Skip to main content

लेखक: space4knews

जोकोविच को हराकर सिन्नर विंबलडन फाइनल में पहुँचे

पूर्व विजेताियन यानिक सिन्नर ने सात बार के विजेता नोवाक जोकोविच को सीधे सेटों में हराकर विंबलडन टेनिस के फाइनल में प्रवेश किया है। सिन्नर ने जोकोविच को ६-४, ६-४ और ६-४ के सेट स्कोर से हराकर ऑस्ट्रेलियन ओपन की हार का बदला लिया है। अब सिन्नर उपाधि के लिए अलेक्जेंडर ज्वेरेव से मुकाबला करेंगे।

२६ जून, काठमांडू। शुक्रवार रात हुए सेमीफाइनल में सिन्नर ने जोकोविच को पराजित किया। ये दोनों खिलाड़ी इससे पहले ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस के सेमीफाइनल में भी भिड़े थे, जहां जोकोविच विजेता रहे थे। सिन्नर ने उस हार का बदला ले लिया है। आज के मैच में सिन्नर ने तीनों सेटों में अपनी सर्विस में कोई गेम नहीं गंवाया।

इजरायल में होम बेस्ड केयरगिवर भेजने के प्रोटोकॉल जल्द पूरा होने की तैयारी

नेपाल और इजरायल सरकार के बीच कृषि तथा घर में आधारित सहायक कार्यकर्ता (केयरगिवर) भेजने के श्रम प्रोटोकॉल को अंतिम चरण में पहुंचाने के लिए चर्चा जारी है। श्रम मंत्रालय के प्रवक्ता पिताम्बर घिमिरे ने तकनीकी विषयों को मिलाकर जल्द से जल्द औपचारिक हस्ताक्षर के लिए वार्ता को आगे बढ़ाने की जानकारी दी। इजरायल ने कामगारों की संख्या वार्षिक कोटा के आधार पर निर्धारित करने की बात कही है और रोजगार अवधि सामान्यतः पांच वर्ष की होगी। २६ असार, काठमाडौँ।

इजरायल में ‘होम बेस्ड केयरगिवर’ भेजने वाला प्रोटोकॉल जल्द ही समापन की तैयारी में है। नेपाल और इजरायल सरकारों के बीच व्यक्ति के घर में कार्य करने वाले केयरगिवर और कृषि क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को भेजने के लिए तैयार किए गए प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने की बातचीत जारी है। नेपाल की ओर से पिछले वर्ष ही प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार कर मंत्रिपरिषद ने पारित कर दिया था। २२ पुष २०८२ को हुई मन्त्रिपरिषद की बैठक में कृषि के नेपाली विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र और घर आधारित सहायक श्रमिक (केयरगिवर) को पांच वर्षों की दीर्घकालीन रोजगार देने के उद्देश्य से इजरायल द्वारा भेजे गए अतिरिक्त दो नए प्रोटोकॉल का मसौदा पारित किया गया था।

इजरायल और नेपाल के बीच हुए श्रम समझौते के तहत ये प्रोटोकॉल पारित हुए थे। इजरायल के पास दीर्घकालीन सेवा केंद्र में सहायक श्रमिक (केयरगिवर) भेजने का केवल एक प्रोटोकॉल है, जिसे संशोधित कर नया मसौदा तैयार किया गया था। इजरायल ने तीन प्रोटोकॉल के मसौदे भेजे थे, जिनमें आवश्यक संशोधन करते हुए मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दी थी। इसके अनुसार युवा, श्रम तथा रोजगार मंत्रालय ने प्रोटोकॉल से जुड़ी समझौतों के लिए प्रक्रिया प्रारंभ की थी।

गत बुधवार श्रम मंत्री रामजी यादव और नेपाल में इजरायली राजदूत स्मुलिकम एरी बास के बीच मुलाकात हुई थी। बैठक के दौरान इस प्रोटोकॉल को शीघ्रता से पारित करने पर चर्चा हुई। दोनों पक्ष मंत्रालय से इस प्रक्रिया को यथाशीघ्र पूरा करने के लक्ष्य पर सहमत थे। विशेषतः होम बेस्ड केयरगिवर के संदर्भ में इजरायल ने कुछ बिंदुओं पर संशोधनों के साथ प्रस्ताव भेजा है। प्रवक्ता घिमिरे के अनुसार तकनीकी टीम इसे अंतिम रूप देने के बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।

कृषि और घर आधारित सहायक कामगारों के विषय में इजरायल ने वार्षिक कोटा निर्धारित कर भेजने की तैयारी की है, लेकिन अभी तक वह स्पष्ट नहीं हुआ है, प्रवक्ता घिमिरे ने बताया। “कामगारों की संख्या इजरायल वार्षिक कोटे के आधार पर तय करेगा, जो प्रोटोकॉल की स्वीकृति के बाद ही ज्ञात होगी,” उन्होंने कहा। इजरायल में कार्य अवधि सामान्य रूप से पांच वर्ष रहेगी। पांच वर्ष की अवधि पूरी होने पर कामगारों को अनिवार्य रूप से अपने देश वापस लौटना होगा।

सरकार ने इजरायल के श्रम बाजार को नेपाली कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए इस प्रोटोकॉल को अधिक प्राथमिकता दी है। समझौता के तहत केयरगिवर क्षेत्र में नेपाली श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

सरकारी संयंत्र द्वारा नेपाली श्रमिक (केयरगिवर) इजरायल भेजने के लिए १४ असोज २०७७ (३० सितंबर २०२०) को ‘इजरायल के विशेष श्रम बाजार में नेपाली श्रमिकों के अस्थायी रोजगार संबंधी समझौता’ हुआ था। इस समझौते के बाद पांच वर्षों में नवीनीकरण की प्रक्रिया आरंभ हुई है।

