड़ी और कोच दोनों के रूप में मिस्र को विश्वकप में पहुँचाने वाले पहले व्यक्ति हैं।

चयन में 10 मैच अपराजित रहते हुए केवल दो गोल खाए मिस्र ने अपनी ताकत दिखाई। टीम का ढांचा रक्षात्मक अनुशासन पर आधारित है, जहाँ मोहम्मद सलाह और उमर मरमाउश को काउंटर अटैक में प्रयोग किया जाता है।

जब हमला तालमेल में होगा, तो मिस्र समूह की सबसे बड़ी ‘अपसेट’ टीम बन सकती है।

सर्वश्रेष्ठ परिणाम – समूह चरण (1934, 1990, 2018), अंतिम भागीदारी – 2018

ईरान

ईरान लगातार चौथे विश्वकप में खेल रहा है और एशिया की सबसे स्थिर टीमों में से एक माना जाता है। कोच अमीर घालेनोई की टीम ने क्वालिफिकेशन में 16 मैचों में केवल एक मैच खोया है, जो उनकी निरंतरता दिखाता है।

महेदी तरीमी टीम के मुख्य गोलस्कोरर और आक्रमण के केंद्र हैं। लेकिन सरदार अजमुन के अनुपस्थिति में टीम के आक्रमण पर दबाव बढ़ा है। ईरान की खेलने की शैली पूरी तरह परिणाममुखी है।

रक्षात्मक अनुशासन, मजबूत मिडफील्ड और तेज काउंटर अटैक इसके मुख्य हथियार हैं। रचनात्मकता सीमित होने के बावजूद, मुश्किल मैचों में ईरान को हराना आसान नहीं होता।

सर्वश्रेष्ठ परिणाम – समूह चरण, अंतिम भागीदारी – 2022

न्यूजीलैंड

‘ऑल व्हाइट्स’ यानी न्यूजीलैंड 2010 के बाद पहली बार विश्वकप में लौटा है। ओशिनिया में क्वालिफिकेशन में पूरी दबदबा बनाकर न्यूजीलैंड ने सभी पांच मैच जीते और केवल एक गोल खाया।

कोच डैरेन बाजली की टीम शारीरिक ताकत, संगठन और कप्तान क्रिस वुड की व्यक्तिगत क्षमताओं पर निर्भर है। 2010 में तीनों मैच ड्रॉ लेकर अपराजित रहना इसकी विश्वकप इतिहास की बड़ी उपलब्धि है।

इस बार भी न्यूजीलैंड की रणनीति रक्षात्मक ब्लॉक और सीधा हमला होगी। कमजोर समझे जाने के बावजूद बिना दबाव खेले वो खतरनाक हो सकते हैं।

सर्वश्रेष्ठ परिणाम – समूह चरण (1982, 2010), अंतिम भागीदारी – 2010

तेल र ग्यासको अभावको खबरबारे हिन्दुस्तान पेट्रोलियमले के भन्यो ?

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम ने इंधन व गैस की कमी के समाचारों को खारिज किया

७ जेठ, काठमाडौं । भारत की प्रमुख तेल कंपनियों में से एक हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने देशभर में इंधन और गैस की कमी होने संबंधी खबरों को खारिज कर दिया है। कंपनी ने अपने रिटेल बिक्री केन्द्रों पर आपूर्ति में कोई समस्या नहीं होने की स्पष्ट जानकारी दी है। एचपीसीएल ने बताया कि उसका संचालन पूरी तरह से सामान्य है और कार्य में कोई बाधा नहीं आई है।

ईरान संकट के कारण देश में तेल और गैस आपूर्ति में कमी आई है तथा देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोग गैस की कमी का सामना कर रहे हैं, ऐसी खबरें सामने आई थीं। लेकिन एचपीसीएल ने इन इंधन कमी संबंधी खबरों को भ्रामक बताया है। कंपनी ने सामाजिक संचार माध्यम प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘एचपीसीएल स्पष्ट करना चाहता है कि इंधन की कमी और आपूर्ति में कोई बाधा होने की रिपोर्टें भ्रामक हैं और वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करतीं।’

कंपनी ने आगे कहा, ‘एचपीसीएल के रिटेल आउटलेट्स में इंधन की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य है और नियमित रूप से पुनः भरण कर निर्बाध संचालन हो रहा है।’ साथ ही, ‘कुछ स्थानों पर ग्राहकों की ज्यादा भीड़ होना और लाइन लगना मुख्य रूप से मई माह में होने वाली मौसमी मांग में वृद्धि से जुड़ा है,’ संदेश में उल्लेख है। ‘इसके अलावा, कई ग्राहक एचपीसीएल के रिटेल आउटलेट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि कुछ निजी आउटलेट्स में इंधन अपेक्षाकृत महंगे दामों पर बिक्री हो रहा है।’

बागमती और गण्डकी प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर, मधेस प्रदेश कमजोर

राष्ट्रीय तथ्यांक कार्यालय ने चालू आर्थिक वर्ष २०७९/८० में बागमती और गण्डकी प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रहने का अनुमान लगाया है। बागमती प्रदेश देश के कुल घरेलू उत्पादन में ३६.७ प्रतिशत हिस्सा लेकर सबसे अधिक आर्थिक योगदान देगा। चालू वर्ष में बागमती प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय २६४४ अमेरिकी डॉलर और मधेस प्रदेश की ९३४ अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान कार्यालय ने सार्वजनिक किया है। ६ जेठ, काठमाडौं।

