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लेखक: space4knews

अमेरिका ने इरान पर किया हवाई हमला, इरान ने कहा – निर्भीकता के साथ जवाब देंगे

२५ असार, काठमांडू । अमेरिका ने इरान पर नए चरण का हमला शुरू कर दिया है। इरान पर इस नए हमले के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा है, ‘यह इरान द्वारा कल जहाज पर किए गए बम हमले का बदला है। यदि ऐसा फिर हुआ तो इसका परिणाम और भी गंभीर होगा।’ इरानी सरकारी मीडिया के अनुसार देश के दक्षिणी हिस्सों में विस्फोट की आवाजें सुनी गई हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास सिरिक और बंदर अब्बास जैसे बंदरगाह शहरों में विस्फोट की आवाजें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा इरान के तटीय इलाकों जैसे कोनारक और चाबहार में भी विस्फोट की आवाज सुनी गई।

इरानी सरकारी टेलीविजन ने बताया कि बंदर अब्बास में आठ विस्फोट हुए हैं और दक्षिणी इरान के सिरिक एवं जास्क बंदरगाहों पर दो- दो मिसाइल हमले किए गए हैं। इसके साथ ही, इरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच लंबे समय से विवादित अबू मुद्दा टापू पर भी दो हमले किए गए हैं, ऐसा इरानी मीडिया ने बताया है। इरान ने बंदर अब्बास में हवाई रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया है। क्षति का पूरा विवरण अभी आना बाकी है। अमेरिकी हमले की पूरी हानि की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन इरानी मीडिया के अनुसार चाबहार में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और बुसेहर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के एक बंकर में आग लग गई है।

इरान ने अब तक इस अमेरिकी हमले पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पहले उच्च अधिकारियों ने कहा था कि अमेरिका की कोई भी कार्रवाई होने पर तुरंत जवाब दिया जाएगा। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इन हमलों को ‘‘महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता को खतरे में डालने वाली तेहरान की क्षमता को कमजोर करने के लिए किया गया’’ बताया है। सेंटकॉम की जारी प्रेस रिलीज में कहा गया, ‘महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर स्वतंत्र रूप से चल रहे व्यापार जहाजों और आम चालक दल पर इरान के हाल के अनुचित हमलों के लिए अमेरिका इरान को जिम्मेदार ठहराता है।’

सरकारी जमीन की सुरक्षा: पूर्व सरकारों के अधूरे कार्य को बालेन सरकार कैसे पूरा करेगी?

सरकारी जमीन के पंजीकरण, उपयोग और लीज पर उपलब्ध कराने से संबंधित नीति २०७९ के खारिज होने के बाद राजनीतिक पहुँच के आधार पर विभिन्न संस्थाओं या निकायों द्वारा उपयोग में लाई जा रही बड़ी मात्रा में जमीन को सरकारी संरक्षण में लाने का नया रास्ता खुला है, ऐसा विशेषज्ञों ने बताया है। भूमि व्यवस्था एवं अभिलेख विभाग ने उपयोग में दी गई सरकारी जमीनों को बकाया राशि चुका कर लीज में बदलने के लिए छह महीने की समय सीमा दी है।

भूमि, सहकारी तथा गरीबी निराकरण मंत्रालय ने दो सप्ताह पहले सरकारी जमीन के पंजीकरण, उपयोग और लीज संबंधी २०७९ की नीति को निरस्त कर दिया था। मालपोत नियमावली २०३६ के नवें संशोधन २०८३ में उन प्रावधानों को शामिल किए जाने के कारण उक्त नीति को समाप्त किया गया है, मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया। महालेखा परीक्षक की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार २७० से अधिक संस्थाओं को लगभग ८००० रोपनी जमीन उपलब्ध कराई गई है।

भूमि व्यवस्था मंत्रालय के प्रवक्ता गणेशप्रसाद भट्ट ने हाल की कोशिशों पर कहा, “उपयोग में दी गई जमीनों को जिन्हें लीज में बदलना था, यदि लीज में नहीं बदला गया तो उन जमीनों को सरकारी जमीन माना जाएगा। अब नियमावली संशोधित कर नई सूचना जारी करके सभी को एक बार और अवसर दिया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “लीज पर जाने के बाद गैर-सरकारी निकायों को किराया देना होगा।” महालेखा परीक्षक ने समस्याओं के बीच यह भी बताया है कि वित्त वर्ष २०८१/८२ तक २७६ संस्थाओं को जमीन वितरित की गई तथा ३ संस्थाओं को ४०/४० वर्ष की अवधि के लिए जमीन लीज पर दी गई है।

विश्व कप 2026: यूरोपीय टीमों का दबदबा असामान्य या स्वाभाविक है?