२०७७ के समझौते में स्वतः नवीनीकरण का प्रावधान न होने के कारण नवीनीकरण प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके साथ ही अतिरिक्त कृषि और घर आधारित श्रमिक भेजने का समझौता भी तैयार किया गया था।

अब तक दो चरणों में ३ हजार से अधिक केयरगिवर इजरायल पहुँच चुके हैं।

इजरायल में होम बेस्ड केयरगिवर भेजने के प्रोटोकॉल को शीघ्र पूरा करने की तैयारी

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाल और इजरायल सरकार के बीच कृषि एवं घरेलू होम बेस्ड केयरगिवर भेजने के श्रम प्रोटोकॉल को अंतिम चरण में लाने की बातचीत जारी है।
  • श्रम मंत्रालय के प्रवक्ता पिताम्बर घिमिरे ने बताया कि तकनीकी विषयों के समायोजन के बाद शीघ्र औपचारिक हस्ताक्षर के लिए वार्ता आगे बढ़ रही है।
  • इजरायल ने श्रमिकों की वार्षिक कोटा आधारित संख्या निर्धारित करने की योजना बनाई है और रोजगार अवधि सामान्यतः पाँच वर्ष की होगी।

२६ आसार, काठमांडू। इजरायल में होम बेस्ड केयरगिवर भेजने संबंधी प्रोटोकॉल को शीघ्र पूरा करने की तैयारियां चल रही हैं।

इजरायल और नेपाल सरकार के बीच घर पर काम करने वाले केयरगिवर और कृषि क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को भेजने के लिए तैयार किए गए प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने पर बातचीत जारी है।

नेपाल की ओर से पिछले वर्ष ही इस प्रोटोकॉल का मसौदा तैयार कर मंत्रिपरिषद से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

२२ पौष २०८२ को मंत्रिपरिषद की बैठक में कृषि क्षेत्र में नेपाली छात्रों और घरेलू सहायक श्रमिक (केयरगिवर) को पाँच वर्ष की दीर्घकालीन नौकरी पाने हेतु इजरायल द्वारा भेजे गए दो नए प्रोटोकॉल के मसौदे को पारित किया गया था। इसके साथ ही दोनों प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने का मार्ग खुला था, लेकिन अब तक कोई समझौता नहीं हो पाया है।

ये प्रोटोकॉल इजरायल और नेपाल के बीच हुए श्रम समझौते के अंतर्गत हैं। इजरायल के साथ दीर्घकालीन सेवा केंद्र में सहायक श्रमिक भेजने का एकमात्र प्रोटोकॉल पहले से था, जिसे संशोधित कर प्रस्तुत किया गया था।

इजरायल ने कुल तीन प्रोटोकॉल का मसौदा भेजा था, जिन्हें आवश्यक संशोधनों के बाद मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिली। इसी के अनुसार युवा, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने संबंधित समझौतों की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन इजरायल पक्ष ने कृषि और घरेलू केयरगिवर प्रोटोकॉल में अतिरिक्त संशोधन के साथ प्रस्तुत किया।

इन प्रोटोकॉल को आगे बढ़ाने के लिए नेपाल और इजरायल सरकार के बीच श्रम प्रोटोकॉल मसौदे पर सघन चर्चा चल रही है। श्रम मंत्रालय के प्रवक्ता पिताम्बर घिमिरे के अनुसार यह प्रक्रिया वार्ता चरण में है।

उन्होंने बताया कि इजरायल द्वारा भेजे गए मसौदे में नेपाल को कुछ तकनीकी विषयों पर विलंब है, जिन्हें मंत्रालय की तकनीकी टीम समीक्षा कर रही है और उच्च स्तरीय वार्ता के जरिए अंतिम रूप दिया जाएगा।

पिछले बुधवार श्रम मंत्री रामजी यादव और नेपाल में इजरायली राजदूत स्मुलिकम एरी बासबीच हुई बैठक में इस प्रोटोकॉल को जल्द से जल्द पारित करने पर चर्चा हुई।

दोनों पक्ष इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहे हैं। विशेषकर होम बेस्ड केयरगिवर से संबंधित प्रस्ताव में इजरायल ने कुछ बिंदुओं पर संशोधन के साथ प्रस्तुति दी है।

प्रवक्ता घिमिरे के अनुसार, तकनीकी टीम अंतिम अनुमोदन दे देने के बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।

कृषि और घरेलू सहायक श्रमिकों के विषय में इजरायल वार्षिक कोटा आधारित संख्या निर्धारित कर भेजने की तैयारी में है, परन्तु अभी तक ठीक विवरण स्पष्ट नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘कामगारों की संख्या इजरायल वार्षिक कोटे के अनुसार तै करता है, जिसे प्रोटोकॉल स्वीकृत होने के बाद ही पता चलेगा।’

इजरायल में कार्यकाल सामान्यतः पाँच वर्ष का होगा। पांच वर्ष पूर्ण होने पर श्रमिकों को अनिवार्य रूप से स्वदेश वापस लौटना होगा। हालांकि, यदि रोजगारदाता केयरगिवर की ईमानदारी और सेवा से संतुष्ट हो और वीजा परिवर्तन की अनुमति दे तो वे वहां बने रह सकते हैं।

सरकार ने इजरायल के श्रम बाजार को नेपाली श्रमिकों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के कारण इस प्रोटोकॉल को प्राथमिकता दी है। यह समझौता केयरगिवर क्षेत्र में नेपाली श्रमिकों के लिए नए रोज़गार अवसर खोलने की उम्मीद रखता है।

सरकारी व्यवस्था के तहत १४ असोज २०७७ (३० सितंबर २०२०) को ‘इजरायल के विशेष श्रम बाजार में नेपाली श्रमिकों की अस्थायी रोजगार संबंधी समझौता’ हुआ था। इसके बाद पांच वर्षों तक नवीनीकरण प्रक्रिया चली।