चालू आर्थिक वर्ष २०७९/८० में बागमती और गण्डकी प्रदेश की आर्थिक वृद्धि राष्ट्रीय औसत से ऊपर रहने की स्थिति प्रकट होती है। राष्ट्रीय तथ्यांक कार्यालय ने बुधवार को प्रकाशित प्रादेशिक लेखा तथ्यांक अनुमान अनुसार बागमती की आर्थिक वृद्धि दर सबसे अधिक ५.४० प्रतिशत रहने का अनुमान है। गण्डकी की वृद्धि दर ५.०१ प्रतिशत रहने की अपेक्षा की गई है। राष्ट्रीय कुल घरेलू उत्पादन वार्षिक वृद्धि दर का प्रारंभिक अनुमान ३.८५ प्रतिशत है। इस आधार पर बागमती और गण्डकी के आर्थिक वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर होंगे। अन्य प्रदेशों में सबसे कमजोर वृद्धि दर मधेस प्रदेश की रहने की जानकारी कार्यालय के उपप्रमुख तथ्यांक अधिकारी एवं प्रवक्ता ढुण्डीराज लामिछाने ने दी।

मधेस की आर्थिक वृद्धि दर केवल १.३१ प्रतिशत रहने का अनुमान है। अन्य प्रदेशों में कोशी ३.१३, लुम्बिनी २.८७, कर्णाली २.९४ और सुदूरपश्चिम ३.२८ प्रतिशत वृद्धि दर रहने की जानकारी कार्यालय ने दी है। इस वर्ष कोशी, बागमती, गण्डकी और सुदूरपश्चिम प्रदेशों की आर्थिक वृद्धि दर पिछले वर्ष की तुलना में सुधरी है। बागमती को छोड़कर अन्य सभी प्रदेशों में कृषि क्षेत्र का योगदान अधिक है, जबकि बागमती प्रदेश में थोक एवं खुदरा व्यापार गतिविधि का योगदान अधिक है।

बागमती में प्रति व्यक्ति आय २६४४ डॉलर और मधेस में ९३४ डॉलर है। राष्ट्रीय औसत प्रति व्यक्ति आय १५१३ अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान है। प्रदेशवार देखें तो सबसे अधिक बागमती प्रदेश में है। इसी तरह गण्डकी प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय १६५१, कोशी १४१०, लुम्बिनी १२८०, सुदूरपश्चिम ११७०, कर्णाली ११८० और मधेस प्रदेश की मात्र ९३४ अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान सार्वजनिक किया गया है।

आजका तरकारी र फलफूलहरूको थोक मूल्य

७ जेठ, काठमाडौं । कालीमाटी फलफूल तथा तरकारी बजार विकास समितिले आजका लागि कृषिउपजहरूको अधिकतम थोक मूल्य तय गरेको छ । समितिका अनुसार, गोलभेँडा ठूलो (नेपाली) प्रतिकिलो ७५, गोलभेँडा ठूलो (भारतीय) प्रतिकिलो ८०, गोलभेँडा सानो (लोकल) प्रतिकिलो ५५, गोलभेँडा सानो (भारतीय) प्रतिकिलो ६०, गोलभेँडा सानो (तराई) प्रतिकिलो ५०, गोलभेँडा साना (टनेल) ७८, आलु रातो (लाम्चो) प्रतिकिलो ३२, आलु रातो (गोलो) प्रतिकिलो २५ र प्याज सुकेको (भारतीय) प्रतिकिलो ३७ रहेको छ । साथै गाजर (लोकल) प्रतिकिलो ६०, बन्दा (लोकल) प्रतिकिलो ४०, काउली स्थानीय प्रतिकिलो ५०, सेतो मूला (हाइब्रिड) प्रतिकिलो ३०, भन्टा लाम्चो प्रतिकिलो ४५ र भन्टा डल्लो प्रतिकिलो ५० कायम गरिएको छ ।

त्यसैगरी, बोडी (तने) प्रतिकिलो ४०, मकै बोडी प्रतिकिलो ९०, घिउ सिमी (लोकल) प्रतिकिलो ८०, घिउ सिमी (हाइब्रिड) प्रतिकिलो ७०, घिउ सिमी (राजमा) प्रतिकिलो ११०, भटमास कोसा प्रतिकिलो १३०, तीते करेला प्रतिकिलो ६०, लौका प्रतिकिलो ४५, परवर (लोकल) प्रतिकिलो ५०, परवर (तराई) प्रतिकिलो ४५ रुपैयाँ रहेको छ । चिचिन्डो प्रतिकिलो ४०, घिरौँला प्रतिकिलो ४५, झिगुनी प्रतिकिलो ६०, फर्सी पकाएको प्रतिकिलो ६०, हरियो फर्सी (लाम्चो) प्रतिकिलो ४०, हरियो फर्सी (डल्लो) प्रतिकिलो ३५, सखरखण्ड प्रतिकिलो ७०, भिन्डी प्रतिकिलो ४० र पिँडालु प्रतिकिलो ५० निश्चित गरिएको छ ।