विश्वकप में स्विट्ज़रलैंड की टीम के कुछ खिलाड़ी

तस्वीर स्रोत, AFP via Getty Images

तस्वीर का कैप्शन, स्विट्ज़रलैंड ने कोलम्बिया को पेनल्टी शूटआउट में हराया

इतिहास देखने पर यूरोपीय टीमों का यूरोप के बाहर आयोजित विश्व कप में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है।

1930 के बाद से यूरोपीय टीमों ने सिर्फ दो बार यूरोप के बाहर विश्व कप जीता है—2010 में दक्षिण अफ्रीका में स्पेन और चार साल बाद ब्राजील में जर्मनी।

लेकिन 2026 में इस सूची में एक और देश आने की उम्मीद है क्योंकि क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली आठ टीमों में से छह यूरोपीय हैं।

ये टीमें हैं बेल्जियम, इंग्लैंड, फ्रांस, नॉर्वे, स्पेन और स्विट्ज़रलैंड। अर्जेंटीना और मोरक्को इस सूची को पूरा कर रहे हैं।

1994 के बाद यूरोप के बाहर आयोजित विश्व कप में पहली बार इतना अधिक यूरोपीय टीमों ने क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया है।

नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ ने मौद्रिक नीति को सकारात्मक अभिव्यक्ति दी

२४ आषाढ़, काठमांडू। नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ ने नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा मंगलवार को जारी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की मौद्रिक नीति को सकारात्मक और संतुलित बताते हुए कहा है कि यह निजी क्षेत्र के मनोबल को बढ़ावा देगा। देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे सुधार की ओर बढ़ रही है, ऐसे समय मौद्रिक नीति ने मूल्य स्थिरता, वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और उच्च आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है, यह महासंघ की मान्यता है। सरकार द्वारा निर्धारित ७ प्रतिशत आर्थिक विकास के लक्ष्य को हासिल करने में निजी क्षेत्र की निर्णायक भूमिका को मौद्रिक नीति ने स्वीकार किया है, जिस पर महासंघ ने स्वागत जताया है।

निजी क्षेत्र में निवेश विस्तार, उत्पादन वृद्धि, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को और अधिक सक्रिय बनाने के लिए मौद्रिक नीति ने लचीली और उपयुक्त कार्यदिशा अपनाई है, यह बात महासंघ के अध्यक्ष अंजन श्रेष्ठ ने कही। ‘‘महासंघ ने लंबे समय से जिन विभिन्न मुद्दों को उठाया है उन्हें मौद्रिक नीति में शामिल करने का प्रयास किया गया है,’’ अध्यक्ष श्रेष्ठ ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर उत्पन्न होने वाले असिमित दायित्वों को हटाने की व्यवस्था, अस्वस्थ उद्योगों में पड़े निष्क्रिय ऋणों का प्रबंधन और दबाव में पड़े ऋणों के पुनरुद्धार के उपाय सकारात्मक हैं।’’

अतिरिक्त रूप से, संस्थागत क्षमता के आधार पर शेयर धरोहर ऋण की सीमा निर्धारित करना तथा सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाले बड़े इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ऋण-धरोहर अनुपात को और सरल बनाने की व्यवस्था को भी सकारात्मक माना गया है। हालांकि, महासंघ ने छोटे, मध्यम, बड़े उद्योग व्यवसायों और विभिन्न क्षेत्रीय ऋणों के पुनर्गठन और पुनर्गठन को आने वाले निर्देशों में स्पष्ट रूप से शामिल किए जाने पर जोर दिया है। नीति दर, स्थायी निक्षेप दर, बैंक दर, नकद मौज़ूदगी अनुपात, वैधानिक तरलता अनुपात और स्थायी तरलता सुविधा को यथावत रखने के निर्णय से नीति स्थिरता बनी रहेगी, यह महासंघ का मानना है।

इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और व्यावसायिक माहौल और अधिक पूर्वानुमान योग्य बनेगा, महासंघ का विश्वास है। इसी तरह बैंक और वित्तीय संस्थानों के डिजिटलकरण, वित्तीय लागत में कमी, सेवा गुणवत्ता में सुधार और नियामक व्यवस्था को सरल, स्पष्ट व प्रभावकारी बनाने की नीति को भी महासंघ ने सराहा है। बैंक और वित्तीय संस्थानों के निर्देशों को सरलीकृत करना और विदेशी विनिमय संबंधी व्यवस्था को सहज बनाना व्यापार, निवेश तथा विदेशी कारोबार में सुविधा प्रदान करेगा, यह धारणा व्यक्त की गई है।

फिर भी, मौद्रिक नीति की सफलता इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी, यह अध्यक्ष श्रेष्ठ ने स्पष्ट किया। ‘‘११ प्रतिशत ऋण प्रवाह के लक्ष्य को पूरा करने और बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध पर्याप्त तरलता का सदुपयोग करने के लिए उद्योग, कृषि, पर्यटन, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, आधारभूत संरचना, निर्यात केंद्रित उद्योग और छोटे तथा मध्यम उद्यमों तक सहज और सुलभ ऋण प्रवाह होना आवश्यक होगा,’’ उन्होंने कहा, ‘‘असली उत्पादनशील क्षेत्रों में ऋण का विस्तार न होने तक आर्थिक पुनरुद्धार में गतिशीलता नहीं लाई जा सकती।’’

महासंघ ने मौद्रिक नीति के साथ ही सरकार द्वारा जारी आर्थिक सुधार कार्यक्रम, निवेश-मित्र कानूनी सुधार, पूंजीगत खर्च का प्रभावी क्रियान्वयन और परियोजनाओं की गति को समानांतर रूप से बढ़ाने पर भी बल दिया है। मौद्रिक और वित्तीय नीतियों के बीच प्रभावी समन्वय से ही अपेक्षित आर्थिक रूपांतरण संभव होगा, यह महासंघ का मानना है। निजी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि, निवेश विस्तार और सतत आर्थिक विकास के लिए राष्ट्र बैंक और सरकार के साथ निरंतर सहयोग एवं रचनात्मक साझेदारी करने के लिए महासंघ प्रतिबद्ध है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच संवाद और नीति स्थिरता से अर्थव्यवस्था में गति आएगी, यह धारणा भी व्यक्त की गई है।