२०७७ के समझौते में अपने आप नवीनीकरण की व्यवस्था नहीं होने के कारण नवीनीकरण प्रक्रिया शुरू हुई। इसके साथ ही कृषि और घरेलू श्रमिक भेजने के समझौते भी तैयार हुए।

इजरायली पक्ष ने दोनों प्रोटोकॉल में कुछ संशोधन के साथ प्रस्ताव भेजा। जिसके बाद दोनों देशों की तकनीकी समितियों ने चर्चा कर शीघ्र समझौता करने की प्रक्रिया शुरू की।

२०७७ के समझौते के अनुसार वर्तमान में तीसरे चरण में केयरगिवर भेजने की प्रक्रिया चल रही है। अब तक दो चरणों में ३ हजार से अधिक केयरगिवर इजरायल पहुँच चुके हैं।

जेभेरेभ ने पहली बार विम्बल्डन फाइनल में जगह बनाई

जर्मनी के अलेक्जेंडर जेभेरेभ ने आर्थर फेरी को सीधे सेट में हराकर पहली बार विम्बल्डन पुरुष एकल फाइनल में प्रवेश किया है। फ्रेंच ओपन विजेता जेभेरेभ अब रविवार को खिताब के लिए यानिक सिनर और नोवाक जोकोविच के बीच हुए मुकाबले के विजेता से खेलेंगे। सेमीफाइनल तक ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले आर्थर फेरी ने नई रैंकिंग में विश्व नंबर ३६ का स्थान हासिल किया है और वे ब्रिटेन के नए नंबर एक खिलाड़ी बन गए हैं। २६ असार, काठमांडू।

जेभेरेभ ने शुक्रवार को सेमीफाइनल में दूसरे वरीयता प्राप्त ब्रिटिश वाइल्डकार्ड फेरी को ७-६ (७-०), ६-२, ६-४ के सीधे सेटों में पराजित किया। अब वे खिताब के लिए पूर्व विजेता यानिक सिनर और सात बार के विम्बल्डन चैम्पियन नोवाक जोकोविच के बीच मुकाबले के विजेता से भिड़ेंगे। २३ वर्षीय फेरी, जो विश्व रैंकिंग में ११४वें स्थान पर थे, ग्रैंड स्लैम में अब तक दूसरे दौर से आगे नहीं जा पाए थे। लेकिन इस बार उन्होंने सभी उम्मीदों को तोड़ते हुए सेमीफाइनल तक की यादगार यात्रा की।

मैच के बाद सेंटर कोर्ट में मौजूद दर्शकों ने फेरी के बेहतरीन प्रदर्शन का सम्मान करते हुए लंबे समय तक तालियाँ बजाईं। इस टूर्नामेंट के बाद, फेरी सोमवार को जारी होने वाली नई विश्व रैंकिंग में करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग, विश्व नंबर ३६ पर पहुंच जाएंगे। वे ब्रिटेन के नए नंबर एक खिलाड़ी भी बनेंगे। इसके अलावा उन्हें ९ लाख पाउंड (लगभग १६ करोड़ ५९ लाख रुपये) का पुरस्कार राशि भी मिलेगी। जीत के बाद जेभेरेभ ने कहा, ‘‘विम्बल्डन मेरे लिए हमेशा एक चुनौतीपूर्ण ग्रैंड स्लैम रहा है। पहली बार फाइनल में पहुंचकर मैं बहुत खुश हूँ।’’ उन्होंने फेरी की भी प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘आर्थर एक असाधारण खिलाड़ी हैं। यह उनकी करियर की शुरुआत मात्र है। वे आने वाले वर्षों में टेनिस में और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे।’’ २९ वर्षीय जेभेरेभ ने पिछले महीने फ्रेंच ओपन जीतकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता था। अब वे दूसरी ग्रैंड स्लैम उपाधि जीतने के लक्ष्य के साथ रविवार को होने वाले विम्बल्डन फाइनल में उतरेंगे।

अर्थ मंत्रालय द्वारा संशोधन और निरस्त किए जाने वाले एक दर्जन कानूनों का विवरण

अर्थ मंत्रालय ने संविधान की भावना और संघीय शासन व्यवस्था के अनुरूप १५ पुराने वित्तीय कानूनों को निरस्त करने तथा ३ कानूनों में संशोधन करने के लिए विधेयक संसद में दायर किया है। इस विधेयक में मूल्य वर्धित कर, आयकर और सीमा शुल्क अधिनियमों में आवश्यक सुधार किए जाने, परिवहन साधनों में जीपीएस लगाकर राजस्व चुहावट नियंत्रण को प्रभावी बनाने का प्रावधान है। निरस्त किए जाने वाले कानूनों से संबंधित जांच-पड़ताल और मामले अब राजस्व जांच विभाग से आंतरिक राजस्व विभाग, सीमा शुल्क विभाग समेत अन्य संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है। (२६ असार, काठमाडौं)

अर्थ मंत्रालय ने कुछ पुराने वित्तीय कानूनों के संशोधन और निरस्तीकरण के लिए विधेयक संसद में प्रस्तुत किया है। मंत्रालय का कहना है कि उन कानूनी और संस्थागत प्रावधानों को निरस्त किया जाएगा जो संविधान की भावना के अनुरूप नहीं हैं या वर्तमान संघीय शासन प्रणाली से असंगत हैं। इसका उद्देश्य कानूनी दुहरा प्रभुत्व समाप्त करना एवं कम समय और लागत में प्रभावी सार्वजनिक सेवा प्रदान करना है, जिससे मंत्रालय को उम्मीद है।