रायोसाग प्रतिकिलो ९०, पालुङ्गो प्रतिकिलो १२०, तोरीसाग प्रतिकिलो ४०, चमसुरको साग प्रतिकिलो १२०, मेथीको साग प्रतिकिलो ११०, हरियो प्याज प्रतिकिलो १५०, च्याउ (कन्य) प्रतिकिलो १८०, च्याउ (डल्ले) प्रतिकिलो ३५०, राजा च्याउ प्रतिकिलो ३०० र सिताके च्याउ प्रतिकिलो १,००० निर्धारण गरिएको छ । कुरिलो प्रतिकिलो ३३०, ब्रोकाउली प्रतिकिलो १००, चुकुन्दर प्रतिकिलो ६०, निगुरो प्रतिकिलो ८०, रातो बन्दा प्रतिकिलो ५०, सजीवन प्रतिकिलो १२०, जिरीको साग प्रतिकिलो १००, पार्सले प्रतिकिलो ३००, सेलरी प्रतिकिलो १३०, सौफको साग प्रतिकिलो १००, पुदिना प्रतिकिलो १००, गान्टेमुला प्रतिकिलो ६०, इमली प्रतिकिलो १८०, तामा प्रतिकिलो १५०, तोफु प्रतिकिलो १५० र गुन्द्रुक प्रतिकिलो ३०० तोकिएको छ ।

स्याउ (झोले) प्रतिकिलो २३०, स्याउ (फुजी) प्रतिकिलो ३००, कागती प्रतिकिलो २८०, केरा (मालभोग) दर्जन २२०, केरा (नेपाली) २००, अनार प्रतिकिलो ४५०, आँप (दसहरी) प्रतिकिलो , अङ्गुर (हरियो) प्रतिकिलो ३२०, तरबुजा (हरियो) प्रतिकिलो ३८ रुपैयाँ तोकिएको छ । भुइँकटहर प्रतिगोटा २३०, काँक्रो (लोकल) प्रतिकिलो ६०, काँक्रो (हाइब्रिड) प्रतिकिलो ३०, काँक्रो (लोकलक्रस) प्रतिकिलो ५०, खकटहर प्रतिकिलो ७०, मेवा (नेपाली) प्रतिकिलो ९०, मेवा (भारतीय) प्रतिकिलो १०० र एभोकाडो प्रतिकिलो ८०० निर्धारण गरिएको छ । यसैगरी, अदुवा प्रतिकिलो १८०, सुकेको खुर्सानी प्रतिकिलो ४३०, खुर्सानी हरियो (लाम्चो) प्रतिकिलो १००, खुर्सानी हरियो (बुलेट) प्रतिकिलो ९०, माछे खुर्सानी प्रतिकिलो ७०, भेडेखुर्सानी प्रतिकिलो ८०, हरियो लसुन प्रतिकिलो २००, हरियो धनियाँ प्रतिकिलो १२० रुपैयाँ रहेको छ । लसुन सुकेको (चाइनिज) प्रतिकिलो १९०, लसुन सुकेको (नेपाली) प्रतिकिलो १२०, छ्यापी सुकेको प्रतिकिलो १४०, माछा (रहु) प्रतिकिलो ३३०, ताजा माछा (बचुवा) प्रतिकिलो ३१० र ताजा माछा (छडी) प्रतिकिलो २६० निर्धारण गरिएको छ ।

इरान युद्ध में अमेरिका के 42 हवाई जहाज और ड्रोन नष्ट, साढ़े 4 खरब खर्च

समाचार सारांश

समीक्षा के बाद प्रस्तुत।

  • इरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी’ में अमेरिकी सेना के 42 विमान और ड्रोन नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
  • अमेरिका और इज़राइल ने इरान में तख्तापलट की योजना बनाई थी, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद को नेता के रूप में आगे बढ़ाने का इरादा था।
  • अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य शक्ति सीमित करने का प्रस्ताव 50-47 मत से पारित किया है, जिससे युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की अनुमति आवश्यक होगी।

7 जेठ, काठमांडू । इरान के खिलाफ संचालित ‘ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी’ में अमेरिका ने भारी हवाई नुक़सान उठाया है। अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध में अमेरिकी सेना के 42 एयरक्राफ्ट और ड्रोन नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने पहले ही यह जानकारी दी है कि इस युद्ध में कुल 4.5 खरब रुपये से अधिक खर्च हो चुका है।

किस-किस विमान को नुकसान पहुंचा?