इसी बीच, महासंघ ने ऋण श्रेणीकरण और ऋण नुकसान प्रबंधन को लचीला बनाने की निजी क्षेत्र की मांग को गंभीरता से लेने, वॉच लिस्ट और ब्लैक लिस्टिंग संबंधी व्यवस्थाओं को वर्तमान परिस्थिति में दो वर्षों के लिए लचीला और सहज बनाने तथा वित्तीय क्षेत्र सुधार २.० को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। निजी क्षेत्र ने बैंकिंग क्षेत्र का पुनःपूंजीकरण, निष्क्रिय संपत्ति प्रबंधन, जोखिम साझाकरण तंत्र के विस्तार और उत्पादक क्षेत्रों को लक्षित वित्तीय उपकरणों के विकास को समाहित करने वाले दूसरे चरण के वित्तीय सुधार कार्यक्रम के क्रियान्वयन को अत्यंत आवश्यक बताया है।

सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी अब डिजिटल प्रणाली के माध्यम से, एकीकृत पोर्टल शुरू

२४ आसार, काठमांडू। ऊर्जा जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय ने राष्ट्रीय महत्व की सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग और समस्या प्रबंधन का वास्तविक समय में अनुगमन करने के लिए एकीकृत डिजिटल निगरानी पोर्टल शुरू किया है। मंत्रालय के अनुसार, पहले चरण में सिक्टा, रानी जमरा–कुलरिया, भेरी–बबई, सुनकोशी–मरिण, महाकाली एवं बबई सिंचाई परियोजनाओं को इस पोर्टल में शामिल किया गया है। आगामी चरणों में अन्य सिंचाई परियोजनाओं को भी इसी प्रणाली से जोड़ा जाएगा।

मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ने हाल ही में सिक्टा, रानी जमरा–कुलरिया, भेरी–बबई एवं बबई सिंचाई परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद परियोजना प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह प्रणाली लागू की है। पोर्टल शुरू होने के बाद मंत्री और मंत्रालय के सचिव अपने कार्यालय से ही परियोजना की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, बजट व्यय, ठेका प्रबंधन, निर्माण की स्थिति तथा परियोजना में आई समस्याओं की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। मंत्रालय को अपेक्षा है कि इससे उच्च स्तरीय नियमित निगरानी और आवश्यक निर्णय प्रक्रिया सुगम होगी।

पहले परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति मुख्यतः स्थलीय निरीक्षण या वित्तीय वर्ष के अंत में मिलने वाली रिपोर्ट के माध्यम से ही ज्ञात होती थी। कई बार परियोजनाओं की अवधि बढ़ने के कारण प्रगति का समय पर मूल्यांकन कठिन होता था, लेकिन नई प्रणाली इस समस्या को समाप्त करेगी। नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक परियोजना प्रमुख को प्रत्येक सप्ताह भौतिक प्रगति, वित्तीय स्थिति, ठेका कार्यान्वयन, दावे-बिवाद, निर्माण में आई बाधाओं और समाधान प्रयासों का विवरण अनिवार्य रूप से पोर्टल में दर्ज करना होगा।

मंत्रालय के अनुसार डिजिटल प्रणाली परियोजना में आई समस्याओं को नक्शे सहित प्रस्तुत करेगी, स्वचालित प्रगति रिपोर्ट तैयार करेगी, साथ ही यह दर्शाएगी कि किस पैकेज में क्यों देरी हुई, समस्या कितने समय से बनी हुई है और उसके समाधान की जिम्मेदारी किस निकाय या व्यक्ति पर है। पोर्टल को भविष्य में प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद् कार्यालय और राष्ट्रीय योजना आयोग के निगरानी प्रणाली से भी जोड़ा जाएगा। इससे विभिन्न सरकारी संस्थान एक ही आंकड़ों के आधार पर निर्णय ले सकेंगे, जिससे एकीकृत वातावरण बनेगा, मंत्रालय को इसे लेकर अपेक्षा है।

इसके अलावा आगामी वित्तीय वर्ष के लिए मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत बजट प्रस्ताव भी इसी प्रणाली से उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित होंगे। प्रत्येक परियोजना की प्रगति, व्यय क्षमता और मौजूदा बाधाओं के प्रमाण के आधार पर बजट का अनुरोध किया जाएगा, मंत्रालय ने बताया। पोर्टल संचालन के अवसर पर मंत्री श्रेष्ठ ने कहा कि डिजिटल डैशबोर्ड निर्माण कार्य न पूरा होने पर महीनों तक फाइलों में सीमित रहने वाली समस्या का समय रहते पता लगाकर निर्णय प्रक्रिया को शीघ्र बनाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि अब अंतर-मंत्रालय समन्वय वाले विषयों को वित्तीय वर्ष के अंत तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता समाप्त होकर साप्ताहिक रूप से पहचान एवं समाधान प्रक्रिया में प्रस्तुत किया जा सकेगा, यह मंत्रालय की आशा है।