मंत्रालय ने प्रादेशिक विकास योजना (कार्यान्वयन) कानून २०१३, नेपाली मुद्रा के प्रचलन को बढ़ावा देने वाला कानून २०१४, आयकर दस्तुर कानून २०१९, राजस्व चुहावट (जांच और नियंत्रण) कानून २०५२, वित्तीय मध्यस्थता संबंधित कानून २०५५ तथा राजस्व चुहावट (जांच और नियंत्रण) नियमावली २०७० को निरस्त करने की तैयारी कर रहा है। इसके अतिरिक्त मूल्य वर्धित कर कानून २०५२, आयकर कानून २०५८ और सीमा शुल्क कानून २०८२ में संशोधन प्रस्तावित हैं।

अर्थ मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने १३ चैत २०८२ को पद ग्रहण करते समय राजस्व जांच विभाग समेत १५ कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की थी तथा इसके लिए एक कार्यदल गठित करने का निर्णय लिया था। यह निर्णय पूर्व अर्थ मंत्री रामेश्वर खनाल के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय आर्थिक सुधार सिफारिश आयोग की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे तत्कालीन एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की सरकार ने गठित किया था।

स्व. वासुदेव मुनाल की ७७वीं जयंती पर नए कृति का आवरण जारी

२६ असार, काठमाडौं । स्वर्गीय वासुदेव मुनाल की ७७वीं जन्मजयंती के अवसर पर उनकी लिखित संस्मरणात्मक कृति ‘आओ ! मेरा प्यारा भाइबहिनी हो ! रेडियो नजदीक आओ !’ का आवरण आज जारी किया गया। लम्बे समय तक रेडियो नेपाल में बाल कार्यक्रम संचालित करने वाले मुनाल हमेशा इसी उद्घाटन वाक्य से कार्यक्रम प्रारंभ किया करते थे। बुकहिल पब्लिकेशन से प्रकाशित होने वाली इस कृति में रेडियो से जुड़े अविस्मरणीय अनुभव, बालकार्यक्रमों के रोचक प्रसंग, गीत-संगीत की यात्रा के साथ-साथ लेखक के व्यक्तिगत जीवन के उतार-चढ़ाव शामिल हैं।

यह पुस्तक नेपाली रेडियो संस्कृति के एक महत्वपूर्ण अध्याय को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का विश्वास जताई गई है। प्रकाशक ने बताया कि यह पुस्तक असोज १२ को औपचारिक रूप से जारी की जाएगी।

पोखरा की ज़मीन विवाद: मनगढ़ंत तरीकों से महल निर्माण, सार्वजनिक घोषित होते ही खाली कराई जा रही है

२५ आषाढ़, पोखरा। कास्की के पूर्व शिशुवा गाविस–३ पार्वती मंदिर के पास बड़े खैर के पेड़ थे। आसपास धान की खेती के लिए खेत थे। खैर के पेड़ वाले स्थान को वन कार्यालय ने डेमोन्स्ट्रेशन (प्रदर्शन) स्थल बनाया था।

सन् 1976 से पहले कुछ लोग वहां आकर रहने लगे और घर बनाने लगे, स्थानीय शोभाकर नेपाली ने बताया। शुरुआत में श्रेष्ठ और तझ्या परिवार आ चुके थे और उसके आस-पास भारी जाति के अन्य लोग भी थे।

कई वर्षों बाद घर बनते गए लेकिन उस जमीन का पंजीकरण नहीं हो पाया था, स्थानीय युवा विकास भट्टराई ने बताया।

उसके बाद वह जमीन विवादित हो गई, फिर भी घर और निर्माण लगातार बनते रहे। अब जमीन सार्वजनिक घोषित होने के कारण उसे खाली कराया जा रहा है।

कई वर्षों से व्यक्ति दावा करते आ रहे थे कि पोखरा–३० खैरखोर, पार्वती मंदिर के पास लगभग २४ रोपनी से अधिक की जमीन सार्वजनिक है, इसलिए खाली करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सन् 1976 में नापी होने का दावा किया गया जमीन सार्वजनिक घोषित हुई है, ऐसी पुष्टि के बाद वहां बने निर्माण हटाने की कार्रवाई आरंभ की गई है। विवादित जमीन पर मनगढ़ंत तरीके से बड़े भवन भी बनाए गए थे।

दावा करने वाले और विवादित जमीन पर लगातार निर्माण और कब्जा होता रहा, और ये लोग राजनीतिक संरक्षण भी पाते थे।

पूर्व शिशुवा गाविस–३ के चार कित्तों में फैले करीब २४ रोपनी जमीन पर लगभग एक दर्शन भवन और अन्य संरचनाएं बनी हैं। जिला से लेकर महानगरपालिका और भ्रष्टाचार अन्वेषण आयोग तक शिकायत पहुंच चुकी है।

भूमि प्रशासन कार्यालय लेखनाथ कास्की ने जनप्रतिनिधि और कर्मचारियों के साथ संयुक्त फील्ड जांच कर जिला प्रशासन कास्की को रिपोर्ट सौंपा था। रिपोर्ट के अनुसार पार्वती मंदिर परिसर के पास भूमि का कोई पंजीकरण नहीं है और जमीन के मालिक का घर खाली पाया गया है।

कुछ व्यक्तियों ने दर्ज़ा दिलाने की कोशिश की, पर जमीन सार्वजनिक होने के कारण असफल रहे और लगातार महानगरपालिका में शिकायत करते रहे। महापौर धनराज आचार्य ने टीम के साथ स्थलीय अध्ययन करके बाकी जमीन संरक्षित करने का आश्वासन दिया है।

जमीन विवादित होने के कारण कभी भी उसे खाली कराया जा सकता है, बावजूद इसके कुछ लोगों ने हस्तक्षेप कर बड़े भवन निर्माण कर लिए।

आंशिक रूप से वहां लंबे समय से रहने वाले पन्नालाल श्रेष्ठ परिवार ने जमीन का दावा किया था। वे अब स्वर्गस्थ हो चुके हैं, उनके बेटी और दामाद ही वहां रहते हैं।