जो विमान नष्ट हुए उनमें 6 लड़ाकू और हमला जेट शामिल हैं, जिनमें एक एफ-35, चार एफ-15ई स्ट्राइक ईगल और एक ए-10 थंडरबोल्ट-2 शामिल हैं। अप्रैल के शुरू में इरान ने अमेरिका का एक एफ-15ई जेट गिरा दिया था।

सबसे अधिक नुकसान ड्रोन की ओर हुआ है। कुल 25 ड्रोन नष्ट हुए हैं, जिनमें 24 एमक्यू-9 रिपर और एक एमक्यू-4सी ट्राइटन शामिल है। इसके अलावा अन्य 11 विमान भी पूरी तरह से नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं।

इरान में तख्तापलट की योजना
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल ने केवल इरान की परमाणु तथा क्षेप्यास्त्र क्षमताओं को कमजोर करने के लिए ही युद्ध नहीं किया, बल्कि उनका उद्देश्य तख्तापलट करना भी था।

नई सरकार के रूप में इरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई थी। युद्ध के पहले दिन इज़राइल ने तेहरान स्थित अहमदीनेजाद के घर के पास हमला किया था। इसका मकसद उन्हें नजरबंदी से मुक्त करना था, लेकिन वह बच गए।

उसके बाद इज़राइल और अमेरिका ने तख्तापलट की योजना से पीछे हटना शुरू कर दिया। इरानी सेना और सर्वोच्च नेतृत्व के साथ बिगड़ते संबंधों के कारण अहमदीनेजाद कई वर्षों से नजरबंदी में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, तख्तापलट की तीन चरणों की योजना बनाई गई थी। पहले चरण में लगातार हवाई हमले करना, इरान के सर्वोच्च नेताओं को निशाना बनाना और कुर्द लड़ाकों को सक्रिय करना अमेरिकी रणनीति थी।

दूसरे चरण में, इज़राइल ने अराजकता और युद्ध का माहौल पैदा करने की योजना बनाई ताकि इरानी सत्ता नियंत्रण खोती दिखे। तीसरे चरण में पूर्वाधार को नुकसान पहुंचाना, गैस और बिजली की आपूर्ति रोक कर राजनीतिक दबाव बढ़ाना और अंत में अहमदीनेजाद को सत्ता में लाना शामिल था।

इसी बीच, अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य शक्ति को सीमित करने का प्रस्ताव 50-47 मत से पारित कर दिया है। चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी ट्रंप के खिलाफ मतदान किया। अगर यह कानून बन जाता है तो ट्रंप को इरान के विरुद्ध युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की अनुमति लेनी होगी।

वहीं, अमेरिकी कोस्टगार्ड अकादमी में भाषण देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इरान की नौसेना और वायु सेना लगभग नष्ट हो चुकी हैं। अब केवल कार्रवाई पूरी करने या इरान के साथ समझौता करने का विकल्प बचा है, उन्होंने कहा।

(एजेंसियों के सहयोग से)

चीन के अनुदान से अरनिको राजमार्ग की ‘गंभीर’ स्थिति में सुधार संभव?

अरनिको राजमार्ग के भू-स्खलन प्रभावित स्थल

तस्वीर स्रोत, Narayan Dutta Bhandari

चीन सरकार द्वारा लगभग 1 अरब 80 करोड़ रुपये के अनुदान से 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद गंभीर समस्या से जूझ रहे अरनिको राजमार्ग पर 200 मीटर लंबे भू-स्खलन को रोका जाएगा, ऐसा नेपाल के अधिकारियों ने बताया है।

मंत्रिपरिषद की बैठक में मंगलवार को अरनिको राजमार्ग की मरम्मत और सुधार के लिए चीन सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले 79.36 मिलियन आरएमबी (लगभग 1 अरब 79 करोड़ 80 लाख रुपये) के अनुदान को स्वीकार करने का निर्णय लिया गया।

लगभग दो सौ मीटर लंबे भू-स्खलन को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने इसी वित्तीय वर्ष में अपने संसाधनों से ठेका दिया था, लेकिन चीन के अनुदान मिलने के बाद इसे प्रतिस्थापित किया जाएगा, सड़क विभाग के एक अधिकारी ने बताया।

2015 के विनाशकारी भूकंप से सड़क और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे नेपाल-चीन के प्रमुख व्यापार मार्ग तातोपानी नाके पर ट्रैफिक सुस्त हो गया और दस हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए, साथ ही कुछ जोखिम वाले क्षेत्रों में लोग अब भी रह रहे हैं, एक स्थानीय जनप्रतिनिधि ने बताया।

पिछले महीने चीन और नेपाल ने काठमांडू के चक्रपथ के दूसरे चरण के विस्तार के लिए 12 अरब रुपये से अधिक के अनुदान समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

एस्टन भिल्ला ने युरोपा लीग फुटबॉल का खिताब जीता

इंग्लिश क्लब एस्टन भिल्ला ने ३० वर्षों से उपाधि शुष्कता को खत्म करते हुए युरोपा लीग फुटबॉल का खिताब जीतने में सफलता हासिल की है। एस्टन भिल्ला ने इस्तांबुल स्थित बशिक्तास पार्क में जर्मन क्लब फ्राइबर्ग को ३–० के स्पष्ट अंतर से मात दी। इस उपाधि के साथ मुख्य प्रशिक्षक उनाई एमरी के लिए यह पांचवीं युरोपा लीग उपाधि भी बन गई। ७ जेठ, काठमाडौं।

एस्टन भिल्ला ने १९९६ में फुटबॉल लीग कप जीतने के बाद कोई उपाधि नहीं जीती थी। यूरोपीय स्तर पर, ये टीम ने ४४ वर्षों के बाद फिर से उपाधि जीती है, जो उन्होंने १९८२ में यूरोपियन कप जीतने के बाद हासिल की थी। मैच के पहले हाफ में एस्टन भिल्ला ने दो गोल कर अपनी पकड़ मजबूत की। ४१वें मिनट में यूरी टिलेमांस ने गोल कर टीम को बढ़त दिलाई।