नेपाल-भारत उद्योग वाणिज्य संघ ने मौद्रिक नीति का स्वागत किया

२४ असार, काठमांडू। नेपाल-भारत उद्योग वाणिज्य संघ ने नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा जारी आर्थिक वर्ष २०८३/८४ की मौद्रिक नीति का स्वागत किया है।

संघ का मानना है कि यह नीति मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए उच्च आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने में मदद करेगी। मौद्रिक नीति को सतर्कतापूर्वक लचीला बताया गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच, नेपाल की अर्थव्यवस्था क्रमिक सुधार की दिशा में बढ़ रही है। इस बीच, जारी मौद्रिक नीति और नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा प्रकाशित मैक्रोइकोनॉमिक रिपोर्ट ने नेपाल के बाह्य क्षेत्र, बैंकिंग प्रणाली की तरलता, विदेशी विनिमय भंडार और निवेश वातावरण में महत्वपूर्ण सुधार की पुष्टि की है, ऐसा संघ का मानना है।

इसने आने वाले आर्थिक वर्ष में आर्थिक गतिविधि के विस्तार के लिए अनुकूल आधार तैयार होने का निष्कर्ष संघ ने निकाला है।

संघ ने मुद्रास्फीति को लगभग ५.५ प्रतिशत की सीमा में बनाए रखते हुए नेपाल सरकार द्वारा निर्धारित ७ प्रतिशत आर्थिक विकास दर को प्राप्त करने के लिए आवश्यक मौद्रिक सहजीकरण प्रदान करने के लक्ष्य के साथ नीति एवं दरों को यथावत रखने, बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने, ब्याज दर कॉरिडोर को जारी रखने तथा नेपाली रुपये और भारतीय रुपये के बीच स्थिर विनिमय व्यवस्था बनाए रखने के निर्णय को निजी क्षेत्र के मनोबल में वृद्धि और निवेश-अनुकूल माहौल के निर्माण में सहायक मानते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता सुदृढ़ करने, बैंकिंग नियमन को और सरल बनाने, डिजिटल वित्तीय सेवाओं को बढ़ावा देने, व्यक्तिगत क्रेडिट स्कोरिंग प्रणाली का विकास करने, निष्क्रिय ऋण प्रबंधन में सुधार करने तथा विदेशी विनिमय प्रबंधन को अधिक सहज बनाने जैसी मौद्रिक नीति पहलों को भी संघ ने सकारात्मक रूप से लिया है।

हालांकि, संघ के अनुसार मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों ने कुछ संरचनात्मक चुनौतियों को समाधान करने का अवसर भी प्रदान किया है।

बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता, ऐतिहासिक रूप से कम ब्याज दर और ऋण प्रवाह की पर्याप्त क्षमता होने के बावजूद निजी क्षेत्र में ऋण विस्तार अपेक्षित स्तर पर नहीं है। यह स्थिति यह संकेत देती है कि अब चुनौती वित्तीय संसाधनों की कमी या ब्याज दरों में नहीं, बल्कि निवेशकों के आत्मविश्वास, नीति स्थिरता, परियोजना कार्यान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता और समग्र निवेश वातावरण में है, ऐसा संघ का मानना है।

इसी संदर्भ में आर्थिक वृद्धि के लक्ष्यों को पाने के लिए केवल मौद्रिक नीति पर्याप्त नहीं होगी, इसे प्रभावी वित्तीय नीति, तीव्र पूंजीगत व्यय, नीति स्थिरता और निजी क्षेत्र-अनुकूल संरचनात्मक सुधारों के साथ समन्वयित कर लागू करना आवश्यक है, ऐसा संघ का विचार है।

रुपन्देही के यूनिवर्सल मेडिकल कॉलेज में श्रम कार्यालय ने किया निरीक्षण, जारी किए 12 निर्देश

२४ असार, काठमाडौं। श्रम तथा रोजगार कार्यालय ने रुपन्देही में स्थित यूनिवर्सल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज में विशेष निरीक्षण और अनुगमन किया है। प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालय के तहत ‘हेलो सरकार’ में प्राप्त शिकायत के आधार पर श्रम कार्यालय ने कॉलेज में श्रम अधिनियम और नियमावली के अनुसार श्रमिकों को प्रदान की जानी वाली सेवा-सुविधाओं के क्रियान्वयन की सावधानीपूर्वक जांच की है। श्रमिकों ने शिकायत की थी कि उन्हें श्रम योगदान के अनुसार वेतन समय पर नहीं मिला, रोजगार समाप्त होने के १५ दिन के भीतर आवश्यक सेवा-सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं और सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशानुसार बुटवल कार्यालय ने कॉलेज में स्थलगत निरीक्षण किया।