पन्नालाल श्रेष्ठ का घर

स्थानीय अगुवाओं ने बताया कि पन्नालाल के नाम से ज़मीन पास कराने के नाम पर कुछ लोगों ने ठगा कर बड़ा भवन बना लिया। पन्नालाल की बेटी और दामाद ने भी सनाा घर बना कर रह रहे हैं। वहां कुल सात पक्की और दस अस्थायी निर्माण हैं।

किसी के नाम पर पंजीकृत न होने वाली सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण और निर्माण किए जाने के कारण महानगरपालिका ने ७ दिनों के भीतर खाली कर देने का आदेश दिया है। नापी कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार सिसुवा खोरखोर / पार्वती मंदिर के आसपास नेपाल सरकार के नाम पर कुल २४ रोपनी १४ आना जमीन दर्ज है।

कित्ता नंबर २४१ मं ६ रोपनी १५ आना, ४०९ में ६ रोपनी ११ आना, ४१४ में २ रोपनी १५ आना, और ४१५ में ७ रोपनी १३ आना क्षेत्रफल की जमीन शामिल है। महानगरपालिका ने इन्हें सार्वजनिक बताया है।

सार्वजनिक जमीन पर बने सारे कच्चे और पक्के ढांचे सूचना जारी करने के ७ दिनों के भीतर स्वयं के खर्च पर हटाने तथा जमीन खाली कराने के निर्देश महानगरपालिका ने दिए हैं।

“निर्धारित अवधि में यदि संरचनाएं हटाई नहीं जाती हैं तो प्रचलित कानून के अनुसार महानगरपालिका उन्हें हटाएगी,” सूचना में लिखा है, “इसमें होने वाला समस्त खर्च अतिक्रमणकर्ताओं से वसूला जाएगा।”

महानगरपालिका, भ्रष्टाचार अन्वेषण आयोग, जिला प्रशासन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के हेलो सरकार तक शिकायत पहुंची थी कि सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण कर बस्ती बनाई गई है। २३ आषाढ़ २०८३ को प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज हुई और बुधवार को छानबीन के बाद कानूनी कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया।

उससे पूर्व जिला प्रशासन ने अतिक्रमित जमीन खाली करने के लिए महानगरपालिक को पत्र जारी किया था, जिसपर आधारित होकर ७ दिनों में खाली करने की सूचना जारी की गई है।

पन्नालाल के निधन के बाद वहां रहने वाले बेटी और दामाद ने बताया कि वे कई सालों से उसी जगह रह रहे हैं। जिस जमीन का २०३३ साल की नापी में विवाद था, वह जमीन पंजीकृत नहीं हो पाई, दामाद ईश्वरकुमार श्रेष्ठ ने बताया।

पन्नालाल का छोटा घर अभी भी वहीं है, पर उनकी दावा की हुई जमीन पर बाद में कोई चलखेल करके बड़ा भवन बना चुका है। महानगरपालिका की सूचना के बाद पार्वती टोला के इस बस्ती में हलचल मची है।

२०६८ साल में इस जमीन को दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। भूमि मंत्रालय के पूर्व मंत्री भीमप्रसाद गौतम के निर्देशन में मालपोत ने सूचना जारी करने का प्रमाण भी पाया गया है। ३५ दिन की दावा सूचना जारी हुई, लेकिन स्थानीय विरोध की वजह से यह प्रक्रिया रुकी रही।

प्रारंभ में पन्नालाल, सोमलाल तझ्या, हर्कलाल तझ्या आदि ने मनोरंजन हेतु जमीन दर्ज कराने की कोशिश की थी, तब विवाद हुआ था। वहां भरत न्यौपाने की बहन का घर भी है, जो अब सब का निधन हो चुका है।

स्थानीय न्यौपाने के अनुसार पहले सार्वजनिक जमीन पर कब्जा कर बसावट शुरू हुई थी और बाद में व्यक्तियों के बीच झगड़ा भी हुआ। पन्नालाल परिवार ने जमीन की बंटवारा भी बताया।

न्यौपाने की बहन वहीं तीन मंजिला घर में रहती हैं, जो सुकुम्वासी होने का दावा करती हैं। अन्य स्थानीय लोग इसे गलत बताते हैं और आरोप लगाते हैं कि बहन द्वारा पन्नालाल परिवार का दावा मिटाने की कोशिश की जा रही है।

इस जमीन के विवाद की वजह से पंजीकरण रोक दिया गया था, न्यौपाने ने बताया कि यह सार्वजनिक जमीन नहीं हुई थी। हाल ही में पन्नालाल परिवार और स्थानीय कांग्रेस नेता नीरलाल तझ्याओं द्वारा इसके संरक्षण का प्रयास किया जा रहा है।

अब वहां माता समूह, शिशुवा नेवा: खल, सामुदायिक वन जैसी संरचनाएं भी बनी हैं, जिसमें राज्य निवेश भी सम्मिलित है।

पन्नालाल के दामाद ईश्वरकुमार ने कहा, “हमें रहने के लिए विकल्प देना चाहिए। पिछले 20 साल से जंगल में रह रहे थे। जमीन पंजीकृत कराने की कोशिश की, मुकदमा भी हुआ। किसी ने लिखकर नहीं दिया, जिससे हमें दुख हुआ।”

पन्नालाल के दामाद ईश्वरकुमार

उन्होंने कहा, “मुकदमे लड़ने में बहुत खर्चा हुआ। सुना है अब जमीन सार्वजनिक घोषित हो गई।”