पहले हाफ की इन्जुरी समय में एमिलियानो बुएन्डिया ने शानदार गोल करते हुए बढ़त दोगुनी कर दी। दूसरे हाफ के ५८वें मिनट में मॉर्गन रोजर्स ने अतिरिक्त गोल करके एस्टन भिल्ला की जीत सुनिश्चित कर दी। पूरी मैच के दौरान एस्टन भिल्ला ने लगातार दबाव बनाए रखा। अमाडु ओनानो के शॉट पोस्ट से लगने के बावजूद गोल नहीं हुआ जबकि बुएन्डिया ने एक और मौका भी गंवाया।

मुख्य प्रशिक्षक उनाई एमरी ने नवंबर २०२२ से टीम का नेतृत्व संभालने के बाद से एस्टन भिल्ला का प्रदर्शन उल्लेखनीय रूप से सुधरा है। एस्टन भिल्ला ने आखिरी बार १९९६ में लीग कप जीता था और इसके बाद यह उनकी पहली बड़ी उपाधि है जिसे टीम ने हासिल किया है।

घरमै आएर मर्‍यो गौर, के थियो कारण ? – Online Khabar

घर में आए और मर गया गौर, कारण क्या था?

समाचार सारांश

  • झापा के मेचिनगर नगरपालिका वार्ड नं. 6 में बुधवार सुबह गौरी गाय के भाले गौर ने एक घर में छटपटाते हुए दम तोड़ा।
  • डिवीजन वन कार्यालय झापा के अनुसार गौर की मृत्यु पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हृदयाघात से हुई बताई गई है।
  • वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. विजय श्रेष्ठ ने गौर के मौत को कैप्चर मायोपैथी से जुड़ा मानने का सुझाव दिया है।

7 जेठ, चितवन। झापा के मेचिनगर नगरपालिका वार्ड नं. 6 में बुधवार सुबह गौरी गाय का भाला गौर एक घर में छटपटाने के बाद मृत पाया गया।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और गौर की मृत्यु को लेकर लोगों में काफ़ी जिज्ञासा है।

डिवीजन वन कार्यालय झापा के अनुसार झापा में जंगली हाथी का आतंक ज़रूर रहता है लेकिन गौर कभी-कभार ही दिखाई देता है।

मंगलवार शाम हाथी गश्ती टीम ने मेचिनगर इलाके में गौर की जोड़ी के होने की सूचना दी थी। बुधवार सुबह एक घर के आँगन में गौर छटपटाता हुआ दिखाई दिया, जिसके बाद डिवीजन वन कार्यालय की टीम घटना स्थल पर पहुंची।

घर की सीसीटीवी फुटेज में गौर को एक आदमी को रगड़ते हुए देखा गया है, अचानक वह फिसलकर गिर गया। उस व्यक्ति को कोई चोट नहीं आई है।

सुबह 6:40 बजे गिरने के करीब डेढ़ घंटे बाद गौर की मृत्यु हो गई। जहां गौर गिरा था, वहीं वहीँ उसकी मृत्यु हुई, डिवीजन वन कार्यालय झापा के वन अधिकारी हिमाल पाठक ने बताया।

उनके अनुसार गौर का पोस्टमार्टम किया गया और उसे खंदक खोदकर दफनाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गौर की मृत्यु हृदयाघात से हुई बताई गई है। वन अधिकारी पाठक ने कहा, ‘किसी ने हमला या जहर दिया या अन्य कारण से गौर की मौत नहीं हुई, यह हृदयाघात से हुई लगती है।’

क्या पशुओं में भी हो सकता है हृदयाघात?

चितवन राष्ट्रीय निकुंज में वरिष्ठ पशु चिकित्सक के रूप में लंबे समय तक काम कर चुके डॉ. विजय श्रेष्ठ का मानना है कि गौर की मौत कैप्चर मायोपैथी के कारण हो सकती है।

गौर की मृत्यु से जुड़े वीडियो को देखकर उन्होंने बताया कि कैप्चर मायोपैथी एक घातक स्थिति है।

डॉ. श्रेष्ठ कहते हैं कि जंगली जानवर अत्यधिक तनाव या लंबे समय तक शारीरिक परिश्रम करने से मांसपेशियों और अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। ‘गौर के मामले में भी ऐसा दिखाई देता है, चाहे कोई उसे रगड़े, हमला करे या वह स्वयं किसी वस्तु से टकराए, ऐसे जंगली पशुओं में कैप्चर मायोपैथी हो सकती है,’ उन्होंने बताया। ‘यह मेटाबोलिक एसिडोसिस, मांसपेशी फाइबर टूटना, गुर्दे की विफलता, और अंततः हृदय की कार्य विफलता के कारण होती है, जिससे मौत हो सकती है।’

डॉ. श्रेष्ठ ने बताया कि यह समस्या विशेष रूप से जंगली जानवरों, गौर, हिरण, मृग जैसे खुर वाले स्तनधारियों और पक्षियों में देखी जाती है।