निरीक्षण के बाद श्रम तथा रोजगार कार्यालय ने कॉलेज प्रशासन को 12 बिंदुओं वाले निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि सभी श्रमिकों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ता उपलब्ध कराया जाए, सभी श्रमिकों को योगदान आधारित सामाजिक सुरक्षा कोष में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, और जो कर्मचारी इस्तीफा दे चुके हैं या जिनका रोजगार समाप्त हो चुका है, उन्हें १५ दिन के भीतर उनका वेतन एवं सेवा-सुविधाएं प्रदान की जाएं। कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि श्रम अधिनियम के विपरीत काम पर लगाने या कानूनी सेवाएं और सुविधाएं न देने वाले रोजगारदाताओं को श्रमिकों से काटे गए धनराशि का दोगुना जुर्माना भरना होगा और श्रमिकों को मुआवजा दिया जाएगा। कॉलेज को श्रम ऑडिट पूरा कर निर्धारित समय में रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा गया है। वरिष्ठ श्रम अधिकारी मनोज कुमार शैनी और शाखा अधिकारी हुम पाण्डे समेत की एक टीम ने कॉलेज में अनुगमन किया।

ट्रम्प की चेतावनी: आज रात इरान पर बड़ा हमला हो सकता है

२४ असार, काठमाडौं । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आज रात इरान पर बड़े हमले की संभावना जताई है। बुधवार को टर्की में सम्पन्न नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेन्स्की के साथ पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रम्प ने यह स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, ‘हमने मंगलवार रात को उन्हें बहुत कड़ी चोट पहुंचाई, बहुत कड़ी।’ इरान से जुड़े प्रश्न के जवाब में ट्रम्प ने कहा, ‘शायद आज रात फिर से हम उन पर जबरदस्त हमला करेंगे।’ उन्होंने बताया कि पहले ही इरानी अधिकारियों को एक छोटी चेतावनी दे दी गई है। ‘हम आज रात फिर से उन पर कड़ा प्रहार करेंगे,’ उन्होंने पुनः जोर दिया।

ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने अब तक इरान पर बड़े हमले नहीं किए हैं, लेकिन भविष्य में अमेरिकी हमले इरान की पुलों और समुद्री जल शोधन संयंत्र जैसे बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने इरान के नियंत्रण में मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग टापू पर कब्जा करने का भी संकेत दिया। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका खार्ग टापू पर कब्जा कर लेगा तो तेहरान इसके खिलाफ कुछ नहीं कर पाएगा। इससे पहले, बुधवार को पत्रकारों के साथ बातचीत में ट्रम्प ने इरान के साथ शांति समझौता समाप्त होने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वार्ताकार इरान से बातचीत में अपना समय गंवा रहे हैं।

ट्रम्प ने न केवल इरानी सरकार को पागल बताया है, बल्कि उनकी नई अभिव्यक्तियां पिछली बातों से काफी अलग दिखाई दे रही हैं। कुछ सप्ताह पहले वे इरान के साथ सफल वार्ता के लिए आशावादी थे, लेकिन अब उनके हालिया बयान संघर्ष के निर्णायक मोड़ की संभावना को बढ़ाते हैं। इससे एक नए आक्रमण की संभावना भी अधिक हो गई है। जेलेन्स्की के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि वे इरान से खुश नहीं हैं। ‘वे झूठ बोलते हैं,’ नाटो सम्मेलन में दोपहर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने इरानी अधिकारियों को ‘खराब’ व्यक्ति बताया। ‘मेरे लिए यह (वार्ता) समाप्त हो चुकी है। मैं अब उनसे बात नहीं करना चाहता। वे खराब लोग हैं,’ उन्होंने कहाकि, ‘जहां तक मेरी बात है, यह खत्म हो चुका है। उनसे बात करना समय की बर्बादी है। वे झूठ बोलते हैं।’ हालांकि उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकार चाहे तो वार्ता जारी रख सकते हैं। ‘लेकिन वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं,’ उन्होंने जोड़ा, ‘वे मानसिक रूप से बीमार हैं। उनके नेता भी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। मेरी राय में उनके साथ व्यवहार करना केवल समय की बर्बादी है।’ इरान ने वार्ता में नाभिकीय हथियार नहीं रखने की बात स्वीकार की थी, जिसके बाद मीडिया में इस विषय पर चर्चा कम हुई, ऐसा भी ट्रम्प ने दावा किया है।

प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था को लेकर दिखाया गंभीरता, निजी क्षेत्र के साथ औपचारिक संवाद की शुरुआत की

२४ असार, काठमाडौँ । मंत्रियों को उद्योगी-व्यवसायियों से मिलने से रोकने के निर्देश जारी किए जाने के बीच, प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों को औपचारिक चर्चा के लिए बुलाना शुरू किया है। अर्थव्यवस्था के प्रति गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने उद्योगी-व्यवसायियों को स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया है। २३ और २४ भदौ को हुए जनजी आंदोलन के दौरान निजी क्षेत्र पर भी हमले हुए थे। निजी निवेश वाले व्यापार–व्यवसाय को तोड़फोड़ और आगजनी से नुकसान पहुंचने के बाद वहाँ के व्यवसायी चिंतित थे।