उनकी स्पष्ट मांग है, “अगर जमीन सरकार की है तो सरकार की रहे, लेकिन हमारी रहने की जगह को न छिना जाए।” स्थानीय लोग भी मांग कर रहे हैं कि अन्य लोग अपना फायदा न उठा सकें। कृष्णकुमार श्रेष्ठ, जो वहीं रहते हैं, कहते हैं, “हम पास नहीं करा पाए, अब कहा जा रहा है यह सरकार की हो जाएगी। हम कई साल से यहां रह रहे हैं। हमें रहने की जगह दी जाए, नहीं हो सके तो सरकार को दे दें।”

सन् २०७८ में वार्ड नं ३० के अध्यक्ष दुर्गा सुवेदी ने बताया कि खैरखोर में कुछ घर और समाज हैं, इसलिए जमीन का प्रबंधन करके संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सार्वजनिक जमीन का संरक्षण हमारा दायित्व है, हम कर रहे हैं।” राजनीतिक रूप से किसी के साथ जुड़े बिना किसी का संरक्षण नहीं किया गया।

कई वर्षों से रहने वाले लेकिन किसी और जगह मकान-जमीन न रखने वाले लोगों को प्रबंधित करके अन्य लोगों से जमीन खाली करानी चाहिए, यह स्थानीय हितधारकों की मांग है। इस भूमि विवाद में राजनीति और कमीशन की भी चर्चा वृद्ध लोगों ने कही है।

गाजामा विश्वकप खेल देखाउने कार्यक्रमका आयोजक इजरायली आक्रमणमा मृत्युवरण

गाजामा विश्वकपका खेलहरूको प्रत्यक्ष प्रसारण गर्ने व्यवस्था गरेका मोहम्मद अल-वाहिदी इजरायली आक्रमणमा मारिएका छन्। उनले सामूहिक रूपमा विश्वकपका खेलहरू हेर्ने कार्यक्रमहरू आयोजना गरेका थिए। ७ जुलाईमा अर्जेन्टिना र इजिप्टबीचको खेलको प्रत्यक्ष प्रसारण पनि उनले व्यवस्था गरेका थिए, तर त्यो खेल सुरु हुनुभन्दा केही घण्टाअघि नै उनी मारिएका थिए। ट्याक्सीमा सवार हुँदा क्षेप्यास्त्र हमलामा परी उनकी मृत्यु भएको हो। अल-वाहिदी खाद्यान्न सहयोग समन्वय गर्ने मानवीय सहायता अधिकारी पनि थिए र गाजामा विस्थापितहरूको शिविरहरू पनि व्यवस्थापन गर्दै आएका थिए।

त्यसै आक्रमणमा अन्य तीन व्यक्ति पनि मारिएका छन्, जसमा दुई जनाका उमेर क्रमशः आठ र १० वर्षका दाजुभाइ थिए। इजरायली सेनाले हमासका कार्यकर्तामाथि आक्रमण गरेको जनाएको छ। तथापि, यस आक्रमणमा निर्दोष नागरिकहरू समेत मारिएको दाबीमा उनीहरू सजग रहेको बताएका छन्।

मेटा कानाड़ा में 10 बिलियन डॉलर के नए डाटा सेंटर का निर्माण कर रहा है

मेटा ने कानाड़ा के अल्बर्टा में 10 बिलियन डॉलर की लागत से 1 गीगावाट क्षमता वाला नया डाटा सेंटर बनाना शुरू किया है। यह कानाड़ा में मेटा का पहला डाटा सेंटर होगा, जो एआई पूर्वाधार विकसित कर निर्माण क्षेत्र में स्थायी रोजगार सृजित करेगा। चीन के एआई लैब्स द्वारा कम संसाधन में शक्तिशाली मॉडल विकसित करने के कारण मेटा को अपने एआई मॉडलों की गुणवत्ता और लागत नियंत्रण पर दबाव महसूस हो रहा है।

तकनीकी कंपनी मेटा ने कानाड़ा के अल्बर्टा में नए डाटा सेंटर का निर्माण शुरू किया है। इस परियोजना में कंपनी 10 बिलियन डॉलर का निवेश करेगी। मेटा के अनुसार, स्टर्जन काउंटी में बनने वाला यह डाटा सेंटर 1 गीगावाट क्षमता का होगा। यह कानाड़ा में मेटा का पहला तथा विश्वभर में 33वां डाटा सेंटर होगा। कंपनी इसे विशेषत: एआई संबंधित कार्यों के लिए तैयार कर रही है।

मेटा ने अमेरिका में ही एआई पूर्वाधार के लिए 600 बिलियन डॉलर से अधिक निवेश किया है। यह कानाड़ा परियोजना निर्माण क्षेत्र में हजारों रोजगार सृजित करेगी। निर्माण पूरा होने के बाद भी यह सेंटर लगभग 300 कर्मचारियों को स्थायी रोजगार देगा। कंपनी ने स्थानीय समुदाय को आर्थिक सहयोग प्रदान करने और पर्यावरण हितैषी तरीके से बिजली तथा पानी के उपयोग का आश्वासन दिया है।

सन् 2026 की पहली त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार, मेटा इस वर्ष अतिरिक्त 125 बिलियन से 145 बिलियन डॉलर के निवेश की योजना बना रहा है। एआई प्रतिस्पर्धा में ‘रेस’ जीतने के लिए प्रोसेसिंग पावर को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मेटा अपने प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ने के लिए अपनी सभी संसाधनों का उपयोग उत्कृष्ट एआई मॉडल विकास में लगा रहा है।

चितवन में आमाछोरा की हत्या के पीछे ‘धुर्बे’ हाथी पर रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी

चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज के अधिकारी पिछले सप्ताह से ‘धुर्बे’ नामक जंगली हाथी की तलाश कर रहे हैं। ‘धुर्बे’ के आक्रमण से भरतपुर महानगरपालिका-२३ बेलहट्टा में आमाछोरे की मृत्यु होने के बाद खोज तेज की गई है, लेकिन अभी तक उक्त हाथी नहीं मिला है, निकुञ्ज ने बताया।