पालतू जानवरों में यह समस्या कम देखी जाती है क्योंकि उन्हें बाहरी वातावरण की अच्छी समझ होती है। जंगली जानवर अप्रत्याशित परिस्थितियों, वातावरण और जोखिम का सामना करते हैं, जहां कैप्चर मायोपैथी विकसित हो सकती है, डॉ. श्रेष्ठ ने बताया।

एक बार मांसपेशी की नेक्रोसिस या अंग क्षति का संकेत मिलने पर जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। डॉ. श्रेष्ठ ने कहा कि अत्यधिक चिंता, कांपना, तेजी से सांस लेना, गर्दन झुकाना (टोर्टिकोलिस), मांसपेशियों में कम्पन, कठोरता या खड़ा न रह पाना, अधिक तापमान (हाइपरथर्मिया), गाढ़े लाल या भूरे रंग का मूत्र आना, तथा कुछ घंटों में मौत जैसे लक्षण देखे जाते हैं।

18 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई किशोरी ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर किया कब्जा

7 जेठ, काठमांडू। 18 वर्षीय एक ऑस्ट्रलियन किशोरी ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की सफलतापूर्वक चढ़ाई की है। किशोरी पर्वतारोही बियांका एड्लर ने माउंट एवरेस्ट आरोहण पूरा किया है, इसकी जानकारी नेपाल पिक एडवेंचर ने दी है। उनके अनुसार, बियांका माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की ऑस्ट्रलियन महिला हैं। पिछले वर्ष, वे डेथ जोन (सबसे जोखिमपूर्ण ऊंचाई वाला क्षेत्र) तक पहुंचीं लेकिन चोटी से लगभग 400 मीटर नीचे लौट आनी पड़ी थीं। इस बार, नेपाल पिक एडवेंचर के अनुसार, वे सफलतापूर्वक आरोहण कर चुका है।

सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ को एलडीसी से विकासशील राष्ट्र में स्तरोन्नति स्थगित करने पत्र भेजा

सरकार ने ‘अति कम विकसित देश’ (एलडीसी) की श्रेणी से विकासशील राष्ट्र में स्तरोन्नति की प्रक्रिया को तत्काल के लिए रोकने का अनुरोध संयुक्त राष्ट्र संघ के संबंधित निकायों से किया है, ऐसा परराष्ट्र मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। उनके अनुसार, परराष्ट्र मंत्रालय ने हाल ही में इस अनुरोध के साथ औपचारिक पत्र भेजा है। यह मामला मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ के ‘आर्थिक और सामाजिक परिषद’ के अधीन आता है। उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने समय के लिए ‘स्थगन’ का अनुरोध किया गया है। सामान्यतः, तीन वर्षों में आवश्यक मानदंडों का पुनर्मूल्यांकन किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2021 में नेपाल को स्तरोन्नति करने का प्रस्ताव अनुमोदित करते हुए विकासशील देश बनने के लिए पाँच वर्षों का संक्रमणकाल निर्धारित किया था, जो इस वर्ष नवंबर में समाप्त हो रहा है। अर्थशास्त्री पोषराज पांडे के अनुसार, नेपाल के अनुरोध के बावजूद संयुक्त राष्ट्र परिषद का निर्णय अनिश्चित है। “बांग्लादेश ने भी ‘डिफरल’ (स्थगन) की मांग की है, इसलिए नेपाल ने भी ऐसा ही किया होगा। बांग्लादेश एलडीसी होने के बाद भी, प्रश्न उठता है कि हम कैसे विकासशील देश बन सकते हैं,” उन्होंने बताया।

नेपाल के साथ-साथ विकासशील देश में स्तरोन्नति के लिए नामित बांग्लादेश ने भी कुछ समय पहले नेपाल की तरह ‘स्थगन’ के लिए औपचारिक पत्र भेजा था। राष्ट्रीय योजना आयोग ने कुछ दिन पहले हितधारकों की एक बैठक आयोजित की थी। उस बैठक में स्तरोन्नति के विषय पर विविध मत व्यक्त किए गए थे। “कुछ ने कहा कि स्तरोन्नति होनी चाहिए, जबकि कुछ ने कहा कि अभी समय उपयुक्त नहीं है,” योजना आयोग के सहायक प्रवक्ता दिवाकर लुइंटेल ने बताया।

स्तरोन्नति न होने के फायदे और नुकसान इस प्रकार हैं। चाहे तत्काल स्तरोन्नति हो या न हो, दोनों स्थितियों के सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष होते हैं। लेकिन अधिकांश अर्थशास्त्री दीर्घकालिक रूप में लाभकारी स्थिति में सहमत हैं। “स्तरोन्नति होना सम्मान की बात है, जैसे उच्च स्तर पर पहुँचना। यह क्षमता विकास और प्रतिस्पर्धा का अवसर प्रदान करता है,” योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष श्रेष्ठ ने कहा।

सरकार ने LDC से विकासशील देश में उन्नति स्थगित किए जाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया: संभावनाएं और चुनौतियों की समीक्षा

दो महिलाएं, एक मोबाइल फोन देख रही है

तस्वीर स्रोत, RSS

विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकार ने “सबसे कम विकसित देशों” (LDC) की श्रेणी से विकासशील देश बनने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की संबंधित संस्था को औपचारिक अनुरोध भेजा है।

विदेश मंत्रालय ने हाल ही में इस अनुरोध के साथ एक औपचारिक पत्र भेजा है। यह मामला संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद के अधिकार क्षेत्र में आता है।