फागुन २०८२ में हुए निर्वाचन में राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने बहुमत पाकर सरकार बनाई थी। सरकार बनने के बाद उद्योगपतियों के खिलाफ विभिन्न आधारहीन कार्रवाइयों ने पारदर्शिता कम की और निजी क्षेत्र की आशंकाएँ बढ़ी। सरकार संवाद के बजाय दबाव और धरपकड़ करता रहा जिससे उद्योगपतियों का मनोबल कमजोर हुआ। निजी क्षेत्र के साथ उचित व्यवहार की आवश्यकता पर व्यवसायियों में द्विविधा थी, जिससे वे निवेश बढ़ाने या घटाने का स्पष्ट निर्णय नहीं कर पा रहे थे। लेकिन, सरकार गठन के तीन माह से अधिक समय बाद बुधवार को प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र की छाता संस्थाओं के प्रतिनिधियों को अपने कार्यालय में बुलाकर चर्चा की, जिससे निजी क्षेत्र सकारात्मक हुआ है।

पहले मंत्रिमंडल के सदस्यों को उद्योगी-व्यवसायियों से मिलने का मार्ग अवरुद्ध करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री ने खुद निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों से मिलाकर उन्हें उत्साहित किया है, ऐसा एक व्यवसायी ने बताया। सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए ७ प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य रखा है। इसके लिए निजी क्षेत्र का सहयोग अत्यंत आवश्यक होने के कारण प्रधानमंत्री ने देर से ही सही, निजी क्षेत्र के साथ रचनात्मक साझेदारी खोजनी शुरू की है। अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र का हिस्सा ८० प्रतिशत से अधिक है और इस स्थिति में उद्योगी-व्यवसायियों से दूरी बनाकर काम चलाना संभव नहीं है, यह प्रधानमंत्री ने समझ लिया है।

‘निजी क्षेत्र को विश्वास में लेकर आगे बढ़ना नहीं तो अर्थव्यवस्था सुधार संभव नहीं है, यह सरकार समझ चुकी है,’ वह व्यवसायी बोले। ‘प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत ने निजी क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न की है।’ उद्योगी-व्यवसायियों पर किए गए धरपकड़ के विषय में भी प्रधानमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है कि डरने की कोई बात नहीं। ‘व्यापारियों से मिलने से रोकने वाले’ सरकारी सर्कुलर जारी होने के दौरान भी प्रधानमंत्री शाह ने निजी क्षेत्र से सीधे मिलना शुरू किया है, जिसे उद्योगी आइसब्रेक की तरह ले रहे हैं। नेपाल उद्योग परिसंघ के महानिर्देशक घनश्याम ओझा ने कहा कि प्रधानमंत्री की सरकार निजी क्षेत्र के प्रति सकारात्मक नजर रखती है।

‘प्रधानमंत्री ने व्यवसायियों से भी आग्रह किया कि वे समझाएं कि सरकार निजी क्षेत्र को सकारात्मक दृष्टि से देख रही है,’ उन्होंने कहा। ‘देश निर्माण के मुख्य साझेदार निजी क्षेत्र ही हैं, यह सरकार को स्पष्ट है। साथ ही अब लगभग सभी व्यवसायियों को अनावश्यक रूप से गिरफ्तार या जेल में डालने की स्थिति नहीं है, निजी क्षेत्र के प्रति सकारात्मक व्यवहार किया जाएगा, डरने की जरूरत नहीं है।’

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि देश की आर्थिक गतिविधियों को सशक्त और प्रभावी बनाने, उद्योग-व्यवसाय चलाने को आसान बनाने और निवेश अनुकूल वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से ये बातचीत हुई है। बड़ी नीतिगत तथा प्रक्रियागत अड़चनों को दूर करते हुए निजी क्षेत्र के मनोबल को बढ़ाना, रोजगार सृजन और उत्पादन वृद्धि पर चर्चा केंद्रित रही। प्रधानमंत्री शाह ने देश के आर्थिक विकास, निवेश विस्तार, रोजगार सृजन और उत्पादन वृद्धि में निजी क्षेत्र को सरकार का महत्वपूर्ण सहयोगी माना है और उद्योगी-व्यवसायियों के व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए सरकार तैयार है। उन्होंने औद्योगिक एवं निजी क्षेत्रमैत्री वातावरण के लिए आवश्यक नीतिगत, कानूनी और प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

दुर्घटना के बाद फरार चालक गिरफ्तार

२४ असार, गुल्मी। गुल्मी के रेसुङ्गा नगरपालिका–८ गजुरा में २२ असार की सुबह हुई जीप दुर्घटना के बाद फरार चालक को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति रेसुङ्गा नगरपालिका–८ छापटोल के १८ वर्षीय जीप चालक अफिन कामी हैं। उन्हें रुपन्देही के सैनामैना नगरपालिका–१ फेटापारी से गिरफ्तार किया गया, यह जानकारी गुल्मी के प्रहरी नायब उपरिक्षक (डीएसपी) वीरेन्द्र वीर विश्वकर्मा ने दी। उनके खिलाफ सवारी संबंधित हत्या मामले में आगे की जांच जारी है, उन्होंने बताया। उस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी और तीन लोग घायल हुए थे।

भारत के केरल में भूस्खलन से टैंकर लोकों की ओर धकेला गया

भारत के केरल राज्य में भूस्खलन के कारण एक टैंकर लोगों की ओर धकेल गया, जिससे कम से कम तीन मजदूरों की मौत हो गई और पाँच लोग लापता हैं।