विक्रम संवत २०७० से निकुञ्ज क्षेत्र के आसपास हाथियों के हमले में अब तक लगभग ३० लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से आधे से अधिक मौतें ‘धुर्बे’ हाथी द्वारा ही होने का निकुञ्ज के अधिकारियों का अनुमान है। पहले भी सरकार के निर्देशानुसार ‘धुर्बे’ को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न स्रोतों और प्रयासों के तहत कार्य किए गए थे, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए थे।

परंतु इस बार ‘धुर्बे’ की रोकथाम के लिए रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी निकुञ्ज द्वारा की गई है।

वृद्धका १२ दाँत निकालेर सम्पूर्ण बैंक रकम हडप्ने डेन्टल क्लिनिक माथि कारबाही

चीनको शाङ्सी प्रान्तमा एक वृद्धको १२ वटा दाँत निकालेर उनको बैंक खाताबाट सम्पूर्ण रकम हडप्ने डेन्टल क्लिनिकलाई स्थानीय प्रशासनले बन्द गराएको छ। क्लिनिकले बिरामीको स्वास्थ्य अवस्था जोखिमपूर्ण हुँदाहुँदै नक्कली डकुमेन्ट बनाउँदै गलत उपचार गरेको र रकम ठगी गरेको पाइएको छ। अधिकारीहरूले क्लिनिकलाई बिरामीको सम्पूर्ण उपचार शुल्क फिर्ता गर्न आदेश दिँदै कानुनी कारबाही अघि बढाएका छन्।

उत्तरी-पश्चिमी चीनको शाङ्सी प्रान्तका ६३ वर्षका ली थरका ती वृद्ध गत सेप्टेम्बरमा दाँत दुखेर दातुआनयुआन डेन्टल क्लिनिक गएका थिए। क्लिनिकका कर्मचारीले उनलाई लिन गाडी पठाएका थिए र निःशुल्क परीक्षण पनि गरिदिएका थिए। विज्ञापनका प्रलोभनमा परेर ती वृद्धले बाँकी रहेका १२ वटा दाँत निकाल्न र १० वटा इम्प्लान्ट लगाउन मन्जुरी दिएका थिए।

त्यसपछि क्लिनिकका कर्मचारीले उनको बैंक अकाउन्ट र डिजिटल वालेटबाट १८ हजार ८ सय युआन रकम निकालेका थिए। उनीहरूले ६ हजार २ सय युआनको बिल बाँकी राखेर ती वृद्धसँग जम्मा ३० युआन मात्र छोडिदिएका थिए। वृद्धको यस्तो अवस्था देखेर उनका छोराले स्वास्थ्य कार्यालयमा क्लिनिकविरुद्ध उजुरी दिएका थिए।

ती वृद्धलाई कोरोनरी मुटुको रोग, मधुमेह र उच्च रक्तचाप जस्ता गम्भीर समस्याहरू थिए र उनलाई चार वटा स्टन्ट पनि राखिएको थियो। यस्तो अवस्थामा दाँत निकाल्न र तुरुन्तै इम्प्लान्ट गर्न अत्यन्त जोखिमपूर्ण मानिन्छ। क्लिनिकले बिरामीको मेडिकल रेकर्डमा महिला लेखेको र नक्कली डकुमेन्ट बनाएको पनि खुलासा भएको छ। स्थानीय स्वास्थ्य ब्यूरोले छानबिन गर्दा क्लिनिकले पूर्ण रूपमा प्रि-अपरेटिभ एसेसमेन्ट नगरेको र सही रेकर्ड नराखेको फेला पारेको छ।

नेपाल और भारत ‘ए’ टीम के बीच कीर्तिपुर में टी–20 श्रृंखला होगी

त्रिवेणी क्रिकेट मैदान में नेपाल और भारत की ‘ए’ टीम के बीच 3 मैचों की टी–20 श्रृंखला आयोजित की जाएगी, यह जानकारी नेपाल क्रिकेट संघ (क्यान) ने दी है। नेपाल ने घरेलू मैदान पर भारत की ‘ए’ टीम के साथ टी–20 क्रिकेट श्रृंखला खेलने की पुष्टि की है। क्यान ने भारत की ‘ए’ टीम को नेपाल दौरे के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया है। इस टी–20 श्रृंखला से नेपाली क्रिकेट खिलाड़ियों के स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। 26 असार, काठमांडू।

नेपाल ने अपने घरेलू मैदान पर भारत की ‘ए’ टीम के साथ टी–20 श्रृंखला खेलने पर सहमति व्यक्त की है। त्रिवेणी क्रिकेट मैदान में नेपाल और भारत की ‘ए’ टीम के बीच 3 मैचों की टी–20 श्रृंखला आयोजित होने वाली है। स्कॉटलैंड में आयोजित आईसीसी सम्मेलन में क्यान के अध्यक्ष चतुरबहादुर चंद, सचिव पारस खड़का और बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के बीच हुई बैठक के बाद यह श्रृंखला तय की गई।

यह श्रृंखला आगामी दिसंबर 9 से 13 तारीख तक खेली जाएगी। पहला मैच 9 दिसंबर को, दूसरा मैच 11 दिसंबर को और तीसरा मैच 13 दिसंबर को होगा। नेपाल और भारत की ‘ए’ टीम के बीच होने वाली इस टी–20 श्रृंखला से नेपाली क्रिकेट को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा प्राप्त होने की उम्मीद है।

संवैधानिक आयोग की सिफारिशों को लागू करने में सरकार की प्रतिबद्धता : मंत्री गौतम

कानून मंत्री सोबिता गौतम ने संवैधानिक आयोग की सिफारिशों एवं वार्षिक प्रतिवेदनों को लागू करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने राष्ट्रीय सभा की बैठक में कहा कि सरकार आयोग की सिफारिशों को कार्यान्वयन में निरंतर लगी हुई है। मंत्री गौतम ने कानून निर्माण और व्यवहारिक सुधारों के माध्यम से संवैधानिक आयोग की रिपोर्टों को लागू करने में सरकार की गंभीरता जाहिर की। २६ असार, काठमांडू।