अधिकारी ने यह नहीं बताया कि स्थगन की अवधि कितनी होगी, हालांकि पात्रता का मूल्यांकन आमतौर पर हर तीन वर्ष में किया जाता है।

सन 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नेपाल की उन्नति का प्रस्ताव स्वीकृत करते हुए विकासशील देश की श्रेणी में जाने के लिए पांच वर्ष के संक्रमण काल की अवधि निर्धारित की थी, जो इस वर्ष नवंबर में समाप्त होने वाली है।

आर्थिक विशेषज्ञ पोषराज पांडे ने कहा कि नेपाल ने अनुरोध तो भेज दिया है, लेकिन अंतिम निर्णय संयुक्त राष्ट्र परिषद पर निर्भर है और यह अनिश्चित है।

बेइजिङको आँगनमा दुई महाशक्तिका महारथी 

बेइजिङमा अमेरिका र रूसका राष्ट्रपतिहरूबीच भेटवार्ता

विश्वका दुई प्रमुख महाशक्तिका राष्ट्रहरू अमेरिका र रूसका राष्ट्रपतिहरू डोनाल्ड ट्रम्प र भ्लादिमिर पुटिनले अर्को महाशक्ति राष्ट्र चीनको भ्रमण गरेका छन्।

आज के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय दर जारी

७ जेठ, काठमाडौं। नेपाल राष्ट्र बैंक ने आज के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय दर जारी की है। जारी विवरण के अनुसार अमेरिकी डॉलर की खरीद दर १५४ रुपये ६२ पैसे और बिक्री दर १५५ रुपये २२ पैसे निर्धारित की गई है। यूरोपीय यूरो की खरीद दर १७९ रुपये ३१ पैसे और बिक्री दर १८० रुपये ०१ पैसे है, जबकि ब्रिटेन पाउंड स्टर्लिंग की खरीद दर २०७ रुपये १४ पैसे और बिक्री दर २०७ रुपये ९४ पैसे निर्धारित की गई है। स्विस फ्रैंक की खरीद दर १९५ रुपये ६२ पैसे और बिक्री दर १९६ रुपये ३८ पैसे है।

ऑस्ट्रेलियन डॉलर की खरीद दर ११० रुपये १६ पैसे और बिक्री दर ११० रुपये ५९ पैसे तय की गई है। कनाडाई डॉलर की खरीद दर ११२ रुपये ३२ पैसे और बिक्री दर ११२ रुपये ७६ पैसे है। सिंगापुर डॉलर की खरीद दर १२० रुपये ७४ पैसे और बिक्री दर १२१ रुपये २१ पैसे रखी गई है। जापानी येन की खरीद दर १० के लिए ९ रुपये ७२ पैसे और बिक्री दर ९ रुपये ७६ पैसे निर्धारित की गई है। चीनी युआन की खरीद दर २२ रुपये ७३ पैसे और बिक्री दर २२ रुपये ८२ पैसे है।

सऊदी अरबियाई रियाल की खरीद दर ४१ रुपये २० पैसे और बिक्री दर ४१ रुपये ३६ पैसे तय की गई है, जबकि कतारी रियाल की खरीद दर ४२ रुपये ४२ पैसे और बिक्री दर ४२ रुपये ५८ पैसे है। थाई भाट की खरीद दर ४ रुपये ७३ पैसे और बिक्री दर ४ रुपये ७५ पैसे है। यूएई दिरहम की खरीद दर ४२ रुपये १० पैसे और बिक्री दर ४२ रुपये २६ पैसे निर्धारित की गई है। मलेशियाई रिंग्गिट की खरीद दर ३८ रुपये ९५ पैसे और बिक्री दर ३९ रुपये १० पैसे है।

दक्षिण कोरियाई वन की खरीद दर १०० के लिए १० रुपये २७ पैसे और बिक्री दर १० रुपये ३१ पैसे रखी गई है। स्वीडिश क्रोना की खरीद दर १६ रुपये ४६ पैसे और बिक्री दर १६ रुपये ५२ पैसे निर्धारित की गई है। डेनिश क्रोना की खरीद दर २३ रुपये ९९ पैसे और बिक्री दर २४ रुपये ०९ पैसे है। हांगकांग डॉलर की खरीद दर १९ रुपये ७४ पैसे और बिक्री दर १९ रुपये ८१ पैसे रखी गई है। कुवैती दिनार की खरीद दर ५०३ रुपये ९८ पैसे और बिक्री दर ५०५ रुपये ९३ पैसे है। बहरीन दिनार की खरीद दर ४१० रुपये ०५ पैसे और बिक्री दर ४११ रुपये ६४ पैसे निर्धारित की गई है। ओमानी रियाल की खरीद दर ४०१ रुपये ६१ पैसे और बिक्री दर ४०३ रुपये १६ पैसे है। भारतीय रुपये की खरीद दर १०० के लिए १६० रुपये और बिक्री दर १६० रुपये १५ पैसे तय की गई है। राष्ट्र बैंक ने इस विनिमय दर को आवश्यकतानुसार किसी भी समय संशोधित करने का अधिकार रखा है। वाणिज्यिक बैंक द्वारा निर्धारित विनिमय दर भिन्न हो सकती है और अद्यतन विनिमय दर केंद्रीय बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के आवागमन में जबरदस्त बढ़ोतरी