टेलिकम कंपनियां थ्रीजी सेवा बंद कर रही हैं, ग्राहक सीम परिवर्तन कर सकेंगे

२४ असार, काठमाडौं। टेलिकम कंपनियां अपनी थ्रीजी सेवा बंद करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं। नेपाल टेलिकम और एनसेल क्रमशः थ्रीजी सेवा बंद करते हुए फोरजी सेवा में अपग्रेड करने की योजना बना चुके हैं। नेपाल टेलिकम के प्रवक्ता कमल लामिछाने के अनुसार थ्रीजी सेवा बंद करने का कार्य भूगोल आधारित ‘क्लस्टर’ प्रणाली के तहत किया जा रहा है। इसके लिए वायरलेस सेवा निर्देशनालय के अधीन समितियां गठित कर कार्य किया जा रहा है। देशभर के लगभग ३ हजार टावरों (साइट) में से लगभग २९६० साइटों को थ्रीजी सेवा हटाने की प्रक्रिया में नेपाल टेलिकम लगा हुआ है। इससे पहले लगभग ४० साइटों पर थ्रीजी सेवा पहले ही बंद हो चुकी है। थ्रीजी सेवा हटाने के लिए फिलहाल चितवन के एक क्लस्टर में काम चल रहा है और सफलता मिलते ही आगामी आर्थिक वर्ष के भीतर देशभर में चरणबद्ध तरीके से थ्रीजी सेवा पूरी तरह बंद करने की योजना है, प्रवक्ता लामिछाने ने जानकारी दी।

लामिछाने के अनुसार, आवाज कॉल थ्रीजी, २जी या फोरजी नेटवर्क में से किसी पर भी हो, वह वोल्टे (VoLTE) के माध्यम से उपलब्ध होता है। लेकिन डेटा सेवा की गुणवत्ता फोरजी में बेहतर होने के कारण विश्व के अधिकांश देशों में थ्रीजी या २जी को हटाकर फोरजी और फाइवजी नेटवर्क को प्राथमिकता दी जा रही है। नेपाल टेलिकम ने भी इसी अनुरूप कदम उठाया है। थ्रीजी सेवा बंद करते समय उपयोगकर्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका भी क्रमवार योजना के तहत ध्यान रखा जा रहा है, लामिछाने ने बताया।

नेपाल टेलिकम के अनुसार वर्तमान में लगभग ६ लाख उपयोगकर्ता थ्रीजी सेवा उपयोग कर रहे हैं और उनके लिए क्रमशः फोरजी पर स्थानांतरण का काम चल रहा है, इसके लिए उपयोगकर्ताओं को सीम निःशुल्क बदलने की सुविधा दी गई है। “यदि कोई भी ग्राहक सीम परिवर्तन का अनुरोध करता है तो उसे निःशुल्क परिवर्तन की अनुमति दी जाएगी,” लामिछाने ने कहा, “थ्रीजी उपयोगकर्ताओं को लक्षित कर हम आंतरिक संदेशों के माध्यम से भी जागरूकता अभियान चला रहे हैं।” सीम परिवर्तन के लिए नागरिकता प्रमाणपत्र, राष्ट्रीय परिचय पत्र, पासपोर्ट, चालक अनुमति पत्र या अन्य सरकारी पहचान पत्र लेकर निकटतम नेपाल टेलिकम कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है, कंपनी ने यह जानकारी दी है।

एनसेल ने भी २२ असार से पाँच प्रदेशों के १३ जिलों में २२६ से अधिक टावरों पर थ्रीजी सेवा बंद करना शुरू किया है। एनसेल के अनुसार कोशी प्रदेश के त्रियुगा, चौदण्डी, बेलका, कटारी, संखुवासभा के खाँदबारी, चैनपुर और धर्मदेवी, धनकुटा के पाख्रीबास, सांगुरीगढी, भोजपुर के टेम्केमैयु सहित विभिन्न स्थानीय तहों में थ्रीजी सेवा बंद हो रही है। एनसेल के नेटवर्क प्रमुख लेना केशरी कंसाकार ने कहा कि नई तकनीक अपनाने और सेवा की गुणवत्ता निरंतर सुधार करने के उद्देश्य से थ्रीजी सेवा बंद करने का निर्णय लिया गया है।

“सन् २०२७ की पहली तीन महीनों के भीतर पूरी तरह से थ्रीजी सेवा बंद करने का लक्ष्य रखा गया है,” उन्होंने कहा। थ्रीजी सेवा बंद होने के बाद भी ग्राहक टुजी और फोरजी नेटवर्क के माध्यम से उच्च गुणवत्ता की आवाज सेवा का उपयोग कर सकेंगे। एनसेल भी भविष्य में फाइवजी जैसी नई तकनीक चलाने की तैयारी कर रहा है।

गाजा के फुटबॉल प्रेमी मलबे में बैठकर विश्व कप मैच देख रहे हैं

गाजा पट्टी में रहने वाले फुटबॉल प्रेमी मलबे में बैठकर विश्व कप के मैच देख रहे हैं। इस वीडियो में ये क्षण देखे जा सकते हैं। मंगलवार को ये प्रशंसक बड़े पर्दे पर अर्जेंटीना और मिस्र के बीच हुए मैच को देखने के लिए जमा हुए थे। इस दौरान कई लोगों ने गाजा पट्टी की सीमा से सटी मिस्र का झंडा फहराया।

हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम के लिए वार्ता में मिस्र की अहम भूमिका रही है। अर्जेंटीना ने इस मुकाबले को 3-2 से जीतकर क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया है।

फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टरफाइनल में पहुंची आठ टीमों की यात्रा

२४ असार, काठमांडू। ४८ टीमों की ऐतिहासिक और रोमांचक प्रतियोगिता को पार करते हुए फीफा विश्व कप 2026 के ‘फाइनल आठ’ का समीकरण पूरा हो चुका है। पूर्व विजेता अर्जेंटीना की संघर्षपूर्ण रक्षा, ब्राजील को चौंकाने वाली नॉर्वे की चमत्कारिक उभर, और मेजबान टीमों के बाहर होने ने इस बार के नॉकआउट दौर को बेहद नाटकीय बना दिया। अपराजित स्पेन और फ्रांस की मजबूत लय से लेकर मोरक्को और स्विट्ज़रलैंड की सशक्त रक्षात्मक रणनीतियों तक ने विश्व कप की ट्रॉफी की होड़ को और भी रोचक मोड़ दिया है। फुटबॉल इतिहास की सबसे कठिन और लंबी यात्राएं तय करते हुए ये आठ मजबूत टीमें अब सुनहरी ट्रॉफी के कड़े मुकाबले के लिए आमने-सामने होंगीं।

फ्रांस ने समूह ‘आई’ में अपनी प्रभुत्व स्थापित कर समूह विजेता बनकर नॉकआउट चरण में प्रवेश किया। फ्रांस ने सेनेगल को ३-१, नॉर्वे को ४-१ और ईराक को ३-० से हराया था। राउंड ऑफ ३२ में फ्रांस ने स्वीडन को ३-० से परास्त किया, जबकि राउंड ऑफ १६ में कप्तान किलियन एम्बापे के निर्णायक पेनाल्टी गोल की मदद से मजबूत रक्षा वाली पाराग्वे को १-० से हराकर क्वार्टरफाइनल का स्थान सुनिश्चित किया।

सन् २०२२ के सेमीफाइनलिस्ट मोरक्को ने इस बार भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए समूह ‘सी’ में उपविजेता के रूप में नॉकआउट चरण में प्रवेश किया। समूह चरण में मोरक्को ने ब्राजील के साथ १-१ की बराबरी खेली, स्कॉटलैंड को १-० से हराया और हैती को ४-२ के गोल अंतर से मात दी। राउंड ऑफ ३२ में मोरक्को ने नेटरलैंड्स को टाईब्रेकर में पराजित किया। राउंड ऑफ १६ में मेजबान कनाडा के खिलाफ पूर्ण प्रभुत्व के साथ ३-० की शानदार जीत दर्ज की।

स्पेन ने समूह ‘एच’ में विजेता बनकर नॉकआउट में स्थान बनाया। स्पेन ने अब तक जारी विश्व कप में कोई भी गोल नहीं खाया है। समूह चरण में स्पेन ने केप वर्डे के साथ बिना कोई गोल हुए ड्रॉ खेला, सऊदी अरब को ४-० और उरुग्वे को १-० से हराया। राउंड ऑफ ३२ में स्पेन ने ऑस्ट्रिया को ३-० से पराजित किया। राउंड ऑफ १६ में पड़ोसी प्रतिद्वंद्वी पुर्तगाल के खिलाफ तनावपूर्ण ‘इबेरियन डर्बी’ मुकाबले में मिकेल मरीनो के घायलकालीन समय के गोल से स्पेन को १-० की रोमांचक जीत मिली।

आगामी मैच:
फ्रांस बनाम मोरक्को : २६ असार (पहला क्वार्टरफाइनल)
इंग्लैंड बनाम नॉर्वे : २७ असार (दूसरा क्वार्टरफाइनल)
स्पेन बनाम बेल्जियम : २८ असार (तीसरा क्वार्टरफाइनल)
अर्जेंटीना बनाम स्विट्ज़रलैंड : २८ असार (चौथा क्वार्टरफाइनल)

संविधान संशोधन में दलित अधिकारों को प्राथमिकता देने की मांग

२४ आसार, काठमाडौँ। स्वतन्त्र दलित नागरिक समाज नेपाल ने संविधान संशोधन प्रक्रिया में दलित समुदाय के अधिकारों, समानुपातिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और समावेशिता के विषयों को प्राथमिकता के साथ संबोधित करने हेतु सरकार, संघीय संसद और राजनीतिक दलों से आग्रह किया है। आज यहां आयोजित पत्रकार बैठक में संस्थान के संयोजक कर्णबहादुर नेपाली ने संविधान संशोधन को दलित अधिकारों को और सुदृढ़ बनाने का ऐतिहासिक अवसर मानने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि दलित समुदाय की सार्थक भागीदारी के बिना संविधान संशोधन सामाजिक न्याय के उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकेगा और इसलिए संशोधन प्रक्रिया को सहभागिता, समावेशिता और मानवाधिकार के अनुरूप होना चाहिए। संस्थान ने छुआछूत और जातीय भेदभाव के खिलाफ संवैधानिक प्रावधानों को और प्रभावी बनाने, राज्य के सभी निकायों में समानुपातिक और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने, भूमिहीन दलितों के भूमि और आवास अधिकार स्पष्ट करने तथा राष्ट्रीय दलित आयोग को अधिकार-संपन्न बनाने की मांग की है।