कानून, न्याय एवं संसदीय मामले मंत्री सोबिता गौतम ने राष्ट्रीय सभा की शुक्रवार को हुई बैठक में राष्ट्रीय समावेशी आयोग की वार्षिक रिपोर्ट पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री बालेन शाह की ओर से जवाब देते हुए यह प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने बताया कि विभिन्न संवैधानिक आयोगों द्वारा प्रस्तुत सिफारिशों एवं वार्षिक प्रतिवेदनों का अध्ययन जारी है।

“जितनी भी संवैधानिक आयोग की रिपोर्टें एवं सिफारिशें आई हैं, उन्हें लागू करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। हम समीक्षा कर रहे हैं। कुछ पहल शुरू हो चुकी हैं और अन्य प्रक्रियाधीन भी हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग की कुछ सिफारिशें लागू करने के लिए आवश्यक कानून बनाना होगा और कुछ व्यवहारिक सुधार भी करने होंगे, जिसमें सरकार गंभीर है।

“कुछ विषयों को अमल में लाने के लिए कानून बनाना ज़रूरी होगा तो कुछ में व्यवहार सुधार की आवश्यकता होगी। इस दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं। संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि संवैधानिक आयोग अब संघीय संसद के प्रति जवाबदेह होंगे तथा वे सरकार से स्वतंत्र रहेंगे, इसलिए इस आधार पर हम विभिन्न स्तरों पर सुधार करते रहेंगे,” उन्होंने कहा।

गणेश नेपाली के निधन के बाद सड़क से संसद तक भारी आक्रोश, गठित हुई जांच समिति

काठमाडौँ में आत्मदाह का प्रयास करने वाले मुगु के गणेश नेपाली के उपचार के दौरान निधन के बाद सड़क से संसद तक तीव्र आक्रोश फैल गया है। शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार की कड़ी निंदा की। राष्ट्रीय सभा में प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग भी उठी। उपचार के दौरान गणेश नेपाली के निधन की खबर सामने आने के बाद काठमाडौँ के माइतीघर क्षेत्र में कुछ युवाओं ने प्रदर्शन किया। गृह मंत्री सुधन गुरुङ ने घटना की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित करने की घोषणा करते हुए संसद को जानकारी दी।

सरकार द्वारा कई प्रयासों के बावजूद गणेश नेपाली को बचाने में असमर्थता पर गृह मंत्री गुरुङ ने दुख व्यक्त किया। “कल हमने अथक प्रयास किए। विमान तैयार था और अनुमति लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि मरीज को स्थिर अवस्था में ही स्थानांतरित किया जा सकता है,” उन्होंने बताया। जांच के लिए महानगर पुलिस के तीन कर्मियों को भी हिरासत में लिया गया है, इसकी भी उन्होंने सूचना दी।

प्रतिनिधि सभा की बैठक में विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार पर इस घटना की जिम्मेदारी डाली। प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस की सांसद बसना थापाले राज्य को मूक दर्शक होने का आरोप लगाया। “एक युवा ने आतंकी कारणों से आग लगाई, लेकिन राज्य मूक दर्शक बना रहा। शरीर जल गया, परंतु सरकार ने एम्बुलेंस नहीं भेजी और पुलिस प्रशासन ने अपराधी की तरह व्यवहार किया,” उन्होंने सवाल उठाए।

गणेश नेपाली की मृत्यु की जिम्मेदारी वर्तमान सरकार की ठहराते हुए नेकपा एमाले के सांसद ऐन महर ने कहा, “यह हत्या का जिम्मा बलेंद्र सरकार को लेना होगा।” वहीं ट्रैफिक पुलिस ने गणेश नेपाली के आत्मदाह प्रयास के दावे को खारिज करते हुए बताया कि इस घटना में कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है। घटनास्थल पर विवाद के बाद गणेश नेपाली द्वारा आत्मदाह का विवरण सार्वजनिक किया गया है।

इरानी कूटनीतिज्ञ माजिद नीली ने अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की

जर्मनी में तैनात इरानी कूटनीतिज्ञ माजिद नीली ने इरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई पर यूरोपीय नेताओं की चुप्पी पर असंतोष व्यक्त किया और चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने चीन-तुर्कमेनिस्तान-इरान रेल मार्ग पर स्थित अघ-तप्पेह-खान पुल पर हमला किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग जोखिम में पड़ गया है।

नीली ने गुरुवार को जारी एक संदेश में बताया कि अमेरिकी कार्रवाई के दौरान कई यूरोपीय नेता मौन साधे हुए हैं, जिससे उन्हें कड़ी आपत्ति है। उन्होंने कहा, “अमेरिका के कथित अपराधों को सामान्य समझना किसी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।” अमेरिका द्वारा निशाना बनाए गए इस अघ-तप्पेह-खान पुल का महत्व अंतरराष्ट्रीय परिवहन और व्यापार मार्ग के रूप में बहुत बड़ा है।

नीली ने चेतावनी दी कि यदि इस परिवहन मार्ग पर अमेरिकी हमले की निंदा नहीं हुई, तो आगे भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण मार्ग भी आसानी से निशाने पर आ सकते हैं, जिनसे यूरोपीय देश भी लाभान्वित होते हैं। उन्होंने आगे कहा, “अपराधों को सामान्य मानना सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।” इससे पहले भी इरान के उत्तरी शहर अक्काला में स्थित रेलवे पुल पर अमेरिकी हमले की घटनाएं हुई हैं।