होर्मुज स्ट्रेट से 11 मई से 17 मई के बीच कम से कम 54 जहाजों ने आवागमन किया, जो पिछले सप्ताह की तुलना में दोगुना से अधिक है। ईरान से जुड़े व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण तेल, गैस और अन्य माल के परिवहन में तेजी देखी गई है। एडनोक के एलएनजी जहाज ने अपनी स्वचालित पहचान प्रणाली बंद कर खाड़ी क्षेत्र में प्रवेश किया है। 7 जून, लंदन। ब्रिटेन स्थित समुद्री व्यापार क्षेत्र के प्रतिष्ठित प्रकाशन ‘लॉयड्स लिस्ट’ के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन पिछले सप्ताह उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध जारी रहने के बावजूद, ईरान से जुड़ी व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण जलसंधि में जहाजों की संख्या में वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 11 मई से 17 मई तक एक सप्ताह में कम से कम 54 जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया। यह संख्या पिछले सप्ताह के 25 जहाजों की तुलना में दोगुना से अधिक है, जो समुद्री व्यापार की तीव्र गतिशीलता को दर्शाता है। यह वृद्धि मुख्य रूप से ईरान से जुड़े व्यापारिक गतिविधियों में आई उछाल के कारण है। विशेष रूप से तेल, गैस और अन्य सामान की आवाजाही में वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडनोक) के स्वामित्व वाले तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) से भरे एक बड़े जहाज ने अपनी स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS) को बंद कर खाड़ी क्षेत्र में प्रवेश किया है।

यह प्रणाली आमतौर पर जहाज की स्थिति और गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल होती है, इसलिए इसे बंद करना सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। लंदन स्थित समुद्री विश्लेषण कंपनी ‘विंडवार्ड’ के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को ही 19 जहाजों ने इस जलसंधि को पार किया। इनमें से 9 जहाज अंदर प्रवेश कर रहे थे और 10 बाहर निकल रहे थे। प्रवेश कर रहे जहाज मुख्यत: भारत और श्रीलंका सहित अन्य देशों के झंडे वाले कार्गो जहाज थे। बाहर जाने वाले जहाजों में एक तेल टैंकर और नौ कार्गो जहाज शामिल थे, जिनमें से पांच जहाज ईरान के झंडे तले थे। विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में इस तरह की उतार-चढ़ाव मध्य पूर्व के ऊर्जा व्यापार, खासकर तेल और गैस आपूर्ति पर सीधे प्रभाव डाल सकते हैं, क्योंकि विश्व के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति यह समुद्री मार्ग से होती है।

मोदीले मेलोनीलाई दिए मेलोडी चकलेट – Online Khabar

मोदी ने मेलोनी को मेलोडी चॉकलेट का तोहफा दिया

७ जेठ, काठमाडौं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक वीडियो और उनकी अभिव्यक्ति सोशल मीडिया में वायरल हो गई है। संयुक्त पत्रकार सम्मेलन में मेलोनी ने नेपाल-भारत संबंधों की भावना व्यक्त करने के लिए हिंदी शब्द ‘परिश्रम’ का उपयोग किया, जिससे सभी उपस्थित लोग हैरान रह गए। उन्होंने कहा, ‘एक भारतीय शब्द है जो इसे बहुत अच्छी तरह से समझाता है, वह है -परिश्रम। परिश्रम का मतलब है कड़ी मेहनत और निरंतर प्रतिबद्धता। यह शब्द भारत में काफी इस्तेमाल होता है और एक लोकप्रिय कहावत है – ‘परिश्रम ही सफलता की कुंजी है’।’ उन्होंने इसका अंग्रेज़ी अनुवाद करते हुए कहा कि कड़ी मेहनत ही सफलता की असली चाबी है और दोनों देशों के संबंधों को भी इसी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे को द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करने वाला बताया गया, और भविष्य में इन संबंधों को और गहरा करने के लिए दोनों देशों ने काम करने की बात की। दौरे के मजेदार पहलू ‘मेलि-मोदी’ नाम की जोड़ी ऑनलाइन चर्चा में आया। प्रधानमंत्री मोदी मेलोनी के लिए भारत की लोकप्रिय चॉकलेट ‘पार्ले की मेलोडी’ तोहफे के रूप में लेकर आए थे। मेलोनी ने सोशल मीडिया पर उस समय का वीडियो साझा करते हुए उपहार के लिए धन्यवाद दिया है। वीडियो में दोनों नेता मेलोडी चॉकलेट लेकर हंसते हुए दिखाई दे रहे हैं। मेलोनी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए हैं,’ तो मोदी ने मजाक में जवाब दिया, ‘मेलोडी।’ ‘मेलि-मोदी’ ट्रेंड की शुरुआत २०२५ के जी-७ सम्मेलन से हुई, जहां मेलोनी ने दोनों नेताओं की सेल्फी वीडियो पर ‘हेलो, फ्रॉम द मेलि-मोदी टीम’ कैप्शन लिखा था।

मंगलवार रात रोम पहुंचने वाले प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में हैं, जहां उनका औपचारिक सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया।